Friday, March 13, 2026
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क्या राहुल गांधी को मिलेंगे विपक्ष नेता के सारे अधिकार ?

अब राहुल गांधी को विपक्ष नेता के सारे अधिकार मिलने वाले हैं! कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे। मंगलवार को देर शाम इंडिया गठबंधन की मीटिंग में राहुल गांधी के बतौर विपक्ष का नेता बनने पर औपचारिक मुहर लगी। पिछले दिनों कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी मीटिंग में एक सुर में राहुल गांधी से नेता विपक्ष बनने का आग्रह किया गया था। हालांकि उन्होंने सोचने के लिए थोड़ा वक्त मांगा था। बताया जाता है कि शुरू में राहुल गांधी इसके लिए बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं थे। लेकिन पार्टी की ओर से लगातार उठ रही मांग के बाद उन्होंने इस पर विचार किया। इंडिया गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन व कल्याण बनर्जी, एसपी के रामगोपाल यादव, डीएमके के टीआर बालू, आरजेडी के सुरेंद्र यादव, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, शिवसेना (UBT) के अरविंद सावंत, आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल मौजूद थे। बैठक के बाद मीडिया के सामने कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने इस फैसले की जानकारी दी। जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी की अगुवाई की, पार्टी चाहती थी कि वैसा ही नेतृत्व लोकसभा में पार्टी का करें। पार्टी के भीतर नेता प्रतिपक्ष के लिए राहुल गांधी पहली पसंद के तौर पर उभरे थे, इसलिए कहा जा रहा था कि नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए यह एक बेहतरीन मौका है।उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब को इस बारे में सूचित करते हुए औपचारिक लेटर लिखा है।

गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष का कद कैबिनेट रैंक का होता है। नेता विपक्ष सीबीआई निदेशक सहित कई अहम पदों के लिए बनी सिलेक्ट कमिटी का मेंबर होता है। वहीं वह संसद की प्रतिष्ठित पीएसी लोकलेखा समिति का अध्यक्ष होता है। दरअसल, पीएम मोदी लोकसभा में नेता सदन हैं। कांग्रेस का मानना है कि राहुल गांधी के नेता विपक्ष होने के बाद अगले पांच साल वह पीएम के सामने स्वाभाविक विकल्प के रूप में उभरेंगे। गौरतलब है कि 2014 और 2019 आम चुनाव में कांग्रेस को उतनी सीटें नहीं मिली थी, जिससे नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिल सके। लोकसभा की कुल सीट का कम से कम दस फीसदी सीट जीतना नेता विपक्ष का पद हासिल करने के लिए जरूरी होता है। लेकिन परंपरा के तहत यह पद कांग्रेस की ओर से पिछले लोकसभा में पश्चिम बंगाल के सांसद अधीर रंजन चौधरी को मिला था। इस बार वह चुनाव हार गये हैं। हालांकि इस बार कांग्रेस के पास नेता विपक्ष का पद लेने के लिए पर्याप्त संख्या है।

दरअसल, पार्टी का मानना था कि अब वक्त आ गया है कि राहुल गांधी को आगे बढ़कर पार्टी को लीड करना चाहिए। जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी की अगुवाई की, पार्टी चाहती थी कि वैसा ही नेतृत्व लोकसभा में पार्टी का करें। पार्टी के भीतर नेता प्रतिपक्ष के लिए राहुल गांधी पहली पसंद के तौर पर उभरे थे, इसलिए कहा जा रहा था कि नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए यह एक बेहतरीन मौका है। पार्टी का मानना था कि राहुल गांधी को अपने पिता वह पूर्व पीएम राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी की तरह नेता प्रतिपक्ष बनकर सदन में लोगों के मुद्दे उठाने चाहिए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिस तरह से भारत जोड़ो यात्रा से लेकर मौजूदा चुनाव तक में राहुल गांधी ने आम आदमी से जुड़े जमीनी मुद्दों को पूरी ताकत से उठाया, वैसे ही अब सदन में वह आम आदमी की आवाज बनेंगे।

माना जा रहा है कि राहुल गांधी के इस भूमिका में आने से फायदा उन्हें और पार्टी दोनों को होगा। नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आने के बाद विपक्षी खेमे के भीतर भी राहुल गांधी को लेकर सोच बदलेगी। भारत यात्राओं राहुल गांधी को एक निर्विवाद मास लीडर बना दिया है, बता दे कि मीडिया के सामने कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने इस फैसले की जानकारी दी। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब को इस बारे में सूचित करते हुए औपचारिक लेटर लिखा है। जिसका लोहा सहयोगी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल सहित देश मान रहा है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उन लोगों की सोच भी बदलेगी, जो कहीं ना कहीं अब भी राहुल गांधी को लेकर असहज महसूस करते हैं।

आखिर लोकसभा में विपक्ष नेता के पास क्या-क्या होते हैं अधिकार?

