Thursday, March 5, 2026
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क्या हिमाचल से चुनाव लड़ सकता है गांधी परिवार?

गांधी परिवार इस बार हिमाचल से चुनाव लड़ सकता है! राज्यसभा चुनाव के लिए सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की चर्चा है। इस तरह की अटकलें हैं कि गांधी परिवार से कोई व्यक्ति हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा सीट के लिए चुनाव लड़ सकता है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मंगलवार को यह कहकर चर्चा को बढ़ा दिया कि यदि उनकी इच्छा हो तो सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा राज्य से राज्यसभा के लिए चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि ‘यह संभव है। हम उनसे चर्चा करेंगे और अगर उन्हें यह उचित लगेगा तो यह सीट उन्हें दी जा सकती है। पांच बार लोकसभा सांसद रहीं और अब रायबरेली का प्रतिनिधित्व कर रहीं सोनिया ने पिछले कुछ समय से लगातार बीमार रही हैं। स्वास्थ्य कारणों से रोजमर्रा की राजनीति गतिविधियों में उतनी सक्रिय नजर नहीं आती हैं। संभव है कि वह इस बार रायबरेली से चुनाव भी ना लड़ें। हाालंकि, इस संबंध में अभी तक आधिकारिक रूप से पार्टी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। ऐसे में यदि वह राज्यसभा का विकल्प चुनती हैं, तो मुख्य सवाल यह होगा कि क्या प्रियंका लोकसभा चुनाव में उनकी जगह लेंगी। प्रतिभा के सकारात्मक बयान को देखते हुए दूसरी संभावना यह है कि प्रियंका गांधी राज्यसभा में आएंगी। वहीं, सोनिया फिर से पारिवारिक क्षेत्र से चुनाव लड़ सकती हैं। सोनिया गांधी ने वर्ष 2019 के आम चुनाव में रायबरेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था जबकि प्रियंका गांधी न तो लोकसभा से सांसद हैं और न ही राज्यसभा की सदस्य।

हिमाचल प्रदेश की एक सीट सहित राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी है। कांग्रेस के पास 68 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 40 सीट हैं। राज्यसभा की यह सीट दो अप्रैल को नड्डा के छह साल के कार्यकाल की समाप्ति के बाद खाली हो रही है जो राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद 2018 में चुने गए थे। राज्य में इस एकमात्र सीट के लिए मतदान अगले महीने राज्य विधानसभा के बजट सत्र 14 से 29 फरवरी के दौरान होगा। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। फिलहाल राज्य की तीनों राज्यसभा सीट बीजेपी के पास हैं। नड्डा के अलावा, राज्य से दो अन्य राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी और सिकंदर कुमार हैं।

गौरतलब है कि सोनिया गांधी 5 बार की लोकसभा सांसद हैं। अभी वो रायबरेली से कांग्रेस की सांसद हैं। हाल के दिनों में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने रोजाना के राजनीतिक गतिविधियों से दूर कर लिया है। अगर वह राज्यसभा सीट के लिए अपनी मंजूरी देती हैं तो बड़ा सवाल ये होगा कि क्या प्रियंका रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी? हालांकि, प्रतिभा सिंह के बयान से लगता है कि एक और स्थिति ये हो सकती है कि प्रियंका गांधी राज्यसभा चली जाएं और सोनिया गांधी रायबरेली से फिर से चुनाव मैदान में उतरें।

हिमाचल की ये सीट 2 अप्रैल को खाली हो रही है। जेपी नड्डा का 6 साल का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। यही नहीं बता दे कि कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव का ऐलान हो जाएगा। पीएम मोदी ने राम-राम के जरिए विपक्ष को इशारा तो कर ही दिया है। इसके अलावा राष्ट्रपति के भाषण में तीन जगह राम मंदिर का जिक्र इतना बताने के लिए काफी है कि जब पीएम मोदी चुनाव प्रचार को उतरेंगे तो उनका रुख किस तरफ होगा। बीजेपी ने कुछ दिन पहले ही अपने एक्स हैंडल पर संकल्प से लेकर सिद्धि तक की तस्वीर पोस्ट की थी। इसमें टेंट में रामलला से लेकर राम मंदिर में बाल राम की मूर्ति को दिखाया गया है। बीजेपी के लिए राम मंदिर का मुद्दा काफी बड़ा था। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण हुआ तो बीजेपी के लिए ये किसी बड़े आशीर्वाद से कम नहीं रहा। 

2018 में बीजेपी की सत्ता में वापसी के बाद वह इस सीट से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। बजट सत्र 14 से 29 फरवरी के दौरान होगा। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। फिलहाल राज्य की तीनों राज्यसभा सीट बीजेपी के पास हैं। नड्डा के अलावा, राज्य से दो अन्य राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी और सिकंदर कुमार हैं।इस समय राज्य की सभी तीन सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। माना जा रहा है कि अगर सोनिया या प्रियंका ने अपनी सहमति दे दी तो हिमाचल से वो राज्यसभा जा सकते हैं।

पीएम मोदी ने बजट के दौरान क्या दिया है इशारा?

हाल ही में पीएम मोदी ने बजट के दौरान एक इशारा दे दिया है! बजट सत्र के ठीक पहले संसद भवन के बाहर पीएम नरेंद्र मोदी की राम-राम और संसद के भीतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अभिभाषण में तीन बार राम मंदिर का जिक्र किया। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही बीजेपी इस मुद्दों को हर मंच पर उठा रही है। बीजेपी के घोषणापत्र का सबसे बड़े मुद्दों में से एक राम मंदिर के पूरा होने के बाद भगवा दल इसके जरिए 24 की चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। बजट सत्र से पहले पीएम मोदी ने पत्रकारों से बातचीत में विपक्षी सांसदों को जमकर सुना दिया। पीएम ने कहा कि संसद में हुड़दंग करने वाले सांसदों के पास बजट सत्र में पश्चाताप का मौका है। अपनी बात खत्म कहते हुए उन्होंने सबको राम-राम भी कह दिया। पीएम के इस संबोधन को विशेषज्ञ चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। पीएम जिस आक्रामक मूड में विपक्ष पर निशाना साधा वो निश्चित ही बीजेपी के लोकसभा चुनाव की तैयारी को दिखाने के लिए काफी है। राम-राम के जरिए पीएम मोदी ने देश की जनता तक संदेश दे दिया कि इस चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा बेहद अहम रहने वाला है।

बीजेपी के घोषणापत्र का सालों से बेहद अहम हिस्सा रहे राम मंदिर में बाल राम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही बीजेपी इसका फायदा उठाने की तैयारी में है। सभी राज्यों से बीजेपी यूनिट हजारों लोगों को राम मंदिर के दर्शन कराने का प्लान बना चुकी है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान बीजेपी ने देश के घर-घर में अक्षत बंटवा दिया। जाहिर है पार्टी की तैयारी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भुनाने की है। पीएम मोदी राम मंदिर उद्घाटन के मुख्य यजमान थे। 2024 लोकसभा चुनाव के एनडीए के पीएम पद का वही चेहरा हैं। मतलब साफ है कि राम के रथ पर भगवा दल संसद के तट तक पहुंचना चाहती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में तीन बार राम मंदिर का जिक्र किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण की इच्छा सदियों से थी आज ये साकार हो चुका है। उनके इतना बोलते ही सदन में जय श्रीराम के उद्घोष तैरने लगा। अपने भाषण के मध्य में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या में 5 दिन में 13 लाख श्रद्धालु गए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या धाम में ही प्राण प्रतिष्ठा के बाद 5 दिनों में ही 13 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए जा चुके हैं। इसके बाद सदस्यों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सभ्यता के कालखंड में ऐसे समय आते हैं जो सदियों का भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में भी ऐसे अनेक पड़ाव आए हैं। इस साल 22 जनवरी को भी देश ऐसे ही एक पड़ाव का साक्षी बना है। सदियों की प्रतीक्षा में अयोध्या में रामलला अपने भव्य राम मंदिर में विराजमान हैं। ये करोड़ों देशवासियों की इच्छा और आस्था का प्रश्न था।

कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव का ऐलान हो जाएगा। पीएम मोदी ने राम-राम के जरिए विपक्ष को इशारा तो कर ही दिया है। इसके अलावा राष्ट्रपति के भाषण में तीन जगह राम मंदिर का जिक्र इतना बताने के लिए काफी है कि जब पीएम मोदी चुनाव प्रचार को उतरेंगे तो उनका रुख किस तरफ होगा। बीजेपी ने कुछ दिन पहले ही अपने एक्स हैंडल पर संकल्प से लेकर सिद्धि तक की तस्वीर पोस्ट की थी। इसमें टेंट में रामलला से लेकर राम मंदिर में बाल राम की मूर्ति को दिखाया गया है। बीजेपी के लिए राम मंदिर का मुद्दा काफी बड़ा था। ऐसे में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर का निर्माण हुआ तो बीजेपी के लिए ये किसी बड़े आशीर्वाद से कम नहीं रहा।

पिछले 10 सालों में मोदी सरकार ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए ओबीसी, ईबीसी, एससी और एसटी जातियों को साध लिया है। मंडल के नाम से जाने जानी वाली ये जातियां इन दिनों बीजेपी की कोर वोटर में शामिल है। अब राम मंदिर के जरिए बीजेपी अपने उन वोटरों को भी साध चुकी है जो कमंडल के जरिए उससे जुड़ी थी। यानी 24 के चुनाव में विकास से राम तक या यों कहें मंडल से कमंडल के साथ बीजेपी चुनावी मैदान में उतरेगी। पीएम मोदी ने आज उसका साफ-साफ इशारा कर दिया है।

बजट से पहले क्या बोली राष्ट्रपति मुर्मू?

आज हम आपको बताएंगे कि बजट से पहले राष्ट्रपति मुर्मू क्या बोली है! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 17वीं लोकसभा के अंतिम सत्र को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने नरेंद्र मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। महामहिम ने राम मंदिर, आर्टिकल 370, तीन तलाक और युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए मोदी सरकार की योजनाओं एवं कामों का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र से लेकर शिक्षा क्षेत्र में मोदी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से ‘सदियों की आकांक्षा पूरी होने’ जैसा है। उन्होंने अभिभाषण में तीन बार राम मंदिर का जिक्र किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण की इच्छा सदियों से थी आज ये साकार हो चुका है। उनके इतना बोलते ही सदन में जय श्रीराम के उद्घोष तैरने लगा। अपने भाषण के मध्य में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या में 5 दिन में 13 लाख श्रद्धालु गए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अयोध्या धाम में ही प्राण प्रतिष्ठा के बाद 5 दिनों में ही 13 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए जा चुके हैं। इसके बाद सदस्यों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सभ्यता के कालखंड में ऐसे समय आते हैं जो सदियों का भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में भी ऐसे अनेक पड़ाव आए हैं। इस साल 22 जनवरी को भी देश ऐसे ही एक पड़ाव का साक्षी बना है। सदियों की प्रतीक्षा में अयोध्या में रामलला अपने भव्य राम मंदिर में विराजमान हैं। ये करोड़ों देशवासियों की इच्छा और आस्था का प्रश्न था।

राष्ट्रपति ने विश्व की वर्तामान परिस्थितियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि संक्रमण काल में एक मजबूत सरकार होने का क्या मतलब होता है, ये हमने देखा है। बीते 3 वर्षों से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दरारें पड़ गई हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘इस कठिन दौर में, मेरी सरकार ने, भारत को विश्व-मित्र के रूप में स्थापित किया है। विश्व मित्र की भूमिका के कारण ही आज हम ग्लोबल साउथ की आवाज़ बन पाए हैं।’ उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण कानून लागू होने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार नारी शक्ति का सामर्थ्य बढ़ाने के लिए हर स्तर पर काम कर रही है। मुर्मू ने कहा कि तीन दशक बाद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने के लिए मैं आपकी सराहना करती हूं। इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि यह महिला नीत विकास के सरकार के संकल्प को मजबूत करता है और सरकार ने ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ की अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी को लेकर युवाओं की चिंता से अवगत है, इसलिए ऐसे गलत तरीकों पर सख्ती के लिए नया कानून बनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘सरकार मानती है कि विकसित भारत की भव्य इमारत 4 मजबूत स्तंभों पर खड़ी होगी। ये स्तंभ हैं – युवाशक्ति, नारीशक्ति, किसान और गरीब। देश के हर हिस्से, हर समाज में इन सभी की स्थिति और सपने एक जैसे ही हैं। इसलिए इन 4 स्तंभों को सशक्त करने के लिए मेरी सरकार निरंतर काम कर रही है। भारत द्वारा विज्ञान एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में की गई शानदार प्रगति का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार AI मिशन पर काम कर रही है जिससे नये स्टार्ट अप्स के लिए संभावनाएं खुलेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार AI मिशन पर काम कर रही है जिसके कारण भारत के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम’ से डिजिटल स्पेस और सुरक्षित होने वाला है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन अधिनियम से देश में अनुसंधान को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यस्थाओं में से एक बनाया है। इससे करोड़ों युवाओं को रोज़गार मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का एक और बड़ा सुधार डिजिटल इंडिया का निर्माण है। डिजिटल इंडिया ने भारत में जीवन और व्यापार, दोनों को बहुत आसान बना दिया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वास्थ क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना, जन औषधि केंद्र, मुफ्त डायलिसिस अभियान समेत अनेक योजनाओं के कारण देश के नागरिकों के हजारों करोड़ रुपये खर्च होने से बचे हैं और इनका देश के नागरिकों के पूरे जीवन-चक्र पर सकारात्मक असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने तीर्थस्थलों के विकास के लिए जो काम किए हैं उससे देश में तीर्थयात्रा आसान हुई है, वहीं दुनिया भी भारत में ‘हैरिटेज टूरिज्म’ को लेकर आकर्षित हुई है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में आठ करोड़ से अधिक लोग काशी गए हैं। उन्होंने कहा कि पांच करोड़ से अधिक लोगों ने उज्जैन में महाकाल के दर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि 19 लाख से अधिक लोगों ने केदारनाथ धाम की यात्रा की है। राष्ट्रपति ने बताया कि अयोध्याधाम में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पांच दिन में 13 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

पीएम मोदी की परीक्षा पर चर्चा का क्या होता है मकसद?

