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निखिल गुप्ता का अमेरिका को प्रत्यारोपण पर क्या असर होगा?

आज हम आपको बताएंगे कि निखिल गुप्ता का अमेरिका को प्रत्यारोपण पर क्या असर होगा! भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता का चेक गणराज्य से अमेरिका लाया जा चुका है। इसलिए लोकसभा चुनावों के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। निखिल गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने खालिस्तान समर्थक आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल थे। पन्नू अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता वाला खालिस्तान समर्थक है। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि पन्नू अमेरिकी नागरिक होने के नाते अपने बोलने की आजादी का इस्तेमाल कर रहा था, इसीलिए उसे निशाना बनाया गया। चेक अधिकारियों ने गुप्ता के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। इसके ठीक 11 दिन बाद उन्हें चेक गणराज्य से अमेरिका भेज दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन भी उसी समय भारत के दौरे पर थे। सुलिवन का यह दौरा भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (iCET) पर बातचीत के लिए था। लेकिन गुप्ता के प्रत्यर्पण ने इस दौरे को भी प्रभावित किया। अमेरिकी सीनेट के कुछ डेमोक्रेट सदस्यों ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर इस मामले में भारत से कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की है। उनका कहना है कि अमेरिका को भारत को स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि इस तरह के कृत्यों के गंभीर परिणाम होंगे।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि कनाडा के विपरीत, अमेरिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उग्रवाद का समर्थन नहीं करता है। यह भी गौर करने वाली बात है कि सुलिवन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान इस मामले पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया, जबकि उनके ऐसा करने की उम्मीद थी। हालांकि, इस मामले के कारण भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी इतनी मजबूत है कि इस तरह के मुद्दों से उस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि पन्नू एक अमेरिकी नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता है। उसे उनके ‘सबसे महत्वपूर्ण अमेरिकी अधिकार – बोलने की आजादी’ का इस्तेमाल करने के लिए निशाना बनाया गया था। वहीं, गुप्ता ने खुद पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। चेक के न्याय मंत्री ने गुप्ता के प्रत्यर्पण की घोषणा उसी दिन की जब अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन भारत पहुंचे थे। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि उनके भारत दौरे से पहले कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं।

चेक गणराज्य के न्याय मंत्री पावेल ब्लेजेक ने ये खुलासे उसी दिन किए जिस दिन सुलिवन यहां पहुंचे थे। उसी दिन अमेरिका में जेफ मर्कले के नेतृत्व में डेमोक्रेट सीनेटरों के एक समूह ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर साजिश में कथित भारतीय संलिप्तता पर कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की। वे चाहते हैं कि भारत को एक स्पष्ट संदेश दिया जाए कि इस तरह के व्यवहार के परिणाम भुगतने होंगे। सुलिवन ने अपनी यात्रा के दौरान मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। अक्सर ऐसा होता नहीं है कि कोई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी मीडिया से बात नहीं करे। इधर, भारत सरकार ने अमेरिकी आरोपों की जांच के लिए नवंबर में एक समिति बनाई थी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन पर दबाव बढ़ा तो भारत से रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ सकता है। चूंकि अमेरिकी चुनाव अभी कुछ दूर हैं, इसलिए भारत के लिए इस तूफान के खत्म होने का इंतजार करने के बारे में सोचना अभी जल्दबाजी होगी। कनाडा ने भारत पर एक और खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप लगाए गए हैं। हाल ही में एक ऑस्ट्रेलियाई मीडिया आउटलेट ने दावा किया है कि कैसे भारतीय जासूसों ने ऑस्ट्रेलिया में सिख अलगाववादियों को निशाना बनाया। हालांकि, भारत ने इस दावे को बिल्कुल झूठ बताया है।

हालांकि ऐसा लग सकता है कि भारत-अमेरिका के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव आने वाला है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि दोनों देश ‘ग्लोबल गुड’ के लिए अपनी साझेदारी को पन्नू मुद्दे के कारण बाधित होने देंगे। यह इस बात से पता चलता है कि भारत और कनाडा के बीच की स्थिति के विपरीत दोनों पक्षों ने पन्नू मामले में सार्वजनिक रूप से भला-बुरा कहे किए बिना चुपचाप मिलकर काम किया है। जयशंकर ने कहा है कि कनाडा के विपरीत अमेरिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर चरमपंथ का बचाव नहीं करता है। दोनों पक्षों को एक-दूसरे की जरूरत भी है। अमेरिका को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच की जरूरत है, और भारत को अपनी वृद्धि और सुरक्षा के लिए जरूरी अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच की। सुलिवन की यात्रा में दोनों पक्षों ने आईसेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो बहुत बड़ी बात है। यह संबंधों के विकास के लिए एक मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम कर सकती है।

ऐसा कहा जा रहा है कि भारत को इस मामले पर अमेरिका के साथ मिलकर कोई रास्ता निकालना होगा। इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाया गया है और अमेरिका और खासकर न्याय विभाग की ओर से उठने वाली आवाजों की भाषा और उसे लहजे को देखते हुए बाइडेन प्रशासन के पास भारत के साथ इस मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसका मतलब है कि उसे कथित रूप से भारत से साजिश रचने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मजबूरी होगी। जैसा कि सीनेटरों ने ब्लिंकन को लिखे पत्र में चेतावनी दी थी, बलि का बकरा बनाने का कोई भी प्रयास काम नहीं करेगा।

शेयर बाजार और एग्जिट पोल के बारे में क्या बोले प्रदीप गुप्ता?

हाल ही में प्रदीप गुप्ता ने शेयर बाजार और एग्जिट पोल के लिए एक बयान दे दिया है! शेयर बाजार में कथित हेरफेर के लिए एग्जिट पोल का इस्तेमाल किए जाने को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का सामना कर रहे एक्सिस माई इंडिया के प्रमुख प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि वह हर तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि अगर सरकार पोल करने वालों के लिए खास नियम बनाती है, तो इससे कारोबार को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विपक्षी राजनीतिक दलों और कई अन्य संगठनों ने पूंजी बाजार नियामक सेबी और एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के जरिए इस बात की गहन जांच करने की मांग की है कि क्या एग्जिट पोल के जरिए शेयर बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।एग्जिट पोल में भाजपा को भारी बहुमत मिलने पर शेयर बाजारों में भारी तेजी देखी गई थी, लेकिन वास्तविक परिणामों में सत्तारूढ़ पार्टी को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद भारी गिरावट आई। पीटीआई के मुख्यालय में यहां समाचार एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में गुप्ता ने कहा कि वह पांच साल से सर्वेक्षण करने वालों के लिए मानदंड और विनियमन तैयार करने की मांग कर रहे हैं। एक्सिस माई इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक गुप्ता ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए 361-401 सीटों की भविष्यवाणी की थी, जबकि वास्तविक संख्या काफी कम रही। उन्होंने एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने की मांग को बचकाना करार देते हुए कहा कि हर नागरिक और संगठन चुनाव परिणाम जानना चाहता है और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।

