Sunday, March 15, 2026
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क्या बीजेपी को जरूरत है आत्म मंथन करने की?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बीजेपी को आत्म मंथन करने की जरूरत है! भाजपा लोकसभा सीटों पर अपनी हार का आकलन करने के लिए राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें कर रही है। प्रत्येक बैठक में एक केंद्रीय नेता पार्टी सदस्यों का मार्गदर्शन कर रहा है। साथ ही उन्हें प्रेरित कर रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाना चाहती है कि कम सीटें बाहरी कारकों के कारण हैं। पार्टी भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करेगी। पार्टी नेताओं ने हमारे सहयोगी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि कमियों को सार्वजनिक करने से दोषारोपण का खेल शुरू हो जाएगा। इससे एक नेता दूसरे के खिलाफ खड़ा हो जाएगा, जिससे पार्टी को नुकसान होगा। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने यूपी भाजपा विस्तारित कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लिया था। यहां उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान पर झूठ फैलाता है। नड्डा ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को लोगों को बताना चाहिए कि कांग्रेस ने किस तरह संविधान के साथ खिलवाड़ किया और भाजपा ने हमेशा संविधान की रक्षा की। भाजपा द्वारा सभी बैठकों में संविधान के मुद्दे को उठाया जा रहा है।

इसका जिक्र सबसे पहले राजस्थान कार्यकारिणी की बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य चुनाव प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे ने किया था। रविवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी के प्रदर्शन के लिए इसे संभावित वजह बताया। बीजेपी भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उत्साहपूर्ण मूड पर ध्यान दे रही है। लोकसभा में अपनी सीटों की संख्या 99 तक पहुंचाने के अलावा, कांग्रेस ने हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी से बेहतर प्रदर्शन किया। केंद्रीय नेतृत्व लोकसभा में कांग्रेस की संख्या में वृद्धि को महज संयोग बताकर खारिज करने की कोशिश कर रहा है। नड्डा ने रविवार को कहा कि कांग्रेस अपने सहयोगियों की कीमत पर बढ़ी है। बीजेपी के साथ सीधे मुकाबले में इसकी सफलता दर 26% है। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के लिए ‘परजीवी’ शब्द का इस्तेमाल किया। अब हर नेता बीजेपी कार्यकर्ताओं को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि उनकी (कांग्रेस कार्यकर्ताओं की) खुशी थोड़े समय के लिए है और बीजेपी वापसी करेगी।

बीजेपी भी पीएम मोदी के नेतृत्व की जोरदार वकालत कर रही है। पार्टी का कहना है कि मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। बीजेपी नेता पार्टी कार्यकर्ताओं को याद दिला रहे हैं कि लगातार तीसरी बार भारत का पीएम बनना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। बीजेपी नेताओं ने रविवार को कहा कि पीएम मोदी के एक्स अकाउंट पर 100 मिलियन फॉलोअर्स हैं। ये दुनिया के किसी भी अन्य नेता से कहीं ज्यादा है।

भाजपा का कहना है कि एनडीए के सहयोगी उसके साथ मजबूती से खड़े हैं। भाजपा की सीटें बहुमत के आंकड़े से नीचे चली गई हैं। ऐसे में इस बात को लेकर हमेशा अटकलें लगाई जाती रही हैं कि क्या सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी। पार्टी के नेता देशभर में कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिला रहे हैं कि यह सरकार 2014 और 2019 की तरह ही मजबूत है। एनडीए के सहयोगी दल हर फैसले में पूरी तरह से पीएम मोदी के साथ हैं। गठबंधन सहयोगियों के साथ दृष्टिकोण पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक है। एनडीए सहयोगियों के बीच सभी स्तरों पर समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। सहयोगी दल भी सरकार के दृष्टिकोण और विभिन्न मुद्दों पर उसके रुख के समर्थक हैं। जेडीयू ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाए जाने की घोषणा का स्वागत किया।

बता दे कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भारतीय जनता पार्टी की पहली कार्यसमिति की बैठक हो रही है। बैठक में विधानसभा चुनाव 2027 पार्टी के मुख्य एजेंडे में है। बैठक में लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणों पर मंथन होना है। साथ ही, आगामी दिनों में 10 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव का रोडमैप तैयार होगा। इस बैठक में सीएम योगी, दोनों उपमुख्यमंत्री सहित भाजपा के कई नेता राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय में बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने पहुंचे हैं। इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हो रहे हैं। बैठक में यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है। 

भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि 1951 में जो संकल्प लिए थे, आज वो पूरे हो रहे हैं। बीजेपी एक ऐसा राजनीतिक दल है जिसके पहले अध्यक्ष ने बलिदान दिया है। इस दौरान यूपी बीजेपी अध्यक्ष ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नजर मुस्लिम वोट पर है। कांग्रेस का एक इको सिस्टम है जो हारने वाले को जीता हुआ बताकर जीतने वाले पर प्रश्न खड़ा करता है। 13 राज्यों में कांग्रेस शून्य है। कांग्रेस दूसरे दलों के सहयोग से जीतती है। आपातकाल की जनक कांग्रेस जब भी सत्ता में रही, उस समय जिसने भी विरोध किया उसे समाप्त करने के लिए कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने सभी कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

यूपी बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि हम संकल्प लेते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में शत-प्रतिशत विजय हासिल करेंगे। अगली लड़ाई स्वार्थी परिवारवादी और मोदी के परिवार के बीच है। राष्ट्र विरोधी और राष्ट्र भक्तों के बीच है। धर्म और अधर्म में बीच में है। भ्रष्टाचारी और सदाचारी के बीच है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के पीएम मोदी के संकल्प को हम सब मिलकर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि 2027 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की सुनिश्चित करने के लिए अभी से कमर कस कर तैयार हो जाना है। जीत का संकल्प हमें लेना है।

जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस को हुआ था प्यार !

एक ऐसा समय जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस को प्यार हुआ था! यह बात तब की है जब आजाद हिंद फौज के नेता सुभाष चंद्र बोस ऑस्ट्रिया में थे, जहां वह भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अनुभवों पर एक किताब लिख रहे थे-द इंडियन स्ट्रगल। वह रोज कुछ न कुछ लिखते। मगर, वो चाहते थे कि कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए जो रोज उनकी बातों को तेजी से लिख सके। अपने इसी मकसद को पूरा करने के दौरान सुभाष चंद्र बोस की मुलाकात एक खूबसूरत ऑस्ट्रियाई लड़की से हुई, जिसे वो पहली ही नजर में दिल दे बैठे। सुभाष के प्रेम संबंध इस देश में पनपे, जिसका नतीजा दोनों की शादी में हुआ। सुभाष चंद्र बोस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हीरो रहे हैं, जो इस वक्त ऑस्ट्रिया के दो दिवसीय दौरे पर हैं। किसी प्रधानमंत्री की यह 40 साल में यह पहला ऑस्ट्रिया दौरा है। इससे पहले 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस देश की यात्रा की थी। 1930 की बात है जब सुभाष चंद्र बोस कारावास में ही थे कि चुनाव में उन्हें कोलकाता का महापौर चुना गया। इसलिए सरकार उन्हें रिहा करने पर मजबूर हो गई। 1932 में सुभाष को फिर से कारावास हुआ। इस बार उन्हें अल्मोड़ा जेल में रखा गया। अल्मोड़ा जेल में उनकी तबियत फिर से खराब हो गई। तब डॉक्टरों की सलाह पर सुभाष को यूरोप जाना पड़ा। 1933 से लेकर 1936 तक सुभाष यूरोप में ही रहे। इस दौरान वह इटली के नेता मुसोलिनी से मिले, जिन्होंने भारत की आजादी में मदद करने की बात कही। आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे दोस्त बन गए। जिन दिनों सुभाष यूरोप में थे उन्हीं दिनों जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का ऑस्ट्रिया में निधन हो गया। सुभाष ने वहां जाकर जवाहरलाल नेहरू को सांत्वना भी दी। 1934 में वह इलाज के लिए ऑस्ट्रिया रुके थे, जब ऑस्टियाई लड़की एमिली से उनकी मुलाकात हुई।

