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जब एक ड्रोन ने ढूंढ निकाला ईरानी राष्ट्रपति का मलवा!

एक ऐसा ड्रोन जिसने ईरानी राष्ट्रपति का मलवा ढूँढ डाला! ईरान के राष्‍ट्रपत‍ि इब्राहिम रईसी के हेल‍िकॉप्‍टर का मलबा म‍िल गया है। ईरान की सरकारी मीडिया ने ऐलान किया है कि ईरानी राष्‍ट्रपत‍ि इब्राहिम रईसी, व‍िदेश मंत्री होसैन अमीरब्‍दोल्‍लाहैन और अन्‍य लोगों की मौत हो गई है। ये लोग अरजबैजान से ईरान के शहर तबरिज जा रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान घने कोहरे के कारण उनका हेलिकॉप्‍टर हादसे का शिकार हो गया। करीब 12 घंटे से ज्‍यादा समय से ईरानी सेना और राहत तथा बचावकर्मी राष्‍ट्रपत‍ि रईसी के हेलिकॉप्‍टर के मलबे को खोज रहे थे लेकिन आखिरकार तुर्की के ड्रोन अकिंसी ने कमाल कर दिया। अकिंसी ने न केवल मलबा ढूढ़ा बल्कि उसका पूरा रास्‍ता बचाव दल को बता दिया जिससे वे आसानी से घटनास्‍थल पर पहुंच गए। दरअसल, ईरान और अजरबैजान की सीमा के बीच में जिस जगह पर यह हेलिकॉप्‍टर हादसा हुआ था, वहां हर तरफ कोहरा छाया था जिससे बचावकर्मी हादसे की ठीक ठीक जगह का पता नहीं लगा पा रहे थे। यही वजह थी कि वे वहां तक पहुंच नहीं पा रहे थे। इस संकट के बीच तुर्की के राष्‍ट्रपत‍ि एर्दोगान के निर्देश पर अकिंसी ड्रोन को रवाना किया गया। इस अकिंसी ड्रोन ने एक वीडियो फुटेज जारी किया और बताया कि किस जगह पर हेलिकॉप्‍टर का मलबा बिखरा पड़ा है।इस ड्रोन के पंख 20 मीटर हैं। इसमें दो टर्बोप्रॉप इंजन लगे हैं और यह बहुत ही लंबे समय तक हवा में रहने की क्षमता रखता है। यह पूरा इलाका पहाड़ी है और धुंध की वजह से राहत और बचाव में दिक्‍कतें आ रही थीं।

तुर्की के राष्‍ट्रपत‍ि ने नाइट व‍िजन तकनीक से लैस अकिंसी ड्रोन और हेलिकॉप्‍टरों को तत्‍काल रवाना किया। तुर्की की अंनादोलू एजेंसी ने बाद में बताया कि अकिंसी ड्रोन ने गर्मी को महसूस किया है और उसे संदेह है कि यह ईरानी राष्‍ट्रपत‍ि के हेलिकॉप्‍टर का मलबा हो सकता है। उन्‍होंने इस जगह की पूरी जानकारी तत्‍काल ईरानी अधिकारियों को दी। इसके बाद छोटे बचाव ड्रोन भेजकर मलबे की जांच की गई और आखिरकार बाद में राहत और बचावकर्मी भी वहां पहुंच गए। तुर्की का यह अकिंसी ड्रोन अत्‍याधुन‍िक तकनीक से लैस है और रात तथा दिन दोनों ही समय में काम करने में सक्षम है।

अकिंसी ड्रोन को बायरकतार कंपनी ने बनाया है जो तुर्की की मशहूर ड्रोन बनाने वाली कंपनी है। इस ड्रोन के सीईओ तुर्की के राष्‍ट्रपत‍ि के दामाद हैं। यह एआई तकनीक से लैस है और रीयल टाइम वीडियो भेजने में माहिर है। इसमें एयर टु एयर रेडॉर तथा कई अन्‍य तरह के रेडॉर लगे हैं। इसमें सैटलाइट के जरिए संचार की सुव‍िधा है। यह अकिंसी ड्रोन हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले करने में भी सक्षम है। इसी वजह से पाकिस्‍तान समेत दुनिया के कई देशों ने इस ड्रोन को खरीदा है। इस ड्रोन के पंख 20 मीटर हैं। इसमें दो टर्बोप्रॉप इंजन लगे हैं और यह बहुत ही लंबे समय तक हवा में रहने की क्षमता रखता है।

अकिंसी अपनी श्रेणी में सबसे क्षमता वाले ड्रोन में गिना जाता है। यह 40 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरता है। उड़ान के समय इसका वजन 5500 किलो तक रहता है। यह ड्रोन युद्ध में जोरदार तबाही मचाने की क्षमता रखता है। इस ड्रोन को गाइडेड मिसाइल, लेजर गाइडेड बम, एयर टु ग्राउंड मिसाइल और छोटे स्‍मार्ट बम से लैस किया जा सकता है। बता दें कि अकिंसी ने न केवल मलबा ढूढ़ा बल्कि उसका पूरा रास्‍ता बचाव दल को बता दिया जिससे वे आसानी से घटनास्‍थल पर पहुंच गए। तुर्की की अंनादोलू एजेंसी ने बाद में बताया कि अकिंसी ड्रोन ने गर्मी को महसूस किया है और उसे संदेह है कि यह ईरानी राष्‍ट्रपत‍ि के हेलिकॉप्‍टर का मलबा हो सकता है। उन्‍होंने इस जगह की पूरी जानकारी तत्‍काल ईरानी अधिकारियों को दी।दरअसल, ईरान और अजरबैजान की सीमा के बीच में जिस जगह पर यह हेलिकॉप्‍टर हादसा हुआ था, वहां हर तरफ कोहरा छाया था जिससे बचावकर्मी हादसे की ठीक ठीक जगह का पता नहीं लगा पा रहे थे। यही वजह थी कि वे वहां तक पहुंच नहीं पा रहे थे। यह ड्रोन अपनी बेमिसाल ताकत की वजह से चलती कार तक को निशाना बनाने में सक्षम है। यह दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को तबाह करने में भी माहिर है। इसी वजह से इसे यूक्रेन की जंग में भी इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति की मौत पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

आज हम आपको बताएंगे कि ईरान के राष्ट्रपति की मौत पर सवाल क्यों उठ रहे हैं! ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन की मौत हो गई है। दोनों नेताओं को लेकर जा रहा हेलीकॉप्टर रविवार को एक दुर्गम घाटी में क्रैश हो गया। बचावकर्मियों को हादसे की जगह तक पहुंचने में कई घंटे का समय लगा और किसी को भी बचाया नहीं जा सका। ईरान के दो अहम पदों पर बैठे नेताओं की मौत की वजह बने हादसे का कारण अज्ञात बना हुआ है। चीनी विशेषज्ञों ने कहा है कि घना कोहरा हादसे के लिए जिम्मेदार हो सकता है लेकिन साथ ही उन्होंने इस पर भी ध्यान दिलाया है कि ईरान फिलहाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्थिति का एक मुश्किल हालात का सामना कर रहा है। ये स्थिति हादसे के पीछे किसी साजिश की आशंका को भी जन्म देती है। हालांकि पर्यवेक्षकों का मानना है कि ईरान की राजनीतिक संरचना ऐसी है कि इस बड़े हादसे के बावजूद देश में अराजकता जैसी स्थिति नहीं आएगी और कामकाज सामान्य तौर पर चलता रहेगा। रिपोर्ट कहती है कि ईरानी राष्ट्रपति रईसी ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत में यात्रा कर रहे थे। मौसम की स्थिति खराब थी लेकिन पश्चिम और इजरायल के साथ ईरान के टकराव को देखते हुए यह दुर्घटना अजीब लगती है। बीते कुछ समय में लगातार सुरक्षा घटनाओं से जूझ रहे ईरान के साथ यह दुर्घटना हुई है। हालांकि इसका ये मतलब नहीं निकाला जा सकता है कि इसके पीछे ईरान के दुश्मनों का हाथ है।’रविवार शाम को दुर्घटना ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 600 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में अजरबैजान देश की सीमा पर स्थित शहर जोल्फा के पास हुई। हादसे के12 घंटे बाद सोमवार सुबह बचावर्मियों ने ड्रोन की मदद से हेलीकॉप्टर का मलबा देखा। चीन के विदेश मंत्रालय ने ईरानी राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर हादसे की खबर के बाद चिंता जहिर करते हुए कहा कि उनकी ओर से ईरान को सभी जरूरी मदद दी जाएगी।

शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के मिडिल ईस्ट स्टडीज इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर लियू झोंगमिन ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, फिलहाल ईरानी राष्ट्रपति के साथ हुए हादसे का कारण निर्धारित करना कठिन है। अपना काम कर रहे हैं और मैंने उन्हें आवश्यक बिंदुओं और देश के सभी ऑपरेशनों पर सलाह दी है। सभी कुछ सुचारु और व्यवस्थित ढंग से चलता रहेगा।पहली नजर में घना कोहरा इसकी सीधी वजह लगता है लेकिन लियू ने ईरान वर्तमान में कई कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। बता दें कि तुर्की के राष्‍ट्रपत‍ि ने नाइट व‍िजन तकनीक से लैस अकिंसी ड्रोन और हेलिकॉप्‍टरों को तत्‍काल रवाना किया। तुर्की की अंनादोलू एजेंसी ने बाद में बताया कि अकिंसी ड्रोन ने गर्मी को महसूस किया है और उसे संदेह है कि यह ईरानी राष्‍ट्रपत‍ि के हेलिकॉप्‍टर का मलबा हो सकता है। उन्‍होंने इस जगह की पूरी जानकारी तत्‍काल ईरानी अधिकारियों को दी। इसके बाद छोटे बचाव ड्रोन भेजकर मलबे की जांच की गई और आखिरकार बाद में राहत और बचावकर्मी भी वहां पहुंच गए। तुर्की का यह अकिंसी ड्रोन अत्‍याधुन‍िक तकनीक से लैस है और रात तथा दिन दोनों ही समय में काम करने में सक्षम है। 

खासतौर से इजरायल के साथ उसके हालिया संघर्ष और ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या को देखते हुए इस घटना ने किसी ‘साजिश’ के संदेह की गुंजाइश भी छोड़ दी है। लियू ने आगे कहा, ‘मौसम की स्थिति खराब थी लेकिन पश्चिम और इजरायल के साथ ईरान के टकराव को देखते हुए यह दुर्घटना अजीब लगती है। बीते कुछ समय में लगातार सुरक्षा घटनाओं से जूझ रहे ईरान के साथ यह दुर्घटना हुई है। हालांकि इसका ये मतलब नहीं निकाला जा सकता है कि इसके पीछे ईरान के दुश्मनों का हाथ है।’

हादसे के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने टीवी पर एक संबोधन में कहा कि देश के ऑपरेशन में कोई व्यवधान नहीं होगा। पहली नजर में घना कोहरा इसकी सीधी वजह लगता है लेकिन लियू ने ईरान वर्तमान में कई कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है। बता दें कि तुर्की के राष्‍ट्रपत‍ि ने नाइट व‍िजन तकनीक से लैस अकिंसी ड्रोन और हेलिकॉप्‍टरों को तत्‍काल रवाना किया।वरिष्ठ अधिकारी अपना काम कर रहे हैं और मैंने उन्हें आवश्यक बिंदुओं और देश के सभी ऑपरेशनों पर सलाह दी है। सभी कुछ सुचारु और व्यवस्थित ढंग से चलता रहेगा।

आखिर बंगाल में क्यों रद्द हुए ओबीसी सर्टिफिकेट?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर बंगाल में ओबीसी सर्टिफिकेट क्यों रद्द हुए! कलकत्ता हाई कोर्ट ने 22 मई को एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए, पश्चिम बंगाल में 2010 से राज्य सरकार की तरफ से जारी किए गए 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट को रद कर दिया। हाई कोर्ट ने राज्य में नौकरियों और सेवाओं में इस तरह के आरक्षण को अवैध बताया। अदालत ने कहा कि इन समुदायों को ओबीसी घोषित करने के लिए वास्तव में धर्म ही एकमात्र मानदंड प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा, उसका मानना है कि मुसलमानों के 77 वर्गों को पिछड़ों के तौर पर चुना जाना पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अदालत इस संदेह को अनदेखा नहीं कर सकती कि उक्त समुदाय मुसलमानों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एक साधन माना गया। राज्य के आरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने साफ किया कि जिन वर्गों का ओबीसी दर्जा हटाया गया है, उसके सदस्य यदि पहले से ही सेवा में हैं या आरक्षण का लाभ ले चुके हैं या राज्य की किसी चयन प्रक्रिया में सफल हो चुके हैं, तो उनकी सेवाएं इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगी। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण कानून, 2012 के तहत ओबीसी के तौर पर आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले 37 वर्गों को संबंधित सूची से हटा दिया। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने महज वोट बैंक की खातिर मुसलमानों को अवांछित ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किए। कमीशन से सलाह नहीं लेने के आधार पर सितंबर 2010 के एक कार्यकारी आदेश को भी रद्द कर दिया। इस आदेश के जरिए ही ओबीसी रिजर्वेशन 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया था। इसमें ए श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत और बी श्रेणी के लिए 7 प्रतिशत रिजर्वेशन का प्रावधान था।

आदेश का तत्काल प्रभाव पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 25 मई को तामलुक, कांथी, घाटल, पुरुलिया, बांकुरा, बिष्णुपुर, झारग्राम और मेदिनीपुर निर्वाचन क्षेत्रों में महसूस किया जा सकता है। इसके साथ ही इस फैसले ने बीजेपी को विपक्ष पर हमला करने का एक और मौका दे दिया है। एनडीए पहले ही विपक्ष पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगाता रहा है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसके हाथ बैठे बिठाए एक हथियार मिल गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य में कुछ वर्गों का ओबीसी दर्जा खत्म करने के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को स्वीकार नहीं करेंगी। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी। एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि राज्य में ओबीसी आरक्षण जारी रहेगा क्योंकि इससे संबंधित विधेयक संविधान की रूपरेखा के भीतर पारित किया गया। तृणमूल प्रमुख ने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर ओबीसी आरक्षण को रोकने की साजिश करने का आरोप लगाया। ममत ने कहा कि संदेशखाली में अपनी साजिश विफल हो जाने के बाद बीजेपी अब नई साजिशें रच रही है। मई 2011 तक पश्चिम बंगाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा सत्ता में था। उसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार सत्ता में आई। एक अनुमान के अनुसार 2010 के बाद पश्चिम बंगाल में ओबीसी श्रेणी के तहत सूचीबद्ध व्यक्तियों की संख्या 5 लाख से ऊपर होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि कोर्ट का फैसला विपक्ष के लिए ‘एक करारा तमाचा’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी इंडिया गठबंधन का ‘तुष्टीकरण का जुनून’ हर सीमा को पार कर गया है। पीएम मोदी ने कहा कि जब भी वह ‘मुस्लिम’ शब्द बोलते हैं, तब उन पर सांप्रदायिक बयान देने का आरोप लगाया जाता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण कानून, 2012 के तहत ओबीसी के तौर पर आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले 37 वर्गों को संबंधित सूची से हटा दिया। कोर्ट ने कमीशन से सलाह नहीं लेने के आधार पर सितंबर 2010 के एक कार्यकारी आदेश को भी रद्द कर दिया।उन्होंने कहा कि वह तो बस ‘तथ्यों को सामने लाकर’ विपक्ष को बेनकाब कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि हाई कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने महज वोट बैंक की खातिर मुसलमानों को अवांछित ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किए।

