Home Blog Page 679

आखिर बीजेपी क्या कर रही है चूक जानिए?

आज हम आपको बताएंगे कि बीजेपी आखिर क्या और कहां चूक कर रही है! लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भारत की राजनीति करवट लेने लगी है। एनडीए के 293 सांसदों के साथ तीसरी बार सरकार बनाने के बाद भी बीजेपी कॉन्फिडेंट नजर नहीं आ रही है, जबकि 234 सीटें जीतने वाले विपक्ष के हौसले बुलंद हैं। विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने भी बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। 13 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी को सिर्फ दो सीटें मिलीं। कहीं न कहीं देश में माहौल मनमोहन सिंह के यूपीए-2 जैसा होने लगा है। नीट एग्जाम (NEET) और यूजीसी जैसे एग्जाम में धांधली के आरोप इसकी शुरुआत हो चुकी है। मोदी सरकार के कार्यकाल में कराए गए काम में नुस्ख निकाले जा रहे हैं और यह लोगों को पसंद भी आ रहा है। 10 साल सत्ता में रहने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की छवि करप्शन के मामले बेदाग रही। अब पेपर लीक, ढहते पुल, दरकती सड़कें और बारिश में टपकते एयरपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार और पार्टी की ओर से किए जा रहे दावों को पब्लिक दरकिनार कर रही है। अगर बीजेपी छवि बदलने में सफल नहीं हुई तो इसका परिणाम बीजेपी को राज्यों के चुनावों में भुगतना पड़ेगा। अब बीजेपी को बूस्टर डोज तभी मिलेगा, जब वह नवंबर में होने वाले चुनाव में झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र में बड़ी जीत हासिल करे। फ्लैश बैक में जाकर 2014 के दौर को याद कीजिए। जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने थे, तब देश की जनता करप्शन और घोटालों की खबरों से परेशान थी। मनमोहन सिंह ऐसे प्रधानमंत्री के तौर प्रचारित हुए, जो कांग्रेस अध्यक्ष के मातहत के तौर पर काम करते हैं। विपक्ष ने बड़े घोटालों पर उनकी चुप्पी पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस भी आरोपों का सटीक जवाब देने में सक्षम नहीं दिख रही थी। गुजरात में ब्रांड बन चुके नरेंद्र मोदी ने इस माहौल को भुनाया। बदलाव की इंतजार कर रही जनता ने समर्थन दिया और बीजेपी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। फिर 10 साल तक राष्ट्रवाद की बयार बही और नरेंद्र मोदी इसके सबसे बड़े आइकॉन के तौर पर उभरे। बीजेपी हिंदी पट्टी में पंचायत से संसद तक काबिज होती गई। नगर निगम में मिलने वाली जीत का सेहरा भी पीएम मोदी के सिर मढ़ा गया। झारखंड, बिहार, कर्नाटक में हार का ठीकरा स्थानीय नेताओं ने ले लिया। 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक ने पीएम मोदी की साख बढ़ाई। जनता ने उन्हें दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दिया। मोदी 2.0 में धारा-370 हटाने और सीएए लागू करने जैसे बुलंद फैसले भी लिए। कोरोना के दौर में भी जनता नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी रही। उन्होंने जैसा कहा, लोगों ने वैसा ही किया। यह उनकी लोकप्रियता का चरम था, जिसे देखकर विपक्ष समेत पूरी दुनिया दंग रह गई। किसान आंदोलन और कोरोना से हुई मौतों के बाद भी यूपी में बीजेपी की वापसी हुई। पिछले साल राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी भारतीय जनता पार्टी की बनी, तो नरेंद्र मोदी को अजेय मान लिया गया।

2024 के लोकसभा चुनाव में हालात बदल गए। बेहतर चुनाव प्रबंधन और अग्रेसिव कैंपेन के बाद भी बीजेपी पूर्ण बहुमत के 273 के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। राष्ट्रवाद, मुफ्त राशन और मोदी मैजिक के सहारे चुनाव में उतरी बीजेपी के 240 पर अटकने से विपक्ष का मनोबल बढ़ा। बीजेपी के नेताओं का कहना है कि वह आरक्षण खत्म करने, 10 किलो मुफ्त राशन और खटाखट 8500 रुपये देने को लेकर फैलाए गए विपक्ष के भ्रम का काट नहीं ढूंढ सके। एक्सपर्ट मानते हैं कि नरेंद्र मोदी खुद अपनी ही स्कीम की जाल में फंस गए। बीजेपी ने राम मंदिर, पांच किलो मुफ्त राशन और कैश डिलिवरी सिस्टम को जीत का रामबाण मान लिया। कोरोना के बाद वोटरों का एक ऐसा वर्ग तैयार कर दिया, जो मुफ्त की स्कीमों पर बंपर वोट करती है। लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने मुफ्त वाली स्कीम और कैश की रकम बढ़ा दी। संगठन के स्तर पर मोदी-शाह की जोड़ी ने करीब उम्र और परफॉर्मेंस के नाम पर 100 सांसदों के टिकट काटे और दूसरे दलों के आए चेहरों को टिकट दिया। मगर इस स्क्रीनिंग में बीजेपी से बड़ी चूक हुई। वह ऐसे सांसदों को टिकट दिया, जो क्षेत्र में नजर नहीं आए। उन नेताओं को भी मैदान में उतारा, जिन्हें जनता पहचानती भी नहीं थी। बीजेपी के अधिकतर उम्मीदवार पीएम नरेंद्र मोदी को चेहरे पर जीतने को लेकर आश्वस्त रहे और नतीजा अब सामने है।

केंद्र सरकार के बेहतर काम का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी के सिर गया। राज्यों में हो रहे डेवलेपमेंट के लिए क्रेडिट पीएम मोदी के खाते में जाता रहा। मोदी-शाह के युग में बीजेपी एक ऐसा चेहरा नहीं पेश नहीं कर सकी, जो पीएम नरेंद्र मोदी का विकल्प बन सके। कुछ ऐसा ही हाल 2004 में था, जब अटल बिहारी वाजपेयी की छवि के सामने बड़े नेताओं का कद छोटा पड़ने लगा। लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में एक चुनाव हारने के बाद दूसरा नेता बनाने में संगठन को 10 साल लग गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट के साथ अधिकतर लोग मान चुके हैं 2024 पीएम नरेंद्र मोदी का आखिरी चुनाव है, क्योंकि वह 2029 में 78 साल के हो जाएंगे। यह नैरेटिव बड़े ही तेज गति से जनमानस के बीच अपनी जगह बना रहा है। अगले दो साल में इसका असर भी नजर आने लगेगा। बीजेपी इसे विपक्ष की चाल कह सकती है, मगर अभी तक पार्टी की ओर से इस नैरेटिव के खिलाफ कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। पार्टी न ही किसी नेता को विकल्प के तौर पेश कर रही है और न ही इसका खंडन कर रही है।

