Monday, January 12, 2026
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क्या तमिलनाडु सहित दक्षिण को साध पाएंगे पीएम मोदी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पीएम मोदी तमिलनाडु सहित दक्षिण को साध पाएंगे या नहीं! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को तमिलनाडु में थे। इस साल लोकसभा चुनाव से पहले पीएम ने यहां कई परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। कुछ नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं की कुल लागत 20,140 करोड़ रुपये है। सीएम एमके स्‍टालिन के साथ मंच साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक प्रेरणा के लिए तमिलनाडु की सराहना की। डीएमडीके के संस्‍थापक और जाने-माने एक्‍टर विजयकांत को श्रद्धांजलि दी। पीएम ने उन्‍हें राष्‍ट्र हित के प्रति समर्पित रहने के साथ न केवल सिनेमा बल्कि राजनीति का भी ‘कप्तान’ बताया। एमके स्टालिन द्रविड़ मुनेत्र कषगम का नेतृत्व करते हैं। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A का वह प्रमुख चेहरा हैं। इस साल लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी से मुकाबला करने के लिए यह गठबंधन कमर कस रहा है। स्‍टालिन की मौजूदगी में विजयकांत पर राष्‍ट्रहित वाला बयान देकर पीएम ने दक्षिण की राजनीति को साधने की कोशिश की। दक्षिण भारत में बीजेपी अपनी उपस्थिति को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करने में जुटी है। प्रधानमंत्री तमिलनाडु के दो दिवसीय दौरे पर हैं। आज उन्होंने लगभग 20,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। त्रिची हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल को हरी झंडी दिखाई। इसके पहले वह तिरुचिरापल्ली के भारतीदासन विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों कार्यक्रमों में उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ मंच साझा किया।

चेन्नई और दक्षिणी तमिलनाडु में हाल की भारी बारिश, बाढ़ और उसके परिणामस्वरूप हुए जानमाल के नुकसान की पृष्ठभूमि में मोदी के इस दौरे के काफी मायने हैं। उत्‍तर भारत में तो बीजेपी की पकड़ मजबूत है। लेकिन, दक्षिण में अभी वह उस स्‍थति में नहीं है। वह दक्ष‍िण में अपनी स्‍थ‍िति को मजबूत करना चाहती है। पीएम ने कहा कि केंद्र राज्‍य को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। हालांकि, स्टालिन ने उनसे भारी बारिश-जलप्रलय को गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित करने और राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से राज्य को उचित धन जारी करने का आग्रह किया।

मोदी ने राज्य की राजधानी चेन्नई से करीब 300 किलोमीटर दूर मध्य तमिलनाडु के तिरुचिरापल्‍ली में 20 परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उद्घाटन किया। उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इससे पहले उन्होंने भारतीदासन विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से तमिलनाडु की प्रगति मजबूत होगी। यात्रा सुगमता बढ़ेगी और रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। ये परियोजनाएं हवाई एवं बंदरगाहों, रेलवे, राजमार्ग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा और उच्च शिक्षा से जुड़ी हैं। तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारा प्रयास देश के विकास में तमिलनाडु से मिली सांस्कृतिक प्रेरणा का लगातार विस्तार करना है।’ दिल्ली में नए संसद भवन में ‘पवित्र सेंगोल’ स्थापित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह तमिल संस्कृति की ओर से पूरे देश को दिए गए सुशासन के मॉडल से उपजी एक प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 25 वर्ष के लिए ‘आजादी का अमृत काल’ भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों आयाम हैं। भारत को तमिलनाडु की जीवंत संस्कृति और विरासत पर गर्व है। अतीत में राज्य के सार्वजनिक कार्यक्रमों में ज्यादातर मौकों पर अंग्रेजी में बोलने वाले मोदी ने मंगलवार को हिंदी में भी बात की।

पीएम ने तमिलनाडु के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को भी याद किया। उनका हाल ही में निधन हो गया। मोदी ने कहा कि उन्होंने देश के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश कर रहा है और यह एक नई आशा के रूप में उभर रही शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ‘मेक इन इंडिया’ के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण ब्रांड एंबेसडर बन रहा है। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को दोहराया जहां राज्य का विकास राष्ट्र के विकास में परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 40 से अधिक केंद्रीय मंत्रियों ने 400 से अधिक बार तमिलनाडु का दौरा किया। वह बोले, ‘भारत तमिलनाडु की प्रगति के साथ प्रगति करेगा।’ उन्होंने कहा कि भारत और सभ्यता हमेशा ज्ञान के इर्द-गिर्द केंद्रित रहे हैं। नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में तो लोग जानते ही हैं, कांचीपुरम के विश्वविद्यालय और मदुरै शिक्षा के केंद्र के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

नई रेल परियोजनाओं के बारे में मोदी ने कहा कि इनसे उद्योग और बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नई सड़क परियोजनाएं श्रीरंगम, चिदंबरम, रामेश्वरम और वेल्लोर जैसे आस्था और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ेंगी। जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, उनमें तिरुचिरापल्ली-मनमदुरई-विरुधुनगर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण शामिल है।

पीएम ने कहा कि 2014 से पहले के दशक में राज्यों को 30 लाख करोड़ रुपये दिए गए थे, जबकि पिछले 10 वर्ष में राज्यों को 120 लाख करोड़ रुपये दिए गए। तमिलनाडु को भी 2014 से पहले के 10 वर्षों की तुलना में इस अवधि में 2.5 गुना अधिक धन मिला है। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए राज्य में तीन गुना से अधिक और रेलवे क्षेत्र में 2.5 गुना अधिक धन खर्च किया गया।

