Sunday, March 15, 2026
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कोर्ट में क्या फैशन परेड चल रही है! सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने वकील की पोशाक की आलोचना की l

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घटना शुक्रवार की है. एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट से एक निर्माण विध्वंस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की पीठ में ‘तत्काल आधार’ पर करने का अनुरोध किया है। लेकिन चीफ जस्टिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया. सुप्रीम कोर्ट के एक वकील को देश के मुख्य न्यायाधीश ने ‘उचित’ पोशाक न पहनने पर फटकार लगाई। स्पष्ट रूप से चिढ़े हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उनसे पूछा, “क्या अदालत में कोई फैशन परेड चल रही है?” जब बिना तैयारी वाला वकील उनकी पोशाक के बारे में जवाबी बहस करने गया, तो मुख्य न्यायाधीश ने उसे बीच में ही रोक दिया और कहा, “माफ करें।” यदि आप ठीक से तैयार होकर नहीं आये तो मैं आपका भाषण नहीं सुन पाऊंगा।

घटना शुक्रवार की है. एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट से एक निर्माण विध्वंस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की पीठ में ‘तत्काल आधार’ पर करने का अनुरोध किया है। हालांकि, जैसे ही उन्होंने केस के बारे में बात की तो चीफ जस्टिस ने उन्हें रोका और पहले कहा, ‘ईमेल करो।’ इसके बाद उन्होंने पूछा, ‘आपके गले में बंधी सफेद पट्टी कहां है?’ क्या यहां कोई फैशन परेड हो रही है?” वकील ने जज को इसका कारण बताया। उन्होंने कहा कि एज्लास आने की जल्दी में वह बैंड पहनना भूल गए थे. लेकिन चीफ जस्टिस ने उस दलील को नहीं सुना. यह स्पष्ट करते हुए कि वह अदालत की पोशाक के बारे में कोई भी दलील नहीं सुनेंगे, मुख्य न्यायाधीश ने वकील को सूचित किया कि वह उनके किसी भी बयान को तब तक नहीं सुनेंगे जब तक कि संबंधित वकील अदालत के नियमों के अनुसार कुछ कपड़े नहीं पहनता। वकीलों को अदालत में क्या पहनना चाहिए, इस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सख्त नियम हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, सेशन कोर्ट, ट्रिब्यूनल कोर्ट और सिटी कोर्ट के वकीलों को ब्लैक एंड व्हाइट ड्रेस, ब्लैक जॉब और व्हाइट ‘नेक बैंड’ पहनना अनिवार्य है। यह नियम महिला और पुरुष दोनों वकीलों पर लागू होता है। विशिष्ट ड्रेस कोड का पालन न करना अदालत के आदेश का उल्लंघन है। मुख्य न्यायाधीश ने वकील को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई और समझाया कि वह देश की कानून व्यवस्था का फैसला करने वाली अदालत में अनुशासनहीनता की किसी भी घटना को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

स्नातक स्तर पर मेडिसिन के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के लीक हुए प्रश्नपत्र को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया है। हालांकि, दोबारा जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर कई मामलों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने सोमवार को दोबारा जांच का आदेश नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोबारा परीक्षा का आदेश देना आखिरी हथियार है. एनआईटी में पूर्व में लगे बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और गड़बड़ियों के आरोपों पर बुधवार तक रिपोर्ट मांगी गई है। केंद्र की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने अनुरोध किया कि सुनवाई की अगली तारीख गुरुवार को तय की जाए. उस दिन इस मामले की अगली सुनवाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को तीन मुद्दों का खुलासा करने का निर्देश दिया। एक, प्रश्न कैसे लीक हुआ? दो, खामी कहां रही? तीन, प्रश्नपत्र और परीक्षा के बीच कितना समय है?

शीर्ष अदालत ने सोमवार को दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दिया, लेकिन संकेत दिया कि उन लोगों के लिए दोबारा परीक्षा की व्यवस्था की जा सकती है, जिन्होंने ऑसडुपा के इस्तेमाल से परीक्षा पास की है। सीबीआई पहले ही भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर चुकी है। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसी से बुधवार तक जांच की प्रगति पर रिपोर्ट देने को कहा है. मुख्य न्यायाधीश जानना चाहते हैं कि सोमवार को नेट मामले की सुनवाई में प्रश्नपत्र कहां तैयार किया गया था. एनटीए के मुताबिक, प्रश्न पत्र दिल्ली में तैयार किया गया था. बताया गया है कि नीट प्रश्न पत्र पिछले 5 मई को परीक्षा के दिन सुबह 10:30 से 11:00 बजे के बीच खोला गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि प्रश्न पत्र टेलीग्राम ऐप पर लीक हो गया था। चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि अगर टेलीग्राम के जरिए प्रश्न लीक हुआ तो बड़े पैमाने पर प्रश्न लीक होने का मामला है. स्नातक स्तर पर मेडिसिन के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के लीक हुए प्रश्न पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया है। हालांकि, दोबारा जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर कई मामलों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने सोमवार को दोबारा जांच का आदेश नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोबारा परीक्षा का आदेश देना आखिरी हथियार है. एनआईटी में पूर्व में लगे बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और गड़बड़ियों के आरोपों पर बुधवार तक रिपोर्ट मांगी गई है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अनुरोध किया कि सुनवाई की अगली तारीख गुरुवार को तय की जाए। उस दिन इस मामले की अगली सुनवाई है.

एशिया कप में भारत ने पाकिस्तान को हराकर की शुरुआत, हरमनप्रीत ने 35 गेंद शेष रहते 7 विकेट से जीता मैच

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भारत की महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप में जीत के साथ शुरुआत की है. पहले मैच में हरमनप्रीता ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़े अंतर से जीत हासिल की थी. निदारा भारत के सामने कोई प्रतिरोध नहीं कर सके. महिला एशिया कप के पहले मैच में भारत ने पाकिस्तान को 10 विकेट से हरा दिया. पहले बल्लेबाजी करते हुए निदा डार की टीम ने 19.2 ओवर में 108 रन बनाए. जवाब में हरमनप्रीत कौर ने 14.1 ओवर में 3 विकेट खोकर 109 रन बना लिए. भारतीयों ने अंत में बिना किसी कारण के जल्दबाजी करते हुए कई विकेट गंवाये।

