Monday, March 16, 2026
Home Blog Page 564

आखिर वक्फ संशोधन बिल में क्या क्या है खास?

आज हम आपको बताएंगे कि वक्फ संशोधन बिल में आखिर क्या-क्या खास है! वक्फ संशोधन बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश हो गया। बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल पहली बार इस सदन में पेश नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘आजादी के बाद 1954 में एक्ट लाया गया। उसके बाद एक्ट में कई संशोधन हुए। हम 1995 के कानून में संशोधन के लिए बिल ला रहे हैं क्योंकि 2013 में ऐसे प्रावधान लाए गए, जिसने वक्फ एक्ट 1995 का स्वरूप बदल दिया है।’ किरेन रिजिजू ने कहा, ‘आज जो विधेयक लाया जा रहा है वह सच्चर समिति की रिपोर्ट (जिसमें सुधार की बात कही गई थी) पर आधारित है, जिसे आपने (कांग्रेस ने) बनाया था।’ केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में जानकारी दी है कि वक्फ संशोधन बिल पहली बार नहीं लाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘1954 में आजादी के बाद ये कानून लाया गया था। फिर इसमें कई बार संशोधन भी हुए।’ रिजिजू ने आगे बताया कि 2013 में वक्फ कानून 1995 में कुछ बदलाव हुए थे, जिसके कारण अब 1995 के कानून में बदलाव के लिए ये नया बिल लाया गया है। यानी पुराने कानून में 2013 में जो बदलाव हुए थे, उनमें सुधार के लिए सरकार ये नया बिल लाई है।

किरने रिजिजू ने कहा, ‘वक्फ बोर्ड के अंदर में 12792 केस आज पेंडिंग हैं। ट्राइब्यूनल में कुल 19207 केस पेंडिंग हैं। क्यों इसको हम खत्म नहीं कर सकते हैं। टाइम लाइन बहुत जरूरी है, न्याय मिलना चाहिए लेकिन समय पर न्याय मिलना चाहिए। अब हमने टाइमलाइन सेट कर दिया है। अपील 90 दिन के अंदर, 6 महीने के अंदर डिस्पोजल होना चाहिए।’ रिजिजू ने अपने भाषण के दौरान शोर करने वाले विपक्षी सांसदों से कहा, ‘अगर सुनना नहीं चाहते हैं तो इतना सवाल क्यों पूछा। इस बिल में सरकार यह प्रावधान कर रही है कि गैर मुस्लिम भी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हो सकते हैं।आप सवाल पूछकर भाग जाना चाहते हो, ऐसा नहीं होने देंगे।’ करीब एक घंटा बोलने के बाद किरेन रिजिजू ने इस बिल को जेपीसी में भेजने का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस बिल को जेपीसी के लिए भेजने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने कि वो इस मामले में कमिटी बनाने का काम करेंगे।

वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन बिल पास होने के बाद वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को अपना नहीं बता सकेगा। अभी वक्फ के पास किसी भी जमीन को अपनी संपत्ति घोषित करने की शक्ति है। जमीन पर दावे से पहले उसका वेरिफिकेशन करना होगा। इससे बोर्ड की मनमानी पर रोक लगेगी। बोर्ड के पुनर्गठन से बोर्ड में सभी वर्गों समेत महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी। मुस्लिम बुद्धिजीवी, महिलाएं और शिया और बोहरा जैसे समूह लंबे समय से मौजूदा कानूनों में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कुछ नेता इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसका विरोध कर रहे हैं। इस बिल पर राजनीतिक दलों के नेताओं की अलग-अलग राय सामने आ रही है, जिससे सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर एतराज जताया। उन्होंने बिल को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार बंटवारे की राजनीति कर रही है, इस तरह की राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि वक्फ के पास दान की गई संपत्ति आती है। इस बिल में सरकार यह प्रावधान कर रही है कि गैर मुस्लिम भी गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हो सकते हैं।

डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि इस बिल के पास होने के बाद नॉन मुस्लिम भी बोर्ड के सदस्य बन सकेंगे, जो गलत है। उन्होंने कहा कि कोई पसंद नहीं करेगा कि जो आपके धर्म का नहीं है, वो आपके धर्म में हस्तक्षेप करे। इस बिल के माध्यम से विशेष समुदाय को टारगेट किया जा रहा है। यह बिल मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ है। टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी इस बिल को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान विरोधी है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर कहा कि मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं। विधेयक के जरिए संविधान की धज्जियां उड़ाने की कोशिश की जा रही है। वक्फ बोर्ड की संपत्ति को खत्म करके आप डीएम राज लाकर बोर्ड की संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं।

आखिरकार पेरिस ओलंपिक में छाई गई देश की बेटी मनु भाकर?

आखिरकार पेरिस ओलंपिक में देश की बेटी मनु भाकर वर्तमान में छा चुकी है! पेरिस ओलंपिक में महिला 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीतने पर देशभर से मनु भाकर को जीत की बधाई मिल रही हैं। पीएम मोदी, राष्ट्रपति, खेल मंत्री मनसुख मांडविया समेत कई दिग्गज हस्तियों ने मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में भारत का खाता खोलने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने मोदी ने इस मेडल को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने लिखा कि पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला पदक जीतने के लिए मनु भाकर को बधाई। कांस्य (पदक) के लिए बधाई। यह सफलता इसलिए और भी खास है क्योंकि वह भारत के लिए निशानेबाजी में पदक जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं। कमाल की उपलब्धि।वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मनु भाकर की ऐतिहासिक जीत पर उनको बधाई देते हुए एक्स पर लिखा- उनकी उपलब्धि कई खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। मनु के पिता रामकिशन ने कहा कि उनकी बेटी की कड़ी मेहनत रंग लाई। उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि हम बहुत खुश हैं और हमारे सभी दोस्त हमें बधाई दे रहे हैं। उसकी कड़ी मेहनत रंग लाई और मनु ने आखिरकार यह कर दिखाया। वहीं मनु की मां सुमेधा ने कहा कि मैं उसका समर्थन करने के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं और मुझे उम्मीद है कि आप सभी उसे आशीर्वाद देते रहेंगे। मनु के चाचा प्रताप सिंह ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मैंने उसे बहुत प्रेरित किया। मैंने उसे बड़ों का सम्मान करने और खुद पर विश्वास करने के लिए कहा। ओलंपिक में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उनकी दादी दया कौर ने कहा कि मेरा आशीर्वाद उस पर है।