क्या अब लागू होगा हिट एंड रन का नया कानून?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब हिट एंड रन का नया कानून लागू होगा या नहीं! हिट-एंड-रन’ को लेकर नए कानून के खिलाफ ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल खत्म होने का रास्‍ता साफ है। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने मंगलवार को ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि नया कानून अभी लागू नहीं हुआ है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 106/2 को लागू करने से पहले ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के लोगों से बात की जाएगी। उसके बाद ही फैसला लिया जाएगा। सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर सभी वाहन चालकों से अपने-अपने काम पर लौटने की अपील की है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने भी सभी ड्राइवरों से हड़ताल खत्‍म करने का आह्वान किया है। ‘हिट-एंड-रन’ मामलों के लिए नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता बीएनएस के तहत जेल और जुर्माने के कड़े प्रावधान के खिलाफ ट्रक, बस और टैंकर ऑपरेटरों ने सोमवार को तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की थी। हड़ताल के मंगलवार को दूसरे दिन में प्रवेश करने के बीच उत्तर और पश्चिम भारत के करीब दो हजार पेट्रोल पंपों में ईंधन का भंडार खत्म हो गया। बीएनएस ने औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता की जगह ली है। इसमें प्रावधान है कि लापरवाही से गाड़ी चलाकर गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण बनने वाले और पुलिस या प्रशासन के किसी भी अधिकारी को सूचित किए बिना भागने वाले ड्राइवरों को 10 साल तक की सजा या सात लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और कोर कमिटी के चेयरमैन बाल मलकीत सिंह ने गृह सचिव से मीटिंग के बाद प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा, ‘ड्राइवर हमारे परिवार के सदस्य हैं। हमने 28 दिसंबर को ही प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर उन्हें ड्राइवरों की चिंता और भय से अवगत करा दिया था। साथ ही यह बता दिया था कि अगर यह कानून लागू होता है तो इससे क्या नुकसान हो सकता है। देश किस तरह प्रभावित होगा। हालांकि, सरकार ने समय पर संज्ञान नहीं लिया और जिस बात का डर था 1 तारीख से वही देखने को मिला। आज हमें 7 बजे गृह मंत्रालय में मीटिंग के लिए बुलाया गया था। गृह सचिव अजय भल्ला की अध्यक्षता में हमारी मीटिंग हुई, जिसमें सभी मुद्दों पर चर्चा हुई। हम आपको यह सूचित करते हैं कि धारा 106(20) के तहत 10 साल की सजा और जुर्माने का कानून अभी तक लागू नहीं हुआ है। हम आपको ड्राइवरों को पूरा आश्वासन दिलाते हैं कि ये कानून लागू नहीं होने देंगे। आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। हम बातचीत में विश्वास रखते हैं। डायलॉग के माध्यम से ही इसका हल निकला है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के साथ बैठक के बाद केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि सरकार और ट्रांसपोर्टर इस बात पर सहमत हुए हैं कि परिवहन कर्मचारी तुरंत अपना काम फिर से शुरू करेंगे। उन्‍होंने बताया, ‘हमने आज अखिल भारतीय परिवहन कांग्रेस के प्रतिनिधियों से चर्चा की। सरकार ये बताना चाहती है कि नए कानून और प्रावधान अभी लागू नहीं हुए हैं। हम ये भी कहना चाहते हैं कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2) लागू करने से पहले अखिल भारतीय परिवहन कांग्रेस से विचार विमर्श करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।’

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों की गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई सफल बैठक के बाद एक बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया कि सरकार ने बीएनएस की धारा 106/2 में सजा और जुर्माने के प्रावधान के बारे में ड्राइवरों की चिंता का संज्ञान लिया। इसे लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ विस्‍तृत चर्चा हुई। सरकार बताना चाहती है कि ये नए कानून और प्रावधान लागू नहीं हुए हैं। इन्‍हें लागू करने से पहले ऑल इंडिया मोटर ट्रासंपार्ट कांग्रेस के साथ बातचीत की जाएगी।

इसके पहले कांग्रेस ने ‘हिट-एंड-रन’ के मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ट्रक चालकों का समर्थन किया। पार्टी ने कहा कि कानून का दुरुपयोग ‘वसूली तंत्र’ और ‘संगठित भ्रष्टाचार’ को बढ़ावा दे सकता है। कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर अवसंरचना क्षेत्र में निवेश को रोकते हुए ‘गरीब को दंडित’ करने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब 150 से ज्‍यादा सांसद निलंबित थे, तब संसद में मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, चालकों के विरुद्ध एक ऐसा कानून बनाया, जिसके ‘परिणाम घातक’ हो सकते हैं।

क्या अब रुकेगी ड्राइवर की हड़ताल?

ड्राइवर की हड़ताल अब रुक सकती है! नए कानून में हिट ऐंड रन मामलों में कड़ी सजा के खिलाफ ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। इस कारण से जम्मू-कश्मीर से महाराष्ट्र तक कई राज्यों में तेल, फल-सब्जी समेत जरूरी चीजों की सप्लाई पर असर पड़ा। एमपी और राजस्थान समेत 10 राज्यों से पेट्रोल पंप खाली होने की खबरें आईं। पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े लोगों ने बताया कि उत्तर भारत में 2000 पेट्रोल पंप खाली हो गए हैं। डर के मारे जरूरी चीजें जमा करने का खतरा बढ़ गया है। इस बीच केंद्र सरकार ने हड़ताली समूहों से बातचीत शुरू की है। केंद्रीय गृह सचिव ने मंगलवार शाम हड़ताली समूहों से बात भी की। दिन में ट्रांसपोर्टरों की सबसे बड़ी यूनियन ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हड़ताली ड्राइवरों के प्रति समर्थन जताया और सरकार से नया कानून वापस लेने की मांग की। कांग्रेस भी हड़तालियों के समर्थन में है। दिल्ली में भी अन्य दिनों की तुलना में पेट्रोल पंपों में ज्यादा भीड़ देखी गई। लेकिन चारों तेल में डिपो सप्लाई बेअसर रही। लेकिन 400 क्लस्टर बसें सड़कों पर नहीं उतरीं। वहीं, ISBT में भी यूपी और पंजाब की तरफ जाने वाली बसें कम रहीं। दूसरे राज्यों में विरोध प्रदर्शनों का असर सप्लाई पर एक-दो दिन में दिख सकता है। महाराष्ट्र के नासिक में ट्रक चालकों ने हड़ताल वापस ली है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि हड़ताल तुरंत खत्म करवाएं। ड्राइवरों में डर, गुस्सा, चिंता है। अगर कोई रास्ता नहीं निकला, तो हालात गंभीर हो सकते हैं। एक ही हल है, सरकार नए कानून को वापस ले।

भारतीय न्याय संहिता-2023 के नए हिट ऐंड रन कानून का विरोध कर रहे ट्रक और बस ऑपरेटर्स मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि कुछ लोगों को गलतफहमी हो गई है। नए कानून में कहीं कोई कमी नहीं है। यह सभी के लिए अच्छा है। इसके तहत कोशिश की गई है कि हादसे के बाद सड़क पर तड़पते इंसान की जिंदगी बचाई जाए। कानून में जो भी बदलाव किए गए हैं वह सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वेशन के तहत किए गए हैं। हिट ऐंड रन के कई मामलों में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरतने की बात कही है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि लापरवाही से गाड़ी चलाने पर हुई दुर्घटना के बाद अगर किसी ट्रक या दूसरे गाड़ी के ड्राइवर को लगता है कि उनके साथ मॉब लिंचिंग जैसा या फिर दूसरी किसी तरह की घटना हो सकती है तो वह मौके से जा सकते हैं। मगर, ऐसा न हो कि सड़क दुर्घटना के बारे में पुलिस या फिर मैजिस्ट्रेट को बताया ही न जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को ऐसे मामलों में कहा कि मौके के हालात अगर बेहद विपरीत हैं, तो आरोपी गाड़ी वाला मौके से कुछ दूर जाकर पुलिस या मैजिस्ट्रेट को सूचना दे सकता है। वह अगर थाने में जाने की स्थिति में नहीं है तो पुलिस कंट्रोल रूम में 108 पर फोन करके अपनी और अपनी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर की पूरी पहचान बताते हुए यह कह सकता है कि उसे पुलिस जब भी जांच के लिए बुलाएगी वह उपलब्ध होगा। ऐसे मामलों में आरोपी के खिलाफ हिट ऐंड रन की अधिकतम 10 साल की सजा वाली धारा में न बुक करके अधिकतम पांच साल तक की सजा वाले में बुक किया जाएगा।

हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि हिट एंड रन के तमाम मामलों में पहली कोशिश यही होनी चाहिए कि आरोपी गाड़ी लेकर न भागे। उसे पुलिस या मैजिस्ट्रेट को दे। इसके अलावा यह भी कोशिश करे कि घायल को किसी न किसी तरह से अस्पताल पहुंचाया जा सके।

हिट ऐंड रन में दो सब-सेक्शन 106 (1) और 106 (2) हैं। सब-सेक्शन 106 (1) कहता है कि अगर आरोपी घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मैजिस्ट्रेट को लापरवाही से गाड़ी चलाने से हुई मौत की घटना की रिपोर्ट करता है तो उस पर सब-सेक्शन 106 2 के तहत नहीं बल्कि सब-सेक्शन 106 1 के तहत कार्रवाई की जाएगी। सब-सेक्शन 106 1 अधिकतम पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। यह जमानती भी है। एक्सिडेंट करके आरोपी भाग जाता है और पुलिस या मैजिस्ट्रेट किसी को तुरंत जानकारी नहीं देता है तो उसके खिलाफ धारा 106 (2) के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें अधिकतम सजा 10 साल तक की है। यह गैर-जमानती है। दोनों मामलों में जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

इस बार के गणतंत्र दिवस पर क्या होगा खास?

