Thursday, March 5, 2026
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क्या अपनी घोषणाएं पूरी कर पाएगी कांग्रेस?

आज हम आपको बताएंगे कि कांग्रेस अपनी घोषणाएं पूरी कर पाएगी या नहीं! सत्ता में अपने एक दशक में भाजपा की विफलताएं कोई रहस्य नहीं हैं। लोगों से अब 2047 तक इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। हालांकि, किसी को वास्तव में लोगों का प्रतिनिधित्व करना होगा और इस बीच शासन करना होगा, जिसके बारे में कांग्रेस कुछ जानती है। उस पार्टी के रूप में जिसने अधिकांश संस्थानों का निर्माण किया, आर्थिक उदारीकरण लाया और सामाजिक सुरक्षा जाल – मनरेगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का निर्माण किया – जिसने भारत को कोविड और उसके बाद के संकट के दौरान बचाया, उसके विचार हमेशा मायने रखते हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में बड़ी संख्या में बेरोजगार पुरुष और महिलाएं शामिल हुईं। बड़ी संख्या में आशावान, बेचैन युवाओं के लिए नौकरियां हमारे समय की केंद्रीय आर्थिक चुनौती है। पीएलएफएस डेटा का उपयोग करते हुए अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा का अनुमान है कि बेरोजगारों की संख्या 1 करोड़ (2012) से बढ़कर 4 करोड़ 2022 हो गई है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2023 रिपोर्ट में पाया गया कि 25 साल से कम उम्र के 42% स्नातक बेरोजगार हैं।कांग्रेस का घोषणा पत्र इस संकट से दो तरह से निपटता है। अल्पकालिक समाधान सरकारी रोजगार में विस्तार है। इसमें केंद्र सरकार, केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवा केंद्रों और अर्धसैनिक बलों में भारती भरोसा योजना के तहत 30 लाख पद शामिल हैं। पारंपरिक ज्ञान के विपरीत, भारतीय राज्य में कर्मचारियों की अत्यधिक कमी है – जैसा कि अर्थशास्त्री कार्तिक मुरलीधरन ने खुलासा किया है, भारत में प्रति 1,000 लोगों पर केवल 16 सार्वजनिक कर्मचारी हैं, जबकि अमेरिका में 77, चीन में 57 और नॉर्वे में 159 हैं। लेकिन सरकार सब कुछ नहीं कर सकती। निजी क्षेत्र का रोजगार महत्वपूर्ण है।

शुरुआत में, पहली नौकरी पक्की योजना 25 वर्ष से कम आयु के स्नातकों और डिप्लोमा धारकों को एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप का अधिकार प्रदान करेगी। उन्हें 1 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा जो नियोक्ताओं और सरकार द्वारा समान रूप से साझा किया जाएगा। 1961 के अप्रेंटिसशिप अधिनियम के तहत 30+ कर्मचारियों वाली कंपनियों को पहले से ही अप्रेंटिस को काम पर रखना आवश्यक है। पहली नौकरी पक्की इसे एक ठोस अधिकार में बदल देती है।अप्रेंटिसशिप से परे, कांग्रेस एक रोजगार-जुड़ा प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना स्थापित करेगी जो कंपनियों को सुरक्षित, अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियां बनाने के लिए कर छूट देती है। मौजूदा उत्पादन-जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे पूंजी-प्रोत्साहन क्षेत्रों को सब्सिडी दी है जहां अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त नौकरियां उत्पन्न होती हैं। हर कोई नौकरी नहीं चाहता। कई युवा अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास गुड़गांव या बेंगलुरु में इनक्यूबेटरों या शार्क टैंक जैसे शो में आमंत्रित होने के लिए पेशेवर नेटवर्क नहीं हैं। 40 वर्ष से कम आयु के युवाओं के लिए, कांग्रेस 5,000 करोड़ रुपये का पेशेवर रूप से संचालित युवा रोशनी फंड स्थापित करेगी। यह भारत के हर जिले में व्यवसायों को निधि देने के लिए अनिवार्य होगा।हमने यह जानने के लिए एक सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना का वादा किया है कि हमारे समाज में संसाधनों का वितरण कैसे किया जाता है। यह एक नैदानिक उपकरण है, और हम केवल सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को तेज करने के बजाय सभी के लिए अवसरों को व्यापक बनाने की दिशा में काम करेंगे।

महिलाओं को सुरक्षित रखना, उनकी शारीरिक सुरक्षा के लिए डर अभी भी कई महिलाओं को नागरिकों और श्रमिकों के रूप में पूरी तरह से भाग लेने से रोकता है। एक समाधान सरकारी निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। कांग्रेस संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने के मौजूदा सरकार के अस्पष्ट वादे को तुरंत लागू करेगी लेकिन हम इससे आगे बढ़ेंगे और 2025 से महिलाओं के लिए सभी नई केंद्र सरकार की नौकरियों में से 50% आरक्षित करेंगे। यह केवल उचित होगा। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण से पता चलता है कि 2021-22 में उच्च माध्यमिक शिक्षा में 48% छात्र और बीए और बीएससी स्नातकों में 54% महिलाएं थीं।

अपराधों की रिपोर्ट करते समय कई महिलाओं को कलंक और असंवेदनशीलता का सामना करना पड़ता है। इसका मुकाबला करने के लिए, कांग्रेस महिलाओं को जानकारी और कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए हर पंचायत में एक अधिकार मैत्री नियुक्त करेगी। कांग्रेस का घोषणापत्र स्पष्ट रूप से कहता है कि हम आपको भय से मुक्ति का वादा करते हैं। व्यवसाय, नागरिक, संस्थान इस दिशा में ठोस कदमों को उठाया जाएगा। मानहानि को अपराधमुक्त करना, गोपनीयता का एक ठोस अधिकार, व्यक्तिगत विकल्पों में स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, वीवीपीएटी की अनिवार्य गिनती इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना कि पुलिस और जांच एजेंसियां कानून के अनुसार कार्य करें। हम भय पर आशा पर ध्यान केंद्रित करेंगे और भारतीयों को नागरिक होने की गरिमा बहाल करेंगे।

भगवान राम को लेकर भाजपा पर क्यों चढ़े कन्हैया कुमार?

हाल ही में कन्हैया कुमार भगवान राम को लेकर भाजपा पर चढ़ गए हैं! लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी, भाजपा भगवान राम का नाम लेकर नाथूराम के सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने की ‘राजनीतिक चाल’ चल रही है जो देश के लिए खतरनाक है। कन्हैया कुमार ने यह भी दावा किया कि भाजपा हिंदू धर्म की महानता को कम करने का प्रयास कर रही है और कहा कि राम की संकल्पना में किसी के लिए नफरत का कोई स्थान नहीं है। कन्हैया कुमार ने ‘पीटीआई’ से बातचीत में कांग्रेस पर लगने वाले परिवारवाद के आरोपों को लेकर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि ‘व्यक्तिवाद’ परिवारवाद से ज्यादा खतरनाक है। जब कन्हैया कुमार से पूछा गया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से देश में राम मंदिर लहर की बात हो रही है जिससे भाजपा को फायदा हो सकता है, तो इस मुद्दे से कांग्रेस कैसे ‘डील’ करेगी? इस पर कन्हैया कुमार ने कहा कि कांग्रेस को इससे डील करने की क्या जरूरत है। अगर राम जी की लहर है तो यह बुरी बात नहीं है। बुरा तब होता जब नाथूराम महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोड़से की लहर होती। उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि भाजपा जो प्रचार कर रही है, उसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है। राम जी त्रेता युग में हुए थे, भाजपा 1980 में बनी है।

