Friday, March 13, 2026
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क्या वर्तमान में माता-पिता करते हैं बच्चों की जरूरत से ज्यादा चिंता?

वर्तमान में माता-पिता बच्चों की जरूरत से ज्यादा चिंता करते हैं! हमारे अंदर एक उधेड़बुन लगी रहती है। हम हर दुख से खुद को बचाना चाहते हैं और अपने परिवार को भी। इसके लिए ढेर सारी कोशिशें भी करते हैं बल्कि ज्यादातर बड़े प्रयास ही इसलिए होते हैं। खूब मन लगाकर पढ़ना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होना, अच्छे पैकेज वाली नौकरी तलाशना या कोई बिजनेश करना। और फिर शादी होते ही लाइफ सेट हो जाएगी… यह हम सोचते हैं। वह मुकाम आ सकता है, जब हम पाते हैं। कि हमारी जिंदगी में अब कोई अनिश्चितता नहीं है, कम से कम पैसे के मामले में। लेकिन जिंदगी में सब कुछ सेट हो जाए, सब कुछ पहले से तय तरीके से आगे बढ़ता रहे तो क्या यह अच्छी स्थिति होगी? यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। आज यह सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा में है। सिंगापुर में रहने वाले भारतीय मूल के एक शख्स का X पर एक पोस्ट सामने आया। इसमें उन्होंने लिखा है कि हमारी जिंदगी बिलकुल परफेक्ट तरीके से चल रही है लेकिन हमें लगता है कि इससे हमारी बेटी बड़ी सॉफ्ट हो गई है। खुद हम भी भूल गए है कि भारत में किस तरह की बदइंतजामियां होती हैं। असल में हम भी सॉफ्ट हो गए हैं। यही वजह है कि हम बेंगलुरु जा रहे हैं ताकि मेरी बेटी जिंदगी की अनिश्चितताओं को समझ सके। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर ढेरों प्रतिक्रियाएं हुईं।

इस फैसले से याद आता है सावजी ढोलकिया का किस्सा। वह गुजरात के हीरा कारोबारी हैं। इनकी हजारों करोड़ की कंपनी नी है और उसकी दुनिया भर में मौजूदगी है। सावजी अपने कर्मचारियों को बोनस में कार और फ्लैट देने के लिए जाने जाते हैं। कुछ साल पहले उनका एक फैसला बड़ा चर्चित हुआ था। इन्होंने अपने इकलौते बेटे को 1 महीने के लिए कोच्चि जाने के लिए प्रोत्साहित किया। मकसद यह था कि उनका बेटा वहां गुमनाम तरीके से जिंदगी बिताए। वह जाने कि गरीब नौकरी और पैसे के लिए कैसे संघर्ष करते हैं। सावजी के 21 साल के बेटे द्रव्य ढोलकिया तब अमेरिका से MBA कर रहे थे। छुट्टियों में घर आए थे। वह 3 जोड़ी कपड़े लेकर कोच्चि चले भी गए। पिता ने 7000 रुपये दिए, लेकिन सिर्फ किसी इमरजेंसी में खर्च के लिए। द्रव्य न तो पिता की पहचान का इस्तेमाल कर सकते थे, न मोबाइल फोन इस्तेमाल कर सकते थे, न 7000 रुपये। एक जगह पर एक हफ्ते से ज्यादा काम नहीं करना था। थोड़े समय के लिए ही सही, उन्होंने जिंदगी के उतार-चढ़ाव को देखा।

आज हम अपने इर्द-गिर्द नजर दौड़ाएं तो क्या देखते हैं? कई लोग मिलेंगे जो अपनी जिंदगी में बेहद सफल माने जाते हैं। इस सफलता के पीछे बड़ा संघर्ष भी होता है। यही व्यक्ति एक अजब-सी इच्छा पाल लेता है कि मेरी फैमिली को संघर्ष न करना पड़े। पत्नी या बच्चे कहीं कार में जाएं तो वे AC कार में बैठें और सीधे मॉल, स्कूल या कहीं और पहुंचें। रास्ते में क्या आया, क्या गया… इस पर ध्यान नहीं जाता। बरसों तक शहर के कई कोनों में घूम आते हैं। लेकिन किसी दिन पत्नी को अकेले मॉल, स्कूल या कहीं और से पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए घर लौटना पड़े तो… नहीं, यह नहीं हो पाएगा। शहर के जिन रूटों और चौराहों से बरसों गुजरते रहे, उनका नाम तक पता नहीं।

बाजार में ताजा सब्ज़ियों की पहचान करना, बैंक की कागजी कार्यवाही को पूरा करना, दोस्ती-रिश्तेदारी में परंपराओं को निभाना… इन सब बातों की सबसे अच्छी पढ़ाई परिवार में ही मिल सकती है। बतौर माता-पिता हम सारे गैजट्स बच्चों के हाथ में थमाकर समझ रहे हैं कि सारी खुशियां कदमों में बिछा दी हैं। हर वीकेंड मॉल घुमाकर, अच्छे रेस्तरां में खाना खिलाकर बेस्ट पापा या मम्मी का गुमान पाल सकते हैं। कभी यह सोचते भी नहीं कि अचानक अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आए तो हमारा जवान होता बेटा हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम की बारीकियों को समझ पाएगा भी या नहीं। सुख के दिनों में हम सोचते हैं, बुरी घटनाओं के बारे में पहले से क्या सोचना!

हम परिवार के लिए हर सुविधा उसके कदमों में बिछा देना चाहते हैं। धीरे-धीरे परिवार भी यह समझने लगता है कि हमें किसी चीज के लिए संघर्ष करने की जरूरत नहीं। समस्या उसके बाद शुरू हो जाती है। समाज में जो हीरो अक्सर सामने आते हैं, वे उन तबकों से उभरते हैं, जो उपेक्षित रहे, जिन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं, चाहे वे पढ़ाई में हों, खेलों में हों, रोजगार में हों या जीवन के दूसरे क्षेत्रों में। फिर हम उनसे अपनी तुलना करते हैं और पाते हैं कि जो सुख-सुविधाएं हमने बटोरीं, वही हमारे बच्चों की भविष्य की तरक्की में बाधाएं बन गईं।

आज समाज में पैसे के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की जो होड़ है, वह सिर्फ अपनी जिंदगी सुरक्षित बनाने की होड़ नहीं है। वह दौड़ इसलिए भी है कि हमारी 7 पीढ़ियों को संघर्ष न करना पड़े। इसे सुनिश्चित करने के लिए किसी को भ्रष्टाचार भी करना पड़े तो वह करता है। जब इन घरों में संपत्ति की भरमार हो जाती है तो क्या खुशियां बरसने लगती हैं? नहीं, तब नई समस्याएं सामने आती हैं। नई पीढ़ी पैसे को जिस सहजता से खर्च करने लगती है, उससे उस पुरानी पीढ़ी को तकलीफ भी महसूस होने लगती है, जिसने सब अपनी मेहनत से अर्जित किया। इससे घरों के अंदर दो पीढ़ियों का टकराव शुरू हो जाता है। नई पीढ़ी यह समझ नहीं पाती कि आंख बंद कर खर्च करने में बुरा क्या है?

