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क्या बीजेपी के लिए नुकसानदायक हो सकती है आरएसएस की नाराजगी?

यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या बीजेपी के लिए आरएसएस की नाराजगी नुकसानदायक हो सकती है या नहीं! लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी भारतीय जनता पार्टी पर लगातार निशाना साध रहे हैं। पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। अब कार्यवाहक सरसंघचालक इंद्रेश कुमार ने भी भाजपा का नाम लिए बगैर करारा तंज कसा है। संघ के पदाधिकारियों के बयानों से लाखों लोग यह सोच रहे हैं कि संघ हमेशा से भाजपा का समर्थक रहा है। अब अचानक ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी के खिलाफ बयान दिए जा रहे हैं। दरअसल यह सब अचानक नहीं हुआ है। संघ और बीजेपी के बीच 6 महीने पहले से ही दूरियां बढ़नी शुरू हो गई थी। लोकसभा चुनाव के दौरान ये दूरियां और ज्यादा बढ़ गई। इसी कारण संघ की ओर से बीजेपी पर एक के बाद एक तंज कसे जा रहे हैं। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह को बीजेपी ने बड़े उत्सव के रूप में मनाया। भले ही भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं लेकिन राम मंदिर का काम पूरा होने से पहले प्राण प्रतिष्ठा समारोह होने पर शंकराचार्यों ने एतराज जताया था। शंकराचार्यों का यह भी कहना था कि चुनावी फायदे के लिए बीजेपी मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही प्राण प्रतिष्ठा करा रही है। यह उचित नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक मिथिलेश जैमिनी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शंकराचार्यों की बात से सहमत थे लेकिन प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर संघ कुछ नहीं कर सका। बीजेपी और संघ के बीच की दूरियां तभी से शुरू हो गई थी।

चार दिन पहले यानी सोमवार 10 जून को नागपुर में आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन में ऐसी ही नसीहत दी थी। यहां वो चुनाव, राजनीति और राजनीतिक दलों के रवैये पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों मे सेवक कहलाने का अधिकारी है। भागवत ने आगे कहा जब चुनाव होता है तो मुकाबला जरूरी होता है। दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए। लोकसभा चुनाव के चौथे चरा की वोटिंग के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान आया था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में हम कम सक्षम थे। तब हमें RSS की जरूरत पड़ती थी। अब हम सक्षम हैं। आज BJP खुद अपने आप को चलाती है।’ इस बयान में बीजेपी और आरएसएस के बीच जो खींचतान चल रही थी, उसकी झलक साफ दिखी।

जैमिनी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदूवादी संगठन है जो सभी हिंदुओं को साथ लेकर चलना चाहता है। संघ हमेशा धर्म गुरुओं और शंकराचार्यों के फैसलों से पक्ष में खड़ा रहा है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में धर्म गुरुओं और शंकराचार्यों की अनुमति नहीं ली गई। कुछ शंकराचार्यों ने तो कई टीवी चैनल को खुलकर बयान दिए थे कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह मुहूर्त के हिसाब से ना होकर राजनैतिक फायदे के हिसाब से हो रहा है। कई हिंदू संगठन भी शंकराचार्यों के फैसलों को मानते हैं लेकिन अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शंकराचार्यों की बात नहीं सुनी गई थी। यही वजह है कि संघ भी बीजेपी की मनमानी से नाराज हो गया। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी मनमर्जी से टिकट वितरण किया। भले ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस हमेशा से भाजपा का खुलकर पक्षधर रहा लेकिन इस बार टिकट वितरण में संघ की अनुमति नहीं ली गई। वोटिंग के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान आया था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में हम कम सक्षम थे। तब हमें RSS की जरूरत पड़ती थी। अब हम सक्षम हैं। आज BJP खुद अपने आप को चलाती है।’ इस बयान में बीजेपी और आरएसएस के बीच जो खींचतान चल रही थी, उसकी झलक साफ दिखी।वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश जैमिनी का कहना है कि जिन नेताओं को संघ टिकट दिलाना चाहता था, पार्टी ने उन नेताओं को टिकट ही नहीं दिया। संघ के पदाधिकारी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की मनमानी से खुश नहीं है।

क्या चुनाव के परिणाम के बाद आरएसएस और बीजेपी हो गए हैं दूर?

वर्तमान में चुनाव के परिणाम के बाद आरएसएस और बीजेपी दूर हो गए हैं! 400 पार’ का नारा बुलंद कर लोकसभा चुनाव में उतरी केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं आए। हालांकि, बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन फिर सरकार बनाने में सफल रहा। नरेंद्र मोदी ने हैट्रिक लगाते हुए लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसी बीच आरएसएस की ओर से कुछ ऐसे बयान आए जिससे सवाल उठे कि क्या संघ और बीजेपी में सबकुछ ठीक है? ये चर्चा इसलिए शुरू हुई क्योंकि आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने बिना नाम लिए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भगवान राम की भक्ति करने वाली पार्टी अहंकारी हो गई थी, इसलिए 241 पर सिमट गई। इस चुनाव में बीजेपी का अहंकार ध्वस्त हो गया। जैसे ही ये कमेंट आया तो सियासी गलियारों में बीजेपी-आरएसएस में मतभेद की अटकलें तेज हो गईं। इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी कुछ ऐसी टिप्पणी की थी जिससे लगा कि वो भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन से कुछ खफा हैं। यही नहीं बीजेपी-आरएसएस के बीच मतभेद की चर्चा अब राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गई। पहले बताते हैं कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्या कहा था। लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद इसका विश्लेषण करते हुए नागपुर में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने पिछले दिनों टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि जो मर्यादा का पालन करते हुए काम करता है, गर्व करता है लेकिन अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों में सेवक कहलाने का अधिकारी है। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को नसीहत भी दी। उन्होंने मणिपुर हिंसा का भी जिक्र किया और कहा कि कर्तव्य है कि इस हिंसा को अब रोका जाए। संघ प्रमुख के इस बयान में कहीं न कहीं निशाना प्रधानमंत्री मोदी पर था क्योंकि उन्होंने कई मौकों पर खुद को प्रधान सेवक के तौर पर पेश किया था। चुनाव नतीजों के तुरंत बाद आए मोहन भागवत के कमेंट से सियासी घमासान तेज हुआ ही थी। इसके बाद आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर ने भी बीजेपी नेतृत्व की आलोचना की थी।

ऑर्गनाइजर ने लिखा कि लोकसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी के अति आत्मविश्वासी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आईना हैं। हर कोई भ्रम में था और किसी ने लोगों की आवाज नहीं सुनी। संघ के मुखपत्र पांचजन्य में भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन पर लेख छपा, जिसका शीर्षक था लोकसभा चुनाव 2024: सबक हैं और सफलताएं भी। इसमें भी बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए गए। इसी दौरान आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार का बयान आया जिसने मानो बीजेपी और संघ में चल रहे घमासान को सबके सामने रख दिया।

इंद्रेश कुमार ने कहा, ‘इन लोगों ने भगवान राम की भक्ति तो की थी, मगर इनमें धीरे-धीरे अहंकार आ गया। आज भगवान राम ने इनके अहंकार को खत्म कर दिया है। ये लोग इस चुनाव में प्रशंसनीय परिणाम नहीं दे पाए। शायद अब इन्हें लोकतंत्र की ताकत का एहसास हो चुका होगा। हालांकि, यह राम जी की ही कृपा थी कि भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बन सकी, लेकिन इसके बावजूद भी ये लोग राम जी कृपा को नहीं समझ पाए। शायद इसलिए जो शक्ति भाजपा को इस चुनाव में मिलनी चाहिए थी, वो राम जी ने अहंकार के कारण रोक दी।’