आज हम आपको बताएंगे कि लोकसभा में विपक्ष नेता के पास क्या-क्या अधिकार होते हैं! कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे। मंगलवार को देर शाम इंडिया गठबंधन की मीटिंग में राहुल गांधी के बतौर विपक्ष का नेता बनने पर औपचारिक मुहर लगी। पिछले दिनों कांग्रेस की CWC मीटिंग में एक सुर में राहुल गांधी से नेता विपक्ष बनने का आग्रह किया गया था। हालांकि उन्होंने सोचने के लिए थोड़ा वक्त मांगा था। बताया जाता है कि शुरू में राहुल गांधी इसके लिए बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं थे। लेकिन पार्टी की ओर से लगातार उठ रही मांग के बाद उन्होंने इस पर विचार किया। इंडिया गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन व कल्याण बनर्जी, एसपी के रामगोपाल यादव, डीएमके के टीआर बालू, आरजेडी के सुरेंद्र यादव, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, शिवसेना (UBT) के अरविंद सावंत, आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल मौजूद थे। बैठक के बाद मीडिया के सामने कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने इस फैसले की जानकारी दी। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रोटेम स्पीकर भर्तहरि महताब को इस बारे में सूचित करते हुए औपचारिक लेटर लिखा है। नेता प्रतिपक्ष का कद कैबिनेट रैंक का होता है। नेता विपक्ष सीबीआई निदेशक सहित कई अहम पदों के लिए बनी सिलेक्ट कमिटी का मेंबर होता है। प्रतिपक्ष बनकर सदन में लोगों के मुद्दे उठाने चाहिए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिस तरह से भारत जोड़ो यात्रा से लेकर मौजूदा चुनाव तक में राहुल गांधी ने आम आदमी से जुड़े जमीनी मुद्दों को पूरी ताकत से उठाया, वैसे ही अब सदन में वह आम आदमी की आवाज बनेंगे।वहीं वह संसद की प्रतिष्ठित पीएसी लोकलेखा समिति का अध्यक्ष होता है। दरअसल, पीएम मोदी लोकसभा में नेता सदन हैं। कांग्रेस का मानना है कि राहुल गांधी के नेता विपक्ष होने के बाद अगले पांच साल वह पीएम के सामने स्वाभाविक विकल्प के रूप में उभरेंगे।

गौरतलब है कि 2014 और 2019 आम चुनाव में कांग्रेस को उतनी सीटें नहीं मिली थी, जिससे नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिल सके। लोकसभा की कुल सीट का कम से कम दस फीसदी सीट जीतना नेता विपक्ष का पद हासिल करने के लिए जरूरी होता है। लेकिन परंपरा के तहत यह पद कांग्रेस की ओर से पिछले लोकसभा में पश्चिम बंगाल के सांसद अधीर रंजन चौधरी को मिला था। इस बार वह चुनाव हार गये हैं। हालांकि इस बार कांग्रेस के पास नेता विपक्ष का पद लेने के लिए पर्याप्त संख्या है।

दरअसल, पार्टी का मानना था कि अब वक्त आ गया है कि राहुल गांधी को आगे बढ़कर पार्टी को लीड करना चाहिए। जिस तरह से राहुल गांधी ने अपनी भारत छोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी की अगुवाई की, पार्टी चाहती थी कि वैसा ही नेतृत्व लोकसभा में पार्टी का करें। पार्टी के भीतर नेता प्रतिपक्ष के लिए राहुल गांधी पहली पसंद के तौर पर उभरे थे, इसलिए कहा जा रहा था कि नेतृत्व की भूमिका में आने के लिए यह एक बेहतरीन मौका है।पार्टी का मानना था कि राहुल गांधी को अपने पिता वह पूर्व पीएम राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी की तरह नेता प्रतिपक्ष बनकर सदन में लोगों के मुद्दे उठाने चाहिए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिस तरह से भारत जोड़ो यात्रा से लेकर मौजूदा चुनाव तक में राहुल गांधी ने आम आदमी से जुड़े जमीनी मुद्दों को पूरी ताकत से उठाया, वैसे ही अब सदन में वह आम आदमी की आवाज बनेंगे।

माना जा रहा है कि राहुल गांधी के इस भूमिका में आने से फायदा उन्हें और पार्टी दोनों को होगा। नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आने के बाद विपक्षी खेमे के भीतर भी राहुल गांधी को लेकर सोच बदलेगी। बता दें कि नेता प्रतिपक्ष का कद कैबिनेट रैंक का होता है। नेता विपक्ष सीबीआई निदेशक सहित कई अहम पदों के लिए बनी सिलेक्ट कमिटी का मेंबर होता है। वहीं वह संसद की प्रतिष्ठित पीएसी लोकलेखा समिति का अध्यक्ष होता है। दरअसल, पीएम मोदी लोकसभा में नेता सदन हैं। कांग्रेस का मानना है कि राहुल गांधी के नेता विपक्ष होने के बाद अगले पांच साल वह पीएम के सामने स्वाभाविक विकल्प के रूप में उभरेंगे। भारत यात्राओं राहुल गांधी को एक निर्विवाद मास लीडर बना दिया है, जिसका लोहा सहयोगी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल सहित देश मान रहा है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उन लोगों की सोच भी बदलेगी, जो कहीं ना कहीं अब भी राहुल गांधी को लेकर असहज महसूस करते हैं।

आखिर कैसा हो रहा है देश के मौसम का मिजाज?

आज हम आपको बताएंगे कि देश के मौसम का मिजाज कैसा हो रहा है! भीषण गर्मी और लू का दौर जा चुका है। दिल्ली, यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में अब मॉनसून सक्रिय होने को है। देश की राजधानी दिल्ली, पंजाब हरियाणा में इस वीकेंड यानी 29-30 जून तक मॉनसून दस्तक दे देगा। एमपी और बिहार में तो इसकी एंट्री हो चुकी है वहीं पहाड़ी राज्यों हिमाचल और उत्तराखंड में भी दो से तीन दिन में यह सक्रिया हो जाएगा। हालांकि देश में कई इलाके ऐसे भी हैं जहां अभी भी गर्मी के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। आइए जानते हैं देशभर में क्या रहेगा आज मौसम का हाल। देश की राजधानी दिल्ली में 29 और 30 जून को मॉनसून एंट्री लेने वाला है। मॉनसून ने अपनी रफ्तार तेज करते हुए मंगलवार को गुजरात, मध्य प्रदेश, साउथ-ईस्ट राजस्थान और वेस्ट उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर कर लिया है। उत्तराखंड की बात करें तो यहां मॉनसून 27 जून को दस्तक दे सकता है। यहां पहले सप्ताह में तेज बारिश होने के आसार हैं। 20 जून को अमूमन पहुंचने वाला मॉनसून 27 जून को पहुंचने वाला है। हालांकि, इससे पहले प्री-मानसून की बारिश गर्मी से राहत देगी।मौसम विभाग ने बताया कि 29 जून से 1 जुलाई तक राजधानी में मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। 30 जून और 1 जुलाई को बारिश के साथ आंधी भी आएगी। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में प्री-मॉनसून बारिश हो रही है, लेकिन यह नमी के स्तर को बढ़ाकर लोगों को परेशान कर रही है। आईएमडी ने बताया कि मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए स्थितियां अनुकूल हैं।