भाजपा इस काम में लगी है कि राम को मानने वाले लोगों को कैसे ठगा जाए, इसलिए नाम तो राम का लेते हैं लेकिन काम नाथूराम के करते हैं। यह जो खेल है इससे भाजपा को फायदा होता है। कन्हैया कुमार के अनुसार यह देश की संस्कृति, इतिहास और आने वाली पीढ़ी के खिलाफ है। अगर हम राम जी की संकल्पना को देखें तो वह (हर जगह) रचे-बसे हैं। लोगों के नाम और स्थानों के नाम उनके नाम पर हैं। कुछ धर्मों में है कि कोई एक स्थान महत्वपूर्ण होता है, लेकिन हिंदू धर्म में सभी स्थान और सभी भगवान महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने आगे कहा कि राम जी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, शिव जी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, विष्णु जी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं और ब्रह्मा जी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हिंदू धर्म दुनिया के दूसरे धर्मों से अलग है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि देश में हिंदू धर्म के लोगों के साथ छलावा किया जा रहा है तथा धर्म की विराटता, विस्तार को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राम जी की संकल्पना में कहीं किसी से नफरत के लिए कोई स्थान नहीं है…चिंताजनक है कि राम जी का नाम लेकर नाथूराम की सांप्रदायिकता, विभाजन, लड़ाने की राजनीतिक चाल चली जा रही है और वो खतरनाक है। राम जी का नाम त्रेता युग से चला आ रहा है वो हमेशा रहेगा। भाजपा के पैदा होने से पहले चलता आ रहा है और भाजपा जब खत्म हो जाएगी, उसके बाद भी रहेगा।

कांग्रेस पर परिवारवादी पार्टी होने के आरोप से जुड़े सवाल पर कुमार ने कहा कि अगर परिवारवाद जैसी कोई चीज है तो सभी परिवारवादी हैं। उनका कहना था कि यह एक जानबूझकर किया जाने वाल प्रयास है कि किसी की पहचान को नीचा दिखाया जाए। कांग्रेस के संदर्भ में परिवारवाद की बात होती है तो मैं यह पूछता हूं कि यह सिर्फ गांधी-नेहरू परिवार तक सीमित है या बाकी नेताओं पर भी लागू होती है? अगर बाकी नेताओं पर लागू होती है तो फिर ऐसा क्यों है कि जब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे तब तक परिवारवादी थे और ज्यों ही भाजपा में गए तब राष्ट्रवादी और संघवादी हो गए?

यह पूछे जाने पर कि क्या तेजस्वी यादव उनसे असहज महसूस करते हैं तो कन्हैया कुमार ने कहा कि मैं इतना बड़ा व्यक्ति नहीं हूं कि जिनके पिता जी, माता जी मुख्यमंत्री रहे हों, कुछ महीने पहले तक वह खद उप मुख्यमंत्री थे, वह हमसे डर जाएंगे। उनको देश के वर्तमान शासन और परिस्थति से डरने की जरूरत है।इस सवाल पर कि क्या वह बिहार के बेगूसराय से ही लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे तो कन्हैया कुमार ने कहा कि जो रास्ता मालूम होता है व्यक्ति बार-बार उसी रास्ते पर चलना चाहता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्ष के लिए मैं अपने आप को किसी स्थान तक सीमित करके नहीं देखता। पार्टी कहेगी कि चुनाव लड़ना है तो 543 सीटों में से कहीं से भी लड़ेंगे। पार्टी के आदेश की कभी अहवेलना नहीं करेंगे, लेकिन यह स्वाभाविक बात है जिस जगह को आप जानते हैं वहां सहज महसूस करते हैं।

क्या 2004 की तरह 2024 में बीजेपी को मात दे पाएगी कांग्रेस?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस 2004 की तरह 2024 में बीजेपी को मात दे पाएगी या नहीं! लोकसभा का चुनावी रण सज चुका है। सत्ताधारी बीजेपी हो या फिर कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां, सभी जोरदार तैयारी में जुटे हुए हैं। ऐसे में हर किसी के मन में सवाल यही है कि आखिर इस बार मुकाबला किसके पक्ष में जाएगा। केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी इस मुकाबले में जीत को लेकर आश्वस्त दिख रही। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद यही है कि पार्टी 2004 वाला कारनामा कर सकती है? जिस तरह 2004 के आम चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन ने जोरदार वापसी की और बीजेपी के ‘इंडिया शाइनिंग’ नारे को फेल करते हुए केंद्र की सत्ता में काबिज हुई, उसकी उम्मीद शायद ही किसी को रही होगी। उस समय भी बीजेपी नेतृत्व जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा था। उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। अब कांग्रेस 2024 में 2004 वाले कारनामे की उम्मीद कर रही, पर क्या इस बार ऐसा कुछ हो सकता है? ये तो 4 जून को स्पष्ट हो सकेगा जब चुनाव नतीजे सामने आएंगे। 2024 में 2004 वाले कारनामे की चर्चा तब शुरू हुई जब कांग्रेस का घोषणापत्र जिसे पार्टी ने ‘न्याय पत्र’ नाम दिया है, वो जारी किया गया। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि 2004 को मत भूलना जब ‘इंडिया शाइनिंग’ का नारा बुलंद किया जा रहा था। हर किसी को संदेह था कि क्या अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली बीजेपी को हराया जा सकता है। जैसे ही राहुल ने इस बात का जिक्र किया तो 2004 में कांग्रेस की जीत की वास्तुकार सोनिया गांधी ने सबसे ज्यादा तालियां बजाईं। लेकिन क्या 2024 में पार्टी के लिए 2004 जैसा कारनामा करना उतना ही आसान होगा?

ये सवाल इसलिए क्योंकि इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। चाहे बीजेपी के लिए 370 सीट का टारगेट सेट करना हो या फिर एनडीए के लिए 400 पार का लक्ष्य रखना। पीएम मोदी खुद आगे बढ़कर फ्रंटफुट पर बैटिंग करते दिख रहे हैं। वो लगातार चुनावी रैलियों और रोड-शो में अपनी सरकार के दौरान हुए विकास कार्यों का जिक्र करते नजर आ रहे हैं। यही नहीं उन्होंने ‘मोदी की गारंटी’ का जिक्र करके लोगों में अपनी मजबूत उपस्थिति का बड़ा दांव भी चला है। पीएम मोदी जिस तरह से इस चुनाव में ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ की तर्ज पर 400 पार के टारगेट में जुटे हैं वो बेहद निर्णायक रहने के आसार हैं। इसके उलट एक फैक्टर कांग्रेस को लेकर भी है, जिस तरह से उनकी पार्टी के नेता साथ छोड़ रहे उससे यही धारणा बन रही कि कांग्रेस कमजोर हो रही है। इसके साथ ही लोगों में ये भी बात फैल रही कि देश की सबसे पुरानी पार्टी को कुछ लोग चला रहे हैं।

