Sunday, March 15, 2026
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जब अशांति के साथ हुई नई संसद की पहली शुरुआत!

हाल ही में नई संसद की पहली शुरुआत अशांति के साथ हुई है! प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरी मेहताब ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला के चयन की घोषणा की तो राहुल गांधी बधाई देने पहुंच गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राहुल को आते देख इशारे से कहा- आइए। राहुल पहुंचे तो पहले बिरला और फिर मोदी से हाथ मिलाया। तब तक संसदीय कार्य मंत्री की हैसियत से किरेन रिजिजू भी आए और तीनों ने मिलकर ओम बिरला को अध्यक्ष के आसन तक पहुंचाया। वहां भर्तृहरि मेहताब ने उनका स्वागत किया और उनके लिए आसन छोड़ दिया। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और आखिर में किरेन रिजिजू ने अध्यक्ष का अभिवादन किया। तब ऐसा लगा जैसे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच बातचीत टूटने के बाद राहुल गांधी का पीएम मोदी का नाम ले-लेकर हमले से सत्ता पक्ष और विपक्ष में जो खाई पैदा हुई, वो पट चुकी है। लेकिन कुछ ही समय बाद ऐसी स्थिति बन गई जिससे लगा कि क्या संसद में शांति की उम्मीद की भी जा सकती है? हुआ ये कि आसन पर विराजमान होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एवं विभिन्न दलों के प्रमुख सांसदों का आह्वान किया। प्रधानमंत्री के 10 मिनट से ज्यादा के बधाई भाषण के बाद राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी सांसदों ने संक्षेप में अध्यक्ष को बधाई दी। राहुल गांधी ने पहले वाक्य में बिरला को बधाई तो दी, लेकिन तुरंत यह भी कहने लगे कि अध्यक्ष महोदय को विपक्ष को भारतीयों की आवाज सदन में पहुंचाने का पर्याप्त मौका देना चाहिए। अखिलेश यादव ने भी ‘बहुत-बहुत बधाई’ देकर राहुल गांधी की अपील का ही समर्थन किया। बल्कि अखिलेश ने तो यहां तक कहा कि आपका अंकुश विपक्ष पर तो रहता ही है, सत्ता पक्ष पर भी रहे। बधाई की औपचारिकता पूरी होने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने अपना एक वक्तव्य दिया और सदन का माहौल तुरंत बदल गया।

दरअसल, लोकसभा अध्यक्ष ने अपने पहले वक्तव्य में 50 साल पहले तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल की जोरदार निंदा की। उन्होंने लंबे-चौड़े वक्तव्य में कई बार ‘कांग्रेस’ और ‘काला दिन’ का जिक्र किया। इस पर कांग्रेस पार्टी के सांसद खड़े हो गए और शोर करने लगे। हालांकि, उन्हें अपने गठबंधन साथियों से ही समर्थन नहीं मिला। सपा, टीडीपी और टीएमसी संसद ने आपातकाल पर अध्यक्ष के वक्तव्य का समर्थन किया और अपनी सीट पर बैठे रहे। शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने अपना वक्तव्य पूरा किया और तुरंत अगले दिन गुरुवार के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा कर दी। थोड़ी देर पहले जिस सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ‘सब चंगा सी’ जैसा माहौल दिखा था, वह तुरंत बदल गया और शोर-शराबे और हंगामे से सदन गूंज उठा।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर तख्ती-पट्टी लेकर आपातकाल के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आपातकाल के लिए कांग्रेस पार्टी से माफी की मांग की। बैनरों में तरह-तरह के नारे लिखे थे। एक नारा था- आपातकाल को न हम भूलेंगे, न माफ करेंगे और ना फिर कभी ऐसा होने देंगे। मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों समेत सत्ता पक्ष के सांसदों ने जो बैनर थाम रखे थे, उनमें ‘कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं’, ‘तानाशाही की मानसिकता कांग्रेस की असलियत है’ जैसे नारे लिखे हुए थे। सभी ने नारे लगाए, ‘माफी मांगो, माफी मांगो, इमर्जेंसी के लिए माफी मांगो।’

दरअसल, संपूर्ण विपक्ष और खासकर कांग्रेस पार्टी ने चुनावों में ‘संविधान बचाओ’ का खूब नारा लगाया। विपक्ष ने मतदाताओं के मन में भय पैदा करने की कोशिश की कि अगर मोदी सरकार सत्ता में लौटी तो संविधान बदलकर आरक्षण खत्म कर देगी। इसका खासकर उत्तर प्रदेश में खासा असर हुआ और बीजेपी की सीटें आधी हो गईं। इससे उत्साहित विपक्ष और खासकर राहुल गांधी संवाददाता सम्मेलनों से लेकर संसद तक संविधान की प्रतियां लहराने लगे। राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी सासंदों ने पद की शपथ लेते वक्त संविधान की प्रति हाथ में थामे रखी। इस पर सत्ता पक्ष को जवाब देना था। फिर 25 जून की तारीख भी आई। यह वही तारीख थी जब 50 वर्ष पहले इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। बीजेपी ने ‘संविधान की रट’ के जवाब में कांग्रेस को आपातकाल से घेरा। सवाल है कि क्या अब विपक्ष संविधान पर सरकार को घेरना छोड़ेगी? अगर नहीं तो क्या संसद में शांति की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए?

क्या इस बार विपक्ष करके बैठा है पूरी तैयारी?

इस बार विपक्ष पूरी तैयारी करके बैठा है! लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटों में भारी गिरावट का असर मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में दिखाई दे सकता है। दरअसल विपक्षी दल पहले से ज्यादा ताकतवर हैं और कांग्रेस की सीटों में उम्मीद से ज्यादा इजाफा हुआ है। ऐसे में विपक्षी दलों का इंडिया एलायंस संसद के अंदर खुद को मजबूत स्थिति में देख रहा है। 99 सीटों के साथ कांग्रेस का भी जोश हाई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस और इंडिया एलायंस की नजरें अब स्थायी समितियों की अध्यक्षता पर है। लोकसभा चुनाव में 236 सीटें जीतने के बाद, विपक्षी दलों के इंडिया गुट को उम्मीद है कि उन्हें पिछले सदन में विपक्ष को मिलीं विभागों से जुड़ी स्थायी समितियों की तुलना में ज्यादा समितियों की अध्यक्षता मिलेगी। इन समितियों की घोषणा आगामी मॉनसून सत्र के दौरान होने की उम्मीद है। खबर के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों ने पार्टियों को चिट्ठी लिखी है। इन चिट्ठियों में पार्टियों से उनके सांसदों को 24 अलग-अलग समितियों (पैनल) के लिए नामित करने के लिए कहा गया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, ‘लोकसभा सचिवालय ने मुझे चिट्ठी लिखकर विभिन्न समितियों के लिए सांसदों के नाम मांगे हैं।’ कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि उन्हें राज्यसभा सचिवालय से भी इसी तरह का अनुरोध मिला है। लोकसभा के लिए 16 और राज्यसभा के लिए 8 विभागों से जुड़ी स्थायी समितियां हैं। दरअसल इन समितियों के अध्यक्षों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इन अध्यक्षों को चुनने का फैसला राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने बताया कि इंडिया गुट को स्थायी समितियों में कम से कम तीन अतिरिक्त अध्यक्ष पद मिलने की उम्मीद है।उन्होंने बताया, ‘कांग्रेस को एक और समिति मिलनी चाहिए। समाजवादी पार्टी को भी एक समिति मिलनी चाहिए, क्योंकि अभी उनकी अगुवाई में कोई समिति नहीं है। वहीं तृणमूल कांग्रेस को भी एक अध्यक्ष पद मिलना चाहिए।’ इसके अलावा, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद की लेखा परीक्षा समिति पब्लिक अकाउंट्स कमेटी का अध्यक्ष बनने की संभावना है और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं को भी कुछ समितियों की जिम्मेदारी मिल सकती है।

