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विकिलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे ने राजनीति के विषय पर क्या कहा?

हाल ही में विकिलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे ने राजनीति के विषय पर एक बयान दिया है! दुनिया भर की काली करतूतों को उजागर करने वाले विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे मंगलवार को लंदन की जेल से रिहा कर दिए गए। इराक और अफगानिस्तान में अमेरिका के युद्ध अपराधों के आरोप लगाने वाले असांजे पर जासूसी के आरोप थे। बताया जा रहा है कि 52 साल के असांजे के आगे झुकते हुए अमेरिका ने उनसे एक डील की है, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई। इस समझौते में उन्होंने अमेरिका की जासूसी की बात मान ली है। आरोपों को मानने के बाद असांजे को 62 महीने यानी 5 साल 2 महीने की जेल की सजा सुनाई जाएगी। हालांकि, असांजे ने ब्रिटेन की जेल में करीब पांच साल यानी 1901 दिन बिताए हैं तो इससे उनकी सजा पूरी मानी जा सकती है। इसके बाद वह अपने मूल देश ऑस्ट्रेलिया लौट सकते हैं। असांजे क्या फिर अमेरिका जैसे देशों की पोल खोलेंगे? असांजे की वेबसाइट विकिलीक्स ने 2011 में यूपी की पूर्व सीएम मायावती को तानाशाह और भ्रष्ट करार दिया था। 23 अक्टूबर, 2008 के एक केबल में कहा गया था कि मायावती को जब भी जरूरत होती, वह अपनी पसंद की सैंडल मंगवाने के लिए अपने एक निजी विमान को खाली मुंबई भेजा करती थीं। खुलासे में यह भी कहा गया था कि मायावती प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं।

मायावती को हमेशा अपनी जान का खतरा सताता रहता है। केबल के मुताबिक, मायावती को यह डर लगता था कि कोई उनके खाने में जहर मिला देगा। इसीलिए उन्होंने फूड टेस्टर्स की नियुक्ति की थी। उनके खाना खाने से पहले कोई कर्मचारी उसे चखता है। मायावती के किचन में खाना बनाने वाले रसोइयों की निगरानी भी की जाती है। मायावती ने अपने आवास से सीएम दफ्तर तक जाने के लिए प्राइवेट रोड बनवाया था। दफ्तर जाने से पहले वह सड़क धुलवाया करती हैं। विकिलीक्स ने यह भी खुलासा किया था कि मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने 1976 में परमाणु डील से जुड़ी अहम जानकारी अमेरिका को दे दी थी। ऐसी रिपोर्टों के बाद भारत में बहुत बवाल मचा था।

असांजे पर 2010-11 में अमेरिका के ऐसे खुफिया सैन्य दस्तावेज लीक करने के आरोप हैं, जिसमें उसे और नाटो को इराक और अफगानिस्तान में युद्ध अपराधों का दोषी बताया गया था। उस वक्त अमेरिका ने असांजे को अपना दुश्मन मानते हुएउन्हें मोस्ट वॉन्टेड अपराधी बताया था। 2019 में असांजे को अमेरिका की फेडरल ग्रैंड ज्यूरी ने 18 मामलों में दोषी ठहराया था। इन मामलों में उन्हें 175 साल की सजा हो सकती थी। अब चूंकि असांजे ने जासूसी की बात मान ली है तो उन्हें करीब 5 साल की ही सजा होगी। 2020 में अमेरिकी सीनेट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस ने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की जीत में मदद की थी। इसके लिए असांजे की विकिलीक्स का इस्तेमाल किया था। हालांकि, ट्रंप ने इस रिपोर्ट को हमेशा झूठा करार दिया है। वहीं रूस ने भी अमेरिकी चुनाव में दखल से इनकार किया था। विकिलीक्स ने डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के अभियान अध्यक्ष के हजारों ईमेल प्रकाशित कर दिए थे।

असांजे 1971 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैड में टाउंसविले में पैदा हुए थे। 90 के दशक में उन्हें कंप्यूटर इतना रास आया कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने हैकरों में से एक माना गया था। उन्होंने 2006 में विकिलीक्स की स्थापना की। उन्होंने अमेरिका के एक पूर्व सैनिक चेल्सिया मैनिंग की मदद से इराक युद्ध में अमेरिका की शर्मनाक करतूतों को उजागर किया था। इनमें से एक 2007 का वीडियो भी था, जिसमें अमेरिकी फौजों के अपाचे हेलीकॉप्टर ने इराक की राजधानी बगदाद में हमला कर दिया था। हमले में प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी के दो पत्रकारों समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी।

अमेरिका के जो बाइडन सरकार से हुई असांजे की डील के कई मायने हैं। अब असांजे को एस्पियॉन्ज एक्ट के तहत पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित उत्तरी मैरियाना द्वीप में अमेरिका की संघीय अदालत के समक्ष पेश होना होगा। इस कोर्ट के समक्ष ही असांजे अमेरिका की जासूसी करने का जुर्म कबूलेंगे। असांजे के प्रत्यर्पण का मुकदमा वापस ले लिया जाएगा और उनके खिलाफ और कोई आरोप तय नहीं होंगे। दरअसल, उत्तरी मैरियाना द्वीप की राजधानी सैपियन में यह सुनवाई इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका जाने से इनकार कर दिया था। यह जगह अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में जरूर आता है, मगर यहां से ऑस्ट्रेलिया करीब है, जो असांजे का देश है। इस केस में असांजे को 5 साल की सजा होगी। चूंकि, वह पहले ही 5 साल की जेल काट चुके हैं, ऐसे में वह कानूनी रूप से बरी हो जाएंगे और अपने देश लौट सकेंगे।

अब देश में लागू होने वाले हैं नए कानून ?