आरएसएस नेता ने कहा, ‘आश्चर्य है कि भगवान राम के विरोधी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर पाए। बेशक नंबर एक पर नहीं आ पाए, लेकिन नंबर दो पर बेहतर प्रदर्शन के साथ अपनी जगह मजबूत करने में सफल हुए। इसलिए हम सभी को एक बात समझ लेनी चाहिए कि प्रभु का न्याय विचित्र नहीं है, बल्कि बड़ा ही सत्य है। प्रभु की लीला अपरंपार है, जिसे इंसानी दिमाग नहीं समझ सकता। जिस पार्टी ने भगवान राम की भक्ति की उसे बेशक 241 सीट ही मिली, लेकिन वो सरकार बनाने में सफल हुई और जिन लोगों ने भक्ति नहीं की, वो अच्छा करने में सफल तो हुए, लेकिन सरकार बनाने से चूक गए। जिन लोगों के मन में राम जी को लेकर श्रद्धा नहीं थी, उन्हें 234 पर ही रोक दिया। प्रभु जी ने कहा कि यह तुम्हारा फल यही है, इसलिए मैं कहता हूं कि जो राम की भक्ति करे वो बिना अहंकार के करे और जो ना करे, तो उसका कल्याण प्रभु खुद कर देगा।’

इंद्रेश कुमार ने आगे कहा, ‘भगवान राम भेदभाव नहीं करते। सबको उसकी नीयत के आधार पर प्रतिफल देते हैं। राम जी सजा नहीं देते हैं और ना ही किसी को विलाप करने का मौका देते हैं। राम जी सबको न्याय देते हैं, देते थे और आगे भी देते रहेंगे। राम जी सदैव न्याय प्रिय रहे हैं। मैं आपको बता दूं कि भगवान राम ने 100 वर्षों के शासनकाल के बाद अश्वमेध यज्ञ किया। इसलिए यह यज्ञ हुआ कि कोई रोगी ना रहे, कोई अशिक्षित ना रहे, कोई बेरोजगार ना रहे। इसलिए भगवान 100 वर्षों के शासनकाल के बाद अश्वमेध यज्ञ करवाया करते थे, ताकि संपूर्ण राज्य में शांति बनी रहे। इसी यज्ञ के कारण भगवान राम 11 हजार सालों तक शासन करने में सफल रहे। दुनिया में आज तक कोई भी इतने वर्षों तक शासन नहीं कर सका।’

आरएसएस सूत्रों ने आगे कहा कि आरएसएस और भाजपा के बीच कोई दरार नहीं है। संघ का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्षी नेताओं समेत लोगों के एक वर्ग का दावा है कि भागवत की नागपुर में की गई टिप्पणी लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के बाद बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को एक संदेश है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘सच्चा सेवक कभी अहंकारी नहीं होता’। सूत्रों ने कहा कि ‘2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद भागवत ने जो भाषण दिए थे और इस बार का जो भाषण है, इनमें बहुत अधिक अंतर नहीं है। किसी भी संबोधन में राष्ट्रीय चुनावों जैसी महत्वपूर्ण घटना का संदर्भ होना लाजिमी है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन इसका गलत मतलब निकाला गया और भ्रम पैदा करने के लिए इसे संदर्भ से बाहर ले जाया गया। उनकी ‘अहंकार’ वाली टिप्पणी कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या बीजेपी के किसी नेता के खिलाफ नहीं थी।’

भले ही आरएसएस की ओर से भागवत और इंद्रेश कुमार के बयानों पर सफाई दी गई हो लेकिन विपक्षी नेताओं ने उनकी टिप्पणियों को हथियार बना लिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि भले ही ‘एक तिहाई’ प्रधानमंत्री की अंतरात्मा या मणिपुर के लोगों की बार-बार की पुकार भी उन्हें पिघला न पाई, शायद भागवत आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी को मणिपुर जाने के लिए राजी कर सकते हैं। फिलहाल आरएसएस ने बीजेपी संग मतभेद की खबरों से इनकार किया है, लेकिन जिस तरह से चुनाव नतीजों के बाद संघ ने तेवर कड़े किए हैं उसने सियासी गलियारे में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

आखिर क्या है वर्तमान में देश के मौसम का मिजाज ?

आज हम आपको बताएंगे कि वर्तमान में देश के मौसम का मिजाज क्या है! दिल्ली-एनसीआर में समेत देशभर के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत मिली है। कहीं वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से बारिश हो रही है, तो कहीं मॉनसून ने दस्तक दे दी है। आज मॉनसून यूपी के पूर्वी हिस्सों में दस्तक देगा। इसके अलावा बिहार के ज्यादातर हिस्सों को भी मॉनसून कवर कर सकता है। मौसम विभाग ने यूपी, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई है।राजधानी दिल्ली में दो दिनों से मौसम सुहावना बना हुआ है। शुक्रवार को राजधानी में रुक-रुक कर बारिश हुई, जिसके बाद से तापमान कम हो गया और लोगों को कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी राजधानी के आसमान में बादल छाए रहेंगे। दिन में बूंदाबांदी की भी संभावना है। इस बीच मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर भी अपडेट दिया है। IMD के अनुसार इस बार दिल्ली में अच्छी बारिश होगी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो जुलाई में ला नीना में बदल जाएगा। इससे मॉनसून में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। वहीं 28 से 30 जून के बीच दिल्ली में मॉनसून दस्तक दे सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार आज पूर्वी यूपी के कई जिलों में मॉनसून दस्तक दे सकता है। आईएमडी ने कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश को पूरी तरह से लू मुक्त घोषित कर दिया है। मौसम विभाग ने 22 जून से लेकर 26 जून तक सहारनपुर, मेरठ, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, खैरी, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, गाजीपुर, सोनभद्र, प्रतापगढ़, फतेहपुर, हमीरपुर, बांदा, झांसी, महोबा और ललितपुर समेत कई जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। ई है। बिहार में मॉनसून 20 जून को ही पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों में मॉनसून पूरे बिहार को कवर कर लेगा। IMD ने 25 जून तक कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। पूर्वानुमान के अनुसार, सक्रिय मॉनसून और कम दबाव के प्रभाव से उत्तर बिहार के अधिकतर जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है। पूर्वानुमान में सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिलों में भारी बारिश की उम्मीद है।

कर्नाटक के तटीय और दक्षिणी जिलों में अनेक स्थानों पर अगले पांच दिनों के दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अनुमान है जिसके मद्देनजर मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गयी है और ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बताया है कि राज्य के तटवर्ती दक्षिण कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ जिलों में भारी बारिश होने की आशंका है।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी गर्मी से राहत मिली है। 24 से 27 जून तक हिमाचल प्रदेश में गरज चमक के साथ तेज हवाएं चलती रहेंगी।भोपाल समेत मध्य प्रदेश के 26 जिलों में रविवार को मॉनसून पहुंच चुका है। इसके बाद एमपीवालो को गर्मी से काफी राहत मिली है। आज भी एमपी के कई जिलों में बारिश का अलर्ट है। इनमें बैतूल, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिला में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राजस्थान की बात करें तो यहां जयपुर समेत कई राज्यों में मॉनसूनी बारिश हुई है। अभी यहां मॉनसून ने दस्तक नहीं दी है, लेकिन प्री-मॉनसून ने पूरा माहौल बना दिया है। उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में आज मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की है कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही यात्रा के लिए निकले। पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में हीटवेव की संभावना है पर यह बहुत परेशान नहीं करेगी। 27 जून तक यहां ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है। बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि इन जिलों में अनेक स्थानों पर सड़कों पर पानी भरने से आवागमन बाधित हुआ है। इसके अलावा दक्षिणी कर्नाटक के कोडागु, शिवमोग्गा, चिकमंगलूर और हसन जिलों में भी लगभग एक सप्ताह से भारी बारिश हो रही है। कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। कोडागु जिले में भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हैं।

क्या वर्तमान में माता-पिता करते हैं बच्चों की जरूरत से ज्यादा चिंता?

