Monday, March 16, 2026
Home Blog Page 561

क्या विनेश फोगाट को मिल सकता है मेडल?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विनेश फोगाट को अब मैडल मिल सकता है या नहीं! भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट 50 किलोग्राम वजन वर्ग के फाइनल से ठीक पहले अयोग्य घोषित कर दी गईं। पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना उनका अधूरा रह गया और भारतीय उम्मीदों को भी बड़ा झटका लगा। उनके पास गोल्ड या सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनने का मौका था। इतिहास रचने का मौका था, लेकिन ये सारे सपना टूटकर बिखर गए हैं। पहलवान ने हालांकि पूरी तरह से हथियार नहीं डाले हैं। उन्होंने और भारतीय ओलंपिक संघ ने बहादुरी से कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में परिणाम को चुनौती देने का फैसला किया। उम्मीद है कि आज फैसला आ जाएगा। यह भी संभव है कि भारतीय रेसलर को सिल्वर मेडल मिले। दूसरी ओर, यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) नियमों का हवाला देते हुए विनेश की याचिका का विरोध कर रहा है, लेकिन एक ऐसा नियम है, जो विनेश को मेडल जीतने में मदद कर सकता है।

दरअसल, UWW की नियम बुक में कुछ खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर विनेश फैसले को अपने पक्ष में कर सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, कुश्ती निकाय का सुझाव है कि 100 ग्राम का अंतर, जिससे विनेश वजन करने में विफल रही, को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चूंकि नियम इसकी अनुमति नहीं देते, इसलिए विनेश को कोई अपवाद नहीं दिया जा सकता। इसलिए, भारतीय पहलवान को मुकाबले में रजत पदक नहीं दिया जा सकता। हालांकि, विश्व कुश्ती संस्था की नियम पुस्तिका में भी एक बड़ी खामी है।

UWW के नियमों के अनुसार, जो पहलवान रेपेचेज का दावा करता है, वह फाइनलिस्ट से हारा हुआ होता है। अगले दिन यानी 7 अगस्त को फाइनल होना था लेकिन फाइनल से पहले नियम के मुताबिक सुबह फिर से वजन नापा जाना था. यहीं पर विनेश का वजन तय 50 किलो से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया और UWW के नियमों के मुताबिक उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए फाइनल से बाहर कर दिया गया50 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में जापान की यूई सुसाकी को रेपेचेज राउंड में कांस्य पदक के लिए लड़ने का अवसर दिया गया था। लेकिन, नियमों के अनुसार, विनेश फाइनलिस्ट नहीं हैं, क्योंकि उन्हें वजन में विफल होने के आधार पर स्वर्ण पदक मैच से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। फाइनल क्यूबा की युस्नेलिस गुजमैन और यूएसए की सारा हिल्डेब्रांट के बीच खेला गया था।

फिर किस आधार पर सुसाकी को रेपेचेज में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई? यदि नियमों का पालन किया जाए तो सुसाकी को रेपेचेज खेलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी, लेकिन UWW ने ऐसा होने दिया। तर्क यह है कि सुसाकी को रेपेचेज मुकाबलों का हिस्सा नहीं होना चाहिए क्योंकि विनेश के नियमों को हटा दिया गया था, उन पर विचार नहीं किया गया था। लेकिन, ऐसा नहीं था। जबकि UWW नियमों में एक स्पष्ट खामी है, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि भारतीय खेमा इसका फायदा कैसे उठाता है जब मंगलवार को फैसला सुनाए जाने से पहले अंतिम CAS सुनवाई होती है। बता दें कि पिछले करीब एक हफ्ते से देश-दुनिया की मीडिया और सोशल मीडिया पर ये मुद्दा छाया हुआ है. इसकी शुरुआत 6 अगस्त को पेरिस ओलंपिक में हुई थी.

उस दिन महिलाओं की 50 किलोग्राम कैटेगरी में विनेश फोगाट ने पहले ही राउंड में जापान की वर्ल्ड नंबर-1 युई सुसाकी को हराकर तहलका मचा दिया था. इसके बाद विनेश ने अपना क्वार्टर फाइनल मैच भी आसानी से जीता और शाम को क्यूबा की गुजमैन लोपेज को सेमीफाइनल में हराते हुए फाइनल में जगह बनाई थी. वो ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं थी. इसके साथ ही उनका मेडल भी पक्का हो गया था, जो गोल्ड भी हो सकता था और कम से कम सिल्वर मेडल तो तय ही था. बता दे कि फिर अगले दिन यानी 7 अगस्त को फाइनल होना था लेकिन फाइनल से पहले नियम के मुताबिक सुबह फिर से वजन नापा जाना था. यहीं पर विनेश का वजन तय 50 किलो से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया और UWW के नियमों के मुताबिक उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए फाइनल से बाहर कर दिया गया. UWW के नियम इतने कठोर हैं कि सिर्फ फाइनल ही नहीं, बल्कि पूरे इवेंट से ही उन्हें बाहर करते हुए उनके सारे नतीजे भी रद्द कर दिए गए और संभावित सिल्वर मेडल भी छीन लिया गया. उन्हें 12 पहलवानों में सबसे अंत में रखा गया. 

हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर क्या बोले रविशंकर प्रसाद?

हाल ही में भारत के लिए आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर रविशंकर प्रसाद ने एक बयान दे दिया है !हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट में सेबी फिर निशाने पर है। इसमें सेबी चीफ और अडानी ग्रुप से कनेक्शन को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद देश की राजनीति फिर गरमा गई है। अब इन आरोपों को लेकर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नया आरोप लगाते हुए कहा कि हंगरी में जन्मे अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस हिंडनबर्ग रिसर्च में मुख्य निवेशक हैं। हिंडनबर्ग में किसका निवेश है? क्या आप इस सज्जन जॉर्ज सोरोस को जानते हैं जो नियमित रूप से भारत के खिलाफ प्रचार करते हैं। रविशंकर प्रसाद यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी ने आज भारत के खिलाफ ही नफरत पैदा कर ली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से उठे सियासी उबाल को शांत करते हुए कहा कि अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस हिन्डेनबर्ग रिसर्च में मुख्य निवेशक हैं। उन्होंने कहा कि आज हम कुछ मुद्दों को उठाना चाहते हैं। हिंडनबर्ग में किसका निवेश है? क्या आप इस सज्जन जॉर्ज सोरोस को जानते हैं जो नियमित रूप से भारत के खिलाफ प्रचार करते हैं, वह वहां के मुख्य निवेशक हैं। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपनी विकृत नफरत में, कांग्रेस पार्टी ने आज भारत के खिलाफ ही नफरत पैदा कर ली है।