मई 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस पार्टी ने तीन स्थायी समितियों की अगुवाई की थी। इसमें वाणिज्य, पर्यावरण और रसायन एवं उर्वरक शामिल है। तृणमूल, संसद में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद, उसे कोई अध्यक्ष पद नहीं मिला। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने शुरुआत में स्वास्थ्य समिति की अध्यक्षता की थी, लेकिन कुछ समय बाद यह भाजपा को वापस मिल गई। द्रमुक की कनिमोई ने ग्रामीण विकास पैनल का नेतृत्व किया। इस बार समाजवादी पार्टी (दोनों सदनों में 41 सांसद) और टीएमसी (दोनों सदनों में 42 सांसद) को कम से कम एक-एक अध्यक्ष पद मिलने का हक बनता है। विपक्ष (कांग्रेस के अलावा) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘लेकिन अंतिम फैसला धनखड़ या बिरला लेंगे।’

विपक्ष के एक पदाधिकारी ने तर्क दिया कि ‘55% सांसद सत्ता पक्ष के साथ हैं जबकि 45% विपक्ष में हैं। यदि अध्यक्ष पदों का वितरण इसी अनुपात में किया जाता है, तो सत्तारूढ़ पक्ष को विभाग-संबंधी स्थायी समितियों के 13 अध्यक्ष मिलने चाहिए, जो विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की देखरेख करती हैं, और अन्य को 11 मिलने चाहिए।’ विभागों से जुड़ी 24 स्थायी समितियों के अलावा, संसद में और भी कई समितियां होती हैं। ये समितियां देश की सबसे ऊंची कानून बनाने वाली संस्था के कामकाज के अलग-अलग पहलुओं को संभालती हैं। इनमें वित्त से जुड़ी समितियां, कुछ समय के लिए बनाई जाने वाली अस्थायी समितियां और अन्य स्थायी समितियां शामिल हैं।

सत्र चलने के दौरान, लोकसभा और राज्यसभा कभी-कभी विशेष समितियां या संयुक्त संसदीय समितियां भी बनाती हैं। ये समितियां किसी खास कानून या महत्वपूर्ण मुद्दे की समीक्षा करने के लिए बनाई जाती हैं। उदाहरण के लिए, शेयर बाजार घोटाले की जांच के लिए या शीतल पेय और पेय पदार्थों में कीटनाशक होने की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समितियां बनाई जा सकती हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद की लेखा परीक्षा समिति पब्लिक अकाउंट्स कमेटी का अध्यक्ष बनने की संभावना है और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं को भी कुछ समितियों की जिम्मेदारी मिल सकती है।दो नेताओं के अनुसार, सचिवालयों ने पार्टियों से मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होने से पहले अपने नामांकन जमा करने का अनुरोध किया है।

क्या दोबारा से शुरू हो सकता है किसान आंदोलन?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या किसान आंदोलन दोबारा से शुरू हो सकता है या नहीं! पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा शंभू बॉर्डर को खोलने का आदेश दिए जाने के बाद अब किसानों ने अपनी अगली रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। किसान संगठन 14 जुलाई को शंभू व खनौरी बार्डर के किसानों के साथ एक मीटिंग करेंगे, इसमें आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। दरअसल, शंभू बार्डर खुलने के आदेश के बाद किसान संगठनों द्वारा एमएसपी सहित कई मांगों को लेकर दिल्ली कूच करने का निर्णय लिया जा सकता है। एमएसपी खरीद गारंटी कानून मोर्चा के हरियाणा संयोजक व भाकियू लोकशक्ति के प्रदेशाध्यक्ष जगबीर घसोला ने हाईकोर्ट के फैसले को किसानों की जीत बताया है। जगबीर घसोला ने कहा कि हरियाणा सरकार की तानाशाही के चलते पंजाब के किसानों को शंभू बॉर्डर पर करीब 6 माह पहले रोक दिया गया। इस वजह से किसान अपनी मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर पर ही डटे रहे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉर्डर खोलने का फैसला सुनाया है। शंभू बॉर्डर के खुलने से आमजन को भी आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होगी।

किसान नेता ने कहा कि 14 जुलाई को शंभू व खनौरी बॉर्डर के किसानों के साथ किसान संगठनों की मीटिंग होगी और इसमें एमएसपी सहित कई मांगों को लेकर दिल्ली कूच करने का भी निर्णय लिया जा सकता है। किसान संगठनों ने कोर्ट के फैसले को किसानों की जीत बताते हुए कहा कि मीटिंग में आगामी आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। अगर जरूरी होगा तो देश भर के किसान आंदोलन में शामिल होंगे और मांगों को पूरा कराकर ही दम लेंगे।उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसान संगठनों के नेता पंजाब और अन्य राज्यों के किसान नेताओं से कोआर्डिनेट करेंगे। साथ ही किसान आंदोलन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाकर अपनी मांगों को पूरा करने की मांग करेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने आज ऐलान किया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर फिर से आंदोलन शुरू करेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक ज्ञापन सौंपेगा। वर्ष 2020-21 के किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले एसकेएम ने अपनी आम सभा की बैठक के एक दिन बाद यह घोषणा की। इस बार शायद संगठन दिल्ली कूच नहीं करेगा। एसकेएम में अलग-अलग किसान संगठन शामिल हैं। संगठन के नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और राज्यसभा तथा लोकसभा के सदस्यों से मुलाकात करने तथा उन्हें किसानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपने के लिए 16 से 18 जुलाई के बीच का समय मांगा जाएगा। बता दें कि करीब पांच महीने से शंभू बार्डर पर बैठे किसानों के कारण अब आम लोग और आसपास के ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। इस चलते पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट वासु रंजन शांडिल्य ने शनिवार को हाई कोर्ट में शंभू बॉर्डर खुलवाने को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि आंदोलन के कारण पांच महीने से नैशनल हाइवे 44 बंद पड़ा है। इससे अंबाला के दुकानदार, व्यापारी, छोटे-बड़े रेहड़ी फड़ी वाले भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। याचिका में मांग की गई है कि शंभू बॉर्डर को तुरंत प्रभाव से खोलने के आदेश दिए जाएं। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।