बाबर आजम की तरह निदादर भी भारत के खिलाफ बेबस दिखे. अभ्यास मैच खेलने के जज्बे के दम पर भारत ने आसान जीत हासिल की। भारतीय टीम जीत के लिए 109 रनों का लक्ष्य लेकर बल्लेबाजी करने उतरी. स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की पहले विकेट की साझेदारी में 9.3 ओवर में 85 रन बने। उससे भारतीय टीम की जीत पक्की हो गई. स्मृति ने 31 गेंदों पर 45 रन बनाए. उनके बल्ले से 9 चौके निकले. शेफाली ने 29 गेंदों पर 40 रन बनाये. 6 चौके और 1 छक्का लगाया. तीसरे नंबर पर दयालन हेमलता ने 11 गेंदों पर 14 रन की पारी खेली. उनके बल्ले से 3 चौके निकले. अंततः 22 गज की दूरी पर हरमनप्रीत और जेमिमा रोड्रिग्ज उनके साथ शामिल हो गईं। भारतीय टीम के कप्तान के बल्ले से 11 गेंदों पर 5 रनों की नाबाद पारी निकली. जेमाइमा 3 गेंदों पर 3 रन बनाकर नाबाद रहीं।

पाकिस्तान की सबसे सफल गेंदबाज सैयदा अरूब शाह ने 9 रन देकर 2 विकेट लिए. उन्होंने शेफाली और मंधाना दोनों को आउट किया. नशरा संधू ने 19 रन देकर 1 विकेट लिया। पाकिस्तान के किसी अन्य गेंदबाज ने विकेट नहीं लिया.

इससे पहले दांबुला से 22 गज की दूरी पर पाकिस्तान के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. भारतीय गेंदबाजों के कारण उनकी रणनीति सफल नहीं हो पाई. दीप्ति शर्मा, रेनुका सिंह, पूजा बस्तरकर पाकिस्तानी बल्लेबाजों की गेंदों को समझ नहीं पाईं. पाकिस्तान के दोनों ओपनर गुल फिरोजा (5) और मुनीबा अली (11) रन नहीं बना सके. तीसरे नंबर पर आईं सिदरा अमीन, तूबा हसन और फातिमा सना को थोड़ा संघर्ष करना पड़ा. अमीन ने 35 गेंदों पर 25 रन की पारी खेली. 3 चौके मारे. उन्होंने 19 गेंदों पर 22 रन बनाये. उन्होंने 3 चौके भी लगाए. फातिमा 16 गेंदों पर 22 रन की पारी खेलकर नाबाद रहीं. उनके बल्ले से 1 चौका और 2 छक्के निकले. पाकिस्तान में कोई और कुछ नहीं कह सका. उन्होंने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाये. कोई महत्वपूर्ण जोड़ियां नहीं बनीं। भारत की सबसे सफल गेंदबाज दीप्ति ने 20 रन देकर 3 विकेट लिए. रेणुका ने 14 रन देकर 2 विकेट लिए। श्रेयंका पाटिल ने 14 रन देकर 2 विकेट लिए. पूजा ने 31 रन देकर 2 विकेट झटके। हरमनप्रीत पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच जीतकर खुश थीं. भारतीय टीम के कप्तान ने कहा कि उनका लक्ष्य पूरी प्रतियोगिता के दौरान आक्रामक क्रिकेट खेलना है.

भारत ने टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत आयरलैंड को हराकर की. दूसरे मैच में प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान है. अमेरिका से हारे बाबर अजमेरा लेकिन भारत-पाकिस्तान की लड़ाई का मतलब एक और तनाव. आयरलैंड पर भारत की जीत के नायकों में से एक हार्दिक पंड्या आश्वस्त हैं. ऐसा लग रहा है जैसे वह पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरने को तैयार ही नहीं हैं.

9 जून को होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच के बारे में हार्दिक ने कहा, ‘मैं हमेशा एक बड़ा मैच खेलने के लिए उत्सुक रहता हूं। ऐसे मैचों का महत्व अलग होता है. पाकिस्तान के खिलाफ किस्मत हमेशा मेरे पक्ष में रही है. उनके खिलाफ कुछ मैचों में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है.” गौरतलब है कि हार्दिक ने पाकिस्तान के खिलाफ छह टी20 मैच खेले हैं. उन्होंने 84 रन बनाए. 11 विकेट लिए.

भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों की दिलचस्पी और जुनून से हार्दिक अनजान नहीं हैं. हालांकि, वह इस मैच को दोनों देशों के बीच लड़ाई के तौर पर नहीं देखना चाहते. भारतीय टीम के उपकप्तान ने कहा, ”यह कोई लड़ाई नहीं है. लेकिन ये मैच इतिहास रच सकता है. भारत-पाकिस्तान के मैच हमेशा रोमांचक होते हैं. बहुत जोश और जुनून है. देखते ही देखते कई लोग उत्साहित हो गए. कृपया सभी लोग उत्साहित न हों। धैर्य रखें। उम्मीद है कि हम एक टीम के रूप में मैदान पर क्रिकेट अनुशासन बनाए रख सकेंगे। टीम में हर किसी का एक लक्ष्य होगा. अगर हम अपना काम ठीक से करें तो हम एक खूबसूरत दिन का आनंद ले सकते हैं। भारत के खिलाफ जीत ही बाबर के दबाव से राहत दिला सकती है. हार्दिक जानते हैं कि पाकिस्तान जीत के लिए बेताब होगा। वह अपनी ताकत पर भरोसा कर रहा है.

लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के लिए क्या बोली आम आदमी पार्टी?

हाल ही में आम आदमी पार्टी ने लोकसभा उपचुनाव में मिली बीजेपी की हार को एक बड़ी हार बताया है! पंजाब की जनता ने जालंधर वेस्ट विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को रिकॉर्ड मतों से जीत दिलाकर भगवंत मान सरकार के प्रति अपने अटूट विश्वास पर अपनी मुहर लगा दी है। आप के सभी कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि हमारे प्रत्याशी मोहिंदर भगत ने 38 हजार मतों से जीत दर्ज की है। इस जीत ने यह संदेश दिया है कि जो आम आदमी पार्टी को धोखा देगा, उसकी राजनीति खत्म हो जाएगी।आप कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत से शीतल अंगुराल को जिताया था, लेकिन वो धोखा देकर भाजपा में चले गए और अब उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, राष्ट्रीय महासचिव संगठन डॉ. संदीप पाठक ने कहा कि जालंधर वेस्ट की जीत ने केजरीवाल के काम की राजनीति पर मोहर लगाई है और भाजपा के मुंह पर करारा तमाचा मारा है। इस जीत ने यह भी साबित किया है कि अरविंद केजरीवाल और सरदार भगवंत मान पर पंजाब की जनता का भरोसा कायम है और उनके काम से बेहद खुश है। संजय सिंह ने कहा कि शुक्रवार को पंजाब के जालंधर वेस्ट उपचुनाव का भी परिणाम आया है। लगभग 38 हजार मतों के अंतर से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मोहिंदर भगत चुनाव जीत गए हैं। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने अपने सभी मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ दिन-रात प्रचार करके चुनाव लड़ा। आम आदमी पार्टी के संगठन की यही खूबसूरती है कि सभी लोग मिलकर अपने लक्ष्य के लिए काम करते हैं। लोकसभा चुनाव का परिणाम हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन पंजाब के जालंधर वेस्ट के उपचुनाव ने साबित कर दिया कि राज्य सरकार के प्रति पंजाब के लोगों की पूरी आस्था और विश्वास अटूट है। यह परिणाम इस बात को साबित करता है। संजय सिंह ने कहा कि अगर पूरे देश में इंडिया गठबंधन की बात करें, तो इंडिया गठबंधन के लिए अच्छी खबरें हैं। इंडिया लगभग एकतरफा इस चुनाव में जीत रहा है। इसलिए भाजपा को यह बात समझ लेना चाहिए कि सिर्फ कोरे वादे और झूठे जुमलों से काम चलने वाला नहीं है। भाजपा को किसानों, नौजवानों के लिए कुछ करके दिखाना होगा। अग्निवीर जैसी योजना को खत्म करके पुरानी सेना की भर्ती बहाल करनी होगी।

संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी और उत्साह जनक बात यह है कि आम आदमी पार्टी को ईश्वर का वरदान मिला है। जो पार्टी को धोखा देगा, उसकी राजनीति खत्म हो जाएगी। अब तक का इतिहास यही दिखाता है कि जो भी आम आदमी पार्टी को छोड़कर भाजपा में गया, उसका क्या हस्र हुआ, यह पूरे देश के सामने है। पंजाब के उपचुनाव में हमारे विधायक, सांसद, मंत्री और अन्य साथियों के लिए एक बड़ा संदेश भी छिपा है। हम यह नहीं कहते हैं कि हमारे अंदर सिर्फ अच्छाइयां ही हैं। हमारे अंदर भी कुछ कमियां होंगी। अगर कुछ बात है तो हमें आपस में बैठ कर संवाद करना चाहिए। एक-दूसरे से मतभेद है तो उसे दूर कीजिए, लेकिन आम आदमी पार्टी के परिवार के अंदर ही रहिए। इस परिवार के बाहर जाएंगे तो कोई इज्जत नहीं मिलेगी।

उन्होंने जालंधर से आम आदमी पार्टी के सांसद रहे रिंकू का उदाहरण देते हुए कहा कि रिंकू को हमारे कार्यकर्ताओं ने बड़ी मेहनत करके जिताया था। हम लोगों ने छोटा भाई मान कर उसको बहुत समझाया, लेकिन वो भाजपा में चला गया और लोकसभा का चुनाव हार गया। इसके अलावा, जालंधर वेस्ट के विधायक शीतल भी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के कड़ी मेहनत की बदौलत जीते थे। लेकिन शीतल आम आदमी पार्टी को छोड़कर भाजपा में चले गए। इसी वजह से जालंधर वेस्ट का उपचुनाव हुआ और आप के प्रत्याशी मोहिंदर भगत 38 हजार वोटों से जीत गए। भाजपा में जाने के बाद रिंकू और शीतल दोनों ही हार गए। इन दोनों से शिक्षा मिलती है कि आप को धोखा देंगे तो राजनीति खत्म हो जाएगी। आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता बड़ी निष्ठा और मेहनत के साथ किसी के साथ जुड़ता है, उसको किसी तरह से ठेस पहुंचाना ठीक नहीं है। अगर पार्टी मुसीबत में हो तो उसको धोखा देना ठीक नही है। जालंधर वेस्ट उपचुनाव का बड़ा संदेश है कि अगर पार्टी मुसीबत में हो तो उसके साथ मजबूती से खड़ा रहिए। अगर पार्टी को छोड़कर जाएंगे तो आपको हार का मुंह देखना होगा।

जालंघर वेस्ट सीट पर आप की जीत पर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक ने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह जीत इस बात का प्रमाण है कि पंजाब की जनता आज भी आम आदमी पार्टी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान के कामों पर भरोसा करती है। यह विशाल बहुमत इस बात का संकेत है कि पंजाब में जो काम भगवंत मान की सरकार कर रही है, उसकी सराहना जनता कर रही है। जिस तरीके से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल काम की राजनीति को पूरे देश में लेकर जा रहे हैं यह जीत उस काम की राजनीति पर मोहर लगाती है। साथ ही, यह जीत उन लोगों के लिए संदेश है, जो पैसा या पॉवर के लिए आप को छोड़ कर चले गए। जालंधर से ‘‘आप’’ के निशान पर जो लोग लोकसभा और विधानसभा चुनाव जीते थे, वह भाजपा में चले गए। उन्होंने जनता के मतों का अपमान किया। जो जनता के बहुमत के साथ गद्दारी करता है, जनता उसे कभी माफ नहीं करती। जनता ऐसे व्यक्ति को दोबारा प्यार या आशीर्वाद नहीं देती। जो लोग छोटे से फायदे के लिए एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, उनसे कहना चाहता हूं कि आप अपना राजनीतिक करियर बर्बाद मत कीजिए।जो लोग एजेंसियों के डर, पैसा, पावर या किसी अन्य परिस्थिति में पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, उनको अपने धर्म पर अड़े रहना चाहिए। परेशानी में ही एक व्यक्ति की परीक्षा होती है। संकट की घड़ी आने पर जो लोग भाग जाते हैं, ऐसे लोगों को जनता नकार देती है। हमें चट्टान के जैसे भाजपा के सामने खड़े रहना है। हमें संघर्ष करना है। केजरीवाल जी जेल के अंदर रहकर इनको 400 से 240 पर लेकर आ गए हैं। अगर उनको ज्यादा दिन तक जेल के अंदर रखा गया तो यह स्पष्ट दिख रहा है कि अब भाजपा को 40 सीटों पर आने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। पंजाब में आम आदमी पार्टी व्यवस्थागत परिवर्तन लाने की कोशिश कर रही है। 75 सालों में जो काम नहीं हुए उन कामों को आम आदमी पार्टी कर रही है। भाजपा केजरीवाल को जेल में रखकर कमजोर करने की कोशिश कर रही है। लेकिन यह उपचुनाव बीजेपी के मुंह पर करारा तमाचा है। अरविंद केजरीवाल की जड़ें अब बहुत अंदर तक जा चुकी हैं। आप इस तरह से अरविंद केजरीवाल को नहीं हरा सकते।

जनता ने भाजपा को जो आशीर्वाद दिया है, उसको मानते हुए भाजपा को देश हित में कार्य करने चाहिए। यह गुंडागर्दी और घटिया राजनीति भाजपा को बंद करनी चाहिए। इस देश के इतिहास और संस्कृति को अगर आप उठाकर देखेंगे तो कोई भी ऐसी पार्टी जिसने द्वेष, गुंडागर्दी और तानाशाही जैसे हथियारों का जब भी इस्तेमाल किया है, वह ज्यादा समय तक चल नहीं पाया है। भाजपा के लिए अभी भी समय है कि वह इस बात को समझे और गंदी राजनीति से बाज आए। जब भाजपा की शुरुआत हुई थी तो उस वक्त आडवाणी जी और अटल बिहारी वाजपेई जी स्वराज की बात करते थे। आज इनकी स्वराज की बातें गुंडागर्दी और तानाशाही में बदल चुकी हैं। आज यह सिर्फ रात दिन जोड़-तोड़ और खरीद-फरोख्त के साथ सरकार बनाने और गिराने में लगे हुए हैं। जब आप भारत जैसे विशाल और महान देश का नेतृत्व कर रहे हों तो इस तरह की चोरी आपको शोभा नहीं देती। आपको अपनी सोच में किसी भी कीमत पर परिवर्तन लाना ही पड़ेगा। आज सवाल हार और जीत का नहीं है, आज सवाल देश का है।

आखिर किसने और कैसे बनाया आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स?

