Saturday, March 14, 2026
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क्या वर्तमान की राजनीति हिंदुत्व को कमजोर बताती है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वर्तमान की राजनीति हिंदुत्व को कमजोर बताती है या नहीं! आज देश में मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग फिर से विभाजनकारी मानसिकता का भौंडा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन पूरा विपक्ष हिंदुत्व को जहरीला बता रहा है। इन्हें भी पता है कि अगर वो मलाई चाटने के लिए जिन चुनावों में जीतकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचते हैं, वो सिर्फ और सिर्फ इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि यहां हिंदुओं की बड़ बहुमत है। लेकिन इन्हें दुनिया की सारी बुराइयां हिंदुत्व में ही दिखती हैं। फिर चालाकी से ये भी बताते हैं कि वो जिस हिंदुत्व का विरोध करते हैं, वो कुछ और है और असली हिंदुत्व कुछ और है। लेकिन क्या मजाल कि वो यही बात इस्लाम के लिए कह दें। उन्होंने हिंदुत्व के भेद बता रहे समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता से जब पूछ लिया कि क्या वो इस्लाम में भी इसी तरह का भेद बता पाएंगे तो उन्होंने चुप्पी ठान ली। एंकर महोदय बार-बार पूछते रहे, सपा नेता बार-बार टालते रहे। एक बार भी इस्लाम का उच्चारण करने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और अभी-अभी लोकसभा में विपक्ष के नेता बने राहुल गांधी भी हिंदुत्व और आरएसएस से देश को खतरा बताते हैं। उन्होंने लोकसभा में यहां तक कह दिया कि जो अपने आपको हिंदू कहते हैं वो चौबीसों घंटे हिंसा करते हैं, नफरत में जीते हैं और असत्य बोलते हैं। फिर सत्ता पक्ष ने इस पर सवाल उठाया तो वो तुरंत चालाकी पर उतर आए कि उन्होंने तो बीजेपी वालों को कहा है, सभी हिंदुओं को नहीं। तो क्या बीजेपी से जुड़े नेता, कार्यकर्ता और उनके समर्थक हिंदू हिंसक हैं? सोशल मीडिया एक्स यूजर विजय पटेल ने राहुल की टिप्पणी का जबर्दस्त जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, ‘राहुल गांधी इतने बहादुर हैं कि हिंदुत्व के खिलाफ लड़ रहे हैं! इसलिए मैं दुनियाभर के 143 हिंदुत्व आतंकी संगठनों के नाम बता रहा हूं। हमारी धरती और पूरी मानव जाति इन्हीं हिंदुत्व आतंकी संगठनों के कारण खतरे में है। मैं आपको वो सारे नाम दिखाता हूं।’

खैर, ये तो हुई सच को झूठ और झूठ को सच बनाने की कथित सेक्युलर माइंडसेट की बात। यही सेक्युलर ब्रिगेड जो स्वामी विवेकानंद और बीजेपी के हिंदुत्व में अंतर देखता है, वही किस तरह इस्लाम की खामियों पर पर्दा डालता है, अब इसकी बात हो जाए। हिंदू समाज में जाति एक सच्चाई है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है। लेकिन क्या बदलते वक्त के साथ हिंदू समाज ने खुद को नहीं बदला? क्या आज जातियों का जकड़न तेजी से कमजोर नहीं पड़ रहा है? दूसरी तरफ, मुसलमानों का क्या? क्या वहां जातियां नहीं हैं? क्या वहां फिरके नहीं हैं? क्या मुसलमानों की उच्च जातियां पूरे समुदाय पर हावी नहीं है? लेकिन हिंदुओं को जाति के नाम एक-दूसरे से भिड़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाले मुसलमानों की एकता की चाहत रखते हैं। इसके पीछे की एक ही मानसिकता है, हिंदू जातियों में बंटकर एकतरफा वोट नहीं करे और मुसलमान का एकमुश्त वोट कथित सेक्युलर पार्टी को मिल जाए, फिर बल्ले-बल्ले। इसके लिए देश-समाज को गर्त में धकेलने को तैयार, ऊपर से खुद के सबसे पवित्र होने की भी धृष्टता। ये है सेक्युलर दलों की हकीकत। मुसलमानों में जाति, वर्ग के आधार पर विभाजन हो गया तब तो वो बोट बैंक नहीं रह जाएगा। फिर धर्मनिपेक्षता की ढोंगपूर्ण राजनीति कैसे चलेगी? इस्लाम के अंदर फिरकापरस्ती किस हद तक है, यह आप इस वीडियो क्लिप से अच्छे से समझ सकते हैं।

आज अनपढ़, पिछड़े मुसलमानों को तो छोड़ दीजिए, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सिलेब्रिटी टाइप मुसलमान भी राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गाने से बचते हैं। भारत माता की जय का नारा नहीं लगाएंगे, वंदे मातरम नहीं कहेंगे। इसके पीछे उनकी हजार दलीलें हैं और उनसे भी ज्यादा तर्क हैं कथित सेक्युलर ब्रिगेड का। हैरत की बात है कि दुनियाभर में हिंसा का पर्याय बन चुके एक कौम भारत में धर्मनिरपेक्षता का झंडा लहरा रहा है। दुनिया को कोई कोना नहीं जहां आतंकवाद से मुसलमान से कनेक्शन नहीं जुड़ा हो। लेकिन भारत की सेक्युलर जमात को खतरा हिंदुत्व से दिखता है। ये वही मोहम्मद अली जिन्ना की मानसिकता है जिसने भारत के दो टुकड़े करवाए थे। ये वही जिन्ना की मानसिकता है जो कहता है कि हिंदू इतने नफरती हो गए हैं कि मुसलमान उनके साथ नहीं रह सकते। आज सात दशक में ही हिंदुओं में जिधर देखो खुद को दूसरों से बड़ा जिन्ना दिखाने को बेताब है- मैं मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी, हिंदुओं और जैसी गालियां दिलवानी है दिलवा लो।

डिबेट क्लिप के वायरल होने पर वो लिखते हैं, ‘क्या यह सच नहीं कि आज कल आए दिन हिंदुओं को गाली देना, उनका अपमान करना, हिंदुओं को बांटने का षडयंत्र करना कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं का प्रिय खेल बन गया है? कहीं डिसमैंटलिंग हिंदुत्व जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, कहीं मेरे धर्म को एड्स, डेंगू, मलेरिया कहकर उसका समूल नाश करने के भाषण दिए जा रहे हैं। इस सबसे मैं दुखी हूं, गुस्से में हूं और फिर उस दिन राहुल गांधी ने संसद में विश्व के सबसे शांतिप्रिय, सबसे सहिष्णु हिन्दू धर्म को हिंसक और नफरत फैलाने वाला बोल दिया। इस सबका गुस्सा और दर्द कुछ शब्दों के रूप में मेरे मुंह से निकल गए।’ वो आगे कहते हैं, ‘और जब यह क्लिप वायरल हुआ तो मुझे एहसास हुआ कि उस दिन मैंने जो कुछ कहा वो अकेले मेरी नहीं करोड़ों हिंदुओं के हृदय की आवाज है। उम्मीद है कि राहुल गांधी सहित जो लोग भी हिंदुओं को हिंसक, एड्स, डेंगू और मलेरिया कहते हैं, सनातन का समूल नाश करने की बातें करते हैं वो करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को समझेंगे और ऐसी घटिया हरकतों की पुनरावृति से बचेंगे।’

