Saturday, March 14, 2026
Home Blog Page 599

आखिर चीन के साथ किस विदेश नीति पर काम करेगा भारत?

आज हम आपको बताएंगे कि चीन के साथ भारत किस विदेश नीति पर काम करेगा! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के लिए कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में होंगे। पिछले कुछ हफ्तों में भारत-चीन संबंधों को लेकर मिले संकेत मिले-जुले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया द्वारा रणनीति में बदलाव से यह पता चलता है कि चीन के साथ व्यावहारिक सहयोग का रास्ता हो सकता है। चीन के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प को चार साल पूरे हो चुके हैं। इसी घटना के बाद दोनों पक्षों देशों के बीच संबंध खराब हो गए थे। अभी भी सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों ही तरफ से 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपने तीसरे कार्यकाल में चीन के साथ संबंधों को सुधारना सबसे बड़ी चुनौती होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 3-4 मई को दोनों नेता अस्ताना में हो रहे एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल तो होंगे, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या दोनों के बीच मुलाकात होगी या नहीं। पीएम मोदी ने अप्रैल में न्यूजवीक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत के लिए, चीन के साथ संबंध महत्वपूर्ण और सार्थक हैं। मेरा मानना है कि हमें अपनी सीमाओं पर लंबे समय तक चले आ रहे गतिरोध को तत्काल सुलझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर और शांत संबंध सिर्फ हमारे दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए भी जरूरी हैं। मोदी ने कहा था कि मुझे उम्मीद है और भरोसा है कि हम अपनी सीमाओं पर शांति और स्थिरता बहाल करने और बनाए रखने में सक्षम होंगे।

चीन ने भी पीएम मोदी के नजरिए पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध सीमाओं से बढ़कर हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश सीमा विवाद से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए संवाद कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत चीन के साथ मिलकर काम करेगा, द्विपक्षीय संबंधों को एक रणनीतिक ऊंचाई और भविष्य के नजरिए से देखेगा। विश्वास बनाने, संवाद और सहयोग में शामिल रहने, और मतभेदों को उचित रूप से संभालने का प्रयास करेगा ताकि संबंधों को एक स्वस्थ और स्थिर मार्ग पर रखा जा सके।

मई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लद्दाख में भी सीमा विवाद के बीच चीन के साथ बाकी मुद्दों को सुलझाने की उम्मीद जताई। लद्दाख में सीमा गतिरोध के बीच, विदेश मंत्री जयशंकर ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मुख्य रूप से बचे हुए मुद्दे ‘पेट्रोलिंग के अधिकार’ और ‘पेट्रोलिंग की क्षमता से जुड़े हैं। दलाई लामा की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी और शी जिनपिंग चले जाएंगे, यह बात पेलोसी ने कही। चीन को लेकर मोदी के बयान पर जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक व्यापक नजरिया पेश किया है। उन्होंने कहा विवाद अब पेट्रोलिंग के अधिकार और पेट्रोलिंग की क्षमता तक सीमित हो गया है। पहले ये सीमा से पीछे हटने और तनाव कम करने की मांग कर रहा था। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद चीन से सीमा विवाद पर समाधान की उम्मीद जगी है। लेकिन कुछ अन्य घटनाओं ने जटिलताओं को भी उजागर किया।

पहली बात, प्रधानमंत्री और ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेशों का आदान-प्रदान (जिसे सूत्रों ने दोनों नेताओं के बीच पहला सार्वजनिक बातचीत बताया) ने चीन को नाराज कर दिया, जिसे उसने उकसाने के तौर पर देखा। 5 जून को, राष्ट्रपति लाई (जिन्हें विलियम लाई के नाम से भी जाना जाता है) ने मोदी को फिर से सत्ता में लौटने पर बधाई दी, और तेजी से बढ़ती ताइवान-भारत साझेदारी को मजबूत बनाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि में योगदान करने के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की इच्छा जताई। मोदी ने लाई को धन्यवाद दिया और निकट संबंधों और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक और तकनीकी साझेदारी की उम्मीद जताई।

दूसरी बात, अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की, जहां पूर्व हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ने घोषणा की कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता की विरासत हमेशा जीवित रहेगी, जबकि शी जिनपिंग चले जाएंगे और उन्हें किसी भी चीज का श्रेय नहीं दिया जाएगा। एक दिन बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया आई। चीन ने अमेरिका से “तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता देने और ‘तिब्बत की स्वतंत्रता’ का समर्थन नहीं करने” की अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह किया।

भारत और चीन के बीच हालिया घटनाओं को लेकर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है। पहला नजरिया है कि भारत चीन के बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही खुद को मजबूत दिखा रहा है। यह नजरिया प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर के उन इंटरव्यू को आधार बनाता है जिनमें उन्होंने सीमा मुद्दे का समाधान निकालने की इच्छा जताई थी। साथ ही, यह नजरिया ताइवान के साथ भारत के संबंध और दलाई लामा से मुलाकात को चीन को यह संदेश देने के तौर पर देखता है कि भारत इस क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी रिश्ते बनाने में सक्षम है।

क्या चीन को पास रखना हमारी जरूरत है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चीन को पास रखना हमारी जरूरत है या नहीं! वर्ष 2020 से ही चीन से निपटना भारतीय विदेश नीति का सबसे चर्चित विषय रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि विवादों को सुलझाने में बल प्रयोग न करने के मूल सिद्धांत का चीन ने उल्लंघन किया। इस कारण पुराना द्विपक्षीय ढांचा पूरी तरह से टूट गया है। बहस मौजूदा वास्तविकताओं के आधार पर नए संबंध बनाने के तरीके के बारे में है। नया ढांचा उन परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाएगा जो 1990 से बहुत अलग हैं। उस वक्त भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के बीच तुलना हुआ करती थी और उनकी सैन्य क्षमताएं काफी संतुलित थीं। अब चीन का जीडीपी हमसे चार गुना से भी अधिक है और कम से कम कागज पर दोनों सेनाओं की स्थिति एक जैसी नहीं है। न ही यह संभावना है कि भारत अगले 10 वर्षों में इस अंतर को काफी हद तक कम कर पाएगा, यहां तक कि आशावादी विकास अनुमानों के अनुसार भी। कुछ चुनौतियां भारत और चीन दोनों के सामने मुंह बाए खड़ी हैं। लेकिन भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण दोनों देश इनके साझे समाधान के लिए साथ नहीं आ पा रहे हैं। ऊपर से चीन अपना ग्लोबल फुटप्रिंट तेजी से बढ़ा रहा है, इस कारण भारत की उसके साथ प्रतिस्पर्धा ही बढ़ेगी, दोस्ती नहीं।