आरक्षण पर क्या बोले थे अंबेडकर और नेहरू?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर अंबेडकर और नेहरू ने आरक्षण पर क्या बोला था! लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने मुस्लिम, मंगलसूत्र के बाद विपक्ष के खिलाफ अब एक नया मोर्चा खोल दिया है। पीएम मोदी ने मंगलवार को बिहार में एक रैली में आरक्षण पर टिप्पणी की। पीएम मोदी ने कहा कि सच्चाई यह है कि अगर अंबेडकर नहीं होते, तो नेहरू ने एससी/एसटी के लिए आरक्षण की अनुमति नहीं दी होती। पीएम ने आरोप लगाया कि विपक्षी इंडिया गठबंधन संविधान को बदलना चाहता था और धार्मिक अल्पसंख्यकों को आरक्षण देना चाहता था। ऐसे में नजर डालते हैं कि आखिर संविधान सभा में आरक्षण को संवैधानिक दर्जा देने पर तब के नेताओं की क्या राय थी। संविधान, जब पहली बार लागू हुआ, तो इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए राजनीतिक संस्थानों और सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण प्रदान करने के प्रावधान शामिल थे। संविधान का अनुच्छेद 16 राज्यों को ‘नागरिकों के किसी भी पिछड़े वर्ग के लिए, जिनका… पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है’ राज्य सेवाओं में नियुक्तियां आरक्षित करने की अनुमति देता है। शुरू में इसे ‘मसौदा अनुच्छेद 10’ के रूप में जाना जाता था। उस समय संविधान सभा के सदस्य 30 नवंबर, 1948 को इस पर बहस हुई थी। प्रारूप संस्करण और अंततः अंतिम संस्करण में ‘कोई पिछड़ा वर्ग’ वाक्यांश को लेकर विवाद था। कई सदस्यों का मानना था कि यह वाक्यांश बहुत अस्पष्ट है क्योंकि ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द को संविधान में कहीं और परिभाषित नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार देश के पहले दलित वकीलों में से एक कांग्रेस के चंद्रिका राम और धर्म प्रकाश ने अनुसूचित जाति के स्थान पर या इसके अतिरिक्त शब्द को स्पष्ट रूप से शामिल करने की वकालत की थी। ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द यह स्पष्ट करने के लिए कि कौन से समूह के लोग आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं। दूसरी ओर, लोकनाथ मिश्रा और दामोदर स्वरूप सेठ जैसे सदस्य, जो कांग्रेस का भी हिस्सा थे, ने पिछड़ा वर्ग को दिए गए आरक्षण को हटाने की मांग की थी। मिश्रा ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि हर किसी को रोजगार, भोजन, कपड़े, आश्रय और उन सभी चीजों का अधिकार है, लेकिन किसी भी नागरिक के लिए राज्य रोजगार के एक हिस्से का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं हो सकता है, ये योग्यता के आधार पर होना चाहिए। यह कभी भी मौलिक अधिकार नहीं हो सकता।

रिपोर्ट के अनुसार ‘पिछड़ा’ शब्द पर बहस में डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने स्वीकार किया था कि यह एक ‘सामान्य सिद्धांत’ है। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि सार्वजनिक रोजगार के मामले में सभी नागरिकों को अवसर की समानता प्रदान की गई थी, उनका तर्क था कि ‘पिछड़ा” शब्द यह सुनिश्चित करने के लिए एक आवश्यक योग्यता थी कि उत्पीड़ित समुदायों को प्रदान किए गए आरक्षण का ‘अपवाद’ न हो और यह पूरी तरह से अवसर की समानता का अधिकार को खत्म ना कर दे। जहां तक पिछड़ा समुदाय क्या है की बात थी तो इसके संबंध में उन्होंने कहा था कि इसका निर्धारण प्रत्येक स्थानीय या राज्य सरकार की तरफ से किया जाएगा।

हालांकि नेहरू ने आरक्षण से संबंधित अनुच्छेदों पर संविधान सभा में बहस में योगदान नहीं दिया, लेकिन पीएम बनने के बाद उन्होंने जून 1961 में मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने पिछड़ों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। समूहों को अच्छी शिक्षा तक पहुंच प्रदान करके, न कि जाति और पंथ के आधार पर नौकरियों को आरक्षित करके। उन्होंने लिखा था, ‘यह सच है कि हम एससी और एसटी की मदद करने के बारे में कुछ नियमों और परंपराओं से बंधे हैं। वे मदद के पात्र हैं, लेकिन फिर भी, मैं किसी भी प्रकार के आरक्षण को नापसंद करता हूं, खासकर सेवा में… किसी पिछड़े समूह की मदद करने का एकमात्र वास्तविक तरीका अच्छी शिक्षा के अवसर देना है। इसमें तकनीकी शिक्षा भी शामिल है, जो लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। बाकी सब कुछ किसी प्रकार की बैसाखी का प्रावधान है जो शरीर की ताकत या स्वास्थ्य में वृद्धि नहीं करता है। पत्र में उन्होंने आगे कहा था कि सांप्रदायिक और जातिगत आधार पर आरक्षण ‘प्रतिभाशाली और सक्षम लोगों को बर्बाद कर देता है जबकि समाज दोयम दर्जे या तीसरे दर्जे का बना रहता है’। उन्होंने कहा था कि मुझे यह जानकर दुख हुआ कि सांप्रदायिक विचार के आधार पर आरक्षण का यह मामला कितना आगे बढ़ गया है।

रिपोर्ट के अनुसार संविधान ने क्रमशः अनुच्छेद 330 और 332 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की शुरुआत की। ब्रजेश्वर प्रसाद और एच जे खांडेकर सहित संविधान सभा के कुछ सदस्यों ने तर्क दिया कि आरक्षण सही नहीं है। एक अपर्याप्त उपाय और इससे उत्पीड़ित समुदायों की कोई प्रगति नहीं होगी। प्रसाद का मानना था कि एससी और एसटी के नाममात्र प्रतिनिधित्व से आर्थिक और शैक्षिक उत्थान नहीं होगा, उन्होंने कहा कि जो कुछ नेता चुने जाएंगे वे ‘भयानक हंगामा करेंगे लेकिन कुछ भी महत्वपूर्ण हासिल नहीं होगा’। अनुच्छेद 334 अनुच्छेद 295-ए का मसौदा के तहत आरक्षण के लिए 10 साल की समय सीमा को लेकर भी आपत्तियां उठाई गईं थीं। प्रारंभ में संविधान के तहत, लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण के प्रावधान 10 वर्षों के बाद समाप्त होने वाले थे। सदस्यों के एक बड़े समूह ने संदेह व्यक्त किया कि इतनी कम समय सीमा के भीतर किसी भी प्रकार की गुणवत्ता हासिल की जा सकती है। उदाहरण के लिए, स्वतंत्र सदस्य और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता जयपाल सिंह ने कहा था, ‘मुझे खेद है कि यह केवल दस वर्षों से है, क्योंकि मुझे विश्वास है कि भारत स्वर्ग नहीं बनने जा रहा है, कि हर कोई दस वर्षों में स्नातक नहीं बनने जा रहा है या हर कोई राजनीतिक रूप से शिक्षित हो जाएगा।

क्या पहाड़ी इलाकों में भी बढ़ गई है गर्मी?