यह लेख पढ़कर एक वर्ग मुझमें जहर ढूंढेगा, लेकिन वही वर्ग बताएगा कि कश्मीर के मुसलमानों या देश के अन्य किसी हिस्से के मुसलमानों में अगर आक्रोश है तो क्यों। वो बताएगा कि दरअसल मुसलमानों को लेकर भड़काया जा रहा है, उन्हें हाशिये पर धकेला गया है। वही वर्ग बताएगा कि कैसे मुसलमानों की दिल जीतने की कोशिश करनी चाहिए। सोचिए, जिन मुसलमानों ने कश्मीर से हजारों हिंदुओं का नरसंहार किया, जिन्होंने डायरेक्ट ऐक्शन डे, मोपला नरसंहार समेत तमाम हिंसक कार्रवाईयों में हिंदुओं की लाशें बिछा दीं, उनके दिल जीतने की जरूरत अब भी है, लेकिन बात-बात में कत्लेआम हुआ हिंदू अपनी वेदना भी बयां कर दे तो जहरीला हो जाता है। ये है भारत में धर्मनिरेपक्षता का दंश। धर्मनिरपेक्षता की ऐसी राग किसी भी देश, समाज का मर्सिया है और कुछ नहीं। सोचिए, नूपुर शर्मा के मामले में देश में मुसलमानों का कैसा खौफ था। यह कोई छठी सदी की बात नहीं, बस सालभर पहले का खौफनाक वाकया है जब आठ निर्दोष हिंदुओं की बर्बर हत्या की गई। लेकिन खोंट हिंदुत्व में है। हिंदुत्व में यह खोट बताने वाले जबकि इस्लाम में अमन का पैगाम पढ़ने वाले धर्मनिरपेक्ष हैं। ये वर्तमान की सबसे बड़ी विडंबना है।

आखिर क्या खासियत रखता है भारत का स्वदेशी टैंक जोरावर?

आज हम आपको भारत के स्वदेशी टैंक जोरावर की खासियत बताने जा रहे हैं! चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत स्वदेशी टैंक विकसित कर रहा है। भारत ने हल्के वजन वाले टैंक जोरावर को निर्माण की दिशा में अहम पड़ाव को पार कर लिया है। स्वदेशी टैंक जोरावर लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेना में जोरावर के शामिल होने से चीन के खिलाफ भारत की स्थिति अधिक मजबूत दिखेगी। पर्वतीय इलाकों में यह टैंक अधिक स्पीड से चल सकता है। रूस और यूक्रेन संघर्ष से सबक सीखते हुए डीआरडीओ ने जोरावर टैंक में घूमने वाले हथियारों के लिए यूएसवी को इंटीग्रेट किया है। लाइट टैंक जोरावर 25 टन वजन का है। यह पहली बार है कि इतने कम समय में एक नया टैंक डिजाइन करके टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया है। जोरावर टैंक की खास बात इसका वजन और साथ ही एक टैंक के मूलभूत मापदंडों का कॉम्बिनेशन है। इस टैंक में फायर, ताकत, मोबिलिटी और सुरक्षा है। लाइट टैंक को एक्शन में देखना हम सभी के लिए वाकई एक महत्वपूर्ण दिन है। यह मुझे खुश और गौरवान्वित करता है। यह वाकई एक मिसाल है। दो से ढाई साल की छोटी सी अवधि में, हमने न केवल इस टैंक को डिजाइन किया है, बल्कि इसका पहला प्रोटोटाइप भी बनाया है। जोरावर को सभी टेस्ट के बाद वर्ष 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है।

दो साल के रिकॉर्ड समय में विकसित यह टैंक स्वदेशी निर्माण में भारतीय प्रगति का प्रमाण है। हल्का टैंक जोरावर 25 टन वजनी है और यह पहली बार है कि इतने कम समय में एक नया टैंक डिजाइन किया गया है। अब यह टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया है। इनमें से 59 टैंक शुरुआत में सेना को उपलब्ध कराए जाएंगे और यह 295 और बख्तरबंद वाहनों के प्रमुख कार्यक्रम के लिए अग्रणी होगा। भारतीय वायु सेना सी-17 श्रेणी के परिवहन विमान में एक बार में दो टैंकों की आपूर्ति कर सकती है क्योंकि यह टैंक हल्का है और इसे पर्वतीय घाटियों में हाई स्पीड से चलाया जा सकता है। अगले 12-18 महीनों में परीक्षण पूरा होने और शामिल किए जाने के लिए तैयार होने की उम्मीद है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख समीर वी कामथ ने शनिवार को कहा कि स्वदेशी हल्के टैंक जोरावर को सभी परीक्षणों के बाद वर्ष 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है।

डीआरडीओ प्रमुख ने एएनआई को बताया कि लाइट टैंक को एक्शन में देखना हम सभी के लिए वास्तव में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह मुझे खुश और गौरवान्वित करता है। यह वास्तव में एक मिसाल है। दो साल से ढाई साल की छोटी अवधि में, हमने न केवल इस टैंक को डिजाइन किया है, बल्कि पहला प्रोटोटाइप भी बनाया है। अब पहला प्रोटोटाइप अगले छह महीनों में डेवलपमेंट टेस्ट से गुजरेगा। फिर हम इसे अपने यूजर्स को यूजर टेस्टिंग के लिए पेश करने के लिए तैयार होंगे। सभी टेस्ट के बाद जोरावर को वर्ष 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है।

डीआरडीओ टैंक लैब के निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि आम तौर पर तीन अलग-अलग प्रकार के टैंक होते हैं। वजन के आधार पर तीन श्रेणियां हैं। भारी टैंक, मध्यम टैंक और हल्के टैंक। हर एक की अपनी भूमिका है। एक सुरक्षा के लिए है, एक आक्रमण के लिए है। ये हल्के टैंक दोनों के लिए मिश्रित भूमिका निभाते हैं। इसलिए यदि आप एक हल्का टैंक देखते हैं, तो दुनिया के कई खिलाड़ी हल्के टैंक बना रहे हैं। पश्चिमी टैंक हैं, रूसी टैंक हैं, चीनी टैंक हैं।

जोरावर टैंक को लेकर लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के कार्यकारी उपाध्यक्ष अरुण रामचंदानी ने कहा कि आज एलएंडटी के लिए बहुत बड़ा दिन है। दो वर्षों के भीतर, हम टैंक को उस स्तर पर ले आए हैं, जहां इसे इंटरनल टेस्ट के लिए और बहुत जल्द यूजर टेस्ट के लिए ले जाया जा सकता है। यह एक बड़ा प्रयास रहा है। डीआरडीओ और एलएंडटी के बीच एक संयुक्त प्रयास है।अब पहला प्रोटोटाइप अगले छह महीनों में डेवलपमेंट टेस्ट से गुजरेगा। फिर हम इसे अपने यूजर्स को यूजर टेस्टिंग के लिए पेश करने के लिए तैयार होंगे। सभी टेस्ट के बाद जोरावर को वर्ष 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह इन दोनों टीमों की एक बड़ी उपलब्धि है। दुनिया में कहीं भी इतने कम समय में कोई नया उत्पाद तैनात नहीं किया गया है। यह डीआरडीओ और एलएंडटी दोनों के लिए एक अद्भुत उपलब्धि है।

विपक्ष के तौर पर क्या संदेश देना चाहते हैं अखिलेश यादव?

