Saturday, March 14, 2026
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आर्मी चीफ का पद संभालते ही किन बातों पर फोकस होना चाहिए?

आज हम आपको बताएंगे की आर्मी चीफ का पद संभालते ही किन बातों पर फोकस होना चाहिए! रविवार दोपहर बाद इंडियन आर्मी को नया चीफ मिल जाएगा। मौजूदा वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी नए आर्मी चीफ का पद संभालेंगे। वे ऐसे वक्त में आर्मी चीफ का पद संभाल रहे हैं जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन से निपटने से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से निपटने की चुनौतियां बढ़ी हैं। सेना के मॉर्डनाइजेशन के साथ ही अग्निवीर के तौर पर एक बड़े मसले का हल निकालना भी बाकी है। 2022 में सेना में भर्ती की प्रक्रिया बदली और अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों की भर्ती हो रही है। अभी तक के प्रावधान के हिसाब से चार साल पूरा होने से पहले 25 पर्सेंट अग्निवीरों को परमानेंट होने का विकल्प दिया जाएगा, उस वक्त तक जनरल द्विवेदी ही आर्मी चीफ रहेंगे। अग्निपथ में बदलाव को लेकर आर्मी के भीतर स्टडी तो चल ही रही है लेकिन इसके साथ ही यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। खासकर इस बार केंद्र सरकार का जो स्वरूप है और विपक्ष के नंबर हैं उससे यह मसला गरम है और आगे इसके और गरमाने के आसार है। ऐसे में सेना की जरूरतों और मनोबल का ध्यान रखते हुए आर्मी चीफ के तौर पर जनरल द्विवेदी को मजबूत स्टैंड लेना होगा।

जम्मू-कश्मीर में घाटी में दहशत फैलाने की आतंकवादियों की साजिश जारी है, लेकिन अब साथ ही कई सालों से शांत रहे जम्मू के इलाकों में भी आतंकी गतिविधि बढ़ी है। लगातार कई वारदातों को आतंकी अंजाम दे चुके हैं और सेना ने अपने कई सैनिकों को खोया है। यह सवाल उठ रहा है कि इंटेलिजेंस क्यों फेल हो रहा है और ह्यमून इंटेलिजेंस क्यों इतना कमजोर हुआ है कि आतंकियों के मंसूबों की वक्त रहते भनक तक नहीं मिल पा रही है। नए आर्मी चीफ के सामने इंटेलिजेंस को मजबूत कर यह भरोसा कायम करने की चुनौती होगी कि आतंकियों की साजिशों को पहले भांपकर उन्हें नाकाम करने की क्षमता सेना में है।

ईस्टर्न लद्दाख में एलएसी पर चार साल से गतिरोध जारी है। सैनिकों की वहां लगातार तैनाती है, जिससे LAC भी एक तरह से LOC बन गई है। सिर्फ ईस्टर्न लद्दाख में ही LAC पर नहीं बल्कि ईस्टर्न सेक्टर में भी LAC पर सैनिकों की तैनाती पहले के मुकाबले बढ़ी है। जम्मू- कश्मीर में आतंकी काबू से बाहर हो रहे हैं। मणिपुर में हालात खराब हैं। इन सब चुनौतियों के बीच सेना को सैनिकों की संख्या भी घटानी है। सरकार की तरफ से सैनिकों की संख्या कम करने का टारगेट है और चुनौतियों चारों तरफ हैं। नॉर्दन बॉर्डर तो प्राथमिकता रहेगी ही लेकिन वेस्टर्न फ्रंट पर भी ढिलाई नहीं बरती जा सकती है। ऐसे में मैनपावर मैनेजमेंट नए चीफ के सामने एक बड़ी चुनौती होगी कि कैसे सभी फ्रंट की जरूरतें पूरी की जाए।

सेना में अभी कुछ क्रिटिकल एम्युनिशन की कमी है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई सैन्य उपकरणों के इंपोर्ट पर बैन लगाया गया है और वे खरीद स्वदेशी कंपनियों से ही करनी हैं। ऐसे में सेना को वक्त पर सभी जरूरी उपकरण मिल सकें यह एक बड़ा टास्क है। क्योंकि कई बार डीआरडीओ की तरफ से सेना की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट का प्रोटोटाइप तो तैयार हो जाता है लेकिन एक्चुअल फंक्शनल प्रोडक्ट मिलने में देरी होती रहती हैं। यह भी चुनौती होगी कि कैसे स्वदेशी इंडस्ट्री को सुविधा मुहैया कराएं कि वे सेना की जरूरत के हिसाब से और उनके मानकों पर फिट बैठने वाले प्रॉडक्ट तैयार करें। युद्ध के बदलते तरीके के साथ ही नए उपकरणों के साथ ही नई तरह की ट्रेनिंग बिना देरी किए देना भी एक चुनौती रहेगी। पाकिस्तान की बुरी आर्थिक स्थिति के बावजूद पाकिस्तान भी तेज रफ्तार से अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है।

चीन ने कुछ वक्त पहले ही अपनी स्ट्रैटजिक सपोर्ट फोर्स को रीस्ट्रक्चर किया है उसके तहत आने वाले तीन डिपार्मेंट साइबर, स्पेस और इंफो सपोर्ट फोर्स को सीधे सेंट्रल मिलिट्री कमिशन (सीएमसी) के तहत ले आए हैँ। जिससे उनकी बेहतर मॉनिटरिंग होगी और वह ज्यादा प्रभावशाली होंगे। इससे भारत के लिए थ्रेट परसेप्शन बढ़ेगा। भारतीय सेना में भी रीस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में यह देखना जरूरी होगा कि क्या बदलते थ्रेट परसेप्शन के हिसाब से सेना खुद को कितनी तेजी से तैयार कर रही है। नए थ्रेट के लिए नए उपकरण के साथ ही नई स्ट्रैटजी और नई तरह की ट्रेनिंग… इन सब में भारतीय सेना पीछे ना छूटे।

आखिर किन-किन राज्यों में हो सकती है बारिश?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किन-किन राज्यों में बारिश हो सकती है !दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में बारिश का दौर जाती है। शनिवार को भी कई इलाकों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आज भी दिल्ली समेत कई जगहों पर बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD ने अगले चार से पांच दिन में भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है। दिल्ली के अलावा, हिमाचल, राजस्थान, हरियाणा, यूपी, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना है। मॉनसून लगभग पूरे देश को कवर कर चुका है। राजधानी दिल्ली में अगले तीन दिनों में भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने दिल्ली में अगले तीन दिन के लिए भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बता दें कि राजस्थान में मॉनसून के कारण आगामी कुछ दिनों में भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम कार्यालय के अनुसार, बीते 24 घंटे में राज्य में कुछ स्थानों पर बादल गरजने के साथ हल्की से मध्यम वर्षा तथा कहीं-कहीं भारी वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान सबसे अधिक पश्चिमी राजस्थान के रायसिंहनगर में 72.3 मिली व पूर्वी राजस्थान के कामां (भरतपुर) में 68 मिमी बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार को भारी बारिश के बीच दिल्ली के वसंत विहार इलाके में एक निर्माण स्थल पर गिरी दीवार के मलबे से तीन मजदूरों के शव निकाले जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी बारिश हुई और 30 जून से दो जुलाई तक राज्य में मूसलाधार बारिश तथा आंधी का पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, कांगड़ा, कुल्लू और किन्नौर जिलों में तीन सड़कें यातायात के लिए बंद कर दी गई हैं। मौसम केंद्र ने कहा कि पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा धर्मपुर में 62.4 मिमी बारिश हुई तथा धर्मशाला में 52.4 मिमी, कसौली में 39 मिमी, शिमला में 11.2 मिमी, सोलन में 10.2 मिमी बारिश हुई।