2004 के मुकाबले 2024 में कांग्रेस के भीतर सबकुछ बदल चुका है। कांग्रेस के भीतर उथल-पुथल का अंदाजा पार्टी के घोषणा पत्र जारी होने के दौरान मंच पर बैठे नेताओं की बातचीत से लगाया जा सकता है। मंच पर स्पष्ट रूप से जो दिग्गज मौजूद थे उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ही थे। ये वही लोग हैं जो पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। इस दौरान ‘राहुल भैया जिंदाबाद’ और ‘राहुल गांधी आप संघर्ष करो हम आपके साथ हैं’ के नारे भी लगे।

राहुल गांधी का ‘संघर्ष’ पार्टी के घोषणापत्र में नजर भी आया, जिसमें जातीय जनगणना और काम के अधिकार की बात की गई है। इसके साथ ही घोषणा-पत्र में एक वादा ये भी है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार दल-बदल के मामले में तत्काल अयोग्यता के लिए एक नया कानून लाएगी। चुनावी बांड की समीक्षा करेगी और ईडी और सीबीआई के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका सुनिश्चित करेगी। राहुल गांधी की हालिया ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ काफी चर्चित रही लेकिन क्या इसका चुनावों में असर दिखेगा, ये भी बेहद दिलचस्प होगा। 2004 के चुनाव में बीजेपी के ‘इंडिया शाइनिंग’ के मुकाबले कांग्रेस का एक नारा काफी चर्चित हुई था। उस समय ‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ’ एक विजयी नारा बना था। हालांकि, तब कांग्रेस काफी मजबूत थी। एक महिला नेता ने उस समय बेहद शक्तिशाली नजर आ रहे अटल बिहारी वाजपेयी को चुनौती दी और देश की सत्ता पर पार्टी को काबिज कराने मे सफल रहीं। हालांकि, अब यह सब बदल गया है।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में एक और अहम फैक्टर है जाति जनगणना पर जोर। कांग्रेस आरक्षण पर 50 फीसदी की सीमा हटाना चाहती है। दलितों और ओबीसी के लिए इसे बढ़ाना चाहती है। जब राहुल गांधी राजनीति में आए, तो वह एक नई हवा लाना चाहते थे और समावेशी राजनीति को बढ़ावा देना चाहते थे जहां सभी को मौका दिया जाएगा और उनके पिता की तरह, वंश या जाति से ज्यादा योग्यता मायने रखेगी। कांग्रेस छोड़ने वाले या उसमें शामिल होने वाले कई लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि बीजेपी से जूझ रही पार्टी समावेशी विकास पर जोर क्यों दे रही है और राहुल गांधी जैसे आधुनिक, उदारवादी नेता, जो निर्णय ले रहे हैं वो बीते समय में वापस जा रहे हैं।

बीजेपी और कांग्रेस नेतृत्व की बात करें उनकी सोच में दिख रहा बड़ा बदलाव ही दोनों दलों की मौजूदा स्थिति को बयान करने के लिए काफी हैं। अगर बीजेपी की बात करें तो पार्टी अपने कार्यकर्ताओं की ताकत को समझती है। पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं से जुड़ने की कवायद करती है। इसके उलट कांग्रेस में कई लोगों ने नेताओं तक पहुंच न होने की शिकायत की है। खुद पार्टी के कई दिग्गजों ने कांग्रेस आलाकमान को लेकर ऐसी ही शिकायतें दर्ज कराई। फिलहाल बीजेपी और कांग्रेस में कौन बाजी मारेगा इसका जवाब 4 जून को सामने आ जाएगा, जब 7 फेज की वोटिंग के बाद मतों की गिनती शुरू होगी। लेकिन मौजूदा स्थिति में यह कोई रहस्य नहीं है कि 2004 में कांग्रेस के पास जो बढ़त थी वह अब स्पष्ट रूप से गायब है।

चुनावी बॉन्ड और बीजेपी के लिए क्या बोले कपिल सिब्बल?

हाल ही में कपिल सिब्बल ने चुनावी बॉन्ड और बीजेपी के लिए एक बयान दिया है! राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी चुनावी बॉन्ड के जरिए प्राप्त ‘अवैध धन’ से प्रचार कर रही है और जांच एजेंसियां सो रही हैं। चुनावी बॉन्ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक मामले को लेकर याचिकाकर्ताओं की तरफ से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने ये दावा किया। उन्होंने कहा कि घाटे वाली 33 कंपनियों ने लगभग 581 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड दान किए, जिनमें से 434 करोड़ रुपये बीजेपी के पास गए। चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी और अन्य दलों के पास जो पैसा गया वह अवैध था। कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर बीजेपी के पास गया धन अवैध है, तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें आयकर विभाग का कोई नोटिस मिला? मैं आयकर विभाग से पूछना चाहता हूं-क्या उसने बीजेपी को कोई नोटिस भेजा? मैं ईडी से पूछना चाहता हूं- क्या उसने कोई छापेमारी की? सिब्बल ने कहा कि आपने कांग्रेस पार्टी के खाते पर रोक लगा दी, लेकिन बीजेपी के करीब 6,655 करोड़ रुपये मिले, क्या आपके खाते पर रोक लगाई गई?

बीजेपी पर हमला करते हुए सिब्बल ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ। न तो आयकर विभाग ने पार्टी को नोटिस भेजा, जिनकी पूंजीगत आय उनके दान से कम थी। सिब्बल ने कहा कि बीजेपी भी सुरक्षित है, कंपनियां भी सुरक्षित हैं। ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई सो रही हैं और भाजपा उस पैसे से प्रचार कर रही है, यही ‘मोदी की गारंटी’ है।न ही ईडी ने सिब्बल ने इस मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।कंपनियों की ओर से 2,717 करोड़ रुपये का दान दिया गया, जिनकी पूंजीगत आय उनके दान से कम थी। सिब्बल ने कहा कि बीजेपी भी सुरक्षित है, कंपनियां भी सुरक्षित हैं। ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई सो रही हैं और भाजपा उस पैसे से प्रचार कर रही है, यही ‘मोदी की गारंटी’ है। उन्होंने कहा कि मैं मोहन भागवत जी से पूछना चाहता हूं, आप कहते हैं कि आप राजनीति में नहीं हैं, लेकिन आप देश के बारे में सोचते हैं। जब से चुनावी बॉन्ड पर फैसला आया है, उन्होंने कुछ नहीं कहा। उन्हें कहना चाहिए कि मोदी सरकार का फैसला गलत था। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को केंद्र की चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। की और न ही सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खाते पर रोक लगा दी गई, लेकिन चूंकि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग आपके (भाजपा) हैं, इसलिए आपको कोई नोटिस नहीं मिलता या छापे का सामना नहीं करना पड़ता।

सिब्बल ने कहा कि ईडी को वहां पहुंचना चाहिए था और सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। कपिल सिब्बल ने यह भी दावा किया कि चुनावी बॉन्ड के माध्यम से उन कंपनियों की ओर से 2,717 करोड़ रुपये का दान दिया गया, जिनकी पूंजीगत आय उनके दान से कम थी। सिब्बल ने कहा कि बीजेपी भी सुरक्षित है, कंपनियां भी सुरक्षित हैं। ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई सो रही हैं और भाजपा उस पैसे से प्रचार कर रही है, यही ‘मोदी की गारंटी’ है। उन्होंने कहा कि गारंटी यह है कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी क्योंकि ईडी, सीबीआई और ईडी उनकी हैं।

सिब्बल ने इस मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं मोहन भागवत जी से पूछना चाहता हूं, आप कहते हैं कि आप राजनीति में नहीं हैं, कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर बीजेपी के पास गया धन अवैध है, तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें आयकर विभाग का कोई नोटिस मिला? मैं आयकर विभाग से पूछना चाहता हूं-क्या उसने बीजेपी को कोई नोटिस भेजा? मैं ईडी से पूछना चाहता हूं- क्या उसने कोई छापेमारी की? सिब्बल ने कहा कि आपने कांग्रेस पार्टी के खाते पर रोक लगा दी, लेकिन बीजेपी के करीब 6,655 करोड़ रुपये मिले, क्या आपके खाते पर रोक लगाई गई?लेकिन आप देश के बारे में सोचते हैं। जब से चुनावी बॉन्ड पर फैसला आया है, उन्होंने कुछ नहीं कहा। उन्हें कहना चाहिए कि मोदी सरकार का फैसला गलत था। सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को केंद्र की चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।

अमेरिका के एरिक गार्सेटी ने भारत की तारीफ की.