आज हम आपको बताएंगे कि इस बार के गणतंत्र दिवस पर क्या खास होने वाला है! इस बार बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी पूरी तरह से स्वदेशी होगी। सूत्रों के मुताबिक बीटिंग रिट्रीट में जो भी धुनें बजाई जाएंगी वह स्वदेशी होंगी। इसके लिए धुनों को चयन कर लिया गया है। साथ ही गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार इंडियन नेवी, एयरफोर्स और नेवी की महिला अग्निवीरों को जॉइंट दस्ता होगा। जिसे तीनों फोर्स की महिला ऑफिसर लीड करेंगी। पहली बार ट्राई सर्विस आर्मी, नेवी, एयरफोर्स दस्ता परेड में मार्च करेगा। साल 2022 में बीटिंग रीट्रीट सेरेमनी से ‘अबाइड विद मी’ धुन को ड्रॉप किया गया था। 1950 से लेकर हर साल 29 जनवरी तक बीटिंग रिट्रीट समारोह में यह धुन बजाई जाती थी। इससे पहले 2020 में भी इसे हटाने की कोशिश की गई थी लेकिन विवाद होने के बाद तब इसे फिर शामिल कर दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक इस बार बीटिंग रिट्रीट में हर धुन स्वदेशी होगी। इसमें ताकत वतन की हम से है, कदम कदम बढ़ाए जा, ऐ-मेरे वतन के लोगो, फौलाद का जिगर, शंखनाद, भागीरथी जैसी धुनें शामिल हैं। बीटिंग रिट्रीट सेना की बैरक में वापसी का प्रतीक है।

बीटिंग रिट्रीट से पहले गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार इंडियन आर्मी, एयरफोर्स और नेवी की महिला अग्निवीरों का जॉइंट दस्ता होगा। अब तक ट्राई सर्विस दस्ता यानी तीनों सेनाओं का जॉइंट दस्ता गणतंत्र दिवस परेड मे शामिल नहीं हुआ है। पहली बार ट्राई सर्विस दस्ता होगा। सूत्रों के मुताबिक इसे इंडियन आर्मी की महिला ऑफिसर लीड करेंगी। उनके पीछे तीन दस्ते आर्मी की महिला अग्निवीर, नेवी की महिला अग्निवीर और एयरफोर्स की महिला अग्निवीर का दस्ता समानांतर पैरलर मार्च करेगा। इनकी अगुवाई इन फोर्स की ही महिला अधिकारी करेंगी। तीन सेनाओं की परेड करने की स्टाइल में भी फर्क है इसलिए आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की महिला अग्निवीर गणतंत्र दिवस परेड के लिए अपनी मार्चिंग स्किल को भी फाइन ट्यून कर रही हैं ताकि कदम से कदम मिलाकर कर्तव्य पथ पर मार्च कर सकें।

इंडियन नेवी में अग्निपथ स्कीम लागू होने के साथ ही अग्निवीर के तौर पर महिला सेलर्स की भी भर्ती शुरू हुई। नेवी के अग्निवीर के पहले बैच में 2600 अग्निवीर थे, इसमें 273 महिला अग्निवीर भी शामिल थी। इंडियन एयरफोर्स में अग्निवीर के पहले बैच में महिलाएं नहीं थी लेकिन दूसरे बैच में 153 महिला अग्निवीर थी जो पिछले महीने ही पासआउट हुई हैं। तीसरे बैच की ट्रेनिंग चल रही है और इसमें भी महिलाएं हैं। इंडियन आर्मी में 2019 से महिलाओं की सैनिक के तौर पर भी भर्ती शुरू हुई। महिलाएं कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में सैनिक के तौर पर तैनात हैं। अग्निपथ स्कीम लागू होने के साथ ही अग्निवीर के तौर पर महिलाएं कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में भर्ती हो रही हैं।

यहि नहीं आपको बता दें कि सूत्रों के मुताबिक, महिला अग्निवीरों की भर्ती से पहले ट्रेनिंग सेंटर में भी उनके लिए व्यवस्थाएं की जानी हैं जिसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सेना में इंफ्रेंट्री, आर्म्ड और मिकैनाइज्ड इंफ्रेंट्री कॉम्बैट आर्म्स हैं। इनमें अभी महिलाओं की एंट्री नहीं है, ऑफिसर लेवल पर भी नहीं। लेकिन कॉम्बैट सपोर्ट आर्म में महिला अधिकारी हैं। इस साल से ही आर्टिलरी में महिला अधिकारियों को लेने की शुरुआत की गई है। आर्टिलरी के अलावा इंजिनियर्स, एयर डिफेंस, आर्मी एविएशन भी सपोर्ट आर्म है। महिला अग्निवीर और एयरफोर्स की महिला अग्निवीर का दस्ता समानांतर पैरलर मार्च करेगा। इनकी अगुवाई इन फोर्स की ही महिला अधिकारी करेंगी। तीन सेनाओं की परेड करने की स्टाइल में भी फर्क है इसलिए आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की महिला अग्निवीर गणतंत्र दिवस परेड के लिए अपनी मार्चिंग स्किल को भी फाइन ट्यून कर रही हैं ताकि कदम से कदम मिलाकर कर्तव्य पथ पर मार्च कर सकें।इसमें भी महिला अधिकारी हैं, जो पहले सिर्फ शॉर्ट सर्विस में होती थी लेकिन अब वह स्थायी कमिशन की हकदार हैं। सूत्रों के मुताबिक, महिला अग्निवीरों की शुरुआत सर्विसेज जैसे आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डिनेंस, इलैक्ट्रिक एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स से हो सकती है। तीसरे बैच की ट्रेनिंग चल रही है और इसमें भी महिलाएं हैं। इंडियन आर्मी में 2019 से महिलाओं की सैनिक के तौर पर भी भर्ती शुरू हुई। महिलाएं कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में सैनिक के तौर पर तैनात हैं। अग्निपथ स्कीम लागू होने के साथ ही अग्निवीर के तौर पर महिलाएं कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में भर्ती हो रही हैं।महिला अग्निवीरों को मिलिट्री इंटेलिजेंस में भी भर्ती करने की तैयारी है। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक महिला अग्निवीर मिलिट्री इंटेलिजेंस में ज्यादा अच्छा कर सकती हैं।

क्या बीजेपी इस बार तोड़ पाएगी सारे रिकॉर्ड?

