Monday, March 16, 2026
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आखिर पहले ही कैसे की जाती है मौसम की भविष्यवाणी?

आज हम आपको बताएंगे कि पहले ही मौसम की भविष्यवाणी आखिर कैसे की जाती है!केरल के वायनाड में तेज बारिश के बाद लैंडस्लाइड में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई लोग घायल हैं और कई लोग अब भी लापता हैं। लैंडस्लाइड सोमवार देर रात चार गांवों में हुई। इनमें घर, पुल, सड़कें और गाड़ियां बह गईं। राहत बचाव का कार्य अब भी जारी है। एनडीआरएफ और सेना भी वहां मौजूद है। वायनाड हादसे पर बुधवार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दावा किया कि भूस्खलन से सात दिन पहले ही राज्य को चेतावनी दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को भी एक और चेतावनी दी गई थी। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे आधुनिक समय-पूर्व चेतावनी प्रणाली मौजूद है और 2014 के बाद भारत उन तीन-चार देशों में से एक है, जो आपदा से सात दिन पहले ही पूर्वानुमान साझा करते हैं।  मौसम विभाग 24 घंटों में 20 सेमी से अधिक बारिश होने और भारी से अत्यधिक भारी बारिश के लिये रेड अलर्ट जारी करता है, जबकि ऑरेंज अलर्ट का मतलब बहुत भारी बारिश (6 सेमी से 20 सेमी) है। एकत्रित डेटा का विश्लेषण मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है जो अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर मौसम के पैटर्न की पहचान करते हैं।मौसम पूर्वानुमान विभिन्न माध्यमों जैसे टेलीविजन, रेडियो, समाचार पत्रों और इंटरनेट के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाता है। कई मोबाइल ऐप्स भी मौसम की जानकारी प्रदान करते हैं।कंप्यूटर मॉडल भी डेटा का विश्लेषण करते हैं और भविष्य के मौसम की स्थिति की भविष्यवाणी करते हैं।भारत के पास दुनिया की सबसे आधुनिक समय-पूर्व चेतावनी प्रणाली मौजूद है और 2014 के बाद भारत उन तीन-चार देशों में से एक है, जो आपदा से सात दिन पहले ही पूर्वानुमान साझा करते हैं।

भारत में मौसम का पूर्वानुमान एक जटिल प्रक्रिया है। इसका सही पता लगाने के लिए कई तरह के उपकरणों और तकनीक का उपयोग किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में पहले से सक्षम हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) यह भारत में मौसम संबंधी सभी गतिविधियों का केंद्र है। यह विभाग देश भर में फैले हुए हजारों मौसम स्टेशनों के नेटवर्क के माध्यम से डेटा एकत्र करता है। ये स्टेशन तापमान, आर्द्रता, वायु दाब, वर्षा, हवा की गति और दिशा जैसे विभिन्न मौसम संबंधी पैरामीटरों को मापते हैं। IMD उपग्रहों से भी डेटा प्राप्त करता है जो बादलों की गतिविधि, समुद्र के तापमान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

IMD वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम मॉडल का उपयोग करता है। ये मॉडल भौतिक नियमों और गणितीय समीकरणों पर आधारित होते हैं। इसके लिए सुपरकंप्यूटरों की आवश्यकता होती है जो बड़ी मात्रा में डेटा का संग्रह करते हैं। इसके बाद डेटा का विश्लेषण मौसम वैज्ञानिक करते हैं। IMD अन्य देशों के मौसम विज्ञान विभागों के साथ सहयोग करता है ताकि वैश्विक मौसम प्रणाली को बेहतर ढंग से समझा जा सके।एकत्रित डेटा का विश्लेषण मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है जो अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर मौसम के पैटर्न की पहचान करते हैं।कंप्यूटर मॉडल भी डेटा का विश्लेषण करते हैं और भविष्य के मौसम की स्थिति की भविष्यवाणी करते हैं।

मौसम पूर्वानुमान विभिन्न माध्यमों जैसे टेलीविजन, रेडियो, समाचार पत्रों और इंटरनेट के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाता है। कई मोबाइल ऐप्स भी मौसम की जानकारी प्रदान करते हैं।जो आपदा से सात दिन पहले ही पूर्वानुमान साझा करते हैं।  मौसम विभाग 24 घंटों में 20 सेमी से अधिक बारिश होने और भारी से अत्यधिक भारी बारिश के लिये रेड अलर्ट जारी करता है, बता रहे हैं भारत में मौसम का पूर्वानुमान एक जटिल प्रक्रिया है। इसका सही पता लगाने के लिए कई तरह के उपकरणों और तकनीक का उपयोग किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में पहले से सक्षम हुआ है। बता दें कि वायनाड हादसे पर बुधवार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दावा किया कि भूस्खलन से सात दिन पहले ही राज्य को चेतावनी दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को भी एक और चेतावनी दी गई थी। जबकि ऑरेंज अलर्ट का मतलब बहुत भारी बारिश 6 सेमी से 20 सेमी है। IMD लगातार अपने मॉडलों और तकनीकों में सुधार करने के लिए अनुसंधान करता रहता है। IMD अन्य देशों के मौसम विज्ञान विभागों के साथ सहयोग करता है ताकि वैश्विक मौसम प्रणाली को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

आखिर क्या है एयरफोर्स की मल्टी नेशनल जॉइंट एक्सरसाइज?

आज हम आपको एयरफोर्स की मल्टी नेशनल जॉइंट एक्सरसाइज के बारे में जानकारी देने वाले हैं! इंडियन एयरफोर्स अब तक की सबसे बड़ी मल्टी नेशनल जॉइंट एक्सरसाइज कराने जा रही है। यह एक्सरसाइज अगस्त में होगी और दो चरणों में होगी। इसमें अमेरिका, यूके, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस सहित 10 देश अपने एयरक्राफ्ट और एयर एसेस्ट्स लेकर शामिल हो रहे हैं। 17 देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होंगे जिन्होंने आने का कंफर्मेशन दे दिया है। एक और देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होगा। इस तरह इस एक्सरसाइज में भारत सहित 30 देश शामिल होंगे। इस एक्सरसाइज का नाम तरंग शक्ति रखा गया है। एयरफोर्स के वाइस चीफ एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि तरंग शक्ति सबसे बड़ी इंटरनेशनल एयर एक्सरसाइज होगी। भारत ने रूस सहित कुल 51 देशों को निमंत्रण भेजा था। उन्होंने कहा कि यह मौका एक दूसरे देश की एयरफोर्स के साथ बेस्ट प्रैक्टिस शेयर करने का होगा। एक्सरसाइज का पहला फेज सुलूर तमिलनाडु में होगा जो 6 अगस्त से 14 अगस्त तक होगा। पहले फेज में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और यूके की एयरफोर्स अपने एयरक्राफ्ट के साथ शामिल हो रही है। यही नहीं एक दूसरे के ऑपरेशंस पर भरोसा बढ़ेगा और भविष्य में कभी पीस कीपिंग या डिजास्टर रिलीफ में साथ काम करने की जरूरत पड़े तो उसका अनुभव रहेगा। उन्होंने कहा कि इस मल्टीनेशनल एक्सरसाइज से हम अपने देश की प्लानिंग और एक्जिक्यूशन की कैपेबिलिटी भी दिखाएंगे। दूसरा फेज 29 अगस्त से 14 सितंबर तक जोधपुर में होगा जिसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ग्रीस, सिंगापुर, यूएई और अमेरिका की एयरफोर्स अपने एयर एसेस्ट्स के साथ शामिल होगी।