यूपी में भी मॉनसून सक्रिय हो चुका है। बारिश के साथ उमस ने भी लोगों को परेशान कर दिया है। राहत की बात है कि उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी के कहर से छुटकारा मिल गया है। आज पूर्वी और पश्चिमी यूपी में कहीं कहीं गरज चमक के साथ बारिश होने के आसार है। पूर्वी यूपी के कुछ जगहों में भारी बारिश के भी आसार हैं। देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच में भारी बारिश का अनुमान है।

पहाड़ी इलाकों की बात करें तो यहां भी 3 से 4 दिन में मॉनसून दस्तक देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में दो दिन भारी बारिश की संभावना है। 28 एवं 29 जून को हिमाचल में येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कई भागों में 1 जुलाई तक लगातार बारिश होने का भी अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार भी मानसून सामान्य तारीख को ही प्रवेश कर सकता है। उत्तराखंड की बात करें तो यहां मॉनसून 27 जून को दस्तक दे सकता है। यहां पहले सप्ताह में तेज बारिश होने के आसार हैं। 20 जून को अमूमन पहुंचने वाला मॉनसून 27 जून को पहुंचने वाला है। हालांकि, इससे पहले प्री-मानसून की बारिश गर्मी से राहत देगी।

पंजाब और हरियाणा में भी 28 जून तक मौसम सामान्य रहेगा और 29 जून को गरज चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन दो प्रदेशों में 26 से 28 जून तक हीटवेव के साथ पारा हाई रहने के आसार हैं। दिल्ली की तरह यहां भी वीकेंड पर ही बारिश दस्तक देगी। बिहार में अधिकांश जगहों पर बुधवार की सुबह बादल छा गए हैं। राजधानी पटना समेत सभी जिलों में आज से बारिश शुरू होने के आसार हैं। उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, मुजफ्फरपुर में मॉनसून आ चुका है। दक्षिण बिहार के जिले पटना, गया से लेकर बक्सर तक को झमाझम बारिश का इंतजार था। मौसम के इशारे समझें तो आज इन इलाकों में भी झमाझम बारिश होने के इशारे मिल रहे हैं।

मध्य प्रदेश में मॉनसून ने एंट्री ले ली है। इसके 55 जिलों में से 33 जिलों में मॉनसून सक्रिय हो गया है। मॉनसून के आने से मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में काफी व्यापक वर्षा देखी गई है।आज पूर्वी और पश्चिमी यूपी में कहीं कहीं गरज चमक के साथ बारिश होने के आसार है। पूर्वी यूपी के कुछ जगहों में भारी बारिश के भी आसार हैं। देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच में भारी बारिश का अनुमान है। अब इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनूकूल हैं। राजस्थान की बात करें तो यहां भी कुछ ही दिनों में मॉनसून अपना रंग दिखाना शुरू करेगा। इस बार यह भी माना जा रहा है कि पिछली बार से ज्यादा बारिश राजस्थान में होगी। दो-तीन दिन के अंदर मानसून राजस्थान में एंट्री कर जाएगा।

क्या आने वाले समय में रूसी राष्ट्रपति से मिल सकते हैं पीएम मोदी?

आने वाले समय में पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के लिए रूस जा सकते हैं। पीएम मोदी की इस मॉस्को यात्रा पर फिलहाल भारत और रूस विचार कर रहे हैं। राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को इसके संकेत दिए। हालांकि भारत की ओर से इस दौरे को लेकर आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है। क्रेमलिन के एक अधिकारी ने जरूरत बताया कि मोदी के रूस दौरे को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। अगर यह दौरा होता है तो करीब पांच वर्षों में भारतीय पीएम का यह पहला रूस दौरा होगा। मोदी ने सितंबर 2019 में आर्थिक संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक का दौरा किया था। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने कहा, ‘मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि हम भारतीय पीएम के दौरे की तैयारियां कर रहे हैं। हम तरीख नहीं बता सकते हैं क्योंकि इसकी घोषणा सहमति बनने के बाद पक्षकारों की ओर से की जाती है।’ राजनयिक सूत्रों ने बताया कि आठ जुलाई के आसपास पीएम की एक दिवसीय यात्रा की योजना बनाई जा रही है लेकिन तारीख अबतक तय नहीं है और विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

अगर मोदी रूस जाते हैं तो वह और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन वर्षों के अंतराल के बाद भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन करेंगे। अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप लगाये हैं। न्यायालय ने एक बयान में कहा कि वारंट इसलिए जारी किए गए हैं कि न्यायाधीशों का विचार है कि यह मानने के लिए तार्किक आधार हैं कि ये लोग 10 अक्टूबर 2022 से नौ मार्च 2023 तक यूक्रेन में बिजली उत्पादन और विद्युत आपूर्ति के बुनियादी ढांचे पर रूसी सशस्त्र बलों के मिसाइल हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। अब तक भारत और रूस के बीच क्रमश: एक दूसरे के देशों में 21 वार्षिक शिखर सम्मेलन हुए हैं। पिछला शिखर सम्मेलन नयी दिल्ली में छह दिसंबर 2021 को आयोजित किया गया था। राष्ट्रपति पुतिन शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएमओ के मुताबिक, तोकायेव ने मोदी से फोन पर बातचीत की और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया के सफल संचालन और लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए उनके फिर से चुने जाने पर हार्दिक बधाई दी। पीएम मोदी ने अस्ताना में आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए भारत के पूर्ण समर्थन से अवगत कराया और विश्वास व्यक्त किया कि कजाकिस्तान का नेतृत्व क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में काफी योगदान देगा।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने यूक्रेन में नागरिकों की मौजूदगी वाले स्थानों पर हमला करने के लिए रूस के पूर्व रक्षा मंत्री एवं इसकी सेना के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के खिलाफ मंगलवार को गिरफ्तारी वारंट जारी किए। कोर्ट ने पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ जनरल वालेरी गेरासीमोव पर युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोप लगाये हैं। न्यायालय ने एक बयान में कहा कि वारंट इसलिए जारी किए गए हैं कि न्यायाधीशों का विचार है कि यह मानने के लिए तार्किक आधार हैं कि ये लोग 10 अक्टूबर 2022 से नौ मार्च 2023 तक यूक्रेन में बिजली उत्पादन और विद्युत आपूर्ति के बुनियादी ढांचे पर रूसी सशस्त्र बलों के मिसाइल हमलों के लिए जिम्मेदार हैं।

