Thursday, March 5, 2026
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आखिर किस नियम के तहत समय पर खत्म हो पाएंगे क्रिकेट मैच?

आज हम आपको वह नियम बताने वाले हैं जिसके तहत क्रिकेट मैच समय पर खत्म हो जाएंगे! इस साल 2 जून से शुरू होने जा रहे टी-20 वर्ल्ड कप के साथ क्रिकेट की दुनिया में एक नया अध्याय भी जुड़ जाएगा। इंटनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC एक ऐसा नियम लाने जा रही है, जिससे मैच के दौरान समय की बर्बादी खत्म हो जाएगी। नियम इतने सख्त और स्पष्ट होंगे कि बात न मानने वाली टीम पर ऑन द स्पॉट पेनल्टी भी ठोक दी जाएगी। इस नए रूल को स्टॉप क्लॉक नियम के नाम से जाना जाएगा। ‘स्टॉप क्लॉक’ नियम जून 2024 से दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले वनडे और टी-20 इंटरनेशनल में स्थायी हो जाएगा। ऐसे में चलिए आपको इस नियम की हर छोटी-बड़ी बात आसान शब्दों में समझाते हैं। स्टॉप क्लॉक’ नियम के अंतर्गत टीम को पेनल्टी रन से बचने के लिए पिछले ओवर के 60 सेकंड के अंदर नया ओवर शुरू करना होता है। यह नियम सबसे पहली बार दिसंबर 2023 में शुरू किया गया। ट्रायल अप्रैल 2024 तक किया जाना था, लेकिन इस ट्रायल के नतीजे साफ दिखायी दे रहे हैं जैसे मैच समय पर खत्म हो रहे हैं, जिससे प्रत्येक वनडे मैच में करीबन 20 मिनट बच रहे हैं।

इसके लिए मैदान पर लगी एक ‘इलेक्ट्रोनिक’ घड़ी 60 से लेकर शून्य तक उलटी गिनती करेगी और थर्ड अंपायर घड़ी शुरू करने का समय तय कर सकता है। फील्डिंग करने वाली टीम के ऐसा नहीं करने पर उसे दो चेतावनी दी जाएगी और इसके बाद के उल्लघंन के लिए हर घटना के लिए पांच रन का जुर्माना लगाया जाएगा। आईसीसी ने हालांकि नियम में कुछ अपवाद भी शामिल किए और ऐसी स्थितियों में शुरू हुई घड़ी को रद्द कर दिया जाएगा। आईसीसी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि, ‘अगर नया बल्लेबाज ओवरों के बीच में क्रीज पर आता है, आधिकारिक ‘ड्रिंक्स ब्रेक’ तथा किसी बल्लेबाज या फील्डर के इंजर्ड होने की स्थिति में मैदान पर ट्रि्टमेंट किया जाना शामिल है। अगर क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण समय खराब हुआ हो। इस नियम को तब भी लागू नहीं किया जाएगा।

फील्डिंग करने वाली टीम अक्सर मैच की गति को धीमा करने की कोशिश करती हैं ताकि उन्हें प्लानिंग बनाने के लिए और ज्यादा समय मिल सके और टीम हर बॉल के बाद फील्डिंग में भी बदलाव करती हैं। अभी तक टीम और कप्तान पर ही वित्तीय रूप से जुर्माना जा सकता था, लेकिन यह इसे रोकने में कारगर साबित नहीं हुआ। बता दें कि क्रिकेट में स्कूप शॉट नया नहीं है। सूर्यकुमार यादव से पहले भी क्रिकेट की दुनिया में 360 डिग्री शॉट्स खेलने वाले बैटर आए हैं। बावजूद इसके सूर्य ने जिस तरह जिंबाब्वे के खिलाफ इनिंग्स की आखिरी गेंद पर फास्ट बोलर रिचर्ड एनगरावा की गेंद को खेला, उससे महान सुनील गावस्कर भी हैरान थे। उनके साथी कॉमेंटेटर पॉमी एमबांग्वा तो लगातार कहते रहे कि आखिर यह कैसे संभव है। सूर्य ने लगभग पांचवें स्टंप की पोजिशन पर जाते हुए एक वाइड यॉर्कर को जिस तरह लगभग गिरते हुए फाइन लेग बाउंड्री के बाहर उड़ा दिया, वह चमत्कार ही था।

मैच के बाद रवि शास्त्री ने जब पूछा कि आप कैसे कर लेते हैं यह सब, तो सूर्य का जवाब था कि मैं रबड़ की गेंद से खेलते हुए इस तरह के शॉट्स खेलने का अभ्यास करता था। शास्त्री ने जब और कुरेदा तो सूर्य ने असल बात बताई। उन्होंने कहा, ‘मैं यह जानने की कोशिश करता हूं कि उस समय गेंदबाज क्या सोच रहा है।’ तो क्या सूर्य गेंदबाज का दिमाग पढ़ लेते हैं? भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और इन दिनों जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के साथ जुड़े लालचंद राजपूत ने NBT को बताया, ‘सूर्य एक बेहद शार्प क्रिकेटर हैं। उन्हें फील्डिंग पोजिशंस से यह अंदाजा लग जाता है कि गेंदबाज कहां बॉल डालने वाला है। वैसे तमाम क्रिकेटर ऐसा करने की कोशिश करते हैं, मगर शायद इस मामले में सूर्य एक जादूगर की तरह हैं। यह काम आसान नहीं। वह क्रिकेट की दुनिया के जादूगर बन गए हैं।’

मुंबई के रहने वाले राजपूत ने यह भी बताया कि सूर्य ने जो हासिल किया है उसके पीछे बेहद कड़ी मेहनत भी है। वर्ल्ड कप के लिए रवानगी से पहले उन्होंने मुंबई के पारसी जिमखाना क्लब के कोच के साथ घास वाली और बाउंसी पिच पर हर रोज घंटों अभ्यास किया। इसके लिए उन्होंने ‘साइड आर्म्स एक्सपर्ट्स’ की भी मदद ली। लगातार तेज गेंदों को इस तरह से हिट करने के बाद ही वह इस लेवल तक पहुंच पाए हैं। उन्होंने मुंबई के पूर्व क्रिकेटर और पारसी जिमखाना के कोच विनायक माने की लगातार सेवाएं लीं। प्रैक्टिस के दौरान भी सूर्य ने लगातार मैच जैसी स्थिति तैयार करवाया और चैलेंज लिया।

क्या इंडियन नेवी ने खदेड़ दिए हैं समुद्री लुटेरे?