एयर मार्शल सिंह ने कहा कि इस एक्सरसाइज का मकसद दुनिया को यह दिखाना है कि किस तरह भारत में डिफेंस इकोसिस्टम लगातार बढ़ रहा है, साथ ही भारत के आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को भी दिखाना है। हम दूसरे देशों को भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री की ताकत भी दिखाएंगे। इसके लिए एग्जिबिशन भी होगा जिसमें डीआरडीओ, भारत की एविएशन इंडस्ट्री, पीएसयू स्वदेशी क्षमता दिखाएंगे।इस एक्सरसाइज का मिलिट्री ऑब्जेक्टिव है कि हमारे इन मित्र देशों के साथ संबंध और मजबूत हों और हम एक दूसरे से बेहतर स्ट्रैटजी और टेक्टिक्स सीखें।पहले फेज में 32 विदेशी एयरक्राफ्ट शामिल होंगे जिसमें फाइटर एयरक्राफ्ट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी हैं। इसमें भारत के 40 एयरक्राफ्ट शामिल होगें जिसमें एलसीए तेजस, मिराज, सुखोई-30 फाइटर एयरक्राफ्ट भी हैं।

एक्सरसाइज के दूसरे फेज में दूसरे देशों के 27 फाइटर एयरक्राफ्ट, 2 टैंकर, 2 एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, 3 स्पेशल फोर्स के एयरक्राफ्ट भी शामिल होंगे। यह पहली बार होगा जब एयरफोर्स कई देशों की एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट को शामिल करते हुए एक साथ एक्सरसाइज को होस्ट करेगा।भारत के फाइटर एयरक्राफ्ट को मिलाकर कुल 40 फाइटर एयरक्राफ्ट होंगे, हेलिकॉप्टर होगा जिसमें प्रचंड, रूद्र, अपाचे भी शामिल होंगे। कुल मिलाकर दूसरे फेज में 75 एयरक्राफ्ट शामिल होंगे। एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि ये एक्सरसाइज किसी देश को ध्यान में रखकर नहीं की जा रही है बल्कि इससे अपने मित्र देशों के साथ इंटर ऑपरेबिलिटी (मिलकर काम करना) बढ़ेगी। एक दूसरे के ऑपरेशंस पर भरोसा बढ़ेगा और भविष्य में कभी पीस कीपिंग या डिजास्टर रिलीफ में साथ काम करने की जरूरत पड़े तो उसका अनुभव रहेगा। उन्होंने कहा कि इस मल्टीनेशनल एक्सरसाइज से हम अपने देश की प्लानिंग और एक्जिक्यूशन की कैपेबिलिटी भी दिखाएंगे।

इंडियन एयरफोर्स वैसे तो कई मल्टी नेशनल एक्सरसाइज का हिस्सा रहा है लेकिन एयरफोर्स ने आज तक कोई भी मल्टीनेशनल एक्सरसाइज एक्टिव पार्टिसिपेशन होस्ट नहीं की है। जानकार के लिए बता दे कि यह मौका एक दूसरे देश की एयरफोर्स के साथ बेस्ट प्रैक्टिस शेयर करने का होगा। एक्सरसाइज का पहला फेज सुलूर तमिलनाडु में होगा जो 6 अगस्त से 14 अगस्त तक होगा। बता दें कि इस एक्सरसाइज का मकसद दुनिया को यह दिखाना है कि किस तरह भारत में डिफेंस इकोसिस्टम लगातार बढ़ रहा है, साथ ही भारत के आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को भी दिखाना है। हम दूसरे देशों को भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री की ताकत भी दिखाएंगे। इसके लिए एग्जिबिशन भी होगा जिसमें डीआरडीओ, भारत की एविएशन इंडस्ट्री, पीएसयू स्वदेशी क्षमता दिखाएंगे। भारत के फाइटर एयरक्राफ्ट को मिलाकर कुल 40 फाइटर एयरक्राफ्ट होंगे, हेलिकॉप्टर होगा जिसमें प्रचंड, रूद्र, अपाचे भी शामिल होंगे। कुल मिलाकर दूसरे फेज में 75 एयरक्राफ्ट शामिल होंगे।पहले फेज में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और यूके की एयरफोर्स अपने एयरक्राफ्ट के साथ शामिल हो रही है। यह पहली बार होगा जब एयरफोर्स कई देशों की एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट को शामिल करते हुए एक साथ एक्सरसाइज को होस्ट करेगा।

अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्या बोली IAS पूजा खेड़कर?

हाल ही में IAS पूजा खेड़कर ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर बयान दिया है! दिल्ली की एक अदालत धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में आरोपी ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत अर्जी पर एक अगस्त को फैसला सुना सकती है। सुनवाई के दौरान खेडकर ने अदालत से कहा कि एक अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जंगला ने बुधवार को खेडकर द्वारा दायर अर्जी पर दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। खेडकर ने अपने वकील के माध्यम से दायर अर्जी में दावा किया कि उन्हें गिरफ्तारी का खतरा है। अभियोजन पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि उन्होंने व्यवस्था को धोखा दिया है। कार्यवाही के दौरान, खेडकर ने कहा कि वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्रिम जमानत चाहती हैं। खेडकर की ओर से पेश वकील बीना महादेवन ने अदालत से कहा, मैंने (खेडकर ने) यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है, इसीलिए मेरे खिलाफ यह सब हो रहा है। अभी जांच के बहुत प्रारंभिक चरण में हैं। हमें उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। अदालत ने जब पूछा कि यदि जांच प्रारंभिक चरण में है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दी में क्यों है, तो श्रीवास्तव ने कहा, यदि उन्हें अग्रिम जमानत मिल जाती है तो वह सहयोग नहीं करेंगी।यह सब जिलाधिकारी के इशारे पर हो रहा है, जिनके खिलाफ मैंने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। उस व्यक्ति ने मुझे एक निजी कमरे में आकर बैठने को कहा। मैंने कहा कि मैं एक योग्य आईएएस हूं और मैं ऐसा नहीं करूंगी। मैं अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्रिम जमानत का अनुरोध कर रही हूं।

महादेवन ने अदालत को बताया कि खेडकर ने कोई जानकारी नहीं छिपाई तथा उन्होंने परीक्षा में शामिल होने की संख्या गलत बताई है। उन्होंने कहा, मैंने पांच लिखा था, लेकिन मुझे 12 लिखना चाहिए था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैंने अलग कोटे के तहत उन (परीक्षा में बैठने के) प्रयासों का लाभ उठाया। यह सद्भावना से किया गया था या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। वकील ने यह भी कहा कि जांच के तहत खेडकर को कई अधिकारियों ने बुलाया है। उन्होंने कहा, आईएएस अकादमी मसूरी ने मुझे (खेडकर को) बुलाया है, पुणे आयुक्त ने मुझे बुलाया है। डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) ने भी मुझे नोटिस दिया है। मुझे इन सभी मंचों पर अपना बचाव करने के लिए अग्रिम जमानत की आवश्यकता है। वकील ने कहा कि इस मामले के बाद से मीडिया खेडकर को निशाना बना रहा है, लेकिन वह एक बार भी मीडिया के पास नहीं गईं क्योंकि उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है।

अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि खेडकर ने खामियों का फ़ायदा उठाया और अपना नाम बदल लिया। लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा, हम अभी जांच के बहुत प्रारंभिक चरण में हैं। हमें उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। अदालत ने जब पूछा कि यदि जांच प्रारंभिक चरण में है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दी में क्यों है, तो श्रीवास्तव ने कहा, यदि उन्हें अग्रिम जमानत मिल जाती है तो वह सहयोग नहीं करेंगी।

श्रीवास्तव ने कहा, ओबीसी कोटे में क्रीमी लेयर और नॉन-क्रीमी लेयर की अवधारणा है। उनके (खेडकर के) पिता ने 53 करोड़ रुपये की अपनी संपत्ति घोषित की है। खेडकर की ओर से पेश वकील बीना महादेवन ने अदालत से कहा, मैंने, खेडकर ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है, इसीलिए मेरे खिलाफ यह सब हो रहा है। यह सब जिलाधिकारी के इशारे पर हो रहा है, जिनके खिलाफ मैंने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। उस व्यक्ति ने मुझे एक निजी कमरे में आकर बैठने को कहा।सब जिलाधिकारी के इशारे पर हो रहा है, जिनके खिलाफ मैंने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। उस व्यक्ति ने मुझे एक निजी कमरे में आकर बैठने को कहा। मैंने कहा कि मैं एक योग्य आईएएस हूं और मैं ऐसा नहीं करूंगी। मैं अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्रिम जमानत का अनुरोध कर रही हूं।इससे बचने के लिए उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता का तलाक हो चुका है और वह अपनी मां के साथ रहती हैं। यह भी जांच का हिस्सा है। हम मेडिकल दस्तावेजों की भी जांच करेंगे।

केंद्र सरकार चाहती है कि राज्यपाल अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं.

भागदौड़ से दूर रहें. नरेंद्र मोदी सरकार राज्यपालों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाते देखना चाहती है। राष्ट्रपति के साथ राज्यपालों का दो दिवसीय सम्मेलन आज से राष्ट्रपति भवन में शुरू हो गया है। केंद्र चाहता है कि राज्यपाल ‘जनता के राज्यपाल’ बनें। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से सीधे संवाद करें। केंद्र राज्यपालों को इस बात के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहता है कि अगर केंद्र और राज्यों के बीच किसी नीतिगत मुद्दे पर कोई विवाद हो तो वे सोशल मीडिया पर खुलकर अपने विचार व्यक्त करें।

पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु जैसे विपक्ष शासित राज्यों ने बार-बार मोदी सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपालों की भूमिका निभाई है। राज्य विधानसभा से पारित बिल के राज्यपाल के पास अटके रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने राज्यपालों को संदेश दिया है कि उन्हें याद रखना चाहिए कि वे जनता द्वारा चुने गये राष्ट्र प्रमुख नहीं हैं.

आज राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यपाल को केंद्र और राज्यों के बीच सेतु का काम करना चाहिए. लेकिन राज्यपालों का ‘जनता का राज्यपाल’ बनना सम्मेलन के एजेंडे में है। कहा गया है कि राज्यपालों को मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए. राज्यपाल को अमजंता से जुड़े मामलों पर उचित रुख अपनाना चाहिए. जरूरत पड़े तो राज्य सरकार पर दबाव बनाया जाये. हालांकि, सरकारी सूत्रों का दावा है कि सिर्फ विपक्ष शासित राज्यों में ही नहीं बल्कि बीजेपी शासित राज्यों में भी यही बात कही जा रही है.

सम्मेलन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस शामिल हुए। राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और उनके बीच टकराव के कारण सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा. सम्मेलन की शुरुआत में अध्यक्ष द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने राज्यपालों से राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में इस संबंध में सक्रिय होने को कहा। उन्होंने इस पर भी विचार करने को कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों का राज्य सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने में राज्यपाल क्या भूमिका निभा सकते हैं. सम्मेलन में तीन नए कानूनों, भारतीय न्याय संहिता, नागरिक सुरक्षा संहिता और साक्ष्य अधिनियम के कार्यान्वयन पर चर्चा होगी।

मोदी सरकार ने पिछड़े जिलों के लिए ‘आकांक्षी जिला’ योजना के साथ-साथ चीन की सीमा से लगे गांवों को विकसित करने के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना शुरू की। केंद्र चाहता है कि राज्यपाल नियमित तौर पर वहां का दौरा करें. आज राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यपालों से इस संबंध में सक्रिय रहने को कहा. देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के संदेश के साथ नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल के बजट में सिर्फ उनके लिए लघु बचत योजनाएं शुरू करने की घोषणा की थी. लेकिन सूत्रों के मुताबिक काफी प्रचार-प्रसार के बावजूद अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली. नतीजतन, केंद्र व्यावहारिक तौर पर इस परियोजना को बंद करने की राह पर चल रहा है.

यह महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र पिछले साल अप्रैल में लॉन्च किया गया था। अवधि दो वर्ष है. एक बार में 2 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है. ब्याज दर 7.5% प्रति वर्ष है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह कुछ टैक्स छूट भी प्रदान करता है। हालाँकि, परियोजना को प्रतिक्रिया इतनी कम है कि इसे रोकने का कोई रास्ता नहीं है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक सूत्र के मुताबिक, अगले साल मार्च में दो साल की अवधि पूरी करने के बाद बचत प्रमाणपत्र चालू नहीं रहेगा। लगभग वही निर्णय अंतिम होता है. नतीजतन, सवाल उठता है कि कभी महिलाओं को बचत के लिए प्रोत्साहित करने की परियोजना को बढ़ावा देने वाली भाजपा इस स्थिति में क्यों आई है? इसे दो साल बाद ही क्यों देना होगा? देश की महिलाओं को जवाब क्यों नहीं दिया?

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि महिला बचत प्रमाणपत्र समेत कई छोटी बचत योजनाओं से जितना निवेश आने की उम्मीद थी, उतना नहीं आया है। इसीलिए सरकार ने चालू साल के बजट में इस सेक्टर में फंड जुटाने का लक्ष्य करीब 50 हजार करोड़ कम कर दिया है. पिछले फरवरी में अंतरिम बजट में अनुमान लगाया गया था कि लघु बचत क्षेत्र में केंद्र को कुल 4.67 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे. पिछले महीने पूर्ण बजट में इसे घटाकर 4.20 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था. पिछले (2023-24) वित्तीय वर्ष में इस क्षेत्र में सरकार का पूंजी प्रवाह लक्ष्य से 20 हजार करोड़ रुपये कम था।