न्यायालय ने कहा, ‘इस अवधि के दौरान, यूक्रेन में कई स्थानों पर कई विद्युत संयंत्रों और सब-स्टेशन पर रूसी सशस्त्र बलों ने हमले किये थे।’ बता दे कि मोदी ने सितंबर 2019 में आर्थिक संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक का दौरा किया था। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने कहा, ‘मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि हम भारतीय पीएम के दौरे की तैयारियां कर रहे हैं। हम तरीख नहीं बता सकते हैं क्योंकि इसकी घोषणा सहमति बनने के बाद पक्षकारों की ओर से की जाती है।’ पिछले साल, न्यायालय ने यूक्रेन से बच्चों के अपहरण के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ वारंट जारी किया था।

विकिलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे ने राजनीति के विषय पर क्या कहा?

हाल ही में विकिलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे ने राजनीति के विषय पर एक बयान दिया है! दुनिया भर की काली करतूतों को उजागर करने वाले विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे मंगलवार को लंदन की जेल से रिहा कर दिए गए। इराक और अफगानिस्तान में अमेरिका के युद्ध अपराधों के आरोप लगाने वाले असांजे पर जासूसी के आरोप थे। बताया जा रहा है कि 52 साल के असांजे के आगे झुकते हुए अमेरिका ने उनसे एक डील की है, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई। इस समझौते में उन्होंने अमेरिका की जासूसी की बात मान ली है। आरोपों को मानने के बाद असांजे को 62 महीने यानी 5 साल 2 महीने की जेल की सजा सुनाई जाएगी। हालांकि, असांजे ने ब्रिटेन की जेल में करीब पांच साल यानी 1901 दिन बिताए हैं तो इससे उनकी सजा पूरी मानी जा सकती है। इसके बाद वह अपने मूल देश ऑस्ट्रेलिया लौट सकते हैं। असांजे क्या फिर अमेरिका जैसे देशों की पोल खोलेंगे? असांजे की वेबसाइट विकिलीक्स ने 2011 में यूपी की पूर्व सीएम मायावती को तानाशाह और भ्रष्ट करार दिया था। 23 अक्टूबर, 2008 के एक केबल में कहा गया था कि मायावती को जब भी जरूरत होती, वह अपनी पसंद की सैंडल मंगवाने के लिए अपने एक निजी विमान को खाली मुंबई भेजा करती थीं। खुलासे में यह भी कहा गया था कि मायावती प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं।

मायावती को हमेशा अपनी जान का खतरा सताता रहता है। केबल के मुताबिक, मायावती को यह डर लगता था कि कोई उनके खाने में जहर मिला देगा। इसीलिए उन्होंने फूड टेस्टर्स की नियुक्ति की थी। उनके खाना खाने से पहले कोई कर्मचारी उसे चखता है। मायावती के किचन में खाना बनाने वाले रसोइयों की निगरानी भी की जाती है। मायावती ने अपने आवास से सीएम दफ्तर तक जाने के लिए प्राइवेट रोड बनवाया था। दफ्तर जाने से पहले वह सड़क धुलवाया करती हैं। विकिलीक्स ने यह भी खुलासा किया था कि मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने 1976 में परमाणु डील से जुड़ी अहम जानकारी अमेरिका को दे दी थी। ऐसी रिपोर्टों के बाद भारत में बहुत बवाल मचा था।

असांजे पर 2010-11 में अमेरिका के ऐसे खुफिया सैन्य दस्तावेज लीक करने के आरोप हैं, जिसमें उसे और नाटो को इराक और अफगानिस्तान में युद्ध अपराधों का दोषी बताया गया था। उस वक्त अमेरिका ने असांजे को अपना दुश्मन मानते हुएउन्हें मोस्ट वॉन्टेड अपराधी बताया था। 2019 में असांजे को अमेरिका की फेडरल ग्रैंड ज्यूरी ने 18 मामलों में दोषी ठहराया था। इन मामलों में उन्हें 175 साल की सजा हो सकती थी। अब चूंकि असांजे ने जासूसी की बात मान ली है तो उन्हें करीब 5 साल की ही सजा होगी। 2020 में अमेरिकी सीनेट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस ने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की जीत में मदद की थी। इसके लिए असांजे की विकिलीक्स का इस्तेमाल किया था। हालांकि, ट्रंप ने इस रिपोर्ट को हमेशा झूठा करार दिया है। वहीं रूस ने भी अमेरिकी चुनाव में दखल से इनकार किया था। विकिलीक्स ने डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के अभियान अध्यक्ष के हजारों ईमेल प्रकाशित कर दिए थे।

असांजे 1971 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैड में टाउंसविले में पैदा हुए थे। 90 के दशक में उन्हें कंप्यूटर इतना रास आया कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने हैकरों में से एक माना गया था। उन्होंने 2006 में विकिलीक्स की स्थापना की। उन्होंने अमेरिका के एक पूर्व सैनिक चेल्सिया मैनिंग की मदद से इराक युद्ध में अमेरिका की शर्मनाक करतूतों को उजागर किया था। इनमें से एक 2007 का वीडियो भी था, जिसमें अमेरिकी फौजों के अपाचे हेलीकॉप्टर ने इराक की राजधानी बगदाद में हमला कर दिया था। हमले में प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी के दो पत्रकारों समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी।