वर्तमान में इंडियन नेवी ने समुद्री लुटेरे खदेड़ दिए हैं! पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भारत को कुछ इसी तरह परिभाषित किया था। बताया था कि जो हमारी तरफ आंख उठाकर देखेगा, उसे मुंह की खानी पड़ेगी। हमारी तीनों सेनाएं (नभ,जल और थल) भी अब ईंट से ईंट बजाने में माहिर हैं। दुश्मन को उसी की भाषा में समझाना उन्हें आता है। भारत के सेना की ताकत क्या होती है, यह तो अरब सागर में आतंक मचा रहे समुद्री लुटेरे अब भलीभांति समझ गए होंगे। भारतीय नौसेना ने 12 मार्च को बांग्लादेश के 22 नागरिकों को भी 11 समुद्री लुटेरों से बचाया। समुद्री लुटेरों की हिमाकत को हाल के एक दो महीनों में भारतीय नौसेना ने ही चुनौती दी है। खुद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी भारत की इस मदद का मुरीद हो गया है। वहां के लोग भारत की बढ़ती ताकत खूब तारीफ भी कर रहे हैं। समुद्री लुटेरों से बचाने के लिए ईरान, लाइबेरिया, यूरोप का देश माल्टा भी शुक्रगुजार है। अरब सागर के पास सोमालिया के तट पर समुद्री लुटेरों ने बांग्लादेशी झंडे वाले जहाज एमवी अब्दुल्ला पर हमला किया था। एमवी अबदुल्ला जहाज उस वक्त कोयला लेकर मोजाम्बिक से संयुक्त अरब अमीरात जा रहा था। इंडियन नेवी ने बताया कि जैसे ही भारतीय नौसेना को सूचना मिली, उन्होंने तुरंत एक लंबी दूरी की समुद्री गश्ती विमान को भेजा। 12 मार्च की शाम जहाज का पता लगाने के बाद, नेवी ने चालक दल के सदस्यों का पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी। इसके लिए इंडियन नेवी ने बांग्लादेश के जहाज एमवी अब्दुल्ला से संपर्क किया लेकिन जहाज से कोई जवाब नहीं मिला।

गुरुवार यानी 14 मार्च की सुबह, भारतीय नौसेना ने यह सुनिश्चित करने के लिए जहाज के चालक दल की जांच की कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। चालक दल के सभी सदस्य बांग्लादेशी नागरिक थे जिन्हें हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने बंधक बना रखा था। भारतीय नौसेना के बयान के अनुसार, ‘मिशन ने समुद्री सुरक्षा अभियानों के लिए तैनात एक युद्धपोत को भेजा था, जिसे रास्ते से हटा दिया गया था। इस युद्धपोत ने 14 मार्च 24 की सुबह अपहरण किए गए एमवी अबदुल्ला को रोका। जहाज पर सवार बांग्लादेशी चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की गई और भारतीय युद्धपोत सोमालिया के क्षेत्रीय जल में पहुंचने तक एमवी के आसपास ही रहा। कुल 22 बांग्लेदेशी नागरिक थे और उन्हें करीब 11 समुद्री लुटेरों ने बंधक बनाया था।

मुश्किल में फंसे पड़ोसी देश के नागरिकों की मदद करना कोई पहली बात नहीं है। बांग्लादेश से पहले बीते दो महीनों में इंडियन नेवी ने पाकिस्तान और ईरान के भी नागरिकों को भी समुद्री लुटेरों से बचाया है। यह सारी घटनाएं अरब सागर के पास सोमालिया तट के पास ही हुई हैं। पाकिस्तान के लिए तो भारतीय नौसेना दो-दो बार मदद कर उन्हें चंगुल से छुटाया था। जनवरी के अंतिम महीने में सोमालिया के पूर्वी तट के पास समुद्री लुटेरों ने 19 पाकिस्तानी नाविकों को बंधक बना लिया था। उनके ईरानी झंडे वाले विमान एफवी अल नईमी में 11 समुद्री लुटेरे सवार हो गए थे। इसके बाद इंडियन नेवी ने अपने INS सुमित्रा को भेजा जिसके बाद मजबूरन समुद्री लुटेरों को उन 19 पाकिस्तानी नागरिकों को छोड़ना पड़ा था। इसके ठीक 2 दिन बाद सोमालिया के ही तट के पास एक बार फिर समुद्री लुटेरों ने 8 पाकिस्तानी नागरिकों को बंधक बनाया था। इस बार उनके साथ 11 ईरानी भी थे। यहां भी मदद के लिए आगे आते हुए इंडियन नेवी ने 11 ईरानी और 8 पाकिस्तानी नागरिकों को बचाया था। तब इंडियन नेवी ने आईएनएस शारदा को भेजा था।

भारत-ईरान के रिश्ते किसी से छुपे नहीं हैं। दोनों के बीच आपसी संबंध मजबूत हैं। भारत ने ईरान के नागरिकों को भी ऐसे ही समुद्री डाकुओं से बचाया था। रविवार यानी 28 जनवरी यानी रविवार को भारतीय नौसेना को सूचना मिली कि ईरान के फिशिंग वैसेल FV ईमान को समुद्री लुटेरों ने बंधक बना लिया था। इसमें 17 ईरानी क्रू मेंबर्स सवार थे। इसके 15 दिन पहले भी इंडियन नेवी ने आईएनएस सुमित्रा की मदद से ईरान के लोगों की रक्षा थी। तब 11 ईरानी नागरिकों के साथ पाकिस्तानी भी सवार थे।

यूरोप के देश माल्टा का एक जहाज भी पिछले साल 14 दिसंबर की तारीख को हाईजैक कर लिया गया था। इसके बाद भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत को अदन की खाड़ी में जहाज एमवी रुएन की मदद के लिए भेजा था। तब 6 समुद्री लुटेरों ने उस जहाज को बंधक बनाया था। एमवी रुएन तब कोरिया से तुर्किये की तरफ जा रहा था कि तभी समुद्री लुटेरों ने उसे बंधक बना लिया था। उस घटना में नाविक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