आज हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी की परीक्षा पर चर्चा का मकसद क्या होता है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जनवरी को ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के तहत छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ बातचीत की। बातचीत के दौरान परीक्षा के तनाव को कम करने और परीक्षा की रणनीति पर चर्चा होगी। परीक्षा पे चर्चा 2024 के लिए रेकॉर्ड एक करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूली छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का यह सातवां संस्करण होगा। इस वर्ष यह कार्यक्रम 29 जनवरी को सुबह 11 बजे से भारत मंडपम, प्रगति मैदान में होगा। कार्यक्रम में लगभग 4000 प्रतिभागी प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे। हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से दो छात्रों और एक शिक्षक के अलावा कला उत्सव और वीर गाथा प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य कार्यक्रम के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। आजकल तो पूरा परिवार मोबाइल में लगा रहता है, घर में बराबर में बैठकर एक दूसरे को मैसेज करते हैं। मोबाइल के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए पूरे परिवार को नियम बनाने होंगे। हम खाने के वक्त कोई गैजेट्स का इस्तेमाल न करें, ऐसा नियम बना सकते हैं। टेक्नोलॉजी से बचने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसका सही उपयोग सीखना बेहद जरूरी है। हमारे मोबाइल पर लगा पासवर्ड परिवार के सभी सदस्यों को पता होगा, तो काफी सुधार हो जाएगा। इसके अलावा हमें स्क्रीन टाइम अलर्ट को मॉनीटर करना चाहिए।

परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की शुरुआत साल 2018 में की गई थी। उसके बाद से हर साल, कभी ऑनलाइन मोड में तो कभी ऑफलाइन मोड में इसका आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) कार्यक्रम 29 जनवरी को ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जाएगा, जहां प्रधानमंत्री देश और विदेश के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत करेंगे। पीएम मोदी से सवाल पूछने के लिए छात्र, अभिभावक और टीचर्स वर्चुअल मोड में भी कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं।

यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें देश और विदेश दोनों के ही छात्र, शिक्षक और अभिभावक प्रधानमंत्री मोदी के साथ परीक्षाओं और स्कूली जीवन से संबंधित चिंताओं पर चर्चा करते हैं। परीक्षा पे चर्चा युवाओं के लिए तनाव मुक्त माहौल तैयार करने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बड़ी पहल ‘एग्जाम वॉरियर्स’ का हिस्सा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों का एग्जाम प्रेशर कम करना है। बोर्ड परीक्षा 2024 से पहले छात्रों में तनाव होना स्वाभाविक है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम के जरिए उसे कम करने की कोशिश करते हैं। वह बच्चों को बोर्ड परीक्षा में बेस्ट मार्क्स स्कोर करने के टिप्स देते हैं, उन्हें मोटिवेट करते हैं और उनके सवालों के जवाब भी देते हैं।

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस खास कार्यक्रम में भाग लेने और प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करने के लिए छात्रों में बहुत उत्‍साह है। देशभर के साथ-साथ विदेशों से भी छात्र, अभिभावक और शिक्षक परीक्षाओं और स्कूल के बाद के जीवन से संबंधित चिंताओं पर चर्चा करने के लिए पीएम के साथ बातचीत करते हैं। ​चेन्नई के एक छात्र ने पीएम मोदी से सवाल किया कि वो प्रधानमंत्री के रूप में बड़े-बड़े प्रेशर कैसे हैंडल कर पाते हैं? इसके जवाब देते हुए पीएम मोदी ने हंसते हुए छात्र से पूछा कि क्या आप भी PM बनना चाहते हैं। पीएम ने कहा कि मैं चुनौतियों को ही चुनौतियां देता हूं। मैं मानता हूं कि कुछ भी क्यों न हो, मेरे साथ 140 करोड़ देशवासियों का साथ है। हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से दो छात्रों और एक शिक्षक के अलावा कला उत्सव और वीर गाथा प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य कार्यक्रम के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है। आजकल तो पूरा परिवार मोबाइल में लगा रहता है, घर में बराबर में बैठकर एक दूसरे को मैसेज करते हैं। मोबाइल के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए पूरे परिवार को नियम बनाने होंगे। हम खाने के वक्त कोई गैजेट्स का इस्तेमाल न करें, वह बच्चों को बोर्ड परीक्षा में बेस्ट मार्क्स स्कोर करने के टिप्स देते हैं, उन्हें मोटिवेट करते हैं और उनके सवालों के जवाब भी देते हैं।ऐसा नियम बना सकते हैं।मैं अपनी शक्ति देश के सामर्थ्य बढ़ाने में लगा रहा हूं।परीक्षा पे चर्चा 2024 के लिए अब तक MyGov पोर्टल पर एक करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं, जबकि 2023 में 38.80 लाख प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।

परीक्षा पर चर्चा पर क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पर चर्चा पर बड़ा बयान दिया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 7वें संस्करण में देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बातचीत की। करीब पौने दो घंटे तक पीएम ‘सर’ की मेगा क्लास में बच्चों को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन से लेकर बेहतर नागरिक बनने के गुर मिले। पीएम ने बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों से भी बात की। प्रधानमंत्री ने बेहद सरल और मजेदार अंदाज में बच्चों के हर एक सवाल का जबाव दिया। कैसे बोर्ड परीक्षा की तैयारी की जाए, टाइम मैनेजनेंट कैसे हो, मोबाइल के दुष्प्रभाव से कैसे बचा जाए? इन सभी सवालों का जवाब पीएम मे दिया। उन्होंने ये भी बताया कि वो कैसे इतने पॉजिटिव रहते हैं और प्रधानमंत्री के रूप में आने वाली चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों ने सवाल किया कि वो परीक्षा और सिलेबस के प्रेशर को कैसे हैंडल करें। इसके जवाब में पीएम ने कहा, ‘हमें किसी भी प्रेशर को झेलने के लिए खुद को सामर्थ्यवान बनाना चाहिए। दबाव को हमें अपने मन की स्थिति से जीतना जरूरी है। किसी भी प्रकार की बात हो, हमें परिवार में भी चर्चा करनी चाहिए।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आपके दोस्त से आपको किस चीज की स्पर्धा है? मान लीजिए 100 नंबर का पेपर है। आपका दोस्त अगर 90 नंबर ले आया तो क्या आपके लिए 10 नंबर बचे? आपके लिए भी 100 नंबर हैं। आपको उससे स्पर्धा नहीं करनी है आपको खुद से स्पर्धा करनी है… उससे द्वेष करने की जरूरत नहीं है। असल में वो आपके लिए प्रेरणा बन सकता है। अगर यही मानसिकता रही तो आप अपने से तेज तरार व्यक्ति को दोस्त ही नहीं बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों को टिप्स देते हुए कहा कि बच्चों के तनाव को कम करने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। इसलिए शिक्षक और छात्रों के बीच हमेशा सकारात्मक रिश्ता रहना चाहिए। शिक्षक का काम सिर्फ जॉब करना नहीं, बल्कि जिंदगी को संवारना है, जिंदगी को सामर्थ्य देना है, यही परिवर्तन लाता है। परीक्षा के तनाव को विद्यार्थियों के साथ-साथ पूरे परिवार और टीचर को मिलकर एड्रेस करना चाहिए। अगर जीवन में चुनौती और स्पर्धा ना हो, तो जीवन प्रेरणाहीन और चेतनाहीन बन जाएगा। इसलिए कॉम्पटिशन तो होना ही चाहिए, लेकिन हेल्दी कॉम्पटिशन होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों को टिप्स देते हुए कहा कि आजकल लोगों की लिखने की आदत कम हो गई है। हम आईपैड वगैरह पर ज्यादा वक्त बिताते हैं। लेकिन जितना लिखेंगे उतनी ही अच्छी तैयारी होगी और कॉन्फीडेंस भी बढ़ेगा। इसलिए आप दिन में जितनी देर पढ़ते हैं उसका कम से कम आधा वक्त नोट्स बनाने में लगाएं। इससे आपको आइडिया लग जाएगा कि परीक्षा में कितनी देर में क्या आंसर लिखना है। अगर आपको तैरना आ जाएगा तो पानी में उतरने में डर नहीं लगेगा, ठीक वैसे ही जब आप लिखने की प्रैक्टिस करेंगे तो आपको टाइम मैनेजमेंट आ जाएगा और जाहिर तौर पर परीक्षा परिणाम में इसका असर दिखेगा। प्रधानमंत्री से एक छात्र ने सवाल किया कि पढ़ाई के साथ-साथ हमारे लिए व्यायाम और खेल कितना जरूरी है। इसके जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह मोबाइल को इस्तेमाल करने के लिए उसे चार्जिंग और रिचार्ज की जरूरत है, ठीक वैसे ही हमारे शरीर को रिचार्ज करना जरूरी है। स्वस्थ रहना सबसे जरूरी है। अगर हम स्वस्थ नहीं रहेंगे तो परीक्षा में बैठने की सामर्थ्य नहीं होगी। कभी कभी सूर्य के प्रकाश में बैठिए। इसके अलावा नींद को महत्व दें, परीक्षा से पहले अच्छी नींद जरूरी है। इसलिए जब भी मम्मी बोलें सो जाओ तो सोना चाहिए। रील्स पर समय बिगाड़ने से नींद को कम आंक रहे हैं।