हर साल देश में लाखों युवा अमेरिका, कनाडा जाकर वहां बसना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि वहां सपने पूरे हो सकते हैं। निश्चित रूप से बड़ी संख्या में युवा भारत लौटकर नहीं आते। भारत में जीवन की कठिनाइयों की निंदा करना आसान हो सकता है। उन कठिनाइयों में जीकर उन्हें आसानी में तब्दील करना अलग बात है। फिल्म ‘स्वदेश’ की कहानी इस सिलसिले में याद करने लायक है। NRI मोहन भार्गव अमेरिका में रहता है और वहां की स्पेस एजेंसी NASA में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर काम करता है। मोहन एक दफे भारत आता है तो यहां गांव की परेशानियों से रूबरू होता है। वह कुछ का समाधान भी निकाल लेता है। फिर वह NASA के काम से वापस अमेरिका चला जाता है। वहां उसका मन नहीं लगता और वह भारत आकर बस जाता है।

कठिन संघर्ष हमें अपने डर का सामना करने को मजबूर करते हैं। ये हमें मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत व्यक्ति बनाते हैं। हमें जो लाइफ स्किल मिलती है, उसे भविष्य की चुनौतियों के लिए आजमाया जा सकता है। यह बात भारत में जीने के लिए ही नहीं, दुनिया के किसी भी कोने के लिए सही हो सकती है। जीवन एक असाधारण यात्रा है। इसमें आशाएं हैं तो निराशाएं भी हैं। जीत हैं तो नाकामियां भी हैं। हम जिन संघर्षों का सामना करते हैं, उनके जरिए ही हम असल में अपनी ताकत पाते हैं। यही संघर्ष हमें लचीलापन देते हैं, जिससे विकास की क्षमता बढ़ती है। चुनौतियां पहली बार में डरावनी लग सकती हैं, लेकिन वे हमारे अंदर की शक्ति को आकार देती हैं। संघर्ष के बिना जीवन मजेदार नहीं है। हमारे लिए जरूरी है कि हम सामने आने वाली प्रतिकूलताओं को खुशी से स्वीकार करें।

क्या देश में उमस ने कर दी है परेशानी खड़ी?

वर्तमान में देश में उमस ने परेशानी खड़ी कर दी है! जून का महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। बिहार-एमपी में जहां मॉनसून ने एंट्री ले ली है, तो वहीं भीषण गर्मी से झुलसी दिल्ली को अब भी अच्ची बारिश का इंचजार है। हालांकि राहत की बात यह है कि देश की राजधानी दिल्ली में अब लू के लौटने की संभावना नहीं है और आगे तेज हवाएं और हल्की बारिश लोगों को राहत पहुंचाती रहेगी। पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में हीटवेव तो है लेकिन यह उतना परेशान नहीं करेगी। यूपी में भी कई जिले बारिश से भीग रहे हैं तो वहीं बिहार में मॉनसून ने प्रचंड गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है। दिल्लीवालो के लिए सबसे राहत की बात यह है कि अब यहां लू नहीं लौटेगी। तेज हवाएं और हल्की बारिश या कुछ समय के लिए बौछारें पड़ेंगी। बारिश से उमस वाली गर्मी जरूर परेशान कर सकती है। उमस वाली गर्मी लू की गर्मी से अधिक खतरनाक मानी जाती है। पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को बादल छाए रहेंगे। आंधी और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। आंधी के दौरान हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। अधिकतम तापमान 39 और न्यूनतम 30 डिग्री तक रह सकता है। इसके बाद 25 से 29 जून तक बादल छाए रहेंगे। आंधी और बारिश की संभावना है। बारिश हल्की और कुछ समय के लिए बौछार की तरह होगी। आंधी के दौरान हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है।जबकि अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली, गोपालगंज, भागलपुर, बांका और आस-पास के हिस्सों में बारिश हो सकती है। मंगलवार से बिहार में बारिश की गतिविधियां और बढ़ने की उम्मीद है। इस दौरान अधिकतम तापमान 39 से 42 और न्यूनतम 28 से 31 डिग्री तक रह सकता है। प्राइवेट एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसून 27 से 30 जून के बीच राजधानी में एंट्री ले सकता है।

यूपी में भी बारिश मेहरबान है। यहां बारिश और गर्मी दोनों का सिलसिला जारी है। कहीं तेज बारिश हो रही तो कहीं अभी भी अच्छी गर्मी पड़ रही है। लखनऊ में भी आज हल्की बरसात होने की संभावना है। इसके बाद तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग की मानें तो 24 जून यानी आज पश्चिमी यूपी में कहीं कहीं और पूर्वी यूपी में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके साथ ही 25 जून को पश्चिमी यूपी में कुछ जगहों पर और पूर्वी यूपी में अनेक स्थान पर बारिश होने के आसार है। हालांकि प्रयागराज में 40.7℃, फतेहगढ़ में 40.4℃, आगरा ताज में 40.2℃, उरई में 40.8℃, बस्ती में 40℃ और लखनऊ में 39.8℃ तापमान दर्ज किया जा रहा है।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी गर्मी से राहत मिली है। 24 से 27 जून तक हिमाचल प्रदेश में गरज चमक के साथ तेज हवाएं चलती रहेंगी। उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में आज मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की है कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही यात्रा के लिए निकले। पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में हीटवेव की संभावना है पर यह बहुत परेशान नहीं करेगी। 27 जून तक यहां ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है। बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।

भोपाल समेत मध्य प्रदेश के 26 जिलों में रविवार को मॉनसून पहुंच चुका है। इसके बाद एमपीवालो को गर्मी से काफी राहत मिली है। आज भी एमपी के कई जिलों में बारिश का अलर्ट है। इनमें बैतूल, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिला में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राजस्थान की बात करें तो यहां जयपुर समेत कई राज्यों में मॉनसूनी बारिश हुई है। अभी यहां मॉनसून ने दस्तक नहीं दी है, लेकिन प्री-मॉनसून ने पूरा माहौल बना दिया है। बिहार में मॉनसून पहुंच भी गया है और खूब बारिश भी करवा रहा है।आंधी के दौरान हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान 39 से 42 और न्यूनतम 28 से 31 डिग्री तक रह सकता है। प्राइवेट एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसून 27 से 30 जून के बीच राजधानी में एंट्री ले सकता है। अभी मौसम विभाग के अनुसार यह उत्तरी सीमा के रक्सौल को कवर कर चुका है। एक-दो दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में पहुंचने की संभावना है। जबकि अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली, गोपालगंज, भागलपुर, बांका और आस-पास के हिस्सों में बारिश हो सकती है। मंगलवार से बिहार में बारिश की गतिविधियां और बढ़ने की उम्मीद है।

हिना खान को स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला.

कैंसर एक महामारी बनता जा रहा है. विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित भारतीय महिलाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सितारों को छोड़ा नहीं गया है. इससे पहले मनीषा कोइराला और सोनाली बेंद्रे को लाइलाज कैंसर का पता चला था। उन्होंने बीमारी पर काबू पा लिया है और सामान्य जीवन में लौट आए हैं। इस बार हिना खान.