बीजेपी इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ने की फिराक में है! नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 10 वर्षों के शासन ने भारतीय जनता पार्टी को उसके उत्तरी आधार से दक्षिण की ओर और पश्चिमी गढ़ों से पूर्व की ओर विस्तार करने का शानदार मौका मुहैया कराया है। हर चुनाव में पीएम मोदी की बढ़ती लोकप्रियता दिखाई पड़ी है, जिससे वो और मजबूत होते गए हैं। बीजेपी की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि उसने एंटी-इन्कम्बेंसी की आग बुझाने की कला सीख ली है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी 303 सीटों के रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिशों में जुटी है। सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित प्रचार अभियान के साथ चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। विपक्ष में चीजें धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं और एजेंडा अभी तक स्पष्ट नहीं है तो बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ डील लगभग फाइनल कर चुकी है। इससे 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा मिल सकता है। 2014 में बीजेपी का नारा था ‘अबकी बार मोदी सरकार’, 2019 में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ और ‘एक बार फिर मोदी सरकार’ था। 2024 चुनाव के लिए ‘मोदी की गारंटी’ और ‘फिर आएगा मोदी’ जैसे नारों से आसमान गुंजाने की तैयारी है। ब्रैंड मोदी ने बीजेपी को कई विधानसभा और दो आम चुनाव में जीत दिलाए हैं। मोदी ने हमेशा चुनाव की जिम्मेदारी ली है और अपनी छवि और नाम पर जनादेश मांगा है। सरकारी योजनाओं और पार्टी के कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी ब्रैंड इमेज समाज के हर वर्ग पर अंकित हो गई है। 2024 का आम चुनाव एक तरह से ‘मोदी का चुनाव’ है क्योंकि वो शासन और पार्टी के अभियानों में सबसे आगे हैं। बीजेपी का नारा ‘सपना नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो हम मोदी को चुनते हैं’ नरेंद्र मोदी पर भरोसे का पैमाना बताता है।’जब पीएम मोदी कहते हैं कि यह ‘मोदी की गारंटी’ है, तो लोगों के बीच एक अलग स्तर का विश्वास पैदा होता है। उनके पास डिलीवरी का ट्रैक रिकॉर्ड है और यह लोगों को सुनिश्चित करता है कि अगर वह वादा करते हैं, तो उसे पूरा भी करेंगे।’

पिछले 10 वर्षों में बीजेपी ही एकमात्र पार्टी है जो अपने मूल मतदाताओं को बरकरार रखने, आधार का विस्तार करने और नए मतदाता वर्ग को जोड़ने में सफल रही है। 2014 में इसे 31% वोट और 282 सीटें मिलीं। 2019 में वोट शेयर बढ़कर 37% और लोकसभा सीटें 303 हो गईं। इस यात्रा में बीजेपी के मूल मतदाताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो उनकी विचारधारा के कारण पार्टी को वोट देते हैं। पार्टी ने अब 2024 के लिए 50% वोट शेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के खात्मे, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार, उज्जैन में महाकाल लोक से लेकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण तक, मोदी सरकार ने बीजेपी और उसके वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के मुख्य एजेंडे को जमीन पर उतारा है।

बीजेपी का डेवलपमेंट एजेंडा उसे शहरी वोटरों और गांवों के उन युवाओं का समर्थन दिला रहा है जो मोदी के नेतृत्व में भारत के विकास को लेकर आश्वस्त हैं। ये लोग मोदी की ज्यादा तारीफ 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और विकसित राष्ट्र बनने के सपने को सच करने के लिए करते हैं। शहरी वोटर बीजेपी के साथ लगभग दो दशकों से हैं। भाजपा युवाओं को अपनी ओर खींचने के लिए मेहनत कर रही है और मोदी को सुधारों का चेहरा बना रही है। ‘रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म’, ‘मेक इन इंडिया’ जैसे नारे युवाओं को खूब भा रहे हैं। युवाओं का मन जीतकर ही पार्टी कई चुनाव जीत चुकी है।

2024 में बीजेपी और युवाओं को जोड़कर वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 50% वोट पाने के लिए विकास से प्रभावित मतदाता बहुत जरूरी हैं। जी-20 और चंद्रयान जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं का भरोसा बढ़ाया है। सरकार गरीब और कम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए नई लॉन्च की गई विश्वकर्मा योजना के तहत कौशल विकास पर ध्यान दे रही है। चुनाव से पहले भाजपा के शीर्ष नेता अलग-अलग शहरों में समाज के प्रभावशाली लोगों के साथ बंद कमरे में बैठक करेंगे। ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के जरिए सरकार युवाओं को विकसित भारत का ब्रैंड एंबेसडर बनने का न्योता दे रही है। इससे 2024 में पार्टी के लिएभाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में केंद्र सरकार की कई योजनाओं को लागू करके निचले वर्गों के बड़े हिस्सा को अपने वोट बैंक में तब्दील कर दिया है। उन्हें ‘लाभार्थी’ कहा जाता है। सरकार इनकी संख्या करीब 80 करोड़ बताती है जिन्हें मोदी सरकार की कम से कम एक योजना का फायदा जरूर मिला है। यह सालों में जाति से परे पार्टी के लिए एक मजबूत वोट बैंक बन गया है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी इस वोट बैंक को मजबूत करती रहेगी। देशभर में जिला बीजेपी कार्यालयों में लगभग 300 कॉल सेंटर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। पार्टी इन कॉल सेंटरों के जरिए लाभार्थियों से सीधे जुड़ेगी। सरकार ने लक्ष्य है कि वह चालू ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के जरिए योजनाओं का प्रचार करते हुए पांच से सात करोड़ नए लाभार्थियों को भाजपा से जोड़ेगी। एक मजबूत वोट बैंक बनेगा।

बीजेपी ने उत्तर, पूर्वोत्तर और मध्य भारत में अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन 2024 के चुनावों के लिए कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों का बदलाव और दक्षिण में कांग्रेस का मजबूत होना पार्टी के लिए चिंता का सबब है। दक्षिण में जीत हासिल करना हमेशा मुश्किल रहा है। 2019 में पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा जहां कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी से 130 लोकसभा सीटों में से 29 सीटें जीती गईं। इनमें से 25 कर्नाटक से और 4 तेलंगाना से थीं। इस साल की शुरुआत में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस को तेलंगाना की जीत से दक्षिण में और मजबूती मिल गई है। इससे लोकसभा सीटों के मामले में कांग्रेस बीजेपी को चुनौती देने लगी है।

भाजपा कर्नाटक में पकड़ कायम रखने के लिए जनता दल सेक्युलर जेडीएस के साथ गठबंधन कर रही है। तेलंगाना में गृह मंत्री अमित शाह ने 17 में से 10 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भाजपा ने तमिलनाडु में एआईएडीएमके के दोनों गुटों को एक करने पर काम कर रही है और पार्टी के साथ गठबंधन की योजना बना रही है। आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण की जनसेना के साथ गठबंधन है। शीर्ष बीजेपी नेता दक्षिण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं क्योंकि पार्टी अपनी पिछला प्रदर्शन बरकरार रखना चाहती है। नए साल में प्रधानमंत्री मोदी का दौरा 3 और 4 जनवरी को तमिलनाडु, पुदुचेरी और केरल से शुरू होगा।

आखिर 2024 के लिए क्या क्या करेगी बीजेपी?