देश में अब नए कानून लागू होने वाले हैं! 1 जुलाई से देश में तीन नए कानून लागू हो जाएंगे। इसके साथ ही आम बोलचाल में IPC की प्रचलित किंवदंतियां भी बदल जाएंगीं। मसलन, ‘420’ का नाम सुनते ही हर छोटा बड़ा इसके मायने समझ जाता था। 420 को लेकर कई फिल्में, कहानियां भी बीता हुआ कल बन जाएंगी। ‘मेरे साथ चार सौ बीसी की है’ जैसे कमेंट अब पुराने पड़ जाएंगे। क्यों कि अब आईपीसी 420 की जगह बीएनएस 316 हो जाएगी। यानी अब आप कह सकेंगे उसने ‘तीन सौ सौलह’ कर दी। यानी ब्रिटिश काल से बेईमानी के लिए दागदार आईपीसी 420 के दाग धुल जाएंगे, अब बीएनएस ‘316’ चीटिंग के लिए ‘बदनाम’ हो जाएगी। नए कानून में डॉक्टर्स को सख्त सजा से सुरक्षा कवच दिया गया है। मसलन, बीएनएस 106(1) में कहा गया है कि एक रजिस्टर्ड डॉक्टर आरएमपी को चिकित्सीय लापरवाही के लिए दो साल तक की कैद और जुर्माने से दंडित किया जाएगा। इसमें कहा गया है किसी भी चिकित्सा प्रोसेस को करते समय जल्दबाजी या लापरवाही से मौत का कारण में चिकित्सकों को बीएनएस में कम सजा का प्रावधान है। कोर्ट के निर्णय तक की सुनवाई पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के तीन के अंदर FIR दर्ज करनी होगी। सात साल से ज्यादा सजा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है।इसके साथ ही बीएनएस की धारा 51 (1) के मुताबिक, चिकित्सक को बिना किसी देरी के आरोपी की जांच रिपोर्ट आईओ को भेजनी होगी। रेप पीड़िता की मेडिकल जांच की रिपोर्ट रजिस्टर्ड डॉक्टर को सात दिनों के अंदर जांच अधिकारी को भेजनी होगी।

इतना ही नहीं, अब पुलिस हिरासत में भी बड़ा बदलाव हो जाएगा। अब बीएनएसए यानी ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ के तहत क्राइम के नेचर के आधार पर पुलिस हिरासत की अवधि 15 दिन के टाइम फ्रेम को बढ़ा दिया गया है। दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड एसीपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक, इसका अर्थ है कि जिस संगीन केस में 10 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है उसमें 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल करनी होती है, ऐसे केस में 60 दिन के अंदर कभी भी 15 दिन की पुलिस कस्टडी ली जा सकती है।

जिस केस में 10 साल से कम अवधि की सजा है, उसमें चार्जशीट 60 दिन के अंदर फाइल करनी होती है। ऐसे केस में 45 दिन के अंदर कभी भी 15 दिन की पुलिस कस्टडी ले सकती है। यह कस्टडी टुकड़ों में भी ली जा सकेगी। इसके साथ ही FIR से लेकर कोर्ट के निर्णय तक की सुनवाई पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के तीन के अंदर FIR दर्ज करनी होगी। सात साल से ज्यादा सजा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य की गई है।

बता दे कि बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर के निदेशक बी श्रीनिवासन ने दी। उन्होंने बताया कि तीन नए प्रमुख कानूनों का मकसद सजा देने की बजाय न्याय देना है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों से मानवीय पक्ष सामने आएगा। नए कानूनों में प्रावधान है कि पुलिस थाने में आने वाले पीड़ित की शिकायत आधे घंटे के अंदर सुनी जाएगी। अगर किसी पीड़ित को थाने में आधे घंटे से ज्यादा इंतजार करवाया गया, तो थाने के संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी। सभी थानों में अलग-अलग मामलों (केस) के लिए अलग-अलग जांच अधिकारी (आईओ) तैनात किए जाएंगे। हर आईओ को लैपटॉप और एंड्रॉयड मोबाइल दिया जाएगा। बिहार पुलिस जल्द ही डिजिटल पुलिस बन जाएगी। सभी आईओ को उनका अलग ई-मेल दिया जाएगा। इसके बाद सभी सीसीटीएनएस (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क योजना) पर एक्टिव होंगे। एफआईआर से लेकर कोर्ट के निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शिकायत दायर करने के तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेसिंक जांच अनिवार्य यौन उत्पीड़न के मामलों में सात दिन के भीतर देनी होगी जांच रिपोर्ट पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय करने का प्रावधान,एसीपी राजेंद्र सिंह के मुताबिक, इसका अर्थ है कि जिस संगीन केस में 10 साल से अधिक की सजा का प्रावधान है उसमें 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल करनी होती है, ऐसे केस में 60 दिन के अंदर कभी भी 15 दिन की पुलिस कस्टडी ली जा सकती है। आपराधिक मामलों में सुनवाई पूरी होने के 45 दिनों में होगा फैसला भगोड़े अपराधियों की गैर-मौजूदगी के मामलों में 90 दिनों के भीतर केस दायर करने का प्रावधान तीन साल के भीतर मिल सकेगा न्याय! 

आखिर चीन के साथ कैसा संबंध चाहते हैं मोदी?

आज हम आपको बताएंगे कि मोदी चीन के साथ कैसा संबंध चाहते हैं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के लिए कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में होंगे। पिछले कुछ हफ्तों में भारत-चीन संबंधों को लेकर मिले संकेत मिले-जुले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया द्वारा रणनीति में बदलाव से यह पता चलता है कि चीन के साथ व्यावहारिक सहयोग का रास्ता हो सकता है। चीन के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प को चार साल पूरे हो चुके हैं। इसी घटना के बाद दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो गए थे। अभी भी सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों ही तरफ से 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपने तीसरे कार्यकाल में चीन के साथ संबंधों को सुधारना सबसे बड़ी चुनौती होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 3-4 मई को दोनों नेता अस्ताना में हो रहे एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल तो होंगे, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या दोनों के बीच मुलाकात होगी या नहीं। पीएम मोदी ने अप्रैल में न्यूजवीक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत के लिए, चीन के साथ संबंध महत्वपूर्ण और सार्थक हैं। मेरा मानना है कि हमें अपनी सीमाओं पर लंबे समय तक चले आ रहे गतिरोध को तत्काल सुलझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर और शांत संबंध सिर्फ हमारे दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए भी जरूरी हैं। मोदी ने कहा था कि मुझे उम्मीद है और भरोसा है कि हम अपनी सीमाओं पर शांति और स्थिरता बहाल करने और बनाए रखने में सक्षम होंगे।