शहरी मध्यम वर्ग बीजेपी का कोर वोटर रहा है, मगर पिछले 10 साल में राष्ट्रवाद की घुट्टी के अलावा मिडिल क्लास के हाथ कुछ नहीं लगा। हर खरीदारी पर टैक्स भरने वालों को इनकम टैक्स में छूट नहीं मिली। सरकारी नौकरियों में कमी की गई। ऐसा ही हाल अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में था, जब एनडीए सरकार ने सरकार के आकार छोटा किया और सरकार के खजाने को भर दिया। 2004 में सेंसेक्स उफान मार रहा था और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 100 बिलियन डॉलर के पार गया था। जब सरकार बदली तो कांग्रेस ने इस खजाने से नौकरियां बांटी। आज सरकार के स्तर पर बीजेपी इसी गलती को रिपीट कर रही है। विपक्ष के हाथ बेरोजगारी और महंगाई का बड़ा मुद्दा लग चुका है। अब यह मुद्दा आम लोगों को रास भी आ रहा है।

कांग्रेस और दूसरे दलों से आयातित नेताओं को पार्टी, सरकार और संगठन में जगह दी गई, जबकि संगठन के लिए वर्षों तक मेहनत करते वाले कार्यकर्ता ही बने रहे। दूसरी पार्टियों से आने वाले अधिकतर ऐसे नेता हैं, जिन्हें बीजेपी के नेताओं ने चुनाव में पटखनी दी थी और वह अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे थे। इन नेताओं को केंद्र और राज्यों में मंत्री पद भी नवाजा गया। पार्टी का यह रुख सीनियर कार्यकर्ताओं के मनोबल तोड़ने के लिए काफी था। अब दबी जुबान में नेता बीजेपी के कांग्रेसीकरण की बात कर रहे हैं।

बीजेपी के कोर समर्थक पार्टी विद डिफरेंस वाले टैगलाइन को आदर्श मानते रहे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार को दूसरी और तीसरी इसलिए मौका मिला कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा बीजेपी के कोर मुद्दों पर लीक से हटकर फैसले लिए। पिछले एक साल से पार्टी शौचालय, मुफ्त राशन, पांचवें नंबर की आर्थिक शक्ति जैसे चंद मुद्दों को अलाप रही है, जिसे नरेंद्र मोदी लालकिला, संसद, चुनाव प्रचार अभियान और विदेशों में भी कई दफा दोहरा चुके हैं। पार्टी के प्रवक्ता भी टीवी डिबेट में उन्हीं मुद्दों को बार-बार दोहराते हैं। इनमें में अधिकतर मुद्दे आर्थिक और मुफ्त वाले मुद्दे हैं, जो निम्न और मिडिल क्लास के पल्ले नहीं पड़ते हैं। यह सर्वविदित है कि सरकार चाहे किसी की भी हो, आर्थिक उदारीकरण का दौर जारी रहेगा। इस सरकार को नए तेवर के साथ कलेवर भी बदलना होगा।

आखिर क्या है जीरो एरर एग्जाम का पैटर्न?

आज हम आपको जीरो एरर एग्जाम का पैटर्न बताने जा रहे हैं! जीरो एरर परीक्षा का रोडमैप तैयार कर रही केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की कमिटी तीन स्तर की रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें पहली बार इंटरनैशनल लेवल पर बेस्ट प्रैक्टिस की स्टडी के साथ भारतीय छात्रों और पैरंट्स के हर एक सुझाव को महत्व दिया जाना शामिल है। सूत्रों का कहना है कि कमिटी नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के सभी एग्जाम सेंटरों की मैपिंग और परीक्षा के विभिन्न तरीकों (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट, पेन एंड पेपर, हाईब्रिड मोड) के हर स्टेप को जांच रही है। सात सदस्यीय कमिटी ने डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट्स की भी मदद ली है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि एग्जामिशन प्रोसेस को 100 पर्सेंट पारदर्शी, टेंपर फ्री और Zero-error परीक्षा बनाना केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता है। बता दें कि एग्जाम के हर पैटर्न को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी ताकि एग्जाम किसी भी मोड में हो, उस एग्जाम की सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च रहे। इसी मकसद को पूरा करने के लिए यह कमिटी बनाई गई है। शिक्षा मंत्री भी लगातार छात्रों से मिल रहे हैं और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जा रहा है। नीट परीक्षार्थी भी शिक्षा मंत्री से मिल रहे हैं। वहीं कमिटी को 37 हजार में से 30 हजार सुझाव छात्रों के मिले हैं। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कमिटी परीक्षा सिस्टम में पारदर्शिता और छात्रों के विश्वास के लिए 360 डिग्री तक की ओवरऑल संभावनाओं को तलाश रही है। हाई लेवल कमिटी ने तीन स्तर की रणनीति अपनाई है।यूजीसी, नैशनल मेडिकल कमिशन , नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन मेडिकल साइंसेस की राय भी ली गई है। इसके अलावा एग्जाम कंडक्ट करवाने वाली मल्टीपल एजेंसी TCS, ION, NSEIT के साथ मीटिंग में समझा कि उनकी प्रैक्टिस क्या हैं, उनका बेस्ट प्रैक्टिस क्या है, क्या सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स होते हैं, क्या कमियां, है, उसको कैसे दूर करें? अल्पकालिक उपायों में आने वाले दिनों में होने वाले एग्जाम सिस्टम में सुधार और पारदर्शिता को लेकर उपाय सुझाए गए हैं। मध्यम अवधि के उपायों में यह तय किया गया है कि इन परीक्षा सुधारों को बड़े स्तर पर कैसे लागू किया जाएगा और दीर्घकालिक चुनौतियों में एनटीए में ऑपरेशनल रिफॉर्म (परिचालन सुधार) लागू करने हैं।

मल्टीपल चेक एंड बैलेंस और डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स को लागू करने के लिए आईआईटी कानपुर के सॉफ्टवेयर इंजिनियरिंग एक्सपर्ट प्रफेसर अमेय करकरे और हाई सिक्योरिटी और अप्लाईड क्रिप्टोग्राफी एक्सपर्ट प्रो. देबप्रिय रॉय की मदद भी ली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कमिटी पेपर सेटिंग, क्वेश्चन पेपर को एग्जाम सेंटर तक ट्रांसफर करने समेत हर स्टेप को बारीकी से देख रही है। एग्जाम सेंटर में पेपर देने का प्रोसेस क्या होता है, मौजूदा एग्जाम में कहां पर समस्या हुई है, लीकेज की समस्या को जड़ से कैसे खत्म किया जा सकता है?

सूत्रों का कहना है कि बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षाओं में इंटरनैशनल लेवल पर बेस्ट प्रैक्टिस की स्टडी की गई है। यूजीसी, नैशनल मेडिकल कमिशन , नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन मेडिकल साइंसेस की राय भी ली गई है। इसके अलावा एग्जाम कंडक्ट करवाने वाली मल्टीपल एजेंसी TCS, ION, NSEIT के साथ मीटिंग में समझा कि उनकी प्रैक्टिस क्या हैं, उनका बेस्ट प्रैक्टिस क्या है, क्या सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स होते हैं, क्या कमियां, है, उसको कैसे दूर करें?