हिना खान छोटे पर्दे का एक लोकप्रिय चेहरा हैं। हाल ही में हिना की फिजिकल हेल्थ को लेकर सवाल उठाए गए थे. दरअसल हिना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह क्या पहनते हैं, कैसे बाल काटते हैं, किस कपड़े के साथ कौन सी ज्वेलरी पहनते हैं, उनके जूते कैसे हैं – सारी जानकारी उनके फॉलोअर्स को इंस्टाग्राम के जरिए बताई जाती है। उनके हालिया पोस्ट के बाद से अटकलें तेज हो गई हैं. बीमार हैं एक्ट्रेस! पिछले कुछ दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि हिना लाइलाज कैंसर से पीड़ित हैं। ये सब उनके फैंस कह रहे थे. इस बार हेना ने खुद अपनी बीमारी की जानकारी दी। स्तन कैंसर से पीड़ित अभिनेत्री. फिलहाल यह बीमारी तीसरे चरण में है।

अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर एक बयान में लिखा, ”पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। मेरे पास अपने सभी प्रशंसकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण समाचार हैं। मुझे स्तन कैंसर, स्टेज तीन का पता चला है। तमाम बाधाओं के बावजूद, मैं कहता हूं कि मैं ठीक हूं। मैं इस बीमारी से उबरने के लिए प्रतिबद्ध हूं।’ सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि इस स्थिति में मेरी व्यक्तिगत गोपनीयता का सम्मान करें। मैं सभी को बता रहा हूं कि इस स्थिति में मेरा परिवार और प्रियजन मेरे साथ हैं।

छोटे पर्दे की अभिनेत्रियों में हिना खान के आउटफिट हमेशा चर्चा में रहते हैं। सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स की संख्या किसी भी बॉलीवुड एक्ट्रेस को टक्कर दे सकती है। हिना क्या पहनती हैं, अपने बाल कैसे काटती हैं, किस ड्रेस के साथ कौन से गहने पहनती हैं, कौन से जूते पहनती हैं – ये सारी जानकारी वह कभी-कभी अपने फॉलोअर्स को इंस्टाग्राम के जरिए बताती हैं। अभिनेत्री की सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक भी जासूसी करते हैं। इससे संदेह पैदा होता है. हिना बीमार है. वह कैंसर से पीड़ित हैं. अस्पताल में भर्ती अभिनेत्री. हालांकि, हेना ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि ये अटकलें एक्ट्रेस के कई पोस्ट से शुरू हुईं.

हिनाके ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर लिखा, ”हमारी कहानी का कोई अंत नहीं है। संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, योद्धा अपने जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करेगा। मैंने सब कुछ अल्लाह पर छोड़ दिया।” एक्ट्रेस की इस पोस्ट के तहत कई लोगों ने उनके ठीक होने की कामना की। हालांकि, उन्होंने इस अटकल पर कोई टिप्पणी नहीं की. हालांकि, कुछ दिन पहले एक डॉक्टर की पोस्ट वायरल हुई थी. वहां उन्होंने लिखा, ”एक मशहूर नेटीजन अस्पताल में आए. वह थायराइड कैंसर से पीड़ित हैं। मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसके साथ ऐसा होगा.” पूरे हालात में धंदे हिना के फैंस.

खराब मूड के कारण हिना खान को सीरीज से बाहर कर दिया गया था. इस बार सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है के प्रोड्यूसर राजन शाही ने उनके बारे में खुलकर बात की। इस सीरीज से हिना रातोंरात मशहूर हो गईं। कहानी लगातार आठ वर्षों तक मुख्य भूमिका (अक्षरा) निभाने के बाद पटकथा के लिए शिवांगी जोशी के चरित्र (अक्षरा की बेटी नायरा) के इर्द-गिर्द घूमती है। इसके बाद सीरीज के सेट पर हादसा हो गया.

हिना खान ने सीरियल से नाम वापस ले लिया है, इस खबर से हिंदी टेलीदुनिया में हलचल मची हुई है। हिना ने मीडिया को बताया कि स्क्रिप्ट में उनका रोल अब अहम नहीं है. ऐसी कोई बात नहीं है इसलिए वो हट गये. लेकिन निर्माता राजन शाही की आवाज अलग है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ”दिन-ब-दिन सेट पर हिना खान की सनक बढ़ती जा रही थी। एक सीन में शिवांगी का समर्थन करते हुए कुछ संवाद थे। लेकिन हिना ने वो डायलॉग बोलने से इनकार कर दिया. मैंने कहा, कुछ डायलॉग जरूर बोलने चाहिए. हिना बाद में सेट छोड़ सकती हैं.” हिना ने उस दिन शाम तक मेकअप वैन में समय बिताया. इसके बाद वह सेट छोड़कर चले गये. प्रोडक्शन ने एक्ट्रेस को साफ कर दिया कि इस सीरियल में उनका सारा काम खत्म हो चुका है. अब उन्हें शूटिंग फ्लोर पर नहीं आना पड़ेगा. लेकिन घटना के अगले दिन एक्ट्रेस दोबारा शूटिंग फ्लोर पर नजर आईं. उन्होंने शूटिंग के दौरान स्क्रिप्ट के मुताबिक डायलॉग बोले. लेकिन इसके बाद भी प्रोड्यूसर ने अपना फैसला नहीं बदला. उन्होंने हिना के किरदार को सीरियल से हटा दिया और उनसे बातचीत करना बंद कर दिया. सवाल उठता है कि क्या हिना शिवांगी को लेकर असुरक्षा की भावना से ग्रस्त थीं.

एनडीए चाहता है कि उपसभापति का पद उनके हाथ में रहे.

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नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले पांच वर्षों के दौरान लोकसभा में कोई उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया। अगर नई लोकसभा में डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति भी हो जाती है तो उस पद पर एनडीए का कोई सांसद ही नजर आ सकता है. आमतौर पर डिप्टी स्पीकर का पद विपक्षी खेमे के लिए छोड़ा जाता है. लेकिन बीजेपी उस परंपरा को किनारे रखते हुए स्पीकर की तरह डिप्टी स्पीकर का पद भी एनडीए के पास रखना चाहती है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या उपसभापति का पद बीजेपी के पास रहेगा या फिर तेलुगु देशम, जेडीयू जैसे किसी को बाहर रखा जाएगा.

“इंडिया” की मांग है कि अगर वे डिप्टी स्पीकर पद के विरोधियों को छोड़ दें तो वे स्पीकर पद के लिए बीजेपी के उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए सहमत हों. मोदी सरकार नहीं मानी. तो ओम बिड़ला के खिलाफ कांग्रेस के के सुरेश को उम्मीदवार बनाया गया. ‘भारत’ के फैसले के बाद वे उपसभापति की नियुक्ति की मांग करेंगे और इसे विपक्ष पर छोड़ देंगे. कांग्रेस का तर्क था कि जवाहरलाल नेहरू ने डिप्टी स्पीकर का पद शिरोमणि अकाली दल के नेता सरदार हुकुम सिंह के लिए छोड़ दिया था. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिंह राव, मनमोहन सिंह से लेकर मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में विपक्ष आजाद हुआ. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक सुझावात्मक ट्वीट में लिखा, ”प्रोटेम स्पीकर एनडीए, स्पीकर एनडीए. यदि डिप्टी स्पीकर सही अनुमान लगाता है तो कोई पुरस्कार नहीं है। इस बीच तेलुगू देशम और जेडीयू सांसदों ने कल और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. सड़क की मांग को लेकर सड़क जाम कर रहे हैं. और उस नाकेबंदी में फंस गए राज्य के डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी. पुलिस के अनुरोध और आवेदन का कोई असर नहीं होने पर राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष को कार घुमाकर दूसरी सड़क से जाना पड़ा. जामकर्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक जाम जारी रहेगा.