अमेरिका के जो बाइडन सरकार से हुई असांजे की डील के कई मायने हैं। अब असांजे को एस्पियॉन्ज एक्ट के तहत पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित उत्तरी मैरियाना द्वीप में अमेरिका की संघीय अदालत के समक्ष पेश होना होगा। इस कोर्ट के समक्ष ही असांजे अमेरिका की जासूसी करने का जुर्म कबूलेंगे। असांजे के प्रत्यर्पण का मुकदमा वापस ले लिया जाएगा और उनके खिलाफ और कोई आरोप तय नहीं होंगे। दरअसल, उत्तरी मैरियाना द्वीप की राजधानी सैपियन में यह सुनवाई इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका जाने से इनकार कर दिया था। यह जगह अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में जरूर आता है, मगर यहां से ऑस्ट्रेलिया करीब है, जो असांजे का देश है। इस केस में असांजे को 5 साल की सजा होगी। चूंकि, वह पहले ही 5 साल की जेल काट चुके हैं, ऐसे में वह कानूनी रूप से बरी हो जाएंगे और अपने देश लौट सकेंगे।

अब देश में लागू होने वाले हैं नए कानून ?

देश में अब नए कानून लागू होने वाले हैं! 1 जुलाई से देश में तीन नए कानून लागू हो जाएंगे। इसके साथ ही आम बोलचाल में IPC की प्रचलित किंवदंतियां भी बदल जाएंगीं। मसलन, ‘420’ का नाम सुनते ही हर छोटा बड़ा इसके मायने समझ जाता था। 420 को लेकर कई फिल्में, कहानियां भी बीता हुआ कल बन जाएंगी। ‘मेरे साथ चार सौ बीसी की है’ जैसे कमेंट अब पुराने पड़ जाएंगे। क्यों कि अब आईपीसी 420 की जगह बीएनएस 316 हो जाएगी। यानी अब आप कह सकेंगे उसने ‘तीन सौ सौलह’ कर दी। यानी ब्रिटिश काल से बेईमानी के लिए दागदार आईपीसी 420 के दाग धुल जाएंगे, अब बीएनएस ‘316’ चीटिंग के लिए ‘बदनाम’ हो जाएगी। नए कानून में डॉक्टर्स को सख्त सजा से सुरक्षा कवच दिया गया है। मसलन, बीएनएस 106(1) में कहा गया है कि एक रजिस्टर्ड डॉक्टर आरएमपी को चिकित्सीय लापरवाही के लिए दो साल तक की कैद और जुर्माने से दंडित किया जाएगा। इसमें कहा गया है किसी भी चिकित्सा प्रोसेस को करते समय जल्दबाजी या लापरवाही से मौत का कारण में चिकित्सकों को बीएनएस में कम सजा का प्रावधान है। कोर्ट के निर्णय तक की सुनवाई पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के तीन के अंदर FIR दर्ज करनी होगी। सात साल से ज्यादा सजा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है।इसके साथ ही बीएनएस की धारा 51 (1) के मुताबिक, चिकित्सक को बिना किसी देरी के आरोपी की जांच रिपोर्ट आईओ को भेजनी होगी। रेप पीड़िता की मेडिकल जांच की रिपोर्ट रजिस्टर्ड डॉक्टर को सात दिनों के अंदर जांच अधिकारी को भेजनी होगी।

इतना ही नहीं, अब पुलिस हिरासत में भी बड़ा बदलाव हो जाएगा। अब बीएनएसए यानी ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ के तहत क्राइम के नेचर के आधार पर पुलिस हिरासत की अवधि 15 दिन के टाइम फ्रेम को बढ़ा दिया गया है। दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड एसीपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक, इसका अर्थ है कि जिस संगीन केस में 10 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है उसमें 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल करनी होती है, ऐसे केस में 60 दिन के अंदर कभी भी 15 दिन की पुलिस कस्टडी ली जा सकती है।

जिस केस में 10 साल से कम अवधि की सजा है, उसमें चार्जशीट 60 दिन के अंदर फाइल करनी होती है। ऐसे केस में 45 दिन के अंदर कभी भी 15 दिन की पुलिस कस्टडी ले सकती है। यह कस्टडी टुकड़ों में भी ली जा सकेगी। इसके साथ ही FIR से लेकर कोर्ट के निर्णय तक की सुनवाई पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के तीन के अंदर FIR दर्ज करनी होगी। सात साल से ज्यादा सजा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है।

बता दे कि बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर के निदेशक बी श्रीनिवासन ने दी। उन्होंने बताया कि तीन नए प्रमुख कानूनों का मकसद सजा देने की बजाय न्याय देना है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों से मानवीय पक्ष सामने आएगा। नए कानूनों में प्रावधान है कि पुलिस थाने में आने वाले पीड़ित की शिकायत आधे घंटे के अंदर सुनी जाएगी। अगर किसी पीड़ित को थाने में आधे घंटे से ज्यादा इंतजार करवाया गया, तो थाने के संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी। सभी थानों में अलग-अलग मामलों (केस) के लिए अलग-अलग जांच अधिकारी (आईओ) तैनात किए जाएंगे। हर आईओ को लैपटॉप और एंड्रॉयड मोबाइल दिया जाएगा। बिहार पुलिस जल्द ही डिजिटल पुलिस बन जाएगी। सभी आईओ को उनका अलग ई-मेल दिया जाएगा। इसके बाद सभी सीसीटीएनएस (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क योजना) पर एक्टिव होंगे। एफआईआर से लेकर कोर्ट के निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शिकायत दायर करने के तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेसिंक जांच अनिवार्य यौन उत्पीड़न के मामलों में सात दिन के भीतर देनी होगी जांच रिपोर्ट पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय करने का प्रावधान,एसीपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक, इसका अर्थ है कि जिस संगीन केस में 10 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है उसमें 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल करनी होती है, ऐसे केस में 60 दिन के अंदर कभी भी 15 दिन की पुलिस कस्टडी ली जा सकती है। आपराधिक मामलों में सुनवाई पूरी होने के 45 दिनों में होगा फैसला भगोड़े अपराधियों की गैर-मौजूदगी के मामलों में 90 दिनों के भीतर केस दायर करने का प्रावधान तीन साल के भीतर मिल सकेगा न्याय! 