चीन के दुस्साहस के खिलाफ प्रतिरोध के नजरिए से देखें तो भारत सराहनीय काम कर रहा है। जवानों और साजो-सामान की संख्या में वृद्धि के अलावा रणनीतिक जोखिम के विचार को फिर से परिभाषित किया जा रहा है। तैनाती के पैटर्न में बदलाव किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट संकेत दिया जा सके कि पीएलए जो ग्रे-जोन बनकार युद्ध की रणनीति तैयार करता है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गलवान में चीन ने विश्वासघात किया था, इसलिए अब उसे ही सद्भावना के स्पष्ट और ठोस सबूत देने होंगे। चीन जब तक एलएसी पर अपने रवैये में स्थायी बदलाव नहीं करता है, तब तक उस पर भारत की विश्वास बहाली संभव नहीं है। लेकिन क्या चीन की आक्रामक नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहना ही अपने आप में एक पर्याप्त नीतिगत प्रतिक्रिया है? ध्यान रहे कि शीत युद्ध के चरम पर दोनों महाशक्तियों ने कभी भी राजनीतिक संवाद बंद नहीं किया। परमाणु युद्ध को रोकने के लिए तंत्र बनाए गए, प्रतिस्पर्धा को प्रबंधित करने और आकस्मिक संघर्ष की संभावना को सीमित करने पर आपसी समझ बनाई गई। शीत युद्ध से एक महत्वपूर्ण सबक यह था कि संवाद और मुकाबला साथ-साथ चल रहे थे।

बाली और जोहान्सबर्ग में छोटी सी मुलाकात के सिवा पिछले चार वर्षों में भारत के प्रधानमंत्री और चीन के राष्ट्रपति के बीच कोई प्रत्यक्ष द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है। मार्च 2022 में वांग यी के भारत दौरे के समय विदेश मंत्रियों के बीच एक भी द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई, न ही दोनों पक्षों के रक्षा मंत्री या राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ही मिले। बहुपक्षीय सम्मेलनों में हल्के स्तर की मुलाकातों और बैठकों में उस तरह की चर्चा नहीं हो सकती, जो संबंधों के लिए एक नया ढांचा तैयार करने के लिए आवश्यक होती है। यह सवाल उठाना महत्वपूर्ण है कि क्या 2020 से राजनीतिक संवाद ठहर जाने के बाद चीन ने एलएसी पर अपने लगातार सैन्यीकरण के खिलाफ भारत की आपत्तियों पर कोई ठोस काम किया है? ऐसा लगता तो नहीं है। इसके उलट यही जान पड़ता है कि चीन ने पूरे मोर्चे पर हवाई शक्ति सहित अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाया है। चीन पूर्वी लद्दाख के दो क्षेत्रों में अपनी अग्रिम स्थिति को वापस लेने पर अड़ा हुआ है। दोनों सेनाओं के बीच 20 से अधिक दौर की बातचीत के बावजूद यथास्थिति अभी भी बनी हुई है।

सैन्य संवाद की अपनी सीमाएं हैं। राजनीतिक संवाद के बिना सेना सीमा प्रबंधन का नया ढांचा विकसित नहीं कर सकती। क्या यह संभव नहीं है कि निरंतर राजनीतिक स्तर पर संवाद को रोके रखने से शायद यह सिलसिला खत्म हो जाए? इस नीति का महत्व भारत-चीन संबंधों में असामान्यताओं के कारणों के बारे में नागरिकों के बीच अधिक जागरूकता बढ़ाने में निहित है। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों को चीनी सप्लाई चेन पर पूरी तरह से निर्भरता से मुक्त करने के लिए आर्थिक और खरीद नीतियों को समायोजित करने में भी मदद की। लेकिन यह संभव नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अलग हो जाए। इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे कुछ क्षेत्रों में तालमेल कम नहीं बल्कि बढ़ सकती है। हमारे कुछ बड़े निर्यातक विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स भी चीनी सप्लाई चेन्स पर निर्भर हैं। पीएलआई योजना के तहत भी आयात घटाने का लक्ष्य, सक्षम नीति और प्रोत्साहनों के बावजूद व्यावहारिक धरातल पर खरा नहीं उतर सकता है। हमारे निकटवर्ती देशों के साथ पूर्वानुमानित संबंध अर्थव्यवस्था निर्माण पर प्रयासों को केंद्रित करने में मदद करेंगे। जब राजनीतिक संवाद ठप पड़ जाता है तो इन प्रयासों को पटरी से उतारने की आशंका अधिक होती है।

हमारे दृष्टिकोण से यह हमारी चिंताओं को व्यक्त करने का राजनीतिक मंच प्रदान कर सकता है। साथ ही यह व्यापार के क्षेत्र में चीन के अनुचित व्यवहार पर समाधान तलाशने का भी मंच बन सकता है। कई स्तरों पर साथ-साथ चलने वाली कूटनीति में संवाद भी एक तार्किक कदम है। केवल सरकार ही अंततः यह तय कर सकती है कि सही नीति क्या है। लेकिन इस सवाल पर एक स्वस्थ बहस की अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है क्योंकि विदेश नीति में जनता की भागीदारी उन नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है जो भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की आकांक्षा रखते हैं।

आखिर कौन होंगे भारत के नए विदेश सचिव?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत के नए विदेश सचिव आखिर कौन होंगे! मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में देश को नया विदेश सचिव भी मिल गया है। दरअसल आज सरकार ने देश के डिप्टी NSA विक्रम मिस्री को अगला विदेश सचिव बनाने का ऐलान किया है। कार्मिक मंत्रालय ने उनके नियुक्ति का आदेश जारी करते हुए बताया कि 15 जुलाई से विक्रम मिस्त्री देश के विदेश सचिव होंगे। बता दें अभी देश के विदेश सचिव के पद पर विनय मोहन क्वात्रा हैं। हालांकि उनका कार्यकाल इस साल 30 अप्रैल को ही खत्म हो गया था लेकिन पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनका कार्यकाल 6 महीने के लिए बढ़ा दिया था। बता दें कि विनय मोहन क्वात्रा ने साल 2022 में विदेश सचिव का कार्यकाल संभाला था। बता दें कि केंद्र सरकार ने उन्हें साल 2018 के आखिरी महीने में चीन में भारतीय राजदूत के तौर नियुक्त किया था। देश के नए विदेश सचिव का ने देश के लिए कई महत्वपूर्ण मिशनों में काम किया है। जिनमें यूरोप, अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में विभिन्न भारतीय मिशन शामिल थे। साल 2020 में जून में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान विक्रम मिस्री ने दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत में हिस्सा लिया था। कार्मिक मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में डिप्टी NSA विक्रम मिस्री की विदेश सचिव के पद पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही डिप्टी NSA के रूप में विक्रम मिस्री के कार्यकाल को भी कम करने को मंजूरी दे दी।

