Friday, March 13, 2026
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NEET जैसी बड़ी एग्जाम पर क्या बोले प्रशासन के लोग?

आज हम आपको बताएंगे कि NEET जैसी बड़ी परीक्षा पर प्रशासन के लोगों ने क्या कहा है! नीट पेपर लीक केस में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। अलग-अलग राज्यों में शिकायतों के मद्देनजर जांच को लेकर स्पेशल टीमें बनाई गई है। इस बीच केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि NEET-UG 2024 ‘पेपर लीक’ मामला लोकल स्तर पर हुआ है। इसमें कोई बड़ा गैंग शामिल नहीं है। पूरे देश के 4,500 केंद्रों पर परीक्षा में एक लाख छात्रों का चयन इसका प्रमाण है। सरकार ने यह भी कहा कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को दूर करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में सुधार किया जाएगा, जो अनियमितताओं के आरोपों के बाद आवश्यक हो गया है। अगली NEET-UG परीक्षा से पहले यह सुधार किए जाएंगे। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि छात्रों में दहशत फैलाने वाले कोचिंग सेंटरों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इस साल जनवरी में कोचिंग सेंटरों पर जारी की गई एक केंद्रीय सलाह का ठीक से पालन नहीं किया गया है और इस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। NEET-UG में जिन 1,563 उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, उनमें से 52 फीसदी ने दोबारा परीक्षा दी। शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि सरकार छात्रों को ग्रेस मार्क्स देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है।

बिहार में NEET ‘पेपर लीक’ मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने अपनी जांच तेज करते हुए रविवार को पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां झारखंड के देवघर में की गईं, जिससे इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 18 हो गई है। गिरफ्तार किए गए पांचों लोग नालंदा के रहने वाले हैं। इनके नाम बलदेव कुमार, मुकेश कुमार, पंकू कुमार, राजीव कुमार और परमजीत सिंह हैं। NTA ने गड़बड़ी का पता चलने के बाद बिहार के केंद्रों से 17 और छात्रों को बाहर किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी संदर्भ के आधार पर सीबीआई ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। करीब 24 लाख छात्रों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी है। मंत्रालय को कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कई शहरों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग माननी पड़ी। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पांच मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, धोखाधड़ी के कुछ मामले सामने आए हैं। एक समीक्षा के बाद परीक्षा प्रक्रिया के संचालन में पारदर्शिता के लिए यह निर्णय लिया गया कि मामले को व्यापक जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया जाए। बता दें कि EOU की रिपोर्ट के अनुसार, जले हुए कागजातों से एक स्कूल का परीक्षा केंद्र कोड भी बरामद किया गया, जो झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल का था। यह स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल है, जिसे NTA ने परीक्षा केंद्र बनाया था। EOU ने इस मामले की जांच के लिए फोरेंसिक लैब की मदद ली है। EOU की रिपोर्ट के आधार पर ही शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इस मामले की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। ईओयू के अनुसार, जले हुए कागजातों में मिले 68 प्रश्न न केवल मूल प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं, बल्कि इन प्रश्नों के क्रमांक भी मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। हालांकि जले हुए कागजात 5 मई को ही बरामद कर लिए गए थे, जब संदिग्ध अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, EOU को इन कागजातों का मिलान NEET-UG के प्रश्नपत्र से करने में देरी हुई क्योंकि NTA शुरुआत में राज्य सरकार के साथ जानकारी, खासकर प्रश्नपत्र, साझा करने से हिचकिचा रहा था। फिलहाल बिहार EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक कब और कहां से हुआ था।

ओएसिस स्कूल के प्राचार्य एहसानुल हक का कहना है कि हो सकता है कि पैकेट के स्कूल पहुंचने से बहुत पहले पेपर लीक हो गया हो। बता दें कि हजारीबाग में चार परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एहसानुल हक परीक्षा आयोजित करने के लिए जिला समन्वयक थे। ‘बताया कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि स्कूल के केंद्र अधीक्षक और NTA द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 5 मई (परीक्षा के दिन) की सुबह दो बैंकों में से एक से पैकेट प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि पैकेट स्कूल पहुंचने के बाद निरीक्षक और छात्रों के सामने पेपर वाला पैकेट खोला गया। जब उनसे पूछा गया कि जले हुए स्क्रैप ओएसिस परीक्षा केंद्र का बताया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि अगर स्कूल की ओर से कोई गड़बड़ी होती तो स्कूल के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जाता, लेकिन अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, ना ही पूछताछ किया गया है।

जब संसद के पहले दिन ही हो गया हंगामा!

हाल ही में संसद के पहले दिन ही हंगामा होता हुआ नजर आ गया! सत्ता पक्ष के ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे के जवाब में ‘संविधान बदल देंगे’ के नैरेटिव से विपक्ष ने इस लोकसभा चुनाव में खुद को मजबूत कर लिया। इसलिए विपक्ष और खासकर कांग्रेस पार्टी संविधान पर राजनीति को अगले स्तर तक ले जाने में जुटी है। 18वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र आयोजित हुआ तो पहले दिन राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी सासंदों ने हाथों में संविधान थामे रखा। यहां तक कि गृह मंत्री अमित शाह जब सांसद पद और इससे जुड़ी गोपनीयता का शपथ लेने जा रहे थे, तब राहुल गांधी ने संविधान की प्रति लहराई। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में प्रवेश से पहले देश में आपातकाल लागू किए जाने के 50 वर्ष पूरे होने पर जनता को जागरूक करने का अभियान चलाने का ऐलान किया। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे हत्थे से उखड़ गए। उन्होंने पीएम मोदी को कठोरता से जवाब दिया। दरअसल, प्रधानमंत्री ने संसद सत्र के पहले दिन मीडिया को संबोधित करने के दौरान कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार तीसरे कार्यकाल में तीन गुना ज्यादा काम करेगी। विपक्ष को भी नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि देश को एक जिम्मेदार विपक्ष की जरूरत है। पीएम मोदी ने अपने लहजे से स्पष्ट कर दिया है कि भले ही इस बार एनडीए की सीटें घट गई हैं, लेकिन विपक्ष को हावी होने का मौका नहीं दिया जाएगा। इसके उलट पीएम ने कांग्रेस को कोसने का मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार में आपातकाल लगाए जाने का जिक्र करते हुए कहा, ‘कल भारतीय लोकतंत्र पर लगे काले धब्बे के 50 साल पूरे हो रहे हैं। नई पीढ़ी यह नहीं भूलेगी कि कैसे भारतीय संविधान को खत्म कर दिया गया। कैसे देश को जेल में तब्दील कर दिया गया और लोकतंत्र को बंदी बना लिया गया। इस 50वीं बरसी पर देश यह संकल्प लेगा कि ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा।’