वर्तमान में माता-पिता बच्चों की जरूरत से ज्यादा चिंता करते हैं! हमारे अंदर एक उधेड़बुन लगी रहती है। हम हर दुख से खुद को बचाना चाहते हैं और अपने परिवार को भी। इसके लिए ढेर सारी कोशिशें भी करते हैं बल्कि ज्यादातर बड़े प्रयास ही इसलिए होते हैं। खूब मन लगाकर पढ़ना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पास होना, अच्छे पैकेज वाली नौकरी तलाशना या कोई बिजनेश करना। और फिर शादी होते ही लाइफ सेट हो जाएगी… यह हम सोचते हैं। वह मुकाम आ सकता है, जब हम पाते हैं। कि हमारी जिंदगी में अब कोई अनिश्चितता नहीं है, कम से कम पैसे के मामले में। लेकिन जिंदगी में सब कुछ सेट हो जाए, सब कुछ पहले से तय तरीके से आगे बढ़ता रहे तो क्या यह अच्छी स्थिति होगी? यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। आज यह सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा में है। सिंगापुर में रहने वाले भारतीय मूल के एक शख्स का X पर एक पोस्ट सामने आया। इसमें उन्होंने लिखा है कि हमारी जिंदगी बिलकुल परफेक्ट तरीके से चल रही है लेकिन हमें लगता है कि इससे हमारी बेटी बड़ी सॉफ्ट हो गई है। खुद हम भी भूल गए है कि भारत में किस तरह की बदइंतजामियां होती हैं। असल में हम भी सॉफ्ट हो गए हैं। यही वजह है कि हम बेंगलुरु जा रहे हैं ताकि मेरी बेटी जिंदगी की अनिश्चितताओं को समझ सके। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर ढेरों प्रतिक्रियाएं हुईं।

इस फैसले से याद आता है सावजी ढोलकिया का किस्सा। वह गुजरात के हीरा कारोबारी हैं। इनकी हजारों करोड़ की कंपनी नी है और उसकी दुनिया भर में मौजूदगी है। सावजी अपने कर्मचारियों को बोनस में कार और फ्लैट देने के लिए जाने जाते हैं। कुछ साल पहले उनका एक फैसला बड़ा चर्चित हुआ था। इन्होंने अपने इकलौते बेटे को 1 महीने के लिए कोच्चि जाने के लिए प्रोत्साहित किया। मकसद यह था कि उनका बेटा वहां गुमनाम तरीके से जिंदगी बिताए। वह जाने कि गरीब नौकरी और पैसे के लिए कैसे संघर्ष करते हैं। सावजी के 21 साल के बेटे द्रव्य ढोलकिया तब अमेरिका से MBA कर रहे थे। छुट्टियों में घर आए थे। वह 3 जोड़ी कपड़े लेकर कोच्चि चले भी गए। पिता ने 7000 रुपये दिए, लेकिन सिर्फ किसी इमरजेंसी में खर्च के लिए। द्रव्य न तो पिता की पहचान का इस्तेमाल कर सकते थे, न मोबाइल फोन इस्तेमाल कर सकते थे, न 7000 रुपये। एक जगह पर एक हफ्ते से ज्यादा काम नहीं करना था। थोड़े समय के लिए ही सही, उन्होंने जिंदगी के उतार-चढ़ाव को देखा।

आज हम अपने इर्द-गिर्द नजर दौड़ाएं तो क्या देखते हैं? कई लोग मिलेंगे जो अपनी जिंदगी में बेहद सफल माने जाते हैं। इस सफलता के पीछे बड़ा संघर्ष भी होता है। यही व्यक्ति एक अजब-सी इच्छा पाल लेता है कि मेरी फैमिली को संघर्ष न करना पड़े। पत्नी या बच्चे कहीं कार में जाएं तो वे AC कार में बैठें और सीधे मॉल, स्कूल या कहीं और पहुंचें। रास्ते में क्या आया, क्या गया… इस पर ध्यान नहीं जाता। बरसों तक शहर के कई कोनों में घूम आते हैं। लेकिन किसी दिन पत्नी को अकेले मॉल, स्कूल या कहीं और से पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए घर लौटना पड़े तो… नहीं, यह नहीं हो पाएगा। शहर के जिन रूटों और चौराहों से बरसों गुजरते रहे, उनका नाम तक पता नहीं।

बाजार में ताजा सब्ज़ियों की पहचान करना, बैंक की कागजी कार्यवाही को पूरा करना, दोस्ती-रिश्तेदारी में परंपराओं को निभाना… इन सब बातों की सबसे अच्छी पढ़ाई परिवार में ही मिल सकती है। बतौर माता-पिता हम सारे गैजट्स बच्चों के हाथ में थमाकर समझ रहे हैं कि सारी खुशियां कदमों में बिछा दी हैं। हर वीकेंड मॉल घुमाकर, अच्छे रेस्तरां में खाना खिलाकर बेस्ट पापा या मम्मी का गुमान पाल सकते हैं। कभी यह सोचते भी नहीं कि अचानक अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आए तो हमारा जवान होता बेटा हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम की बारीकियों को समझ पाएगा भी या नहीं। सुख के दिनों में हम सोचते हैं, बुरी घटनाओं के बारे में पहले से क्या सोचना!

हम परिवार के लिए हर सुविधा उसके कदमों में बिछा देना चाहते हैं। धीरे-धीरे परिवार भी यह समझने लगता है कि हमें किसी चीज के लिए संघर्ष करने की जरूरत नहीं। समस्या उसके बाद शुरू हो जाती है। समाज में जो हीरो अक्सर सामने आते हैं, वे उन तबकों से उभरते हैं, जो उपेक्षित रहे, जिन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलीं, चाहे वे पढ़ाई में हों, खेलों में हों, रोजगार में हों या जीवन के दूसरे क्षेत्रों में। फिर हम उनसे अपनी तुलना करते हैं और पाते हैं कि जो सुख-सुविधाएं हमने बटोरीं, वही हमारे बच्चों की भविष्य की तरक्की में बाधाएं बन गईं।

आज समाज में पैसे के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की जो होड़ है, वह सिर्फ अपनी जिंदगी सुरक्षित बनाने की होड़ नहीं है। वह दौड़ इसलिए भी है कि हमारी 7 पीढ़ियों को संघर्ष न करना पड़े। इसे सुनिश्चित करने के लिए किसी को भ्रष्टाचार भी करना पड़े तो वह करता है। जब इन घरों में संपत्ति की भरमार हो जाती है तो क्या खुशियां बरसने लगती हैं? नहीं, तब नई समस्याएं सामने आती हैं। नई पीढ़ी पैसे को जिस सहजता से खर्च करने लगती है, उससे उस पुरानी पीढ़ी को तकलीफ भी महसूस होने लगती है, जिसने सब अपनी मेहनत से अर्जित किया। इससे घरों के अंदर दो पीढ़ियों का टकराव शुरू हो जाता है। नई पीढ़ी यह समझ नहीं पाती कि आंख बंद कर खर्च करने में बुरा क्या है?

