Thursday, March 5, 2026
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हरियाणा के सात जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद, सड़कों पर बैरिकेड लगाकर बैठे किसान.

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देश के किसानों ने कई मांगों को लेकर मार्च की धमकी दी है. पंजाब, हरियाणा के कई जिलों से किसानों ने ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया है. उनका अगले मंगलवार को राजधानी में मार्च और विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम है. हरियाणा सरकार ने किसानों के इस आंदोलन को ‘रोकने’ के लिए दो दिन पहले ही कदम उठाना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. इतना ही नहीं पुलिस ने सड़क पर बैरिकेड्स भी लगाने शुरू कर दिए हैं. किसानों के आंदोलन से पहले हरियाणा के सात जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद, सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए फसल, किसानों के लिए पेंशन, फसल बीमा और उनके खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर 13 फरवरी को दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना है। कई लोगों को डर है कि राजधानी की सड़कें फिर से गर्म हो जाएंगी. मालूम हो कि इस आंदोलन में 200 से ज्यादा किसान संगठन शामिल होंगे. मनोहर लाल खट्टर सरकार पहले ही अधिसूचना जारी कर इंटरनेट सेवाएं बंद करने की घोषणा कर चुकी है. अधिसूचना के मुताबिक, अशांति से बचने के लिए अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं मंगलवार रात तक निलंबित रहेंगी. ग्राहक केवल वॉयस कॉल कर सकते हैं।

इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों को अन्य जिलों से हरियाणा में प्रवेश करने से रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। पुलिस की अतिरिक्त 50 कंपनियां तैनात की गई हैं। जिसके चलते यात्रियों को चंडीगढ़ और दिल्ली के बीच सफर करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, पुलिस ने वैकल्पिक सड़कों का भी जिक्र किया है. पुलिस ने हरियाणा में लोगों को सलाह दी है कि जब तक जरूरी न हो पंजाब और दिल्ली की यात्रा न करें। गौरतलब है कि 2020 में किसानों के विरोध प्रदर्शन से पूरा देश उथल-पुथल रहा. उत्तर भारत के राज्यों में लगातार हलचल जारी है. उस आंदोलन के कारण अंततः नरेंद्र मोदी सरकार पीछे हट गयी। ‘विवादित’ कृषि बिल वापस लिया गया.

40 साल की पारिवारिक दुश्मनी, बदला चुकाने के लिए युवक को यमुना के पानी में डुबाकर मारने के आरोप में गिरफ्तार पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को आरिफ शरीफ को उसके घर से लेकर यमुना किनारे गया था . दोनों यमुना किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। दोनों परिवारों के बीच चालीस साल तक दुश्मनी चलती रही. चार दशक तक चली इस दुश्मनी के चलते एक शख्स ने युवक को यमुना के पानी में डुबा दिया. हरियाणा की एक अदालत ने शुक्रवार को आरोपी आरिफ को जेल की सजा सुनाई. घटना हरियाणा के करनाल के मुंडी गढ़ी गांव की है. मृतक का नाम शरीफ है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को आरिफ शरीफ को उसके घर से लेकर यमुना किनारे गया था. दोनों यमुना किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक शरीफ ने अत्यधिक नशीली दवाएं ली थीं. ऐसे में आरिफ ने शरीफ को यमुना के पानी में डुबाकर मार डाला। पुलिस के मुताबिक, उस वक्त शरीफ के पास 40 हजार कैश था, जो यमुना के पानी में बह गया. आरिफ ने शरीफ की हत्या कर दी और मौके से भाग गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को आरिफ शरीफ को उसके घर से लेकर यमुना किनारे गया था. दोनों यमुना किनारे बैठकर नशा कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक शरीफ ने अत्यधिक नशीली दवाएं ली थीं. ऐसे में आरिफ ने शरीफ को यमुना के पानी में डुबाकर मार डाला। पुलिस के मुताबिक, उस वक्त शरीफ के पास 40 हजार कैश था, जो यमुना के पानी में बह गया. आरिफ ने शरीफ की हत्या कर दी और मौके से भाग गया।

पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी गठबंधन पर आप की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने रविवार को हरियाणा में आम आदमी पार्टी की एक रैली को संबोधित किया. वहां उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी गठबंधन बनाकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. हालांकि, केजरीवाल ने कांग्रेस का नाम नहीं लिया, हालांकि विपक्षी गठबंधन ने भारत का नाम लिया। उस बैठक से केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव बिना गठबंधन किए अकेले लड़ेगी. लोकसभा चुनाव के बाद इस साल के अंत तक हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है. रविवार को केजरीवाल ने कहा, ”लोकसभा चुनाव आ रहे हैं। आप जानते हैं कि हमने देश के आम चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ बनाया है. इसलिए, हम गठबंधन सहयोगियों के साथ समझदारी से चुनाव लड़ेंगे।” इसके बाद उन्होंने कहा, ”विधानसभा चुनाव में हम हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर अकेले लड़ेंगे.” उन्होंने उम्मीद जताई कि आप हरियाणा में सरकार बनाएगी, जहां फिलहाल भाजपा का शासन है।

विकसित भारत के सपने पर क्या बोली विपक्ष?

विकसित भारत के सपने पर विपक्ष ने एक बड़ा बयान दे दिया है! संसद के बजट सत्र के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर खूब निशाना साधा। विपक्ष ने कहा कि सरकार पर हर मोर्चे पर विफल हुई है। केंद्र की मोदी सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा से लेकर विभिन्न समस्याओं को हल करने के बजाय वह अपनी पीठ खुद ही थपथपा रही है। यही नहीं विपक्ष ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास करने का उसका दावा सच से परे है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि मोदी सरकार तोहफे बांटने में विश्वास नहीं करती बल्कि देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। भाजपा की कविता पाटीदार ने उच्च सदन में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने देश की महिलाओं की किस्मत को संवारने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दस करोड़ से अधिक माताओं को उस धुएं से मुक्ति मिली जो उन्हें दमा जैसी बीमारी के कगार पर पहुंचा देता है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने यह भी दावा किया सामाजिक न्याय विभाग से इन बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति भी कई लाभार्थियों को नहीं मिल पा रही है। उन्होंने किसी का नाम लिये बिना कहा कि एक व्यक्ति जो पार्टी बदल चुका है और अब एक मुख्यमंत्री है उसने एक विवादास्पद बयान दिया है। इसके बाद जब खरगे ने वह बयान पढ़ा तो सभापति धनखड़ ने इस बयान को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया। खरगे ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोग पढ़े लिखे हैं किंतु उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में बेरोजगारी के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है।