हाल ही में अखिलेश यादव ने विपक्ष के तौर पर एक संदेश दे दिया है! नई संसद में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को जब बतौर सांसद प्रवेश किया तो हर किसी की नजरें उन पर टिक गईं। अखिलेश के एक हाथ में संविधान की पुस्‍तक थी। दूसरे हाथ से उन्‍होंने अयोध्‍या से अपने नए नवेले सांसद अवधेश प्रसाद का हाथ कसकर पकड़ा हुआ था। सीढ़ियां चढ़कर वह अवधेश प्रसाद को अपने साथ अंदर सदन में ले गए। इस दौरान अयोध्‍या सांसद ने झुककर संसद की सीढ़ियों को प्रणाम किया। अंदर सदन में अखिलेश यादव कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ विपक्ष की पहली पंक्ति में बैठे। खास बात यह रही कि यूपी विधानसभा की तरह यहां भी अवधेश प्रसाद अखिलेश के बगल में ही बैठे नजर आए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अवधेश प्रसाद को इतना महत्‍व देकर अखिलेश प्रसाद ने बड़ा सियासी संदेश दिया है। कहीं न कहीं अयोध्‍या में बीजेपी की हुई किरकिरी को उन्‍होंने भुनाने की कोशिश की है। संसद में प्रवेश के मौके पर अखिलेश अपनी पार्टी के सभी सांसदों के साथ मीडिया के सामने पहुंचे। उनके बगल में पत्‍नी डिंपल यादव और चाचा रामगोपाल यादव भी मौजूद थे। इस बीच अखिलेश ने पीछे खड़े अवधेश प्रसाद का हाथ पकड़ा और उन्‍हें सामने लेकर आए। सांसद अरुण गोविल शपथ ले रहे थे और उनकी ओर से संस्कृत में शपथ लेने के बाद जय श्री राम का नारा लगाया गया। इसके ठीक तुरंत बाद लोकसभा में सपा सांसदों की ओर से जय अवधेश के नारे गूंजने लगे। वहीं अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद को अयोध्या का राजा तक कह दिया। उन्‍होंने सबसे परिचय कराया तो अवधेश प्रसाद ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया। दलित समाज से आने वाले अवधेश प्रसाद को अखिलेश यादव लगातार तवज्‍जो देते रहे हैं। यूपी विधानसभा में भी वह अखिलेश के बगल में बैठते रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले सपा ने पीडीए की जो पॉलिटिक्‍स शुरू की, अवधेश प्रसाद उसका बड़ा चेहरा है। पिछड़ा, दलित और अल्‍पसंख्‍यकों को तरजीह देकर अखिलेश यादव ने 37 सीटों पर कब्‍जा जमा लिया है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्‍यादा झटका उत्‍तर प्रदेश से ही लगा है। बीजेपी यहां मात्र 33 सीटों पर सिमट गई। जिस अयोध्‍या में ऐतिहासिक राम मंदिर से लेकर अरबों रुपये के विकास कार्य करवाए गए, वहां भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। 9 बार से सपा विधायक चुनते आ रहे अवधेश प्रसाद ने बीजेपी से दो बार सांसद चुनते आ रहे लल्‍लू सिंह को हरा दिया। इस हार की वजह से बीजेपी को देश और विदेश में किरकिरी का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव ने अयोध्‍या की जनसभा में गलती से अवधेश प्रसाद को पूर्व विधायक बता दिया था। अवधेश उस समय बीकापुर के सपा विधायक थे तो उन्‍होंने तत्‍काल सपा प्रमुख को उनकी गलती का एहसास दिलाया। बता दें कि संसद सत्र की शुरुआत होते ही लोकसभा में फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद पहली पंक्ति में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ बैठे नजर आते हैं। संसद परिसर में सभी जगहों पर अखिलेश यादव के साथ अवधेश प्रसाद नजर आते हैं। संसद सत्र के दौरान जब सांसदों का शपथ ग्रहण चल रहा था उस वक्त यूपी के मेरठ लोकसभा सीट से जीते सांसद अरुण गोविल शपथ ले रहे थे और उनकी ओर से संस्कृत में शपथ लेने के बाद जय श्री राम का नारा लगाया गया। इसके ठीक तुरंत बाद लोकसभा में सपा सांसदों की ओर से जय अवधेश के नारे गूंजने लगे। वहीं अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद को अयोध्या का राजा तक कह दिया। 

इस पर अखिलेश ने बात संभालते हुए कहा कि आपको पूर्व विधायक इसलिए कह रहा हूं क्‍योंकि आप अयोध्‍या के नए सांसद बनने जा रहे हो। उस समय कौन जानता था कि अखिलेश की भविष्‍यवाणी सच हो जागी।अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग किसी को लाने का दावा कर रहे थे उन्हें अब खुद किसी के सहारे की जरूरत है। उन्होंने कहा हम अयोध्या से प्रेम का पैगाम लाए हैं। हालिया संपन्‍न हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीट में से समाजवादी पार्टी ने अपने स्‍थापना काल से अब तक रिकार्ड प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक 37 सीट पर जीत हासिल की। लोकसभा चुनाव के जब नतीजे आए तो अवधेश प्रसाद अयोध्‍या के नए सांसद बन चुके थे।

क्या अयोध्या ने सभी पार्टियों की राजनीति को धराशाही कर दिया है ?

वर्तमान में अयोध्या ने सभी पार्टियों की राजनीति को धराशाही कर दिया है! लोकसभा चुनाव नतीजों को आए हुए एक महीने का वक्त बीत गया है। एनडीए की सरकार बन गई है और इंडिया गठबंधन विपक्ष में है। सरकार गठन के बाद 18 वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र भी बीत गया लेकिन एक शब्द जिसकी गूंज अब तक सुनाई पड़ रही है। वह है अयोध्या। लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है और 60 साल बाद ऐसा हुआ की कोई लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस लौटा। लेकिन इस जीत में भी अयोध्या की हार ने बीजेपी के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। वहीं बीजेपी की यहां हुई हार को विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपने तरीके से पेश कर रही है। संसद में राहुल गांधी ने अयोध्या में बीजेपी की हार पर जो कुछ कहा उससे आगे बढ़ते हुए आज यानी शनिवार को गुजरात में उन्होंने कहा कि अयोध्या में बीजेपी को हराकर, इंडिया गठबंधन ने राम मंदिर आंदोलन को हरा दिया है। विपक्ष का नेता बनने के बाद राहुल गांधी पहली बार शनिवार को गुजरात पहुंचे। राहुल गांधी ने यहां कहा कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को उसी तरह हराएगी, जैसे उसने हालिया लोकसभा चुनाव में अयोध्या में उसे हराया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अहमदाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने (भाजपा) हमें धमकाकर और हमारे कार्यालय को नुकसान पहुंचाकर हमें चुनौती दी है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि हम सब मिलकर उनकी सरकार को उसी तरह तोड़ देंगे जैसे उन्होंने हमारे कार्यालय को नुकसान पहुंचाया है। यह लिखकर ले लीजिए कि कांग्रेस गुजरात में चुनाव लड़ेगी और नरेन्द्र मोदी व बीजेपी को गुजरात में हराएगी, जैसा हमने अयोध्या में किया था।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि इंडिया गठबंधन ने अयोध्या में बीजेपी को हराकर राम मंदिर आंदोलन को पराजित कर दिया है जिसे लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू किया था। उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में भाजपा का गुजरात में भी यही हश्र होगा। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस गुजरात में बीजेपी को हराएगी क्योंकि मोदी के विजन का गुब्बारा फूट चुका है। संसद में मैंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या वह मनुष्य हैं, क्योंकि उन्होंने खुद कहा था कि वह नॉन बायोलॉजिकल हैं और उनका भगवान से सीधा संबंध है। अगर आप सीधे भगवान से जुड़े हैं, तो अयोध्या में आप कैसे हार गए?