उत्तराखंड के हरिद्वार में दोपहर भारी बारिश हुई जिससे ‘सूखी नदी’ में बाढ़ आने से कई कारें पानी के तेज बहाव में बह गईं। हरिद्वार में बारिश का पानी घरों में घुस गया और प्रमुख सड़कों में जलजमाव हुआ। यह नदी आमतौर पर सूखी रहती है इसलिए लोग अपनी गाड़ियां ‘सूखी नदी’ के किनारे खड़ी कर देते हैं। यह नदी बारिश के पानी से भरती है। राजस्थान में मॉनसून के कारण आगामी कुछ दिनों में भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम कार्यालय के अनुसार, बीते 24 घंटे में राज्य में कुछ स्थानों पर बादल गरजने के साथ हल्की से मध्यम वर्षा तथा कहीं-कहीं भारी वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान सबसे अधिक पश्चिमी राजस्थान के रायसिंहनगर में 72.3 मिली व पूर्वी राजस्थान के कामां (भरतपुर) में 68 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम कार्यालय ने पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया है।

आईएमडी ने कहा कि 29 जून से तीन जुलाई तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने का अनुमान है। आईएमडी ने इस अवधि के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में बहुत भारी वर्षा का भी अनुमान जताया है। आईएमडी ने यह भी कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूर्वी उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में आगे बढ़ गया है। मौसम विभाग ने दिल्ली में अगले तीन दिन के लिए भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को भारी बारिश के बीच दिल्ली के वसंत विहार इलाके में एक निर्माण स्थल पर गिरी दीवार के मलबे से तीन मजदूरों के शव निकाले जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई। हरिद्वार में बारिश का पानी घरों में घुस गया और प्रमुख सड़कों में जलजमाव हुआ। यह नदी आमतौर पर सूखी रहती है इसलिए लोग अपनी गाड़ियां ‘सूखी नदी’ के किनारे खड़ी कर देते हैं। यह नदी बारिश के पानी से भरती है। राजस्थान में मॉनसून के कारण आगामी कुछ दिनों में भारी बारिश होने का अनुमान है। ने कहा कि अगले दो से तीन दिन में पश्चिमी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब के अधिकांश हिस्सों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू के शेष इलाकों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

क्या देश में हो सकती है अब भारी बारिश?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब देश में भारी बारिश हो सकती है या नहीं! जून खत्म होते होते मॉनसून ने दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में अपना कब्जा कर लिया है। इसके बाद गर्मी तो जैसे छूमंतर हो गई है। हालांकि लोगों को चिपचिपी गर्मी परेशान कर रही है। खास दिल्ली की बात करें तो आज भी यहां बादलों का डेरा है और अगले तीन दिन तक भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं उत्तर प्रदेश, पंजाब- उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी मॉनसून के चलते अच्छी बारिश हो रही है। अमेरिकी मौसम विभाग ने जून के शुरुआत में भविष्यवाणी की थी। उसने जुलाई और उसके बाद अगस्त-सितंबर में अच्छी बरसात की उम्मीद जताई है।  शुक्रवार को तूफानी बारिश के बाद शनिवार को बारिश के कुछ जगहों पर तेज स्पैल आए। यह स्पैल 20 मिनट से आधे घंटे तक रहे। मौसम विभाग की मानें तो 3 जुलाई तक यहां भी भारी बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने अगले 3-4 दिन इन राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गर्मी परेशान नहीं करेगी।इससे पूर्व घने काले बादल छाए थे। इसकी वजह से लोगों को लगा कि अब एक बार फिर तेज बारिश काफी देर तक होने वाली है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं दिन भर बादल छाए रहे। बारिश कम होने की वजह से राजधानी में उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। 2 जुलाई तक मौसम विभाग ने तेज बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके बाद तीन जुलाई को भी मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 29 और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रह सकता है। वहीं 4 व 5 जुलाई को मध्यम बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रह सकता है।

उत्तर प्रदेश में भी मौसम बारिश के बाद सुहाना हो गया है। बारिश ने एक ओर जहां भारी गर्मी से राहत दिलाई तो वहीं अब दूसरी ओर उमस परेशान कर रही है। राजधानी लखनऊ प्रदेश के लगभग अधिकतर हिस्सों में बारिश हो चुकी है। रविवार को महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। 30 जून को पश्चिमी और पूर्वी यूपी में अधिकांश जगहों पर गरज चमक के साथ बारिश होने की बात कही गई है। इस दौरान कहीं भारी तो कहीं मध्यम बारिश होने की संभावना है।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। उत्तराखंड की बात करें तो यहां कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, वहीं कहीं-कहीं भारी बारिश का भी अलर्ट है। पहाड़ों पर भारी बारिश होने का अनुमान है। इससे लैंडस्लाइड का खतरा भी बढ़ गया है। देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार में भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। कई जिले ऐसे हैं जहां मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो 30 जून से 2 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट है। 3 जुलाई को मौसमू विभाग ने कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब 30 जून से 3 जुलाई तक यहां के लोगों को मूसलाधार बारिश देखने को मिलेगी।

पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ में भी बारिश ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग की मानें तो 3 जुलाई तक यहां भी भारी बारिश होने वाली है। मौसम विभाग ने अगले 3-4 दिन इन राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गर्मी परेशान नहीं करेगी।

मध्य प्रदेश में मॉनसून ने पहले ही एंट्री मार ली थी, इसके चलते राज्य के कई इलाकों में बारिश जारी रही और कई जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी भी है। मौसम विभाग भोपाल सर्कल के अधिकारियों ने बताया कि उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर बने चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र से नमी के कारण प्रदेश के कई इलाकों में बारिश जारी रहेगी। राजस्थान की बात करें तो मुख्यत: पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 3 जुलाई तक कहीं येलो तो कहीं ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इसके बाद तीन जुलाई को भी मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 29 और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रह सकता है। वहीं 4 व 5 जुलाई को मध्यम बारिश की संभावना है। अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रह सकता है।इन जगहों में गरज चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी है। बिहार की बात करें तो पटना समेत लगभग सभी जिलों में झमाझम बारिश जारी है। यह मंजर कल दोपहर से शुरू है जो आज सुबह भी जारी रहेगा।

नीट-पीजी 2024 11 अगस्त को दो पालियों में आयोजित की जाएगी.

