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क्या पश्चिम बंगाल में हो रहा है सीबीआई पर विरोध?

वर्तमान में पश्चिम बंगाल में सीबीआई पर विरोध किया जा रहा है! हाल ही में ममता बनर्जी सरकार पश्चिम बंगाल में सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार की अर्जी को सुनवाई के योग्य मानते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने कानूनी पहलू उठाया है जिस पर विचार किया जाना चाहिए। जब राज्य सरकार ने CBI जांच के लिए दी गई अपनी परमीशन को वापस ले लिया तो फिर एजेंसी वहां के मामलों में केस क्यों दर्ज कर रही है। दरअसल, ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 131 का हवाला देते हुए यह याचिका दाखिल की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार की एक और याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण-जमीन हथियाने और राशन घोटाले से जुड़े सभी मामलों में सीबीआई जांच का आदेश दिया था।  पश्चिम बंगाल और केंद्र के बीच यह विवाद संदेशखाली केस के बाद शुरू हुआ। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इस साल 5 जनवरी को बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शेख शाहजहां के घर छापा मारा था। इस दौरान अधिकारियों पर TMC समर्थकों ने जानलेवा हमला किया था। इसमें तीन अधिकारी घायल हो गए थे। बाद में सामने आया कि शाहजहां ने कई महिलाओं से यौन उत्पीड़न किया है। इस मामले में केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। जब इस मामले में सीबीआई जांच को लेकर ममता सरकार ने मंजूरी नहीं दी तो सीबीआई ने हाईकोर्ट से इजाजत ले ली। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को संदेशखाली केस CBI को सौंप दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने महिलाओं के यौन शोषण मामले में FIR दर्ज की। यहीं से केंद्र और राज्य के बीच यह विवाद बढ़ता चला गया।

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने 1941 में भ्रष्टाचार और घूसखोरी की जांच के लिए स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट तैयार किया। युद्ध के बाद दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के प्रावधानों के तहत इस एजेंसी का कामकाज शुरू हुआ। 1963 में गृह मंत्रालय ने इसका नाम स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट से बदलकर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) कर दिया। सीबीआई लोक सेवकों के भ्रष्टाचार, गंभीर आर्थिक अपराधों, धोखाधड़ी और सनसनीखेज अपराध से संबंधित क्राइम की जांच करती है। साथ ही सामाजिक अपराध विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी से संबंधित गंभीर अपराधों की जांच करना भी इसका मकसद था। 1987 इसका जांच करने का दायरा बढ़ाया गया। इसके बाद से ही यह एजेंसी हत्या, अपहरण, आतंकवाद के अलावा कई संगठित गंभीर अपराधों की जांच भी करने लगी। यह एजेंसी अपनी मर्जी से किसी मामले को संज्ञान में नहीं ले सकती। केंद्र सरकार की अनुमति के बाद ही कोई मामला जांच के लिए सीबीआई को दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अनिल कुमार सिंह श्रीनेत कहते हैं कि अगर किसी मामले की जांच सीबीआई कर रही है तो उसे राज्य सरकार की इजाजत लेनी अनिवार्य है। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट भी यह बात साफ तौर कह चुका है कि बिना राज्य सरकार की अनुमति के सीबीआई वहां जांच नहीं कर सकती है। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा था कि यह प्रावधान संविधान के मुताबिक है। वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को आतंकवाद से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की परमिशन की जरूरत नहीं होती।

दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 से सीबीआई एक स्वतंत्र निकाय है। यह कानून उस राज्य में किसी भी अपराध की सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति प्राप्त करना अनिवार्य बनाता है। राज्य सरकार की सहमति या तो सामान्य या मामले के अनुसार विशिष्ट हो सकती है। राज्य अपने क्षेत्र में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की त्रुटिहीन सीबीआई जांच के लिए अपनी सामान्य सहमति दे सकता है। सामान्य सहमति के अभाव में सीबीआई को छोटी से छोटी कार्रवाई से पहले विशिष्ट सहमति मांगनी अनिवार्य है।

पिछले कुछ सालों में 8 राज्यों ने जांच के लिए अपनी सामान्य सहमति वापस ले ली है। नतीजतन एजेंसी को मामले में विशिष्ट अनुमति की जरूरत है। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान और मिजोरम शामिल हैं। मिजोरम 2015 में अपनी सामान्य सहमति वापस लेने वाला पहला राज्य था। नवंबर 2018 में, आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की सामान्य सहमति वापस ले ली। इस मामले के कुछ ही घंटों बाद सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने इसकी घोषणा की। बाद में आंध्र प्रदेश ने अपनी सहमति बहाल कर दी। जनवरी 2019 में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की सहमति वापस ले ली। पंजाब ने अपनी सामान्य सहमति वापस नहीं ली, लेकिन उसने सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे महत्वपूर्ण मामलों के लिए केस-विशिष्ट सहमति वापस ले ली।

एडवोकेट अनिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, राजनीतिक भावना से प्रेरित विवादों के निपटारे के लिए अनुच्छेद 131 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के बीच विवाद के मामले पर सुनवाई करने हेतु असहमति जताई थी। अगर केंद्र या राज्य के विरुद्ध किसी नागरिक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दायर की जाती है तो उसे अनुच्छेद 131 के तहत नहीं लिया जाएगा।

जब अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सीबीआई को गया नोटिस!