एक छात्रा ने पीएम मोदी से सवाल किया कि हम अपने मां-बाप को कैसे यकीन दिलाएं कि हम मेहनत कर रहे हैं? इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ये सोचने का विषय है कि पारवारिक माहौल में माता-पिता या टीचर भरोसा नहीं कर पा रहे। कहीं न कहीं हमें अपने आचरण का एनालिसिस करने की जरूरत है। एक विद्यार्थी के नाते हमें ये सोचना चाहिए कि क्या आप जो कहते हैं उसका सच में पालन करते हैं या नहीं। माता-पिता के मना करने भी अगर हम फोन चला रहे हैं, तो भरोसा तो कम होगा ही। ठीक ऐसे ही मां-बाप को भी बच्चों पर भरोसा करना चाहिए। अगर बच्चों के नंबर नहीं आए हैं, तो इस तरह की बातें, कि तुम पढ़ते नहीं हो, दोस्तों के साथ समय बिताते रहते हो, ऐसी बातें बच्चों और मां-बाप के बीच दूरी बढ़ा देती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी से कुछ अभिभावकों और छात्रों ने सोशल मीडिया और मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभाव बचने के उपाय पूछे। इसके जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी चीज की अति ठीक नहीं होती। हम पेट भरने के बाद अपना मनपसंद खाना नहीं खा सकते है ठीक वैसे ही कितनी भी प्रिय चीज क्यों न आ रही हो, लेकिन मोबाइल की समय सीमा तय करनी पड़ेगी। आजकल तो पूरा परिवार मोबाइल में लगा रहता है, घर में बराबर में बैठकर एक दूसरे को मैसेज करते हैं। मोबाइल के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए पूरे परिवार को नियम बनाने होंगे। हम खाने के वक्त कोई गैजेट्स का इस्तेमाल न करें, ऐसा नियम बना सकते हैं। टेक्नोलॉजी से बचने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसका सही उपयोग सीखना बेहद जरूरी है। हमारे मोबाइल पर लगा पासवर्ड परिवार के सभी सदस्यों को पता होगा, तो काफी सुधार हो जाएगा। इसके अलावा हमें स्क्रीन टाइम अलर्ट को मॉनीटर करना चाहिए।

​चेन्नई के एक छात्र ने पीएम मोदी से सवाल किया कि वो प्रधानमंत्री के रूप में बड़े-बड़े प्रेशर कैसे हैंडल कर पाते हैं? इसके जवाब देते हुए पीएम मोदी ने हंसते हुए छात्र से पूछा कि क्या आप भी PM बनना चाहते हैं। पीएम ने कहा कि मैं चुनौतियों को ही चुनौतियां देता हूं। मैं मानता हूं कि कुछ भी क्यों न हो, मेरे साथ 140 करोड़ देशवासियों का साथ है। मैं अपनी शक्ति देश के सामर्थ्य बढ़ाने में लगा रहा हूं। इसके लिए मैं देश की शक्ति और सामर्थ्य पर भरोसा करता हूं। मैं ये नहीं सोचता कि मैं ये सब कैसे कर पाऊंगा। मैं जिनके लिए काम कर रहा हूं उनपर मेरा अपार भरोसा है। अगर मुझसे कोई गलती भी हो जाती है, तो मैं इसे एक सबक मानता हूं और निराश नहीं होता। कोराना के दौर में मैंने रोजाना देशवासियों से बात की, उन्हें मोटिवेट किया, इससे उनकी सामर्थ्य बढ़ती थी। PM ने कहा, ‘जब कोई निजी स्वार्थ नहीं होता, तो निर्णय लेने में कोई दुविधा नहीं होती। ये मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं जो करूंगा देश के लिए करूंगा, आपके लिए करूंगा, मेरा क्या होगा इसकी मुझे कोई परवाह नहीं है।’

जब एलन मस्क ने इंसान के दिमाग में की चिप फिट!

हाल ही में एलन मस्क ने इंसान के दिमाग में चिप फिट करना शुरू कर दिया है! एलन मस्क ने एक्स पर लिखे पोस्ट में ऐलान किया है कि उनकी कंपनी न्यूरालिंक ने रविवार को एक मरीज के दिमाग में एक चिप को फिट किया है। इस प्रोडक्ट को टेलिपैथी नाम दिया गया है। मस्क ने एक्स पर लिखा कि टेलिपैथी की मदद से कोई व्यक्ति किसी फोन या कंप्यूटर को सिर्फ सोचकर नियंत्रित कर लेगा। आपने सिर्फ सोचा और आपके कंप्यूटर या मोबाइल ने वह कर दिखाया! सिलसिलेवार पोस्ट्स में मस्क ने बड़े उत्साहित हकर अपने इस अति महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि शुरुआती उपयोगकर्ता वे होंगे, जिन्होंने अपने अंगों का इस्तेमाल खो दिया है। कल्पना कीजिए कि स्टीफन हॉकिंग एक स्पीड टाइपिस्ट या नीलामीकर्ता की तुलना में तेजी से संवाद कर पाए होते।’ इंसानी दिमाग में चिप इम्प्लांट को क्रांतिकारी माना जा रहा है। ये तमाम रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकता है। लेकिन इसे लेकर तमाम आशंकाएं भी उठने लगी हैं। दिमाग में चिप फिट करना इंसान की सबसे बड़ी गलती है या फिर वरदान, इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है। बहस भी क्यों न छिड़े। ट्रांसह्मयूमनिज्म के हिमायती प्रकृति को ही चुनौती दे रहे हैं। इससे मानवता तक के खत्म होने की आशंका गहरा रही है। न्यूरालिंक की स्थापना 2016 में हुई थी। इसे पिछले साल यूएस फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन से ह्यूमन ट्रायल यानी इंसानी दिमाग में चिप फिट करने की इजाजत मिली थी। इससे पहले न्यूरालिंक ने बंदरों पर इस तकनीक का ट्रायल किया था जो सफल रहा था। इस तकनीक को ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस कहा जाता है। ट्रायल के दौरान बंदरों ने कंप्यूटर के कर्सर को सिर्फ सोचकर नियंत्रित कर लिया। आखिर वो चिप कैसा है जिसे पहली बार किसी इंसान के दिमाग में फिट किया गया है? उस छोटे से चिप को लिंक के नाम से जाना जाता है जिसे सर्जरी के जरिए खोपड़ी में इम्प्लांट किया गया है। इससे बहुत महीन तार जुड़े हुए हैं जो इंसान के बाल से भी पतले हैं। इसे बहुत ही सावधानी से ब्रेन के एक खास हिस्से में फिट किया गया है। इंसानी दिमाग में चिप इम्प्लांट तमाम ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो दिमाग से जुड़ीं बीमारियों से जूझ रहे हैं। इससे कई बीमारियों के इलाज में मदद मिल सकती है।