रविशंकर ने आगे कहा कि अगर भारत का शेयर बाजार बाधित होता है तो क्या छोटे निवेशक परेशान होंगे या नहीं? कांग्रेस पार्टी की राजनीति में एक टूलकिट की राजनीति है, दूसरी चिट की राजनीति है। यदि परीक्षा में चिट्स पाए जाते हैं तो कार्रवाई की जाती है। लेकिन कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को मिलने वाली चिट्स के बारे में क्या किया जाना चाहिए? वे पूरे शेयर बाजार को ध्वस्त करना चाहते हैं, छोटे निवेशकों के पूंजी निवेश को रोकना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारत में कोई आर्थिक निवेश न हो। प्रसाद ने कहा कि सोरोस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर आलोचक और ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के संस्थापक हैं। भाजपा ने उन पर भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।

शनिवार को, अमेरिका स्थित हिन्डेनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट में आरोप लगाया कि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और उनके पति कवल बुच ने कथित अडानी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट अपतटीय धन में हिस्सेदारी रखी थी। सेबी प्रमुख और उनके पति ने एक बयान में आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और प्रेरित बताया था। पिछले साल जनवरी में, हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिससे समूह के शेयर की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई। अडानी ने इन दावों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष के खिलाफ आरोपों से उसकी ‘ईमानदारी’ से गंभीर समझौता’किए जाने के बाद भारतीय शेयर बाजार में काफी जोखिम है।

बता दे कि अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने वर्ष 2023 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में उसने अदाणी ग्रुप पर स्टॉक मैनिपुलेशन से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कई आरोप लगाए थे। हालांकि, 2023 के अंत में अदाणी ग्रुप को इन आरोपों से छुटकारा मिल गया था। अब भारत के मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ एक्शन लिया है। सेबी ने अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च को कारण बताओ नोटिस भेजा है।सेबी द्वारा मिले नोटिस पर फर्म ने रिएक्ट किया और 1 जुलाई को पब्लिश अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि सेबी ने नोटिस में कहा गया है कि हमने नियमों का उल्लंघन किया है। दरअसल, सेबी ने आरोप लगाया है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कुछ गलत बयान शामिल थे जिससे पाठक गुमराह हुए। हिंडनबर्ग ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि हमारे विचार से सेबी की जिम्मेदारी निवेशकों की रक्षा करना है, जबकि सेबी धोखाधड़ी करने वालों की रक्षा कर रहा है। इसके आगे फर्म ने कहा कि भारतीय बाजार के सूत्रों के साथ हमारी चर्चा हुई थी और हमने पाया कि हमारी रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने अदाणी ग्रुप की सहायता करना शुरू कर दिया था।

क्या नई रणनीति अपनाने जा रहे हैं राहुल गांधी?

आने वाले समय में राहुल गांधी नई रणनीति अपनाने जा रहे हैं! नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आम जनों की आवाजों को बखूबी संसद तक पहुंचा रहे हैं। हालांकि बतौर जनप्रतिनिधि यह कोई नई बात नहीं है कि आप आम लोगों की आवाज संसद तक पहुंचाए। लेकिन नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी न सिर्फ आम लोगों की आवाज संसद तक पहुंचाने की मुहिम में जुटे हुए हैं, बल्कि वह समाज के ऐसे तबकों तक को संसद तक पहुंचा रहे हैं, जिनके लिए न सिर्फ दिल्ली, बल्कि संसद भी बहुत दूर की चीज थी। इनमें किसानों से लेकर मछुआरे तक शामिल हैं। हालांकि राहुल का आम लोगों से संवाद भी कोई नई बात नहीं है। सांसद बनने के बाद से ही वह लगातार समाज के अलग-अलग तबकों से संपर्क करते रहे हैं, लेकिन इसमें एक बदलाव तब आया, जब वह भारत जोड़ो यात्रा जैसा एक बड़ा जन संपर्क अभियान का हिस्सा बने तो वहीं दूसरा बदलाव नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद आया है। 18वीं लोकसभा के अब तक आयोजित दो सत्रों में राहुल गांधी ने संसद में उन लोगों से मुलाकात की, जो आमतौर पर संसद नहीं आ पाते थे। उन्होंने न सिर्फ उन्हें संसद भवन बुलाया, बल्कि उनके लिए संसद के दरवाजे भी खुलवाए। इन दो सत्रों में राहुल गांधी ने किसानों, मछुआरों, स्टूडेंट्स, वकीलों, सफाई कर्मचारियों, लोको पायलट, सर्व सेवा संघ, फूड सिक्योरिटी कानून के लिए काम करने वाले प्रतिनिधि तक शामिल हैं। इनके अलावा, ओलिंपिक मेडल विजेता से मुलाकात हो या मीडिया पर लगी रोक को उठाने का मुद्दा, राहुल लगातार समाज के अलग-अलग तबकके तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी ने रणनीति बनाई है कि वह अलग-अलग तबकों से अपने संसद परिसर में बने ऑफिस में मिलेंगे।

गौरतलब है कि जब किसानों का एक जत्था उनसे मिलने आया, तो संसद भवन में उनके प्रवेश को रोका गया। राहुल ने तुरंत इस मुद्दे को मीडिया में उठाया कि किसानों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें भीतर नहीं आने दिया जाएगा तो वह खुद उनसे मिलने वहां जाएंगे। इतना ही नहीं, वह उनसे मिलने आनन-फानन में संसद के बाहर दरवाजे तक जाने को तैयार हो गए। हालांकि बाद में किसानों को संसद के भीतर आने की अनुमति दे दी गई। दरअसल, किसान मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेर रहा है। एमएसपी का कानूनी गांरटी की अपनी मांग को लेकर किसान आज तक शंभु बॉर्डर पर धरने पर बैठे हुए हैं। राहुल संसद से लेकर सड़क तक लगातार कह रहे हैं कि किसानों को एमएसपी की कानूनी गांरटी दी जाए। वहीं उन्होंने यहां तक कहा कि सत्ता में आने के बाद वह एमएसपी काे कानूनी जामा पहनाएंगे। कुछ ऐसा ही मामला मछुआरों को लेकर भी हुआ। जब मुछआरों की एंट्री रोकी गई तो राहुल उनके मिलने रिसेप्शन तक जा पहुंचे और उन्होंने संसद के रिसेप्शन हॉल में ही अपनी जनसंसद लगा ली। जिस दिन मछुआरों का जत्था संसद पहुंचा, उस दौरान संसद के दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया था।