हाल ही में अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सीबीआई को नोटिस पहुंच गया है! सीएम अरविंद केजरीवाल न तो घोषित अपराधी हैं और न ही आतंकवादी’, दिल्ली के मुख्यमंत्री की जमानत याचिका पर उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट में ये टिप्पणी की। अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट का रुख किया है। इस याचिका पर जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सीबीआई से जवाब मांगा। जिसमें 17 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। उस दिन केजरीवाल की अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका भी सुनवाई के लिए लगी है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं।जस्टिस कृष्णा ने हाल ही में सीबीआई की गिरफ्तारी और तीन दिन की पुलिस हिरासत को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई 17 जून को तय की गई है। केजरीवाल ने मामले में जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाए बिना सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी, विक्रम चौधरी और एन हरिहरन केजरीवाल की ओर से पेश हुए। एडवोकेट डीपी सिंह ने सीबीआई का प्रतिनिधित्व किया। सुनवाई के दौरान सिंघवी ने दलील देते हुए कहा कि केजरीवाल न तो घोषित अपराधी हैं और न ही आतंकवादी हैं।

डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि जमानत याचिका और केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका में उठाए गए आधार एकसमान हैं और मुख्यमंत्री के पास जमानत के लिए पहले ट्रायल कोर्ट जाने का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है। केजरीवाल ने मामले में जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाए बिना सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था।सिंघवी ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां ट्रिपल टेस्ट का दूर-दूर तक आरोप है और केजरीवाल न तो घोषित अपराधी हैं और न ही आतंकवादी हैं। विक्रम चौधरी ने दलील दी कि चूंकि निचली अदालत ने केजरीवाल को रिमांड पर भेजते हुए पाया था कि सीआरपीसी की धारा 41ए का उल्लंघन नहीं किया गया है, इसलिए सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना व्यर्थ होगा। वेकेशन जज अमिताभ रावत ने मुख्यमंत्री को 26 जून को तीन दिनों के लिए सीबीआई की हिरासत में भेज दिया था, यह देखते हुए कि इस स्टेज पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं कहा जा सकता है।

हालांकि, जज ने कहा था कि गिरफ्तारी गैरकानूनी नहीं है, लेकिन सीबीआई को अति उत्साही नहीं होना चाहिए। बाद में, 29 जून को वेकेशन जज सुनैना शर्मा ने केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया क्योंकि सीबीआई ने इस स्टेज पर उनकी आगे की रिमांड नहीं मांगी थी। जस्टिस कृष्णा ने हाल ही में सीबीआई की गिरफ्तारी और तीन दिन की पुलिस हिरासत को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई 17 जून को तय की गई है।

जांच एजेंसी ने तिहाड़ जेल में मुख्यमंत्री से पूछताछ की, जहां वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। केजरीवाल का बयान दर्ज किया गया। यह दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पीएमएलए मामले में मुख्यमंत्री को दी गई जमानत पर रोक लगाने के कुछ घंटों बाद हुआ था। कोर्ट की इजाजत के बाद 26 जून को सीबीआई ने केजरीवाल से कोर्ट में पूछताछ की और फिर उन्हें इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका भी सुनवाई के लिए लगी है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी, विक्रम चौधरी और एन हरिहरन केजरीवाल की ओर से पेश हुए। एडवोकेट डीपी सिंह ने सीबीआई का प्रतिनिधित्व किया। सुनवाई के दौरान सिंघवी ने दलील देते हुए कहा कि केजरीवाल न तो घोषित अपराधी हैं और न ही आतंकवादी हैं।केजरीवाल ने मामले में जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाए बिना सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। मई में उन्हें आम चुनाव के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने 1 जून तक अंतरिम जमानत दी थी। उन्होंने 2 जून को सरेंडर किया था।

बेरोजगारी के मुद्दे पर बीजेपी को क्या बोली कांग्रेस?

हाल ही में कांग्रेस ने बेरोजगारी के मुद्दे पर बीजेपी को आड़े हाथ ले लिया है! कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने तुगलकी नोटबंदी, जल्दबाजी में लागू जीएसटी लागू कर भारत में बेरोजगारी के संकट को बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार ने चीन से बढ़ते आयात के कारण रोजगार बढ़ाने वाले वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को भी बर्बाद कर दिया है। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक बयान में वैश्विक बैंक सिटीग्रुप की एक नयी रिपोर्ट का हवाला दिया। रमेश ने कहा कि कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जो हाल के चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस की कही गई बातों की पुष्टि करते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस बेरोजगारी संकट पर लगातार चिंता जताती रही है। तुगलकी नोटबंदी, जल्दबाजी में लागू जीएसटी ( और चीन से बढ़ते आयात के कारण रोजगार सृजन करने वाले MSME के पूरी तरह ध्वस्त हो जाने से यह संकट और बढ़ गया है।रमेश ने कहा कि सिटीग्रुप की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार की कई अतिप्रचारित योजनाओं ने जमीनी स्तर पर कोई लाभ नहीं दिया है और इनमें सुधार के लिए सुझाव दिए गए हैं।’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री ने केवल बड़े कारोबारी समूहों को लाभ पहुंचाने वाली आर्थिक नीतियां बनाकर बेरोजगारी दर को 45 वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। इसमें ग्रेजुएशन कर चुके युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 42 प्रतिशत है।

रमेश ने रिपोर्ट के मुख्य अंश साझा किए जिसमें कहा गया है कि भारत को अपने युवाओं को रोजगार देने के लिए अगले 10 वर्षों तक प्रति वर्ष 1.2 करोड़ नौकरियां सृजित करनी चाहिए। रमेश ने कहा कि यहां तक कि सात प्रतिशत जीडीपी वृद्धि भी हमारे युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं करेगी। ‘नॉन बायोलॉजिकल’ प्रधानमंत्री की सरकार में देश ने औसतन केवल 5.8 प्रतिशत जीडीपी दर हासिल की है। अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में मोदी सरकार का पूरी तरह विफल होना बेरोजगारी संकट का मूल कारण है। मुद्रा और स्वनिधि जैसे जुमले छोटे व्यवसायों को कर्ज देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। इनमें बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 10 लाख रिक्त पद हैं जो न केवल हमारे शिक्षित युवाओं के साथ भद्दा मजाक है बल्कि सरकार के कामकाज में भी बाधा है।’ कांग्रेस नेता ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की केवल 21 प्रतिशत श्रम शक्ति के पास नियमित वेतन वाली नौकरी है जो कि कोविड के पहले के समय से 24 प्रतिशत कम है। रमेश ने दावा किया, ‘कोविड के बाद की रिकवरी में एकमात्र लाभार्थी अरबपति वर्ग रहा है। इस बीच वेतनभोगी मध्यम वर्ग के लिए रास्ते बंद हो रहे हैं।’

