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क्या भारत और ईरान डील पर भड़क चुका है अमेरिका?

वर्तमान में अमेरिका भारत और ईरान डील पर भड़क चुका है! भारत और ईरान के बीच चाबहार में शाहिद बेहिश्ती पोर्ट टर्मिनल के विकास को लेकर एक दीर्घकालिक डील हुई है। इस डील पर हस्ताक्षर के बाद से ही अमेरिका खुश नहीं लग रहा। अमेरिका ने प्रतिबंधों के जोखिम की चेतावनी दी है। अमेरिका की प्रतिक्रिया को व्यापक रूप से नीति-उलट कदम के रूप में देखा जा रहा है। 2018 की एक पॉलिसी के तहत अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए भारत को कुछ प्रतिबंधों से छूट दी थी। विदेश मंत्रालय ने 13 मई को कहा कि इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) और ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन के बीच हुई डील क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया के साथ भारत के संबंधों को बढ़ावा देगा। ईरान के सड़क और शहरी विकास मंत्रालय के मुताबिक इस समझौते से भारत को बंदरगाह का इस्तेमाल करने के लिए 10 साल की सुविधा मिलेगी, जो पाकिस्तान के साथ ईरान की दक्षिणपूर्वी सीमा के करीब स्थित है। न्यूज एजेंसी AFP ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक IPGL रणनीतिक उपकरण प्रदान करने और बंदरगाह के परिवहन बुनियादी ढांचे को विकसित करने में 370 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। समझौते के बाद अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा, ‘मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू रहेंगे और हम इन्हें लागू करना जारी रखेंगे। कोई भी संस्था ईरान के साथ व्यापार करने की सोचे तो उसे जोखिम के बारे में पता होना चाहिए।’ विशेष छूट के बारे में पूछने पर पटेल ने न में जवाब दिया।

नवंबर 2018 में अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह के विकास और इसे अफगानिस्तान से जोड़ने वाली रेलवे लाइन के निर्माण में भारत को कुछ प्रतिबंधों से छूट दी थी। हालांकि अमेरिका ने भारतीय संस्थाओं और कंपनियों पर कई शर्तें लगायी हैं। अगर ये शर्तें पूरी नहीं होतीं तो इन्हें प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका की ओर से जो मंजूरी दी गई उसमें चाबहार बंदरगाह का विकास और रखरखाव और अफगानिस्तान के लिए एक रेल लिंक शामिल था। लेकिन ईरान से कच्चे तेल के आयात और निर्यात को मंजूरी नहीं दी गई। इसके अलावा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, उसके अधिकारियों और सहयोगियों से लेनदेन की इजाजत नहीं दी।

ईरानी राजदूत इराज इलाही ने मंगलवार को कहा कि भारत का महत्व किसी भी देश को उस पर प्रतिबंध लगाने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी अमेरिकी प्रतिबंध से कई देशों के व्यापार हितों को नुकसान होगा। पूर्व भारतीय विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘अमेरिका ने चाबहार को अफगानिस्तान के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में प्रतिबंधों से बाहर किया था। अमेरिका ने अफगानिस्तान को तालिबान को सौंप दिया। सार्वजनिक रूप से प्रतिबंधों की धमकी क्यों दी गई? यह भी कहा जा सकता था कि वह भारत से संपर्क में हैं।’ माना जा रहा है कि अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से निकलने के बाद चाबाहर का महत्व उसके लिए कम हो गया।बता दें कि अमेरिका को भारत और ईरान दोनों से गंभीर परेशानी है। अमेरिका नहीं चाहता है कि कोई भी देश ईरान के साथ व्यापार करे, क्योंकि अमेरिका का ईरान के साथ अच्छे संबंध नहीं है। अमेरिका ने अपने निजी हितों को साधने के लिए ईरान पर प्रतिबंधों की बौछार की हुई है। अब वह दबाव बना रहा है कि बाकी दुनिया भी इन प्रतिबंधों का सम्मान करे और ईरान के साथ कोई भी व्यापार न करे। उधर भारत का शुरू से एक रुख रहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को छोड़कर किसी भी दूसरे प्रतिबंधों को नहीं मानता है। अमेरिका यह भी नहीं चाहता है कि भारत को ईरान के साथ दोस्ती करके कोई फायदा हो। इससे भारत की निर्भरता अमेरिका से कम हो सकती है और वह अमेरिका के दुश्मन गुटों के और ज्यादा करीब जा सकता है।

चाबहार बंदरगाह ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। इसे भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और बड़े यूरेशियन क्षेत्र से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाता है। भारत चाहता है कि यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे आईएनएसटीसी में एक प्रमुख केंद्र बने। INSTC ईरान के माध्यम से भारत और रूस को जोड़ता है। यह भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई के लिए 7,200 किलोमीटर की मल्टी-मोड परिवहन परियोजना है। यूक्रेन में संघर्ष के बीच INSTC को महत्व मिला है। भारत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए आईएनएसटीसी और चाबहार बंदरगाह दोनों पर जोर दे रही है।

आखिर क्या है प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल मामले में नया अपडेट?