केंद्र ने पोस्ट ग्रेजुएट लेवल ऑफ मेडिसिन के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा नेट-पीजी का नया शेड्यूल जारी कर दिया है। NEET-PG के आयोजन पैनल ‘द नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज’ ने कहा कि परीक्षा 11 अगस्त को दो चरणों में आयोजित की जाएगी.

देशभर में नेट-पीजी का आयोजन 23 जून को होना था। लेकिन परीक्षा से 24 घंटे पहले अचानक इसे स्थगित कर दिया गया. इसके बाद अटकलें लगने लगीं कि प्रश्न लीक होने की वजह से परीक्षा स्थगित की गई है.

जब छात्र इस सवाल का जवाब पाने के लिए बेताब हैं कि नेट पीजी कब आयोजित होगी, तो केंद्र सरकार और एनबीई (द नेशनल बोर्ड ऑफ एजुकेशन) के सूत्रों ने पिछले मंगलवार को कहा कि प्रश्न लीक के जोखिम से बचने के लिए ऐसा किया जा रहा है। परीक्षा से दो घंटे पहले प्रश्न पत्र तैयार करने पर विचार किया गया। यह भी जानकारी है कि परीक्षा अगले महीने के भीतर आयोजित की जा सकती है. आखिरकार एनबीईएमएस ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि परीक्षा 11 अगस्त को आयोजित की जाएगी. लेकिन दो मामलों में. संसद के दोनों सदनों में आज प्रश्न लीक मामले पर चर्चा को लेकर हंगामा मचा रहा. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का माइक्रोफोन बंद करने का भी आरोप लगा. आख़िरकार लोकसभा सत्र आज के लिए रद्द करना पड़ा. नतीजतन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस शुरू नहीं हो सकी. जो संसदीय इतिहास में वस्तुतः अभूतपूर्व है। हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मांग है कि सरकार सवालों के लीक होने समेत सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है.

राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस आज से संसद के दोनों सदनों में शुरू होने वाली थी। हालांकि, कल ही राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने बहस से पहले प्रश्न लीक पर चर्चा की मांग की थी. इसी तरह, आज राहुल, तृणमूल के सुदीप बनर्जी जैसे विपक्षी दलों के नेताओं ने लंबित प्रस्ताव पेश किए। राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा में 22 दलों के नेताओं द्वारा प्रस्तुत लंबित प्रस्तावों को खारिज कर दिया।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने दावा किया, ”2016 के बाद से राज्यसभा में कोई भी लंबित प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़ग को आज यह मुद्दा उठाने की भी अनुमति नहीं दी गई. तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने छात्रों से कहा, ”प्रिय छात्रों, आज राज्यसभा में सौ से अधिक सांसद और लोकसभा में 250 सांसद हैं. आपके रवैये को संसद में उजागर करने की कोशिश की. लेकिन सरकार ने हमें वह मौका नहीं दिया. वे अपने भगवान की पूजा करने में व्यस्त हैं!” हालांकि विपक्ष के हंगामे के कारण आज राज्यसभा स्थगित कर दी गई, लेकिन दोपहर बाद उच्च सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस शुरू हुई। गौरतलब है कि बीजेडी सांसद भले ही पिछले दस सालों से विभिन्न मुद्दों पर सरकार के साथ रहे हों, लेकिन आज वे राज्यसभा में सरकार विरोधी नजर आ रहे हैं.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लंबित प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा, ”मैं पहले ही कह चुका हूं कि धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस रोकना और अन्य मुद्दों पर चर्चा करना संभव नहीं है.” आप बहस में हर बात पर चर्चा करते हैं. मुझे उम्मीद है कि सरकार भी आपके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रतिक्रिया देगी।” ज्ञात हो कि प्रश्न लीक के मुद्दे को हम सभी एक महत्वपूर्ण मामला मानते हैं. इसलिए मैं वास्तविक मामले पर चर्चा की मांग करता हूं.” जब स्पीकर ने मांग खारिज कर दी तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसद वेल में आकर विरोध करने लगे. पहले दौर में स्पीकर ने सत्र बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया. प्रश्न को ‘लीक’ होने से बचाने के लिए पंजाब से आम आदमी पार्टी के सांसद राजकुमार छब्बेवाल हाथ में एम-सील लेकर संसद में दाखिल हुए। आज राहुल ने अपना भाषण शुरू करने से पहले स्पीकर से अपना माइक चालू करने का अनुरोध किया. जो विवादित है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकसभा में राहुल का माइक्रोफोन बंद कर युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की गई. हालांकि, सत्ता पक्ष ने इसे बंद करने के आरोपों से इनकार किया है. स्पीकर ने दावा किया, “जैसा कि मैंने पहले कहा है, मेरे पास माइक्रोफ़ोन ऑन-ऑफ स्विच नहीं है।”

करीब 12 बजे जब लोकसभा सत्र शुरू हुआ तो कल्याण बनर्जी, हनुमान बेनीवाल, गुरजी सिंह औजला जैसे विपक्षी सांसद प्रश्न लीक पर चर्चा की मांग को लेकर वेल में आकर विरोध करने लगे. केंद्रीय संसदीय मंत्री किरण रिजिजू ने आश्वासन दिया, ”सरकार बहस में सभी तरह के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है.” हालांकि, विपक्षी सांसद अड़े रहे. जिसे देखते हुए स्पीकर ने हमेशा की तरह लोकसभा सत्र रद्द कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने बहस पर धन्यवाद देने की बजाय छात्रों के पक्ष में खड़े होने का संदेश दिया है. ऐसा हाल ही में नहीं हुआ है कि विपक्ष ने राष्ट्रपति के भाषण को लेकर बहस का पहला दिन बर्बाद कर दिया हो. इसके परिणामस्वरूप कई राजनेताओं के मुताबिक अगले सोमवार से संसद में सामान्य कामकाज होगा. बाद में राहुल ने टिप्पणी की कि प्रश्न लीक पर संसद के बाहर चर्चा नहीं होने देने का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है. सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने लिखा, ”विपक्ष नेट में धांधली और लीक हुए सवालों पर संसद में रचनात्मक चर्चा चाहता था. लेकिन दुर्भाग्य से हमें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी गई।’ …हम प्रधानमंत्री से चर्चा की मांग करते हैं और छात्रों को उचित सम्मान देने का अनुरोध करते हैं।”

रत्ना पाठक शाह ने कहा कि आधुनिकता हमारे मन में है.