उन्होंने कहा कि पिछड़े इलाकों में बहुत कुछ किया जाना है। उन्होंने कहा कि आज पब्लिक सेक्टर लगातार बंद हो रहे हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। निजी क्षेत्र पर ध्यान देने के बजाय पब्लिक सेक्टर पर ध्यान दिया जाना चाहिए और इसे खत्म करने की जगह इसकी खामियों को दूर किया जाना चाहिए। सेना में भर्ती की अल्पकालिक ‘अग्निपथ’ योजना का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा,‘अग्निवीर चार साल के बाद कहां जाएंगे ? पहले कहा गया कि 100 लोगों में से केवल 25 को हटाया जाएगा, शेष 75 को रखा जाएगा। लेकिन आज हालत इसके बिल्कुल उलट है।’

कांग्रेस अध्यक्ष ने महंगाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘टमाटर, प्याज, तेल, अनाज, दाल… ऐसी कौन सी चीज है जिसके दाम दोगुने नहीं हुए।’ उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से आम आदमी चौतरफा परेशानियों का सामना कर रहा है। खरगे ने किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी आमदनी दोगुना करने का और न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का भी वादा किया था लेकिन यह वादा ही रहा और किसानों की आमदनी में सालाना 1.5 फीसदी की गिरावट आई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में कृषि के बजट में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि लौटाई गई है। उन्होंने कहा कि वह सामाजिक न्याय के लिए जातीय जनगणना चाहते हैं क्योंकि इससे वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और फिर जरूरी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। जो लोग सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं, वे जरूर इसे मानेंगे।

भाजपा सदस्य ने ध्यान दिलाया कि अमृत काल की शुरुआत में बने नये संसद भवन में अपने जीवन को कर्म से गढ़ने वाली नारी शक्ति की परिचायिका राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अयोध्या में राम मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा के मनोभाव को ध्यान में रखते हुए सरकार के देश को विकसित बनाने के संकल्प को दोहराया जो रामराज्य की स्थापना की ओर एक कदम होगा। पाटीदार जब अपनी बात रख रही थीं, उसी दौरान कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करने के बाद उस पर संशोधन पेश किए जाते हैं। किंतु सभापति जगदीप धनखड़ ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया। सभापति ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश हो जाने के बाद इन पर विभिन्न सदस्यों के संशोधन रखवाये।

भाजपा सदस्य पाटीदार ने सेना, कोविड संकट के समय टीका निर्माण तथा चंद्रयान अभियान सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नारी के अधिकारों में वृद्धि कर उनके सम्मान को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि युवा, महिला, किसान एवं गरीब ऐसे चार वर्ग हैं जो सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि आज गांवों में चार लाख किलोमीटर सड़कें बिछाने का काम हो या नये हवाई अड्डों का निर्माण या रेलवे पटरियों एवं बंदरगाह का निर्माण, सरकार हर क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात को बताने में खुशी होती है कि न केवल प्रधानमंत्री बल्कि उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग से हैं और इसकी योजनाएं ओबीसी हितैषी हैं।

क्या आपराधिक मानहानि क्रिमिनल लॉ में होगा विग्रह?

आपराधिक मानहानि का क्रिमिनल लॉ से विग्रह हो सकता है! लॉ कमिशन ने अपनी सिफारिश में कहा है कि आपराधिक मानहानि का मामला क्रिमिनल लॉ में बने रहना चाहिए। इससे फर्जी और झूठे आरोपों और बयान देने वालों में डर बना रहेगा। साथ ही लॉ कमिशन ने अपनी एक अन्य सिफारिश में कहा है कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को तभी जमानत मिले जब वह नुकसान की भरपाई के लिए उतनी रकम जमा कर दें। लॉ कमिशन ने 284 वीं और 285 वीं रिपोर्ट में ये सिफारिशें की हैं। लॉ कमिशन ने अपनी 284 वीं रिपोर्ट में कहा है कि सा्र्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में आरोपी को तभी जमानत मिलनी चाहिए जब वह नुकसान के बराबर की राशि जम कर दे। जस्टिस रितु राज अवस्थी की अगुवाई वाले लॉ कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाए जाने से सरकार के राजस्व का नुकसान होता है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने से सरकारी राजस्व को नुकसान और लोगों को इस कारण परेशानी होती है। इस मामले में लॉ कमिशन ने तमाम जजमेंट और मसले की गंभीरता को देखते हुए लॉ कमिशन ने प्रीवेंशन ऑफ डैमेज ऑफ पब्लिक प्रोपर्ट एक्ट 1984 में बदलाव की सिफारिश की है।

इसके लिए कहा गया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में जमानत के प्रावधान कड़े किए जा सकते हैं। इसके लिए प्रावधान किया जा सकता है कि नुकसान जितने का हुआ है उसके बराबर की राशि जमा करने पर ही जमानत हो। ऐसा माना जा रहा है कि ऐसे कड़े प्रावधान करने से लोग ऐसे अपराध करने से बचेंगे। लॉ कमिशन ने अपनी 285 वीं रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की है कि क्रिमिनल मानहानि का मामला क्रिमिनल लॉ में बने रहना चाहिए। लॉ कमिशन ने रिपोर्ट में कहा है कि विचार और अभिव्यक्ति का जो अधिकार है वह लोगों को संविधान के तहत मिला हुआ है वहीं दूसरी तरफ लोगों को गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिला हुआ है और अनुच्छेद-21 के तहत यह अधिकार लोगों को मिला हुआ है। समाज में शांति और सौहार्द बना रहे इसके लिए प्रावधान किए गए हैं। कोई भी अधिकार पूर्ण नहीं है। लोगों की गरिमा और मान प्रतिष्ठा को प्रोटेक्ट करने के लिए आराधिक मानहानि का अपराध कानून के किताब में है। यह जरूरी है कि लोगों की गरिमा और प्रतिष्ठा को प्रोटेक्ट किया जाए और कोई किसी और की प्रतिष्ठा का हनन न करे। इसे अपराध के तौर पर इसलिए रखा गया है ताकि फर्जी और झूठे बयान से किसी की प्रतिष्ठा का हनन न किया जा सके।