आज हम आपको प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल मामले में नया अपडेट देने वाले हैं! कर्नाटक सेक्स स्कैंडल केस ने लोगों खास ध्यान आकर्षित किया है। इस मामले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एचडी रेवन्ना के बेटे और पूर्व प्रधानमंत्री जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगौड़ा के पोते सांसद प्रज्वल रेवन्ना शामिल हैं। वहीं अन्य लोग चुनाव पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कर रहे हैं। प्रज्वल की पेन ड्राइव में 2,976 सेक्सुअल वीडियो क्लिप हैं, जिनमें कथित तौर पर कई महिलाओं पर सेक्सुअल एक्ट करने के लिए दबाव डाला गया है। इसने कुछ पीड़ितों को मामले दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रज्वल जर्मनी भाग गया है। उसके पिता रेवन्ना भी मुश्किल में हैं। उसके घर की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया है, ‘जब भी उसकी पत्नी भवानी बाहर होती थी, रेवन्ना बार-बार मुझे अनुचित तरीके से छूता था, मेरे कपड़े उतारता था और मेरा यौन उत्पीड़न करता था।’ यह भारतीय समाज के दो भयानक पहलुओं को उजागर करता है। पहला, शक्तिशाली परिवार स्थानीय पुलिस थानों को कैसे नियंत्रित करते हैं और प्रभावी तौर पर खुद को कानून से ऊपर दिखाने की कोशिश करते हैं। उनके बच्चों को लगता है कि उन्हें आपराधिक शिकायत से छूट है। इसके विनाशकारी नैतिक परिणाम हो सकते हैं। दुख की बात है कि गौड़ा वंश की शक्ति असाधारण नहीं है। पूरे भारत में शीर्ष राजनेता अपने क्षत्रपों में माहिर हैं। उनके खिलाफ शिकायत करने वाला कोई भी व्यक्ति पुलिस की फटकार के बाद बुरी तरह से प्रभावित होगा। कभी-कभी उनकी नाराजगी सामने आती है, लेकिन इसका अन्य क्षत्रपों पर कोई असर नहीं होता।

पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर विचार करें। उन्होंने 2017 में उन्नाव नौकरी के लिए उनके पास आई 16 वर्षीय लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया। उसके पिता ने पुलिस के सामने विरोध किया, लेकिन खुद उसे गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में पुलिसकर्मियों ने पीट-पीट कर मार डाला। न्याय के लिए बेताब लड़की ने मुख्यमंत्री के घर के बाहर खुद को आग लगा ली। कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और पुलिस जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया। बाद में, एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी जिसमें लड़की दो मौसी और अपने वकील के साथ यात्रा कर रही थी। उसकी मौसी मर गईं और उसका वकील बुरी तरह घायल हो गया। एक लड़की के लिए यह कितना दुखद परिणाम था, जिसने शिकायत करने की हिम्मत की। क्या उसकी कहानी अन्य पीड़ितों को हतोत्साहित नहीं करेगी?

महिला पीड़ितों और उनके परिवारों पर सामाजिक प्रभाव सबसे बुरा है। मुझे यह यौन शोषण से भी कहीं अधिक चौंकाने वाला लगता है। निश्चित रूप से जबरन सेक्सुअल एक्ट करते हुए जिन महिलाओं की फिल्म बनाई गई उन्हें उनके समुदायों की पूरी सहानुभूति और जोरदार समर्थन मिलना चाहिए। निश्चित रूप से छेड़छाड़ करने वालों और बलात्कारियों को बहिष्कृत किया जाना चाहिए। हालांकि, अफसोस इस बात का है कि ये पीड़ित ही होती हैं जिन्हें उनके समुदायों की ओर से बहिष्कृत किया जा रहा है। जहां तक अपराधियों का सवाल है, क्षेत्र के एक अखबार की रिपोर्ट में कहा गया कि इन खुलासों का उनके वोटों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जाहिर तौर पर, मतदाताओं को ये लगता है कि इसमें कुछ भी खास नहीं हुआ है।

हसन जिला जहां से प्रज्वल रेवन्ना सांसद हैं, कई पीड़ित महिलाएं और उनके परिवार अपमान और सामाजिक तिरस्कार से बचने के लिए भाग गए हैं। पारंपरिक भारतीय समाज बलात्कार की शिकार महिलाओं को भयानक अपराध की शिकार नहीं मानता। यह उन्हें पोर्न क्लिप में एक्टिंग करने वाली महिलाओं के रूप में देखता है। कई परिवारों के लिए यह अपमान सहन करना बेहद कठिन था। रेवन्ना के घर में काम करने वाली एक महिला को चुप कराने के लिए उसका अपहरण कर लिया गया था। पुलिस ने उसे बचाया। क्या उसे खतरनाक राजनेताओं को सजा दिलाने वाली हीरोइन के रूप में सम्मानित किया जाता है? नहीं, वह और उसका परिवार जीवन भर के लिए जख्मी हो गए हैं। उसका बेटा कहता है, ‘अब पूरी दुनिया हमारे बारे में जानती है। हम अपने गांव वापस कैसे जा सकते हैं और कैसे रह सकते हैं? हम गरीब लोग हैं जो हर दिन गुजारा करने के लिए संघर्ष करते हैं। जिस इलाके में हम रहते थे, वह हमें कभी स्वीकार नहीं करेगा।’