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आधुनिक महिलाओं की परिभाषा क्या है? इस पर बहस का कोई अंत नहीं है. आजकल कई महिला-केंद्रित फिल्में भी आधुनिक महिला किरदारों को अलग-अलग तरह से चित्रित कर रही हैं। लेकिन क्या आधुनिक महिला पात्र को धूम्रपान या शराब पीना पड़ता है? तभी पता चलेगा कि किरदार वाकई मॉडर्न है? एक्ट्रेस रत्ना पाठक शाह ने एक इंटरव्यू में सवाल उठाया.

‘फोर मोर शॉट्स’ या ‘कॉकटेल’ जैसी फिल्मों में स्वतंत्र और आधुनिक महिला किरदारों को उन्मुक्त जीवन जीते हुए दिखाया गया है। आधुनिक होने के कारण वे धूम्रपान और शराब पीने को अपने दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। या बेहतर कहें तो, क्योंकि वे धूम्रपान करती हैं या शराब पीती हैं, इसलिए उन्हें आसानी से आधुनिक महिला का खिताब मिल जाता है। लेकिन क्या वाकई इस तरह से आधुनिक बनना संभव है? या किसी व्यक्ति की मानसिकता, विचार और व्यवहार से पता चल सकता है कि वह आधुनिक है या नहीं?

रत्ना पाठक को अतीत में बंधी एक आधुनिक महिला का किरदार निभाने के लिए कई बार प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने वह किरदार भी लौटा दिया. रत्ना ने एक इंटरव्यू में कहा, ”आजकल यह सोचा जाता है कि एक आधुनिक महिला का मतलब है कि वह धूम्रपान करेगी और शराब पीएगी। मैंने ऐसे कई ‘आधुनिक माँ’ पात्रों को देखा है जो बैठे-बैठे धूम्रपान और शराब पीते हैं। इसीलिए मैंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया है।” तो आधुनिकता किससे प्रकट होती है? रत्ना कहती हैं, “आधुनिकता वास्तव में किसी के विचारों में प्रकट होती है। आधुनिकता इस बात से प्रकट होती है कि हम लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। हम क्या खाते हैं या क्या पहनते हैं, ये चीज़ें आधुनिकता का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं।”

उनकी अभिनेत्री पत्नी रत्ना पाठक शाह भी नसीरुद्दीन शाह की तरह ही खुलकर बात करती हैं, मनोरंजन से लेकर दोस्ती तक – उन्हें किसी भी मुद्दे पर बात करने में कोई झिझक नहीं होती। हाल ही में वायरल हुआ एक वीडियो फिर से इसी ओर इशारा करता है। शायद रत्ना को किसी टॉक शो में आमंत्रित किया गया था. वहां उन्होंने ‘आरआरआर’, ‘एनिमल’ से मुंह खोला। साफ ने कहा कि वह संदीप रेड्डी बंगा की ‘एनिमल’ देखने नहीं गए थे। क्योंकि फिल्म का पोस्टर देखकर वह काफी असहज हो गए थे. इतना आतंक था कि वह घबरा गया! इस बारे में उन्होंने कहा, ”पहले साउथ की फिल्मों में सेक्स और हिंसा को अलग तरीके से दिखाया जाता था. वह प्रवृत्ति जारी है. उसी तरह आज भी साउथ के डायरेक्टर सेक्स और हिंसा को अलग तरीके से दिखाते हैं।”

66 वर्षीय अभिनेत्री ने आगे दावा किया कि ये दो तत्व उद्योग की छवि में ऊंचे तार से बंधे हैं। जो उसे पसंद नहीं है. इसलिए भले ही ‘एनिमल’ ब्लॉकबस्टर थी, लेकिन उन्हें फिल्म देखने की जरूरत महसूस नहीं हुई। बातचीत के संदर्भ में, उनके और उनके सह-अभिनेताओं के बीच मतभेद है। मॉडरेटर पूछता है, परेश रावल, अनुपम खेर और अभिनेत्री के राजनीतिक आदर्श और जीवनशैली बिल्कुल मेल नहीं खा सकते हैं। इसके बाद भी उन्हें अपने पेशे की खातिर उनके साथ कई फिल्मों में काम करना पड़ा। क्या कभी इस बारे में बहस हुई है?

इस बार भी एक खरा रत्न. उनका साफ़ जवाब था, ”वे मेरे दोस्त हैं. हमने प्रोफेशनल लाइफ में एक साथ कदम रखा।’ मैं एक साथ बड़ा हुआ हूं. उस दृष्टिकोण से, मतभेद हो सकते हैं। इसका मतलब है कि उसे काटना होगा, मैं इस ट्रेंड में विश्वास नहीं करती।” एक्ट्रेस यहीं नहीं रुकीं। उनकी कड़ी शिकायत यह है कि यह पीढ़ी, हालांकि, इस प्रवृत्ति में विश्वास करती है। अगर वे किसी से सहमत नहीं होते तो उसे रद्द कर देते हैं. उनके शब्दों में, ”मैं 21वीं सदी के इस व्यवहार को कतई स्वीकार नहीं कर सकता. उसे रद्द करने पर सहमत क्यों नहीं? इसलिए अनुपम, परेश मेरे अच्छे दोस्त हैं। विभिन्न मुद्दों पर हजारों मतभेद होने के बावजूद.”

प्रोफेशनल लाइफ हो या पर्सनल लाइफ, रत्ना पाठक शाह कभी भी सार्वजनिक रूप से बोलने से नहीं कतराती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि चंदनतला की नसीरुद्दीन शाह से मुलाकात सहज नहीं थी. पहले भी था वैवाहिक रिश्ता उनके पति पेशे से एक्टर हैं. एक्ट्रेस के माता-पिता अपनी बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित थे. वे जहाज के स्वरूप को लेकर भी संदेह में थे।

“उनके मुस्लिम होने या हमारी उम्र में अंतर होने से कोई समस्या नहीं थी। उसकी पहले भी एक शादी हो चुकी है, उसके बच्चे भी हैं और उसके माता-पिता इस बात को लेकर संशय में थे। उस पर ऐसा चेहरा!” निर्देशक-अभिनेत्री ने कहा। रत्ना ने ये भी कहा कि उस वक्त नसीरुद्दीन को अक्सर शक्ल-सूरत को लेकर बातें सुननी पड़ती थीं. इस लुक के साथ अभिनेता कैसे बनें! एक्टर को अपने परिवार से ऐसे व्यंग्य सुनने पड़े.

अनंत अंबानी-राधिका मर्चेंट की शादी में जस्टिन बीबर ने कितना चार्ज किया?

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अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की प्री-वेडिंग सेरेमनी पिछले चार महीने से चल रही है। पहले जामनगर में, फिर पानी के रास्ते इटली में। इस बार शादी का समय आ गया है. चाहे ऑनलाइन मीडिया हो या बी-टाउन, अब हर जगह एक जैसा ही चलन है!