आईपीसी और नए भारतीय न्याय संहिता में अपराधिक मानहानि अपराध के तौर पर रखा गया है। यह ध्यान रहे कि नए भारतीय न्याय संहिता में आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी करार शख्स को सोशल सर्विस करने जैसी सजा देने का भी प्रावधान किया गया है। पहले जुर्माना, जेल की सजा का प्रावधान था और अब सोशल सर्विस जैसी सजा भी जोड़ी गई है। यही नहीं आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की याचिका पर सुनवाई 29 जनवरी तक स्थगित कर दी। इसमें उन्होंने अपनी कथित टिप्पणी ‘केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं’, को लेकर अहमदाबाद की एक मजिस्ट्रेट अदालत में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मानहानि की शिकायत को गुजरात के बाहर किसी अन्य स्थान पर, संभव हो तो दिल्ली, स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने प्रतिवादी के वकील द्वारा समय दिए जाने का अनुरोध करने के बाद मामले पर सुनवाई स्थगित की।

पीठ ने कहा, ‘जब उन्होंने तेजस्वी ने बयान वापस ले लिया है तो अभियोजन को मुकदमा जारी क्यों रखना चाहिए? आप निर्देश लें वरना हम अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करेंगे।’ शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘प्रतिवादी के वकील ने 19 जनवरी को याचिकाककर्ता तेजस्वी यादव के दर्ज कराए बयान पर निर्देश लेने के लिए वक्त मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय करें।’ उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय जनता दल राजद के नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले आपराधिक मानहानि की शिकायत में सुनवाई पर रोक लगा दी थी और याचिका दायर करने वाले गुजरात निवासी को नोटिस जारी किया था। कथित आपराधिक मानहानि के लिए यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। गुजरात की एक अदालत ने अगस्त में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत यादव के खिलाफ प्रारंभिक जांच की थी और एक स्थानीय व्यवसायी और कार्यकर्ता हरेश मेहता द्वारा दायर शिकायत पर उन्हें तलब करने के लिए पर्याप्त आधार पाया था। शिकायत के अनुसार, यादव ने मार्च 2023 में पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा था, ‘वर्तमान स्थिति में केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं, और उनकी धोखाधड़ी को माफ कर दिया जाएगा।’ बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कथित तौर पर पूछा था, ‘अगर वे एलआईसी या बैंकों का पैसा लेकर भाग गए तो कौन जिम्मेदार होगा?’ मेहता ने दावा किया था कि यादव की टिप्पणी ने सभी गुजरातियों की मानहानि की।

आखिर राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को ध्यान से क्यों सुन रहे थे पीएम मोदी?

हाल ही में राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को पीएम मोदी बड़े ध्यान से सुन रहे थे! राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का स्वागत किया, साथ ही इसकी कमियों को भी बताया। खरगे ने अपनी बात जब शुरू की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामने मौजूद थे। जेपी नड्डा, पीयूष गोयल भी प्रधानमंत्री के साथ सदन में मौजूद थे। इस दौरान खरगे ने अपनी बात हिमांशु वाजपेयी की एक कविता से शुरू की। उन्होंने कहा, ‘न खाता न बही है, जो तुम बोले वही सही है। न्यूज एक छप रही है सब कुछ बिल्कुल सही है। सच पर FIR क्यों, राशन की मार क्यों, झूठ की जय जयकार क्यों, निष्ठुर है सरकार क्यों। मगर मेरे शहर के लोग देश के लोग ये सवाल मुझसे पूछ रहे हैं।’ खरगे ने अभिभाषण पर बोलते हुए कहा कि मैं यही पूछना चाहता हूं कि एक तरफ तो आप अपनी बातों को बहुत सी एडजेक्टिव्स लगाकर बोले। सही है कि हर सरकार अपनी बात को राष्ट्रपति के माध्यम से कहलाती है। लेकिन इस राष्ट्र के जो निर्माता हैं उनको कभी भी हमें नहीं भूलना चाहिए। समृद्धि की इस राह पर जाने के लिए सबको मिल के काम करना है। देश के लोगों को ऊपर लाने के लिए शिक्षा जरूरी है। उनका शिक्षित होना जरूरी है। जब तक वो शिक्षित नहीं होंगे तब तक उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा। आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शिक्षा पर खास प्राथमिकता दी। लोगों को शिक्षित करने के लिए योजनाएं तैयार की। स्कूल, कॉलेज, आईआईटी खोले। ये इंस्टीट्यूशन देश के लिए विजन बने।

खरगे ने आगे कहा कि टेक्निकल एजुकेशंस हों, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज हों, इसका लाभ सबको मिलना चाहिए। संविधान में एससी-एसटी और ओबीसी के लिए भी रिजर्वेशन बनाया है। लेकिन इसमें आज ओबीसी के लिए 27 पर्सेंट रिजर्वेशन है, वो उनको मिलना चाहिए जो नहीं मिल रहा। कोई कारण लगा के वो घट जाते हैं। एससी-एसटी के साथ भी ऐसा है। उनको घटाने की कोशिश हो रही। कैसे इसमें कटौती की जाए ये किया जा रहा। कोई सरकार इसके लिए जांच नहीं करती, ये हमारे देश के लिए बड़ा नुकसान है। इन चीजों को मैं आपके सामने लाना चाहता हूं। ये समाज की मानसिकता है।

इस दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के एक मुख्यमंत्री के बयान का जिक्र राज्यसभा में किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के एक चीफ मिनिस्टर जो पहले कांग्रेस में थे अब वो बीजेपी के साथ हैं। उनका ये कमेंट एससी-एसटी से जुड़ा था, इस एक कमेंट का जिक्र उन्होंने सदन में उठाया जिस पर काफी विवाद हुआ है। खरगे ने फिर इस पर कहा कि हम इस मुद्दे को उठा रहे और प्रधानमंत्री से इस मामले में अपील करेंगे कि कार्रवाई करें। हालांकि सदन के सभापति जगदीप धनखड़ ने खरगे की इन बातों को कार्रवाई से अलग कर दिया।