इससे भी बुरी बात यह है कि महिला अपने परिवार को सच बताने से बहुत डरती थी। बेटा कहता है, ‘उसने हमें कभी भी उनके साथ हो रहे हमले के बारे में नहीं बताया। हमें वीडियो वायरल होने के बाद ही पता चला।’ हमारे थके हुए सोशल मानदंड एक महिला को सामाजिक अपमान के डर से अपने ही परिवार से रेप की शिकायत करने से रोकते हैं। दूसरे देशों में, पीड़ितों को राष्ट्रीय सहानुभूति मिलती है, और जो अपनी कहानी बताने के लिए आगे आते हैं, उन्हें हिरोइन कहा जाता है। यहां की परंपराएं अलग हैं, यहां पितृसत्तात्मक संस्कृति है जो महिलाओं को महज एक वस्तु के तौर पर पेश करती है। उन्हें अपने पिता की संपत्ति और शादी के बाद अपने पति की संपत्ति के रूप में देखा जाता है, न कि उन व्यक्तियों के रूप में जो अपनी मर्जी से जीने और कुछ करने के लिए स्वतंत्र हैं। दहेज की प्रथा उन्हें और भी वस्तु के तौर पर पेश करती है।

इसका एक परिणाम यह है कि बलात्कार की शिकार लड़की को ‘खराब माल’ के रूप में देखा जाता है। लोग हिंदी में कहेंगे ‘नेता ने लड़की को खराब कर दिया’। कितना गलत तर्क है! निश्चित रूप से आदमी बुरा है, और लड़की नहीं। लेकिन पारंपरिक समाज में, कोई भी उससे शादी नहीं करेगा। दूसरे पुरुष उसे ‘बुरी लड़की’, वैध शिकार के रूप में देखेंगे। उसका परिवार कलंकित होगा। एक घायल आदमी को समुदाय से सहानुभूति और मदद मिलेगी। लेकिन एक बलात्कार पीड़ित महिला को नहीं मिलेगी, क्योंकि उसे एक वस्तु के रूप में देखा जाता है। उसे और नुकसान पहुंचाया जाता है।

जब नेटफ्लिक्स की मूवी देखकर बना डाला हत्या का प्लान!

एक ऐसी घटना जिसमें नेटफ्लिक्स की मूवी देखकर हत्या का प्लान ही बना डाला! तारीख 01 मई 2024 दिन बुधवार ये दिन ग्रेटर नोएडा के रेस्टोरेंट व्यापारी कृष्ण कुमार शर्मा के परिवार के लिए सारी जिंदगी में अंधेरा करने वाला काला दिन साबित हुआ। उस दिन उनके बेटे का अपहरण कर लिया गया। अपहरण का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। बदमाशों ने उनके 14-15 वर्षीय बेटे कुणाल शर्मा की हत्या कर दी। उसके शव को दो दिनों तक कार की डिग्गी में लेकर घूमते रहे थे। उसे नोएडा के सेक्टर-127 स्थित होटल में लेकर भी गए थे। वह विरोध न कर पाए इसके लिए उसको नशे का इंजनेक्शन देकर कार की डिग्गी में डाल दिया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। मौत होने के बाद आरोपियों ने उसे बुलंदशहर में नहर में फेंक दिया। 5 मई को कुणाल शर्मा का शव बुलंदशहर में नहर से बरामद किया गया। इस पूरे हत्याकांड के खुलासे के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने 11 टीमें लगाई। जो सीसीटीवी, मैन्युअल व टैक्निकल सर्विलांस के जरिए कुणाल शर्मा के हत्यारों को पकड़ने में लगी हुई थीं।

इससे पहले इस पूरे काण्ड को अंजाम देने से पहले हत्यारों ने नेटफिलिक्स पर आई वेबसीरीज हिंट को देखकर कुणाल हत्याकांड की योजना बनाई। इस वेब सीरीज को देखने के बाद हत्यारों ने ऐसी फुलप्रुफ योजना बनाई कि पुलिस भी चकरा गयी। पुलिस को भी समझ में नहीं आ रहा था कि कुणाल की हत्या को कैसे अंजाम दिया गया है। इस पूरे हत्याकांड का नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई चौंकाने वाले खुलासा किया। इस मामले में पुलिस ने एमबीबीएस की एक छात्रा समेत बुधवार देर रात मुठभेड़ के दौरान इस हत्याकांड में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इस हत्याकांड में अब तक 4 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

ग्रेटर नोएडा के डीसीपी ऑफिस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान गौतमबुद्ध नगर के जॉइंट पुलिस कमिश्नर एंड डीआईजी बबलू कुमार ने बताया कि थाना बीटा-2 क्षेत्र में रेस्टोरेंट व्यापारी कृष्ण कुमार शर्मा का 14 वर्षीय बेटा कुणाल एक मई को लापता हो गया था। पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज, मैन्युअल और टेक्निकल सर्विलांस आदि की मदद से मामले की जांच कर रही थी। सीसीटीवी फुटेज को देखने के बाद पाया गया कि किशोर एक लड़की के साथ गया था। इस मामले में देर रात को एक मुठभेड़ के दौरान डाढ़ा गांव निवासी कुणाल भाटी, अगौता बुलंदशहर निवासी हिमांशु चौधरी और मनोज को गिरफ्तार कर जब पूछताछ की गई तो पता चला कि वेब सीरीज हिंट देखकर हत्या की योजना बनाई थी।

पूछताछ में तीनों ने बच्चे की हत्या की बात स्वीकार की। पुलिस ने इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कोडा कार, मृतक बच्चे के कपड़े और उसका मोबाइल फोन भी बरामद किया। इसके साथ ही पुलिस ने स्टीकर, टेप तथा आरोपियों ने जो कपड़े घटना वाले दिन पहने थे उन्हें भी बरामद किया। जॉइंट पुलिस कमिश्नर एंड डीआईजी बबलू कुमार ने आगे बताया कि कार में कुणाल को बैठाकर ले जाने वाली युवती तनु हिमांशु की दोस्त है। वह गुरुग्राम से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। उसने हिंट वेब सीरीज के तर्ज पर हत्या की योजना तैयार कराई। जिसे तीनों ने अंजाम दिया।