अनंत और राधिकार 12 जुलाई को एक-दूसरे से हाथ मिलाएंगे। इस बीच, मुकेश की पत्नी नीता अंबानी ने काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर महादेव को शादी का पहला निमंत्रण समर्पित किया। इसके बाद से शादी के निमंत्रणों की डिलीवरी का दौर शुरू हो गया है. बुधवार को विवाह पूर्व ‘मेमारू’ समारोह था। 5 जुलाई को मुंबई में अंबानी परिवार के घर पर संगीत का कार्यक्रम होगा. पॉप स्टार जस्टिन बीबर वहां गाना गाने आ रहे हैं. मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे की शादी में गाने के लिए जस्टिन को कितनी फीस मिल रही है? अंबानी के घर की शादी एक शानदार आयोजन है, वे अरबों रुपये खर्च करते हैं और दुनिया के सभी प्रसिद्ध सितारों को लाते हैं। जामनगर इवेंट में गाना गाने पहुंची रिहाना. मंच पर दलजीत दोसांझ भी नजर आ रहे हैं. इसके बाद उन्होंने इटली में हुए इवेंट में भारी रकम खर्च करके शकीरा, कैटी पेरी, पीट बुल जैसे सितारों को मंच पर लाया। इस बार गाना गाने आ रहे हैं जस्टिन बीबर. वह करीब 83 करोड़ रुपये ले रहे हैं. अनंत की बहन ईशा की शादी में बेयॉन्से गाना गाने पहुंचीं। उस वक्त उन्होंने करीब 33 करोड़ रुपये लिए थे. लेकिन जस्टिन ने सभी सितारों को पीछे छोड़ दिया।

हालांकि प्री-वेडिंग सेरेमनी विदेश में होती है लेकिन पता चला है कि शादी जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में होगी। विवाह दिवस की शुभकामनाएँ। अगले दिन मंगल उत्सव यानी रिसेप्शन पार्टी है. सारी रस्में वहीं होंगी. अनंत-राधिका की प्री-वेडिंग सेरेमनी में मेहमानों को रोटी के साथ सोना खाने की इजाजत दी गई और सभी मेहमानों ने इसे खाया! ये कहा सारा अली खान ने.

जामनगर में मुकेश अंबानी-नीता अंबानी के बेटे अनंत अंबानी के प्री-वेडिंग फंक्शन में सारा अली खान को इनवाइट किया गया था। सारा इस कार्यक्रम में सैफ अली खान, करीना कपूर खान, इब्राहिम, जेह और तैमूर के साथ शामिल हुईं। लेकिन सिर्फ एक फिल्म स्टार के तौर पर नहीं. सारा दरअसल अनंत-राधिका के साथ बड़ी हुई हैं। एक ही स्कूल में पढ़ते हैं इसलिए है एक और रिश्ता हाल ही में एक इंटरव्यू में अनंत-राधिका ने प्री-वेडिंग सेरेमनी के बारे में खुलकर बात की। अनंत अंबानी और उनकी लंबे समय से दोस्त रहीं राधिका मर्चेंट की इस साल मार्च में प्री-वेडिंग सेरेमनी हुई थी। बॉलीवुड सितारे तो मौजूद थे ही, दुनिया भर से कई मशहूर लोग भी मौजूद थे. आलीशान आयोजन में आम लोगों की भी दिलचस्पी कम नहीं है.

मीडिया इंटरव्यू के दौरान सारा से एक बार फिर पूछा गया कि इवेंट में जाकर उन्हें कैसा लग रहा है। इसके जवाब में सारा ने सभी को चौंकाते हुए कहा, ”मेहमानों को रोटी के साथ सोना खाने की इजाजत थी. मेहमानों ने भी इसे खाया. हीरे इधर-उधर बिखरे हुए थे।”

हालाँकि, सारा के हाव-भाव से पता चल रहा था कि वह मज़ाक कर रही थी। बाद में उन्होंने कहा, “यह बहुत अच्छा था, उन्होंने बहुत गर्मजोशी और ईमानदारी से स्वागत किया।” सारा को इवेंट में जाकर क्या पसंद आया? नवाब बारी की बेटी ने कहा, ”मुझे कई चीजें पसंद हैं. सबसे अच्छा तो वह था जब अनंत-राधिका ने कागज पर हस्ताक्षर करने के बाद एक-दूसरे को देखा। इसके अलावा, नीता अंबानी ने जिस तरह से भरतनाट्यम नृत्य किया, उसने शाही नीले रंग का सूट, गले में सफेद दुपट्टा पहने हुए एक भी डांस मिस नहीं किया। चेहरे पर बेतरतीब बाल झड़ रहे हैं. एक नज़र में जॉनी डेप या शाहरुख खान को समझने का कोई तरीका नहीं है! अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की दूसरी प्री-वेडिंग सेरेमनी में ‘किंग खान’ का ये नया लुक देखने को मिला। नई पोशाक में शाहरुख की एक छोटी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ हो गई।

लोकप्रिय हॉलीवुड अभिनेता जॉनी डेप को कई बार इसी लुक में देखा गया है। नेटिज़न्स को लगता है कि जॉनी डेप और शाहरुख में काफी समानताएं हैं। शाहरुख के फैंस उनकी तारीफों से भरे हुए हैं. इस प्रिय अभिनेता की उनके नए लुक के लिए प्रशंसा की गई, लेकिन कई लोगों ने उपहास भी उड़ाया, एक व्यक्ति ने लिखा, “जॉनी डेप बनने की कोशिश कर रहा हूँ!” किसी ने लिखा, “पाकिस्तान के जॉनी डेप!” अनंत-राधिका की प्री-वेडिंग सेरेमनी में शाहरुख की झलक देखकर पहले तो कई लोगों को लगा कि शायद जॉनी डेप ही आए हैं। लेकिन बाद में गलती ने उन्हें तोड़ दिया. शाहरुख के हाथ में कई फिल्में हैं। इनमें ‘किंग’, ‘पठान 2’, ‘जवान’ के सीक्वल शामिल हैं। आने वाली फिल्मों की लिस्ट में ‘किंग’ और ‘टाइगर वर्सेस पठान’ शामिल हैं।

हाल ही में प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कम से कम एक दर्जन जिलाधिकारियों का तबादला किया है।

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भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने खराब नतीजों के लिए असंतुष्ट पार्टी कार्यकर्ताओं, सही उम्मीदवार को टिकट नहीं देने और साथ ही जिला प्रशासन से ‘पर्याप्त’ समर्थन की कमी जैसे मुद्दों को जिम्मेदार ठहराया है। सूत्रों के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ प्रशासन ने हाल ही में उस रिपोर्ट के कारण राज्य के विभिन्न जिलों में कम से कम एक दर्जन जिलाधिकारियों का तबादला कर दिया। गौरतलब है कि बीजेपी उम्मीदवार उन जिलों में लोकसभा चुनाव हार गए जहां के जिलाधिकारी बदल गए हैं.