अभी हाल ही में राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की फैजाबाद लोकसभा सीट से बीजेपी की हार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा था। इस लोकसभा क्षेत्र में अयोध्या शहर भी आता है। राहुल गांधी ने कहा था कि अयोध्या के लोगों को गुस्सा तब आया जब उन्हें पता चला कि राम मंदिर के उद्घाटन के लिए एक भी स्थानीय व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उनके सर्वेक्षकों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह देते हुए कहा कि वह हार जाएंगे और उनका राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा।

लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद देश के बड़े सियासी सूबे में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की ताकत बढ़ी है। 80 में से 37 सीटें जीतकर सपा पहले नंबर पर यहां रही। इस जीत के बाद अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से 2027 में होने वाले राज्‍य विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने की अपील करते हुए कहा कि अयोध्या जिले के फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र से पार्टी नेता अवधेश प्रसाद की जीत से जनता ने नफरत की राजनीति को खत्म कर दिया है। अखिलेश यादव की ओर से खासतौर पर अयोध्या का जिक्र चुनाव नतीजों के बाद किया गया। फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट से सपा के अवधेश प्रसाद ने वहां से 2014 से लगातार दो बार चुनाव जीते भाजपा उम्मीदवार लल्‍लू सिंह को पराजित कर दिया और उन्‍हें तीसरी बार संसद पहुंचने से रोक दिया।

यह तो जीत के बाद की सिर्फ झलक थी। संसद सत्र की शुरुआत होते ही लोकसभा में फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद पहली पंक्ति में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ बैठे नजर आते हैं। संसद परिसर में सभी जगहों पर अखिलेश यादव के साथ अवधेश प्रसाद नजर आते हैं। संसद सत्र के दौरान जब सांसदों का शपथ ग्रहण चल रहा था उस वक्त यूपी के मेरठ लोकसभा सीट से जीते सांसद अरुण गोविल शपथ ले रहे थे और उनकी ओर से संस्कृत में शपथ लेने के बाद जय श्री राम का नारा लगाया गया। इसके ठीक तुरंत बाद लोकसभा में सपा सांसदों की ओर से जय अवधेश के नारे गूंजने लगे। वहीं अखिलेश यादव ने अवधेश प्रसाद को अयोध्या का राजा तक कह दिया।

लोकसभा में फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में सपा की जीत का विशेष उल्लेख सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर किया गया। अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग किसी को लाने का दावा कर रहे थे उन्हें अब खुद किसी के सहारे की जरूरत है। उन्होंने कहा हम अयोध्या से प्रेम का पैगाम लाए हैं। हालिया संपन्‍न हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीट में से समाजवादी पार्टी ने अपने स्‍थापना काल से अब तक रिकार्ड प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक 37 सीट पर जीत हासिल की। सपा की सहयोगी कांग्रेस को भी छह सीट पर जीत मिली, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 33 और उसके सहयोगी राष्‍ट्रीय लोकदल (रालोद) को दो और अपना दल (एस) को एक सीट पर जीत मिली। एक सीट आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी जीती है।

क्या उत्तर प्रदेश में अब अपनी पैठ बैठाने जा रही है कांग्रेस?

कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ बैठाने जा रही है! लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन इस बार उम्मीद से बढ़कर रहा है। पार्टी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य यूपी में समाजवादी पार्टी से गठबंधन का पूरा फायदा मिला है। कई दशक बाद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने सुरक्षित दलित वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने में सफल रही है। पार्टी इस सफलता के बाद, 2027 के विधानसभा चुनाव में दलित समुदाय को अपने पाले में बनाए रखने को लेकर खास रणनीति पर काम कर रही है। बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ से सदन में उनके महत्व को उजागर किया है। इसके बाद, कांग्रेस के भीतर कई लोगों का मानना है कि प्रसाद को प्रमुखता देने से दलितों के बीच यह संदेश जाएगा कि इंडिया ब्लॉक समुदाय के सदस्यों को नेतृत्व की भूमिका देने के लिए तैयार है। प्रसाद एक पासी दलित हैं, एक ऐसा समुदाय जो कई सीटों पर निर्णायक संख्या में है, खासकर यूपी के अवध क्षेत्र में। कांग्रेस ने राज्य में दलित समुदाय के लिए एक व्यापक आउटरीच कैंपेन की तैयारी शुरू कर दी है। इस अभियान के तहत दलितों के बीच विशेष सदस्यता अभियान, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रभावशाली दलित हस्तियों की पहचान करना, साथ ही उनके मुद्दों पर बात करने के लिए संभाग स्तरीय ‘सम्मेलन’ और जिला स्तरीय ‘दलित चौपाल’ आयोजित करना शामिल होगा। हाल ही में लखनऊ में राज्य कांग्रेस मुख्यालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य भर के प्रमुख दलित नेताओं के सुझावों को सुनने के बाद 15 दिनों का रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि हालांकि कार्यक्रम की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है,हाल के चुनावों में उन्होंने संविधान के नाम पर या राहुल जी की वजह से हमारा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर दलित हमारा समर्थन करने के लिए एक कदम बढ़ाते हैं, तो अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनसे संपर्क करने के लिए एक और कदम बढ़ाएं। उन्होंने हमारा समर्थन किया। अब उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान खोजने की बारी हमारी है। लेकिन पहले चार सम्मेलन गोरखपुर पूर्वी यूपी, सीएम योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र, लखनऊ , वाराणसी पूर्वी यूपी, पीएम नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र और मेरठ पश्चिमी यूपी में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।

रिपोर्ट में पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह कदम कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद उठाया गया है। पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी अनुसूचित इकाई को मजबूत करने के लिए संगठन में प्रमुख दलित चेहरों को नई जिम्मेदारियां देने पर भी विचार कर रही है।विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया।

यूपी कांग्रेस के अनुसूचित जाति (एससी) विभाग के प्रमुख और यूपी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष आलोक प्रसाद के अनुसार दलित परंपरागत रूप से हमारे समर्थक रहे हैं, लेकिन बीच में कुछ गलतफहमियों के कारण वे समय के साथ हमसे दूर हो गए। हालांकि, हाल के चुनावों में उन्होंने संविधान के नाम पर या राहुल जी की वजह से हमारा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर दलित हमारा समर्थन करने के लिए एक कदम बढ़ाते हैं, तो अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनसे संपर्क करने के लिए एक और कदम बढ़ाएं। उन्होंने हमारा समर्थन किया। अब उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान खोजने की बारी हमारी है।

कई लोग समाजवादी पार्टी (सपा) के फैजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद को लोकसभा उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित कराने के विपक्ष के प्रयास को सत्तारूढ़ बीजेपी को रक्षात्मक स्थिति में लाने का एक और प्रयास मानते हैं। खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ से सदन में उनके महत्व को उजागर किया है। इसके बाद, कांग्रेस के भीतर कई लोगों का मानना है कि प्रसाद को प्रमुखता देने से दलितों के बीच यह संदेश जाएगा कि इंडिया ब्लॉक समुदाय के सदस्यों को नेतृत्व की भूमिका देने के लिए तैयार है। कांग्रेस मुख्यालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य भर के प्रमुख दलित नेताओं के सुझावों को सुनने के बाद 15 दिनों का रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि हालांकि कार्यक्रम की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पहले चार सम्मेलन गोरखपुर पूर्वी यूपी, सीएम योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र, लखनऊ , वाराणसी पूर्वी यूपी, पीएम नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र और मेरठ पश्चिमी यूपी में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।प्रसाद एक पासी दलित हैं, एक ऐसा समुदाय जो कई सीटों पर निर्णायक संख्या में है, खासकर यूपी के अवध क्षेत्र में।

क्या आने वाले समय में हो सकती है तेज बारिश?