सुभाष चंद्र बोस जब ऑस्ट्रिया लड़की एमिली शेंकल से एक इंटरव्यू के दौरान चंद मिनटों की मुलाकात में सुभाष उसे अपना दिल बैठे थे। सुभाष उस वक्त अपनी किताब ‘द इंडियन स्ट्रगल’ किताब उनकी इसी लिखने की आदत का नतीजा थी। हालांकि, अपनी इस किताब को लिखने के लिए उन्हें किसी टाइपिस्ट की जरूरत थी, जो तेजी से उनकी बातों को लिख सके। जब यह काम शुरू हुआ तो उस वक्त सुभाष ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में थे। वहां उनके एक दोस्त डॉ. माथुर ने इस काम में मदद की और दो लोगों को सुभाष के पास टाइपिस्ट की नौकरी के लिए भेज दिया। इनमें से एक थी 23 साल की खूबसूरत ऑस्ट्रियाई लड़की एमिली शेंकल, जिसे 37 साल के सुभाष पहली ही नजर में दिल दे बैठे थे। इसी दौरान दोनों के बीच प्यार पनपा।

सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते सौगत बोस की किताब ‘हिज मैजेस्टी अपोनेंट- सुभाष चंद्र बोस एंड इंडियाज स्ट्रगल अगेंस्ट एंपायर’ में लिखा है कि एमिली से मुलाकात के बाद सुभाष में बड़ा बदलाव आया। 26 जनवरी, 1910 को ऑस्ट्रिया के एक कैथोलिक परिवार में जन्मी एमिली कहती हैं’ सुभाष ने मुझे प्रपोज किया और हमारे रिश्ते रोमांटिक होते गए। 1934 से मार्च 1936 के बीच ऑस्ट्रिया और चेकेस्लोवाकिया में रहने के दौरान हमारे रिश्तों में गहराई आनी लगी।’

एमिली के पिता को शुरुआत में अपनी बेटी का किसी भारतीय के यहां काम करना या उससे रिश्ता रखना बेहद नागवार गुजरा था। हालांकि, जब उनकी मुलाकात सुभाष से हुई तो वह भी उनके करिश्माई व्यक्तित्व के मुरीद हो गए। सुभाष ने एमिली को कई पत्र लिखा था, जिसे एमिली ने खुद शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर कुमार बोस की पत्नी कृष्णा बोस को सौंपा था। इन्हीं पत्रों में कुछ लवलेटर भी थे, जिनसे सुभाष और एमिली के रोमांटिक रिश्ते की बात जाहिर होती है। 1910 को जन्मी एमिली के साथ सुभाष चंद्र बोस ने 12 साल बिताए थे। दोनों का प्यार अटूट था।

सुभाष ने एमिली को 5 मार्च, 1936 को एक लेटर लिखा था। इस पत्र में वह कहते हैं-‘माई डार्लिंग, जैसे वक्त आने पर बर्फीला पहाड़ भी पिघल जाता है, वैसे ही मेरी भावनाएं भी हैं। …मुझे नहीं मालूम कि आने वाले समय में क्या होगा…संभव हो कि मुझे पूरी जिंदगी जेल में बितानी पड़े। मुझे गोली मार दी जाए या फांसी दे दी जाए। मैं तुम्हें कभी देख नहीं पाऊं, मगर मेरा यकीन करो, तुम हमेशा मेरे दिल में राज करोगी। मेरी सोच और मेरे सपनों में रहोगी। इस जन्म में हम नहीं मिल पाए तो अगले जन्म में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।’

बाद में सांसद रहीं और शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर कुमार बोस की पत्नी कृष्णा बोस ने सुभाष और एमिली की प्रेम कहानी पर ‘ए ट्रू लव स्टोरी- एमिली एंड सुभाष’ लिखी थी। सुभाष और एमिली का साथ 1945 तक महज 12 साल का ही रहा। दोनों को 29 नवंबर, 1942 एक बेटी हुई, जिसका नाम दोनों ने इटली के क्रांतिकारी नेता गैरीबाल्डी की ब्राजीली मूल की पत्नी अनीता गैरीबाल्डी के सम्मान में रखा, जो गुरिल्ला युद्ध में माहिर थीं।

सुभाष बर्लिन में रिबेन ट्रोप जैसे जर्मन नेताओं से मिले। उन्होंने जर्मनी में भारतीय स्वतन्त्रता संगठन और आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की। इसी दौरान सुभाष नेताजी के नाम से जाने जाने लगे। जर्मन सरकार के एक मन्त्री एडॅम फॉन ट्रॉट सुभाष के अच्छे दोस्त बन गए। 29 मई 1942 के दिन सुभाष जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर से मिले। उन्होंने हिटलर से उनकी आत्मकथा में लिखे गए उस अंश को निकालने को कहा, जिसमें भारतीयों की बुराई की गई थी।

पीएम मोदी ने इसी साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के अवसर पर महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर हम उनके जीवन और साहस का सम्मान करते हैं। देश की स्वतंत्रता के लिए उनका अटूट समर्पण आज भी प्रेरित करता है। सरकार ने साल 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्‍मदिन 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया था। सुभाष ने जब विदेश में आजाद हिंद फौज सरकार बनाई तो उन्होंने यह चर्चित नारा दिया था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।

आखिर दिल्ली की जलमग्न वाली स्थिति पर क्यों नहीं हो रही बहस ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि दिल्ली की जलमग्न वाली स्थिति पर बहस क्यों नहीं हो रही है! सीजन की पहली ही तेज बारिश में देश की राजधानी दिल्ली पानी-पानी हो गई। कराहने लगी। हर तरफ जलजमाव ही जलजमाव। सड़कों पर गाड़ियां डूबती हुई दिखने लगीं। कहीं अंडरपास लबालब पानी में डूब गया तो कहीं वीवीआईपी एरिया में सांसदों, मंत्रियों के आवास में घुटनेभर पानी जमा हो गया। एनडीएमसी में जहां केंद्र का नियंत्रण है या फिर वे इलाके जो दिल्ली सरकार के तहत आते हैं, हर जगह बुरी हालत। ये सारे मंजर जलनिकासी व्यवस्था और मॉनसून से पहले नालों की डिसिल्टिंग के दावे और तैयारियों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हालांकि, एक ही दिन में 228 मिलीमीटर बारिश से किसी भी शहर की हालत चरमरा सकती है। 1936 के बाद दिल्ली ने 24 घंटे के भीतर इतनी बारिश देखी है। देश की राजधानी के जलमग्न होने पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप का खेल चलने लगा है। भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में जलजमाव को लेकर आम आदमी पार्टी पर हमलावर है क्योंकि दिल्ली के साथ-साथ नगर निगम में भी उसी की सरकार है। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी को दिल्ली से ज्यादा अयोध्या की चिंता सता रही है। साथ ही साथ वह इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 पर हुए हादसे में एक शख्स की मौत को लेकर बीजेपी को घेर रही है। बारिश से दिल्ली एक तरह से त्राहि-त्राहि कर रही है लेकिन AAP सांसद को अयोध्या की चिंता ज्यादा सताती दिख रही है। आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को भारी बारिश के कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 सहित कई इमारतों के गिरने पर नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार की आलोचना की। टर्मिनल 1 पर सुबह करीब साढ़े 5 बजे हुए हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 8 लोग घायल हो गए। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने देशभर में कथित रूप से क्षतिग्रस्त हुईं इमारतों का जिक्र करते हुए निशाना साधा। उन्होंने यह दावा किया कि अयोध्या शहर पहली बारिश नहीं झेल सका जहां विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए थे।