खरगे ने प्राइवेट सेक्टर को जोर देने की सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने पब्लिक सेक्टर को और आगे बढ़ाने की अपील की। इसे खत्म नहीं करना चाहिए। पब्लिक सेक्टर्स गरीबों और देश के लिए अच्छा है। अग्निपथ योजना पर भी खरगे ने अपनी बात रखी। लोग ये समझे कि जैसा कि स्टाइपेंड के बाद लोग परमानेंट हो जाएंगे। लगा वो 4 साल बाद मिलिट्री में जाएंगे, लेकिन आज स्थिति क्या है आप 75 लोगों को बाहर कर रहे। 25 लोग ही लिए जा रहे। पूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ मनोज नरवणे का जिक्र करते हुए खरगे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नरवणे ने बताया कि अग्निपथ योजना सिर्फ आर्मी में आना था लेकिन सरकार इसे एयरफोर्स, नेवी के लिए भी ले आई। परेशान हैं अग्निवीर से जुड़े लोग। इस दौरान खरगे ने फिर कहा कि ‘अच्छे दिनों की आस लगाते हुए हबीब हम बेहतरीन दिन भी गंवाते चले गए।’ अग्निपथ में जवानों को चार साल बाद जाना पड़ रहा। महंगाई का मुद्दा भी मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाया। इस दौरान खरगे ने बिल्किस बानो का मुद्दा भी उठाया।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस सांसद डीके सुरेश के ‘अलग देश की मांग करने के लिए मजबूर’ बयान पर भी रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘अगर कोई देश को तोड़ने की बात करेगा, तो हम इसे कभी सहन नहीं करेंगे। चाहे वह किसी भी पार्टी का हो। मैं खुद कहूंगा कि कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक हम एक हैं और एक रहेंगे।’

क्या था कांग्रेस सांसद डीके सुरेश का बयान जिसकी वज़ह से भिड़े नेता?

आज हम आपको बताएंगे कि कांग्रेस सांसद डीके सुरेश का वह कौन सा बयान था जिसकी वजह से राज्यसभा में नेता भिड़ गए! कांग्रेस सांसद डीके सुरेश की ओर से कथित तौर पर दक्षिणी राज्यों के लिए ‘अलग राष्ट्र’ की मांग का मुद्दा उठाया, जिस पर हंगामा बढ़ने लगा है। राज्यसभा में शुक्रवार को ये मुद्दा उठाया गया। सत्तापक्ष ने इस बयान को देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर हमला करार दिया। इस मामले पर कांग्रेस से स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर दी। कांग्रेस ने साफ किया कि पार्टी देश की अखंडता के प्रति समर्पित है और इस तरह के किसी भी कमेंट को बर्दाश्त नहीं करेगी। राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने शून्यकाल आरंभ होते ही इस मुद्दे को उठाया। जिस पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अगर कोई भी देश को तोड़ने की बात करेगा तो कांग्रेस पार्टी उसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और उसके बाद गोयल को बोलने का मौका दिया।

पीयूष गोयल ने कहा कि प्रमुख विपक्षी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और कांग्रेस शासित राज्य के एक उपमुख्यमंत्री के भाई ने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक कमेंट किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का वक्तव्य देने वाला कांग्रेस का सांसद भी है। इसका जवाब देते हुए खरगे ने कहा कि जिस सांसद के वक्तव्य की बात की जा रही है वह दूसरे सदन लोकसभा के सदस्य हैं, लिहाजा इसकी चर्चा उच्च सदन में नहीं की जा सकती। सभापति धनखड़ ने खरगे की इस बात को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस प्रकार की व्यवस्था दी है कि सदन में ऐसे मामलों पर चर्चा की जा सकती है।कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने गुरुवार को कथित तौर पर कहा कि अगर विभिन्न टैक्स से एकत्रित धनराशि के वितरण के मामले में दक्षिणी राज्यों के साथ हो रहे ‘अन्याय’ को दूर नहीं किया गया तो ये सूबे एक अलग राष्ट्र की मांग करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

गोयल ने कहा कि यह कांग्रेस की विभाजनकारी सोच को दर्शाता है। कांग्रेस पर समय-समय पर देश को बांटने का आरोप लगाते हुए गोयल ने कहा कि ताजा प्रकरण इसका यह एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब हम सदन के सदस्य बनते हैं तब देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने की शपथ लेते हैं और संविधान के अनुपालन की शपथ लेते हैं। यह देश के संविधान का अपमान है। देश की एकता और अखंडता पर यह हमला है।’सदन के नेता ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस विभाजनकारी सोच को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। इसका जवाब देते हुए खरगे ने कहा कि जिस सांसद के वक्तव्य की बात की जा रही है वह दूसरे सदन लोकसभा के सदस्य हैं, लिहाजा इसकी चर्चा उच्च सदन में नहीं की जा सकती। सभापति धनखड़ ने खरगे की इस बात को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस प्रकार की व्यवस्था दी है कि सदन में ऐसे मामलों पर चर्चा की जा सकती है।

 इस पर खरगे ने कहा कि अगर सदस्य ने ऐसा कुछ कहा है तो उसका वीडियो लाकर उसे निचले सदन में सत्तापक्ष की ओर से ‘एक्सपोज’ किया जा सकता है। सभापति ने इस पर टोकते हुए कहा कि सभी ने संविधान के अंतर्गत शपथ ली है और सांसद ने जो बयान दिया है, वह उनके हिसाब से बहुत गंभीर, अप्रत्याशित और संविधान की भावना के खिलाफ है। सदन चाहे तो इस मामले को विशेषाधिकार हनन समिति को भेजे और उस पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई देश को तोड़ने की बात करेगा तो हम कभी सहन नहीं करेंगे। एक उपमुख्यमंत्री के भाई ने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक कमेंट किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का वक्तव्य देने वाला कांग्रेस का सांसद भी है। कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने गुरुवार को कथित तौर पर कहा कि अगर विभिन्न टैक्स से एकत्रित धनराशि के वितरण के मामले में दक्षिणी राज्यों के साथ हो रहे ‘अन्याय’ को दूर नहीं किया गया तो ये सूबे एक अलग राष्ट्र की मांग करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।चाहे वह मेरी पार्टी का हो या किसी और पार्टी का हो। इस देश की एकता के लिए… कोई कहे या नहीं कहे… मैं मल्लिकार्जुन खरगे कहूंगा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत एक है और एक रहेगा।’ डीके सुरेश, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई हैं।

क्या अब भारत के खेमे में आएंगे एडवांस्ड ड्रोन?