अब आने वाले समय में तेज बारिश हो सकती है !दिल्ली में बारिश के साथ ही लोगों को उमस झेलनी पड़ रही है। राजधानी के कुछ हिस्सों में वीकेंड के सुबह की शुरुआत बारिश के साथ हुई। हालांकि, दोपहर में धूप निकलने से लोगों को उमस ने परेशान कर दिया। उमस की वजह लोग पसीने से तरबतर रहे। दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। भारत मौसम विभाग के मुताबिक, अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि न्यूनतम तापमान 27.1 डिग्री सेल्सियस रहा। यह इस मौसम के औसत तापमान से 0.8 डिग्री सेल्सियस कम है। दिल्ली में 7 जुलाई से लेकर 12 जुलाई तक हल्की बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में इस दौरान बादल छाए रहेंगे। 11 जुलाई को अधिकतम पारा 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।इसके अलावा 845.1 एमएम, असम में 600.3 एमएम, त्रिपुरा में 605.0 एमएम, अंडमान और निकोबार में 629.6 एमएम, बारिश हुई है। वहीं, सबसे कम बारिश वाले प्रदेशों में लद्दाख में महज 14.1 एमएम, हरियाणा में 61.3 एमएम, चंडीगढ़ में 90.3 एमएम, पंजाब में 68.3 एमएम बारिश हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक पंजाब, हरियाणा, ईस्ट राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और वेस्ट मध्य प्रदेश में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 7 जुलाई को ओडिशा, 9 जुलाई तक अरुणाचल प्रदेश, 9 और 10 जुलाई को असम, मेघालय में भारी बारिश का अलर्ट है।

दो दिन जमकर बरसात के बाद मॉनसून अब रूठने लगा है। पिछले तीन दिनों में शहर के कुछ हिस्सों में ही हल्की बारिश हुई है। इस कारण उमस भरी गर्मी परेशान करने लगी है। मौसम विभाग 12 जुलाई तक बारिश का अनुमान जता रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून कमजोर पड़ने लगा है। इस कारण आने वाले दिनों में शहर के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ़ मंजीत के अनुसार अभी बारिश की संभावनाएं क्षीण नहीं हुई हैं। 12 जुलाई तक लगातार बारिश के संकेत हैं, लेकिन अलग-अलग दिन हल्की बारिश की संभावना नजर आ रही है।

भारत के पूर्वी भागों में मूसलाधार बारिश होने से बिहार में कई स्थानों पर विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां बाढ़ से 30 जिलों के 24.5 लाख लोग प्रभावित हैं। बिहार में 4 जुलाई से कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। राज्य के कुछ जिलों में लगातार बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं। पानी का बहाव बढ़ने से कई बांधों में पानी का स्तर भी बढ़ गया है। इसके अलावा नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भी कई जगहों पर नदियां खतरे के स्तर को छू रही हैं या उससे ऊपर बह रही हैं। हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश हुई है जिसमें कांगड़ा का धर्मशाला और पालमपुर शामिल है जहां 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई।

बीते कुछ दिनों से कई प्रदेशों में हो रही जोरदार बारिश की वजह से शनिवार को इस मॉनसून सीजन में बारिश की भरपाई हो गई। अब जून से शुरू हुए मॉनसून सीजन में एक प्रतिशत तक अधिक बारिश देश भर में हुई है। इस सीजन में पहली बार मॉनसून सरप्लस में पहुंचा है। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून के दौरान एक जून से अब तक देश भर में सामान्य तौर पर 213.3 एमएम बारिश होती है। वहीं अब तक इस सीजन में 214.9 एमएम बारिश हो चुकी है।

मौसम विभाग के अनुसार सबसे अधिक बारिश मेघालय में 1248.4 एमएम, गोवा में 1167.7 एमएम बारिश हो चुकी है। इसके अलावा 845.1 एमएम, असम में 600.3 एमएम, त्रिपुरा में 605.0 एमएम, अंडमान और निकोबार में 629.6 एमएम, बारिश हुई है। मौसम विभाग 12 जुलाई तक बारिश का अनुमान जता रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून कमजोर पड़ने लगा है। इस कारण आने वाले दिनों में शहर के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ़ मंजीत के अनुसार अभी बारिश की संभावनाएं क्षीण नहीं हुई हैं। 12 जुलाई तक लगातार बारिश के संकेत हैं, लेकिन अलग-अलग दिन हल्की बारिश की संभावना नजर आ रही है।वहीं, सबसे कम बारिश वाले प्रदेशों में लद्दाख में महज 14.1 एमएम, हरियाणा में 61.3 एमएम, चंडीगढ़ में 90.3 एमएम, पंजाब में 68.3 एमएम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, अब तक मॉनसून के दौरान छह राज्यों में कम बारिश 21 राज्यों में सामान्य बारिश, 5 राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश और 4 राज्यों में सामान्य से बहुत अधिक बारिश हुई है।

5 तरीके: परिवार की कुल आय समान होने पर भी महिलाओं की बचत बढ़ेगी

यदि महिलाओं के पास कुछ पैसे बचाए हुए हैं, तो वे किसी भी समस्या के समय परिवार की मदद कर सकती हैं। महिलाएं मितव्ययी कैसे बन सकती हैं? एक छोटे परिवार को बढ़ती बाजार कीमतों और दैनिक खर्चों से निपटने के लिए दो लोगों की आय के साथ संघर्ष करना पड़ता है। बच्चों की विभिन्न ज़रूरतों, उनकी शिक्षा और उनके शौक के लिए भुगतान करने के बाद भविष्य के बारे में सोचना कुछ खास नहीं है। अधिकांश परिवारों में परिवार को संभालने की जिम्मेदारी महिलाओं की होती है, इसलिए महीने के अंत में अधिकांश पुरुषों को घर के ‘वित्त मंत्री’ की ओर रुख करना पड़ता है। यदि महिलाओं के पास कुछ पैसे बचाए हुए हैं, तो वे किसी भी समस्या के समय परिवार की मदद कर सकती हैं। महिलाएं मितव्ययी कैसे बन सकती हैं?

1) मासिक खर्चों का निर्धारण: महीना शुरू होने से पहले संभावित खर्चों की एक सूची बनाएं। यदि संभव हो तो प्रतिदिन का खर्च लिख लें। महीने के अंत में यह जांच लें कि सभी खर्च योजना के मुताबिक खर्च हो गए हैं या उससे ज्यादा हो गए हैं। यदि आप किसी कारण से महीने की शुरुआत में अधिक खर्च करते हैं, तो आपको महीने के अंत में खर्चों को कम करना होगा। यदि आवश्यक हो, तो मासिक खर्चों में कुछ पैसे जोड़ें, खर्चों को एक निश्चित राशि तक सीमित रखें और बाकी को बचाकर रखें।

2) अलग-अलग खर्चों के लिए अलग-अलग हिसाब-किताब: किसी भी सेक्टर में कितना खर्च होगा, इसका हिसाब एक जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग रखें। यदि एक ही स्थान पर छोड़ दिया जाए तो उपभोग के समय का ध्यान ही नहीं रहेगा। ऐसे में लागत अधिक हो सकती है. इसलिए

3) बचत करने से बेहतर है निवेश करना: बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वे पैसा खर्च किए बिना बिस्तर के नीचे रखेंगे तो वे अपने लक्ष्य हासिल कर लेंगे। लेकिन किसी प्रोजेक्ट में निवेश करना घर या बैंक खाते में पैसा रखने से बेहतर है। इस अभ्यास में आप बाजार मूल्य और पैसे की मांग को समझेंगे।