चीन ने भी पीएम मोदी के नजरिए पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध सीमाओं से बढ़कर हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश सीमा विवाद से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए संवाद कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि भारत चीन के साथ मिलकर काम करेगा, द्विपक्षीय संबंधों को एक रणनीतिक ऊंचाई और भविष्य के नजरिए से देखेगा। विश्वास बनाने, संवाद और सहयोग में शामिल रहने, और मतभेदों को उचित रूप से संभालने का प्रयास करेगा ताकि संबंधों को एक स्वस्थ और स्थिर मार्ग पर रखा जा सके।

मई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लद्दाख में भी सीमा विवाद के बीच चीन के साथ बाकी मुद्दों को सुलझाने की उम्मीद जताई। लद्दाख में सीमा गतिरोध के बीच, विदेश मंत्री जयशंकर ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मुख्य रूप से बचे हुए मुद्दे ‘पेट्रोलिंग के अधिकार’ और ‘पेट्रोलिंग की क्षमता से जुड़े हैं। दलाई लामा की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी और शी जिनपिंग चले जाएंगे, यह बात पेलोसी ने कही। चीन को लेकर मोदी के बयान पर जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक व्यापक नजरिया पेश किया है। उन्होंने कहा विवाद अब पेट्रोलिंग के अधिकार और पेट्रोलिंग की क्षमता तक सीमित हो गया है। पहले ये सीमा से पीछे हटने और तनाव कम करने की मांग कर रहा था। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद चीन से सीमा विवाद पर समाधान की उम्मीद जगी है। लेकिन कुछ अन्य घटनाओं ने जटिलताओं को भी उजागर किया।

पहली बात, प्रधानमंत्री और ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेशों का आदान-प्रदान (जिसे सूत्रों ने दोनों नेताओं के बीच पहला सार्वजनिक बातचीत बताया) ने चीन को नाराज कर दिया, जिसे उसने उकसाने के तौर पर देखा। 5 जून को, राष्ट्रपति लाई (जिन्हें विलियम लाई के नाम से भी जाना जाता है) ने मोदी को फिर से सत्ता में लौटने पर बधाई दी, और तेजी से बढ़ती ताइवान-भारत साझेदारी को मजबूत बनाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि में योगदान करने के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने की इच्छा जताई। मोदी ने लाई को धन्यवाद दिया और निकट संबंधों और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक और तकनीकी साझेदारी की उम्मीद जताई।

दूसरी बात, अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात की, जहां पूर्व हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी ने घोषणा की कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता की विरासत हमेशा जीवित रहेगी, जबकि शी जिनपिंग चले जाएंगे और उन्हें किसी भी चीज का श्रेय नहीं दिया जाएगा। एक दिन बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया आई। चीन ने अमेरिका से “तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता देने और ‘तिब्बत की स्वतंत्रता’ का समर्थन नहीं करने” की अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह किया।

भारत और चीन के बीच हालिया घटनाओं को लेकर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है। पहला नजरिया है कि भारत चीन के बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही खुद को मजबूत दिखा रहा है। यह नजरिया प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर के उन इंटरव्यू को आधार बनाता है जिनमें उन्होंने सीमा मुद्दे का समाधान निकालने की इच्छा जताई थी। साथ ही, यह नजरिया ताइवान के साथ भारत के संबंध और दलाई लामा से मुलाकात को चीन को यह संदेश देने के तौर पर देखता है कि भारत इस क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी रिश्ते बनाने में सक्षम है।

क्या BRICS देशों से दूर हो रहा है भारत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत अब BRICS देशों से दूर हो रहा है या नहीं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने कजाकिस्तान में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से किनारा कर सकते हैं। उनकी जगह विदेश मंत्री एस जयशंकर के इसमें शामिल होने की उम्मीद है। द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि पीएम मोदी ने 3-4 जुलाई को होने वाले शिखर सम्मेनल के लिए अस्ताना की यात्रा नहीं करने का फैसला किया है। इसके पहले प्रधानमंत्री के सम्मेलन में जाने की योजना थी और एक अग्रिम सुरक्षा दल ने वहां अपना सर्वेक्षण भी किया था। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ ही मध्य एशियाई नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। बता दें कि इसके बाद सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या मोदी इस साल अक्ट्बूर के आखिर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस साल ब्रिक्स सम्मेलन रूस के कजान में आयोजित किया जाना है, जिसकी मेजबानी पुतिन करेंगे। भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य हैं। इस साल पांच नए सदस्यों संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, मिस्र और इथियोपिया का स्वागत करेगा।

पीएम मोदी के अस्ताना में हो रही एससीओ की बैठक में शामिल न होने के फैसले का असर इस्लामाबाद में इसी साल सर्दियों में होने वाले सम्मेलन में भी भारत की भागीदारी पर पड़ सकता है, जिसकी मेजबानी पाकिस्तान करेगा। शुक्रवार को जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से भारत की भागीदारी को लेकर पूछा गया तो उन्होंने पुष्टि करने से इनकार कर दिया और कहा कि यात्रा के विवरण को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

सूत्रों ने पीएम मोदी के सम्मेलन में न जाने के फैसले के पीछे आगामी संसद सत्र का हवाला दिया है जो 24 जून से 3 जुलाई तक चलने वाला है। इस सत्र में लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव और दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के अलावा प्रधानमंत्री के 2 से 4 जुलाई के बीच लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देने की उम्मीद है। एससीओ मूल रूप से रूस और चीन द्वारा आगे किया गया एक यूरेशियन सुरक्षा और आर्थिक समूह है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान पूर्ण सदस्य हैं। इस साल इसमें ईरान और बेलारूस को इसमें शामिल किया जाना है।

इस समूह में पीएम मोदी की अनुपस्थिति से इस समूह के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर सवाल उठने की संभावना है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एससीओ का माहौल नई दिल्ली के लिए मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के साथ तनाव सम्मेलन में परेशानी का मुख्य कारण रहा है, जिसमें दोनों देशों के नेता आतंकवाद के मुद्दे पर एक-दूसरे पर निशाना साधते हैं। चीन का इसमें होना भी भारत के लिए असहज स्थिति है। 2020 में गलवान में हुई घातक झड़प के बाद से मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कहीं भी द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई है। हालांकि, दोनों नेतानों ने 2022 में इंडोनेशिया में जी-20 और 2023 में दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संक्षिप्त बातचीत की है।