आने वाले समय में भारत के खेमे में एडवांस्ड ड्रोन शामिल होने वाले हैं! अमेरिका से भारत को 31 MQ-9B ड्रोन मिलने को लेकर जो कंफ्यूजन दिख रहा था वह दूर हो गया है। अमेरिकी सरकार ने भारत को ड्रोन बेचने को मंजूरी दे दी है। अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने इससे जुड़ा सर्टिफिकेट जारी कर इसे अमेरिकी कांग्रेस को नोटिफाई भी कर दिया है। यह डील करीब 3.99 बिलियन डॉलर की होगी। MQ-9B हाई एल्टीट्यूट लॉग एंड्योरेंस आर्म्ड अनमैन्ड एरियल वीइकल है। यानी यह लंबे वक्त तक हवा में रह सकता है और बेहद ऊंचाई में काम कर सकता है और यह रिमोटली ऑपरेट होता है। अमेरिकी कांग्रेस अब इस प्रस्तावित बिक्री का रिव्यू करेगी और इसके लिए उसके पास 30 दिन का वक्त है। अमेरिकी कांग्रेस के रिव्यू के बाद अमेरिका और भारत के बीच यह डील की जाएगी। जब कॉन्ट्रैक्ट हो जाएगा उसके तीन साल बाद यूएवी की डिलीवरी शुरू होगी। भारत को मिलने वाले 31 ड्रोन आर्म्ड होंगे और डील में ड्रोन के अलावा 170 एजीएम-114R हेलिफायर मिसाइल, 16 M36E9 हेलिफायर कैपटिव एयर ट्रेनिंग मिसाइल, 310 GBU-39B लेजर स्मॉल डायामीटर बॉम्ब, 8 GBU-39B गाइडेड टेस्ट वीइकल और लाइव फ्यूज भी शामिल होंगे। पिछले साल जून में रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से 31 MQ-9B यूएवी लेने को मंजूरी दी थी। अमेरिकी कंपनी जनरल अटॉमिक्स से 31 यूएवी लिए जाने हैं।जिससे भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इंडियन नेवी ने 2020 में जनरल अटोमिक्स से दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए थे, जो अभी भी नेवी के पास हैं। इसकी अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव चरम पर था तब प्रीडेटर ड्रोन को निगरानी के लिए वहां भेजा गया था। इनमें से 15 सी-गार्डियन हैं जो इंडियन नेवी को मिलेंगे और 16 स्काई गार्डियन हैं।इंडियन ओशन रीजन यानी हिंद महासागर रीजन की जिम्मेदारी नेवी के पास है। भारत की साइज से करीब तीन गुना बढ़े हिंद महासागर रीजन पर निगरानी रखना एक चुनौती भरा टास्क है। क्योंकि ईस्ट कोस्ट से करीब 5000 किलोमीटर आगे तक तो वेस्ट कोस्ट से करीब 8000 किलोमीटर आगे तक की पूरी निगरानी करनी होती है। लगातार निगरानी नहीं रखी जाएगी तो पता नहीं चलेगा कि दुश्मन के शिप की क्या मूवमेंट है। अमेरिका से 31 MQ-9B यूएवी लेने को मंजूरी दी थी। इन 16 में से 8 इंडियन आर्मी को मिलेंगे और 8 इंडियन एयरफोर्स को।जनरल अटोमिक्स से दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए थे, जो अभी भी नेवी के पास हैं। इसकी अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव चरम पर था तब प्रीडेटर ड्रोन को निगरानी के लिए वहां भेजा गया था। G20 लीडरशिप समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी प्रेजिडेंट जो बाइडन के बीच हुई बातचीत में भी इस डील को लेकर चर्चा हुई थी।

ड्रोन भारत में ही असेंबल किए जाएंगे। ड्रोन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी जनरल अटोमिक्स भारत में ग्लोबल मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरऑल फैसिलिटी भी बनाएगी। जिससे भारत की स्वदेशी इंडस्ट्री को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इंडियन नेवी ने 2020 में जनरल अटोमिक्स से दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए थे, जो अभी भी नेवी के पास हैं। इसकी अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव चरम पर था तब प्रीडेटर ड्रोन को निगरानी के लिए वहां भेजा गया था।

इंडियन ओशन रीजन यानी हिंद महासागर रीजन की जिम्मेदारी नेवी के पास है। भारत की साइज से करीब तीन गुना बढ़े हिंद महासागर रीजन पर निगरानी रखना एक चुनौती भरा टास्क है। क्योंकि ईस्ट कोस्ट से करीब 5000 किलोमीटर आगे तक तो वेस्ट कोस्ट से करीब 8000 किलोमीटर आगे तक की पूरी निगरानी करनी होती है। लगातार निगरानी नहीं रखी जाएगी तो पता नहीं चलेगा कि दुश्मन के शिप की क्या मूवमेंट है। अमेरिका से 31 MQ-9B यूएवी लेने को मंजूरी दी थी। अमेरिकी कंपनी जनरल अटॉमिक्स से 31 यूएवी लिए जाने हैं। इनमें से 15 सी-गार्डियन हैं जो इंडियन नेवी को मिलेंगे और 16 स्काई गार्डियन हैं। इन 16 में से 8 इंडियन आर्मी को मिलेंगे और 8 इंडियन एयरफोर्स को। G20 लीडरशिप समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी प्रेजिडेंट जो बाइडन के बीच हुई बातचीत में भी इस डील को लेकर चर्चा हुई थी।हिंद महासागर रीजन से ही भारत की ऊर्जा जरूरतों और कमर्शल सामान का ट्रांसपोर्ट होता है। दूसरे देशों की प्राइमरी एनर्जी की जरूरत यहीं से होकर जाती है। हिंद महासागर रीजन की निगरानी में नेवी को मिलने वाले नए 15 प्रीडेटर ड्रोन अहम होंगे।

क्या रिटायर्ड जजों के पक्ष में जाएंगे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया?