कांग्रेस नेता ने मोदी पर ग्रामीण भारतीयों को और गरीब बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक मजदूरी प्रति वर्ष 1-1.5 प्रतिशत से कम हो रही है। रमेश ने कहा कि सिटीग्रुप की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार की कई अतिप्रचारित योजनाओं ने जमीनी स्तर पर कोई लाभ नहीं दिया है और इनमें सुधार के लिए सुझाव दिए गए हैं।

रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि ‘स्किल इंडिया’ योजना पूरी तरह से विफल रही है। केवल 4.4 प्रतिशत युवाओं के पास ही किसी तरह का औपचारिक प्रशिक्षण है।कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक बयान में वैश्विक बैंक सिटीग्रुप की एक नयी रिपोर्ट का हवाला दिया। रमेश ने कहा कि कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जो हाल के चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस की कही गई बातों की पुष्टि करते हैं। रमेश ने कहा कि कौशल विकास के लिए एक नई पहल की सख्त जरूरत है।राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा कि जिनके भरोसे करोड़ों जिंदगियां चलती हैं, उनकी अपनी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। ‘यूरिनल’ जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित लोको पायलट के न काम के घंटों की कोई सीमा है और न ही उन्हें छुट्टी मिलती है। इस कारण वे शारीरिक और मानसिक रूप से टूट कर बीमार हो रहे हैं। कांग्रेस के न्याय पत्र में प्रशिक्षुता के अधिकार का जो वादा था वह वास्तव में समय की मांग है। उन्होंने कहा कि मुद्रा और स्वनिधि जैसे जुमले छोटे व्यवसायों को कर्ज देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। इनमें बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है।

राहुल गांधी का लोको पायलट से मिलना विवाद क्यों बन गया?

आज हम आपको बताएंगे कि राहुल गांधी का लोको पायलट से मिलना विवाद क्यों बन गया है! राहुल गांधी शुक्रवार सुबह-सुबह यूपी के हाथरस पहुंचें। वहां सत्संग के दौरान मची भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिजनों से मुलाकात कर उनका गम बांटा। रास्ते में अलीगढ़ के एक गांव में भी पीड़ित परिवारों से मिले। हाथरस से लौटकर दोपहर में वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गए और वहां लोको पायलटों से मुलाकात की। लेकिन अब उनकी ये मुलाकात विवाद में पड़ गई है। उत्तर रेलवे का कहना है कि कांग्रेस नेता ने जिनसे मुलाकात की, वे उनकी क्रू लॉबी के नहीं थे, बल्कि ऐसा लगता है कि वे बाहरी थे। राहुल गांधी के साथ 7-8 कैमरामैन भी थे। बीजेपी ने भी इस मामले को लपकते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला है। उसने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने जिन कथित लोको पायलटों से मुलाकात की, वे लोको पायलट नहीं थे बल्कि प्रफेशनल एक्टर थे, जिन्हें वे खुद ही लाए थे। हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस या राहुल गांधी की तरफ से अभी कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) दीपक कुमार ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने जिन क्रू मेंबर के साथ चर्चा की, वे उनकी लॉबी से नहीं थे, बल्कि बाहर के हो सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘आज दोपहर करीब 12:45 बजे राहुल गांधी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आए। उन्होंने हमारी क्रू लॉबी देखी। उनके साथ 7-8 कैमरामैन थे। उन्होंने हमारी क्रू लॉबी का दौरा किया और ये जाना कि हम अपनी क्रू लॉबी कैसे बुक करते हैं। क्रू लॉबी से बाहर आने के बाद उन्होंने कुछ लोगों से चर्चा की। वहां करीब 7-8 क्रू थे जो हमारी लॉबी से नहीं थे, लेकिन ऐसा लगता है कि वे बाहर से थे।’

उत्तर रेलवे की तरफ से राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले कथित लोको पायलटों को बाहरी बताने के बाद बीजेपी हमलावर हो गई है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने रेलवे अधिकारी के एएनआई को दिए बयान का वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस पर हमला किया है। उन्होंने पोस्ट किया, ‘अब उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार बताते हैं कि कैसे बालक बुद्धि राहुल गांधी ने कैमरामैन और एक निर्देशक की टीम के साथ गेट पर घुसकर उनकी बातचीत को शूट किया… लेकिन शूट में शामिल लोग उनकी लॉबी से नहीं थे! वे किराए के लोग थे। यू-ट्यूबर बनने की ऐसी बेताबी!’

इससे पहले, राहुल गांधी शुक्रवार दोपहर को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलटों से मुलाकात की। ये लोको पायलट रेलवे की रीढ़ हैं, जिसे देश की जीवन रेखा कहा जाता है। उनके जीवन को सरल और सुरक्षित बनाना रेलवे सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम होगा।’ राहुल गांधी की लोको-पायलटों के साथ बातचीत पश्चिम बंगाल में कंचनजंगा एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना के कुछ सप्ताह बाद हुई है जिसमें कम से कम 10 लोगों की जान चली गई थी। बता दें कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को एक बार फिर लोको पायलट से जुड़े मुद्दों को उठाया। राहुल ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन उनके अधिकारों और कामकाजी परिस्थितियों में सुधार के लिए संसद में आवाज उठाएगा। राहुल गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलट के साथ अपनी हालिया बातचीत का एक वीडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में लोको पायलट की जिंदगी की गाड़ी पूरी तरह से पटरी से उतर गई है।’ उन्होंने कहा कि लोको पायलट को गर्मी से खौलते केबिन में बैठ कर 16-16 घंटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा कि जिनके भरोसे करोड़ों जिंदगियां चलती हैं, उनकी अपनी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। ‘यूरिनल’ जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित लोको पायलट के न काम के घंटों की कोई सीमा है और न ही उन्हें छुट्टी मिलती है। इस कारण वे शारीरिक और मानसिक रूप से टूट कर बीमार हो रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसे हालात में लोको पायलट से ट्रेन चलवाना उनकी और यात्रियों की जान को जोखिम में डालना है। गांधी ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन लोको पायलट के अधिकारों और कामकाजी हालात को बेहतर किए जाने के लिए संसद में आवाज उठाएगा।