बता दें, कि ग्रेटर नोएडा के थाना बीटा-2 क्षेत्र के रबूपुरा के गांव म्याना के रहने वाले ढाबा संचालक कृष्ण कुमार शर्मा का छोटा बेटा कुणाल कक्षा आठ का छात्र था। उनके 15 वर्षीय बेटे कुणाल शर्मा के अपहरण और हत्या के मामले में आठ दिन बाद बुधवार देर रात थाना बीटा-2 पुलिस और स्वाट टीम ने घटना में शामिल दो बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से एक बदमाश घायल हो गया। जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने अपहरण की घटना में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद की है। डीसीपी ग्रेटर नोएडा जोन-3 साद मियां खान ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि ब्याज के पैसों और रेस्टोरेंट को हड़पने के विवाद में कुणाल का अपहरण किया गया था। उसकी हत्या कर शव नहर में फेंक दिया गया था।

पकड़े गए बदमाश की पहचान डाढा गांव निवासी कुणाल भाटी और अगौता बुलंदशहर निवासी हिमांशु चौधरी और मनोज के रूप में हुई है। मनोज मृतक कुणाल का मौसा है। माह जनवरी वर्ष 2024 से पहले नट मढैया सीएनजी पम्प स्थित शिवा ढाबा आरोपी मनोज का था, परन्तु मृतक के पिता कृष्ण कुमार शर्मा जो मनोज के सगे मौसा है ने कृष्ण कुमार शर्मा से ब्याज पर पैसे लिए थे। लेकिन पैसा न चुका पाने के कारण ढाबे को कृष्ण कुमार ने रख लिया था और खुद ही इस होटल को अपने मृतक बेटे कुणाल के साथ संचालित करने लगा था। जिस कारण आरोपी मनोज अंदर ही अंदर अपने मौसा कृष्ण कुमार से जलन रखने लगा था।

आरोपी हिमांशु को मनोज ने अपने मौसा कृष्ण कुमार से 2 लाख रूपये ब्याज पर दिलाये थे। जिनको न चुकाने की एवज में अपनी गाड़ी ब्रेजा कृष्ण कुमार शर्मा के पास गिरवी रखी हुयी थी। आरोपी मनोज व हिमांशु ने अपने साथी कुनाल भाटी व महिला मित्र के साथ मिलकर प्लान बनाया कि यदि कृष्ण कुमार के पुत्र को मार दिया जाये तो कृष्ण कुमार शर्मा अकेला पड़ जायेगा और ढाबा नहीं चला पायेगा और पुनः होटल का संचालन आरोपी मनोज को मिल जायेगा। जिसमें सभी आरोपी पार्टनर हो जायेंगे। जिस कारण मौका पाकर आरोपी मनोज ने अपने साथी सह-आरोपियों हिमांशु, कुनाल भाटी व महिला के साथ मिलकर कृष्ण कुमार के पुत्र की हत्या को अंजाम दिया।

क्या वर्तमान में बिल्डिंग में लगी लिफ्ट पर नहीं किया जा सकता भरोसा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वर्तमान में बिल्डिंग में लगी लिफ्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता! दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-137 स्थित पारस टियरा सोसायटी में फिर एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है। इस सोसायटी में लिफ्ट की घटनाएं नहीं रुक रहीं है। इससे पहले भी 3 अगस्त 2023 की शाम को पारस टियरा सोसायटी के टॉवर-24 में लिफ्ट गिरने से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो चुकी है। जिसके चलते महिला के परिवारजनों ने सोसायटी प्रबंधन और लिफ्ट अधिकारियों के खिलाफ सेक्टर-142 थाने में केस दर्ज करवाया गया था, रविवार रात पारस टियरा हाउसिंग सोसायटी के टावर-5 की लिफ्ट अचानक खराब हो गई। चौथी मंजिल पर खराब हुई लिफ्ट में सवार तीन लोग अंदर फंस गए। लिफ्ट से बाहर निकलने के दौरान लिफ्ट के ब्रेक अचानक फेल हो गए। बेकाबू हुई लिफ्ट तेजी से ऊपर की ओर जाने लगी और सीधे 25वीं मंजिल पर पहुंच गई। अचानक ब्रेक फेल होने की वजह से खराब हुई लिफ्ट सबसे आखिरी मंजिल की छत पर पहुंचकर टकरा गई, जिससे छत क्षतिग्रस्त हो गई।

सोसायटी निवासी ने बताया कि पिछले साल हुई घटना में बुजुर्ग महिला की हुई मौत मामले में उनके परिजनों ने सोसायटी के प्रेसिडेंट और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। जिसके चलते सोसायटी के प्रेसिडेंट रमेश गौतम आईपीसी की धारा-304ए के तहत गिरफ्तार भी हुए थे। उनके अलावा कुल आठ लोगों के खिलाफ पुलिस ने नामजद अभियोग पंजीकृत करके चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की थी। उसके बाद से रमेश गौतम और अन्य तीन आरोपी अनंगपाल चौहान, सुखपाल सिंह राणा और नीतू सलार फिलहाल जमानत पे रिहा हैं और इस बड़े हादसे के बाद भी सोसायटी प्रबंधन के विभिन्न पदों पर आसीन हैं।

