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क्या अब चीन को धूल चटाएगा भारत?

आने वाले समय में भारत और चीन को धूल चटा सकता है! भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में दुनिया की दो सबसे ऊंची टैंक मरम्मत करने की जगह बनाई है। यहां पर 500 से अधिक टैंक और पैदल सेना के लिए लड़ाकू वाहन तैनात किया गया हैं जिससे इसके संचालन में सहायता मिल सके। इसके साथ ही 14,500 फीट से अधिक ऊंचाई पर पूर्वी लद्दाख में न्योमा और डीबीओ सेक्टर में चीन की सीमा के पास टैंक और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों के लिए दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र बन गया है। बता दें कि चीनी आक्रामकता के कारण अप्रैल-मई 2020 में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में टैंक, बीएमपी लड़ाकू वाहन और भारत निर्मित बख्तरबंद लड़ाकू वाहन पूर्वी लद्दाख में तैनात किए गए हैं। भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि टैंकों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों को इन अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया है।क्षेत्र में बख्तरबंद वाहनों के संचालन को बनाए रखने में मदद करने के लिए, हमने न्योमा में और डीबीओ सेक्टर में डीएस-डीबीओ रोड पर केएम-148 के पास ये मध्यम रखरखाव (रीसेट) सुविधाएं स्थापित की हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ये दो मुख्य क्षेत्र हैं जहां पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में टैंक और आईसीवी संचालन केंद्रित हैं। भारतीय सेना द्वारा अत्यधिक कम तापमान वाले उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में टी-90, टी-72, बीएमपी और के-9वज्र स्व-चालित हॉवित्जर जैसे टैंकों को समायोजित करने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने हाल ही में बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों (एएफवी) के लिए मध्यम रखरखाव (रीसेट) सुविधा का निरीक्षण किया और इसकी विशिष्ट रखरखाव विशेषताओं का अवलोकन किया। सेना के अधिकारियों के अनुसार, नई सुविधाएं टैंकों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों की सेवाक्षमता और मिशन विश्वसनीयता में सुधार करती हैं। सुविधाएं सुनिश्चित करती हैं कि लड़ाकू बेड़ा उबड़-खाबड़ इलाकों और कठोर मौसम की स्थिति में भी परिचालन के लिए तैयार रहे, जहां तापमान शून्य से 40 डिग्री नीचे चला जाता है।

बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों (AFV) के लिए विशेष तकनीकी सहायता बुनियादी ढांचे की तैनाती से परिचालन दक्षता और युद्ध के लिए तत्परता में सुधार हुआ है। वायु सेना के बेड़े में अगली पीढ़ी के विमानों को शामिल कर रहा है, जिसके लिए एफ-35 का अधिग्रहण किया जाना है। सिंगापुर के पास अभी एफ-16 लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें 2030 के दशक के मध्य तक बाहर किए जाने की योजना है।भारत और चीन पिछले चार वर्षों से पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में गतिरोध में हैं, जिसमें दोनों पक्षों ने सीमाओं के पास लगभग 50,000 सैनिक तैनात किए हैं। संघर्ष के दौरान, चीन ने उस क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति को एकतरफा रूप से बदलने के लिए बड़ी संख्या में पैदल सेना, लड़ाकू वाहन और टैंक पेश किए। भारतीय सेना ने तुरंत जवाब दिया, प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करने के लिए सी-17 परिवहन विमान का उपयोग करके रेगिस्तान और मैदानी इलाकों से भारी बख्तरबंद इकाइयों को तेजी से तैनात किया।

किया।

यही नहीं चीन से मुकाबले के लिए अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बड़ी महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत अगले एक दशक में इस इलाके में 300 से ज्यादा अत्याधुनिक एडवांस F-35 लड़ाकू विमानों की तैनाती होने वाली है। इन सभी विमानों को अमेरिका खुद तैनात नहीं करने जा रहा है, बल्कि वह इन्हें इस इलाके में अपने सहयोगियों को सौंपने जा रहा है। इनमें अमेरिका के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर शामिल हैं। चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए इंडो-पैसिफिक में एफ-35 फाइटर जेट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लॉकहीड मार्टिन को 2020 में सिंगापुर क लिए 12 F-35B शॉर्ट टेक ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग विमानों की बिक्री की मंजूरी दी थी। अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन इन विमानों का निर्माण करती है। आक्रामकता के कारण अप्रैल-मई 2020 में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में टैंक, बीएमपी लड़ाकू वाहन और भारत निर्मित बख्तरबंद लड़ाकू वाहन पूर्वी लद्दाख में तैनात किए गए हैं। भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि टैंकों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों को इन अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया है।इनमें से पहले चार विमानों को 2026 तक सौंप दिया जाना है। सिंगापुर अपने वायु सेना के बेड़े में अगली पीढ़ी के विमानों को शामिल कर रहा है, जिसके लिए एफ-35 का अधिग्रहण किया जाना है। सिंगापुर के पास अभी एफ-16 लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें 2030 के दशक के मध्य तक बाहर किए जाने की योजना है।

आखिर क्यों बढ़ावा मिल रहा है मुफ्त राशन वाली राजनीति को?

वर्तमान में मुफ्त राशन वाली राजनीति को बहुत बढ़ावा मिल रहा है! कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कहा कि चुनाव जीतने पर उनकी सरकार गरीबों को हर महीने 10 किलो अनाज देगी। चुनाव के चार चरण बीत जाने के बाद कांग्रेस की इस योजना की घोषणा के मायने समझने के लिए दो साल पहले उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव को याद करना जरूरी है। उस चुनाव में बीजेपी की जीत के पीछे इस योजना को एक बड़ी वजह माना जाता रहा है। इसलिए कहा जाता है कि मोदी सरकार की ओर से पिछले साल दिसंबर में ही खत्म होने वाली इस योजना को पांच और सालों के लिए बढ़ाने की घोषणा के पीछे भी वजहें चुनावी फायदे से जुड़ी थी। पिछले साल नवंबर में पांच राज्यों के चुनावों के बीचो बीच पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ की एक रैली में इस योजना को बढ़ाने की घोषणा की थी। ये योजना कोविड के दौरान जून 2020 में शुरू गई थी, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीब नागरिकों को पांच किलो गेहूं या चावल मुफ्त मिलता है। अब ये योजना दिसंबर 2028 तक कायम रहेगी। पीएम अपनी चुनावी रैलियों में लगातार इस योजना का जिक्र करते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इसे अपने अपनी नीतियों से निकली रीब्राडिंग वाली योजना ही कहती है।