वर्तमान में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रिटायर्ड जजों के पक्ष में जा रहे हैं! क्या आप जानते हैं कि राज्यों के कंज्यूमर फोरम के प्रमुखों के पद खाली क्यों हैं। इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने के पीछे बड़ी वजह क्या है। सरकार इन पदों को भर ही नहीं पा रही है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इन पदों पर नियुक्ति को लेकर होने प्रक्रिया पर टिप्पणियां की है। सीजेआई ने साफ तौर पर इन फोरम के प्रमुखों के चयन के लिए होने वाली लिखित परीक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को नसीहत भी दी है। चीफ जस्टिस का मानना है कि राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष के रूप में सेलेक्शन के लिए लिखित परीक्षा, उसके बाद इंटरव्यू देना और परीक्षा और मौखिक परीक्षा दोनों में न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करना संवैधानिक अदालत के जजों की गरिमा को गिराने जैसा है। जस्टिस चंद्रचूड़ इस बात से पूरी तरह सहमत दिखे कि हाई कोर्ट का जज किसी भी मामले में हर मुद्दे और यहां तक कि शीर्ष नौकरशाहों की भी जांच कर सकते हैं लेकिन वे इस पद के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू देना ही नहीं चाहते हैं। सीजेआई का कहना है कि जजों की योग्यता को आंकना है तो इस बात को उसकी तरफ से दिए गए फैसलों से करनी चाहिए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को परीक्षाओं में बैठाना अशोभनीय है। अधिकांश सक्षम रिटायर्ड जज इस परीक्षा के खिलाफ हैं।उनकी क्षमता पर मौजूदा जज के रूप में उनकी तरफ से दिए गए निर्णयों के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि रिटायर्ड जिला जज भी ऐसी सेलेक्शन प्रक्रिया से गुजरने के लिए अनिच्छुक हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सीजेआई से सहमत थे, लेकिन बताया कि सरकार ने सेलेक्शन नियमों में संशोधन करके एससीडीआरसी अध्यक्ष बनने के लिए रिटायर्ड जजों को लिखित परीक्षा-मौखिक चयन प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता को खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी अयोध्या में राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण भेजा गया था। चीफ जस्टिस अयोध्या पर शीर्ष अदालत की फैसला सुनाने वाली बेंच का हिस्सा रहे थे। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम चल रहा है। इधर, चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ अपने काम में लगे हुए हैं। दरअसल, आज अदालत में छुट्टी नहीं है और चीफ जस्टिस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।मेहता ने कहा कि यह संशोधन था मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने योग्यता परीक्षा के प्रावधान को रद्द कर दिया।

100 अंकों के दो पेपर, सामान्य ज्ञान, संवैधानिक कानून और उपभोक्ता कानूनों में रिटायर्ड जजों की क्षमता, व्यापार और वाणिज्य के साथ-साथ उपभोक्ता-संबंधी मुद्दों या सार्वजनिक मामलों पर निबंध लिखने की उनकी क्षमता का परीक्षण करने के लिए थे। इसके साथ ही विश्लेषण और प्रारूपण में उसकी क्षमताओं को निर्धारित करने के लिए एक केस स्टडी लिखनी होती है। दो जजों की पीठ ने यह भी कहा था कि प्रत्येक पेपर में क्वालिफाई करने के लिए 50% अंक होंगे। साथ ही 50 अंकों की ओरल परीक्षा होगी। यही नहीं आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी अयोध्या में राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण भेजा गया था। चीफ जस्टिस अयोध्या पर शीर्ष अदालत की फैसला सुनाने वाली बेंच का हिस्सा रहे थे। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम चल रहा है। इधर, चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ अपने काम में लगे हुए हैं। दरअसल, आज अदालत में छुट्टी नहीं है और चीफ जस्टिस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था। फैसला देने वाली पांच जजों की संविधान पीठ में उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे। इस बात से पूरी तरह सहमत दिखे कि हाई कोर्ट का जज किसी भी मामले में हर मुद्दे और यहां तक कि शीर्ष नौकरशाहों की भी जांच कर सकते हैं लेकिन वे इस पद के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू देना ही नहीं चाहते हैं। सीजेआई का कहना है कि जजों की योग्यता को आंकना है तो इस बात को उसकी तरफ से दिए गए फैसलों से करनी चाहिए।राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से इन सभी जजों को प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण मिला था।

क्या भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान को दिलवा पाएगी सबक?

भारतीय वायु सेना अब चीन और पाकिस्तान को सबक दिलवा सकती है! भारतीय वायु सेना अपना सबसे बड़ा युद्धाभ्यास करने जा रही है। इंडियन एयरफोर्स का अभ्यास वायुशक्ति-2024 17 फरवरी को पोखरण फायरिंग रेंज में आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास में 121 प्रकार के विमान भाग लेंगे। भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता के इस भव्य प्रदर्शन की जाएगी। इस दौरान देश की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। भारतीय वायुसेना इस अभ्यास के जरिये चीन और पाकिस्तान को भी अपनी ताकत का अहसास कराएगी। इस अभ्यास की घोषणा करते हुए, IAF के उप-प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना के तेजस, सुखोई, मिराज, जगुआर जैसे लड़ाकू विमान भाग लेंगे। इसके अलावा राफेल, प्रचंड, ध्रुव और रुद्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे। एक अधिकारी ने कहा कि हमेशा की तरह, वायु शक्ति दिन और रात में भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का एक दिलचस्प प्रदर्शन होगा। यह अभ्यास भारतीय सेना के साथ संयुक्त अभियानों का भी प्रदर्शन करेगा।

सिंह ने कहा कि हर तीन साल में आयोजित होने वाले इस अभ्यास में 77 लड़ाकू विमान, 41 हेलीकॉप्टर, 5 परिवहन विमान, तीन प्रकार की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 12 यूएवी, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें आदि शामिल हैं। सटीक और गैर-सटीक मिसाइलें, हवा से हवा में मार करने वाली गाइडेड मिसाइलें और सतह से हवा में मार करने वाली गाइडेड मिसाइलें भी प्रदर्शित की जाएंगी। इस एक्सरसाइज के लिए फुल ड्रेस रिहर्सल 14 फरवरी को होगी। वायु शक्ति एक्सरसाइज कई हवाई अड्डों से संचालन करते हुए लंबी दूरी, सटीक क्षमता के साथ-साथ पारंपरिक हथियारों को सटीक, समय पर और विनाशकारी प्रभाव से वितरित करने की भारतीय वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन होगा। भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर बेड़े की तरफ से विशेष अभियान, जिसमें गरुड़ और भारतीय सेना के तत्व भी शामिल होंगे, अपनी काबिलियत दिखाएंगे।