बीरभूम के बोलपुर के मकरमपुर में स्थानीय निवासियों ने सड़क जाम कर दी. उस घेराबंदी में डिप्टी स्पीकर व रामपुरहाट के तृणमूल विधायक आशीष फंस गये. सूचना मिलने के बाद बोलपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने जाम लगाने वालों से आशीष की कार छोड़ने की अपील की. कार में बैठकर आशीष ने खुद ही कुछ लोगों को बुला लिया। लेकिन घेरने वाले अड़े हुए हैं. नतीजतन, उन्होंने कार मोड़ ली और दूसरे रास्ते से गंतव्य के लिए रवाना हो गये. उपसभापति ने कहा, ”मैं कहने जा रहा था कि कोलकाता में बैठक है. वे सड़क जाम कर रहे हैं. लेकिन हम बंद, नाकेबंदी का समर्थन नहीं करते. मैं यहां आया और इस समस्या के बारे में सुना. जाम लगाने वालों से बात हो रही है. मैं मंत्री जी से भी बात कर रहा हूं. यह बेहद महत्वपूर्ण सड़क पिछले कुछ महीनों से खस्ताहाल है। इस सड़क के माध्यम से बोलपुर से एक दिशा में सैथिया और दूसरी दिशा में लवपुर तक पहुंचा जा सकता है। राजग्राम की यह अति महत्वपूर्ण सड़क जीर्णोद्धार के अभाव में महीनों से खराब पड़ी है। ऐसे में इस सड़क पर यात्रा करने वाले कई लोगों को परेशानी होती है. निवासियों की शिकायत है कि प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क की मरम्मत नहीं की, जबकि उन्हें बार-बार इस बारे में सूचित किया गया था. इस दिशा में खराब सड़कों पर वाहन चलाने के दौरान आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। आसपास कई स्कूल हैं. उस स्कूल से आने-जाने के रास्ते में टोटो एक दुर्घटना का शिकार हो जाता है। घेराव करने वालों में से एक और स्थानीय निवासी पुष्पेंदु रॉय ने कहा, ”आस-पड़ोस के लोग आज सड़क अवरुद्ध कर रहे हैं. सड़क की बदहाली आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। मजबूरन हमने ब्लॉक करने का फैसला किया. मैंने डिप्टी स्पीकर सर को भी घटना बताई. सर ने हमारे सामने कुछ कॉल किये. जब तक पीडब्ल्यूडी के लोग आकर आश्वासन नहीं देंगे, तब तक जाम जारी रहेगा.

विधायक क्षेत्र में नजर नहीं आ रहे हैं. रामपुरहाट के विधायक आशीष बनर्जी जब अपने निर्वाचन क्षेत्र देउचा-पचामी गए तो उन्हें ऐसी शिकायतें सुनने को मिलीं। इतना ही नहीं एक युवक ने विधायक की गाड़ी रोककर उनसे सीधे सवाल कर लिया. अपने गुस्से के बारे में बताएं. युवक ने देउचा-पंचमी के आदिवासी ग्राम परिषद का सदस्य होने का भी दावा किया। उनकी विधायक से बहस भी हुई. इसके बाद स्थानीय लोगों ने युवक को हटाया. फिर भी गुस्सा कम नहीं हुआ. युवक का सवाल, ‘क्या विधायक धूमकेतु हैं?’

आशीष विधानसभा के उपाध्यक्ष भी हैं. मंगलवार को वह तृणमूल के ‘दीदी की सुरक्षा कवच’ कार्यक्रम में ‘दीदी के दूत’ बनकर देउचा-पंचमी के भरकटा इलाके में गये थे. वहां सुशील मुर्मू नामक युवक ने उसकी कार रोकी. विधायक कार की आगे बायीं सीट पर बैठे थे. सुशील ने उनके सामने जाकर पूछा, ”इतनी देर तक कहां थे?” गुस्साए युवक ने विधायक से कहा, ”आप उल्टा क्यों कह रहे हैं?” तो क्या होता है? अब तुम्हें आना मंजूर है या नहीं?” इसी बीच कोई सुशील से कहता सुनाई देता है, ”चले जाओ, चले जाओ.” इससे सुशील और भी नाराज हो गए. उन्होंने भी पलटवार करते हुए कहा, ‘क्या भगवन्?’ एक विधायक इस तरह बात करते हैं. देखो…” तभी एक शख्स ने सुशील को रोकने की कोशिश की. लेकिन उसने बिना सुने ही आशीष से दोबारा कहा, “तुम ये सब बातें क्यों कहते हो?” मैं यहां से क्यों साझा करूं? ”मैं यहीं का निवासी हूं.”

विधायक के जाने के बाद भी सुशील ने इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा, ”विधायक एक धूमकेतु है. वह कभी नजर नहीं आता. पंचमी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ है. यहां पानी की समस्या है. धूल की भी समस्या है. उसने मुझे धमकी दी. क्या हम इंसान नहीं हैं? वह इतने दिनों तक कहाँ था? वह एक राजदूत हो सकते हैं. लेकिन हम उसे नहीं देखते.

कोटा में NEET अभ्यर्थी की मौत, राजस्थान में इस साल 12 मामला.

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राजस्थान के कोटा में एक और आत्महत्या की घटना घटी. 17 साल के एक छात्र की मौत हो गई. वह पिछले दो साल से कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इस आत्महत्या का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है. इस बात को लेकर भी असमंजस की स्थिति है कि छात्र ने इस साल नेट परीक्षा दी या नहीं.

छात्र कोटा के एक कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहा था. वह झारखंड से कोटा पढ़ाई करने गये थे. हॉस्टल में रहता था. छात्र के परिवार ने कहा कि पिछले बुधवार से उससे फोन पर संपर्क नहीं हो सका है. गुरुवार को छात्र के माता-पिता ने तुरंत हॉस्टल में फोन किया। उस वक्त हॉस्टल अधिकारी भी हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि बुधवार रात से छात्र को नहीं देखा गया है. उसने घर भी नहीं छोड़ा. इसके बाद वह उनके घर के सामने चिल्लाने लगा. लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. हॉस्टल के कमरे का दरवाजा तोड़कर छात्र का लटकता हुआ शव बरामद किया गया. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर गयी. इस संबंध में दादाबाड़ी थाना प्रभारी नरेश मीणा ने कहा, ”वह छात्र NEET की तैयारी कर रहा था. एक स्थानीय कोचिंग सेंटर में पढ़ाई की. लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि क्या उन्होंने इस वर्ष परीक्षा दी थी, और यदि हां, तो उन्हें परिणाम कैसे मिला। परिजन भी इस बारे में कुछ पुष्टि नहीं कर सके। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या छात्र परीक्षा परिणाम को लेकर मानसिक अवसाद से पीड़ित था. घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. छात्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. इस संबंध में उसके सहपाठियों से भी पूछताछ की जाएगी।

इस मामले में हॉस्टल अथॉरिटी की भूमिका पर सवाल उठाया गया है. क्योंकि, पिछले कुछ महीनों में आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद स्थानीय जिला प्रशासन ने कोटा के सभी हॉस्टलों में स्प्रिंग-फैन लगाने का फैसला किया है. ताकि पंखे पर लटक कर आत्महत्या करने की प्रवृत्ति कम हो जाये. लेकिन उस हॉस्टल में ये नहीं था. पुलिस उस संबंध में अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी.