4) आपातकालीन बचत: खतरा पहले से नहीं आता। खासकर अगर घर में बुजुर्ग सदस्य या बच्चे हों तो ऐसी स्थिति समय-समय पर उत्पन्न हो सकती है। तो आप उस खर्च के लिए पहले से ही एक अलग खाता रख सकते हैं।

5) भविष्य के लिए बचत: जितनी जल्दी आप भविष्य के लिए योजना बनाना शुरू करेंगे, उतना बेहतर होगा। पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ उठाने से लेकर बुढ़ापे में दुनिया की यात्रा करने तक, इन सबके बारे में सोचना अच्छा है। नौकरी के बाद आप अपना जीवन कैसे बिताएंगे इसकी योजना बनाएं, अभी से थोड़े से पैसे बचाएं।

क्या रिटायरमेंट के बाद आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी? आज ही योजना बनाएं
क्या आप सेवानिवृत्ति के बाद भी वही जीवनशैली बरकरार रख पाएंगे जिसके आप आदी हैं? तो आज ही अपनी सेवानिवृत्ति के बाद की जीवनशैली की योजना बनाना शुरू करें।

क्या आप किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि रिटायरमेंट के बाद आपकी स्थायी मासिक आय भी खत्म हो जाएगी! क्या आप सेवानिवृत्ति के बाद भी वही जीवनशैली बरकरार रख पाएंगे जिसके आप आदी हैं? तो आज ही अपनी सेवानिवृत्ति के बाद की जीवनशैली की योजना बनाना शुरू करें। कम उम्र में लागतें अधिक होती हैं, लेकिन आपको जल्दी बचत शुरू करने की आवश्यकता है। क्योंकि शीघ्र सेवानिवृत्ति योजना का प्राथमिक लाभ यह है कि यह आपको पैसे बचाने के लिए अधिक समय देता है।

लेकिन रिटायरमेंट प्लानिंग कैसे की जा सकती है?

आपात्कालीन स्थिति के लिए तैयार रहें

यदि कोई निश्चित आय नहीं है, तो यह सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन में अधिक अनिश्चितता लाता है। ऐसी स्थितियों के लिए पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए. यह योजना आपको शांति और सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति के अच्छे समय का आनंद लेने और आपात स्थिति से निपटने में भी मदद करेगी।

मुद्रास्फीति से सुरक्षा

समय के साथ रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों की कीमत बढ़ती जा रही है। ऐसे में वर्तमान जीवनशैली को भविष्य में भी बरकरार रखने के लिए अभी रिटायरमेंट के बारे में सोचकर पैसे बचाना बहुत जरूरी है।

स्वास्थ्य जागरूकता

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं या कई तरह की बीमारियां घर कर सकती हैं। दवा का खर्च तो है ही. इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना जरूरी है. यह स्वास्थ्य बीमा आपको बाद में बहुत सारा पैसा बचाएगा। स्वास्थ्य बीमा आपके अधिकांश चिकित्सा खर्चों को कवर करता है। परिणामस्वरूप आप अपनी सेवानिवृत्ति में शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।

कर छूट लाभ

रणनीतिक निवेश योजना विभिन्न कर लाभ प्रदान करती है। सेवानिवृत्ति योजना में आपके द्वारा योगदान किए गए धन को कर योग्य आय से बाहर रखा जा सकता है। इसी प्रकार, कुछ सेवानिवृत्ति योजना की परिपक्वता राशियाँ कर-मुक्त हैं। टैक्स न चुकाने से होने वाली बचत से दूसरे निवेशों में मदद मिलेगी.

संपत्ति का संरक्षण

यदि आप अपनी सेवानिवृत्ति के बाद की अवधि के लिए योजना नहीं बनाते हैं, तो आपको भविष्य में विभिन्न वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे बाहर निकलने के लिए आपको अपनी संपत्ति भी बेचनी पड़ सकती है।

शांतिपूर्ण जीवन

बुढ़ापे में नियमित आय बंद होने पर भी वित्तीय स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए सेवानिवृत्ति की योजना बनाते समय, भविष्य के लिए विभिन्न निवेशों, जैसे आपके अनिवार्य खर्च, आपातकालीन निधि आदि को ध्यान में रखना आवश्यक है। इससे आप आगे चलकर शांतिपूर्ण जीवन जी सकेंगे।

इसलिए, कम उम्र से ही एक अच्छी तरह से परिभाषित निवेश योजना आपको सेवानिवृत्ति के बाद की कठिन परिस्थितियों से बचा सकती है। सही समय पर निवेश करें. और सेवानिवृत्ति का आनंद लें।

अनंत-राधिका की शादी में मेहमानों के लिए कितना है यात्रा खर्च?

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अनंत-राधिका की शादी में जाने-माने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सितारे और प्रमुख राजनेता शामिल होंगे। अंबानी परिवार को अपनी यात्रा पर कितना खर्च करना पड़ता है?

एशिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी का घर पिछले 3 जुलाई से ही सजाया जा रहा है। दक्षिण मुंबई के अल्टमाउंड रोड पर स्थित एंटीलिया दुनिया के सबसे महंगे घरों में से एक है। चार लाख वर्ग फीट के इस घर में 27 मंजिल हैं और ऊंचाई 570 फीट है। अब उस घर के सामने चार सितारों की भीड़ है. मौका है छोटे बेटे अनंत अंबानी की शादी का। अनंत तीन लड़कों और लड़कियों में सबसे छोटा है। इस लिहाज से देखा जाए तो मुकेश और नीता अंबानी कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहते क्योंकि यह घर की आखिरी शादी है। शादी से पहले की दो रस्मों के बाद अब शादी का समय है। अनंत और राधिका की शादी 12 जुलाई को होगी।

इस महाविवाह समारोह में देश-विदेश के मशहूर सितारे और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहेंगी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही मुंबई के लिए रवाना हो चुकी हैं. अमेरिका से पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा. किम कार्दशियन शुक्रवार को मुंबई में कदम रखेंगी। अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में विदेश से मेहमानों को लाने के लिए अंबानी परिवार ने 3 फाल्कन-2000 जेट किराए पर लिए थे। यह विशेष प्रकार का चार्टर्ड विमान दुनिया के विभिन्न हिस्सों से मेहमानों को शादी समारोह में ले जाएगा। सुनने में आया है कि इन विमानों का किराया 7 लाख 20 हजार टका प्रति घंटा है.

एयर चार्टर कंपनी के सीईओ राजन मेहरा ने कहा कि अंबानी परिवार ने शादी में मेहमानों को लाने-ले जाने के लिए उनकी कंपनी से तीन फाल्कन-2000 विमान किराए पर लिए हैं। उन्होंने एक समाचार एजेंसी को बताया कि मेहमान अलग-अलग जगहों से आ रहे हैं और प्रत्येक विमान देश भर में कई यात्राएं करेगा।

लेकिन सिर्फ ये तीन जेट ही नहीं, अगले तीन दिनों तक 100 और विमान मेहमानों की सेवा में लगे रहेंगे. अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी 12 जुलाई को मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में होने जा रही है। गाइहलुद और मेहंदी की रस्म पूरी हो चुकी है. बोलीपारा से लेकर नेतपारा तक हर जगह ये शादी चल रही है. अब और नहीं बल्कि क्यों, कहा जाता है भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के सबसे छोटे बेटे की शादी! शोर मच जाएगा.