ये सवाल उठना लाजमी है कि 2024 के लिए बीजेपी क्या क्या करने वाली है! नए साल की शुरुआत के साथ ही देश का सियासी पारा चढ़ना शुरू हो गया है। राजनीतिक पार्टियों ने लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। बीजेपी का जोश सबसे ज्यादा हाई है। विरोधियों के हमलों के बीच बीजेपी ने उत्तर से लेकर दक्षिण तक, देश की जनता को रिझाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। बीजेपी साफ कर चुकी है कि यह लोकसभा चुनाव भी पीएम मोदी के चेहरे पर लड़ा जा रहा है। बीजेपी ने ‘अबकी बार 400 पार, तीसरी बार मोदी सरकार’ के स्लोगन के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने का फैसला किया है। उधर पीएम नरेंद्र मोदी भी पार्टी में नई ऊर्जा फूंकने का काम कर रहे हैं। ‘धन्यवाद मोदी भाईजान’ और ‘लव-कुश यात्रा’ के बीच पीएम मोदी दक्षिण भारत में पार्टी को मजबूत करने के काम में जुट गए हैं। उसी कड़ी में पीएम मोदी ने नए साल के दूसरे दिन मंगलवार को दो दिवसीय दक्षिण दौरे पर तिरुचिरापल्ली पहुंचे। दौरे के तहत पीएम मोदी तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में भारतीदासन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इसके साथ उन्होंने तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन किया। मोदी की इस यात्रा को चुनाव अभियान की शुरुआत के रूप में माना जा रहा है, जहां वह बमुश्किल पैर जमा पा रही है। यह यात्रा राज्य बीजेपी प्रमुख के अन्नामलाई की पदयात्रा के बीच भी हो रही है। बीजेपी अब तक राज्य में अन्नाद्रमुक के साथ चुनाव लड़ती थी, जो NDA से बाहर हो गई है। हालांकि, दोनों पार्टियों के पास अभी भी एक-दूसरे के लिए रास्ते खुले हैं।

बीजेपी ने इस बार मुस्लिम वोटरों में बड़ी सेंधमारी करने का रोड मैप तैयार किया है। इसी कड़ी में बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने ‘शुक्रिया मोदी भाईजान’ सम्मेलन शुरू किया है। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल होंगी। बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं को बड़ी संख्या में मोदी की योजना का लाभ मिला है। जिसके कारण वह पार्टी से जुड़ रही हैं। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी लोकसभा क्षेत्रों में शुक्रिया मोदी भाईजान नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत बीजेपी हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक हजार मुस्लिम महिलाओं को जोड़ेगी। जानकारी के मुताबिक, शुक्रिया मोदी भाईजान के जरिए सभी लाभार्थियों को पीएम मोदी के काम से जोड़ा जाएगा। करीब ढाई करोड़ से ज्यादा यूपी में मुस्लिम ही लाभार्थी हैं, जिन्हें बड़ी संख्या में मुफ्त राशन से लेकर शौचालय, पीएम आवास, आयुष्मान भारत, हर घर नल तमाम योजना से जोड़ा गया है।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है। इस प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को बीजेपी के प्रदेश कार्यालय से लव-कुश समाज द्वारा लव कुश रथ यात्रा शुरू हुई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने भगवा झंडी दिखाकर रथ को रवाना किया। ‘सबके सिया, सबके राम’ स्लोगन के साथ निकला लव-कुश रथ यात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों से होते हुए 22 जनवरी को अयोध्या में सम्पन्न होगी। रथ यात्रा रवाना को लेकर प्रदेश कार्यालय में किन्नर समाज के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे और गीत गाकर शुभकामनाएं दी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने लव कुश रथ यात्रा की शुरुआत करते हुए कहा कि देश के सनातनी 500 वर्षों से उस दिन का इंतजार कर रहे थे, जब उनके भगवान श्री राम भव्य राम मंदिर में पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष तौर पर साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद भव्य राम मंदिर 22 जनवरी को स्थापित होने वाला है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मंगलवार को महाराष्ट्र में 2024 लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान की शुरुआत की। यह अभियान बीजेपी की लोकसभा प्रवास योजना का एक हिस्सा है, जिसमें उसने देश भर में 160 निर्वाचन क्षेत्रों को चुना है जहां वह 2019 के लोकसभा चुनावों में हार गई थी। महाराष्ट्र में पार्टी 48 लोकसभा सीटों में से 18 पर कमजोर दिख रही है।

बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ममता बनर्जी के गढ़ बंगाल में पर फोकस किया है। उन्होंने 2024 में बंगाल की 35 लोकसभा सीटों का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बंगाल मिशन के लिए 15 सदस्यीय कोर चुनाव प्रबंधन समिति का गठन किया। समिति में बंगाल के लिए चार केंद्रीय पर्यवेक्षक हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि राज्य से चार कनिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों को बाहर रखा गया है।

जानिए विवेक बिंद्रा की जिंदगी में हुए विवादों के बारे में सब कुछ!

आज हम आपको विवेक बिंद्रा की जिंदगी में हुए विवादों को बताने वाले हैं! उत्तर प्रदेश के नोएडा में अंतर्राष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिंद्रा के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। यह केस उनकी दूसरी पत्नी के भाई की शिकायत पर दर्ज किया गया है। इस शिकायत में मोटिवेशनल स्पीकर के चमक- दमक वाले चेहरे के पीछे का पहलू सामने आया है। आरोप है कि विवेक बिंद्रा ने पत्नी यानिका को कमरे में बंद करके बेरहमी से पीटा। यानिका को कमरे में बंद कर गाली- गलौच की। उसके बाल खींचे। चेहरा नोचा। मोबाइल तोड़ दिया। पिटाई से यानिका के कान का पर्दा फट गया। विवेक बिंद्रा के खिलाफ नोएडा में एफआईआर दर्ज कराया गया है। एफआईआर के मुताबिक, 6 दिसंबर को विवेक बिंद्रा की यानिका से शादी हुई थी। मारपीट की घटना 8 दिसंबर की बताई जा रही है। इसके बाद यानिका को दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यानिका के भाई वैभव क्वात्रा ने विवेक के खिलाफ 14 दिसंबर को सेक्टर- 126 थाने में केस दर्ज कराया। हालांकि, यह मामला शुक्रवार की शाम सामने आया। इसके साथ ही विवेक बिंद्रा का वीडियो भी सामने आया है, इसमें वह सोसायटी के गेट पर पत्नी के साथ नोकझोंक करते दिख रहे हैं। वीडियो सामने आते ही वायरल होने लगा। विवेक बिंद्रा एक बड़े बिजनेस के सीईओ हैं। उनकी कंपनी का नाम बड़ा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड है। यह कंपनी लोगों को इंटरप्रेन्योरशिप और व्यापारिक लोगों को ट्रेनिंग और सलाह देती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कंपनी का टर्नओवर करीब 50 करोड़ का है। ऑफिशियल डेटा अब तक सामने नहीं आ पाया है। उनके यूट्यूब पर 21.4 मिलियन यानी करीब दो करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं।