वहीं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने लिखा कि गर्व का पल,मनु भाकर ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक में भारत का पहला पदक जीता। उन्होंने लिखा मनु को बधाई, आपने अपना कौशल और समर्पण दिखाया है। आप ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला निशानेबाज बन गई हैं। भारत के एकमात्र निशानेबाजी स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने कहा कि इस 22 साल की निशानेबाज के अथक समर्पण, कड़ी मेहनत और जुनून ने सचमुच रंग दिखाया।

वहीं नीता अंबानी ने इसे अविश्वसनीय पल करार करते हुए कहा कि हमारी सबसे कम उम्र की महिला निशानेबाज ने कांस्य पदक के साथ पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का खाता खोला। बधाई हो, मनु भाकर। ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल जीतने वाली पहली भारतीय महिला और ऐसा करने वाली हमारी सबसे कम उम्र की भारतीय निशानेबाज बनकर आपने इतिहास रच दिया। मुझे विश्वास है कि आज आपकी सफलता भारत भर के युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करेगी। भारतीय तिरंगे को ऊंचा रखें। ‘

गो इंडिया गो’ हम सभी को गौरवान्वित करें। यही नहीं पेरिस ओलंपिक का समापन स्टेड डी फ्रांस स्टेडियम में रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात हुआ. रंगारंग समारोह के बीच आयोजन समिति के अध्यक्ष टोनी एस्तांगुएट और इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के अध्यक्ष थॉमस बाख ने संबोधित किया. टोनी एस्टांगुएट ने कहा कि यह ओलंपिक गेम्स का समापन नहीं, बल्कि उद्घाटन समारोह की समाप्ति है. खेल तो अनवरत होते रहेंगे. थॉमस बाक ने लॉस एंजिल्स के मेयर को ओलंपिक ध्वज सौंपा. पेरिस ओलंपिक का समापन समारोह तीन घंटे तक चला. शुरुआत फ्रेंच गीत से हुई. इसके बाद परेड ऑफ नेशंस हुई. फिर बेल्जियम की पॉप सिंगर एंजेले वान वीक ने परफॉर्म किया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के गोल्डन वॉयजर बैंड ने ओलिंपिक की खोज दिखाई. फ्रांस के बैंड फिनिक्स की परफॉर्मेंस में एंजेले, कमिस्की और रैपर वनाडा ने भी परफॉर्म किया. फिर पांच ग्रैमी अवॉर्ड विनर गैब्रिएला सरमिएंटो विल्सन ने अमेरिका का नेशनल एंथम गाया.

इसी बीच हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज ने भी समारोह में परफॉर्म किया. वे स्टेडियम की छत से एक रोप के जरिये नीचे उतरे. फिर सिमोन बाइल्स और लॉस एंजिल्स के मेयर से ओलंपिक फ्लैग लिया और बाइक से उसे लेकर चले गए. अगले ही सीन में उन्होंने एक प्लेन से फ्लैग के साथ जंप किया और लॉस लॉस एंजिल्स में उतरे (यह सीन पहले ही शूट कर लिया गया था). इसके बाद अमेरिका के महान एथलीट माइकल जॉनसन को फ्लैग सौंपा गया. आखिर में ओलंपिक मशाल बुझाकर समारोह का अंत किया गया. क्लोजिंग सेरेमनी में एक वक्त ऐसा आया कि जब स्टेडियम में घुप्प अंधेरा छा गया. इसके बाद लाइट शो शुरू हुआ. लाइट शो की थीम ‘गोल्डन वॉयजर’ थी. शो में एक कहानी दिखाई गई. एक ट्रैवलर, गोल्डन मैन, जिसका सारा शरीर सोने का बना हुआ है. वह दुनिया की सैर पर निकलता है. ग्रीस पहंचता है, जहां, 2800 साल पहले ओलंपिक गेम्स की शुरुआत हुई थी.

भारत से अब कहां जाने का विचार रखती है शेख हसीना?

 

आज हम आपको बताएंगे कि भारत से अब कहां जाने का शेख हसीना विचार रखती है! बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद वहां पर बहुत कुछ बदल गया है। अंतरिम सरकार का गठन हो जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की कमान संभालेंगे। इसी बीच बांग्लादेश के हालात पर भारतीय विदेश मंत्रालय की भी प्रतिक्रिया आ गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में हर पल हालात बदल रहे हैं। अपने लोगों का ध्यान रखना हर सरकार की जिम्मेदारी होती है। भारत इसे लेकर चिंतित है। हमारी बातचीत वहां की सरकार से भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चल रही है। हम आशा करते हैं कि वहां के हालात जल्द ही सुधर जाएं।इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के आगे के प्लान को लेकर उठ रहे सवाल पर का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक शेख हसीना के भारत में ही रहने या कहीं और जाने की बात है तो यह फैसला उनको करना है। हमें उनके प्लान के बारे में अभी नहीं पता है। इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में भी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए समूहों और संगठनों द्वारा विभिन्न पहल की गई हैं। मैं संसद में विदेश मंत्री द्वारा कही गई बातों को दोहराना चाहूंगा कि हम इन कदमों का स्वागत करते हैं, लेकिन स्वाभाविक रूप से कानून और व्यवस्था के स्पष्ट रूप से बहाल होने तक हम बहुत चिंतित रहेंगे।

रणधीर जायसवाल ने बताया कि बांग्लादेश में करीब 19,000 भारतीय थे जिनमें से छात्रों की संख्या 9,000 थी। वहां पर प्रदर्शन के उग्र होने पर अधिकांश छात्र भारत लौट आए हैं। छात्रों के अलावा कई भारतीयों ने भी दूतावास से मदद की गुहार लगाई थी। जिनकी मदद की जा रही है। इसी बीच शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने एक बड़ा ऐलान किया है। सजीब वाजेद जॉय न कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल होते ही उनकी मां अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उनके देश में अशांति फैलाने में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है।