क्या चुनावी बॉन्ड के नाम पर हुआ था घोटाला?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चुनावी बॉन्ड के नाम पर घोटाला हुआ था या नहीं! सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करा दी है। निर्वाचन आयोग की तरफ से इस डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। डेटा के अनुसार इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये बीजेपी को सबसे अधिक चंदा मिला है। डेटा के सामने आने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल तो इससे सबसे बड़ा घोटाला बता रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में एसआईटी जांच की भी मांग कर दी है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से इसे कथित रूप से दुनिया का सबसे बड़ा एक्सटॉर्शन रैकेट बताया जा रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी की तरफ से इस चुनावी चंदे में पारदर्शिता की बड़ी पहल करार दिया जा रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लग चुकी है।कपिल सिब्बल ने साफ कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये कंपनियों ने राजनीतिक दलों को अपने हित में साध लिया है। उन्होंने कहा कि डेटा से साफ पता चलता है कि घाटे में चल रही कंपनियों ने भी राजनीतिक दलों को इलेक्टरोल बॉन्ड के जरिए चंदा दिया। हालांकि, सिब्बल ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि इस मामले की कोई जांच नहीं होगी। सिब्बल ने इस मामले में सिर्फ कोर्ट से ही उम्मीद जताई। सिब्बल ने 2जी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि एक एसआईटी का गठन कर इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये किस पार्टी को किसने कितना चंदा दिया। साथ ही इस चंदे की एवज में उसे कितना फायदा पहुंचा।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से लाई गई चुनावी बॉन्ड योजना को ‘दुनिया का सबसे बड़ा ‘एक्सटॉर्शन रैकेट’ (जबरन वसूली गिरोह)’ बताया। राहुल ने इस स्कीम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘दिमाग की उपज’ करार दिया। राहुल इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि यह कॉर्पोरेट भारत से एक आपराधिक जबरन वसूली है। उन्होंने कहा कि हर एक कॉर्पोरेट यह जानता है। राहुल ने आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के महीनों बाद, कंपनियों ने बीजेपी को चुनावी बॉन्ड के जरिये दान दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई, ईडी मामले दर्ज करती है और फिर कॉरपोरेट बीजेपी को पैसा देते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य कॉरपोरेट्स को गुमनाम रूप से धन दान करने की अनुमति देना था। राहुल ने कहा कि विपक्षी सरकारों को गिराने, शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों को तोड़ने के लिए धन इलेक्शन बॉन्ड के जरिये प्राप्त किया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी बांड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि यह योजना भारतीय राजनीति में काले धन के वर्चस्व को खत्म करने की एक पहल थी। शाह ने कहा कि इस योजना को खत्म करने की बजाय इसमें सुधार किया जाना चाहिए था। शाह ने कहा कि मैं इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करना चाहता हूं। कुल 20,000 करोड़ रुपये के चुनावी बांन्ड में से बीजेपी को लगभग 6,000 करोड़ रुपये मिले हैं। शाह ने सवाल उठाया कि बाकी बॉन्ड कहां गए? उन्होंने कहा कि 303 सांसद होने के बावजूद हमें 6,000 करोड़ रुपये मिले हैं और बाकियों को 242 सांसदों के बावजूद 14,000 करोड़ रुपये मिले हैं। शाह ने कहा कि किस बात को लेकर हंगामा है? उन्होने कहा कि मैं कह सकता हूं कि एक बार हिसाब-किताब हो जाने के बाद वे आप सभी का सामना नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, गृह मंत्री ने यह भी कहा कि चुनावी बॉन्ड के लागू होने से पहले, विपक्षी दल कैश में राजनीतिक चंदा लेते थे। शाह ने आरोप लगाया कि 1,100 रुपये के दान में से, वे के पार्टी के नाम पर 100 रुपये जमा करते थे और 1,000 रुपये अपनी जेब में रखते थे।

भारतीय स्टेट बैंक ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 1 अप्रैल 2019 से इस साल 15 फरवरी के बीच कुल 22,217 चुनावी बॉन्ड खरीदे गए। वहीं, राजनीतिक दलों ने 22,030 बॉन्ड को कैश कराया। चंदा हासिल करने वाले टॉप पार्टियों में बीजेपी 6,060 करोड़ रुपये पहले नंबर पर रही। वहीं, दूसरे नंबर पर टीएमसी 1,609 करोड़ रुपये और तीसरे नंबर पर कांग्रेस 1,421 करोड़ रुपये रहीं। कांग्रेस के अलावा बीआरएस को 1214 करोड़ रुपये, बीजेडी को 775 करोड़ रुपये, डीएमके को 639 करोड़ रुपये मिले। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा डोनेशन देने वाली कंपनियों में पहले नंबर पर फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज का नाम शामिल है। कंपनी ने 1368 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं। दूसरे नंबर पर मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड है। कंपनी ने 966 करोड़ रुपये इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये डोनेशन दिया है। इसके बाद क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड 410 करोड़ रुपये का नाम है। वहीं, हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ने 377 करोड़ रुपये, वेदांता लिमिटेड 376 करोड़, एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 225 करोड़ रुपये चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये दिए।

आखिर डिसएबल्ड कैडेट्स के लिए क्या फैसला लेगा रक्षा मंत्रालय?

आज हम आपको बताएंगे कि डिसएबल्ड कैडेट्स के लिए रक्षा मंत्रालय क्या फैसला लेने वाला है! मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान चोट लग जाने की वजह से मेडिकल आधार पर जो कैडेट्स बाहर हो जाते हैं उन्हें भी रीसेटेलमेंट पुर्नस्थापन सुविधा दी जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि इसमें न तो डिसएबिलिटी पेंशन शामिल है ना ही ईसीएचएस की सुविधा। इसमें वह कुछ भी नहीं है जो सर्विस हेडक्वॉर्टर आर्मी, नेवी, एयरफोर्स ने अपने प्रस्ताव में भेजा था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ऐसे कैडेट्स के लिए अवसरों को बढ़ाने के लिए, पुनर्वास महानिदेशालय द्वारा संचालित योजनाओं के लाभ के विस्तार की अनुमति दी गई है। इससे मेडिकल आधार पर निष्कासित हुए 500 कैडेट्स को योजनाओं का लाभ उठाने और उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसी तरह की स्थिति में भविष्य के कैडेटों को भी समान लाभ मिलेंगे। रीसेटेलमेंट सुविधा में क्या शामिल है, इस पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि उन कैडेट्स को ऑयल प्रॉडक्ट एजेंसी में अलॉटमेंट के लिए 8 पर्सेंट कोटा के लिए इलेजिबल होने का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

मदर डेरी मिल्क बूथ, फ्रूट और वेजिटेबल सफल शॉप का अलॉटमेंट हो सकेगा। एनसीआर में सीएनजी स्टेशन के मैनेजमेंट के लिए, एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशनशिप के अलॉटमेंट के लिए, रेटल आउटलेट पेट्रोल और डीजल के अलॉटमेंट के लिए इलेजिबिलिटी सर्टिकेट दिया जाएगा। सरकार ने 4 अगस्त 2021 को संसद को बताया था कि डिसएबिलिटी पेंशन देने का प्रस्ताव मंत्रालय में विचाराधीन है। हालांकि ऐसा कुछ भी रीसेटेलमेंट सुविधा में शामिल नहीं किया गया है, जिसका ऐलान रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को किया।सिक्योरिटी एजेंसी स्कीम और टेक्निकल सर्विस स्कीम में शामिल किया जाएगा। ये सब अभी डिसएबल्ड पूर्व सैनिकों और सैनिकों की विडोज विधवाओं पर लागू होती हैं। भारतीय सशस्त्र सेनाओं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स ने दिव्यांग डिसएबल कैडेट्स को आर्थिक मदद और इलाज में मदद देने का जो प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा था उसमें डिसएबिलिटी पेंशन देने को कहा गया था। 2015 में रक्षा मंत्री ने इस मामले पर एक्सपर्ट कमिटी बनाई थी तब भी कमिटी ने दिव्यांग कैडेट्स को डिसएबिलिटी पेंशन और आर्थिक मदद की सिफारिश की थी। लेकिन तब इसे स्वीकार नहीं किया गया। सर्विस हेडक्वॉर्टर्स ने फिर प्रस्ताव भेजा। जिसमें कहा गया कि अगर कैडेट डिसएबल हो जाता है या मौत हो जाती है तो आर्थिक मदद एक्स ग्रेशिया का प्रावधान किया जाए। इसके लिए उन्हें लेफ्टिनेंट की सैलरी के हिसाब से पेंशन दी जा सकती है।