निवेश सलाहकार नीलांजन डे ने कहा, ‘आजकल महिलाएं म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में ज्यादा निवेश कर रही हैं। क्योंकि जोखिम शामिल होने के बावजूद रिटर्न की दर बहुत अधिक है। तो कुल मिलाकर, इस प्रकार के ऋण-आधारित निवेश माध्यम के प्रति उत्साह कम होने की प्रवृत्ति है।” उनके अनुसार, कई महिलाएं अब जोखिम नहीं उठाती हैं। इसलिए वे उस 2 लाख रुपये को म्यूचुअल फंड या शेयरों में डालकर अधिक रिटर्न पाने की कोशिश कर रहे हैं। यह जानते हुए भी कि जोखिम है कि उन आय की गारंटी नहीं है। संबंधित हलकों के एक वर्ग के अनुसार, मोदी सरकार के कुछ नेता और मंत्री अब शेयर फंड में निवेश करने का संदेश देते हुए सुने जा सकते हैं। ऊपर से बैंक जमा पर ब्याज थोड़ा बढ़ गया है. यहां तक ​​कि कुछ छोटी बचत से भी अवधि के अंत में अधिक पैसा मिल सकता है। कुल मिलाकर, महिलाओं की बचत दरें कई महिलाओं के लिए आकर्षक नहीं बन पाई हैं। हालाँकि, इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई।

टीएमसी नेता ममता बाला ठाकुर ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

नए नागरिकता कानून (सीएए) आने के बाद से वह लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को राज्यसभा में शून्यकाल में इस बारे में बात करते हुए तृणमूल सांसद ममताबाला ठाकुर ने पेरिस ओलंपिक का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, देश के 117 प्रतियोगी जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर देश के लिए लड़ रहे हैं. उस उदाहरण को ध्यान में रखते हुए भारतीय नागरिकों को धर्म, भाषा, जाति के आधार पर बांटने की राजनीति बिल्कुल गलत है। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि सीएए, नागरिकों से पहचान पत्र दिखाने को कहने की कोशिश भी सही नहीं है. हालांकि, बीजेपी ने उनके इस रुख की कड़े शब्दों में आलोचना की है.

मतुआओं का एक वर्ग हमेशा से नागरिकता कानून की मांग करता रहा है. बीजेपी का केंद्रीय और राज्य नेतृत्व भी इस कानून के पक्ष में है. हाल ही में केंद्र ने लोकसभा चुनाव से पहले इस कानून को लाने का आदेश दिया था. बनगांव और राणाघाट लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों की बड़ी जीत को देखते हुए मटुआरा ने इस कानून के लिए प्रारंभिक समर्थन व्यक्त किया है। हालाँकि, तृणमूल नेता ममता बनर्जी हमेशा कहती रही हैं कि जो लोग इतने लंबे समय से मतदान का अधिकार लगाकर सरकार चुन रहे हैं, उन्हें अलग से यह नागरिकता देने की कोई ज़रूरत नहीं है। उन्हें यह भी डर है कि जो लोग कागजात नहीं दिखा पाएंगे, वे अपनी नागरिकता खो सकते हैं।

इस दिन, ममताबाला टैगोर ने भी उसी स्वर में कहा, “मतुआओं ने हमेशा बिना शर्त नागरिकता की मांग की है।” सीएए के नाम पर केंद्र की भाजपा सरकार मतुआओं को गुलाम बनाने की कोशिश कर रही है। वे इसे ए, बी और सी श्रेणियों में बांटकर नागरिकता देने की बात कर रहे हैं.” भारतीयों के संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”भारतीय विशेष हैं, कला, भाषा, धर्म की विविधता में एकता का स्वर हमें समृद्ध करता है. वहीं, ममता बाला ने सीएए की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा, ”नागरिकों को नागरिकता साबित करने के लिए अवास्तविक, भ्रामक कागज दिखाना.” मैं ऐसा कहने के पक्ष में नहीं हूं.

मतुआ समाज के प्रतिनिधि नागरिक काबियाल असीम सरकार ने उनके इस रुख की आलोचना की. फिलहाल वह हरिनघाटा से बीजेपी विधायक हैं. उन्होंने कहा, ”मैं ममताबाला टैगोर से आग्रह करूंगा कि वे द्वंद्व की राजनीति बंद करें. क्योंकि, उनकी पार्टी के सर्वोच्च नेता का कहना है कि जिनके पास आधार कार्ड, वोटर कार्ड है वही देश के नागरिक हैं. वहीं, ममता बाला का कहना है कि बिना शर्त नागरिकता दी जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे हड़ताल पर चले जायेंगे. तृणमूल की इन दोनों में से कौन सी स्थिति सही है, पहले उन्हें फैसला करने दीजिए।” भाजपा के बंगाण संगठनात्मक जिला अध्यक्ष देवदास मंडल ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि तृणमूल की राज्यसभा सांसद ममता ठाकुर की बेटी मधुपर्णा को अवैध रूप से संविदा डेटा-एंट्री के रूप में अस्थायी नौकरी पर नियुक्त किया गया था। राजनीतिक प्रभाव के माध्यम से हरिचंद गुरुचंद विश्वविद्यालय में संचालक रहे हैं विश्वविद्यालय में लंबे समय से कुलपति नहीं है। देवदास ने आरोप लगाया कि कार्यवाहक रजिस्ट्रार ने नियमों का उल्लंघन कर नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं. कोई भर्ती अधिसूचना जारी नहीं की गई या कोई परीक्षा आयोजित नहीं की गई।

ममता ने पलटवार करते हुए कहा, ”मेरी बेटी विश्वविद्यालय के छात्रों के हित में मुफ्त में काम कर रही है.” उस विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार आनंदी बागची ने कहा, ”मैं सारा काम नहीं रोक सकता क्योंकि वहां कोई कुलपति नहीं है. मैंने यह नियुक्ति उन छात्रों के बारे में सोचकर की है जो हताश हैं.” ममताबाला टैगोर ने शांतनु टैगोर का नामांकन रद्द करने की मांग की. ऐसा दावा तृणमूल के राज्यसभा सांसद ने शनिवार रात बनगांव में एक संवाददाता सम्मेलन में किया. बनगांव सांगठनिक जिला तृणमूल कार्यालय में बैठीं ममता बाला ने कहा, ”नामांकन पत्र जमा करते समय सही जानकारी दी जानी चाहिए. लेकिन हमें पता चला है कि बीजेपी उम्मीदवार शांतनु ने बहुत सारी गलत और असत्य जानकारी दी है. हम इस मामले को लेकर पहले ही चुनाव आयोग से संपर्क कर चुके हैं।’ कौशिक मलिक नाम का एक व्यक्ति पहले ही शांतनु की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए कई दस्तावेज आयोग को सौंप चुका है। उन्होंने आगे कहा, ”शांतनु ठाकुर के नामांकन में उनकी आय शून्य दिखाई गई है. लेकिन उस शांतनुई ने फिर से चार लाख रुपये इनकम टैक्स जमा कर दिया. यदि हां, तो जिसकी कोई आय नहीं है, उसने आयकर कैसे जमा किया?”

सीमा पर घुसपैठ के बीच केंद्र ने बीएसएफ डीजी और स्पेशल डीजी को हटाया.