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लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ने मोदी सरकार को असहज कर दिया है. आज नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने मोदी सरकार को सर्टिफिकेट दिया.

एक कार्यक्रम में गार्सेटी ने कहा कि भारत में अमेरिकी दूतावास का प्रतिनिधि होना एक “महान अवसर” है, उनके शब्दों में, “यदि आप भविष्य देखना चाहते हैं, तो भारत आएं।” यदि आप भविष्य का अनुभव लेना चाहते हैं, तो भारत आएं। यदि आप भविष्य के लिए काम करना चाहते हैं, तो भारत आएं।”

इससे पहले, देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी नई ऊंचाई पर पहुंच गई है, जिससे प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग का महत्व बढ़ गया है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहा. देश के विदेश मंत्रालय के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि अमेरिका अरुणाचल प्रदेश को भारतीय क्षेत्र के रूप में मान्यता देता है और वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार सैन्य घुसपैठ का कड़ा विरोध करता है। अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने कोलकाता में एक पीली टैक्सी के सामने खड़े होकर अपनी तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की और लिखा ‘दो राजदूत’. गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में उनके स्वर में कोलकाता की सराहना भरी थी. “कोलकाता एक ऐसा शहर है जहां की सड़कों पर आप खो जाना चाहते हैं,” एरिक ने ऐसे कहा जैसे अपना कूटनीतिक कवच उतार रहा हो। राजदूत के लिए काम एक समस्या है! दिल्ली ख़ूबसूरत है, योजनाबद्ध है. लेकिन कोलकाता लापरवाह! उन्होंने कहा, मुझे कोई जानकारी नहीं है. वह मैं हूं!”

एरिक मध्य कोलकाता के पंचमिशेली मोहल्ले में घूमने का अपना अनुभव बता रहे थे। वह गलियों में घूमने, फ़ारसी अग्नि देवता के मंदिर जाने या पुरानी मस्जिद के सामने चाय और पूड़ी पीने की बात करता है। एरिक ने बड़ाबाजार, टेरिटिबाजार के चिनपारा में बेथ-एल सिनेगॉग की भी तस्वीर खींची। उनके शब्दों में, ”किसी शहर में संघर्ष की उपस्थिति मुझे आकर्षित करती है। कोलकाता के रंगीन इलाकों में ऐसा लगता था कि इतनी विविध आबादी ने एक राष्ट्र बनाया है। यह आवश्यक शिक्षा है.”

स्वतंत्र अमेरिका का दूसरा वाणिज्य दूतावास कलकत्ता में स्थापित किया गया। एरिक ने कहा, “जॉर्ज वाशिंगटन ने अप्रैल 1794 में महावाणिज्यदूत बेंजामिन जॉय को भेजा। हम तब से हैं!” राजदूत ने इस दिन कहा, “अमेरिका में अध्ययन या अनुसंधान के लिए अधिकांश वीजा अब भारत में कोलकाता से दिए जा रहे हैं। यह गौरव है. कलकत्ता के शिक्षित दिमागों का एक परिचय।” उस शाम दिल्ली लौटने से पहले एरिक ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स और जोरासांकोर ठाकुरबाड़ी का भी दौरा किया। कोलकाता की अपनी यात्रा के दौरान, अमेरिकी राजदूत एरिक गारसेटी ने शहर की विविध संस्कृति में डुबकी लगाई। उन्होंने शहर की सड़कों पर अलग-अलग मूड में अपनी कई तस्वीरें ट्वीट कीं। पूर्व चिनपारा बाज़ार गए, पुराने ‘चाइना ईटिंग हाउस’ के सामने तस्वीरें लीं। वह हाथ में चाय का बर्तन लेकर भीड़ के साथ चला। उस मोहल्ले में पुराने इमामबाड़े का दौरा। बड़ाबाजार में पोलक स्ट्रीट पर बेथ-एल सिनेगॉग भी गए।

अमेरिकी राजदूत ने अपने ट्वीट में लिखा, ”कोलकाता वास्तव में रंगीन संस्कृतियों का शहर है। मैंने शहर के सामंजस्यपूर्ण इतिहास की गहराई को महसूस किया और विभिन्न तीर्थस्थलों का दौरा किया। इन संस्थानों का सह-अस्तित्व कलकत्ता की धार्मिक सहिष्णुता और बहुलवाद को दर्शाता है। शाम को उन्होंने शहर के कुछ प्रमुख नागरिकों से भी मुलाकात की. एरिक आज, गुरुवार को अमेरिकन सेंटर में पत्रकारों से मुखातिब होंगे। लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक गार्सेटी ने भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ली। अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने शुक्रवार को उन्हें पद की शपथ दिलाई।

कमला ने शपथ ग्रहण समारोह की फोटो ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आज मुझे अपने सहयोगी एरिक को भारत में अगले राजदूत के रूप में शपथ लेने का सम्मान मिला। राजदूत गार्सेटी एक जिम्मेदार लोक सेवक हैं। वह भारत के लोगों के साथ हमारी साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के प्रस्ताव को 52-42 वोटों से मंजूरी मिल गई। अमेरिका में तीसरी पीढ़ी के आप्रवासी इस नेता को डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ‘बिडेन के करीबी’ के रूप में जाना जाता है। हालाँकि, विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का भी उनसे जुड़ाव है। सीनेट की विदेश संबंध समिति के दो रिपब्लिकन सदस्यों ने भी भारत के अगले राजदूत के रूप में लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक के नाम का समर्थन किया।

एनसीईआरटी ने बारहवीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की किताबों में कई बदलाव किए हैं.