कांग्रेस ने कई बार कहा है कि कि ये योजना यूपीए-2 के वक्त पारित किए गए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की ही रीब्रांडिंग है। बता दें कि 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ गए हैं, तो 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज क्यों दिया जा रहा है। इसे लेकर पीएम ने संसद में ही कहा था कि हम अनाज देते हैं और देते रहेंगे, क्योंकि 25 करोड़ लोग निम्न मध्यम वर्ग बन गए हैं, और हमें उनकी जरूरतों और महत्व के बारे में बेहतर समझ है। हाल ही में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स में पोस्ट कर कहा था कि 7 अगस्त 2013 को लिखी एक चिट्ठी में बतौर गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का विरोध किया था। कांग्रेस कहती है कि 2013 में यूपीए द्वारा पारित एनएफएसए, भारत के इतिहास का सबसे ऐतिहासिक और अहम कानून में से एक था। इसके तहत 75% ग्रामीण और 50% शहरी भारतीयों को कानूनी अधिकार के रूप में सब्सिडी वाले राशन की गारंटी मिली थी। ऐसे में जब आबादी 141 करोड़ है, तो इसके तहत 95 करोड़ लोगों को सब्सिडी वाला राशन मिलना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि देश में 2021 की जनगणना कराने में मोदी सरकार विफल रही है, ऐसे में सिर्फ 81 करोड़ लोगों को ही राशन मिल रहा है और 14 करोड़ भारतीय इस अधिकार से वंचित हैं।

राजनीतिक विश्लेषक यशवंत देशमुख कहते हैं कि योजनाओं की घोषणा अपनी जगह है, लेकिन वोट करने में दूसरे फैक्टर भी काम करते हैं। वो कहते हैं, ‘राजनीतिक दल अपनी ओर से घोषणाओं और स्कीम की घोषणा करते रहते हैं लेकिन इसमें विश्वसनीयता एक अहम फैक्टर होता है। लोगों को जिस की बात पर ज्यादा यकीन होता है, वो उसी दल की घोषणा पर वोट करते हैं।’ ऐसे में सवाल ये भी उठते रहे हैं कि अगर सरकार के मुताबिक 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ गए हैं, तो 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज क्यों दिया जा रहा है। इसे लेकर पीएम ने संसद में ही कहा था कि हम अनाज देते हैं और देते रहेंगे, क्योंकि 25 करोड़ लोग निम्न मध्यम वर्ग बन गए हैं, और हमें उनकी जरूरतों और महत्व के बारे में बेहतर समझ है।

पिछले साल 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बीच पीएम की ओर से मुफ्त राशन की योजना को लेकर विपक्ष की ओर से कई सवाल उठाए गए थे। टीएमसी जैसी पार्टियों ने पीएम की ओर से इस की घोषणा की टाइमिंग को लेकर मोदी सरकार को कठघरे में लिया था। जानकारों का मानना है कि जिन राज्यों में मध्यम निम्न वर्ग और गरीबों की तादाद ज्यादा होती है, वहां ये इस तरह की घोषणाएं ज्यादा फायदा पहुंचाती हैं। मोदी सरकार की ओर से पिछले साल दिसंबर में ही खत्म होने वाली इस योजना को पांच और सालों के लिए बढ़ाने की घोषणा के पीछे भी वजहें चुनावी फायदे से जुड़ी थी। पिछले साल नवंबर में पांच राज्यों के चुनावों के बीचो बीच पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ की एक रैली में इस योजना को बढ़ाने की घोषणा की थी।खासतौर से यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में इसे अहम बताया जाता है। ऐसे में चुनावों के बीच मुफ्त राशन की घोषणा का जिक्र होना अस्वाभाविक नहीं, जबकि कांग्रेस इसे अपनी ही योजना बताती रही है।

आखिर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों निरस्त की न्यूजक्लिक के फाउंडर की गिरफ्तारी?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने न्यूजक्लिक के फाउंडर की गिरफ्तारी निरस्त करती है! सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ की यूएपीए मामले में गिरफ्तारी और रिमांड को कानून की नजर में अमान्य और निरस्त है। कोर्ट ने कहा कि रिमांड अर्जी में गिरफ्तारी के आधार लिखित तौर पर देने होते हैं और मौजूदा मामले में रिमांड ऑर्डर से पहले रिमांड की कॉपी आरोपी प्रबीर और उनके वकील को मुहैया नहीं कराई गई। कोर्ट ने कहा कि 4 अक्टूबर 2023 को रिमांड के आदेश से पहले रिमांड अर्जी की कॉपी आरोपी को मुहैया नहीं कराए जाने से उसकी गिरफ्तारी और रिमांड निरस्त हो जाते हैं। ऐसे में आरोपी रिहाई का हकदार है। कोर्ट ने शीर्ष अदालत द्वारा पंकज बंसल केस में दिए गए फैसले का हवाला दिया और कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश कानून की नजर में मान्य नहीं है और वह आदेश खारिज किया जाता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम बिना बेल बॉन्ड और स्योरिटी के रिहाई के लिए कह सकते थे। लेकिन चूंकि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, ऐसे में आरोपी को ट्रायल कोर्ट के सामने बेल बॉन्ड भरना होगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के बाद 30 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली पुलिस की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए थे, जबकि याचिकाकर्ता प्रबीर की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए। अदालत के फैसले के बाद अडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजू ने कहा कि चूंकि गिरफ्तारी को अमान्य करार दिया गया है, ऐसे में पुलिस को गिरफ्तारी की शक्ति से रोकना नहीं चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। आपके पास जो भी कानून के दायरे में शक्ति है, उसे कानून इजाजत देता है।

पिछले साल 18 अक्टूबर को न्यूज़क्लिक के चीफ एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने यूएपीए के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी को वैलिड करार दिया था, जिसके बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई में सिब्बल ने कहा था कि यह मामला जर्नलिस्ट से जुड़ा हुआ है और वह पुलिस कस्टडी में हैं। सिब्बल ने कहा था कि आरोपी को गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया और यह संविधान के स्कीम का उल्लंघन है। एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई। गिरफ्तारी और रिमांड आदेश से पहले रिमांड की कॉपी नहीं दी गई। यह अनुच्छेद-20,21 और 22 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। रात में याची को पकड़ा गया और गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया। सुबह छह बजे उन्हें मैजिस्ट्रेट के घर पर पेश कर रिमांड पर लिया या और सुबह 7 बजकर पांच मिनट पर उनके वकील को वट्सऐप पर जानकारी दी गई।

वहीं दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी को मौखिक तौर पर गिरफ्तारी का आधार बताया गया, साथ ही अरेस्ट मेमो दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून कहता है कि एफआईआर कोई इनसाइक्लोपीडिया नहीं। जांच अधिकारी को अधिकार है कि वह छानबीन करे और चार्जशीट दाखिल करे। सिब्बल की दलील है कि यूएपीए लगाया गया, लेकिन कैसे कनेक्ट है यह नहीं बताया गया।