पीएम मोदी की टिप्पणी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तीखी प्रतिक्रिया आई। खरगे ने कहा, ‘आप विपक्ष को चेतावनी दे रहे हैं। आप 50 साल पुराने आपातकाल की बात कर रहे हैं, लेकिन पिछले 10 सालों में अघोषित आपातकाल को भूल गए हैं।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बात की जानकारी है कि इस चुनाव में हुआ क्या। विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर अटैक कर कर रहा है। शायद प्रधानमंत्री मोदी को भी यह बात पता थी कि विपक्ष किस तैयारी के साथ आज आया हुआ है। तभी उन्होंने सत्र की शुरुआत के ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए ऐसी बात कह दी जो कांग्रेस को नागवार गुजरी। प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा काला धब्बा करार देते हुए कहा कि इसकी 50वीं बरसी के मौके पर देशवासी यह संकल्प लें कि भारत में फिर कभी कोई ऐसा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।

खरगे ने कहा कि जनता ने ‘मोदी जी के खिलाफ जनादेश दिया है’। कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि विपक्षी गठबंधन संसद के अंदर और बाहर लोगों की आवाज उठाएगा।

उधर, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश और उसके लोगों की सेवा के लिए लगातार सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी, लेकिन साथ ही उन्होंने विपक्ष के लिए कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत को एक जिम्मेदार विपक्ष की जरूरत है, लोग नारेबाजी नहीं बल्कि सार चाहते हैं, वे बहस चाहते हैं, संसद में नाटक और हंगामा नहीं बल्कि परिश्रम चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 50 साल पहले के आपातकाल का जिक्र किया, लेकिन पिछले 10 वर्षों के उस ‘अघोषित आपातकाल’ को भूल गए जिसका जनता ने इस लोकसभा चुनाव में अंत कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को उम्मीद थी कि संसद सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नीट और दूसरी परीक्षओं में पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मौन साध लिया। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी अपने रस्मी संबोधन में आज जरूरत से ज्यादा बोले। इसे कहते हैं, रस्सी जल गई, बल नहीं गया।मुझे उम्मीद है कि विपक्ष लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।’ उन्होंने कहा कि देश को सांसदों से बहुत उम्मीदें हैं और उनसे आग्रह किया कि वे जन कल्याण के लिए हर संभव कदम उठाएं। पीएम ने नवनिर्वाचित सांसदों को बधाई दी और कहा कि यह पहली बार है जब नए सांसद नए संसद भवन में शपथ लेंगे।

संसद के पहले सत्र में किन-किन मुद्दों को पीएम मोदी ने उठाया?

आज हम आपको बताएंगे कि संसद के पहले सत्र में पीएम मोदी ने किन-किन मुद्दों को उठाया है! 18 वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत हो गई। लोकसभा के भीतर सोमवार विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद कुछ बताने की कोशिश कर रहे थे। सांसदों को देखकर ऐसा लगा कि जो बात चुनावों के दौरान उनकी ओर से बताने की कोशिश हुई वह उसे चुनाव बाद भी जारी रखे हुए हैं। विपक्षी दलों के सांसद संविधान की कॉपी लेकर संसद पहुंचे थे। चुनाव के दौरान भी विपक्षी दलों की ओर से यह कहा गया कि बीजेपी वाले सत्ता में लौटे तो संविधान बदल देंगे। आरक्षण खत्म कर देंगे। चुनाव में बीजेपी को नुकसान भी हुआ खासकर यूपी में। यूपी में सपा ने 37 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। कांग्रेस-सपा गठबंधन को कुल 43 सीटें मिलीं। इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसका असर भी आज लोकसभा में दिखा जब सपा सांसदों को सदन में बैठने के लिए पहली लाइन मिली। विपक्षी दल एक ओर जहां संविधान की कॉपी के साथ संसद पहुंचे थे तो वहीं सत्र की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने 25 जून का खास जिक्र किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बात की जानकारी है कि इस चुनाव में हुआ क्या। विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर अटैक कर कर रहा है। शायद प्रधानमंत्री मोदी को भी यह बात पता थी कि विपक्ष किस तैयारी के साथ आज आया हुआ है। तभी उन्होंने सत्र की शुरुआत के ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए ऐसी बात कह दी जो कांग्रेस को नागवार गुजरी। प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा काला धब्बा करार देते हुए कहा कि इसकी 50वीं बरसी के मौके पर देशवासी यह संकल्प लें कि भारत में फिर कभी कोई ऐसा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी इस बात को कभी नहीं भूलेगी कि उस समय कैसे देश के संविधान को पूरी तरह नकार दिया गया था, देश को जेल खाना बना दिया गया था और लोकतंत्र को पूरी तरह दबोच दिया गया था। उन्होंने कहा आपातकाल के ये 50 साल इस संकल्प के हैं। गौरव के साथ हमारे संविधान की रक्षा करते हुए… भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करते हुए… देशवासी ये संकल्प करेंगे कि भारत में फिर कभी कोई ऐसी हिम्मत नहीं करेगा जो 50 साल पहले की गई थी और लोकतंत्र पर काला धब्बा लगा दिया गया था। देश में 25 जून, 1975 को आपातकाल घोषित किया गया था और यह 21 मार्च, 1977 तक जारी रहा। इस अवधि को नागरिक स्वतंत्रता के निर्मम दमन के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस कदम का विरोध करने वाले नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 50 साल पहले के आपातकाल का जिक्र किया, लेकिन पिछले 10 वर्षों के उस ‘अघोषित आपातकाल’ को भूल गए जिसका जनता ने इस लोकसभा चुनाव में अंत कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को उम्मीद थी कि संसद सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नीट और दूसरी परीक्षओं में पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मौन साध लिया। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी अपने रस्मी संबोधन में आज जरूरत से ज्यादा बोले। इसे कहते हैं, रस्सी जल गई, बल नहीं गया। वहीं विपक्ष के प्रदर्शन पर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संविधान पर हमला स्वीकार्य नहीं है इसलिए हमने संविधान की प्रतियां पकड़ी हुई हैं।

पहले दिन संसद परिसर के नजारे को देखकर इस बात के पूरे आसार हैं कि यह सत्र काफी हंगामेदार होगा। इंडिया गठबंधन भले ही विपक्ष में है लेकिन उसकी ओर से यह बार-बार कहा जा रहा है कि हार पीएम मोदी की हुई है। लोकसभा चुनाव नतीजों से कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों का उत्साह काफी बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी को भी पता है कि वह विपक्ष के निशाने पर हैं। आज उनकी ओर से जिन बातों का जिक्र किया गया वह ऐसे ही नहीं था। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद यह पहला सत्र है और आने वाले वक्त में नतीजों का असर समय-समय पर दिखाई देगा इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

जब संसद में पहली बार आमने-सामने हुए पक्ष विपक्ष!