एनसीईआरटी ने आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए बारहवीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की किताबों में कई बदलाव लाए हैं। कुछ सन्दर्भ जोड़े गये, कुछ सन्दर्भ हटाये गये तथा कुछ सन्दर्भों पर टिप्पणियाँ की गयीं। नए संदर्भों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया जाना भी शामिल है।

किताब के पेज 132 पर पहले लिखा था, ”ज्यादातर राज्यों के पास समान शक्तियां हैं. हालाँकि, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों के मामले में कुछ विशेष प्रावधान हैं।” हालाँकि, जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्वी राज्यों के मामले में कुछ विशेष प्रावधान हैं। हालाँकि, संविधान का अनुच्छेद 370, जिसमें जम्मू और कश्मीर के लिए एक विशेष प्रावधान था, अगस्त 2019 में निरस्त कर दिया गया था।

कुछ अन्य हिस्से बदल गए हैं. उदाहरण के लिए, दूसरे अध्याय के पृष्ठ 25 पर, भारत-चीन संबंधों पर चर्चा की गई। इसमें कहा गया, ”हिंदी-चीनी भाई-भाई का मूड बदल गया है”, ”दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के कारण उन्होंने उम्मीद खो दी है.”
या तो।” अब वाक्य बन गया है, ”भारतीय सीमा पर चीनी अतिक्रमण ने वह उम्मीद खत्म कर दी।” ‘अधिक से अधिक चरमपंथियों ने अलगाव की मांग की।” यह दूसरा वाक्य अब हटा दिया गया है। पहला वाक्य बस इतना कहता है, “प्रस्ताव में संघीय ढांचे को मजबूत करने की मांग की गई है।” एनसीईआरटी ने कहा कि बदलाव पहले ही ऑनलाइन किया जा चुका है। अब यह छपने आ गया है.

अधिकृत कश्मीर के संबंध में पृष्ठ 119 पर पहले लिखा था, “भारत इस क्षेत्र को अवैध कब्ज़ा मानता है। पाकिस्तान फिर इसे ‘आजाद कश्मीर’ बताता है.” इस क्षेत्र को ‘पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर’ कहा जाता है।

खालिस्तान विषय को भी छोड़ दिया गया है. जैसा कि पहले पृष्ठ 123 पर था, “इस प्रस्ताव में संघीय ढांचे को मजबूत करने का आह्वान किया गया। लेकिन इसकी व्याख्या एक अलग सिख राष्ट्र की दलील के रूप में भी की जा सकती है।” इसके बाद दूसरे पैराग्राफ में लिखा है, ”अधिक से अधिक चरमपंथियों ने अलगाव की मांग की।” यह दूसरा वाक्य अब हटा दिया गया है। पहला वाक्य बस इतना कहता है, “प्रस्ताव में संघीय ढांचे को मजबूत करने की मांग की गई है।” एनसीईआरटी ने कहा कि बदलाव पहले ही ऑनलाइन किया जा चुका है। अब यह छपने आ गया है.

एक कैरिकेचर भी हटा दिया गया है. पृष्ठ 155 पर पहले एक व्यंग्यचित्र था, जिसका शीर्षक था – ‘क्या भारतीय लोकतंत्र जीवित रहेगा?’ व्यंग्यचित्र और प्रश्न दोनों हटा दिए गए हैं। इसमें भारत के विकास के बारे में एक तालिका आती है. यह निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि 2014 के बाद के भारत के बारे में कोई नकारात्मक धारणा न फैले। इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के प्रश्नपत्रों की संरचना में बदलाव होगा। इन दोनों कक्षाओं के प्रश्नपत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बदले जाएंगे। अब से उम्मीदवारों को बड़े लिखित प्रश्नों के बजाय अधिक कौशल आधारित वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देना होगा। इस संबंध में बोर्ड ने हाल ही में एक अधिसूचना प्रकाशित की है।

नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बहुविकल्पीय प्रश्नों/घटना-आधारित या ‘केस-आधारित’ प्रश्नों/’स्रोत-आधारित एकीकृत’ प्रश्नों या किसी अन्य प्रकार की ‘योग्यता’ या कौशल-आधारित प्रश्नों की संख्या 40 से बढ़ाई जाएगी। ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं में प्रतिशत से 50 प्रतिशत। दूसरी ओर, लघु प्रश्न/विस्तृत बड़े प्रश्न जैसे ‘निर्मित प्रतिक्रिया’ प्रश्नों की संख्या 40 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दी जाएगी। हालाँकि, शेष 20 प्रतिशत ‘चयनित प्रतिक्रिया प्रकार’ प्रश्न अपरिवर्तित रहते हैं। बोर्ड ने कहा कि प्रश्न पत्र का यह नया प्रारूप शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 से पेश किया जाएगा। प्रश्नपत्र की संरचना में अचानक इतना बदलाव क्यों? सीबीएसई के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य वर्षों से रटने की आदत से उबरने के लिए छात्रों की रचनात्मक, आलोचनात्मक या विश्लेषणात्मक और व्यवस्थित सोच कौशल को बढ़ाना है। हालाँकि, प्रकाशित अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि बोर्ड द्वारा कक्षा 9 और 10 की परीक्षाओं के मामले में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में जानकारी दी है कि कक्षा तीन और छह की नई पाठ्यपुस्तकें अप्रैल-मई तक छात्रों के लिए उपलब्ध होंगी। ये पाठ्यपुस्तकें स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप नए पाठ्यक्रम पर तैयार की गई हैं। इनमें से तीसरी कक्षा की किताबें इसी महीने और छठी कक्षा की किताबें मई के मध्य से उपलब्ध होंगी। आलोचनात्मक या विश्लेषणात्मक और व्यवस्थित सोच कौशल को बढ़ाना है। हालाँकि, प्रकाशित अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि बोर्ड द्वारा कक्षा 9 और 10 की परीक्षाओं के मामले में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने प्रचार अभियान के दौरान तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस पर हमला बोला.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान डीएमके और कांग्रेस पर भाई-भतीजावाद को लेकर हमला बोला. उन्होंने आज कांगू क्षेत्र के वेल्लोर में एक सार्वजनिक बैठक में कहा, “पूरी द्रमुक अब एक पारिवारिक संगठन बन गई है।” इस पितृसत्तात्मक राजनीति के कारण तमिलनाडु के युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल रहा है। द्रमुक के लिए राजनीति करने के लिए, किसी को तीन मुख्य मुद्दों पर पारंगत होना होगा – पारिवारिक राजनीति, भ्रष्टाचार, तमिल विरोधी संस्कृति।’ वेल्लोर के अलावा प्रधानमंत्री ने मेट्टापलायम में भी एक और रैली की.

इस साल के लोकसभा चुनाव में अभी तक मजबूत राष्ट्रवाद पैदा नहीं हुआ है, इसलिए देश की मुख्य सत्ताधारी पार्टी एक तरफ हिंदुत्व और दूसरी तरफ मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं को सामने ला रही है। आज दक्षिण भारत में खड़े होकर मोदी ने कहा, ”द्रमुक और कांग्रेस ने अनुसूचित जाति और ओबीसी को लंबे समय तक बिजली और आवास के लिए इंतजार कराया। लेकिन भाजपा ने उन्हें घर, बिजली और मुफ्त राशन दिया। परिवारवादी पार्टियाँ सोचती हैं कि गरीब लोगों का कोई भी प्रतिनिधि अपने बच्चों के बिना उच्च पद पर नहीं बैठ सकता।” मोदी पहले ही कांगू क्षेत्र में दो बार प्रचार कर चुके हैं। फरवरी और मार्च में पल्लदम और सेलम में दो सार्वजनिक बैठकें आयोजित की गईं। हाल ही में डीएमके ने कहा था कि यह लोकसभा चुनाव मोदी के भारत छोड़ने का चुनाव है. आज उस बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ”मैं उस नेता से कुछ कहना चाहता हूं जिन्होंने कहा था कि ये वोट, मोदी का वोट भारत छोड़ने के लिए है- इस बार का वोट, भारत से भ्रष्टाचार को भगाने के लिए है.” इस बार का वोट पितृसत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए है। भारत से राष्ट्र-विरोध को ख़त्म करना।”

डीएमके नेता दयानिधि मारन ने तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई पर तंज कसते हुए उन्हें ‘पाखंडी’ कहा। मोदी ने उस टिप्पणी को हथियार बनाकर नहीं छोड़ा. कहा, ”डीएमके सत्ता के अहंकार में डूबती जा रही है. उनके एक बड़े नेता ने हमें अन्नामलाई के बारे में गर्व से बताया – वह फिर कौन हैं! साथ ही अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। ये अहंकार तमिलनाडु की महान संस्कृति को शोभा नहीं देता. यहां के लोग इस व्यवहार को कभी पसंद नहीं करेंगे.”