12 मई यानी रविवार की रात ठीक वैसा ही हादसा पारस टियरा सोसायटी के टॉवर-25 में हुआ, जिसमें तीन लोग दुर्घटना के शिकार हुए। एक सोसायटी निवासी मोहन लाल जी थे, जिन्होंने आठवीं मंजिल से नीचे जाने के लिए लिफ्ट पकड़ी थी। साथ में उस लिफ्ट में दो डिलीवरी बॉयज मौजूद थे, जो सामान की डिलीवरी के लिए लिफ्ट में मौजूद थे। लिफ्ट में बैठते ही एक तेज झटका लगा और लिफ्ट नीचे जाने के बजाय तेजी से ऊपर जाते हुए 25वीं मंजिल की छत के जाल को तेजी से तोड़ती हुई आधी छत पे जा के अटक गई। लिफ्ट में फंसे हुए लोगों की तत्काल सहायता के लिए कोई भी टेक्निशियन उपलब्ध नहीं था। सिक्योरिटी गार्ड को लिफ्ट खोलने के बारे में न कोई जानकारी थी और न ही किसी प्रकार की ट्रेनिंग मिली हुई थी। अंततः लिफ्ट में फंसे एक डिलीवरी बॉय की सूझबूझ से लिफ्ट का दरवाजा अन्दर से खोल कर तीनों लोगों को रेस्क्यू किया गया। किसी भी व्यक्ति को ज्यादा चोटें नहीं आई हैं, लेकिन इस हादसे से भय और सदमे की स्थिति है। लिफ्ट में जो हादसा हुआ उसका तकनीकी कारण बिल्कुल पिछली साल के लिफ्ट हादसे की तरह था, जिसमें काउंटर वैट की केबल टूटने से लिफ्ट तेज गति से नीचे जाने की बजाय तेजी से बिल्डिंग की छत की जाली तोड़ते हुए अटक गई थी।

हादसे के समय पिछली बार की तरह इस बार भी सोसायटी के अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के सभी पदाधिकारी मौजूद नहीं थे। पारस टियरा सोसायटी काफी दुर्दशा में चल रही है और आए दिन यहां के निवासी विरोध-प्रदर्शन और धरना देते रहते है। 22 जनवरी 2024 को सोसायटी की एओए कार्यकारिणी का एक वर्ष का कार्यकाल कानूनन समाप्त हो चुका है। उसके बावजूद भी बिना चुनाव कराए कालातीत एओए कुर्सी पे काबिज हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार सोसायटीज से इसकी कई बार शिकायतें की गईं और निवासियों की तरफ से विधिवत चुनाव कराने की गुहार की गई। जिस पर निर्णय लंबित है। एसडीएम सदर के कोर्ट में भी चुनाव के विषय में मामला लंबित है। जिस पर 15 तारीखें लगने के बाद भी अभी तक मामला लंबित है। प्रशासन के इस सुस्त रवैए के चलते सोसायटी के प्रबंधन पर अवैध कालातीत एओए बोर्ड का कब्जा है। जिसके अध्यक्ष रमेश गौतम हैं, जो पिछले छह साल से सोसायटी के सभी बैंक अकाउंट्स का संचालन कर रहे हैं।

1 अप्रैल 2024 से कालातीत अध्यक्ष रमेश गौतम में बिना किसी जीबीएम यानी जनरल बॉडी मीटिंग की सहमति से सोसायटी मेंटेनेंस शुल्क में 32% की बढ़ोतरी कर दी है, जिसमें सिंकिंग फंड में 400% की बढ़ोतरी करते हुए 10 पैसा प्रति स्क्वायर फीट से बढ़ा कर 50 पैसा कर दिया है, जिससे निवासियों पर अधिक आर्थिक दबाव आ गया है। यहां पर मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाने के बाद भी सर्विसेज और उसकी क्वालिटी में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस विषय पर भी डिप्टी रजिस्ट्रार को निवासियों की ओर से शिकायत की गई है। जिस पर भी मामला लंबित है।

12 मई 2024 का लिफ्ट मामला, जिसमे टीकेई कंपनी की लिफ्ट लगी है, उसके साथ हुए लिफ्ट मेंटेनेंस एग्रीमेंट की कॉपी भी रमेश गौतम के पास उपलब्ध नहीं है। 26 फरवरी से उत्तर प्रदेश में लिफ्ट अधिनियम 2024 लागू है, लेकिन उस एक्ट के तहत अभी तक पारस टियरा का पंजीयन हुआ भी है या नहीं इसकी जानकारी रमेश गौतम की तरफ से नहीं दी गई है। गुस्साएं निवासियों ने 12 मई के लिफ्ट हादसे के लिए सोसायटी प्रबंधन को लापरवाही का जिम्मेदार मानते हुए रमेश गौतम, सुखपाल सिंह राणा, अनंगपाल चौहान एवं अन्य के खिलाफ सेक्टर-142 पुलिस थाना प्रभारी को कल रात तहरीर दी गई है।

आखिर क्या है राजस्थान के उदयपुर में हुआ पूजा हत्याकांड?