हाल ही में संसद में पहली बार पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हुए हैं! सोमवार को 18वीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू हुआ, जहां सदन के भीतर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक अलग-अलग अंदाज में दिखाई दिए। पहले दिन जहां नए चुने गए सांसदों को शपथ लेनी थी तो वहीं दूसरी ओर कई सांसदों के परिजन भी इस मौके पर वहां पहुंचे दिखाई दिए। सोमवार को सदन में जहां एक ओर कुछ दलों ने अपनी पहचान के लिए रंग विशेष का सहारा लिया तो वहीं कुछ सांसदों पर लोगों की निगाहें टिकी नजर आईं। सोमवार को राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ सत्र में सबसे पहले सदन में लोकसभा के महासचिव ने लोकसभा में नवनिर्वाचित सांसदों की सूची हिंदी व अंग्रेजी में पटल पर रखी, उसके बाद प्रोटेम स्पीकर (कार्यकारी अध्यक्ष)के तौर पर भर्तहरि महताब ने प्रोटेम स्पीकर के पैनल का ऐलान किया। सदन में सबसे पहले पीएम मोदी, फिर प्रोटेम स्पीकर के पैनल, उसके बाद मोदी सरकार के मंत्रियों और फिर अक्षरों के क्रम में राज्यवार सांसदों ने शपथ ली। सदन में सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने शपथ ली। ऑफवाइट कुर्ते व जैकेट में जब पीएम मोदी शपथ लेने के लिए पोडियम पर पहुंचे तो पूरा सदन में अचानक कोलाहल शुरू हो गया। सत्तापक्ष जहां इस दौरान लगातार ‘भारत माता की जय’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाता दिख तो वहीं विपक्ष संविधान की कॉपी दिखाता नजर आया। पीएम मोदी के शपथ के दौरान कांग्रेस के नेता रहुल गांधी सबसे पहले संविधान की कॉपी लेकर खड़े हुए, उसके बाद तमाम विपक्षी सदस्य संविधान की प्रति दिखाने लगे। जब पीएम संविधान और लाेकतंत्र शब्द का उच्चारण कर रहे थे ताे उस समय कटाक्ष करते हुए विपक्षी दल ‘ओहो-ओहो’ करता दिखा। दूसरी ओर पीएम के बाद जब प्रोटेम स्पीकर पैनल के शपथ लेने की बारी आई विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष की ओर डीएमके के टीआर बालू, कांग्रेस के के सुरेश व टीएमसी के सुदीप बंधोपाध्याय को पैनल में रखा गया, लेकिन विपक्ष पैनल का विरोध करता दिखा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने प्रोटेम स्पीकर का चयन करते समय संसदीय मर्यादाओं की अनदेखी की। वहीं गृह मंत्री अमित शाह जब शपथ लेने के लिए आए तो भी विपक्षी सांसदों ने संविधान की प्रतियां लहराईं। देश में नीट एग्जाम को मचे सियासी बवाल के बीच जब देश के शिक्षा मंत्री शपथ लेने पहुंचे ताे विपक्षी खेमा ‘नीट-नीट’ ‘चीट-चीट’ की आवाज बुलंद करते उन्हें हूट करता नजर आया।

पहले दिन सदन में चुहलबाजी भी खूब नजर आई। हालांकि यह दाेनों ही तरफ से थी, लेकिन विपक्ष खेमा इसमें माहिर नजर आया। विपक्ष शपथ लेने वाले सदस्यों के हिसाब से मजाक व चुहल करते दिखे। जब मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान शपथ लेकर रिपाेर्टर डेस्क पर दस्तखत करने के लिए चले तो विपक्षी ‘मामा-मामा’ कहकर उनसे चुहल करता दिखा। इस दौरान टीएमसी के कल्याण बनर्जी पहले हाफ में लगातार कमेंट और मजाक करते दिखे। जेडीयू के ललन सिंह जब शपथ लेने के लिए उठे तो कल्याण बनर्जी सदन में लोकप्रिय हिंदी गाना गाते नजर आए- ‘दोस्त-दोस्त ना रहा…’ फिर कहने लगे कि अरे यह तो हमारे बहुत पुराने दोस्त हैं। बिहार के सीनियर नेता व मंत्री गिरिराज सिंह पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने मु़स्कुराते हुए कहा कि आपकी वजह से हमारी सीटें बढ़ गईं। जब टीडीपी के सांसद शपथ लेने पहुंचे तो विपक्ष मजाकिया अंदाज में उनसे कहने लगा कि हमारी तरफ आ जाइए। उल्लेखनीय है कि इंडिया गठबंधन की निगाहें अभी भी टीडीपी व जेडीयू पर लगी हैं। उन्हें लगता है कि आने वाले समय में ये दल एनडीए छोड़ सकते हैं। वहीं आंध्र प्रदेश की बीजेपी अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी शपथ लेने के लिए चलीं तो विपक्ष ने चुहल करते हुए छेड़ा कि क्या स्पीकर बना रहे हैं? दरअसल, स्पीकर की रेस में पुरंदेश्वरी का नाम भी है। दूसरी ओर लंच टाइम होता देख बीजेपी सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी लगातार आसन से लंच टाइम के लिए सदन का लंच ब्रेक करने की लगातार गुहार लगाते दिखे।

पहले दिन सदन में दलों का कलर कोड दिखा ताे कई सांसदों का पहनावा व वेशभूषा नजरें खींचता नजर आया। सदन में जहां टीडीपी सांसद पीले अंगवस्त्र पहने अलग नजर आ रहे थे तो वहीं इस बार बड़ी संख्या के साथ निचले सदन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते एसपी ने लाल टोपी के साथ गले में गुलाबी गमछे को अपना ड्रेस व कलर कोड बनाया। हालांकि एसपी के सभी सांसदों के सिर पर लाल टोपी भले ही न हो, लेेकिन महिला सांसदों सहित उनके सभी सदस्यों के गले में गुलाबी अंगोछा जरूर था। राहुल गांधी अपनी ट्रेड मार्क बन चुकी वाइट टीशर्ट व ब्लैक ट्राउजर में दिखे तो वहीं एलजेपी सांसद चिराग पासवान वाइट कुर्ते, ब्लू डेलिम में माथे पर चौड़ा तिलक लगाए दिखे। शपथ लेने के बाद उन्होंने बाकायदा पीएम मोदी की पास पहुंच कर उन्हें झुककर प्रणाम किया। मंडी सांसद कंगना रनौत ऑफ वाइट साड़ी ब्लाउज में दिखीं तो वहीं केरल के त्रिशुर से सांसद गोपी सुरेश अपने पारंपरिक पहनावे व वाइट शूज में हाथों में बड़ी बड़ी अंगूठियों के साथ शपथ रजिस्टर में दस्तखत करते दिखे। मध्य प्रदेश के देवास की सांसद अनीता चौहान अपनी पारंपरिक भूषा के साथ चांदी की ढेर सारी पारंपरिक जूलरी में शपथ लेने पहुंचीं।

पहले दिन लोकसभा में तमाम सदस्यों ने हिंदी व अंग्रेजी के साथ-साथ तमाम क्षेत्रीय भाषाओं व संस्कृत में शपथ ली। इनमें गुजराती, ओडिया, तेलुगु, मराठी, असमी, बांग्ला, मलयालम, कन्नड़, डोगरी जैसी भाषाएं शामिल थीं। वहीं कुछ सदस्य शपथ लेने के बाद सीधे अपनी सीट की ओर चल दिए, तब उन्हें साथी सांसदों या लोकसभा सचिवालय के स्टाफ द्वारा साइन करने की याद दिलाई गई। भूलने वालों में कर्नाटक के पूर्व सीएम एसडी कुमारस्वामी भी शामिल थे।

मणिपुर में हिंसा और मोहन भागवत की सलाह क्या मानेगी बीजेपी?