विदेश सचिव भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का शीर्ष अधिकारी होता है। यह एक महत्वपूर्ण पद है और विदेश सचिव भारत की विदेश नीतियों को बनाने महत्वपूर्ण भूमिका होती है।विदेश सचिव प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोत्तम रूप से कैसे बढ़ावा दिया जाए, इस पर रणनीति तैयार की जा सके। विदेश सचिव बनने के लिए एक IFS अधिकारी को विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति में गहरा ज्ञान होना चाहिए।

देश के नए विदेश सचिव की घोषणा हो गई है। सरकार ने डिप्टी NSA विक्रम मिस्री को देश का अगला विदेश सचिव बनाने की घोषणा की है। मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश के अनुसार विक्रम मिस्री 15 जुलाई से अपना कार्यभार संभालेंगे। अभी विदेश सचिव के पद पर विनय मोहन क्वात्रा हैं। जिसका कार्यकाल इसी साल 30 अप्रैल को खत्म हो गया था लेकिन सरकार ने उनका कार्यकाल 6 महीने के लिए बढ़ा दिया था। विक्रम मिस्री का जन्म 7 अप्रैल 1964 को जम्मू कश्मीर में हुआ था। उन्होंने सिंधिया स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की और ग्रेजुएशन दिल्ली के हिंदू कॉलेज से पूरा किया। उसके बाद उन्होंने एमबीए भी किया। हालांकि उसके बाद विक्रम मिस्री ने सिविल परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और परीक्षा पास करके IFS अधिकारी बन गए। बता दें कि विक्रम मिस्री 1989 बैच के IFS अधिकारी हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी से लेकर डायरेक्टर तक के पद पर काम कर किया है।

देश के नए विदेश सचिव तीन प्रधानमंत्रियों के निजी सचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 1997 से मार्च 1998 तक इंद्र कुमार गुजराल, अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक मनमोहन सिंह और मई 2014 से जुलाई 2014 तक पीएम नरेंद्र के निजी सचिव रहे थे। विक्रम मिस्री को चीन के मामलों का जानकार भी बताया जाता है। केंद्र सरकार ने उन्हें साल 2018 के आखिरी महीने में चीन में भारतीय राजदूत के तौर नियुक्त किया था। देश के नए विदेश सचिव का ने देश के लिए कई महत्वपूर्ण मिशनों में काम किया है। जिनमें यूरोप, अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में विभिन्न भारतीय मिशन शामिल थे। साल 2020 में जून में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान विक्रम मिस्री ने दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत में हिस्सा लिया था।

विदेश सचिव प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोत्तम रूप से कैसे बढ़ावा दिया जाए, इस पर रणनीति तैयार की जा सके। विदेश सचिव बनने के लिए एक IFS अधिकारी को विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति में गहरा ज्ञान होना चाहिए।इसके साथ ही विक्रम मिस्री यूरोप, अफ्रीका, एशिया और उत्तर अमेरिका सहित भारत के कई दूतावासों में सेवाएं दी हैं।

जब आईजीआई एयरपोर्ट की छत भड़बड़ा कर गिरी?

हाल ही में आईजीआई एयरपोर्ट की छत भड़बड़ा कर गिर चुकी है! दिल्ली में मॉनसून की पहली बारिश राजधानी के लोगों के लिए आफत बन गई है। पहली ही बारिश की वजह से जहां कई जगहों पर जलभराव हुआ तो वहीं दिल्ली के टर्मिनल-1 पर बड़ा हादसा हो गया। जिसमें एक शख्स की मौत भी हो गई और कई लोग घायल हो गए। टर्मिनल-1 पर छज्जा गिरने पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि एयरपोर्ट के छत का जो हिस्सा गिरा है उसका उद्घाटन पीएम मोदी ने 10 मार्च को किया था। हालांकि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मल्लिकार्जुन खरगे के इस दावे को खारिज कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने हादसे वाली जगह का दौरा करने के बाद कहा कि एयरपोर्ट के छत का जो हिस्सा गिरा है वो 2009 में बने छत का हिस्सा है। इसका उद्घाटन पीएम मोदी ने नहीं किया था। मंत्री ने आगे कहा कि हम इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन की गई इमारत दूसरी तरफ है और यहां जो इमारत गिरी है वह एक पुरानी इमारत है और 2009 में इसका उद्घाटन किया गया था। जीएमआर ने इस काम का ठेका निजी ठेकेदारों को दिया था। इस तरह से पूरे दिन एयरपोर्ट की छत गिरने पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सोशल मीडिया वॉर चलती रही। आइए आपको दिखाते हैं कि किसने क्या आरोप- प्रत्यारोप लगाए हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दिल्ली एयरपोर्ट पर हुए हादसे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मार्च में प्रधानमंत्री जी ने दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल-1 का उद्घाटन किया था आज उसकी छत ढह गई जिसमें एक कैब ड्राइवर की दुखद मृत्यु हो गई। तीन महीने पहले प्रधानमंत्री जी ने जिस जबलपुर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था उसकी भी छत ढह गई। अयोध्या में निर्माण कार्यों के खस्ताहाल पर पूरा देश दुखी है। यह भाजपा का चंदा लो और धंधा दो का भ्रष्टाचारी मॉडल है जिससे अब पर्दा उठ चुका है। सवाल यह है कि प्रधान उद्घाटन मंत्री जी क्या इन घटिया निर्माण कार्यों और इस भ्रष्टाचारी मॉडल की जिम्मेदारी लेंगे?