जॉय ने कहा कि हालांकि 76 वर्षीय हसीना निश्चित रूप से बांग्लादेश लौटेंगी, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि वह सेवानिवृत्त नेता के रूप में लौटेंगी या सक्रिय नेता के रूप में। उन्होंने यह भी कहा कि शेख मुजीब (शेख मुजीबुर रहमान) परिवार के सदस्य न तो अपने लोगों को छोड़ेंगे और न ही संकटग्रस्त अवामी लीग को बेसहारा छोड़ेंगे।जॉय ने अपनी मां की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भारत से अंतरराष्ट्रीय राय बनाने में मदद करने और बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के लिए दबाव बनाने की अपील की। इधर भारत अपने अहम पड़ोसी को लेकर वेट एंड वॉच की नीति पर है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में साफ कहा था कि भारत सरकार ने वहां की राजनीतिक ताकतों से हमेशा संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए कहा है। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। दरअसल, इस वक्त भारत सरकार की प्राथमिकता वहां रह रहे भारतीयों की वापसी को लेकर भी है।

इस बीच जेल से रिहा हुईं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने ढाका में अपनी पार्टी की एक विशाल रैली को संबोधित किया। 79 साल की जिया को 2018 में भ्रष्टाचार के आरोप में 17 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने तीसरे देश में शरण मांगने वाले सवाल पर बुधवार को कहा, ‘ये सभी अफवाहें हैं। उन्होंने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। वह कुछ और समय के लिए दिल्ली में ही रहेंगी। मेरी बहन उनके साथ हैं।’ क्या उनकी राजनीति में आने की कोई योजना है? इस सवाल पर जॉय ने कहा, ‘ऐसी योजना नहीं है। यह तीसरी बार है जब परिवार के खिलाफ तख्तापलट किया गया है।’

बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक, वहां सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और BNP के सेक्रेटरी जनरल एक एम महबूब की ओर से कहा गया कि भारत को शेख हसीना और उनकी बहन रेहाना को वापस बांग्लादेश भेज देना चाहिए। ऐसे में हसीना की भारत में मौजूदगी भारतीय डिप्लोमेसी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली हैं। बांग्लादेश में वैसे भी पहले से एंटी इंडिया भावना बीते कुछ समय से उभार पर रही है। ऐसे में भारत नहीं चाहेगा कि वहां इस तरह की भावना को और जगह मिले। वह भी तब जबकि वहां नई सरकार के गठन के लिए चहल-पहल शुरू हो गई है।

क्या बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को बचाएगी भारत सरकार?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारत सरकार बचाएगी या नहीं! बांग्लादेश के मौजूदा हालात में वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने भी चिंता जताई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत सरकार से मांग की है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। संघ के पूर्व सरकार्यवाहक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि बांग्लादेश एक अलग देश है और वहां स्वंयसेवी संगठन के तौर पर काम करने में हमारी कुछ मर्यादा है। उन्होंने कहा कि हमने सरकार से अपील की है कि वहां के हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें और हमें विश्वास है कि सरकार जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से जो खबरें सामने आ रही है, उससे ऐसा दिख रहा है कि वहां हिंदू टारगेट हो रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदूमहाजोत के जनरल सेक्रेटरी गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने मंगलवार को एक वीडियो मैसेज जारी करते हुए कहा कि यह खबरें आ रही थी कि कई मंदिरों में तोड़फोड़ हुई हैं, हमने भी यह सुना, फिर जब चेक किया तो पता चला कि ढाका के एक मंदिर में ऐसा हुआ है लेकिन वहां पर जमीन को लेकर विवाद था। इस्कॉन टेंपल के डैमेज होने की रिपोर्ट आई लेकिन यह फेक न्यूज थी। अल्पसंख्यकों को नुकसान ना पहुंचाएं, वे हमारे दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य नहीं है लेकिन धीरे धीरे नॉर्मल हो रही है। अंतरिम सरकार बनने तक देश में टेंशन रहेगी कि आगे क्या होगा।उन्होंने कहा कि यहां विरोध तानाशाह शेख हसीना के खिलाफ है न कि किसी हिंदू या अल्पसंख्यक के खिलाफ। आवामी लीग के कुछ हिंदू नेताओं के घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हमला हुआ और आग लगाई गई लेकिन अब स्थिति ठीक हो रही है। स्टूडेंट्स हिंदू मंदिरों को गार्ड कर रहे हैं।

बांग्लादेश के सीनियर जर्नलिस्ट मकसूद-उन-नबी ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि हसीना के देश छोड़ने के बाद लोगों ने सेलिब्रेट किया, इसे दूसरी आजादी की तरह मना रहे हैं। कुछ तोड़फोड़, हिंसा की घटनाएं हुई हैं, कुछ ग्रुप ने जानबूझकर हिंसा की। कुछ आवामी लीग के ऑफिस में आग लगाई। सिक्योरिटी क्राइसेस है क्योंकि पुलिस काम नहीं कर रही, पुलिस खुद सिक्योरिटी चाहते हैं क्योंकि लोग पुलिस के खिलाफ हैं। पुलिस भी सरकार का पार्ट थी और उन्होंने लोगों पर फायरिंग की थी जिससे बहुत मौतें हुई। हालांकि अब पुलिस के प्रमुख को चेंज कर दिया गया है। मकसूद ने कहा कि दशकों से यहां लोग चाहे किसी भी धर्म के हों वे एक साथ मिलकर शांति से रह रहे हैं। कभी कभी घटनाएं हुई हैं लेकिन जिस तरह की बातें की जा रही हैं कि बड़ी संख्या में रिफ्यूजी भारत की तरफ जा रहे हैं, यह गलत है।

उन्होंने कहा कि दो दिन पहले हालात ज्यादा खराब थे लेकिन अब कई स्टूडेंट्स, सोशल संगठन यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हिंदू मंदिरों की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। स्टूडेंट्स खुद सुरक्षा दे रहे हैं, लोगों से कह रहे हैं कि नुकसान न पहुंचाएं। मस्जिदों से इमाम भी अनाउंस कर रहे हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि अल्पसंख्यकों को नुकसान ना पहुंचाएं, वे हमारे दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य नहीं है लेकिन धीरे धीरे नॉर्मल हो रही है। अंतरिम सरकार बनने तक देश में टेंशन रहेगी कि आगे क्या होगा।