NTA के स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली में बदलाव का खाका तैयार किए जाने की प्रक्रिया बहुत तेजी से चल रही है। सूत्र बताते हैं कि डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स अब पूरी तरह से बदल जाएंगे। एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली में भी बड़े बदलाव होंगे। एनटीए द्वारा कंडक्ट करवाए जाने वाले सभी एग्जाम का मैक्रो और माइक्रो लेवल पर विश्लेषण किया जा रहा है। बता दें कि शिक्षा मंत्री भी लगातार छात्रों से मिल रहे हैं और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जा रहा है। नीट परीक्षार्थी भी शिक्षा मंत्री से मिल रहे हैं। वहीं कमिटी को 37 हजार में से 30 हजार सुझाव छात्रों के मिले हैं। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कमिटी परीक्षा सिस्टम में पारदर्शिता और छात्रों के विश्वास के लिए 360 डिग्री तक की ओवरऑल संभावनाओं को तलाश रही है। एनटीए को विश्वस्तरीय एग्जाम एजेंसी बनाने के ब्लूप्रिंट पर काफी चीजें स्पष्ट हो गई हैं और डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स सबसे अहम कड़ी साबित होगा। कमिटी एग्जाम के हर पैटर्न को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी ताकि एग्जाम किसी भी मोड में हो, उस एग्जाम की सुरक्षा और पारदर्शिता सर्वोच्च रहे।

क्या वर्तमान में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने हार मान ली है?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वर्तमान में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने हार मान ली है या नहीं! क्या बीजेपी के पतन के दिन आ गए हैं? इसका कोई ठोस जवाब नहीं हो सकता, लेकिन परिस्थितियों, शीर्ष नेताओं के मिजाज, काम-काज के तौर-तरीके, चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण से फिलहाल तो संकेत पतन के ही दिख रहे हैं। जो बीजेपी फटाफट निर्णय लेने के लिए जानी जाती है, उसे क्या हो गया! 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए, लेकिन क्या बीजेपी ने उम्मीद से कमतर प्रदर्शन पर कोई बड़ा फैसला लिया? यहां तक कि जगत प्रकाश नड्डा का कार्यकाल 30 जून को ही खत्म हो गया, लेकिन 15 दिन बाद भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन तो दूर, चर्चा तक नहीं हो रही है! बीजेपी पार्टी विद डिफरेंस कहलाती थी, उस बीजेपी में वो सब देखने को मिल रहा है जिसके लिए कांग्रेस बदनाम हुआ करती थी- प्रदर्शन पर चाटुकारिता को तवज्जो। शीर्ष नेताओं की तरफ से पार्टी की हैंडलिंग में इस तरह की मनमर्जी हो रही है कि निराशा का भाव दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। लोकसभा से लेकर उप-चुनावों तक में तमाम नकारात्मक संकेतों के बावजूद दूसरी पार्टियों से नेताओं के बुलाकर अपने वर्षों के कार्यकर्ताओं, नेताओं को ठगा महसूस करवाने का चलन बदस्तूर जारी है। तो पार्टी अब अपने ही नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों की तरफ से भेजे जा रहे अलर्ट मेसेज को भी अनसुना कर रही है? लगता तो ऐसा ही है।

नरेंद्र मोदी को 2014 में देश ने प्रधानमंत्री के रूप में इसीलिए चुना था क्योंकि मनमोहन सिंह की छवि फैसले नहीं ले पाने वाले पीएम की हो गई थी। यह मतदाताओं को पसंद नहीं आया। मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने के लिए धड़ाधड़ फैसले लिए- नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक। फिर मोदी ने पार्टी के उम्रदराज नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया, भ्रष्टाचार के आरोपी विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। ये सभी नरेंद्र मोदी के एक मजबूत पीएम होने की छवि मजबूत करने में मददगार साबित हुए। नतीजा हुआ कि जनता ने दूसरी बार 2019 में ज्यादा सीटें देकर सत्ता में वापसी करवा दी। लेकिन अब पार्टी को मतदाता ही नहीं, अपने कार्यकर्ता और नेता भी खुलकर कह रहे हैं- जाग जाओ, वरना देर हो जाएगी।

अभी हुए विभिन्न राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणामों की व्याख्या ही कर लें। सात राज्यों की इन कुल 13 में से बीजेपी सिर्फ दो सीटें जीत पाई है। मतलब साफ है कि पार्टी कैडर और वोटरों में मायूसी का माहौल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। ऐसा लगता है कि दूसरी पार्टियों से नेताओं को लाकर अपने ही कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने में बीजेपी रिकॉर्ड बनाना चाहती है। अब दिखने लगा है कि दशकों से पार्टी के लिए समर्पित नेताओं, कार्यकर्ताओं पर बाहरी नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने से बीजेपी बहुत तेजी से गर्त में जा सकती है। लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक यही संकेत मिला। अब जब उप-चुनाव हुए तो बीजेपी कैडर और इसके समर्थकों ने साफ बता दिया कि पैराशूट कैंडिडेट्स किसी को रास नहीं आ रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के टिकट पर उपचुनाव लड़ने वाले छह में से चार कैंडिडेट हार गए। यह पिछले महीने हुआ था। ताजा चुनाव में तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने बीजेपी के टिकट पर उम्मीदवारी हासिल की थी। उनमें दो बुरी तरह हारे और एक किसी तरह जीत सका। 2024 के लोकसभा चुनावों की ही बात करें तो दूसरी पार्टियों से आए उन 26 कैंडिडेट्स में 21 हार गए जिन्हें बीजेपी ने टिकट दिए थे। इन 26 ने 2024 में ही बीजेपी जॉइन की थी। वैसे 2014 से दूसरी पार्टियों से बीजेपी में आए कुल 110 नेताओं को इस बार पार्टी ने टिकट दिया था। इनमें 69 कैंडिडेट हार गए। साफ है कि मोदी को जिताने के लिए जनता आंखें मूंद लेने को अब तैयार नहीं है।

ऐसा नहीं है कि पार्टी नेता ये समझ नहीं रहे हैं। समझ रहे हैं और शीर्ष नेतृत्व को समझाने की कोशिश भी कर रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गोवा बीजेपी की कार्यसमिति की बैठक में साफ कहा कि हम पार्टी विद डिफरेंस हैं। हम भी अगर कांग्रेस की गलतियां करेंगे तो फिर उसे सत्ता से बाहर करके अपनी सरकार बनाने का क्या फायदा? हिमचाल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार खुद-ब-खुद गिरने वाली थी, लेकिन हमारी पार्टी बीजेपी ने हड़बड़ी कर दी और सब चौपट हो गया।

राजस्थान के मंत्री किरोड़ लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को कई पत्र लिखकर भ्रष्टाचार और सरकार के कामों में हीलाहवाली के प्रति सचेत किया। उचित सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। प. बंगाल के बीजेपी चीफ दिलीप घोष ने इस बात पर नाराजगी जताई कि शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश के नेताओं को आसान जीत वाली सीटों से हटाकर चुनौतीपूर्ण सीटों से टिकट दिए। नतीजा यह हुआ कि पहले से खराब रिजल्ट आए। उत्तर प्रदेश के बदलापुर विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने कहा है कि प्रदेश में बीजेपी की हालत काफी गंभीर है और 2027 के विधानसभा चुनावों में जीत की कोई आस नहीं दिख रही है।

सवाल है कि क्या बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व अपने ही नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों, मतदाताओं के लगातार भेजे जा रहे संदेशों को अब सुनेगा? संभव है कि नहीं सुने। ऐसा इसलिए क्योंकि वह वोट प्रतिशत के चश्मे से चुनावी नतीजों का विश्लेषण करना ठीक समझ रही है। उसे लगता है कि मतदाता अब भी पार्टी के साथ है, वरना वोट प्रतिशत में भारी गिरावट आती। क्या यह सच है? हां, हो सकता है। मतदाता आज भी बीजेपी से दूर नहीं गया हो, लेकिन उसकी मायूसी कब विरोध में बदल जाए, यह समझना बहुत कठिन नहीं है।

आखिर कैसा है दिल्ली से बिहार तक का मौसम?