राहुल ने शुक्रवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलटों से मुलाकात की थी, जिसके बाद उत्तर रेलवे (NR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि गांधी ने जिन लोको पायलट से मुलाकात की, वे नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन की ‘क्रू लॉबी’ (लोको पायलट के लिए निर्धारित स्थल) से नहीं थे। दिल्ली मंडल उत्तर रेलवे के अंतर्गत आता है। रायबरेली सांसद ने लोको पायलट से बात करके उनकी समस्याओं और चुनौतियों के बारे में जानकारी हासिल की थी। गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह संसद में उनके मुद्दे उठाएंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि गांधी ने नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर देशभर से आए करीब 50 लोको पायलट से मुलाकात की और उन्होंने उन्हें अपनी समस्याएं बताईं।

आखिर कंचनजंगा ट्रेन हादसा किसकी है गलती जानिए?

आज हम आपको बताएंगे कि कंचनजंगा ट्रेन हादसा किसकी गलती है! पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में 17 जून को कंचनजंगा एक्सप्रेस और मालगाड़ी की हुई टक्कर मामले में चीफ कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (CCRS) जनक कुमार गर्ग की रिपोर्ट आ गई है। इसमें ट्रेन एक्सीडेंट कैटेगरी ‘एरर इन ट्रेन वर्किंग’ बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें अकेले लोको पायलट, एएलपी या फिर गार्ड की गलती नहीं थी, बल्कि संयुक्त रूप से स्टेशन मैनेजर और ट्रेन संचालन से संबंधित कई अधिकारियों के स्तर पर ‘चूक’ हुई थी। जिस वजह से यह ट्रेन एक्सीडेंट हुआ और मालगाड़ी के पायलट और कंचनजंगा के गार्ड समेत हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड को भी सलाह दी गई है कि वह सुरक्षित ट्रेन चलाने के लिए कवच लगाने समेत ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम के लिए देशभर में एक यूनिफॉर्म सिस्टम तैयार करे। क्योंकि, कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे में जो गलतियां या चूक हुई। वह किसी एक के कारण नहीं बल्कि चीजों को अलग-अलग समझने की वजह से भी हुई। जैसे की कंचनजंगा और मालगाड़ी से पहले रंगापानी रेलवे स्टेशन से पांच और ट्रेन रवाना हुई थी। इन सभी को स्टेशन मास्टर ने T/A 912 अथॉरिटी जारी की थी। लेकिन यह सब ट्रेन अलग-अलग स्पीड से आगे पहुंची थी। इसमें 14 मिनट से लेकर 36 मिनट तक का ट्रेनों ने समय लिया। इन सात ट्रेनों में केवल कंचनजंगा एक्सप्रेस के पायलट ने नियमों का पालन किया और खराब सिग्नल होने के चलते उसने 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाई।

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि अन्य ट्रेनों के एलपी ने नियमों का पालन नहीं किया। चूंकि T/A 912 अथॉरिटी पर कहीं पर भी ट्रेन लिमिट नहीं लिखी गई थी। इस वजह से सब ट्रेनों के पायलट ने ट्रेनों को अपने-अपने हिसाब से दौड़ाया। इसमें सबसे अधिक 78 किलोमीटर प्रति घंटा तक की स्पीड से कंचनजंगा को पीछे से टक्कर मारने वाली मालगाड़ी ने दिखाई।

स्पीडोमीटर डेटा से पता लगा है कि हादसे के दिन जब सुबह 8:45:43 बजे ट्रेन T/A 912 अथॉरिटी लेकर चली थी। तब इसकी स्पीड 15 किलोमीटर प्रति घंटा थी। लेकिन एलपी इसकी स्पीड बढ़ाता रहा और 4:04 मिनट बाद 8:50:02 मिनट पर मालगाड़ी की स्पीड 78 KMPH तक पहुंच गई थी। कंचनजंगा एक्सप्रेस आगे मोड़ पर खड़ी थी। फिर जैसे ही सुबह 8:50:03 बजे मालगाड़ी के एलपी ने आगे खड़ी कंचनजंगा को देखा। उसने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए। 15 सेकंड में ट्रेन की स्पीड घटकर 40 KMPH तक ही आ पाई और 8:50:18 बजे मालगाड़ी ने कंचनजंगा एक्सप्रेस में पीछे से टक्कर मार दी। तीन सेकंड बाद ही उसकी स्पीड जीरो हो गई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि T/A 912 अथॉरिटी सभी कायदे-कानून को बताते हुए जारी नहीं की गई थी। पायलट को कॉशन ऑर्डर जारी नहीं किया गया था। इमरजेंसी के दौरान वॉकी-टॉकी जैसे क्रिटिकल सेफ्टी इक्विपमेंट की कमी थी और स्टेशन मास्टर T/A 912 अथॉरिटी पर स्पीड लिमिट लिखने में फेल रहे।वैसे T/A 912 अथॉरिटी के लिए देशभर में एक ही तरह का नियम नहीं है। जिससे अलग-अलग ट्रेनों के पायलट ने इसे अपनी तरह से समझते हुए ट्रेन चलाईं। इसी तरह से अन्य कई स्तर पर कुछ ना कुछ चूक रही जो की इतनी बड़ी दुर्घटना का कारण बनी।