वह कहते हैं कि मैं यह नहीं कह रहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का डर नहीं है, कई जगह हिंसा हुई है लेकिन ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में हैं जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। कई इस्लामिक संगठन अल्पसंख्यकों को और मंदिर को सुरक्षा दे रहे हैं।बता दें कि इस्कॉन टेंपल के डैमेज होने की रिपोर्ट आई लेकिन यह फेक न्यूज थी। उन्होंने कहा कि यहां विरोध तानाशाह शेख हसीना के खिलाफ है न कि किसी हिंदू या अल्पसंख्यक के खिलाफ। आवामी लीग के कुछ हिंदू नेताओं के घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हमला हुआ और आग लगाई गई लेकिन अब स्थिति ठीक हो रही है। हसीना के देश छोड़ने के बाद लोगों ने सेलिब्रेट किया, इसे दूसरी आजादी की तरह मना रहे हैं। कुछ तोड़फोड़, हिंसा की घटनाएं हुई हैं, कुछ ग्रुप ने जानबूझकर हिंसा की। कुछ आवामी लीग के ऑफिस में आग लगाई।स्टूडेंट्स हिंदू मंदिरों को गार्ड कर रहे हैं। मैं खुद कई मंदिरों में गया और देखा कि वहां स्टूडेंट्स ही सुरक्षा कर रहे हैं। वे रात भर वहीं रह रहे हैं ताकि कोई अराजक तत्व वहां तोड़फोड़ ना कर सके।

महिला कुश्ती बाज के लिए क्या सोच रहा है पूरा देश ?

आज हम आपको बताएंगे कि महिला कुश्ती बाज के लिए पूरा देश आखिर क्या सोच रहा है! विनेश बेहोश हो गईं। उन्हें पता चला कि फाइनल मुकाबला नहीं खेल सकतीं। क्यों? क्योंकि उनका वजन तय सीमा से 100-150 ग्राम ज्यादा है। यह खबर फ्रांस से भारत पहुंची और पूरा देश बदहवास, हर कोई सन्न… ये क्या हुआ! कल ओलिंपिक के सेट पर धड़ाधड़ पटखनी दे रहीं विनेश फोगाट यूं गेम से बाहर हो जाएंगी, ये कौन सोच सकता है! भारतीय कुश्ती के इतिहास में पहला ओलिंपिक गोल्ड मेडल मिलने का सपना देख रहा पूरा देश ये कैसे विश्वास करे कि गोल्ड क्या कोई मेडल नहीं मिल पाएगा! सपनों पर इतना बड़ा आघात, उम्मीदों पर इतना बड़ा प्रहार, आकांक्षाओं को इतना बड़ा झटका! ये महज नियम पर खरा उतरने में चूक का मामला नहीं, एक त्रासदी है। पेरिस में मिले जख्म ने विनेश को अस्पताल ही नहीं पहुंचाया, भारत की भावनाओं को रौंद दिया। सोशल मीडिया के घरौंदे में करोड़ों आहत मन का चित्कार गूंज रहा है।जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, “एक ही दिन में दुनिया की तीन धुरंधर पहलवानों को हराने के बाद आज विनेश के साथ-साथ पूरा देश भावुक है। किसी को नियम की आड़ में बेईमानी की बू आ रही है तो कोई ओलिंपिक का बहिष्कार करने तक का मन बना चुका है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रासकिन्हा मंगलवार की रात एक्स पर पोस्ट करते हैं और विनेश की यात्रा को तस्वीरों में दिखाते हैं। वो लिखते हैं, ’17 अगस्त, 2023 को विनेश की एसीएल सर्जरी हुई। 25 अगस्त, 2023 को विनेश ने 29वीं जन्मदिन मनाया। हमने विनेश को पेरिस ओलिंपिक के लिए पूरी तरह तैयार करने का संकल्प लिया। 6 अगस्त, 2024 को विनेश ओलिंपिक्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। अब तो सिर्फ गोल्ड पर नजर है। सपनों का एकमात्र लक्ष्य तिरंगा।’

सोचिए, आज विरेन के दिल पर क्या बीत रही होगी? फिर विरेन ही क्यों, यही सपना तो पूरा भारत देख रहा था। सोहोम लिखते हैं, ‘विनेश फोगाट फाइनल में पहुंचने के बाद रातभर नहीं सोईं और अतिरिक्त दो किलो वजन घटाने के लिए कड़ी मेहनत करती रहीं। लेकिन 100 ग्राम से छंट गईं और अब अस्पताल में हैं। आखिर हम भी इस सदमे से कैसे उबर पाएंगे? यह भारतीय खेल इतिहास का संभवत: सबसे निष्ठुर, विनाशकारी और हृदय विदारक घटना है।’

विनेश, आप चैंपियनों की चैंपियन हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, पूरे देश समवेत स्वर यही है। आप अभी अस्पताल में हैं और हम सदमें में। लेकिन हर व्यक्ति, समाज, राष्ट्र के जीवन में उतार-चढ़ाव भरा दौर आता है। प्रकृति का यह नियम स्वीकार करके आपको, हमको, सबको उबरना होगा। हम उबरेंगे, आप फिर मैदान में होंगी। विजेता तो हम एक-एक भारतीय आपको मान ही चुके हैं, बस सुनहरे तमगे के लिए और चार बरस का इंतजार कर लेंगे। 100 ग्राम वजन का बढ़ना, आपका गौरव नहीं घटा सकता। हमें आप पर करोड़ों-अरबों टन का गर्व है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेरिस ओलंपिक में फाइनल में स्थान बनाने के लिए महिला पहलवान विनेश फोगाट को मंगलवार को बधाई दी और कहा कि आज भारत की बहादुर बेटी के सामने सत्ता का वो पूरा तंत्र धराशाई पड़ा था, जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, “एक ही दिन में दुनिया की तीन धुरंधर पहलवानों को हराने के बाद आज विनेश के साथ-साथ पूरा देश भावुक है।

राहुल ने कहा कि जिन्होंने भी विनेश और उसके साथियों के संघर्ष को झुठलाया, उनकी नीयत और काबिलियत तक पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए, उन सभी को जवाब मिल चुका है। उन्होंने कहा कि आज भारत की बहादुर बेटी के सामने सत्ता का वो पूरा तंत्र धराशाई पड़ा था जिसने उसे खून के आंसू रुलाए थे। कांग्रेस नेता ने कहा, “चैम्पियंस की यही पहचान है, वो अपना जवाब मैदान से देते हैं। बहुत शुभकामनाएं विनेश। पेरिस में आपकी सफलता की गूंज, दिल्ली तक साफ सुनाई दे रही है।”

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने विनेश के फाइनल में पहुंचने से पहले एक्स पर पोस्ट किया, “शाबाश विनेश फोगाट। मैं जानती हूं कि आपके लिए यह सिर्फ ओलंपिक का कठिन मुकाबला भर नहीं है। आपने दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी को तो हराया ही, यह मैदान के भीतर और बाहर आपके संघर्षों की भी जीत है।” उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आपके हाथों में लहराता हुआ तिरंगा देख रही है। आप इस देश का गौरव हैं और हमेशा रहेंगी। खूब शुभकामनाएं। जय हो! विजय हो!