इसके साथ ही इस साल कोटा में 12 छात्रों की आत्महत्या की खबर सामने आई। पिछले साल कोटा में कुल 27 छात्रों ने आत्महत्या की थी. सभी लोग किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से कोटा गए थे। कोटा में जिस तेजी से आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, उससे प्रशासन चिंतित है. राजस्थान के कोटा में एक एनआईटी अभ्यर्थी ने नतीजे घोषित होने के अगले दिन ही आत्महत्या कर ली. पुलिस ने शुरू में कहा कि उसने एक बहुमंजिला इमारत की दसवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक का नाम बागीशा तिवारी है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार बागीशा नीट की तैयारी के लिए कोटा आई थी। एक बहुमंजिला अपार्टमेंट में किराये पर रहता था। उस फ्लैट में बागीशा की मां और भाई उसके साथ रहते थे। वे आवास की पांचवीं मंजिल पर रहते थे। बागीशा ने इसी साल नेट परीक्षा दी थी. उस परीक्षा के नतीजे मंगलवार को जारी किये गये. अगले दिन बुधवार को बागीशा आवास के नीचे लहूलुहान अवस्था में पड़ी मिली। पुलिस ने बताया कि जब उसे बचाया गया और अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बागीशा मध्य प्रदेश के रीबा जिले की रहने वाली है। उसका भाई बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। वह संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है। बागीशा के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह भी उनमें कोई असामान्यता नजर नहीं आई। लेकिन पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक किसी को अंदाजा नहीं था कि बागीशा इतना बड़ा फैसला ले लेगी. शुरुआत में पुलिस को पता चला कि बागीशा ने आवास की दसवीं मंजिल से छलांग लगा दी है. पुलिस को पता चला कि आवास के कुछ लोगों ने उसे छत की ओर जाते देखा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि विदिशा ने आत्महत्या क्यों की।

कोटा में एक के बाद एक नेट परीक्षार्थियों की आत्महत्या का मामला सामने आ रहा है. जनवरी से अब तक 10 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं. पिछले साल 26 छात्रों ने आत्महत्या की थी. युवक 23 दिन पहले कोटा से लापता हो गया था. आख़िरकार वह मिल गया. युवक के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे गोवा से बचाया। आरोप है कि पुलिस निष्क्रिय थी. परिवार को इस संबंध में सक्रिय होना होगा। युवक 23 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा कर रहा है.

युवक राजस्थान के सवाई माधोपुर इलाके का रहने वाला है. उन्हें नेट परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा भेजा गया था। कुछ दिन पहले वह नीट की परीक्षा देने के बाद वहां से गायब हो गया. उन्होंने घर के लिए एक पत्र भी लिखा. कहा कि किसी को उनकी चिंता नहीं करनी चाहिए। युवक ने पत्र में यह भी कहा कि वह पांच साल बाद घर लौटेगा. वह इसी महीने की 6 तारीख को कोटा से फरार हो गया था.

कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी का माइक बंद करने का आरोप लगाया, जब उन्होंने NEET पेपर लीक का मुद्दा उठाया।

फिर राहुल की ‘आवाज़’? पिछले साल मार्च में राहुल ब्रिटिश संसद के सदस्यों के एक समूह के साथ चर्चा बैठक में भाग लेने के लिए लंदन गए थे। वहां उन्होंने लोकसभा में अपना माइक बंद होने की शिकायत की. लोकसभा में फिर राहुल गांधी द्वारा माइक्रोफोन बंद करने की शिकायत आई। शुक्रवार को लोकसभा सत्र का एक वीडियो क्लिप कांग्रेस द्वारा एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया था। इसमें राहुल स्पीकर ओम बिरला से माइक चालू करने के लिए कहते सुनाई दे रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि राहुल लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार पर बोलने गए थे. उस वक्त उनका माइक ‘जानबूझकर’ बंद कर दिया गया था. जब राहुल ने इस ओर ध्यान दिलाया तो स्पीकर ओम ने कहा कि उन्होंने सांसद का माइक्रोफोन बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है. हालांकि, इसके बाद उन्होंने NEET प्रश्न के लीक होने पर बहस की मांग को एक तरह से खारिज कर दिया और कहा, ‘चर्चा राष्ट्रपति के भाषण पर होनी चाहिए. अन्य मुद्दों को सदन में दर्ज नहीं किया जाएगा.” वहां बात करते समय उसे पता चला कि माइक ख़राब है. इसके बाद राहुल ने कहा, ‘लेकिन भारतीय संसद में माइक खराब नहीं हुआ है. बंद कर दिया। बहस की आवाज दबा दी गई है.” बीजेपी ने विदेश में उनके बयान को ‘देश का अपमान’ करार दिया. कांग्रेस की ओर से जवाबी शिकायत की गई कि नोटबंदी, जीएसटी, चीनी आक्रामकता जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं होने दी गई। मोदी सरकार ने बार-बार माइक बंद कर विपक्ष की ‘आवाज़ दबाई’ है.

संसद में फिर आपातकाल का मुद्दा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बाद इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू. गुरुवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ”1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है.”

राष्ट्रपति मुर्मू ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की सरकार की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद द्वारा लगाए गए आपातकाल से देश में अराजकता फैल गई थी। उनके शब्दों में, ”उस दिन की घटना संविधान पर सीधा, सबसे बड़ा हमला थी. लोकतंत्र को कलंकित करने का ऐसा प्रयास निंदनीय है.”

इस बार अध्यक्ष मुर्मू ने संविधान का मुद्दा उठाया और बिना नाम लिए कांग्रेस को याद दिलाया कि राहुल की दादी ने पहले भी देश में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे. संयोग से, यह सरकार ही है जो संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद में राष्ट्रपति के लिखित संबोधन का ‘विषय’ तय करती है।

 

राष्ट्रपति के भाषण के दौरान बीजेपी और सरकार पक्ष के सांसद जयकार करते दिखे. दूसरी ओर, विपक्षी बेंचों की ओर से विरोध प्रदर्शन हुआ। पिछले तीन दिनों से कभी संसद के बाहर तो कभी ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 50 साल पहले की आपात स्थिति को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है. बुधवार को लोकसभा में दूसरी बार अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद ओम ने सीधे आपातकाल की आलोचना की और इसे संसद के मिनटों में दर्ज किया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव को याद दिलाना चाहते थे लोकसभा में शपथ ग्रहण के दौरान संविधान दिखाकर लोकतांत्रिक परंपरा का परिचय दिया। इस बार अध्यक्ष मुर्मू ने संविधान का मुद्दा उठाया और बिना नाम लिए कांग्रेस को याद दिलाया कि राहुल की दादी ने पहले भी देश में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे. संयोग से, यह सरकार ही है जो संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद में राष्ट्रपति के लिखित संबोधन का ‘विषय’ तय करती है।

दरअसल, पिछले दस सालों में विपक्ष ने मोदी पर अघोषित आपातकाल लगाने का आरोप लगाया है. केंद्रीय जांच एजेंसियों को प्रभावित कर विपक्ष को घेरने, मीडिया में डंडा घुमाने, संसद में विपक्ष की आवाज दबाने जैसे कई आरोप लगे हैं. इसीलिए विपक्ष ने मौजूदा चुनाव में संविधान की रक्षा के आह्वान के साथ प्रचार शुरू किया। उन्होंने शिकायत की कि अगर बीजेपी “400 पार” करती है, तो वह संविधान बदल देगी। सर्वेक्षणों के नतीजों से पता चलता है कि विपक्ष के अभियान ने मतदाताओं के मन पर आंशिक प्रभाव छोड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार विपक्षी गठबंधन के भीतर कांग्रेस को असहज करने के लिए आधी सदी पहले का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रही है.