यह सवाल उठा था कि क्या गिरफ्तारी का आधार बताया गया? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने अरेस्ट मेमो को देखा है और उसमें कहीं भी गिरफ्तारी का आधार नहीं लिखा है। अरेस्ट मेमो में साधारण तौर पर जो परफर्मा होता है, उसमें गिरफ्तारी का औपचारिक कारण दर्ज है। गिरफ्तारी का कारण और गिरफ्तारी के आधार में फर्क होता है। इसमें डिटेल में आधार गिनाए जाते हैं कि क्यों गिरफ्तारी जरूरी थी और आरोपी को मुहैया कराना जरूरी है, क्योंकि उसके आधार पर आरोपी रिमांड के दौरान अपना बचाव कर सके और जमानत के दौरान दलील पेश कर सके।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें संदेह नहीं है कि रिमांड अर्जी में गिरफ्तारी का आधार होता है और रिमांड दिए जाने से पहले वह कॉपी ना तो याची को दी गई और ना ही उनके वकील को मुहैया कराई गई। ऐसे में आरोपी रिलीज के हकदार हैं। आरोपी की गिरफ्तारी, रिमांड आदेश और हाई कोर्ट का आदेश कानून की नजर में अमान्य करार दिया जाता है।

मौजूदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसके दूरगामी परिणाम होंगे। दरअसल इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पंकज बंसल केस में शीर्ष अदालत के फैसले को रेफर किया है। पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने पंकज बंसल केस में कहा था कि आरोपी को गिरफ्तारी के बारे में बताया जाए कि उसकी गिरफ्तारी का आधार क्या है और यह उसे लिखित में बताना जरूरी है। इसके लिए कोई अपवाद नहीं हो सकता। अब मौजूदा मामले में आरोपी प्रबीर की गिरफ्तारी और रिमांड को इसी आधार पर अमान्य करार दिया गया कि उन्हें रिमांड के दौरान लिखित में नहीं बताया गया कि गिरफ्तारी का आधार क्या है। अब सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह फैसला आने वाले केसों के लिए नजीर बनेगा।

नागरिकता संशोधन कानून के लिए क्या बोले पाकिस्तान से आए लोग?

हाल ही में पाकिस्तान से आए लोगों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के लिए एक बयान दिया है! नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत कई लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई। CAA से नागरिकता पाए लोगों ने खुशी जताई। नागरिकता पाने वाली भावना ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मुझे आज नागरिकता मिल गई है। अब मैं आगे पढ़ सकती हूं। मैं 2014 में यहां आई थी और जब CAA पारित हुआ तो मुझे बहुत खुशी हुई। पाकिस्तान में हम लड़कियां पढ़ नहीं पाती थीं। जब वहां हमें बाहर जाना होता था तो हम बुर्का पहनते थे। भारत में हमें पढ़ने को मिलता है। मैं अभी 11वीं क्लास में हूं।’ 3 महीने पहले 400 से ज्यादा शरणार्थियों का गृह मंत्रालय ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया था। 24 वर्षीय भरत कुमार ने कहा, ‘जब हम यहां आए तब मैं 13 साल का था। हमें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा क्योंकि डर के साए में रहना मुश्किल था।’ पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए भारत भाग कर आने वाले भरत कुमार का संघर्ष 11 साल के लंबे इंतजार के बाद बुधवार को समाप्त हो गया। यही नहीं मजनू का टीला में रहने वाली शीतल दास आजीविका के लिए मोबाइल फोन कवर बेचती हैं। उन्होंने कहा कि उनका 19 लोगों का परिवार 2013 में पाकिस्तान के सिंध से भागकर यहां आया था। उनके परिवार में से तीन लोगों को नागरिकता मिल गई है। शीतल ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। सरकार ने हमारी इच्छा पूरी की। अब मैं भारत में सम्मानजनक जीवन जी सकती हूं। उन्हें मिलाकर कुल 14 लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम सीएए के तहत भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान की गई। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने एक विशेष समारोह में 14 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान किये।

नागरिकता प्राप्त करने के कुछ मिनट बाद 24 वर्षीय भरत ने कहा कि भारतीय होना एक शानदार अहसास है। इसने मुझे एक नया जीवन दिया है। भरत ने कहा कि उनका परिवार पाकिस्तान के सिंध प्रांत में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए भारत आया था। भरत कुमार का परिवार दिल्ली में मजनू का टीला इलाके में रहता है और छोटा-मोटा काम करता है। उन्होंने कहा कि बुधवार को उनके इलाके में कुल पांच लोगों को भारतीय नागरिकता मिली जबकि सौ से अधिक लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था। हमें बताया गया कि बाकी आवेदकों को भी उचित समय पर नागरिकता मिल जाएगी। भरत ने कहा कि भारतीय नागरिकता पाना उनके लिए किसी ‘सपने के सच होने’ जैसा है। मजनू का टीला में रहने वाली शीतल दास आजीविका के लिए मोबाइल फोन कवर बेचती हैं। उन्होंने कहा कि उनका 19 लोगों का परिवार 2013 में पाकिस्तान के सिंध से भागकर यहां आया था। उनके परिवार में से तीन लोगों को नागरिकता मिल गई है। शीतल ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। सरकार ने हमारी इच्छा पूरी की। अब मैं भारत में सम्मानजनक जीवन जी सकती हूं।

पाकिस्तान के सिंध से आईं यशोदा ने भी भारतीय नागरिकता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि वह अब एक भारतीय के रूप में सम्मानजनक जीवन जी सकती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि भारत की नागरिकता मिलने से अब उनके परिवार और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। भारतीय नागरिकता पाने का मेरा लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है। मैं वास्तव में बहुत खुश हूं। सीएए के तहत बुधवार को 14 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किए गए। तीन पड़ोसी देशों के सताए हुए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने वाला सीएए दो महीने पहले लागू किया गया था। महीने पहले 400 से ज्यादा शरणार्थियों का गृह मंत्रालय ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया था। 24 वर्षीय भरत कुमार ने कहा, ‘जब हम यहां आए तब मैं 13 साल का था। हमें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा क्योंकि डर के साए में रहना मुश्किल था।’ पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए भारत भाग कर आने वाले भरत कुमार का संघर्ष 11 साल के लंबे इंतजार के बाद बुधवार को समाप्त हो गया।उन्होंने कहा कि बुधवार को उनके इलाके में कुल पांच लोगों को भारतीय नागरिकता मिली जबकि सौ से अधिक लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था। हमें बताया गया कि बाकी आवेदकों को भी उचित समय पर नागरिकता मिल जाएगी। भरत ने कहा कि भारतीय नागरिकता पाना उनके लिए किसी ‘सपने के सच होने’ जैसा है।बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से प्रताड़ित हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए दिसंबर 2019 में सीएए अधिनियमित किया गया था। ये कानून 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आने वाले गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागकिता प्रदान करता है।

जब उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई इंडिया गठबंधन की महा प्रेस कॉन्फ्रेंस!