हर साल देश में लाखों युवा अमेरिका, कनाडा जाकर वहां बसना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि वहां सपने पूरे हो सकते हैं। निश्चित रूप से बड़ी संख्या में युवा भारत लौटकर नहीं आते। भारत में जीवन की कठिनाइयों की निंदा करना आसान हो सकता है। उन कठिनाइयों में जीकर उन्हें आसानी में तब्दील करना अलग बात है। फिल्म ‘स्वदेश’ की कहानी इस सिलसिले में याद करने लायक है। NRI मोहन भार्गव अमेरिका में रहता है और वहां की स्पेस एजेंसी NASA में प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर काम करता है। मोहन एक दफे भारत आता है तो यहां गांव की परेशानियों से रूबरू होता है। वह कुछ का समाधान भी निकाल लेता है। फिर वह NASA के काम से वापस अमेरिका चला जाता है। वहां उसका मन नहीं लगता और वह भारत आकर बस जाता है।

कठिन संघर्ष हमें अपने डर का सामना करने को मजबूर करते हैं। ये हमें मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत व्यक्ति बनाते हैं। हमें जो लाइफ स्किल मिलती है, उसे भविष्य की चुनौतियों के लिए आजमाया जा सकता है। यह बात भारत में जीने के लिए ही नहीं, दुनिया के किसी भी कोने के लिए सही हो सकती है। जीवन एक असाधारण यात्रा है। इसमें आशाएं हैं तो निराशाएं भी हैं। जीत हैं तो नाकामियां भी हैं। हम जिन संघर्षों का सामना करते हैं, उनके जरिए ही हम असल में अपनी ताकत पाते हैं। यही संघर्ष हमें लचीलापन देते हैं, जिससे विकास की क्षमता बढ़ती है। चुनौतियां पहली बार में डरावनी लग सकती हैं, लेकिन वे हमारे अंदर की शक्ति को आकार देती हैं। संघर्ष के बिना जीवन मजेदार नहीं है। हमारे लिए जरूरी है कि हम सामने आने वाली प्रतिकूलताओं को खुशी से स्वीकार करें।

क्या देश में उमस ने कर दी है परेशानी खड़ी?

वर्तमान में देश में उमस ने परेशानी खड़ी कर दी है! जून का महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। बिहार-एमपी में जहां मॉनसून ने एंट्री ले ली है, तो वहीं भीषण गर्मी से झुलसी दिल्ली को अब भी अच्ची बारिश का इंचजार है। हालांकि राहत की बात यह है कि देश की राजधानी दिल्ली में अब लू के लौटने की संभावना नहीं है और आगे तेज हवाएं और हल्की बारिश लोगों को राहत पहुंचाती रहेगी। पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में हीटवेव तो है लेकिन यह उतना परेशान नहीं करेगी। यूपी में भी कई जिले बारिश से भीग रहे हैं तो वहीं बिहार में मॉनसून ने प्रचंड गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है। दिल्लीवालो के लिए सबसे राहत की बात यह है कि अब यहां लू नहीं लौटेगी। तेज हवाएं और हल्की बारिश या कुछ समय के लिए बौछारें पड़ेंगी। बारिश से उमस वाली गर्मी जरूर परेशान कर सकती है। उमस वाली गर्मी लू की गर्मी से अधिक खतरनाक मानी जाती है। पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को बादल छाए रहेंगे। आंधी और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। आंधी के दौरान हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। अधिकतम तापमान 39 और न्यूनतम 30 डिग्री तक रह सकता है। इसके बाद 25 से 29 जून तक बादल छाए रहेंगे। आंधी और बारिश की संभावना है। बारिश हल्की और कुछ समय के लिए बौछार की तरह होगी। आंधी के दौरान हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है।जबकि अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली, गोपालगंज, भागलपुर, बांका और आस-पास के हिस्सों में बारिश हो सकती है। मंगलवार से बिहार में बारिश की गतिविधियां और बढ़ने की उम्मीद है। इस दौरान अधिकतम तापमान 39 से 42 और न्यूनतम 28 से 31 डिग्री तक रह सकता है। प्राइवेट एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसून 27 से 30 जून के बीच राजधानी में एंट्री ले सकता है।

यूपी में भी बारिश मेहरबान है। यहां बारिश और गर्मी दोनों का सिलसिला जारी है। कहीं तेज बारिश हो रही तो कहीं अभी भी अच्छी गर्मी पड़ रही है। लखनऊ में भी आज हल्की बरसात होने की संभावना है। इसके बाद तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग की मानें तो 24 जून यानी आज पश्चिमी यूपी में कहीं कहीं और पूर्वी यूपी में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके साथ ही 25 जून को पश्चिमी यूपी में कुछ जगहों पर और पूर्वी यूपी में अनेक स्थान पर बारिश होने के आसार है। हालांकि प्रयागराज में 40.7℃, फतेहगढ़ में 40.4℃, आगरा ताज में 40.2℃, उरई में 40.8℃, बस्ती में 40℃ और लखनऊ में 39.8℃ तापमान दर्ज किया जा रहा है।

पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी गर्मी से राहत मिली है। 24 से 27 जून तक हिमाचल प्रदेश में गरज चमक के साथ तेज हवाएं चलती रहेंगी। उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में आज मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों से अपील की है कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही यात्रा के लिए निकले। पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ में हीटवेव की संभावना है पर यह बहुत परेशान नहीं करेगी। 27 जून तक यहां ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है। बारिश को लेकर मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।

भोपाल समेत मध्य प्रदेश के 26 जिलों में रविवार को मॉनसून पहुंच चुका है। इसके बाद एमपीवालो को गर्मी से काफी राहत मिली है। आज भी एमपी के कई जिलों में बारिश का अलर्ट है। इनमें बैतूल, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिला में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राजस्थान की बात करें तो यहां जयपुर समेत कई राज्यों में मॉनसूनी बारिश हुई है। अभी यहां मॉनसून ने दस्तक नहीं दी है, लेकिन प्री-मॉनसून ने पूरा माहौल बना दिया है। बिहार में मॉनसून पहुंच भी गया है और खूब बारिश भी करवा रहा है।आंधी के दौरान हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान 39 से 42 और न्यूनतम 28 से 31 डिग्री तक रह सकता है। प्राइवेट एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसून 27 से 30 जून के बीच राजधानी में एंट्री ले सकता है। अभी मौसम विभाग के अनुसार यह उत्तरी सीमा के रक्सौल को कवर कर चुका है। एक-दो दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में पहुंचने की संभावना है। जबकि अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, वैशाली, गोपालगंज, भागलपुर, बांका और आस-पास के हिस्सों में बारिश हो सकती है। मंगलवार से बिहार में बारिश की गतिविधियां और बढ़ने की उम्मीद है।

हिना खान को स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला.