वासु रंजन शांडिल्य ने याचिका में पंजाब और हरियाणा सरकार सहित किसान नेता स्वर्ण सिंह पंढेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल को भी पार्टी बनाया है। याचिका में बताया गया है कि शंभू बॉर्डर बंद होने के कारण सरकारी बसों का रूट डायवर्ट किया हुआ है, जिससे तेल का खर्च बढ़ रहा है। अंबाला और शंभू के आसपास के मरीज बॉर्डर बंद होने के कारण दिक्कत में हैं। एंबुलेंस के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा-पंजाब के वकीलों को भी अंबाला से पटियाला और पटियाला वालों को अंबाला की अदालतों में आने में भारी दिक्कतें हो रही है। एडवोकेट वासु रंजन ने बताया कि फरवरी 2024 से गैर कानूनी तरीके से संविधान का उल्लंघन कर राष्ट्रीय हाइवे को बंद किया हुआ है और शंभू बॉर्डर के आसपास किसानों ने अस्थायी घर बना लिए हैं, ऐसा लगता है कि जैसे अब शंभू बॉर्डर कभी खुलेगा ही नहीं। यह अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गया है। हाई कोर्ट केंद्र और दोनों राज्य सरकारों को रास्ता खोलने के आदेश दें।

वासु रंजन ने कहा कि रास्ता किसके कारण और क्यों बंद है, इस पर निर्णय हाई कोर्ट करेगा। रोड को बंद करना जनता के मौलिक अधिकारों का हनन है। रोड बंद होने से अंबाला और पटियाला जिले का छोटा-बड़ा काम बंद हो चुका है। यह हाइवे पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर को जोड़ता है। इसके बंद होने से न केवल सरकारों को नुकसान हो रहा है, बल्कि आम आदमी भी परेशान है।

गार्ज़ा में चार मिलियन टन कंक्रीट, स्टील का मलबा, हटाने में 15 साल! संयुक्त राष्ट्र ने कहा, क्या है कीमत?

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संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि गाजा के अलग-अलग हिस्सों में जमा हुआ मलबा खासकर आम फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए ”घातक” हो सकता है. इजरायली सेना के बम-गोले-मिसाइलों के कारण गाजा में 40 लाख टन कंक्रीट और स्टील का मलबा जमा हो गया है. अगर अभी हमला रोक दिया गया तो इसे हटाने में लगभग 15 साल लग जाएंगे! संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

7 अक्टूबर को आजादी समर्थक फिलिस्तीनी सशस्त्र समूह हमास के हमले के बाद से इजरायली सेना गाजा पट्टी पर लगातार हमले कर रही है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और फिलिस्तीन शरणार्थी राहत और रोजगार एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) ने नौ महीने के युद्ध की स्थिति की समीक्षा की और कहा कि चार मिलियन टन के मलबे के नीचे बिना फटे बम और विभिन्न हानिकारक पदार्थ जमा हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि गाजा के विभिन्न हिस्सों में जमा हुआ मलबा खासकर आम फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए “घातक” हो सकता है. इसके अलावा कई शव मलबे के नीचे दबे हुए हैं और उनके सड़ने का भी खतरा है. रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे को सुरक्षित हटाने के लिए कम से कम 500 मिलियन डॉलर (करीब 4200 मिलियन टका) की जरूरत है। संयोग से, 2014 में गाजा पर इजरायली हमले के बाद करीब 24 लाख टन मलबा हटाना पड़ा था.

दक्षिणी गाजा के अल मवासी में जमीन पर अभी भी ताजा इजरायली टैंक के पहिये के निशान हैं। हवा में बारूद की गंध. फ़िलिस्तीनी किसान नेदाल अबू जाहेर एक मृत टमाटर का पौधा उठाए हुए हैं। उन्होंने थकी हुई आवाज में कहा, यह विनाश का नमूना है. हम साधारण किसान हैं, अचानक एक दिन टैंक आए और गोलाबारी शुरू कर दी, मिसाइलें दागने लगीं।” अबू जाहेर के पीछे उसके ग्रीनहाउस के खंडहर हैं। जाहेर ने मीडिया को बताया कि इजराइल ने इस क्षेत्र की पहचान मानवीय क्षेत्र के रूप में की है.

अबू जाहेर अकेले नहीं हैं. 7 अक्टूबर, 2023 को, इज़राइल-हमास संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें पूरे पूर्वी गाजा पट्टी में लगभग 57 प्रतिशत कृषि भूमि नष्ट हो गई। इसका खुलासा हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (खाद्य एवं कृषि संगठन) और कृत्रिम उपग्रह संगठन यूएनओएसएटी द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक रिपोर्ट में हुआ है। एफएओ के मैथ्यू हेनरी ने स्पष्ट किया कि फिलिस्तीन की 30 प्रतिशत खाद्य आपूर्ति कृषि से आती है। वे नष्ट हो गए हैं. 2022 में गाजा ने इजराइल, वेस्ट बैंक और दुनिया के अन्य हिस्सों में लगभग 4 करोड़ 46 लाख रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात किया। स्ट्रॉबेरी और टमाटर उनमें से एक हैं. संघर्ष की शुरुआत के बाद से, निर्यात की मात्रा शून्य हो गई है। खेत में गोलाबारी चल रही है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, गाजा में चल रहे खाद्य संकट के लिए यह विनाश काफी हद तक जिम्मेदार है।

हालाँकि, इज़रायली सेना का दावा है कि कृषि भूमि और बगीचों पर जानबूझकर हमला नहीं किया गया था। हमास सशस्त्र बल ज्यादातर इन्हीं इलाकों से हमले करते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह का दावा है कि इज़राइल वास्तव में हमास को भूखा रखकर गाजा को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। गाजा लगभग नष्ट हो चुका है, फिर भी इज़रायली हमले जारी हैं।

दक्षिणी गाजा के अल मवासी में जमीन पर अभी भी ताजा इजरायली टैंक के पहिये के निशान हैं। हवा में बारूद की गंध. फ़िलिस्तीनी किसान नेदाल अबू जाहेर एक मृत टमाटर का पौधा उठाए हुए हैं। उन्होंने थकी हुई आवाज में कहा, यह विनाश का नमूना है. हम साधारण किसान हैं, अचानक एक दिन टैंक आए और गोलाबारी शुरू कर दी, मिसाइलें दागने लगीं।” अबू जाहेर के पीछे उसके ग्रीनहाउस के खंडहर हैं। जाहेर ने मीडिया को बताया कि इजराइल ने इस क्षेत्र की पहचान मानवीय क्षेत्र के रूप में की है.