इतना ही नहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा-भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों में ताश के पत्तों की तरह ढहने वाले घटिया बुनियादी ढांचे के लिए जिम्मेदार हैं। दिल्ली एयरपोर्ट (T1) की छत का गिरना, जबलपुर एयरपोर्ट की छत का गिरना, अयोध्या की नई सड़कों की खस्ता हालत, राम मंदिर में रिसाव, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक रोड में दरारें, 2023 और 2024 में बिहार में 13 नए पुल गिरना, प्रगति मैदान सुरंग का जलमग्न होना, गुजरात में मोरबी पुल का ढहना त्रासदी कुछ ऐसे स्पष्ट उदाहरण हैं जो मोदी जी और भाजपा के विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने के बड़े दावों की पोल खोलते हैं। 10 मार्च को जब मोदी जी ने दिल्ली एयरपोर्ट T1 का उद्घाटन किया, तो उन्होंने खुद को दूसरी मिट्टी का इंसान कहा। इसके बाद पार्टी के अध्यक्ष ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते लिखा कि दिल्ली एयरपोर्ट त्रासदी के पीड़ितों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदना। उन्होंने एक भ्रष्ट, अयोग्य और स्वार्थी सरकार का खामियाजा भुगता है।

वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए एक्स पर लिखा कि दिल्ली एयरपोर्ट टर्मिनल-1, जिसका उद्घाटन मार्च में प्रधानमंत्री ने किया था, आज इसकी छत गिर गई, जिसमें एक कैब ड्राइवर की दुखद मौत हो गई। जबलपुर एयरपोर्ट की छत, जिसका उद्घाटन तीन महीने पहले प्रधानमंत्री ने किया था वो भी गिर गई। अयोध्या में निर्माण कार्य की खराब स्थिति से पूरा देश दुखी है। उन्होंने पीएम से जिम्मेदारी लेने के लिए भी सवाल किया और कहा कि यह भाजपा का दान लो और व्यापार दो का भ्रष्ट मॉडल है, जो अब उजागर हो गया है। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री इन घटिया निर्माण कार्यों और इस भ्रष्ट मॉडल की जिम्मेदारी लेंगे?

कांग्रेस के कई नेताओ के ट्वीट पर बीजेपी नेताओं ने भी जमकर पलटवार किया। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान जिसने भी सबसे बड़ी रिश्वत भेजी, उसे ठेके दे दिए गए। टी1 का जो हिस्सा ढह गया, उसे 2009 में खोला गया था जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सत्ता में थी। उन दिनों गुणवत्ता जांच की कोई अवधारणा नहीं थी और जिसने भी सत्तारूढ़ कांग्रेस को सबसे बड़ी रिश्वत भेजी, उसे ठेके दे दिए गए। उन्होंने आगे लिखा कि सोनिया गांधी, जो उस समय सुपर पीएम थीं, को जवाब देना चाहिए।

दिल्ली एयरपोर्ट पर शुक्रवार सुबह हादसे में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। साथ ही दिल्ली एयरपोर्ट ने कहा है कि सभी घायलों को तीन-तीन लाख रुपए का मुआवजा दिया जायगा। भारी बारिश के बाद शुक्रवार को एयरपोर्ट के टर्मिनल वन पर छत गिरने से हुए हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। दिल्ली एयरपोर्ट ने एक्स पर कहा है कि टर्मिनल वन की सभी फ्लाइट रात 11 बजे तक टर्मिनल दो और तीन से जाएंगी और लैंड करेगी।

जब संसद में हुई सांसद बेहोश!

हाल ही में संसद में एक सांसद बेहोश हो गई है! विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में शुक्रवार को एक सदस्य के बेहोश होने और उन्हें अस्पताल ले जाने के बाद भी सदन की कार्यवाही जारी रखने पर आपत्ति जताते हुए सरकार की आलोचना की। विपक्षी सांसदों ने सरकार पर सदस्य के प्रति उदासीनता दिखाने का आरोप लगाया। उच्च सदन में यह घटना उस समय हुई जब नीट-यूजी मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बीच छत्तीसगढ़ से कांग्रेस सदस्य फूलो देवी नेताम अचानक बेहोश हो गईं और उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी दलों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। बाद में सभापति धनखड़ ने सदन को बताया कि उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। सभापति ने कहा, ‘मुझे अस्पताल से जानकारी मिली है। डॉक्टरों के अनुसार, वह ठीक हो रही हैं और वह विभिन्न जांच के लिए दो-तीन घंटे तक वहां रहेंगी। राज्यसभा के अधिकारी भी वहां हैं…।’ भोजनावकाश के बाद बैठक शुरू होने पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा हो रही थी और भाजपा की कविता पाटीदार अपनी बात रख रही थीं। इसी दौरान नेताम अचानक बेहोश होकर गिर गईं। इसके बाद सभापति ने दोपहर दो बज कर करीब बीस मिनट पर बैठक को दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

दोपहर ढाई बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने सदन को बताया कि फूलो देवी नेताम को ब्लड प्रेशर की शिकायत है। इस पर सभापति धनखड़ ने कहा, ‘मैंने सभी कदम उठाए हैं, सदन का कामकाज स्थगित किया है। सभी व्यवस्थाएं की गई हैं और यही किया जा सकता था। सभी चीजों का ध्यान रखा जा रहा है।’ राज्यसभा सदस्यों के अनुसार, नेताम का ब्लड प्रेशन 214/140 तक बढ़ गया था, जिसे डॉक्टर ने खतरनाक बताया। उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया और ‘आईसीयू’ में भर्ती कराया गया।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने बाद में नेताम से अस्पताल में मुलाकात की और कहा कि उनकी तबियत ठीक हो रही है। खरगे ने सांसदों का सम्मान नहीं करने के लिए सरकार की आलोचना की और इस रवैये की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘इस सरकार और संसद, खासकर राज्यसभा से करुणा की बात करें… लोगों के लिए कोई करुणा नहीं है। उन्होंने सदन की कार्यवाही जारी रखी, वे यह देखने नहीं आए कि क्या हुआ।’ खरगे ने कहा, ‘हम भी सदन चलाना चाहते हैं, लेकिन उनका तरीका क्या है… एक सदस्य बेहोश हो गईं, उन्होंने यह भी नहीं देखा कि क्या हो रहा है। उन्होंने सदन को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया और घटना पर कोई चिंता व्यक्त नहीं की।’ उन्होंने कहा, ‘सदस्यों के साथ ऐसा आचरण नहीं किया जाना चाहिए, उन्हें जो सम्मान दिया जाना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है और मैं इस रवैये की निंदा करता हूं।’ खरगे बताया कि नेताम को आईसीयू में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह जांचने के लिए सीटी स्कैन किया गया कि मस्तिष्क प्रभावित हुआ है या नहीं और उनकी कुछ और जांच की जाएगी।

कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि नेताम सदन में विरोध करते समय बेहोश हो गई थीं और उन्होंने एक सदस्य को अस्पताल ले जाने के बाद भी सदन की कार्यवाही जारी रखने के लिए राज्यसभा के सभापति की आलोचना की। चौधरी ने कहा, ‘एक सांसद बेहोश हो गईं, संसद के डॉक्टर ने देखा कि उसका रक्तचाप खतरनाक स्तर पर था। कुछ सांसद उनकी देखभाल के लिए अस्पताल जा रहे थे लेकिन सदन चलता रहेगा… एक व्यक्ति, एक संसद सदस्य, एक महिला के जीवन का कोई मूल्य नहीं है।’

डीएमके नेता तिरुचि शिवा ने कहा कि उन्हें वॉकआउट के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा, ‘हमने नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिया… लेकिन उन्होंने इसकी अनुमति नहीं दी। विपक्षी दल नारे लगा रहे थे, जो असामान्य बात नहीं है। सत्ता पक्ष ने उस पर ध्यान नहीं दिया। अचानक फूलो देवी बेहोश हो गईं, उसके बाद भी वे बहस जारी रख रहे हैं।’ तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने कहा कि नेताम के बेहोश होने पर सरकार की ओर से कोई चिंता नहीं थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने कहा कि वह नेताम के साथ एम्बुलेंस में थीं और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है।

आखिर क्या रहे दिल्ली नोएडा में मौसम के मिजाज?