इस बार अध्यक्ष मुर्मू ने संविधान का मुद्दा उठाया और बिना नाम लिए कांग्रेस को याद दिलाया कि राहुल की दादी ने पहले भी देश में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे. संयोग से, यह सरकार ही है जो संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद में राष्ट्रपति के लिखित संबोधन का ‘विषय’ तय करती है।

 

आखिर क्या है अमेरिका के फाउंडर बेंजामिन फ्रैंकलिन का केजरीवाल से संबंध?

आज हम आपको बताएंगे कि केजरीवाल का अमेरिका के फाउंडर बेंजामिन फ्रैंकलिन से क्या संबंध है! एक आदमी अपने जीवन में क्या क्या हो सकता है? आप यकीन करें या न करें, मगर अमेरिका के फाउंडर बेंजामिन फ्रैंकलिन को अमेरिकी प्रिंटर, पब्लिशर, लेखक, आविष्कारक, वैज्ञानिक और कूटनीतिज्ञ कहा जाता है। एक ऐसा शख्स जो अमेरिका की नींव रखने वाले फाउंडिंग फादर्स में से एक था। जिसने अमेरिकी क्रांति के दौरान फ्रांस में अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया था। एक ऐसी हस्ती, जिसने अमेरिका की आजादी के घोषणापत्र पर दस्तखत किए थे। यही नहीं उसने अमेरिकी लोगों के लिए ऐसा संविधान लिखा, जो आज भी भारत समेत पूरी दुनिया के लिए नजीर है। हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देते हुए जज न्याय बिंदु ने अमेरिका के संस्थापकों में से एक बेंजामिन फ्रैंकलिन का जिक्र किया। आइए- समझते हैं कि फ्रैंकलिन कौन थे और उनकी बातें आज भी भारतीय अदालतों में क्यों गूजती हैं। अमेरिका के बोस्टन में जन्मे फ्रैंकलिन अपने माता-पिता के 17 बच्चों में 10वें नंबर की औलाद थे। उनके पिता तब साबुन और मोमबत्तियां बेचा करते थे। फ्रैंकलिन ने ही क्रांतिकारी युद्ध को समाप्त करने वाली पेरिस की 1783 की संधि को तैयार करने में एक अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने ही अमेरिका के लिए मानवाधिकारों की अहमियत देते हुए संविधान तैयार किया।

आपराधिक कानूनों में ब्लैकस्टोन रेश्यो थ्योरी चलती है। फ्रैंकलिन से भी पहले इंग्लैंड के एक जज और ज्यूरिस्ट विलियम ब्लैकस्टोन ने यह सिद्धांत दिया था कि भले ही 10 दोषी छूट जाएं, मगर 1 भी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। कुछ समय बाद ही फ्रैंकलिन ने पहले के 10 के बजाय इस कथन को 100 कर दिया। उन्होंने कहा-भले ही 100 गुनहगार छूट जाएं, मगर कोई बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए। इसी के आधार पर तब बोस्टन में नरसंहार करने वाले ब्रिटिश सैनिक सजा पाने से बच गए थे। 18वीं सदी के आखिरी दशकों में उस वक्त यह सिद्धांत काफी चर्चा में रहा था। यह सिद्धांत अब 21वीं सदी में अदालतों में अक्सर नजीर बनकर सामने आती है। भारत में भी इसी को अपनाया गया है। फ्रैंकलिन ने साइंस ऑफ इलेक्ट्रिसिटी की खोज की। बाद में माइकल फैराडे ने इसी आधार पर बिजली का आविष्कार किया। फ्रैंकलिन ने 1752 में बिजली को भांप लिया था। उन्होंने एक पतंग उड़ाई और उसमें धातु से बने धागे में चाबी बांध दी। हवा की तेज रफ्तार से जब चाबी पर रगड़ हुई तो चिंगारी निकली, जो बिजली के आविष्कार की दिशा में पहला कदम था।

फ्रैंकलिन के प्रयोग ने यह बताया कि अगर किसी इमारत के ऊंचे बिंदु पर एक मेटल की धातु रखी हुई है, जो एक कंडक्टर से जुड़ी हुई है तो मेटल की धातु पर बिजली गिरने पर उससे जुड़ा कंडक्टर बिजली को इमारत से दूर जमीन में ले जाएगा। इस समझ का इस्तेमाल करके लकड़ी के घरों और इमारतों को बिजली गिरने से होने वाले नुकसान से बचाया गया। आज पूरी दुनिया में इसी सिद्धांत का इस्तेमाल कर हजारों जानें बचाई जाती हैं। फ्रैंकलिन का एक कथन दुनिया के लिए नजीर बन गया। उन्होंने कहा था कि जल्दी उठना और जल्दी सोना एक आदमी का स्वस्थ, धनी और बुद्धिमान बनाता है। उन्होंने बिजली के रॉड, स्टोव और आर्मोनिका ग्लास की भी खोज की। उन्होंने अखबार निकाला और कारोबार भी किए। फ्रैंकलिन ने पहले तो खुद दासों को मुक्त कर दिया और दूसरों को भी प्रेरित किया कि वो दासों को गुलाम न बनाएं। उनकी इसी सोच ने बाद में अमेरिका में दास प्रथा खत्म करने में अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके खिलाफ इस मामले से सीधे तौर पर जुड़े होने के सुबूत देने में नाकाम रहा। निचली अदालत के आदेश के बाद ईडी की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देने के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, केजरीवाल को राहत देते हुए विशेष जज न्याय बिंदु ने कहा कि पहली नजर में उनका अपराध अभी तक सिद्ध नहीं हो सका है।

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष न्यायाधीश न्याय बिंदु ने ही दिल्ली शराब घोटाला केस में सीएम अरविंद केजरीवाल को जमानत देने का फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान जज ने अमेरिका के संस्थापकों में से एक बेंजामिन फ्रैंकलिन को कोट करते हुए कहा, भले ही 100 दोषी व्यक्ति बच जाएं, लेकिन एक निर्दोष व्यक्ति को सजा न हो। उन्होंने कहा कि कानून का यह सिद्धांत है कि जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक हर व्यक्ति को निर्दोष माना जाना चाहिए। मगर, मौजूदा मामले में यह सिद्धांत ऐसा लागू होता प्रतीत नहीं होता है।

क्या भारत बांग्लादेश की दोस्ती से चीन को होगी जलन?