सीआरएस की इस प्राथमिक रिपोर्ट के एक्सपर्ट का कहना है कि यह तो साफ हुआ कि कम से कम अकेले लोको पायलट की गलती से यह दुर्घटना नहीं हुई थी। इसमें कई स्तर पर गलतियां और चूक हुईं। जो दुर्घटना का कारण बनी। अब रेलवे का कहना है कि वैसे तो इस दुर्घटना में ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम के फेल होने पर बनाए गए नियमों का पालन नहीं किया गया। यह नियम देशभर में एक समान हैं। मालगाड़ी के लोको पायलट ने अथॉरिटी को ठीक ढंग से समझा नहीं। जबकि कंचनजंगा ट्रेन के पायलट ने नियमों के तहत ट्रेन चलाई और रेड सिग्नल पर रूका। इसमें 14 मिनट से लेकर 36 मिनट तक का ट्रेनों ने समय लिया। इन सात ट्रेनों में केवल कंचनजंगा एक्सप्रेस के पायलट ने नियमों का पालन किया और खराब सिग्नल होने के चलते उसने 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाई।लेकिन इसके बावजूद रेलवे ने बड़ा कदम उठाते हुए अथॉरिटी फार्म को बदल दिया है। जिससे की कोई भी पायलट इसे गलत ढंग से ना समझे। एलपी और एएलपी की और अधिक ट्रेनिंग कराई जाएगी। इसके अलावा जो भी अन्य जरूरी कदम हैं। वह सब उठाए जाएंगे।

क्या देश में बढ़ रही है उमस? क्या कर सकते हैं इलाज?

वर्तमान में देश में उमस बढ़ती ही जा रही है! दिल्ली-एनसीआर के लोग एक बार फिर गर्मी से बेहाल हैं। इस बार उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान करके रख दिया है। हालांकि मौसम विभाग ने आज दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश का अनुमान जताया है। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है। वहीं इस पूरे सप्ताह दिल्ली का अधिकतम 33-35 के बीच रहने का अनुमान है। उधर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में आज भी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं यूपी, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के बाद मौसम सुहाना हुआ है। कुछ जगहों पर बाढ़ जैसे हालात हैं। हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह के लिए ‘येलो अलर्ट’ पहले ही जारी कर दिया था। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है।मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर एवं बीकानेर संभाग के कुछ भागों में आगामी दिनों में बारिश होने का अनुमान है और 17 जुलाई को जोधपुर संभाग और 18 जुलाई को शेखावाटी क्षेत्र में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। बीते दो दिनों से राज्य के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिसमें सबसे अधिक 36.8 मिलीमीटर बारिश सुंदरनगर में दर्ज की गई। इसके बाद मंडी में 16.6 मिमी, पंडोह में 12 मिमी, पांवटा साहिब में 8.2 मिमी, करसोग में 8.1 मिमी, गोहर में 7 मिमी, बग्गी में 5.7 मिमी, सोलन में 4.4 मिमी और कुफरी में 4 मिमी बारिश दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश के हरदोई सहित अन्य जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। सैकड़ों गांव और खेत खलिहान जलमग्न हो गए हैं। इस बीच, हरदोई के डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पूरी स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए। बाढ़ की वजह से 83 स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं कार्य में तेजी लाने के लिए एसडीआरएफ, पीएसी व राजस्व की टीमें तैनात की गईं हैं।

बाढ़ ने किसानों की फसलों को भी बर्बाद करके रख दिया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के संपर्क मार्ग कट गए हैं। इससे प्रशासनिक अधिकारियों को राहत-सामग्री पहुंचाने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में बीते दिनों डीएम की अगुवाई में बैठक भी हुई। इसमें राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के मकसद से पूरी रूपरेखा तैयार की गई, जिसे आगामी दिनों में जमीन पर उतारा जाएगा।

मौसम विभाग ने पूर्वी राजस्थान में अगले चार-पांच दिन मानसून के सक्रिय रहने और कोटा एवं उदयपुर संभाग में विभिन्न स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान लगाया है। मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ व आसपास के क्षेत्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और बंगाल की खाड़ी में 18 जुलाई के आसपास एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। उसने अपने पूर्वानुमान में कहा कि पूर्वी राजस्थान में विभिन्न स्थानों पर अगले चार-पांच दिन मानसून सक्रिय रहेगा तथा कोटा एवं उदयपुर संभाग में भारी बारिश हो सकती है।

उसने कहा कि कोटा, उदयपुर, अजमेर संभाग में कहीं-कहीं अति भारी बारिश होने का अनुमान है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह के लिए ‘येलो अलर्ट’ पहले ही जारी कर दिया था। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है। बीते दो दिनों से राज्य के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जिसमें सबसे अधिक 36.8 मिलीमीटर बारिश सुंदरनगर में दर्ज की गई। सैकड़ों गांव और खेत खलिहान जलमग्न हो गए हैं। इस बीच, हरदोई के डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पूरी स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए। बाढ़ की वजह से 83 स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिए गए हैं।उत्तर प्रदेश के हरदोई सहित अन्य जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। सैकड़ों गांव और खेत खलिहान जलमग्न हो गए हैं।मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर एवं बीकानेर संभाग के कुछ भागों में आगामी दिनों में बारिश होने का अनुमान है और 17 जुलाई को जोधपुर संभाग और 18 जुलाई को शेखावाटी क्षेत्र में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।

केदारनाथ में गौरीकुंड के पास हादसा, बारिश के कारण भूस्खलन से तीन तीर्थयात्रियों की मौत, कई घायल

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स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ तीर्थयात्री ट्रैकिंग के लिए केदारनाथ जा रहे थे। रविवार सुबह से ही भारी बारिश हो रही है. परिणाम स्वरूप पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर टूटकर उनके ऊपर गिरे।
उत्तराखंड के केदारनाथ में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में तीन लोगों की मौत हो गई. कई लोग घायल हो गये. घटना रविवार सुबह गौरीकुंडा के पास हुई. सूचना मिलने के बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा.

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ तीर्थयात्री ट्रैकिंग के लिए केदारनाथ जा रहे थे। रविवार सुबह से ही भारी बारिश हो रही है. परिणाम स्वरूप पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर टूटकर उनके ऊपर गिरे। तीन लोगों की कुचलकर मौत हो गई। कई लोग घायल हो गये. राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल भेजा गया. राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स-हैंडल पर हुई घटना पर अफसोस जताया. उन्होंने कहा, ”बचाव कार्य जारी है. स्थिति पर नजर रखी जा रही है।” उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है। बारिश के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन हो रहा है.