कैंसर एक महामारी बनता जा रहा है. विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित भारतीय महिलाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सितारों को छोड़ा नहीं गया है. इससे पहले मनीषा कोइराला और सोनाली बेंद्रे को लाइलाज कैंसर का पता चला था। उन्होंने बीमारी पर काबू पा लिया है और सामान्य जीवन में लौट आए हैं। इस बार हिना खान.

हिना खान छोटे पर्दे का एक लोकप्रिय चेहरा हैं। हाल ही में हिना की फिजिकल हेल्थ को लेकर सवाल उठाए गए थे. दरअसल हिना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वह क्या पहनते हैं, कैसे बाल काटते हैं, किस कपड़े के साथ कौन सी ज्वेलरी पहनते हैं, उनके जूते कैसे हैं – सारी जानकारी उनके फॉलोअर्स को इंस्टाग्राम के जरिए बताई जाती है। उनके हालिया पोस्ट के बाद से अटकलें तेज हो गई हैं. बीमार हैं एक्ट्रेस! पिछले कुछ दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि हिना लाइलाज कैंसर से पीड़ित हैं। ये सब उनके फैंस कह रहे थे. इस बार हेना ने खुद अपनी बीमारी की जानकारी दी। स्तन कैंसर से पीड़ित अभिनेत्री. फिलहाल यह बीमारी तीसरे चरण में है।

अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर एक बयान में लिखा, ”पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। मेरे पास अपने सभी प्रशंसकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण समाचार हैं। मुझे स्तन कैंसर, स्टेज तीन का पता चला है। तमाम बाधाओं के बावजूद, मैं कहता हूं कि मैं ठीक हूं। मैं इस बीमारी से उबरने के लिए प्रतिबद्ध हूं।’ सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि इस स्थिति में मेरी व्यक्तिगत गोपनीयता का सम्मान करें। मैं सभी को बता रहा हूं कि इस स्थिति में मेरा परिवार और प्रियजन मेरे साथ हैं।

छोटे पर्दे की अभिनेत्रियों में हिना खान के आउटफिट हमेशा चर्चा में रहते हैं। सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स की संख्या किसी भी बॉलीवुड एक्ट्रेस को टक्कर दे सकती है। हिना क्या पहनती हैं, अपने बाल कैसे काटती हैं, किस ड्रेस के साथ कौन से गहने पहनती हैं, कौन से जूते पहनती हैं – ये सारी जानकारी वह कभी-कभी अपने फॉलोअर्स को इंस्टाग्राम के जरिए बताती हैं। अभिनेत्री की सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक भी जासूसी करते हैं। इससे संदेह पैदा होता है. हिना बीमार है. वह कैंसर से पीड़ित हैं. अस्पताल में भर्ती अभिनेत्री. हालांकि, हेना ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि ये अटकलें एक्ट्रेस के कई पोस्ट से शुरू हुईं.

हिनाके ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर लिखा, ”हमारी कहानी का कोई अंत नहीं है। संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, योद्धा अपने जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करेगा। मैंने सब कुछ अल्लाह पर छोड़ दिया।” एक्ट्रेस की इस पोस्ट के तहत कई लोगों ने उनके ठीक होने की कामना की। हालांकि, उन्होंने इस अटकल पर कोई टिप्पणी नहीं की. हालांकि, कुछ दिन पहले एक डॉक्टर की पोस्ट वायरल हुई थी. वहां उन्होंने लिखा, ”एक मशहूर नेटीजन अस्पताल में आए. वह थायराइड कैंसर से पीड़ित हैं। मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसके साथ ऐसा होगा.” पूरे हालात में धंदे हिना के फैंस.

खराब मूड के कारण हिना खान को सीरीज से बाहर कर दिया गया था. इस बार सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है के प्रोड्यूसर राजन शाही ने उनके बारे में खुलकर बात की। इस सीरीज से हिना रातोंरात मशहूर हो गईं। कहानी लगातार आठ वर्षों तक मुख्य भूमिका (अक्षरा) निभाने के बाद पटकथा के लिए शिवांगी जोशी के चरित्र (अक्षरा की बेटी नायरा) के इर्द-गिर्द घूमती है। इसके बाद सीरीज के सेट पर हादसा हो गया.

हिना खान ने सीरियल से नाम वापस ले लिया है, इस खबर से हिंदी टेलीदुनिया में हलचल मची हुई है। हिना ने मीडिया को बताया कि स्क्रिप्ट में उनका रोल अब अहम नहीं है. ऐसी कोई बात नहीं है इसलिए वो हट गये. लेकिन निर्माता राजन शाही की आवाज अलग है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ”दिन-ब-दिन सेट पर हिना खान की सनक बढ़ती जा रही थी। एक सीन में शिवांगी का समर्थन करते हुए कुछ संवाद थे। लेकिन हिना ने वो डायलॉग बोलने से इनकार कर दिया. मैंने कहा, कुछ डायलॉग जरूर बोलने चाहिए. हिना बाद में सेट छोड़ सकती हैं.” हिना ने उस दिन शाम तक मेकअप वैन में समय बिताया. इसके बाद वह सेट छोड़कर चले गये. प्रोडक्शन ने एक्ट्रेस को साफ कर दिया कि इस सीरियल में उनका सारा काम खत्म हो चुका है. अब उन्हें शूटिंग फ्लोर पर नहीं आना पड़ेगा. लेकिन घटना के अगले दिन एक्ट्रेस दोबारा शूटिंग फ्लोर पर नजर आईं. उन्होंने शूटिंग के दौरान स्क्रिप्ट के मुताबिक डायलॉग बोले. लेकिन इसके बाद भी प्रोड्यूसर ने अपना फैसला नहीं बदला. उन्होंने हिना के किरदार को सीरियल से हटा दिया और उनसे बातचीत करना बंद कर दिया. सवाल उठता है कि क्या हिना शिवांगी को लेकर असुरक्षा की भावना से ग्रस्त थीं.

एनडीए चाहता है कि उपसभापति का पद उनके हाथ में रहे.

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नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले पांच वर्षों के दौरान लोकसभा में कोई उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया। अगर नई लोकसभा में डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति भी हो जाती है तो उस पद पर एनडीए का कोई सांसद ही नजर आ सकता है. आमतौर पर डिप्टी स्पीकर का पद विपक्षी खेमे के लिए छोड़ा जाता है. लेकिन बीजेपी उस परंपरा को किनारे रखते हुए स्पीकर की तरह डिप्टी स्पीकर का पद भी एनडीए के पास रखना चाहती है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या उपसभापति का पद बीजेपी के पास रहेगा या फिर तेलुगु देशम, जेडीयू जैसे किसी को बाहर रखा जाएगा.