हाल ही में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इंडिया गठबंधन की महा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी! लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दलों के बड़े-बड़े नेता इस समय चुनाव प्रचार में खूब पसीना बहा रहे हैं। बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सपा मुखिया अखिलेश यादव लखनऊ में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। इसके बाद दोनों नेता अलग-अलग जिलों में चुनाव प्रचार भी करेंगे। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, बसपा सुप्रीमो मायावती, कांग्रेस महासचिव समेत कई नेता-मंत्री चुनाव प्रचार करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मायावती कल (गुरुवार) बांदा जिले के अतर्रा स्थित हिन्दू इंटर कॉलेज के मैदान में जनसभा को संबोधित करेंगी। यूपी की राजधानी लखनऊ के लिए 15 मई का दिन बेहद अहम हुआ । बुधवार सुबह 10:30 बजे ताज होटल में इंडिया गठबंधन की संयुक्त कॉन्फ्रेंस होने जा रही है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मौजूद रहेंगे। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष दोपहर 1:30 बजे रायबरेली के हरचंदपुर में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। फिर अमेठी के लिए रवाना हो जाएंगे। अमेठी में अपराह्न 3:15 पर कांग्रेस प्रत्याशी के.एल. शर्मा के समर्थन में जनसभा करेंगे। इस दौरान अमेठी लोकसभा चुनाव प्रभारी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मौजूद रहेंगे।

रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सीट से उम्मीदवार राजनाथ सिंह बुधवार को लखनऊ दौरे पर रहेंगे। राजनाथ सिंह शाम 6 बजे मोहनलालगंज लोकसभा सीट से बीजेपी कैंडिडेट कौशल किशोर के लिए बीकेटी इंटर कॉलेज में जनसभा को संबोधित करेंगे। सीएम योगी 15 मई को महोबा, जालौन, झांसी और लखनऊ के दौरे पर रहेंगे। सीएम योगी दोपहर 12:45 बजे डाक बंगला मैदान महोबा, 2:15 बजे जीआईसी इंटर कॉलेज, उरई जालौन और 3:50 बजे झांसी में काली जी का मंदिर लक्ष्मी गेट से दतिया गेट तक रोड शो करेंगे। फिर शाम 7 बजे लखनऊ के अमीनाबाद चौराहा पर जनसभा को सम्बोधित करेंगे।

सपा मुखिया अखिलेश यादव 15 मई को बलरामपुर की गैसड़ी विधान और फैजाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी जनसभाओं को सम्बोधित करेंगे। अखिलेश 12:30 बजे गैंसड़ी के विशुनपुर टनटनवा में सपा इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी राकेश कुमार यादव के पक्ष में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे अयोध्या जिले के मवई बाजार के पास मैदान में फैजाबाद लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने जाएंगे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा में नुक्कड़ सभाएं और जनसंपर्क कर कांग्रेस की समर्थन में वोट की अपील करेंगी। प्रियंका उमरन, अकोढ़िया, नगर ऊंचाहार, मतीनगंज, कुरौली बुधकर बालमपुर और विश्वनाथगंज में चुनाव प्रचार करेंगी।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बुधवार को सिद्धार्थनगर और कौशाम्बी के प्रवास पर रहेंगे, जबकि प्रदेश के दूसरे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक गोरखपुर और श्रावस्ती के दौरे पर रहेंगे। वहीं, केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी श्रावस्ती, बाराबंकी और रायबरेली के दौरे पर रहेंगी। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह प्रयागराज में पार्टी से जुड़े सम्मेलन को संबोधित करेंगे। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण भी प्रयागराज के प्रवास पर रहेंगे। पिछड़ा मोर्चा के सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके साथ ही बीजेपी अनुसूचित वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष लाल सिंह आर्य बुधवार को गोण्डा दौरे पर रहेंगे।इसके अलावा प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद बस्ती और प्रयागराज के प्रवास पर रहेंगे। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा सुबह 10 बजे मोहनलालगंज लखनऊ में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री एवं पीलीभीत से बीजेपी उम्मीदवार जितिन प्रसाद सुबह 10 बजे हमीरपुर में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री नितिन अग्रवाल सुबह 10 बजे बांदा में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री अनिल राजभर सुबह 10 बजे कैसरगंज बहराइच में जनसम्पर्क करेंगे। कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी शाम 6 बजे प्रयागराज के राजापुर करमा में व्यापारी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। मंत्री दारा सिंह चौहान 4 बजे चन्दौली में पिछड़ा मोर्चा को संबोधित करेंगे। मंत्री राकेश सचान सुबह 10 बजे फतेहपुर में जनसम्पर्क करेंगें। मंत्री धर्मवीर प्रजापति अम्बेडकरनगर और फतेहपुर के प्रवास पर रहेंगे।

यूपी सरकार के मंत्री अरुण सक्सेन चन्दौली के प्रवास पर रहेंगे। मंत्री कपिल देव अग्रवाल जालौन सुबह 10 बजे जालौन में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री राकेश राठौर सुबह 10 बजे अयोध्या में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री सोमेन्द्र तोमर सुबह 10 बजे बाराबंकी में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री नरेन्द्र कश्यप प्रयागराज दौरे पर रहेंगे। मंत्री जसवंत सैनी सुबह 10 बजे झांसी में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री ब्रजेश सिंह दोपहर 3 बजे गोरखपुर में किसान मोर्चा सम्मेलन को सम्बोधित करेंगे। प्रदेश सरकार में मंत्री अजीत पाल हमीरपुर में जनसम्पर्क करेंगे। मंत्री प्रतिभा शुक्ला अमेठी में जनसम्पर्क करेंगी। मंत्री रजनी तिवारी बाराबंकी में जनसम्पर्क करेंगी। मंत्री अजीत पाल बांदा में जनसम्पर्क करेंगे।