संजय सिंह ने कहा, ‘हम सभी ने देखा कि पहली बारिश के ठीक बाद अयोध्या में राम मंदिर से पानी निकलना शुरू हो गया। पानी गर्भगृह में चला गया, जिससे मंदिर के मुख्य पुजारी नाराज हो गए। हमने अटल सेतु पुल की हालत देखी है। जबलपुर टर्मिनल ढह गया। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे तबाह हो गया। पूरा अयोध्या, जिसे केंद्र विकास के लिए बताता है, पहली बारिश के बाद जलमग्न हो गया। दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल 1 की छत गिरना बहुत शर्मनाक है, इसका उद्घाटन 10 मार्च को पीएम मोदी ने किया था। भाजपा के साथ भ्रष्टाचार जुड़ा है।’

वैसे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि गर्भगृह में जहां भगवान राम विराजमान हैं, वहां की छत से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है और न ही कहीं से पानी गया है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी मंगलवार को मंदिर के मुख्य पुजारी के आरोपों को खारिज कर दिया था, जिनका कहना था कि गर्भगृह से बारिश का पानी निकल रहा है।

संजय सिंह ने मुंबई के अटल सेतु का भी जिक्र किया, जिसे लेकर कांग्रेस ने इस महीने के शुरू में दरारें आने का दावा किया था। हालांकि, मुंबई महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) का कहना है कि अटल सेतु पर नहीं, बल्कि उल्वे में उसे जोड़ने वाले अप्रोच रोड पर मामूली दरारें पाई गईं, जो पुल का हिस्सा नहीं है। पुल को जोड़ने वाली सर्विस रोड है। जबलपुर टर्मिनल हादसे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के नुकसान और दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल 1 की छत गिरने का उदाहरण देते हुए संजय सिंह ने कहा, ‘दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल 1 की छत गिरना बहुत शर्मनाक है, जिसका उद्घाटन 10 मार्च को पीएम मोदी ने किया था। भाजपा के साथ भ्रष्टाचार जुड़ा है।’ हालांकि, टर्मिनल 1 पर हुए हादसे के बाद मौके पर पहुंचे केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि इमारत का जो हिस्सा गिरा, उसका निर्माण 2009 में हुआ था। जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसका उद्घाटन नहीं किया था।

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी भी सियासत से कहां चूकने वाली है। उसके प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार तड़के भारी बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव की खबर आने के बाद आम आदमी की दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मिंटो ब्रिज से भी जलभराव की खबर मिली है, जिसे AAP ने ठीक करने का दावा किया है।

भाजपा पार्षद रविंदर सिंह नेगी ने दिल्ली सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध के तौर पर भीषण जलभराव के बीच एक हवा वाली नाव चलाई। उन्होंने एएनआई से कहा, ‘पीडब्ल्यूडी के सभी नाले ओवरफ्लो हो रहे हैं। उन्होंने मॉनसून से पहले इसकी सफाई नहीं करवाई। इससे जलभराव हो गया है, विनोद नगर जलमग्न हो गया है।’

कोचिंग सेंटर जा रही अंजलि नाम की एक यात्री ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, ‘हमें काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है, पहली बारिश के बाद यह स्थिति है, यदि मुख्य सड़क पर यह स्थिति है, तो गलियों में क्या स्थिति होगी?’

जब वैज्ञानिकों ने बनाया रामसेतु का नक्शा!

हाल ही में वैज्ञानिकों ने रामसेतु का नक्शा बना दिया है! इसरो के वैज्ञानिकों ने अमेरिकी सैटेलाइट से मिले डेटा का इस्तेमाल करके राम सेतु का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा बनाया है। इस नक्शे से भारत और श्रीलंका के बीच बने जमीनी पुल के निर्माण को लेकर चल रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने अमेरिका के एक उपग्रह से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल करके राम सेतु, जिसे एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है, उसका पहला समुद्र के नीचे का विस्तृत मैप तैयार किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि राम सेतु के निर्माण को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। यह नक्शा 29 किमी लंबे राम सेतु का पहला पानी के नीचे का नक्शा है, जो समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 8 मीटर दर्शाता है। इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के वैज्ञानिकों ने ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में कहा, ‘यह रिपोर्ट नासा के उपग्रह ICESat-2 के जल पारगम्य फोटॉन का इस्तेमाल करके एडम्स ब्रिज के बारे में जरूरी डिटेल्स प्रदान करने वाली पहली रिपोर्ट है। हमारे निष्कर्ष एडम्स ब्रिज और इसकी उत्पत्ति की समझ को और बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।

यह उपग्रह एक लेजर अल्टीमीटर से लैस है जो समुद्र के उथले क्षेत्रों में किसी भी संरचना की ऊंचाई को मापने के लिए फोटॉन या प्रकाश कणों को पानी में प्रवेश करने की अनुमति देता है। एडम्स ब्रिज भारत में रामेश्वरम द्वीप के दक्षिण-पूर्वी प्वाइंट धनुषकोडी से श्रीलंका के मन्नार द्वीप में तलाईमन्नार के उत्तर-पश्चिमी छोर तक फैला है। यह चूना पत्थर की छिछली चट्टानों की एक श्रृंखला से बनी पानी के नीचे की चोटी है, जिसके कुछ हिस्से पानी के ऊपर दिखाई देते हैं, लेकिन यहां कोई चट्टान या वनस्पति नहीं है।

जोधपुर और हैदराबाद के एनआरएससी शोधकर्ताओं ने एडम्स ब्रिज के बारे में कई जटिल विवरणों का पता लगाने के लिए नासा सैटेलाइट से खींची गई तस्वीरों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि पुल का 99.98 फीसदी हिस्सा समुद्र के पानी में डूबा हुआ है, जिसके कारण जहाजों से क्षेत्र का सर्वेक्षण संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने पुल के नीचे 2-3 मीटर की गहराई वाले 11 संकरे चैनलों का पता लगाया, जो मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य के बीच पानी के मुक्त प्रवाह या आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करते हैं।

भूवैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि भारत और श्रीलंका की उत्पत्ति का आपस में गहरा संबंध है। दोनों ही गोंडवाना के प्राचीन महाद्वीप का हिस्सा थे, जो टेथिस सागर में उत्तर की ओर बह गया था। बता दें कि इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के वैज्ञानिकों ने ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में कहा, ‘यह रिपोर्ट नासा के उपग्रह ICESat-2 के जल पारगम्य फोटॉन का इस्तेमाल करके एडम्स ब्रिज के बारे में जरूरी डिटेल्स प्रदान करने वाली पहली रिपोर्ट है। लगभग 35-55 मिलियन वर्ष पहले लौरेशिया नाम के एक अन्य महाद्वीप से टकराकर अपनी वर्तमान स्थिति में आ गया था। बता दें कि वहीं शोध के शोधकर्ताओं के अनुसार, हमारी जांच के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि राम सेतु (एडम्स ब्रिज), धनुषकोडी और तलाईमन्नार द्वीप का एक सबमरीन श्रृखंला है। एडम्स ब्रिज की क्रेस्ट लाइन पर, दोनों तरफ लगभग 1.5 किमी का हिस्सा बेहद उथले पानी के भीतर अचानक गहराई के साथ काफी उतार-चढ़ाव वाला है।

जबकि मौजूदा भूगर्भीय साक्ष्यों से पता चलता है कि यह पुल भारत और श्रीलंका के बीच एक भूतपूर्व जमीनी संबंध है।एडम्स ब्रिज, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में ज्यादातर राम सेतु के नाम से जाना जाता है, श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप और भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के बीच उथले पानी की एक श्रृंखला है। स्टडी में कहा गया है, रिसर्च में राम सेतु (एडम्स ब्रिज) के आयतन की गणना की गई, जिससे लगभग 1 km 3 की वैल्यू हासिल हुई। और दिलचस्प बात यह है कि इस आयतन का केवल 0.02 प्रतिशत ही औसत समुद्र तल से ऊपर है, और सामान्य तौर पर, ऑप्टिकल सैटेलाइट इमेजरी में भी यही दिखाई देता है – कुल मिलाकर, एडम्स ब्रिज का लगभग 99.98 प्रतिशत हिस्सा उथले और बहुत उथले पानी में डूबा हुआ है। एडम्स ब्रिज की वर्तमान भौतिक विशेषताओं की पुष्टि करने के लिए, वैज्ञानिकों ने 3डी-व्युत्पन्न मापदंडों के माध्यम से बाथिमेट्रिक डेटा से दृश्य व्याख्याओं का उपयोग किया, जिसमें आकृति, ढलान और वॉल्यूमेट्रिक विश्लेषण शामिल थे।वहीं रामेश्वरम के मंदिर में लगे तमाम अभिलेखों से पता चलता है कि यह राम सेतु 1480 तक पानी के ऊपर था और एक चक्रवात तूफान के दौरान जलमग्न हो गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों और हिमनदों के पिघलने से जुड़े समुद्र के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण जमीनी पुल ऊपर आ सकता है। रामेश्वरम के मंदिर अभिलेखों से पता चलता है कि यह पुल 1480 तक पानी के ऊपर था और एक चक्रवात के दौरान जलमग्न हो गया था।

आखिर कब खत्म होंगे लापरवाही वाले हादसे?

वर्तमान में अधिकतर हादसे की वजह लापरवाही सामने आ रही है! पता नहीं यह लापरवाही वाले हादसे कब खत्म होंगे! बुधवार सुबह सवा 5 बजे यूपी के उन्नाव में एक डबल डेकर स्लीपर बस और टैंकर की टक्कर में 18 लोगों की मौत हो गई। 19 अन्य घायल हैं। मरने वालों में 3 महिलाएं और एक बच्चा भी है। टक्कर इतना जबरदस्त था कि बस और टैंकर दोनों के परखच्चे उड़ गए। बस बिहार से शिवहर से दिल्ली जा रही थी। एक दिन पहले ही मंगलवार को यूपी के ही अमेठी में दिल्ली से बिहार के सिवान जा रही बस हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई। आखिर लंबी दूरी की बसें क्यों साबित हो रहीं ‘दौड़ती ताबूत’? आखिर ऐसी बसों और मालिकों पर ऐक्शन क्यों नहीं होता है? आइए समझते हैं। सड़क हादसों की एक बड़ी वजह मानवीय गलतियां होती है। ज्यादातर मामलों में हादसे की वजह मानवीय चूक होती हैं। घंटों तक बिना नींद लिए या फिर महज 2-3 घंटे की नींद लिए ड्राइविंग की वजह से उन्हें झपकी आ जाती है। कभी-कभी तो लंबी दूरी की बस सिर्फ एक ड्राइवर के भरोसे होती है। इस तरह ओवरवर्क हादसे की एक प्रमुख वजह है।इसमें ओवर स्पीड, शराब पीकर या ड्रग के नशे में ड्राइविंग, ड्राइविंग करते हुए किसी अन्य से बातचीत या मोबाइल चलाना या कुछ ऐसा करना जिससे ध्यान बंट जाए, ड्राइवर को नींद आना और ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करना। इनके अलावा वाहन में गड़बड़ी की वजह से भी हादसे हो जाते हैं जैसे ब्रेक फेल होना, टायर में गड़बड़ी होना।

आजकल बसें बहुत रफ्तार में दौड़ती हैं जिसकी वजह शानदार हाइवेज और एक्सप्रेसवेज का निर्माण है। सड़कें अच्छी हैं तो गाड़ियों की रफ्तार बढ़ी है। लेकिन अधिकतम गति की एक सीमा है। अगर बसें और दूसरी गाड़ियां उसका पालन करें तो इतने हादसे नहीं होंगे। ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होने से हादसे तो होंगे ही। उन्नाव बस हादसे में जानकारी सामने आ रही है कि ओवरटेक के चक्कर में हादसा हुआ। ओवरटेक करते वक्त बस ओवरस्पीड हो गई और टैंकर से टकरा गई। इसी तरह मंगलवार को अमेठी में हुआ हादसा भी लापरवाही का नतीजा लगता है। ड्राइवर ने बस को रोड पर ही खड़ा कर दिया था और पीछे से आ रही गाड़ी ने टक्कर मार दी थी। बस या किसी भी वाहन को सड़क पर खड़ा करना, भले ही थोड़ा साइड में करके खड़ा किया गया हो, हादसे को न्योता देने जैसा है। जाड़े के दिनों में कोहरे या फिर बरसात में बारिश की वजह से विजिबिलिटी कम होने पर भी हादसे हो जाते हैं।

इन बढ़ते बस हादसों की एक और बड़ी वजह ड्राइवरों का पर्याप्त नींद नहीं लेना है। अक्सर देखा जाता है कि लंबी दूरी के लिए चलने वालीं बसों में ड्राइवर ओवरवर्क कर रहे होते हैं। घंटों तक बिना नींद लिए या फिर महज 2-3 घंटे की नींद लिए ड्राइविंग की वजह से उन्हें झपकी आ जाती है। कभी-कभी तो लंबी दूरी की बस सिर्फ एक ड्राइवर के भरोसे होती है। इस तरह ओवरवर्क हादसे की एक प्रमुख वजह है।