वर्तमान में पहाड़ी इलाकों में भी गर्मी बढ़ गई है! राजधानी दिल्ली समेत देशभर के ज्यादातर राज्यों में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग ने भी अगले पांच दिनों के लिए लू का रेड अलर्ट जारी किया है। कई जगहों पर तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, आज राजस्थान के कई हिस्सों, पंजाब के कुछ हिस्सों, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में गंभीर लू चलने की संभावना है। वहीं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, सौराष्ट्र एंव कच्छ के अलग-अलग हिस्सों में भीषण गर्मी और लू चलेगी।मौसम विभाग ने दिल्ली में लू का रेड अलर्ट जारी किया है। पिछले करीब हफ्तेभर से दिल्ली में भीषण गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा है। समुद्री इलाकों में साइक्लोन की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, 26 मई की शाम को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में चक्रवाती तूफान आने की संभावना है। इसके अलावा दक्षिण के राज्यों में तेज बारिश के आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है।हालांकि दो दिन से राजधानी में तेज हवाएं चल रही हैं। हवाओं की वजह से तापमान में हल्की गिरावट हुई है, लेकिन गर्मी अभी भी काफी ज्यादा है। बिजली की मांग बढ़ने का प्रमुख कारण गर्मी का अधिक पड़ना है। पारा चढ़ने के साथ एयर कंडीशनर/ कूलर का उपयोग बढ़ रहा है, बता दे कि पंजाब के कुछ हिस्सों, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में गंभीर लू चलने की संभावना है।मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक दिल्लीवालों को लू से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

 मौसम विभाग वे पांच राज्यों में लू का रेड अलर्ट जारी किया है। इसमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने भी लू को देखते हुए अस्पतालों में तैयारियां पूरी की हैं, ताकि मरीजों को बेड और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। राजस्थान में तो डॉक्टरों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। देश के उत्तरी राज्यों में जहां भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, तो वहीं समुद्री इलाकों में साइक्लोन की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसारजब अत्यधिक गंभीर मौसम की आशंका होती है, जिससे रेल, सड़क और वायु के साथ-साथ बिजली आपूर्ति सहित परिवहन बाधित हो सकता है।यह इस साल गर्मी के मौसम में अबतक की सबसे अधिक मांग है।  देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ने से बिजली की अधिकतम मांग बुधवार को 235.06 गीगावाट पर पहुंच गयी। यह इस मौसम की अबतक की सर्वाधिक मांग है।, 26 मई की शाम को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में चक्रवाती तूफान आने की संभावना है। इसके अलावा दक्षिण के राज्यों में तेज बारिश के आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है।

उत्तर भारत के राज्यों में तो गर्मी बढ़ ही रही है, लेकिन एक्सपर्ट्स इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में भी पारा लगातार बढ़ रहा है। इसे लेकर मौसम विभाग ने इन राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बता दें कि ऑरेंज अलर्ट तब जारी किया जाता है जब अत्यधिक गंभीर मौसम की आशंका होती है, जिससे रेल, सड़क और वायु के साथ-साथ बिजली आपूर्ति सहित परिवहन बाधित हो सकता है।  देश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ने से बिजली की अधिकतम मांग बुधवार को 235.06 गीगावाट पर पहुंच गयी। यह इस मौसम की अबतक की सर्वाधिक मांग है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, ‘बिजली की मांग बढ़ने का प्रमुख कारण गर्मी का अधिक पड़ना है। पारा चढ़ने के साथ एयर कंडीशनर/ कूलर का उपयोग बढ़ रहा है, बता दे कि पंजाब के कुछ हिस्सों, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली में गंभीर लू चलने की संभावना है। वहीं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, सौराष्ट्र एंव कच्छ के अलग-अलग हिस्सों में भीषण गर्मी और लू चलेगी।मौसम विभाग ने दिल्ली में लू का रेड अलर्ट जारी किया है। जिससे बिजली की खपत में भी वृद्धि हुई है।’ बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बिजली की अधिकतम मांग या दिन में सबसे अधिक आपूर्ति बुधवार को 235.06 गीगावाट दर्ज की गई। यह इस साल गर्मी के मौसम में अबतक की सबसे अधिक मांग है।

आखिर रोजगार की बात क्यों कर रही है सारी पार्टियां ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर रोजगार की बात सारी पार्टियां क्यों कर रही है! आम चुनाव में धर्म और जाति से लेकर तमाम तरह के मुद्दे उठाकर पक्ष-विपक्ष ने एक-दूसरे को घेरने का प्रयास किया है। लेकिन, इस चुनाव में यह भी पहली बार देखा जा रहा है कि रोजगार का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है और सभी दलों को इस पर बात करनी पड़ रही है। युवा खासकर पहली बार वोट देने वाली पीढ़ी का साफ कहना है कि अब वक्त आ गया है, जब रोजगार के सवाल पर मतदान किया जाए। दरअसल, हाल के बरसों में जब से युवा वोटर का हस्तक्षेप राजनीति में बढ़ा है, तब से रोजगार पर बात करना और इसे अपनी मुख्य राजनीतिक थीम में लाना सभी दलों के लिए जरूरी-सा हो गया है। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ने रोजगार को अपना मुख्य चुनावी अजेंडा बनाया है। गठबंधन का कहना है कि अगर उसकी सरकार बनती है, तो सबसे पहला काम होगा 30 लाख सरकारी नौकरी देने की दिशा में। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के अधिकतर नेता अपनी हर सभा में इस बारे में बात कर रहे हैं। इसका असर जमीन पर भी दिख रहा है।

रोजगार पर बात करने से विपक्ष को दो फायदे हो रहे हैं। पहला फायदा तो यह कि राष्ट्रवाद या हिंदुत्व से अलग अपनी एक दूसरी सियासी पिच बनाने में सफल हुए हैं। दूसरा फायदा है- सबसे बड़े वोट बैंक यानी युवाओं तक पहुंच। पिछले दो आम चुनावों में नरेंद्र मोदी की अगुआई में युवा वोटर्स पर BJP ने पकड़ बनाए रखी थी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि मोदी सरकार के दूसरे टर्म में सार्वजनिक मंचों से सबसे ज्यादा रोजगार और आर्थिक मसलों से जुड़े मुद्दे उठ रहे हैं। कोविड के बाद यह मसला और मुखर हुआ है। पिछले दिनों पेपरलीक और नौकरियों को लेकर यूपी से बिहार तक स्टूडेंट्स ने आक्रामक आंदोलन किया। इनमें से कई मामलों में सरकार को झुकना पड़ा।