मोटर न्यूरॉन डिसीज जैसे एएलएस एमियोट्रोफिक लैटरल स्क्लिेरोसिस और मेरु रज्जू यानी स्पाइल कॉर्ड में चोट की स्थिति में ये वरदान साबित हो सकता है। ऐसे मरीज जो अपने अंगों पर नियंत्रण खो चुके हों, वे इसके जरिए अपने अंगों को नियंत्रित कर सकेंगे। कई बीमारियों में कोई व्यक्ति चलने-फिरने में असमर्थ होता है क्योंकि उसका अंगों पर नियंत्रण खत्म हो जाता है। ऐसे लोग इसकी मदद से फिर चल-फिर सकेंगे। मान लीजिए, किसी हादसे में किसी व्यक्ति ने हाथ या पैर खो दिया हो, लेकिन इस तकनीक के जरिए वह अपने रोबॉटिक आर्म या लेग को कंट्रोल कर सकेगा। वह सामान्य तौर पर चल-फिर सकेगा और मशीनी हाथ का भी आसानी से इस्तेमाल कर सकेगा। लकवा, पार्किंसन, ब्रेन इंजरी, मिर्गी के दौरों, डिप्रेशन, अंधेपन या बहरेपन वगैरह का भी इलाज हो सकेगा।

न्यूरालिंक अभी जिस टेलीपैथी तकनीक का ह्यूमन ट्रायल कर रही है, उसका अगले 5-6 वर्षों में कॉमर्शियल यूज करने का लक्ष्य है। कई बीमारियों के इलाज में ये तकनीक वरदान तो साबित हो सकती है लेकिन एक दूसरा पहलू भी है। ये तकनीक वरदान की जगह अभिशाप भी साबित हो सकती है, विनाशकारी भी हो सकती है। इससे प्राइवेसी को खतरा रहेगा। चिप के जरिए किसी इंसान के दिमाग पर भी कंट्रोल किया जा सकेगा। इस तरह तो इंसान और मशीन का फर्क ही मिट जाएगा। इंसान एक रोबॉट की तरह हो जाएगा जिसे कोई दूसरा इंसान नियंत्रित कर रहा होगा। हालांकि, ये आशंका अभी दूर की बात है। लेकिन न्यूरालिंक के प्रोजेक्ट से जो तात्कालिक आशंका है, वो है प्राइवेसी से जुड़ा हुआ। अगर मान भी लिया जाए कि इस तकनीक का सिर्फ सदुपयोग ही होगा तब भी आशंकाएं हैं। मान लीजिए कि कोई व्यक्ति ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिसमें वह अपने हाथ पैर या बाकी अंगों को नियंत्रित करने में असमर्थ है। अगर उसके दिमाग में चिप फिट किया गया तो ये उसके लिए वरदान तो होगा ही लेकिन कुछ सवाल भी हैं। चिप के जरिए मिलने वाले डेटा पर किसका नियंत्रण होगा? दूसरा व्यक्ति बिना इजाजत उस डेटा का मिसयूज भी तो कर सकता है? चिप इंप्लांट के जरिए कोई शख्स किसी दूसरे व्यक्ति के मस्तिष्क पर नियंत्रण भी तो कर सकता है। अगर नियंत्रण नहीं भी कर पाए तो ये तो जान ही पाएगा कि वह क्या सोच रहा है, उसके दिमाग में क्या चल रहा है।

एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक जिस उद्देश्य से काम कर रही है, वे ट्रांसह्यूमनिज्म के कॉन्सेप्ट से प्रेरित हैं। ये विचार अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके इंसान की मौलिक क्षमताओं को बढ़ाने की वकालत करता है। मौत को शाश्वत सत्य कहा जाता है लेकिन ट्रांसह्यूमनिस्ट इसे झुठलाने में यकीन रखते हैं। वे इस दिशा में काम कर रहे हैं कि व्यक्ति की मौत ही न हो। बूढ़ा ही न हो। कभी बीमार ही न हो। यानी ये सीधे-सीधे प्रकृति की सत्ता को चुनौती है। अभी ये भले ही किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कल्पना जैसी लग रही हो लेकिन आने वाले वक्त में ये हकीकत की शक्ल भी अख्तियार कर सकती है। आसान शब्दों में कहें तो ट्रांसह्यूमनिज्म इंसान को एक तरह से सुपर ह्यूमन बनाने का कॉन्सेप्ट है। सुपर ह्यूमन का कॉन्सेप्ट ही मानवता के लिए बड़े खतरे की दस्तक है। इससे मानवता तक खत्म हो सकती है। मशीन और इंसान का फर्क मिट सकता है। एक तो दुनिया में पहले से ही काफी असमानता है। कुछ लोग हैं जिनके पास हर तरह के साधन हैं तो तमाम लोग ऐसे हैं जो वंचित हैं और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जो समर्थ हैं, साधन संपन्न हैं वे तकनीक के इस्तेमाल से सुपर ह्यूमन में तब्दील हो सकते हैं। इससे ये खतरा बढ़ जाएगा कि कुछ मुट्ठीभर सुपरह्यूमन विशाल आबादी को नियंत्रित कर लेंगे। उन्हें गुलाम बना सकते हैं।

क्या तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन पाएगा भारत?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत अब तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन पाएगा या नहीं! भारत ने अपने सामने बड़े लक्ष्‍य रख दिए हैं। उन्‍हें पाने के लिए वह पूरी ताकत से दौड़ लगा रहा है। तमाम अनुमान भी संकेत देते हैं कि भारत नहीं रुकने वाला है। तीन साल में वह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा। 2030 तक उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार 7 ट्रिलियन डॉलर हो जाने के आसार हैं। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बनने को तैयार है। इसके उलट चीन लड़खड़ाता दिख रहा है। ग्‍लोबल जीडीपी में उसकी हिस्‍सेदारी घट गई है। जानकारों का मानना है कि चीन की अर्थव्‍यवस्‍था में जो गिरावट शुरू हुई है उसमें वापसी की गुंजाइश कम ही है। इसके पीछे कई तरह की वजह हैं। इनमें वर्किंग पॉपुलेशन का कम होना सबसे बड़ा कारण है। उधर, चीन की आक्रामकता भी कई देशों को अखर रही है। यूरोप और अमेरिका सहित कई देशों में चीन विरोधी लहर है। अब इन सबके बीच एक बड़ा सवाल है। वह यह है कि क्‍या भारत इस मौके का फायदा उठा सकता है? अभी उसे क्‍या करने की जरूरत है? ग्‍लोबल जीडीपी में चीन की हिस्‍सेदारी 1990 में 2 फीसदी हुआ करती थी। 2021 तक यह बढ़कर करीब 18.4 फीसदी पर पहुंच गई। इसके पीछे उसकी तमाम आर्थिक नीतियां रहीं। हालांकि, अब ग्‍लोबल जीडीपी में चीन की हिस्‍सेदारी फिर घटने लगी है। यह घटकर 17 फीसदी रह गई है। इसकी एक सबसे बड़ी वजह ड्रैगन की कामकाजी आबादी की हिस्‍सेदारी घटना है। यह एक दशक से घट ही रही है। यह घटकर करीब 19 फीसदी रह गई है। अगले तीन दशकों में इसके घटकर 10 फीसदी रह जाने के आसार हैं। यानी चीन की सुस्‍ती स्‍थायी दिखती है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो अर्थव्‍यवस्‍था के दोबारा तेजी से भागने के आसार कम ही हैं।