मौसम विभाग ने कहा कि रविवार को चंपावत, नैनीताल, उधमसिंह नगर में भारी से बहुत भारी बारिश होगी. उन इलाकों में अंतिम चेतावनी भी जारी कर दी गई है. इसके अलावा पौडी, पिथौरागढ, बागेश्वर, अल्मोडा के कई स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. पतन की भी आशंका है. टोंकपुर चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग शनिवार को भूस्खलन के कारण बंद कर दिया गया है। बदरीनाथ हाईवे पर कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण यातायात बाधित है।

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद इस बार उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने जानकारी दी है कि रविवार को चारधाम यात्रा बंद रहेगी. तीर्थयात्रियों को जहां हैं वहीं खड़े रहने के लिए कहा गया है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के सभी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है.

चारधाम यात्रा 10 मई से शुरू हो गई है. नवंबर तक जारी रहेगा. मौसम भवन के पूर्वानुमान के मुताबिक, 7 और 8 जुलाई को उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. कुमाऊं,पौड़ी,चमोली,रुद्रप्रयाग में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा देहरादून, हरिद्वार, टिहरी जैसे जिले ऑरेंज अलर्ट पर हैं। ऐसे में पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन की आशंका अधिक है. नदियों में भी पानी बढ़ने लगा है. कई नदियाँ पहले से ही खतरे के स्तर तक पहुँच रही हैं। नतीजतन, उत्तराखंड प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।

गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडे ने शनिवार रात मौसम का पूर्वानुमान देखकर एडवाइजरी जारी की। मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को बताया गया है कि वे रविवार को पूरे दिन आगे नहीं बढ़ सकते। जो जहां है, जहां तक ​​चला गया है, वहीं खड़ा रहना चाहिए। अगर मौसम में सुधार नहीं हुआ तो प्रशासन आगे नहीं बढ़ने देगा. तीर्थयात्रियों को हृषिकेश के बाद आगे न बढ़ने के लिए कहा गया है।

मौसम की वजह से शनिवार को अमरनाथ यात्रा भी रद्द कर दी गई. भारी बारिश के कारण सड़क पर कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है. इसके बाद तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यात्रा को अस्थायी तौर पर रोकने का फैसला किया. प्रशासन सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को जम्मू से 5600 तीर्थयात्री बालटाल और पहलगांव बेसकैंप के लिए रवाना हुए। लेकिन शुक्रवार से भारी बारिश शुरू हो गयी. कुछ जगहों पर सड़क टूट गयी. परिणामस्वरूप, तीर्थयात्रियों को उन दो आधार शिविरों से आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। खबर है कि बुधवार को 30,000 तीर्थयात्रियों ने अमरनाथ गुफा के दर्शन किये. अमरनाथ और लास्टनाग में तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। रात में तापमान 5 डिग्री तक गिर सकता है। प्रशासन ने उस पहलू पर भी विचार किया है. मौसम में सुधार होने तक अमरनाथ यात्रा की इजाजत नहीं दी जाएगी. 52 दिनों की यह यात्रा 29 जून को शुरू हुई थी. यह यात्रा 19 अगस्त को समाप्त होगी.

क्या अमेरिका भारत पर बना पाया दबाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अमेरिका भारत पर दबाव बना पाया है या नहीं! हाल ही में पीएम मोदी के रूस दौरे की काफी चर्चा हुई। भारत से कहीं अधिक चर्चा अमेरिका और दूसरे देशों में हुई। पीएम मोदी की इस यात्रा पर सबसे अधिक पैनी नजर अमेरिका की थी। कहा जा रहा था कि मोदी के वहां जाने से भारत के साथ रिश्तों पर इसका असर पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली रूस यात्रा थी। इसलिए भी इस दौरे पर अधिक नजर थी। भारत और रूस के बीच गहराते रिश्तों से अमेरिका और यूरोपीय देश एक अलग तरह की बेचैनी महसूस कर रहे थे। मोदी के दौरे के बाद जिस तरीके से अमेरिका की ओर से बयान सामने आए उससे एक बात और अधिक क्लियर हो गई कि भारत का स्टैंड बदला नहीं है। इसी का नतीजा है कि अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने कहा है कि रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर चिंताओं के बावजूद भारत वाशिंगटन का रणनीतिक साझेदार बना रहेगा। पेंटागन के प्रेस सचिव ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के बीच काफी लंबे समय से रिश्ते हैं। अमेरिका के नजरिये से भारत एक रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ हम रूस से उसके रिश्तों सहित पूर्ण और स्पष्ट बातचीत करना जारी रख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका, रूस से भारत के रिश्तों को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में बिल्कुल स्पष्ट रहा है। हमने अपनी चिंताओं को निजी तौर पर सीधे भारत सरकार के समक्ष जाहिर किया है और हम ऐसा करना जारी रख रहे हैं। इसमें बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल है कि क्या ऐसे बयान पहले संभव थे।