अभी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट की सैलरी 56510 रुपए है। पेंशन इसकी आधी होती है। कैंडेड्स सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर ही कमिशन होते हैं। प्रस्ताव में ये भी कहा गया था कि दिव्यांग कैडेट्स को पूर्व सैनिकों की तरह हेल्थ स्कीम ईसीएचएस में शामिल किया जाए। सरकार ने 4 अगस्त 2021 को संसद को बताया था कि डिसएबिलिटी पेंशन देने का प्रस्ताव मंत्रालय में विचाराधीन है। हालांकि ऐसा कुछ भी रीसेटेलमेंट सुविधा में शामिल नहीं किया गया है, जिसका ऐलान रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को किया।

भारतीय आर्म्ड फोर्सेस सेना, नेवी, एयरफोर्स का हिस्सा बनने से पहले युवा जब तक एनडीए, आईएमए, ओटीए या नेवी और एयरफोर्स की अकेडमी में ट्रेनिंग कर रहे होते हैं तब तक उन्हें कैडेट्स कहा जाता है। वह जब ट्रेनिंग पूरी कर फौज में अधिकारी के तौर पर कमिशन होते हैं तब से उन्हें फौज का हिस्सा माना जाता है। लेकिन अगर ट्रेनिंग के दौरान कोई कैडेट डिसएबल हुआ या उसकी मौत हो गई तो सरकार या फौज की तरफ से उन्हें या परिवार वालों को कोई राहत नहीं दी जाती। दिव्यांग कैडेट्स को मदद देने का मसला संवेदनाओं से भी जुड़ा है। जब कोई युवा सेना का हिस्सा बनने आता है तो वह खुद को पूरी तरह देश को समर्पित करता है और अगर उसे कुछ हो गया तो उससे मुंह मोड़ लेना बिल्कुल सही नहीं है। इसी तरह की स्थिति में भविष्य के कैडेटों को भी समान लाभ मिलेंगे। रीसेटेलमेंट सुविधा में क्या शामिल है, इस पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि उन कैडेट्स को ऑयल प्रॉडक्ट एजेंसी में अलॉटमेंट के लिए 8 पर्सेंट कोटा के लिए इलेजिबल होने का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।ट्रेनिंग के दौरान डिसएबल होने के बाद कइयों को जिंदगी भर इलाज का भारी खर्चा उठाना पड़ता है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 1985 के बाद अब तक करीब 500 डिसएबल कैडेट्स हैं। हर साल अलग अलग सैन्य अकेडमी में करीब 10-20 कैडेट्स मेडिकली अनफिट होने की वजह से बाहर हो जाते हैं।

किस राज्य में कब होंगे लोकसभा चुनाव? जानिए!

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किस राज्य में कब होंगे लोकसभा चुनाव! देश के सबसे बड़े ‘चुनावी महाकुंभ’ की तारीखों का ऐलान आज मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव का पहला चरण 19 अप्रैल, दूसरा चरण 26 अप्रैल, तीसरा चरण 7 मई, चौथा चरण 13 मई, पांचवां चरण 20 मई, छठा चरण 25 मई और सातवां चरण 1 जून को होगा। 19 अप्रैल से 1 जून तक 7 चरणों में होंगे लोकसभा चुनाव। वोटों की गिनती 4 जून को होगी। फेज -1 का नोटिफिकेशन 20 मार्च को जारी होगा। नॉमिनेशन दाखिल करने की आखिरी तारीख 27 मार्च होगी। 28 मार्च को नामांकन पत्र की जांच। 30 मार्च को नामांकन वापस लिया जा सकेगा। 19 अप्रैल को वोटिंग होगी। पहले फेज में 102 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी।

दूसरे फेज के चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 28 मार्च को जारी किया जाएगा। 4 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किया जा सके। 5 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 8 अप्रैल तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। 26 अप्रैल को यहां वोटिंग होगी। दूसरे फेज मे 89 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। तीसरे फेज का नोटिफिकेशन 12 अप्रैल को जारी होगा। 19 अप्रैल तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकते हैं। 20 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 22 अप्रैल तक नांमाकन वापस लिए जा सकते हैं। तीसरे फेज में 7 मई को वोटिंग होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। तीसरे चरण में 94 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी।

चौथे फेज का नोटिफिकेशन 18 अप्रौल को जारी होगा। 25 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। 26 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 29 अप्रैल तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। चौथे फेज में 13 मई को वोटिंग होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। चौथे फेज में 96 सीटों पर वोटिंग होगी। पांचवें फेज का नोटिफिकेशन 26 अप्रैल को जारी होगा। 3 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। 4 मई को नामांकन पत्र की जांच होगी. 6 मई तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। 20 मई को वोटिंग होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। पांचवें चरण में 49 सीटों पर वोटिंग होगी।

छठे फेज के लिए 29 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी होगा। 6 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। नामांकन पत्रों की जांच 7 मई को होगा। 9 मई तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। छठे फेज की वोटिंग 25 मई को होगी। छठे चरण में 57 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। सातवें और अंतिम चरण के लिए नोटिफिकेशन 7 मई को जारी किया जाएगा। 14 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। 15 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 17 मई को नामांकन वापस लिया जा सकता है। अंतिम चरण की वोटिंग 1 जून को होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। अंतिम चरण में 57 सीटों पर वोटिंग होगी।

बता दे कि चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बार 543 सीटों के लिए लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होंगे। वोटों की गिनती 4 जून को होगी। 19 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोट डाले जाएंगे। 26 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा। तीसरे चरण के लिए 7 मई को वोट डाले जाएंगे। 13 मई को चौथे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे। पांचवे चरण का मतदान 20 मई को होगा। 25 मई को छठे चरण और 1 जून को सातवें और अंतिम चरण का चुनाव होगा। लोकसभा चुनाव के साथ ही चार राज्यों में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि इससे पहले निर्वाचन आयोग ने कहा कि हम चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस बार युवा वोटर अच्छी संख्या में हैं। 18 से 19 साल की 85 लाख महिला वोटर हैं। 19-29 साल के 19.74 करोड़ वोटर हैं। 1.8 करोड़ वोटर पहली बार वोट डालेंगे। इसस बार 85 साल के वोटर घर से ही वोट दे सकेंगे।

इस बार करीब 96.88 करोड़ वोटर 12 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसमें 49 करोड़ 72 लाख पुरुष मतदाता हैं। वहीं, 47.1 करोड़ महिला वोटर हैं। बता दें कि चौथे फेज में 96 सीटों पर वोटिंग होगी। पांचवें फेज का नोटिफिकेशन 26 अप्रैल को जारी होगा। 3 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। 4 मई को नामांकन पत्र की जांच होगी. 6 मई तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। भारत में अमेरिका की तुलना में लगभग चार गुना अधिक वोटर हैं। देश में कुल वोटरों की संख्या यूरोप के देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। इस बार वोटर लिस्ट में 2.3 करोड़ नए मतदाता जुड़े हैं। इस बार लोकसभा चुनाव कराने में 55 लाख ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा।

झारखंड बीजेपी नेता जय प्रकाश भाई पटेल बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गये.