आज हम आपको बताएंगे कि दिल्ली नोएडा में मौसम के मिजाज आखिर क्या रहे हैं! राजधानी दिल्ली में मॉनसून ने एंट्री ले ली है। पहली ही बारिश में दिल्ली पानी-पानी हो गई। शुक्रवार को जगह-जगह जलभराव हो गया। अभी भी कई जगहों पर जलभराव की स्थिति है। वहीं मौसम विभाग ने आज भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। दिल्ली के अलावा पूरे एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, यूपी, बिहार, झारखंड समेत देश के कई राज्यों में बारिश के आसार हैं। देश के ज्यादातर इलाकों में मॉनसून अपना असर दिखा रहा है। बारिश के चलते लोगों को भीषण गर्मी से भी राहत मिली है। दिल्ली में शुक्रवार को मॉनसून के पहले दिन लगातार तीन घंटे तक बारिश हुई जो पिछले 88 सालों में इस महीने हुयी सर्वााधिक वर्षा है। बारिश के कारण दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 की छत का एक हिस्सा ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि उड़ानों का संचालन निलंबित कर दिया गया। बता दें कि मौसम विभाग ने 29 और 30 जून को कम दबाव के प्रभाव से राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के साथ व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान जताया है। पिछले 24 घंटों के दौरान झारखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई जिसमें पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी में सबसे अधिक 32.4 मिमी बारिश हुई। राजधानी के कई हिस्से जलमग्न हो गए। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1936 के बाद शहर में पिछले 88 वर्षों में जून में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है, और 1901 से 2024 की अवधि में यह दूसरी सबसे अधिक बरसात है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक दिल्ली में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।मानसून पहुंचने में पांच दिनों की देरी हुई है। विभाग ने शनिवार और रविवार के वास्ते चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों के लिए ‘ओरेंज’ चेतावनी जारी की। पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को घने बादल छाए रहेंगे। मध्यम से तेज बारिश की संभावना है। बारिश के साथ आंधी भी आ सकती है।

राजस्थान में मॉनसून लगातार आगे बढ़ रहा है जहां बीते चौबीस घंटे में कई जगह मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई जगह भारी से अति भारी बारिश होने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने राजस्थान के कुछ भागों में 29 जून से दो जुलाई के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अनुसार भरतपुर, जयपुर संभाग के कुछ भागों में 29 जून से दो जुलाई के दौरान कहीं-कहीं भारी व कहीं-कहीं अति भारी बारिश होने की संभावना है।

पूरे झारखंड को मॉनसून ने कवर कर लिया है। हालांकि राज्य में 69 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड के पांच जिलों में 80 प्रतिशत कम बारिश हुई है। राज्य में मॉनसून 21 जून को सामान्य से 11 दिन की देरी से आया था। मौसम विभाग ने 29 और 30 जून को कम दबाव के प्रभाव से राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के साथ व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान जताया है। पिछले 24 घंटों के दौरान झारखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई जिसमें पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी में सबसे अधिक 32.4 मिमी बारिश हुई। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी अभिषेक आनंद ने कहा कि हम कम शनिवार और रविवार को पूरे झारखंड में व्यापक वर्षा होने की उम्मीद कर रहे हैं। इससे जून महीने में हुई बारिश की कमी का अंतर कुछ कम हो सकता है।

हिमाचल प्रदेश में शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार को भारी वर्षा हुई तथा मौसम विभाग ने सप्ताहांत को राज्य के 12 में से सात जिलों में अलग-अलग स्थानों पर ‘भारी वर्षा’ होने, गरज के साथ बौछारें पडने और बिजली गिरने का संकेत देते हुए ‘ओरेंज’ चेतावनी जारी की। मौसम विभाग ने एक और दो जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने, गरज के साथ बौछारें पड़ने, बिजली गिरने की ‘येलो’ चेतावनी भी जारी की तथा चार जुलाई तक राज्य में वर्षा होते रहने का अनुमान लगाया। मौसम विभाग ने राजस्थान के कुछ भागों में 29 जून से दो जुलाई के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अनुसार भरतपुर, जयपुर संभाग के कुछ भागों में 29 जून से दो जुलाई के दौरान कहीं-कहीं भारी व कहीं-कहीं अति भारी बारिश होने की संभावना है।दक्षिण पश्चिम मानसून बृहस्पतिवार को हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में पहुंचा। वैसे मानसून पहुंचने में पांच दिनों की देरी हुई है। विभाग ने शनिवार और रविवार के वास्ते चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों के लिए ‘ओरेंज’ चेतावनी जारी की।

जब तीन नए कानून को कोर्ट में दी गई चुनौती !

हाल ही में तीन नए कानून को कोर्ट में चुनौती दी गई है! केंद्र सरकार के तीनों नए क्रिमिनल लॉ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने इसके अमल पर रोक की मांग की है और अनुरोध किया है कि एक्सपर्ट कमिटी का गठन करके कानून की व्यवहारिकता परखें। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रेकॉर्ड कंवर सिद्धार्थ की ओर से अर्जी दाखिल की गई है। तीनों कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता एक जुलाई से आईपीसी, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे। केंद्र सरकार ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर रखा है। अंजली पटेल और छाया मिश्रा की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि नए कानूनों का टाइटल ठीक नहीं है।इसी तरह एक अन्य याचिका केरल हाई कोर्ट में एडवोकेट पीवी जीवेश की ओर से दाखिल कर हिंदी और संस्कृत शब्दावली पर ऐतराज जताया था। सुप्रीम कोर्ट से मामले में याचियों को राहत नहीं मिली है ऐसे में नई अर्जी पर याची को सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मिलेगी? यह सवाल कायम है। जो टाइटल रखा गया है, उसके हिसाब से विधान की व्याख्या नहीं है और न ही वह उद्देश्य पूरा कर रहा है। नए कानून का जो नाम है वह स्पष्ट नहीं है, साथ ही कानून की धाराओं में कई विरोधाभास हैं। याचिका में कहा गया है कि जहां तक भारतीय न्याय संहिता का सवाल है तो इसमें ज्यादातर धाराएं आईपीसी की तरह ही रखी गई हैं। साथ ही भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस में संगठित अपराध को भी शामिल किया गया है, जिसमें वाहन चोरी, जेबतरासी, परीक्षा के क्वेश्चन पेपर की बिक्री और अन्य तरह के संगठित अपराध को शामिल किया गया है।