यह एक महत्वपूर्ण सवाल बनकर रह गया है कि मणिपुर में हिंसा और मोहन भागवत की सलाह को बीजेपी मानेगी या नहीं! लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के द्वितीय समापन समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक साल से हिंसा की आग में जल रहा है। मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है। इसे प्राथमिकता से करने पर विचार करना चाहिए। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि काम करें, पर मैंने किया इसका अहंकार ना पालें, वही सही सेवक है। संघ प्रमुख के इस संबोधन को केंद्र की मोदी सरकार के लिए बड़े मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि चुनाव सहमति बनाने की प्रक्रिया है। चुनाव प्रचार में एक दूसरे को लताड़ना, तकनीक का दुरुपयोग, असत्य प्रसारित करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोधी की जगह प्रतिपक्ष कहना चाहिए। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय के समापन में भागवत ने कहा कि चुनाव के आवेश से मुक्त होकर देश के सामने उपस्थित समस्याओं पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र में हर पांच साल होने वाली घटना है। हम अपना कर्तव्य करते रहते हैं लोकमत परिष्कार का। प्रतिवर्ष करते हैं, प्रति चुनाव में करते हैं, इस बार भी किया है। भागवत ने कहा कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है। इस पर प्राथमिकता से उसका विचार करना होगा।

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय के समापन में भागवत ने कहा कि चुनाव के आवेश से मुक्त होकर देश के सामने उपस्थित समस्याओं पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि अभी चुनाव संपन्न हुए, उसके परिणाम भी आए। सरकार भी बन गई, यह सब हो गया। लेकिन उसकी चर्चा अभी तक चलती है। जो हुआ वह क्यों हुआ, कैसे हुआ, क्या हुआ? यह अपने देश के प्रजातांत्रिक तंत्र में हर पांच साल में होने वाली घटना है। उसके अपने नियम हैं। डायनेमिक्स के अनुसार होता है, लेकिन यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है। समाज ने अपना मत दे दिया, उसके अनुसार सब होगा। क्यों, कैसे, इसमें हम लोग नहीं पड़ते। हम लोकमत परिष्कार का अपना कर्तव्य करते रहते हैं। हर चुनाव में करते हैं, इस बार भी किया है। बाकी क्या हुआ इस चर्चा में नहीं पड़ते।

भागवत ने कहा कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है। इस पर प्राथमिकता से उसका विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि हजारों सालों के भेदभावपूर्ण बर्ताव ने विभाजन की खाई बनाई और गुस्सा भी पैदा किया। उन्होंने कहा कि भगवान ने सबको बनाया है। भगवान की बनाई कायनात के प्रति अपना भावना क्या होनी चाहिए? ये सोचने का विषय है। संघ प्रमुख ने कहा कि जो मर्यादा का पालन करते हुए काम करता है, गर्व करता है किन्तु लिप्त नहीं होता है, अहंकार नहीं करता है, वही सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी है।

संघ प्रमुख ने कहा हजारों वर्षों से जो पाप हमने किया उसका प्रक्षालन करना पड़ेगा। ऐसे ही आपस में मिलना जुलना है। रोटी-बेटी सब प्रकार के व्यवहार होने दो। लेकिन जो बाहर की विचारधारा आई हैं, यह उनकी प्रकृति ऐसी थी। हम ही सही बाकी सब गलत। अब उसको ठीक करना पड़ेगा क्योंकि वह आध्यात्मिक नहीं है। इन विचारधाराओं में जो अध्यात्म है, उसको पकड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पैगंबर साहब का इस्लाम क्या है, सोचना पड़ेगा। ईसा मसीह की ईसाइयत क्या है सोचना पड़ेगा। भगवान ने सबको बनाया है। भगवान की बनाई जो कायनात है, उसके प्रति अपनी भावना क्या होनी चाहिए सोचना पड़ेगा।भागवत ने कहा कि सोच समझ के जो समय के प्रवाह में विकृतियां आई हैं, उसको हटाकर यह जानकर कि मत अलग हो सकते हैं, तरीके अलग हो सकते हैं। सब अलग हो सकता है। हमको इस देश को अपना मानकर, उसके साथ अपना भक्तिपूर्ण संबंध स्थापित कर, इस देश के पुत्र सब अपने भाई हैं यह जानकर व्यवहार करना पड़ेगा।

भागवत ने कहा कि समाज में एकता चाहिए, लेकिन अन्याय होता रहा है, इसलिए आपस में दूरी है। मन में अविश्वास है, हजारों वर्षों का काम होने के कारण चिढ़ भी है। अपने देश में बाहर से आक्रामक आए, आते समय अपना तत्वज्ञान भी लेकर आए। यहां के कुछ लोग विभिन्न कारणों से उनके विचारों के अनुयाई बन गए, ठीक है। अब वह लोग चले गए, उनके विचार रह गए। उसको मानने वाले रह गए, हैं तो यहीं के। विचार वहां के हैं तो यहां की परंपरा को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बस एक बात है कि भारत के बाहर के विचारों में जो हम ही सही बाकी सब गलत है, उसको छोड़ो। मतांतरण वगैरा नहीं करने की जरूरत है। सब मत सही है, सब समान है तो फिर अपने मत पर ही रहना ठीक है। दूसरों के मत का भी उतना ही सम्मान करो।

आखिर मोहन भागवत के बयान के पीछे क्या है कहानी?