महिला कुश्तीबाज विनेश फोगाट के लिए क्या बोल खेल मंत्री?

हाल ही में खेल मंत्री ने महिला कुश्तीबाज विनेश फोगाट के लिए एक बयान दिया है !ओलंपिक में भारतीय पहलवान विनेश फोगाट के 50 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतियोगिता से अयोग्य ठहराए जाने के बाद केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में बयान दिया। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि आखिर विनेश के साथ क्या हुआ था। अगर कोई पहलवान तय वजन सीमा में नहीं होता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ही इस खेल के नियम तय करता है। इस बीच, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि इस मामले में विनेश की कोई गलती नहीं है।मांडविया ने बताया कि विनेश का वजन 50 किलो 100 ग्राम पाया गया। भारत ने इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ से कड़ा विरोध जताया है।

खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय ओलंपिक संघ की प्रमुख पी टी उषा से बात करके इस मामले में उचित कार्रवाई के लिए कहा है। केंद्रीय खेल मंत्री ने लोकसभा में बताया कि विनेश मंगलवार 6 अगस्त को 3 मुकाबले जीतकर 50 Kg रेसलिंग ओलिंपिक में फाइनल में पहुंचने वालीं पहली भारतीय महिला रेसलर बनी थीं। सेमीफाइनल में उन्होंने क्यूबा की पहलवान गुजमान लोपेजी को, क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन की ओकसाना लिवाच और प्री-क्वार्टरफाइनल में वर्ल्ड चैंपियन जापान की युई सुसाकी को 3-2 से मात दी थी।

उन्हें बुधवार 7 अगस्त की रात करीब 10 बजे गोल्ड मेडल के लिए अमेरिकी रेसलर सारा एन हिल्डरब्रांट से मुकाबला करना था। जहां तक उनकी तैयारी हेतु सहायता का प्रश्न है, भारत सरकार ने विनेश फोगाट की उनकी आवश्यकता के अनुसार हर संभव सहायता प्रदान की है। उनके लिए पर्सनल स्टाफ भी नियुक्त किए गए हैं जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। उनके साथ हंगरी के विख्यात कोच वोलेर अकोस और फिजियो अश्विनी पाटिल हमेशा रहते हैं। इनको ओलम्पिक के लिए इनके अतिरिक्त व्यक्तिगत सहायक स्टाफ जैसे विभिन्न स्पारिंग पार्टनर्स, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग विशेषज्ञ, के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई!

खेल मंत्री ने आगे बताया कि पेरिस ओलंपिक के लिए कुल 70.45 लाख रुपये दिए गए। इनमें टॉप्स के तहत 53.35 लाख रुपये और ACTC के तहत 17.10 लाख रुपये दिए गए। इससे पहले टोक्यो ओलंपिक के लिए 1.66 करोड़ रुपये दिए गए थे। वहीं बुल्गारिया में 23 दिनों की ट्रेनिंग के लिए 5.44 लाख रुपये दिए गए, बुडापेस्ट में 16 दिनों की ट्रेनिंग 10.54 लाख रुपये दिए गए।UWW का नियम नंबर 11 कहता है कि, ‘मैच में एंट्री से पहले टीम के लीडर को ‘फाइनल एथलीट्स’ का नाम देना होता है, जो मुकाबले में लड़ेगा। इसकी जानकारी पहले से देनी होती है।’ यानी, मुकाबले से पहले ही यह तय हो जाता है कि कौन सा पहलवान किसके खिलाफ लड़ेगा।वजन का ब्योरा मैच से एक दिन पहले दोपहर 12 बजे तक देना होता है।

 गौरतलब है कि विनेश को 50 किलो से ज्यादा भार के कारण इस प्रतियोगिता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। इस बार विनेश का मेडल पक्का हो चुका था बस उसका रंग बदलना बाकी थी।

लेकिन वजन के कारण विनेश समेत पूरे 140 करोड़ देशवासियों का सपना टूट गया। इस घटना के बाद विनेश के चाचा महावीर फोगाट ने कहा कि अब इसमें कुछ नहीं हो सकता है और कोई मेडल नहीं आने वाला है। विनेश के प्रतियोगिता से बाहर होने के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर उन्हें असली चैंपियन बताया था। बता दें कि विनेश फोगाट के मामले में भारत सरकार और भारतीय कुश्ती संघ ही आगे का रोडमैप तैयार करेगी। फोगाट के साथ अगर अन्याय हुआ भी है तो भारत सरकार ही ओलिंपिक मैनेजमेंट के आगे फोगाट की हर बात रखेगी। लेकिन ये लोग देश की बेटी और भारत सरकार के बीच ही नफरत के बीच बोने में लगे हुए हैं।  यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी ट्वीट कर उन्हें चैंपियन बताया है।रेसलिंग में पहलवानों को अपने वजन के हिसाब से अलग-अलग वर्गों में बांटा जाता है, ताकि मुकाबला बराबरी का हो। खिलाड़ियों को अपने तयशुदा वजन वर्ग में ही खेलना होता है। सेमीफाइनल में उन्होंने क्यूबा की पहलवान गुजमान लोपेजी को, क्वार्टरफाइनल में यूक्रेन की ओकसाना लिवाच और प्री-क्वार्टरफाइनल में वर्ल्ड चैंपियन जापान की युई सुसाकी को 3-2 से मात दी थी।अगर कोई पहलवान तय वजन सीमा में नहीं होता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ही इस खेल के नियम तय करता है। इस बीच, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि इस मामले में विनेश की कोई गलती नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोच और न्यूट्रिनिस्ट जिम्मेदार हैं।