उत्तर से दक्षिण. नरेंद्र मोदी ने आगामी लोकसभा चुनाव में ‘चार सौ पार’ का जो वादा किया है, उसे सफल बनाने के लिए वह खुद दौड़ रहे हैं.

आज सुबह राम मंदिर का मुद्दा उठाकर उत्तर प्रदेश के पिलीवित में हिंदुत्व का ज्वार ला दिया. उन्होंने कल्याण सिंह की तारीफ करते हुए उत्तर प्रदेश में उनके मुख्यमंत्रित्व काल में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को बड़ी कुशलता से याद किया. उसी दिन दोपहर के समय मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में एक सार्वजनिक बैठक कर कांग्रेस के गुटीय संघर्ष को सामने लाना चाहा. नरेंद्र मोदी ने हाथ में कमल का निशान लेकर चेन्नई की रंगारंग यात्रा की. यात्रा को स्थानीय भाजपा विंग द्वारा लगातार सक्रिय रखा गया है। राजनीतिक खेमे के मुताबिक, द्रविड़ भूम में मोदी की ए हेन यात्रा की व्यवस्था से पता चलता है कि मोदी और उनकी भगवा सेना दक्षिण भारत में अपने पैर जमाने के लिए कितनी बेताब है. क्योंकि बीजेपी के पास उत्तर में अपनी ताकत बढ़ाने की अब कोई गुंजाइश नहीं है. राजनीतिक हलकों का कहना है कि दक्षिण में सीटें बढ़ाने को ध्यान में रखते हुए ‘चारशो पार’ के सिद्धांत का प्रचार किया गया है, लेकिन राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होने पर पीएम विरोधी मंच इंडिया के सदस्य दलों पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आखिरकार इस मंदिर के निर्माण को रोकने की कोशिश की. बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मोदी ने आज प्रचार अभियान में उन्हें याद किया. कहा, ”हमारे कल्याण सिंह ने राम मंदिर के लिए अपनी जान और सरकार कुर्बान कर दी. देश का हर परिवार अपनी आस्था के अनुसार शामिल हुआ। लेकिन इंडी-एलायंस के नेताओं को मंदिर बनने से पहले ही नफरत थी. यह अभी भी मौजूद है. कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर न बनने देने की भरपूर कोशिश की है. लेकिन जब देशवासियों ने अपने संसाधनों से इस भव्य मंदिर का निर्माण किया और उन्हें (कांग्रेस को) आने और अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए आमंत्रित किया, तो उन्होंने निमंत्रण को अस्वीकार करके भगवान राम का अपमान किया। कांग्रेस ने भी शामिल होने वालों को छह साल के लिए निलंबित कर दिया।

मुख्य विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, ”एक समय था जब कांग्रेस सरकार दुनिया की तरफ मदद का हाथ बढ़ाती थी. लेकिन कोविड महामारी के दौरान भारत ने पूरी दुनिया को दवाइयां भेजीं. जब कोई देश शक्तिशाली हो जाता है तो पूरी दुनिया उसकी बात सुनने को मजबूर हो जाती है। अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, इरादा नेक हो तो परिणाम मिलना तय है। हम आज हर जगह विकसित भारत देखते हैं।”

सलमान खान की अगली फिल्म सिकंदर ईद 2025 पर रिलीज होगी.

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बॉलीवुड में साल भर विभिन्न त्योहारों के आसपास बड़े सितारों की फिल्में रिलीज होती रहती हैं। और इस सीज़न का मतलब है सलमान खान का बड़े पर्दे पर आना। आइडिया एक्टर की इस साल कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है. लेकिन इस खास दिन पर सलमान ने अपने फैंस को निराश नहीं किया. उन्होंने गुरुवार को अपनी नई फिल्म के नाम की घोषणा की. उन्होंने फिल्म में अपने किरदार की झलक भी दी. सलमान ने हाल ही में अपनी नई फिल्म की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह गजनी फेम दक्षिणी निर्देशक एआर मुरुगादॉस के साथ टीम बनाने जा रहे हैं। फिल्म का निर्माण साजिद नाडियाडवाला ने किया है। इसके बाद से ही फैंस के बीच इस नई फिल्म को लेकर उत्साह का पारा चढ़ा हुआ है. भाईजान ने गुरुवार को इस फिल्म के नाम का खुलासा किया. फिल्म का नाम ‘सिकंदर’ है. वह फिल्म में शीर्षक भूमिका निभाएंगे।

इस साल दो हिंदी फिल्में रिलीज हुई हैं। ऐसे में सलमान ने फिल्म के नाम की घोषणा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “इस ईद पर ‘बड़े मिया छोटे मिया’ और ‘मैदान’ देखें और अगले साल ‘सिकंदर’ से आकर बात करें।” आप को बधाई।

दर्शकों ने सलमान को साजिद द्वारा निर्मित कई फिल्मों में देखा है। वह सफर ‘जुरूआ’ से शुरू हुआ. बाद में इस जोड़ी ने दर्शकों को ‘मुझसे शादी करोगी’ और ‘किक’ जैसी फिल्में दीं। दूसरी ओर, फिल्म ‘गजनी’ ने मुरुगादॉस को बॉलीवुड में लोकप्रियता दिलाई। तमिल फिल्म के हिंदी वर्जन में आमिर खान ने काम किया था. मालूम हो कि मुरुगादॉस पहली बार सलमान के साथ किसी फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं। सुनने में आ रहा है कि फिल्म में सलमान के अपोजिट इंडस्ट्री की एक टॉप एक्ट्रेस के नाम पर विचार किया जा रहा है। यह फिल्म अगले साल ईद पर रिलीज होगी। सलमान खान ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई नए कलाकारों को मौका दिया है। उनकी बहन अर्पिता खान के पति आयुष शर्मा भी उस लिस्ट में हैं। आयुष ने सलमान द्वारा निर्मित फिल्म ‘लवरात्रि’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद वह फिल्म ‘एंथम’, ‘किसी की भाई किसी की जान’ में नजर आए। उनकी अगली फिल्म ‘रुस्लान’ बहुत जल्द रिलीज होगी. आयुष ने अब तक जो कुछ फिल्में की हैं वे सभी सलमान खान के साथ हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने जीजा की प्रोडक्शन कंपनी के साथ ही काम किया है। लेकिन क्या गिन्नी अर्पिता और जीजा सलमान खान इस फैसले को समझ पाते हैं? आखिरकार आयुष ने बताई वजह.