संगठित अपराध की परिभाषा में कहा गया है कि अगर संगठित गिरोह की हरकत से नागरिकों में यह आमतौर पर फीलिंग हो कि उन्हें असुरक्षा हो रही है तो यह अपराध बनेगा। असुरक्षा की भावना वाली बात स्पष्टता के साथ परिभाषित नहीं है। साथ ही कहा गया है कि भारतीय न्याय संहिता में गैंग को परिभाषित नहीं किया गया है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि किसी भी अपराध के मामले में 15 दिन के पुलिस रिमांड लिए जाने का प्रावधान है और यह गिरफ्तारी के 40 दिन या 60 दिन के दौरान कभी भी लिया जा सकेगा। इस तरह से यह प्रावधान एक तरह से इस दौरान जमानत के प्रावधान को प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि मौजूदा प्रावधान यह है कि गिरफ्तारी के 15 दिनों के भीतर ही रिमांड लिया जा सकता है।गौरतलब है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागिरक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से लागू होने जा रहा है। भारतीय न्याय संहिता में 357 धाराएं हैं। पुराने औपनिवेशिक काल के कई शब्दावली को हटा दिया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत तमाम कानूनी प्रावधान किए गए हैं।

तीनों नए कानून को लागू किए जाने से ठीक पहले इसे फिर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। हालांकि इससे पहले भी इस कानून को अलग-अलग आधार पर चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं दी थी। 20 फरवरी को उस याचिका को खारिज कर दिया गया था, जिसमें नए क्रिमिनल लॉ को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने राहत देने से मना किया था और कहा था कि कानून अभी अमल में नहीं है। बता दें कि भारतीय न्याय संहिता में गैंग को परिभाषित नहीं किया गया है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि किसी भी अपराध के मामले में 15 दिन के पुलिस रिमांड लिए जाने का प्रावधान है और यह गिरफ्तारी के 40 दिन या 60 दिन के दौरान कभी भी लिया जा सकेगा। इस तरह से यह प्रावधान एक तरह से इस दौरान जमानत के प्रावधान को प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि मौजूदा प्रावधान यह है कि गिरफ्तारी के 15 दिनों के भीतर ही रिमांड लिया जा सकता है। वहीं 20 मई को भी सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी खारिज की थी। इसी तरह एक अन्य याचिका केरल हाई कोर्ट में एडवोकेट पीवी जीवेश की ओर से दाखिल कर हिंदी और संस्कृत शब्दावली पर ऐतराज जताया था। सुप्रीम कोर्ट से मामले में याचियों को राहत नहीं मिली है ऐसे में नई अर्जी पर याची को सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मिलेगी? यह सवाल कायम है।

अजगर का एक और हमला, सांप के पेट से महिला का शव बरामद, एक महीने में दूसरी घटना

0

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना मध्य इंडोनेशिया के दक्षिण सुलावेसी प्रांत के सितेबा गांव में हुई. सिरियाती नाम की छत्तीस वर्षीय महिला मंगलवार से लापता थी. इंडोनेशिया में एक बार फिर अजगर के पेट के अंदर से एक महिला का शव बरामद होने से सनसनी फैल गई. स्थानीय प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को सांप का पेट काटकर महिला का शव बरामद किया गया. एक महीने में यह दूसरी घटना है जिससे निवासियों में भय व्याप्त हो गया है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना मध्य इंडोनेशिया के दक्षिण सुलावेसी प्रांत के सितेबा गांव में हुई. सिरियाती नाम की छत्तीस वर्षीय महिला मंगलवार से लापता थी. वह सुबह अपने बीमार बच्चे के लिए दवा खरीदने निकला और गायब हो गया। दोपहर बाद जब वह वापस नहीं लौटा तो परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। सिरियाती के पति एडियांसा ने दावा किया कि उनकी पत्नी की चप्पलें और कपड़े घर से 500 मीटर दूर पड़े मिले थे. इसके बाद उन्हें शक हुआ. महिला के पति ने भी बताया कि जंगल में घुसते वक्त उन्होंने 10 मीटर अंदर एक अजगर को देखा. सांप का पेट बहुत सूजा हुआ था. इसके बाद उन्होंने गांववालों को बुलाया. सांप को पकड़ लिया गया और उसका पेट काट दिया गया। फिर महिला का शव उसके पेट के अंदर से बरामद किया गया. पिछले महीने ही दक्षिण सुलावेसी में एक महिला का शव अजगर के पेट से मिला था। उस घटना के तुरंत बाद एक महिला का शव बरामद होने से फिर से दहशत फैल गई.

तीन दिन तक लापता रहने के बाद आखिरकार एक महिला का शव अजगर के पेट के अंदर से बरामद हुआ। इस घटना में हल्सथुल गिर गया है. स्थानीय निवासी दहशत में हैं. घटना मध्य इंडोनेशिया की है. स्थानीय लोगों ने शनिवार को महिला का शव बरामद किया.

यह भयावह घटना दक्षिण सुलावेसी प्रांत के कलेमपांग गांव में हुई। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि महिला का शव 16 फुट के अजगर के पेट से बरामद हुआ है. मृतक का नाम फरीदा है. ग्राम प्रधान सुआर्डी रोसी ने एएफपी को बताया कि महिला गुरुवार रात से लापता थी। जब वह रात को नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू हुई। शुक्रवार को दिनभर तलाश जारी रही। अंतत: पुलिस में गुमशुदगी की डायरी भी दर्ज करायी गयी. ग्राम प्रधान सुवर्दी ने बताया कि शनिवार की सुबह स्थानीय लोगों ने फरीदा का कुछ सामान घर से कुछ दूरी पर जंगल में पड़ा देखा. तभी उन्हें शक हुआ. जैसे ही वे जंगल में दाखिल हुए, उन्हें अजगर दिखाई दिया। वह हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं था। ग्रामीणों का शक और मजबूत हो गया। क्योंकि इस तरह की घटना पहले भी सुलायेसी प्रांत में हो चुकी है. इसके बाद गांव वालों ने अजगर का पेट काटने का फैसला किया. सुवर्दी ने दावा किया कि जब अजगर का पेट काटा गया तो फरीदा का शरीर बाहर आया।

वन विभाग के मुताबिक ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं. हालाँकि, हाल के दिनों में इंडोनेशिया में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं। पिछले साल सुलायेसी के तिनंगिया जिले में एक किसान का शव अजगर के पेट से बरामद किया गया था. 2018 में, दक्षिणपूर्व सुलावेसी के मुना शहर में एक महिला का शव अजगर के पेट से बरामद किया गया था।

पत्नी को अजगर ने काट लिया था. देखते ही देखते युवक ने अजगर को पकड़ लिया और बोरे में भर लिया. यह अंत नहीं है! उसने तुरंत अपनी पत्नी और अजगर को एक बोरे में डाला और अस्पताल ले गया। अस्पताल के आपातकालीन विभाग में युवक के बोरे से अजगर को देखकर भीड़ लग गई। ऐसा ही एक वाकया उत्तर प्रदेश के उन्नाव के जिला अस्पताल में हुआ. घटना का खुलासा सोमवार को हुआ.