अबू जाहेर अकेले नहीं हैं. 7 अक्टूबर, 2023 को, इज़राइल-हमास संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें पूरे पूर्वी गाजा पट्टी में लगभग 57 प्रतिशत कृषि भूमि नष्ट हो गई। इसका खुलासा हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (खाद्य एवं कृषि संगठन) और कृत्रिम उपग्रह संगठन यूएनओएसएटी द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित एक रिपोर्ट में हुआ है। एफएओ के मैथ्यू हेनरी ने स्पष्ट किया कि फिलिस्तीन की 30 प्रतिशत खाद्य आपूर्ति कृषि से आती है। वे नष्ट हो गए हैं. 2022 में, गाजा ने इज़राइल, वेस्ट बैंक और दुनिया के अन्य हिस्सों में लगभग 4.46 मिलियन टका के कृषि उत्पादों का निर्यात किया। स्ट्रॉबेरी और टमाटर उनमें से एक हैं. संघर्ष की शुरुआत के बाद से, वे निर्यात शून्य हो गए हैं। खेत में गोलाबारी चल रही है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, गाजा में चल रहे खाद्य संकट के लिए यह विनाश काफी हद तक जिम्मेदार है।

हालाँकि, इज़रायली सेना का दावा है कि कृषि भूमि और बगीचों पर जानबूझकर हमला नहीं किया गया था। हमास सशस्त्र बल ज्यादातर इन्हीं इलाकों से हमले करते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह का दावा है कि इज़राइल वास्तव में हमास को भूखा रखकर गाजा को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। गाजा लगभग नष्ट हो चुका है, फिर भी इज़रायली हमले जारी हैं।

चीन दौरे पर हसीना की शी जिनपिंग से मुलाकात, 21 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर! भारत में बढ़ेगी चिंता?

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यह कहने के बाद भी कि चीन ने रुचि दिखाई है, हसीना ने क्यों कहा कि वह चाहती हैं कि भारत तीस्ता परियोजना करे
पिछले महीने हसीना की नई दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन के बाद कुल दस समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन सूत्रों के मुताबिक चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा तीस्ता पर कार्रवाई है.

बीजिंग से लौटने के बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह चाहती हैं कि तीस्ता प्रोजेक्ट भारत करे. हालांकि, वह यह बताना नहीं भूले कि चीन ने भी काफी दिलचस्पी के साथ तीस्ता परियोजना में शामिल होने की पेशकश की है।

कूटनीतिक खेमे के मुताबिक भारत को प्राथमिकता देने की बात करने के साथ ही हसीना ने चीन कार्ड भी बहुत धीरे से खेला है. उनके शब्दों में, ”हमें तीस्ता प्रोजेक्ट करना है. चीन और भारत दोनों ने हमें इसकी पेशकश की। इसी बीच चीन ने एक सर्वे कराया है. भारत भी करेगा सर्वे दोनों देशों की व्यवहार्यता की जांच करने के बाद, हम वही लेंगे जो हमारे लिए उचित होगा।” इसके बाद उन्होंने कहा, ”लेकिन मैं पसंद करूंगा कि भारत ऐसा करे. क्योंकि भारत ने तीस्ता का पानी रोक दिया है. अगर उनसे इसकी वसूली करनी है तो उन्हें इस प्रोजेक्ट का काम करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर वे प्रोजेक्ट करते हैं। यह कूटनीति है. इसमें कोई गुस्सा शामिल नहीं है।”

पिछले महीने हसीना की नई दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन के बाद कुल दस समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन राजनयिक सूत्रों के मुताबिक द्विपक्षीय बातचीत का सबसे बड़ा फोकस तीस्ता पर कार्रवाई है. यह निर्णय लिया गया है कि बांग्लादेश की ओर तीस्ता जल के संरक्षण और प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही बांग्लादेश जाएगा।

सच तो यह है कि चीन तीस्ता परियोजना से भारत को हटाकर खुद पैसा लगाना चाहता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की आपत्ति के कारण तीस्ता जल बंटवारा समझौता लागू नहीं हो पा रहा है. लेकिन ढाका ने शुष्क मौसम के दौरान बांग्लादेश की ओर तीस्ता में जल आपूर्ति बनाए रखने के लिए जल प्रतिधारण और निर्बाध प्रवाह की एक मेगा-परियोजना की योजना बनाई है, जिसके लिए प्रौद्योगिकी और धन दोनों की आवश्यकता होगी।

तीस्ता परियोजना में भारत को प्राथमिकता दिए जाने की घोषणा करने के अलावा, हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के दक्षिण में विभिन्न विकास योजनाओं के लिए चीन को आमंत्रित किया गया है। वे इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाएंगे. फिलहाल, बीजिंग बांग्लादेश-चीन मैत्री पुल का निर्माण करेगा।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक से पहले, हसीना ने बीजिंग में ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी प्रधान मंत्री ली कुइयांग के साथ एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय बैठक भी की। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद शेख हसीना ने इस बार बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. बुधवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की चीन की तीन दिवसीय यात्रा के तीसरे दिन ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में बैठक में भाग लेने के बाद 21 द्विपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

बांग्लादेश सरकार के अनुसार, आर्थिक और बैंकिंग क्षेत्रों में सहयोग, व्यापार और निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे का विकास, आपदा प्रतिक्रिया उपायों में सहायता, छठे और नौवें बांग्लादेश-चीन मैत्री पुलों का निर्माण, बांग्लादेश से कृषि उत्पादों का निर्यात और संचार दोनों देशों के लोगों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। गौरतलब है कि ‘भारत की चिंता’ का तीस्ता परियोजना मुद्दा उस सूची में नहीं है। शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले हसीना ने चीनी प्रधानमंत्री ली कुइयांग के साथ एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय बैठक भी की। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हसीना की यात्रा बीजिंग-ढाका राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने के अवसर पर है। संयोग से, जनवरी में हसीना की नई सरकार के शपथ लेने के 48 घंटों के भीतर, ढाका में चीनी राजदूत याओ वेन ने नए विदेश मंत्री हसन महमूद से मुलाकात की और उनसे तीस्ता पर उनकी परियोजना को शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया।

लेकिन दिल्ली ने भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली तीस्ता नदी पर काम कर रहे किसी तीसरे देश के इंजीनियरों और तकनीशियनों को लेकर बांग्लादेश से चिंता जताई. कई विशेषज्ञों ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के संवेदनशील ‘चिकन नेक’ खंड के पास चीन की परियोजना को लागू करने में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री महमूद जब शपथ लेने के बाद दिल्ली आये तो उन्हें इन चिंताओं से अवगत कराया गया।

इसके बाद विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि 22 जून को दिल्ली में मोदी और हसीना के बीच हुई मुलाकात में तीस्ता मुद्दे पर चर्चा हुई. संयोग से, यह बांग्लादेश की प्रधान मंत्री हसीना ही थीं, जिन्होंने पांच साल पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर तीस्ता परियोजना में सहयोग की मांग की थी, क्योंकि तीस्ता जल बंटवारे पर भारत के साथ समझौते में अनिश्चित काल के लिए देरी हो रही थी। ऐसे में हसीना-जिनपिंग की मुलाकात पर नई दिल्ली की ‘नजर’ थी.

दिल्ली क्वाड की बैठक में अपनी बात रखना चाहते हैं l

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इस चतुर्भुज समूह की विदेश मंत्री स्तर की वार्ता करीब एक साल से रुकी हुई है. क्वाड शिखर सम्मेलन इस साल की शुरुआत में होना था लेकिन अमेरिका की ओर से कोई पहल नहीं हुई है। जुलाई के अंत में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक टोक्यो में होने वाली है. वहीं, विदेश मंत्रालय ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अपनी रणनीति आगे लाने की तैयारी शुरू कर दी है। नई दिल्ली पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधि का मुकाबला करने और उत्तर कोरिया के परमाणु मिसाइल हमले पर चिंता जैसे मुद्दों पर खुद को स्थापित करना चाहती है। यह खबर राजनयिक सूत्रों से पता चली है. चीन के साथ फिलीपींस का सैन्य तनाव भी चर्चा के केंद्र में रहने वाला है.