इसके उलट भारत की तस्‍वीर सुनहरी दिख रही है। अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष आईएमएफ ने 2024-25 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमानों में बदलाव किया है। आईएमएफ ने इसे बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था 2024-25 में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहने की उम्मीद है। भारत के पास न तो टैलेंट की कमी है। न उसके पास काम करने वाले युवा हाथों की किल्‍लत है। भारत तेजी से एक बड़ी डिजिटल इकनॉमी बन रहा है। निर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ोतरी से रोजगार के मौके भी बढ़ने के आसार हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से हाल में जारी रिपोर्ट में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्‍वीर दिखाई गई है। यह रिपोर्ट कहती है कि तीन साल में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। 2030 तक इसके 7 ट्रिलियन डॉलर हो जाने की उम्‍मीद है। पिछले 10 सालों में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी की औसत रफ्तार से बढ़ी है। भारत अभी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उसके सामने तीन सबसे बड़े खतरे वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और महंगाई के हैं। हालांकि, भारत को भरोसा है कि वह इन चुनौतियों से निपट लेगा।

ग्‍लोबल इकनॉमी में चीन का घटता कॉन्ट्रिब्‍यूशन उभरते बाजारों के लिए मौके तैयार करेगा। सच तो यह है पिछले साल भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको और ब्राजील का ग्‍लोबल अर्थव्‍यवस्‍था में हिस्‍सा बढ़ा है। यानी फायदा मिलना तय है। लेकिन, अभी कई ऐसी चीजें हैं जिन्‍हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चीन को अभी कुछ सालों में भारत रिप्‍लेस नहीं कर पाएगा। ऐसे में उसे धीरे-धीरे मजबूत कदम बढ़ाने होंगे। सबसे पहले तो उसे अपनी क्षमता का विस्‍तार करना होगा। इसके लिए देश के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में बड़े निवेश की जरूरत होगी। सरकार के साथ इसमें निजी सेक्टर को भी उतरना होगा। दूसरा, उसे दुनिया के झंझावातों से दूरी बनाकर अपने हितों को देखना होगा। पॉलिसी लेवल पर कोई भी गलत कदम उसे अपने लक्ष्‍य से बहुत दूर पहुंचा देगा। तीसरा, उसे अपनी वर्किंग पॉपुलेशन को पूरी तरह से इस्‍तेमाल करने का बंदोबस्‍त करना होगा। सरकार को सुनिश्चित करना होगा एक भी युवा बिना काम और रोजगार के नहीं रहे। वर्किंग पॉपुलेशन किसी भी अर्थव्‍यवस्‍था की पूंजी होती है। भारत अभी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उसके सामने तीन सबसे बड़े खतरे वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और महंगाई के हैं। हालांकि, भारत को भरोसा है कि वह इन चुनौतियों से निपट लेगा।इस पूंजी को ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्‍तेमाल करना होगा। युवा आबादी, बढ़ता मध्‍यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था, सर्विस सेक्‍टर, स्‍टार्टअप इकोसिस्‍टम, व‍िदेशी न‍िवेश, सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग’ की पॉल‍िसी और मजबूत बैंकिंग प्रणाली भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बड़ी ताकत हैं।

आखिर किन-किन जातियों को दिया गया है नीतीश कैबिनेट में स्थान?

आज हम बताएंगे कि नीतीश कैबिनेट में किन-किन जातियों को स्थान दिया गया है! बिहार में नई सरकार बनी, जिसमें नीतीश कुमार 9वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा डिप्टी सीएम बने। इसके अलावा 6 मंत्री बने। मंत्रिपरिषद में शपथ लेने वाले मंत्रियों में जातीय अंकगणित को ध्यान में रखा गया। लेकिन किसी ब्राह्मण, मुस्लिम और महिला विधायक को जगह नहीं मिली। उपमुख्यमंत्री पद के लिए कोइरी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी और भूमिहार समुदाय के विजय कुमार सिन्हा को मौका मिला। जो भाजपा की पसंद सवर्ण जाति के मूल आधार को बरकरार रखते हुए ओबीसी तक पहुंच बनाने की ओर इशारा करता है। नीतीश कुमार के मंत्रिपरिषद के सदस्यों के रूप में रविवार को शपथ लेने वालों में भाजपा नेता सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और प्रेम कुमार शामिल रहे। जदयू नेता विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र यादव और श्रवण कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली। जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न उजागर किए जाने की शर्त पर बताया कि राजग सहयोगियों ने नई सरकार के लिए मंत्रियों को चुनते समय हिंदुओं के सभी सामाजिक समूहों को खुश करने के लिए एक आदर्श संतुलन बनाया। प्रेम कुमार कहार जाति से आते हैं तो विजेंद्र यादव, यादव समुदाय से।हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा नेता संतोष कुमार सुमन और निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह भी ओथ लेने वालों में शामिल रहे। नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी और संतोष कुमार सुमन, तीनों बिहार विधान परिषद के सदस्य एमएलसी हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, नीतीश कुमार मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देते समय एनडीए के सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं ने बेहतर जातीय संतुलन बनाया है। हालांकि अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अन्य जातियों, ब्राह्मण, मुस्लिम और महिला विधायकों को समायोजित करने के लिए एक या दो दिन में कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। नए मंत्रिमंडल में तीन उच्च जाति के मंत्री हैं, जिनमें भूमिहार समुदाय से विजय चौधरी और विजय सिन्हा, राजपूत से सुमित कुमार सिंह निर्दलीय शामिल हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा श्रवण कुमार भी कुर्मी जाति से हैं। हाल ही में संपन्न जाति सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में कुर्मियों की कुल संख्या 37.62 लाख है, जो बिहार की कुल आबादी का 2.87 प्रतिशत है। जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न उजागर किए जाने की शर्त पर बताया कि राजग सहयोगियों ने नई सरकार के लिए मंत्रियों को चुनते समय हिंदुओं के सभी सामाजिक समूहों को खुश करने के लिए एक आदर्श संतुलन बनाया। प्रेम कुमार कहार जाति से आते हैं तो विजेंद्र यादव, यादव समुदाय से।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा नेता संतोष सुमन महादलित समुदाय से आते हैं। जदयू नेता ने कहा कि मंत्रियों के जाति विभाजन से पता चलता है कि राजग सहयोगियों ने नए मंत्रिमंडल में सभी महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों को शामिल करने के लिए पर्याप्त प्रयास किया। बता दें कि अब यादव जाति को तटस्थ करने के लिए जदयू नेता विजेंद्र यादव को मंत्री बनाया गया। वोटिंग टेंडेंसी को लेकर बिहार की सबसे आक्रामक जाति को एनडीए से जोड़ने के लिए दो-दो भूमिहार को मंत्री बनाया है। भाजपा ने तो भूमिहार नेता विजय सिन्हा को डिप्टी सीएम बना दिया और जदयू की तरफ से विजय चौधरी को भी मंत्री बनाया गया। अतिपिछड़ा जाति के लिए भाजपा ने कहार जाति के प्रेम कुमार को भी मंत्री बनाया है। एनडीए के रणनीतिकार ने बड़ी चालाकी से सरकार के भविष्य का भी ख्याल रखा। ऐसा इसलिए कि राजद जिस मैजिक नंबर के पीछे भाग रही थी, उसके आंकड़ों में हम के चार विधायक और निर्दलीय विधायक सुमित कुमार को भी शामिल किया जा रहा था। एनडीए ने राजद नेतृत्व के उस मंसूबे को ध्वस्त किया और साथ ही दलित और राजपूत जाति को भी संतुष्ट करने में सफलता पाई। 

संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक, बिहार में एक मुख्यमंत्री अधिकतम 35 मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकता है। रविवार को केवल आठ मंत्रियों ने ही पद की शपथ ली। आगे आने वाली मंत्रियों की सूची से बाकी बचे जातीय समीकरण को भी तुष्ट किए जाने के संकेत मिलने लगे हैं। रविवार की शाम सीएम समेत 9 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें नीतीश कुमार के साथ 2 उपमुख्यमंत्री और 6 कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। बीजेपी से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा डिप्टी सीएम होंगे। इसके अलावा प्रेम कुमार शामिल हैं। जदयू से विजय चौधरी, विजेंद्र यादव और श्रवण कुमार ने शपथ ली। जबिक हम से जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और निर्दलीय सुमित सिंह मंत्री बने।उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व अगले विस्तार में ब्राह्मण, मुस्लिम समुदाय, महिला विधायकों और अन्य जातियों का ख्याल रखेगा।

क्या बिहार के कैबिनेट में है जातीय आधार?

वर्तमान में बिहार के कैबिनेट में जातीय आधार है! आगामी राजनीति की सुध लेते बिहार में एनडीए की सरकार बनी। जातीय तुष्टिकरण के साथ-साथ राजद नेता तेजस्वी यादव के ए-टू-जेड समीकरण को भी ध्वस्त करने के सूत्र भी तलाश लिए गए। सीएम नीतीश कुमार के साथ शपथ लेने वालों में 8 मंत्रियों से ये स्पष्ट हो गया कि एनडीए आगामी चुनाव में किन ‘जातीय वीर’ के साथ चुनाव में उतरने जा रही है। हालांकि, आगे आने वाली मंत्रियों की सूची से बाकी बचे जातीय समीकरण को भी तुष्ट किए जाने के संकेत मिलने लगे हैं। रविवार की शाम सीएम समेत 9 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें नीतीश कुमार के साथ 2 उपमुख्यमंत्री और 6 कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। बीजेपी से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा डिप्टी सीएम होंगे। इसके अलावा प्रेम कुमार शामिल हैं। जदयू से विजय चौधरी, विजेंद्र यादव और श्रवण कुमार ने शपथ ली। जबिक हम से जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और निर्दलीय सुमित सिंह मंत्री बने।

एनडीए के मंत्रिपरिषद की जो पहली तस्वीर आई है, उसमें बिहार के प्रमुख और आक्रामक जातियों की झलक दिख गई। ऐसा लगा कि एनडीए के रणनीतिकार तेजस्वी के ए-टू-जेड फॉर्मूला को शिकस्त देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस मंत्रिपरिषद पर ध्यान दें तो सबसे ज्यादा जोर लव-कुश समीकरण पर दिया गया है। सीएम नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सी-एम सम्राट चौधरी और जदयू के श्रवण कुमार लव-कुश समीकरण को पुष्ट करते देख रहे हैं। ऐसे भी राज्य के सबसे बड़ी आबादी यादव के 14 प्रतिशत वोट के विरुद्ध लव-कुश समीकरण से ही एनडीए राजद को मात देते रही है।

अब यादव जाति को तटस्थ करने के लिए जदयू नेता विजेंद्र यादव को मंत्री बनाया गया। वोटिंग टेंडेंसी को लेकर बिहार की सबसे आक्रामक जाति को एनडीए से जोड़ने के लिए दो-दो भूमिहार को मंत्री बनाया है। भाजपा ने तो भूमिहार नेता विजय सिन्हा को डिप्टी सीएम बना दिया और जदयू की तरफ से विजय चौधरी को भी मंत्री बनाया गया। अतिपिछड़ा जाति के लिए भाजपा ने कहार जाति के प्रेम कुमार को भी मंत्री बनाया है। एनडीए के रणनीतिकार ने बड़ी चालाकी से सरकार के भविष्य का भी ख्याल रखा।बीजेपी नेतृत्व के फलसफे पर भाजपा की राजनीति के सुर बदलने आगे। अटल आडवाणी को सॉफ्ट नेताओं के विरुद्ध नरेंद्र मोदी के हाथ भाजपा और देश का नेतृत्व आया। इस धरातल पर नरेंद्र मोदी के प्राथमिकता वाले नेताओं में न नीतीश कुमार थे और न ही सुशील मोदी।

 ऐसा इसलिए कि राजद जिस मैजिक नंबर के पीछे भाग रही थी, उसके आंकड़ों में हम के चार विधायक और निर्दलीय विधायक सुमित कुमार को भी शामिल किया जा रहा था। एनडीए ने राजद नेतृत्व के उस मंसूबे को ध्वस्त किया और साथ ही दलित और राजपूत जाति को भी संतुष्ट करने में सफलता पाई। बता दें कि सम्राट चौधरी हार्ड कोर नेता माने जाते हैं। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनते ही सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को मेमोरी लॉस सीएम बताया। नीतीश को हमेशा कहते रहे हैं कि वो बिहार संभालने लायक नहीं हैं। वे डरपोक नेता हैं। यहां तक कि 2023 में सिर पर भगवा रंग का मुरेठा बांधते यह कसम भी खाई कि नीतीश कुमार के पद से हटने के बाद ही वह मुरैठ खोलेंगे। उधर, भाजपा ने नीतीश कुमार का इंतज़ाम सदन के बाहर भी कर दिया है। नरेंद्र मोदी के हनुमान चिराग पासवान ने खुलेआम कहा कि नीतीश कुमार से मेरी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। पर नरेंद्र मोदी नीत नीतियों को वह फलीभूत होने नहीं देंगे तो उन्हें चिराग पासवान का विरोध झेलना होगा। 

 

बिहार मंत्रिपरिषद की ये अंतिम तस्वीर नहीं है। आने वाले मंत्रियों की सूची में ब्राह्मण, वैश्य, अन्य पिछड़ी जातियां, दलित और मुस्लिम कोटे को भी तुष्ट किया जाएगा। तेज तर्रार नेताओं को सीएम नीतीश कुमार के अगल-बगल खड़ा किया है। याद होगा विधान सभा अध्यक्ष रहते विजय सिन्हा ने सीएम नीतीश कुमार से टकराहट भरी भाषा के साथ सवाल जवाब किया था। मसला लखीसराय का था। एक गिरफ्तारी को लेकर तब वे दोनों आमने-सामने हो गए थे। ये वही विजय सिन्हा हैं जिन्होंने नीतीश को मेंटल, बंधुआ मजदूर तक कहा था।पिछली एनडीए सरकार के कई मंत्री अभी आगामी सूची के लिए इंतजाररत हैं। मिली जानकारी के अनुसार आने वाले मंत्रियों की सूची हर संभव जातीय तुष्टिकरण की पुष्ट तस्वीर भी परोसने जा रही है।

अब बिहार में किसका रहेगा दबदबा जानिए?

