Thursday, March 5, 2026
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जानिए जन्म देने वाले बाप की अद्भुत कहानियाँ!

आज हम आप सभी को जन्म देने वाले बाप की अद्भुत कहानियाँ बताने जा रहे हैं! बाप-बेटे के रिश्ते पर बनीं इस फिल्म में एक बेटा अपने पिता को दुश्मनों से बचाने के लिए हर हद पार कर देता है। बेटा जानता है बिना पिता के उसका कोई वजूद नहीं है। रील हो या रीयल लाइफ, पिता का किरदार बच्चों के जीवन का आधार होता है। पिता का प्यार और डांट, दोनों अनमोल हैं। इसकी कोई कीमत नहीं होती। पिता को यूं ही ‘आसमान’ नहीं कहते हैं, पिता अपने बच्चों की एक खुशी पर सब कुछ कुर्बान कर देता है। वहीं बच्चों पर कुछ आफत आए तो वो सारी दुनिया से भी लड़ जाता है। पिछले कुछ दिनों से पिता की ‘दिलदारी’ और ‘लाचारी’ की दो भावुक तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। एक तस्वीर है भारत के मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके बेटे अनंत की और दूसरी तस्वीर है राजस्थान में तैनात सब इंस्पेक्टर नरेश शर्मा और उनके 21 महीने के बेटे हृदयांश की। जहां एक तरफ मुकेश अंबानी ने अपने बेटे की प्री-वेडिंग इवेंट पर एक हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च कर दिए, वहीं दूसरी तरफ नरेश शर्मा अपने 21 महीने के बेटे को गंभीर बीमारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ से बचाने के लिए 17.5 करोड़ रुपये जुटाने में लगे हैं। यह रकम जुटाना उनके लिए ‘एवरेस्ट’ पर चढ़ाई करने से भी कठिन चुनौती है। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है, उन्हें पूरी उम्मीद है कि वह अपने बेटे को दर्द और तकलीफ से उबार लेंगे। नरेश शर्मा अपने बेटे की जान बचाने के लिए दरबदर भटक रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वह अपने बेटे के इलाज के लिए मदद मांग रहे हैं। नरेश कुमार पेशे से पुलिस इंस्पेक्टर हैं। आमतौर पर पुलिस महकमे के लोगों को सख्त मिजाज वाला समझा जाता है। लेकिन जब बेटा तकलीफ में हो तो पुलिसवाले की आंखों में भी आंसुओं की सुनामी आ जाती है। नरेश शर्मा भी अपने आंसुओं को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, बेटे के लिए मदद की गुहार लगाते वक्त वह खूब रो रहे हैं। बच्चों की खुशी का लम्हा हो या दुख का पल, पिता के आंसू छलक ही जाते हैं। देश के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी भी अपने बेटे अनंत के प्री-वेडिंग इवेंट में भावुक हो गए थे और उनकी आंखों से आंसू छलक गए थे। दरअसल अनंत अंबानी ने अपने प्री-वेडिंग इवेंट में दिल छू लेने वाली स्पीच दी थी। अनंत ने उनकी प्री-वेडिंग के पल को खूबसूरत बनाने के लिए अपने माता-पिता को थैंक्स कहा था। उन्होंने उन हेल्थ इश्यू के बारे में भी बताया जिनका वह बचपन से सामना कर रहे हैं और कैसे उनके माता-पिता ने उन्हें कभी कष्ट महसूस नहीं होने दिया। दरअसल 2017 में अपने एक इंटरव्यू में अनंत अंबानी की मां नीता अंबानी ने बताया था कि उनका बेटा गंभीर अस्थमा से पीड़ित था, इसलिए उन्हें उसे बहुत सारे स्टेरॉयड पर रखना पड़ा, जिसके चलते अनंत का वजन फिर से बढ़ गया था। अस्थमा के इलाज में स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग श्वसन नलिकाओं को खोलने में मदद करता है, जिससे सांस की समस्या से राहत मिलती है। हालांकि इसके साइड इफेक्ट में वजन बढ़ना भी शामिल है।

राजस्थान के धौलपुर जिले के मनियां पुलिस थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर नरेश शर्मा का 21 महीने का बेटा हृदयांश गंभीर बीमारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ से पीड़ित है। इस बीमारी की वजह से हृदयांश अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता है। डॉक्टर ने इलाज के लिए 17.5 करोड़ रुपये का एक इंजेक्शन ZOLGESMA की जरूरत बताई है। इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना हृदयांश के पिता नरेश के लिए संभव नहीं है। नरेश ने अपने बेटे हृदयांश की जान बचाने के लिए एक अभियान शुरू किया है। नरेश क्राउड फंडिंग के जरिए पैसा इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर ह्रदयांश को बचाने की मुहिम चल पड़ी है। सोशल मीडिया पर ह्रदयांश की बीमारी के बारे में जानकर उसकी मदद के लिए हजारों लोग आगे आए हैं। वहीं राजस्थान के पुलिस महानिदेशक यूआर साहू ने भी सब इंस्पेक्टर नरेश शर्मा के बेटे के लिए अपील जारी की है। डीजीपी साहू ने पुलिस विभाग के सभी आईपीएस अधिकारियों और कर्मचारियों को एक पत्र जारी करके नरेश शर्मा के बेटे ह्रदयांश की जान बचाने के लिए सहयोग करने की अपील की है। कई आईपीएस अफसर भी ह्रदयांश की मदद के लिए मुहिम चला रहे हैं। कुछ आईपीएस अफसरों ने 51,000 तो कुछ अफसरों ने 25-25 हजार रुपये की सहयोग राशि दी है।

21 महीने के हृदयांश को स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी नाम की बीमारी है। ये काफी दुर्लभ बीमारी है। इसके सिर्फ एक ही इलाज है। इसमें Zolgensma नाम का इंजेक्शन लगाया जाता है। दुनिया की सबसे महंगा इंजेक्शन एक बार फिर चर्चा में है। यह वन-टाइम जीन थेरेपी है जिसका यूज स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) से जूझ रहे बच्चों के इलाज में किया जाता है। हालांकि यह भारत में अप्रूव्ड नहीं है लेकिन डॉक्टर की सलाह और सरकार की मंजूरी के बाद इसका आयात किया जा सकता है। यह दुनिया की सबसे महंगी दवा है। भारत में इसकी एक डोज की कीमत 17 करोड़ रुपये बैठती है।

Zolgensma को स्विस कंपनी नोवार्तिस ने विकसित किया है। यह दुर्लभ जेनेटिक बीमारी एसएसए के इलाज में काम आती है। एसएमए एक घातक, न्यूरोमस्कुलर और प्रोग्रेसिव आनुवंशिक बीमारी है। यह खासतौर से ब्रेन की नर्व सेल्स और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाती है। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में 10,000 से 25,000 बच्चे और वयस्क इस बीमारी से जूझ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि बहुत कम मरीज दवा को खरीद पाते हैं, इसलिए इसकी कीमत बहुत ऊंची बनी रहती है। दुनिया में एसएमए के इलाज के लिए केवल तीन दवाओं को मंजूरी मिली है। इन्हें बनाने वाली कंपनियां बायोजेन, नोवार्तिस और रॉश है। इसकी भारी कीमत के बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे एसएमए के इलाज और केयर में आने वाले खर्च को काफी हद तक ऑफसेट किया जा सकता है। नोवार्तिस की वेबसाइट के मुताबिक इस दवा को 45 देशों में मंजूरी मिली है और अब तक दुनियाभर में 2,500 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। कंपनी का दावा किया है उसने 36 देशों में करीब 300 बच्चों को मुफ्त में जीन थेरेपी दी है।

आखिर लोकसभा चुनाव से पहले क्यों हो रही है मिसिंग वोटर की चर्चा?