“इंडिया” की मांग है कि अगर वे डिप्टी स्पीकर पद के विरोधियों को छोड़ दें तो वे स्पीकर पद के लिए बीजेपी के उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए सहमत हों. मोदी सरकार नहीं मानी. तो ओम बिड़ला के खिलाफ कांग्रेस के के सुरेश को उम्मीदवार बनाया गया. ‘भारत’ के फैसले के बाद वे उपसभापति की नियुक्ति की मांग करेंगे और इसे विपक्ष पर छोड़ देंगे. कांग्रेस का तर्क था कि जवाहरलाल नेहरू ने डिप्टी स्पीकर का पद शिरोमणि अकाली दल के नेता सरदार हुकुम सिंह के लिए छोड़ दिया था. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिंह राव, मनमोहन सिंह से लेकर मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में विपक्ष आजाद हुआ. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक सुझावात्मक ट्वीट में लिखा, ”प्रोटेम स्पीकर एनडीए, स्पीकर एनडीए. यदि डिप्टी स्पीकर सही अनुमान लगाता है तो कोई पुरस्कार नहीं है। इस बीच तेलुगू देशम और जेडीयू सांसदों ने कल और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. सड़क की मांग को लेकर सड़क जाम कर रहे हैं. और उस नाकेबंदी में फंस गए राज्य के डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी. पुलिस के अनुरोध और आवेदन का कोई असर नहीं होने पर राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष को कार घुमाकर दूसरी सड़क से जाना पड़ा. जामकर्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक जाम जारी रहेगा.

बीरभूम के बोलपुर के मकरमपुर में स्थानीय निवासियों ने सड़क जाम कर दी. उस घेराबंदी में डिप्टी स्पीकर व रामपुरहाट के तृणमूल विधायक आशीष फंस गये. सूचना मिलने के बाद बोलपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने जाम लगाने वालों से आशीष की कार छोड़ने की अपील की. कार में बैठकर आशीष ने खुद ही कुछ लोगों को बुला लिया। लेकिन घेरने वाले अड़े हुए हैं. नतीजतन, उन्होंने कार मोड़ ली और दूसरे रास्ते से गंतव्य के लिए रवाना हो गये. उपसभापति ने कहा, ”मैं कहने जा रहा था कि कोलकाता में बैठक है. वे सड़क जाम कर रहे हैं. लेकिन हम बंद, नाकेबंदी का समर्थन नहीं करते. मैं यहां आया और इस समस्या के बारे में सुना. जाम लगाने वालों से बात हो रही है. मैं मंत्री जी से भी बात कर रहा हूं. यह बेहद महत्वपूर्ण सड़क पिछले कुछ महीनों से खस्ताहाल है। इस सड़क के माध्यम से बोलपुर से एक दिशा में सैथिया और दूसरी दिशा में लवपुर तक पहुंचा जा सकता है। राजग्राम की यह अति महत्वपूर्ण सड़क जीर्णोद्धार के अभाव में महीनों से खराब पड़ी है। ऐसे में इस सड़क पर यात्रा करने वाले कई लोगों को परेशानी होती है. निवासियों की शिकायत है कि प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क की मरम्मत नहीं की, जबकि उन्हें बार-बार इस बारे में सूचित किया गया था. इस दिशा में खराब सड़कों पर वाहन चलाने के दौरान आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। आसपास कई स्कूल हैं. उस स्कूल से आने-जाने के रास्ते में टोटो एक दुर्घटना का शिकार हो जाता है। घेराव करने वालों में से एक और स्थानीय निवासी पुष्पेंदु रॉय ने कहा, ”आस-पड़ोस के लोग आज सड़क अवरुद्ध कर रहे हैं. सड़क की बदहाली आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। मजबूरन हमने ब्लॉक करने का फैसला किया. मैंने डिप्टी स्पीकर सर को भी घटना बताई. सर ने हमारे सामने कुछ कॉल किये. जब तक पीडब्ल्यूडी के लोग आकर आश्वासन नहीं देंगे, तब तक जाम जारी रहेगा.

विधायक क्षेत्र में नजर नहीं आ रहे हैं. रामपुरहाट के विधायक आशीष बनर्जी जब अपने निर्वाचन क्षेत्र देउचा-पचामी गए तो उन्हें ऐसी शिकायतें सुनने को मिलीं। इतना ही नहीं एक युवक ने विधायक की गाड़ी रोककर उनसे सीधे सवाल कर लिया. अपने गुस्से के बारे में बताएं. युवक ने देउचा-पंचमी के आदिवासी ग्राम परिषद का सदस्य होने का भी दावा किया। उनकी विधायक से बहस भी हुई. इसके बाद स्थानीय लोगों ने युवक को हटाया. फिर भी गुस्सा कम नहीं हुआ. युवक का सवाल, ‘क्या विधायक धूमकेतु हैं?’

आशीष विधानसभा के उपाध्यक्ष भी हैं. मंगलवार को वह तृणमूल के ‘दीदी की सुरक्षा कवच’ कार्यक्रम में ‘दीदी के दूत’ बनकर देउचा-पंचमी के भरकटा इलाके में गये थे. वहां सुशील मुर्मू नामक युवक ने उसकी कार रोकी. विधायक कार की आगे बायीं सीट पर बैठे थे. सुशील ने उनके सामने जाकर पूछा, ”इतनी देर तक कहां थे?” गुस्साए युवक ने विधायक से कहा, ”आप उल्टा क्यों कह रहे हैं?” तो क्या होता है? अब तुम्हें आना मंजूर है या नहीं?” इसी बीच कोई सुशील से कहता सुनाई देता है, ”चले जाओ, चले जाओ.” इससे सुशील और भी नाराज हो गए. उन्होंने भी पलटवार करते हुए कहा, ‘क्या भगवन्?’ एक विधायक इस तरह बात करते हैं. देखो…” तभी एक शख्स ने सुशील को रोकने की कोशिश की. लेकिन उसने बिना सुने ही आशीष से दोबारा कहा, “तुम ये सब बातें क्यों कहते हो?” मैं यहां से क्यों साझा करूं? ”मैं यहीं का निवासी हूं.”

विधायक के जाने के बाद भी सुशील ने इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा, ”विधायक एक धूमकेतु है. वह कभी नजर नहीं आता. पंचमी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ है. यहां पानी की समस्या है. धूल की भी समस्या है. उसने मुझे धमकी दी. क्या हम इंसान नहीं हैं? वह इतने दिनों तक कहाँ था? वह एक राजदूत हो सकते हैं. लेकिन हम उसे नहीं देखते.

कोटा में NEET अभ्यर्थी की मौत, राजस्थान में इस साल 12 मामला.

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राजस्थान के कोटा में एक और आत्महत्या की घटना घटी. 17 साल के एक छात्र की मौत हो गई. वह पिछले दो साल से कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इस आत्महत्या का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है. इस बात को लेकर भी असमंजस की स्थिति है कि छात्र ने इस साल नेट परीक्षा दी या नहीं.

छात्र कोटा के एक कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहा था. वह झारखंड से कोटा पढ़ाई करने गये थे. हॉस्टल में रहता था. छात्र के परिवार ने कहा कि पिछले बुधवार से उससे फोन पर संपर्क नहीं हो सका है. गुरुवार को छात्र के माता-पिता ने तुरंत हॉस्टल में फोन किया। उस वक्त हॉस्टल अधिकारी भी हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि बुधवार रात से छात्र को नहीं देखा गया है. उसने घर भी नहीं छोड़ा. इसके बाद वह उनके घर के सामने चिल्लाने लगा. लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. हॉस्टल के कमरे का दरवाजा तोड़कर छात्र का लटकता हुआ शव बरामद किया गया. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर गयी. इस संबंध में दादाबाड़ी थाना प्रभारी नरेश मीणा ने कहा, ”वह छात्र NEET की तैयारी कर रहा था. एक स्थानीय कोचिंग सेंटर में पढ़ाई की. लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि क्या उन्होंने इस वर्ष परीक्षा दी थी, और यदि हां, तो उन्हें परिणाम कैसे मिला। परिजन भी इस बारे में कुछ पुष्टि नहीं कर सके। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या छात्र परीक्षा परिणाम को लेकर मानसिक अवसाद से पीड़ित था. घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. छात्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. इस संबंध में उसके सहपाठियों से भी पूछताछ की जाएगी।

इस मामले में हॉस्टल अथॉरिटी की भूमिका पर सवाल उठाया गया है. क्योंकि, पिछले कुछ महीनों में आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद स्थानीय जिला प्रशासन ने कोटा के सभी हॉस्टलों में स्प्रिंग-फैन लगाने का फैसला किया है. ताकि पंखे पर लटक कर आत्महत्या करने की प्रवृत्ति कम हो जाये. लेकिन उस हॉस्टल में ये नहीं था. पुलिस उस संबंध में अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी.