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लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में बीजेपी के घर में सेंध! पदमा के विधायक कांग्रेस में शामिल इस बार लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने झारखंड में बीजेपी का घर तोड़ दिया. मांडू क्षेत्र के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का झंडा थाम लिया. लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में कांग्रेस ने बीजेपी के घर में तोड़फोड़ की. मांडू क्षेत्र के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का झंडा थाम लिया. पार्टी में जयप्रकाश का स्वागत करने के लिए झारखंड पार्टी के निवर्तमान नेता गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, चंपई सोरेन कैबिनेट के सदस्य आलमगीर आलम और अनुभवी नेता पवन खेड़ा मौजूद थे।

जयप्रकाश के पिता, दिवंगत टेकलाल महतो, झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक सदस्य थे। वह 2004 से 2009 तक गिरिडी सांसद रहे। बाद में वे मांडू के विधायक भी बने. 2014 में, जयप्रकाश अपने पिता द्वारा खाली की गई सीट पर झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुने गए। बाद में वह बीजेपी में चले गये. मांडू 2019 में केंद्र से दोबारा निर्वाचित हुए। बुधवार को पार्टी बदलने का कारण बताते हुए जयप्रकाश ने कहा कि उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में अपने पिता के आदर्शों की कोई झलक नहीं दिखती. इसलिए उन्होंने पद्म शिविर छोड़कर झारखंड में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ को मजबूत करने का फैसला किया.

नई पार्टी में शामिल होने के बाद जयप्रकाश ने कहा, ”मैं किसी पद के लिए कांग्रेस में शामिल नहीं हुआ। मैं अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए नई टीम में आया हूं।” कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, वह हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. कांग्रेस के साथ आने से विपक्षी दल ‘इंडिया’ झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटें जीतेगी. झारखंड के 14 केंद्रों पर 13 मई से 1 जून तक चार चरणों में मतदान होगा। संयोगवश, झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन की बहू और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हो गईं। मंगलवार को। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी, सीता शिबू के सबसे बड़े बेटे, दुमका जिले के जामा निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे।

लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में कांग्रेस ने बीजेपी के घर में तोड़फोड़ की. मांडू क्षेत्र के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का झंडा थाम लिया. पार्टी में जयप्रकाश का स्वागत करने के लिए झारखंड पार्टी के निवर्तमान नेता गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, चंपई सोरेन कैबिनेट के सदस्य आलमगीर आलम और अनुभवी नेता पवन खेड़ा मौजूद थे। 2014 में, जयप्रकाश अपने पिता द्वारा खाली की गई सीट पर झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुने गए। बाद में वह बीजेपी में चले गये. मांडू 2019 में केंद्र से दोबारा निर्वाचित हुए। बुधवार को पार्टी बदलने का कारण बताते हुए जयप्रकाश ने कहा कि उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में अपने पिता के आदर्शों की कोई झलक नहीं दिखती. इसलिए उन्होंने पद्म शिविर छोड़कर झारखंड में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ को मजबूत करने का फैसला किया.

जयप्रकाश के पिता, दिवंगत टेकलाल महतो, झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक सदस्य थे। वह 2004 से 2009 तक गिरिडी सांसद रहे। बाद में वे मांडू के विधायक भी बने. 2014 में, जयप्रकाश अपने पिता द्वारा खाली की गई सीट पर झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुने गए। बाद में वह बीजेपी में चले गये. मांडू 2019 में केंद्र से दोबारा निर्वाचित हुए। बुधवार को पार्टी बदलने का कारण बताते हुए जयप्रकाश ने कहा कि उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में अपने पिता के आदर्शों की कोई झलक नहीं दिखती. इसलिए उन्होंने पद्म शिविर छोड़कर झारखंड में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ को मजबूत करने का फैसला किया.

नई पार्टी में शामिल होने के बाद जयप्रकाश ने कहा, ”मैं किसी पद के लिए कांग्रेस में शामिल नहीं हुआ। मैं अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए नई टीम में आया हूं।” कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, वह हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. कांग्रेस के साथ आने से विपक्षी दल ‘इंडिया’ झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटें जीतेगी. झारखंड के 14 केंद्रों पर 13 मई से 1 जून तक चार चरणों में मतदान होगा। संयोगवश, झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन की बहू और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हो गईं। मंगलवार को। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी, सीता शिबू के सबसे बड़े बेटे, दुमका जिले के जामा निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे।

लखनऊ सुपर जाइंट के कप्तान केएल राहुल ने उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए.

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आईपीएल से पहले, लखनऊ के नेता राहुल मंदिर में. टीम में शामिल हुए लोकेश राहुल महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करने गए. नेशनल क्रिकेट अकादमी ने उन्हें स्वस्थ घोषित कर दिया है. हालाँकि, आईपीएल खेलने के लिए कुछ शर्तें हैं। आईपीएल शुक्रवार से शुरू होगा. लखनऊ सुपर जाइंट्स के कप्तान बुधवार को टीम से जुड़े। इससे पहले लोकेश राहुल महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करने पहुंचे. नेशनल क्रिकेट अकादमी ने उन्हें स्वस्थ घोषित कर दिया है. हालाँकि, आईपीएल खेलने के लिए कुछ शर्तें हैं।

लखनऊ की टीम ने अभ्यास शुरू कर दिया है. कोच जस्टिन लैंगर की ट्रेनिंग चल रही है. लखनऊ का पहला मैच जयपुर में. वे राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलेंगे. लखनऊ टीम में शामिल होने से पहले राहुल ने मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में पूजा की. वह वहीं से टीम में शामिल हुए. आखिरी बार उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए देखा गया था. भारत के लिए टेस्ट खेला. वहां उनकी मांसपेशियों में चोट लग गई.

राहुल ने आईपीएल में 118 मैचों में 4163 रन बनाए। उन्होंने चार बार आईपीएल में 600 से ज्यादा रन बनाए हैं. उनके नाम चार शतक भी हैं. राहुल ने पहली बार 2013 में आईपीएल खेला था. उनके नाम अब तक 33 अर्धशतक हैं. शतक लगाने वालों की सूची में भारतीयों में राहुल विराट कोहली के बाद हैं। राहुल को आईपीएल में खेलने की मंजूरी मिल गई है, लेकिन बीसीसीआई ने उन्हें फिलहाल विकेटकीपर के रूप में खेलने से प्रतिबंधित कर दिया है। बोर्ड के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी को बताया, ‘एनसीए ने राहुल को छूट दे दी है। 20 को टीम से जुड़ेंगे लखनऊ। इसके बाद वह पहला मैच खेलने के लिए जयपुर के लिए उड़ान भरेंगे। ऐसा लगता है जैसे शुरू में उसे आगे की ओर झुकने से मना किया गया था। कुछ मैचों के बाद वह कीपिंग करने में सक्षम होंगे।’ वह पहले कुछ मैचों में केवल बल्लेबाज के रूप में खेलेंगे।”

आईपीएल शुरू होने से पहले लखनऊ सुपर जाइंट्स को बड़ी खुशखबरी मिली है. उनके कप्तान केएल राहुल फिट थे. राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) ने राहुल को फिट घोषित कर दिया। लेकिन यह भी कहा गया कि राहुल पहले कुछ मैचों में विकेटकीपिंग नहीं कर पाएंगे.