लोकसभा में बीजेपी को बहुमत से 32 सीटें कम मिलीं. 2019 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 62 सीटें जीतीं. इस बार बीजेपी 33 सीटों पर आ गई. इसका मतलब है कि अगर भाजपा उत्तर प्रदेश में सीटें बरकरार रख सकती है, तो केंद्र में उस अर्थ में उसके पास साझेदार-निर्भरता नहीं होगी। उत्तर प्रदेश में खराब नतीजों के कारणों का पता लगाने के लिए भाजपा ने एक टास्क फोर्स का गठन किया। हाल ही में इनकी रिपोर्ट योगी को सौंपी गई थी. इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य और जिला नेतृत्व की रिपोर्टों को नजरअंदाज करते हुए, ज्यादातर मामलों में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा चुने गए उम्मीदवारों को स्थानीय नेतृत्व का विश्वास नहीं मिला। इसलिए स्थानीय कार्यकर्ता भी बैठ गये.

रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही राज्य में पिछले 7 साल से बीजेपी का शासन है, लेकिन कई मामलों में जिला प्रशासन से जिस तरह की मदद की उम्मीद थी, वह नहीं मिल पाई है. सूत्रों का दावा है कि उस रिपोर्ट के बाद कौशांबी, चित्रकोट, श्रावस्ती, सीतापुर, बस्ती, सहारनपुर, बांदा, मुरादाबाद, सीतापुर, शंभल, कैसरगंज, औरैया के जिला कमिश्नरों को हटा दिया गया था.

रिपोर्ट में पार्टी की प्रचार रणनीति को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। कहा गया है कि अगर बीजेपी को 400 सीटें मिलेंगी तो वह संविधान बदल देगी – विपक्ष का अभियान काफी लोकप्रिय था. संविधान बदला तो आरक्षण नहीं मिलेगा-उसी दुष्प्रचार के चलते दलित समाज ने विकल्प के तौर पर सपा को चुना है. इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य और जिला नेतृत्व की रिपोर्टों को नजरअंदाज करते हुए, ज्यादातर मामलों में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा चुने गए उम्मीदवारों को स्थानीय नेतृत्व का विश्वास नहीं मिला। इसलिए स्थानीय कार्यकर्ता भी बैठ गये.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में हार के पीछे राजपूत-क्षत्रिय समुदाय का गुस्सा एक बड़ा कारण था। जिसके लिए राजकोट से बीजेपी सांसद पुरूषोत्तम रूपाला को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिन्होंने राजपूतों के बारे में विवादित टिप्पणी की है। पूर्वी क्षेत्र में जहां भाजपा ने 2019 में 27 में से 20 सीटें जीती थीं, इस बार वह गिरकर 11 पर आ गईं। हाथरस कांड की ‘असली’ वजह का पता लगाने के लिए प्रतिबद्ध योगी आदित्यनाथ सरकार ने घटना की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग भी बनाया है। इस संबंध में एक जांच कमेटी पहले ही गठित की जा चुकी है. पुलिस भी अपनी तरफ से जांच कर रही है. हालाँकि, नए आयोग को कुछ सवालों के जवाब खोजने का काम सौंपा गया है। वे पता लगाएंगे, हाथोर की घटना महज एक दुर्घटना है? या फिर इसके पीछे कोई गुप्त साजिश है. क्या हाथोर आपदा की योजना ठंडे दिमाग से बनाई गई थी या नहीं।

हाथरस भगदड़ में मरने वालों की संख्या पहले ही 121 हो गई है (पीटीआई ने मृतकों की सूची भी जारी की है)। घटना के बाद से योगी प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं. इसलिए न्यायिक आयोग यह पता लगाएगा कि वास्तव में ‘दोषी’ कौन था।

आयोग के गठन को लेकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल पहले ही बयान जारी कर चुकी हैं. उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हेमंत राव और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी भावेश कुमार सिंह सेवानिवृत्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ब्रिजेश कुमार श्रीवास्तव (द्वितीय) की अध्यक्षता वाले आयोग में होंगे। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में होगा. उन्हें सभी जरूरी सवालों के जवाब ढूंढने होंगे और दो महीने के भीतर योगी सरकार को एक रिपोर्ट सौंपनी होगी। यदि अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो तो इसके लिए शासन की अनुमति प्राप्त की जाये।

आयोग से फिलहाल जिन सवालों के जवाब देने को कहा गया है वे हैं: 1. आयोजक संस्था ने जिला प्रशासन की सभी शर्तों का पालन किया है या नहीं. 2. क्या यह घटना दुर्घटना, साजिश या सुनियोजित अपराध है? 3. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने क्या कदम उठाए? 4. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने क्या कदम उठाए? 5. घटना वास्तव में कैसे घटी?

न्याय संहिता में यौन उत्पीड़न अपराधों को लिंग-निरपेक्ष माना गया है.

नई दिल्ली, 3 जुलाई: नए आपराधिक कानून में बलात्कार को ‘लिंग तटस्थ’ बना दिया गया है। भारतीय दंड संहिता यौन अपराधों के पीड़ितों और अपराधियों के लिंग के खिलाफ भेदभाव नहीं करती है। ऐसे में नाबालिगों के अलावा नाबालिगों के यौन शोषण पर भी सजा की व्यवस्था है. महत्वपूर्ण बदलावों के बावजूद, नया कानून वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं मानता।

भारतीय दंड संहिता की धारा 366ए में ‘नाबालिग’ शब्द का उल्लेख किया गया था। लेकिन भारतीय दंड संहिता में वह शब्द हटा दिया गया है. नए कानून के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियां दोनों ही यौन उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं. अतः भारतीय दण्ड संहिता के अनुच्छेद 96 में ‘नाबालिग’ शब्द के स्थान पर ‘चिशु’ (बालक) शब्द का प्रयोग किया गया है। नाबालिग का यौन शोषण दंडनीय अपराध माना जाता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 366बी को भी भारतीय दंड संहिता में लिंग तटस्थ बनाया गया है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता में ‘नाबालिग को विदेश से लाने का अपराध’ बताया गया था, नए कानून में ‘नाबालिग’ की जगह ‘नाबालिग और नाबालिगों को विदेश से लाना’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है. नए अधिनियम की धारा 141 में कहा गया है कि यदि 21 वर्ष से कम उम्र की लड़की या 18 वर्ष से कम उम्र का लड़का अवैध यौन संबंध के लिए भारत लाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को अपराधी माना जाएगा। नाबालिगों से बलात्कार की सजा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 12 साल से कम, 16 साल से कम और 18 साल की नाबालिगों से बलात्कार के मामले में आरोपी के लिए पीड़िता या पीड़िता की उम्र को ध्यान में रखते हुए सजा का प्रावधान रखा गया है।

न्याय संहिता में एक नया अध्याय भी जोड़ा गया है। इसका शीर्षक है, ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध’। इसके अलावा कानून में नाबालिगों से रेप को लेकर कानून में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है. इसमें कहा गया है कि अपराध की नई परिभाषा में यह प्रावधान किया गया है कि सभी नाबालिग लड़कियों से सामूहिक बलात्कार के लिए मौत या आजीवन कारावास की सजा होगी। भारतीय दंड संहिता में केवल 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार का प्रावधान है। एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले, वैवाहिक संबंधों में बलात्कार का आरोप तभी स्वीकार किया जाता था जब पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम हो। नए कानून में इसे बढ़ाकर 18 कर दिया गया है. हालाँकि, वैवाहिक बलात्कार को अपराध के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। समाचार अभिकर्तत्व। कुछ दिन पहले चंदननगर के एक आश्रम के अध्यक्ष पर वहां रहने वाली कुछ नाबालिग छात्राओं के साथ यौन शोषण करने का आरोप लगा था. परिमल बनर्जी नाम का आरोपी भगोड़ा है. उसे बचाने के लिए गुरुवार की दोपहर तुलकलाम की घटना हो गयी.