इस युद्धाभ्यास के जरिये चीन और पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों पर युद्ध के लिए भारतीय वायुसेना की तत्परता की तैयारी भी दिखेगी। आईएएफ के उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने एक्सरसाइज पर ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अभ्यास के दौरान दो घंटे की अवधि में, वायुसेना एक से दो किलोमीटर के दायरे में 40 से 50 टन विस्फोटक गिराएंगे।एयरफोर्स बड़े हमलों से लेकर हवाई प्रभुत्व के छोटे और गहन युद्ध की तैयारी में हर युद्धा कौशल का प्रदर्शन करेगी। भारत के इस युद्धाभ्यास पर चीन के साथ ही पाकिस्तान की भी नजर होगी। वायु शक्ति का अंतिम आयोजन फरवरी 2019 में पोखरण में हुआ था। उस समय लड़ाकू विमानों ने विभिन्न प्रकार की मिसाइलों, सटीक-निर्देशित युद्ध सामग्री, बम और रॉकेटों के साथ गोला-बारूद के ढेर, पुलों और कमांड पोस्टों सहित नकली दुश्मन साइटों को निशाना बनाया और नष्ट कर दिया।भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर बेड़े की तरफ से विशेष अभियान, जिसमें गरुड़ और भारतीय सेना के तत्व भी शामिल होंगे, अपनी काबिलियत दिखाएंगे। इसमें भारतीय वायुसेना की जबरदस्त मारक क्षमता के साथ ही तेजी और सटीकता का प्रदर्शन हुआ।

बता दे कि हाइपरसोनिक मिसाइलों में हाई पावर्ड एयर ब्रीथिंग इंजन काम करता है। इसकी हाइपरसोनिक गति से युद्धाभ्यास वाले हथियारों को लॉन्च करने की क्षमता किसी भी सेना की ताकत को बढ़ा देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह वर्तमान में उपयोग में आने वाली किसी भी वायु रक्षा प्रणाली से बच सकती है। हाइपरसोनिक मिसाइलें रूस और चीन के जखीरे में अपनी ताकत दिखाने के नए घातक हथियार हैं। इसके अलावा राफेल, प्रचंड, ध्रुव और रुद्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी शामिल होंगे। एक अधिकारी ने कहा कि हमेशा की तरह, वायु शक्ति दिन और रात में भारतीय वायुसेना की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का एक दिलचस्प प्रदर्शन होगा। भारत के इस युद्धाभ्यास पर चीन के साथ ही पाकिस्तान की भी नजर होगी। वायु शक्ति का अंतिम आयोजन फरवरी 2019 में पोखरण में हुआ था। उस समय लड़ाकू विमानों ने विभिन्न प्रकार की मिसाइलों, सटीक-निर्देशित युद्ध सामग्री, बम और रॉकेटों के साथ गोला-बारूद के ढेर, पुलों और कमांड पोस्टों सहित नकली दुश्मन साइटों को निशाना बनाया और नष्ट कर दिया। इसमें भारतीय वायुसेना की जबरदस्त मारक क्षमता के साथ ही तेजी और सटीकता का प्रदर्शन हुआ।यह अभ्यास भारतीय सेना के साथ संयुक्त अभियानों का भी प्रदर्शन करेगा।हालांकि यूक्रेन-रूस युद्ध ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें अजेय हैं। चीन और रूस दावा करते रहे हैं लेकिन अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान का मानना है कि हाइपरसोनिक मिसाइलें कोई हथियार नहीं हो सकते हैं।

क्या अब टूट जाएगी विपक्षी एकता?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब विपक्षी एकता टूट जाएगी या नहीं! देश में लोकसभा चुनाव में अधिक समय नहीं रहा गया है। केंद्र सरकार की तरफ से अंतरिम बजट आ चुका है। अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम भी खत्म हो चुका है। अब इंतजार है लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा का। दूसरी तरफ सत्ता की हैटट्रिक लगाने की तैयारी में लगी बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन के सामने मुकाबला कितना कड़ा है? विपक्षी दलों की तरफ से मोदी को कितनी मजबूत टक्कर मिलेगी। चुनाव से पहले इंडिया में मची उथल-पुथल के बाद यह सवाल मौजू है। विपक्षी दलों की तरफ से केंद्र के अंतरिम बजट पर पहली बार एक सुर में होने के बावजूद विपक्ष पूरी तरह बिखरा नजर आ रहा है। 28 दलों वाले इंडिया गठबंधन में चुनाव से पहले साथियों के छिटकने का सिलसिला शुरू हो चुका है। पिछले साल दिसंबर से ही कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों में सीटों के बंटवारें पर सहमति को लेकर बातचीत चल रही है। करीब 50 दिन बीतने के बाद भी अभी तक ठोस रूप से कुछ भी जनता के सामने नहीं आया है। वहीं, इंडिया गठबंधन के संयोजक की रेस में शामिल रहे प्रमुख चेहरे और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पाला बदल चुके हैं। इससे एनडीए को कितनी मजबूती मिलेगी इस सवाल से कही अधिक अहम है कि इंडिया गठबंधन को कितनी बड़ी चोट पहुंची हैं। कांग्रेस भले ही इसके असर को कमतर करके आंक रही हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मोदी के खिलाफ लड़ाई में बड़ा झटका मान रहे हैं।

इंडिया गठबंधन में कांग्रेस सबसे बड़ा दल है। ऐसे में गठबंधन का हिस्सेदार 28 दलों के बीच उसकी जिम्मेदारी काफी अहम है। कांग्रेस के सामने दिल्ली, पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल में दुविधा की स्थिति है। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की क्षेत्रीय इकाइयां गठबंधन पर मानसिक रूप से तैयार ही नहीं हो पा रही हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की तरफ से सभी सीटों पर चुनाव लड़ने तक की बात भी कह दी गई। वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भी एकला लड़ो की बात कह चुकी हैं। अभी ये दो दलों की तरफ से असहमति के सुर निकल ही रहे थे कि इंडिया गठबंधन के लिए महाराष्ट्र से भी अच्छी खबर नहीं आ रही है। महाराष्ट्र में महा विकास अघाडी में शामिल प्रकाश अंबेडकर ने साफ कह दिया है कि इंडिया गठबंधन लगभग खत्म हो चुका है। प्रकाश का कहना है कि राज्य में सीटों के बंटवारे पर शिवसेना और एनसीपी से बातचीत हो रही है। कांग्रेस से कोई बातचीत ही नहीं है।