आज हम आपको बताएंगे कि दिल्ली से बिहार तक का मौसम आखिर कैसा है! दिल्ली-NCR समेत देशभर में मॉनसून सक्रिय हो गया है। कुछ राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है तो कुछ इलाकों में रुक- रुक कर बारिश हो रही है। हालांकि बारिश के बाद भी दिल्ली-NCR में इन दिनों गर्मी और उमस से जीना मुहाल कर दिया है। एक तरफ दिल्ली के लोग उमस से परेशान हो गए हैं तो वही दूसरी और यूपी-बिहार के कई इलाकों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। दिल्ली में मॉनसून के आने के बाद भी उमस और गर्मी दिल्लीवासियों का पीछा छोड़ ही नहीं रही है। सोमवार को भी दिल्ली के कुछ इलाकों में बारिश हुई लेकिन उमस का प्रकोप फिर भी जारी रहा। आज के मौसम को लेकर भी IMD ने बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार आज दिल्ली के कई इलाकों में रिमझिम बारिश हो सकती है।चार-पांच दिनों में उत्तराखंड के मौसम का मिजाज बदलने वाला है, इसके मद्देनजर प्रदेश भर में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि जान–माल का नुकसान न हो। हालांकि बारिश के बाद भी दिल्ली का अधिकतम तापमान एक डिग्री बढ़ने की उम्मीद है। IMD के अनुसार आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है।

यूपी-बिहार में झमाझम बारिश पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज भी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश और कुछ जगहों पर रिमझिम बारिश पड़ सकती है। मौसम विभाग ने आज उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है। बता दें कि मौसम को लेकर भी IMD ने बारिश का पूर्वानुमान जताया है।इसके साथ ही सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर, बरेली और आसपास के इलाकों में बारिश के साथ वज्रपात की चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग ने पूरे उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक आज प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने कहा कि 16 जुलाई को उत्तराखंड में अनेक जगहों पर हल्की-मध्यम बारिश की संभावना है। इसके साथ ही पर्वतीय जिलों नैना, चंपारण, पिथौरागढ़ और देहरादून में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, 17 और 18 जुलाई को प्रदेश में कई जगहों पर हल्की वर्षा होने की उम्मीद है। इस दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि चार-पांच दिनों में उत्तराखंड के मौसम का मिजाज बदलने वाला है, इसके मद्देनजर प्रदेश भर में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि जान–माल का नुकसान न हो।

हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहने के बीच यहां के मौसम कार्यालय ने सोमवार को ‘येलो अलर्ट’ जारी करने के साथ सप्ताह के अंत में राज्य के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। शिमला में स्थित मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 21 जुलाई तक बारिश का अनुमान जताया है। बता दें कि मौसम को लेकर भी IMD ने बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार आज दिल्ली के कई इलाकों में रिमझिम बारिश हो सकती है। हालांकि बारिश के बाद भी दिल्ली का अधिकतम तापमान एक डिग्री बढ़ने की उम्मीद है। IMD के अनुसार आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है। यूपी-बिहार में झमाझम बारिश पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज भी यूपी और बिहार के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश और कुछ जगहों पर रिमझिम बारिश पड़ सकती है। मौसम विभाग ने आज उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।इसके साथ ही मौसम विभाग ने महाराष्ट्र में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने की उम्मीद है।IMD ने मंगलवार यानी आज रायगढ़ के लिए रेड अलर्ट और मुंबई, ठाणे, पालघर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सतार और कोल्हापुर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

आखिर क्या है 72 वर्षीय अम्मा की धोखे की कहानी?

आज हम आपको 72 वर्षीय अम्मा की दुखी की कहानी बताने जा रहे है! सड़क किनारे ठेला लगाकर बच्चों की कैप, बैग और क्लिप बेचने वाली 72 साल की सुकुमारीअम्मा का हमेशा से सपना था कि उनका अपना एक घर हो। कमाई इतनी नहीं थी कि वो उससे अपना ये सपना पूरा कर सकें, इसलिए अक्सर सुकुमारीअम्मा लॉटरी खरीदकर अपना भाग्य आजमाया करती थीं। 15 मई 2024 को सुकुमारीअम्मा की किस्मत चमक गई। उन्होंने एक दिन पहले जो लॉटरी का टिकट खरीदा था, उसपर उन्हें पूरे एक करोड़ का इनाम लगा। हालांकि, ये रकम उनके हाथों तक पहुंच पाती, इससे पहले ही उनके साथ एक बड़ा धोखा हो गया। दरअसल, सुकुमारीअम्मा ने 14 मई को टिकट वेंडर कन्नन से एक ही सीरीज के 12 टिकट खरीदे थे। इन टिकटों के लिए उन्होंने उसे 1200 रुपए दिए। कन्नन को जब पता चला कि सुकुमारीअम्मा को 1 करोड़ का पहला इनाम लगा है तो उसके मन में लालच आ गया। उसने सुकुमारीअम्मा से कहा कि उनके सारे टिकटों पर 100-100 रुपए का इनाम मिला है। इसमें काफी समय लग सकता था। ऐसे में कन्नन से समझौता करने के लिए सुकुमारीअम्मा ने एक दूसरी याचिका दाखिल की। ये वो याचिका थी, जिसके तहत समझौते लायक अपराधों के लिए कोर्ट की स्वीकृति से मामलों का निपटारा किया जाता है।सुकुमारीअम्मा की उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने कन्नन को अपने टिकट दे दिए। कन्नन ने कहा कि वो कल आकर इनाम के रुपए दे देगा। इसके बाद कन्नन अपने घर पहुंचा और ये कहते हुए मिठाई बांटने लगा कि उसे 1 करोड़ की लॉटरी लगी है।

कन्नन के घर के पास एक दूसरा टिकट वेंडर रहता था, जो जानता था कि जिस टिकट पर जैकपॉट लगा है, वो सुकुमारीअम्मा ने खरीदा था। वो तुरंत उनके पास पहुंचा और कन्नन के धोखे की पूरी कहानी बताई।इससे वो टिकट का मालिक बन गया था। इसीलिए, हमने समझौते के बारे में सोचा, क्योंकि अगर मामला लंबा खिंचता तो लॉटरी ऑफिस में टिकट जमा करने की 30 दिन की समय-सीमा खत्म हो जाती। सुकुमारीअम्मा कन्नन पर काफी भरोसा करती थीं, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वो उनके साथ ऐसी धोखाधड़ी करेगी। उन्होंने कन्नन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और अगले ही दिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब यहां समस्या ये थी कि कन्नन उस टिकट के पीछे अपना नाम लिखकर बैंक में जमा कर चुका था।