उस युवक का नाम नरेंद्र है. वह उन्नाव का रहने वाला है. बीते शनिवार की रात उसकी पत्नी कुसुम को अजगर ने काट लिया। कुसुम उस समय घर का काम कर रही थी. पत्नी की चीख सुनकर परिवार के बाकी लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद युवक ने अजगर को पकड़कर बोरे में डाल लिया. इसके बाद वह तुरंत अपनी पत्नी और अजगर को लेकर अस्पताल गया। अस्पताल के आपातकालीन विभाग के डॉक्टर तुषार चौरसिया ने जब युवक से पूछा कि उसकी पत्नी को किस सांप ने काटा है, तो उसने बोरा खोलकर अजगर दिखाया. अस्पताल में अजगर देखने के बाद डॉक्टरों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. युवक की पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनका इलाज चल रहा है.

डॉक्टरों ने बताया कि अजगर जहरीला नहीं है. फिलहाल युवक की पत्नी स्वस्थ है. बाद में युवक ने अजगर को जंगल में छोड़ दिया।

रोहित की वापसी पर विवाद, विराट ने यात्रियों को प्लेन से क्यों उतारा?

0

विश्व कप विजेता भारतीय टीम को लेकर एक चार्टर्ड विमान देश के लिए रवाना हो गया है. इससे एक नई जटिलता पैदा हो गई है. विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइन को एक पत्र भेजा है. यह क्या कहता है? टी20 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम को लेकर एक चार्टर्ड विमान देश के लिए रवाना हो चुका है. उस विमान को लेकर नई जटिलताएँ पैदा हो गईं। विमानन नियामक डीजीसीए ने एयर इंडिया को एक पत्र भेजा है. उनका दावा है कि यात्रियों को अमेरिका में बेसहारा छोड़कर भारतीय टीम को लाने के लिए विमान बारबाडोस भेजा गया था.

एयर इंडिया की वेस्ट इंडीज के किसी भी देश से भारत के लिए सीधी उड़ान नहीं है। इसलिए वहां से फ्लाइट का इंतजाम करना संभव नहीं था. बारबाडोस से रोहित, कोहली को वापस लाने वाली फ्लाइट को नेवार्क से दिल्ली आना था। न्यूआर्क अमेरिका के न्यू जर्सी में एक शहर है। विमान को दिल्ली की बजाय बारबाडोस भेजा गया. जो यात्री इस फ्लाइट से भारत आने वाले थे, उन्हें कंपनी की दूसरी फ्लाइट में बिठाया गया। AIC24WC को नेवार्क से बारबाडोस तक निकाला गया। संबंधित क्षेत्रों में एयर इंडिया के अतिरिक्त विमानों की कमी के कारण कुछ उड़ान कार्यक्रमों में बदलाव किया गया है।

डीजीसीए ने दावा किया कि जो यात्री नेवार्क से दिल्ली लौटने वाले थे, उन्हें असहाय हालत में छोड़कर बारबाडोस भेज दिया गया. एयरलाइन ने दावा किया कि यात्रियों को उड़ान रद्द होने के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था। लेकिन कुछ लोगों को यह नहीं पता था. वे तय समय पर एयरपोर्ट पहुंच गये. वे नेवार्क से सड़क मार्ग से न्यूयॉर्क पहुंचे और उन्हें एयर इंडिया की दूसरी उड़ान से ले जाया गया। डीजीसीए इस अव्यवस्था से खुश नहीं है. माफी मांगी गई है कि यात्रियों के साथ ऐसा क्यों किया गया. हालांकि इससे पहले एयर इंडिया के अधिकारियों ने असुविधा के लिए विमान के मूल यात्रियों से माफी मांगी. संगठन ने बताया, ”यात्रियों को धन्यवाद. उन्होंने अपनी कठिनाइयों के बावजूद विमान को खाली कराने में कोई आपत्ति नहीं जताई। विश्व विजेताओं की देश वापसी की व्यवस्था में सभी ने हमारा सहयोग किया। वे भी चाहते हैं कि हमारे विश्व विजेता क्रिकेटर सुरक्षित घर लौट आएं।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने वेस्टइंडीज के बारबाडोस में फंसे भारतीय क्रिकेटरों, बोर्ड अधिकारियों और भारतीय पत्रकारों को वापस लाने के लिए विशेष उड़ानों की व्यवस्था की है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण रोहित शर्मा और विराट कोहली को स्वदेश वापस लाने के लिए बीसीसीआई अधिकारियों ने विशेष पहल की। एयर इंडिया के अधिकारियों से संपर्क करके AIC24WC की व्यवस्था की गई है।

क्रिकेटर, कोच समेत भारतीय टीम के 31 सदस्य। इसके अलावा, बीसीसीआई ने कुछ क्रिकेटरों, कुछ बीसीसीआई अधिकारियों और भारतीय पत्रकारों के परिवारों को वापस लाने की पहल की। क्योंकि बेहद खतरनाक चक्रवात ‘बेरील’ के कारण पिछले रविवार को वेस्ट इंडीज द्वीप देशों के सभी हवाई अड्डे बंद कर दिए गए थे। एयर इंडिया की वेस्ट इंडीज के किसी भी देश से भारत के लिए सीधी उड़ान नहीं है। इसलिए वहां से फ्लाइट का इंतजाम करना संभव नहीं था. बारबाडोस से रोहित, कोहली को वापस लाने वाली फ्लाइट को नेवार्क से दिल्ली आना था। न्यूआर्क अमेरिका के न्यू जर्सी में एक शहर है। विमान को दिल्ली की बजाय बारबाडोस भेजा गया. जो यात्री इस फ्लाइट से भारत आने वाले थे, उन्हें कंपनी की दूसरी फ्लाइट में बिठाया गया। AIC24WC को नेवार्क से बारबाडोस तक निकाला गया। संबंधित क्षेत्रों में एयर इंडिया के अतिरिक्त विमानों की कमी के कारण कुछ उड़ान कार्यक्रमों में बदलाव किया गया है। एयर इंडिया के अधिकारियों ने असुविधा के लिए विमान के मूल यात्रियों से माफी मांगी। संस्था की ओर से बताया गया है, ”यात्रियों को धन्यवाद. उन्होंने अपनी कठिनाइयों के बावजूद विमान को खाली कराने में कोई आपत्ति नहीं जताई। विश्व विजेताओं की देश वापसी की व्यवस्था में सभी ने हमारा सहयोग किया। वे भी चाहते हैं कि हमारे विश्व विजेता क्रिकेटर सुरक्षित घर लौट आएं।