भारत बांग्लादेश की दोस्ती से चीन को जलन हो सकती है! बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना दो दिवसीय दौरे पर भारत आई हैं। इस दौरान उनकी पीएम मोदी से मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुलाकात की अहमियत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में हम करीब 10 बार मिले हैं। लेकिन आज की मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि प्रधानमंत्री शेख हसीना हमारी सरकार के तीसरे कार्यकाल में हमारी पहली राजकीय अतिथि हैं। पीएम मोदी ने कहा कि बांग्लादेश हमारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन सागर और इंडो-पैसिफिक विजन में हमारे साथ संगम रखता है। बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा डेवलपमेंट पार्टनर है और बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को हम अत्यधिक प्राथमिकता देते हैं। मैं बंगबंधु के स्थिर, समृद्ध और प्रगतिशील बांग्लादेश के विजन को साकार करने में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराता हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक साल में हमने मिलकर लोक कल्याण की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की हैं। दोनों देशों के बीच भारतीय रुपये में व्यापार शुरू हो गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी पर दुनिया की सबसे लंबी रिवर क्रूज सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। भारत और बांग्लादेश के बीच पहली क्रॉस-बॉर्डर मैत्री पाइपलाइन पूरी हो गई है। भारतीय ग्रिड के माध्यम से नेपाल से बांग्लादेश को बिजली का निर्यात ऊर्जा क्षेत्र में उप-क्षेत्रीय सहयोग का पहला उदाहरण बन गया है। सिर्फ एक साल में इतने सारे क्षेत्रों में इतनी बड़ी पहल को लागू करना हमारे संबंधों की गति और पैमाने को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बांग्लादेश हमारी पड़ोस पहले नीति, एक्ट ईस्ट नीति, विजन SAGAR और इंडो-पैसिफिक विजन के संगम पर स्थित है। पिछले एक ही वर्ष में हमने साथ मिलकर लोक कल्याण के अनेक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को पूरा किया। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजिच समारोह में भारत-बांग्लादेश के बीच जो समझौते हुए उनमें इन-स्पेस और बांग्लादेश के आईसीटी और दूरसंचार मंत्रालय के बीच हुआ समझौता भी शामिल है। इस समझौते पर बांग्लादेश सैटेलाइट कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष और सीईओ शाहजहां महमूद और अंतरिक्ष विभाग के सचिव एस सोमनाथ ने हस्ताक्षर किए।इस समझौते से दोनों देशों में स्पेस टेक्नॉलजी और सैटलाइट कम्यूनिकेशन में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।पीएम मोदी ने इस दौरान टी-20 वर्ल्ड कप में भारत-बांग्लादेश की टीम के भिड़ंत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मैं आज शाम के क्रिकेट विश्व कप मैच के लिए दोनों टीमों को शुभकामनाएं देता हूं। बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा विकास साझेदार है और हम बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश के 12वें संसदीय चुनाव और जनवरी 2024 में हमारी नई सरकार के गठन के बाद यह किसी भी देश की मेरी पहली द्विपक्षीय यात्रा है। भारत हमारा प्रमुख पड़ोसी, विश्वसनीय मित्र और क्षेत्रीय साझेदार है। बता दें कि दोनों देशों के बीच हुई साझेदारियों की मुख्य घोषणाओं में से बांग्लादेश के नागरिकों के लिए भारत में इलाज करवाने के लिए ई-मेडिकल वीजा सुविधा शुरू करने का निर्णय है। यह कदम न केवल रोगियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाएगा बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को भी मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त, बांग्लादेश के रंगपुर में एक नए वाणिज्य दूतावास के खुलने से उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लोगों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। मोदी-हसीना वार्ता के बाद भारत और बांग्लादेश ने ‘ग्रीन पार्टनरशिप’ के लिए एक साझा दृष्टिकोण को अंतिम रूप देते हुए एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। 

बांग्लादेश भारत के साथ हमारे संबंधों को बहुत महत्व देता है, जो 1971 में हमारे मुक्ति संग्राम के दौरान पैदा हुए थे। मैं भारत के उन बहादुर, शहीद नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने 1971 में हमारे मुक्ति संग्राम के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के बीच संयुक्त प्रेस वार्ता से पहले कई समझौतों पर मुहर लगी। व्यापार के मामले में भारत और बांग्लादेश ने भारतीय रुपये में व्यापार शुरू करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह व्यापार प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा और दोनों देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, भारतीय ग्रिड के माध्यम से नेपाल से बांग्लादेश को बिजली निर्यात को एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में उजागर किया गया है, जो क्षेत्रीय सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा की क्षमता को प्रदर्शित करता है।भारत और बांग्लादेश ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की उपस्थिति में समझौतों और ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया।

निखिल गुप्ता का अमेरिका को प्रत्यारोपण पर क्या असर होगा?

आज हम आपको बताएंगे कि निखिल गुप्ता का अमेरिका को प्रत्यारोपण पर क्या असर होगा! भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता का चेक गणराज्य से अमेरिका लाया जा चुका है। इसलिए लोकसभा चुनावों के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। निखिल गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल थे। पन्नू अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता वाला खालिस्तान समर्थक है। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि पन्नू अमेरिकी नागरिक होने के नाते अपने बोलने की आजादी का इस्तेमाल कर रहा था, इसीलिए उसे निशाना बनाया गया। चेक अधिकारियों ने गुप्ता के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। इसके ठीक 11 दिन बाद उन्हें चेक गणराज्य से अमेरिका भेज दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन भी उसी समय भारत के दौरे पर थे। सुलिवन का यह दौरा भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (iCET) पर बातचीत के लिए था। लेकिन गुप्ता के प्रत्यर्पण ने इस दौरे को भी प्रभावित किया। अमेरिकी सीनेट के कुछ डेमोक्रेट सदस्यों ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर इस मामले में भारत से कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की है। उनका कहना है कि अमेरिका को भारत को स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि इस तरह के कृत्यों के गंभीर परिणाम होंगे।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि कनाडा के विपरीत, अमेरिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उग्रवाद का समर्थन नहीं करता है। यह भी गौर करने वाली बात है कि सुलिवन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान इस मामले पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया, जबकि उनके ऐसा करने की उम्मीद थी। हालांकि, इस मामले के कारण भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी इतनी मजबूत है कि इस तरह के मुद्दों से उस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि पन्नू एक अमेरिकी नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता है। उसे उनके ‘सबसे महत्वपूर्ण अमेरिकी अधिकार – बोलने की आजादी’ का इस्तेमाल करने के लिए निशाना बनाया गया था। वहीं, गुप्ता ने खुद पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। चेक के न्याय मंत्री ने गुप्ता के प्रत्यर्पण की घोषणा उसी दिन की जब अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन भारत पहुंचे थे। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि उनके भारत दौरे से पहले कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं।

चेक गणराज्य के न्याय मंत्री पावेल ब्लेजेक ने ये खुलासे उसी दिन किए जिस दिन सुलिवन यहां पहुंचे थे। उसी दिन अमेरिका में जेफ मर्कले के नेतृत्व में डेमोक्रेट सीनेटरों के एक समूह ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर साजिश में कथित भारतीय संलिप्तता पर कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की। वे चाहते हैं कि भारत को एक स्पष्ट संदेश दिया जाए कि इस तरह के व्यवहार के परिणाम भुगतने होंगे। सुलिवन ने अपनी यात्रा के दौरान मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। अक्सर ऐसा होता नहीं है कि कोई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी मीडिया से बात नहीं करे। इधर, भारत सरकार ने अमेरिकी आरोपों की जांच के लिए नवंबर में एक समिति बनाई थी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन पर दबाव बढ़ा तो भारत से रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ सकता है। चूंकि अमेरिकी चुनाव अभी कुछ दूर हैं, इसलिए भारत के लिए इस तूफान के खत्म होने का इंतजार करने के बारे में सोचना अभी जल्दबाजी होगी। कनाडा ने भारत पर एक और खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप लगाए गए हैं। हाल ही में एक ऑस्ट्रेलियाई मीडिया आउटलेट ने दावा किया है कि कैसे भारतीय जासूसों ने ऑस्ट्रेलिया में सिख अलगाववादियों को निशाना बनाया। हालांकि, भारत ने इस दावे को बिल्कुल झूठ बताया है।