रोचक है कि जब लोकोपायलट का डेलिगेशन मिलने पहुंचा तो राहुल न सिर्फ उनसे मिले और उनके मुद्दे जाने, बल्कि उस डेलिगेशन के साथ बाकायदा रेलवे मंत्री से मिलने गए। गौरतलब है कि राहुल की लोकोपायलट से हुई पहली मुलाकात को लेकर कई तरह के आरोप व विवाद सामने आए थे। जिसके बाद राहुल गांधी ने बाकायदा लोकोपायलट के एक दल से मुलाकात की। सरकार द्वारा मीडिया को संसद के मकर द्वार तक जाने पर लगी रोक को लेकर अपने सरोकार राहुल गांधी ने बाकायदा सदन के भीतर उठाए, जहां उन्होंने कहा कि आपने मीडिया को पिंजरे में बंद कर दिया है। मीडिया को एक सीमित जगह पर रखने के दौरान राहुल गांधी सहित तमाम विपक्ष के नेता मीडिया से मिलने उनके कांच के बने कंटेनर नुमा मीडिया एनक्लोजर तक गए थे।

राहुल गांधी की इस कवायद के पीछे रणनीति है कि समाज के अलग-अलग तबकों को संसद के भीतर आने का मौका मिले। उल्लेखनीय है कि इनमें से कई ऐसे वर्ग हैं, जो अपने मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों को से असंतुष्ट हैं। जाहिर है, ऐसे तबके जब संसद में आते हैं तो सरकार के लिए कई बार काफी असहज स्थिति हो जाती है। लेकिन राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उनका संवैधानिक दर्जा होने के बाद सत्तारूढ़ दल चाहकर इनके प्रवेश को लेकर एक हद के बाद विरोध नहीं कर सकता। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की रणनीति है कि आने वाले समय में राहुल गांधी संसद सत्र के दौरान लगातार आगे भी अपने दफ्तर में विभिन्न तबकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात जारी रखेंगे। इसके पीछे एक रणनीति है कि आप जिन मुद्दों को सदन में उठा रहे है, उस दौरान अगर उससे जुड़े लोगों को संसद भवन में बुलाते हैं तो उसका असर मीडिया से लेकर समाज तक में व्यापक होता है।

लिंगानुपात को लेकर क्या कहती है वर्तमान में रिपोर्ट?

आज हम आपको बताएंगे की लिंगानुपात को लेकर वर्तमान में रिपोर्ट क्या कहती है! भारत में लिंगानुपात 2011 के प्रति एक हजार पुरुषों पर 943 महिलाएं के स्तर से बढ़कर 2036 में प्रति 1000 पुरुषों पर 952 महिलाएं होने की उम्मीद है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी ‘भारत में महिला एवं पुरुष 2023’ रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि 2036 में भारत की जनसंख्या में 2011 की जनसंख्या की तुलना में स्त्रियों की संख्या अधिक होने की संभावना है, जैसा कि लिंगानुपात में परिलक्षित होता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2011 में प्रत्येक एक हजार पुरुषों पर 943 महिलाएं थी जो बढ़कर 2036 तक प्रति एक हजार पुरुषों पर 952 हो जाने का अनुमान है, जो लैंगिक समानता में सकारात्मक चलन को दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2036 तक भारत की जनसंख्या 152.2 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत 2011 के 48.5 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा बढ़कर 48.8 प्रतिशत हो जाएगा। आईएमआर हमेशा बालकों की तुलना में बलिकाओं की अधिक रही है, लेकिन 2020 में, दोनों प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 28 शिशुओं के स्तर पर बराबर थे। कहा गया कि 15 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों का अनुपात 2011 से 2036 तक घटने का अनुमान है, जिसका कारण संभवतः प्रजनन दर में कमी आना है। इसके विपरीत, इस अवधि के दौरान 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या के अनुपात में उल्लेखनीय वृद्धि का पूर्वानुमान लगाया गया है।यह स्पष्ट है कि 2016 से 2020 तक 20-24 और 25-29 आयु वर्ग में आयु विशिष्ट प्रजनन दर (एएसएफआर) क्रमशः 135.4 और 166.0 से घटकर 113.6 और 139.6 रह गई है। इस अवधि के लिए 35-39 वर्ष की आयु के लिए एएसएफआर 32.7 से बढ़कर 35.6 हो गया है, जो दर्शाता है कि जीवन में व्यवस्थित होने के बाद, महिलाएं परिवार बढ़ाने के बारे में सोच रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में किशोर प्रजनन दर निरक्षर आबादी में 33.9 थी जबकि साक्षर आबादी में यह 11.0 थी। यह दर उन महिलाओं के लिए भी काफी कम है जो साक्षर हैं लेकिन बिना किसी औपचारिक शिक्षा के हैं (20.0), अशिक्षित महिलाओं की तुलना में, जो महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने के महत्व के बार फिर उजागर होता है।आयु आधारित प्रजनन दर को एक विशिष्ट आयु वर्ग की महिलाओं में उस आयु वर्ग की प्रति हजार महिला जनसंख्या पर जन्मे एवं जीवित बच्चों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें कहा गया है कि मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के संकेतकों में से एक है और इसे 2030 तक 70 तक लाने का लक्ष्य स्पष्ट रूप से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) ढांचे में रखा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण, भारत ने समय रहते एमएमआर (2018-20 में 97/लाख जीवित जन्म) को कम करने का प्रमुख मील का पत्थर सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है, और एसडीजी लक्ष्य को भी हासिल करना संभव होना चाहिए। मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) से तात्पर्य किसी वर्ष में प्रति 100,000 जन्म पर गर्भावस्था या प्रसव संबंधी जटिलताओं के परिणामस्वरूप मरने वाली महिलाओं की संख्या से है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में बालक और बालिका दोनों में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर)में कमी आई है। आईएमआर हमेशा बालकों की तुलना में बलिकाओं की अधिक रही है, लेकिन 2020 में, दोनों प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 28 शिशुओं के स्तर पर बराबर थे।

पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर के आंकड़ों से पता चलता है कि यह 2015 में 43 से घटकर 2020 में 32 रह गई है। यही स्थिति लड़के और लड़कियों दोनों के लिए है और लड़के और लड़कियों के बीच का अंतर भी कम हो गया है।आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की श्रम बल भागीदारी दर पुरुष और महिला दोनों की 2017-18 से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 15वें आम चुनाव (1999) तक, 60 प्रतिशत से भी कम महिला मतदाताओं ने भाग लिया, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत उनसे आठ प्रतिशत अधिक था। हालांकि, 2014 के चुनावों में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 65.6 प्रतिशत हो गई, और 2019 के चुनावों में यह और बढ़कर 67.2 प्रतिशत हो गई। पहली बार, महिलाओं के लिए मतदान प्रतिशत थोड़ा अधिक था, जो महिलाओं में बढ़ती साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता के प्रभाव को दर्शाता है।उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने जनवरी 2016 में अपनी स्थापना के बाद से दिसंबर 2023 तक कुल 1,17,254 स्टार्ट-अप को मान्यता दी है। इनमें से 55,816 स्टार्ट-अप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो कुल मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप का 47.6 प्रतिशत है। यह महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व भारत के स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी में महिला उद्यमियों के बढ़ते प्रभाव और योगदान को रेखांकित करता है।

क्या आने वाले चुनाव तय करेंगे बीजेपी का राज ?

आने वाले चुनाव ही अब तय करेंगे कि भाजपा देश में राज करेगी या नहीं! इस साल चार राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं- हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर। जहां हरियाणा में BJP की सरकार है, वहीं महाराष्ट्र में BJP गठबंधन की। झारखंड में BJP वापसी की कोशिश में है तो जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव में BJP ने इस बार 400 पार का नारा जरूर दिया था, लेकिन वह अपने दम पर बहुमत के आंकड़े के करीब भी नहीं पहुंच पाई। लोकसभा चुनाव के बाद होने वाले इन पहले विधानसभा चुनावों में BJP का प्रदर्शन कैसा रहता है, इस पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि BJP की आगे की दिशा क्या होगी। हरियाणा में दो बार से लगातार BJP सत्ता में है। 2014 में जब पार्टी यहां सत्ता में आई तो मनोहर लाल खट्टर को सीएम बनाया। फिर 2019 का विधानसभा चुनाव खट्टर के नेतृत्व में ही लड़ा और JJP के साथ मिलकर सरकार बनाई। उसके बाद चुनाव से कुछ ही पहले नायब सिंह सैनी को सीएम बनाकर खट्टर को केंद्र में भेज दिया गया। BJP के पास प्रदेश में कोई बड़ा चेहरा नहीं है। ऐसे में इस बात की संभावना कम ही दिखती है कि वह किसी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर आगे बढ़ेगी।

BJP के लिए हरियाणा इसलिए अहम है क्योंकि बड़ी संख्या में किसान तो यहां हैं ही, भारी तादाद में यहां के युवा भी फौज में जाते हैं। नए कृषि कानून (जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया) को लेकर किसानों की नाराजगी की चर्चाएं अभी भी होती हैं। साथ ही सेना में भर्ती की नई स्कीम अग्निपथ को लेकर विपक्ष का रुख आक्रामक है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा चुनाव के वक्त से इस मसले को उठा रहे हैं कि यह स्कीम युवाओं के खिलाफ है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करगिल विजय दिवस पर जिस तरह इस स्कीम के पक्ष में बात की और विपक्ष को घेरा, उससे यह संदेश साफ है कि इस स्कीम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होने वाला। ऐसे में विधानसभा चुनाव में इसका क्या असर होगा, यह देखना होगा। 2019 लोकसभा चुनाव में BJP ने राज्य की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार BJP के खाते में 5 सीटें ही आई हैं। वोट शेयर देखें तो 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP को 58% वोट मिले थे जबकि इस लोकसभा चुनाव में उसे 46.06% मिले। कांग्रेस का वोट शेयर जहां 2019 में 28.42% था वहीं इस बार 43.73% हो गया। लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस मजबूत बनकर उभरी और BJP के लिए विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी चुनौती यही है।

महाराष्ट्र में BJP गठबंधन की सरकार है। लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। BJP राज्य की सिर्फ 9 सीटों पर लोकसभा चुनाव में जीती जबकि उसने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। 2019 विधानसभा चुनाव में BJP ने राज्य की 106 सीटों पर जीत दर्ज की थी। राज्य में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं। यहां मराठा आरक्षण एक बड़ा इशू है जो BJP के लिए मुसीबत बन सकता है। लोकसभा चुनाव में भी BJP को मराठवाड़ा क्षेत्र में सफलता नहीं मिली। वहां की 8 सीटों में से उसने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई।

झारखंड में BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनजातीय आबादी को साथ लाने की है। उसके पास आदिवासी नेता तो हैं लेकिन हेमंत सोरेन के मुकाबले का चेहरा नहीं है। राज्य सरकार के खिलाफ भले ही एंटी इनकंबेंसी है लेकिन जेल जाने के बाद हेमंत सोरेन के पक्ष में सहानुभूति भी है। लोकसभा चुनाव में BJP जनजाति आरक्षित पांच सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत पाई। झारखंड में 81 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 28 सीटें अनुसूचित जनजाति के प्रत्याशियों के लिए आरक्षित हैं। वहीं अगर जम्मू-कश्मीर को देखें तो यह चुनाव BJP के लिए साख का सवाल भी होगा। आर्टिकल 370 हटने के बाद का यह पहला विधानसभा चुनाव होगा और इसके नतीजे बताएंगे कि असल में लोगों ने BJP के इस कदम को किस तरह लिया है।

परिसीमन के बाद जम्मू रीजन में विधानसभा सीटों की संख्या 37 से बढ़कर 43 तो कश्मीर में 46 से बढ़कर 47 हो गई। 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हैं। यह माना जा रहा है कि BJP जम्मू रीजन की सभी 43 सीटों पर या ज्यादातर सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी कर रही है लेकिन कश्मीर की 47 सीटों में से काफी सीटों पर BJP छोटे दलों या फिर निर्दलीयों को समर्थन दे सकती है। पिछले कुछ समय में जिस तरह से जम्मू रीजन में आतंकी हमले बढ़े हैं, उससे भी BJP के इस नैरेटिव को झटका लगा है कि आर्टिकल 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति आ गई है।

क्या भारत से पाकिस्तान आने वाले समय में ले सकता है बदला?