यह पूछने पर कि क्या वह जेपीसी या सेबी की जांच के लिए तैयार हैं, उन्होंने कहा, मैं हर तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा, जहां तक शेयर बाजार में उछाल से मुझे कोई लाभ मिलने की बात है… एक्सिस माई इंडिया का कोई डीमैट खाता नहीं है। यह एक लिमिटेड कंपनी है, सूचीबद्ध नहीं है। आज तक कंपनी में कोई भी बाहरी निवेश नहीं हुआ है। प्रवर्तकों ने भी कोई निवेश नहीं किया है। अप्रैल से शेयरों में मेरा व्यक्तिगत निवेश मात्र 35,000 रुपये रहा है। मुझे कहां लाभ हुआ? गुप्ता ने एक्सिस माई इंडिया के विदेशी निवेशकों के लिए एग्जिट पोल करने और उनके साथ अलग-अलग परिणाम साझा करने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, किसी भी एफआईआई ने हमसे कभी संपर्क नहीं किया, न ही हमने किसी विदेशी निवेशक के लिए काम किया है। हमने उनके लिए कभी कोई एग्जिट पोल सर्वेक्षण नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा, पहले वे एग्जिट पोल को अवैज्ञानिक बताते थे, अब वे चाहते हैं कि एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। ये बचकानी बातें हैं। हर नागरिक और संगठन चुनाव के नतीजे जानना चाहता है और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल सिर्फ यह बताने के लिए नहीं होते कि कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है, बल्कि इससे राजनीतिक दलों को नतीजों का विश्लेषण करने में भी मदद मिलती है। गुप्ता ने कहा, ”मेरे 70 फीसदी ग्राहक कॉरपोरेट ग्राहक हैं। अगर एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा भी दिया जाता है, तो इससे हमारे कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो भी कानून तय करेगा, मैं उसके साथ हूं। यह पूछने पर क्या 2024 के चुनाव नतीजों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है, गुप्ता ने कहा, वे हमें हमारे काम के लिए कारोबार देते हैं, न कि इस आधार पर कि हम चुनाव नतीजों की कितनी सही भविष्यवाणी करते हैं। उन्होंने कहा, पिछले पांच सालों से मैं कुछ नियमन की मांग को लेकर दर-दर भटक रहा हूं। जब हमारे लोग जमीन पर जाते हैं, तो उन्हें संदिग्ध मानसिकता से देखा जाता है। हमें यह समझाना पड़ता है कि हम सेल्सपर्सन नहीं हैं, हम धोखेबाज नहीं हैं और हमें किसी राजनीतिक दल ने नहीं भेजा है। हमसे अक्सर पूछा जाता है कि आपको अनुमति किसने दी? उन्होंने कहा, हमने गृह मंत्रालय को लिखा, हमें कानून मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए कोई कानून नहीं है, इसलिए पहले हमें कानून चाहिए। वहां से हमें सूचना और प्रसारण मंत्रालय के पास भेजा गया कि आप वहां अपना पंजीकरण करवाएं और एक प्रकोष्ठ स्थापित करें।

सवाल यह है कि कौन सही है और कौन गलत है, इसकी निगरानी कौन करेगा… इसलिए कुछ नहीं हुआ। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमें विनियमन की जरूरत है। एक्सिस माई इंडिया 2013 से एग्जिट पोल आयोजित कर रहा है। उस समय गुप्ता हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से लौटे थे। उनका दावा है कि उन्होंने 65 में 61 चुनावों की सही भविष्यवाणी की। यह पूछने पर कि एक्सिस माई इंडिया यह खुलासा क्यों नहीं करता कि कुछ राजनीतिक दल भी उसके ग्राहक हैं, गुप्ता ने कहा, 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में, भाजपा हमारे ग्राहकों में शामिल थी और एग्जिट पोल में हमने त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की थी, जो बिल्कुल सही थी।

क्या समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक एक साथ खड़े होंगे भारत बांग्लादेश?

समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक अब भारत और बांग्लादेश एक साथ खड़े होने वाले हैं! बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे पर दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए। भारत और बांग्लादेश ने ई-मेडिकल वीजा, नए वाणिज्य दूतावास, भारतीय रुपये में व्यापार और बिजली निर्यात जैसी पहलों के माध्यम से अपने संबंधों को विस्तार दिया है। दोनों देशों ने ग्रीन पार्टनरशिप, डिजिटल पार्टनरशिप, ब्लू इकॉनमी और स्पेस टेक्नॉलजी के क्षेत्रों में साझेदारी का निर्णय लिया। भारत और बांग्लादेश ने लंबे समय से एक करीबी रिश्ता साझा किया है, जो आपसी सम्मान और सहयोग पर आधारित है। दोनों देशों के बीच हाल के घटनाक्रमों ने इस बंधन को और मजबूत किया है, जिसमें कनेक्टिविटी, कॉमर्स और कोऑपरेशन को बढ़ाने के उद्देश्य से पहल की गई है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच व्यापक बातचीत हुई। इस दौरान दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत शुरू करने, रक्षा सहयोग बढ़ाने और आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा विकास सहयोगी है और नई दिल्ली उसके साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि ‘आज नए क्षेत्रों में भारत-बांग्लादेश सहयोग के लिए एक भविष्यवादी दृष्टिकोण तैयार किया गया है।’ दोनों पक्षों ने डिजिटल क्षेत्र, समुद्री क्षेत्र और रेलवे संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और व्यापक बनाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

दोनों देशों के बीच हुई साझेदारियों की मुख्य घोषणाओं में से बांग्लादेश के नागरिकों के लिए भारत में इलाज करवाने के लिए ई-मेडिकल वीजा सुविधा शुरू करने का निर्णय है। यह कदम न केवल रोगियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाएगा बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को भी मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त, बांग्लादेश के रंगपुर में एक नए वाणिज्य दूतावास के खुलने से उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लोगों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। मोदी-हसीना वार्ता के बाद भारत और बांग्लादेश ने ‘ग्रीन पार्टनरशिप’ के लिए एक साझा दृष्टिकोण को अंतिम रूप देते हुए एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और नीली अर्थव्यवस्था पर समझौते को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रक्षा उत्पादन और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण सहित रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। मोदी ने कहा, ‘हम भारत-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने के बांग्लादेश के फैसले का स्वागत करते हैं।’ व्यापार के मामले में भारत और बांग्लादेश ने भारतीय रुपये में व्यापार शुरू करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह व्यापार प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा और दोनों देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, भारतीय ग्रिड के माध्यम से नेपाल से बांग्लादेश को बिजली निर्यात को एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में उजागर किया गया है, जो क्षेत्रीय सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा की क्षमता को प्रदर्शित करता है।

भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है, यह बताते हुए उन्होंने कहा कि यह देश नई दिल्ली की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति, ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘विजन सागर’ और भारत-प्रशांत दृष्टि के संगम पर स्थित है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह एक स्थिर, समृद्ध और प्रगतिशील बांग्लादेश के बंगबंधु के दृष्टिकोण को साकार करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। वहीं, बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना ने कहा, ‘भारत हमारा प्रमुख पड़ोसी और एक विश्वसनीय मित्र है’ और ढाका नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है जो ‘1971 में हमारे मुक्ति संग्राम’ में पैदा हुए थे।

दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजिच समारोह में भारत-बांग्लादेश के बीच जो समझौते हुए उनमें इन-स्पेस और बांग्लादेश के आईसीटी और दूरसंचार मंत्रालय के बीच हुआ समझौता भी शामिल है। इस समझौते पर बांग्लादेश सैटेलाइट कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष और सीईओ शाहजहां महमूद और अंतरिक्ष विभाग के सचिव एस सोमनाथ ने हस्ताक्षर किए।इस समझौते से दोनों देशों में स्पेस टेक्नॉलजी और सैटलाइट कम्यूनिकेशन में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, भारत और बांग्लादेश के रेल मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। रेलवे संपर्क बढ़ाने और सुचारू सीमा पार परिवहन की सुविधा के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान मोहम्मद हुमायूं कबीर और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष जया सिन्हा ने किया। समुद्र विज्ञान में सहयोग के लिए एक और समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया ताकि समुद्री विज्ञान में संयुक्त अनुसंधान और अन्वेषण को बढ़ावा दिया जा सके, जिस पर भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त, मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान और बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने हस्ताक्षर किए। एनडीएमए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण, आपदा प्रबंधन रणनीतियों और लचीलापन प्रयासों को मजबूत करने के लिए किया गया।

क्या अब चीन को आंख दिखाएगा भारत?

भारत कब आने वाले समय में चीन को भी आंख दिखा सकता है! पिछले कुछ हफ्तों में चीन के प्रति भारत के रवैये में बदलाव आया है। ये इस बात का संकेत देता है कि अपने तीसरे कार्यकाल में, मोदी सरकार चीन के खिलाफ सख्त रुख अपना सकती है। 2020 में सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद से ही दोनों देशों के संबंधों में तनाव बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जुलाई के पहले हफ्ते में कजाकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में शामिल हो सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हो सकती है। दोनों नेताओं के बीच संभावित बैठक से कुछ समय पहले ही, भारत चीन के खिलाफ अपना रुख सख्त करता हुआ दिखाई दे रहा है। बता दें कि 2022 में बाली में हुए जी20 शिखर सम्मेलन और एक साल बाद दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में गलवान झड़प के बाद मोदी और शी के बीच हुई दो बैठकों में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाए थे। भारत-चीन सीमा पर दोनों तरफ अभी भी हजारों सैनिक तैनात हैं।

चीन भारत सरकार पर पिछले चार सालों से बंद पड़ी सीधी यात्री उड़ानों को दोबारा शुरू करने का दबाव डाल रहा है, लेकिन भारत सीमा विवाद के चलते इससे इनकार कर रहा है। रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन की सरकार और एयरलाइंस ने पिछले एक साल में कई बार भारत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण से सीधी हवाई संपर्क बहाल करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक चीन इसे एक बड़ा मुद्दा मानता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स को एक बयान में कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि भारत सीधी उड़ानों को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के लिए चीन के साथ काम करेगा।” साथ ही यह भी कहा कि उड़ानों को फिर से शुरू करना दोनों देशों के हित में होगा। लेकिन भारत-चीन मामलों के जानकार एक सीनियर भारतीय अधिकारी ने सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की चीन की इच्छा के बारे में कहा, ‘जब तक सीमा पर शांति और अमन न हो, तब तक बाकी रिश्ते आगे नहीं बढ़ सकते।’

चीन के साथ रिश्ते तभी सामान्य होंगे, जब सीमा विवाद का हल निकल आएगा, भारत इस पर अड़ा हुआ है। कोरोना महामारी फैलने के चार महीने बाद भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें बंद कर दी गई थीं। हालांकि भारत ने एक साल बाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्गों पर कोरोना पाबंदियां हटा लीं और चीन ने 2023 की शुरुआत में सभी कोरोना यात्रा प्रतिबंध हटा दिए, फिर भी ये उड़ानें दोबारा शुरू नहीं हुईं, सिर्फ कुछ खास कोरोना वापसी उड़ानों को छोड़कर। 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने मोदी को लगातार तीसरी चुनाव जीत पर बधाई दी और दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई। उन्होंने व्यापार, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में भारत-ताइवान सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनी रहे।

ताइवान के राष्ट्रपति ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव में जीत पर मेरी हार्दिक बधाई। हम तेजी से बढ़ रही ताइवान-भारत साझेदारी को और मजबूत करने, व्यापार, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में हमारे सहयोग का विस्तार करने की उम्मीद करते हैं ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि में योगदान दे सकें।’ मोदी ने जवाब दि, ‘आपके गर्मजोशी भरे संदेश के लिए धन्यवाद, हम परस्पर लाभकारी आर्थिक और तकनीकी साझेदारी की दिशा में काम करते हुए और घनिष्ठ संबंधों की आशा करते हैं।’ इन दोनों नेताओं के इस औपचारिक संवाद ने चीन को नाराज कर दिया, जिसने मोदी द्वारा ताइवानी राष्ट्रपति के बधाई संदेश को स्वीकार करने पर भारत के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत से ताइवान की राजनीतिक गणनाओं का विरोध करने और वन-चाइना सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करने का आग्रह किया। चीन ने कहा कि वो “वन चाइना पॉलिसी” के तहत ताइवान के अधिकारियों और अन्य देशों के बीच सभी प्रकार की आधिकारिक बातचीत का विरोध करता है। बता दें कि भारत अन्य देशों की तरह वन चाइना पॉलिसी का पालन करता है। हालांकि भारत ने 2010 के बाद से कभी भी इसका सार्वजनिक रूप से जिक्र नहीं किया है। ऐसे में भारत और ताइवान के बढ़ते संबंध को चीन विद्रोह के रूप में देखता है।

करीब दो हफ्ते पहले, खबर आई थी कि भारत कुछ ऐसा करने की योजना बना रहा है जिससे चीन गुस्से में आ सकता है। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चीन के अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने के जवाब में, चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 2 दर्जन से ज्यादा जगहों के नाम बदलने की योजना बना रहा है। जिन जगहों के नाम बदले जाएंगे, सेना ने उनकी लिस्ट तैयार कर ली है और जल्द ही जारी कर दी जाएगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि नए नामों को चुनते वक्त इतिहास की अच्छी तरह से जांच की गई है और साथ ही उन इलाकों में रहने वाले लोगों की राय भी ली गई है, जिनमें से कई चीनी नामों का विरोध करते हैं। नाम बदलने की इस मुहिम का मकसद भारत की तरफ से सीमा पर एक अलग कहानी दुनियाभर में फैलाना है। ये कहानी मजबूत ऐतिहासिक रिसर्च और उन इलाकों में रहने वाले लोगों की राय पर आधारित होगी। इसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में फैलाया जाएगा।

कुछ दिनों पहले, भारत ने अमेरिका की संसद के कई बड़े नेताओं को दलाई लामा से मिलने की इजाजत दे थी। इन नेताओं में अमेरिका के पूर्व स्पीकर नैंसी पेलोसी भी शामिल थीं। दलाई लामा तिब्बत के धर्मगुरु हैं, जो फिलहाल भारत में रहते हैं। चीन की सरकार ने इस मुलाकात का पहले ही विरोध किया था। चीन दलाई लामा को तिब्बत को चीन से अलग करने की कोशिश करने वाला मानता है। इसी दौरान, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान भी भारत में थे। वे भारत के साथ सुरक्षा और टेक्नॉलॉजी पर मिलकर काम करने की बातचीत कर रहे थे।

बांग्लादेश के साथ क्या-क्या हुए समझौते?