हालांकि ऐसा लग सकता है कि भारत-अमेरिका के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव आने वाला है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि दोनों देश ‘ग्लोबल गुड’ के लिए अपनी साझेदारी को पन्नू मुद्दे के कारण बाधित होने देंगे। यह इस बात से पता चलता है कि भारत और कनाडा के बीच की स्थिति के विपरीत दोनों पक्षों ने पन्नू मामले में सार्वजनिक रूप से भला-बुरा कहे किए बिना चुपचाप मिलकर काम किया है। जयशंकर ने कहा है कि कनाडा के विपरीत अमेरिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर चरमपंथ का बचाव नहीं करता है। दोनों पक्षों को एक-दूसरे की जरूरत भी है। अमेरिका को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच की जरूरत है, और भारत को अपनी वृद्धि और सुरक्षा के लिए जरूरी अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच की। सुलिवन की यात्रा में दोनों पक्षों ने आईसेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो बहुत बड़ी बात है। यह संबंधों के विकास के लिए एक मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम कर सकती है।

ऐसा कहा जा रहा है कि भारत को इस मामले पर अमेरिका के साथ मिलकर कोई रास्ता निकालना होगा। इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाया गया है और अमेरिका और खासकर न्याय विभाग की ओर से उठने वाली आवाजों की भाषा और उसे लहजे को देखते हुए बाइडेन प्रशासन के पास भारत के साथ इस मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसका मतलब है कि उसे कथित रूप से भारत से साजिश रचने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मजबूरी होगी। जैसा कि सीनेटरों ने ब्लिंकन को लिखे पत्र में चेतावनी दी थी, बलि का बकरा बनाने का कोई भी प्रयास काम नहीं करेगा।

शेयर बाजार और एग्जिट पोल के बारे में क्या बोले प्रदीप गुप्ता?

हाल ही में प्रदीप गुप्ता ने शेयर बाजार और एग्जिट पोल के लिए एक बयान दे दिया है! शेयर बाजार में कथित हेरफेर के लिए एग्जिट पोल का इस्तेमाल किए जाने को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का सामना कर रहे एक्सिस माई इंडिया के प्रमुख प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि वह हर तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि अगर सरकार पोल करने वालों के लिए खास नियम बनाती है, तो इससे कारोबार को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विपक्षी राजनीतिक दलों और कई अन्य संगठनों ने पूंजी बाजार नियामक सेबी और एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के जरिए इस बात की गहन जांच करने की मांग की है कि क्या एग्जिट पोल के जरिए शेयर बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।एग्जिट पोल में भाजपा को भारी बहुमत मिलने पर शेयर बाजारों में भारी तेजी देखी गई थी, लेकिन वास्तविक परिणामों में सत्तारूढ़ पार्टी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद भारी गिरावट आई। पीटीआई के मुख्यालय में यहां समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में गुप्ता ने कहा कि वह पांच साल से सर्वेक्षण करने वालों के लिए मानदंड और विनियमन तैयार करने की मांग कर रहे हैं। एक्सिस माई इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक गुप्ता ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए 361-401 सीटों की भविष्यवाणी की थी, जबकि वास्तविक संख्या काफी कम रही। उन्होंने एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने की मांग को बचकाना करार देते हुए कहा कि हर नागरिक और संगठन चुनाव परिणाम जानना चाहता है और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।

यह पूछने पर कि क्या वह जेपीसी या सेबी की जांच के लिए तैयार हैं, उन्होंने कहा, मैं हर तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा, जहां तक शेयर बाजार में उछाल से मुझे कोई लाभ मिलने की बात है… एक्सिस माई इंडिया का कोई डीमैट खाता नहीं है। यह एक लिमिटेड कंपनी है, सूचीबद्ध नहीं है। आज तक कंपनी में कोई भी बाहरी निवेश नहीं हुआ है। प्रवर्तकों ने भी कोई निवेश नहीं किया है। अप्रैल से शेयरों में मेरा व्यक्तिगत निवेश मात्र 35,000 रुपये रहा है। मुझे कहां लाभ हुआ? गुप्ता ने एक्सिस माई इंडिया के विदेशी निवेशकों के लिए एग्जिट पोल करने और उनके साथ अलग-अलग परिणाम साझा करने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, किसी भी एफआईआई ने हमसे कभी संपर्क नहीं किया, न ही हमने किसी विदेशी निवेशक के लिए काम किया है। हमने उनके लिए कभी कोई एग्जिट पोल सर्वेक्षण नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा, पहले वे एग्जिट पोल को अवैज्ञानिक बताते थे, अब वे चाहते हैं कि एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। ये बचकानी बातें हैं। हर नागरिक और संगठन चुनाव के नतीजे जानना चाहता है और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल सिर्फ यह बताने के लिए नहीं होते कि कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है, बल्कि इससे राजनीतिक दलों को नतीजों का विश्लेषण करने में भी मदद मिलती है। गुप्ता ने कहा, ”मेरे 70 फीसदी ग्राहक कॉरपोरेट ग्राहक हैं। अगर एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा भी दिया जाता है, तो इससे हमारे कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो भी कानून तय करेगा, मैं उसके साथ हूं। यह पूछने पर क्या 2024 के चुनाव नतीजों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है, गुप्ता ने कहा, वे हमें हमारे काम के लिए कारोबार देते हैं, न कि इस आधार पर कि हम चुनाव नतीजों की कितनी सही भविष्यवाणी करते हैं। उन्होंने कहा, पिछले पांच सालों से मैं कुछ नियमन की मांग को लेकर दर-दर भटक रहा हूं। जब हमारे लोग जमीन पर जाते हैं, तो उन्हें संदिग्ध मानसिकता से देखा जाता है। हमें यह समझाना पड़ता है कि हम सेल्सपर्सन नहीं हैं, हम धोखेबाज नहीं हैं और हमें किसी राजनीतिक दल ने नहीं भेजा है। हमसे अक्सर पूछा जाता है कि आपको अनुमति किसने दी? उन्होंने कहा, हमने गृह मंत्रालय को लिखा, हमें कानून मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए कोई कानून नहीं है, इसलिए पहले हमें कानून चाहिए। वहां से हमें सूचना और प्रसारण मंत्रालय के पास भेजा गया कि आप वहां अपना पंजीकरण करवाएं और एक प्रकोष्ठ स्थापित करें।

सवाल यह है कि कौन सही है और कौन गलत है, इसकी निगरानी कौन करेगा… इसलिए कुछ नहीं हुआ। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमें विनियमन की जरूरत है। एक्सिस माई इंडिया 2013 से एग्जिट पोल आयोजित कर रहा है। उस समय गुप्ता हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से लौटे थे। उनका दावा है कि उन्होंने 65 में 61 चुनावों की सही भविष्यवाणी की। यह पूछने पर कि एक्सिस माई इंडिया यह खुलासा क्यों नहीं करता कि कुछ राजनीतिक दल भी उसके ग्राहक हैं, गुप्ता ने कहा, 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में, भाजपा हमारे ग्राहकों में शामिल थी और एग्जिट पोल में हमने त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की थी, जो बिल्कुल सही थी।