सुकुमारीअम्मा के सामने अब दोहरा संकट था। नियम के मुताबिक, उन्हें 30 दिनों के भीतर टिकट को लॉटरी ऑफिस में जमा करना था और कन्नन के खिलाफ कोर्ट की कार्यवाही 30 दिनों में पूरी होना संभव नहीं था। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और कानूनी लड़ाई लड़नी शुरू कर दी। शुरुआत में सुकुमारीअम्मा के वकील ने टिकट हासिल करने के लिए धारा 451 के तहत याचिका दायर की थी। लेकिन, इसमें काफी समय लग सकता था। ऐसे में कन्नन से समझौता करने के लिए सुकुमारीअम्मा ने एक दूसरी याचिका दाखिल की। ये वो याचिका थी, जिसके तहत समझौते लायक अपराधों के लिए कोर्ट की स्वीकृति से मामलों का निपटारा किया जाता है।

सुकुमारीअम्मा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कन्नन के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप के तहत मामला दर्ज किया था। कोर्ट में समझौते के तहत सुकुमारीअम्मा ने कन्नन के खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने पर अपनी सहमति दे दी। इसके बाद सुकुमारीअम्मा को उनका टिकट वापस मिल गया औ उन्होंने 30 दिन के भीतर इसे लॉटरी ऑफिस में जमा करा दिया। कन्नन को जब पता चला कि सुकुमारीअम्मा को 1 करोड़ का पहला इनाम लगा है तो उसके मन में लालच आ गया। उसने सुकुमारीअम्मा से कहा कि उनके सारे टिकटों पर 100-100 रुपए का इनाम मिला है। सुकुमारीअम्मा की उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने कन्नन को अपने टिकट दे दिए।लॉटरी दफ्तर की तरफ से कमीशन और टैक्स काटने के बाद अब सुकुमारीअम्मा को 63 लाख रुपए मिलेंगे। कन्नन के घर के पास एक दूसरा टिकट वेंडर रहता था, जो जानता था कि जिस टिकट पर जैकपॉट लगा है, वो सुकुमारीअम्मा ने खरीदा था। वो तुरंत उनके पास पहुंचा और कन्नन के धोखे की पूरी कहानी बताई। सुकुमारीअम्मा कन्नन पर काफी भरोसा करती थीं, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वो उनके साथ ऐसी धोखाधड़ी करेगी।सुकुमारीअम्मा के वकील ने बताया कि कन्नन ने अपने हस्ताक्षर के साथ टिकट को बैंक में जमा किया था। इससे वो टिकट का मालिक बन गया था। इसीलिए, हमने समझौते के बारे में सोचा, क्योंकि अगर मामला लंबा खिंचता तो लॉटरी ऑफिस में टिकट जमा करने की 30 दिन की समय-सीमा खत्म हो जाती।

आखिर अब डीएम पूजा खेड़कर के साथ क्या होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अब डीएम पूजा खेड़कर के साथ क्या होगा! पूजा खेडकर… 2022 में यूपीएससी की परीक्षा दी और 2023 में 841वीं रैंक पाकर आईएएस अधिकारी बन गईं। महाराष्ट्र के पुणे में अपना प्रोबेशनरी पीरियड पूरा किया और ट्रांसफर होने के बाद वाशिम जिले में असिस्टेंट कलेक्टर बनकर पहुंच गईं। लेकिन कहानी महज इतनी नहीं है। पूजा खेडकर के साथ बहुत सारे विवाद खड़े हो गए हैं। आरोप हैं कि पूजा खेडकर ने पुणे में रहते हुए कई अधिकारियों को परेशान किया। अलग-अलग तरह की डिमांड की। यहीं नहीं, उन्होंने अपनी प्राइवेट ऑडी कार पर लाल बत्ती का इस्तेमाल किया। मीडिया में अधिकारियों से बातचीत की उनकी वॉट्सएप चैट भी सामने आ गई है। विवाद उठे तो पूजा खेडकर को लेकर कुछ और चौंकाने वाली बातें भी सामने आईं। पूजा ने यूपीएससी की परीक्षा के दौरान तीन एफिडेविट जमा किए थे। इनमें से एक में उन्होंने खुद को मानसिक रूप से अक्षम बताया। दूसरे में बताया कि उन्हें देखने में भी समस्या है। और तीसरा एफिडेविट था ओबीसी नॉन क्रीमी लेकर कैटेगरी का। अब खुलासा हुआ है कि अपनी जॉइनिंग के दौरान पूजा ने यूपीएससी की तरफ से कराए जाने वाले मेडिकल टेस्ट को नजरअंदाज किया। उन्हें 6 बार मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया, जिनमें से केवल आखिरी के एक टेस्ट में ही पूजा शामिल हुईं और उसमें उन्होंने एमआईआर कराने से मना कर दिया। ऐसे में मेडिकल संबंधी जो एफिडेविट पूजा खेडकर ने यूपीएससी को दिए, उनपर सवाल खड़े हो गए हैं।

दूसरा विवाद उनके ओबीसी नॉन क्रीमी लेकर कैटेगरी के एफिडेविट को लेकर है। दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि पूजा खेडकर के पिता के पास 40 करोड़ की संपत्ति है। वहीं, पूजा को भी करीब 22 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति का मालिक बताया जा रहा है। यूपीएससी में जमा किए गए इन दस्तावेजों पर विवाद खड़ा होने के बाद अब केंद्र सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।इन धाराओं के साबित होने पर दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। एडवोकेट शिवाजी शुक्ला के मुताबिक, ऐसी स्थिति में अगले कदम के तहत यूपीएससी उन्हें पद से बर्खास्त करने की कार्रवाई कर सकता है। पूजा के खिलाफ आरोपों पर एडिशनल सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी जांच करेंगे। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर का अब क्या होगा? क्या उन्हें बर्खास्त किया जाएगा या फिर उनकी नौकरी जारी रहेगी। आइए आपको इस बारे में डिटेल से बताते हैं।

साकेत कोर्ट में सीनियर एडवोकेट शिवाजी शुक्ला से बात की। उन्होंने बताया कि जब सरकार का कोई कर्मचारी भ्रामक या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करता है, तो सबसे पहले उसके रिपोर्टिंग अथॉरिटी के पास शिकायत दर्ज होती है। आईएएस पूजा खेडकर के मामले में रिपोर्टिंग अथॉरिटी चीफ सेक्रेटरी हैं। इनके पास शिकायत दर्ज होने के बाद पूजा खेडकर के खिलाफ विभागीय जांच होगी। केंद्र की तरफ से गुरुवार को ही मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय पैनल बना दिया गया है।

अब अगर पूजा खेडकर विभागीय जांच में दोषी पाई जाती हैं, तो अगला कदम उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई का होगा। विभागीय जांच के आधार पर पूजा के खिलाफ एक चार्जशीट बन सकती है, जो चीफ सेक्रेटरी को सौंपी जाएगी। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई की तरफ कदम बढ़ाए जाएंगे। विभागीय जांच के आधार पर भारतीय न्याय संहिता के मुताबिक, उनके खिलाफ धारा 318(4), धारा 336 (3) और धारा 340 (2) के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है। ये सभी धाराएं धोखाधड़ी, फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए जालसाजी और जाली डॉक्यूमेंट्स का वास्तविक तौर पर इस्तेमाल करने से जुड़ी हैं।

इन धाराओं के साबित होने पर दोषी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। एडवोकेट शिवाजी शुक्ला के मुताबिक, ऐसी स्थिति में अगले कदम के तहत यूपीएससी उन्हें पद से बर्खास्त करने की कार्रवाई कर सकता है।अपनी जॉइनिंग के दौरान पूजा ने यूपीएससी की तरफ से कराए जाने वाले मेडिकल टेस्ट को नजरअंदाज किया। उन्हें 6 बार मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया, जिनमें से केवल आखिरी के एक टेस्ट में ही पूजा शामिल हुईं और उसमें उन्होंने एमआईआर कराने से मना कर दिया। चूंकि, एक आईएएस अधिकारी की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा होती है, इसलिए बर्खास्तगी के लिए भी राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होती है। ऐसे में फाइल को राष्ट्रपति भवन भेजा जाएगा। बर्खास्तगी की कार्रवाई के दौरान दोषी अधिकारी से वो सभी लाभ और सैलरी वापस लिए जाते हैं, जो उसने पद पर रहते हुए पाए हैं।

क्या अब पुणे में बंद होंगे खतरनाक पर्यटन स्थल?