आज हम आपको बताएंगे कि कश्मीरी टाइगर्स आतंकी संगठन किसने और कैसे बनाया है! हाल ही में जम्मू कश्मीर के कठुआ इलाके में एक आतंकी हमला हुआ, जिसमें सेना के पांच से ज्यादा जवान शहीद हो गए! इसी बीच अचानक से एक पोस्टर वायरल होती है, नाम था कश्मीर टाइगर! जिसने लिखा कि इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी हम लेते हैं! यहां कुछ नए आतंकी संगठन भी बन गए हैं। साल 2019 के बाद से कश्मीर टाइगर्स, TRF, PAFF और लश्कर-ए- मुस्तफा नए आतंकी संगठ भी बन गए। पहले कश्मीर में मुख्यत: तीन टेररिस्ट ग्रुप सक्रिय थे। इनमें जैश,लश्कर और हिजबुल थे। बाद में अल बदर आया। इन नए आतंकी संगठनों को पाकिस्तान से मदद मिल रही है। सवाल यह कि आखिर यह आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स है क्या? यह कब बना और किसने बनाया? तो आज हम इन सभी अनसुलझे सवालों का जवाब देने वाले हैं!

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सोमवार आतंकवादियों ने घात लगाकर सेना की गाड़ी को निशाना बनाया। इस हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए। कठुआ के बदनोटा इलाके में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने सेना के ट्रक को निशाना बनाया। आतंकवादियों के पास हाईटेक हथियार थे और उनकी ओर से ग्रेनेड से भी हमला किया गया। आतंकवादियों ने पहाड़ी से घात लगाकर सेना के ट्रक पर पहले ग्रेनेड फेंका और फिर बताया जा रहा है कि उनकी ओर से स्नाइपर गन से फायरिंग की गई। सूत्रों का कहना है कि जिस वक्त हमला किया गया उस वक्त ट्रक की रफ्तार धीमी थी क्योंकि एक तरफ ऊंची पहाड़ी और दूसरी ओर खाई थी। हमले के बाद आतंकवादी जंगल की ओर भाग गए। पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह शैडो संगठन है जो जैश ए मोहम्मद के लिए काम करता है।

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स का नाम चर्चा में आता है। पिछले कुछ वर्षों में सेना ने आतंकियों की कमर तोड़ दी है और पुराने कई संगठन खत्म हो गए हैं। वहीं कुछ नए आतंकी संगठन भी बन गए हैं। साल 2019 के बाद से कश्मीर टाइगर्स, TRF, PAFF और लश्कर-ए- मुस्तफा नए आतंकी संगठ भी बन गए। पहले कश्मीर में मुख्यत: तीन टेररिस्ट ग्रुप सक्रिय थे। इनमें जैश,लश्कर और हिजबुल थे। बाद में अल बदर आया। इन नए आतंकी संगठनों को पाकिस्तान से मदद मिल रही है।

आतंकवादी संगठन कश्मीर टाइगर्स का नाम पहली बार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद सुर्खियों में आया था। पुलिस के अनुसार यह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का शैडो ग्रुप है। इसने पहली बार जून 2021 में दक्षिण कश्मीर में ग्रेनेड हमले को अंजाम देने की जिम्मेदारी ली थी। सेना की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने के बाद अब आतंकी संगठन अपने छोटे ग्रुप बनाने में लगे हुए हैं और पाकिस्तान के इशारे पर ऐसा किया जा रहा है। कठुआ हमले की जिम्मेदारी कश्मीर टाइगर्स ने ली है। कुछ साल पहले जैश का आतंकी मुफ्ती अल्ताफ उर्फ अबू जार निवासी अनंतनाग की ओर से एक वीडियो जारी किया गया। अबू जार ने इस वीडियो के जरिए यह बताया कि उसने नया आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स बना लिया है। उसने बताया कि उसके संगठन में काफी लोग हैं और जो इसके बैनर के तले काम करने वाले हैं। अबू जार लोकल है और कुछ सालों तक वह आतंकवादियों की मदद करता था। उसके बाद वह जैश में शामिल हो गया। आतंकी हमले के बाद कश्मीर टाइगर्स का कबूलनामा भी सामने आया है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सोमवार आतंकवादियों ने घात लगाकर सेना की गाड़ी को निशाना बनाया। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स का नाम चर्चा में आता है। पिछले कुछ वर्षों में सेना ने आतंकियों की कमर तोड़ दी है और पुराने कई संगठन खत्म हो गए हैं।इस हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए। कठुआ के बदनोटा इलाके में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने सेना के ट्रक को निशाना बनाया।आतंकी संगठन की ओर से एक पोस्ट में लिखा गया है कि 26 जून को डोडा में मारे गए तीन आतंकियों की मौत का बदला है। जल्द ही और हमले किए जाएंगे। ये लड़ाई कश्मीर की आजादी तक चलती रहेगी। खैर, यह थी इस आतंकवादी संगठन कश्मीर टाइगर्स के बारे में पूरी जानकारी!

क्या खुल गया है रामसेतु का रहस्य?

वर्तमान में राम सेतु का रहस्य खुल गया है इसरो ने पहले नक्शा बना लिया है! हाल ही में भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के द्वारा नासा के तथ्यों की मदद से रामसेतु का रहस्य खोल दिया गया है! इसरो के द्वारा समुद्र के भीतर स्थित रामसेतु का पहला नक्शा तैयार कर लिया गया है! आपको इस बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे! 