वर्तमान में लोकसभा चुनाव से पहले मिसिंग वोटर की चर्चा हो रही है! जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे ध्यान उन बड़ी संख्या में रजिस्टर्ड वोटर्स पर जाता है जो अलग-अलग वजहों से मतदान में हिस्सा नहीं ले पाते। करीब 30 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स हैं जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाते। ऐसा इसलिए क्योंकि वे लंबे समय से दूसरी जगह पर रहते हैं? ये ‘लापता मतदाता’ मुख्य रूप से प्रवासी हैं, जिनका वोटिंग लिस्ट में पता उनके मौजूदा निवास स्थान से मेल नहीं खाता। परिणामस्वरूप, वे मतदान करने में असमर्थ रहते हैं। अपने रजिस्टर्ड एड्रेस में विसंगतियों के कारण वो वोटिंग में शामिल नहीं हो पाते। ‘लापता मतदाता’ के रूप में ये वोटर्स ज्यादातर प्रवासी हैं जो चुनावी प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं। हालांकि, अब चुनाव आयोग ने इन ‘लापता मतदाताओं’ के लिए ही रिमोट इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया है। इस प्रक्रिया के जरिए कोशिश यही है कि ऐसे मतदाता भी वोटिंग में हिस्सा ले सकें जो अपने रजिस्टर्ड एड्रेस से दूर रहते हैं। इनकी वोटिंग से संभावना जताई जा रही कि आंकड़े में 30 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। नए मतदाताओं के आने से न केवल मतों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, बल्कि कई और मुद्दे भी सामने आएंगे। इसके राजनीतिक दलों को अपने घोषणापत्र पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता होगी। इन लापता मतदाताओं के आने से चुनावी रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। ये वोटर्स, जो मुख्य रूप से युवा, अविवाहित लोग हैं, पारंपरिक ग्रामीण मतदाताओं से अलग होते हैं। उनकी शहरी पृष्ठभूमि और अनुभव देश में राजनीति के भविष्य को नया आकार देंगे।

अगर चुनाव आयोग इन ‘लापता मतदाताओं’ के लिए रिमोट इलेक्ट्रॉनिक मशीनें लगाने की अपनी योजना में सफल हो जाता है, तो इससे मौजूदा वोटिंग पर्सेंट में बड़ी छलांग लग सकती है। ये आंकड़ा 30 फीसदी तक और बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में न केवल अधिक वोट डाले जाएंगे, बल्कि सियासी पार्टियों को नए सिरे से इन वोटर्स को फोकस करते हुए प्लानिंग करनी पड़ेगी। इन नए मतदाताओं के आने से लॉन्ग टर्म चुनाव रणनीतियों में बड़े बदलाव को प्रेरित करेंगे। ये अब शहर में रहकर कमाने वाले लोग हैं। ये वोटर्स ज्यादातर युवा होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि 60 से ऊपर के लगभग 71 फीसदी लोग गांवों में ही रहते हैं। ये विशेषताएं मिलकर निश्चित रूप से भविष्य की राजनीति पर गहरी छाप छोड़ेंगी।

उदाहरण के लिए, अगर कोई प्रत्यक्ष फील्ड डेटा का इस्तेमाल करता है, तो दिल्ली और बेंगलुरु में अधिकांश प्रवासी 16 से 30 वर्ष की आयु के हैं। इनमें भी अधिकतर अविवाहित युवा हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर युवा ही अपने गृह राज्य, गृह जिले से बाहर काम के लिए महिलाओं की तुलना में ज्यादा पलायन करते हैं। वे बाहर रहकर भी अकसर अकेले होते हैं क्योंकि उनका आर्थिक भविष्य अनिश्चित है। ये ‘लापता मतदाता’ आम तौर पर पुरुष होते हैं क्योंकि जब महिलाएं पलायन करती हैं तो इसका मुख्य कारण शादी होता है। उनका वैवाहिक घर उन्हें एक स्थिर एड्रेस और मतदाता सूची में एक पक्का रजिस्ट्रेशन देता है। हालांकि महिला की शादी किसी ऐसे शख्स से होती है जिसकी नौकरी अनिश्चित है तो वो भी ‘लापता मतदाता’ के रूप में पुरुष के साथ ही शामिल होंगी।

ऐसा नहीं है कि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले सभी लोग वोट देने से चूक जाते हैं। लगभग 70 फीसदी घुमंतू नहीं हैं लेकिन वे जिस घर में रहते हैं उसके मालिक हैं। वो अपने पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। शायद ही ऐसे लोग ‘लापता मतदाताओं’ में से होंगे। श्रमिकों का एक निश्चित पता हो, इसके लिए उन्हें नौकरी की सुरक्षा की आवश्यकता है और इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। अनौपचारिक श्रम से कॉरपोरेट घरानों को तुरंत फायदा होता है, लेकिन निम्न वर्ग को वोटिंग के विशेषाधिकार और सार्थक स्किल हासिल करने से वंचित रखा जाता है। उद्योग सार्वजनिक रूप से योग्य श्रमिकों की कमी के बारे में शिकायत करता है, लेकिन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम को बहुत कम राशि का योगदान देता है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे से पता चलता है, महिलाएं छोटे पैमाने के उद्यम में भी अधिक सक्रिय हो रही हैं। स्टडी से पता चला है कि जब पत्नियां और माएं काम करना शुरू करती हैं, तो राजनीतिक मामलों में उनकी रुचि भी बढ़ती है। पहले से ही, 2019 के चुनावों में, महिलाओं का वोटिंग पर्सेंट पुरुष मतदाताओं से अधिक थी। हालांकि, अगर ‘लापता मतदाताओं’ को चुनाव के लिए वापस लाया जाता है, तो चुनाव में पुरुषों की संख्या बढ़ जाएगी।हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब प्रवासी उचित शहरी नौकरी पाने में विफल रहता है, तो इसका कारण प्रयास की कमी नहीं है। अधिकांश शहरी प्रवासी मैट्रिकुलेट और स्नातक हैं, और निश्चित रूप से साक्षर से कहीं अधिक हैं। इसलिए, अगर चुनाव आयोग ‘लापता मतदाता’ को साथ लाने की उम्मीद करता है तो यह वास्तव में एक बड़ा फैसला होगा। ये लोकतांत्रिक मशीनरी के दायरे को व्यापक बना रहा है।

एक बार जब ‘लापता मतदाताओं’ को अपना स्थान मिल जाए, तो यह संभावना नहीं है कि राजनीतिक घोषणापत्र उन मुद्दों की ओर अधिक निर्णायक रूप से झुकेंगे जो सीधे तौर पर पुरुष प्रवासियों से संबंधित हैं। इसका असर गांव छोड़ चुके पुरुषों की जगह भरने वाली महिला कामगारों पर भी पड़ेगा। कोई चाहे जिस ओर देखे, पार्टियों को नए सिरे से सोचना होगा। मिसिंग वोटर्स को आकर्षित करने के लिए स्किल और नौकरी के स्थायित्व पर ध्यान देना पहले से ज्यादा जरूरी होगा। ठाणे, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और सूरत जैसे शहर, जाहिर तौर पर बेहद अहम होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि ये शहरी केंद्र 25 फीसदी से अधिक नौकरी चाहने वाले प्रवासियों को आकर्षित करते हैं। इसलिए यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि वहां कई ‘लापता मतदाता’ मिलेंगे। यह अतीत को सुधारने का समय है। वर्षों तक ‘मिसिंग वोटर्स’ को भुला दिया गया, लेकिन अब इन्हें और अनदेखा नहीं किया जा सकता।

आखिर क्यों खास है गगनयान के एस्ट्रोनॉट्स की ड्रेस?