आखिर चीन के साथ कैसा संबंध चाहते हैं मोदी?

आज हम आपको बताएंगे कि मोदी चीन के साथ कैसा संबंध चाहते हैं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के लिए कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में होंगे। पिछले कुछ हफ्तों में भारत-चीन संबंधों को लेकर मिले संकेत मिले-जुले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया द्वारा रणनीति में बदलाव से यह पता चलता है कि चीन के साथ व्यावहारिक सहयोग का रास्ता हो सकता है। चीन के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प को चार साल पूरे हो चुके हैं। इसी घटना के बाद दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो गए थे। अभी भी सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों ही तरफ से 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपने तीसरे कार्यकाल में चीन के साथ संबंधों को सुधारना सबसे बड़ी चुनौती होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 3-4 मई को दोनों नेता अस्ताना में हो रहे एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल तो होंगे, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या दोनों के बीच मुलाकात होगी या नहीं। पीएम मोदी ने अप्रैल में न्यूजवीक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत के लिए, चीन के साथ संबंध महत्वपूर्ण और सार्थक हैं। मेरा मानना है कि हमें अपनी सीमाओं पर लंबे समय तक चले आ रहे गतिरोध को तत्काल सुलझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर और शांत संबंध सिर्फ हमारे दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए भी जरूरी हैं। मोदी ने कहा था कि मुझे उम्मीद है और भरोसा है कि हम अपनी सीमाओं पर शांति और स्थिरता बहाल करने और बनाए रखने में सक्षम होंगे।

चीन ने भी पीएम मोदी के नजरिए पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध सीमाओं से बढ़कर हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश सीमा विवाद से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए संवाद कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत चीन के साथ मिलकर काम करेगा, द्विपक्षीय संबंधों को एक रणनीतिक ऊंचाई और भविष्य के नजरिए से देखेगा। विश्वास बनाने, संवाद और सहयोग में शामिल रहने, और मतभेदों को उचित रूप से संभालने का प्रयास करेगा ताकि संबंधों को एक स्वस्थ और स्थिर मार्ग पर रखा जा सके।

मई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लद्दाख में भी सीमा विवाद के बीच चीन के साथ बाकी मुद्दों को सुलझाने की उम्मीद जताई। लद्दाख में सीमा गतिरोध के बीच, विदेश मंत्री जयशंकर ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मुख्य रूप से बचे हुए मुद्दे ‘पेट्रोलिंग के अधिकार’ और ‘पेट्रोलिंग की क्षमता से जुड़े हैं। दलाई लामा की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी और शी जिनपिंग चले जाएंगे, यह बात पेलोसी ने कही। चीन को लेकर मोदी के बयान पर जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक व्यापक नजरिया पेश किया है। उन्होंने कहा विवाद अब पेट्रोलिंग के अधिकार और पेट्रोलिंग की क्षमता तक सीमित हो गया है। पहले ये सीमा से पीछे हटने और तनाव कम करने की मांग कर रहा था। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद चीन से सीमा विवाद पर समाधान की उम्मीद जगी है। लेकिन कुछ अन्य घटनाओं ने जटिलताओं को भी उजागर किया।

पहली बात, प्रधानमंत्री और ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेशों का आदान-प्रदान (जिसे सूत्रों ने दोनों नेताओं के बीच पहला सार्वजनिक बातचीत बताया) ने चीन को नाराज कर दिया, जिसे उसने उकसाने के तौर पर देखा। 5 जून को, राष्ट्रपति लाई (जिन्हें विलियम लाई के नाम से भी जाना जाता है) ने मोदी को फिर से सत्ता में लौटने पर बधाई दी, और तेजी से बढ़ती ताइवान-भारत साझेदारी को मजबूत बनाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि में योगदान करने के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की इच्छा जताई। मोदी ने लाई को धन्यवाद दिया और निकट संबंधों और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक और तकनीकी साझेदारी की उम्मीद जताई।

दूसरी बात, अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की, जहां पूर्व हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ने घोषणा की कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता की विरासत हमेशा जीवित रहेगी, जबकि शी जिनपिंग चले जाएंगे और उन्हें किसी भी चीज का श्रेय नहीं दिया जाएगा। एक दिन बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया आई। चीन ने अमेरिका से “तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता देने और ‘तिब्बत की स्वतंत्रता’ का समर्थन नहीं करने” की अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह किया।

भारत और चीन के बीच हालिया घटनाओं को लेकर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है। पहला नजरिया है कि भारत चीन के बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही खुद को मजबूत दिखा रहा है। यह नजरिया प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर के उन इंटरव्यू को आधार बनाता है जिनमें उन्होंने सीमा मुद्दे का समाधान निकालने की इच्छा जताई थी। साथ ही, यह नजरिया ताइवान के साथ भारत के संबंध और दलाई लामा से मुलाकात को चीन को यह संदेश देने के तौर पर देखता है कि भारत इस क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी रिश्ते बनाने में सक्षम है।

क्या BRICS देशों से दूर हो रहा है भारत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत अब BRICS देशों से दूर हो रहा है या नहीं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने कजाकिस्तान में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से किनारा कर सकते हैं। उनकी जगह विदेश मंत्री एस जयशंकर के इसमें शामिल होने की उम्मीद है। द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि पीएम मोदी ने 3-4 जुलाई को होने वाले शिखर सम्मेनल के लिए अस्ताना की यात्रा नहीं करने का फैसला किया है। इसके पहले प्रधानमंत्री के सम्मेलन में जाने की योजना थी और एक अग्रिम सुरक्षा दल ने वहां अपना सर्वेक्षण भी किया था। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ ही मध्य एशियाई नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। बता दें कि इसके बाद सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या मोदी इस साल अक्ट्बूर के आखिर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस साल ब्रिक्स सम्मेलन रूस के कजान में आयोजित किया जाना है, जिसकी मेजबानी पुतिन करेंगे। भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य हैं। इस साल पांच नए सदस्यों संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, मिस्र और इथियोपिया का स्वागत करेगा।