राहुल को इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में क्वाड्रिसेप्स चोट लगी थी। उन्होंने बाकी टेस्ट नहीं खेले. तीसरे मैच में भाग लेना था लेकिन बाहर हो गये। राहुल ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एनसीए में अपने समय के दौरान बल्लेबाजी, कीपिंग और फील्डिंग के वीडियो पोस्ट किए थे।

बोर्ड के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी को बताया, ‘एनसीए ने राहुल को छूट दे दी है। 20 को टीम से जुड़ेंगे लखनऊ। इसके बाद वह पहला मैच खेलने के लिए जयपुर के लिए उड़ान भरेंगे। ऐसा लगता है जैसे शुरू में उसे आगे की ओर झुकने से मना किया गया था। कुछ मैचों के बाद वह कीपिंग करने में सक्षम होंगे।’ वह शुरुआती कुछ मैचों में सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खेलेंगे.” लेकिन अगर राहुल नहीं टिक सके तो लखनऊ को चिंता नहीं है. क्विंटन डी कॉक या वेस्टइंडीज के निकोलस पूरन को रखा जा सकता है. हालांकि, अगर राहुल को टी20 वर्ल्ड कप टीम में मौका पाना है तो उन्हें आईपीएल में अच्छा खेलना होगा.

बोर्ड सूत्र ने कहा, ”पिछले प्रदर्शन के कारण विश्व कप के पहले तीन बल्लेबाजों में राहुल के नाम पर विचार नहीं किया जा रहा है. आईपीएल में अच्छा खेलने पर पांचवें या छठे नंबर पर विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर खेल सकते हैं. अगर सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खेल रहे हैं तो रिंकू सिंह, ऋषभ पंत जैसे विकल्प मौजूद हैं.” आईपीएल से पहले लखनऊ सुपर जाइंट्स कैंप में एक और विदेशी क्रिकेटर शामिल हुआ. पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एडम वोजेस को आईपीएल की लखनऊ फ्रेंचाइजी ने सलाहकार नियुक्त किया है। उन्हें टीम के मुख्य कोच जस्टिन लैंगर की सलाह पर लाया गया था।

वोजेस ने 35 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया. पूर्व क्रिकेटर के पास ऑस्ट्रेलिया के लिए 20 टेस्ट, 31 वनडे और 7 टी20 मैच खेलने का अनुभव है। उनके पास आईपीएल खेलने का भी अनुभव है. उन्होंने 2010 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेला। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मुख्य रूप से बल्लेबाजी सलाहकार के रूप में लखनऊ शिविर में शामिल हुए हैं। कुछ दिन पहले दक्षिण अफ्रीका के पूर्व ऑलराउंडर लांस क्लूजनर सहायक कोच के रूप में लखनऊ फ्रेंचाइजी से जुड़े थे। लखनऊ सुपर जायंट्स के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर वोजेस के सलाहकार के रूप में शामिल होने की घोषणा की।

टीम के मुख्य कोच लैंगर ने कहा, “हमने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के लिए लंबे समय तक एक साथ खेला है।” वोग्स के पास बिग बैश लीग में कोच के रूप में काम करने का अनुभव है। एक कोच के रूप में उन्हें काफी सफलता मिली है। जब मैं वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया को कोचिंग दे रहा था तब वोग्स कप्तान थे। मेरे बाद उन्हें नेतृत्व सौंपा गया. उन्होंने पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके समय में बहुत कुछ बदल गया है. वोज़ मिलने से लखनऊ फ्रेंचाइजी को फायदा होगा। वोजेस एक अद्भुत व्यक्ति और महान कोच हैं। मैं उनके साथ दोबारा काम करने का मौका पाकर उत्साहित हूं।”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी है कि बिना आरोपपत्र दाखिल किए लोगों को जेल में नहीं रखा जा सकता.

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‘बिना सुनवाई के आरोपी को दिन-ब-दिन जेल में नहीं रखा जा सकता’, ईडीके ने बुधवार को झारखंड निवासी प्रेम प्रकाश की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट को फटकार लगाई। उनका दावा है कि उन्हें 18 महीने तक बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद रखा गया है. 18 महीने से जेल में बंद आरोपी का ट्रायल अब तक शुरू नहीं हो सका है. उस आरोपी की जमानत मामले में ईडी को सुप्रीम कोर्ट के सवालों का सामना करना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट का सवाल, क्या किसी आरोपी को बिना ट्रायल के लंबे समय तक जेल में रखा जा सकता है? न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसी की भूमिका पर नाराजगी व्यक्त की.

बुधवार को झारखंड के रहने वाले प्रेम प्रकाश नाम के शख्स की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई. उनका दावा है कि उन्हें 18 महीने तक बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद रखा गया है. कानून के मुताबिक, जांच एजेंसी को किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के 60 से 90 दिनों के भीतर अंतिम आरोप पत्र दाखिल करना होता है। यदि आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो गिरफ्तार व्यक्ति सीधे जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। उस नियम के मुताबिक प्रेम ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी. गौरतलब है कि ईडी ने अवैध खनन मामले में प्रेम को गिरफ्तार किया था. वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी माने जाते थे।

झारखंड हाई कोर्ट से प्रेम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने दावा किया कि ईडी ने इस मामले में केवल पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है. अभी तक अंतिम आरोप पत्र नहीं दे सके। इसलिए ट्रायल शुरू नहीं हुआ है. तो फिर उनके मुवक्किल को इस तरह से जेल में क्यों रखा जाना चाहिए, यह सवाल बुधवार की सुनवाई में प्रेम के वकील ने उठाया। जस्टिस खन्ना की पीठ जांच एजेंसी से जानना चाहती है कि किस आधार पर प्रेम को हिरासत में लिया जा रहा है। ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बुधवार को कोर्ट में दावा किया कि प्रेम का दबदबा है. जेल से बाहर आने पर वह जांच को प्रभावित कर सकता है. जस्टिस खन्ना ने उनसे कहा, ”अगर वह (प्रेम प्रकाश) ऐसा कुछ करता है तो आपको आकर हमें बताना चाहिए.”

उन्होंने यह भी कहा, ”एक व्यक्ति को 18 महीने तक जेल में रखा गया है. यह हमें परेशान कर रहा है.’ यदि आप किसी को गिरफ्तार करते हैं, तो मुकदमे की प्रक्रिया तुरंत शुरू होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में यह संभव नहीं था.” जज ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन हो रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में भी ऐसी ही टिप्पणी की थी. जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने ईडी की भूमिका पर भी नाराजगी जताई. पीठ ने कहा, ”कोई जांच एजेंसी जांच पूरी किए बिना गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका का विरोध नहीं कर सकती।” फिलहाल, ईडी तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को दिल्ली नहीं बुला सकती। कोयला तस्करी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतरिम आदेश बरकरार रखा. शीर्ष अदालत ने बुधवार को अभिषेक के बचाव को बरकरार रखते हुए कहा, ईडी इस अवधि के दौरान डायमंड हार्बर से तृणमूल सांसद के खिलाफ कोई ‘सख्त कार्रवाई’ नहीं कर सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी.