आने वाले समय में पाकिस्तान भारत से बदला ले सकता है! बंगाल की खाड़ी में एक छोटी सी जगह है सेंट माटिन द्वीप। बिल्कुल ऐसे जैसे समंदर में किसी ने एक पांव रख दिया हो। यह द्वीप बांग्लादेश के समुद्रतटीय जिले कॉक्स बाजार का हिस्सा है, जो मुख्य भूमि से महज 9 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखने के लिए देश और दुनिया के सैलानी आते हैं। मगर, ये इलाका एक बार फिर चर्चा में है। वजह यह है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह आरोप लगाया है कि सेंट मार्टिन द्वीप नहीं देने की वजह से अमेरिका ने उनका तख्तापलट कराया है। स्टोरी में यह जानेंगे कि आखिर सेंट मार्टिन द्वीप की इतनी अहमियत क्यों है और इसका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिमों से क्या कनेक्शन है? सेंट मार्टिन द्वीप के पास ही एक और छोटा सा द्वीप है छेरा द्वीप, जो पश्चिमी म्यांमार से महज 8 किलोमीटर दूर है और नाफ नदी के मुहाने पर स्थित है, जो बांग्लादेश और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है। इसे लोकल लोग बहुत ज्यादा नारियल और दालचीनी पाए जाने की वजह से नारिकेल जंजीरा और दारूचीनी द्वीप (दालचीनी द्वीप) कहते हैं। आपको अगर सेंट मार्टिन द्वीप जाना हो तो आपको कॉक्स बाजार या टेकनॉफ से बोट मिलेंगी, जिनसे आप वहां जा सकते हैं। सेंट मार्टिन की मेन इनकम टूरिज्म ही है। इसके अलावा, यहां पर मुख्य खेती नारियल और चावल है। साथ ही मछली मारना भी प्रमुख कारोबार हे। आज इसी नारियल द्वीप पर चीन-पाकिस्तान और कथित रूप से अमेरिका भी नजरे गड़ाए हुए है, क्योंकि इसकी रणनीतिक अहमियत ज्यादा है।

सेंट मार्टिन महज 3 वर्ग किमी के दायरे में फैला है। यहां पर ज्यादातर हिस्से में मूंगे की चट्टाने हैं। 18वीं सदी में पहली बार यहां पर अरब व्यापारी यहां पर अपनी नौकाओं से पहुंचे तो उन्होंने इस इलाके का नाम जजीरा (छोटा द्वीप) दिया। यहां व्यापारी आराम के लिए ठहरते थे। 19वीं सदी की शुरुआत में यह ब्रिटिश भारत का हिस्सा हो गया। उस वक्त इसका नाम चटगांव के डिप्टी कमिश्नर मिस्टर मार्टिन के नाम पर इस द्वीप का नाम सेंट मार्टिन पड़ गया। बाद में यहां बंगाली बोलने वाले राखाइन लोग आकर यहां बसने लगे, जो ज्यादातर मछुआरे थे। आज इसकी आबादी करीब 8,000 है। दरअसल, यह इलाका म्यांमार के राखाइन स्टेट के पास पड़ता है, जहां से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम भागकर आते रहे हैं। भारत के बंटवारे में सेंट मार्टिन पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। 1971 में आजाद होने के बाद यह इलाका बांग्लादेश के हिस्से में आ गया।

कई मीडिया रिपोर्टों में यह कहा गया है कि बांग्लादेश में अगस्त 2017 करीब 1.20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम रोहिंग्याओं को बांग्लादेश में शरण दी गई थी, क्योंकि वे म्यांमार सेना और अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) के सदस्यों के बीच सशस्त्र संघर्ष के कारण देश से भाग गए थे। अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी एक कुख्यात उग्रवादी संगठन है, जो इंटरनेशनल ड्रग्स, हथियार और मानव तस्करी में भी शामिल है। अब इसी का फायदा पाकिस्तान और चीन उठा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि म्यांमार की सेना रोहिंग्या मुस्लिमों की एक लड़ाकू आर्मी बना रही है, जिसे सेंट मार्टिन द्वीप पर कब्जा करने का मकसद दिया गया है। यहां तक कि इस रोहिंग्या आर्मी को आईएसआई कमांडो और आत्मघाती हमले के लिए ट्रेनिंग दे रही है।

2017 में म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या मुसलमान आतंकी कारनामों में शामिल हो रहे हैं। खुद शेख हसीना ये बात कई मंचों से उठा चुकी हैं। बताया जा रहा है क्थ् अलकायदा, इस्लामिक स्टेट (ISIS), हिजबुल्लाह, हमास, लश्कर-ए-तैयबा, मुस्लिम ब्रदरहुड, हिज्ब-उत-तहरीर, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे कई आतंकी संगठन रोहिंग्याओं को आतंकी और जिहादी हमलों के लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं। कुछ समय पहले ही यह खबर आई थी कि बांग्लादेश में करीब 45 हजार रोहिंग्या मुस्लिम नाफ नदी की ओर से बांग्लादेश में घुसपैठ की फिराक में हैं। जनवरी 2020 में एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश के सशस्त्र बलों को एक नई चेतावनी जारी की है, कि ISI रोहिंग्याओं को ट्रेनिंग दे रही है। यह ट्रेनिंग अलकायदा से जुड़े बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन जमात-उल मुजाहिदीन ऑफ बांग्लादेश (JMB) के माध्यम से दी जा रही है।

डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी के अनुसार, बांग्लादेश की आजादी के बाद से देश में 11 आम चुनाव हुए हैं, जिसमें सिर्फ 4 ही निष्पक्ष रहे हैं। खुद हसीना पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। अमेरिका ने यहां तक कह दिया था कि बांग्लादेश में जनवरी में हुए चुनाव निष्पक्ष नहीं थे। हसीना ने कुछ महीने पहले यह दावा किया था कि उनकी सरकार गिराने की साजिश रची जा रही है। वहीं, इस साल मई में शेख हसीना ने अमेरिका पर संकेतों में आरोप लगाया था कि अगर मैं किसी खास देश को बांग्लादेश में हवाई अड्डा बनाने की अनुमति देती तो इस तरह की साजिशें नहीं रची जाती।