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केंद्र ने बीएसएफ प्रमुख और उपप्रमुख को हटाया, बार-बार आतंकी घुसपैठ की ‘सजा’? नितिन अग्रवाल बीएसएफ के डीजी थे. उन्हें पिछले साल जून में इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें समय से पहले हटा दिया गया. बीएसएफ प्रमुख के खिलाफ ऐसी कार्रवाई पहले नहीं हुई है. केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल या बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) और उनके उप विशेष महानिदेशक (पश्चिम) को हटा दिया। विशेषज्ञ इस कदम को अभूतपूर्व मान रहे हैं. क्योंकि, पिछले 10 सालों में भी सरकार किसी भी बीएसएफ प्रमुख के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करती नजर नहीं आई है. कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की बार-बार घुसपैठ और घाटी में अशांति के कारण हो सकता है।

नितिन अग्रवाल बीएसएफ के डीजी थे. उन्हें पिछले साल जून में इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें समय से पहले हटा कर राज्य स्तरीय कैडर में वापस भेज दिया गया. वहीं वाईबी खुरानिया इतने लंबे समय तक स्पेशल डीजी (पश्चिम) के पद पर रहे. उन्हें भी राज्य में वापस भेज दिया गया. नितिन 1989 केरल कैडर के अधिकारी थे. खुरानिया 1990 के ओडिशा कैडर में थे. दोनों को कार्यकाल खत्म होने से पहले ही पद से हटा दिया गया था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को दो अलग-अलग सर्कुलर में दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश को जल्द लागू करने को भी कहा गया है.

बीएसएफ के दो नेताओं पर अचानक कार्रवाई क्यों? कई लोग कहते हैं कि इसके पीछे कश्मीर में उनकी नाकामी है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में तीसरी बार बीजेपी के सत्ता में आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे कश्मीर में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. केंद्र ने यह भी कहा कि वहां आतंकवाद को सख्ती से कुचला जाएगा. लेकिन नई सरकार के गठन के बाद से कश्मीर में बार-बार शांति भंग हो रही है. जम्मू में बस हमले में कई तीर्थयात्रियों की जान चली गई. कश्मीर सीमा पर बार-बार घुसपैठ और सेना के जवानों के साथ गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं। पिछले दो महीनों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं. नाम न छापने की शर्त पर बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा, ”बल पर उनकी पकड़ मजबूत नहीं थी। बीएसएफ की अन्य शाखाओं के साथ भी समझ की कमी थी. ऐसा प्रतीत होता है कि इस निष्कासन का यही कारण है। यह कदम यह संदेश भी देता है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को कितना महत्व देती है।

कश्मीर ने समय-समय पर विभिन्न संघर्षों, आतंकवादी घुसपैठ और आतंकवादी हमलों का अनुभव किया है। हालांकि, कोई सोच भी नहीं सकता कि बीएसएफ अधिकारियों के खिलाफ पहले भी ऐसी कार्रवाई हुई होगी. 2019 में पुलवामा हमले के दौरान भी केंद्र ने ऐसा कुछ नहीं किया. आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन के कारण बांग्लादेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले भारतीय छात्र देश वापस आ रहे हैं। उनमें से कई पश्चिम बंगाल की विभिन्न सीमाओं के माध्यम से भारत में प्रवेश कर रहे हैं। भारत के साथ-साथ नेपाल, भूटान और यहां तक ​​कि मालदीव से भी छात्र इस देश में आ रहे हैं। नेपाल और भूटान के छात्र फिर भूमि सीमा पार करके अपने गृह देशों में जाएंगे। ऐसी खबर है कि मालदीव के छात्र भी घर लौट सकते हैं। ये छात्र सुरक्षित भारत आ सकें और अपने स्थानों पर जा सकें, इसके लिए बीएसएफ ने मदद का हाथ बढ़ाया है. बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने उत्तर 24 परगना के पेट्रापोल, घोजाडांगा, नादिया के गेदे और मालदा के महदीपुर में विशेष हेल्प डेस्क खोले हैं। इस दिन पहले एकुष के मंच से, बाद में अपने एक्स हैंडल पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि संबंधित जिला प्रशासन सीमा पार भारत आने वाले छात्रों समेत छात्रों को हर संभव सहायता प्रदान करेगा. उदाहरण के तौर पर, ममता ने कहा कि लगभग 300 छात्र बालुरघाट के पास हिली सीमा के माध्यम से भारत में प्रवेश कर गए। उनमें से 35 को कुछ सहायता की आवश्यकता थी, जिसकी व्यवस्था की गई।

भारत सरकार ने संकटग्रस्त बांग्लादेश से भारतीय छात्रों को वापस लाने की पहल की है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भूटान और नेपाल के अनुरोध पर इन दोनों देशों के छात्रों को भी भारत आने में मदद की जा रही है. बीएसएफ के मुताबिक, 18 जुलाई से रविवार दोपहर तक बांग्लादेश से कुल 1,208 छात्र उनकी मदद से इन चार सीमावर्ती इलाकों से भारत में दाखिल हुए. इनमें 1045 भारतीय, 152 नेपाली, 4 भूटानी और 7 बांग्लादेशी नागरिक हैं। इसके अलावा कई अन्य छात्र उत्तर बंगाल की शेष सीमाओं से भारत में दाखिल हुए.

भूस्खलन प्रभावित वायनाड में अब तक 300 से अधिक लोगों की मौत, बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी.

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क्या जीवन की धड़कन अब भी दबी हुई है? वायनाड में जीवन की तलाश वायनाड में विशेष तकनीक से लैस रडार के ढहने के बाद पांचवें दिन का बचाव कार्य शुरू हो गया है. सरकार के मुताबिक अब तक तीन सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों अभी भी लापता हैं. यह पतन मंगलवार को हुआ। आज शनिवार है. चार दिन बीत गए. ढहे वेनाडे में बचाव कार्य अभी भी जारी है. मरने वालों की संख्या 300 से ज्यादा हो गई है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मरने वालों की आधिकारिक संख्या 308 है। अपुष्ट सूत्रों ने मरने वालों की संख्या अधिक बताई है, कम से कम 340। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं. क्या जिंदगी की धड़कन अभी भी मिट्टी के ढेर में दबी हुई है? राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया दल के साथ-साथ सेना ने भी बचाव अभियान शुरू किया है।

शुक्रवार को मलबे से चार लोगों को जिंदा बचाया गया. कई लोग अभी भी लापता हैं. जैसे-जैसे समय बीत रहा है, जीवित लोगों को बचाने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है। सुरक्षा बल के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि यह पता लगाने के लिए अत्याधुनिक रडार का इस्तेमाल किया जाएगा कि क्या मिट्टी के ढेर के नीचे अभी भी कोई दबा हुआ है.

शनिवार सुबह वायुसेना के अधिकारियों ने वेनार हादसे से प्रभावित इलाके का दौरा किया. इसके अलावा सेना की रेस्क्यू टीम में शामिल लेफ्टिनेंट कर्नल विकास राणा ने बताया कि अलग-अलग रेस्क्यू टीमें बनाकर कई प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”शनिवार के साथ-साथ शुक्रवार को भी बचाव कार्य चलाने की योजना है. प्रभावित क्षेत्र को छोटे-छोटे क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। उन स्थानों पर अलग-अलग बचाव दल पहले ही भेजे जा चुके हैं।” उन्होंने कहा कि प्रत्येक बचाव दल के साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित सेना के जवानों को भी भेजा गया है. शनिवार सुबह से ही कई स्वयंसेवी संगठन वेनारा के बचाव अभियान में सेना के साथ शामिल हो गये हैं. बचाव कार्यों में विशेषज्ञता रखने वाले कई गैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ता भी वेनारा के ढहे हुए क्षेत्र में पहुंच गए हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, खबर, सेना, आपदा प्रबंधन टीम और पुलिस के नेतृत्व में इस बचाव अभियान में 1,300 से अधिक बचावकर्मी तैनात किए गए हैं. सेना के जवानों ने गांव में बचाव अभियान चलाने के लिए वेनाड के पुंचिरीमट्टम इलाके में एक अस्थायी आश्रय स्थापित किया है।

एक नंगा बच्चा जिसके सीने और पीठ पर कपड़ा बंधा हुआ है। आंखों में डर की झलक साफ है. बारिश में पूरा शरीर भीग गया है. डर के मारे सहमा हुआ है. केरल के वायनाड में ‘मौत का जुलूस’ चल रहा है, ऐसे में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है.