विपक्ष के प्रचार में सबसे ज्यादा फोकस है रोजगार पर। प्रचार का करीब एक चौथाई हिस्सा सिर्फ नौकरियों पर है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने NBT से बातचीत में कहा था कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने रोजगार के नाम पर वोट मांगा तो मिला। इसके बाद वह जितने भी वक्त तक सरकार में रहे, उन्होंने लोगों को नौकरियां दीं। इसी वजह से इस बार आम चुनाव में भी उन्हें युवाओं का समर्थन मिल रहा है।

ऐसा नहीं है कि BJP ने इस मुद्दे पर विपक्ष को फ्री पास दे दिया है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी सरकार और पार्टी की ओर से युवाओं से जुड़ रहे हैं। NBT के साथ बातचीत में भी उन्होंने रोजगार से जुड़े सवाल पर कहा था, ‘पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के नए अवसर आए। EPFO के मुताबिक, पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं। PLFS का डेटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वह अब 3% रह गई है।’ पीएम ने कहा था, ‘हमारी माइक्रो फाइनैंस की नीतियां कितनी प्रभावी हैं, इस पर SKOCH ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है। यह रिपोर्ट कहती है कि पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए हैं। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं। इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। हमने अपनी सरकार के पहले 100 दिनों का एक्शन प्लान तैयार किया है। उसमें हमने अलग से युवाओं के लिए 25 दिन और जोड़े हैं। हम देशभर से आ रहे युवाओं के सुझाव पर गौर कर रहे हैं और नतीजों के बाद उस पर तेजी से काम शुरू होगा।’

जानकारों का कहना है कि मुद्दा उठने और उस पर किसी दल को वोट मिलने में फर्क है। चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख की एजेंसी के ओपिनियन पोल में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा थी। वह बताते हैं, ‘पिछले कुछ बरसों से लगातार यह बात सामने आई कि आर्थिक मुद्दा आमजन के सामने गंभीर हुआ है। लेकिन, इसे अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कई फैक्टर की जरूरत होती है।’ वह कहते हैं कि महंगाई या बेरोजगारी के नाम पर ही सरकार को नहीं घेरा जा सकता, बल्कि इसके लिए यह बताना पड़ता है कि सत्ता पक्ष कैसे जिम्मेदार है। अगर इन मुद्दों पर चुनौती देनी है तो विपक्ष को सिर्फ शिकायत नहीं, विकल्प और विजन के साथ आना होगा।

चक्रवात रेमल के प्रभाव से कोलकाता वृक्षारोपण की राशि का पांच गुना मुआवजा चाहती है

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रेमल में तीन सौ से अधिक पेड़ उखाड़े गये, कलकत्ता नगर पालिका वृक्षारोपण की राशि का पांच गुना मुआवजा चाहती है
चक्रवात रेमल के प्रभाव से कोलकाता शहर के विभिन्न हिस्सों में तीन सौ से अधिक पेड़ उखड़ गए हैं। जो कलकत्ता जैसे घिन्जी शहर के लिए एक बड़ी क्षति है। इसलिए कोलकाता नगर पालिका इस घाव को ढकने के लिए कम से कम पांच गुना अधिक पेड़ लगाना चाहती है। सोमवार सुबह तूफान थमते ही नगर पालिका ने कोलकाता शहर की सफाई शुरू कर दी. शुरुआत में पता चला था कि कोलकाता शहर में करीब 400 बड़े पेड़ गिरे हैं. लेकिन मंगलवार की सुबह कोलकाता नगर निगम पार्क विभाग से मिली खबर के मुताबिक बोट्स समेत करीब 300 बड़े पेड़ उखड़ गये. अन्य 100 पेड़ क्षतिग्रस्त हो गए और उनकी शाखाओं का बड़ा हिस्सा नीचे गिर गया।

कोलकाता नगर निगम के मुताबिक, गिरे बड़े पेड़ों की संख्या 294 है. बाद में, कई और पेड़ों के गिरने की सूचना मिलने के बाद यह बढ़कर 300 हो गई। कृष्णाचूरा, राधाचूरा, कपास, पाम, कदम, सुपुरी जैसे पेड़ उखड़ गए हैं। गिरे हुए पेड़ों की इतनी संख्या को लेकर कोलकाता नगर पालिका त्वरित कार्रवाई करना चाहती है. वे आपदा कार्य ख़त्म होने के बाद ही इस मुद्दे पर काम शुरू करना चाहते हैं. जिन इलाकों में पेड़ गिरे हैं उनकी पहचान कर ली गई है. सबसे ज्यादा पेड़ पार्क स्ट्रीट, कैमक स्ट्रीट, न्यू अलीपुर, प्रिंस अनवर शाह रोड पर गिर रहे हैं। इसके अलावा, बेलेघाटा, अलीपुर रोड, गोल्फग्रीन रोड, जीसी एवेन्यू, स्ट्रैंड रोड, किरणशंकर रॉय रोड, पाटुली में फूल बागान, खिदिरपुर में मनसतला लेन, गरियाहाट, पीजी अस्पताल के अंदर, बिड़ला तारामंडल के सामने की सड़क पर बड़े पेड़ गिर गए।

इसलिए कोलकाता नगर पालिका इन इलाकों में पांच गुना ज्यादा पेड़ लगाकर इसकी भरपाई करना चाहती है. कोलकाता नगर पालिका के मेयर परिषद (उद्योन) देबाशीष कुमार ने कहा, ”लगभग 300 बड़े पेड़ों के गिरने के बाद ही हमने 1500 पौधे लगाने की योजना बनाई है. वह काम अगले कुछ दिनों में शुरू हो जाएगा.”

चक्रवात रेमल के कारण शहर में 294 पेड़ गिर गये. यह खबर कोलकाता नगर पालिका के पार्क विभाग के सूत्रों से मिली है.

शेक्सपियर सारणी, पार्क स्ट्रीट, अलीपुर रोड, गणेश एवेन्यू, स्ट्रैंड रोड, सैयद अमीर अली एवेन्यू जैसी महत्वपूर्ण सड़कें पेड़ गिरने के कारण रविवार रात को बंद कर दी गईं। सोमवार सुबह कैथेड्रल रोड, पार्क स्ट्रीट और कैममैक स्ट्रीट पर भी पेड़ उखड़ गए। इसके अलावा, रविवार रात से शहर की कई सड़कों पर पेड़ गिरे हुए हैं। नगर निगम सूत्रों के अनुसार शहर में सबसे अधिक पेड़ बोरो नंबर 10-41 में गिरे हैं. इसके अलावा बोरो नंबर सात में 38, बोरो नंबर नौ और तीन में क्रमश: 25 और 24 पेड़ गिरे. बोरो नंबर 13 और 14 में 18-18 पेड़ गिर गये. बरो नंबर 16 में 22 पेड़ टूट गये. गिरे पेड़ों में कृष्णचूरा, राधाचूरा, बकुल आदि प्रमुख हैं।

लालबाजार ने कहा कि आपदा के दौरान पेड़ गिरने से सड़क अवरुद्ध होने की आशंका के चलते थाने की पुलिस और ट्रैफिक गार्ड को पहले ही सचेत कर दिया गया था. पुर उद्यान विभाग की नगर स्थित विशेष टीमें भी सतर्क थीं। हर थाने और ट्रैफिक गार्ड बल को भी अलर्ट कर दिया गया. पेड़ काटने की मशीनें और विशेष टीमें तैयार थीं. नतीजतन, पेड़ गिरने की सूचना मिलने के बाद कोलकाता नगर निगम और कोलकाता पुलिस के जवानों ने आपदा प्रतिक्रिया बल के सदस्यों के साथ रात में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जहां भी संभव हुआ, पुलिस कर्मियों ने पेड़ काटे और यातायात सामान्य करने का प्रयास किया. हालांकि, शेक्सपियर सरणी समेत कई सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ उखड़ने से नगर पालिका को सूचना दी गयी. दमकलकर्मियों ने आकर उन पेड़ों को हटा दिया.