क्या दिल्ली में लोकसभा चुनाव की हो चुकी है तैयारी पूरी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या दिल्ली में लोकसभा चुनाव की तैयारी पूरी हो चुकी है या नहीं! 25 मई को दिल्ली में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली निर्वाचन आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पी.कृष्णमूर्ति के अनुसार 2019 लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार वोटरों की संख्या में करीब 8.85 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। साल 2019 के चुनाव में वोटरों की संख्या 1,43,16,453 थी जो 2024 लोकसभा चुनाव में 1,52,01,936 हो गया है। सुरक्षा के लिहाज से चुनाव में पैरा-मिलिट्री फोर्स की 46 बटालियन तैनात किया जाएगा। 78 हजार दिल्ली पुलिस के जवान होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार साल 2019 के चुनाव की तुलना में इस साल लोकसभा चुनाव में वोटरों की संख्या में 8,85,483 की बढ़ोतरी हुई है। फर्स्ट टाइम वोटरों की संख्या में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में कमी आई है। पिछले लोकसभा चुनाव में ऐसे वोटरों की संख्या 2,54,723 थी जो अब 2,52,038 है। पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी वोटर्स) वोटरों की संख्या में 36,948 की बढ़ोतरी हुई है। सर्विस वोटरों की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में 1697 बढ़ी है। ओवरसीज वोटरों की संख्या में 281 की बढ़ोतरी हुई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार पहले एक पोलिंग बूथ पर वोटरों की संख्या 1500 थी लेकिन इस बार वोटरों की संख्या 1800 कर दी गई है। जिस पोलिंग स्टेशन पर 1800 से अधिक वोटर हैं, वहां ऑग्जिलियरी पोलिंग स्टेशन आसपास बनाए जाएंगे। इस तरह से चार ऑग्जिलियरी पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इसमें 1-1 ऑग्जिलियरी पोलिंग स्टेशन नई दिल्ली और नॉर्थ-वेस्ट में और दो साउथ दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में बनाए जाएंगे।

विशेष सुरक्षा व्यवस्था के लिए इस बार 25 मई को मतदान के दिन दिल्ली में CRPF की 46 बटालियन तैनात किया जाएगा। एक बटालियन में करीब 1300 जवान होते हैं। इस तरह CRPF के कुल 59,800 जवान होंगे। इसके अलावा होमगार्ड के 19,000, दिल्ली पुलिस के 78,000 जवान होंगे। नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में सबसे कम 1488 पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। 13,637 पोलिंग स्टेशनों में से 2800 पोलिंग स्टेशन संवेदनशील बताए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पी. कृष्णमूर्ति के अनुसार जितने भी संवेदनशील पोलिंग स्टेशन हैं वहां मतदान प्रक्रिया का लाइव वेबकास्ट किया जाएगा।दिल्ली में 78 हजार जवानों में से 33,000 को पोलिंग स्टेशनों और उसके आसपास तैनात किया जाएगा। मतदान संपन्न कराने के लिए करीब एक लाख पोलिंग पार्टी को इस बार नियुक्त किया गया है जिसमें सेक्टर अफसर, माइक्रो-ऑब्जर्वर, स्टैटिक सर्वेयर और बाकी चुनावकर्मी होंगे। मतदाताओं की मदद के लिए 180 साइन लैंग्वेज ट्रांसलेटर भी नियुक्त किए जाएंगे।

दिल्ली में मतदान के लिए कुल 13,637 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे जिसमें सबसे अधिक 2454 मतदान केंद्र नॉर्थ-वेस्ट लोकसभा क्षेत्र में बनाए जाएंगे। पोलिंग स्टेशन के मामले में दूसरा सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र वेस्ट दिल्ली है, जहां 2283 पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में सबसे कम 1488 पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। 13,637 पोलिंग स्टेशनों में से 2800 पोलिंग स्टेशन संवेदनशील बताए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पी. कृष्णमूर्ति के अनुसार जितने भी संवेदनशील पोलिंग स्टेशन हैं वहां मतदान प्रक्रिया का लाइव वेबकास्ट किया जाएगा। कुल पोलिंग स्टेशन के 50 प्रतिशत पोलिंग स्टेशन में मतदान प्रक्रिया का लाइव वेबकास्ट की प्लानिंग है।

दिल्ली के सात लोकसभा क्षेत्रों में 13,637 पोलिंग स्टेशन हैं, जिसमें से 20.5 प्रतिशत पोलिंग स्टेशनों की संवेदनशील के रूप में पहचान की गई है। यानी 2800 पोलिंग स्टेशन संवेदनशील हैं। जिस पोलिंग स्टेशन पर 1800 से अधिक वोटर हैं, वहां ऑग्जिलियरी पोलिंग स्टेशन आसपास बनाए जाएंगे। इस तरह से चार ऑग्जिलियरी पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इसमें 1-1 ऑग्जिलियरी पोलिंग स्टेशन नई दिल्ली और नॉर्थ-वेस्ट में और दो साउथ दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में बनाए जाएंगे।ये पोलिंग स्टेशन जिन क्षेत्रों में हैं, उनमें पिछले कुछ महीनों में आपराधिक गतिविधियां बढ़ी हैं या फिर अपराधियों का प्रभाव अधिक है। इसमें कुछ ऐसे भी पोलिंग स्टेशन हैं, जहां जातीय हिंसा या सांप्रदायिक तनाव की स्थिति की आशंका पुलिस को है। 78 हजार दिल्ली पुलिस के जवान होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार साल 2019 के चुनाव की तुलना में इस साल लोकसभा चुनाव में वोटरों की संख्या में 8,85,483 की बढ़ोतरी हुई है। फर्स्ट टाइम वोटरों की संख्या में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में कमी आई है। पिछले लोकसभा चुनाव में ऐसे वोटरों की संख्या 2,54,723 थी जो अब 2,52,038 है।अगर किसी पोलिंग स्टेशन पर पहले किसी चुनाव के दौरान ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई कि वहां री-पोलिंग कराने की नौबत आ गई, तो उसे भी इस कैटिगरी में शामिल किया जाता है। किसी एक प्रत्याशी को अगर किसी पोलिंग स्टेशन पर 75 प्रतिशत से अधिक वोट मिला होता है, तो वह भी पोलिंग स्टेशन संवेदनशील की कैटिगरी में शामिल कर लिया जाता है।

आखिर क्या है ईस्ट दिल्ली की लोकसभा सीट का गणित?

आज हम आपको ईस्ट दिल्ली की लोकसभा सीट का गणित बताने जा रहे हैं! राजधानी दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर 25 मई को वोटिंग होनी है। इस बार पूर्वी दिल्ली यानी ईस्ट दिल्ली सीट काफी चर्चा में है। इस सीट पर बीजेपी ने हर्ष हर्ष मल्होत्रा को मौका दिया है, तो वहीं आम आदमी पार्टी ने कुलदीप कुमार को टिकट दिया है। ईस्ट दिल्ली के लोगों का कहना है कि चुनाव आते जाते रहते हैं, लेकिन उनकी समस्याएं जस की तस रहती हैं। यहां गंदगी, पानी की कमी और ट्रैफिक जाम चुनावी मुद्दे हैं। ईस्ट दिल्ली में 21 लाख से ज्यादा वोटर्स हैं। फिलहाल यहां बीजेपी के गौतम गंभीर सांसद हैं।  ईस्ट दिल्ली सीट पर कुल वोटरों की संख्या 21 लाख 6 हजार 642 हैं। इसमें से 9.62 लाख महिलाएं, 11.44 लाख पुरुष और 101 थर्डजेंडर वोटर शामिल हैं। यहां पहली बार वोट डालने वाले युवाओं की संख्या 32 हजार 586 है। ईस्ट दिल्ली सीट सबसे पहले 1967 में बनी, जब दिल्ली में सात लोकसभा सीटों का परिसीमन हुआ। ये सीट न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे देश में सबसे ज्यादा आबादी वाली लोकसभा सीट है। यहां 2014 से लगतार बीजेपी जीत रही है। अभी यहां से बीजेपी के गौतम गंभीर सांसद हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनावों के ऐलान से पहले राजनीति छोड़ने का फैसला लिया था।