अगर पीएम मोदी जुलाई में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेते हैं, तो यह बीते सप्ताह इटली में आयोजित G-7 देशों के सम्मेलन के बिल्कुल विपरीत होगा। पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जबकि भारत इसका सदस्य भी नहीं है और उसे नौ अन्य देशों के साथ संपर्क बढ़ाने के तहत आमंत्रित किया गया था। राष्ट्रपति के अभिभाषण के अलावा प्रधानमंत्री के 2 से 4 जुलाई के बीच लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देने की उम्मीद है। एससीओ मूल रूप से रूस और चीन द्वारा आगे किया गया एक यूरेशियन सुरक्षा और आर्थिक समूह है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान पूर्ण सदस्य हैं। इस साल इसमें ईरान और बेलारूस को इसमें शामिल किया जाना है।इसके बाद सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या मोदी इस साल अक्ट्बूर के आखिर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस साल ब्रिक्स सम्मेलन रूस के कजान में आयोजित किया जाना है, जिसकी मेजबानी पुतिन करेंगे। भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य हैं। इस साल पांच नए सदस्यों संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईरान, मिस्र और इथियोपिया का स्वागत करेगा।

आखिर एससीओ समिट के लिए क्यों नहीं गए पीएम मोदी?

यह सवाल वर्तमान का सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर पीएम मोदी एससीओ समिट के लिए क्यों नहीं गए! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3-4 जुलाई को अस्ताना में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद की पहली सत्र में शामिल होना, इसका एक बड़ा कारण है। लेकिन असल कारण है चीन के साथ तनाव। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि पीएम मोदी ने पहले पुष्टि की थी कि वे अस्ताना एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। हालांकि, अब भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए वो विदेश मंत्री एस जयशंकर को भेज सकते हैं। बता दें कि विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि दोनों पक्ष प्रासंगिक सैन्य और कूटनीतिक तंत्र के माध्यम से आगे के रास्ते पर बातचीत जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं। कजाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत एससीओ शिखर सम्मेलन का फोकस यूरेशिया में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव और बढ़ती कट्टरता की पृष्ठभूमि में आतंकवाद का मुकाबला करना होगा। मोदी ने यह सोचकर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए हामी भरी थी कि वहां रूस, चीन और ईरान के नेताओं के अलावा मेजबान कजाकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई नेताओं से मुलाकात होगी। भारत ने 2023 में एससीओ की अध्यक्षता की, लेकिन शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मोड में किया था। फरवरी में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को हल करने के लिए उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता का एक नया दौर आयोजित किया, जिसमें दोनों पक्षों ने जमीन पर ‘शांति और स्थिरता’ बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन किसी भी सफलता का कोई संकेत नहीं मिला।मोदी ने समरकंद में 2022 के एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कोई बैठक नहीं की थी। बाद में बाली जी20 शिखर सम्मेलन में शी और मोदी ने संक्षिप्त बातचीत की थी। फिर 2023 में दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में छोटी बैठक हुई थी।

सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन के साथ संबंधों में खटास जारी है। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की धर्मशाला में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात और चीन के लिए सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति न देने के निर्णय का संकेत साफ है- रिश्तों में बर्फ जमी हुी है। यह बिल्कुल अलग बात है कि चीन के साथ व्यापार बढ़ रहे हैं और भारतीय उद्योग जगत चीनी प्रफेशनल्स के लिए वीजा में ढील देने की मांग भी कर रहा है। भारत ने बीजिंग और चीन में अन्य वाणिज्य दूतावासों से जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

मामले की जानकारी रखने वालों ने कहा कि चीन अभी भी लद्दाख में कई फ्लैश पॉइंट्स पर गलवान से पहले की स्थिति बहाल करने पर सहमत नहीं हुआ है, जिससे संबंध सामान्य नहीं हो पा रहे हैं। फरवरी में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को हल करने के लिए उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता का एक नया दौर आयोजित किया, कट्टरता की पृष्ठभूमि में आतंकवाद का मुकाबला करना होगा। मोदी ने यह सोचकर शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए हामी भरी थी कि वहां रूस, चीन और ईरान के नेताओं के अलावा मेजबान कजाकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई नेताओं से मुलाकात होगी। भारत ने 2023 में एससीओ की अध्यक्षता की, लेकिन शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मोड में किया था।जिसमें दोनों पक्षों ने जमीन पर ‘शांति और स्थिरता’ बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन किसी भी सफलता का कोई संकेत नहीं मिला।

उस बैठक में भारतीय पक्ष ने देपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों के समाधान के लिए जोरदार तरीके से दबाव डाला, लेकिन वार्ता में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि दोनों पक्ष प्रासंगिक सैन्य और कूटनीतिक तंत्र के माध्यम से आगे के रास्ते पर बातचीत जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं।शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल मोड में किया था। मोदी ने समरकंद में 2022 के एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कोई बैठक नहीं की थी। बाद में बाली जी20 शिखर सम्मेलन में शी और मोदी ने संक्षिप्त बातचीत की थी। फिर 2023 में दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में छोटी बैठक हुई थी। कजाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत एससीओ शिखर सम्मेलन का फोकस यूरेशिया में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव और बढ़ती कट्टरता की पृष्ठभूमि में आतंकवाद का मुकाबला करना होगा।

क्या नीट एग्जाम के वास्तविक पेपर खत्म कर दिए गए थे?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नीट एग्जाम के वास्तविक पेपर खत्म कर दिए गए थे या नहीं! बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने नीट पेपर लीक की जांच तेज कर दी है। रविवार को पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों को एक दिन पहले झारखंड के देवघर से हिरासत में लिया गया था। इसके साथ ही मामले में अब तक 18 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। सीबीआई ने पांच मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की है। बता दें कि बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किये गए अभ्यर्थियों के घर से जले हुए कागजात बरामद किए थे, जिनमें परीक्षा के प्रश्नपत्र की फोटो कॉपी भी थे। बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने इन जले हुए कागजातों का मिलान NTA की ओर से उपलब्ध कराए गए मूल प्रश्नपत्र से किया। जांच में पाया गया कि जले हुए कागजातों में 68 प्रश्न मूल प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं। इतना ही नहीं प्रश्नों के क्रमांक भी मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। EOU की रिपोर्ट के अनुसार, जले हुए कागजातों से एक स्कूल का परीक्षा केंद्र कोड भी बरामद किया गया, जो झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल का था। यह स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल है, जिसे NTA ने परीक्षा केंद्र बनाया था। EOU ने इस मामले की जांच के लिए फोरेंसिक लैब की मदद ली है। EOU की रिपोर्ट के आधार पर ही शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इस मामले की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। ईओयू के अनुसार, जले हुए कागजातों में मिले 68 प्रश्न न केवल मूल प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं, बल्कि इन प्रश्नों के क्रमांक भी मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। हालांकि जले हुए कागजात 5 मई को ही बरामद कर लिए गए थे, जब संदिग्ध अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, EOU को इन कागजातों का मिलान NEET-UG के प्रश्नपत्र से करने में देरी हुई क्योंकि NTA शुरुआत में राज्य सरकार के साथ जानकारी, खासकर प्रश्नपत्र, साझा करने से हिचकिचा रहा था। फिलहाल बिहार EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक कब और कहां से हुआ था।