आज हम आपको बताएंगे कि मोहन भागवत के बयान के पीछे की कहानी क्या है! मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के ठीक एक दिन बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर, चुनाव,राजनीतिक दलों के रवैये पर बात की। भागवत ने सभी धर्मों को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान है। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद बाहर का अलग माहौल है। नई सरकार भी बन गई। संघ नतीजों के विश्लेषण में नहीं उलझता। संघ इसमें नहीं पड़ता। लोगों ने जनादेश दिया है और सबकुछ उसी अनुसार होगा। RSS चीफ ने मणिपुर के मसले पर काफी कुछ कहा और शांति बहाली नहीं होने पर चिंता व्यक्त की। मोहन भागवत की ओर से जो बयान सामने आए उसके बाद विपक्षी दलों को मोदी सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया। संघ प्रमुख के बयान को बीजेपी चीफ जेपी नड्डा के बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि नड्डा ने कुछ दिन पहले कहा था कि अब बीजेपी अब अपने पैरो पर खड़ी है। यही नहीं, इस बार के चुनाव में बीजेपी ने संघ से कोई मदद भी नहीं मांगी थी। पिछले दो चुनावों में संघ यूपी से लेकर बिहार तक काफी एक्टिव था। लेकिन इस बार आरएसएस यूपी से भी दूर रहा। सूत्रों के मुताबिक नड्डा के बयान के बाद तो स्वयंसेवक भी एक्टिव नहीं रहे। अब भागवत के बयान को चुनाव परिणाम के बाद नड्डा के बयान से ही जोड़ा जा रहा है।

कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की मणिपुर में शांति बहाली नहीं होने पर चिंता व्यक्त किए जाने संबंधी टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष किया। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि भागवत ही ‘आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी’ को मणिपुर का दौरा करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी) संजय राउत ने कहा कि सरकार तो उनके ही आशीर्वाद से चल रही है, बोलने से क्या होता है। मोहन भागवत के बयान पर एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि मैं उनके बयान का स्वागत करती हूं क्योंकि मणिपुर भारत का हिस्सा है। हम अपने लोगों को इतनी पीड़ा में देखते हैं यह बेहद परेशान करने वाला है।

नागपुर में आरएसएस प्रशिक्षुओं की एक सभा को संबोधित करते हुए सोमवार मोहन भागवत ने कहा था कि 10 साल पहले मणिपुर में शांति थी। ऐसा लगा था कि वहां बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है, लेकिन राज्य में अचानक हिंसा बढ़ गई है। आरएसएस प्रमुख ने कहा,मणिपुर की स्थिति पर प्राथमिकता के साथ विचार करना होगा। चुनावी बयानबाजी से ऊपर उठकर राष्ट्र के सामने मौजूद समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने चुनावी बयानबाजी से बाहर आकर देश के सामने मौजूद समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा,मणिपुर पिछले एक साल से शांति स्थापित होने की प्रतीक्षा कर रहा है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल चुनाव के दौरान भी मणिपुर हिंसा मामले में मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे।

मोहन भागवत ने कहा कि अभी चुनाव संपन्न हुए, उसके परिणाम भी आए। सरकार भी बन गई, यह सब हो गया लेकिन उसकी चर्चा अभी तक चलती है। जो हुआ वह क्यों हुआ, कैसे हुआ, क्या हुआ। यह अपने देश के प्रजातांत्रिक तंत्र में प्रति 5 साल में होने वाली घटना है। समाज ने अपना मत दे दिया, उसके अनुसार सब होगा। क्यों, कैसे, इसमें हम लोग नहीं पड़ते। हम लोकमत परिष्कार का अपना कर्तव्य करते रहते हैं। हर चुनाव में करते हैं, इस बार भी किया है। बाकी क्या हुआ इस चर्चा में नहीं पड़ते।

मोहन भागवत ने कहा कि तकनीक की मदद से झूठ को पेश किया गया। ऐसे देश कैसे चलेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष को विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। वे विपक्ष हैं और एक पक्ष को उजागर कर रहे हैं इसलिए उनकी राय भी सामने आनी चाहिए। पिछले दो चुनावों में संघ यूपी से लेकर बिहार तक काफी एक्टिव था। लेकिन इस बार आरएसएस यूपी से भी दूर रहा। सूत्रों के मुताबिक नड्डा के बयान के बाद तो स्वयंसेवक भी एक्टिव नहीं रहे। अब भागवत के बयान को चुनाव परिणाम के बाद नड्डा के बयान से ही जोड़ा जा रहा है।चुनाव लड़ने की एक गरिमा होती है उस गरिमा का ख्याल नहीं रखा गया। ऐसा करना जरूरी है क्योंकि हमारे देश के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई है। पिछले दस सालों में बहुत सारी सकारात्मक चीजें हुई हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम चुनौतियों से मुक्त हो गए हैं।

क्या अब बीजेपी को नहीं है आरएसएस की जरूरत?

यह सवाल उठने लाजिमी है कि क्या बीजेपी को अब आरएसएस की जरूरत है या नहीं! लोकसभा चुनाव 2024 में इस बार उत्‍तर प्रदेश ने देश की सियासत को झकझोर कर रख दिया। यूपी में भाजपा को तगड़ा झटका लगा, वहीं इंडी गठबंधन को बड़ी ताकत मिली। यूपी में जो एनडीए गठबंधन 2019 में 64 सीटों पर खड़ा था, वही 2024 में 36 सीटों पर फ‍िसल गया। वहीं इंडी गठबंधन यान‍ि सपा और कांग्रेस पिछले चुनावों में 6 सीट जीत सके थे, उन्‍होंने इस बार 43 सीटों पर परचम लहरा दिया। भाजपा के इस बेहद खराब प्रदर्शन में कहीं न कहीं राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की नाराजगी को भी कारण माना जा रहा था। इसी क्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान को भी जोड़कर देखा जा रहा है।  बात जुलाई 2021 की है। करीब 6 महीने बाद यूपी में विधानसभा चुनाव 2022 होना था। राष्‍ट्रीय स्‍वंय सेवक संघ तभी से फील्डिंग में जुट गया था। नए सरकार्यवाह दत्‍तात्रेय होसबोले 2022 के चुनाव तक नागपुर छोड़कर लखनऊ में प्रवास करना शुरू कर रहे थे। उन्‍हें लखनऊ में रहकर प्रदेश के राजनीतिक माहौल को मजूबत करने के मिशन पर लगाया गया था। वहीं भैया जी जोशी राम मंदिर निर्माण प्रॉजेक्‍ट के केयरटेकर थे। इस दौरान बीजेपी के राष्‍ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रभारी राधा मोहन सिंह ने लखनऊ प्रवास में संघ के अहम नेताओं के साथ बैठक की थी। जिसमें 2022 के चुनाव को लेकर संघ ने फीडबैक दिए थे। इसमें सत्‍ता विरोधी लहर की चुनौती से निपटना, कार्यकर्ताओं से नाराजगी काे दूर करना, प्रत्‍याशियों को लेकर जनता में रोष आदि कंट्रोल करने का संदेश था।