हाल ही में भारत के बांग्लादेश के साथ कई समझौते हुए हैं! बीते 9 जून को मोदी सरकार के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुई बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना एक बार अपने दो दिन के भारत दौरे पर हैं। दौरे के दूसरे दिन शनिवार को शेख हसीना ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और दोनों देशों के बीच अहम समझौतों को लेकर आम सहमति बनी। इसके बाद दोनों नेताओं ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक साझा विजन पर मुहर लगाई।दोनों देशों के बीच गेडे दर्सना और हल्दीबाड़ी चिल्हाटी के बीच मालगाड़ी की भी शुरुआत होगी। विदेश सचिव ने बताया कि रोहिंग्या के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच वार्ता हुई जिसमें इस आयाम का भी जिक्र था कि किस तरह भारत और बांग्लादेश मानवीय तरीके से आगे बढ़ सकते है, इसके साथ ही इस पहलू से जुड़ी चुनौतियों के मद्देनजर चर्चा हुई। इसके साथ ही डिफेंस के आधुनिकीकरण और स्पेस टेक्नोलॉजी को लेकर भी दोनों देश एक सहमति पर पहुंचे। इस बातचीत का दायरा काफी बड़ा था, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के सारे आयाम थे। पीएम मोदी ने कहा कि शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों ने डिफेंस प्रोडक्शन को आधुनिक बनाने, चरमपंथ और आतंकवाद के खिलाफ रणनीति के साथ साथ सीमाओं पर शांति कायम करने की दिशा में बात हुई। बातचीत में कनेक्टिविटी, व्यापार इन्फ्रास्ट्रक्चरऔर आर्थिक साझेदारी समेत दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत शुरू करने को लेकर सहमति बनी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हमने सहयोग को लेकर एक भविष्य का विजन तैयार किया है। दोनों देशों के युवाओं को ग्रीन पार्टनरशिप, डिजिटल पार्टनरशिप,ब्लू इकॉनमी और स्पेस में बनी सहमति से फायदा पहुंचेगा।

हसीना ने ये भी कहा कि भारत हमारा पड़ोसी और परखा हुआ दोस्त है। पीएम मोदी ने बांग्लादेश के साथ संबंधों पर ये भी कहा कि बांग्लादेश हमारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन सागर और इंडो विजन के संगम के केंद्र में है । इस द्विपक्षीय बातचीत के बारे में ज्यादा जानकारी विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी दी, जिसमें उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच कुल 10 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हौ। दोनों देशों ने भविष्य की साझेदारी के विजन डॉक्यूमेंट पर भी मुहर लगाई, जिसका आधार विकसित भारत 2047 और स्मार्ट बांग्लादेश 2041 विजन से प्रेरित है। इसके अलावा डिजिटल पार्टनरशिप और ग्रीन पार्टनरशिप फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर भी इस साझा विज़न का हिस्सा है।

द्विपक्षीय समझौतों का दायरा काफी व्यापक है, जिसमें रेलवे और बस कनेक्टिविटी से लेकर सागर डॉक्ट्रिन के तहत ब्लू इकॉनमी और मेरीटाइम सहयोग तक शामिल है। तीस्ता डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में चीन की रूचि की खबरों के बीच भारत ने ये ऐलान किया कि तीस्ता के संरक्षण और प्रबंधन के लिए जल्द एक टीम बांग्लादेश भेजी जाएगी। हालांकि क्वात्रा ने ये साफ किया कि ये टीम नदी के टेक्निकल मैनेजमेंट और रेस्टोरेशन पर ही फोकस करेगी।

इसके अलावा बांग्लादेश से इलाज कराने के लिए भारत आने वाले लोगों के लिए जल्द ई मेडिकल वीजा की शुरूआत की जाएगी। विदेश सचिव ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग भारत इलाज कराने आते हैं। बांग्लादेश के राजशाही और कोलकाता के बीच नई पैसेंजर ट्रेन को भी लॉन्च किया जाएगा, तो कोलकाता से चटगांव के बीच बस सेवा शुरू होगी। सिराजगंज में इनलैंड कंटेनर डिपो का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही भारत बांग्लादेश के रंगपुर में असिस्टेंट हाई कमिशन भी बनाएगा। नदियों के मैनेजमेंट को लेकर 1996 की गंगा जल समझौते के नवीनीकरण के लिए एक ज्वाइंट टेक्निकल कमेटी का गठन किया जाएगा। दोनों देशों के बीच गेडे दर्सना और हल्दीबाड़ी चिल्हाटी के बीच मालगाड़ी की भी शुरुआत होगी। तीस्ता डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में चीन की रूचि की खबरों के बीच भारत ने ये ऐलान किया कि तीस्ता के संरक्षण और प्रबंधन के लिए जल्द एक टीम बांग्लादेश भेजी जाएगी। हालांकि क्वात्रा ने ये साफ किया कि ये टीम नदी के टेक्निकल मैनेजमेंट और रेस्टोरेशन पर ही फोकस करेगी।विदेश सचिव ने बताया कि रोहिंग्या के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच वार्ता हुई जिसमें इस आयाम का भी जिक्र था कि किस तरह भारत और बांग्लादेश मानवीय तरीके से आगे बढ़ सकते है, इसके साथ ही इस पहलू से जुड़ी चुनौतियों के मद्देनजर चर्चा हुई। इसके साथ ही डिफेंस के आधुनिकीकरण और स्पेस टेक्नोलॉजी को लेकर भी दोनों देश एक सहमति पर पहुंचे।

आखिर देश की राजधानी में कब तक पहुंचेगा मानसून?