आज हम आपको बताएंगे कि गगनयान के एस्ट्रोनॉट्स की ड्रेस क्यों खास है! हाल ही में गगन मिशन के चारों एस्ट्रोनॉट्स के नाम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दी है। पीएम मोदी से मुलाकात के 4 जांबाजों ने नीले रंग का एक खास ब्लू ग्राउंड सूट पहना था। यह सूट बनाया किसने? किसने डिजाइन किया? इन सभी सवालों के जवाब हर कोई जानना चाहता है। दरअसल पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान को लेकर देशवासियों में काफी उत्साह है। गगनयान मिशन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को जानने की जिज्ञासा लोगों के मन में है। एस्ट्रोनॉट्स की ड्रेस की भी एक खास बात है। एस्ट्रोनॉट्स की खास ड्रेस को बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के तीन छात्रों और दो प्रोफेसर ने मिलकर बनाया है। इन स्टूडेंट्स का नाम है लामिया अनीज, समर्पण प्रधान और तुलिया डी। ये तीनों 2022 बैच के छात्र हैं।इसके अलावा दो प्रोफेसर-डॉ. जोनाली बाजपेई और डॉ. मोहन कुमार इस ड्रेस डिजाइन में शामिल थे। अंतरिक्ष यात्रियों ने फरवरी में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी , बेंगलुरु की एक टीम द्वारा डिजाइन की गई नीली ग्राउंड यूनिफॉर्म में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्ट टीम ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पंख भी डिजाइन किया है। निफ्ट ने अंतरिक्ष यात्रियों के यूनिफॉर्म को एनर्जेटिक रूप देने के लिए एक असममित डिजाइन चुना, जिसमें नीला रंग आकाश और शांति का प्रतीक है। जिस कपड़े से इस यूनिफॉर्म को बनाया गया है वह कपास से बना है। प्रोफेसर बाजपेयी ने कहा, ‘मेरी टीम ने 150 डिज़ाइनों पर काम किया और इसरो की टीम को 70 अलग-अलग विकल्प दिए गए थे।’बता दे कि निफ्ट, बेंगलुरु के फैशन टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. मोहन वीके ने कहा कि आवश्यकता यह थी कि यह विशेष सूट 140 करोड़ भारतीयों को उत्साहित करे। दूसरा, यह अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं वाले देशों के विशिष्ट अंतरिक्ष क्लब में भारत के प्रवेश की जोरदार घोषणा होनी चाहिए। अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायु सेना से हैं। इसके केंद्र में अशोक चक्र है। हमने इसरो के लोगो को चक्र और पंखों वाले लोगों से मर्ज कर दिया है। ग्राउंड यूनिफ़ॉर्म में एक खास डिजाइन होता है जिसमें एक तरफ हल्का नीला और दूसरी तरफ गहरा नीला होता है।ऐसी आवश्यकताओं के आधार पर, हमने अपनी डिज़ाइन दिशाओं को विषमता तक सीमित कर दिया है। उन्होंने बताया कि ग्राउंड यूनिफॉर्म अंतरिक्ष यात्री सूट से अलग है, जिसे भारत ने रूस से खरीदा है। प्रोफेसर बाजपेयी ने कहा, ‘नीला रंग शांति, शांति और दृढ़ता की भावना का प्रतीक है।’

उन्होंने आगे कहा कि हम गहरे और हल्के नीले रंग और कुछ क्षैतिज पट्टियों के साथ रंगों के एक सुंदर संतुलन तक पहुंचे हैं। अंतरिक्ष यात्री पैच में पंख, अशोक चक्र और इसरो लोगो शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पंख सौर पैनलों के खुलने के समान हैं और सकारात्मकता, प्रचुरता, उड़ान और ऊंचाई का अहसास कराते हैं। ये यह भी दर्शाता है कि अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायु सेना से हैं। इसके केंद्र में अशोक चक्र है। हमने इसरो के लोगो को चक्र और पंखों वाले लोगों से मर्ज कर दिया है। ग्राउंड यूनिफ़ॉर्म में एक खास डिजाइन होता है जिसमें एक तरफ हल्का नीला और दूसरी तरफ गहरा नीला होता है।

निफ्ट, बेंगलुरु के फैशन टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. मोहन वीके ने कहा कि आवश्यकता यह थी कि यह विशेष सूट 140 करोड़ भारतीयों को उत्साहित करे। बता दें कि निफ्ट टीम ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पंख भी डिजाइन किया है। निफ्ट ने अंतरिक्ष यात्रियों के यूनिफॉर्म को एनर्जेटिक रूप देने के लिए एक असममित डिजाइन चुना, जिसमें नीला रंग आकाश और शांति का प्रतीक है। जिस कपड़े से इस यूनिफॉर्म को बनाया गया है वह कपास से बना है। प्रोफेसर बाजपेयी ने कहा, ‘मेरी टीम ने 150 डिज़ाइनों पर काम किया और इसरो की टीम को 70 अलग-अलग विकल्प दिए गए थे।’बता दे कि निफ्ट, बेंगलुरु के फैशन टेक्नोलॉजिस्ट डॉ. मोहन वीके ने कहा कि आवश्यकता यह थी कि यह विशेष सूट 140 करोड़ भारतीयों को उत्साहित करे। दूसरा, यह अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं वाले देशों के विशिष्ट अंतरिक्ष क्लब में भारत के प्रवेश की जोरदार घोषणा होनी चाहिए। बता दे इसमे इसरो के लोगो को चक्र और पंखों वाले लोगों से मर्ज कर दिया है। ग्राउंड यूनिफ़ॉर्म में एक खास डिजाइन होता है जिसमें एक तरफ हल्का नीला और दूसरी तरफ गहरा नीला होता है। दूसरा, यह अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं वाले देशों के विशिष्ट अंतरिक्ष क्लब में भारत के प्रवेश की जोरदार घोषणा होनी चाहिए। ऐसी आवश्यकताओं के आधार पर, हमने अपनी डिज़ाइन दिशाओं को विषमता तक सीमित कर दिया है।

क्या चीन के प्रति सख्त हो चुका है भारत का नजरिया?