हालांकि, इस संदर्भ में आयुष ने कहा कि उनका करियर अभी शुरू हुआ है. कोई पारिवारिक प्रतिबंध नहीं हैं. वह किसी भी प्रोडक्शन कंपनी में काम करने को तैयार हैं, भले ही वह अच्छी फिल्म और कहानी क्यों न हो। आयुष के शब्दों में, ”न तो मैंने और न ही मेरे परिवार ने कोई योजना बनाई थी. परिवार के बाहर तस्वीरें न लेने का विचार भी सही नहीं है. मैं अच्छा काम करने का भूखा हूं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि निर्माता कौन है। ”तस्वीर अच्छी होनी चाहिए.”

आयुष शर्मा स्टारर ‘रुस्लान’ का फर्स्ट लुक पिछले अप्रैल में जारी किया गया था। पब्लिसिटी फ्लैश सामने आते ही विवाद शुरू हो गया. आरोप लगाया गया कि फिल्म की पटकथा और संवाद सभी साहित्यिक चोरी हैं। निर्माता जगदीश शर्मा और अभिनेता राजवीर शर्मा ने शिकायत की। उन्होंने अपने वकीलों के जरिए दिल्ली कोर्ट में केस दायर कर आगामी फिल्म ‘रुसलान’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है. उनके मुताबिक, आयुष शर्मा की यह फिल्म 2009 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘रुस्लान’ की हूबहू नकल पर बनाई गई है। वैसे भी इस उलझन से उबरने के बाद ये फिल्म 26 अप्रैल को रिलीज होगी.

2016 में बॉक्स ऑफिस पर सबसे सफल फिल्मों में से एक सलमान खान स्टारर ‘सुल्तान’ थी। इस फिल्म के लिए भाईजान ने कड़ी मेहनत करके अपनी शारीरिक संरचना में बदलाव किया। क्योंकि फिल्म में उन्होंने एक पहलवान की भूमिका निभाई थी. फिल्म में उनकी हीरोइन अनुष्का शर्मा थीं। इस फिल्म के लिए दोनों को मिलने वाले पारिश्रमिक में काफी अंतर था।

सूत्रों के मुताबिक, प्रोडक्शन कंपनी यशराज फिल्म्स ने फिल्म ‘सुल्तान’ बनाने के लिए 90 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। हालांकि, फिल्म ने उस साल बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा की कमाई की थी. फिल्म का वर्ल्डवाइड बिजनेस 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है. लेकिन इस फिल्म में सलमान और अनुष्का के पारिश्रमिक के आंकड़े ने कई लोगों को चौंका दिया है। इस फिल्म के लिए सलमान ने कोई विशेष पारिश्रमिक नहीं लिया। उन्होंने फिल्म के मुनाफे से पारिश्रमिक की मांग की। वहीं अनुष्का उस वक्त फिल्म के लिए जो रेट लेती थीं, उसे देखते हुए कई सूत्रों का दावा है कि उन्हें इस फिल्म के लिए 6 से 7 करोड़ रुपये मिले थे. फिल्म के हिट होने के बाद सलमान को यशराज की ओर से 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। आंकड़े कहते हैं कि अनुष्का को फिल्म के बजट का केवल 6-7 प्रतिशत भुगतान किया गया था। इसकी तुलना में सलमान की पॉकेट सैलरी कई गुना ज्यादा है!

शाहजहां शेख ने संदेशखाली घटना की सीबीआई जांच की सराहना की.

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शाहजहां ने कहा, ‘सीबीआई जांच हो तो बहुत अच्छा’ संदेशखाली मामले में हाई कोर्ट के फैसले के संदर्भ में शाहजहां शेख ने कहा कि अगर केंद्रीय एजेंसी ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ईडी) से जांच हो तो यह भी ‘अच्छा’ होगा. उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के विभिन्न मामलों की जांच कर रही है। शाहजहां शेख का मानना ​​है कि संदेशखालिकांडे में सीबीआई और ईडी की जांच से अच्छे नतीजे मिलेंगे. निष्कासित तृणमूल नेता ने यह बात गुरुवार को ईडी कार्यालय से मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय कही.

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को संदेशखाली में महिलाओं पर अत्याचार, जमीन पर कब्जा करने, स्थानीय निवासियों पर अत्याचार के आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया। इस संदर्भ में पूछे जाने पर संदेशखालिर बाग ने गुरुवार को कहा, ”सीबीआई जांच हो तो बहुत अच्छा होगा.” शाहजहां का जवाब, ‘सब ठीक हो जाएगा’ राशन ‘भ्रष्टाचार’ मामले में 5 जनवरी को ईडी संदेशखाली स्थित शाहजहां के घर की तलाशी लेने गई थी. वहां ईडी अधिकारियों पर हमला किया गया. तभी से शाहजहां लापता था. 55 दिनों तक ‘लापता’ रहने के बाद आखिरकार उसे मिनाखान के बामनपुकुर इलाके से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. शाहजहां के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के कई मामलों में ईडी की जांच जारी है.

संयोगवश संदेशखाली को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में कुल पांच जनहित मामले दायर किये गये थे. मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवाग्नम और न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ एक साथ मामलों की सुनवाई कर रही है। उस मामले में सीबीआई जांच का फैसला सुनाया गया. कोर्ट की निगरानी में जांच जारी रहेगी. इसके अलावा कोर्ट ने संदेशखाली के संवेदनशील इलाकों को चिह्नित करने के लिए सड़कों पर सीसी कैमरे, एलईडी लाइटें लगाने को कहा है. राज्य को इसका खर्च अगले 15 दिनों के भीतर चुकाना होगा.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने संदेशखाली घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए. केंद्रीय एजेंसी को बुधवार से जांच शुरू करने को कहा गया है. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई को नई ईमेल आईडी खोलकर संदेशखाली घटना से जुड़ी शिकायतें जमा करनी होंगी. कोर्ट की निगरानी में जांच जारी रहेगी. इसके अलावा कोर्ट ने संदेशखाली के संवेदनशील इलाकों को चिह्नित करने के लिए सड़कों पर सीसी कैमरे, एलईडी लाइटें लगाने को कहा है. राज्य को इसका खर्च अगले 15 दिनों के भीतर चुकाना होगा.

संदेशखली को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में कुल पांच जनहित मामले दायर किये गये थे. मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवाग्नम और न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ एक साथ मामलों की सुनवाई कर रही है। उस मामले में मंगलवार को फैसला सुनाया गया. हाई कोर्ट ने दिए सीबीआई जांच के आदेश. जैसा कि डिवीजन बेंच ने देखा, न्यायालय को इसमें कोई संदेह नहीं था कि न्याय के हित में संदेशखाली घटना की निष्पक्ष जांच आवश्यक थी। महिलाओं पर अत्याचार, आम लोगों, खासकर अनुसूचित जनजातियों की जमीन हड़पने समेत विभिन्न शिकायतों पर विचार करते हुए कोर्ट ने फैसला किया कि संदेशखाली लोगों की शिकायतों के आधार पर सीबीआई जांच शुरू करेगी. कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले के सभी पक्ष अगले 15 दिनों के भीतर सभी शिकायतें सीबीआई को सौंपें. शिकायतें सीबीआई द्वारा प्रदान की गई ईमेल आईडी के माध्यम से की जानी चाहिए। यह शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा के लिए है। उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट को संदेशखाली क्षेत्र में उस ईमेल आईडी का प्रचार करना चाहिए. हाई कोर्ट ने कहा कि स्थानीय भाषा में सबसे ज्यादा प्रसारित होने वाले दैनिक अखबार में लोगों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए.