अब पुणे में खतरनाक पर्यटन स्थल बंद होने वाले है! तीन दिन पहले भुशी डैम पर एक भयावह हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें पूरा परिवार पानी में बह गया था। इसके बाद पुणे प्रशासन ने हादसे पर गंभीरता से संज्ञान लिया। कलेक्टर सुहास दिवसे ने पुणे के पर्यटन स्थलों के लिए एक अधिसूचना जारी की है। आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अनुसार, मावल, मुलशी, अंबेगांव, खेड़, जुन्नार, भोर, वेल्हा, इंदापुर और हवेली में धारा 163 लागू की गई है। पुणे जिला प्रशासन का दावा है कि वह मॉनसून के दौरान पर्यटकों का ख्याल रखता है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए 2 से 31 जुलाई तक मावल तालुका में भूसी बांध और पावना झील क्षेत्र में पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने पुणे जिले के खतरनाक स्थानों की एक सूची भी तैयार की है। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने की संभावना है। कोहरे के कारण रास्ता भटकना पड़ रहा है। वन संरक्षक चव्हाण ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटन के लिए सेंचुरी में सभी प्राकृतिक मार्गों को बंद करने का फैसला किया है।इसमें मावल तालुका के भूसी बांध, बेंडेवाडी, खंडाला के टाइगर पॉइंट, लायन पॉइंट, राजमाची पॉइंट, सहारा ब्रिज, पावना झील, टाटा बांध, घुबड़ फॉल्स पर पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कलेक्टर की ओर से जारी आदेश के मुताबिक पांच से अधिक लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गहरे पानी में रीलिंग और तस्वीरें लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। नियमों का उल्लंघन करने पर बीएनएनएस और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल जनवरी 2024 में पुणे जिले के लोनावाला में पावना झील के पास चार लोग डूब गए थे, जबकि वन्यजीव संरक्षक मावल की जानकारी के अनुसार, मार्च और मई के बीच मावल के जल पर्यटन स्थलों पर 27 लोगों की जान चली गई। इस खतरे को समझते हुए जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को खतरनाक पर्यटक स्थलों पर खतरनाक सामग्री के चेतावनी बोर्ड लगाने का निर्देश दिया है। भीमाशंकर देवस्थान दर्शन के लिए आ रहे पर्यटकों के लिए अहम खबर है। भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी में दुर्घटना संभावित क्षेत्र में पर्यटकों का प्रवेश 30 सितंबर तक बंद कर दिया गया है। वन विभाग (वन्यजीव) ने आदेश जारी किया कि पर्यटक छुट्टियों के लिए इस क्षेत्र में न आएं। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दरअसल भीमाशंकर क्षेत्र में साल भर भक्तों की भारी भीड़ रहती है। मॉनसून के दौरान पर्यटक भी बड़ी संख्या में इस प्राकृतिक क्षेत्र में घूमने और झरने का आनंद लेने आते हैं।

भीमाशंकर सेंचुरी भाग एक और वन क्षेत्र के भाग दो में झरने के कुंडों में डुबकी लगाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ छुट्टियों पर पुणे मुंबई से पर्यटक आते हैं। वर्तमान में इन झरनों में पानी तेज है। यदि आप तैरते समय पानी के प्रवाह और गहराई का अनुमान नहीं लगाते हैं तो यह एक घातक दुर्घटना का कारण बन सकता है। भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी की पहाड़ी घाटियों में जंगल के रास्ते बारिश के कारण फिसलन भरे हो गए हैं। कई स्थानों पर घास उगने के कारण रास्ते बह गए हैं। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने की संभावना है। कोहरे के कारण रास्ता भटकना पड़ रहा है। वन संरक्षक (वन्यजीव) तुषार चव्हाण ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटन के लिए सेंचुरी में सभी प्राकृतिक मार्गों को बंद करने का फैसला किया है।

इस बीच भीमाशंकर में दर्शन के लिए आने वाले सभी पर्यटकों को सेंचुरी के चारों ओर घूमते समय नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। चव्हाण ने कहा कि बिना अनुमति के अवैध रूप से सेंचुरी में प्रवेश न करें और बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले पर्यटकों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए 2 से 31 जुलाई तक मावल तालुका में भूसी बांध और पावना झील क्षेत्र में पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन ने पुणे जिले के खतरनाक स्थानों की एक सूची भी तैयार की है। लोनावला के भूशी डैम इलाके में रविवार को हुए हादसे में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद तम्हिनी घाट इलाके में एक 32 वर्षीय युवक बह गया। सोमवार को कोल्हापुर के कलम्मावाडी बांध क्षेत्र में दूधगंगा नदी के तल में पैर गिरने से दो युवक बह गए।

सोने की घड़ी से लेकर 110 एकड़ खेत IAS पूजा खेड़कर विवादों में!

हाल ही में IAS पूजा खेड़कर विवादों में आ गई है क्योंकि उनके पास सोने की घड़ी से लेकर 110 एकड़ खेत मिले हैं! महाराष्ट्र कैडर की आईएएस पूजा खेडकर इन दिनों विवादों मे घिरी हैं। पूरे देश में उन्हें लेकर चर्चा हो रही है। ट्रेनी आईएएस अधिकारी पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे यूपीएससी परीक्षा पास करने का आरोप है। केंद्र ने आरोपों की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया। पूजा खेडकर पर दिव्यांगता और ओबीसी कोटा का दुरुपयोग करने का आरोप है। इसके अलावा पूजा खेडकर पर अनुचित व्यवहार के आरोप भी लगे हैं। उन्हें पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया है। पूजा खेडकर के मामले में एक और खुलासा हुआ है, उनके पास अकूत संपत्ति है। जबकि पूजा ने दावा किया था कि उनकी मां और पिता अलग हो चुके हैं लेकिन इसका भी लोगों ने खंडन किया है। उन्होंने कहा कि आज कभी भी इसका जिक्र नहीं हुआ। पूजा के पिता पूर्व अफसर हैं और राजनीति में भी हैं। बीते लोकसभा चुनाव के शपथपत्र में भी उन्होंने अपनी पत्नी से अलग रहने का कोई जिक्र नहीं किया। उनकी पत्नी भी सरपंच हैं और उनके भी हलफनामे में इसका कोई जिक्र नहीं है। कहा जा रहा है कि पूजा करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। पुणे की रहने वाली प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर का नाम इस समय काफी चर्चा में है। पूजा खेडकर को अपने पद का गलत इस्तेमाल करने के आरोपों के बाद पुणे से महाराष्ट्र के वाशिम जिले में ट्रांसफर कर दिया गया है।