इस चतुर्भुज समूह की विदेश मंत्री स्तर की वार्ता करीब एक साल से रुकी हुई है. क्वाड शिखर सम्मेलन इस साल की शुरुआत में होना था लेकिन अमेरिका की ओर से कोई पहल नहीं हुई है। साउथ ब्लॉक स्वाभाविक रूप से टोक्यो चरण का फायदा उठाने के लिए उत्सुक है। उस बैठक से पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत-आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए लाओस का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के हिरोशिमा में हुई क्वाड ग्रुप की बैठक की सराहना की. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने उनकी लोकप्रियता के लिए प्रशंसा व्यक्त की। यहां तक ​​कि, एक कदम आगे बढ़ते हुए, बिडेन ने गंभीरता से कहा कि वह प्रधान मंत्री मोदी का ऑटोग्राफ लेंगे। हालांकि पूरा मामला हल्के-फुल्के अंदाज में है, कुछ लोग इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत और मोदी की बढ़ती स्वीकार्यता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

शनिवार को क्वाड बैठक में मोदी को देखने के बाद बिडेन ने कहा, “आप बहुत लोकप्रिय हैं, मुझे आपका ऑटोग्राफ मिलेगा।” इस संदर्भ में, बिडेन ने मोदी से कहा, “पूरा अमेरिका आपके आने का इंतजार कर रहा है। सोचो मैं मजाक कर रहा हूँ? मेरा विश्वास करो, मुझे अपने जीवन में इतने सारे कॉल कभी नहीं आए।” लगभग इसी लहजे में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा, ”आप सिडनी में 20,000 लोगों के सामने बोलेंगे.” मुझे टिकटों के लिए बहुत सारे अनुरोध मिल रहे हैं।” मोदी कुछ दिनों में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का दौरा करेंगे. उससे पहले क्वाड समूह के दो अहम सदस्य देशों के प्रमुखों की सराहना से प्रधानमंत्री के दौरे को और महत्वपूर्ण बनाने की उम्मीद है. भारत भी चार सदस्यीय क्वाड समूह का सदस्य है। माना जा रहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की ‘आक्रामकता’ को कम करने में इस समूह की भूमिका बड़ी होने वाली है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक्स हैंडल (पूर्व में ट्विटर) पर उनके फॉलोअर्स की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो गई है। जाहिर तौर पर वह इस मामले में सभी समकालीन राष्ट्राध्यक्षों में प्रथम हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की, इतालवी प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी या कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो – कोई भी अनुयायियों की संख्या में उनके करीब नहीं आता है।

रविवार को 10 करोड़ का आंकड़ा पार करने के बाद मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ”मैं इस शानदार कनेक्शन का हिस्सा बनकर खुश हूं। जहां चर्चाएं, वाद-विवाद, मौलिक सोच, रचनात्मक आलोचना और बहुत कुछ पाया जा सकता है और एक साथ आनंद लिया जा सकता है। मैं भविष्य में इस तरह के और अच्छे अनुभवों की आशा करता हूँ।”

अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के फॉलोअर्स की संख्या प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीब है। उनके 8.7 करोड़ फॉलोअर्स हैं. राष्ट्रपति बिडेन के 3.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं। दुबई के शासक शेख मोहम्मद के 1.12 करोड़ फॉलोअर्स हैं. पोप फ्रांसिस के 1.85 करोड़ फॉलोअर्स हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूडो के 65 लाख और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के 24 लाख फॉलोअर्स हैं।

ब्रैलेट, डीप नेक या क्रॉप टॉप, अनंत की शादी में किस हीरोइन का ब्लाउज डिजाइन था सबका ध्यान?

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अंबानी की शादी में बॉलीवुड एक्ट्रेसेस के आउटफिट्स ने सबका ध्यान खींचा। क्या आप भी नायिकाओं द्वारा दिखाई गई धारा में बहना चाहते हैं? अंबानी की शादी से कुछ अभिनेत्रियों के आउटफिट की एक झलक। रोजमर्रा की जिंदगी में किसी भी त्योहार या खास पार्टी में लगभग सभी महिलाएं जींस-कुर्ती, सलवार, साड़ी पहनना पसंद करती हैं। हाल ही में युवतियों में भी साड़ी पहनने का चलन बढ़ा है। चाहे वह 10,000 टका की साड़ी हो या एक हजार टका की साड़ी, ब्लाउज के टुकड़े के साथ ब्लाउज बनाए बिना कंट्रास्ट ब्लाउज पहनने का फैशन बहुत ‘इन’ है। अगर आपके पास काला या हरा डिजाइनर ब्लाउज है तो महिलाएं इसे अलग-अलग साड़ियों के साथ अलग-अलग स्टाइल में पहन सकती हैं।

आधे फैशन में ब्लाउज कट भी अंतहीन हैं। बोटनेक, क्रॉप ब्लाउज़, स्लीवलेस, डीप नेक, चाइनीज़ कॉलर, ऑफ शोल्डर, क्रॉप्ड कट, और क्या है! अंबानी की शादी में बॉलीवुड एक्ट्रेसेस के आउटफिट्स ने सबका ध्यान खींचा। क्या आप भी नायिकाओं द्वारा दिखाई गई धारा में बहना चाहते हैं? अंबानी की शादी से कुछ अभिनेत्रियों के आउटफिट की एक झलक। आलिया का ब्लाउज: आलिया भट्ट ने अनंत-राधिका की शादी में डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ​​द्वारा डिजाइन की गई फ्यूशिया पिंक बनारसी साड़ी पहनी थी। आलिया की साड़ी जहां वेस्टर्न स्टाइल की थी तो वहीं एक्ट्रेस का ब्लाउज भी वेस्टर्न स्टाइल का था। आलिया ने बनारसी के साथ गोल्ड कलर का ट्यूब ब्लाउज पहना था। साड़ी के साथ ब्लाउज के मिक्स ने फैन्स का ध्यान खींचा है. ब्लाउज की वजह से आलिया की इंडियन ड्रेस में वेस्टर्न ‘टच’ है।

प्रियंका चोपड़ा: अंबानी की शादी में दूल्हों के बीच प्रियंका के डांस ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। अनंत की शादी के मौके पर प्रियंका एक दिन के लिए अमेरिका से भारत आई थीं। एक्ट्रेस का आउटफिट आकर्षक था. एक्ट्रेस ने कॉस्ट्यूम डिजाइनर तरुण तहेलियानी द्वारा डिजाइन किया हुआ पीला-नारंगी रंग का लहंगा पहना था। उनका ‘प्लंजिंग नेकलाइन’ ब्लाउज नायिका के पहनावे में गर्माहट जोड़ता है।

भूमि पेडनेकर: अनंत की शादी में एक्ट्रेस भूमि मनमोहक लुक में कैमरे में कैद हुईं। चाहे फिल्म का प्रमोशन हो या इंस्टाग्राम के लिए फोटोशूट, बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि को हाल ही में बोल्ड आउटफिट में देखा गया है! भूमि ने अनंत की शादी में भी इंडो-वेस्टर्न ‘लेयर्ड फ्रिल’ लहंगा पहना था। लहंगे के साथ ब्रैलेट ब्लाउज पहना हुआ था। एक्ट्रेस के ब्लाउज के कट ने फैन्स का ध्यान खींचा.