यह स्थान अट्टामाला का पहाड़ी घना जंगल है। एक वन अधिकारी नग्न बच्चे को अपनी छाती से लगाए हुए है। नाम है हरीश. हरीश और उनकी टीम ने दुर्गम पहाड़ी रास्ते को पार कर घने जंगल से बच्चे समेत कुल छह लोगों को बचाया. कलपेट्टा रेंज वन अधिकारी हरीश। ढहने के बाद, चार वन अधिकारी हरीश के नेतृत्व में अट्टमाला के पहाड़ी इलाके में तलाशी अभियान पर निकले।

पनिया समुदाय के कुछ परिवार अट्टामाला पहाड़ियों के जंगलों में रहते थे। वन अधिकारियों को इसकी जानकारी थी. वे आदिवासी समुदाय से हैं. यह आदिवासी समुदाय इलाके में ज्यादा भ्रमण नहीं करता है. परिणामस्वरूप, हरिशेरा ने गहरे जंगल में एक खोज अभियान चलाया ताकि यह पता लगाया जा सके कि ढहने के बाद वे कैसे हैं, क्या वे बिल्कुल जीवित हैं। मूसलाधार बारिश, बीच-बीच में अगम्य पहाड़ी रास्ते, नीचे गहरी खाइयाँ – सभी बाधाओं को पार करते हुए वे खोज रहे थे। हरीश ने बताया कि उस वक्त उन्होंने एक महिला और उसके साथ दो साल के बच्चे को देखा. झिझकते हुए जंगल में भटकता रहा। महिला की आंखों में डर के भाव साफ झलक रहे थे. जंगल में महिला और बच्चे को देखकर हरीश सोचता है कि उनके साथ कोई और भी होगा। हरीश ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, स्थानीय भाषा में महिला से बात करने पर हरीश को पता चला कि महिला का पति और उसके तीन बच्चे एक पहाड़ी गुफा में फंसे हुए हैं। अत्यंत दुर्गम. साढ़े चार घंटे पहाड़ी रास्ता तय कर गुफा तक पहुंचे। हर पल मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं खाई में फिसल जाऊंगा। मैं जोखिम उठाते हुए धीरे-धीरे गुफा तक पहुंच गया। गुफा में महिला का पति तीन बच्चों के साथ लेटा हुआ था।” बचाए गए बच्चों में चार, तीन और एक साल के बच्चे थे. हरीश ने कहा, “ऐसा लग रहा था जैसे वे पिछले कुछ दिनों से भूखे थे।”

हरीश ने कहा, “बच्चे बेहद थके हुए थे। हम उन्हें अपने पास मौजूद खाना खिलाते हैं।’ बच्चों को अपने साथ लाओ. बहुत समझाने के बाद उनके माता-पिता हमारे साथ आने को तैयार हुए। मैंने बच्चों को कपड़े से अपने शरीर पर बांध लिया. उसके बाद, मैं फिर से पहाड़ी रास्ते पर लौट आया।” आदिवासी परिवार को अट्टमाला के एक स्थानीय शिविर में रखा गया है। उनके लिए भोजन और वस्त्र की व्यवस्था की गई है।

हरीश को सीने से लगाए एक बच्चे की तस्वीर वायरल हो गई है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने तस्वीर जारी करने के लिए हरीश और उनकी टीम की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स (पूर्व-ट्विटर) हैंडल पर लिखा, “वेना में, हमारे बहादुर वन अधिकारियों ने चार घंटे तक पहाड़ी रास्ता पार करने के बाद एक आदिवासी झुग्गी से छह लोगों की जान बचाई। इस काम के लिए वन अधिकारियों को बधाई।”

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वेनाड हादसे में अब तक 308 लोगों की मौत हो चुकी है। हालाँकि, अपुष्ट सूत्रों ने मरने वालों की संख्या 350 से अधिक बताई है। वेनारा के चार गांव पिछले सोमवार देर रात ढह गए। पतन में चुरलमाला, मुंडक्कई, अट्टमाला और नुलपुझा नष्ट हो गए।

भारत की मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में तीसरा पदक जीतने से चूक गई.

पेरिस में पदकों की हैट्रिक, ओलंपिक में आखिरी इवेंट में चौथे स्थान पर रहे मनु वेकर, पेरिस ओलंपिक में तीसरा पदक जीतने में नाकाम रहे। 22 वर्षीय निशानेबाज महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहीं। नया इतिहास नहीं बना सके. मनु वेकर पेरिस ओलंपिक में तीसरा पदक जीतने में असफल रहे। 22 वर्षीय निशानेबाज महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहीं। नया इतिहास नहीं बना सके. अच्छी शुरुआत के बावजूद आठवीं सीरीज में असफलता के कारण मनु पदक से चूक गईं.

आठवें राउंड के बाद मनु और हंगरी की वेरोनिका मेजर दोनों के 28 अंक थे। टाईब्रेकर में मनु जीत नहीं सकीं. भारतीय निशानेबाज पांच में से तीन शॉट में लक्ष्य को भेदने में नाकाम रहे। वह चौथे स्थान पर रहे. वेरोनिका ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता।

इस ओलंपिक से पहले निशानेबाजी में भारत के पदकों की संख्या चार थी. और भारत को इस ओलिंपिक में सिर्फ निशानेबाजी से तीन मेडल मिले हैं. शनिवार को पदकों की हैट्रिक से आगे मनु, हॉकी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया, पदक से एक कदम दूर
मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में तीसरे पदक की ओर अग्रसर। वह महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचीं। हॉकी और बैडमिंटन में भी भारत ने सफलता हासिल की है. तीरंदाजी और जूडो में निराशा हाथ लगी.
मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में तीसरे पदक की ओर अग्रसर। वह महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचीं। जहां वह क्वालीफाइंग राउंड में दूसरे स्थान पर रहीं, वहीं भारत की एक अन्य प्रतियोगी ईशा सिंह 18वें स्थान पर रहीं। हॉकी और बैडमिंटन में भी भारत ने सफलता हासिल की है. तीरंदाजी और जूडो में निराशा हाथ लगी.