आज हम आपको राजस्थान के उदयपुर में हुआ पूजा हत्याकांड के बारे में जानकारी देने वाले हैं! राजस्थान में उदयपुर जिले के मावली थाना क्षेत्र में एक साल पहले हुआ पूजा भील हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर पूजा भील को न्याय दिलाने के लिए एक मुहिम चल रही है। इस मुहिम में हजारों लोग मांग कर रहे हैं कि पूजा भील के हत्यारों को फांसी दी जाए। सोशल मीडिया के ट्विटर पर ‘हैशटैग पूजा के हत्यारों को फांसी दो’ तेजी से ट्रेंड हो रहा है। साथ में एक साल पहले प्रकाशित खबरों को भी वायरल किया जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के राज में उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र में एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। महज 8 साल की मासूम बालिका की निर्मम हत्या करके उसके शव के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए थे। इन टुकड़ों को बोरे में भरकर सुनसान इलाके में फेंक दिया गया था। हत्याकांड के 5 दिन बाद पुलिस ने एक बोरे में से शव बरामद किया था। पोस्टमार्टम से हैरान जनक खुलासा हुआ। पता चला कि मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म किया गया था। हैवानियत इतनी कि हत्या के बाद शव के साथ भी दुष्कर्म किया गया था। पुलिस ने इस मामले में दुष्कर्म और हत्या के आरोपी कमलेश उर्फ करण सिंह को गिरफ्तार किया था। साथ ही उसके माता-पिता को भी गिरफ्तार किया गया था।

मासूम बालिका की हत्या के बाद जब आरोपी की गिरफ्तारी हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पूछताछ के दौरान पुलिस ने बताया कि आरोपी कमलेश ने पड़ोस में रहने वाली 8 साल की मासूम को घर बुलाया। फिर उसे बंधक बनाकर जबरन दुष्कर्म किया। वारदात को छिपाने के लिए आरोप कमलेश ने गला घोंटकर बच्ची की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके 10 टुकड़े कर दिए और बोरे में भरकर लकड़ी के बक्से में छिपा दिया। उधर परिजनों ने बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज कराई तो कमलेश भी पुलिस के साथ बच्चों की तलाश करने के लिए घूमता रहा। चार दिन तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला।

कमलेश के घर में लकड़ी के बक्से में पड़े शव से जब बदबू आने लगी तो उसे लगा कि अब मामले का खुलासा होने वाला है। ऐसे में उसने अपने माता पिता को घटना की जानकारी दी। आरोपी के माता-पिता ने भी वारदात को छिपाने का प्रयास किया और बोरे में बंद शव को लकड़ी के बक्से से बाहर निकाल कर घर के पास ही एक खंडहर में बोरा फेंक दिया। शव ढूंढते हुए घूम रहे लोगों को जब बदबू आई तो खंडहर में पड़े बोरे के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने जांच की तो बोरे में मासूम लड़की के शव के टुकड़े टुकड़े मिले थे। हत्यारे का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की टीमें बुलाई गई। डॉग घटनास्थल से सीधा कमलेश के मकान की ओर भागा और भौंकने लगा। बाद में पुलिस ने कमलेश से पूछताछ की तो वारदात का खुलासा हो गया जिसके बाद कमलेश और उसके माता पिता को गिरफ्तार कर लिया गया।

वारदात का खुलासा होने पर पुलिस ने बड़ी गंभीरता से मामले की जांच की। एसपी विकास कुमार के निर्देशन में जांच हुई और 10 दिन के भीतर पूरा अनुसंधान करके चालान पेश किया गया। बता दें कि साथ में एक साल पहले प्रकाशित खबरों को भी वायरल किया जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के राज में उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र में एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। महज 8 साल की मासूम बालिका की निर्मम हत्या करके उसके शव के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए थे। शव ढूंढते हुए घूम रहे लोगों को जब बदबू आई तो खंडहर में पड़े बोरे के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने जांच की तो बोरे में मासूम लड़की के शव के टुकड़े टुकड़े मिले थे। हत्यारे का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की टीमें बुलाई गई।इन टुकड़ों को बोरे में भरकर सुनसान इलाके में फेंक दिया गया था। हत्याकांड के 5 दिन बाद पुलिस ने एक बोरे में से शव बरामद किया था। पोस्टमार्टम से हैरान जनक खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की कोशिश की लेकिन पूरा एक साल गुजरने के बाद भी आरोपी को सजा नहीं सुनाई जा सकी। आरोपी को फांसी की सजा दिलाने की मांग के साथ यह मामला एक बार फिर ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

क्या जाट आरक्षण से सीएम भजनलाल के राज्य में आ सकता है सियासी फ़ेर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जाट आरक्षण से सीएम भजनलाल के राज्य में सियासी फ़ेर सकता है या नहीं! राजस्थान में लोकसभा चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही समीकरणों की जोड़, गुणा, भाग की गणित लगाने में जुटी हुई है। इस बीच राजस्थान की भरतपुर और धौलपुर करौली लोकसभा सीट काफी सुर्खियों में है। दोनों ही सीटें जाट बाहुल्य हैं लेकिन इस बार जाट आरक्षण आंदोलन की आग ने दोनों सीटों की समीकरणों को प्रभावित किया है। इसमें अब मुख्यमंत्री भजनलाल के गृह जिले भरतपुर के चुनाव परिणाम को लेकर सियासत की नजरें बेसब्री से रुक गई हैं। इस चुनाव में जाट समाज ने आरक्षण की मांग नहीं मानने पर बीजेपी को हराने का अभियान चलाया। ऐसी स्थिति में राजस्थान की भरतपुर और धौलपुर की समीकरणों को जाट समाज ने नहीं बिगाड़ दिया हो, इसको लेकर बीजेपी की चिंता बढ़ी हुई है। राजस्थान की भरतपुर और धौलपुर लोकसभा सीट जाट समाज के बाहुल्य क्षेत्र की हैं। ऐसे में सियासी चर्चा है कि जाट आरक्षण के आंदोलन को देखते हुए दोनों लोकसभा सीटों पर चुनाव परिणाम प्रभावित होने के आसार हैं। जाट आरक्षण समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताया कि भजनलाल सरकार ने समाज के साथ वादा खिलाफी की है। इसके कारण समाज ने गांव-गांव घूम कर बीजेपी को हराने का संकल्प लिया। इस दौरान समाज ने धौलपुर और भरतपुर में कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन भी दिया है। ऐसे में चर्चा है कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को जाट आरक्षण के आंदोलन का फायदा मिल सकता है। इस स्थिति में सियासत में धौलपुर और भरतपुर की सीट पर कांग्रेस को काफी मजबूत माना जा रहा है। इधर, फौजदार का दावा है कि दोनों सीटों पर कांग्रेस इस बार जीत हासिल करेगी।