ईस्ट दिल्ली सीट में राजधानी की अन्य लोकसभा सीटों की तरह 10 विधानसभाएं आती हैं। ईस्ट दिल्ली के तहत, ओखला, जंगपुरा, लक्ष्मी नगर, कृष्णा नगर, गांधी नगर, शाहदरा, विश्वास नगर, कोंडली, त्रिलोकपुरी और पटपड़गंज सीट आती है। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में इन 10 में से 7 सीटों पर आम आदमी पार्टी जीती थी, जबकि तीन सीटें बीजेपी ने हासिल की थी। ईस्ट दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में गंदगी, लॉ एंड ऑर्डर, अवैध कब्जे और ट्रैफिक जाम जैसे मुद्दे हैं। किशन लाल नाम के एक शख्स ने कहा, ‘नेता चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन अगले पांच सालों में जनता के लिए कुछ नहीं करते। हम गंदगी, पानी की कमी और ट्रैफिक जाम से जूझते रहते हैं और आगे भी यही हाल रहेगा। जो भी विकास हुआ है, वो इस इलाके की बढ़ती आबादी के हिसाब से काफी नहीं है।’ ज्यादातर लोगों को यही लगता है, लेकिन विवेक विहार के विजय नारंग थोड़ा अलग राय रखते हैं। वो कहते हैं कि, ‘जमनापार अब वैसी बदनाम जगह नहीं रही। यहां की प्रॉपर्टी की रेट्स तो साउथ दिल्ली को भी टक्कर देती हैं। सड़कें भी अब बहुत अच्छी बन गई हैं। पहले ऑफिस जाने में एक घंटा लगता था, अब सिर्फ 20 मिनट लगते हैं। लेकिन एक मध्यमवर्गीय मतदाता के तौर पर, हम सरकार से चमत्कार नहीं चाहते, बस बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाएं। ट्रांसपोर्ट पर ध्यान देना जरूरी है।’

पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र 21 लाख मतदाताओं वाला घना शहरी इलाका है। यहां रहने वाले लोगों के अलग-अलग मुद्दे हैं। यहां इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन, मयूर विहार जैसे मध्यमवर्गीय इलाके हैं, तो वहीं रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों वाले इलाके (Mayur Vihar) और प्रीत विहार, गगन विहार, निर्माण विहार, कृष्णा नगर और गांधी नगर जैसे व्यापारिक इलाके भी हैं। दूसरी तरफ, चिल्ला, कोंडली, खिचड़ीपुर और दल्लूपुरा जैसे गांवों में काफी संख्या में प्रवासी रहते हैं। वहीं शाहदरा, ओखला, सीलमपुर, जांगपुरा और त्रिलोकपुरी इलाकों में झुग्गी-झोपड़ियां भी हैं। भाजपा के हर्ष मल्होत्रा, जो पूर्व नगर निगम के मेयर हैं, इस सीट पर आप के कुलदीप कुमार से मुकाबला करेंगे। पूर्व अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए गए कार्यों को प्रदर्शित कर रहे हैं। बदले में कुलदीप कुमार ने 25 मई के चुनावों को सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं पर जनमत संग्रह में बदल दिया है।

लक्ष्मी नगर, जंगपुरा, ओखला और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में भीड़भाड़ एक प्रमुख चिंता का विषय है, जहां तेजी से व्यावसायीकरण और शहरीकरण हुआ है। यहां पहली बार वोट डालने वाले युवाओं की संख्या 32 हजार 586 है। ईस्ट दिल्ली सीट सबसे पहले 1967 में बनी, जब दिल्ली में सात लोकसभा सीटों का परिसीमन हुआ। ज्यादातर लोगों को यही लगता है, लेकिन विवेक विहार के विजय नारंग थोड़ा अलग राय रखते हैं। वो कहते हैं कि, ‘जमनापार अब वैसी बदनाम जगह नहीं रही। यहां की प्रॉपर्टी की रेट्स तो साउथ दिल्ली को भी टक्कर देती हैं।ये सीट न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे देश में सबसे ज्यादा आबादी वाली लोकसभा सीट है।ओखला में तेजी से आवासीय और कमर्शियल विकास हुआ है, जिसने बहुराष्ट्रीय निगमों और स्वास्थ्य सुविधाओं को आकर्षित किया है, लेकिन सुविधाओं में वृद्धि उस अनुपात में नहीं हुई है।

स्वाति मालीवाल बदसलूकी मामले में क्या बोले संजय सिंह?

हाल ही में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने स्वाति मालीवाल बदसलूकी मामले में अपना बयान दे दिया है! आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की घटना को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आप सांसद संजय सिंह ने बताया कि स्वाति के साथ केजरीवाल के पीए विभव कुमार ने ही बदसलूकी की थी। उन्होंने कहा कि स्वाति मालीवाल के साथ हई घटना निंदनीय थी और इसपर अरविंद केजरीवाल ने घटना का संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 24 घंटे की चुप्पी के बाद इस मामले पर आम आदमी पार्टी की ओर से आज पहला बयान सामने आया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना की पूरी जानकारी दी। संजय सिंह ने बताया कि कल एक घटना हुई थी। अरविंद केजरीवाल के आवास पर विभव कुमार जो अरविंद केजरीवाल के पीए हैं, उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ दुर्व्यवहार किया था। स्वाति मालीवाल ने इस घटना की जानकारी दिल्ली पुलिस को दी है। यह एक निंदनीय घटना है। अरविंद केजरीवाल ने घटना का संज्ञान लिया है और घटना में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि स्वाति मालीवाल सोमवार को सीएम केजरीवाल से मिलने उनके आवास पहुंची थीं। वह ड्राइंग रूम में बैठी थीं। तभी केजरीवाल के पीए विभव कुमार वहां पहुंचे। उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ बदतमीजी की। स्वाति मालीवाल ने अपने साथ हुई इस घटना की जानकारी 112 पर कॉल कर दिल्ली पुलिस को दी। संजय सिंह ने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस के पास एक महिला ने कॉल कर बताया कि उसके साथ सीएम केजरीवाल के आवास में मारपीट की गई है। कॉल करने वाली ने खुद को स्वाति मालीवाल बताया। उसने कहा कि केजरीवाल के पीए विभव कुमार ने उनके साथ बदसलूकी की है। इस कॉल के बाद हड़कंप मच गया। बाद में जब यह कंफर्म हो गया कि कॉल आप की ही सांसद स्वाति मालीवाल का है, तब बीजेपी भी इसपर हमलावर हो गई। इसके बाद लोकल पुलिस तुरंत कॉल पर पहुंची। कुछ देर बाद सांसद मैडम स्वाति मालीवाल थाना सिविल लाइन आईं और बिना कोई शिकायत दिए थाने से चली गईं।भाजपा ने इस मामले की निंदा करते हुए केजरीवाल पर हमलावर हो गई। इस पूरे प्रकरण पर आज पार्टी की ओर से संजय सिंह ने इसपर पूरी डिटेल बताई। इससे पहले दिल्ली एमसीडी में भी इस घटना को लेकर आज खूब हंगामा कटा था।