आज हम आपको बताएंगे कि देश की राजधानी में मानसून कब तक पहुंचेगा! दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में मौसम खुशनुमा हो चुका है। बिहार-झारखंड से लेकर नॉर्थ ईस्ट और साउथ के राज्यों में मॉनसून अपना असर दिखा रहा है। वहीं आज यूपी के कुछ जिलों में भी मॉनसून दस्तक देगा। इधर दिल्ली-एनसीआर में आज भी बारिश के आसार हैं, और दिनभर आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में फिलहाल लू से राहत रहेगी। अगर मॉनसून की बात की जाए तो इस महीने के आखिर तक पूरे उत्तर भारत में मॉनसून छा सकता है। यही नहीं पश्चिमी उपनगर में 18.30 एमएम और शहर में 7.49 एमएम बारिश दर्ज़ की गई है। मौसम विशेषज्ञ ऋषिकेश आग्रे के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून धीरे-धीरे सक्रिय हो रहा है। तटीय क्षेत्र में शुष्क हवा के प्रवेश के कारण फिलहाल शहर में जोरदार बारिश की संभावना नहीं है। यह स्थिति रविवार तक रहेगी। उसके बाद भारी बारिश की संभावना है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार अगले तीन से चार दिनों में मॉनसून गुजरात, महाराष्ट्र के बचे हुए हिस्सों, मध्य प्रदेश के कुछ अन्य इलाकों, छत्तीसगढ़, ओडिशा, वेस्ट बंगाल का गंगा क्षेत्र, झारखंड, बिहार और ईस्ट उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर कर लेगा।बुधवार से फिर आसमान में बादल छा जाएंगे। जिसके बाद लगातार दो से तीन दिन तक प्री मानसून की बारिश की संभावना बन रही है। इस दौरान अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच जाएगा, जबकि न्यूनतम तापमान 25 डिग्री के आसपास रहेगा। इसके बाद मॉनसून का अगला पड़ाव वेस्ट उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली की तरफ होगा। स्काईमेट ने एक दिन पहले ही पूर्वानुमान जताया है कि 27 से 30 जून के बीच मॉनसून दिल्ली में एंट्री ले सकता है। इस बीच रुक-रुक कर बारिश होगी। आंधी चलेगी। तापमान में भी काफी गिरावट आएगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, आज से राजधानी लखनऊ समेत कई जगहों पर छिटपुट बारिश का सिलसिला शुरू होगा, जो सोमवार को जोर पकड़ेगा। अगले तीन से चार दिनों में प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मॉनसून के पहुंचने की भी संभावना बन रही है। ऐसे में 25 जून से प्रदेश भर में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। आज भी पूर्वी यूपी में कई जगहों पर बारिश हो सकती है। IMD के अनुसार, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, गाजीपुर, सोनभद्र, प्रतापगढ़, फतेहपुर, हमीरपुर, बांदा, झांसी, महोबा और ललितपुर समेत कई जिलों में बारिश के आसार हैं।

 मौसम विभाग ने मुबंई में बारिश का अलर्ट जारी किया है। आज और कल यहां भारी बारिश की संभावना है। मुंबई और पालघर के लिए येलो अलर्ट और ठाणे, रायगड के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बीएमसी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह 8 बजे से शनिवार की सुबह 8 बजे तक पूर्वी उपनगर में सबसे अधिक 33.68 एमएम, पश्चिमी उपनगर में 18.30 एमएम और शहर में 7.49 एमएम बारिश दर्ज़ की गई है। मौसम विशेषज्ञ ऋषिकेश आग्रे के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून धीरे-धीरे सक्रिय हो रहा है। तटीय क्षेत्र में शुष्क हवा के प्रवेश के कारण फिलहाल शहर में जोरदार बारिश की संभावना नहीं है। यह स्थिति रविवार तक रहेगी। उसके बाद भारी बारिश की संभावना है।

भीषण गर्मी से अब थोड़ी राहत मिलने लगी है। काफी समय के बाद अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचा है। शनिवार को अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। एनएच-9 और उसके आसपास के एरिया में दोपहर के समय बारिश हुई। इसका असर पूरे शहर पर देखने को मिला। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले तीन दिन तक आसमान साफ रहेगा। बता दें कि बिहार और ईस्ट उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर कर लेगा। इसके बाद मॉनसून का अगला पड़ाव वेस्ट उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली की तरफ होगा। स्काईमेट ने एक दिन पहले ही पूर्वानुमान जताया है कि 27 से 30 जून के बीच मॉनसून दिल्ली में एंट्री ले सकता है। इस बीच रुक-रुक कर बारिश होगी। आंधी चलेगी। तापमान में भी काफी गिरावट आएगी।ऐसे में 25 जून से प्रदेश भर में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। आज भी पूर्वी यूपी में कई जगहों पर बारिश हो सकती है। IMD के अनुसार, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, गाजीपुर, सोनभद्र, प्रतापगढ़, फतेहपुर, हमीरपुर, बांदा, झांसी, महोबा और ललितपुर समेत कई जिलों में बारिश के आसार हैं। अधिकतम तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। बुधवार से फिर आसमान में बादल छा जाएंगे। जिसके बाद लगातार दो से तीन दिन तक प्री मानसून की बारिश की संभावना बन रही है। इस दौरान अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच जाएगा, जबकि न्यूनतम तापमान 25 डिग्री के आसपास रहेगा।

सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड के बीच मैच का पूर्वावलोकन.

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दो साल पहले भारत विश्व कप इंग्लैंड से हार गया था. रोहित शर्मा सेमीफाइनल से बाहर हो गए. इंग्लैण्ड विश्व विजेता बना। विश्व कप के सेमीफाइनल में एक बार फिर भारत इंग्लैंड के सामने है. दोनों टीमें गुरुवार को खेलेंगी. रोहित शर्मा को उस मैच से पहले तीन चीजों के बारे में सोचना होगा.

1) विराट कोहली की फॉर्म- मौजूदा वर्ल्ड कप में विराट फॉर्म में नहीं हैं. किसी भी मैच में रन नहीं बना सकते. वह सुपर 8 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी बिना कोई रन बनाए आउट हो गए। इंग्लैंड की ओपनिंग जोड़ी संघर्ष कर रही है क्योंकि विराट अच्छा नहीं खेल रहे हैं. रोहित की गर्दन पर दबाव पड़ा है. इंग्लैंड के गेंदबाज भी विराट को जल्दी आउट करने की कोशिश करेंगे. नॉकआउट में विराट को अतिरिक्त जिम्मेदारी लेनी होगी. अगर वह अच्छा खेलेंगे तो भारतीय बल्लेबाज अधिक आत्मविश्वास से लबरेज दिखेंगे। लेकिन विराट की फॉर्म को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. सेमीफाइनल में विराट भी करेंगे ओपनिंग. उसे अच्छा खेलना होगा. नहीं तो भारत मुश्किल में पड़ सकता है.

2) इंग्लैंड की ओपनिंग जोड़ी – मौजूदा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के दो ओपनर फिल साल्ट और जोस बटलर फॉर्म में हैं। उनमें से कम से कम एक हर मैच में बड़े रन बना रहा है। दोनों बल्लेबाज आईपीएल से अच्छी फॉर्म में हैं. दोनों आक्रामक क्रिकेट खेलते हैं. तेजी से चलाना। खेल को प्रतिद्वंद्वी से दूर ले जाओ. वे भारत के खिलाफ भी ऐसा ही खेलने की कोशिश करेंगे. मैच जीतने के लिए इंग्लैंड के दोनों ओपनर्स को जल्दी आउट होना जरूरी है. नहीं तो भारत पर दबाव बढ़ जाएगा.