वर्तमान में भारत का नजरिया चीन के प्रति सख्त हो चुका है! भारत की तरफ से हाल ही में अपनी चीन से सटी सीमा पर 10 हजार सैनिकों की तैनाती की खबर आई थी है। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में चीन के साथ लगी अपनी 532 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है। भारत के इस कदम पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया आई है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा है कि सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ाने का भारत का कदम स्थिति को सामान्य करने के दोनों देशों के प्रयासों के लिए बिल्कुल उलट है। भारत के इस कदम को सीमा पर अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ ही चीन पर दबाव बनाने के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, सैनिकों की तैनाती को लेकर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद शुरू होने और गलवान में हिंसा के बाद चीन को लेकर अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक किया है। भारत के विदेश मंत्री देश के साथ ही विदेशी दौरों पर भी चीन को आईना दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ भारत की तरफ से लगातार सैन्य साजो सामान के साथ ही मॉर्डन हथियारों की खरीद को बढ़ाया गया है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया गया है। इसमें भारत किसी भी तरह से चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर बैकफुट पर नजर नहीं आ रहा है। भारत खुले रूप से चीन पर यथास्थिति को बदलने की बात कहता रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने को लेकर लगातार सैन्य स्तर की वार्ता चल रही है। ऐसे में भारत की रणनीति चीनी दबाव को कुंद करने की है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2020 में सीमाओं पर हिंसा के लिए चीन को फिर जिम्मेदार ठहराया। विदेश मंत्री ने अपने हाल के जापान के दो दिन के दौरे पर कहा कि चीन ने भारत के साथ लंबे समय से कायम लिखित समझौतों का पालन नहीं किया। जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत में एक बहुत बड़ा शक्ति परिवर्तन वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि जब क्षमताओं और प्रभाव तथा संभवतः महत्वाकांक्षाओं में बहुत बड़े बदलाव होते हैं, तो सभी महत्वाकांक्षाएं और रणनीतिक परिणाम भी जुड़े होते हैं। जयशंकर ने कहा कि अब, यह कोई मुद्दा नहीं है कि आपको यह पसंद है या आपको यह पसंद नहीं है। वहां एक वास्तविकता है, आपको उस वास्तविकता से निपटना होगा। विदेश मंत्री ने कहा कि आदर्श रूप से, हम मानते हैं कि हर कोई कहेगा, ठीक है, चीजें बदल रही हैं, लेकिन इसे जितना संभव हो उतना स्थिर रखना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि दुर्भाग्य से, हमने चीन के मामले में पिछले दशक में ऐसा नहीं देखा है। उदाहरण के लिए, 1975 से 2020 के बीच, 45 साल में सीमा पर कोई हिंसा नहीं हुई और 2020 में हालात बदल गए।

जयशंकर ने एक सवाल पर कहा कि हम कई चीजों पर असहमत हो सकते हैं, लेकिन जब कोई देश किसी पड़ोसी के साथ लिखित समझौतों का पालन नहीं करता है, तो मुझे लगता है… तब रिश्ते की स्थिरता पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है और ईमानदारी से कहूं तो इरादों पर सवाल उठता है। इससे पहले पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से जारी सैन्य टकराव के बीच जयशंकर ने दिल्ली में कहा था कि चीन को सीमा प्रबंधन समझौतों का पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि भारत-चीन संबंधों में सुधार के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति होनी चाहिए। अंततः भारत और चीन के बीच संबंधों में संतुलन होना चाहिए। जयशंकर ने चीन से निपटने को लेकर एक व्यापक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि भारत ने अतीत में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का उतना प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं किया, जितना वह कर सकता था।

जापान में ही विदेश मंत्री ने कहा कि आजादी मिलने के तुंरत बाद, हमने आक्रमण देखा, हमारी सीमाओं में बदलाव की कोशिश हुई और बल्कि आज भी भारत के कुछ हिस्सों पर एक अन्य देश का कब्जा है, लेकिन हमने इस पर दुनिया को यह कहते नहीं देखा कि चलो हम सभी भारत का साथ दें। जयशंकर ने यह भी कहा था कि आज हमें बताया जा रहा है कि यह सिद्धांतों का मामला है। काश, मैं यह सिद्धांत पिछले 80 वर्ष में देखता। मैंने इन सिद्धांतों को मनमाने ढंग से इस्तेमाल करते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि मैं कहूंगा कि हमारे साथ अन्याय किया गया। मैं इसकी पैरवी नहीं कर रहा हूं कि हर किसी के साथ ऐसा किया जाना चाहिए। हमारा रुख बहुत स्पष्ट रहा है।एलएसी के पास पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद 5 मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध पैदा हो गया था। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई। यह कई दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था। भारत लगातार कहता रहा है कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में शांति नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

आखिर बीजेपी से वापिस कैसे जुड़े चंद्रबाबू नायडू?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि चंद्रबाबू नायडू बीजेपी से वापस कैसे जुड़ गए हैं! 2024 के चुनावी रण में बीजेपी ने एनडीए गठबंधन के लिए 400 पार का टारगेट सेट किया है। इसके लिए पार्टी लगातार अपना कुनबा बढ़ाने में जुटी है। इसी कड़ी में बीजेपी का आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और पवन कल्याण की जेएसपी के साथ डील फाइनल हो गया है। टीडीपी सांसद कनकमेदला रवींद्र कुमार ने पुष्टि की है कि तेलुगु देशम पार्टी टीडीपी, एनडीए में शामिल हो रही है। बीजेपी ने टीडीपी-जनसेना के साथ गठबंधन किया है।इस अलायंस के बाद चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि गठबंधन से आंध्र प्रदेश को फायदा होगा। बीजेपी-टीडीपी का एक साथ आना देश और राज्य के लिए लाभप्रद स्थिति है। गठबंधन को लेकर तेलगुदेशम पार्टी के मुखिया एन. चंद्रबाबू नायडू और जन सेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण के साथ गृह मंत्री अमित शाह की मीटिंग हुई। दिल्ली में हुई बैठक के बाद गठबंधन का ऐलान हो गया।बीजेपी-टीडीपी और जेएसपी में गठबंधन के बाद तीनों पार्टियों की ओर से ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया गया है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू और जन सेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण ने संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी बीते 10 साल से देश की प्रगति में लगातार काम कर रहे हैं। अब इसमें टीडीपी और जेएसपी भी शामिल होकर आंध्र प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सहयोग करेंगे। बीजेपी-टीडीपी के बीच पुराना संबंध रहा है। टीडीपी ने 1996 में एनडीए ज्वाइन किया था। ये अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार और फिर 2014 की नरेंद्र मोदी की सरकार में साथ काम किया। अब एक बार फिर टीडीपी और बीजेपी एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेंगी।

 आंध्र प्रदेश में लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं। जानकारी के मुताबिक, जो सीट शेयरिंग फॉर्म्युला तय हुआ है उसमें बीजेपी 6, जनसेना पार्टी 2 और टीडीपी 17 सीटों पर कैंडिडेट उतारेगी। वहीं आंध्र प्रदेश में होने वाले विधानसभा को लेकर भी सीट बंटवारे पर बातचीत हुई है। सूबे में 175 विधानसभा सीटें हैं। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने साफ कहा है को वो 145 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ऐसे में बीजेपी और जनसेना पार्टी के हिस्से में 30 सीटें ही आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक दोनों दलों के बीच 30 सीट को लेकर फैसला हो चुका है। बीजेपी की कोशिश विजाग, विजयवाड़ा, अराकू, राजमपेट, राजमुंदरी, तिरूपति समेत कुछ प्रमुख चुनावी क्षेत्रों को अपने पास रखने की है। माना जा रहा कि टीडीपी और जनसेना पार्टी के साथ बातचीत में ये प्वाइंट भी उठा। बीजेपी का फोकस आगामी लोकसभा चुनावों में अकेले 370 सीटें जीतने का है। इस सफलता को हासिल करने के लिए वो क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को महत्वपूर्ण मान रही है। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश के अलावा, बीजेपी ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजेडी से भी चुनावी समझौते को लेकर प्लानिंग में है।