इसके साथ ही इस साल कोटा में 12 छात्रों की आत्महत्या की खबर सामने आई। पिछले साल कोटा में कुल 27 छात्रों ने आत्महत्या की थी. सभी लोग किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से कोटा गए थे। कोटा में जिस तेजी से आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, उससे प्रशासन चिंतित है. राजस्थान के कोटा में एक एनआईटी अभ्यर्थी ने नतीजे घोषित होने के अगले दिन ही आत्महत्या कर ली. पुलिस ने शुरू में कहा कि उसने एक बहुमंजिला इमारत की दसवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक का नाम बागीशा तिवारी है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार बागीशा नीट की तैयारी के लिए कोटा आई थी। एक बहुमंजिला अपार्टमेंट में किराये पर रहता था। उस फ्लैट में बागीशा की मां और भाई उसके साथ रहते थे। वे आवास की पांचवीं मंजिल पर रहते थे। बागीशा ने इसी साल नेट परीक्षा दी थी. उस परीक्षा के नतीजे मंगलवार को जारी किये गये. अगले दिन बुधवार को बागीशा आवास के नीचे लहूलुहान अवस्था में पड़ी मिली। पुलिस ने बताया कि जब उसे बचाया गया और अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बागीशा मध्य प्रदेश के रीबा जिले की रहने वाली है। उसका भाई बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। वह संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है। बागीशा के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह भी उनमें कोई असामान्यता नजर नहीं आई। लेकिन पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक किसी को अंदाजा नहीं था कि बागीशा इतना बड़ा फैसला ले लेगी. शुरुआत में पुलिस को पता चला कि बागीशा ने आवास की दसवीं मंजिल से छलांग लगा दी है. पुलिस को पता चला कि आवास के कुछ लोगों ने उसे छत की ओर जाते देखा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि विदिशा ने आत्महत्या क्यों की।

कोटा में एक के बाद एक नेट परीक्षार्थियों की आत्महत्या का मामला सामने आ रहा है. जनवरी से अब तक 10 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं. पिछले साल 26 छात्रों ने आत्महत्या की थी. युवक 23 दिन पहले कोटा से लापता हो गया था. आख़िरकार वह मिल गया. युवक के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे गोवा से बचाया। आरोप है कि पुलिस निष्क्रिय थी. परिवार को इस संबंध में सक्रिय होना होगा। युवक 23 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा कर रहा है.

युवक राजस्थान के सवाई माधोपुर इलाके का रहने वाला है. उन्हें नेट परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा भेजा गया था। कुछ दिन पहले वह नीट की परीक्षा देने के बाद वहां से गायब हो गया. उन्होंने घर के लिए एक पत्र भी लिखा. कहा कि किसी को उनकी चिंता नहीं करनी चाहिए। युवक ने पत्र में यह भी कहा कि वह पांच साल बाद घर लौटेगा. वह इसी महीने की 6 तारीख को कोटा से फरार हो गया था.

कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी का माइक बंद करने का आरोप लगाया, जब उन्होंने NEET पेपर लीक का मुद्दा उठाया।

फिर राहुल की ‘आवाज़’? पिछले साल मार्च में राहुल ब्रिटिश संसद के सदस्यों के एक समूह के साथ चर्चा बैठक में भाग लेने के लिए लंदन गए थे। वहां उन्होंने लोकसभा में अपना माइक बंद होने की शिकायत की. लोकसभा में फिर राहुल गांधी द्वारा माइक्रोफोन बंद करने की शिकायत आई। शुक्रवार को लोकसभा सत्र का एक वीडियो क्लिप कांग्रेस द्वारा एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया था। इसमें राहुल स्पीकर ओम बिरला से माइक चालू करने के लिए कहते सुनाई दे रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि राहुल लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार पर बोलने गए थे. उस वक्त उनका माइक ‘जानबूझकर’ बंद कर दिया गया था. जब राहुल ने इस ओर ध्यान दिलाया तो स्पीकर ओम ने कहा कि उन्होंने सांसद का माइक्रोफोन बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है. हालांकि, इसके बाद उन्होंने NEET प्रश्न के लीक होने पर बहस की मांग को एक तरह से खारिज कर दिया और कहा, ‘चर्चा राष्ट्रपति के भाषण पर होनी चाहिए. अन्य मुद्दों को सदन में दर्ज नहीं किया जाएगा.” वहां बात करते समय उसे पता चला कि माइक ख़राब है. इसके बाद राहुल ने कहा, ‘लेकिन भारतीय संसद में माइक खराब नहीं हुआ है. बंद कर दिया। बहस की आवाज दबा दी गई है.” बीजेपी ने विदेश में उनके बयान को ‘देश का अपमान’ करार दिया. कांग्रेस की ओर से जवाबी शिकायत की गई कि नोटबंदी, जीएसटी, चीनी आक्रामकता जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं होने दी गई। मोदी सरकार ने बार-बार माइक बंद कर विपक्ष की ‘आवाज़ दबाई’ है.

संसद में फिर आपातकाल का मुद्दा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बाद इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू. गुरुवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ”1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है.”

राष्ट्रपति मुर्मू ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की सरकार की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद द्वारा लगाए गए आपातकाल से देश में अराजकता फैल गई थी। उनके शब्दों में, ”उस दिन की घटना संविधान पर सीधा, सबसे बड़ा हमला थी. लोकतंत्र को कलंकित करने का ऐसा प्रयास निंदनीय है.”

इस बार अध्यक्ष मुर्मू ने संविधान का मुद्दा उठाया और बिना नाम लिए कांग्रेस को याद दिलाया कि राहुल की दादी ने पहले भी देश में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे. संयोग से, यह सरकार ही है जो संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद में राष्ट्रपति के लिखित संबोधन का ‘विषय’ तय करती है।

 

राष्ट्रपति के भाषण के दौरान बीजेपी और सरकार पक्ष के सांसद जयकार करते दिखे. दूसरी ओर, विपक्षी बेंचों की ओर से विरोध प्रदर्शन हुआ। पिछले तीन दिनों से कभी संसद के बाहर तो कभी ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 50 साल पहले की आपात स्थिति को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है. बुधवार को लोकसभा में दूसरी बार अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद ओम ने सीधे आपातकाल की आलोचना की और इसे संसद के मिनटों में दर्ज किया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव को याद दिलाना चाहते थे लोकसभा में शपथ ग्रहण के दौरान संविधान दिखाकर लोकतांत्रिक परंपरा का परिचय दिया। इस बार अध्यक्ष मुर्मू ने संविधान का मुद्दा उठाया और बिना नाम लिए कांग्रेस को याद दिलाया कि राहुल की दादी ने पहले भी देश में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे. संयोग से, यह सरकार ही है जो संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद में राष्ट्रपति के लिखित संबोधन का ‘विषय’ तय करती है।