विवेक बिंद्रा पर गंभीर आरोप लगा है। दरअसल, मां से बहस करने से रोकने पर पत्नी को पीटने का आरोप मोटिवेशनल स्पीकर पर लगा है। गाजियाबाद के चंदर नगर के रहने वाले वैभव क्वात्रा ने विवेक बिंद्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने अपने बहनोई विवेक बिंद्रा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वैभव ने दर्ज कराए गए एफआईआर में आरोप लगाया है कि मेरी बहन यानिका की शादी 6 दिसंबर को विवेक बिंद्रा के साथ ललित मानगर होटल में हुई थी। विवेक इस समय नोएडा के सेक्टर- 94 स्थित सुपरनोवा वेस्ट रेजीडेंसी में रहते हैं। शादी के दो दिन बाद 8 दिसंबर की सुबह 3:00 बजे विवेक अपनी मां प्रभा से किसी बहस कर रहे थे। पत्नी यानिका दोनों के बीच आ गई। यानिका ने बीच- बचाव की कोशिश की। पति विवेक को समझाना शुरू किया। इस पर विवेक पत्नी पर भड़क गए।

एफआईआर के अनुसार, विवेक ने पत्नी यानिका को कमरे में बंद कर दिया। उसके साथ गाली- गलौच की। उसके साथ मारपीट की। उसका मोबाइल तोड़ दिया। विवेक ने यानिका के बाल नोच लिए। एफआईआर में कहा गया है कि विवेक ने यानिका की ऐसी पिटाई की, जिससे उसके पूरे शरीर पर घाव हो गया। वैभव ने शिकायत में कहा है कि यानिका के सिर में घाव की वजह से उसे चक्कर आ रहा है। कान से सुनाई नहीं दे रहा है। इलाज के लिए कड़कड़डूमा स्थित कैलाश दीपक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वैभव ने अपनी शिकायत में कहा है कि गंभीर स्थिति में यानिका ने अपनी बहन को फोन किया। उसे अपनी स्थिति के बारे में बताया। इसके बाद वैभव अपनी बहन के साथ यानिका के घर पहुंचे। उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल उसे लेकर अस्पताल गए। वहां उसे भर्ती कराया गया। अस्पताल में लगातार उसका इलाज चल रहा है। वैभव ने कहा कि मेरी बहन इस मारपीट की घटना से पूरी तरह टूट चुकी है। वह मानसिक रूप से काफी परेशान है। किसी से भी अधिक बातचीत नहीं कर रही है।

विवेक बिंद्रा मोटिवेशनल स्पीच और सलाहों से कंपनियों को खड़ी करने की सलाह तो देते हैं, लेकिन अपने परिवार को खड़ा करने में वे कामयाब नहीं रहे हैं। उनकी पहली पत्नी गीतिका सबरवाल से भी उनका विवाद चल रहा है। दोनों के बीच का विवाद कोर्ट में विचाराधीन है। फरीदाबाद के ओमेक्स हाईट्स सोसायटी में रहने वाली गीतिका बिंद्रा ने फरीदाबाद सेंट्रल थाना में पति के विवाद के बाद शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में कहा गया था कि पति विवेक बिंद्रा के साथ उनका कई सालों से विवाद चल रहा है। गीतिका ने विवेक से खुद की जान को खतरा बताया था। कोर्ट में उनके बीच तलाक का केस चल रहा है, इस केस में उन्होंने विवेक बिंद्रा से गुजारा- भत्ता की भी मांग की है। उन दोनों का एक बेटा भी है। पहली पत्नी से विवाद के बाद विवेक ने यानिका से दूसरी शादी की।

विवेक बिंद्रा का विवादों से पुराना नाता है। कई बार वे अपने बयानों से विवाद में फंस चुके हैं। मोरबी टाइल्स विवाद इसी में से एक है। इस विवाद में उन्होंने मोरबी टाइल्स पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, विवाद गहराने के बाद उन्हें अपना वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाना पड़ा। पिछले दिनों उनका मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर संदीप महेश्वरी से विवाद गहरा गया। दोनों ने वीडियो बनाकर एक- दूसरे पर खुलेआम आरोप लगाए। यह मामला सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बना हुआ है।

क्या अब दिल्ली मेट्रो के नियम हो गए हैं सख्त?

अब दिल्ली मेट्रो के नियम सख्त हो चुके हैं! एक महिला ने गुरु द्रोणाचार्य स्टेशन पर मेट्रो ट्रेन के दरवाजे बंद होते देख अपना बैग बीच में डाल दिया ताकि वे फिर से खुल जाएं। हालांकि, दरवाजे बैग पर बंद हो गए और ट्रेन कुछ मीटर आगे बढ़ने के बाद ट्रेन रुक गई। यात्री इस तरह के तिकड़म हर रोज मेट्रो ट्रेनों में भिड़ाते रहते हैं जो हादसे का कारण बन सकता है। साथ ही ट्रेन रनिंग टाइम में भी देरी हो सकती है जिसका बाद पीछे आने वाली ट्रेन भी प्रभावित होगी। इसलिए, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन डीएमआरसी ने मंगलवार को दरवाजों के बीच बैग अड़ाने वाली महिला की शिकायत पुलिस से कर दी। हाल ही में 35 वर्षीय एक महिला का कपड़ा मेट्रो में फंस गया जिससे वो घसीटती चली गई और इस कारण उसकी मौत हो गई। ऐसे हादसे में पहली मौत के बाद उठे सवालों के बीच डीएमआरसी ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए तो पाया कि दरवाजों को बंद होने से रोकने की कोशिश करना यात्रियों का शगल बन गया है। इसलिए डीएमआरसी ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि कोच के गेटों को रोकना मेट्रो रेलवे ऑपरेशन एंड मेंटनेंस एक्ट, 2002 की धारा 67 के तहत अपराध है, जिसके लिए चार साल तक के कारावास या 10 हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।

जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन पर सोमवार को दर्ज एक मामले में एक महिला ने तब कोच में घुसने की कोशिश की जब गेट बंद हो रहे थे। उसका कोट बंद दरवाजों के बीच फंस गया और महिला थोड़ी दूर तक घिसटती रही। हालांकि, उसकी जान बच गई। एक यात्री 27 दिसंबर को न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन पर खड़ी मेट्रो के दरवाजों के बीच खड़ा हो गया ताकि गेट नहीं लगे क्योंकि उसे अपने साथ आई महिला को कोच में घुसने में देर हो गई थी। डीएमआरसी ने कहा कि जबरन रुकावट के कारण कोच का दरवाजा खराब हो गया और 15 मिनट की देरी हुई। पुलिस इसकी शिकायत दर्ज करेगी। डीएमआरसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम यात्रियों को कोच के गेटों को रोककर अपनी जान जोखिम में डालने के खिलाफ सावधान करना चाहते हैं। वैसे भी कुछ ही मिनटों में एक और ट्रेन आ जाती है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने देखा है कि गेट बंद करने से रोकने वाले लोगों की घटनाएं बढ़ रही हैं।’ अधिकारी ने कहा कि डीएमआरसी ऐसा करने वाले यात्रियों के खिलाफ अब पुलिस शिकायत दर्ज करेगी और उन पर जुर्माना भी लगाएगी! 