आंध्र प्रदेश में बीजेपी टीडीपी के साथ आने की अहम वजह हैं। दरअसल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों में अपना प्रभुत्व बनाए रखना चाहती है। पांच साल पहले, वाईएसआर कांग्रेस राज्य की 25 लोकसभा सीटों में से 22 सीटें और 175 विधानसभा क्षेत्रों में से 151 सीटें जीतने में सफल हुई थी। इसके विपरीत, बीजेपी को पिछले चुनावों में चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी अकेले चुनाव मैदान में थी। ऐसी स्थिति में पार्टी लोकसभा और विधानसभा दोनों में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी। प्रधानमंत्री मोदी बीते 10 साल से देश की प्रगति में लगातार काम कर रहे हैं। टीडीपी और जनसेना पार्टी के साथ बातचीत में ये प्वाइंट भी उठा। बीजेपी का फोकस आगामी लोकसभा चुनावों में अकेले 370 सीटें जीतने का है। इस सफलता को हासिल करने के लिए वो क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को महत्वपूर्ण मान रही है।अब इसमें टीडीपी और जेएसपी भी शामिल होकर आंध्र प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सहयोग करेंगे। बीजेपी-टीडीपी के बीच पुराना संबंध रहा है। टीडीपी ने 1996 में एनडीए ज्वाइन किया था। ये अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार और फिर 2014 की नरेंद्र मोदी की सरकार में साथ काम किया।पिछले चुनाव नतीजों से सबक लेते हुए ही पार्टी ने इस बार गठबंधन का दांव चला है। टीडीपी, जो एक समय एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। पार्टी ने उसे फिर एनडीए में शामिल कर लिया है। टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू को भी उम्मीद है कि इस गठबंधन से उन्हें आगामी चुनाव में फायदा मिलेगा।

आखिर कौन है भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट इनायत वत्स?

आज हम आपको भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट इनायत वत्स के बारे में जानकारी देने वाले हैं! मेजर नवनीत वत्स ने 20 साल पहले देश की आन के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उनकी बेटी अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाएंगी। हालांकि, अब वो दिन आ गया जब एक बेटी ने अपने पिता की तरह ही सेना में जगह बनाने के लिए जमकर मेहनत किया। यही नहीं लगातार कोशिश के साथ पिता की शहादत के करीब 20 साल बाद लेफ्टिनेंट इनायत वत्स सेना में शामिल हो गईं। शनिवार को जब वो भारतीय सेना में ज्वाइन कर रही थीं तो बेहद दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई। दरअसल, इनायत वत्स ने सेना में ज्वाइनिंग के दौरान वही वर्दी पहनी जो कभी उनके पिता ने पहना था। इनायत वत्स, जिनके पहले नाम का अर्थ ही होता है दयालुता। हालांकि, जब वो महज तीन साल की थी उसी समय जिंदगी ने उन्हें बड़ा दर्द दिया। उन्होंने अपने पिता सेना में मेजर नवनीत वत्स को खो दिया था। इतनी कम उम्र में पिता का साया सिर से उठने के बाद भी इनायत ने हौसला नहीं हारा। हरियाणा की रहने वाली दिल्ली से ग्रेजुएट इस बेटी ने पढ़ाई के साथ ही अपने पिता की राह पर चलने का फैसला कर दिया। उन्होंने तय कर लिया कि वो भी अपने पिता की तरह सेना में भर्ती होंगी। अब वो समय आ भी जब बेटी ने पिता की विरासत को साधा और उन्हीं की वर्दी पहनकर इंडियन आर्मी का हिस्सा बनीं।

लेफ्टिनेंट इनायत वत्स के पिता मेजर नवनीत वत्स ने साल 2003 में अपनी जान गंवाई थी। वो कश्मीर में एक आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल थे। इनायत सेना में अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। उनके नाना भी आर्मी में कर्नल रैंक पर थे। पंचकुला की रहने वाली इनायत वत्स, अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। महज तीन साल की उम्र में उनके पिता ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने जिस वीरता का परिचय दिया उसके लिए नवनीत वत्स को मरणोपरांत सेना पदक से सम्मानित किया गया था। इनायत वत्स अब भारतीय सेना में शामिल हो गई हैं। उन्होंने सेना ज्वाइन के खास मौके पर अपने पिता की ही वर्दी पहनकर और इस दिन को और खास बना दिया। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), चेन्नई में शिरकत किया था। दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएट इनायत ने डीयू के हिंदू कॉलेज से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। शहीद के परिजनों को लेकर हरियाणा सरकार की पॉलिसी के तहत उन्हें एक गजेटेड पोस्ट का ऑफर मिला था, हालांकि इनायत का प्लान कुछ और ही था।

अपने पिता नवनीत वत्स को आदर्श मानने वाली इनायत का एक ही लक्ष्य था सेना में भर्ती, आखिरकार उन्होंने इसे हासिल भी कर लिया। हालांकि उनकी मां शिवानी ने बेटी के फैसलों को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर की थी, बावजूद इसके उन्होंने इनायत के फैसले को पूरा सपोर्ट भी किया। उन्होंने कहा कि वह एक बहादुर की बेटी हैं। जब इनायत ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, तो सभी ने सोचा कि वह राज्य सरकार की ओर से दी गई नौकरी ही ज्वाइन करेंगी। हालांकि, वह एक शहीद की बेटी हैं और उनके लिए सेना में शामिल होना स्वाभाविक था। शिवानी 27 साल की थीं और उनकी शादी को केवल चार साल ही हुए थे जब उनके पति हमेशा के लिए उनसे दूर चले गए। वो पंचकूला में पास के ही एख चंडीमंदिर में आर्मी पब्लिक स्कूल में टीचर थीं। हरियाणा की रहने वाली दिल्ली से ग्रेजुएट इस बेटी ने पढ़ाई के साथ ही अपने पिता की राह पर चलने का फैसला कर दिया। उन्होंने तय कर लिया कि वो भी अपने पिता की तरह सेना में भर्ती होंगी। अब वो समय आ भी जब बेटी ने पिता की विरासत को साधा और उन्हीं की वर्दी पहनकर इंडियन आर्मी का हिस्सा बनीं।उन्होंने बताया कि इनायत ने एक बार मुझसे पूछा था कि अगर मैं लड़का होती तो तुम क्या करतीं? उस समय मैंने उससे कहा था कि मैं उसे एनडीए या आईएमए में शामिल होने के लिए कहती। मुझे खुशी है कि मेरी बेटी ने इस बात को स्वीकार किया और अब वो सेना में शामिल हो गई हैं।

आखिर बीजेपी पर क्यों भड़के सीएम अरविंद केजरीवाल?