जिस तरह आए दिन बस हादसों में लोगों की जान जा रही है, उससे लंबी दूरी की बस सर्विस पर सवाल उठने लाजिमी हैं। क्या लंबी दूरी की प्राइवेट बसों पर रोक लगाई जानी चाहिए? वैसे प्रतिबंध किसी समस्या का समाधान नहीं है। अगर ये बसें ट्रैफिक नियमों का पालन करें तो हादसों में यूं जिंदगियां नहीं जाएंगी। लेकिन ये बसें मनमाने और खतरनाक ढंग से सड़कों पर दौड़ रही हैं। न नियमों की परवाह है न यात्रियों की सुरक्षा की चिंता। अगर ऐसा हो रहा है तो कहीं न कहीं, इसके लिए करप्शन या फिर प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है।सड़क हादसों की एक बड़ी वजह मानवीय गलतियां होती है। ज्यादातर मामलों में हादसे की वजह मानवीय चूक होती हैं। इसमें ओवर स्पीड, शराब पीकर या ड्रग के नशे में ड्राइविंग, ड्राइविंग करते हुए किसी अन्य से बातचीत या मोबाइल चलाना या कुछ ऐसा करना जिससे ध्यान बंट जाए, ड्राइवर को नींद आना और ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करना। बसें ट्रैफिक नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं, इसे लेकर जिम्मेदार आंख मूंदे हुए हैं। इसमें कुछ तो लापरवाही है तो कुछ हद तक करप्शन भी जिम्मेदार है। ये तो एक ओपन सीक्रेट है कि बस मालिक सड़क पर मनमाने तरीके से बस दौड़ाने के लिए जगह-जगह ‘चढ़ावा’ चढ़ाते हैं। इस वजह से उन पर ऐक्शन नहीं होता।

जब रेल मंत्री ने सभी के सामने सुनाई रेल सुविधा?

हाल ही में रेल मंत्री ने सभी के सामने रेल सुविधाओं के बारे में चर्चा की है! हाल ही में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह ट्रेन चालकों की परेशानियों और रेलवे के दूसरे मामलों को उठाएंगे। पिछले सप्ताह लोको पायलट के साथ राहुल गांधी ने मुलाकात की थी। वहीं अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन चालकों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि लोको पायलट रेलवे परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। विपक्ष की ओर से हमारे लोको पायलटों को हतोत्साहित करने के लिए बहुत सारी गलत सूचनाएं और नाटकबाजी की जा रही है, इसलिए जरूरी है कि मैं चीजों को बिल्कुल स्पष्ट कर दूं। उन्होंने इसको लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि लोको पायलटों के ड्यूटी घंटों की सावधानीपूर्वक निगरानी की जाती है। सफर के बाद आराम करने की पूरी सुविधा है। ड्यूटी के घंटे निर्धारित होते हैं। इस वर्ष जून माह में 8 घंटे से भी कम औसत ड्यूटी है।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा था कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में लोको पायलट की जिंदगी की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। उन्होंने कहा कि लोको पायलट को गर्मी से खौलते केबिन में बैठ कर 16-16 घंटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। केवल अति आवश्यक परिस्थितियों में ही यात्रा की अवधि निर्धारित घंटों से अधिक होती है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले लोको पायलट कैब की हालत बहुत ही खराब थी। 2014 के बाद से, एर्गोनोमिक सीटों के साथ कैब में सुधार किया गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोको पायलटों से मुलाकात के बाद एक पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि लोको पायलट से जुड़े मुद्दों और उनके अधिकारों की आवाज इंडिया गठबंधन संसद में उठाएगा।इतना ही नहीं ट्रेन के 7,000 से अधिक लोको कैब AC वाले हैं। नये लोकोमोटिव का निर्माण एसी कैब से किया जा रहा है। जब लोको पायलट की ड्यूटी खत्म होती है और यात्रा पूरी होती है तब वह आराम के लिए रनिंग रूम में आते हैं। 2014 से पहले रनिंग रूम की हालत बहुत खराब थी।

आज लगभग सभी (558) रनिंग रूम अब वातानुकूलित हैं। कई रनिंग रूम में फुट मसाजर भी उपलब्ध कराए जाते हैं। कांग्रेस ने लोको पायलटों की कामकाजी परिस्थितियों को समझे बिना इसकी आलोचना की थी। पिछले कुछ वर्षों में, बड़ी भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई और 34,000 रनिंग स्टाफ की भर्ती की गई है। वर्तमान में 18,000 रनिंग स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। फर्जी खबरों से रेल परिवार को हतोत्साहित करने का प्रयास विफल होगा। पूरा रेल परिवार हमारे देश की सेवा में एकजुट है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोको पायलटों से मुलाकात के बाद एक पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि लोको पायलट से जुड़े मुद्दों और उनके अधिकारों की आवाज इंडिया गठबंधन संसद में उठाएगा। राहुल गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलट के साथ अपनी हालिया बातचीत का एक वीडियो एक्स पर पोस्ट कर यह टिप्पणी की। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा था कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में लोको पायलट की जिंदगी की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। उन्होंने कहा कि लोको पायलट को गर्मी से खौलते केबिन में बैठ कर 16-16 घंटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

गांधी ने एक पोस्ट में कहा जिनके भरोसे करोड़ों जिंदगियां चलती हैं, उनकी अपनी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। बता दें कि ड्यूटी के घंटे निर्धारित होते हैं। इस वर्ष जून माह में 8 घंटे से भी कम औसत ड्यूटी है। केवल अति आवश्यक परिस्थितियों में ही यात्रा की अवधि निर्धारित घंटों से अधिक होती है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले लोको पायलट कैब की हालत बहुत ही खराब थी। 2014 के बाद से, एर्गोनोमिक सीटों के साथ कैब में सुधार किया गया है। यूरिनल (मूत्रालय) जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित लोको पायलट के न काम के घंटों की कोई सीमा है और न ही उन्हें छुट्टी मिलती है।2014 के बाद से, एर्गोनोमिक सीटों के साथ कैब में सुधार किया गया है। इतना ही नहीं ट्रेन के 7,000 से अधिक लोको कैब AC वाले हैं। नये लोकोमोटिव का निर्माण एसी कैब से किया जा रहा है। जब लोको पायलट की ड्यूटी खत्म होती है और यात्रा पूरी होती है तब वह आराम के लिए रनिंग रूम में आते हैं। 2014 से पहले रनिंग रूम की हालत बहुत खराब थी। इस कारण वे शारीरिक और मानसिक रूप से टूट कर बीमार हो रहे हैं।

मुस्लिम महिला के गुजारे के लिए क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिला के गुजारे के लिए एक बयान दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में बने एक बेहद विवादित कानून को बड़ा झटका दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भी आपराधिक दंड संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते की मांग करने का हकदार बताया है। राजीव गांधी सरकार ने शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट के इसी तरह के आदेश को पलटने के लिए नया कानून बना दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिला (तलाक संबंधी अधिकारों का संरक्षण) कानून, 1986 की सीमाओं को तोड़ते हुए कहा कि महिला चाहे किसी भी धर्म की हो, उसे शादी टूटने पर पति से गुजारा-भत्ता मांगने का हक है। शाह बानो नाम की मुस्लिम महिला को जब सुप्रीम कोर्ट ने पति से गुजारा भत्ता लेने का हकदार बताया था तब मुस्लिम समुदाय के आक्रोश के आगे झुककर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसद से उपर्युक्त कानून पारित करवा दिया था। ताजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 सभी धर्म की महिलाओं पर लागू होता है यानी यह एक धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कह दिया है कि यह फैसला हर धर्म की महिलाओं पर लागू होगा और मुस्लिम महिलाएं भी इसका सहारा ले सकती हैं। इसके लिए उन्हें सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कोर्ट में याचिका दाखिल करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में 19 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था।