शूटिंग

मनु क्वालीफाइंग राउंड में दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचीं। उन्होंने 600 में से 590 अंक हासिल किए। प्रीसीजन राउंड के बाद मनु तीसरे स्थान पर थीं। उनका स्कोर 300 में से 294 था. रैपिड राउंड के बाद वह दूसरे स्थान पर आ गए। इस राउंड में उन्होंने 296 का स्कोर किया। हंगरी की वेरोनिका मेजर ने 592 अंक हासिल किये और कुल मिलाकर प्रथम स्थान पर रहीं। उन्होंने ओलंपिक रिकॉर्ड को छू लिया. ईरान की हनियेह रोस्तामियान तीसरे स्थान पर रहीं। उनका कुल स्कोर 588 है.

भारत की एक और प्रतियोगी ईशा फाइनल में जगह नहीं बना सकीं। वह क्वालीफाइंग राउंड में 581 के कुल स्कोर के साथ 18वें स्थान पर रहे। ईशा ने शुरू से ही लगातार अंक गंवाए। स्वाभाविक रूप से वह पिछड़ गये। अंत में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद इसका कोई फायदा नहीं मिला।

मनु ने इससे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इस साल के ओलंपिक में यह उनका और भारत का पहला पदक था। इसके बाद उन्होंने सरबजोत सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल की मिश्रित टीम स्पर्धा में भी कांस्य पदक जीता। यह पेरिस ओलंपिक में उनका और भारत का दूसरा पदक था। मनु शनिवार को 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में पदक जीतकर भारतीय खेलों में एक नया इतिहास रचेंगी। वह एक ही ओलंपिक में तीन पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे।

ऑस्ट्रेलिया हॉकी में मारा गया

ओलिंपिक हॉकी में भारतीय टीम की बड़ी जीत. भारत ने 52 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को हराया. हरमनप्रीत सिंघेरा ने शुक्रवार को आखिरी पूल मैच 3-2 से जीता। पिछले टोक्यो ओलंपिक के कांस्य विजेता पहले ही क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम शुरू से ही आक्रामक मूड में रही. अभिषेक ने 12 मिनट में भारत को बढ़त दिला दी. एक मिनट बाद कप्तान हरमनप्रीत ने पेनल्टी कॉर्नर से अंतर बढ़ा दिया. भारतीय टीम ने पहला क्वार्टर 2-0 की बढ़त के साथ समाप्त किया। दूसरे क्वार्टर में आक्रामक तीव्रता बढ़ जाती है। क्रेग थॉमस ने 25 मिनट में अंतर कम कर दिया. भारतीय टीम ने दूसरे क्वार्टर का अंत 2-1 की बढ़त के साथ किया. तीसरे क्वार्टर की शुरुआत में हरमनप्रीत ने फिर गोल किया. 32वें मिनट में कप्तान ने टीम को 3-1 की बढ़त दिला दी. इस गोल से भारत की जीत पक्की हो गई. 55वें मिनट में गोवर्स ब्लेक ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतर कम किया. पिछले ओलंपिक रजत पदक विजेता मैच के अंत में स्कोर करने के लिए बेताब थे। लेकिन यह काम नहीं किया. अंत में भारतीय टीम 3-2 से जीतकर मैदान से बाहर गई. 1972 ओलिंपिक के बाद पहली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत हासिल की।

पदक के सामने लक्ष्य

पेरिस ओलंपिक में भारत एक और पदक की दहलीज पर. लक्ष्य सेन शुक्रवार को बैडमिंटन के सेमीफाइनल में पहुंच गए। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे के चाउ टीएन चेन को 19-21, 21-15, 21-12 से हराया। सेमीफाइनल में जीत रजत सुनिश्चित करेगी। अगर वह हार भी गए तो कांस्य पदक के मुकाबले में बने रहेंगे. वह ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले  खिलाड़ी बने।

अग्निवीर के ऐतिहासिक मुद्दे पर क्या बोले पीएम मोदी?

अग्निवीर के ऐतिहासिक मुद्दे पर पीएम मोदी ने अपना भी बयान दे दिया है! लोकसभा चुनाव से लेकर सरकार बनने के बीच विपक्ष लगातार अग्निवीर के मुद्दे पर सरकार को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश में जुटा है। 18वीं लोकसभा के गठन के बाद संसद के पहले सत्र में कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर आक्रामक नजर आए। विपक्षी दल समेत एनडीए के प्रमुख घटक जनता दल यूनाइटेड ने भी अग्निवीर योजना में संशोधन का समर्थन किया था। विपक्ष के लगातार दबाव के बीच पीएम मोदी ने इस संबंध में सरकार का रुख साफ कर दिया। पीएम में करगिल विजय दिवस के मौके पर अग्निवीर को लेकर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। पीएम मोदी के रुख से यह साफ हो गया कि राहुल गांधी की मंशा तो पूरी नहीं होने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अग्निपथ योजना को सेना की तरफ से किए गए आवश्यक सुधारों का एक उदाहरण बताया। पीएम ने विपक्ष पर सशस्त्र बलों में औसत आयु वर्ग को युवा रखने के उद्देश्य से शुरु की गई इस भर्ती प्रक्रिया पर राजनीति करने का आरोप लगाया। मोदी ने करगिल युद्ध में जीत की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित करगिल विजय दिवस पर अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि पेंशन के पैसे बचाने के लिए अग्निपथ योजना शुरू की गई थी।

पीएम मोदी ने कहा कि वे अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य हमारे सैनिकों को युवा और युद्ध के लिए तैयार करना है। वे कह रहे हैं कि अग्निवीर योजना नरेंद्र मोदी द्वारा पेंशन बचाने के लिए शुरू की गई है। पीएम ने कहा कि ऐसे लोगों की सोच से भ्रम होता है। उन्होंने कहा कि जरा कोई मुझे बताए आज मोदी के शासनकाल में जो भर्ती होगा क्या आज ही उनको पेंशन देना है क्या उनको पेंशन देना तो 30 साल बाद आएगी, मोदी उस समय 105 साल का होगा उसके लिए मोदी आज गाली खाएगा। क्या तर्क दे रहे हैं।

पीएम मोदी के बयान से एक चीज तो साफ है कि कांग्रेस पार्टी और उनके नेता राहुल गांधी की अग्निपथ को खत्म किए जाने की मांग तो पूरी नहीं होगी। हालांकि, कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सरकार में आने पर अग्निपथ योजना को खत्म करने का वादा किया था। सरकार के गठन के बाद भी राहुल गांधी लगातार यह बात कह रहे हैं कि सत्ता में आने पर पर कांग्रेस सेना में भर्ती की इस स्कीम को खत्म कर देगी। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर सरासर झूठ बोल रहे हैं। इस योजना को लेकर युवाओं में रोष है और कांग्रेस इस मांग पर कायम है कि इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

बीजेपी शासित राज्य अग्निवीरों को लिए एक के बाद आरक्षण की घोषणा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि देश की सेवा करके लौटने वाले अग्निवीरों को यूपी पुलिस और पीएएसी बल में वेटेज दिया जाएगा। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी इस योजना का समर्थन करते हुए राज्य की नौकरियों में अग्निवीरों को नौकरी में आरक्षण देने के निर्णय की घोषणा की है। हरियाणा सरकार ने कहा है कि राज्य कांस्टेबल, माइनिंग गार्ड, वन रक्षक, जेल वार्डन और एसपीओ के पदों पर सीधी भर्ती में अग्निवीरों को 10% आरक्षण प्रदान करेगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनकी सरकार अग्निवीरों को उनकी सेवा समाप्ति के बाद पुलिस और सशस्त्र बलों की भर्ती में आरक्षण प्रदान करेगी। कारगिल दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा कि हम सरकारी सेवाओं में उन्हें आरक्षण देने के लिए प्रावधान करेंगे और एक अधिनियम लाएंगे। हम विभिन्न सरकारी विभागों में उनके कौशल और अनुशासन का उपयोग करेंगे।

सरकार ने सेना के तीनों अंगों में औसत आयु वर्ग को युवा रखने के उद्देश्य से 2022 में ‘अग्निपथ भर्ती योजना’ शुरू की थी। इस योजना में साढ़े 17 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को चार साल की अवधि के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती करने का प्रावधान है। इनमें से 25 प्रतिशत को अगले 15 वर्षों तक बनाये रखने का प्रावधान है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस योजना को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि चार साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों का क्या होगा। कांग्रेस का कहना है कि अग्निवीर को कोई पेंशन नहीं मिलती, कोई ग्रैच्यूटी नहीं मिलती, परिवार को पेंशन नहीं मिलती, बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई शिक्षा भत्ता नहीं मिलता।

अग्नि वीर के मुद्दे पर क्या बोले विपक्ष के अखिलेश यादव ?

हाल ही में विपक्ष के अखिलेश यादव ने अग्नि वीर के मुद्दे पर एक बयान दे दिया है! अग्निवीर योजना का मुद्दा एक बार फिर संसद में उठा। समाजवादी पार्टी के मुखिया और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि अग्निवीर वाली जो नौकरी है, कोई भी नौजवान जो फौज के लिए तैयारी करता है वो कभी स्वीकार नहीं कर सकता। जब पहली बार ये स्कीम आई थी उस समय बड़े बड़े उद्योगपतियों से ट्वीट कराया गया था कि इस योजना से अच्छी स्कीम नहीं है। अग्निवीरों को हम अपने यहां नौकरी दे देंगे। सरकार में बैठे लोगों को ये बात याद होगी क्योंकि सरकार खुद स्वीकार करती है कि ये स्कीम ठीक नहीं है। इसीलिए वो अपनी-अपनी सरकारों से कहते हैं कि अग्निवीर वाले जो लौटकर आएंगे उन्हें कोटा दीजिए, आप नौकरी दीजिए। अखिलेश यादव ने जैसे ही अग्निवीर योजना पर सवाल उठाए तो बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने रिएक्ट किया। सपा मुखिया ने कहा कि अगर आप ये सब कह रहे तो आप खड़े होकर कह दीजिए कि अग्निवीर अच्छी योजना है। इस पर अनुराग ठाकुर खड़े हो गए और अपनी बात रखी। हमीरपुर सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि मैं इस सभा में खड़े होकर कहता हूं मैं उस राज्य हिमाचल प्रदेश से हूं जिसने पहला परमवीर मेजर सोमनाथ शर्मा दिए। कारगिल के युद्ध में सबसे ज्यादा शहीद होने वाले हिमाचल प्रदेश के वीर नौजवान थे।

अनुराग ठाकुर ने आगे कहा कि चार परमवीर विजेता हुए जिसमें दो कैप्टन विक्रम बत्रा, सूबेदार संजय कुमार हिमाचल प्रदेश से हुए। मैं कहता हूं कि जी हां, जो लंबे समय से मांग थी वन रैंक वन पेंशन, किसी सरकार ने पूरी नहीं की वो मोदी सरकार ने किया। मैं एक बात और कहता हूं अग्निवीर में 100 फीसदी रोजगार की गारंटी है और रहेगी। इस पर अखिलेश यादव ने फिर कहा कि अनुराग ठाकुर बस सदन में इतना कह दें कि अग्निवीर अच्छी योजना है। इस पर फिर अनुराग ठाकुर खड़े हुए। इस तरह दोनों ही नेताओं में जमकर घमासान देखने को मिला।

अखिलेश यादव ने इससे पहले चीन-लद्दाख मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिस समय लद्दाख और चीन को लेकर सवाल उठा था, उस समय राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे गए थे। उस समय सुझाव था कि लिपुलेख से लेकर ग्वालियर तक 6 लेन का हाइवे बनना चाहिए। जब जरूरी होगा तब सेना जल्दी से मूव कर सकती है। जो सरकार मंचों से ये कहती थी हम किसानों की आय दोगुनी कर देंगे। आज तो 11 साल हो गए सरकार को क्या किसान की आय दोगुनी हो गई क्या। आप कहते हैं कि आप एमएसपी दे रहे हैं तो आप कानूनी गारंटी क्यों नहीं दे रहे हैं। बता दें कि तीनों सेनाओं में अग्निवीरों की भर्ती से जुड़ी अग्निपथ स्कीम को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झटके के बाद जेडीयू और एलजेपी जैसे उसके सहयोगी भी अग्निपथ स्कीम की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। विपक्ष के हमलों और सहयोगी दलों के दबाव से बैकफुट पर आई मोदी सरकार अब इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से काउंटर करने की तैयारी कर चुकी है। यही वजह है कि अब मोदी सरकार सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का जोर-शोर से प्रचार कर रही है। पूर्व अग्निवीरों को शारीरिक दक्षता परीक्षा भी नहीं देनी होगी और उन्हें उम्र में भी छूट मिलेगी। वैसे तो सीएपीएफ भर्तियों में अग्निवीरों को तरजीह दिए जाने का ऐलान तो पिछले साल ही हो चुका था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तब ऐलान किया था कि सेंट्रल सिक्यॉरिटी फोर्सेज में पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण दिया जाएगा। लेकिन अब बीएसएफ, सीआईएसएफ के चीफ आगे बढ़कर इसका ऐलान कर रहे हैं। दरअसल, मोदी सरकार अग्निपथ के मुद्दे पर अब और जोखिम नहीं ले सकती। अगले 2-3 महीनों में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनाव जो होने हैं।

लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस ने मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और वादा किया कि सत्ता में आए तो इस स्कीम को खत्म कर देंगे। कांग्रेस सत्ता में तो नहीं आई जो वादे के तहत अग्निपथ स्कीम को खत्म कर सके, लेकिन चुनाव बाद भी वह इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आक्रामक है। राहुल गांधी ने अभी ड्यूटी के दौरान अग्निवीरों की मौत के बाद मिलने वाले मुआवजे का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ड्यूटी के दौरान देश की रक्षा करते हुए जो अग्निवीर अपनी जान न्यौछावर करते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से मुआवजा नहीं दिया जा रहा। हालांकि, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यहां तक कि सेना ने भी राहुल गांधी के आरोपों को पुरजोर तरीके से खारिज किया। बीजेपी ने राहुल गांधी पर अग्निवीर के मुद्दे पर झूठ बोलने और देश को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। इसके बाद भी राहुल गांधी और कांग्रेस के तेवरों में नरमी नहीं आई। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद विपक्ष उत्साहित है और बीजेपी सतर्क। लोकसभा चुनाव में पिछली बार के मुकाबले बीजेपी की सीटें घटने के पीछे एक बड़ी वजह अग्निवीर के मुद्दे को भी माना गया। चुनावी झटके के बाद माना जा रहा था कि मोदी सरकार अग्निपथ स्कीम में बदलाव करेगी लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं दिख रहा।