बीजेपी की स्थिति इस समय समुद्र में एक बड़े जहाज के रूप में दिख रही है। मोदी सरकार किसान सम्मान निधि, मुफ्त अनाज योजना, पीएम आवास योजना, मुद्रा लोन जैसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं के साथ मजबूती से ताल ठोक रही है। वहीं, बिहार जैसे बड़े राज्य में इंडिया गठबंधन पूरी तरह से बिखरा नजर आ रहा है। नीतीश कुमार खुद इस बात को कह चुके हैं कि इंडिया गठबंधन बिल्कुल स्लो चल रहा है। कांग्रेस भले ही यह कह रही हो कि इंडिया गठबंधन को मकसद मोदी को सत्ता से हटाना है लेकिन जमीनी स्तर पर यह दूर की कौड़ी नजर आ रही है। विपक्ष महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सरकार को अभी तक घेरने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। इंडिया गठबंधन की तरफ से अभी तक संयुक्त रैली या प्रचार अभियान को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। करीब 50 दिन बीतने के बाद भी अभी तक ठोस रूप से कुछ भी जनता के सामने नहीं आया है। वहीं, इंडिया गठबंधन के संयोजक की रेस में शामिल रहे प्रमुख चेहरे और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पाला बदल चुके हैं। इससे एनडीए को कितनी मजबूती मिलेगी इस सवाल से कही अधिक अहम है कि इंडिया गठबंधन को कितनी बड़ी चोट पहुंची हैं। कांग्रेस भले ही इसके असर को कमतर करके आंक रही हो लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मोदी के खिलाफ लड़ाई में बड़ा झटका मान रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जहां तक आम चुनाव में लोगों के बीच प्रमुख मुद्दे और परेसप्शन की लड़ाई है इसमें कांग्रेस नीत इंडिया गठबंधन पूरी तरह से पिछड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में इंडिया गठबंधन मोदी से मुकाबला कैसे कर पाएगा ये तो आने वाला समय ही तय करेगा।

क्या राजस्थान से भी राज्यसभा में जा सकती है सोनिया गांधी?

सोनिया गांधी अब राजस्थान से भी राज्यसभा में एंट्री ले सकती हैं! सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी का नाम इस लिस्ट में सबसे आगे चल रहा है। पार्टी राजनीतिक समीकरण के आधार पर तय करने में जुटी है कि सोनिया गांधी को हिमाचल प्रदेश से उम्मीदवार बनाया जाए या फिर राजस्थान से। यूपी की रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी को उतारने की तैयारी चल रही है! राजस्थान में तीन सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा और कांग्रेस जुटे हुए हैं। एक तरफ जहां भाजपा की तरफ से हाईकमान फैसला करेगा। वहीं इस बार कांग्रेस की तरफ से भी एक नाम सबको चौंका सकता है। ऐसी चर्चा है कि पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी की उम्मीदवार बन सकती हैं या उनके अलावा कोई दिग्गज नेता राजस्थान से उच्च सदन में जाएगा। दरअसल, राजस्थान से बतौर राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने फिर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाए जाने की इच्छा कांग्रेस नेतृत्व के सामने जता दी है। खाली हो रही एक सीट पर पार्टी किसी दिग्गज नेता को उच्च सदन भेजने पर विचार कर रही है।  

सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी का नाम इस लिस्ट में सबसे आगे चल रहा है। पार्टी राजनीतिक समीकरण के आधार पर तय करने में जुटी है कि सोनिया गांधी को हिमाचल प्रदेश से उम्मीदवार बनाया जाए या फिर राजस्थान से। यूपी की रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी को उतारने की तैयारी चल रही है। पार्टी की सोनिया गांधी के स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने के बजाय राज्यसभा चुनाव के जरिए सांसद बनाए रखने की इच्छा जताई है।

इधर, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने हाल ही सोनिया गांधी को लेकर बयान दिया कि वे तेलंगाना से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। उनके अलावा कोई दिग्गज नेता राजस्थान से उच्च सदन में जाएगा। दरअसल, राजस्थान से बतौर राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने फिर से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाए जाने की इच्छा कांग्रेस नेतृत्व के सामने जता दी है। खाली हो रही एक सीट पर पार्टी किसी दिग्गज नेता को उच्च सदन भेजने पर विचार कर रही है।  साथ ही, रेड्डी के इस बयान से पहले तेलंगाना कांग्रेस कमेटी ने भी सोनिया गांधी से तेलंगाना से लोकसभा चुनाव लड़ने का आग्रह किया था।

पार्टी सोनिया के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन को भी राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है। माकन साल 2022 में राज्यसभा चुनाव में हरियाणा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे थे, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। माकन के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अच्छे संबंध रहे हैं, हालांकि नवंबर 2022 की विधायक दल की बैठक नहीं होने देने की घटना के बाद जरूर उनके संबंधों में कुछ खटास की खबरें आई थीं। सूत्रों के अनुसार अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ही लेगा, जो भी नाम तय करेगा, उसे लेकर अशोक गहलोत से जरूर चर्चा करेगा। राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रभावशाली नेता के हाथ ही फ्लोर मैनेजमेंट दिया जाएगा, ताकि क्रॉस वोटिंग नहीं हो।

भाजपा में भी भूपेंद्र यादव का कार्यकाल पूरा होने से सीट खाली होने जा रही है। किरोड़ी लाल मीणा के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद एक सीट पहले से खाली हो चुकी है। भाजपा में चौंकाने वाला नाम राजेंद्र राठौड़ का हो सकता है। हालांकि, संघ की ओर से सतीश पूनिया का नाम सुझाया गया है। वहीं, पार्टी की राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली की सह-प्रभारी अल्का गुर्जर के नाम की भी चर्चा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार भूपेंद्र यादव को अलवर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाए जाने पर विचार चल रहा है।बता दें कि अशोक गहलोत से अच्छे संबंध रहे हैं, हालांकि नवंबर 2022 की विधायक दल की बैठक नहीं होने देने की घटना के बाद जरूर उनके संबंधों में कुछ खटास की खबरें आई थीं। सूत्रों के अनुसार अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ही लेगा, जो भी नाम तय करेगा, उसे लेकर अशोक गहलोत से जरूर चर्चा करेगा। राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रभावशाली नेता के हाथ ही फ्लोर मैनेजमेंट दिया जाएगा, ताकि क्रॉस वोटिंग नहीं हो। यादव वहां के सामाजिक समीकरण में भी फिट बैठते हैं। बाबा बालकनाथ के विधानसभा चुनाव लड़ने के कारण लोकसभा सीट खाली है।