आपको बता दे कि इसरो के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी सैटेलाइट से मिले डेटा का इस्तेमाल करके राम सेतु का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा बनाया है। इस नक्शे से भारत और श्रीलंका के बीच बने जमीनी पुल के निर्माण को लेकर चल रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने अमेरिका के एक उपग्रह से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल करके राम सेतु, जिसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, उसका पहला समुद्र के नीचे का विस्तृत मैप तैयार किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि राम सेतु के निर्माण को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। बता दें कि भूवैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि भारत और श्रीलंका की उत्पत्ति का आपस में गहरा संबंध है। दोनों ही गोंडवाना के प्राचीन महाद्वीप का हिस्सा थे, जो टेथिस सागर में उत्तर की ओर बह गया था। यह नक्शा 29 किमी लंबे राम सेतु का पहला पानी के नीचे का नक्शा है, जो समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 8 मीटर दर्शाता है। वैज्ञानिकों ने पुल के नीचे 2-3 मीटर की गहराई वाले 11 संकरे चैनलों का पता लगाया, जो मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य के बीच पानी के मुक्त प्रवाह या आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करते हैं।इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के वैज्ञानिकों ने ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में कहा, ‘यह रिपोर्ट नासा के उपग्रह ICESat-2 के जल पारगम्य फोटॉन का इस्तेमाल करके एडम्स ब्रिज के बारे में जरूरी डिटेल्स प्रदान करने वाली पहली रिपोर्ट है। हमारे निष्कर्ष एडम्स ब्रिज और इसकी उत्पत्ति की समझ को और बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।

यह उपग्रह एक लेजर अल्टीमीटर से लैस है जो समुद्र के उथले क्षेत्रों में किसी भी संरचना की ऊंचाई को मापने के लिए फोटॉन या प्रकाश कणों को पानी में प्रवेश करने की अनुमति देता है। एडम्स ब्रिज भारत में रामेश्वरम द्वीप के दक्षिण-पूर्वी प्वाइंट धनुषकोडी से श्रीलंका के मन्नार द्वीप में तलाईमन्नार के उत्तर-पश्चिमी छोर तक फैला है। यह चूना पत्थर की छिछली चट्टानों की एक श्रृंखला से बनी पानी के नीचे की चोटी है, जिसके कुछ हिस्से पानी के ऊपर दिखाई देते हैं, लेकिन यहां कोई चट्टान या वनस्पति नहीं है। बता दें कि जोधपुर और हैदराबाद के NRSC शोधकर्ताओं ने एडम्स ब्रिज के बारे में कई जटिल विवरणों का पता लगाने के लिए नासा सैटेलाइट से खींची गई तस्वीरों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि पुल का 99.98 फीसदी हिस्सा समुद्र के पानी में डूबा हुआ है, जिसके कारण जहाजों से क्षेत्र का सर्वेक्षण संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने पुल के नीचे 2-3 मीटर की गहराई वाले 11 संकरे चैनलों का पता लगाया, जो मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य के बीच पानी के मुक्त प्रवाह या आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करते हैं।

भूवैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि भारत और श्रीलंका की उत्पत्ति का आपस में गहरा संबंध है। दोनों ही गोंडवाना के प्राचीन महाद्वीप का हिस्सा थे, जो टेथिस सागर में उत्तर की ओर बह गया था। लगभग 35-55 मिलियन वर्ष पहले लौरेशिया नाम के एक अन्य महाद्वीप से टकराकर अपनी वर्तमान स्थिति में आ गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों और हिमनदों के पिघलने से जुड़े समुद्र के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण जमीनी पुल ऊपर आ सकता है। यही नहीं 29 किमी लंबे राम सेतु का पहला पानी के नीचे का नक्शा है, जो समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 8 मीटर दर्शाता है। इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के वैज्ञानिकों ने ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में कहा, ‘यह रिपोर्ट नासा के उपग्रह ICESat-2 के जल पारगम्य फोटॉन का इस्तेमाल करके एडम्स ब्रिज के बारे में जरूरी डिटेल्स प्रदान करने वाली पहली रिपोर्ट है। रामेश्वरम के मंदिर अभिलेखों से पता चलता है कि यह पुल 1480 तक पानी के ऊपर था और एक चक्रवात के दौरान जलमग्न हो गया था। तो इस तरीके से इसरो के द्वारा सभी तथ्यों को एकत्रित करके भारत के सबसे पहले इतिहास राम सेतु का रहस्य खोल दिया गया है!

उत्तराखंड में बीजेपी को कैसे हरा पाई कांग्रेस?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि कांग्रेस ने बीजेपी को उत्तराखंड में कैसे हरा दिया है! उत्तराखंड में चल रहे विधानसभा उपचुनाव के वोटों की गिनती में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। 10 जुलाई को दोनों सीटों पर वोट डाले गए थे। आज चुनाव परिणाम घोषित किया जा रहा है। दोनों ही सीटों के शुरुआती रुझानों में भाजपा पिछड़ती नजर आ रही है। भाजपा को बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। वहीं, मंगलौर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी तीसरे स्थान पर खिसकती दिख रही है। मंगलौर सीट पर विधायक सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है। वहीं, बद्रीनाथ विधानसभा सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी के पाला बदलने के बाद उपचुनाव हो रहा है। बीजेपी दोनों सीटों पर बाहरी दूसरे दलों से आए उम्मीदवारों पर भरोसा करती दिख रही है। इस कारण कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ ढीली बनती दिख रही है। उपचुनाव के शुरुआती रुझान इसी तरफ इशारा करते दिख रहे हैं। बद्रीनाथ निवर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई थी। भाजपा ने उन्हें पार्टी उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन, उपचुनाव के मैदान में वह पिछड़ते दिख रहे हैं। वहीं, मंगलोर सीट पर विधायक के निधन के बाद सहानुभूति की लहर का असर नहीं दिख रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार यहां पर भी आगे चल रहे हैं। हालांकि, मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस और बसपा के बीच चुनावी टक्कर होती दिख रही है। भाजपा यहां तीसरे स्थान पर की पिछड़ती नजर आ रही है।

बद्रीनाथ सीट पर भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बद्रीनाथ से राजेंद्र सिंह भंडारी विधायक चुने गए। हालांकि, उन्हें भाजपा अपने पाले में लाने में कामयाब रही। ऐसे में यह सीट खाली हो गई। यहां से राजेंद्र भंडारी को एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा गया। हालांकि, इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर होती दिख रही है।

बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा ने पूर्व विधायक राजेंद्र भंडारी को उम्मीदवार बनाया। उनके समर्थन में पुष्कर सिंह धामी तक चुनावी मैदान में प्रचार करने उतरे। वहीं, मंगलौर विधानसभा सीट से करतार सिंह भड़ाना को प्रत्याशी बनाया गया। करतार सिंह भड़ाना हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विधायक रह चुके हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की सदस्यता ली थी। इस प्रकार भाजपा ने बाहरी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया।वहीं, कांग्रेस अलग रणनीति के साथ उपचुनाव के मैदान में उतरी। कांग्रेस ने मंगलौर सीट पर अनुभवी और बद्रीनाथ सीट पर नए चेहरे को चुनावी मैदान में उतारा। मंगलौर सीट से काजी मोहम्मद निजामुद्दीन और बद्रीनाथ सीट से प्रत्याशी लखपत बुटोला भाजपा को कड़ी टक्कर देते दिखे।