यूपी में विधानसभा चुनाव चरण दर चरण आगे बढ़ा तो आरएसएस का ये सपोर्ट जमीन पर दिखाई देने लगा। भाजपा को एंटी इनकमबैंसी का जो नुकसान हो रहा था, उसे संघ ने हर विधानसभा में 400 से 500 छोटी बड़ी बैठकें कर पाटने का काम किया। वोटरों को जागरूक करना उन्‍हें बूथ तक भेजने का काम किया गया। संघ की प्रांत टोली, विभाग कार्यवाह, प्रचारक जिलों के समन्‍वयक, विधानसभा के समन्‍वयकों से सीधा संवाद किया गया। इस पूरे महाआयोजन में भाजपा के प्रभारी, राष्‍ट्रीय संगठन मंत्री गवाह रहे। इस पूरी एक्‍सरसाइज का फल ये हुआ कि आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा यूपी की सत्‍ता पर काब‍िज होकर इतिहास बना दिया। योगी ने दोबारा सत्‍ता संभाली और संघ वापस अपने काम की तरफ लौट गया।

लेकिन दो साल बाद अब लोकसभा चुनाव 2024 में परिस्‍थ‍ितियां बदली हुई थीं। जनवरी में राम मंदिर प्राण प्रतिष्‍ठा से भाजपा आत्‍मविश्‍वास के लबरेज दिखाई दी। मोदी का चेहरा और राम मंदिर का श्रेय के साथ पन्‍ना प्रमुख तक फैल चुका पार्टी का संगठन देख पार्टी के नेता ये मानकर चल चुके थे कि यूपी फतेह तो तय है। भाजपा के इस कांफ‍िडेंस का आभास पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा के एक बयान ने भी दिया। दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय और मौजूदा समय में काफी कुछ बदल चुका है। उन्‍होंने कहा कि पहले हम इतनी बड़ी पार्टी नहीं थे और अक्षम थे, हमें आरएसएस की जरूरत पड़ती थी, लेकिन आज हम काफी आगे बढ़ चुके हैं और अकेले दम पर आगे बढ़ने में सक्षम हैं।

जेपी नड्डा ने कहा था कि पार्टी बड़ी हो गई है और सभी को अपने-अपने कर्तव्य के साथ भूमिकाएं मिल चुकी हैं। आरएसएस एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है और हम एक राजनीतिक संगठन हैं। यह जरूरत का सवाल नहीं है। यह एक वैचारिक मोर्चा है। वो वैचारिक रूप से अपना काम करते हैं और हम अपना। हम अपने मामलों को अपने तरीके से मैनेज कर रहे हैं और राजनीतिक दलों को यही करना चाहिए।

आरएसएस से दूरी का सीधा असर उत्‍तर प्रदेश में भी दिखाई दे रहा था। आमतौर पर चुनाव से पहले ही संघ परिवार और भाजपा के नेताओं की बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। संघ से हर बार तो महत्‍वपूर्ण फीडबैक मिलता था वह भी नहीं मिला। पहली बार इस तरह का रुख देखने को मिला। संघ ने भी इस पर कुछ नहीं कहा और उसने अपने स्‍वयंसेवकों को वैचारिक कार्यक्रमों तक ही समेट लिया। भाजपा के पुराने नेताओं के अनुसार ऐसा लग रहा था चुनाव में हमें संघ परिवार की कोई जरूरत ही नहीं है। एकतरफा निर्णय लिए जा रहे थे संघ परिवार और उसके अनुषांगिक संगठनोंं से पूरी तरह संवादहीनता रही। इसका सीधा असर ये हुआ कि पूरे चुनाव में आरएसएस तटस्‍थ हो गया। वह अपने पूर्व निधार्रित कार्यक्रमों में ही रहा, उसने अपनी पूरी भूमिका समेट ली।

बता दें हर लोकसभा चुनाव से पहले आरएसएस के कार्यकर्ता हर लोकसभा क्षेत्र दर्जनों बैठकें कर लेते हैं। जनता क्‍या सोच रही है, प्रत्‍याशियों के बारे में उनका क्‍या ख्‍याल है, सांसद कितना प्रभावी है, मुददे कौन कौन से हैं, सत्‍ता विरोधी लहर कितनी है आदि का पूरा फीडबैक संघ के पास होता है। ये किसी भी राजनीतिक दल से ज्‍यादा सटीक माना जाता है। संघ से समय-समय पर फीडबैक भी तमाम माध्‍यमों से बीजेपी नेताओं को दिया जाता रहा है। इस बार भी परिस्‍थतियां प्रतिकूल होने का फीडबैक था लेकिन बीजेपी नेताओं ने इस पर गौर ही नहीं किया।

मोहन भागवत ने कहा कि तकनीक की मदद से झूठ को पेश किया गया। ऐसे देश कैसे चलेगा? विपक्ष को विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। वे विपक्ष हैं और एक पक्ष को उजागर कर रहे हैं इसलिए उनकी राय भी सामने आनी चाहिए। चुनाव लड़ने की एक गरिमा होती है उस गरिमा का ख्याल नहीं रखा गया। ऐसा करना जरूरी है क्योंकि हमारे देश के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई है। पिछले दस सालों में बहुत सारी सकारात्मक चीजें हुई हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम चुनौतियों से मुक्त हो गए हैं।

क्या बीजेपी के लिए नुकसानदायक हो सकती है आरएसएस की नाराजगी?

यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या बीजेपी के लिए आरएसएस की नाराजगी नुकसानदायक हो सकती है या नहीं! लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी भारतीय जनता पार्टी पर लगातार निशाना साध रहे हैं। पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। अब कार्यवाहक सरसंघचालक इंद्रेश कुमार ने भी भाजपा का नाम लिए बगैर करारा तंज कसा है। संघ के पदाधिकारियों के बयानों से लाखों लोग यह सोच रहे हैं कि संघ हमेशा से भाजपा का समर्थक रहा है। अब अचानक ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी के खिलाफ बयान दिए जा रहे हैं। दरअसल यह सब अचानक नहीं हुआ है। संघ और बीजेपी के बीच 6 महीने पहले से ही दूरियां बढ़नी शुरू हो गई थी। लोकसभा चुनाव के दौरान ये दूरियां और ज्यादा बढ़ गई। इसी कारण संघ की ओर से बीजेपी पर एक के बाद एक तंज कसे जा रहे हैं। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह को बीजेपी ने बड़े उत्सव के रूप में मनाया। भले ही भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं लेकिन राम मंदिर का काम पूरा होने से पहले प्राण प्रतिष्ठा समारोह होने पर शंकराचार्यों ने एतराज जताया था। शंकराचार्यों का यह भी कहना था कि चुनावी फायदे के लिए बीजेपी मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही प्राण प्रतिष्ठा करा रही है। यह उचित नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक मिथिलेश जैमिनी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शंकराचार्यों की बात से सहमत थे लेकिन प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर संघ कुछ नहीं कर सका। बीजेपी और संघ के बीच की दूरियां तभी से शुरू हो गई थी।