3) आदिल राशिद की फिरकी – इंग्लैंड के लेग स्पिनर अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं. बीच के ओवरों में विकेट लेना. रन नहीं दे रहे. वेस्टइंडीज के मैदान पर आदिल के खिलाफ बड़े शॉट खेलना मुश्किल होता है. इसलिए भारतीय बल्लेबाजों को सावधान रहना होगा. उन्हें बड़े रन बनाने का लक्ष्य रखना होगा, भले ही वे आदिल को संभाल लें। नहीं तो बीच के ओवरों में विकेट खोकर भारत दबाव में आ जाएगा.

भारत अभी तक यह विश्व कप नहीं हारा है. वे अपराजित रहते हुए सेमीफाइनल में पहुंचे। दूसरी ओर, इंग्लैंड ग्रुप चरण में ऑस्ट्रेलिया से और सुपर 8 में दक्षिण अफ्रीका से हार गया। नतीजतन, रोहित के पास उदाहरण है कि इंग्लैंड को कैसे हराया जा सकता है. वे इसे मैदान पर दिखाना चाहेंगे.

गुयाना में गुरुवार को बारिश की 87 प्रतिशत संभावना है। पूरे दिन बारिश हो सकती है. इसके परिणामस्वरूप खेल में व्यवधान हो सकता है. गेम क्रैश भी हो सकता है. अगर ऐसा है तो भारत को फायदा होगा. वे फाइनल में जाएंगे क्योंकि वे ग्रुप में शीर्ष पर हैं। इसलिए इंग्लैंड खेलना चाहेगा.

खेल गुरुवार को भारतीय समयानुसार रात 8 बजे शुरू होगा। खेल का प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स चैनल पर किया जाएगा। इसे हॉटस्टार ऐप पर डिजिटली देखा जा सकता है। टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में अफगानिस्तान की टीम 56 रन पर आउट हो गई. साउथ अफ्रीका के खिलाफ इस बल्लेबाजी ने न सिर्फ राशिद खान को मुकाबले से बाहर कर दिया, बल्कि तीन रिकॉर्ड अपने नाम कर दिए. यह टी20 विश्व कप इतिहास में किसी सेमीफाइनल में सबसे कम रन बनाने वाली पारी है।

राशिद ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. त्रिनिदाद की पिच पर दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने गेंद से दम दिखाया. रहमानुल्लाह गुरबाज पहले ही ओवर में आउट हो गए. मार्को जानसेन ने पहले ओवर में विकेट लेकर शुरुआत की. पावर प्ले में गए 5 विकेट. जानसन के साथ कैगिसो रबाडा ने विकेट लिया। एनरिक नोखी बाद में विकेट लेने के उत्सव में शामिल हुए। तेज गेंदबाजों की ताकत के बीच स्पिनर तबरेज शम्सी ने तीन विकेट चटकाए।

अफगानिस्तान की पारी 56 रन पर समाप्त हुई. यह टी20 क्रिकेट में अफगानिस्तान की सबसे कम पारी भी है। 2014 में बांग्लादेश के खिलाफ अफगानिस्तान की टीम 72 रन पर आउट हो गई थी. यह अफगानिस्तान की अब तक की सबसे कम पारी थी। गुरुवार को यह रिकॉर्ड टूट गया. दक्षिण अफ्रीका ने पहले कभी टी20 क्रिकेट में किसी टीम को इतने कम रनों पर आउट नहीं किया है. दक्षिण अफ्रीका ने इस विश्व कप में श्रीलंका को 77 रनों से ऑल आउट करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया.

साउथ अफ्रीका टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंच गया. वे पहली बार किसी विश्व कप के फाइनल में पहुंचे। वह मैच 29 जून को होगा. दक्षिण अफ्रीका भारत-इंग्लैंड मैच के विजेता से खेलेगा.

संसद में भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक खींचतान.

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ओम बिड़ला को आज ध्वनि मत से 18वीं लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया। लोकसभा के नेता नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाथ मिलाया और अध्यक्ष को उनकी सीट तक ले गए। अब तक तो ठीक है, विपक्षी खेमे की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए ओम बिड़ला ने अपने पहले ही भाषण में जिस तरह इंदिरा गांधी के समय की इमरजेंसी का जिक्र किया, उसने शुरू से ही टकराव की स्थिति साफ कर दी।

युदांग देही में जहां पिछला लोकसभा सत्र समाप्त हुआ था, वहीं से आज नए लोकसभा सत्र की शुरुआत का वस्तुतः संकेत दे दिया गया। सत्ता पक्ष, विपक्ष और स्पीकर तीनों खेमों के बयानों और बॉडी लैंग्वेज से साफ हो गया है कि कोई भी दल मैदान से पीछे नहीं हट रहा है. कई राजनेताओं के मुताबिक यह समझा जा रहा है कि मोदी तीसरी बार लोकसभा को अपने तरीके से चलाने के इच्छुक हैं. स्पीकर का संदेश, जरूरत पड़ी तो पिछली बार की तरह सांसदों को सस्पेंड करने से नहीं हिचकेंगे. वहीं विपक्षी नेता राहुल ने बताया कि विपक्ष भी संघर्ष के लिए तैयार है क्योंकि उसके पास पहले से ज्यादा ताकत है.

करीब चार साल बाद आज ओम बिड़ला अध्यक्ष चुने गए. आज प्रधानमंत्री ने स्पीकर के तौर पर उनका नाम प्रस्तावित किया, जबकि शिवसेना (उद्धव) सांसद अरविंद साबंत ने कांग्रेस सांसद के सुरेश का नाम प्रस्तावित किया. लेकिन अंत में, कांग्रेस नेतृत्व ने बटन नहीं दबाया क्योंकि वे विभाजन नहीं चाहते थे। ओम बिड़ला को ध्वनि मत से वर्तमान लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद केंद्रीय संसदीय मंत्री किरण रिजिजू ने हमेशा की तरह विपक्ष के नेता राहुल गांधी को फोन किया. प्रधानमंत्री स्पीकर की सीट की ओर बढ़े. मोदी ने सबसे पहले ओम बिरला से हाथ मिलाया. फिर राहुल ने स्पीकर से हाथ मिलाया. अंत में प्रधानमंत्री और राहुल ने हाथ मिलाया. अगले चरण में वे दोनों स्पीकर को उनकी कुर्सी तक ले गये. ओम बिड़ला ने दूसरी बार अध्यक्ष पद की कमान संभाली.

बहरहाल, सौहार्द की वह तस्वीर छपने के बाद आखिरकार लोकसभा में टकराव की बानगी साफ हो ही गई. पिछली लोकसभा में विपक्ष की आवाज को ”दबाकर” सरकार के खिलाफ कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किये गये थे। इस बार भी प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि बिल को पास कराने के लिए जरूरत पड़ी तो ऐसा भी किया जाएगा. ओम बिरला ने पिछली लोकसभा में असंसदीय आचरण के लिए करीब 150 सांसदों को निलंबित कर दिया था. आज संसद में तृणमूल के सुदीप बनर्जी समेत कई सांसद शामिल हुए.