भरतपुर लोक सभा क्षेत्र राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है। ऐसे में भरतपुर लोकसभा सीट को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल की भी प्रतिष्ठा दाव पर है। हालांकि, भरतपुर लोकसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। यहां से बीजेपी की तरफ से रामस्वरूप कोली और कांग्रेस की संजना जाटव के बीच जोर आजमाइश हुई। इधर, जाट बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण भरतपुर सीट पर जाट आरक्षण का प्रभाव देखने को मिल सकता है। जाट समाज ने आरक्षण को लेकर यहां गांवों में घूम-घूम कर बीजेपी को हराने का संकल्प दिलाया है। ऐसे में 4 जून को आने वाले चुनाव परिणाम में जाट समाज की भूमिका के कारण बीजेपी के लिए मुसीबत बढ़ सकती है।

जाट आरक्षण समिति के आंदोलन पर संयोजक नेम सिंह फौजदार की अगवाई में भजनलाल सरकार के साथ कमेटी की जयपुर और दिल्ली में वार्ता हुई। इस दौरान समाज को आरक्षण दिए जाने का आश्वासन दिया, लेकिन जाट समाज लोकसभा चुनाव से पहले अपनी मांगे मानने के लिए अड़ा हुआ था। जब समाज की मांग पूरी नहीं हुई, तो जाट समाज की ओर से ऑपरेशन गंगाजल अभियान चलाया गया। जिसके तहत समाज ने धौलपुर, भरतपुर, करौली समेत क्षेत्रों में गांव-गांव घूम कर लोगों को हथेली पर गंगाजल लेकर बीजेपी को वोट नहीं देने की सौगंध दिलाई। इस दौरान जाट समाज ने कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में जाट समाज को प्रेरित भी किया।

जाट आरक्षण का मुद्दा इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को काफी प्रभावित कर सकता हैं। इस दौरान राजस्थान में धौलपुर और भरतपुर के अलावा भी यह मुद्दा राजस्थान से सटी हुई हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 10 लोकसभा सीटों पर अपना असर दिखा सकता हैं, क्योंकि भरतपुर धौलपुर जाट समाज की रिश्तेदारी इन क्षेत्रों में भी हैं। इसको लेकर आरक्षण समिति के संयोजक नेमसिंह फौजदार ने बताया कि उन्होंने आरक्षण के मुद्दों को लेकर मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, फतेहपुर सिकरी और हरियाणा की 10 सीटों पर लोगों से संपर्क किया। ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई है कि इन सीटों पर बीजेपी को जाट समाज का विरोध झेलना पड़ेगा। समाज ने गांव-गांव घूम कर बीजेपी को हराने का संकल्प लिया। इस दौरान समाज ने धौलपुर और भरतपुर में कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन भी दिया है। ऐसे में चर्चा है कि दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को जाट आरक्षण के आंदोलन का फायदा मिल सकता है। इस स्थिति में सियासत में धौलपुर और भरतपुर की सीट पर कांग्रेस को काफी मजबूत माना जा रहा है।उनका अनुमान हैं कि बीजेपी को इन सीटों से हार का सामना करना पड़ सकता हैं। उन्होंने दावा किया है कि भरतपुर, धौलपुर के अलावा देश के आठ राज्यों में भी जाट समाज के आरक्षण का मुद्दा व्यापक असर दिख रहा हैं।

राजनीतिक पार्टियों को क्या बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद?

हाल ही में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनीतिक पार्टियों को एक सलाह दे दी है! जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वर्तमान परिपेक्ष में धर्म के नाम पर राजनीतिक पार्टियों के चुनाव लड़ने का घोर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि धर्म राजनीति का विषय नहीं है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सोमवार को जयपुर प्रवास के दौरान पहुंचे। यहां मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों पर जमकर कटाक्ष किया, उन्होंने गौ हत्या को लेकर भी इसका अंदरूनी तौर पर सपोर्ट करने वाली राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार करने का आव्हान जनता से किया। उन्होंने गौ माता की राष्ट्रीय माता भी घोषित करने की मांग उठाई हैं। जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सोमवार को जयपुर ‘गौहत्या रोकने के लिए आयोजित संकल्प यात्रा’ में हिस्सा लेने आए। इस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने राजनीतिक दलों को धर्मशास्त्र का पाठ पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने नाना पटोले के बयान ‘कांग्रेस की सरकार आई, तो फिर से राम मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा’ पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले तो यह बताइए, उस मंदिर में क्या कमी है? जब आपको मंदिर, मस्जिद और धर्म शास्त्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो फिर इस तरह की बयानबाजी क्यों देते हैं? यह धार्मिक लोगों के जिम्मे का कार्य है और उन्हीं का रहने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी धार्मिक मामले में दखलअंदाज करने के लिए हकदार नही हैं।