पीएम मोदी के अस्ताना में हो रही एससीओ की बैठक में शामिल न होने के फैसले का असर इस्लामाबाद में इसी साल सर्दियों में होने वाले सम्मेलन में भी भारत की भागीदारी पर पड़ सकता है, जिसकी मेजबानी पाकिस्तान करेगा। शुक्रवार को जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से भारत की भागीदारी को लेकर पूछा गया तो उन्होंने पुष्टि करने से इनकार कर दिया और कहा कि यात्रा के विवरण को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

सूत्रों ने पीएम मोदी के सम्मेलन में न जाने के फैसले के पीछे आगामी संसद सत्र का हवाला दिया है जो 24 जून से 3 जुलाई तक चलने वाला है। इस सत्र में लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव और दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के अलावा प्रधानमंत्री के 2 से 4 जुलाई के बीच लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देने की उम्मीद है। एससीओ मूल रूप से रूस और चीन द्वारा आगे किया गया एक यूरेशियन सुरक्षा और आर्थिक समूह है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान पूर्ण सदस्य हैं। इस साल इसमें ईरान और बेलारूस को इसमें शामिल किया जाना है।

इस समूह में पीएम मोदी की अनुपस्थिति से इस समूह के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर सवाल उठने की संभावना है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एससीओ का माहौल नई दिल्ली के लिए मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के साथ तनाव सम्मेलन में परेशानी का मुख्य कारण रहा है, जिसमें दोनों देशों के नेता आतंकवाद के मुद्दे पर एक-दूसरे पर निशाना साधते हैं। चीन का इसमें होना भी भारत के लिए असहज स्थिति है। 2020 में गलवान में हुई घातक झड़प के बाद से मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कहीं भी द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई है। हालांकि, दोनों नेतानों ने 2022 में इंडोनेशिया में जी-20 और 2023 में दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संक्षिप्त बातचीत की है।

अगर पीएम मोदी जुलाई में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेते हैं, तो यह बीते सप्ताह इटली में आयोजित G-7 देशों के सम्मेलन के बिल्कुल विपरीत होगा। पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जबकि भारत इसका सदस्य भी नहीं है और उसे नौ अन्य देशों के साथ संपर्क बढ़ाने के तहत आमंत्रित किया गया था। राष्ट्रपति के अभिभाषण के अलावा प्रधानमंत्री के 2 से 4 जुलाई के बीच लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देने की उम्मीद है। एससीओ मूल रूप से रूस और चीन द्वारा आगे किया गया एक यूरेशियन सुरक्षा और आर्थिक समूह है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान पूर्ण सदस्य हैं। इस साल इसमें ईरान और बेलारूस को इसमें शामिल किया जाना है।इसके बाद सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या मोदी इस साल अक्ट्बूर के आखिर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस साल ब्रिक्स सम्मेलन रूस के कजान में आयोजित किया जाना है, जिसकी मेजबानी पुतिन करेंगे। भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य हैं। इस साल पांच नए सदस्यों संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, मिस्र और इथियोपिया का स्वागत करेगा।

आखिर एससीओ समिट के लिए क्यों नहीं गए पीएम मोदी?

यह सवाल वर्तमान का सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर पीएम मोदी एससीओ समिट के लिए क्यों नहीं गए! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3-4 जुलाई को अस्ताना में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद की पहली सत्र में शामिल होना, इसका एक बड़ा कारण है। लेकिन असल कारण है चीन के साथ तनाव। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि पीएम मोदी ने पहले पुष्टि की थी कि वे अस्ताना एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। हालांकि, अब भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए वो विदेश मंत्री एस जयशंकर को भेज सकते हैं। बता दें कि विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि दोनों पक्ष प्रासंगिक सैन्य और कूटनीतिक तंत्र के माध्यम से आगे के रास्ते पर बातचीत जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं। कजाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत एससीओ शिखर सम्मेलन का फोकस यूरेशिया में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव और बढ़ती कट्टरता की पृष्ठभूमि में आतंकवाद का मुकाबला करना होगा। मोदी ने यह सोचकर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए हामी भरी थी कि वहां रूस, चीन और ईरान के नेताओं के अलावा मेजबान कजाकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई नेताओं से मुलाकात होगी। भारत ने 2023 में एससीओ की अध्यक्षता की, लेकिन शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मोड में किया था। फरवरी में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को हल करने के लिए उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता का एक नया दौर आयोजित किया, जिसमें दोनों पक्षों ने जमीन पर ‘शांति और स्थिरता’ बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन किसी भी सफलता का कोई संकेत नहीं मिला।मोदी ने समरकंद में 2022 के एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कोई बैठक नहीं की थी। बाद में बाली जी20 शिखर सम्मेलन में शी और मोदी ने संक्षिप्त बातचीत की थी। फिर 2023 में दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में छोटी बैठक हुई थी।

सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन के साथ संबंधों में खटास जारी है। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की धर्मशाला में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात और चीन के लिए सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति न देने के निर्णय का संकेत साफ है- रिश्तों में बर्फ जमी हुी है। यह बिल्कुल अलग बात है कि चीन के साथ व्यापार बढ़ रहे हैं और भारतीय उद्योग जगत चीनी प्रफेशनल्स के लिए वीजा में ढील देने की मांग भी कर रहा है। भारत ने बीजिंग और चीन में अन्य वाणिज्य दूतावासों से जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