तमन्ना भाटिया: काला लहंगा पहने हुए, अंबानी की शादी में तमन्ना के आउटफिट ने भीड़ का ध्यान खींचा। लहंगे के साथ उन्होंने डीप नेक क्रॉप टॉप स्टाइल ब्लाउज पहना था। इस तरह का ब्लाउज़ डिज़ाइन साड़ी के साथ भी खूब लगेगा। भले ही अभिनेत्री का पहनावा छोटा हो, लेकिन ब्लाउज का डिज़ाइन उनके पहनावे में ‘गर्म’ एहसास जोड़ता है।

जान्हवी कपूर: जान्हवी को शादी में अपने दैनिक पोशाक में कुछ आश्चर्य हुआ। उन्होंने कॉन्सर्ट में नीले रंग का लहंगा पहना था. मनीष मल्होत्रा ​​द्वारा डिजाइन किया गया लहंगा ब्लाउज आकर्षक था। ‘मेश इल्यूजन हाईनेक’ ब्लाउज को फैशन प्रेमियों ने काफी पसंद किया है। ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा नेट का था, जिसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि ऊपर कोई कपड़ा ही नहीं है।

पिछले सात दिनों से मुंबई शहर में जमकर हिंसा हो रही है. अरबपति मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी की शादी. शादी 12 जुलाई को थी, उसके बाद 13 जुलाई को ‘शुभ आशीर्वाद’ समारोह हुआ। 14 जुलाई को ‘मंगल उत्सव’ था. 15वां ‘रिसेप्शन’. इससे पहले करीब सात दिनों तक ‘संगीत’, शरीर पर पीला रंग लगाने समेत विभिन्न अनुष्ठान होते हैं। अंबानी घर के सभी कार्यक्रमों में सितारे शामिल होते हैं। अनंत की दुल्हन पार्टी में शाहरुख खान, सलमान खान से लेकर प्रियंका चोपड़ा, माधुरी दीक्षित तक शामिल हैं। ‘थलाइवा’ रजनीकांत ने ढोल की थाप पर किया डांस. शाहरुख ने ‘झूमे जो पठान’ की धुन पर डांस भी किया. माधुरी ने ‘चोली के पीछे’ गाने पर डांस किया. भले ही कैटरीना ने डांस नहीं किया लेकिन प्रियंका चोपड़ा ने ‘चिकनी चमेली’ गाने पर डांस किया. इसमें नई पीढ़ी के सितारे भी थे. लेकिन सलमान को कभी डांस करते हुए नहीं देखा गया. इस बार अनंत-राधिका की शादी की रस्म पूरी हुई और ‘भाई’ अंबानी-बेटे के लिए एक शर्त लेकर बैठे।

हालांकि भाईजान अनंत की शादी में डांस नहीं कर रहे थे, लेकिन जामनगर में उनके प्री-वेडिंग फंक्शन में डांस करते नजर आए। अनंत के साथ सलमान के हमेशा अच्छे रिश्ते रहे हैं। अनंत भी उन्हें अपना दोस्त मानते हैं, बड़े भाई की तरह सम्मान करते हैं। सोमवार को सलमान ने सोशल मीडिया पर मुकेश अंबानी के बेटे और बहू की तस्वीर के साथ लिखा, “अनंत और राधिका, मिस्टर और मिसेज अनंत अंबानी। मैंने देखा कि आप एक-दूसरे और अपने परिवार से कितना प्यार करते हैं। यह संपूर्ण विश्व शक्ति आपको एक साथ लेकर आई है। जीवन की सारी खुशियाँ बाँटें। भगवान आपका भला करें मैं उस दिन नाचूंगा। जिस दिन आप माता-पिता बनेंगे।” अम्बानी किसी भी कार्यक्रम को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। बेटे की शादी खत्म होते ही सुनने में आया है कि लंदन में एक और समारोह आयोजित किया जाएगा. लेकिन भाईजान की ये रिक्वेस्ट सुनकर अनंत-राधिकर में से किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया है.

सीबीआई ने एनटीए के ट्रंक से नेट परीक्षा के प्रश्न चुराने वाले इंजीनियर को सागरेड के साथ पकड़ा

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नेट क्वेश्चन लीक की जांच में सीबीआई ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है. इनके खिलाफ एनटीए के ट्रंक से प्रश्नपत्र चोरी करने की शिकायत है. मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रश्न लीक मामले में इस बार सीबीआई ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है. पंकज कुमार पर बिहार के हज़ारीबाग़ में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के ट्रंक से नेट परीक्षा के पेपर चोरी करने का आरोप लगाया गया है. राजू सिंह नाम के एक अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की. खुफिया सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने मंगलवार को दो अलग-अलग ऑपरेशन में इन दोनों को गिरफ्तार किया है. पंकज को पटना से गिरफ्तार किया गया. राजू को झारखंड के जमशेदपुर से गिरफ्तार किया गया. गौरतलब है कि नेट क्वेश्चन लीक की जांच के सिलसिले में सीबीआई अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.

सूत्रों के मुताबिक, 2017 में पंकज कुमार उर्फ ​​आदित्य ने जमशेदपुर के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग पास की थी. पंकज पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था एनटीए के ट्रंक से प्रश्नपत्र चुराने का आरोप है। इसके बाद लीक हुए प्रश्न को बांटने का आरोप पंकज सागरेद राजू पर है. नेट परीक्षा में बेनियम की शिकायत आते ही पूरे देश में हंगामा मच गया. इसका खामियाजा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को भुगतना पड़ता है. शिक्षा मंत्रालय भी आलोचना के घेरे में आ गया है. ऐसे में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बेनियाम की शिकायत की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. केंद्रीय खुफिया एजेंसी पहले ही कई एफआईआर दर्ज कर चुकी है. केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने देशभर में अब तक करीब 60 लोगों को गिरफ्तार किया है.

गौरतलब है कि बिहार में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर मुख्य रूप से प्रश्न लीक के आरोपों से संबंधित हैं। दूसरी ओर, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में एफआईआर फर्जी उम्मीदवारों और परीक्षा में धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने आवास पर नेट परीक्षा अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के कारण उत्पन्न स्थिति के कारण अध्ययन प्रक्रिया में समय बर्बाद न हो. उन्होंने आश्वासन दिया, हालांकि काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी होगी, लेकिन इसका संस्थागत कैलेंडर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

नेट से जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है. काउंसिलिंग भी अटकी हुई है। इस साल का नेट रद्द करने की मांग उठी है. फिर से परीक्षा के आयोजन की अर्जी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई मामले दायर किए गए हैं. इसी बीच गुरुवार को धर्मेंद्र ने कुछ नेट अभ्यर्थियों को अपने घर बुलाया। उन्होंने कुछ देर तक उनसे बातचीत की. छात्रों से परीक्षा संबंधी चिंताओं और समस्याओं के बारे में सुनें। खबर है कि उन्होंने वहां छात्रों को आश्वासन दिया.