दरअसल, यह पूरा मामला तेलंगाना के एक व्यक्ति अब्दुल समद और उसकी तलाकशुदा पत्नी से जुड़ा हुआ है। फैमिली कोर्ट ने अब्दुल समद को 20 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने को कहा था। समद ने इसे तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी। तब हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ते की रकम आधी करके 10 हजार रुपये प्रति माह कर दी। समद फिर भी संतुष्ट नहीं हुए और हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले आए। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया कि मुस्लिम महिला और इस मामले में उनकी तलाकशुदा पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता मांगने की हकदार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में समद के वकील वसीम कादरी ने दलील दी कि दरअसल तलाकशुदा महिला के हितों के लिहाज से सीआरपीसी की धारा 125 से कहीं ज्यादा फायदेमंद मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 है जिसे राजीव गांधी की सरकार ने लाया था। आज राजीव गांधी होते तो सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले का गूंज कुछ ज्यादा होती। मीडिया उनकी प्रतिक्रिया मांगता और विपक्ष हमलावर होता।

कादरी ने कहा कि मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 की धारा 3 में मेहर, दहेज और संपत्ति की वापसी से संबंधित प्रावधान है और यह किसी भी मुस्लिम महिला के लिए ज्यादा फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि 1986 का कानून के तहत मुस्लिम महिला के लिए ताउम्र ‘उचित और निष्पक्ष’ प्रावधान हैं जो सीआरपीसी की धारा 125 के तहत नहीं है। समद के वकील ने यह भी दलील दी कि अपना भरण-पोषण करने में स्वयं सक्षम तलाकशुदा महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते की मांग नहीं कर सकती है जबकि 1986 का कानून सक्षम महिला को भी अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार देता है।

इसके जवाब में एमिकस क्यूरी गौरव अगरवाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ किसी महिला से सीआरपीसी के तहत राहत पाने का उसका अधिकार छीन नहीं सकता है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने एमिकस क्यूरी की दलील मानते हुए अब्दुल समद की याचिका खारिज कर दी और हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने ही 1985 में शाह बानो केस में कहा था कि सीआरपीसी की धारा 125 हर किसी पर लागू होता है, चाहे वह किसी भी धर्म से हो। लेकिन राजीव गांधी की सरकार ने 1986 का कानून बनाकर लागू कर दिया ताकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रोक लग जाए। नए कानून में कहा गया कि मुस्लिम महिला तलाक के बाद सिर्फ इद्दत के 90 दिनों तक गुजारा भत्ता पाने की हकदार होती है। 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून पर अपना मुहर लगाया था।

लेकिन अब जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस मसीह की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सीआरपीसी की धारा 125 धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है जिस पर कोई पर्सनल लॉ हावी नहीं हो सकता है। यानी, मुस्लिम समाज के लिए राजीव गांधी सरकार का लाया कानून साफ-साफ दरकिनार हो गया है। पीठ ने यह भी कहा कि जब तक महिला की दूसरी शादी नहीं हो जाती या वो खुद सक्षम नहीं हो जाती है तब तक उसके भरण पोषण का खर्च उठाना उसके पूर्व पति का दायित्व है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भरण पोषण का खर्च उठाना कोई दयालुता नहीं बल्कि तलाकशुदा महिला का अधिकार है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘कुछ पतियों को पता ही नहीं कि पत्नियां जो गृहिणी हैं, वो उन पर भावनात्मक और अन्य दूसरे रूप से भी उन्हीं पर निर्भर होती हैं। समय आ गया है कि भारतीय पुरुष गृहणियों की भूमिका और उनके त्याग को जरूर समझें।’

सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल समद केस में यह भी कहा कि सीआरपीसी के सेक्शन 125 के तहत याचिका सुनवाई के अधीन हो तो इस दौरान मुस्लिम महिला (निकाह संबंधी अधिकारों का संरक्षण), 2019 के तहत भी राहत की मांग की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई मुस्लिम महिला अगर दोनों कानूनों से संरक्षण देने की मांग करती है तो उसे दोनों कानूनों से संरक्षण दिया जा सकता है। इस तरह देखें तो मुस्लिम महिलाओं को सीआरपीसी, 1986 और 2019 तीनों कानूनों से संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार मिल गया है। अगर कोई मुस्लिम महिला 1986 के कानून के तहत भरण पोषण मिलने से संतुष्ट नहीं है तो वह सीआरपीसी के तहत भी खर्चे की मांग कर सकती है। मतलब 1986 का कानून रद्द नहीं हुआ है, वह भी अपनी जगह कायम है। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने इसे समझाते हुए कहा कि अब मुस्लिम महिला चाहें तो वो शरिया कानून यानी 1986 एक्ट या फिर सीआरपीसी की धारा 125 में से किसी एक के तहत या फिर दोनों प्रावधानों के तहत अपने भरण पोषण की मांग कर सकती हैं।

क्या बिहार सहित कई राज्यों में सुस्त पड़ चुका है मानसून?

वर्तमान में बिहार सहित कई राज्यों में मानसून सुस्त पड़ चुका है! मॉनसून के आने से देशभर में लोगों को गर्मी से राहत मिल गई है। हालांकि कुछ राज्यों में ज्यादा बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जो लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। मौसम विभाग ने तो आने वाले चार-पांच दिनों के लिए देशभर में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। ऐसे में आने वाली 15 जुलाई तक देशभर के करीब सभी हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं पहाड़ों पर आफत बनकर बरस रही बारिश की वजह से लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली में दो दिनों से कुछ इलाकों में बारिश हो रही है। जिसकी वजह से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग में 11-12 जुलाई को तेज हवाएं चलने व केवल कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।हालांकि कुछ देर की बारिश से उमस थोड़ी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार आज यानी 11 जुलाई को आसमान में बादल छाए रहेंगे जो कुछ जगहों पर बरस भी सकते हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार आज दिल्ली के कुछ इलाकों में रिमझिम बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं आज राजधानी का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री रहने की उम्मीद है। बता दें कि मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक दिल्ली में बारिश का अनुमान जताया है। अगर मौसम विभाग का ये पूर्वानुमान सच साबित हुआ तो दिल्ली से उमस भी गायब हो जाएगी।

उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक बारिश का जोर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार 11 से 13 जुलाई तक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बादल झमाझम बरसेंगे। IMD ने आज देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी, बस्ती, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, सीतापुर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर एवं आसपास के इलाकों में गरज चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

उत्तर प्रदेश से भी पहले बिहार में मॉनसून ने दस्तक दी थी। जिसके बाद से वहां कई शहरों में लगातार बारिश हो रही है। बारिश की वजह से कई जगह पर बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है। इसी बीच मौसम विभाग ने बताया कि बिहार में मॉनसून कमजोर पड़ने लगा है। हालांकि फिर भी बिहार के कुछ शहरों में आज हल्की बारिश पड़ने की संभावना है। बता दें कि बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वीरपुर बराज के पास बुधवार को कोसी के जलस्तर में कमी आई है। इसके बावजूद प्रदेश की नदियां उफान पर हैं और कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं। नदियों के जलस्तर में वृद्धि के साथ दरभंगा, मधुबनी, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, सारण के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