चक्रवात रेमल तबाही मचाने के बाद दोनों बंगाल से निकल गया। यह शक्तिशाली चक्रवात सोमवार को मजबूत होकर चक्रवाती तूफान में बदल गया। मंगलवार की सुबह यह मजबूत होकर गहरे दबाव में बदल गया। 12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यह धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व, पूर्वी बांग्लादेश की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह 5:30 बजे, दबाव मोंगला से 260 किमी उत्तर-पूर्व और ढाका से 100 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित था।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 12 घंटों में यह सामान्य दबाव में तब्दील हो जाएगा. हालांकि, रेमल के प्रत्यक्ष प्रभाव और इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव के बावजूद, दक्षिण बंगाल के लगभग सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। लेकिन कहीं भी भारी बारिश की संभावना नहीं है. राज्य के तटीय जिलों के कुछ हिस्सों में सुबह अचानक 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. कोलकाता और नादिया में सुबह के समय तेज़ हवा की अधिकतम गति 50 से 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हालांकि, पवन कार्यालय ने कहा कि दोपहर के बाद हवा की गति नहीं रहेगी.

पापुआ न्यू गिनी में भूस्खलन, 2,000 लोग दबे, आंकड़ों के साथ संयुक्त राष्ट्र को सरकार का पत्र!

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सोमवार को संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में, पापुआ न्यू गिनी के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने कहा कि ढहने से कम से कम 2,000 लोग दबकर मर गए। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
पिछले शुक्रवार को पापुआ न्यू गिनी के उत्तर में एक सुदूर गाँव में भूस्खलन हुआ। देश के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के अनुसार, इस घटना में कम से कम 2,000 लोग मारे गए।

सोमवार को संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में, पापुआ न्यू गिनी के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने कहा कि ढहने से कम से कम 2,000 लोग दबकर मर गए। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. सरकारी अधिकारियों ने रविवार को घटनास्थल का दौरा किया. उन्हें आशंका थी कि मरने वालों की संख्या बढ़ेगी. संयुक्त राष्ट्र को भेजे गए पत्र में यह आशंका व्यक्त की गई है. यह भी बताया गया कि मुख्य सड़क ध्वस्त हो गयी। चारों तरफ भुरभुरी मिट्टी, कीचड़ पड़ा हुआ है। जिसके कारण बचाव कार्य बाधित हो गया है.
पापुआ न्यू गिनी के एंगा प्रांत का वह गांव जहां भूस्खलन प्रभावित हुआ है, वहां काफी आबादी है। पास ही परजेरा सोने की खदान है। खदान का संचालन कनाडाई कंपनी बैरिक गोल्ड द्वारा किया जाता है। इसके साथ एक चीनी कंपनी भी है. खदान सहित आसपास का क्षेत्र काफी दुर्गम है। सिर्फ सोना ही नहीं, वहां कई तरह के प्राकृतिक संसाधन हैं। ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित इस देश की कुल जनसंख्या 1.2 मिलियन है। वहां अलग-अलग लोग रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने जानकारी दी है कि वे स्थिति पर नजर रख रहे हैं. मकान गिरने के डर से आसपास के लोगों ने भी अपना घर छोड़ दिया है. अभी करीब 250 मकान खाली पड़े हैं। 1,250 बेघर।

पापुआ न्यू गिनी एक विविधतापूर्ण देश है जिसमें कई प्रकार की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियाँ हैं। यह अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसे गरीबी, भ्रष्टाचार और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों का भी सामना करना पड़ता है।

पापुआ न्यू गिनी में स्थिति क्षेत्र और विशिष्ट मुद्दों के आधार पर काफी भिन्न हो सकती है। सरकार स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में सुधार, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और कानून प्रवर्तन और शासन से संबंधित मुद्दों से निपटने सहित विभिन्न चुनौतियों का समाधान करने पर काम करना जारी रखती है।

पापुआ न्यू गिनी की स्थिति पर नवीनतम और विशिष्ट अपडेट के लिए, मैं विश्वसनीय समाचार स्रोतों या सरकारी वेबसाइटों की जाँच करने की सलाह दूंगा।

पापुआ न्यू गिनी दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक देश है, जो न्यू गिनी द्वीप के पूर्वी आधे हिस्से और कई छोटे द्वीपों पर कब्जा करता है। यह अपनी विविध संस्कृति, आश्चर्यजनक प्राकृतिक परिदृश्य और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। पापुआ न्यू गिनी के बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

1. भूगोल: पापुआ न्यू गिनी पश्चिम में इंडोनेशियाई प्रांत पापुआ के साथ न्यू गिनी द्वीप साझा करता है। इसमें कई द्वीप भी शामिल हैं, जिनमें उत्तर-पूर्व में बिस्मार्क द्वीपसमूह और दक्षिण-पूर्व में सोलोमन द्वीप शामिल हैं।

2. संस्कृति: देश अविश्वसनीय रूप से सांस्कृतिक रूप से विविध है, इसकी आबादी के बीच 800 से अधिक अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं। पारंपरिक रीति-रिवाज और अनुष्ठान कई समुदायों का अभिन्न अंग बने हुए हैं, और जनजातीय जुड़ाव अक्सर दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

3. अर्थव्यवस्था: पापुआ न्यू गिनी की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि, खनन और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। प्रमुख निर्यातों में सोना, तांबा और तेल जैसे खनिजों के साथ-साथ कॉफी, कोको और पाम तेल जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं।

4. चुनौतियाँ: अपनी प्राकृतिक संपदा के बावजूद, पापुआ न्यू गिनी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें गरीबी, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, राजनीतिक अस्थिरता और स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। भ्रष्टाचार और कानून प्रवर्तन समस्याएं भी महत्वपूर्ण चिंताएं हैं।

5. राजनीतिक संरचना: पापुआ न्यू गिनी एक संवैधानिक राजतंत्र वाला संसदीय लोकतंत्र है। पापुआ न्यू गिनी की रानी का प्रतिनिधित्व गवर्नर-जनरल द्वारा किया जाता है, जबकि प्रधान मंत्री सरकार का प्रमुख होता है। देश में एक सदनीय संसद है।

6. प्राकृतिक सौंदर्य: पापुआ न्यू गिनी अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें हरे-भरे वर्षावन, प्राचीन समुद्र तट, मूंगा चट्टानें और उच्चभूमि घाटियाँ शामिल हैं। यह साहसिक पर्यटन, पारिस्थितिक पर्यटन और सांस्कृतिक अनुभवों में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है।

7. पर्यावरण संरक्षण: यह देश दुनिया के कुछ सबसे विविध पारिस्थितिक तंत्रों का घर है, लेकिन इसे वनों की कटाई, आवास हानि और प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। संरक्षण पहलों और सतत विकास प्रथाओं के माध्यम से इन मूल्यवान प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के प्रयास चल रहे हैं।

कुल मिलाकर, पापुआ न्यू गिनी संस्कृतियों और परिदृश्यों के अनूठे मिश्रण वाला एक आकर्षक और विविध देश है, लेकिन यह कई सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों से भी जूझता है।

बॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के बीच एक पुल बनना चाहता हूं: अल्लू अर्जुन l

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बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री का पहले ही विलय हो चुका है। इस बार अंतरराष्ट्रीय सिनेमा को बॉलीवुड से जोड़ने की बात सामने आई। लेकिन पर्दे के पीछे कोई बाली स्टार नहीं है. दक्षिणी स्टार अल्लू अर्जुन इस मंगनी की पहल करने के इच्छुक हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ”मैं बॉलीवुड और विश्व सिनेमा के बीच संपर्क का माध्यम बनना चाहता हूं। उस स्थिति में मैं दोनों के बीच सेतु बन सकता हूं।” वह बॉलीवुड और विश्व सिनेमा के बीच की दूरी को पाटना चाहते हैं।

उनके अनुसार, बॉलीवुड के भीतर एक पुनर्जागरण शुरू हो चुका है। अल्लू उनकी ‘अग्रिम पंक्ति’ में रहना चाहता है. सिनेमा के प्रति अल्लू का जुनून और उनकी लोकप्रियता भौगोलिक सीमाओं से परे है। सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता के मामले में ही नहीं, बल्कि सिनेमा के प्रति उनका दर्शन उन्हें ऐसे काम के लिए प्रेरित करता है। एल्यूर का कहना है कि बड़े पैमाने पर, फिल्म के साथ सांस्कृतिक संबंध पर जोर देना महत्वपूर्ण है। उनकी आने वाली फिल्म ‘पुष्पा 2’ के गाने ‘पुष्पा पुष्पा’ से इस काम की शुरुआत हो चुकी है। इस गाने को कई भाषाओं में ‘डब’ किया गया है। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सके. घटित हुआ। मुद्दा यह है कि वह नहीं चाहते कि सिनेमा भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं में बंधा रहे।

प्रशंसकों और आलोचकों के अनुसार, अल्लू विभिन्न भूमिकाओं में जोखिम लेने से नहीं कतराते। उन्होंने भारतीय सिनेमा में सबसे विश्वसनीय और प्रभावशाली अभिनेता का खिताब हासिल किया है। अभिनेता को लगता है कि एक नया ‘सिनेमाई’ अनुभव प्रदान करके ही अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की बराबरी करना संभव है।

चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप! आख़िरकार अल्लू अर्जुन ने अपना मुँह खोला
चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर अल्लू अर्जुन ने खोला मुंह. वह 11 मई को अपनी पत्नी स्नेहा रेड्डी के साथ आंध्र प्रदेश के नंद्याल के लिए रवाना हुए। वहां साउथ स्टार वाईएसआरसीपी विधायक एस रवि के घर गए। विधायक का पूरा नाम शिल्पा रवि चंद्र किशोर रेड्डी है।

जैसे ही अभिनेता की मौजूदगी की खबर फैली, स्थानीय लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। चुनावी माहौल में अल्लू बिना पूर्व अनुमति के नंद्याल गए। आक्रोशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को काफी तेजी दिखानी पड़ी. इसके बाद पुलिस ने एक्टर और रवि के खिलाफ मामला दर्ज किया. घटना के बारे में अल्लू अर्जुन ने कहा कि वह किसी खास राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं. अभिनेता ने कहा, “मैं तटस्थ हूं और राजनीतिक संबद्धता के बावजूद लोगों का समर्थन करता हूं। मैं हमेशा अपने चाचा पवन कल्याण के समर्थन में खड़ा हूं। ससुर जी मैं रेड्डी और दोस्त रवि के साथ भी हूं। अल्लू ने अपने दोस्त रवि को चुनाव में समर्थन देने का वादा किया। लेकिन पिछली बार वह अपना वादा पूरा नहीं कर सके. उनके शब्दों में, ”इस बार तो मैं बात करने के लिए नंद्याल गया.”

इससे पहले साउथ स्टार को हैदराबाद में वोटिंग के दौरान मीडिया का सामना करना पड़ा था. चुनाव जागरूकता के मुद्दे पर बोलने के साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि उनका सभी राजनीतिक दलों के प्रति तटस्थ रवैया है.

फिल्म ‘पुष्पा’ की जबरदस्त लोकप्रियता के बाद ‘पुष्पा: द रूल’ रिलीज होने जा रही है। महामारी के बाद साल 2021 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऑक्सीजन मुहैया कराई. इस फिल्म ने करीब 350 करोड़ रुपए का बिजनेस किया है। उसके बाद करीब तीन साल का ब्रेक. इस बार फिल्म का दूसरा भाग आ रहा है। इस फिल्म के लिए अल्लू अर्जुन ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। वह रातों-रात इंटरनेशनल स्टार बन गए। ये तस्वीर इस बार बड़ी होने वाली है. ‘पुष्पा 2’ तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी के अलावा बंगाली में भी रिलीज होगी। सुनने में आ रहा है कि इस बार बंगाल के लोकप्रिय गायक तिमिर बिस्वास वहां अपनी आवाज देने वाले हैं.

इस संदर्भ में, गायक ने आनंदबाजार ऑनलाइन को बताया कि सब कुछ बहुत शुरुआती चरण में है। अभी सबकुछ बताने को तैयार नहीं हूं। हालांकि, सुनने में आ रहा है कि इस फिल्म के बंगाली वर्जन में तिमिर बंगाली में एक गाना गाने वाले हैं.

‘पुष्पा 2’ का पहला पोस्टर पिछले साल अप्रैल में अल्लू के जन्मदिन पर जारी किया गया था। पोस्टर में अल्लू का ‘लुक’ देखकर हंगामा मच गया. एक्टर को इस रूप में पहले कभी नहीं देखा गया है. चमकीला लाल माथा, दोनों गाल फिर नीले। भौहों के बीच चंदन की बूँदें चमक रही हैं। साड़ी, गले में नींबू की माला, चेहरे पर दाढ़ी-मूंछें। हाथ में रखी बंदूक बृहन्नला की पोशाक में अल्लू कुछ हद तक फंस गए थे. इसी बीच फिल्म का टीजर इसी साल 8 अप्रैल को रिलीज किया गया था. वहीं अल्लू नीले रंग की पट्टू साड़ी में नजर आ रहे हैं. इसके बाद से ही फैंस के बीच उत्साह बढ़ गया है. दर्शक ‘पुष्पा’ को दूसरी बार बड़े पर्दे पर देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. सुकुमार द्वारा निर्देशित यह फिल्म 15 अगस्त को रिलीज हो रही है.

आईपीएल में 15 भारतीय क्रिकेटरों ने विश्व कप में कैसा प्रदर्शन किया?

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आईपीएल ख़त्म हो गया है. वहीं कुछ दिनों बाद टी20 वर्ल्ड कप शुरू हो रहा है. भारतीय टीम पहला मैच 5 जून को आयरलैंड के खिलाफ खेलेगी. इससे पहले  ने 15 भारतीय क्रिकेटरों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया था।

रोहिन शर्मा (कप्तान)

आईपीएल की कप्तानी गंवाने के बावजूद वह अभी भी देश के कप्तान के पद पर बने हुए हैं। उनके नेतृत्व में देश विश्व कप में उतरेगा. लेकिन ऐसा नहीं है कि रोहिन बड़े आत्मविश्वास के साथ वर्ल्ड कप में उतर सकते हैं. उन्हें ये आईपीएल पसंद नहीं आया. हालाँकि टीम ग्रुप में सबसे निचले पायदान पर रही, लेकिन खुद रोशन को बल्ले से सफलता नहीं मिली। 14 मैचों में 417 रन बनाए. डेढ़ सौ शताब्दियाँ हैं। बिल्कुल भी अच्छा प्रदर्शन नहीं.