उस दिन जब बाल संरक्षण समिति के पदाधिकारी वहां चर्चा करने गए तो माता-पिता और कुछ नाबालिग निवासियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया. आरोप है कि जब पुलिस अधिकारियों को बचाने गई तो नाबालिगों ने उन पर ईंट फेंकना शुरू कर दिया. हालांकि, कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ. अधिकारियों की दो कारों में तोड़फोड़ की गयी. आश्रम के दो कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जवाब में लाठियां चलाईं. पुलिस ने इसे स्वीकार नहीं किया. बाद में और पुलिस बल गया और स्थिति को नियंत्रित किया. अधिकारियों को बचाया गया.

चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट के एक अधिकारी ने बताया कि यौन शोषण की शिकायत के बाद से परिमल का पता नहीं चल पाया है. पुलिस जांच कर रही है. इस दिन बाल संरक्षण समिति की ओर से अभिभावकों को बैठक में बुलाया गया था. वहां अभिभावकों और छात्रों का एक समूह आ गया और विरोध करने लगा. पुलिस समिति पदाधिकारियों के बचाव में गई तो रहवासियों ने घटना को अंजाम दिया। पुलिस अधिकारी ने दावा किया, ”अधिकारियों को बाहर लाया गया है. हालाँकि, लाठीचार्ज नहीं किया गया था। कोई नहीं मारा गया.

पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, उस आश्रम के निवासी और उनके अभिभावक एक तरफ परिमल के पक्ष में हैं. दूसरा पक्ष विरोध में है. इस दिन बाल संरक्षण समिति के पदाधिकारियों ने अभिभावकों को अपने बच्चों को घर वापस ले जाने की सलाह दी. यह सुनकर परिमल के पक्ष में रहने वाले सभी अभिभावकों ने आपत्ति जताई। उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया. इसमें नाबालिग छात्र भी शामिल हैं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि परिमल निर्दोष हैं. फिर स्थिति
यह जटिल है।

शाम को डीसीपी (मुख्यालय) इशानी पाल पहुंचीं. उनके सामने ही रहवासियों ने पुलिस पर उन पर लाठियां बरसाने का आरोप लगाया. पुलिस से बहस होने लगी.

आश्रम की दो महिला कार्यकर्ताओं ने शिकायत की, ”पुलिस ने छोटी बच्चियों पर लाठियां चलाईं. उनका दावा है कि एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाना पड़ा. निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मार दिया गया। पुलिस ने प्रतिवाद किया कि ईंट से कोई घायल हुआ होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि देश ने उन्हें संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी दी है.

यह साबित करने के लिए कि वह संविधान के खिलाफ नहीं हैं, नरेंद्र मोदी ने आज देश भर में ‘गणोत्सव’ आयोजित करके संविधान की 75वीं वर्षगांठ मनाने के अपने फैसले की घोषणा की। मोदी संविधान को बदलना चाहते हैं, जो लोकसभा चुनाव प्रचार में राहुल गांधी समेत विपक्ष का मुख्य हथियार था. इसलिए वह लोकसभा में ‘चर्चो पार’ पर निशाना साध रहे हैं. बीजेपी को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी. लोकसभा में बीजेपी की सीटों की संख्या पिछली बार 303 से घटकर 240 रह गई है.

संविधान पर विपक्ष के आरोप को पलटने की कोशिश में प्रधानमंत्री ने आज संसद में दावा किया कि देश की जनता ने उन्हें वोट देकर संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी दी है. आज उन्होंने कांग्रेस को ‘संविधान विरोधी’ और ‘दलित विरोधी’ करार दिया. राहुल गांधी ने दावा किया कि इस बार का वोट संविधान की रक्षा की लड़ाई है. संविधान की रक्षा के लिए, लोगों ने विपक्ष को अधिक सीटें जीतने के लिए भेजा। आज प्रधानमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, ”आपातकाल के बाद 1977 का वोट संविधान की रक्षा के लिए एक संघर्ष था…और अगर इस बार का वोट संविधान की रक्षा के लिए वोट था, तो देश की जनता ने हमें संविधान की रक्षा के लायक समझा.” संविधान।” …संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर देशभर में होगा ‘गणोत्सव’! ”

प्रधानमंत्री ने आज ‘इंडिया’ मंच पर कांग्रेस के सहयोगी दलों पर ‘अवसरवादी’ होने का आरोप लगाया. इस सप्ताह की शुरुआत में, विपक्ष एकजुट हुआ और मोदी सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को जेल में डालने के लिए ईडी-सीबीआई के इस्तेमाल के खिलाफ संसद में विरोध प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में हुई बहस का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने बुधवार को कहा, ”किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को कानून से छूट नहीं मिलेगी.” ये मोदी की गारंटी है.

लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ताकत बढ़ाते हुए राहुल ने दावा किया कि जनता ने संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष को अधिक सीटें जिताकर संसद में भेजा है. लोकसभा में मोदी के शपथ ग्रहण के दौरान राहुल ने संविधान भी थामा हुआ था। आज, मोदी दावा करते हैं कि उन्होंने ही 29 नवंबर को संविधान दिवस मनाने का फैसला किया था। क्योंकि, 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपनाया था. लेकिन उस वक्त कांग्रेस ने इसका विरोध किया था. प्रधान मंत्री का दावा है कि संविधान उनके लिए लेखों का संकलन नहीं है। रास्ता दिखाने के लिए ‘लाइटहाउस’. लेकिन आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने संविधान पर ही हमला बोल दिया. मोदी ने सोनिया और राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए कहा कि यूपीए काल में सरकार ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलती थी. केंद्रीय कैबिनेट के फैसले की कॉपी फाड़ दी गई है.