अधिकारी ने आगे कहा, ‘यदि किसी यात्री का सामान ट्रेन के दरवाजे में फंस जाता है, तो वह शरीर में भी उलझ सकता है और व्यक्ति को चोट लग सकती है। ट्रेन का दरवाजा खुद से बंद होने के तीन प्रयास करता है। यदि लगातार रुकावट होती है तो दरवाजा खुल जाता है और आगे भी ऐसा ही रहता है। ऐसी स्थिति में ट्रेन नहीं चलती है। तब ट्रेन ऑपरेटर को आकर दरवाजा बंद करना पड़ता है।’ डीएमआरसी ने मेट्रो स्टेशनों पर एक वीडियो चलाना शुरू किया है जो यात्रियों को इस तरह के काम के जोखिमों के बारे में चेतावनी देता है। इसके साथ ही, लोगों को इस बारे में शिक्षित करने के लिए साइनेज भी लगाए जा रहे हैं। डीएमआरसी में कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन के प्रिंसिपल एग्जिक्युटिव डायरेक्टर अनुज दयाल कहते हैं, ‘डीएमआरसी पहले से ही ट्रेनों के अंदर यात्रियों को सलाह देने वाली घोषणाएं करती है कि वो बोर्डिंग या डीबोर्डिंग के दौरान अपनी साड़ी, धोती, दुपट्टा, बैग आदि का ध्यान रखें। हाल की घटना के मद्देनजर अतिरिक्त उपाय भी किए जा रहे हैं, जिसमें पूरे रेल नेटवर्क में प्लैटफॉर्म स्क्रीन के दरवाजे और ट्रेन के दरवाजे पर अतिरिक्त साइनेज लगाना शामिल है।’

अनुज दयाल ने कहा कि प्रमुख स्टेशनों पर लगे डिजिटल स्क्रीन और ट्रेनों के अंदर स्क्रीन भी जागरूकता वीडियो चलाए रहे हैं, डीएमआरसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम यात्रियों को कोच के गेटों को रोककर अपनी जान जोखिम में डालने के खिलाफ सावधान करना चाहते हैं। वैसे भी कुछ ही मिनटों में एक और ट्रेन आ जाती है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने देखा है कि गेट बंद करने से रोकने वाले लोगों की घटनाएं बढ़ रही हैं।’ अधिकारी ने कहा कि डीएमआरसी ऐसा करने वाले यात्रियों के खिलाफ अब पुलिस शिकायत दर्ज करेगी और उन पर जुर्माना भी लगाएगी। जो विशेष रूप से यात्रियों को कोच से चढ़ने और उतरने के दौरान सुरक्षा सावधानियों के बारे में शिक्षित करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी जोखिमों के बारे में जानकारी फैलाने के लिए सोशल मीडिया हैंडल का भी इस्तेमाल कर रही है।

युवा पीढ़ी में बढ़ रही आत्महत्या की समस्या! आखिर इसकी वजह क्या है?

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एक के बाद एक बर्बरतापूर्ण इतिहास के पीछे परिवार में ऐश्वर्य के अभाव में आत्महत्याएं हो रही हैं आनंद की बेताब खोज. इससे थक गया। थका हुआ होना. थकान को कम करने के लिए लगातार माउस क्लिक या स्मार्ट फोन उंगलियों की हरकत। इसके साथ ही थकान के एक चरण से दूसरे चरण की ओर जाना होता है। हम मीडिया में समृद्धि की तलाश में यात्रा और गरीबी में समाप्त होने की कहानी से परिचित हैं। हमारे आस-पास के लोगों के व्यवहार और खर्च करने के तरीके से, हम आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि वे व्यक्तिगत और पारिवारिक आपदा की सीमा के करीब हैं। यदि हम जीवन में अपनी इच्छाओं और अभिलाषाओं को ध्यान से परखने का थोड़ा सा भी साहस रखें तो हम समझ जाएंगे कि यदि हम स्वयं पर नियंत्रण नहीं रखेंगे तो हमें ‘त्रासदी‘ का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मीडिया में आई खबरों से आश्चर्यचकित न हों। खबर बनने वाले लोगों के नाम-धाम-परिस्थितियों से परे हम एक तरह के चरित्र, एक तरह की अस्थायीता, एक तरह की नियति को समझते हैं।

हाल ही में कलकत्ता के गरिया और अमेरिका के मैसाचुसेट्स में दो परिवारों ने लगभग एक ही समय में अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उसके बाद पिछले बुधवार 3 जनवरी को गरिया स्टेशन के पास एक महंगे फ्लैट से पिता, मां और बेटे का शव बरामद किया गया था. पिता स्वपन मैत्रा इंजीनियर हैं। मां अपर्णा मैत्रा गृहिणी हैं। पुत्र सुमनराज मैत्रा. पड़ोसियों ने दावा किया कि बारालोकी चावल सुमोन का था। लेकिन कोई नहीं जानता कि क्या करना है. अचानक उस फ्लैट से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने आकर देखा तो फ्लैट में तीन अलग-अलग जगहों पर तीन लोगों की लाशें लटकी हुई थीं. उस दिन 79 साल के स्वपन, 68 साल की अपर्णा और 39 साल के सुमनराज के शव सड़ चुके हैं. पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, ऐशो-आराम की जिंदगी के साथ तालमेल नहीं बिठा पाने के कारण दोस्तों ने गरीबी की दुनिया छोड़ दी। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों ने एक साथ आत्महत्या की, या किसी ने दूसरों की हत्या कर आत्महत्या कर ली।

इसी तरह 28 दिसंबर को अमेरिका के मैसाचुसेट्स के एक संभ्रांत इलाके में एक आलीशान बंगले से एक भारतीय जोड़े और उनकी छोटी बेटी का शव बरामद किया गया था. शुरुआती जांच में पता चला कि आर्थिक तंगी के कारण राकेश कमल ने पत्नी टीना और बेटी एरियाना की गोली मारकर हत्या कर आत्महत्या कर ली। कारोबार ठप था. एक साल पहले उन्हें अपना 11 कमरों वाला बंगला घाटे में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था। ऐसी घटनाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हो रही हैं.

वस्तुतः दीक्षा ही उलट दी गई है। बड़े बिलबोर्ड विज्ञापन में लिखा है ‘लालच एक गुण है’। नवउदारवादी अर्थशास्त्र और इसके आवश्यक पहलुओं ने सभी वर्गों में एक प्रकार की एकरसता पैदा कर दी है। “दैनिक जीवन का दबाव मेरे लिए थका देने वाला हो गया है,” सभी उम्र के लोग आसानी से घोषणा करते हैं। यह थकान नई इच्छाओं का बीजारोपण है। यह थकान का कारखाना हमें थकान के नए लक्षण दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों की खूबसूरत छोटी टांगों वाली लड़कियाँ, जिनके चमकदार दाँत, मखमली-मुलायम चमकती त्वचा, घुंघराले बालों से भरा सिर – हर समय ‘ऐ-ऐ’ चिल्लाती रहती हैं। ब्रांड कल्चर की एक बड़ी निशानी है ‘करो ज़दा का इरादा’।