इस मामले की अगली सुनवाई हाई कोर्ट में 2 मई को होगी. कोर्ट ने कहा कि स्थानीय लोगों से जमीन हड़पने के आरोपों की उचित जांच और जांच कर रिपोर्ट अगली सुनवाई के दिन सीबीआई को सौंपी जाए. यदि आवश्यक हो, तो सीबीआई किसी भी व्यक्ति, संगठन, सरकारी प्राधिकरण, पुलिस प्राधिकरण, गैर सरकारी संगठनों सहित मामले में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति से जानकारी और राय ले सकती है।

कोर्ट ने कहा कि संदेशखाली में भूमि हस्तांतरण, कृषि भूमि को भेड़ों के नाम करने के आरोपों की जांच सीबीआई करे और विस्तृत रिपोर्ट दे. कोर्ट जांच प्रक्रिया की निगरानी करेगा. सीबीआई की रिपोर्ट देखने के बाद आगे के निर्देश दिये जायेंगे. इस सन्दर्भ में न्यायालय की टिप्पणी है कि संदेशखाली मामले में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ध्यान में रखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर जांच का अनुरोध किया गया था. मामले की महत्ता को समझते हुए कोर्ट को लगता है कि कोर्ट की निगरानी में ही सीबीआई जांच करेगी.

कोर्ट ने संदेशखाली के संवेदनशील इलाकों में सीसी कैमरे लगाने को कहा. उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, स्थानीय प्रशासन मिलकर संवेदनशील इलाकों की पहचान करें. सड़क पर एलईडी लाइटें लगाई जाएं। सीसीटीवी और एलईडी लाइट का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. अदालत ने निर्देश दिया कि राज्य अगले 15 दिनों के भीतर इस संबंध में आवश्यक मंजूरी और खर्च का भुगतान करे।

ऐसे खिलाड़ी जो आगे चलकर बने हैं राजनेता!

आज कहानी ऐसे खिलाड़ियों की जो आगे चलकर राजनेता बने हैं! राजनीति की पिच पर उतरने वाले कई खिलाड़ियों ने जहां बड़ी-बड़ी पारियां खेली हैं वहीं ऐसे भी नाम हैं, जो छोटी पारी खेलकर रिटायर हो गए। 2024 लोकसभा चुनाव में भी कई खिलाड़ी किस्मत आजमा रहे हैं, जबकि कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने राजनीति से तौबा कर ली है। तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान को बहरामपुर सीट से उतारा है। उनका मुकाबला कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी से हो सकता है। टीएमसी ने पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद कीर्ति आजाद को भी टिकट दिया है। कीर्ति आजाद 1999, 2009 और 2014 में दरभंगा सीट से बीजेपी सांसद रह चुके हैं। बीजेपी-कांग्रेस छोड़कर 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शाम‍िल हुए कीर्ति पर पार्टी ने बड़ा भरोसा जताते हुए बर्धमान-दुर्गापुर सीट से उम्मीदवार बनाया है। कीर्ति ने 2014 का चुनाव बीजेपी के ट‍िकट पर लड़ा था। 2015 में बीजेपी से सस्‍पेंड कर द‍िया गया था और फिर 2019 चुनावों से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने उन्हें धनबाद से उतारा था लेकिन उन्हें बीजेपी के पशुपति नाथ सिंह ने हरा दिया था। कीर्त‍ि ने 2021 के आखिर में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम ल‍िया था।

2008 के ओलिंपिक कांस्य पदक जीतने वाले विजेंदर सिंह ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर साउथ दिल्ली से चुनाव लड़ा था लेकिन बीजेपी के रमेश बिधूड़ी से हार गए थे। विजेंदर मुक्केबाजी में ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने हाल में बीजेपी जॉइन कर ली। पूर्व क्रिकेटर और वर्ल्ड चैंपियन टीम का हिस्सा रहे गौतम गंभीर को बीजेपी ने 2019 में पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। बीजेपी की ओर से ओलिंपिक में सिल्वर पदक विजेता कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जबकि कांग्रेस की ओर से ओलिंपियन कृष्णा पूनिया मैदान में थीं। राठौड़ ने यह सीट जीती। राठौड़ ने 2014 में भी यहां से जीत हासिल की थी। इस बार बीजेपी ने उन्हें राजस्थान विधानसभा चुनाव में उतारा है। वह भजनलाल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।उन्होंने कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली को हराया था। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने राजनीति से तौबा कर ली है।

क्रिकेटर और कमेंटेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2004 में की और बीजेपी के टिकट पर अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। वह जीते लेकिन रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अमृतसर सीट पर उपचुनाव हुआ। उपचुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की। 2009 लोकसभा चुनाव में सिद्धू ने तीसरी बार जीत हासिल की। बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा सदस्य भी बनाया लेकिन बीजेपी से उनकी बात बिगड़ गई। 2017 में उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा देते हुए बीजेपी से नाता तोड़ लिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के टिकट पर वह अमृतसर पूर्वी विधानसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की।

2019 लोकसभा चुनाव में जयपुर ग्रामीण सीट पर मुख्य मुकाबला दो पूर्व ओलिंपियन खिलाड़ियों में ही था। बीजेपी की ओर से ओलिंपिक में सिल्वर पदक विजेता कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जबकि कांग्रेस की ओर से ओलिंपियन कृष्णा पूनिया मैदान में थीं। राठौड़ ने यह सीट जीती। राठौड़ ने 2014 में भी यहां से जीत हासिल की थी। इस बार बीजेपी ने उन्हें राजस्थान विधानसभा चुनाव में उतारा है। वह भजनलाल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी ने 1971 में विशाल हरियाणा पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए थे। बीजेपी-कांग्रेस छोड़कर 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शाम‍िल हुए कीर्ति पर पार्टी ने बड़ा भरोसा जताते हुए बर्धमान-दुर्गापुर सीट से उम्मीदवार बनाया है। कीर्ति ने 2014 का चुनाव बीजेपी के ट‍िकट पर लड़ा था। 2015 में बीजेपी से सस्‍पेंड कर द‍िया गया था और फिर 2019 चुनावों से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने उन्हें धनबाद से उतारा था लेकिन उन्हें बीजेपी के पशुपति नाथ सिंह ने हरा दिया था। कीर्त‍ि ने 2021 के आखिर में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम ल‍िया था।पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन ने 2009 में कांग्रेस के टिकट पर मुरादाबाद से चुनाव जीता था। बीजेपी से सस्‍पेंड कर द‍िया गया था और फिर 2019 चुनावों से पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने उन्हें धनबाद से उतारा था लेकिन उन्हें बीजेपी के पशुपति नाथ सिंह ने हरा दिया था। कीर्त‍ि ने 2021 के आखिर में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम ल‍िया था।केरल, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे कई दिग्गजों के लिए निराशाजनक रहे थे। इनमें क्रिकेटर एस श्रीसंत, अभिनेत्री रूपा गांगुली, फुटबाल खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया प्रमुख हैं। क्रिकेटर श्रीसंत ने तिरुवनंतपुरम से बीजेपी के सहयोग से चुनाव लड़ा था लेकिन वहां कांग्रेस के वीएस शिवकुमार ने जीत दर्ज की थी।