पूजा खेडकर को लेकर कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं। उनमें से एक ये जानकारी सामने आई है कि उनके पास अकूत संपत्ति है। उनका करियर भी विवादास्पद रहा, उन्हें एक बार निलंबित भी किया गया था। दिलीप खेडकर के दो बच्चे हैं, पीयूष खेड़कर और डॉ. पूजा खेडकर। पीयूष खेडकर लंदन में पढ़ाई कर रहे हैं।पता चला है कि पूजा खेडकर की सालाना कमाई 42 लाख रुपये है। वहीं उनके पास 17 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति है। पूजा की संपत्ति, नियुक्ति और पद का गलत इस्तेमाल करने को लेकर इस समय विवाद खड़ा हो गया है।

पूजा खेडकर प्रोबेशन के दौरान अवैध मांग करने को लेकर विवादों में घिर गई हैं। पुणे कलेक्टर सुहास दिवासे ने खेडकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, खेडकर परिवार का यह पहला मामला नहीं है। उनके पिता और पूर्व सिविल सेवक दिलीप खेडकर पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर एक पूर्व चार्टर्ड अधिकारी हैं। उनका पैतृक गांव नगर जिले के पाथर्डी तालुका में भलगांव है। डिपिल खेडकर ने मैकेनिकल में ग्रेजुएशन किया है। खेडकर ने रिटायरमेंट के बाद राजनीति में किस्मत आजमाई। उन्होंने वंचित बहुजन अघाड़ी से अहमदनगर लोकसभा चुनाव लड़ा था। लोकसभा चुनाव में उन्हें 13 हजार 749 वोट मिले।

दिलीप खेडकर ने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनके पास 40 करोड़ की संपत्ति है, तो चर्चा शुरू हुई। इस बात पर राजनीतिक चर्चा होने लगी कि एक चार्टर्ड अधिकारी के पास इतनी संपत्ति कैसे हो सकती है। दिलीप खेडकर की पत्नी डॉ. मनोरमा खेडकर के पिता जगन्नाथ बुधवंत भी एक चार्टर्ड अधिकारी थे। उनका करियर भी विवादास्पद रहा, उन्हें एक बार निलंबित भी किया गया था। दिलीप खेडकर के दो बच्चे हैं, पीयूष खेड़कर और डॉ. पूजा खेडकर। पीयूष खेडकर लंदन में पढ़ाई कर रहे हैं।

दिलीप खेडकर के भाई माणिक खेडकर 5 साल तक बीजेपी के तालुका अध्यक्ष रहे हैं। दिलीप खेडकर ने कहा था कि अगर उन्हें नामांकन मिलता है, तो वह देवी को डेढ़ किलो वजनी चांदी का मुकुट चढ़ाएंगे। खास बात यह है कि उन्होंने अपना वचन निभाते हुए उस प्रतिज्ञा को पूरा किया। पूजा खेडकर ने यूपीएससी परीक्षा 2021 में उत्तीर्ण की थी। इस परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 821 थी। सामने आया है कि उन्होंने खुद को दिव्यांग बताया है।आज कभी भी इसका जिक्र नहीं हुआ। पूजा के पिता पूर्व अफसर हैं और राजनीति में भी हैं। बीते लोकसभा चुनाव के शपथपत्र में भी उन्होंने अपनी पत्नी से अलग रहने का कोई जिक्र नहीं किया। उनकी पत्नी भी सरपंच हैं और उनके भी हलफनामे में इसका कोई जिक्र नहीं है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के पास एक याचिका भी दायर की गई है। पूजा का तर्क है कि दिव्यांग अभ्यर्थियों को एससी/एसटी अभ्यर्थियों की तुलना में अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें भी यही लाभ मिलना चाहिए।

अपने विधायकों के साथ बप्पा की शरण में पहुंचे अजीत पवार!

हाल ही में अजीत पवार अपने विधायकों के साथ बप्पा की शरण में पहुंच चुके हैं! महाराष्ट्र में विधान परिषद की 11 सीटों के चुनावों से पहले एक बार फिर से रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की वापसी होती दिख रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तमाम नेताओं और विधायकों ने एक साथ सिद्धिविनायक के दर्शन किए जीत की हुंकार भरी तो वहीं दूसरी अजित पवार के बप्पा की शरण में जाने पर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने तंज कसा है। सिद्धिविनायक को भी पता है कि कौन झूठ बोल रहा है, कौन मेरे दरवाजे पर पुण्य करने आ रहा है। महाराष्ट्र में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 12 जुलाई को वोट डाले जाएंगे। 11 सीटों के लिए 12 कैंडिडेट होने से चुनाव की नौबत आई है। एक कैंडिडेड को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 23 वोटों की जरूरत होगी। इन चुनावों में क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच सभी दलाें ने अपने विधायकों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। इसी बीच राउत ने कहा कि वे सिद्धिविनायक के दर्शन कर रहे हैं। यह तो अच्छी बात है। बप्पा जानते हैं कि कौन पुण्य कर रहा है और कौन पाप कर रहा है। संजय राउत ने एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने महाराष्ट्र के मामले में जिस तरह का पाप किया है। उप मुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई में तमाम विधायक मुंबई के सिद्धिविनायक में दर्शन के लिए गए थे। बप्पा के दर्शन करने के बाद अजित पवार ने लिखा था कि लोक कल्याण के लिए श्री गणेश, लोगों के विकास का जुनून। पवार ने लिखा था कि किसी भी कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से होती है। आज सिद्धिविनायक के दर्शन से हमें नई ऊर्जा मिली है। आने वाले समय में इसी ऊर्जा से जनता का प्यार, विश्वास और आशीर्वाद हासिल करेंगे। बप्पा के दर्शन के बाद अजित पवार ने नेताओं के साथ विक्ट्री साइन बनाकर फोटो भी खिंचवाए थे।ऐसा माना जा रहा है कि 9 जुलाई की रात से 12 जुलाई तक सभी पार्टियों अपने विधायकों को एक जगह पर रखेंगे। सिद्धिविनायक विजिट विजिट के बाद एनसीपी विधायकों को एक स्थान पर ठहराए जाने की चर्चा है। इसे विधान परिषद चुनावों से पहले शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। शरद पवार के खेमे से दावा किया गया था कि अजित पवार के साथ गए 19 विधायक लौटना चाहते हैं।

अजित पवार की पार्टी एनसीपी ने सिद्धिविनायक बप्पा के दर्शन को को विधानसभा अभियान का श्री गणेश करार दिया है तो अजित पवार की सिद्धिविनायक जाने पर संजय राउत ने तंज कसा है। राउत ने कहा है कि सिद्धिविनायक को भी पता है कौन चोरी और झूठ बोल रहा है, कौन उनके पास नेक बनने आ रहा है। राउत ने कहा कि वे सिद्धिविनायक के दर्शन कर रहे हैं। यह तो अच्छी बात है। बप्पा जानते हैं कि कौन पुण्य कर रहा है और कौन पाप कर रहा है। संजय राउत ने एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने महाराष्ट्र के मामले में जिस तरह का पाप किया है। सिद्धिविनायक इस तरह किसी को आशीर्वाद नहीं देते।