उत्तराखंड उपचुनाव के चार राउंड के वोटों की गिनती के बाद असर साफ दिख रहा है। मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की बढ़त लगातार बड़ी हो रही है। कांग्रेस उम्मीदवार काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने 4898 वोटों की बढ़त बना ली है। तीसरे राउंड के वोटों की गिनती के बाद काजी मोहम्मद निजामुद्दीन 16,696 वोटों के साथ आगे निकलते दिख रहे हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के उबैदुर रहमान मोंटी 11,798 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। भारतीय जनता पार्टी के करतार सिंह भड़ाना 7630 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर हैं।

बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर तीसरे राउंड में भी कांग्रेस उम्मीदवार लखपत सिंह बुटोला बढ़त बनाई हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार लखपत सिंह बुटोला लगातार पहले नंबर पर बने हुए हैं। उन्हें अब तक 7223 वोट मिले हैं। वहीं, भाजपा के राजेंद्र सिंह भंडारी 6062 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इस प्रकार कांग्रेस उम्मीदवार ने 1161 वोटों की बढ़त बनाई हुई है।

बीजेपी ने पिछले समय में दूसरे दलों से नेताओं को लेकर चुनावी मैदान में उतारा है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान ऐसे मामले कई सीटों पर देखने को मिले। इन उम्मीदवारों से पार्टी का आम कार्यकर्ता कनेक्ट ही नहीं कर पाया। उत्तराखंड में भी यह होता दिख रहा है। बद्रीनाथ सीट पर 2017 के चुनाव में भाजपा ने कब्जा जमाया था। लेकिन, 2022 में पार्टी हार गई। इसके बाद विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी को अपने पाले में ले आए। फिर उम्मीदवार बना दिया। इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी थी। वहीं, मंगलौर में भी कारतार सिंह भड़ाना को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में कोई खुशी नहीं दिखी थी। कार्यकर्ता उदासीन हुए तो फायदा विपक्ष को मिलता दिख रहा है।

उत्तराखंड में बद्रीनाथ के उपचुनाव में क्या आए राजनीतिक परिणाम?

उत्तराखंड के बद्रीनाथ में हाल ही में उपचुनाव हुए जिसमें राजनीतिक परिणाम उलट आए हैं! उत्तराखंड के दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम बड़े संकेत दे रहे हैं। मंगलौर और बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे। इसमें से मंगलौर विधानसभा सीट बहुजन समाज पार्टी विधायक हाजी सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद खाली हुई थी। वहीं, बद्रीनाथ विधानसभा सीट के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी ने लोकसभा चुनाव के दौरान पाला बदला। भाजपा के साथ हो लिए। इस कारण यह सीट खाली हुई थी। इस कारण दोनों सीटों पर 10 जुलाई को उपचुनाव हुआ था। शनिवार को जारी विधानसभा उपचुनाव के परिणाम में दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली है। उपचुनाव के रिजल्ट ने उत्तराखंड में एक अलग राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में लगभग दो-तिहाई से अधिक सीट जीतने वाली भाजपा को बड़ा झटका लगा है। 2014 के बाद बाद से प्रदेश में यह पहला मौका है, जब कांग्रेस पार्टी को किसी भी चुनाव में भाजपा से अधिक सीटें आई हैं। या यूं कहें कि उन्होंने भाजपा को कोई भी सीट जीतने नहीं दी है। बद्रीनाथ सीट पर भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार को तोड़कर कमल खिलाने की योजना तैयार की थी। उसमें पार्टी सफल नहीं रही। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एसडीजी सूचकांक में उत्तराखंड को बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश पहले पायदान पर दिख रही है। इस सब के बाद भी भाजपा प्रदेश की एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं रही। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण विपक्ष की तगड़ी रणनीति को माना जा रहा है।ऐसे में दूसरे दलों के विधायक तोड़कर कमल खिलाने की मुहिम वाली रणनीति पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माने जाने वाले मंगलौर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस ने अपना कब्जा जमा लिया है। दरअसल, बद्रीनाथ और मंगलौर विधानसभा सीट पर अल्पसंख्यक और दलित आबादी बड़ी संख्या में है। इस कारण यहां पर भाजपा को जीत दर्ज करने में मशक्कत होती रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बद्रीनाथ सीट पर कब्जा किया था।

मंगलौर और बद्रीनाथ सीट 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। मंगलौर विधानसभा सीट पर बसपा उम्मीदवार सरवत करीम अंसारी ने कब्जा जमाया था। वहीं, बद्रीनाथ सीट कांग्रेस के पाले में गई थी। विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत ने यह साफ किया है कि दलित और मुस्लिम वर्ग का वोट अब बहुजन समाज पार्टी की तरफ जाने की जगह कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो रही है। यह एक बड़ा बदलाव होता इस उप चुनाव में दिखा है। अब तक दलित-आदिवासी समाज में भाजपा अपनी पकड़ बनती दिख रही थी, लेकिन कांग्रेस एक बार फिर उनके बीच पैर जमा रही है।

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किए जाने के बाद से पुष्कर सिंह धामी एक बड़े नेता के तौर पर उभर रहे हैं। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एसडीजी सूचकांक में उत्तराखंड को बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश पहले पायदान पर दिख रही है। इस सब के बाद भी भाजपा प्रदेश की एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं रही। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण विपक्ष की तगड़ी रणनीति को माना जा रहा है।

विपक्ष ने चुनाव के दौरान राहुल गांधी की ओर से उठाए जाने वाले मसलों को जोरदार तरीकों से जनता के बीच रखा। राहुल गांधी ने जिस प्रकार से युवाओं के बेरोजगारी के मुद्दे को उठाया है, उससे प्रदेश का युवा वर्ग को जोड़ने की कोशिश की गई। वहीं, उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार से अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने मिलकर पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स को अपनाया। वह उत्तराखंड की जमीन पर भी काम करता दिख रहा है।दोनों सीटों पर 10 जुलाई को उपचुनाव हुआ था। शनिवार को जारी विधानसभा उपचुनाव के परिणाम में दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली है।मंगलौर और बद्रीनाथ सीट 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। मंगलौर विधानसभा सीट पर बसपा उम्मीदवार सरवत करीम अंसारी ने कब्जा जमाया था। उपचुनाव के रिजल्ट ने उत्तराखंड में एक अलग राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में लगभग दो-तिहाई से अधिक सीट जीतने वाली भाजपा को बड़ा झटका लगा है। इसकी काट सीएम पुष्कर सिंह धामी नहीं तलाश पाए। उपचुनाव के परिणाम कुछ यही संकेत देते दिखाई दे रहे हैं।

जब लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली कड़ी मात!