ओएसिस स्कूल के प्राचार्य एहसानुल हक का कहना है कि हो सकता है कि पैकेट के स्कूल पहुंचने से बहुत पहले पेपर लीक हो गया हो। बता दें कि हजारीबाग में चार परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एहसानुल हक परीक्षा आयोजित करने के लिए जिला समन्वयक थे। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए हक ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि स्कूल के केंद्र अधीक्षक और NTA द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 5 मई (परीक्षा के दिन) की सुबह दो बैंकों में से एक से पैकेट प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि पैकेट स्कूल पहुंचने के बाद निरीक्षक और छात्रों के सामने पेपर वाला पैकेट खोला गया। जब उनसे पूछा गया कि जले हुए स्क्रैप ओएसिस परीक्षा केंद्र का बताया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि अगर स्कूल की ओर से कोई गड़बड़ी होती तो स्कूल के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जाता, लेकिन अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, ना ही पूछताछ किया गया है।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने नीट पेपर लीक मामले अब तक 18 लोग गिरफ्तार कर चुकी है। ईओयू के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांच लोगों की पहचान बलदेव कुमार, मुकेश कुमार, पंकू कुमार, राजीव कुमार और परमजीत सिंह के रूप में हुई है। ये सभी नालंदा के रहने वाले हैं। कुख्यात संजीव कुमार उर्फ लुटन मुखिया गिरोह से जुड़े बलदेव कुमार को परीक्षा से एक दिन पहले नीट-यूजी परीक्षा की हल की गई उत्तर पुस्तिका कथित तौर पर उसके मोबाइल फोन पर पीडीएफ प्रारूप में प्राप्त हुई थी। बयान में मुखिया गिरोह के सदस्यों पर कई राज्यों में प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप लगाया गया है।

EOU के अनुसार, अब तक की जांच से पता चला है कि बलदेव और उसके साथियों ने चार मई को पटना के राम कृष्ण नगर में एक घर में इकट्ठा हुए छात्रों को हल की गई उत्तर पुस्तिकाएं दी गई थी ताकि वे इसे याद कर लें। बयान में कहा गया कि अभ्यर्थियों को पहले से गिरफ्तार किए गए दो लोगों-नीतीश कुमार और अमित आनंद द्वारा वहां लाया गया था। बयान के अनुसार, लीक हुआ नीट-यूजी प्रश्नपत्र मुखिया गिरोह द्वारा झारखंड के हजारीबाग के एक निजी स्कूल से प्राप्त किया गया था। जांच टीम ने पटना के एक घर से बरामद आंशिक रूप से जले हुए प्रश्नपत्र का मिलान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रश्नपत्र से किया, जिससे प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि हुई।

NEET जैसी बड़ी एग्जाम पर क्या बोले प्रशासन के लोग?

आज हम आपको बताएंगे कि NEET जैसी बड़ी परीक्षा पर प्रशासन के लोगों ने क्या कहा है! नीट पेपर लीक केस में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। अलग-अलग राज्यों में शिकायतों के मद्देनजर जांच को लेकर स्पेशल टीमें बनाई गई है। इस बीच केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि NEET-UG 2024 ‘पेपर लीक’ मामला लोकल स्तर पर हुआ है। इसमें कोई बड़ा गैंग शामिल नहीं है। पूरे देश के 4,500 केंद्रों पर परीक्षा में एक लाख छात्रों का चयन इसका प्रमाण है। सरकार ने यह भी कहा कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को दूर करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में सुधार किया जाएगा, जो अनियमितताओं के आरोपों के बाद आवश्यक हो गया है। अगली NEET-UG परीक्षा से पहले यह सुधार किए जाएंगे। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि छात्रों में दहशत फैलाने वाले कोचिंग सेंटरों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इस साल जनवरी में कोचिंग सेंटरों पर जारी की गई एक केंद्रीय सलाह का ठीक से पालन नहीं किया गया है और इस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। NEET-UG में जिन 1,563 उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, उनमें से 52 फीसदी ने दोबारा परीक्षा दी। शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि सरकार छात्रों को ग्रेस मार्क्स देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं है।

बिहार में NEET ‘पेपर लीक’ मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने अपनी जांच तेज करते हुए रविवार को पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां झारखंड के देवघर में की गईं, जिससे इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 18 हो गई है। गिरफ्तार किए गए पांचों लोग नालंदा के रहने वाले हैं। इनके नाम बलदेव कुमार, मुकेश कुमार, पंकू कुमार, राजीव कुमार और परमजीत सिंह हैं। NTA ने गड़बड़ी का पता चलने के बाद बिहार के केंद्रों से 17 और छात्रों को बाहर किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी संदर्भ के आधार पर सीबीआई ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है। करीब 24 लाख छात्रों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी है। मंत्रालय को कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कई शहरों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग माननी पड़ी। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पांच मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, धोखाधड़ी के कुछ मामले सामने आए हैं। एक समीक्षा के बाद परीक्षा प्रक्रिया के संचालन में पारदर्शिता के लिए यह निर्णय लिया गया कि मामले को व्यापक जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया जाए। बता दें कि EOU की रिपोर्ट के अनुसार, जले हुए कागजातों से एक स्कूल का परीक्षा केंद्र कोड भी बरामद किया गया, जो झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल का था। यह स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल है, जिसे NTA ने परीक्षा केंद्र बनाया था। EOU ने इस मामले की जांच के लिए फोरेंसिक लैब की मदद ली है। EOU की रिपोर्ट के आधार पर ही शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इस मामले की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। ईओयू के अनुसार, जले हुए कागजातों में मिले 68 प्रश्न न केवल मूल प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं, बल्कि इन प्रश्नों के क्रमांक भी मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। हालांकि जले हुए कागजात 5 मई को ही बरामद कर लिए गए थे, जब संदिग्ध अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, EOU को इन कागजातों का मिलान NEET-UG के प्रश्नपत्र से करने में देरी हुई क्योंकि NTA शुरुआत में राज्य सरकार के साथ जानकारी, खासकर प्रश्नपत्र, साझा करने से हिचकिचा रहा था। फिलहाल बिहार EOU यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक कब और कहां से हुआ था।