आखिर ओलंपिक पर भी क्यों हो रही है राजनीति?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ओलंपिक पर भी राजनीति क्यों हो रही है! पेरिस ओलिंपिक में गोल्ड के लिए फाइनल मुकाबले में उतरने से पहले पहलवान विनेश फोगाट को अयोग्य करार कर दिया गया। उनका वजन वेट कैटेगिरी से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया। पेरिस से यह खबर जैसे ही भारत पहुंची, पूरा देश गमगीन हो गया। गोल्ड की उम्मीद लगाए करोड़ों लोगों के चेहरे मुरझा गए। लेकिन धीरे-धीरे विनेश फोगाट के मामले में भी गंदी सियासत का रंग चढ़ गया और सोशल मीडिया पर कई लोग इसे सरकार और भारतीय कुश्ती संघ की साजिश बताने लगे। फिर क्या था, देखते ही देखते वो जमात ऐक्टिव हो गई, जो हर बात पर जहर उगलती है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस पूरे मामले को सरकार की साजिश बताने लगे, तो कोई लिख रहा है फोगाट ‘सिस्टम के आगे’ हार गई। ताज्जुब की बात है जिन लोगों को ओलिंपिक के बारे में जीरो नॉलेज है, वह इस मामले पर ज्ञान दे रहे हैं। ये लोग हर घटना को सियासी बनाने में माहिर हैं। ऐसे लोगों को सोचना चाहिए कि ये मुद्दा देश का अंदरूनी मामला नहीं है। ओलिंपिक दुनिया का एक बड़ा खेल इवेंट है। खिलाड़ियों के लिए ये इवेंट ‘करो या मरो’ जैसा होता है। मगर जब भारत के अंदर से ही प्रधानमंत्री और कुश्ती संघ को फोगाट मामले से जोड़ा जाए तो इसका दुनिया में क्या संदेश जाएगा।

विनेश फोगाट वही है, जिन्होंने भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। विनेश ने महिला पहलवानों के साथ हो रहे कथित यौन शोषण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था। इसी आंदोलन के दौरान दिल्ली की सड़कों पर उन्हें घसीटते हुए तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिससे काफी बवाल मचा था। यह मुद्दा कोर्ट के अधीन है। इस मामले की आड़ में ओलिंपिक की घटना को शामिल करना केवल मूर्खतापूर्ण है।

विनेश के सेमीफाइनल मैच जीतते ही राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया था। अचानक पीएम मोदी के खिलाफ मीम्स बनने की शुरुआत हो गई थी। सोशल मीडिया में कुछ महानुभाव इसे पीएम मोदी की हार बताने लगे थे। ऐसी संकीर्ण विचारधारा के लोगों को सोचना चाहिए कि विनेश फोगाट के मामले में भारत सरकार और भारतीय कुश्ती संघ ही आगे का रोडमैप तैयार करेगी। फोगाट के साथ अगर अन्याय हुआ भी है तो भारत सरकार ही ओलिंपिक मैनेजमेंट के आगे फोगाट की हर बात रखेगी। लेकिन ये लोग देश की बेटी और भारत सरकार के बीच ही नफरत के बीच बोने में लगे हुए हैं। रेसलिंग में पहलवानों को अपने वजन के हिसाब से अलग-अलग वर्गों में बांटा जाता है, ताकि मुकाबला बराबरी का हो। खिलाड़ियों को अपने तयशुदा वजन वर्ग में ही खेलना होता है। अगर कोई पहलवान तय वजन सीमा में नहीं होता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) ही इस खेल के नियम तय करता है। UWW के नियमों के अनुसार, हर मैच से पहले खिलाड़ियों का वजन लिया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अपने तयशुदा वर्ग में ही खेल रहे हैं।

UWW का नियम नंबर 11 कहता है कि, ‘मैच में एंट्री से पहले टीम के लीडर को ‘फाइनल एथलीट्स’ का नाम देना होता है, जो मुकाबले में लड़ेगा। इसकी जानकारी पहले से देनी होती है।’ यानी, मुकाबले से पहले ही यह तय हो जाता है कि कौन सा पहलवान किसके खिलाफ लड़ेगा।

वजन का ब्योरा मैच से एक दिन पहले दोपहर 12 बजे तक देना होता है। वजन के दौरान पहलवानों को क्या पहनना है, यह भी नियमों में तय होता है। अगर कोई पहलवान तय समय पर अपना वजन नहीं कराता है या फिर अपने वर्ग से अलग वजन का पाया जाता है, तो उसे प्रतियोगिता से बाहर किया जा सकता है। UWW का नियम कहता है कि जो एथलीट वजन के अनुरुप नहीं होता, उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाता है। इसी आंदोलन के दौरान दिल्ली की सड़कों पर उन्हें घसीटते हुए तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिससे काफी बवाल मचा था। यह मुद्दा कोर्ट के अधीन है। इस मामले की आड़ में ओलिंपिक की घटना को शामिल करना केवल मूर्खतापूर्ण है।इसके अलावा यदि कोई एथलीट पहले या दूसरे, दोनों बार में भी वजन नहीं करवाता तो भी उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। साथ ही उसे बिना कोई रैंक दिए आखिरी स्थान पर रखा जाता है।

आखिर वास्तविकता में कौन चला रहा है दिल्ली ?

आज हम आपको बताएंगे कि वास्तविकता में दिल्ली को कौन चला रहा है! आखिर देश की राजधानी दिल्ली को कौन चला रहा है? इस सवाल का जवाब दिल्ली में रहने वाला हर शख्स जानना चाहता है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद यह सवाल खड़ा हुआ है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीती सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल के पक्ष में एक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि कानून एलजी को दिल्ली नगर निगम में एल्डरमैन नियुक्त करने का अधिकार देता है। फैसले में यह भी कहा गया कि उपराज्यपाल एल्डरमैन नियुक्ति के लिए मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। यह फैसला आम आदमी पार्टी सरकार के लिए एक और झटका है। हाल ही में भारी बारिश के बाद दिल्ली के हालात बहुत खराब हो गए थे। जगह-जगह पर सीवर लाइनें चोक हो गई थी। नगर निगम स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 15 महीने से सुरक्षित रखा गया फैसला सोमवार को सुनाए जाने के बाद, उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से यह पहली प्रतिक्रिया है।सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया था। ऐसे यह स्थिति और भी पेचीदा हो गई है क्योंकि अब यह सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली चला कौन रहा है? सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर चल रही खींचतान के बीच आया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला AAP सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे दिल्ली सरकार के कामकाज में और भी मुश्किलें आ सकती हैं।