इस संदर्भ में अभिषेक के वकील संजय बसु ने कहा, ”वादी एक सांसद हैं. वह आगामी लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। अभिषेक और उनकी पत्नी रुजिरा नरूला बंद्योपाध्याय जांच एजेंसी को सहयोग कर रहे हैं। कोर्ट में ईडी की ओर से पेश हुए केंद्र के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने मामले को स्वीकार किया. साथ ही उन्होंने कहा, मार्च 2022 के बाद ईडी ने इस मामले में अभिषेक को समन नहीं किया. उसी साल सितंबर के बाद कोयला तस्करी मामले में भी रुजिरा को समन नहीं किया गया था. इसलिए जांच एजेंसी को उन दोनों लोगों को समन करने की कोई जल्दी नहीं है.

कोयला तस्करी मामले में ईडी अभिषेक और उनकी पत्नी रुजिरा से कई दौर में पूछताछ कर चुकी है. इससे पहले दोनों को इस संबंध में पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया गया था। लेकिन अभिषेक और उनकी पत्नी ने ईडी की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. उन्होंने अर्जी में कहा कि उनसे कोलकाता में पूछताछ की जाये. 17 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में भी अभिषेक के पक्ष में फैसला सुनाया. शीर्ष अदालत ने तृणमूल सांसद और उनकी पत्नी से दिल्ली की बजाय कोलकाता में पूछताछ करने का आदेश दिया. लेकिन साथ ही यह भी कहा कि राज्य पुलिस और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभिषेक-रुजिरा से पूछताछ के दौरान कोलकाता में ईडी अधिकारियों को किसी भी उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

आखिर लखनऊ के ला मार्टीनियर कॉलेज में क्यों हो रही है बगावत?

वर्तमान में लखनऊ के ला मार्टीनियर कॉलेज में बगावत हो रही है! यूपी की राजधानी लखनऊ को नवाबों के शहर के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां का इतिहास इसको सबसे अलग बनाता है। रहन-सहन, खाना-पानी, तौर- तरीके, भाषा, इमारतें-पार्क, पहनावे में राजसी जीवन की झलक दिखाई देती है। शायद यही वजह भी है कि इसे अदब और नवाबों का शहर कहा जाता है। वहीं यहां बनी इमारतें भी सुंदरता बढ़ाने का काम करती है। इन सब के अलावा यहां का एक स्कूल सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता है, जो इन दिनों चर्चा में है। हालांकि इस समय चर्चा की वजह सुंदरता नहीं बल्कि, अध्यापकों की आपस में बगावत होना है। वहीं दूसरी तरफ विवाद बढ़ने के बाद प्रिसिंपल सी मैकफारलैंड ने 11 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है। बता दें कि प्रधानाचार्य सी मैकफारलैंड ने ये कार्रवाई कक्ष में तालाबंदी, पोस्टर जलाने और अनुशासनहीना के आरोप में की है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं लखनऊ के ला मार्टीनियर कॉलेज की जहां 11 शिक्षकों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। इनमें नौ सीनियर असिस्टेंट और दो मिडिल स्कूल के टीचर शामिल हैं। इन्हें अब परिसर के भीतर भी आने नहीं दिया जाएगा। बर्खास्त किए गए शिक्षकों में डॉ. अगम मिश्रा असिस्टेंट टीचर अकाउंटेंसी सीनियर स्कूल, डॉ. अमित अवस्थी असिस्टेंट टीचर हिंदी, सीनियर स्कूल, देश बंधु असिस्टेंट टीचर हिंदी सीनियर स्कूल, जेएनवी राव असिस्टेंट टीचर कंप्यूटर साइंस, सीनियर स्कूल, कृष्ण नंद असिस्टेंट टीचर, फिजिकल एजुकेशन, आलोक मिश्रा असिस्टेंट टीचर, कॉमर्स सीनियर स्कूल, अंशुमान अग्निहोत्री असिस्टेंट टीचर मिडिल स्कूल, दीपेश एल्बर्ट ट्रिम असिस्टेंट टीचर गणित, सीनियर स्कूल, सीनियर स्कूल, मो. असलम असिस्टेंट टीचर, कंप्यूटर एप्स, सीनियर स्कूल, नागेश डी. शर्मा असिस्टेंट टीचर, मैथमेटिक्स, सीनियर स्कूल और राजू रंजन असिस्टेंट टीचर आर्ट मिडिल स्कूल का नाम शामिल है। जानकारी के मुताबिक, आरोप पत्र दायर करने वालों में मिडिल स्कूल की प्रमुख जी. लोबो भी शामिल थीं, जिन्होंने इस्तीफा दे दिया।

आपके द्वारा दिए गए बयानों से, आपने प्रत्येक उत्तर में अपने रुख में बदलाव दिखाया है, लगभग 2 महीने की अवधि के भीतर बदली हुई परिस्थितियों की आवश्यकता के आधार पर झूठ और झूठ बोला है। जांच अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि प्रिंसिपल सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मार्गदर्शन और सलाह के लिए मुझे प्रिंसिपल के फैसले पर पूरा भरोसा है। मुझे सबूतों की जांच करने के लिए समय चाहिए। एलसीजी को कार्यवाही की निगरानी करनी है और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी है। सभी प्रशासनिक प्रस्ताव प्रिंसिपल-नामित के माध्यम से भेजे जाने चाहिए। प्रिंसिपल का अनुशासनात्मक अधिकार छात्रों के बीच अनुशासन बनाए रखने तक ही सीमित है। बाद के चरण में गवाहों से जिरह करने के लिए समय का अनुरोध।पीठासीन अधिकारी को स्थानीय गवर्नर्स समिति द्वारा नियुक्त किया जाना चाहिए। कम से कम 50 गवाहों से जिरह करने की मांग, जिसके लिए 14 दिन की अग्रिम सूचना दी जानी चाहिए। प्राकृतिक न्याय के हित में जांच को प्रिंसिपल के अलावा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी को हस्तांतरित किया जाना।

आपके किसी भी पिछले संचार में आपके कार्यों के लिए किसी भी प्रकार के पश्चाताप या खेद का कोई संकेत नहीं था। 5 मार्च, 2024 को दस अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित माफी को इस मामले पर अंतिम आदेश को टालने का एक और प्रयास माना जाता है। आपने 14 दिसंबर, 2024 की घटनाओं के इर्द-गिर्द अपने कार्यों को उचित ठहराना जारी रखा है, आपको स्पष्टीकरण के लिए हर अवसर प्रदान किया गया है, आपको अपने अपराधों को स्वीकार करने के लिए कई अवसर प्रदान किए गए हैं।

आपने विभिन्न बहानों का उपयोग करके अनुशासनात्मक प्राधिकारी का सामना करने से बचने का विकल्प चुना है। आपके कार्य और जिस तरह से वे किए गए, उससे यह संकेत मिलता है कि आपकी मानसिकता ऐसी है कि आप अपने अधीन सौंपे गए प्रभावशाली विद्यार्थियों को पढ़ाने, मार्गदर्शन देने, निर्देशित करने और उनके चरित्र का निर्माण करने के लिए अयोग्य हैं। फ्रांस की इमारतों की तर्ज पर बने इस कॉलेज का नाम देश के प्राचीन शिक्षण संस्थानों में शुमार है। यह स्कूल 700 एकड़ में बना है। वहीं यह दुनिया का एकमात्र स्कूल है, जिसे शाही युद्ध सम्मान से नवाजा गया है। बता दें कि 1845 में स्थापित ला मार्टिनियर कॉलेज की स्थापना मेजर जनरल क्लाउड मार्टिन की वसीयत के अनुसार की गई थी। वहीं एक समय ऐसा भी था कि यहां पढ़ने वाले बच्चों ने ब्रिटिश सैनिकों की तरफ से भारतीय सैनिकों के खिलाफ मोर्चा खोला था। वहीं इस स्कूल में गदर एक प्रेमकथा, अनवर, रक्स, ऑलवेज कभी कभी और शतरंज के खिलाड़ी जैसी फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है।