हाल ही में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को कड़ी मात मिल गई है! लोकसभा चुनाव के बाद देश के सात राज्यों की 13 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इन नतीजों में इंडिया गठबंधन बीजेपी पर भारी पड़ा है। उपचुनाव में बिहार, पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तराखंड में कमल मुरझा गया है। इन उपचुनाव में इंडिया गठबंधन ने 13 में से 10 सीटों पर जीत हासिल की है। बीजेपी के खाते में महज दो ही सीट आई है। बिहार में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की है। वहीं, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने 4 सीटों पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल कर ली है। खास बात है कि बीजेपी को अपने गढ़ उत्तराखंड में दोनों सीटों पर हार मिली है। लोकसभा के बाद हुए पहले चुनाव पर देश की निगाहें लगी थी। राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर आम लोग भी इन चुनावों को बीजेपी की परीक्षा मान रहे थे। विधानसभा उपचुनाव में पंजाब की एक, हिमाचल प्रदेश की तीन, उत्तराखंड की दो, पश्चिम बंगाल की चार, मध्य प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर मतदान हुआ था। इन चुनाव में इंडिया’ गठबंधन में शामिल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। बीजेपी ने यहां बद्रीनाथ के अलावा मंगलोर सीट पर भी बाहरी उम्मीदवार पर भरोसा जताया था। बद्रीनाथ से बीजेपी उम्मीदवार राजेंद्र सिंह भंडारी ने लोकसभा चुनाव के समय बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी।चुनाव नतीजों में बीजेपी पर इंडिया गठबंधन भारी पड़ा। बीजेपी के लिए हिमाचल में बीजेपी हमीरपुर सीट जीतने में कामयाब रही। वहीं, तमिलनाडु में विक्रवांडी विधानसभा सीट पर डीएमके उम्मीदवार अन्नियूर शिवा ने जीत हासिल की।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जादू उपचुनाव में भी बरकरार रहा। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों कृष्णा कल्याणी, मधुपर्णा ठाकुर, मुकुट मणि अधिकारी, सुप्ति पांडे ने क्रमशः रायगंज, बगदाह, राणाघाट दक्षिण, मानिकतला सीट पर जीत हासिल की। उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में कल्याणी ने बीजेपी के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मानस कुमार घोष पर 50,077 मतों के अंतर से जीत हासिल की। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य एवं मतुआ नेता ममताबाला ठाकुर की बेटी मधुपर्णा ठाकुर ने उत्तर 24 परगना जिले की बगदाह विधानसभा सीट पर भाजपा के अपने प्रतिद्वंद्वी बिनय कुमार बिश्वास को 33,455 मतों के अंतर से हराया। उत्तर 24 परगना के राणाघाट दक्षिण में तृणमूल कांग्रेस के मुकुट मणि अधिकारी ने भाजपा उम्मीदवार मनोज कुमार बिश्वास को 39,048 मतों से हराया।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी एवं कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश ठाकुर ने देहरा विधानसभा सीट पर भाजपा के होशियार सिंह को 9,399 मतों से हराया। नालागढ़ में कांग्रेस के हरदीप सिंह बावा ने भाजपा के केएल ठाकुर को 25,618 मतों से हराया। बीजेपी ने हमीरपुर सीट जीती है। भाजपा उम्मीदवार आशीष शर्मा को 27,041 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के पुष्पिंदर वर्मा को 25,470 वोट मिले।

इस चुनाव में बीजेपी को उत्तराखंड से सबसे अधिक निराशा हाथ लगी। उत्तराखंड को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में भी यहां दमदार प्रदर्शन किया था। इन चुनाव नतीजों ने यहां बीजेपी के खेमे में हलचल पैदा कर दी है। बीजेपी को बद्रीनाथ सीट पर मिली हार के बाद पार्टी की रणनीति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी की बाहरी उम्मीदवारों पर भरोसा करने को हार का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। बीजेपी ने यहां बद्रीनाथ के अलावा मंगलोर सीट पर भी बाहरी उम्मीदवार पर भरोसा जताया था। बद्रीनाथ से बीजेपी उम्मीदवार राजेंद्र सिंह भंडारी ने लोकसभा चुनाव के समय बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी।

लोकसभा चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन के लिए यह जीत बूस्टर का काम करेगी। विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक फायदा कांग्रेस को हुआ है। कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत हासिल की है। इन चुनाव परिणाम का असर राज्य के साथ ही केंद्र में साफ देखने को मिलेगा। चुनाव नतीजों में बीजेपी पर इंडिया गठबंधन भारी पड़ा। बीजेपी के लिए हिमाचल में बीजेपी हमीरपुर सीट जीतने में कामयाब रही। वहीं, तमिलनाडु में विक्रवांडी विधानसभा सीट पर डीएमके उम्मीदवार अन्नियूर शिवा ने जीत हासिल की।लोकसभा चुनाव के परिणाम से उत्साहित कांग्रेस इन नतीजों के बाद बीजेपी के खिलाफ अधिक आक्रामक नजर आएगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही संसद सत्र में अपने तेवर दिखा चुके हैं। ऐसे में इन नतीजों ने विपक्षी धड़े इंडिया ब्लॉक को एक बार फिर से फ्रंटफुट पर खेलने का मौका दे दिया है।

अयोध्या के बाद बद्रीनाथ में कैसे हारी बीजेपी?

हाल ही में बीजेपी अयोध्या के बाद बद्रीनाथ में भी हार गई है! लोकसभा चुनाव में बीजेपी अभी अयोध्या के हार को भूल भी नहीं पाई थी कि उपचुनाव में एक ऐसी ही और हार का सामना करना पड़ा है। उत्तराखंड की बद्रीनाथ सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। जैसी ही एक और धर्म नगरी में बीजेपी को हार मिली तो विपक्ष को एक और मौका निशाना साधने का मिल गया। विपक्षी दलों ने इसे अयोध्या की हार से जोड़ दिया। उत्तराखंड में बद्रीनाथ में मिली जीत के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के बाद बाबा बद्री ने बीजेपी को करारी शिकस्त दी है। बीजेपी ने बद्रीनाथ में हुए उपचुनाव में कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भंडारी को चुनाव में उतारा था। भंडारी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उपचुनाव में राजेंद्र भंडारी को कांग्रेस उम्मीदवार लखपत बुटोला के हाथों 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा।राहुल ने कहा था कि वे हार गए क्योंकि वे भारत के विचार पर हमला कर रहे थे। हमारे संविधान में भारत को राज्यों का संघ कहा गया है। राहुल गांधी का कहना था कि भारत राज्यों, भाषाओं, इतिहास, संस्कृति, धर्म और परंपराओं का एक संघ है। उन्होंने कहा था कि देश के प्रधानमंत्री को जनता ने संदेश दिया है कि आप संविधान के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते। बीजेपी की हार पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि यह हार बीजेपी के लिए सबक है। बद्रीनाथ में बद्री बाबा ने बीजेपी को करारी हार दिलाई है। माहरा इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में केदारनाथ से भी इसी तरह का संदेश जाने वाला है।