ओएसिस स्कूल के प्राचार्य एहसानुल हक का कहना है कि हो सकता है कि पैकेट के स्कूल पहुंचने से बहुत पहले पेपर लीक हो गया हो। बता दें कि हजारीबाग में चार परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एहसानुल हक परीक्षा आयोजित करने के लिए जिला समन्वयक थे। ‘बताया कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि स्कूल के केंद्र अधीक्षक और NTA द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 5 मई (परीक्षा के दिन) की सुबह दो बैंकों में से एक से पैकेट प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि पैकेट स्कूल पहुंचने के बाद निरीक्षक और छात्रों के सामने पेपर वाला पैकेट खोला गया। जब उनसे पूछा गया कि जले हुए स्क्रैप ओएसिस परीक्षा केंद्र का बताया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि अगर स्कूल की ओर से कोई गड़बड़ी होती तो स्कूल के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जाता, लेकिन अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, ना ही पूछताछ किया गया है।

जब संसद के पहले दिन ही हो गया हंगामा!

हाल ही में संसद के पहले दिन ही हंगामा होता हुआ नजर आ गया! सत्ता पक्ष के ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे के जवाब में ‘संविधान बदल देंगे’ के नैरेटिव से विपक्ष ने इस लोकसभा चुनाव में खुद को मजबूत कर लिया। इसलिए विपक्ष और खासकर कांग्रेस पार्टी संविधान पर राजनीति को अगले स्तर तक ले जाने में जुटी है। 18वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र आयोजित हुआ तो पहले दिन राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी सासंदों ने हाथों में संविधान थामे रखा। यहां तक कि गृह मंत्री अमित शाह जब सांसद पद और इससे जुड़ी गोपनीयता का शपथ लेने जा रहे थे, तब राहुल गांधी ने संविधान की प्रति लहराई। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में प्रवेश से पहले देश में आपातकाल लागू किए जाने के 50 वर्ष पूरे होने पर जनता को जागरूक करने का अभियान चलाने का ऐलान किया। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे हत्थे से उखड़ गए। उन्होंने पीएम मोदी को कठोरता से जवाब दिया। दरअसल, प्रधानमंत्री ने संसद सत्र के पहले दिन मीडिया को संबोधित करने के दौरान कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार तीसरे कार्यकाल में तीन गुना ज्यादा काम करेगी। विपक्ष को भी नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि देश को एक जिम्मेदार विपक्ष की जरूरत है। पीएम मोदी ने अपने लहजे से स्पष्ट कर दिया है कि भले ही इस बार एनडीए की सीटें घट गई हैं, लेकिन विपक्ष को हावी होने का मौका नहीं दिया जाएगा। इसके उलट पीएम ने कांग्रेस को कोसने का मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार में आपातकाल लगाए जाने का जिक्र करते हुए कहा, ‘कल भारतीय लोकतंत्र पर लगे काले धब्बे के 50 साल पूरे हो रहे हैं। नई पीढ़ी यह नहीं भूलेगी कि कैसे भारतीय संविधान को खत्म कर दिया गया। कैसे देश को जेल में तब्दील कर दिया गया और लोकतंत्र को बंदी बना लिया गया। इस 50वीं बरसी पर देश यह संकल्प लेगा कि ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा।’

पीएम मोदी की टिप्पणी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए तीखी प्रतिक्रिया आई। खरगे ने कहा, ‘आप विपक्ष को चेतावनी दे रहे हैं। आप 50 साल पुराने आपातकाल की बात कर रहे हैं, लेकिन पिछले 10 सालों में अघोषित आपातकाल को भूल गए हैं।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बात की जानकारी है कि इस चुनाव में हुआ क्या। विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर अटैक कर कर रहा है। शायद प्रधानमंत्री मोदी को भी यह बात पता थी कि विपक्ष किस तैयारी के साथ आज आया हुआ है। तभी उन्होंने सत्र की शुरुआत के ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए ऐसी बात कह दी जो कांग्रेस को नागवार गुजरी। प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा काला धब्बा करार देते हुए कहा कि इसकी 50वीं बरसी के मौके पर देशवासी यह संकल्प लें कि भारत में फिर कभी कोई ऐसा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।

खरगे ने कहा कि जनता ने ‘मोदी जी के खिलाफ जनादेश दिया है’। कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि विपक्षी गठबंधन संसद के अंदर और बाहर लोगों की आवाज उठाएगा।

उधर, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश और उसके लोगों की सेवा के लिए लगातार सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करेगी, लेकिन साथ ही उन्होंने विपक्ष के लिए कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, ‘भारत को एक जिम्मेदार विपक्ष की जरूरत है, लोग नारेबाजी नहीं बल्कि सार चाहते हैं, वे बहस चाहते हैं, संसद में नाटक और हंगामा नहीं बल्कि परिश्रम चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 50 साल पहले के आपातकाल का जिक्र किया, लेकिन पिछले 10 वर्षों के उस ‘अघोषित आपातकाल’ को भूल गए जिसका जनता ने इस लोकसभा चुनाव में अंत कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को उम्मीद थी कि संसद सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नीट और दूसरी परीक्षओं में पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मौन साध लिया। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी अपने रस्मी संबोधन में आज जरूरत से ज्यादा बोले। इसे कहते हैं, रस्सी जल गई, बल नहीं गया।मुझे उम्मीद है कि विपक्ष लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।’ उन्होंने कहा कि देश को सांसदों से बहुत उम्मीदें हैं और उनसे आग्रह किया कि वे जन कल्याण के लिए हर संभव कदम उठाएं। पीएम ने नवनिर्वाचित सांसदों को बधाई दी और कहा कि यह पहली बार है जब नए सांसद नए संसद भवन में शपथ लेंगे।

संसद के पहले सत्र में किन-किन मुद्दों को पीएम मोदी ने उठाया?