हाल ही में सीएम अरविंद केजरीवाल बीजेपी पर एक बार फिर भड़क गए हैं! दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि अगर भगवान राम इस युग में होते तो बीजेपी ईडी और सीबीआई को उनके पीछे भी लगा देती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आम आदमी पार्टी की सरकार ‘विकास’ के मॉडल पर काम कर रही है जबकि बीजेपी विपक्षी दलों को खत्म करके और उनकी सरकारों को गिराकर ‘विनाश’ का मॉडल अपना रही है।हाल ही में ‘आप’ सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए 2024-25 बजट पर सदन को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह इतना अच्छा बजट है कि लोग अब कह रहे हैं कि आप-कांग्रेस गठबंधन दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटें जीतेगा। केजरीवाल ने उन्हें आठ समन भेजे जाने का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी की योजना उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डालने और उनकी सरकार को गिराने की है। आप संयोजक केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘अगर भगवान राम इस युग में होते तो बीजेपी ईडी और सीबीआई को उनके घर भेज देती और उनसे बंदूक के बल पर कहती कि वह बीजेपी के साथ आएंगे या जेल जाएंगे।’ दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने एक बयान में भगवान राम के बारे में मुख्यमंत्री की टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने केजरीवाल से ऐसी ‘तुच्छ टिप्पणियां’ न करने का आग्रह किया, जो भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति और आस्था पर खराब प्रभाव डालती हैं। केजरीवाल ने कहा कि वह उन्हें भेजे गये आठ समन के मुकाबले दिल्ली में आठ नये विद्यालयों का निर्माण कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (बीजेपी) मुझे इतने सारे नोटिस भेजे हैं जैसे कि मैं देश का सबसे बड़ा आतंकवादी हूं।’ केजरीवाल के आरोपों पर बीजेपी की ओर से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार को गिराने के लिए बनायी गई योजना के मुताबिक, पहला काम जो उन्हें करना है वो है मुफ्त बिजली योजना को रोकना और उसके बाद अच्छे विद्यालयों की साख को कम करना और दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक और अस्पतालों को बंद करना है। उन्होंने लोगों से ‘दिल्ली के दुश्मनों’ की पहचान करके उन्हें ‘दंडित’ करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि वे कभी न लौटें।

केजरीवाल ने सोमवार को वित्त मंत्री आतिशी द्वारा पेश बजट की सराहना करते हुए कहा कि बजट में घोषित ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ के तहत परिवार की प्रत्येक महिला को एक हजार रुपये दिये जाएंगे। केजरीवाल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी याद किया, जो वर्तमान में आबकारी नीति से संबंधित मामले में जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि अगले साल वह (सिसोदिया) विधानसभा में बजट पेश करेंगे।’ मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी मई 2014 में भारी जनादेश के साथ केंद्र की सत्ता में आई थी लेकिन उसने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का इस्तेमाल करके विपक्षी दलों को निशाना बनाकर ‘विनाश’ का मॉडल अपनाया। उन्होंने कहा, ‘हमने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया, चौबीस घंटे मुफ्त बिजली दी, मुफ्त पानी प्रदान किया, बुजुर्गों को मुफ्त तीर्थयात्रा पर भेजा, गरीब परिवारों के बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देखने में मदद की। यह आम आदमी पार्टी का ‘विकास’ मॉडल है।’

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में 2015 में सरकार बनाने के बाद से आप सरकार लोगों के लिए किए गए अच्छे कार्यों के कारण भारी जनादेश के साथ लगातार चुनाव जीतती आ रही है, फिर चाहे वह वर्ष 2020 में विधानसभा चुनाव हो या फिर 2022 का दिल्ली नगर निगम एमसीडी चुनाव। उन्होंने कहा, ‘इस बजट के पेश होने के बाद जनता अब कह रही है कि दिल्ली की सभी सात सीट हमारी होंगी।’ आप और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे के समझौते के तहत केजरीवाल की पार्टी दिल्ली की सात लोकसभा सीट में से चार पर चुनाव लड़ रही है जबकि कांग्रेस तीन सीट पर चुनाव मैदान में है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा कि मई 2014 में देश की सत्ता में आने के बाद पार्टी ने ‘विनाश’ का मॉडल सामने रखा। केजरीवाल ने कहा, ‘इस मॉडल में विपक्षी दलों को एक-एक करके खत्म करना, विधायकों को खरीदकर पार्टियों को तोड़ना, गिरफ्तारियां करना और विपक्षी नेताओं को जेल भेजना शामिल है। इस मॉडल का दूसरा हिस्सा देश में विपक्षी सरकारों के अच्छे कामों को रोकना है।’

रणजी फाइनल में मुंबई अभी भी विदर्भ से 289 रन आगे है.

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चौथे दिन का खेल खत्म होने तक मुंबई अभी भी 289 रन से आगे है। मुंबई के रणजी ट्रॉफी जीतने के ज्यादा मौके हैं. वे अपनी 42वीं रणजी जीत की ओर बढ़ रहे हैं. बुधवार को दिन खत्म होने तक विदर्भ ने 248 रन बना लिए थे। उन्होंने 5 विकेट गंवाए. करुण नायर इस दिन क्रीज पर टिके रहने की पूरी कोशिश करते हैं.

रणजी फाइनल में मुंबई ने पहली पारी में 224 रन बनाए. जवाब में विदर्भ की पारी 105 रनों पर सिमट गई. दूसरी पारी में मुशीर खान के शतक और श्रेयस अय्यर के 95 रनों की बदौलत मुंबई ने 418 रन बनाए. उन्होंने विदर्भ के सामने 538 रनों का लक्ष्य रखा. उस रन के जवाब में विदर्भ ने 248 रन पर 5 विकेट खो दिए. सलामी बल्लेबाज अथर्व तावड़े (32) और ध्रुव शोरे (28) ने क्रीज पर टिकने की कोशिश की. लेकिन 64 रन बाद विदर्भ ने पहला विकेट खो दिया. विदर्भ के लिए करुण ने 220 गेंदों पर 74 रन बनाए. 220 गेंद की इस पारी में उन्होंने सिर्फ तीन चौके लगाए. करुण क्रीज पर टिकने के लिए संघर्ष कर रहे थे. लेकिन अंत में वह युवा मुशीर खान की गेंद पर आउट हो गये. विदर्भ के लिए अक्षय वार्डकर (नाबाद 56) और हर्ष दुबे (नाबाद 11) 5 विकेट खोकर संघर्ष कर रहे हैं. मुंबई के लिए मुशीर खान और तनुस कोटियन ने दो-दो विकेट लिए। शम्स मुलानी ने एक विकेट लिया. मुंबई एक बार फिर रणजी ट्रॉफी जीतने को बेताब है। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक वानखेड़े स्टेडियम में अजिंक्य रहाणे की टीम खिताब की दौड़ में काफी आरामदायक स्थिति में है। मंगलवार को खेल खत्म होने पर विदर्भ की दूसरी पारी 10 रन थी. 10 विकेट हाथ में. रणजी जीतने के लिए उन्हें 528 रन और बनाने होंगे. इससे पहले मुंबई ने दूसरी पारी में 418 रन बनाए.