आज हम आपको बताएंगे कि बिहार में अब किसका दबदबा रहेगा! बिहार में डबल इंजन की सरकार चल पड़ी है, राज्य में फिर से नीतीशे सरकार है, पर इस बार डबल इंजन की सरकार में समान पावर के इंजन लगे हैं। एनडीए की यह सरकार न तो 2005 या कि 2010 या फिर साल 2017 वाली एनडीए सरकार कतई नहीं होने जा रही है। इस बार सीएम नीतीश कुमार के सारे दाव पेंच को दुरुस्त करने के इंतजाम बीजेपी ने एनडीए सरकार की नींव डालते ही कर दिया है। जानिए क्या है बीजेपी की रणनीति। इस बार हमेशा की तरह बीजेपी के रणनीतिकारों ने सॉफ्ट नेताओं को डेप्युटी सीएम की जिम्मेदारी नहीं दी। 2005 में राज्य के डेप्युटी सीएम बने सुशील मोदी। नीतीश कुमार की पसंदीदा नेताओं में से एक रहे। डबल इंजन की सरकार अपनी गति से चल रही थी। लेकिन बाद में बीजेपी के भीतर से ही सुशील मोदी का विरोध इसलिए शुरू हो गया कि उन्हें नीतीश कुमार की हितों का रक्षक नेता माना जाने लगा। वैसे भी नीतीश कुमार या सुशील मोदी अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के पसंदीदा नेताओं में शुमार किए जाते रहे। लेकिन देश में बीजेपी नेतृत्व के फलसफे पर भाजपा की राजनीति के सुर बदलने आगे। अटल आडवाणी को सॉफ्ट नेताओं के विरुद्ध नरेंद्र मोदी के हाथ भाजपा और देश का नेतृत्व आया। इस धरातल पर नरेंद्र मोदी के प्राथमिकता वाले नेताओं में न नीतीश कुमार थे और न ही सुशील मोदी।

लेकिन 2017 में एनडीए की सरकार बनी तो रेणु देवी और तार किशोर प्रसाद को डेप्युटी सीएम बनाया गया। ये भी नीतीश कुमार के आगे प्रभावहीन ही रहे। इस बार भाजपा ने बड़ी सोच समझकर अनुभवी और तेज तर्रार नेताओं को सीएम नीतीश कुमार के अगल-बगल खड़ा किया है। याद होगा विधान सभा अध्यक्ष रहते विजय सिन्हा ने सीएम नीतीश कुमार से टकराहट भरी भाषा के साथ सवाल जवाब किया था। मसला लखीसराय का था। एक गिरफ्तारी को लेकर तब वे दोनों आमने-सामने हो गए थे। ये वही विजय सिन्हा हैं जिन्होंने नीतीश को मेंटल, बंधुआ मजदूर तक कहा था।

सम्राट चौधरी हार्ड कोर नेता माने जाते हैं। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनते ही सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार को मेमोरी लॉस सीएम बताया। नीतीश को हमेशा कहते रहे हैं कि वो बिहार संभालने लायक नहीं हैं। वे डरपोक नेता हैं। यहां तक कि 2023 में सिर पर भगवा रंग का मुरेठा बांधते यह कसम भी खाई कि नीतीश कुमार के पद से हटने के बाद ही वह मुरैठ खोलेंगे। उधर, भाजपा ने नीतीश कुमार का इंतज़ाम सदन के बाहर भी कर दिया है। नरेंद्र मोदी के हनुमान चिराग पासवान ने खुलेआम कहा कि नीतीश कुमार से मेरी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। पर नरेंद्र मोदी नीत नीतियों को वह फलीभूत होने नहीं देंगे तो उन्हें चिराग पासवान का विरोध झेलना होगा।

बता दे कि बिहार में महागठबंधन की सरकार का अंत हो गया है। नीतीश कुमार के शब्दों में उन्होंने पिछली सरकार को खत्म कर दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि अब यहीं रहेंगे। सियासी जानकार मानते हैं कि बीजेपी इन दिनों अपना हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है। जानकारों की मानें, तो पार्टी ने सबसे पहले दो नेताओं को नीतीश के आगे-पीछे डिप्टी सीएम के रूप में लगा दिया है। पहले नेता विजय कुमार सिन्हा हैं। ये भूमिहार समाज से आते हैं। दूसरे नेता सम्राट चौधरी, जो लव-कुश समीकरण को साधते हैं। अपनी आक्रामक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। जाहिर है, बीजेपी ने ओबीसी और ऊंची जाति के संयोजन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। बीजेपी को पता है कि लोकसभा चुनाव मुश्किल से कुछ महीने दूर हैं।

नीतीश के नेतृत्व वाले एनडीए ने 2020 का विधानसभा चुनाव भी एक साथ जीता था। जिसके बाद भाजपा ने ओबीसी वैश्य नेता तारकिशोर प्रसाद और ईबीसी नोनिया नेता रेनू देवी को डिप्टी सीएम नियुक्त किया था। वे अगस्त 2022 तक अपने पद पर बने रहे। उसके बाद 9 अगस्त, 2022 को नीतीश कुमार आरजेडी के पाले में चले गए। तब तक दोनों नेता डिप्टी सीएम बने रहे। बीजेपी का पिछला ओबीसी-ईबीसी प्रयोग असफल रहा था। पार्टी ने नीतीश पर लगातार हमला करने वाले सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को डिप्टी सीएम बना दिया है। चौधरी अब काम में व्यस्त रहेंगे। पार्टी को उम्मीद है कि अपनी नई भूमिका में ये लोग नीतीश के प्रतिनिधि के रूप में काम करेंगे। अपनी आक्रामकता भी कम करेंगे। जरूरत पड़ने पर पार्टी का इशारा होते ही, जेडीयू प्रमुख यानी नीतीश कुमार को काबू में भी रखेंगे।

बीजेपी से जुड़े सूत्र कहते हैं कि चौधरी को आगे बढ़ाने का भाजपा का एक कारण उन्हें राज्य की राजनीति में आगे किए रहना है। सम्राट चौधरी को बीजेपी बहुत कुछ सोच समझकर आगे बढ़ा रही है। सम्राट को इस बार महत्वपूर्ण भूमिका देना जरूरी था। इससे कार्यकर्ताओं में एक अच्छा संदेश जाएगा। दूसरी बात की पार्टी नीतीश को अपने साथ लेकर लोकसभा चुनाव को साधने की कवायद में जुटी है। इसका ताजा प्रमाण है, जेपी नड्डा का बयान जो उन्होंने पटना में दिया। नड्डा ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से बिहार के विकास को गति मिलेगी। अब बिहार विकास की ओर अग्रसर होगा। नड्डा ने कहा कि बिहार में जनता ने एनडीए को जनादेश दिया था और अब डबल इंजन की सरकार राज्य का विकास करेगी। उन्होंने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि नीतीश कुमार फिर से एनडीए में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी है स्थिरता आई है और डबल इंजन का बेहतर प्रभाव रहेगा। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एनडीए लोकसभा चुनाव में स्वीप करेगी तथा विधानसभा चुनाव में भी एनडीए की सरकार बनेगी।