भारत और रूस के बीच गहरी दोस्ती जगजाहिर है लेकिन एक सवाल यह कि क्या अमेरिका की ओर से कुछ साल पहले इसी तरह की प्रतिक्रिया सामने आती। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने आर्थिक क्षति पहुंचाने के लिए रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। इनमें अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली ‘स्विफ्ट’ से रूस को बाहर करना शामिल था। इससे रूस पर विदेशी भुगतान प्राप्त करने की समस्या खड़ी हो गई। इतना ही नहीं रूस से व्यापार करने वाले देशों के लिए भी इसमें एक छिपी चेतावनी थी। इस फैसले के बीच भारत एक अलग ही राह पर चल पड़ा और उसने रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल खरीदने का फैसला हुआ। यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक आर्थिक स्थितियों में बदलाव और इस दिशा में भारत के प्रयासों के कारण, दिल्ली ने अब 20 से अधिक देशों के साथ रुपये में लेनदेन शुरू कर दिया है। इन सभी बदलावों की बदौलत अमेरिका और उसके डॉलर का दबदबा कम होने लगा है। इन सभी परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में भारत और रूस के बीच घनिष्ठ संबंधों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत पर पश्चिमी देशों की करीबी नजर थी। पुतिन से बातचीत में मोदी ने उनसे कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान पर संभव नहीं है और शांति के प्रयास बम और बंदूकों के बीच सफल नहीं होते हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई जिसमें रूस से यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता तुरंत रोकने की अपील की गई है। भारत इस वोटिंग से दूर रहा। 193 सदस्यों वाली महासभा में 99 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। बेलारूस, क्यूबा, उत्तर कोरिया, रूस और सीरिया सहित 9 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया। भारत, बांग्लादेश, भूटान, चीन, मिस्र, नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका सहित 60 देश मतदान से दूर रहे। पेंटागन के प्रेस सचिव ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के बीच काफी लंबे समय से रिश्ते हैं। अमेरिका के नजरिये से भारत एक रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ हम रूस से उसके रिश्तों सहित पूर्ण और स्पष्ट बातचीत करना जारी रख रहे हैं।अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की एक टिप्पणी हाल ही में सामने आई जिसमें उन्होंने कहा कि हम सिर्फ अपना भविष्य भारत में नहीं देखते और भारत केवल अपना भविष्य अमेरिका में नहीं देखता, बल्कि दुनिया हमारे संबंधों में बड़ी चीजें देख सकती है। इस बयान के भी अलग-अलग मायने मतलब निकाले जा सकते हैं लेकिन भारत की ओर से जो बात बार-बार कही जा रही है कि देश का हित पहले अब भी वह उस पर कायम है। बिना इसकी परवाह किए कि कौन नाराज होगा।

जानिए कहानी इच्छाधारी बाबा भीमानंद की!

आज हम आपको इच्छाधारी बाबा भीमानंद की कहानी सुनाने जा रहे हैं! भजन गाने वाला शख्स है इच्छाधारी स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूटवाले। उनके खुले बाल गेंदे की पंखुड़ियों से सजे हुए हैं, जबकि बाबा के हाई प्रोफाइल भक्त उनके समर्थन में झांझ बजा रहे हैं। यूपी के हाथरस में भगदड़ में 121 लोगों की मौत के बाद सूरजपाल उर्फ नारायण हरि सरकार ‘भोले बाबा’ का नाम आने के साथ ही देश में विवादित बाबाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विवादित बाबाओं में एक नाम चित्रकूट के रहने वाले इच्छाधारी बाबा के नाम से मशहूर भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी का भी है। दिल्ली में फाइव स्टार होटल में कभी सिक्योरिटी गार्ड रहे शख्स ने करोड़पति बनने तक का सफर तय किया। द्विवेदी के बाबा बनने से लेकर फिर जेल जाने की कहानी दिल्ली और एनसीआर पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है। भीमानंद की एक बेटी है जिसने महाराष्ट्र से पढ़ाई की है। उसकी पत्नी मुन्नी देवी चित्रकूट में ही रहती थी। 1988 में दिल्ली आकर उसने होटल पार्क रॉयल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर ली। जल्द ही वह आगरा के एक फाइव स्टार होटल में रहने लगा। लेकिन वह एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति था। वह दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में एक मसाज पार्लर में मैनेजर की नौकरी शुरू की। यहां उसकी मुलाकात एक द्विवेदी उपनाम वाले व्यक्ति से हुई। यह दोस्त, जो शिरडी के साईं बाबा का भक्त था। उसने, भीमानंद को अन्य स्वामियों और संतों के संपर्क में ला दिया। इसके बाद भीमानंद अलग-अलग जगहों पर जाकर सत्संग करने लगा। वो लोगों की समस्याओं को सुलझाने से लेकर शादी कराने और नौकरी दिलाने की आड़ में पैसे बनाना शुरू कर दिया। बाद में आगे चलकर वह पूरी तरह से सेक्स रैकेट का बड़ा सरगना बन गया।

प्राचीन काल के देवताओं की तरह, उनकी उपस्थिति भी जरूरत और परिस्थिति के हिसाब से अलग-अलग रूपों में प्रकट होती थी। अपने साथी साईं भक्तों के लिए, वे स्वामी भीमानंद था। संदेह से परे एक पवित्र व्यक्ति। अपनी गर्लफ्रेंड के लिए, वे बस शिव मूरत द्विवेदी था। अपने पीड़ितों और ग्राहकों के लिए, वे शिव मूर्ति थे, एक ऐसा व्यक्ति जो वेश्यावृत्ति, डकैती, हत्या के प्रयासों में लिप्त था और दलाल होने के आरोप में जेलों में आता-जाता रहा। यह सब साईं बाबा के नाम पर किया गया था। पुलिस के अनुसार, वह अपने सभी फ़ोन कॉल्स का जवाब हमेशा की तरह ‘हेलो’ के बजाय ‘ओम श्री साईं’ कहकर देता था। वह कॉल करने वाले की आवाज सुनता और फिर तय करता कि किसे ढूंढा जा रहा है- दलाल शिव मूर्ति या साईं भक्त स्वामी भीमानंद को।

द्विवेदी को पहली बार 1997 में गिरफ्तार किया गया था। इसके तुरंत बाद अगली गिरफ्तारी हुई। उसे 1998 में बदरपुर में चोरी का माल प्राप्त करने और डकैती के आरोप में गिरफ्तार किया गया। दिल्ली में पुलिस की निगाह में आने के बाद उसने अपना काम नोएडा में शुरू कर दिया। तब तक, उसने खानपुर में एक मंदिर बना लिया था। वह शिव मूरत द्विवेदी को इच्छाधारी स्वामी भीमानंद बना लिया था। 2003 में, नोएडा पुलिस ने द्विवेदी के साथ सौदा करने के लिए दो नकली ग्राहकों को भेजकर एक जाल (25 फरवरी को दिल्ली पुलिस द्वारा बिछाए गए जाल के समान) बिछाया। उन्होंने फर्जी बाबा, उसके दलाल और छह सेक्स वर्करों को गिरफ्तार किया। यह रैकेट दक्षिण दिल्ली में दो सरकारी फ्लैटों से चलाया जा रहा था- एक आरके पुरम में और दूसरा मोहम्मदपुर में लोक निर्माण के माली राम नारायण का। भीमानंद ने उस फ्लैट को किराए पर दे रखा था। यह सब तब हो रहा था, जब एक लाख से अधिक भोले-भाले अनुयायियों को उसके पवित्र वेश के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