1735 में फ्रांस के ल्योंन में जन्में क्लाउड मार्टिन फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी में फौजी थे, लेकिन नवाब आसफुद्दौला के कहने पर लखनऊ आ गए थे और इनके यहां नौकरी कर ली। बेशुमार दौलत कमाने के बाद उनकी ख्वाहिश थी कि एक स्कूल खोला जाए। जहां गरीब बच्चों को दाखिला दिया जाए और किसी विशेष जाति या धर्म के बच्चों को दाखिला न दिया जाए। इसलिए उनकी वसीयत के तहत, फ्रांस के ल्योन, कलकत्ता और लखनऊ में स्कूलों की स्थापना के लिए रूपयो आवंटित किए गए। अपनी वसीयत में क्लाउड मार्टिन ने यह भी कहा था कि लकपेरा या कॉन्स्टेंटिया हाउस में मेरा घर, घर से संबंधित सभी जमीन और परिसर और इसके चारों ओर की सभी जमीन, किसी को भी बेचा नहीं जाएगा या इससे अलग नहीं किया जाएगा।

उन्होंने रेजीडेंसी की दक्षिणी परिधि के एक अत्यंत उजागर हिस्से की रक्षा की, पैदल सेना और तोपखाने के हमलों का सामना किया और खनन कार्यों के अधीन थे। बड़ी कठिनाई का सामना करते हुए, उन्होंने करीब 5 महीनों तक द मार्टिनियर पोस्ट की कुशलतापूर्वक और सफलतापूर्वक रक्षा की। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई भी जारी रही।

जानिए कौन है नए चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू?

आज हम आपको नए चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू की कहानी सुनाने जा रहे हैं! उत्तराखंड में मुख्य सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके डॉ सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त बनाये जाने से देवभूमि की अहमियत और भी बढ़ गयी है। पंजाब में जन्मे संधू उत्तराखंड कैडर के अधिकारी हैं और देवभूमि से उनका गहरा नाता है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव पद पर रहते हुए डॉ. संधू ने प्रदेश में चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना और जमरानी बांध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति देने में भी भूमिका निभाई। केंद्र की योजनाओं को धरातल पर उतारने में डॉ. संधू की सबसे बड़ी भूमिका रही। डॉ.एसएस संधू भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के अधिकारी हैं। उनका जन्म 6 जुलाई 1963 को हुआ था। डॉ. संधू ने पंजाब से एमबीबीएस मेडिसिन के साथ ही एमए और एलएलबी की डिग्री भी प्राप्त की है। डॉ. एसएस संधू ने उत्तराखंड में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत होने के बाद वे इसी वर्ष फरवरी में लोकायुक्त के सचिव पद पर भी नियुक्त किए गए थे। उत्तराखंड में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री पद पर रहने के बाद डॉक्टर संधू 2019 में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। जहां उन्होंने अक्टूबर 2019 में एनएचएआई के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना के कार्य की जिम्मेदारी भी बेहतर तरीके से निभाई। परियोजना की प्रगति की जानकारी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय सीधे डॉ. संधू के संपर्क में रहा।एनएचएआई के अध्यक्ष रहते हुए डॉ. संधू ने सड़कों का निर्माण और इससे संबंधित विवादों का निपटारा करने में भी खासी भूमिका निभाई।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डॉक्टर संधू के एनएचएआई में किए गए कार्य को काफी सराहा था। जुलाई 2021 में डॉ. संधू ने धामी सरकार में मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण किया था। वह 31 जनवरी 2024 को रिटायर हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें लोकपाल कार्यालय में सचिव पद की अहम जिम्मेदारी भी सौंप गई थी। डॉ. संधू ने आईएएस अधिकारी के रूप में शुरुआती दौर में 9 सालों तक उत्तराखंड में अपनी सेवाएं दी। इसके बाद वे दो बार इंटर स्टेट डेपुटेशन पर पंजाब भी गए। पहली बार 1997 से लेकर 2002 और उसके बाद वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक पंजाब में डेपुटेशन पर रहे।

एसएस संधू लुधियाना नगर निगम के आयुक्त के रूप में काम करने के लिए राष्ट्रपति पदक से भी सम्मानित हो चुके हैं। एमडीडीए में वीसी, शिक्षा विभाग में एडिशनल सचिव के पद पर भी डॉ. संधू रहे हैं। 1986 में हरिद्वार के जिलाधिकारी भी रहे। 2007 से 2012 के बीच पंजाब में बादल सरकार के सीएम के स्पेशल सेक्रेटरी भी रहे। मुख्य सचिव पद पर रहते हुए डॉ. संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना के कार्य की जिम्मेदारी भी बेहतर तरीके से निभाई। परियोजना की प्रगति की जानकारी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय सीधे डॉ. संधू के संपर्क में रहा।

मुख्य सचिव रहते हुए डॉ. संधू ने उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने शासन की कार्य प्रणाली को सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ने का काम भी किया। पारंपरिक तौर-तरीकों की बजाय हाईटेक साधनों से प्रशासनिक कामकाज का माहौल भी बनाया। डॉ. संधू में सचिवालय से लेकर विभागों निदेशालयों और जिलों तहसीलों में ई-फाइल व्यवस्था के विजन को लागू करने पर डॉ. संधू ने विशेष जोर दिया। केंद्र की योजनाओं को धरातल पर उतारने में डॉ. संधू की सबसे बड़ी भूमिका रही। डॉ.एसएस संधू भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के अधिकारी हैं। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें लोकपाल कार्यालय में सचिव पद की अहम जिम्मेदारी भी सौंप गई थी। डॉ. संधू ने आईएएस अधिकारी के रूप में शुरुआती दौर में 9 सालों तक उत्तराखंड में अपनी सेवाएं दी। इसके बाद वे दो बार इंटर स्टेट डेपुटेशन पर पंजाब भी गए।उनका जन्म 6 जुलाई 1963 को हुआ था। डॉ. संधू ने पंजाब से एमबीबीएस मेडिसिन के साथ ही एमए और एलएलबी की डिग्री भी प्राप्त की है। डॉ. एसएस संधू ने उत्तराखंड में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत होने के बाद वे इसी वर्ष फरवरी में लोकायुक्त के सचिव पद पर भी नियुक्त किए गए थे।वहीं एनएचएआई के अध्यक्ष रहते हुए डॉ. संधू ने दिल्ली से देहरादून तक एक्सप्रेस हाईवे को मंजूरी भी दिलाई और मुख्य सचिव बनने के बाद अपने प्रयासों से इस पर तेजी से काम भी करवाया।