राजस्थान में भी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार आज जोधपुर, उदयपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर संभाग के कुछ भागों में बादल गरजने के साथ बारिश होने की संभावना है। IMD के अनुसार गुरुवार से मॉनसून ट्रफ लाइन के हिमालय की ओर जाने से बारिश में कमी होने की संभावना है। 11-15 जुलाई को कुछ स्थानों पर बादलों की गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। बता दें कि कुछ देर की बारिश से उमस थोड़ी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार आज यानी 11 जुलाई को आसमान में बादल छाए रहेंगे जो कुछ जगहों पर बरस भी सकते हैं। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार आज दिल्ली के कुछ इलाकों में रिमझिम बारिश देखने को मिल सकती है।बारिश की वजह से कई जगह पर बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है। इसी बीच मौसम विभाग ने बताया कि बिहार में मॉनसून कमजोर पड़ने लगा है। हालांकि फिर भी बिहार के कुछ शहरों में आज हल्की बारिश पड़ने की संभावना है। आज राजधानी का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री रहने की उम्मीद है। बता दें कि मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक दिल्ली में बारिश का अनुमान जताया है। अगर मौसम विभाग का ये पूर्वानुमान सच साबित हुआ तो दिल्ली से उमस भी गायब हो जाएगी।बता दें कि बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग में 11-12 जुलाई को तेज हवाएं चलने व केवल कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

जानिए महिलाओं के घरेलू भत्ते पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के घरेलू भत्ते पर एक बयान दिया है! सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को परिवार में घरेलू महिलाओं की भूमिका की अहमियत पर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक स्थिरता के लिए व्यवहारिक कदम उठाने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय मर्द होममेकर्स की भूमिका को समझें। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने मुस्लिम महिला की ओर से गुजारे भत्ते की मांग पर यह बात कही। अदालत ने कहा कि कोई भी विवाहित महिला अलग होने की स्थिति में पति से गुजारा भत्ता मांगने की हकदार है। ऐसे मामलों में धर्म मायने नहीं रखता है। कोर्ट ने कहा कि पति अपनी पत्नियों को आर्थिक मदद दें। इसका तरीका भी बताते हुए कहा कि पतियों को जॉइंट अकाउंट खुलवाना चाहिए। इसके अलावा पत्नी को एटीएम कार्ड देकर उसे अकाउंट का एक्सेस देना चाहिए। इससे उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता होगी और वह घर में सम्मानित महसूस करेंगी। बेंच ने कहा कि धारा-125 के दायरे में मुस्लिम महिलाएं भी आती हैं। यह धारा पत्नी के गुजारा भत्ता के कानूनी अधिकार से संबंधित है। पीठ ने जोर देकर कहा कि गुजारा भत्ता दान नहीं, बल्कि हर शादीशुदा महिला का अधिकार है और सभी शादीशुदा महिलाएं इसकी हकदार हैं, फिर चाहे वे किसी भी धर्म की हों।

शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मोहम्मद अब्दुल समद की याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने गुजारे भत्ते के संबंध में फैमिली कोर्ट के फैसले में दखल देने का समद का अनुरोध ठुकरा दिया था। समद ने दलील दी थी कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा-125 के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। अदालत को मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को लागू करना होगा।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील वसीम कादरी की दलीलें सुनने के बाद 19 फरवरी को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कादरी ने दलील दी थी कि सीआरपीसी की धारा-125 के मुकाबले 1986 का कानून मुस्लिम महिलाओं के लिए ज्यादा फायदेमंद है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने 13 दिसंबर 2023 को समद की पत्नी को अंतरिम गुजारे भत्ते के भुगतान के संबंध में परिवार अदालत के फैसले पर रोक नहीं लगाई थी। हालांकि, उसने गुजारा भत्ता की राशि हर महीने 20 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार कर दी थी, जिसका भुगतान याचिका दाखिल करने की तारीख से किया जाना था।

नैशनल कमिशन फऑर वुमन की प्रमुख रेखा शर्मा ने मुस्लिम महिलाओं के लिए गुजारा भत्ता मांगने के अधिकार की पुष्टि करने वाले सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी महिलाओं के लिए लैंगिक समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। उन्होंने कहा, ‘यह इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि किसी भी महिला को कानून के तहत समर्थन और सुरक्षा के बिना नहीं छोड़ा जाना चाहिए। आयोग महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत में हर महिला को न्याय मिले।’

बीजेपी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की, जिसमें कहा गया है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। बीजेपी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देने के शीर्ष अदालत के फैसले को पलटने के लिए कानून बनाने का राजीव गांधी सरकार का फैसला संविधान के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक था, क्योंकि इसने शरिया और इस्लामी कानूनों को प्रधानता दी थी। उन्होंने कहा, ‘जब भी कांग्रेस सत्ता में रही है, संविधान खतरे में रहा है। यह (राजीव गांधी सरकार का) एक निर्णय था जिसने संविधान पर शरिया को प्रधानता दी थी। कांग्रेस सरकार के दौरान कुचली गई संविधान की प्रतिष्ठा को इसके द्वारा बहाल किया गया है। फैसले ने संविधान के लिए उत्पन्न बड़े खतरों में से एक को समाप्त कर दिया है।’ सुप्रीम कोर्ट ने 1985 में तलाक के बाद अपने पति से गुजारा भत्ता की याचिका को स्वीकार कर लिया था। इसे आम तौर पर शाह बानो मामले के नाम से जाना जाता है। हालांकि, रूढ़िवादी मुस्लिम समूहों के विरोध के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने फैसले को पलटने के लिए संसद में कानून पारित किया था। त्रिवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अब मुस्लिम महिलाओं को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि इसे धर्म के मामले से परे देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह समान अधिकारों का मुद्दा है।

चेना पुरी में एक कम ज्ञात पता, अन्य साधनों से श्रीक्षेत्र की यात्रा करें l

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आप पुरी के पास कुछ कम ज्ञात स्थानों की यात्रा कर सकते हैं। पिछले कुछ सालों में ये जगहें धीरे-धीरे लोकप्रिय होती जा रही हैं। स्वाद बदलने के लिए आप एक बार वहां जा सकते हैं। जब आप पुरी कहते हैं तो आपकी आंखों के सामने तूफानी समुद्र की तस्वीर तैर जाती है। लहरें लगातार उठ रही हैं, रेत पर टूट रही हैं। सीप-शंख के टुकड़े तैर रहे हैं। जब आप पुरी कहते हैं, तो आप जगन्नाथ मंदिर, रथ, मंदिर में भोजन या पूजा के बारे में सोचते हैं। ‘डिपुडा’ बंगालियों के घूमने के लिए तीन सबसे लोकप्रिय स्थान हैं। पुरी उसमें गिर जाती है. तभी से बंगालियों का ओडिशा के इस समुद्रतटीय शहर से गहरा रिश्ता रहा है। हालाँकि, अब यह शहर बहुत अधिक चकाचौंध है। भीड़भाड़ वाले लक्जरी होटल। कई प्रसिद्ध बंगाली रेस्तरां श्रृंखलाओं ने यहां शाखाएं खोली हैं। जिंदगी बदल गई है. लेकिन यह अब तक वैसा ही है, बंगाली का पुरी के प्रति प्रेम, मंदिर जाकर जगन्नाथ के दर्शन करना, समुद्र में स्नान करना, शाम को समुद्र के किनारे कहानियाँ सुनाना, खाना और खरीदारी करना। यदि आप रथयात्रा के अवसर पर पुरी जाते हैं, तो प्रसिद्ध स्थानों की भीड़ से बचने के लिए आप कम ज्ञात स्थानों पर भी जा सकते हैं।