आज हम आपको बताएंगे कि संसद के पहले सत्र में पीएम मोदी ने किन-किन मुद्दों को उठाया है! 18 वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत हो गई। लोकसभा के भीतर सोमवार विपक्षी दल खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद कुछ बताने की कोशिश कर रहे थे। सांसदों को देखकर ऐसा लगा कि जो बात चुनावों के दौरान उनकी ओर से बताने की कोशिश हुई वह उसे चुनाव बाद भी जारी रखे हुए हैं। विपक्षी दलों के सांसद संविधान की कॉपी लेकर संसद पहुंचे थे। चुनाव के दौरान भी विपक्षी दलों की ओर से यह कहा गया कि बीजेपी वाले सत्ता में लौटे तो संविधान बदल देंगे। आरक्षण खत्म कर देंगे। चुनाव में बीजेपी को नुकसान भी हुआ खासकर यूपी में। यूपी में सपा ने 37 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। कांग्रेस-सपा गठबंधन को कुल 43 सीटें मिलीं। इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसका असर भी आज लोकसभा में दिखा जब सपा सांसदों को सदन में बैठने के लिए पहली लाइन मिली। विपक्षी दल एक ओर जहां संविधान की कॉपी के साथ संसद पहुंचे थे तो वहीं सत्र की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने 25 जून का खास जिक्र किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बात की जानकारी है कि इस चुनाव में हुआ क्या। विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर अटैक कर कर रहा है। शायद प्रधानमंत्री मोदी को भी यह बात पता थी कि विपक्ष किस तैयारी के साथ आज आया हुआ है। तभी उन्होंने सत्र की शुरुआत के ठीक पहले मीडिया को संबोधित करते हुए ऐसी बात कह दी जो कांग्रेस को नागवार गुजरी। प्रधानमंत्री ने इमरजेंसी को लोकतंत्र पर लगा काला धब्बा करार देते हुए कहा कि इसकी 50वीं बरसी के मौके पर देशवासी यह संकल्प लें कि भारत में फिर कभी कोई ऐसा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी इस बात को कभी नहीं भूलेगी कि उस समय कैसे देश के संविधान को पूरी तरह नकार दिया गया था, देश को जेल खाना बना दिया गया था और लोकतंत्र को पूरी तरह दबोच दिया गया था। उन्होंने कहा आपातकाल के ये 50 साल इस संकल्प के हैं। गौरव के साथ हमारे संविधान की रक्षा करते हुए… भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करते हुए… देशवासी ये संकल्प करेंगे कि भारत में फिर कभी कोई ऐसी हिम्मत नहीं करेगा जो 50 साल पहले की गई थी और लोकतंत्र पर काला धब्बा लगा दिया गया था। देश में 25 जून, 1975 को आपातकाल घोषित किया गया था और यह 21 मार्च, 1977 तक जारी रहा। इस अवधि को नागरिक स्वतंत्रता के निर्मम दमन के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस कदम का विरोध करने वाले नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 50 साल पहले के आपातकाल का जिक्र किया, लेकिन पिछले 10 वर्षों के उस ‘अघोषित आपातकाल’ को भूल गए जिसका जनता ने इस लोकसभा चुनाव में अंत कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को उम्मीद थी कि संसद सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नीट और दूसरी परीक्षओं में पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मौन साध लिया। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी अपने रस्मी संबोधन में आज जरूरत से ज्यादा बोले। इसे कहते हैं, रस्सी जल गई, बल नहीं गया। वहीं विपक्ष के प्रदर्शन पर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संविधान पर हमला स्वीकार्य नहीं है इसलिए हमने संविधान की प्रतियां पकड़ी हुई हैं।

पहले दिन संसद परिसर के नजारे को देखकर इस बात के पूरे आसार हैं कि यह सत्र काफी हंगामेदार होगा। इंडिया गठबंधन भले ही विपक्ष में है लेकिन उसकी ओर से यह बार-बार कहा जा रहा है कि हार पीएम मोदी की हुई है। लोकसभा चुनाव नतीजों से कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों का उत्साह काफी बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी को भी पता है कि वह विपक्ष के निशाने पर हैं। आज उनकी ओर से जिन बातों का जिक्र किया गया वह ऐसे ही नहीं था। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद यह पहला सत्र है और आने वाले वक्त में नतीजों का असर समय-समय पर दिखाई देगा इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

जब संसद में पहली बार आमने-सामने हुए पक्ष विपक्ष!