चार दिन पहले यानी सोमवार 10 जून को नागपुर में आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन में ऐसी ही नसीहत दी थी। यहां वो चुनाव, राजनीति और राजनीतिक दलों के रवैये पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों मे सेवक कहलाने का अधिकारी है। भागवत ने आगे कहा जब चुनाव होता है तो मुकाबला जरूरी होता है। दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए। लोकसभा चुनाव के चौथे चरा की वोटिंग के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान आया था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में हम कम सक्षम थे। तब हमें RSS की जरूरत पड़ती थी। अब हम सक्षम हैं। आज BJP खुद अपने आप को चलाती है।’ इस बयान में बीजेपी और आरएसएस के बीच जो खींचतान चल रही थी, उसकी झलक साफ दिखी।

जैमिनी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदूवादी संगठन है जो सभी हिंदुओं को साथ लेकर चलना चाहता है। संघ हमेशा धर्म गुरुओं और शंकराचार्यों के फैसलों से पक्ष में खड़ा रहा है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में धर्म गुरुओं और शंकराचार्यों की अनुमति नहीं ली गई। कुछ शंकराचार्यों ने तो कई टीवी चैनल को खुलकर बयान दिए थे कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह मुहूर्त के हिसाब से ना होकर राजनैतिक फायदे के हिसाब से हो रहा है। कई हिंदू संगठन भी शंकराचार्यों के फैसलों को मानते हैं लेकिन अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शंकराचार्यों की बात नहीं सुनी गई थी। यही वजह है कि संघ भी बीजेपी की मनमानी से नाराज हो गया। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी मनमर्जी से टिकट वितरण किया। भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस हमेशा से भाजपा का खुलकर पक्षधर रहा लेकिन इस बार टिकट वितरण में संघ की अनुमति नहीं ली गई। वोटिंग के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान आया था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में हम कम सक्षम थे। तब हमें RSS की जरूरत पड़ती थी। अब हम सक्षम हैं। आज BJP खुद अपने आप को चलाती है।’ इस बयान में बीजेपी और आरएसएस के बीच जो खींचतान चल रही थी, उसकी झलक साफ दिखी।वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश जैमिनी का कहना है कि जिन नेताओं को संघ टिकट दिलाना चाहता था, पार्टी ने उन नेताओं को टिकट ही नहीं दिया। संघ के पदाधिकारी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की मनमानी से खुश नहीं है।

क्या चुनाव के परिणाम के बाद आरएसएस और बीजेपी हो गए हैं दूर?

वर्तमान में चुनाव के परिणाम के बाद आरएसएस और बीजेपी दूर हो गए हैं! 400 पार’ का नारा बुलंद कर लोकसभा चुनाव में उतरी केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं आए। हालांकि, बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन फिर सरकार बनाने में सफल रहा। नरेंद्र मोदी ने हैट्रिक लगाते हुए लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसी बीच आरएसएस की ओर से कुछ ऐसे बयान आए जिससे सवाल उठे कि क्या संघ और बीजेपी में सबकुछ ठीक है? ये चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने बिना नाम लिए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भगवान राम की भक्ति करने वाली पार्टी अहंकारी हो गई थी, इसलिए 241 पर सिमट गई। इस चुनाव में बीजेपी का अहंकार ध्वस्त हो गया। जैसे ही ये कमेंट आया तो सियासी गलियारों में बीजेपी-आरएसएस में मतभेद की अटकलें तेज हो गईं। इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी कुछ ऐसी टिप्पणी की थी जिससे लगा कि वो भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन से कुछ खफा हैं। यही नहीं बीजेपी-आरएसएस के बीच मतभेद की चर्चा अब राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गई। पहले बताते हैं कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्या कहा था। लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद इसका विश्लेषण करते हुए नागपुर में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने पिछले दिनों टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि जो मर्यादा का पालन करते हुए काम करता है, गर्व करता है लेकिन अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी है। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को नसीहत भी दी। उन्होंने मणिपुर हिंसा का भी जिक्र किया और कहा कि कर्तव्य है कि इस हिंसा को अब रोका जाए। संघ प्रमुख के इस बयान में कहीं न कहीं निशाना प्रधानमंत्री मोदी पर था क्योंकि उन्होंने कई मौकों पर खुद को प्रधान सेवक के तौर पर पेश किया था। चुनाव नतीजों के तुरंत बाद आए मोहन भागवत के कमेंट से सियासी घमासान तेज हुआ ही थी। इसके बाद आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर ने भी बीजेपी नेतृत्व की आलोचना की थी।

ऑर्गनाइजर ने लिखा कि लोकसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के अति आत्मविश्वासी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आईना हैं। हर कोई भ्रम में था और किसी ने लोगों की आवाज नहीं सुनी। संघ के मुखपत्र पांचजन्य में भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन पर लेख छपा, जिसका शीर्षक था लोकसभा चुनाव 2024: सबक हैं और सफलताएं भी। इसमें भी बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए गए। इसी दौरान आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार का बयान आया जिसने मानो बीजेपी और संघ में चल रहे घमासान को सबके सामने रख दिया।

इंद्रेश कुमार ने कहा, ‘इन लोगों ने भगवान राम की भक्ति तो की थी, मगर इनमें धीरे-धीरे अहंकार आ गया। आज भगवान राम ने इनके अहंकार को खत्म कर दिया है। ये लोग इस चुनाव में प्रशंसनीय परिणाम नहीं दे पाए। शायद अब इन्हें लोकतंत्र की ताकत का एहसास हो चुका होगा। हालांकि, यह राम जी की ही कृपा थी कि भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बन सकी, लेकिन इसके बावजूद भी ये लोग राम जी कृपा को नहीं समझ पाए। शायद इसलिए जो शक्ति भाजपा को इस चुनाव में मिलनी चाहिए थी, वो राम जी ने अहंकार के कारण रोक दी।’

आरएसएस नेता ने कहा, ‘आश्चर्य है कि भगवान राम के विरोधी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर पाए। बेशक नंबर एक पर नहीं आ पाए, लेकिन नंबर दो पर बेहतर प्रदर्शन के साथ अपनी जगह मजबूत करने में सफल हुए। इसलिए हम सभी को एक बात समझ लेनी चाहिए कि प्रभु का न्याय विचित्र नहीं है, बल्कि बड़ा ही सत्य है। प्रभु की लीला अपरंपार है, जिसे इंसानी दिमाग नहीं समझ सकता। जिस पार्टी ने भगवान राम की भक्ति की उसे बेशक 241 सीट ही मिली, लेकिन वो सरकार बनाने में सफल हुई और जिन लोगों ने भक्ति नहीं की, वो अच्छा करने में सफल तो हुए, लेकिन सरकार बनाने से चूक गए। जिन लोगों के मन में राम जी को लेकर श्रद्धा नहीं थी, उन्हें 234 पर ही रोक दिया। प्रभु जी ने कहा कि यह तुम्हारा फल यही है, इसलिए मैं कहता हूं कि जो राम की भक्ति करे वो बिना अहंकार के करे और जो ना करे, तो उसका कल्याण प्रभु खुद कर देगा।’