क्या भारत में भी हो सकता है कभी तख्तापलट?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कभी भारत में तख्तापलट हो सकता है या नहीं! शेख हसीना बांग्‍लादेश से भागकर नई दिल्ली में हैं, आंग सांग सू की म्‍यांमार की जेल में हैं, इमरान खान पाकिस्‍तानी जेल में हैं और श्रीलंका के राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे भी देश से भागने को मजबूर कर दिए गए थे। बांग्लादेश, म्यांमार पाकिस्तान हो या श्रीलंका, दक्षिण एशिया और भारत के पड़ोसी देशों के राजनीतिक हालात कमोबेश एक जैसे ही हैं। लेकिन भारत के राजनीतिक हालात इन देशों से अलग हैं, पूरी तरह अलग। राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की मशहूर कविता, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है, भारत में आपातकाल के दौरान खूब गूंजा करती थी। 25 जून 1975 को समाजवादी नेता जेपी नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया था। उस दौरान नेताओं को खूब जेल में डाला गया। सरकार विरोधी आंदोलन भी चलता रहा। लेकिन इस दौरान सैन्य शासन का अंदेशा देश में कभी नहीं रहा। करीब दो साल देश में आपातकाल रहा। आम चुनाव हुए और इंदिरा गांधी की बुरी तरह हार हुई। लेकिन यह भारत के लोगों का महान लोकतांत्रिक चरित्र था की उन्होंने न तो संसद पर हमला बोला और न ही इंदिरा गांधी को देश से भागने की नौबत आई। भारत में सत्ता के प्रति लोगों का गुस्सा नहीं भड़कता, ऐसा बिलकुल नहीं है लेकिन यहां जनता अपने वोट के जरिए सत्ता को जवाब देती है। इस मामले में न्यायालय की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण होती है और उस पर लोगों का भरोसा भी होता है। भारत में न्यायालय कभी सरकार के दबाव में नहीं आते। वहीं दक्षिण एशिया के बाकि देशों में सरकार,विपक्ष, न्यालयालय और सेना के कार्यों में कभी पारदर्शिता नहीं दिखाई पड़ती।

दरअसल, लोकतंत्र, सिर्फ व्यवस्था नहीं होती, यह लोगों का चरित्र भी होता है, या यो समझिये यह राष्ट्रीय चरित्र भी बन जाता है। दक्षिण एशिया में भारत को यही चरित्र दूसरों से अलग करता है। शेख हसीना ने बांग्लादेश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया। उनकी पार्टी अवामी लीग देश में लोकतंत्र की बड़ी समर्थक भी रही। लेकिन सत्ता में आने के बाद शेख हसीना धीरे धीरे निरंकुश हो गई। वे आम चुनावों में अपने मुकाबले विरोधियों को खड़े हुए देखना ही नहीं चाहती थी। विरोधियों को जेल में डालने का लंबा सिलसिला उनके कार्यकाल में थमा ही नहीं। निरंकुशता के कारण उन्हें छात्र आन्दोलन भी देशद्रोहियों का आन्दोलन नजर आने लगा। हसीना छात्रों से बात कर समस्या का समाधान कर सकती थीं लेकिन सत्ता के नशे में डूबे अवामी लीग के नेताओं ने छात्रों पर ही हमले शुरू कर दिए। शेख हसीना में विरोधियों को खुद ही मजबूत होने का मौका दिया, वे एकजुट हुए और अंतत: हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा।

यह भी दिलचस्प है कि शेख हसीना ने बांग्लादेश को गरीबी से निकाल कर साल 2041 में विकसित बांग्लादेश बनाने का सपना देखा था। लम्बे समय तक सत्ता में रहने के कारण अवामी लीग के नेताओं ने अच्छी खासी सम्पत्ति बना ली थी। अब वहीं सम्पत्ति जनता लूट रही है, अवामी लीग के नेताओं को ढूंढ़ ढूंढ़कर मारा जा रहा है। शेख हसीना ने किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने की धुन में बांग्लादेश के उस लोकतंत्र का गला घोंट दिया जिसे स्थापित करने के लिए उनके पिता शेख मुजीबुर्रहमान ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी। अब्राहम लिंकन ने कहा था कि लगभग सभी लोग प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं,लेकिन यदि आप किसी व्यक्ति के चरित्र का परीक्षण करना चाहते हैं, तो उसे शक्ति प्रदान करें। शेख हसीना को शक्ति मिली तो उन्होंने इसका इस्तेमाल प्रभुत्व और नियन्त्रण के लिए किया। काश, वे भारतीय लोकतंत्र के इस गुण को समझ सकती की सत्ता का उपयोग क्षमता और सहयोग के लिए भी किया जा सकता है।

शेख हसीना को छात्रों से बात करने की जरूरत थी,सर्वदलीय बैठक बुलाने की जरूरत थी,लेकिन वह सत्ता के नशे में चूर होकर स्थितियों को भांप ही नहीं सकीं। पाकिस्तान,श्रीलंका,म्यांमार और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में लोकतान्त्रिक व्यवस्था इसलिए भी नहीं मजबूत है क्योंकि इन देशों की सामाजिक व्यवस्थाओं में सामन्तवाद है जो शक्ति के हस्तांतरण को निचले स्तर से ही बाधित कर देता है। इसका प्रभाव राजनीतिक भी होता है और सत्ता कुछ ही परिवारों और समूहों में केन्द्रित हो जाती है। भारत में सत्ता को लेकर आम जन की भागीदारी और जागरूकता अभूतपूर्व है, यही कारण है कि भारत में पाकिस्तान, श्रीलंका,म्यांमार और बांग्लादेश जैसे हालात न तो बनते हैं और न ही ऐसी स्थितियां भविष्य में निर्मित होने की कोई संभावना है। लोकतंत्र की पांच विशेषताएं हैं, निर्वाचित प्रतिनिधि,स्वतंत्र न्यायपालिका, नागरिक स्वतंत्रता, संगठित विपक्षी दल और कानून का शासन। भारत की आम जनता तत्परता से इन पांचों विशेषताओं को ध्यान में रखती है और जनता का यहीं चरित्र देश को सत्ता विरोधी हिंसा से दूर कर देता है या उसकी कभी जरूरत ही नहीं पड़ती।

 

कोलकाता में डॉक्टर महिला के साथ रेप कितना बढ़ गया मामला?