शादी समारोह में कई बॉलीवुड सितारे पहले ही नजर आ चुके हैं. इस इवेंट में जान्हवी कपूर से लेकर सारा अली खान, रणवीर सिंह से लेकर सलमान खान तक कई लोग मौजूद थे। वहीं इस म्यूजिक इवेंट में एक्टर शाहरुख खान को छोड़कर बॉलीवुड के लगभग सभी टॉप सितारे मौजूद थे. कॉन्सर्ट में पॉप स्टार जस्टिन बीबर मौजूद थे.
सूत्रों के मुताबिक, इस शादी समारोह में भारतीय मूल की किम कार्दशियन और उनकी बहन ख्लोए कार्दशियन, बीट्राइस ‘लाइफ कोच’ जॉय शेट्टी जैसे सितारे मौजूद रहेंगे। इसके अलावा मुकेश अंबानी के बेटे की शादी के मौके पर विदेशी राजनेता भी मौजूद रहेंगे. उस सूची में ब्रिटेन के पूर्व प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन और टोनी ब्लेयर, स्वीडन के पूर्व प्रधान मंत्री कार्ल बिल्ड्ट, कनाडा के पूर्व प्रधान मंत्री स्टीफन हार्पर शामिल हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी मुकेश-पुत्र के विवाह समारोह में शामिल हो सकते हैं। सोनिया गांधी को भी निमंत्रण पत्र दिया गया है.

इसके अलावा शादी समारोह में बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी भी देखने को मिलेगी. मेहमानों से अनुरोध है कि वे शादी समारोह में शामिल होने के लिए पारंपरिक कपड़े पहनें। अनंत-राधिका की प्री-वेडिंग सेरेमनी पर हॉलीवुड, बॉलीवुड और साउथ सिनेमा ने भी रोक लगा दी थी। इस कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और रजनीकांत जैसे अभिनेता अपने परिवार के साथ शामिल हुए। करीना कपूर-सैफ अली खान, रणबीर सिंह-दीपिका पादुकोण से लेकर आलिया भट्ट-रणबीर कपूर, अजय देवगन-काजल, विक्की कौशल-कैटरीना कैफ, वरुण धवन-सिद्धार्थ मल्होत्रा, श्रद्धा कपूर तक! सिर्फ अभिनेता ही नहीं, माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स, मेटर के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फिंक, डिज्नी के सीईओ बॉब इगर, एडोब के सीईओ शांतनु नारायण, डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप, ‘बैंक ऑफ अमेरिका’ के चेयरमैन ब्रायन थॉमस मोयनिहान, राजा और रानी अतिथियों में भूटान जैसे व्यक्ति भी शामिल थे

आखिर किन सेलिब्रिटीज ने दी है अपनी घातक बीमारियों को मात?

आज हम आपको बताएंगे कि किन सेलिब्रिटीज ने अपनी घातक बीमारियों को मात दी है! हिना खान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि वे ब्रेस्ट कैंसर की तीसरी स्टेज से जूझ रही हैं, मगर हार नहीं मानने वाली। रिसर्च, एक्सपर्ट और ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर सेलेब्स का मानना है कि स्तन कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को भी हराया जा सकता है, बशर्ते पीड़ित शर्म, हिचक और डर से परे अपनी बीमारी का खुल कर इलाज करवाए, इसके प्रति जागरूक हो। मगर आम तौर पर इसे सोशल स्टिग्मा मान कर महिलाएं इलाज में देर कर देती हैं। जानी-मानी एक्ट्रेस हीना खान ने हाल ही में जब सोशल मीडिया पर एक बहुत ही भावुक करने वाली पोस्ट शेयर करके बताया कि वे कैंसर की तीसरी स्टेज से जूझ रही हैं तो इंडस्ट्री व फैंस में डर और चिंता की लहर दौड़ गई। फैंस और इंडस्ट्री का फिक्रमंद होना स्वाभाविक है। देश में कैंसर से होने वाली महिलाओं की मौत के आंकड़े डरावने हैं। कैंसर की जंग जीत चुकी ताहिरा कश्यप ने भी खुलासा किया, ‘अपने ट्रीटमेंट के दौरान मुझे पता चला कि कई औरतें अपनी मैमोग्राफी, कीमोथेरेपी महज इसलिए नहीं करवातीं, क्योंकि एक जॉइंट फैमिली सिस्टम में वे ब्रा नहीं बोल सकती, तो ये कैसे बोलें कि उनके ब्रेस्ट में गांठ है। ट्रीटमेंट न करवाने के कारण कई अपनी जान भी गंवा देती हैं।’

वाकई WHO और कैंसर रिसर्च एजेंसियों के मुताबिक, भारत में कैंसर के हर साल डेढ़ से दो लाख नए मामले आते हैं, जिसमें करीब 25 प्रतिशत महिलाओं की मौत हो जाती है। अपोलो हॉस्पिटल की एक रिपोर्ट ने तो देश में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर पेशंट्स को देखते हुए भारत को कैंसर कैपिटल करार दे दिया गया है। बॉलीवुड में ताहिरा कश्यप ही नहीं मुमताज, सोनाली बेंद्रे, महिमा चौधरी, छवि मित्तल जैसी एक्ट्रेसेस अगर कैंसर को मात कर सर्वाइवर बनीं, तो महज इसलिए कि उन्होंने अपनी इस बीमारी को किसी तरह का सोशल स्टिग्मा या कलंक न मान कर बिना शर्म और हिचक के इसका इलाज करवाया और इसे लेकर जागरूकता भी फैलाई। ताहिरा कश्यप ने अपनी जर्नी पर किताब लिखी, तो छवि मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक यूजर द्वारा ब्रेस्ट काटने के कॉमेंट पर उसे पूरी ब्रेस्ट सर्जरी समझा दी थी।

कैंसर की लड़ाई लड़ चुकी महिमा चौधरी कहती हैं, ‘हिना खान का जब अपने ब्रेस्ट कैंसर के बारे में पता चला, तो सबसे पहले उन्होंने मुझे फोन किया। महिलाएं अगर अपनी इस बीमारी के बारे में खुल कर बात करेंगी, तो जागरूकता फैलेगी, क्योंकि ये सफर और ट्रीटमेंट इतने मुश्किल होते हैं कि आपके दिमाग में 100 तरह के सवाल होते हैं, मेरा ट्रीटमेंट सही है या नहीं? मैं बचूंगी या नहीं? आम तौर पर महिलाएं अपने फिजिकल अपीयरेंस (अपने स्तन) को लेकर बहुत ज्यादा फिक्रमंद होती हैं। जबकि आज कल ब्रेस्ट की रिकंस्ट्रक्टिव ( ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में इंप्लांट करके नई ब्रेस्ट बनाई जाती है)और प्लास्टिक सर्जरी इतनी बढ़िया है कि किसी को कुछ पता नहीं चलता। कई बार छोटे शहर की महिलाएं ब्रेस्ट की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी नहीं करवातीं। जरूरत पड़ने पर ये सर्जरी जरूर करवानी चाहिए। ब्रेस्ट रिइंप्लांट बहुत आम और कामयाब सर्जरी है। इस पर काफी रिसर्च हो रखी है।’ हमारे पास आने वाले 80 प्रतिशत केसे ऐसे होते हैं, जो शर्म या झिझक के कारण समय पर नहीं आते। कई महिलाएं डॉक्टर को अपना स्तन नहीं दिखाना चाहती। कइयों को लगता है कि इसमें स्तन काटने पड़ जाएंगे। कई ऐसा भी सोचती हैं कि इससे उनके स्त्रीत्व कम हो जाएगा। कैंसर को लेकर बहुत बड़ा डर भी होता है और अवेयरनेस की कमी भी। मगर आज के दौर में अर्ली डिटेक्शन के बाद आप लम्पेक्टोमी सिर्फ गांठ रिमूव करने की प्रक्रिया कर सकते हैं।’