वहीं, स्वाति मालीवाल के आरोपों पर मंगलवार एमसीडी में जमकर हंगामा हुआ। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल के आरोपों को लेकर यहां दिल्ली नगर निगम में हंगामा खड़ा हो गया। हंगामे के बीच मेयर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी पार्षद आसन के करीब आकर केजरीवाल के खिलाफ नारे लगाने लगे और घटना को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करने लगे। दिल्ली पुलिस को सोमवार सुबह 9 बजे के करीब पीसीआर कॉल मिली जिसमें महिला ने दावा किया कि वह सीएम आवास पर है और उसके साथ मारपीट की गई है। इस कॉल में मारपीट का आरोप सीएम अरविंद केजरीवाल के पूर्व पीए विभव कुमार के ऊपर लगाया गया। नॉर्थ डीसीपी मनोज कुमार मीना ने आधिकारिक तौर पर कहा कि हमें सुबह 9:34 बजे कॉल मिली। इसके बाद लोकल पुलिस तुरंत कॉल पर पहुंची। कुछ देर बाद सांसद मैडम (स्वाति मालीवाल) थाना सिविल लाइन आईं और बिना कोई शिकायत दिए थाने से चली गईं। इस मामले में अभी तक हमें कोई शिकायत नहीं मिली है।

मंगलवार एमसीडी की कार्यवाही शुरू होते ही बीजेपी पार्षद आसन के करीब आकर केजरीवाल के खिलाफ नारे लगाने लगे और घटना को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करने लगे। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना की पूरी जानकारी दी। संजय सिंह ने बताया कि कल एक घटना हुई थी। अरविंद केजरीवाल के आवास पर विभव कुमार जो अरविंद केजरीवाल के पीए हैं, उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ दुर्व्यवहार किया था।उन्होंने केजरीवाल हाय-हाय और केजरीवाल इस्तीफा दो के नारे लगाए। इसके साथ ही विपक्षी पार्षद महापौर के आसन के पास पोस्टर लेकर खड़े थे, जिन पर ‘दलित महापौर को कुर्सी पर बिठाओ, दलित विरोधी केजरीवाल इस्तीफा दो’ नारे लिखे हुए थे। हंगामे के बीच महापौर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

आखिर बीजेपी की पोल खोलने के लिए क्या करेगी आम आदमी पार्टी?

हाल ही में आम आदमी पार्टी ने बीजेपी की पोल खोलने के लिए एक नया कैंपेन शुरू कर दिया है! बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की पोल खोलने के लिए आम आदमी पार्टी ने वॉशिंग मशीन कैंपेन शुरू किया है। इसके जरिए व्यंग्यात्मक तरीके से लोगों को बताया जा रहा है कि किस तरह बीजेपी जॉइन करते ही भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं के सारे दाग धुल जाते हैं और फिर उन्हें बड़े पदों से नवाजा जाता है। या फिर उन पर चल रहे केस बंद कर दिए जाते हैं। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के दफ्तर में भी यह कैंपेन चलाया गया। पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय और सचिव पंकज गुप्ता की मौजूदगी में पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने डेमो देकर बताया कि कैसे भ्रष्टाचार के आरोपियों को बीजेपी की वॉशिंग मशीन में डालकर उन्हें क्लीन किया जाता है। स्टेज पर एक तरफ वॉशिंग मशीन का बड़ा सा मॉडल रखा गया था और दूसरी तरफ जेल का मॉडल बनाया गया था। जो लोग बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार हो गए, उन्हें वॉशिंग मशीन में डाल दिया गया और जिन्होंने समाज सेवा के रास्ते से पीछे हटने से इनकार कर किया, उन्हें जेल में डाल दिया गया। इस दौरान कुछ पार्टी वर्करों को नेताओं के रूप में पेश करके उन्हें वॉशिंग मशीन में डाला गया और धुलने के बाद वो केसरिया कपड़ों में बाहर निकले, जिसके बाद ED-CBI ने उन्हें परेशान करना बंद कर दिया। वहीं मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, संजय सिंह बने कलाकारों ने झुकने से इनकार कर दिया, तो उन्हें जेल में डाल दिया गया।

गोपाल राय ने कहा कि आम आदमी पार्टी अलग-अलग तरीकों और माध्यमों के जरिए अपने चुनाव प्रचार अभियान को आगे बढ़ा रही है। उसी के तहत ये वॉशिंग मशीन कैंपेन शुरू किया गया है, जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि वो भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए यह चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी के इसी दावे की सच्चाई को दिखाने के लिए हम वॉशिंग मशीन कैंपेन के जरिए लोगों को बता रहे हैं कि बीजेपी की वॉशिंग मशीन का काला जादू क्या है? लोकसभा चुनाव के लिए चार टीमें तैयारराय ने बताया कि हम 4 लोकसभा क्षेत्रों के लिए चार टीमें तैयार कर रहे हैं, जो 23 मई तक ईस्ट, वेस्ट, साउथ और नई दिल्ली लोकसभा के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जाकर इस वॉशिंग मशीन के काले जादू को प्रदर्शित करेंगे और बीजेपी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का असली सच जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि अभी तक हुए लोकसभा चुनाव के चारो चरणों के मतदान के बाद ऐसी खबरें आ रही हैं कि बीजेपी 200-220 सीटों पर ही सिमट जाएगी। ऐसे में हमारी कोशिश है कि दिल्ली और पूरे देश में बचे हुए तीन चरणों में चुनाव प्रचार को और तेज करके केंद्र सरकार की सच्चाई को जनता के सामने रखें, ताकि लोग सही निर्णय ले सकें।