प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कहना चाहते थे. लेकिन चूंकि राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बार-बार अनुरोध के बावजूद मौका नहीं दिया, इसलिए कांग्रेस, तृणमूल, वामपंथी और अन्य समूहों सहित विपक्षी खेमा एक साथ ‘वॉकआउट’ कर गया। इससे पहले बीजू जनता दल ने भी वॉकआउट किया. बाद में खड़गे ने शिकायत की कि आरएसएस, जनसंघ, ​​बीजेपी ने हमेशा संविधान का विरोध किया है. अब चुनावों में मार खाने के बाद मोदी संविधान-प्रेमी का चोला पहन रहे हैं।

मोदी आज कांग्रेस, खासकर गांधी परिवार को भी दलित विरोधी साबित करना चाहते हैं. उनके मुताबिक कांग्रेस लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव में असफल रही है. लेकिन उस विफलता के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़ग को दोषी ठहराया जाएगा। जिसकी नाकामी, वो छुप जायेगा. मोदी का इशारा राहुल की तरफ था. उन्होंने आरोप लगाया कि के सुरेश, सुशील कुमार शिंदे और मीरा कुमार जैसे दलित नेताओं को गांधी परिवार ने यह जानते हुए भी मैदान में उतारा था कि वे हाल के स्पीकर चुनाव, उससे पहले क्रमशः उपराष्ट्रपति चुनाव और 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में हार जाएंगे।

विपक्षी गठबंधन में दरार डालने के प्रयास में, मोदी ने लोकसभा में कहा कि कांग्रेस एक परजीवी की तरह है, जो क्षेत्रीय पार्टी के वोटों पर भरोसा करके 99 सीटों तक पहुंच रही है। आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने केवल क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं को ही जेल में डाला। अब हर कोई मोदी सरकार पर ईडी-सीबीआई का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहा है. लेकिन यूपीए काल में मुलायम सिंह यादव, प्रकाश करतारा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए सीबीआई, आयकर विभाग का इस्तेमाल किया. कांग्रेस ने ही आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. अब आम आदमी पार्टी नेता की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने मोदी पर आरोप लगाया है. संसद में लेफ्ट भले ही कांग्रेस का साथी है, लेकिन ‘शहजादा’ ने केरल के मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी की मांग उठाई है. मोदी ने दावा किया, ”जांच एजेंसियों को भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी आजादी दी गई है.” सरकार आंखें नहीं मूंदेगी. मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि संगठनों को ईमानदारी के लिए, ईमानदारी से काम करने दीजिए। तो जयराम रमेश जैसे कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार पर एक तिहाई सरकार कहकर व्यंग्य किया। आज मोदी ने जवाब दिया, ”कांग्रेस नेताओं के चेहरे पर ‘घी-चीनी’ पड़ने दीजिए. सरकार के बीस साल और रहेंगे. साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगले पांच साल में गरीबी उन्मूलन के लिए निर्णायक फैसले होंगे. पिछले दस सालों में देश की जनता ने ‘भूख’ का स्वाद चख लिया है. बार ‘मेन कोर्स’ में आएगा.

पेपर लीक और भारत सरकार के बारे में क्या बोली प्रियंका गांधी?

हाल ही में प्रियंका गांधी ने पेपर लीक और भारत सरकार के बारे में एक बयान दिया है! नीट यूजी 2024 पेपर लीक मामला तूल पकड़ता जा रहा है। देश में कई जगहों पर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने एक्स पर पोस्ट करके केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए लिखा कि भाजपा की सरकार हमारे देश के युवाओं को कुशल और सक्षम बनाने की जगह उन्हें कमजोर बना रही है। उन्होंने एक्स पर लिखा- देश में पिछले 5 सालों में 43 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। भाजपा राज में पेपर लीक हमारे देश की राष्ट्रीय समस्या बन गई है जिसने अब तक करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। सबसे ज्यादा युवा आबादी हमारे पास है। भाजपा की सरकार हमारे इन युवाओं को कुशल और सक्षम बनाने की जगह उन्हें कमजोर बना रही है। करोड़ों होनहार छात्र दिन-रात मेहनत से पढ़ाई करते हैं, अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, माता-पिता, तन-पेट काटकर पढ़ाई का बोझ उठाते हैं। बच्चे सालों तक वैकेंसी आने का इंतजार करते हैं। वैकेंसी आती है तो फॉर्म भरने का खर्चा, परीक्षा देने जाने का खर्चा, और अंत में सारा प्रयत्न भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।

NEET की परीक्षा लीक के बाद NET का पेपर रद्द करने पर भी प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाने पर लिया था। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भाजपा सरकार का लीकतंत्र व लचरतंत्र युवाओं के लिए घातक है। NEET परीक्षा में हुए घपले की खबरों के बाद अब 18 जून को हुई NET की परीक्षा भी गड़बड़ियों की आशंका के चलते रद्द की गई। क्या अब जवाबदेही तय होगी? क्या शिक्षा मंत्री इस लचरतंत्र की जिम्मेदारी लेंगे?

पेपर लीक को लेकर मचे घमासान पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि हमें एक शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा करनी चाहिए। जब मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया तो मुझे बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि इससे 2 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं, हमें इस मुद्दे का समाधान खोजना होगा।जो भी गड़बड़ियां सामने आई हैं मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। सारा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। छात्र देश का भविष्य हैं और हम देश के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आग ने आगे कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देंगे।

यही नहीं एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि नीट का पेपर लीक हुआ है और कुछ लोगों ने हजारों- करोड़ों रुपये कमा लिए। हालांकि इन सबके बीच उन सभी उन सभी छात्रों के सपने बर्बाद हो गए हैं। इसलिए कल विपक्ष की बैठक में मैंने छात्रों के इस मुद्दे को उठाया था और कहा था कि इस पर एक पूरे दिन चर्चा करने की जरूरत है। हम अपने छात्रों की परवाह करते हैं जो हमारे देश का भविष्य हैं। इसके बाद उन्होंने मैसेज में आगे कहा कि सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि हमें एक शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा करनी चाहिए। जब मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया तो मुझे बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि इससे 2 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं, हमें इस मुद्दे का समाधान खोजना होगा। ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री जिन्हें चर्चा का नेतृत्व करना है वो बहस ही नहीं चाहते हैं। हम सरकार से लड़ना नहीं चाहते हैं बस बहस करके अपने विचार रखना चाहते हैं।

इस वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए राहुल गांधी ने लिखा- भारत का विपक्षी गुट NEET परीक्षा और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार के साथ रचनात्मक बहस करना चाहता है, बता रहे हैं अब तक करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। सबसे ज्यादा युवा आबादी हमारे पास है। भाजपा की सरकार हमारे इन युवाओं को कुशल और सक्षम बनाने की जगह उन्हें कमजोर बना रही है। करोड़ों होनहार छात्र दिन-रात मेहनत से पढ़ाई करते हैं, अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, माता-पिता, तन-पेट काटकर पढ़ाई का बोझ उठाते हैं। लेकिन हमें आज संसद में ऐसा करने की अनुमति नहीं दी गई। यह एक गंभीर चिंता है जो पूरे भारत में लाखों परिवारों को परेशान कर रही है। हम प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर बहस करने और छात्रों को वो सम्मान देने का आग्रह करते हैं जिसके वे हकदार हैं।