दिल्ली में पिछले महीने बारिश ने बहुत तबाही मचाई है। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पानी भर गया और नुकसान भी हुआ। राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बारिश का पानी भरने से तीन UPSC के छात्रों की मौत हो गई। इसके अलावा एक छात्र की मौत करंट लगने से हुई। नालों में गिरने से भी दो लोगों की मौत हुई है। बारिश की वजह से दिल्ली में बहुत नुकसान हुआ है। इस बीच दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल वी के सक्सेना के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। एलजी दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम से काफी नाराज है। वह दिल्ली के बदहाल नालों का जायजा कर चुके हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जमकर लताड़ भी लगाई थी।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के कार्यालय ने बुधवार को कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में ‘एल्डरमैन’ की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद, आम आदमी पार्टी (आप) को ‘आत्मनिरीक्षण’ करने की जरूरत है। उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में यह उम्मीद भी जताई गई है कि नगर निगम स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 15 महीने से सुरक्षित रखा गया फैसला सोमवार को सुनाए जाने के बाद, उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से यह पहली प्रतिक्रिया है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने सोमवार को दिल्ली सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें यह कहा गया था कि उपराज्यपाल को एमसीडी में 10 एल्डरमैन की नियुक्ति के मामले में मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता पर कार्य करने के लिए बाध्य माना जाए। उपराज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने उम्मीद जताई है कि उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा ‘एल्डरमैन’ की नियुक्ति के मामले में स्पष्ट रूप से दिए गए फैसले के बाद एमसीडी आवश्यक प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए शीघ्रता से कदम उठाएगा, बता रहे हैं सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर चल रही खींचतान के बीच आया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला AAP सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे दिल्ली सरकार के कामकाज में और भी मुश्किलें आ सकती हैं। बता दें कि दिल्ली में पिछले महीने बारिश ने बहुत तबाही मचाई है। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पानी भर गया और नुकसान भी हुआ। राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बारिश का पानी भरने से तीन UPSC के छात्रों की मौत हो गई। जो पिछले लगभग 19 महीनों से लंबित पड़े हैं।’ दिल्ली सरकार पर व्यर्थ मुकदमेबाजी में उलझने का आरोप लगाते हुए उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि सरकार ने न केवल उच्चतम न्यायालय का समय बर्बाद किया, बल्कि जानबूझकर एमसीडी को भी पंगु बना दिया।

नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने आसनसोल-वारंगल रेलवे कॉरिडोर को मंजूरी दी.

कैबिनेने ट आसनसोल-वारंगल के बीच नए रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी, आठ नई लाइनें भी बनाई जाएंगी। रेल मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल और तेलंगाना के वारंगल के बीच इस रेल कॉरिडोर का इस्तेमाल कोयला परिवहन के लिए किया जाएगा. इसके अलावा इस कॉरिडोर से यात्री ट्रेनें चलेंगी. केंद्रीय कैबिनेट ने आसनसोल-वारंगल के बीच रेल कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इतना ही नहीं, कैबिनेट ने इस परियोजना के तहत देश में आठ नई लाइनों के निर्माण को मंजूरी दे दी है, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक हुई.

रेल मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल और तेलंगाना के वारंगल के बीच इस रेल कॉरिडोर का इस्तेमाल कोयला परिवहन के लिए किया जाएगा. इसके अलावा इस कॉरिडोर से यात्री ट्रेनें चलेंगी. गुनपुर-थेरुबली के बीच नई लाइन शुरू की जाएगी। यह लाइन जूनागढ़-नबरंगपुर और मलकानगिरी-पांडुरंगपुरम के ऊपर से गुजरेगी। अश्विनी ने दावा किया कि यह नया गलियारा पूर्वी तट पर बंदरगाहों के साथ कनेक्टिविटी बनाने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। ये सभी बंदरगाह माल खासकर कोयले की ढुलाई में अहम भूमिका निभाएंगे। इस नए कॉरिडोर से पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड, बिहार और ओडिशा को भी फायदा होगा। रेल मंत्री ने यह भी कहा कि 500-700 किमी लंबे इस कॉरिडोर के निर्माण के लिए 7383 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

अश्विनी ने यह भी बताया कि नई आठ लाइनें कहां बनाई जाएंगी। गुनपुर-थेरुबली के बीच 73.62 किमी लंबी लाइन बनाई जाएगी. जूनागढ़-नबरंगपुर के बीच 116.21 किमी, मलकानगिरी-पांडुरंगपुरम के बीच 173.61 किमी, बादामपहाड़-केंदुझारगढ़ के बीच 82.06 किमी, जालना-जलगांव के बीच 174 किमी, बरमुरा-चाकुलिया के बीच लगभग 60 किमी और बंगरीपोसी-गुरुमहिसानी के बीच 85.6 किमी का निर्माण करने का निर्णय लिया गया है एक लंबी रेलवे लाइन. इसके अलावा इस कॉरिडोर से यात्री ट्रेनें चलेंगी. केंद्रीय कैबिनेट ने आसनसोल-वारंगल के बीच रेल कॉरिडोर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इतना ही नहीं, कैबिनेट ने इस परियोजना के तहत देश में आठ नई लाइनों के निर्माण को मंजूरी दे दी है, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक हुई.

 

रेल मंत्री ने दावा किया कि अगर यह कॉरिडोर बनता है तो यह कई मायनों में अहम भूमिका निभाएगा. माल परिवहन के अलावा यह गलियारा पर्यटन, रोजगार और वित्त की दृष्टि से भी प्रमुख मार्गों में से एक होगा। ‘रेल मंत्री रहते हुए ममता ने क्या किया?’ वर्तमान रेल मंत्री वैष्णव ने आंकड़े उछालकर तृणमूल नेता पर साधा निशाना रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बुलेट ट्रेन के बारे में बात की. विपक्ष ने सवाल उठाया कि वह रेल हादसों पर चुप क्यों हैं. उन्होंने गुरुवार को उन सभी आरोपों का जवाब दिया. जब तृणमूल नेता ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तब उन्होंने रेल दुर्घटना पर संसद में क्या कहा था? मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आंकड़ों पर चुटकी ली. जहां रेल दुर्घटनाओं को लेकर उनके मंत्रालय की आलोचना हो रही थी, वहीं रेल मंत्री को संसद में विपक्ष की भूमिका पर निशाना साधते देखा गया। उस संदर्भ में बंगाल की मुख्यमंत्री की बातें भी उनके भाषण में आईं. अश्विनी ने आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे ममता के रेल मंत्री रहने के दौरान रेल दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई। साथ ही उन्होंने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को भी आड़े हाथों लिया.