हाल ही में संसद में पहली बार पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हुए हैं! सोमवार को 18वीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू हुआ, जहां सदन के भीतर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक अलग-अलग अंदाज में दिखाई दिए। पहले दिन जहां नए चुने गए सांसदों को शपथ लेनी थी तो वहीं दूसरी ओर कई सांसदों के परिजन भी इस मौके पर वहां पहुंचे दिखाई दिए। सोमवार को सदन में जहां एक ओर कुछ दलों ने अपनी पहचान के लिए रंग विशेष का सहारा लिया तो वहीं कुछ सांसदों पर लोगों की निगाहें टिकी नजर आईं। सोमवार को राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ सत्र में सबसे पहले सदन में लोकसभा के महासचिव ने लोकसभा में नवनिर्वाचित सांसदों की सूची हिंदी व अंग्रेजी में पटल पर रखी, उसके बाद प्रोटेम स्पीकर (कार्यकारी अध्यक्ष)के तौर पर भर्तहरि महताब ने प्रोटेम स्पीकर के पैनल का ऐलान किया। सदन में सबसे पहले पीएम मोदी, फिर प्रोटेम स्पीकर के पैनल, उसके बाद मोदी सरकार के मंत्रियों और फिर अक्षरों के क्रम में राज्यवार सांसदों ने शपथ ली। सदन में सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने शपथ ली। ऑफवाइट कुर्ते व जैकेट में जब पीएम मोदी शपथ लेने के लिए पोडियम पर पहुंचे तो पूरा सदन में अचानक कोलाहल शुरू हो गया। सत्तापक्ष जहां इस दौरान लगातार ‘भारत माता की जय’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाता दिख तो वहीं विपक्ष संविधान की कॉपी दिखाता नजर आया। पीएम मोदी के शपथ के दौरान कांग्रेस के नेता रहुल गांधी सबसे पहले संविधान की कॉपी लेकर खड़े हुए, उसके बाद तमाम विपक्षी सदस्य संविधान की प्रति दिखाने लगे। जब पीएम संविधान और लाेकतंत्र शब्द का उच्चारण कर रहे थे ताे उस समय कटाक्ष करते हुए विपक्षी दल ‘ओहो-ओहो’ करता दिखा। दूसरी ओर पीएम के बाद जब प्रोटेम स्पीकर पैनल के शपथ लेने की बारी आई विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष की ओर डीएमके के टीआर बालू, कांग्रेस के के सुरेश व टीएमसी के सुदीप बंधोपाध्याय को पैनल में रखा गया, लेकिन विपक्ष पैनल का विरोध करता दिखा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने प्रोटेम स्पीकर का चयन करते समय संसदीय मर्यादाओं की अनदेखी की। वहीं गृह मंत्री अमित शाह जब शपथ लेने के लिए आए तो भी विपक्षी सांसदों ने संविधान की प्रतियां लहराईं। देश में नीट एग्जाम को मचे सियासी बवाल के बीच जब देश के शिक्षा मंत्री शपथ लेने पहुंचे ताे विपक्षी खेमा ‘नीट-नीट’ ‘चीट-चीट’ की आवाज बुलंद करते उन्हें हूट करता नजर आया।

पहले दिन सदन में चुहलबाजी भी खूब नजर आई। हालांकि यह दाेनों ही तरफ से थी, लेकिन विपक्ष खेमा इसमें माहिर नजर आया। विपक्ष शपथ लेने वाले सदस्यों के हिसाब से मजाक व चुहल करते दिखे। जब मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान शपथ लेकर रिपाेर्टर डेस्क पर दस्तखत करने के लिए चले तो विपक्षी ‘मामा-मामा’ कहकर उनसे चुहल करता दिखा। इस दौरान टीएमसी के कल्याण बनर्जी पहले हाफ में लगातार कमेंट और मजाक करते दिखे। जेडीयू के ललन सिंह जब शपथ लेने के लिए उठे तो कल्याण बनर्जी सदन में लोकप्रिय हिंदी गाना गाते नजर आए- ‘दोस्त-दोस्त ना रहा…’ फिर कहने लगे कि अरे यह तो हमारे बहुत पुराने दोस्त हैं। बिहार के सीनियर नेता व मंत्री गिरिराज सिंह पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने मु़स्कुराते हुए कहा कि आपकी वजह से हमारी सीटें बढ़ गईं। जब टीडीपी के सांसद शपथ लेने पहुंचे तो विपक्ष मजाकिया अंदाज में उनसे कहने लगा कि हमारी तरफ आ जाइए। उल्लेखनीय है कि इंडिया गठबंधन की निगाहें अभी भी टीडीपी व जेडीयू पर लगी हैं। उन्हें लगता है कि आने वाले समय में ये दल एनडीए छोड़ सकते हैं। वहीं आंध्र प्रदेश की बीजेपी अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी शपथ लेने के लिए चलीं तो विपक्ष ने चुहल करते हुए छेड़ा कि क्या स्पीकर बना रहे हैं? दरअसल, स्पीकर की रेस में पुरंदेश्वरी का नाम भी है। दूसरी ओर लंच टाइम होता देख बीजेपी सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी लगातार आसन से लंच टाइम के लिए सदन का लंच ब्रेक करने की लगातार गुहार लगाते दिखे।

पहले दिन सदन में दलों का कलर कोड दिखा ताे कई सांसदों का पहनावा व वेशभूषा नजरें खींचता नजर आया। सदन में जहां टीडीपी सांसद पीले अंगवस्त्र पहने अलग नजर आ रहे थे तो वहीं इस बार बड़ी संख्या के साथ निचले सदन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते एसपी ने लाल टोपी के साथ गले में गुलाबी गमछे को अपना ड्रेस व कलर कोड बनाया। हालांकि एसपी के सभी सांसदों के सिर पर लाल टोपी भले ही न हो, लेेकिन महिला सांसदों सहित उनके सभी सदस्यों के गले में गुलाबी अंगोछा जरूर था। राहुल गांधी अपनी ट्रेड मार्क बन चुकी वाइट टीशर्ट व ब्लैक ट्राउजर में दिखे तो वहीं एलजेपी सांसद चिराग पासवान वाइट कुर्ते, ब्लू डेलिम में माथे पर चौड़ा तिलक लगाए दिखे। शपथ लेने के बाद उन्होंने बाकायदा पीएम मोदी की पास पहुंच कर उन्हें झुककर प्रणाम किया। मंडी सांसद कंगना रनौत ऑफ वाइट साड़ी ब्लाउज में दिखीं तो वहीं केरल के त्रिशुर से सांसद गोपी सुरेश अपने पारंपरिक पहनावे व वाइट शूज में हाथों में बड़ी बड़ी अंगूठियों के साथ शपथ रजिस्टर में दस्तखत करते दिखे। मध्य प्रदेश के देवास की सांसद अनीता चौहान अपनी पारंपरिक भूषा के साथ चांदी की ढेर सारी पारंपरिक जूलरी में शपथ लेने पहुंचीं।

पहले दिन लोकसभा में तमाम सदस्यों ने हिंदी व अंग्रेजी के साथ-साथ तमाम क्षेत्रीय भाषाओं व संस्कृत में शपथ ली। इनमें गुजराती, ओडिया, तेलुगु, मराठी, असमी, बांग्ला, मलयालम, कन्नड़, डोगरी जैसी भाषाएं शामिल थीं। वहीं कुछ सदस्य शपथ लेने के बाद सीधे अपनी सीट की ओर चल दिए, तब उन्हें साथी सांसदों या लोकसभा सचिवालय के स्टाफ द्वारा साइन करने की याद दिलाई गई। भूलने वालों में कर्नाटक के पूर्व सीएम एसडी कुमारस्वामी भी शामिल थे।