हाल ही में कोलकाता में डॉक्टर महिला के साथ रेप हुआ था जो मामला अब बढ़ चुका है! कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पीजी ट्रेनी महिला डॉक्टर की रेप-हत्या मामले देशभर में डॉक्टरों में आक्रोश है। दिल्ली, यूपी से लेकर कोलकाता तक डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को दिल्ली में AIIMS, राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना को लेकर यूपी के लखनऊ में भी डॉक्टरों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। यहां किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और अस्पताल में डॉक्टरों ने काम बंद रखा। दूसरी तरफ मामले में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष ने इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आरडीए के बैनर तले हड़ताल की जा रही है। इसका असर देश की राजधानी दिल्ली के बड़े अस्पतालों में भी देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में आरएमएल, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, सुचेता कृपलानी, कलावती सरन, लोकनायक, जीबी पंत, जीटीबी, अंबेडकर अस्पताल व इहबास समेत ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं। हम पुलिस की मौजूदा जांच से असंतुष्ट हैं। न्याय मिलने तक और जब तक राज्य सरकार सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की फुलप्रूफ सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा।इस कारण अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं और नियमित सर्जरी प्रभावित रहेंगी। वहीं इमरजेंसी सेवाएं सामान्य हैं। वहीं एम्स में भी रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान किया है।

डॉक्टरों की हड़ताल के कारण राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ओपीडी सेवा प्रभावित है। मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं। हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरएमएल अस्पताल में अपनी मां का इलाज कराने पहुंचे उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के निवासी राज को भी इन्हीं परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, डॉक्टर हड़ताल पर हैं और सुनने वाला कोई नहीं है।कोई कहता है इमरजेंसी में जाओ, तो वहां के डॉक्टर किसी और जगह भेज देते हैं। माता जी की हालत खराब है। डॉक्टर कुछ भी जवाब नहीं दे रहे हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, केवल इमरजेंसी सेवाएं मिलेंगी। ओपीडी, कुछ सर्जरी, वार्ड में सेवाएं, लैब में जांच समेत अन्य कार्यों में डॉक्टर मदद नहीं करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, आरएमएल अस्पताल ने रेजिडेंट्स डॉक्टरों की स्ट्राइक को देखते हुए सभी फैकल्टी की छुट्टी कैंसल कर दी है और इलाज के लिए प्लान तय किया है।

एक दिन पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट सह वाइस प्रिंसिपल संजय वशिष्ठ को हटा दिया था। उनकी जगह छात्र मामलों की डीन प्रोफेसर बुलबुल मुखोपाध्याय को सुपरिटेंडेंट का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। पिछले तीन दिन से जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे थे लेकिन सोमवार को सुबह से उन्होंने इमरजेंसी सेवाएं भी रोक दी हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के एक प्रदर्शनरत जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि हम अपनी सहकर्मी के हत्या मामले की सीबीआई या किसी मौजूदा मजिस्ट्रेट से निष्पक्ष जांच कराना चाहते हैं। हम पुलिस की मौजूदा जांच से असंतुष्ट हैं। न्याय मिलने तक और जब तक राज्य सरकार सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की फुलप्रूफ सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि अगर पुलिस आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर की हत्या का मामला रविवार तक सुलझाने में विफल रही तो इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी। बनर्जी ने कहा कि वह चाहती हैं कि मामले की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में की जाए। मुख्यमंत्री महिला डॉक्टर के घर गईं और उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अंदर कथित रूप से रेप और मर्डर की शिकार हुई महिला डॉक्टर का शव शुक्रवार को सुबह मिला था। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को देशभर के विभिन्न हिस्सों से समर्थन मिल रहा है। ‘फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (फोरडा) ने हड़ताल का समर्थन किया है। एसोसिएशन ने सोमवार को वैकल्पिक सेवाओं को रोकने का देशव्यापी आह्वान किया है। ‘पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम’ ने भी राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर, महिला डॉक्टर से रेप और मर्डर मामले की जांच के लिए एक निष्पक्ष जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया है। उसने राज्य के विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा तथा दोषी को मृत्युदंड देने की भी मांग की है।

क्या आतंकी संगठन के मामले में गृहमंत्री ने कर दिया कमाल?

वर्तमान में आतंकी संगठन के मामले में गृहमंत्री ने कमाल कर दिया है! आखिर गृह मंत्री अमित शाह का प्लान काम करने लगा। दक्षिण कश्मीर के कोकेरनाग में बीते शनिवार को आतंकवादियों के खिलाफ अभियान में भारतीय सेना ने भले ही दो वीर सपूतों को खो दिया हो, लेकिन इससे कई सकारात्मक संदेश मिले हैं। यह मुठभेड़ इस बात का संकेत है कि खुफिया जानकारी और सुरक्षा बलों की सशस्त्र प्रतिक्रिया के बीच की खाई कम हो रही है। हालांकि जंगली इलाकों और पहाड़ों के कारण खुफिया जानकारी और सशस्त्र प्रतिक्रिया के बीच अभी भी अंतर है, लेकिन भारतीय सेना अब जम्मू क्षेत्र में पूरी ताकत से तैनात है। ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने के आदि थे। कोकेरनाग अभियान से पता चलता है कि भारतीय सुरक्षा बलों को आखिरकार आतंकवादियों के खिलाफ खुफिया जानकारी मिल रही है और अब बस कुछ ही समय की बात है जब इन जिहादियों का सफाया कर दिया जाएगा।वहां अर्धसैनिक बलों को शामिल किया जा रहा है, जिसमें असम राइफल्स की दो बटालियन भी शामिल हैं। असम राइफल्स के जवान जंगल-पहाड़ी युद्ध में प्रशिक्षित हैं और पिछले पांच दशकों से पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद ग्रुप से जुड़े कम से कम 35 पाकिस्तानी नागरिक सांबा-कठुआ इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके भारतीय सीमा में घुसे हैं। इनमें से करीब 10 दक्षिण कश्मीर की ओर कश्मीर घाटी में जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर नामित पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जेईएम आतंकवादी समूह का संचालन आतंकी सरगना रऊफ असगर कर रहा है, जो मसूद अजहर का छोटा भाई है। जेईएम का आतंकवादी काशिफ जान इन आतंकवादियों को पंजाब-जम्मू और कश्मीर सीमा पर उड़झ नाले के रास्ते जम्मू-कश्मीर में भेज रहा है।

हालांकि राज्य पुलिस, आईबी, रॉ और सेना को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में सामंजस्य बिठाने की दरकार अब भी बनी हुई है। वहीं, सुरक्षा बलों को इस क्षेत्र में अपनी रणनीति और अपनी क्षमता को फिर से आंकने होंगे। तभी पाकिस्तान से घुसपैठ को रोककर आतंकवादियों का खात्मा किया जा सकेगा। जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद के पीछे मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की गई घुसपैठ के कारण बलों की संख्या में कमी आना है।

मोदी सरकार ने जहां कश्मीर में सेना की संख्या बनाए रखने का फैसला किया, वहीं जम्मू से सेना को लद्दाख भेजा गया क्योंकि वे ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने के आदि थे। कोकेरनाग अभियान से पता चलता है कि भारतीय सुरक्षा बलों को आखिरकार आतंकवादियों के खिलाफ खुफिया जानकारी मिल रही है और अब बस कुछ ही समय की बात है जब इन जिहादियों का सफाया कर दिया जाएगा।