रेल मंत्री बुधवार के बाद गुरुवार को भी लोकसभा सत्र में शामिल हुए. बुधवार को उनके भाषण में रेल दुर्घटना का विषय नहीं आया. अश्विनी ने देश में बुलेट ट्रेन तकनीक पर चर्चा की. जिससे विपक्ष एक नए मोड़ पर आ गया. इसके बाद उन्होंने गुरुवार को संसद में ट्रेन हादसे से जुड़ी शिकायतों का जवाब दिया. ममता के रेल मंत्री रहने के दौरान रेल दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए अश्विनी ने कहा, ”जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तब वह इसी संसद में खड़े होकर कहती थीं कि देश में रेल दुर्घटनाएं 0.24 प्रतिशत से घटकर 0.19 प्रतिशत हो गयी हैं. तब यहां बाकी लोग ताली बजाएंगे। और अब, जब देश में ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 0.19 से घटकर 0.03 प्रतिशत हो गई है, तो वे इसके बजाय मुझे दोषी ठहरा रहे हैं! क्या देश ऐसे ही चलता रहेगा? अश्विनी ने यह भी बताया कि नई आठ लाइनें कहां बनाई जाएंगी। गुनपुर-थेरुबली के बीच 73.62 किमी लंबी लाइन बनाई जाएगी. जूनागढ़-नबरंगपुर के बीच 116.21 किमी, मलकानगिरी-पांडुरंगपुरम के बीच 173.61 किमी, बादामपहाड़-केंदुझारगढ़ के बीच 82.06 किमी, जालना-जलगांव के बीच 174 किमी, बरमुरा-चाकुलिया के बीच लगभग 60 किमी और बंगरीपोसी-गुरुमहिसानी के बीच 85.6 किमी का निर्माण करने का निर्णय लिया गया है एक लंबी रेलवे लाइन.

क्या अब बांग्लादेश पर चीन रख रहा है नजर?

अब चीन बांग्लादेश पर पैनी नजर रखा है! बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे पर शुरू हुआ विरोध कब हिंसक हो गया,शायद शेख हसीना भी नहीं समझ पाईं। हालत ये हो गई है कि शेख हसीना को पीएम पद से इस्तीफा देने के साथ देश तक छोड़ना पड़ा। शेख हसीना अब भारत में हैं और अब आगे उनका क्या कदम होगा, इसपर अभी सब अनिश्चित है। भारत के दृष्टिकोण से, अपनी कई विफलताओं और घरेलू राजनीति में तेजी से अस्थिर स्थिति के बावजूद, हसीना ने धार्मिक चरमपंथियों और भारत विरोधी ताकतों को नियंत्रण में रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता के स्रोत के रूप में काम किया। हालांकि एनएसए अजीत डोभाल ने गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। आज विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाकर भारत का रुख साफ किया है। अब इसपर चीन क्या सोच रहा है यह भी देखने वाली बात है। ढाका से रिपोर्टों में कहा गया है कि हसीना की अवामी लीग को अंतरिम सरकार से बाहर रखा जाएगा जो सेना बना रही है, जबकि विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। जमात पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों के लिए जाना जाता है, बीएनपी, इस साल की शुरुआत में चुनाव नहीं लड़ा था क्योंकि यह एक कार्यवाहक सरकार के तहत आयोजित नहीं किया गया था। इसने भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने का अवसर कभी नहीं गंवाया है। दोनों पक्षों ने बांग्लादेश के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की थी।उन्होंने मिलकर जुलाई की शुरुआत में छात्र आंदोलन के रूप में शुरू हुए प्रोटेस्ट को शासन परिवर्तन के लिए एक हिंसक देशव्यापी आंदोलन में बदल दिया।

भारत उम्मीद करेगा कि नई सरकार पर सेना का प्रभाव कम होगा। हालांकि इसके अलावा भी बहुत कुछ है जिसके बारे में वह चिंतित होगा। हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता ने भारत को देश में आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति दी है जिसे सरकार अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में एक अनिवार्य भागीदार के रूप में भी देखती है। ऊर्जा और संपर्क पर ध्यान केंद्रित करने वाली साझेदारी फली-फूली। इसने भारत को बांग्लादेश के साथ 4,000 किलोमीटर की सीमा पर सहकारी और शांतिपूर्ण प्रबंधन तंत्र रखने और नशीली दवाओं और मानव तस्करी और नकली मुद्रा से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने की अनुमति दी। भारत इस बात को लेकर चिंतित होगा कि ढाका में नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद इस तरह की पहल कैसे प्रभावित होती है।

भारत को बांग्लादेश की धरती पर विदेशी तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों सहित क्षेत्रीय अशांति को भड़काने के किसी भी प्रयास से बचने की आवश्यकता होगी। ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने हसीना की इस हार का लंबे समय से इंतजार किया है। 2021 में तालिबान की वापसी के साथ भारत को अफगानिस्तान में इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा था। वो अलग बात है कि काबुल में शासन अब तक भारत की चिंताओं को स्वीकार करता रहा है। सरकार अफगानिस्तान में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों की गतिविधियों के बारे में मिल रही रिपोर्टों पर ध्यान लगाए हुए है।

भारत इस बात को लेकर चिंतित होगा कि ढाका के साथ आतंकवाद विरोधी और रक्षा सहयोग कैसे प्रभावित हो सकता है। हसीना के साथ अपनी बैठकों में, पीएम मोदी कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर जोर दे रहे थे और जून में अपने पिछले शिखर सम्मेलन में, दोनों पक्षों ने बांग्लादेश के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की थी।

भारतीय सरकारों के हसीना सरकार के साथ “सर्वव्यापी” संबंध थे जो सद्भावना और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित थे। विदेश मंत्रालय ने इसे क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक मॉडल की सराहना की। भारत सरकार ने बांग्लादेश की विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में हसीना के प्रमुख समर्थक के रूप में काम किया है। भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने का अवसर कभी नहीं गंवाया है। उन्होंने मिलकर जुलाई की शुरुआत में छात्र आंदोलन के रूप में शुरू हुए प्रोटेस्ट को शासन परिवर्तन के लिए एक हिंसक देशव्यापी आंदोलन में बदल दिया।बदले में, हसीना ने भारत के सुरक्षा हितों का ध्यान रखा, सीमा मुद्दे को हल किया और अशांत इस्लामी तत्वों को भारत को निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी।