Sunday, March 15, 2026
Home Blog Page 571

क्या लोकसभा में अब अलग जगह बैठेगी टीएमसी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब लोकसभा में टीएमसी अलग बैठेगी! क्या लोकसभा में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के सांसदों की सीटिंग अरेंजमेंट बदलने जा रही है? चर्चा तो कुछ ऐसी ही है। लोकसभा में सीटों को लेकर टीएमसी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बीच अलग से बातचीत चल रही है। टीएमसी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है लेकिन फिर भी वो अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी बीजेपी विरोधी पार्टी के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहती है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ‘इंडिया’ गठबंधन को सीटिंग प्लान दिया है, लेकिन इसमें टीएमसी को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि ममता बनर्जी की पार्टी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है और उम्मीद है कि वह उसी ग्रुप में बैठेगी। लेकिन अलग सीटों की बात से पता चलता है कि टीएमसी स्वतंत्र रूप से इसके लिए बातचीत कर रही है, भले ही वे एक ही पंक्ति में हों। संसद के जानकार और राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि निचले सदन में बैठने की व्यवस्था गठबंधन के अनुसार की जाती है, न कि पार्टियों के अनुसार। सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों और विपक्ष के बीच स्पष्ट विभाजन के लिए, जो पार्टियों के बीच समन्वय के साथ-साथ सदन के प्रबंधन में मदद करता है। सूत्रों ने कहा कि ‘इंडिया’ ब्लॉक स्पीकर से एक ग्रुप के रूप में बात कर रहा है। हालांकि, विपक्ष वर्तमान में अधिक से अधिक सहयोगियों को अपने साथ करने के लिए आगे की लाइन में अधिक सीटों के लिए स्पीकर पर दबाव बना रहा है। कांग्रेस को आगे की पंक्ति में और सीटें चाहिए। इसके अलावा विपक्ष में समाजवादी पार्टी और डीएमके के लिए भी प्रमुख पदों की जरूरत है। उम्मीद है कि शिवसेना यूबीटी को भी आगे बैठाया जा सकता है।अब ऐसा प्रतीत होता है कि तृणमूल कांग्रेस कुछ अलग से प्लान कर रही है। इसे बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के खुद को बीजेपी विरोधी ताकत के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा। ये स्पीकर चुनाव के दौरान और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के बयानों में भी स्पष्ट था।

महत्वपूर्ण रूप से, तृणमूल ने पिछले सत्र में आपातकाल पर प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस के विरोध का समर्थन नहीं किया था। हालांकि, कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी कांग्रेस का साथ नहीं दिया, उनके पास यह बहाना था कि वे आपातकाल के शिकार थे। लेकिन 1970 के दशक में टीएमसी आलाकमान कांग्रेस का हिस्सा थी। टीएमसी ने शनिवार को नीति आयोग की बैठक में भी यह कहते हुए हिस्सा लिया कि बैठक के बहिष्कार पर ‘इंडिया’ गुट के साथ कोई समन्वय नहीं है।

हालांकि 18वीं लोकसभा पहले ही अपने दूसरे सत्र में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन सीट आवंटन अभी तक तय नहीं हो सका है। दिग्गजों का कहना है कि इस मुद्दे को सुलझाने में समय लगता है क्योंकि अलग-अलग पार्टियों की स्पीकर से अलग-अलग मांगें होती हैं, और अड़चन काफी हद तक आगे की पंक्ति की सीटों को लेकर होती है। सूत्रों ने कहा कि विपक्ष वर्तमान में अधिक से अधिक सहयोगियों को अपने साथ करने के लिए आगे की लाइन में अधिक सीटों के लिए स्पीकर पर दबाव बना रहा है। कांग्रेस को आगे की पंक्ति में और सीटें चाहिए। इसके अलावा विपक्ष में समाजवादी पार्टी और डीएमके के लिए भी प्रमुख पदों की जरूरत है। उम्मीद है कि शिवसेना यूबीटी को भी आगे बैठाया जा सकता है।

टीएमसी एक सूत्र ने कहा कि अभी बातचीत चल रही है। बैठने की व्यवस्था जल्द ही फाइनल हो जानी चाहिए।बता दें कि सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों और विपक्ष के बीच स्पष्ट विभाजन के लिए, जो पार्टियों के बीच समन्वय के साथ-साथ सदन के प्रबंधन में मदद करता है। सूत्रों ने कहा कि ‘इंडिया’ ब्लॉक स्पीकर से एक ग्रुप के रूप में बात कर रहा है। हालांकि, अब ऐसा प्रतीत होता है कि तृणमूल कांग्रेस कुछ अलग से प्लान कर रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, विपक्ष सदन में अधिक संख्या में लौटा है। कांग्रेस ने खुद अपनी संख्या लगभग दोगुनी कर ली है। लेकिन 1970 के दशक में टीएमसी आलाकमान कांग्रेस का हिस्सा थी। टीएमसी ने शनिवार को नीति आयोग की बैठक में भी यह कहते हुए हिस्सा लिया कि बैठक के बहिष्कार पर ‘इंडिया’ गुट के साथ कोई समन्वय नहीं है।एक मोटे अनुमान के अनुसार, विपक्ष के सदन के लगभग 40 फीसदी हिस्से को कवर करने की उम्मीद है।

आखिर क्या है पीएम मोदी का प्रोजेक्ट परी?

आज हम आपको पीएम मोदी के नए प्रोजेक्ट परी के बारे में जानकारी देने वाले हैं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 112वीं बार ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। एक बार फिर जन सरोकार से जुड़े मुद्दों पर राय रखी और मैथ्स ओलंपियाड में भारत की धाक जमाने वाले छात्रों से बात की। पीएम ने अहोम सम्राज्य के चराईदेव मैदाम और प्रोजेक्ट परी से जुड़ी जानकारी भी साझा की। पीएम मोदी ने कहा कि एक प्रयास है- प्रोजेक्ट परी। अब आप परी सुनकर कन्फ्यूज मत होईएगा। ये परी स्वर्गीय कल्पना से नहीं जुड़ी बल्कि धरती को स्वर्ग बना रही है। पीएम मोदी ने परी प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि परी यानि पब्लिक आर्ट ऑफ इंडिया। प्रोजेक्ट परी, पब्लिक आर्ट को लोकप्रिय बनाने के लिए उभरते कलाकारों को एक मंच पर लाने का बड़ा माध्यम बन रहा है। आप देखते होंगे सड़कों के किनारे, दीवारों पर अंडरपास में बहुत ही सुंदर पेटिंग्स बनी हुई दिखती हैं। ये पेटिंग्स और ये कलाकृतियां यही कलाकार बनाते हैं जो परी से जुड़े हैं। इससे जहां हमारे सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ती है, वहीं हमारे कल्चर को और ज्यादा पॉपुलर बनाने में भी मदद मिलती है।

पीएम मोदी ने कहा कि उदाहरण के लिए दिल्ली के भारत मंडपम को ही लीजिए। यहां देश भर के अद्भुत ऑर्ट वर्क आपको देखने को मिल जाएंगे। दिल्ली में कुछ अंडरपास और फ्लाईओवर पर भी आप ऐसे खूबसूरत पब्लिक ऑर्ट देख सकते हैं। मैं कला और संस्कृति प्रेमियों से आग्रह करूंगा कि वे भी पब्लिक आर्ट पर और काम करें। ये हमें अपनी जड़ों पर गर्व करने की सुखद अनुभूति देगा।

मन की बात’ में पीएम ने पेरिस ओलंपिक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया में पेरिस ओलंपिक छाया हुआ है। ओलंपिक हमारे खिलाड़ियों को विश्व पटल पर तिरंगा लहराने का मौका देता है, देश के लिए कुछ कर गुजरने का मौका देता है। आप भी अपने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएं, चीयर फॉर भारत। उन छात्रों से भी बात की जिन्होंने मैथ ओलंपियाड में देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा, स्पोर्ट्स की दुनिया के इस ओलंपिक से अलग, कुछ दिन पहले मैथ्स की दुनिया में भी एक ओलंपिक हुआ है। इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड, इस ओलंपियाड में भारत के स्टूडेंट्स ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया है। इसमें हमारी टीम ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए चार गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल जीता है। इसमें 100 से ज्यादा देशों के युवा हिस्सा लेते हैं और हमारी टीम टॉप पांच में आने में सफल रही। पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलिंपियाड विजेताओं से फोन पर बात की।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि ‘मन की बात’ में, अब मैं उस विषय को साझा करना चाहता हूं, जिसे सुनकर हर भारतवासी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा। लेकिन, इसके बारे में बताने से पहले मैं आपसे एक सवाल करना चाहूंगा। क्या आपने चराईदेउ मैदाम का नाम सुना है? अगर नहीं सुना, तो अब आप ये नाम बार-बार सुनेंगे और बड़े उत्साह से दूसरों को बताएंगे। असम के चराईदेउ मैदाम को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया जा रहा है। इस लिस्ट में यह भारत की 43वीं, लेकिन नार्थ ईस्ट की पहली साइट होगी। आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि चराईदेव मैदाम आखिर है क्या, और ये इतना खास क्यों है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि चराईदेउ का मतलब है शाइनिंग सिटी ऑन द हिल यानी पहाड़ी पर एक चमकता शहर। ये अहोम राजवंश की पहली राजधानी थी। अहोम राजवंश के लोग अपने पूर्वजों के शव और उनकी कीमती चीजों को पारंपरिक रूप से मैदाम में रखते थे। चराईदेव मैदाम, टीले नुमा एक ढांचा होता है, जो ऊपर मिट्टी से ढका होता है और नीचे एक या उससे ज्यादा कमरे होते हैं। ये मैदाम, अहोम साम्राज्य के दिवंगत राजाओं और गणमान्य लोगों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का ये तरीका बहुत यूनिक है। इस जगह पर सामुदायिक पूजा भी होती थी।

पीएम मोदी ने बताया कि अहोम साम्राज्य के बारे में दूसरी जानकारियां आपको और हैरान करेंगी। 13वीं शताब्दी के शुरू होकर ये साम्राज्य 19वीं शताब्दी की शुरुआत तक चला। इतने लंबे कालखंड तक एक साम्राज्य का बने रहना बहुत बड़ी बात है। शायद अहोम साम्राज्य के सिद्धांत और विश्वास इतने मजबूत थे, कि उसने इस राजवंश को इतने समय तक कायम रखा। मुझे याद है कि इसी वर्ष 9 मार्च को मुझे अदम्य साहस और शौर्य के प्रतीक, महान अहोम योद्धा लसित बोरफुकन की सबसे ऊंची प्रतिमा के अनावरण का सौभाग्य मिला था। इस कार्यक्रम के दौरान, अहोम समुदाय आध्यात्मिक परंपरा का पालन करते हुए मुझे अलग ही अनुभव हुआ था। लसित मैदाम में अहोम समुदाय के पूर्वजों को सम्मान देने का सौभाग्य मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। अब चराईदेउ मैदाम के वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनने का मतलब होगा कि यहां पर और अधिक पर्यटक आएंगे। आप भी भविष्य के अपने ट्रेवल प्लॉन में इस साइट को जरूर शामिल करिएगा।

आखिर कब सुधरेगा भारत का सिस्टम?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर भारत का सिस्टम कब सुधरेगा! सेना में भर्ती होकर देश के लिए कुर्बान होने का जज्बा रखते थे, आपने ‘अग्रिवीर योजना’ लाकर हमारे दिल को चोट पहुंचाई, हम चुप रहे। कभी रेलवे का एग्जाम लीक हुआ, कभी यूपी पुलिस भर्ती का पेपर लीक हुआ, लेकिन हम अपनी किस्मत का दोष समझकर चुप बैठ गए। परंतु सिस्टम हमारे पीछे हाथ धोकर पड़ गया है। देश की बड़ी परीक्षा नीट का भी पेपर लीक हो जाता है। हम सड़कों पर उतरे, सिस्टम से लड़े और सीबीआई जांच शुरू हो गई। सिस्टम से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं। लेकिन कमजोर नहीं हुए हैं। हमें फिर से संघर्ष करना है। सिस्टम को सुधारने के लिए सिस्टम में आना है। प्लीज हमें बख्श दो, आज देश के हर छात्र और नौजवान के दिल और जुबान से बस ये ही अपील निकल रही होगी। दरअसल अब मामला बहुत आगे निकल गया है। देश के युवाओं की जान पर बन आई है। आईएएस और आईपीएस बनकर देश को सुधारने का सपना देखने वाले छात्र कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में डूबकर मर रहे हैं। बिजली के खंभों का कंरट उन्हें मौत की नींद सुला रहा है। किसी के पिता खेती करते हैं, किसी के पिता मामूली सी नौकरी करते हैं, किसी के पिता मजदूरी करते हैं… लेकिन आपको इस बात से कहां फर्क पड़ता है। आपको तो बस सियासत करनी है। दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में भारी बारिश होती है। कोचिंग सेंटर के बेसेमेंट में बनी लाइब्रेरी में अचानक फोर्स से सीवर का पानी घुस जाता है। 10 मिनट के अंदर गंदे पानी की भेंट तीन नौजवानों के सपने चढ़ जाते हैं। और शासन और प्रशासन दावा करता है कि जांच शुरू हो गई है। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। खबरों में पढ़ते हैं दिल्ली सरकार मे मंत्री आतिशी ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को इस घटना की जांच करने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। अरे भाई , ये इतना सारा ज्ञान घटना के बाद क्यों आता है। दिल्ली सरकार कहती है केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार के प्रतिनिधि कहते हैं दिल्ली सरकार चोर है। बारिश से पहले सीवरेज ठीक नहीं कराए। उधर कोचिंग सेंटर का मालिक बस अपने फायदे के बारे में सोचता है और बच्चों को मौत के मुंह में बिठाकर देश का सबसे बड़ा अफसर बनाने के सपने दिखाता है। दरअसल सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले बच्चे मिडिल क्लास से ताल्लुक रखते हैं। अगर वो किसी हादसे के शिकार हो भी जाते हैं, तो क्या फर्क पड़ता है। बस अपने घर का बच्चा इन चक्करों में ना फंसे। ये ही सोच है जो युवाओं की मौत का कारण बन रही है।

दिल्ली के करोल बाग मेट्रो स्टेशन पर भारी पुलिस बल तैनात है। ओल्ड राजेंद्र नगर में शनिवार को एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भर जाने से हुई 3 छात्रों की मौत के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए छात्रों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। न्यूज चैनल और न्यूज वेबसाइट्स पर अब ऐसी ही खबरें देखने को मिल रही है। दरअसल एक सिस्टम के आगे बेबस छात्र कितना संघर्ष करेगा। कभी पेपर लीक हो जाता है तो वह सड़कों पर उतरकर पुलिस के डंडे खाता है। कभी अग्निवीर स्कीम के विरोध में वो सिस्टम से लड़ता है। अब अपने जीवन के लिए सरकार से गुहार लगा रहा है। लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। युवा आज की तारीख में राजनीति का केंद्र बिंदु बन गए हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हर कोई युवाओं के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेक रहा है। छात्रों और नौजवानों की हालत रोजाना खराब होती जा रही है। जब कोई युवा खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतता है तो पूरे देश को उस पर गर्व होता है। लेकिन जब वहीं नौजवान गटर के पानी की भेंट चढ़ जाता है तो सिस्टम मौन हो जाता है।

बीते 2-3 सालों से देश का युवा सड़क पर है। उसकी मेहनत पर सिस्टम पानी फेर रहा है। दुनिया में भारत सबसे ज्यादा युवा आबादी वाला देश है। लेकिन वो युवा आबादी बहुत मजबूर है। बीटेक, बीबीए, एमबीए और एमटेक करने के बाद भी उसके पास प्राइवेट नौकरी तक नहीं है। उसके बावजूद भारत का युवा हिम्मत वाला है। वह लगातार संघर्ष कर रहा है। रात दिन एक करके अपनी तकदीर बदलना चाहता है। लेकिन उसे अब संघर्ष भी नहीं करने दिया जा रहा है। जीवनभर की कमाई जुटाकर मां-बाप अपने बच्चों को बड़ा आदमी बनाना चाहते हैं। लेकिन देश की राजधानी में ही जब सपने पानी में डूबकर खत्म हो रहे हैं तो देश के अन्य राज्यों का क्या हाल होगा। पूरी दुनिया एआई के दौर में पहुंच गई है। लेकिन दुर्भाग्य है कि आज भी भारत का सिस्टम ‘जमी जमाई व्यवस्था‘ से बाहर नहीं आना चाहता है। तीन घरों के चिराग डूबकर मर जाते हैं, और सरकार इस बात की जांच करती है कि पानी आखिर बेसमेंट तक कैसे पहुंचा। यहां गलती सरकार की है, सिस्टम की है या कोचिंग सेंटर मालिक की, इसका पता चल भी जाए तो क्या होगा। असल मुद्दा तो ये है कि युवाओं को जो बिना अपराध के हर रोज सजा मिल रही है, इसका स्थायी हल कैसे खोजा जाए। अभी भी मौका है संभला जा सकता है। अगर देर हो गई तो हर रोज किसी सीवर या नाली में टूटते सपनों की सिसकियां ही सुनाई देंगी।

क्या फसल बीमा बन सकता है किसानों की सुरक्षा का कवच?

आने वाले समय में फसल बीमा किसानों की सुरक्षा कवच बन सकता है! जलवायु परिवर्तन को लेकर हम ऐसी चिंताजनक स्थिति में आ खड़े हुए हैं, जिसका हमारी पृथ्वी पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। पूरी दुनिया में तापमान के लगातार बढ़ने से विभिन्न घटनाएं देखने को मिल रही हैं, जो दुनिया के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करने का कारण बन रही हैं। मौसम का अपने चरम पर पहुंचना आम होता जा रहा है, जो लोगों के जीवन और आजीविका को तेजी से प्रभावित कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि पेरिस समझौते के तहत किए गए वादे नाकाफी हैं और पृथ्वी की तापमान को इसी सदी में पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2.5 से लेकर 2.9 डिग्री सेल्सियस तक तक बढ़ा सकते हैं। जलवायु का यह चिंताजनक परिवर्तन हम सभी को प्रभावित करेगा और हमारी आर्थिक गतिविधियों को भी बाधित करेगा, जिससे हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। खेती भी इस स्थिति से बच नहीं पाएगी। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए नेशनल इनोवेशंस इन क्लाइमेट रेसिलिएंट एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने एक अध्ययन किया है।

वर्ष 2050 और 2080 तक वर्षा आधारित चावल की पैदावार में तकरीबन 2.5% तक की कमी देखी जा सकती है, सिंचित चावल की पैदावार वर्ष 2050 तक 7% और वर्ष 2080 तक 10% घट सकती है, वर्ष 2100 तक गेहूं की पैदावार 6 से 25% तक कम हो सकती है, वर्ष 2100 तक मक्के की पैदावार 18 से 23% तक कम हो सकती है! एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2015 और 2021 के बीच बाढ़ और बहुत ज्यादा बारिश की वजह से भारत 3.39 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि खो चुका है। इसके अलावा, सूखे के कारण अन्य 3.5 करोड. हेक्टेयर फसल क्षेत्र नष्ट हो चुका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भारत के 573 ग्रामीण जिलों में कृषि जोखिम मूल्यांकन किया। इसमें पाया गया कि 109 जिले जलवायु प्रभावों के कारण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जो ‘बहुत अधिक जोखिम’ श्रेणी में हैं और 201 जिले ‘जोखिम’ श्रेणी में हैं। इस सच से कोई भी अनजान नहीं है कि अति मौसमी घटनाएं प्रबल होती जा रही हैं और बार-बार हो रही हैं, जिससे कृषि और फसल उत्पादन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति किसानों को कर्ज और गरीबी की गर्त में धकेल सकती है।

फसल के नुकसान और उसके नतीजे में होने वाली वित्तीय कठिनाई को कम करने का एक तरीका फसल बीमा है। क्षेमा का नया फसल बीमा उत्पाद, ‘सुकृति’ और ‘प्रकृति’ किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं। सुकृति एक स्वनिर्धारित फसल बीमा योजना है, जिसकी शुरुआती कीमत 499 रुपए प्रति एकड़ है। यह बीमा 100 से अधिक फसलों को कवर करता है। यह किसानों को 9 जोखिमों की पूर्वनिर्धारित सूची से एक प्रमुख और एक न्यून जोखिम चुनने का संयोजित विकल्प प्रदान करता है। यह सुविधा सुनिश्चित करती है कि किसान जलवायु, क्षेत्र, उनके खेत के स्थान, ऐतिहासिक प्रतिमान आदि घटकों पर आधारित ऐसे जोखिमों का चयन करें, जो वास्तव में उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।

चक्रवात, बाढ़, जलप्रिय फसलों के लिए लागू नहीं, ओलावृष्टि और भूकंप, भूस्खलन, बिजली गिरने से लगी आग, जानवरों के हमले, बंदर, खरगोश, जंगली सुअर, हाथी और विमान दुर्घटना जैसी न्यून आपदाओं के लिए सुकृति बीमा योजना के तहत सुरक्षा प्रदान की जाती है। किसान अपने वित्तीय हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करके अपना कवरेज बढ़ा सकते हैं। वे अपने घर से क्षेमा ऐप पर पंजीकरण करके आसानी से बीमा खरीद सकते हैं। ऐप पर नीति विवरण और क्षतिग्रस्त फसलों की तस्वीरें या वीडियो अपलोड करके भी क्लेम कर सकते हैं। क्षेमा त्वरित दावा निपटान सुनिश्चित करने के लिए जियो टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी और एआई बेस्ड एल्गोरिदम जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग करता है।

फसल बीमा किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। समय के साथ यह कृषि में उच्च निवेश और बेहतर प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है, जिससे अंततः समग्र कृषि को बढ़ावा मिलता है। इसलिए, किसानों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे इस खरीफ सीजन में बीज, उर्वरक और उपकरण के साथ ही साथ फसल बीमा भी खरीदें। बता दें कि इस सच से कोई भी अनजान नहीं है कि अति मौसमी घटनाएं प्रबल होती जा रही हैं और बार-बार हो रही हैं, जिससे कृषि और फसल उत्पादन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति किसानों को कर्ज और गरीबी की गर्त में धकेल सकती है। इससे न सिर्फ प्रतिकूल जलवायु घटनाओं से उनकी आय सुरक्षित रहेगी बल्कि उन्हें अपनी कृषि यात्रा को समृद्धि की ओर अग्रसर करने में भी मदद मिलेगी।

आखिर क्या है उत्तर प्रदेश में फल सब्जी की दुकानों पर नेम प्लेट मामला जानिए?

आज हम आपको उत्तर प्रदेश में फल सब्जी की दुकानों पर नेम प्लेट के मामले के बारे में बताने जा रहे हैं! हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा कावड़ यात्रियों की आस्था और धर्म को सुरक्षित रखने के लिए फल सब्जी की दुकानों पर नेम प्लेट लगाने की बात कही थी! जिसके बाद कावड़ यात्रियों के मार्ग पर आने वाली सभी खाने पीने के दुकानदारों के द्वारा अपना नाम और पहचान अपनी दुकान के सामने लगा लिए गए… इसके बाद विपक्ष के द्वारा सियासत शुरू कर दी गई! आपको हम इस पूरी घटना और विवाद के बारे में जानकारी देंगे!  आपको बता दे कि कांवड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही गुरुवार को पुरकाजी से बुढ़ाना मोड़ तक अलग-अलग जगह दुकानदारों ने अपने नाम दुकानों के बाहर प्रदर्शित किए। मिठाई, कोल्ड ड्रिंक्स और खाने-पीने के सामान की दुकानों के बाहर नाम लिखे गए।

फल विक्रेताओं ने भी नाम वाले बैनर लटकाए हैं। वहीं पुलिस के फैसले ने तूल पकड़ा तो भाजपा नेताओं के बयान आने शुरू हो गए। सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम और खतौली के पूर्व विधायक विक्रम सैनी ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर पर निशाना साधा। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया, इस पर सियासी बहस शुरू हो गई है। इसे लेकर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असद्उद्दीन ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर पलटवार किया। गीतकार जावेद अख्तर ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए टिप्पणी की है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी ने कांवड़ यात्रियों के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पूरे यूपी में कांवड़ मार्गों पर खाने-पीने की दुकानों पर संचालकों-मालिकों का नाम पहचान लिखनी होगी।

उन्होंने कहा कि कांवड यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचनेवालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। उधर, इस फैसले का अखिलेश यादव और मायावती ने कड़ा विरोध किया है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के आदेश के अनुसार अब हर खाने वाली दुकान या ठेले के मालिक को अपना नाम बोर्ड पर लगाना होगा, ताकि कोई कांवड़िया गलती से मुसलमान की दुकान से कुछ न खरीद ले। इसे दक्षिण अफ्रीका में अपारथाइड कहा जाता था और हिटलर की जर्मनी में इसका नाम जुडेनबोयकोट था। बता दें कि यशवीर आश्रम बघरा के संचालक स्वामी यशवीर महाराज ने अधिकारियों से मिलकर कांवड़ मार्ग की दुकानों के दुकानदारों के नाम प्रदर्शित करने की मांग रखी थी। उन्होंने एसएसपी अभिषेक सिंह से भी मुलाकात की थी।

कांवड़ यात्रा रूट पर नेम प्लेट लगाने का विवाद उत्तर प्रदेश से गहराया है। मुजफ्फरनगर प्रशासन की ओर से सबसे पहले कांवड़ रूट पर लगने वाली दुकानों पर नेम प्लेट लगाने का आदेश जारी किया गया। इस नेम प्लेट पर दुकानदार और इसमें काम करने वाले कर्मियों के नाम की जानकारी देने को कहा गया। इस आदेश के बाद मुजफ्फरनगर में विरोध शुरू हो गया। अखिलेश यादव से लेकर मायावती और एआईएमआई प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी तक प्रशासन के खिलाफ बयान देने लगे। हालांकि, मुजफ्फरनगर प्रशासन के आदेश को सहारनपुर और शामली में भी लागू कर दिया गया। विवाद गहराया तो योगी सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा। योगी सरकार ने इस मामले में चौंकाने वाला फैसला लेते हुए प्रदेश के सभी रूटों पर दुकानों के आगे नेम प्लेट का आदेश जारी कर दिया।कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी विकास भवन में हुई बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया था। पुलिस ने इसके बाद कांवड़ मार्ग पर व्यवस्था लागू करानी शुरू कर दी थी। एआईएमआईएम के प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी की एक्स पर पोस्ट के बाद अन्य लोगों ने भी बृहस्पतिवार को मोर्चा संभाल लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा रूट पर नेम प्लेट लगाए जाने से संबंधित याचिका में 22 जुलाई को अंतरिम आदेश जारी किया गया था। कोर्ट ने कांवड़ यात्रा की शुरुआत के साथ ही रूट पर नेम प्लेट लगाने संबंधी आदेश पर रोक लगाने का आदेश दिया। दरअसल, दुकानदारों की ओर से दायर याचिका में आर्थिक चोट पहुंचाने वाला यह आदेश बताया गया।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कांवड़ यात्रा रूट पर बने होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट्स को शाकाहारी या मांसाहारी का बोर्ड लगाने का आदेश दिया। दुकान के मालिक या कर्मियों के नाम लिखने को अनिवार्य किए जाने पर रोक लगा दी गई। अब योगी सरकार की ओर से कोर्ट में पेश किए गए जवाब में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आस्था पर चोट न पड़ने देने को लेकर इस प्रकार का आदेश जारी किए जाने की बात कही है। कोर्ट अन्य सरकारों का जवाब आने के बाद 29 जुलाई को मामले में आगे की सुनवाई हुई।यानी सीधी सी बात यह है कि उत्तर प्रदेश में अब कोई भी गलत तरीके से फल सब्जी और खाने-पीने के समान नहीं बेच पाएगा,

क्योंकि अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि धर्म विरोधी लोगों के द्वारा एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाने के लिए कई आपत्तिजनक कार्य किए जाते हैं… जिसके बाद हिंसा भड़क सकती है…. इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा ऐसी हिंसा से बचने के लिए पहले से ही प्रिकॉशन ले लिए गए हैं!

आखिर क्या है छत्रपति शिवाजी महाराज का बाघ नख?

आज हम आपको छत्रपति शिवाजी महाराज के बाघ नख  के बारे में जानकारी देने वाले हैं! हाल ही में लंदन के एक म्यूजियम से छत्रपति शिवाजी महाराज का बाघ नख भारत वापस लाया गया है! जिसके बाद सियासत भी शुरू हो गई है! लेकिन सवाल यह कि आखिर छत्रपति शिवाजी महाराज का यह बाघ नख आखिर क्या है? इसकी कहानी क्या है और यह लंदन कैसे पहुंचा? इस बारे में आपको पूरी जानकारी देंगे! 

आपको बता दें कि छत्रपति शिवाजी महाराज का बाघ नख ब्रिटेन की राजधानी लंदन से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पहुंच चुका है। पिछले साल महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने बाघ नख को वापस लाने के लिए कोशिशें शुरू की थीं। आखिरकार 17 जुलाई की सुबह बाघ नख लंदन से मुंबई एयरपोर्ट पहुंच गया। बता दें कि 1659 के युद्ध में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसी बाघ नख के एक प्रहार से अफजल का काम तमाम किया था और अपनी रक्षा की थी। मराठा साम्राज्य के भविष्य को इस घटना ने एक अलग ही दिशा में मोड़ दिया था। इतिहासकारों के अनुसार, 1659 में शिवाजी महाराज ने बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को बाघ नख से एक ही झटके में चीर दिया था। तब बीजापुर सल्तनत के प्रमुख आदिल शाह और शिवाजी के बीच युद्ध चल रहा था। अफजल खान ने छल से शिवाजी को मारने की योजना बनाई थी और उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। शिवाजी ने अफजल खान के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था। जब शामियाने में मुलाकात के दौरान उसने शिवाजी की पीठ में खंजर भोंकने की कोशिश की, तो पहले से ही सतर्क शिवाजी ने बाघ नख से एक ही बार में अफजल का पेट चीर दिया था। तब से शिवाजी का बाघ नख शौर्य का प्रतीक बना हुआ है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1659 में आदिलशाही सल्तनत के सेनापति अफजल खान को जिस बाघ नख से मारा, महाराष्ट्र सरकार ने अपनी कोशिशों से उसे वापिस ला दिया है। यह बाघ नख ब्रिटेन के एक म्यूजियम में रखा हुआ था।  राज्य सरकार ने जी20 की बैठकों में इसका जिक्र किया था और ब्रिटेन सरकार ने इसे देने की हामी भरी थी। यह बाघ नख अब भारत आ रहे हैं। हालांकि इसे लेकर सियासत भी शुरू हो गई है और शिवसेना (UBT) के नेताओं ने इस बाघ नख के शिवाजी का बाघ नख होने पर सवाल उठाए हैं।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर से इतिहास के जानकार इन्द्रजीत सावंत ने कहा है कि जो बाघ नख महाराष्ट्र सरकार लंदन से ला रही है वह असली नहीं है क्योंकि साल 1919 तक महाराष्ट्र में सातारा में शिवाजी महाराज के बाघ नख उनके वंशजों के महल में मौजूद थे। हालांकि 1919 के बाद से बाघ नखों का कोई पता नहीं था। जो बाघ नख महाराष्ट्र सरकार लाई है इसे एक अंग्रेज अधिकारी को भेंट में दिया गया था और बाद में इसे उन्होंने लंदन म्यूजियम को सौंप दिया था। इस तरह देखा जाए तो दोनों ही पक्षों के अपने-अपने दावे और अपनी-अपनी दलीलें हैं। बता दें कि 1659 में शिवाजी महाराज ने बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को बाघ नख से एक ही झटके में चीर दिया था। तब बीजापुर सल्तनत के प्रमुख आदिल शाह और शिवाजी के बीच युद्ध चल रहा था। अफजल खान ने छल से शिवाजी को मारने की योजना बनाई थी और उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। शिवाजी ने अफजल खान के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था। कहते हैं कि बाघ नख नाम के इस हथियार का इस्तेमाल सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज ने ही किया था। बाघ नख एक तरह का हथियार है, जो आत्मरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है जिससे यह पूरी मुट्ठी में फिट हो सके। यह स्टील और दूसरी धातुओं से से तैयार किया जाता है। इसे चार नुकीली छड़ें होती हैं जो किसी बाघ के पंजे जैसी घातक और नुकीली होती है और इसके दोनों तरफ दो रिंग होती हैं। इसे हाथ की पहली और चौथी उंगली में पहनकर ठीक तरह से मुट्ठी में फिट किया जाता है। यह इतना घातक होता है कि एक ही वार में किसी को भी मौत के घाट उतार सकता है।हालांकि इसे लेकर सियासत भी शुरू हो गई है और शिवसेना के नेताओं ने इस बाघ नख के शिवाजी का बाघ नख होने पर सवाल उठाए हैं। तो यह है हमारे वीर छत्रपति शिवाजी महाराज के बाघ नख की कहानी!

अगर ट्रंप राष्ट्रपति बने तो भारत को क्या करना होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप बनते हैं तो भारत को क्या करना होगा! अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर दुनियाभर की नजरें लगी हुई हैं। चुनाव प्रचार के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवा डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटस उम्मीदवार जो बाइडेन एक दूसरे के खिलाफ बढ़त बनाने में जुटे हैं। अमेरिका समेत दुनिया के छोटे-बड़े देशों की नजरें डोनाल्ड ट्रंप के भाषणों पर अधिक हैं। फिलहाल मीडिया रिपोर्ट में ट्रंप अपने प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में अगर राष्ट्रपति ट्रंप सत्ता में वापसी करते हैं तो कई देशों के लिए अमेरिका के साथ मौजूदा राजनयिक समीकरणों में बदलाव हो तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में सवाल है कि आखिर भारत को ट्रंप के दुबारा राष्ट्रपति बनने पर क्या कुछ करने की जरूरत होगी। अमेरिका में जिस तरह से ट्रंप भाषण दे रहे हैं उससे एक बात तो तय है कि राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप का संभावित दूसरा कार्यकाल में ‘कॉमन सेंस’ के आधार पर चलेगा। यह वहीं कॉमन सेंस है जिसका विचार मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन में हाल ही में संपन्न रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन का प्रमुख विषय था। माना जा रहा है कि ट्रंप के नेतृत्व में, रिपब्लिकन पार्टी कई मुद्दों पर पारंपरिक अमेरिकी आम सहमति को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाएगी। इसमें मुक्त व्यापार, गठबंधन, खुली सीमाएं शामिल हैं। भारत सहित दुनिया के बाकी हिस्सों को अमेरिका के बारे में अपनी धारणाओं को बदलना होगा।

पांच संभावित बदलावों के लिए भारतीय विदेश नीति के एलीट वर्ग को अमेरिका के बारे में अपने स्वयं के ‘कॉमन सेंस’ पर पुनर्विचार करना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार और आर्थिक वैश्वीकरण रिपब्लिकन सम्मेलन ने बिना किसी हिचकिचाहट के ट्रम्प की वैश्वीकरण विरोधी प्रवृत्ति का समर्थन किया है। रिपब्लिकन पार्टी बाकी दुनिया को (घर पर काम करने वाले लोगों की कीमत पर) उत्पादन आउटसोर्सिंग बंद करना चाहता है। वह अमेरिका को फिर से एक विनिर्माण महाशक्ति बनाना” चाहता है। इसके लिए मुख्य साधन आयात पर शुल्कों में बड़ी बढ़ोतरी (सभी आयातों के लिए 10% और चीन से आयात के लिए 60%) की घोषित ट्रम्प योजना है। ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में, ट्रम्प ने आयात को महंगा बनाने और अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डॉलर का अवमूल्यन करने की अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा पर जोर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया ने लंबे समय से यह मान लिया है कि अमेरिका दुनिया के निर्यात के लिए एक अथाह स्रोत है। यह विश्वास ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में कायम नहीं रह सकता। अमेरिकी संरक्षणवाद की शिकायत करना या WTO के नियमों के बारे में बात करना वाशिंगटन के साथ ज्यादा तालमेल नहीं बिठा पाएगा। WTO की बात करना, जैसा कि हमारे व्यापार नौकरशाह करते हैं। यह एक शक्तिशाली चक्रवात को रोकने के लिए मंत्र पढ़ने जैसा होगा। व्यापार के मुद्दे जो पहले कार्यकाल में ट्रंप के साथ भारत के जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण अड़चन थे, अब एक गंभीर चुनौती बन जाएंगे। इसके समाधान के लिए भारत की अपनी व्यापार रणनीतियों पर फिर से विचार करना होगा।

रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा और गठबंधन सुरक्षा के मामले में, भारत यूरोप और एशिया में अमेरिका के उन सहयोगियों से बेहतर स्थिति में हो सकता है, जिन्हें अमेरिका के छोड़े जाने का डर है। रिपब्लिकन अमेरिका को दुनिया से अलग-थलग नहीं करना चाहते। वे अधिक पारस्परिकता चाहते हैं। पहली नजर में, एक गैर-सहयोगी के रूप में, भारत उस तर्क का हिस्सा नहीं है; लेकिन अमेरिका के साथ सैन्य साझेदारी आज भारत की डिफेंस कैलकुलस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी वजह है कि चीन अपनी सीमाओं पर हमेशा से ही आक्रामक रहा है। हालांकि भारत-अमेरिका के बीच तालमेल वास्तविक है, लेकिन दिल्ली अब तक इसे ठोस सैन्य व्यवस्था में बदलने में हिचकिचा रही है।

यह विचार कि दिल्ली किसी के साथ प्रतिबद्धता किए बिना सभी पक्षों के साथ खेल सकती है, ट्रंप के अधीन आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है, जो अमेरिका के महाशक्ति संबंधों को हिला देने की योजना बना रहे हैं। इच्छुक और सक्षम साझेदारों की अमेरिकी खोज और अपनी व्यापक राष्ट्रीय शक्ति का निर्माण करने तथा एशियाई सुरक्षा को नया आकार देने में बड़ी भूमिका निभाने की भारत की इच्छा के बीच एक अच्छा तालमेल है। भारत पिछले एक दशक से भी अधिक समय से अमेरिका के साथ अधिक बोझ साझा करने की योजना को स्पष्ट करने में धीमा रहा है। यह अब नई दिल्ली के लिए एक तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए।

रिपब्लिकन बिडेन प्रशासन के “हरित संक्रमण” के व्यापक एजेंडे को खत्म करने के लिए दृढ़ हैं। ट्रंप औद्योगिक नीति के माध्यम से अमेरिका को “ऊर्जा महाशक्ति” बनाने का वादा कर रहे हैं। वह हाइड्रोकार्बन ड्रिलिंग के तेजी से विस्तार का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप के कार्यकाल में भारत ने अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियों के साथ काम किया। दिल्ली के लिए उनके साथ फिर से जुड़ना समझदारी होगी। भारत के लिए ट्रंप का अमेरिका एक अधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बन सकता है।

ट्रंप की तरफ से किए जा रहे व्यापक राजनीतिक पुनर्गठन के बीच भारत को अमेरिका के विभिन्न घरेलू राजनीतिक क्षेत्रों के साथ बातचीत बढ़ानी चाहिए। पूंजी के हितों से ऊपर मजदूर वर्ग के हितों को रखने, बड़े पैमाने पर अप्रवासन के खिलाफ श्रम को सुरक्षित करने, वैश्विक प्रतिबद्धताओं को कम करने और विदेशों में युद्धों से बचने के ट्रंप के तर्क रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच की खाई को पाटते हैं और राजनीतिक समर्थन के विविध स्रोत हैं।

जब कोरोना में हुई अतिरिक्त मौतों को स्वास्थ्य मंत्रालय ने नकारा!

हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना में हुई अतिरिक्त मौतों को नकार दिया है! केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘साइंस एडवांस’ पेपर में पब्लिश उस रिपोर्ट को सिरे से नकार दिया है, जिसमें भारत में कोविड महामारी के दौरान 2020 में 2019 के मुताबिक करीब 11.9 लाख ज्यादा मौतों का दावा किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2020 में अत्यधिक मृत्यु दर को पेश करने वाली इस रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए कहा है कि साइंस एडवांस पेपर के दावे अपुष्ट और अस्वीकार्य अनुमानों पर आधारित हैं। पेपर में अत्यधिक मौतों के आंकड़ों को तीन गुना तक बढ़ाकर बताया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इस पेपर को पब्लिश करने वालों ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के विश्लेषण के लिए मानक पद्धति फॉलो करने का दावा किया है लेकिन उनकी पद्धति में गंभीर खामियां हैं। जबकि आंकड़े कहते हैं कि 2019 की तुलना में 2020 में मृत्यु पंजीकरण में 4.74 लाख की बढ़ोतरी हुई है।अगर हम उस सीआरएस डेटा को देखें तो 2020 में ज्यादा डेथ का नंबर 4.74 लाख है जबकि रिसर्च पेपर में 12 लाख का दावा किया गया है तो पहला आंकड़ा तो बिल्कुल गलत साबित हो जाता है। 2018 और 2019 में मृत्यु पंजीकरण में पिछले वर्षों की तुलना में 4.86 लाख और 6.90 लाख की बढ़ोतरी हुई थी। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी. के. पॉल का कहना है कि 2019 के मुकाबले 2020 में अत्यधिक मृत्यु दर की जानकारी सही नहीं है। ये जो स्टडी पब्लिश हुई है, उसमें 2020 में 2019 के मुकाबले ज्यादा मौतें होने की बात कही है लेकिन स्टडी करने वालों का तरीका बहुत ही कमजोर है। 

उस समय देश में 14 राज्यों में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 चल रहा था और रिसचर्स ने केवल कुछ महीनों का ही डेटा एकत्र किया है जबकि सर्वे में पूरे साल का डेटा लिया जाता है। सरकार इस बात को बिल्कुल नहीं मानती है कि 2019 के मुकाबले 2020 में 11.9 या 12 लाख ज्यादा डेथ ज्यादा हुई है। भारत में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) का एक पुख्ता सिस्टम है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने इसे कानूनी रूप से लागू किया है। देश में जितनी भी मौतें होती हैं, उस डेटा को रजिस्टर में लिखा जाता है। पहले स्टेट में रजिस्टर्ड होता है और उसके बाद केंद्र के पास रिपोर्ट आती है। अगर हम उस सीआरएस डेटा को देखें तो 2020 में ज्यादा डेथ का नंबर 4.74 लाख है जबकि रिसर्च पेपर में 12 लाख का दावा किया गया है तो पहला आंकड़ा तो बिल्कुल गलत साबित हो जाता है।

2019 में 92% और 2020 में 99.9% डेथ रजिस्ट्रर्ड हुई हैं। कोविड के दौरान 2020 में जो 4.74 लाख ज्यादा मौतें हुई हैं, उसमें कोविड के कारण हुई मौतें भी शामिल हैं। सरकार ने कोविड के दौरान ग्राउंड लेवल पर डेटा जुटाया है और पूरा अनुमान लगाया है। 2020 में कोविड के कारण हुई मौतों की संख्या करीब 1.49 लाख है, जो 4.74 लाख में ही शामिल है। सभी ज्यादा मौतें केवल कोविड के कारण नहीं हो सकती हैं और भारत का डेटा भी यही कहता है। साइंस जर्नल की स्टडी में अनुमान से कहीं ज्यादा आकलन दिखाया गया है जो सचाई से मेल नहीं खाता है। डॉ. पॉल का कहना है कि इस प्रकाशित किए गए पेपर में इस तरह के विश्लेषण की आवश्यकता के लिए गलत तर्क दिया गया है और दावा किया गया है कि भारत सहित निम्न और मध्यम आय वाले देशों में महत्वपूर्ण पंजीकरण प्रणाली कमजोर है। बता दें कि 2018 और 2019 में मृत्यु पंजीकरण में पिछले वर्षों की तुलना में 4.86 लाख और 6.90 लाख की बढ़ोतरी हुई थी। नीति आयोग के सदस्य. वी. के. पॉल का कहना है कि 2019 के मुकाबले 2020 में अत्यधिक मृत्यु दर की जानकारी सही नहीं है। यह सत्य से बहुत दूर है। उस समय देश में 14 राज्यों में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 चल रहा था और रिसचर्स ने केवल कुछ महीनों का ही डेटा एकत्र किया है जबकि सर्वे में पूरे साल का डेटा लिया जाता है। सरकार इस बात को बिल्कुल नहीं मानती है कि 2019 के मुकाबले 2020 में 11.9 या 12 लाख ज्यादा डेथ ज्यादा हुई है।भारत में नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) अत्यधिक मजबूत है और 99% से अधिक मृत्यु की जानकारी देती है।अगर हम उस सीआरएस डेटा को देखें तो 2020 में ज्यादा डेथ का नंबर 4.74 लाख है जबकि रिसर्च पेपर में 12 लाख का दावा किया गया है तो पहला आंकड़ा तो बिल्कुल गलत साबित हो जाता है। यह रिपोर्टिंग वर्ष 2015 में 75 प्रतिशत से लगातार बढ़कर वर्ष 2020 में 99 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

जब किरेन रिजिजू ने बुलाई सर्वदलीय बैठक!

हाल ही में किरेन रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी! संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने वाला है, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस सत्र के दौरान विपक्ष भी ‘नीट’ पेपरलीक और रेल सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। यह सत्र सोमवार से शुरू होगा और 12 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 बैठकें होंगी। बजट सत्र से पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सभी दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान बजट सत्र में उठने वाले मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सरकार इस सत्र में छह विधेयक पेश कर सकती है, जिसमें 90 साल पुराने एयरक्राफ्ट एक्ट को बदलने वाला विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बजट के लिए भी संसद से मंजूरी मांगी जाएगी। 22 जुलाई से शुरू होने वाला संसद का ये सत्र 12 अगस्त को समाप्त होगा। इस दौरान 19 बैठकें होंगी। विधेयक को भी पेश करने, विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है। गुरुवार को जारी लोकसभा बुलेटिन में कहा गया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संगठनों की भूमिका में अधिक स्पष्टता और तालमेल लाना है।यह बजट सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। गुरुवार को जारी लोकसभा बुलेटिन में कहा गया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संगठनों की भूमिका में अधिक स्पष्टता और तालमेल लाना है।इसके साथ ही, 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले यह आखिरी पूर्ण बजट भी होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार इस बजट में कई बड़े ऐलान कर सकती है। इस सत्र में सरकार की ओर से छह विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। इनमें 90 साल पुराने विमान अधिनियम को बदलने वाला विधेयक भी शामिल है। इस सत्र में जम्मू-कश्मीर के बजट के लिए संसद की मंजूरी भी मिलेगी। इस केंद्रशासित प्रदेश में फिलहाल विधानसभा अस्तित्व में नहीं है और केंद्र का शासन है।

सीतारमण सोमवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश करेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण 23 जुलाई को आम बजट पेश करने वाली हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने आज संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई है, ताकि उन मुद्दों को समझा जा सके जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाना चाहते हैं। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल ने घोषणा की है कि वह एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगा और संसद में राज्य के हित के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाएगा।

बीजेपी संसदीय दल के अध्यक्ष चुने गए नवीन पटनायक ने अपनी पार्टी के सांसदों से ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठाने को कहा है। इस सत्र में वित्त विधेयक के अलावा सरकार ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक को भी पेश करने, विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है। गुरुवार को जारी लोकसभा बुलेटिन में कहा गया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संगठनों की भूमिका में अधिक स्पष्टता और तालमेल लाना है।

भारतीय वायुयान विधेयक, 2024 नागरिक उड्डयन क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी के लिए सक्षम प्रावधान प्रदान करने की खातिर 1934 के विमान अधिनियम को बदलने का प्रयास करता है। बजट सत्र में उठने वाले मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। सरकार इस सत्र में छह विधेयक पेश कर सकती है, जिसमें 90 साल पुराने एयरक्राफ्ट एक्ट को बदलने वाला विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बजट के लिए भी संसद से मंजूरी मांगी जाएगी।सत्र के दौरान पेश और पारित किए जाने वाले अन्य विधेयकों में स्वतंत्रता पूर्व के कानून की जगह लेने वाला बॉयलर विधेयक, कॉफी (संवर्धन और विकास) विधेयक और रबर संवर्धन और विकास विधेयक शामिल हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) का भी गठन किया है। सीतारमण सोमवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश करेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण 23 जुलाई को आम बजट पेश करने वाली हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने आज संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई है, ताकि उन मुद्दों को समझा जा सके जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाना चाहते हैं।बीएसी संसदीय कामकाज का एजेंडा तय करती है।

जब जिंदल ग्रुप के अधिकारी पर महिला ने लगाया छेड़खानी का आरोप!

हाल ही में एक महिला ने जिंदल ग्रुप के अधिकारी पर छेड़खानी का आरोप लगाया है! एक महिला ने आरोप लगाया है कि जिंदल ग्रुप की तरफ से प्रोमोटेड फर्म के एक शीर्ष अधिकारी ने कोलकाता से अबू धाबी की उड़ान के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की। इतनी ही नहीं महिला ने कथित अधिकारी पर फोन में पोर्न दिखाने का भी आरोप लगाया। अपने आरोपों की जानकारी उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किा। इस पर सांसद और जिंदल स्टील के अध्यक्ष नवीन जिंदल ने कहा कि उन्होंने अपनी टीम को मामले की जांच करने का आदेश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ओमान स्थित वल्कन ग्रीन स्टील का सीईओ है। एक्स पर एक पोस्ट में, महिला, ने लिखा, ‘कोलकाता से अबू धाबी (बोस्टन के लिए ट्रांजिट) की फ्लाइट में मेरे साथ हुई एक घटना को साझा कर रही हूं। स्टाफ ने अबू धाबी में पुलिस को भी सूचित किया जो विमान के गेट खुलते ही इंतजार कर रहे थे। मैं शिकायत नहीं कर सकती थी क्योंकि मैं बोस्टन के लिए अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट मिस कर देती।मैं एतिहाद के कर्मचारियों और अबू धाबी पुलिस द्वारा मुझे प्रदान किए गए समर्थन के लिए बहुत आभारी हूं। महिला की प्रोफाइल में हार्वर्ड में इंडिया कॉन्फ्रेंस की सह-अध्यक्ष बताया गया है। उसने आरोप लगाया कि वह ‘एक उद्योगपति के बगल में’ बैठी थी। महिला ने उसे ‘जिंदल स्टील का सीईओ’ बताया।

महिला ने लिखा कि उसकी उम्र लगभग 65 साल होगी। उसने मुझे बताया कि वह अब ओमान में रहता है, लेकिन अक्सर यात्रा करता है।सांसद नवीन जिंदल तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं, ताकि उन्हें पता चले कि नेतृत्व में किस तरह के लोग हैं। मुझे इस बात का भी डर है कि यह उत्पीड़क सत्ता में बैठे हुए अपनी महिला कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा होगा। उसने मुझसे बातचीत शुरू की – हमारी जड़ों, परिवार आदि के बारे में बहुत सामान्य बातचीत की। वह राजस्थान के चुरू से है… बातचीत मेरे हॉबी पर होने लगी। उसने पूछा कि क्या मुझे फिल्में देखना पसंद है और मैंने कहा कि हां, जरूर। फिर उसने मुझे बताया कि उसके फोन में कुछ मूवी क्लिप हैं। महिला ने आरोप लगाया कि उसने अपना फोन और इयरफोन निकालकर मुझे पोर्न दिखाया। इसके बाद वह अश्लील तरीके से मुझे छूने लगा।

महिला ने आगे लिखा कि इससे ‘मैं सदमे और डर से जम गई थी। मैं आखिरकार वॉशरूम भाग गई और एयर स्टाफ से शिकायत की। शुक्र है कि एतिहाद की टीम बहुत सक्रिय थी और उसने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने मुझे अपने बैठने की जगह पर बैठाया और मुझे चाय और फल दिया। स्टाफ ने अबू धाबी में पुलिस को भी सूचित किया जो विमान के गेट खुलते ही इंतजार कर रहे थे। मैं शिकायत नहीं कर सकती थी क्योंकि मैं बोस्टन के लिए अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट मिस कर देती।

महिला ने कहा कि मुझे अगले गेट तक ले जाया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह मेरे पास न आए। जब पुलिस ने उससे सवाल पूछे तो उसने इनकार भी नहीं किया। महिला ने लिखा कि मैं यह इसलिए शेयर कर रही हूं क्योंकि मैं सभी को याद दिलाना चाहती हूं कि ऐसा कुछ किसी के साथ भी हो सकता है। बता दें कि आरोपी ओमान स्थित वल्कन ग्रीन स्टील का सीईओ है। एक्स पर एक पोस्ट में, महिला, ने लिखा, ‘कोलकाता से अबू धाबी बोस्टन के लिए ट्रांजिट की फ्लाइट में मेरे साथ हुई एक घटना को साझा कर रही हूं। मैं एतिहाद के कर्मचारियों और अबू धाबी पुलिस द्वारा मुझे प्रदान किए गए समर्थन के लिए बहुत आभारी हूं। महिला ने लिखा कि उसकी उम्र लगभग 65 साल होगी। उसने मुझे बताया कि वह अब ओमान में रहता है, लेकिन अक्सर यात्रा करता है। उसने मुझसे बातचीत शुरू की – हमारी जड़ों, परिवार आदि के बारे में बहुत सामान्य बातचीत की।मैं इस घटना को जिंदल स्टील के संस्थापक, सांसद नवीन जिंदल तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं, ताकि उन्हें पता चले कि नेतृत्व में किस तरह के लोग हैं।महिला ने आरोप लगाया कि उसने अपना फोन और इयरफोन निकालकर मुझे पोर्न दिखाया। इसके बाद वह अश्लील तरीके से मुझे छूने लगा। मुझे इस बात का भी डर है कि यह उत्पीड़क सत्ता में बैठे हुए अपनी महिला कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा होगा।