सुनहरा समुद्र तट

स्वर्ग के द्वार पर सबसे पहला नाम आता है पुरी का। ऐसा कहा जाता है कि स्वर्ग में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। पास में ही एक श्मशान घाट भी है. यह इलाका काफी भीड़भाड़ वाला है. हालाँकि, यदि आप इतनी भीड़ में तैरना नहीं चाहते हैं, तो आप स्वर्गद्वार से टैक्सी लेकर ओडिशा के एक स्वच्छ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समुद्र तट गोल्डन बीच तक पहुँच सकते हैं। इस देश के कई समुद्र तटों को स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के मामले में ‘ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन’ प्राप्त हुआ है। उनमें से एक है ये गोल्डन बीच. इसे ब्लू फ्लैग बीच भी कहा जाता है। जब आप यहां आते हैं तो पारंपरिक पूड़ी ढूंढना मुश्किल होता है। बल्कि इस समुद्रतट की साफ-सफाई, सुंदरता और हरियाली आपको एक शब्द में गोवा की याद दिला सकती है। गोल्डन बीच का प्रवेश टिकट 20 रुपये प्रति व्यक्ति है। हालांकि, यहां 24 घंटे घूमने की इजाजत नहीं है। यहां सुबह से शाम तक घूमा जा सकता है। स्नान और कपड़े बदलने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन इसमें पैसा भी खर्च होता है. क्या मैं पैसे लेकर पुरी बीच पर जाऊंगा, ये सवाल मन में आ सकता है. लेकिन अगर आप दोपहर के समय महीन रेत के इस साफ समुद्र तट को देखेंगे, तो आपको वह याद नहीं रहेगा। समुद्र तट पैदल मार्ग, हरियाली, बच्चों के पार्क, खेल का मैदान, शौचालय, पीने के पानी की सुविधा, वॉचटावर से घिरा हुआ है। यहां आपको प्लास्टिक का एक भी टुकड़ा नहीं मिलेगा। इस समुद्र तट को स्वच्छता बनाए रखने और अन्य पहलुओं के लिए प्रतिष्ठित ‘ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन’ प्राप्त हुआ है। आम तौर पर यह सम्मान प्रदूषण मुक्त वातावरण, समुद्री जीवन और समुद्र तट से सटे वन्य जीवन और अन्य आयामों की गुणवत्ता का निर्धारण करके दिया जाता है। ठीक इसी कारण से, इस विशाल समुद्र तट पर कहीं भी कंक्रीट निर्माण नहीं पाए जाते हैं। जो कुछ भी उपलब्ध है वह पर्यावरण के अनुकूल है। धीरे-धीरे यह बीच भी लोकप्रिय होता जा रहा है।

कैसे जाना है?

पुरी स्टेशन या स्वर्गद्वार से टोटो या ऑटो द्वारा गोल्डन बीच तक पहुंचा जा सकता है। इस बीच पर आप दोपहर की बजाय सुबह और दोपहर के वक्त जाएंगे तो ज्यादा मजा आएगा। रघुराजपुर

पुरी के पास एक गांव है रघुराजपुर. यह कलाकारों का गांव है. गाँव का प्रत्येक परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी पटचित्र बनाता है। जिंदगी की कहानी कभी सुपारी के खोल में खुलती है तो कभी कपड़े में। रसयात्रा, विष्णु का दशावतार, जगन्नाथ का स्वर्णभेष, आध्यात्मिक जगत भी उस कैनवास का विषय है। वर्ष 2000 में रघुराजपुर शिल्पग्राम को विरासत सम्मान मिला। पुरी से 11 किमी दूर इस गांव में पर्यटकों की भीड़ नहीं होती। यदि आप ताड़ और नारियल के पेड़ों से घिरी सड़क को पार करके गाँव में प्रवेश करते हैं, तो आप हर घर की दीवारों पर रंग-बिरंगे शिल्प देख सकते हैं। कलाकार घर के बरामदे पर बैठकर चित्रकारी कर रहे हैं. पटचित्र वास्तव में मिट्टी पर चित्रित कोई चित्र नहीं है। इस गांव में चित्र बनाए गए हैं। पट्टा का अर्थ है कपड़ा. कपड़े पर रुई की सटीक खरोंच में कहानी मूर्त हो जाती है। लेकिन इस रंग में बनावटीपन नहीं है. सीपियों, पत्थरों तथा सब्जियों से प्राकृतिक रंग निकालकर चित्र बनाये जाते हैं। न केवल कपड़ों पर, बल्कि पर्यटक आकर्षणों में चाय की केतली, पान के पत्ते, कागज और मिट्टी के बर्तनों पर भी शिलिग्राम की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाती हैं।

कैसे जाना है?

रघुराजपुर गांव पुरी से 11 मीटर की दूरी पर है। आप ऑटो किराये पर लेकर तीन घंटे के अंदर वहां से घूम सकते हैं।

पिपली

पुरी से आप इस राज्य के एक और कलाकार गांव का दौरा कर सकते हैं। पिपली ओडिशा का प्रसिद्ध एप्लिक का काम यहां किया जाता है। छतरियों से लेकर बैग और कपड़ों तक, आप एप्लिक कलाकृति देखने के लिए गांव आ सकते हैं। सुनने में आता है कि दसवीं सदी में पुरी के तत्कालीन राजा ने कलाकारों को लाकर पिपली गांव बसाया था। ये कलाकार ही थे जो रथों, जगन्नाथ देव के तकियों और मंदिर के छत्रों और शामियाने की सजावट करते थे। लेकिन अब उस काम में भी विविधता आ गई है. बैग से लेकर छतरियां, दीवारों को सजाने के लिए रंग-बिरंगे कपड़े और अन्य कपड़ों से उन्होंने डिजाइन बनाए। छोटा गिलास भी डाला जाता है. सभी कृतियाँ इतनी रंगीन हैं कि ऐसा लगता है मानो रंगों का मेला चल रहा हो। हालाँकि आप पुरी में कई दुकानों में घरेलू सजावट पा सकते हैं, लेकिन यदि आप उनकी कार्यशाला में जाना चाहते हैं, तो आपको पिपली गांव जाना होगा। गाँव के प्रवेश मार्ग पर एप्लिक डिज़ाइन बेचने वाली दुकानें भी हैं। वहां इन सभी चीजों की कीमत पुरी के डाकानों से तुलनात्मक रूप से कम है।

कैसे आए?

पिपली गांव पुरी से लगभग 40 किमी दूर है। आप कार किराए पर लेकर यहां घूम सकते हैं। आप विभिन्न प्रकार के एप्लिक हस्तशिल्प खरीद सकते हैं।