सूत्र के मुताबिक, अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात की और परीक्षा को लेकर कई तरह की चिंताएं व्यक्त कीं. उनकी मुख्य चिंता यह थी कि क्या परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा, अदालती मामले के कारण काउंसलिंग में देरी के कारण शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में भी देरी होगी। ऐसे में छात्रों को डर रहता है कि उन्हें प्रथम वर्ष का मेडिकल कोर्स पूरा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री को वे सारी चिंताएं बतायीं.

शिक्षा मंत्री से मिलकर बाहर निकले लोगों ने कहा कि धर्मेंद्र ने उनकी बातें सुनीं. समस्या बताने का मौका दिया। वे खुलकर अपनी बात कहने में सक्षम हो गए हैं. इसके अलावा छात्रों से परीक्षा प्रक्रिया को कैसे बेहतर बनाया जाए इसके बारे में सुझाव भी सुनने को मिले हैं. इतना ही नहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि आगे से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता रखी जाएगी. सरकार इसे सुनिश्चित करेगी. शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसके लिए जरूरी कदम उठाये जायेंगे.

शिक्षा मंत्री के आवास से निकल रहे एक छात्र ने कहा कि उनमें से ज्यादातर लोग दूसरी बार परीक्षा नहीं देना चाहते हैं. तुरंत काउंसलिंग की जाए, ये उनकी मांग है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि मामला अभी लंबित है. सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में जरूरी फैसला लेगा.

इस साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा नेट के नतीजे 4 जून को जारी किए गए, उसी दिन जिस दिन लोकसभा चुनाव नतीजे घोषित हुए थे। इसमें देखा जा सकता है कि 67 लोगों ने एक साथ पूरे अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा यह भी पता चला है कि उन 67 में से कई लोगों ने एक ही सेंटर से परीक्षा दी है. कुछ लोगों को परीक्षा में अंक मिलते हैं, जो सामान्य गणना से परे है। इसके बाद NEET के रिजल्ट को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. बहस शुरू हुई. कथित तौर पर देश के कुछ हिस्सों में NEET के प्रश्न परीक्षा से पहले ही लीक हो गए थे. पुलिस ने इस सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया. उन्होंने पैसे के बदले नेट प्रश्न बेचने की बात स्वीकार की। उसके बाद विभिन्न विषयों में रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट नेट का आयोजन किया गया। अगले ही दिन परीक्षा रद्द घोषित कर दी गई. केंद्र सरकार ने माना है कि नेट का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में व्यवस्थागत खामियां हैं। सरकार को इस बात का सबूत मिला कि परीक्षा से एक दिन पहले नेट के प्रश्न भी डार्क वेब पर लीक हो गए थे. इसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई. इसके बाद नेट रद्द करने की मांग भी उठी. मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है.

क्या बीजेपी ने खोल दी है आने वाले चुनाव की संपूर्ण रणनीति?

बीजेपी ने आने वाले चुनाव की संपूर्ण रणनीति खोल दी है! उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भारतीय जनता पार्टी की पहली कार्यसमिति की बैठक हो रही है। बैठक में विधानसभा चुनाव 2027 पार्टी के मुख्य एजेंडे में है। बैठक में लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणों पर मंथन होना है। साथ ही, आगामी दिनों में 10 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव का रोडमैप तैयार होगा। इस बैठक में सीएम योगी, दोनों उपमुख्यमंत्री सहित भाजपा के कई नेता राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय में बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने पहुंचे हैं। इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हो रहे हैं। बैठक में यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है कि छोटे से बड़े कार्यकर्ताओं के सुझाव लेकर पार्टी नेतृत्व यदि किसी प्रकार का बदलाव करना चाहता है तो उसको अवसर मिलता है।भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि 1951 में जो संकल्प लिए थे, आज वो पूरे हो रहे हैं। बीजेपी एक ऐसा राजनीतिक दल है जिसके पहले अध्यक्ष ने बलिदान दिया है। इस दौरान यूपी बीजेपी अध्यक्ष ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नजर मुस्लिम वोट पर है। कांग्रेस का एक इको सिस्टम है जो हारने वाले को जीता हुआ बताकर जीतने वाले पर प्रश्न खड़ा करता है। 13 राज्यों में कांग्रेस शून्य है। कांग्रेस दूसरे दलों के सहयोग से जीतती है। आपातकाल की जनक कांग्रेस जब भी सत्ता में रही, उस समय जिसने भी विरोध किया उसे समाप्त करने के लिए कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने सभी कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

यूपी बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि हम संकल्प लेते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में शत-प्रतिशत विजय हासिल करेंगे। अगली लड़ाई स्वार्थी परिवारवादी और मोदी के परिवार के बीच है। राष्ट्र विरोधी और राष्ट्र भक्तों के बीच है। धर्म और अधर्म में बीच में है। भ्रष्टाचारी और सदाचारी के बीच है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के पीएम मोदी के संकल्प को हम सब मिलकर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि 2027 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की सुनिश्चित करने के लिए अभी से कमर कस कर तैयार हो जाना है। जीत का संकल्प हमें लेना है।

राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है। पार्टी को मजबूत करने के लिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश देती रहती है। लोकसभा चुनाव के कारण पिछले कुछ समय से प्रदेश कार्यसमिति की बैठक नहीं हो पाई थी। हमें उम्मीद है कि पार्टी तीन गुना बहुमत से (विधानसभा चुनाव) जीतेगी। योगी सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि जब भी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होती है तो जो राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक प्रस्ताव हैं और सामाजिक विषयों पर उन पर चर्चाएं होती हैं। स्वाभाविक है इस बैठक में भी चर्चा होनी हैं। यूपी सरकार के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा हमारे प्रदेश आ रहे हैं। मैं प्रदेश की जनता की ओर से उनका हृदय से स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इस कार्यसमिति की बैठक के बाद हमारे कार्यकर्ताओं, संगठन के पदाधिकारियों को नई ऊर्जा, नई दिशा मिलेगी। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है कि छोटे से बड़े कार्यकर्ताओं के सुझाव लेकर पार्टी नेतृत्व यदि किसी प्रकार का बदलाव करना चाहता है तो उसको अवसर मिलता है।

बीजेपी नेता मोहसिन रजा ने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण बैठक है, क्योंकि ग्रामीण स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को भी आमंत्रित किया गया है। वे अपने मुद्दे सामने रख सकेंगे। यूपी और देश के लोग बीजेपी पर विश्वास करते हैं, हम इसे जाने नहीं देंगे। आपातकाल की जनक कांग्रेस जब भी सत्ता में रही, उस समय जिसने भी विरोध किया उसे समाप्त करने के लिए कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने सभी कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।हमारे कार्यकर्ता पूरी तरह से तैयार हैं। हम उपचुनावों को विधानसभा चुनावों से नहीं जोड़ सकते हैं लेकिन हां हम नतीजों को देख सकते हैं और उसके अनुसार रणनीति बना सकते हैं।

क्या बीजेपी ने दे दिया है सभी को 2027 चुनाव का मंत्र?