मामले की जानकारी रखने वालों ने कहा कि चीन अभी भी लद्दाख में कई फ्लैश पॉइंट्स पर गलवान से पहले की स्थिति बहाल करने पर सहमत नहीं हुआ है, जिससे संबंध सामान्य नहीं हो पा रहे हैं। फरवरी में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को हल करने के लिए उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता का एक नया दौर आयोजित किया, कट्टरता की पृष्ठभूमि में आतंकवाद का मुकाबला करना होगा। मोदी ने यह सोचकर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए हामी भरी थी कि वहां रूस, चीन और ईरान के नेताओं के अलावा मेजबान कजाकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई नेताओं से मुलाकात होगी। भारत ने 2023 में एससीओ की अध्यक्षता की, लेकिन शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मोड में किया था।जिसमें दोनों पक्षों ने जमीन पर ‘शांति और स्थिरता’ बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन किसी भी सफलता का कोई संकेत नहीं मिला।

उस बैठक में भारतीय पक्ष ने देपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों के समाधान के लिए जोरदार तरीके से दबाव डाला, लेकिन वार्ता में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि दोनों पक्ष प्रासंगिक सैन्य और कूटनीतिक तंत्र के माध्यम से आगे के रास्ते पर बातचीत जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं।शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मोड में किया था। मोदी ने समरकंद में 2022 के एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कोई बैठक नहीं की थी। बाद में बाली जी20 शिखर सम्मेलन में शी और मोदी ने संक्षिप्त बातचीत की थी। फिर 2023 में दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में छोटी बैठक हुई थी। कजाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत एससीओ शिखर सम्मेलन का फोकस यूरेशिया में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव और बढ़ती कट्टरता की पृष्ठभूमि में आतंकवाद का मुकाबला करना होगा।

क्या नीट एग्जाम के वास्तविक पेपर खत्म कर दिए गए थे?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नीट एग्जाम के वास्तविक पेपर खत्म कर दिए गए थे या नहीं! बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने नीट पेपर लीक की जांच तेज कर दी है। रविवार को पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों को एक दिन पहले झारखंड के देवघर से हिरासत में लिया गया था। इसके साथ ही मामले में अब तक 18 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। सीबीआई ने पांच मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की है। बता दें कि बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किये गए अभ्यर्थियों के घर से जले हुए कागजात बरामद किए थे, जिनमें परीक्षा के प्रश्नपत्र की फोटो कॉपी भी थे। बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने इन जले हुए कागजातों का मिलान NTA की ओर से उपलब्ध कराए गए मूल प्रश्नपत्र से किया। जांच में पाया गया कि जले हुए कागजातों में 68 प्रश्न मूल प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं। इतना ही नहीं प्रश्नों के क्रमांक भी मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। EOU की रिपोर्ट के अनुसार, जले हुए कागजातों से एक स्कूल का परीक्षा केंद्र कोड भी बरामद किया गया, जो झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल का था। यह स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल है, जिसे NTA ने परीक्षा केंद्र बनाया था। EOU ने इस मामले की जांच के लिए फोरेंसिक लैब की मदद ली है। EOU की रिपोर्ट के आधार पर ही शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इस मामले की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। ईओयू के अनुसार, जले हुए कागजातों में मिले 68 प्रश्न न केवल मूल प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं, बल्कि इन प्रश्नों के क्रमांक भी मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। हालांकि जले हुए कागजात 5 मई को ही बरामद कर लिए गए थे, जब संदिग्ध अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, EOU को इन कागजातों का मिलान NEET-UG के प्रश्नपत्र से करने में देरी हुई क्योंकि NTA शुरुआत में राज्य सरकार के साथ जानकारी, खासकर प्रश्नपत्र, साझा करने से हिचकिचा रहा था। फिलहाल बिहार EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक कब और कहां से हुआ था।

ओएसिस स्कूल के प्राचार्य एहसानुल हक का कहना है कि हो सकता है कि पैकेट के स्कूल पहुंचने से बहुत पहले पेपर लीक हो गया हो। बता दें कि हजारीबाग में चार परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एहसानुल हक परीक्षा आयोजित करने के लिए जिला समन्वयक थे। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए हक ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि स्कूल के केंद्र अधीक्षक और NTA द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 5 मई (परीक्षा के दिन) की सुबह दो बैंकों में से एक से पैकेट प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि पैकेट स्कूल पहुंचने के बाद निरीक्षक और छात्रों के सामने पेपर वाला पैकेट खोला गया। जब उनसे पूछा गया कि जले हुए स्क्रैप ओएसिस परीक्षा केंद्र का बताया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि अगर स्कूल की ओर से कोई गड़बड़ी होती तो स्कूल के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जाता, लेकिन अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, ना ही पूछताछ किया गया है।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने नीट पेपर लीक मामले अब तक 18 लोग गिरफ्तार कर चुकी है। ईओयू के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांच लोगों की पहचान बलदेव कुमार, मुकेश कुमार, पंकू कुमार, राजीव कुमार और परमजीत सिंह के रूप में हुई है। ये सभी नालंदा के रहने वाले हैं। कुख्यात संजीव कुमार उर्फ लुटन मुखिया गिरोह से जुड़े बलदेव कुमार को परीक्षा से एक दिन पहले नीट-यूजी परीक्षा की हल की गई उत्तर पुस्तिका कथित तौर पर उसके मोबाइल फोन पर पीडीएफ प्रारूप में प्राप्त हुई थी। बयान में मुखिया गिरोह के सदस्यों पर कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप लगाया गया है।

EOU के अनुसार, अब तक की जांच से पता चला है कि बलदेव और उसके साथियों ने चार मई को पटना के राम कृष्ण नगर में एक घर में इकट्ठा हुए छात्रों को हल की गई उत्तर पुस्तिकाएं दी गई थी ताकि वे इसे याद कर लें। बयान में कहा गया कि अभ्यर्थियों को पहले से गिरफ्तार किए गए दो लोगों-नीतीश कुमार और अमित आनंद द्वारा वहां लाया गया था। बयान के अनुसार, लीक हुआ नीट-यूजी प्रश्नपत्र मुखिया गिरोह द्वारा झारखंड के हजारीबाग के एक निजी स्कूल से प्राप्त किया गया था। जांच टीम ने पटना के एक घर से बरामद आंशिक रूप से जले हुए प्रश्नपत्र का मिलान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रश्नपत्र से किया, जिससे प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि हुई।