वहीं दूसरी ओर दिल्ली शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद केजरीवाल लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। दूसरी ओर ईडी इस मामले में शांत बैठने के मूड में नहीं है। केंद्रीय जांच एजेंसी मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह अपनी अगली चार्जशीट में आम आदमी पार्टी को सह-आरोपी बनाने वाली है। ईडी के वकील ने कोर्ट को जब यह जानकारी दी, उस वक्त इसी केस में फंसे मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी।इस दौरान कुछ पार्टी वर्करों को नेताओं के रूप में पेश करके उन्हें वॉशिंग मशीन में डाला गया और धुलने के बाद वो केसरिया कपड़ों में बाहर निकले, जिसके बाद ED-CBI ने उन्हें परेशान करना बंद कर दिया। ईडी ने आज सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी शराब नीति मामले में मुकदमे में देरी करने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। पिछले महीने, यह खबर आई थी कि जांच एजेंसी 15 मई से पहले आम आदमी पार्टी और सीएम केजरीवाल के साथ, शायद एक अतिरिक्त चार्जशीट जैसी एक नई चार्जशीट फाइल कर सकती है। इस मामले में तेलंगाना की MLC कविता भी सह आरोपी हैं। ईडी के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि फाइल में आप को आरोपी बनाया जाएगा और एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट बहुत जल्द दायर की जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल 17 गिरफ्तारियों के बावजूद 250 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं। ईडी ने कहा कि जांच अधिकारी को लगभग हर दिन अदालत में मौजूद रहना चाहिए।

जानिए कब हुआ था यहूदी देश इजराइल का जन्म?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर यहूदी देश इजराइल का जन्म कब हुआ था! इजरायल बीते सात महीने से दुनियाभर में चर्चा में है, इसकी वजह गाजा की लड़ाई है। बीते साल अक्टूबर में हमास ने इजरायल पर हमला किया था। इसमें इजरायल के 1200 लोग मारे गए थे और 250 को हमास के लड़ाके बंधक बनाकर गाजा ले गए थे। इस हमले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल की सेना ने गाजा पर हमला बोल दिया था। इसके बाद से लगातार इजरायल के हमले जारी हैं, जिससे ये इलाका बुरी तरह से तबाह हुआ है। इजरायल के हमलों में गाजा में 33 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं। गाजा में जंग से एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है, जिसकी दुनियाभर में आलोचना भी हो रही है। दोनों पक्षों के बीच कई बार युद्ध विराम पर बात हुई लेकिन मामला अटक गया। दोनों पक्षों में क्यों मामला अटक जाता है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर कैसे मुस्लिम मुल्कों की दुनिया के बीच ये यहूदी देश अस्तित्व में आया। क्यों आज भी कई देश इजरायल को मान्यता नहीं देते और ये विवाद क्या है। बता दें कि इजरायल हाल ही की तारीख यानी 14 मई को अस्तित्व में आया था, यानी इजरायल को बने 76 साल हो गए हैं। 14 मई, 1948 को यहूदी एजेंसी के प्रमुख डेविड बेन-गुरियन ने इजरायल की स्थापना की घोषणा की। उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने उसी दिन नए राष्ट्र के तौर पर इजरायल को मान्यता दे दी थी। दुनिया के जिस हिस्से को आज ज्यादातर देश इजरायल के तौर पर मान्यता देते हैं, 1948 से पहले वह ब्रिटेन के नियंत्रण में था। प्रथम विश्व युद्ध से पहले पश्चिम एशिया के इस हिस्से यानी फिलीस्तीन पर ओटोमन साम्राज्य का राज था। ओटोमन साम्राज्य की हार के बाद ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर नियंत्रण कर लिया। यहां यहूदी और अरबों की आबादी रहती थी। अल्पसंख्यक यहूदियों और बहुसंख्यक अरबों के अलावा कुछ दूसरे जातीय समूह भी यहां पर रहते थे।

दुनिया के कई हिस्सों में उत्पीड़न का शिकार हो रहे यहूदियों को साल 1917 में ब्रिटेन के विदेश सचिव आर्थर बाल्फोर की ओर से एक देश देने की बात कही गई थी। ब्रिटेन के फिलिस्तीन में यहूदी लोगों के लिए एक देश बनाने का विचार दिया और फिलीस्तीन में इसकी कोशिश शुरू हो गई। 1920 के बाद से 1940 तक यहां लगातार यूरोप और जर्मनी से भागकर यहूदी फिलीस्तीन पहुंचे। इससे इलाके में यहूदियों की संख्या बढ़ गई। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इजरायल की स्थापना पर तेजी से काम शुरू हुआ। इस पर आगे बढ़ते हुए 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को अलग-अलग यहूदी और अरब देश में बांटने करने के लिए मतदान कराया और यरुशलम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर बना दिया। इसे यहूदी नेताओं ने स्वीकार किया लेकिन अरब पक्ष ने अस्वीकार कर दिया।

इसके एक साल बाद 1948 में यहूदी नेताओं ने यहूदियों के लिए एक सुरक्षित देश और मातृभूमि होने की बात कहते हुए इजरायल की स्थापना की घोषणा कर दी। इजरायल को अमेरिका का साथ मिला लेकिन पड़ोसी अरब देश इससे भड़क गए और दूसरे ही दिन पांच देशों की सेनाओं ने नए बने देश पर हमला कर दिया। एक साल तक लड़ाई चली इसमें इजरायल ने अधिकांश क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया। बड़ी तादाद में फिलिस्तिनियों को अपने घरों को छोड़कर जाना पड़ा।

1967 में एक बार फिर अरब देशों और इजरायल के बीच लड़ाई छिड़ी। ये लड़ाई सिर्फ छह दिन चली लेकिन इजरायल के लिए काफी फायदेमंद रही। इस दौरान इजरायल ने पूर्वी यरुशलम और वेस्ट बैंक, सीरियाई गोलान हाइट्स, गाजा और मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया। दुनिया के जिस हिस्से को आज ज्यादातर देश इजरायल के तौर पर मान्यता देते हैं, 1948 से पहले वह ब्रिटेन के नियंत्रण में था। प्रथम विश्व युद्ध से पहले पश्चिम एशिया के इस हिस्से यानी फिलीस्तीन पर ओटोमन साम्राज्य का राज था।इसके बाद से इजरायल ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बस्तियां बनाकर यहूदियों को बसाया है।

इजरायल और फिलीस्तीन के बीच आज भी कई मुद्दे उलझे हुए हैं। इसमें फिलिस्तीनी शरणार्थियों की वापसी, वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियां, यरुशलम पर दावा और फिलिस्तीनी को आजाद देश का दर्जा दिया जाना। इन सब मुद्दों पर कई अरब देशों के साथ आज इजरायल की तनातनी चल रही है। सऊदी अरब समेत कई इस्‍लामिक देशों ने आजतक इजरायल को मान्‍यता नहीं दी है। अमेरिका लगातार कोशिश कर रहा है कि इजरायल और सऊदी के बीच संबंध स्‍थापित हो जाएं लेकिन अलग फलस्‍तीन देश का पेच फंसा हुआ है।