बीजेपी की बद्रीनाथ में मिली हार पर सोशल मीडिया पर लोगों ने बीजेपी पर निशाना साधा।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि इंडिया गठबंधन ने अयोध्या में बीजेपी को हराकर राम मंदिर आंदोलन को पराजित कर दिया है जिसे लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू किया था। एक यूजर ने लिखा कि अयोध्या के बाद बीजेपी बद्रीनाथ भी हार गई। बद्रीनाथ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई। महादेव जी राहुल गांधी के साथ हैं। एक अन्य यूजर ने लिखा कि मोदी पूरा हिंदू समुदाय नहीं है, आरएसएस पूरा हिंदू समुदाय नहीं है, बीजेपी पूरा हिंदू समुदाय नहीं है। अयोध्या के बाद बद्रीनाथ ने भी साबित कर दिया। एक अन्य यूजर ने लिखा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तो बस शुरुआत थी, अब उत्तराखंड के बद्रीनाथ में कांग्रेस पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की।

बद्रीनाथ में बीजेपी की हार पर शिवसेना (यूबीटी) ने भी तंज कसा। शिवसेना यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जय बाबा बद्रीनाथ, नॉन बाइलॉजिकल पार्टी यहां भी हारी। राज्यसभा सांसद ने परोक्ष रूप से बीजेपी की अयोध्या में हुई हार की तरफ से इशारा किया। उत्तराखंड की दोनों ही सीटों पर 10 जुलाई को वोटिंग हुई थी। बीजेपी के लिए उत्तराखंड में दोनों सीटों पर हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

लोकसभा में उत्तर प्रदेश की फैजाबाद सीट पर हुई हार को लेकर तब राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि बीजेपी अयोध्या में हार गई, वे उत्तर प्रदेश में हार गए। राहुल ने कहा था कि वे हार गए क्योंकि वे भारत के विचार पर हमला कर रहे थे। हमारे संविधान में भारत को राज्यों का संघ कहा गया है। राहुल गांधी का कहना था कि भारत राज्यों, भाषाओं, इतिहास, संस्कृति, धर्म और परंपराओं का एक संघ है। उन्होंने कहा था कि देश के प्रधानमंत्री को जनता ने संदेश दिया है कि आप संविधान के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते।मोदी पूरा हिंदू समुदाय नहीं है, आरएसएस पूरा हिंदू समुदाय नहीं है, बीजेपी पूरा हिंदू समुदाय नहीं है। अयोध्या के बाद बद्रीनाथ ने भी साबित कर दिया। एक अन्य यूजर ने लिखा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तो बस शुरुआत थी, अब उत्तराखंड के बद्रीनाथ में कांग्रेस पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की। उपचुनाव में राजेंद्र भंडारी को कांग्रेस उम्मीदवार लखपत बुटोला के हाथों 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी की हार पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि यह हार बीजेपी के लिए सबक है।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि इंडिया गठबंधन ने अयोध्या में बीजेपी को हराकर राम मंदिर आंदोलन को पराजित कर दिया है जिसे लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू किया था।

संविधान हत्या दिवस पर विपक्षी नेताओं से क्या बोले सुधांशु त्रिवेदी?

हाल ही में सुधांशु त्रिवेदी ने संविधान हत्या दिवस पर विपक्षी नेताओं को घेर लिया है! भारतीय जनता पार्टी ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने के केंद्र के फैसले का विरोध करने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर शनिवार को निशाना साधा और कहा कि आपातकाल के खिलाफ लड़ने वाले लोग भी सत्ता के लिए अराजकतावादी कहलाने को तैयार हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि चूंकि 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, इसलिए उन लोगों के दिलों में बहुत दर्द है, जो संविधान का रक्षक होने का दिखावा कर रहे हैं। वे सवाल कर रहे हैं कि जब 50 साल (आपातकाल लागू होने के बाद) हो गए हैं, तो (संविधान हत्या दिवस मनाने की) क्या जरूरत है। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सत्ता की लालसा में आप अपने ऊपर अराजकता का ठप्पा लगाने को भी तैयार हैं। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या जेपी आंदोलन उनके लिए भी अराजकता था। मनोज झा ने सत्तारूढ़ भाजपा से आईना देखने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने और देश में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लिए माफी मांगने को कहा।भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणी शिवसेना नेता संजय राउत के उस बयान के जवाब में आई है थी। जिसमें संजय राउत ने कहा था कि आपातकाल को 50 साल हो गए हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी भविष्य के बजाय अतीत को देखती रहती है।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लगाया था क्योंकि देश में अराजकता थी। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में उनके समकक्ष अटल बिहारी वाजपेयी को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता, तो वे भी आपातकाल लगाते। राउत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल की तुलना भी आपातकाल से की। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दल राजद ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ घोषित करने के लिए मोदी सरकार की शुक्रवार को आलोचना की थी और कहा था कि इस तरह के कदमों से भाजपा संविधान से ‘छेड़छाड़’ करने के अपने प्रयासों के कारण लोकसभा चुनाव में मिले ‘झटके’ से उबरने की कोशिश कर रही है।

राजद सांसद मनोज झा ने भी सत्तारूढ़ भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया था और मांग की थी कि केंद्र 30 जनवरी को ‘गांधी हत्या दिवस’ घोषित करे जिस दिन महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। मनोज झा ने सत्तारूढ़ भाजपा से आईना देखने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने और देश में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लिए माफी मांगने को कहा।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आपातकाल के काले दिनों को याद करने के लिए 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का सरकार का फैसला जरूरी था। उन्होंने कहा कि यह ध्यान देने योग्य बात है कि जिन लोगों ने उत्पीड़न झेला, वे आज उत्पीड़कों के साथ हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि संविधान की हत्या सिर्फ 1975 में ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के सभी शासनकालों के दौरान की गई। बता दें कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या जेपी आंदोलन उनके लिए भी अराजकता था। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणी शिवसेना नेता संजय राउत के उस बयान के जवाब में आई है थी। जिसमें संजय राउत ने कहा था कि आपातकाल को 50 साल हो गए हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी भविष्य के बजाय अतीत को देखती रहती है।शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लगाया था क्योंकि देश में अराजकता थी। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में उनके समकक्ष अटल बिहारी वाजपेयी को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता, तो वे भी आपातकाल लगाते। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणी शिवसेना नेता संजय राउत के उस बयान के जवाब में आई है थी। जिसमें संजय राउत ने कहा था कि आपातकाल को 50 साल हो गए हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी भविष्य के बजाय अतीत को देखती रहती है।उन्होंने कहा कि संविधान में पहला संशोधन जवाहरलाल नेहरू ने 1951 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कमतर करने के लिए किया था, जब चुनाव भी नहीं हुए थे।