दरअसल, पिछले दस सालों में विपक्ष ने मोदी पर अघोषित आपातकाल लगाने का आरोप लगाया है. केंद्रीय जांच एजेंसियों को प्रभावित कर विपक्ष को घेरने, मीडिया में डंडा घुमाने, संसद में विपक्ष की आवाज दबाने जैसे कई आरोप लगे हैं. इसीलिए विपक्ष ने मौजूदा चुनाव में संविधान की रक्षा के आह्वान के साथ प्रचार शुरू किया। उन्होंने शिकायत की कि अगर बीजेपी “400 पार” करती है, तो वह संविधान बदल देगी। सर्वेक्षणों के नतीजों से पता चलता है कि विपक्ष के अभियान ने मतदाताओं के मन पर आंशिक प्रभाव छोड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार विपक्षी गठबंधन के भीतर कांग्रेस को असहज करने के लिए आधी सदी पहले का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रही है.

इस बार अध्यक्ष मुर्मू ने संविधान का मुद्दा उठाया और बिना नाम लिए कांग्रेस को याद दिलाया कि राहुल की दादी ने पहले भी देश में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे. संयोग से, यह सरकार ही है जो संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद में राष्ट्रपति के लिखित संबोधन का ‘विषय’ तय करती है।

 

आखिर क्या है अमेरिका के फाउंडर बेंजामिन फ्रैंकलिन का केजरीवाल से संबंध?

आज हम आपको बताएंगे कि केजरीवाल का अमेरिका के फाउंडर बेंजामिन फ्रैंकलिन से क्या संबंध है! एक आदमी अपने जीवन में क्या क्या हो सकता है? आप यकीन करें या न करें, मगर अमेरिका के फाउंडर बेंजामिन फ्रैंकलिन को अमेरिकी प्रिंटर, पब्लिशर, लेखक, आविष्कारक, वैज्ञानिक और कूटनीतिज्ञ कहा जाता है। एक ऐसा शख्स जो अमेरिका की नींव रखने वाले फाउंडिंग फादर्स में से एक था। जिसने अमेरिकी क्रांति के दौरान फ्रांस में अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया था। एक ऐसी हस्ती, जिसने अमेरिका की आजादी के घोषणापत्र पर दस्तखत किए थे। यही नहीं उसने अमेरिकी लोगों के लिए ऐसा संविधान लिखा, जो आज भी भारत समेत पूरी दुनिया के लिए नजीर है। हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देते हुए जज न्याय बिंदु ने अमेरिका के संस्थापकों में से एक बेंजामिन फ्रैंकलिन का जिक्र किया। आइए- समझते हैं कि फ्रैंकलिन कौन थे और उनकी बातें आज भी भारतीय अदालतों में क्यों गूजती हैं। अमेरिका के बोस्टन में जन्मे फ्रैंकलिन अपने माता-पिता के 17 बच्चों में 10वें नंबर की औलाद थे। उनके पिता तब साबुन और मोमबत्तियां बेचा करते थे। फ्रैंकलिन ने ही क्रांतिकारी युद्ध को समाप्त करने वाली पेरिस की 1783 की संधि को तैयार करने में एक अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने ही अमेरिका के लिए मानवाधिकारों की अहमियत देते हुए संविधान तैयार किया।

आपराधिक कानूनों में ब्लैकस्टोन रेश्यो थ्योरी चलती है। फ्रैंकलिन से भी पहले इंग्लैंड के एक जज और ज्यूरिस्ट विलियम ब्लैकस्टोन ने यह सिद्धांत दिया था कि भले ही 10 दोषी छूट जाएं, मगर 1 भी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। कुछ समय बाद ही फ्रैंकलिन ने पहले के 10 के बजाय इस कथन को 100 कर दिया। उन्होंने कहा-भले ही 100 गुनहगार छूट जाएं, मगर कोई बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिए। इसी के आधार पर तब बोस्टन में नरसंहार करने वाले ब्रिटिश सैनिक सजा पाने से बच गए थे। 18वीं सदी के आखिरी दशकों में उस वक्त यह सिद्धांत काफी चर्चा में रहा था। यह सिद्धांत अब 21वीं सदी में अदालतों में अक्सर नजीर बनकर सामने आती है। भारत में भी इसी को अपनाया गया है। फ्रैंकलिन ने साइंस ऑफ इलेक्ट्रिसिटी की खोज की। बाद में माइकल फैराडे ने इसी आधार पर बिजली का आविष्कार किया। फ्रैंकलिन ने 1752 में बिजली को भांप लिया था। उन्होंने एक पतंग उड़ाई और उसमें धातु से बने धागे में चाबी बांध दी। हवा की तेज रफ्तार से जब चाबी पर रगड़ हुई तो चिंगारी निकली, जो बिजली के आविष्कार की दिशा में पहला कदम था।

फ्रैंकलिन के प्रयोग ने यह बताया कि अगर किसी इमारत के ऊंचे बिंदु पर एक मेटल की धातु रखी हुई है, जो एक कंडक्टर से जुड़ी हुई है तो मेटल की धातु पर बिजली गिरने पर उससे जुड़ा कंडक्टर बिजली को इमारत से दूर जमीन में ले जाएगा। इस समझ का इस्तेमाल करके लकड़ी के घरों और इमारतों को बिजली गिरने से होने वाले नुकसान से बचाया गया। आज पूरी दुनिया में इसी सिद्धांत का इस्तेमाल कर हजारों जानें बचाई जाती हैं। फ्रैंकलिन का एक कथन दुनिया के लिए नजीर बन गया। उन्होंने कहा था कि जल्दी उठना और जल्दी सोना एक आदमी का स्वस्थ, धनी और बुद्धिमान बनाता है। उन्होंने बिजली के रॉड, स्टोव और आर्मोनिका ग्लास की भी खोज की। उन्होंने अखबार निकाला और कारोबार भी किए। फ्रैंकलिन ने पहले तो खुद दासों को मुक्त कर दिया और दूसरों को भी प्रेरित किया कि वो दासों को गुलाम न बनाएं। उनकी इसी सोच ने बाद में अमेरिका में दास प्रथा खत्म करने में अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके खिलाफ इस मामले से सीधे तौर पर जुड़े होने के सुबूत देने में नाकाम रहा। निचली अदालत के आदेश के बाद ईडी की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देने के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, केजरीवाल को राहत देते हुए विशेष जज न्याय बिंदु ने कहा कि पहली नजर में उनका अपराध अभी तक सिद्ध नहीं हो सका है।

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष न्यायाधीश न्याय बिंदु ने ही दिल्ली शराब घोटाला केस में सीएम अरविंद केजरीवाल को जमानत देने का फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान जज ने अमेरिका के संस्थापकों में से एक बेंजामिन फ्रैंकलिन को कोट करते हुए कहा, भले ही 100 दोषी व्यक्ति बच जाएं, लेकिन एक निर्दोष व्यक्ति को सजा न हो। उन्होंने कहा कि कानून का यह सिद्धांत है कि जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक हर व्यक्ति को निर्दोष माना जाना चाहिए। मगर, मौजूदा मामले में यह सिद्धांत ऐसा लागू होता प्रतीत नहीं होता है।