पुलिस का कहना है कि शिव मूर्ति अपने काम को एक बिजनेस की तरह चलाता था। वह लॉजिस्टिक के लिए एक या दो लोगों के अलावा किसी और पर भरोसा नहीं करता था। वह अक्सर अपने सेक्स वर्कर को पिक-अप पॉइंट पर खुद ही ले जाता था। वह सभी बुकिंग भी खुद ही लेता था। वह, अपनी छुट्टियों का एक डायरी रखता था। इसके साथ ही अपने अकाउंट में सावधानी बरतता था। उसके पास 50 से अधिक लड़कियां थीं जो सीधे उसके लिए काम करती थीं। उसके उसके पास 500 से अधिक लड़कियों के नंबर थे। जाहिर है, पैसा अच्छा था।

इच्छाधारी बाबा की कुल संपत्ति लगभग 60 करोड़ रुपये आंकी गई है। अपनी पारिवारिक संपत्ति को छोड़कर, उसके पास खानपुर में एक मंदिर और आश्रम और दिल्ली में तीन अन्य संपत्तियां हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में भी संपत्ति है। वहां वह 200 बिस्तरों वाला अस्पताल बनवा रहा था।

क्या विकलांगता प्रमाण पत्र भी हासिल करना चाहती थी IAS पूजा खेड़कर?

IAS पूजा खेड़कर विकलांगता प्रमाण पत्र भी हासिल करना चाहती थी! ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर इस वक्त सुर्खियों में हैं। सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने का इन पर आरोप है। पूजा हाल ही में तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने पुणे में अपनी तैनाती के दौरान कथित तौर पर अलग ‘केबिन’ और ‘स्टाफ’ की मांग की थी और उसके बाद उनका ट्रांसफर वाशिम जिले में कर दिया गया। अब इस मामले में एक और जानकारी सामने आई है। अगस्त 2022 में, पूजा खेडकर ने पुणे से विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए अप्लाई किया था। लेकिन डॉक्टरों ने उनकी जांच के बाद सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार कर दिया था। रिपोर्ट में इस लेटर को दिखाया गया है। जो लेटर खारिज करते हुए भेजा गया उसमें लिखा गया है कि आपके मेडिकल कंडीशन की जांच की गई, मेडिकल बोर्ड की ओर से पूरे मामले को देखा गया लेकिन विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं है। यह दूसरी बार था जब खेडकर ने इस तरह का मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करने का प्रयास किया था। रिपोर्टों के अनुसार इससे पहले अहमदनगर से एक प्रमाण पत्र हासिल करने का प्रयास किया था। महाराष्ट्र काडर की 2022 बैच की ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर की नियुक्ति सवालों के घेरे में आ गई है। 821वीं रैंक हासिल करने वाली अधिकारी पर आरोप लगे हैं कि सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दिव्यांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सर्टिफिकेट जमा किए। ट्रेनी IAS अधिकारी ने ओबीसी और दृष्टिबाधित श्रेणियों के तहत सिविल सेवा परीक्षा दी थी।

इस कैटेगरी में अप्लाई करने की वजह से पूजा को एम्स में मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया। आईएएस पद के लिए चयन प्रक्रिया के दौरान पूजा ने छह बार अनिवार्य मेडिकल परीक्षण कराने से मना किया था। अप्रैल 2022 में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में पहला टेस्ट निर्धारित किया गया था, जिसे उन्होंने कोविड-19 पॉजिटिव होने का दावा करते हुए छोड़ दिया। इसके बाद मई, जुलाई और अगस्त में भी उन्होंने परीक्षण टाल दिया। सितंबर में, उन्होंने एक एमआरआई टेस्ट नहीं करवाया जो उनकी दोनों आंखों में विजन लॉस के आकलन करने के लिए जरूरी था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पूजा ने एक प्राइवेट मेडिकट सेंटर से एमआरआई रिपोर्ट जमा करा दी थी।

ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर पर आरोप हैं कि सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए उन्होंने फर्जी दिव्यांगता और ओबीसी सर्टिफिकेट दिए। ट्रेनिंग के दौरान अपने लिए अलग केबिन और स्टाफ की मांग की, जो प्रोबेशनरी ट्रेनी को नहीं दिए जाते। पुणे कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार पूजा ने 3 जून को ट्रेनी के तौर पर जॉइन करने से पहले ऐसी मांगे की थीं, लेकिन उन्हें ये सुविधाएं नहीं दी गईं। पद के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद में आने के बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। आरोप यह भी है कि वह निजी ऑडी कार पर लाल-नीली बत्ती और वीआईपी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करती थीं। खेडकर की अब एक सदस्यीय पैनल द्वारा जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।

ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के पिता ने बेटी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है। महाराष्ट्र सरकार के पूर्व कर्मचारी और पूजा के पिता दिलीप खेडकर ने एक मराठी समाचार चैनल से कहा कि वह वास्तव में गैर समृद्ध वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) से संबंध रखते हैं। दिलीप खेडकर ने लोकसभा चुनाव लड़ा था और उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में 40 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उन्होंने कहा कि यदि सीमित साधनों वाला कोई व्यक्ति चार से पांच एकड़ जमीन का मालिक है, तो मूल्यांकन से पता चल सकता है कि उसकी संपत्ति कई करोड़ रुपये है। दिलीप ने कहा क्रीमी लेयर के रूप में वर्गीकरण (संपत्ति) मूल्यांकन के बजाय आय पर निर्भर करता है। वहीं पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर से भूमि विवाद को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले में अभी तक संपर्क नहीं कर पाई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। भूमि विवाद को लेकर मनोरमा द्वारा कुछ लोगों को पिस्तौल दिखाकर कथित तौर पर धमकाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मनोरमा और उनके पति दिलीप खेडकर के अलावा पांच अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।