आज मोदी ने ओम बिड़ला के उस कदम के पक्ष में सवाल उठाते हुए कहा, ”संसद में नियमों के पालन के सवाल पर आपको कड़े फैसले लेने पड़े हैं.” मैं जानता हूं कि इस तरह के फैसले से आपको व्यक्तिगत तौर पर दुख पहुंचा है. लेकिन लोकसभा की गरिमा और व्यक्तिगत कठिनाइयों के बीच आपने सदैव संसद की गरिमा को प्राथमिकता दी है। उस साहसिक कार्य के लिए आपको बधाई।” यानी विपक्ष की आलोचना के बावजूद मौजूदा लोकसभा में सांसदों को निलंबित करने जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा तो लिया जाएगा।

आज जिम्मेदारी को लेकर अपने पहले भाषण में स्पीकर ने यह भी बता दिया कि वह पहली बार लोकसभा चलाने की राह पर चलने जा रहे हैं. इस बार एनडीए गठबंधन की ताकत, खासकर लोकसभा में बीजेपी सांसदों की कमी, इसके उलट लोकसभा में विपक्ष की संख्या बढ़ने के बावजूद वह अपने कामकाज के तौर-तरीकों में बदलाव के पक्ष में नहीं है. इसलिए भाषण की शुरुआत में उन्होंने आपातकाल लगाए जाने की आलोचना की. हालांकि विपक्ष ने वेल में आकर विरोध जताया, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया. जब विपक्ष ने मांग की कि पिछली लोकसभा की तरह निलंबन दोबारा नहीं किया जाना चाहिए, तो स्पीकर की जवाबी टिप्पणी में कहा गया, ”आप किस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं, यह भी ध्यान में रखना चाहिए.”

राहुल गांधी-अखिलेश यादव ने यह भी साफ कर दिया है कि ताकतवर विपक्षी खेमा भी सत्ताधारी खेमे को नहीं छोड़ेगा. सपा नेता अखिलेश ने आज स्पीकर को तटस्थ रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा, ”आप लोकतंत्र की अदालत में मुख्य न्यायाधीश हैं. लोकसभा आपके वचन का पालन करे। अखिलेश ने मांग की कि स्पीकर की सीट से सत्ता पक्ष को भी शासित किया जाना चाहिए. अखिलेश के शब्दों में, ”स्पीकर की सीट पर बैठकर तटस्थता बनाए रखना सबसे अहम जिम्मेदारी है.”

प्रधानमंत्री ने आज अध्यक्ष की भूमिका की सराहना करते हुए दावा किया, ”पिछली लोकसभा में लगभग 97 प्रतिशत काम हुआ.” जो एक रिकॉर्ड है.” राहुल ने सफलता की उस परिभाषा को चुनौती देना नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा, ”सवाल यह है कि भारत के लोगों को लोकसभा में किस हद तक बोलने की इजाजत है.” विपक्ष की आवाज को खामोश कर संसद चलाना अलोकतांत्रिक विचार है. इस चुनाव से पता चला है कि लोग चाहते हैं कि विपक्ष संविधान की रक्षा करे. हमें यकीन है कि भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विपक्ष को लोकसभा में बोलने की अनुमति देकर आप संविधान की रक्षा के सवाल पर अपना कर्तव्य निभाएंगे।”

ओम बिरला ने इंदिरा गांधी के आपातकाल की आलोचना की, कांग्रेस ने पलटवार किया.

लगभग 50 साल पहले इसी समय तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने देश में आपातकाल लगाया था. पिछले दो दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी संसद के बाहर तो कभी ट्वीट कर आपातकाल और कांग्रेस की भूमिका पर बात कर रहे हैं. आज दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बने ओम बिरला ने आपातकाल की आलोचना की और मामले को संसद के मिनटों में दर्ज किया।

बीजेपी नेतृत्व के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व लोकसभा में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नरेंद्र मोदी को संविधान दिखाकर लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने गया था. लेकिन यह कांग्रेस ही थी जिसने अतीत में आपातकाल लगाकर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लिया था, ऐसा बताया गया। आज जब सत्ताधारी खेमा कहता है कि देश के युवाओं को आपातकाल के दौर की जानकारी होनी चाहिए, तो विपक्ष इस पर पलटवार करता है कि सत्ताधारी दल को 50 साल पहले क्या हुआ था, यह न सोच कर भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.

विपक्ष ने मोदी पर पिछले दस साल में अघोषित आपातकाल लगाने का आरोप लगाया है. केंद्रीय जांच एजेंसियों को प्रभावित कर विपक्ष को घेरने, मीडिया में डंडा घुमाने, संसद में विपक्ष की आवाज दबाने जैसे कई आरोप लगे हैं. इसीलिए विपक्ष ने मौजूदा चुनाव में संविधान की रक्षा के आह्वान के साथ प्रचार शुरू किया। लोकसभा में नरेंद्र मोदी-अमित शाह के शपथ ग्रहण के दौरान राहुल गांधी ने संविधान का मुद्दा उठाया और उन्हें लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के एहसास की याद दिलाई.

इसके बाद आपातकाल के कारण मोदी के दो दिन तक संसद से अनुपस्थित रहने पर आज स्पीकर ने इस बारे में बात की. कई राजनेता सोचते हैं कि यह पूर्व नियोजित है. इसका उद्देश्य कांग्रेस पर हमला करना था, साथ ही समाजवादी पार्टी जैसे उन भारत-साझेदारों के बीच विभाजन पैदा करना था जो आपातकाल के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। आज, अध्यक्ष ने आपातकाल के खिलाफ आंदोलनकारियों की याद में एक क्षण का मौन रखा। एनडीए सांसदों के साथ समाजवादी पार्टी के सांसद भी खड़े हुए. हालांकि, तृणमूल सांसद खड़े नहीं हुए. बाद में एसपी नेता अखिलेश यादव ने कहा, ”इमरजेंसी का विरोध अकेले बीजेपी के लोगों ने नहीं किया. अन्य पार्टियों ने भी ऐसा किया.” वहीं, उनका सवाल था, ”बीजेपी कब तक अतीत की ओर देखेगी?”

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, ”आज इस तरह का मुद्दा उठाना आश्चर्यजनक है. सरकार योजनाबद्ध तरीके से आज के सत्र को खराब करना चाहती है.” सिर्फ वक्ता का बयान. स्पीकर के बयान के विरोध में आज कई कांग्रेस सांसदों ने वेल में आकर प्रदर्शन किया. हालांकि, विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी सीट पर बैठे रहे.

स्पीकर ने कहा, ”इंदिरा गांधी के समय जो आपातकाल लगाया गया था, उसमें देश के नागरिकों के अधिकारों में कटौती की गई थी. विपक्षी नेताओं को मनमाने ढंग से जेल में डाल दिया गया। तत्कालीन तानाशाही सरकार ने मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिये। न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा दिया गया। संविधान को बदल दिया गया ताकि सारी शक्ति एक व्यक्ति में निहित हो जाए। कुछ ऐसे फैसले लिए गए जिन्होंने हमारे संविधान की भावना को नष्ट कर दिया।” विपक्ष ने मोदी पर पिछले दस साल में अघोषित आपातकाल लगाने का आरोप लगाया है. केंद्रीय जांच एजेंसियों को प्रभावित कर विपक्ष को घेरने, मीडिया में डंडा घुमाने, संसद में विपक्ष की आवाज दबाने जैसे कई आरोप लगे हैं. इसीलिए विपक्ष ने मौजूदा चुनाव में संविधान की रक्षा के आह्वान के साथ प्रचार शुरू किया। लोकसभा में नरेंद्र मोदी-अमित शाह के शपथ ग्रहण के दौरान राहुल गांधी ने संविधान का मुद्दा उठाया और उन्हें लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के एहसास की याद दिलाई.