इंद्रेश कुमार ने आगे कहा, ‘भगवान राम भेदभाव नहीं करते। सबको उसकी नीयत के आधार पर प्रतिफल देते हैं। राम जी सजा नहीं देते हैं और ना ही किसी को विलाप करने का मौका देते हैं। राम जी सबको न्याय देते हैं, देते थे और आगे भी देते रहेंगे। राम जी सदैव न्याय प्रिय रहे हैं। मैं आपको बता दूं कि भगवान राम ने 100 वर्षों के शासनकाल के बाद अश्वमेध यज्ञ किया। इसलिए यह यज्ञ हुआ कि कोई रोगी ना रहे, कोई अशिक्षित ना रहे, कोई बेरोजगार ना रहे। इसलिए भगवान 100 वर्षों के शासनकाल के बाद अश्वमेध यज्ञ करवाया करते थे, ताकि संपूर्ण राज्य में शांति बनी रहे। इसी यज्ञ के कारण भगवान राम 11 हजार सालों तक शासन करने में सफल रहे। दुनिया में आज तक कोई भी इतने वर्षों तक शासन नहीं कर सका।’

आरएसएस सूत्रों ने आगे कहा कि आरएसएस और भाजपा के बीच कोई दरार नहीं है। संघ का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी नेताओं समेत लोगों के एक वर्ग का दावा है कि भागवत की नागपुर में की गई टिप्पणी लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को एक संदेश है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘सच्चा सेवक कभी अहंकारी नहीं होता’। सूत्रों ने कहा कि ‘2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद भागवत ने जो भाषण दिए थे और इस बार का जो भाषण है, इनमें बहुत अधिक अंतर नहीं है। किसी भी संबोधन में राष्ट्रीय चुनावों जैसी महत्वपूर्ण घटना का संदर्भ होना लाजिमी है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन इसका गलत मतलब निकाला गया और भ्रम पैदा करने के लिए इसे संदर्भ से बाहर ले जाया गया। उनकी ‘अहंकार’ वाली टिप्पणी कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या बीजेपी के किसी नेता के खिलाफ नहीं थी।’

भले ही आरएसएस की ओर से भागवत और इंद्रेश कुमार के बयानों पर सफाई दी गई हो लेकिन विपक्षी नेताओं ने उनकी टिप्पणियों को हथियार बना लिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि भले ही ‘एक तिहाई’ प्रधानमंत्री की अंतरात्मा या मणिपुर के लोगों की बार-बार की पुकार भी उन्हें पिघला न पाई, शायद भागवत आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी को मणिपुर जाने के लिए राजी कर सकते हैं। फिलहाल आरएसएस ने बीजेपी संग मतभेद की खबरों से इनकार किया है, लेकिन जिस तरह से चुनाव नतीजों के बाद संघ ने तेवर कड़े किए हैं उसने सियासी गलियारे में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

आखिर क्या है वर्तमान में देश के मौसम का मिजाज ?

आज हम आपको बताएंगे कि वर्तमान में देश के मौसम का मिजाज क्या है! दिल्ली-एनसीआर में समेत देशभर के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत मिली है। कहीं वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से बारिश हो रही है, तो कहीं मॉनसून ने दस्तक दे दी है। आज मॉनसून यूपी के पूर्वी हिस्सों में दस्तक देगा। इसके अलावा बिहार के ज्यादातर हिस्सों को भी मॉनसून कवर कर सकता है। मौसम विभाग ने यूपी, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई है।राजधानी दिल्ली में दो दिनों से मौसम सुहावना बना हुआ है। शुक्रवार को राजधानी में रुक-रुक कर बारिश हुई, जिसके बाद से तापमान कम हो गया और लोगों को कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी राजधानी के आसमान में बादल छाए रहेंगे। दिन में बूंदाबांदी की भी संभावना है। इस बीच मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर भी अपडेट दिया है। IMD के अनुसार इस बार दिल्ली में अच्छी बारिश होगी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो जुलाई में ला नीना में बदल जाएगा। इससे मॉनसून में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। वहीं 28 से 30 जून के बीच दिल्ली में मॉनसून दस्तक दे सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार आज पूर्वी यूपी के कई जिलों में मॉनसून दस्तक दे सकता है। आईएमडी ने कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश को पूरी तरह से लू मुक्त घोषित कर दिया है। मौसम विभाग ने 22 जून से लेकर 26 जून तक सहारनपुर, मेरठ, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, खैरी, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, गाजीपुर, सोनभद्र, प्रतापगढ़, फतेहपुर, हमीरपुर, बांदा, झांसी, महोबा और ललितपुर समेत कई जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। ई है। बिहार में मॉनसून 20 जून को ही पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों में मॉनसून पूरे बिहार को कवर कर लेगा। IMD ने 25 जून तक कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। पूर्वानुमान के अनुसार, सक्रिय मॉनसून और कम दबाव के प्रभाव से उत्तर बिहार के अधिकतर जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है। पूर्वानुमान में सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिलों में भारी बारिश की उम्मीद है।

कर्नाटक के तटीय और दक्षिणी जिलों में अनेक स्थानों पर अगले पांच दिनों के दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अनुमान है जिसके मद्देनजर मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गयी है और ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया है कि राज्य के तटवर्ती दक्षिण कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ जिलों में भारी बारिश होने की आशंका है।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी गर्मी से राहत मिली है। 24 से 27 जून तक हिमाचल प्रदेश में गरज चमक के साथ तेज हवाएं चलती रहेंगी।भोपाल समेत मध्य प्रदेश के 26 जिलों में रविवार को मॉनसून पहुंच चुका है। इसके बाद एमपीवालो को गर्मी से काफी राहत मिली है। आज भी एमपी के कई जिलों में बारिश का अलर्ट है। इनमें बैतूल, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिला में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राजस्थान की बात करें तो यहां जयपुर समेत कई राज्यों में मॉनसूनी बारिश हुई है। अभी यहां मॉनसून ने दस्तक नहीं दी है, लेकिन प्री-मॉनसून ने पूरा माहौल बना दिया है। उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में आज मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की है कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही यात्रा के लिए निकले। पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में हीटवेव की संभावना है पर यह बहुत परेशान नहीं करेगी। 27 जून तक यहां ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है। बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि इन जिलों में अनेक स्थानों पर सड़कों पर पानी भरने से आवागमन बाधित हुआ है। इसके अलावा दक्षिणी कर्नाटक के कोडागु, शिवमोग्गा, चिकमंगलूर और हसन जिलों में भी लगभग एक सप्ताह से भारी बारिश हो रही है। कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। कोडागु जिले में भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हैं।