हाल ही में बीजेपी ने सभी कार्यकर्ताओं को 2027 चुनाव का मंत्र दे दिया है! लोकसभा चुनाव में वोट शेयर और सीटें दोनों कम होने से हताश कार्यकर्ताओं में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने जोश भरा। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में लोकसभा चुनाव में हारी हुई सीटों पर मंथन तो हुआ ही, साथ ही दस सीटों पर होने वाले उपचुनाव और 27 के रण के लिए कार्यकर्ताओं को उनका ‘बल’ भी याद दिलाया गया। कार्यसमिति में यह भी मंथन हुआ कि उपचुनाव से पहले अब कैसे विपक्ष की काट करनी है और हर बूथ तक किस तरह से विपक्ष के भ्रम को तोड़ना है। बीजेपी लोकसभा चुनाव में 2019 के मुकाबले सीटें और वोट शेयर दोनों कम होने के बाद पूरी तैयारी में जुट गई है। बीजेपी की सीटें 2019 की 64 के मुकाबले 33 पर पहुंच गई थीं और वोट शेयर भी 8.50% कम हो गया था। इसके बाद से लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा है। कई जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर विधायकों तक बयान सामने आ रहे हैं। कार्यसमिति की बैठक में इस नब्ज को समझते हुए भाजपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं के सम्मान को याद दिलाया। सीएम योगी ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता बैकफुट पर न आएं, उन्होंने अपना काम बखूबी किया है। विपक्ष भ्रम फैलाने में कामयाब हो गया। वहीं डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि जो आप कार्यकर्ताओं का दर्द है, वही मेरा भी दर्द है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि कार्यकर्ता के सम्मान से बड़ा कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि कार्यकर्ता के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

बीजेपी अब दलितों के बीच अपना फोकस बढ़ाएगी। लोकसभा चुनावों में बीएसपी के वोट बैंक में लगी सेंधमारी का फायदा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को मिल गया। अब बीजेपी इसकी काट खोजने में जुट गई है। बीजेपी ने इसकी शुरुआत कार्यसमिति बैठक से की। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यसमिति की बैठक में पहुंचते ही बाबा साहेब भीमराम अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, उसके बाद मंच पर चढ़े। बीजपी अब दलितों के बीच विपक्ष के फैलाए भ्रम को तोड़ने के लिए प्लान बना रही है।

इसके लिए पार्टी दलित नेताओं और मंत्रियों की एक टीम तैयार कर रही है। वह दलित बस्तियों में जाकर बताएंगे कि समाजवादी सरकार में किस तरह से बाबा साहेब के नाम से बने कन्नौज मेडिकल कॉलेज का नाम बदल दिया गया था। भाजपा सरकार ने किस तरह से ये नाम दोबारा रखा। सपा सरकार ने अनुसूचित जाति की स्कॉरलशिप बंद करवा दी थी, जिसे बीजेपी सरकार ने शुरू करवाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अम्बेडकर से जुड़े पांच स्थलों को पंच तीर्थ घोषित किया।

बीजेपी ने कार्यकर्ताओं के सामने सबसे पहले यूपी में 10 खाली हुई विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को जीतने का टारगेट रखा है। यह सीटें दस विधायकों के सांसद बनने के बाद खाली हुई हैं। 2022 में इनमें पांच सीटें समाजवादी पार्टी के पास और पांच सीटें एनडीए गठबंधन के पास थीं। अब बीजेपी सभी दस सीटें जीतने पर फोकस करेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्यसमिति में सभी दस सीटें जीतने का टारगेट दिया। भाजपा संगठन महामंत्री धर्मपाल ने कार्यकर्ताओं से कहा कि बूथ स्तर तक समितियों को मजबूत करना है। जहां समितियों में सदस्य नहीं हैं, वहां नए सिरे से समितियों का गठन किया जाएगा।बता दें कि उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को किसी भी स्थिति में ‘बैकफुट’ पर आने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपने अपना काम बखूबी किया है। रविवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के आंबेडकर सभागार में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की एक दिवसीय बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। 

उन्होंने कहा कि आप (भाजपा कार्यकर्ता) विपक्ष में थे, तो जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए संघर्ष करते थे, अब जब सरकार में हैं, तो उत्तर प्रदेश में सुरक्षित वातावरण देख रहे हैं। याद कीजिए मोहर्रम के समय में सड़कें खाली हो जाती थीं और आज जब मोहर्रम होता है, तो पता भी नहीं चलता। इससे पहले उन्होंने हाल के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता न मिलने की वजहों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब हम आत्‍मविश्‍वास में होते हैं कि हम तो जीत ही रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से कहीं न कहीं हमें खामियाजा भुगतना ही पड़ता है। प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में भाजपा को इस बार सिर्फ 33 सीट पर जीत मिली, जबकि विपक्षी समाजवादी पार्टी ने 37 और उसकी सहयोगी कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल को दो और अपना दल (एस) को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली, जबकि अकेले मैदान में उतरे आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद नगीना सीट पर जीत गए। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का खाता भी नहीं खुला।

लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में नसीहत भरे अंदाज में योगी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कहा कि भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में 2014, 2017, 2019 और 2022 में भारी सफलता प्राप्त कर विपक्ष को उसकी वास्तविक स्थिति में पहुंचाने का कार्य किया और लगातार उस पर दबाव बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कोई संदेह नहीं कि 2014, 2017, 2019 और 2022 में (लोकसभा और विधानसभा चुनावों में) जितना मत प्रतिशत भाजपा का रहा, 2024 में भी आप सभी कार्यकर्ताओं के संघर्ष से, मोदी जी और राष्‍ट्रीय अध्यक्ष जी के नेतृत्व में भाजपा उतने वोट पाने में सफल रही, लेकिन वोट इधर-उधर होने से सीटों पर हार जीत तय होती है। ऐसे जब हम आत्‍मविश्‍वास में होते कि हम तो जीत ही रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से कहीं न कहीं हमें खामियाजा भुगतना ही पड़ता है।

उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो विपक्ष चुनाव के पहले हिम्मत हार कर बैठ गया था, वह आज फिर उछल कूद कर रहा है। अपनी सरकार की कानून-व्यवस्था की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही योगी ने कहा कि 2022 के चुनाव के बाद विपक्ष उछल कूद करने लगा और मारपीट पर उतारु हो गया, लेकिन वास्तव में हमारी सरकार के माफिया मुक्त अभियान में आप सबके सहयोग से प्रदेश को गुंडों और माफिया से मुक्त करने में सफलता प्राप्त हुई। उन्‍होंने समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान दलितों, महापुरुषों के अपमान, आरक्षण में भेदभाव और संविधान की अवहेलना करने का आरोप लगाया।