पहली पारी में मुंबई के 224 रन के जवाब में विदर्भ की पारी 105 रन पर समाप्त हुई. रहाणे 119 रनों की बढ़त के साथ दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने आए. सरफराज खान के भाई मुशीर खान ने 136 रन बनाये. उन्होंने मुंबई के लिए रणजी फाइनल में सबसे कम उम्र में शतक बनाकर सचिन तेंदुलकर का 30 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। कप्तान रहाणे के बल्ले से 73 रनों की पारी निकली. सोमवार को खेल के अंत में मुशीर और रहाणे 22 गज की दूरी पर नाबाद थे। आईपीएल से पहले रणजी फाइनल में कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान श्रेयस अय्यर भी फॉर्म में लौट आए। उनके बल्ले से 95 रनों की पारी निकली. इसके अलावा शम्स मुलानी ने भी अच्छा रन बनाया. वह 50 रनों से अजेय. विदर्भ के सबसे सफल गेंदबाज हर्ष दुबे ने 144 रन देकर 5 विकेट लिये. यश टैगोर ने 79 रन देकर 3 विकेट लिए।

मुंबई की दूसरी पारी खत्म होने के बाद विदर्भ के सामने जीत का लक्ष्य 538 रन है. इस दिन उन्हें 2 ओवर बल्लेबाजी करने का मौका मिलता है. अभी भी दो दिन का खेल बाकी है. परिणामी परिणामों की वस्तुतः गारंटी है। मुंबई को 42वीं बार रणजी जीतने के लिए 10 विकेट की जरूरत है. दूसरी ओर विदर्भ को 528 रन और चाहिए। भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा वानखेड़े स्टेडियम में रणजी फाइनल देखने पहुंचे. उन्हें मुंबई के सजघर में अपने रणजी टीम के साथियों के साथ देखा गया। रोहित के आईपीएल की तैयारी के लिए कुछ दिनों में मुंबई इंडियंस कैंप में शामिल होने की उम्मीद है।

हार्दिक पंड्या सोमवार को मुंबई इंडियंस के ट्रेनिंग कैंप में शामिल हुए। कैंप में नए कप्तान तो आ गए हैं, लेकिन पूर्व कप्तान नजर नहीं आए हैं. इंग्लैंड सीरीज खत्म होने के बाद रोहित मुंबई में थे लेकिन आईपीएल फ्रेंचाइजी के कैंप में शामिल नहीं हुए. मंगलवार को उसे दूसरे खेत में देखा गया.

वानखेड़े स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी का फाइनल चल रहा है. खिताबी मुकाबले में मुंबई का मुकाबला विदर्भ से है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मुंबई की रणजी चैंपियन एक बार फिर समय का इंतजार कर रही है. सुनील गौस्कर, सचिन तेंदुलकर जैसे पूर्व क्रिकेटर अपनी पसंदीदा टीम का खेल देखने मैदान पर पहुंचे. रोहित मंगलवार को अजिंक्य रहाणे की टीम का खेल देखने वानखेड़े भी गए थे.

भारतीय टीम के कप्तान हालांकि गैलरी में नहीं बैठे. उन्हें मुंबई के एक ड्रेसिंग रूम में देखा गया था. रोहित ने कुछ देर तक अपने रणजी टीम साथियों से भी बात की। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने उस वीडियो को सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रेमियों के साथ शेयर किया है. माना जा रहा है कि रोहित कुछ दिनों के आराम के बाद मुंबई इंडियंस के तैयारी शिविर में शामिल होंगे.

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर आईपीएल 2024 में अपना नाम बदल सकती है.

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बदल जाएगा महान टीम का नाम? आईपीएल से पहले ये है संकेत रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर इस बार आईपीएल 22 मार्च से शुरू हो रहा है. उम्मीद है कि आरसीबी उससे पहले अपना नाम बदल सकती है. आरसीबी द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो से नाम बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। नाम बदलकर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर हो जाएगा. पार्टी की ओर से यही संकेत है. इस बार आईपीएल 22 मार्च से शुरू हो रहा है. इससे पहले नाम बदलने की उम्मीद है. आरसीबी द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो से नाम बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं।

आरसीबी अगले मंगलवार को नाम बदलने की घोषणा कर सकती है. उनके द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में नाम परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। माना जा रहा है कि बेंगलुरु का लंबे समय से चला आ रहा नाम बदलकर बेंगलुरु किया जा सकता है। इस दक्षिण भारतीय शहर का नाम 1 नवंबर 2014 से बदल गया। पहले इसका नाम बेंगलुरु था. अब यह बेंगलुरु है. लेकिन 2008 से विराट कोहली की टीम का नाम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर है। जो कि इतने दिनों के बाद बदलना तय माना जा रहा है. नया नाम हो सकता है रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर.आईपीएल 22 मार्च से शुरू हो रहा है. पहले दिन आरसीबी का मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स से होगा. दर्शकों को विराट कोहली बनाम महेंद्र सिंह धोनी का मैच देखने का इंतजार रहेगा. इन दोनों टीमों के बीच चेन्नई ने पांच बार आईपीएल जीता है. लेकिन आरसीबी को अभी भी अपनी पहली आईपीएल ट्रॉफी की तलाश है.

2008 में पहली बार आईपीएल का आयोजन किया गया था. तब से आरसीबी खेल रही है. लेकिन दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स की तरह उन्होंने कभी आईपीएल नहीं जीता. हालांकि आरसीबी तीन बार (2009, 2011 और 2016) फाइनल में पहुंची है। लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत पाए.

मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में से एक हैं। मंगलवार 30 जनवरी को उनका 34वां जन्मदिन है. इस सीजन वह नौ साल बाद आईपीएल में खेलने के लिए लौट रहे हैं। उन्होंने आखिरी बार 2014 और 2015 सीज़न में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेला था।

स्टार्क ने अब तक टेस्ट क्रिकेट और अपने परिवार के साथ समय बिताने को प्राथमिकता दी है। लेकिन टी20 वर्ल्ड कप सामने है. शायद इसीलिए वह बीस के दशक की सबसे लोकप्रिय फ्रेंचाइजी लीग आईपीएल में लौट आए।

इस बार वह कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेलते नजर आएंगे. मौजूदा आईपीएल नीलामी में नाइट राइडर्स ने सबसे ज्यादा 24.75 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. ब्रॉडकास्टर पर एक वीडियो में, ऑस्ट्रेलियाई स्टार ने कहा, “मैं अभी भी कई साल पहले आरसीबी के लिए विराट (कोहली) के साथ आईपीएल खेलने की यादें संजोता हूं। वह तब हमारे कप्तान थे।’

स्टार्क ने कहा, “तभी मैं वास्तव में उसे जान पाया।” खासकर मैदान के बाहर और बेहद विनम्र लोग। अपने पैर हमेशा ज़मीन पर रखें। एक ही समय में बहुत गर्मजोशी और भावुकता। मैं मैदान के बाहर की बात कर रहा हूं. और मैदान पर असंभव प्रतिस्पर्धी मानसिकता के साथ खेलते हैं. मुझे उनके बारे में सबसे ज्यादा याद आईपीएल के संदर्भ में है।”

आईपीएल में वापसी को बेताब पंत: दिसंबर 2022 में एक सड़क दुर्घटना में ऋषभ पंत गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद से भारतीय स्टार मैदान पर वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फैंस इस साल के आईपीएल में उनकी मैदान पर वापसी का इंतजार कर रहे हैं. दिल्ली कैपिटल्स के स्टार ने एक बार फिर बताया कि वह इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर उन्होंने जिम में वर्कआउट करते हुए अपनी एक तस्वीर पोस्ट की। जिसे देखने के बाद उनके फैंस की उम्मीद बढ़ सकती है. ऋषभ की आईपीएल में वापसी का पहला संकेत नवंबर में दिल्ली कैपिटल्स कैंप में मिला। इसके बाद उन्हें आईपीएल नीलामी में भी देखा गया था. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने विराट कोहली के कोच को बर्खास्त कर दिया है. इसके साथ ही क्रिकेट निदेशक माइक हेसन भी बाहर हो गए। आरसीबी ने अभी तक नए कोच के नाम की घोषणा नहीं की है. 16 साल के आईपीएल में उन्हें अभी तक एक भी ट्रॉफी नहीं मिली है. वे नया कोच लाकर सूखे को दूर करने की कोशिश करेंगे।