संयोग से स्पीकर ने आज जो शिकायतें याद दिलाईं उनमें से ज्यादातर विपक्ष ने मोदी के खिलाफ की हैं. कई राजनेताओं के मुताबिक, सत्ताधारी दल आज विपक्ष के हमलों को कुंद करने के लिए अतीत की यादें ताजा करने की रणनीति अपनाता है। बाद में स्पीकर के बयान के समर्थन में मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ”स्पीकर ने जिस तरह से आपातकाल की आलोचना की है, उससे मैं खुश हूं…देश के युवाओं के लिए इसके बारे में जानना जरूरी है.” क्योंकि, यह संविधान को कुचलने, जनमत का गला घोंटने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करने का एक प्रमुख उदाहरण है। …निरंकुश शासन का एक उदाहरण।” विपक्षी एनडीए शिवसेना (उद्धव) पार्टी के नेता आदित्य ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा, ”एक ऐसी सरकार जो देश में अघोषित आपातकाल लगाती है, लेकिन उसे घोषित करने की हिम्मत नहीं करती, वह दिखावा कर रही है आपातकालीन स्थिति हो।” शर्मनाक.”

समाजवादी पार्टी के सांसद आर के चौधरी ने सेंगोल को हटाने की मांग की.

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राजशाही के प्रतीक सेनगोल को हटाएं, भारतीय संविधान को लोकसभा में रहने दें’, स्पीकर को लिखा पत्र समाजवादी पार्टी के सांसद चौधरी ने स्पीकर को लिखे पत्र में दावा किया कि राजशाही के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला सेनगोल लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढांचे के खिलाफ है। भारत की। राजतंत्र का प्रतीक सेनगोल नहीं, लोकतांत्रिक भारत की विधायिका में संविधान चाहिए. उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के सांसद आरके चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यह मांग की.

स्पीकर को लिखे पत्र में सांसद चौधरी ने दावा किया कि राजशाही के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला सेनगोल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढांचे के खिलाफ है। इसलिए उन्होंने तत्काल सेनगोल को लोकसभा से हटाकर वहां लोकतांत्रिक भारत का प्रतीक संविधान रखने की मांग की। उन्होंने बुधवार को स्पीकर चुनाव से पहले प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि मोहताब को पत्र भेजा। संयोग से, पिछले साल 27 मई को, नए संसद भवन के उद्घाटन से एक रात पहले, तमिल अधिनाम के सदस्यों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक राजदंड ‘सेन्गोल’ सौंपा था। देश की आजादी के बाद सोने की छड़ी सेनगोल अंग्रेजों से सत्ता सौंपने का प्रतीक है। जिसे मोदी ने खुद नए संसद भवन में स्थापित किया था. इसे स्पीकर की सीट के बगल में रखा गया है. किसी समय चोल राजवंश का प्रतीक रहा ‘राजदंडा’ अगस्त 1947 में भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को उपहार में दिया गया था।

पूरे लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रामलला के दाह संस्कार समारोह में शामिल नहीं होने के लिए विपक्ष के भारत मंच की आलोचना की। अयोध्या के राम मंदिर वाले लोकसभा क्षेत्र फैजाबाद में बीजेपी हार गई. सुनने में आ रहा है कि इस बार राहुल गांधी और अखिलेश यादव अयोध्या की जनता को धन्यवाद देने जा सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, राहुल और अखिलेश अयोध्या की ‘धन्यवाद यात्रा’ पर जा सकते हैं. लेकिन अभी तक कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है. सिर्फ फैजाबाद में ही बीजेपी समाजवादी पार्टी से नहीं हारी है. अयोध्या क्षेत्र की पांचों लोकसभा सीटें बीजेपी हार गई है. जिसे मोदी ने खुद नए संसद भवन में स्थापित किया था. इसे स्पीकर की सीट के बगल में रखा गया है. किसी समय चोल राजवंश का प्रतीक रहा ‘राजदंडा’ अगस्त 1947 में भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को उपहार में दिया गया था।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, भले ही अयोध्या में धन्यवाद यात्रा फाइनल न हो, लेकिन गांधी परिवार रायबरेली और अमेठी में धन्यवाद यात्रा जरूर करेगा. सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी एक साथ रायबरेली और अमेठी की जनता को धन्यवाद देते हुए रोड-शो करेंगे. कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि राहुल रायबरेली से सांसदी छोड़कर वेनार्ड के लिए सांसद का पद छोड़ सकते हैं. क्योंकि राहुल को रायबरेली की जनता ने भारी मतों से जिताया है. पिछले लोकसभा चुनाव में अमेठी में जहां राहुल स्मृति ईरानी से हार गए थे, वहीं इस बार गांधी परिवार के विश्वासपात्र किशोरीलाल शर्मा ने स्मृति को हरा दिया। लोकसभा चुनाव हारने वाले केंद्रीय मंत्रियों में स्मृति को सबसे ज्यादा वोट मिले।

आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ने तर्क दिया कि राहुल के रायबरेली से सांसद होने से उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुनरुद्धार में कांग्रेस को फायदा होगा। इसके अलावा, रायबरेली गांधी परिवार की पारंपरिक सीट है. फिर केरल के नेता के सुरेश ने कहा कि राहुल को वेनाड से सांसद पद पर रहना चाहिए. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में वह अमेठी से हार गए थे, लेकिन वेनार चुनाव जीतकर राहुल संसद पहुंचे थे।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक बीजेपी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दक्षिण भारतीय पार्टी बताने की कोशिश कर रही थी. इसलिए राहुल गांधी को केरल के वेनाड के बजाय हिंदी बेल्ट के रायबरेली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। इसके अलावा राहुल ने रायबरेली में बीजेपी को हराया. वह इंडिया मंच से साथी सीपीआई नेता एनी राजा से हार गए। अमेठी के सांसद किशोरलाल शर्मा के मुताबिक, ‘रायबरेली में राहुल गांधी ने वेनार्ड से बड़े अंतर से जीत हासिल की है।’ इसलिए राहुल को रायबरेली से सांसद बनना चाहिए. पूरे लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रामलला के दाह संस्कार समारोह में शामिल नहीं होने के लिए विपक्ष के भारत मंच की आलोचना की। अयोध्या के राम मंदिर वाले लोकसभा क्षेत्र फैजाबाद में बीजेपी हार गई. सुनने में आ रहा है कि इस बार राहुल गांधी और अखिलेश यादव अयोध्या की जनता को धन्यवाद देने जा सकते हैं.