बाजार हर पल ब्रांड बदल रहा है। हम उनकी तलाश कर रहे हैं. खरीदें या न खरीदें, अपनी आँखों से देखें! दुकान को सजाने के लिए शीशे और शीशों का इस्तेमाल देखने लायक है. और इसलिए, प्रकाश. सभी प्रश्न करने वाले विचार नष्ट हो जाते हैं। हमारी आँखें अब खुली नहीं हैं. एक शराबी आदमी की तरह. हम यह समझ ही नहीं पाते कि बाजार हमें बेहोश कर रहा है। जब आप टीवी चालू करते हैं तो विज्ञापन न देखने का कोई तरीका नहीं है। जो कुछ भी नया लगता है, वह कुछ ही समय में थका देने वाला हो जाता है। मेरे तन-मन-आत्मा की भूख मिटाने के लिए प्रतिभाशाली विज्ञापन डिजाइनर मोटी कमाई वाला काम कर रहे हैं। वे लोगों को बरगलाने के जादूगर हैं। कितनी बार ग्लैमरस महिलाएं और पुरुष हर समय खाने की रेसिपी और खाना पकाने के तरीके बताते रहते हैं। खाना बनाया, कपड़े पहने (लेकिन बिल्कुल भी पसीना नहीं बहाया) और अपने रसना को ‘के खाबी ऐ बाले’ कहा। हम उसके आकर्षण पर भोजन करते हैं। यात्रा चैनल नीले पानी और नीली परियों से भरे हुए हैं। ‘सेडक्शन’ लगातार रोमांचकारी है.

खालिदा की टीम ने बांग्लादेश में शुरू की 48 घंटे की हड़ताल!अशांति की आशंका है

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शनिवार सुबह 6 बजे से बीएनपी की हड़ताल शुरू हो गई है. यह 8 जनवरी (सोमवार) सुबह 6 बजे तक जारी रहेगा. इस बीच बांग्लादेश राष्ट्रीय संसद की 300 सीटों पर रविवार को मतदान होगा. पिछले चुनाव अभियान में तीन लोग मारे गये थे. घटना को लेकर राजनीतिक तनाव व्याप्त है. ऐसे में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी ने शनिवार सुबह से 48 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है. तनाव के इस माहौल में रविवार को देश की नेशनल असेंबली की 300 सीटों पर वोटिंग हुई.

बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी, वाम गठबंधन जैसे विपक्षी खेमे पहले ही प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार की देखरेख में होने वाले किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेने की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने चुनाव बहिष्कार के लिए भी अभियान चलाया। उनकी मांग एक ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ कार्यवाहक सरकार के प्रबंधन के तहत आम चुनाव की थी। लेकिन सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग ने उस मांग को खारिज कर दिया, जिससे टकराव का माहौल बन गया. ऐसे में शनिवार सुबह 6 बजे से बीएनपी की हड़ताल शुरू हो गई है. यह 8 जनवरी (सोमवार) सुबह 6 बजे तक जारी रहेगा. पार्टी के संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर ने शुक्रवार को मीडिया में हड़ताल की घोषणा की. ऐसे में राजनीतिक पर्यवेक्षकों के एक वर्ग को डर है कि अगर रविवार को मतदान के दौरान बीएनपी कार्यकर्ता-समर्थक हड़ताल को सफल बनाने के लिए सड़क पर उतरे तो संघर्ष अवश्यंभावी है. बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने के लिए बुधवार को ही सेना तैनात कर दी है। लेकिन सत्तारूढ़ खेमे को डर है कि अशांति होने पर मतदान दर घट सकती है.

जुलूस व्यस्त दोतरफा सड़क के एक किनारे पर कब्जा कर रहा है। युवा लड़कों का एक समूह. सिर पर अलग-अलग रंग की टोपियां. हाथ में बांग्लादेश का नया और पुराना झंडा. पुराने झंडे के बीच में बांग्लादेश का नक्शा है. बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई इसी झंडे से लड़ी गई थी. लड़के पोस्टर-उत्सव पकड़े हुए। इसे पढ़ने के बाद समझ आया कि ये युवा फ्रीडम फाइटर्स चिल्ड्रेन नाम की संस्था से जुड़े हैं. वे ‘वोट-वोट’ नहीं, आजादी विरोधी नारे लगा रहे हैं. कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़. स्वतंत्रता सेनानियों ने गला ऊंचा करके जो धूल उड़ाई थी, उसे एक बार पाकिस्तानी सेना के साथ घातक लड़ाई में उलझा दिया था। उनका, और उनका – दोनों पीढ़ियों का नारा, ‘जॉय बांग्ला’।

लेकिन वोट का नारा कहां है? बांग्लादेश का चुनाव कानून रंगीन पोस्टरों के इस्तेमाल पर रोक लगाता है। लेकिन रस्सियों पर लटके काले और सफेद पोस्टरों ने जंजीरों की तरह मुख्य सड़क से लेकर गलियों को ढक दिया। अब किसी की भी दीवार पर कुछ और पोस्टरों के लिए जगह नहीं बची है। मीडिया में मतदान की ख़बरें छाई हुई हैं. सत्तारूढ़ पार्टी अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादिर का कहना है कि मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी को लाल कार्ड दिखाया जाना चाहिए ताकि वे किसी भी मैच में मैदान में नहीं उतर सकें. कई लोगों के मुताबिक इस बार का अभियान बेहद एकतरफा है. पूरे ढाका में निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। ‘विपक्षी दल’ जातीय पार्टी भी है, जिसने सत्तारूढ़ दल के साथ सीटों के समझौते की घोषणा की है. लेकिन गुरुवार दोपहर ढाका पहुंचने पर उनमें से किसी के अस्तित्व का उस तरह अहसास नहीं हुआ.

फिर, बीएनपी, जिसने पहले ही सत्तारूढ़ पार्टी अवामी लीग को मतदान क्षेत्र में थोड़ा वॉकओवर दे दिया है, अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए हड़ताल और नाकाबंदी के रास्ते से हट नहीं पा रही है। बांग्लादेश के 300 निर्वाचन क्षेत्रों में से 299 में मतदान (नौगांव में एक सीट एक स्वतंत्र उम्मीदवार की मृत्यु के कारण निलंबित कर दी गई थी)। बीएनपी ने रविवार को चुनाव के दिन को बीच में रखते हुए शनिवार सुबह 6 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक 48 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया है। बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहुल कबीर रिजवी ने गुरुवार को एक ‘गुप्त स्थान’ से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी घोषणा की.

कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और कुछ वामपंथी पार्टियाँ। लेकिन, लोगों ने हड़ताल का आह्वान नहीं सुना. कई लोगों का कहना है कि उनके इस अड़ियल तरीके ने बीएनपी को मुश्किल में डाल दिया है. ऐसे में नेतृत्व भी समझ रहा है कि हड़ताल बुलाने पर भी उसे लागू कराने की ताकत उनके पास नहीं है. नमाज़, सड़क यातायात, धुंध भरी सर्दी, दोपहर, दोपहर और शाम ढाका की हाथी झील में उतरती है। कौड़न बाजार की हलचल बता रही है, वोट से पहले का पेट। बहरहाल, चुनावी पोशाक पहने ढाका दादाठाकुर की धुन पर निवासियों को आह्वान कर रहा है- ‘वोट देने जाएं/वोट देने जाएं।’ दरअसल,
इस चुनाव में सत्तारूढ़ अवामी लीग के लिए मतदाताओं को बूथ तक लाना सबसे बड़ी चुनौती है.