कहा जाता है कि हेसन और बांगड़ के विराट के साथ अच्छे रिश्ते हैं। बांगर एक समय भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच थे। उन्होंने खराब फॉर्म में चल रहे विराट को व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित भी किया। आरसीबी ने उस कोच को काट दिया. हालांकि, गेंदबाजी कोच एडम ग्रिफिथ्स को बरकरार रखा गया है।

बैंगलोर टीम किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो नए विचार ला सके। आरसीबी ट्रॉफी जीतने के लिए बेताब है. 2023 में भले ही कोहली ने रन बनाए लेकिन टीम प्लेऑफ में जगह नहीं बना पाई. यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार यह जिम्मेदारी किसी भारतीय कोच को दी जाएगी या किसी विदेशी को।

प्रियंका चोपड़ा की चचेरी बहन मीरा चोपड़ा जयपुर में शादी कर रही हैं.

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प्रियंकाया, बहन की गुरु, मीरा ने अपनी शादी के दिन दीदी की नकल कैसे की? कुछ दिनों पहले मीरा चोपड़ा ने टूटो दीदी प्रियंका-परिणीति को लेकर नेगेटिव कमेंट किया था। इस बार एक्ट्रेस ने शादी में उतारी उनकी नकल? मौजूदा समय में चोपड़ा परिवार की चारों बेटियां एक्टिंग की दुनिया में अपनी धाक जमा चुकी हैं। हालांकि, प्रियंका चोपड़ा बाकी तीनों से काफी आगे हैं। वह एक अंतरराष्ट्रीय स्टार हैं. वहीं परिणीति चोपड़ा, मीरा चोपड़ा और मन्नारा चोपड़ा का काम अब तक हिंदी और साउथ फिल्मों की दुनिया तक ही सीमित है। लेकिन मीरा शोहरत के मामले में प्रियंका-परिणीति से काफी पीछे हैं। यहां तक ​​कि उन्होंने कुछ दिनों पहले टूटो दीदी प्रियंका-परिणीति को लेकर भी नेगेटिव कमेंट किया था. उन्होंने कहा कि सिनेमा में आने के बाद उन्हें कोई मदद नहीं मिली. लेकिन जब बात शादी की आई तो मीरा ने अपनी बड़ी बहन प्रियंका के दिखाए रास्ते पर चलीं.

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने 2018 में राजस्थान के जोधपुर में शादी के बंधन में बंधी। उन्होंने हॉलीवुड पॉप स्टार निक जोनस के साथ उम्मेद भवन पैलेस का दौरा किया। प्रियंका ने एक शानदार सफेद गाउन में निक के साथ न केवल हिंदू बल्कि ईसाई धर्म के अनुसार भी अंगूठियां बदलीं। इसके बाद 2023 में प्रियंका की चचेरी बहन और बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति ने राजनेता राघव चड्ढा से शादी कर ली। उन्होंने शादी के लिए राजस्थान के उदयपुर को भी चुना। इस बार मीरा भी उसी राह पर चल पड़ी. मीरा ने जयपुर के एक लग्जरी रिजॉर्ट में शादी रचाई। बर्तन कारोबारी रक्षित केजरीवाल। शादी में मीरा ने लाल लहंगा पहना था, जबकि रक्षित ने सफेद शेरवानी पहनी थी। कई लोगों का अनुमान है कि मीरा ने कॉस्ट्यूम डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का डिजाइन किया हुआ लहंगा पहना है। ठीक वैसे ही जैसे प्रियंका ने अपनी शादी में कपड़े पहने थे. चंद मेहमानों के साथ मीरा की शादी हुई. इस मौके पर बॉलीवुड से गौरव चोपड़ा, निर्देशक मधुर भंडारकर, निर्माता जयंतलाल गाडा और अन्य लोग मौजूद थे। इसके अलावा प्रियंका की मां मधु चोपड़ा नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद और शुभकामनाएं देने पहुंचीं. अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने 2018 में राजस्थान के जोधपुर में शादी के बंधन में बंधी। उन्होंने हॉलीवुड पॉप स्टार निक जोनस के साथ उम्मेद भवन पैलेस का दौरा किया। प्रियंका ने एक शानदार सफेद गाउन में निक के साथ न केवल हिंदू बल्कि ईसाई धर्म के अनुसार भी अंगूठियां बदलीं। इसके बाद कैटरीना कैफ और विक्की कौशल तथा कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​ने राजस्थान में ‘डेस्टिनेशन’ वेडिंग की। प्रियंका की चचेरी बहन और बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने इसी साल राजनेता राघव चड्ढा से शादी की है। प्रियंका की एक और बहन मीरा चोपड़ा की शादी नए साल में राजस्थान में हो रही है. खबर है कि वह फरवरी महीने में सात बार यात्रा करने वाले हैं.

भले ही प्रियंका और परिणीति बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस हैं लेकिन मीरा अभी तक मायानगरी में अपनी जमीन मजबूत नहीं कर पाई हैं। लगभग एक दशक तक मनोरंजन जगत से जुड़े रहने के बावजूद प्रियंका की बहन बहुत लोकप्रिय नहीं हैं। मीरा परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में राजस्थान घूमना चाहती हैं। हालांकि शादी की सही तारीख अभी तक पता नहीं चली है, लेकिन खबर है कि वह फरवरी 2024 के अंत में शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। शादी समारोह में सिर्फ 150 मेहमान ही शामिल होंगे. इस साल क्रिसमस के मौके पर मीरा ने अपने बॉयफ्रेंड और होने वाले दूल्हे के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी. हालाँकि, उनकी पहचान के बारे में अभी भी कोई जानकारी नहीं है।

मीरा ने 2016 में विक्रम भट्ट की ‘1920: लंदन’ से बॉलीवुड में एंट्री की। इससे पहले उन्होंने तमिल और तेलुगु फिल्मों में काम किया था। मीरा को बॉलीवुड में ‘गैंग ऑफ घोस्ट्स’, ‘सेक्शन 375’ में भी देखा गया था। लेकिन अभी तक वह दर्शकों के मन में जगह नहीं बना पाए हैं. हालाँकि, मीरा का दावा है कि वह कभी भी बॉलीवुड में काम पाने के लिए अपने परिवार का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं। उनकी अगली फिल्म ‘सफ़ेद’ 29 दिसंबर को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही है। फिल्म का प्रीमियर 2022 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ। लेकिन मीरा शोहरत के मामले में प्रियंका-परिणीति से काफी पीछे हैं। यहां तक ​​कि उन्होंने कुछ दिनों पहले टूटो दीदी प्रियंका-परिणीति को लेकर भी नेगेटिव कमेंट किया था. उन्होंने कहा कि सिनेमा में आने के बाद उन्हें कोई मदद नहीं मिली. लेकिन जब बात शादी की आई तो मीरा ने अपनी बड़ी बहन प्रियंका के दिखाए रास्ते पर चलीं.