प्राकृतिक आपदा के कारण भारतीय क्रिकेटरों को बारबाडोस के एक होटल में रहना पड़ रहा है। स्थिति में थोड़ा सुधार होने के बाद, बीसीसीआई अधिकारियों ने एयर इंडिया अधिकारियों से संपर्क किया और एक विशेष उड़ान की व्यवस्था की। इससे पहले बोर्ड के अधिकारी अमेरिका और वेस्टइंडीज के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखे हुए थे. विमान का पूरा किराया बीसीसीआई चुका रही है.

शादी के बाद दाढ़ी रखने की एक्टिंग! दीपिका और बच्चे पैदा करने की योजना बना रही हैं

0

अभिनेत्री ने कहा कि अगर उन्हें कभी कोई जीवनसाथी मिलता है और वह शादी कर लेती हैं तो वह सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अभिनय छोड़ने को तैयार हैं। दीपिका पादुकोण शादी के बाद एक्टिंग में दाढ़ी बढ़ाना चाहती थीं। एक्ट्रेस को रणवीर सिंह से प्यार हो गया था. उस समय एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें कभी कोई हमसफर मिलता है और वह शादी कर लेती हैं तो वह खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के लिए एक्टिंग छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक से अधिक बच्चों के साथ पारिवारिक जीवन का आनंद लेना चाहते हैं। ये वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैल गया.

एक इंटरव्यू में दीपिका ने कहा, ”रणवीर और मुझे बच्चे बहुत पसंद हैं। हम इंतजार कर रहे हैं कि कब हम अपने परिवार में नया मेहमान ला सकें। उन्हें पटकथा लेखक होमी अदजानिया और अनाइता के बच्चों के साथ समय बिताना भी पसंद है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेत्री अपने दोस्तों और परिवार के साथ नियमित समय बिताने की कोशिश करती हैं। हाल ही में दीपिका को ‘कल्कि 2898 AD’ के प्रमोशनल इवेंट में देखा गया। हीरोइन वहां ब्लैक टाइट ‘बॉडीकॉन’ ड्रेस पहनकर आई थीं। उसका अहंकार स्पष्ट हो गया। रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के पहले बच्चे का जन्म सितंबर में होने वाला है। रणवीर ने पिछले मार्च में सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की थी.

साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘कल्कि 2898 AD’ गुरुवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। 600 करोड़ रुपये के बजट से बनी इस फिल्म को लेकर शुरुआत से ही उत्साह चरम पर था. यह इस वक्त देश की सबसे महंगी फिल्म है। यह फिल्म तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज हुई थी।

खबर है कि नाग अश्विन द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने पहले दिन दुनिया भर में 191.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। तेलुगु वर्जन अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 64.5 करोड़ रुपये है। फिल्म ने अब तक हिंदी में 27.5 करोड़, तमिल में 4 करोड़, मलयालम में 2.2 करोड़ और कन्नड़ में 30 लाख का कलेक्शन किया है।

इससे पहले शाहरुख खान स्टारर ‘जवां’ ने बॉक्स ऑफिस पर सबका ध्यान खींचा था. इस फिल्म का पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 75 करोड़ रुपये था। यश स्टारर ‘केजीएफ चैप्टर 2’ का पहले दिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 159 करोड़ रुपये था। वो सारे रिकॉर्ड ‘कल्कि 2898 ईस्वी’ ने तोड़ दिए। बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन बिजनेस के मामले में ‘कल्कि 2898 एडी’ का स्थान ‘बाहुबली 2’ और ‘आरआरआर’ के बाद है। प्रभास की ‘बाहुबली 2’ का पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 217 करोड़ रुपये था। ‘आरआरआर’ ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 223 करोड़ रुपये की कमाई की.

‘कल्कि 2898 AD’ बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन के बिजनेस के मामले में अभी भी तीसरे नंबर पर है। नाग अश्विन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण, कमल हासन, दिशा पटानी और अन्य कलाकार हैं।

बस कुछ महीने और इंतजार करना है. एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के घर सितंबर में नया मेहमान आने वाला है। इससे पहले दीपिका अपने पति एक्टर रणवीर सिंह के साथ वेकेशन पर गई थीं. ‘बेबीमून’ से वापस आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी पोस्ट की थी। उस तस्वीर में दीपिका की पीठ साफ तौर पर धूप से झुलसी हुई नजर आ रही है। शायद वह किसी समय समुद्र के किनारे ‘रेसर बैक’ टॉप में धूप सेंक रही थी। समुद्र के खारे पानी, हवा और धूप के कारण उसकी पीठ पर काले धब्बे पड़ गए हैं।

हालांकि, दीपिका के शुभचिंतकों को उनकी त्वचा पर ऐसे अनचाहे काले धब्बे देखकर बर्दाश्त नहीं हुआ। नेट इन्फ्लुएंसर प्रभाकीरत कौर ने दीपिका को लिखा, “बेसन, एलोवेरा जेल, खट्टी दही और मसूरदाल मक्खन का पैक बनाएं। यह पता नहीं चल पाया है कि दीपिका ने अपनी पीठ के काले दाग हटाने के लिए इस ट्रिक का इस्तेमाल किया था या नहीं। हालांकि, प्रभाकीरत की ट्रिक को फॉलो कर कई सोशल मीडिया यूजर्स को फायदा हुआ है। ब्यूटीशियनों का कहना है कि मुसूरदाल बाटा त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है। ये दालें प्राकृतिक एक्सफोलिएटर के रूप में बहुत अच्छा काम करती हैं। खट्टे दही में लैक्टिक एसिड होता है। दाल के साथ मिलाने पर यह घटक टैनिंग के लिए उत्प्रेरक का काम करता है। इस मिश्रण में एलोवेरा होता है. संवेदनशील त्वचा से सनबर्न हटाने में इस जड़ी बूटी की भूमिका होती है। अगर त्वचा बहुत तैलीय है तो बेसन मिला सकते हैं।