हार्दिक पंड्या (सह-निदेशक)

हार्दिक वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की सबसे बड़ी हार है, इस पर चर्चा जारी रह सकती है. गुजरात से मुंबई आकर कप्तान बनने के बाद वह खुद ही आईपीएल फैंस की नजर में विलेन बन गए. हर मैच में उन्हें ताने सुनने पड़ते थे. आप प्रदर्शन की आलोचना भी कर सकते हैं. 14 मैचों में सिर्फ 216 रन. मैं 47वें नंबर पर हूं. उन्होंने कुल 11 विकेट लिए. संख्याएँ 37 हैं।

यश्वी जयसवाल

वर्ल्ड कप टीम में ओपनर के तौर पर उनकी भूमिका लगभग तय है. लेकिन 16 मैचों में 435 रन बनाना इस साल के आईपीएल में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं है. उनके नाम एक शतक और एक अर्धशतक है. बहुत सारे मैचों में जरूरत पड़ने पर चमक सकते हैं। कई तकनीकी कमजोरियों से जूझ रहे हैं.

विराट कोहली

आईपीएल से पहले अगर कोई खिलाड़ी सबसे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरा तो वो कोहली ही थे। टीम एलिमिनेटर से बच गई है। कोहली ने लगातार आईपीएल जीता. लेकिन आप अपने प्रदर्शन से खुश हो सकते हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो वह सबसे ज्यादा रन बनाकर आईपीएल की ऑरेंज कैप जीत लेंगे. 15 मैचों में 741 रन बनाए. एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए. कोई इंतज़ार नहीं कर रहा है.

सूर्यकुमार यादव

उनकी पहचान आईपीएल से है. आईपीएल में अच्छा खेलने से भारतीय टीम को मौका मिला और एक समय वह विश्व में नंबर एक स्थान पर थी। लेकिन ये आईपीएल उनके लिए अच्छा नहीं रहा. 11 मैचों में 345 रन बनाए. मैं 26वें नंबर पर हूं. कहो नहीं बल्ले से उनका प्रदर्शन असामान्य नहीं है. दिक्कत यह है कि नंबर चार का कोई विकल्प नहीं है.

समुदाय

सिर्फ आईपीएल ही नहीं, ऋषभ पॉन्ड की वापसी क्रिकेट इतिहास की सबसे बेहतरीन ‘वापसी कहानियों’ में से एक कही जा सकती है। करीब दो साल पहले हुए कार हादसे के बाद क्रिकेट के खेल पर सवाल खड़े हो गए थे. पंत न केवल जल्दी लौटे, बल्कि पूरी आईपीएल टीम का नेतृत्व किया। हो सकता है कि टीम बहुत अच्छा नहीं खेली हो. लेकिन पंथ के प्रदर्शन ने हमारा ध्यान खींचा. 13 मैचों में 446 रन बनाए. उसके तीन देवता हैं। वह हर मैच में किसी न किसी तरह से टीम के लिए योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं.

संजू सैमसन

आईपीएल के सर्वश्रेष्ठ में से एक चला गया। विश्व कप का दूसरा विकेटकीपर कौन होगा, इस सवाल पर वह बहस की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ते। उन्होंने जिस तरह से बल्लेबाजी की है उससे उनके नेतृत्व ने सबका ध्यान खींचा है। दुर्भाग्य से, राजस्थान ने शुरू से ही आक्रामक खेल दिखाया और अंत में हारकर टीम को फाइनल में नहीं ले जा सकी। लेकिन संजू के 16 मैचों में 561 रन हमारा ध्यान खींचते हैं.

शिवम दुबे

रिंकू सिंह की जगह शुरुआती 15 में चुने जाने के बाद से ही आलोचना शुरू हो गई थी. चयनकर्ता कितनी भी प्राथमिकता का दावा कर लें, कोई इस पर विश्वास नहीं करता. टीम की घोषणा के बाद से ही शिवम का प्रदर्शन खराब हो गया है. वह किसी भी मैच में अच्छा खेल सकते हैं. उन्होंने 14 मैचों में सिर्फ 396 रन बनाए. सूची में 18. तीन अर्धशतकों के अलावा कहने को कुछ नहीं। 14 मैचों में सिर्फ एक ओवर फेंका. एक विकेट लिया. वर्ल्ड कप टीम में मौका मिलने के बावजूद चेन्नई ने उन्हें गेंदबाज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया.

रवीन्द्र जड़ेजा

एक ऑलराउंडर के तौर पर भारतीय टीम को उन पर काफी भरोसा है। लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि आईपीएल के किसी भी मैच में जडेजा ने बहुत अच्छा खेला हो. प्रदर्शन ऐसा नहीं कहता. 14 मैचों में 267 रन बनाए. बस आधी सदी. उन्होंने आठ विकेट लिए. बिलकुल भी प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं.

अक्षर पटेल

अलराउंडर, अलराउंडर की तरह, जडेज़ार के लिए एक वैकल्पिक चरित्र हो सकता है। लेकिन अपने अच्छे प्रदर्शन के कारण वह टीम के प्रबल दावेदार नहीं हैं. 14 मैचों में दो अर्धशतक के साथ 235 रन बनाए. 11 विकेट लिए. लेकिन पात्र महत्वपूर्ण क्षणों में जिम्मेदार पारी खेलने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

-कुलदीप यादव

आईपीएल में दिल्ली के तीसरे सफल गेंदबाज. अमेरिका और वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी चाइनामैन गेंदबाजी काम आ सकती है. कुलदीप ने 11 मैचों में 16 विकेट लिए. इकोनॉमी रेट 1.777

युजवेंद्र चहल

पिछले दो टी20 वर्ल्ड कप में उन्हें मौका नहीं मिला. लेकिन इस बार निर्भचाचारी चहल को रिलीज करने की हिम्मत नहीं दिखा सके. चहल की गेंदबाजी अमेरिका और कैरेबियन में असरदार हो सकती है. 15 मैचों में 18 विकेट लिए हैं. लेकिन आपको इकोनॉमी दरों के लिए थोड़ा अधिक भुगतान करना होगा। आईपीएल में करीब 10 रन बनाए.

अर्शदीप सिंह

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में उनका प्रथम ग्यारह में होना स्वाभाविक था। भारतीय टीम में नियमित मौका नहीं मिला. लेकिन उन्हें वर्ल्ड कप टीम में रखा गया है. वह आईपीएल में विकेट लेने वालों की सूची में चौथे नंबर पर हैं। 14 मैचों में 19 विकेट. इस बार भी प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी. लेकिन अर्शदीप की गेंदबाजी ने हमारा ध्यान खींचा.

जयप्रीत बुमरा

पिछली बार चोट के कारण आईपीएल नहीं खेल सके थे. इस बार बुमराह ने अपना अलग खेल खेला. चाहे कितनी भी टीमें प्वाइंट टेबल में खत्म हो जाएं लेकिन बल्लेबाज फिर भी खुद को बुमराह की गेंदबाजी के लिए तैयार नहीं कर पाते हैं. वह आईपीएल में विकेट लेने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 13 मैचों में 20 विकेट लिए. एक मैच में पांच विकेट होते हैं.