विधान परिषद चुनावों के बीजेपी ने पांच और अजित पवार और शिंदे की अगुवाई वाली एनसीपी और शिवसेना ने दो-दो कैंडिडेट खड़े किए हैं। ऐसे में महायुति की तरफ से कुल नौ कैंडिडेट हैं जबकि महाविकास आघाडी की तरफ से तीन कैंडिडेट मैदान में हैं। इनमें कांग्रेस की तरफ प्रज्ञा सातव, शिवसेना यूबीटी से मिलिंद नार्वेकर और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की पीजेंट पार्टी के नेता जयंत पाटिल का समर्थन किया है। 288 सदस्यों वाली विधानसभा में अभी मौजूदा विधायकों की संख्या 274 है। बता दें कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार की अगुवाई में तमाम विधायक मुंबई के सिद्धिविनायक में दर्शन के लिए गए थे। बप्पा के दर्शन करने के बाद अजित पवार ने लिखा था कि लोक कल्याण के लिए श्री गणेश, लोगों के विकास का जुनून। पवार ने लिखा था कि किसी भी कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से होती है।अजित पवार की पार्टी एनसीपी ने सिद्धिविनायक बप्पा के दर्शन को को विधानसभा अभियान का श्री गणेश करार दिया है तो अजित पवार की सिद्धिविनायक जाने पर संजय राउत ने तंज कसा है। ऐसा माना जा रहा है कि 9 जुलाई की रात से 12 जुलाई तक सभी पार्टियों अपने विधायकों को एक जगह पर रखेंगे। सिद्धिविनायक विजिट विजिट के बाद एनसीपी विधायकों को एक स्थान पर ठहराए जाने की चर्चा है।

आखिर विवादों में कैसे फांसी IAS पूजा खेड़कर?

आज हम आपको बताएंगे कि IAS पूजा खेड़कर विवादों में कैसे फंसी है! महाराष्ट्र कैडर की प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर विवादों में आ गई हैं। पहले उनके ऊपर आरोप था कि कि उन्होंने पहले अपने रसूख का इस्तेमाल करके वीआईपी नंबर प्लेट मांगी। इसके बाद उसे ठेकेदार द्वारा दी गई निजी ऑडी पर लाल बत्ती लगाई। इतना ही नहीं पुणे कलेक्टर का निजी चैंबर छीन लिया था। इस सब के अलावा अब नई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसमें कहा जा रहा है कि पूजा खेडकर ने कथित तौर पर आईएएस में शामिल होने के लिए अपना विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी बनाया था। इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र नौकरशाही से लेकर सरकार के गलियारों में हड़कंप की स्थिति है। पूजा खेडकर 2023 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। पिछले महीने सरकार ने पूजा खेडकर का पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया था। 2023 बैच की आईएएस के विवाद में घिरे के बाद सरकार ने उनका तबादला पुणे से कर दिया था। पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को मसूरी से ट्रेनिंग के बाद पणे में बतौर अपर कलेक्टर तैनाती मिली थी। वहां पर वह असिस्टेंट कलेक्टर पद की ट्रेनिंग के लिए गई थीं। विवाद में घिरने के बाद अब यह भी चर्चा शुरू हो गई कि यह फैसला राजनीतिक प्रभाव के कारण लिया गया था। मराठी पोर्टल लोकसत्ता ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि उन्होंने पुणे जिले में प्रशिक्षु सहायक कलेक्टर के रूप में शामिल होने से पहले पुणे कलेक्टर सुहास दिवस, रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर ज्योति कदम को एक व्हाट्सएप संदेश भेजा था। इसके बाद उन्होंने पूजा खेडकर द्वारा रखे गए फर्नीचर और अन्य सामान को बाहर निकालने का फैसला किया, लेकिन पूजा ने कलेक्टर को संदेश भेजा कि अगर तुम ऐसा करोगे तो मेरी बेइज्जती होगी।इसमें उन्होंने अलग केबिन, अलग कार, आवास की मांग की। तब यह सामने आया था कि प्रोबेशन पर चल रहे असिस्टेंट कलेक्टर को ये सुविधाएं देना नियमों के अनुरूप नहीं है। कलेक्टर कार्यालय की ओर से बताया गया कि आवास मुहैया कराया जाएगा।

पूजा खेडकर 3 जून से 14 जून 2024 तक पुणे कार्यालय में रही थीं। इस दौरान उनसे अपेक्षा की गई थी कि वे कलेक्टर कार्यालय, कलेक्टर, रेजिडेंट कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे और काम कैसे किया जाता है, इसके बारे में जानकारी और अनुभव प्राप्त करेंगे। इसके बाद उनका तबादला अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में कर दिया जाएगा। चूंकि पुणे की रेजिडेंट सब-कलेक्टर ज्योति कदम एक महिला हैं, इसलिए खेडकर को 4 जून को मतगणना प्रक्रिया पूरी होने तक कदम के केबिन में बैठने और अनुभव प्राप्त करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया और ज्वाइनिंग के अगले ही दिन अलग कमरा मांगा था।

पूजा खेडकर के लिए पुणे कलेक्टर कार्यालय की कुलकिडा शाखा की चौथी मंजिल पर एक बैठक आयोजित की गई थी। लेकिन उन्होंने बैठक व्यवस्था को खारिज कर दिया। इसके बाद पूजा खेडकर ने अपने पिता दिलीप खेडकर के साथ पुणे कलेक्टर कार्यालय भवन में आवश्यक केबिन की खोज शुरू कर दी।

पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर ने पुणे के अपर कलेक्टर अजय मोरे के केबिन पर दावा किया। आरोप है कि पुणे के अपर कलेक्टर अजय मोरे 18 से 20 जून के बीच सरकारी काम से मुंबई गए थे। उस समय पूजा खेडकर ने अजय मोरे के सामने वाले कक्ष की टेबल, कुर्सियां, सोफा हटवा दिया और उस कक्ष पर कब्जा कर अपने लिए टेबल, कुर्सियां और फर्नीचर की व्यवस्था कर ली। इसकी शिकायत अपर कलेक्टर अजय मोरे ने कलेक्टर सुहास दिवस से की। इसके बाद उन्होंने पूजा खेडकर द्वारा रखे गए फर्नीचर और अन्य सामान को बाहर निकालने का फैसला किया, लेकिन पूजा ने कलेक्टर को संदेश भेजा कि अगर तुम ऐसा करोगे तो मेरी बेइज्जती होगी।

सामने आया है कि इस दौरान पूजा खेडकर अपनी एम्बर लाइट वाली ऑडी कार में आती-जाती थीं। पिछले महीने सरकार ने पूजा खेडकर का पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया था। 2023 बैच की आईएएस के विवाद में घिरे के बाद सरकार ने उनका तबादला पुणे से कर दिया था। पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को मसूरी से ट्रेनिंग के बाद पणे में बतौर अपर कलेक्टर तैनाती मिली थी। वहां पर वह असिस्टेंट कलेक्टर पद की ट्रेनिंग के लिए गई थीं।अब सामने आ रहा है कि उन्होंने अपने विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी किया था, हालांकि इस पूरे विवाद पर अभी तक पूजा खेडेकर ने अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।