कहती हैं, ‘कैंसर के फैलाव के कारण मास्टक्टोमी करनी पड़ती है, जहां ब्रेस्ट को रिकन्सट्रक्ट या रीइम्प्लांट किया जाता है। जितना जल्दी आप कैंसर को डिटेक्ट करेंगे, तो पीड़ित को पूरा ब्रेस्ट निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर एडवांस स्टेज में भी पता चलता है, तो जरूरी नहीं कि ब्रेस्ट निकालना ही पड़े। ब्रेस्ट साल्वेज, बचाव किया जा सकता है। एक केस में 81 साल की उम्रदराज महिला फर्स्ट स्टेज में ही हमारे पास आ गई थी। सर्जरी करके उसकी गांठ निकाल दी गई और आज वो स्वस्थ हैं।’ 40 के होने के बाद साल में एक बार मैमोग्राफी का टेस्ट होना चाहिए।’

क्या आने वाले समय भारत-पाकिस्तान का व्यापार संबंध खुल सकता है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान का व्यापार संबंध खुल सकता है या नहीं !भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत सारी समानताएं होने के बावजूद संबंधों में अस्थिरता का लंबा इतिहास रहा है लेकिन 2019 के बाद व्यापार संबंधों में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। पुलवामा में हमला और उसके बाद जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने ने दोनों देशों नें औपचारिक व्यापार संबंधों को खत्म कर दिया। भारत ने पाकिस्तानी आयात पर भारी जुर्माना लगाया और नियंत्रण रेखा के पार व्यापार को निलंबित कर दिया। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए व्यापार प्रतिबंध लगा दिया और बाद में केवल आवश्यक दवाइयों के आयात की अनुमति दी। पांच साल के बाद, हाल के घटनाक्रमों से यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। भारत पाक व्यापार संबंधों को टटोलते हुए डॉन ने रिपोर्ट की है। पाकिस्तान के बड़े अखबार डॉन की रिपोर्ट कहती है कि इस साल निर्वाचित होने के बाद दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर बधाई संदेशों का आदान-प्रदान किया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पाक के डिप्टी पीएम इशाक डार ने खुलकर में भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की वकालत की है। इस ओर ध्यान देना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि तस्करी और बदले रूट से दोनों देशों के बीच प्रवाहित होने वाले अरबों डॉलर व्यापार संबंधों को सामान्य बनाने के संभावित लाभों को रेखांकित करते हैं अनुमान है कि दुबई और अन्य केंद्रों के माध्यम से तस्करी और पुनर्मार्ग के माध्यम से दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का प्रवाह होता है।

पाकिस्तान संघीय राजस्व बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शब्बर जैदी का कहना है कि एक साल में 1.5-2 बिलियन डॉलर के सामान की तस्करी हो रही है, जिसमें दुबई से ही एक बिलियन डॉलर की तस्करी हो रही है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर शोध परिषद द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुमान के मुताबिक 2016 में दोनों देशों में अनौपचारिक व्यापार 4.71 बिलियन डॉलर का था। जैदी कहते हैं कि इस अनौपचारिक व्यापार के लिए भुगतान अक्सर हुंडी/हवाला चैनलों के माध्यम से किया जाता है, जिसमें संभावित रूप से सीमा सुरक्षा बल शामिल होते हैं। वे कहते हैं कि ईदुल अजहा से पहले हजारों गाय और अन्य पशुधन सीमा पार चले गए, साथ ही सुपारी और तंबाकू उत्पादों का अवैध व्यापार भी हुआ। पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान से सेंधा नमक और सूखे मेवे की तस्करी 3,300 किलोमीटर लंबी सीमा से की जाती है। इस तरह का एक मजबूत अनौपचारिक व्यापार नेटवर्क सामान्यीकृत व्यापार संबंधों के संभावित लाभों को रेखांकित करता है। जबकि राजनीतिक तनाव बना हुआ है, आर्थिक तर्क पारस्परिक लाभ के लिए आगे का रास्ता सुझाता है।

पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल कहते हैं, ‘सभी तरह का व्यापार फायदेमंद होता है और दोनों देशों की निकटता को देखते हुए यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। चीन और ताइवान के बीच विवाद है लेकिन उनका व्यापार फल-फूल रहा है। भारत और चीन के बीच विवाद है लेकिन उनका व्यापार फल-फूल रहा है। आक्रमण के खतरे के बावजूद, चीन और ताइवान का द्विपक्षीय व्यापार 250 बिलियन डॉलर से अधिक है। इसी तरह भारत ने 2023 में चीन से 101 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया और 2023 में 16 बिलियन डॉलर का निर्यात किया।’ वे कहते हैं कि हम प्रतिबंध से पहले की तुलना में कश्मीर को वापस पाने के करीब नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ व्यापार संबंधों को रोकना राजनीतिक रूप से सफल नहीं रहा है। उनका तर्क है कि आर्थिक रूप से मजबूत पाकिस्तान, कमजोर पाकिस्तान की तुलना में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी लोगों की इच्छाओं और आकांक्षाओं का बेहतर प्रतिनिधित्व कर सकता है।

क्या भारत के साथ व्यापार खुलने का मतलब यह है कि पाकिस्तान का निर्यात बढ़ जाएगा। इस सवाल पर विभिन्न पाकिस्तानी व्यापारियों के अनुभव बताते हैं कि भारत में ‘मेड इन पाकिस्तान’ लेबल वाले उत्पादों के प्रति उनमें पूर्वाग्रह है। इसके अलावा पुलवामा हमलों से पहले भारत ने अक्सर पाकिस्तान के निर्यात पर गैर-टैरिफ बाधाएं लगाई थीं। हालांकि यह सभी संभावित निर्यातों के लिए सही नहीं है। भारत के अमृतसर में मजीठ मंडी है, जिसमें करीब 400 व्यापारी हैं। इनमें से अधिकतर व्यापारी 2019 से पहले पाकिस्तान से सूखे खजूर मंगाते थे। भारतीय लेखिका निकिता सिंगला और प्रिया अरोड़ा की रिपोर्ट ‘द दुबई एंगल्ड ट्राएंगल’ में कहा गया है कि बाजार में सूखे खजूर खरीदने आने वाले ग्राहक अन्य सामान भी खरीदते थे लेकिन अब मंडी बंजर जमीन की तरह दिखती है और ज्यादातर व्यापारी कारोबार से बाहर हो गए हैं।

वर्तमान में पाकिस्तान माल ढुलाई लागत पर काफी खर्च करता है। हैदर बताते हैं कि दूर से आयात के लिए व्यवसाय प्रति कंटेनर लगभग 3,000 से 4,000 डॉलर का भुगतान करते हैं। हालांकि, भारत से आयात करने से ये लागत काफी कम हो सकती है, जिससे ये 300 से 400 डॉलर प्रति कंटेनर तक कम हो सकती है। चीन के साथ गलत तरीके से किए गए मुक्त व्यापार समझौते का उदाहरण देते हुए, जिसने पाकिस्तान के बाजार को भर दिया और बदले में बहुत कम निर्यात प्राप्त हुआ, श्री हैदर का तर्क है कि व्यापार को उदार बनाने का पहला कदम वार्ता से शुरू करना है, जो दोनों देशों के हित में टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं निर्धारित करता है। भारत के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते में विवाद समाधान तंत्र, बैंकिंग चैनल तथा सरकार-से-सरकार सौदों बनाम व्यवसाय-से-व्यवसाय सौदों के तौर-तरीके जैसे महत्वपूर्ण तत्व शामिल होंगे। उनका कहना है कि दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र का समझौता पुराना हो चुका है और हर चीज पर फिर से बातचीत करने की जरूरत है।