सच्चाई यह है कि भारतीय सेना ने जम्मू में सेना की संख्या बढ़ा दी है। साथ ही आतंकवाद विरोधी अभियानों की दूसरी पंक्ति में अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी भी बढ़ी है। नए भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सुचिंद्र कुमार और 16वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा सभी राजौरी-पुंछ सेक्टर के इलाके से अच्छी तरह वाकिफ हैं और हर कीमत पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों से लोहा लेने को तैयार हैं। बता दें कि भारतीय सेना अब जम्मू क्षेत्र में पूरी ताकत से तैनात है। वहां अर्धसैनिक बलों को शामिल किया जा रहा है, जिसमें असम राइफल्स की दो बटालियन भी शामिल हैं।

बता दें कि आतंकवाद पर काफी हद तक लगाम लगाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इसके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की जरूरत बताई है। एनआईए द्वारा आयोजित दो दिवसीय आतंकवाद निरोधी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि भविष्य में कोई आतंकी संगठन खड़ा ही न हो पाए, इसके लिए सभी आतंकरोधी एजेंसियों को सख्त रुख अपनाना होगा। असम राइफल्स के जवान जंगल-पहाड़ी युद्ध में प्रशिक्षित हैं और पिछले पांच दशकों से पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं। आने वाले दिनों में सकारात्मक नतीजों की उम्मीद है क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया एजेंसियों को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वे अपना काम करें।

उन्होंने एनआईए, एटीएस और एसटीएफ जैसी एजेंसियों को आतंकी घटनाओं की जांच के दायरे से बाहर निकलकर आतंकवाद पर जड़मूल से खत्म करने की दिशा में काम करने की सलाह दी।अमित शाह ने बताया कि मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति के कारण आतंकी घटनाओं में भारी कमी आई है। उन्होंने जून 2004 से मई 2014 की संप्रग सरकार और मोदी सरकार के जून 2014 से अगस्त 2023 के बीच हुई आतंकी घटनाओं के तुलनात्मक आंकड़े पेश किये।

आखिर कैसा होगा आने वाले समय में मौसम?

आज हम आपको बताएंगे कि आने वाले समय में मौसम कैसा होगा! सावन का महीना खत्म होने को है लेकिन मॉनसून अपने पूरे जोर है। रविवार सुबह से दिल्ली-NCR से लेकर उत्तर भारत में जो बारिश पड़नी शुरू हुई, वो बंद होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। दिल्ली में कई जगहों पर सड़कें दरिया बन गई हैं और कुछ इलाकों में घुटनों तक पानी आ गया है। ऐसा ही हाल कुछ नोएडा का भी है। रविवार से अभी तक दिल्ली और नोएडा से कई जगहों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। जहां पर घुटनों तक पानी जमा हो गया है। वहीं पहाड़ों पर तो बारिश आफत बनकर बरस रही है। उत्तराखंड हो या हिमाचल प्रदेश दोनों ही राज्यों का बारिश की वजह से बुरा हाल है। वहां पर कई जिलों में लोग बारिश की वजह से बाढ़ से लेकर भूस्खलन की समस्या से जूझ रहे हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने इस पूरे सप्ताह देशभर के कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। दिल्ली में रविवार सुबह से बरस रहे बादल शांत होने का नाम नहीं ले रहे हैं।चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 338 सड़कें बंद हो गई हैं। बता दें कि बारिश की वजह से चंबा, मंडी, किन्नौर, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आई हैं और चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 338 सड़कें बंद हैं। कुछ इलाकों में आज भी सुबह से बादल गरजने के साथ बरस भी रहे हैं और कुछ जगहों पर बिजली भी चमक रही है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में अभी बारिश होना बाकी है। दरअसल मौसम विभाग ने आने वाले 7 दिनों के मौसम की भविष्यवाणी कर दी है। जिसके अनुसार दिल्ली में पूरे सप्ताह बारिश होने की संभावना है। IMD के अनुसार कल दिल्ली में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में बरसात भी होगी। वहीं कल दिल्ली का अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रहने की संभावना है। दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से दिल्ली के कई सड़कों पर जलभराव की भी शिकायत आई है।

दिल्ली ही नहीं यूपी में भी मॉनसून अपना जोर दिखा रहा है। सावन जाते-जाते उत्तर प्रदेश के कई शहरों को खूब भिगो रहा है। आज भी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर झमाझम बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनों तक उत्तर प्रदेश में ऐसा ही मौसम रहने वाला है। IMD ने प्रदेश के कई जिलों में कल और परसो बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके साथ मौसम विभाग ने कल यानी मंगलवार को देवरिया, गोरखपुर, संत कबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद और मुरादाबाद के आसपास के इलाकों में बारिश बारिश की संभावना जताई है।

हिमाचल प्रदेश में रविवार से जारी भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ से पूरा जनजीवन प्रभावित हो गया है। मौसम विभाग ने अगले शनिवार तक पूरे प्रदेश में भारी बारिश की अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही IMD ने मंगलवार तक चंबा, किन्नौर, सिरमौर और शिमला जिलों के कुछ हिस्सों में बाढ़ का खतरा भी जताया है और और येलो अलर्ट भी जारी किया है। चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 338 सड़कें बंद हो गई हैं। बता दें कि बारिश की वजह से चंबा, मंडी, किन्नौर, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की खबरें आई हैं और चार राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 338 सड़कें बंद हैं।

बता दे कि मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हुई बारिश की वजह से लोगों को उमस से राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार ये राहत बुधवार को भी बनी रहेगी।बता दें कि पहाड़ों पर तो बारिश आफत बनकर बरस रही है। उत्तराखंड हो या हिमाचल प्रदेश दोनों ही राज्यों का बारिश की वजह से बुरा हाल है। वहां पर कई जिलों में लोग बारिश की वजह से बाढ़ से लेकर भूस्खलन की समस्या से जूझ रहे हैं। दिल्ली ही नहीं यूपी में भी मॉनसून अपना जोर दिखा रहा है। सावन जाते-जाते उत्तर प्रदेश के कई शहरों को खूब भिगो रहा है।इसी बीच मौसम विभाग ने इस पूरे सप्ताह देशभर के कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD ने आजमगढ़, बलिया, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती के साथ ही लखीमपुर खीरी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत के साथ ही पश्चिमी यूपी में भी आज बारिश की संभावना जताई है।