जगतगुरु शंकराचार्य ने आगे कहा कि गौ हत्या को रोकने के लिए हमारा ही नहीं, हर सनातनी का दृढ़ संकल्प होना चाहिए। इसके लिए अब हमने कमर कस ली है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों पर, बिना किसी का नाम लिए ‘कसाई पार्टी’ कहकर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि कसाई पार्टी वह है, जो चुनाव जीतने के बाद गौ हत्या करने वालों को प्रोत्साहन देती है, वह गौ हत्यारों से चंदा लेती है। गौ हत्या करने वाले कत्ल खानों को लाइसेंस देती है, जो कत्लखानों की मशीनों पर सब्सिडी देती हैं।

इस दौरान शंकराचार्य लोकसभा चुनाव में राम मंदिर और धर्म के नाम पर वोट मांगने पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव जीतने के लिए धर्म के नाम पर लोगों से वोट मांगने का कोई अधिकार नहीं है। राजनीति में धर्म का प्रयोग करना अक्षम्य में अपराध है। उन्होंने कहा कि पहले राजनीतिक पार्टियों को पहले धर्मशास्त्र की शिक्षा लेनी चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए राजनीतिक पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि इन्होंने चुनाव आयोग में अपनी धर्मनिरपेक्ष होने का शपथ पत्र दिया है, लेकिन यह सभी इसका उल्लंघन कर रहे हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से पूछा गया कि पीएम मोदी अपने चुनाव भाषण में जय श्री राम और गौ माता की जय के नारे लगाते हुए भाषण देते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी हो, उसे चुनाव जीतने के लिए धर्म का सहारा नहीं लेना चाहिए, यह गलत है। उन्होंने पीएम मोदी का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए कहा कि उनको अपने प्रबंधन, कानून व्यवस्था… कैसे लोगों में जागरूकता पैदा की.. कैसे उन्होंने शिक्षा का प्रसार किया, इस बात पर वोट मांगने चाहिए।

शंकराचार्य ने गौ हत्या को रोकने के लिए अब आमजन को आंदोलन नहीं करना की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन करने से कोई सुनवाई नहीं होती हैं। बड़े-बड़े आंदोलनकर्ता आए, लेकिन फेल होकर चले गए। आपने देखा कि खिलाड़ी बैठे थे, उन्हें पुलिस ने घसीट -घसीट के बर्बाद कर दिया। किसानों का भी क्या हाल हुआ आप जानते हैं। आंदोलन में भगदड़ मचती है, पुलिस गोलियां चलाती है, धाराएं लगाकर मुकदमा दर्ज किया जाता हैं।इसके लिए अब हमने कमर कस ली है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों पर, बिना किसी का नाम लिए ‘कसाई पार्टी’ कहकर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि कसाई पार्टी वह है, जो चुनाव जीतने के बाद गौ हत्या करने वालों को प्रोत्साहन देती है, वह गौ हत्यारों से चंदा लेती है। पूरी जिंदगी आप मुकदमा ही लड़ते रह जाते हैं तो आंदोलन से कोई सुनवाई नहीं होगी। हमें गौ हत्या को प्रोत्साहन देने वाली राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार करना चाहिए। हमें मन में संकल्प कर घर के बाहर बोर्ड लगा देना चाहिए कि ‘यह सच्चे सनातन धर्म और गौ भक्त का घर है। कृपया गौ हत्या समर्थक पार्टी हमसे संपर्क नहीं करें। ऐसा संकल्प लेकर राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार किया जाना चाहिए।

आखिर कौन बनेगा राजस्थान का नया कांग्रेस अध्यक्ष?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर राजस्थान का नया कांग्रेस अध्यक्ष कौन बनेगा! राजस्थान में लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई। इस बीच कांग्रेस में 4 जून को चुनाव परिणाम नाम आने के बाद बड़े बदलाव होने के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि चुनाव परिणाम के बाद राजस्थान कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर हाईकमान बड़ा फैसला ले सकता है। इसको लेकर कांग्रेस में पीसीसी चीफ को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई हैं। कांग्रेस की सियासत में चर्चा शुरू हो गई है कि अब अगला पीसीसी चीफ कौन होगा? क्या वर्तमान अध्यक्ष एक्सटेंशन मिलेगा? या किसी नए चेहरे को पीसीसी चीफ बनाया जाएगा। हाल ही में लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके, लेकिन अब नवंबर दिसंबर में राजस्थान के पंचायत राज के चुनाव होने हैं। इस बीच कांग्रेस की सियासत में फिर से चर्चा उठ रही है कि यदि कांग्रेस को इस चुनाव में बढ़त हासिल करनी है, तो फिर से सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस के कमान देनी होगी! हाल ही में राजस्थान में लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ। अब 4 जून परिणाम का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब कांग्रेस की अगली नजर राजस्थान के पंचायत राज चुनाव पर हैं। इधर, कांग्रेस में पीसीसी चीफ को लेकर फिर से सीयासी चर्चा शुरू हो गई हैं। कयास है कि 4 जून के परिणाम के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कोई फैसला हो सकता है। इसको लेकर कांग्रेस के नेताओं के नाम को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई हैं। वहीं चर्चा यह भी है कि कांग्रेस वर्तमान अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को जारी रख सकती हैं। इस बीच मांग उठने लगी हैं कि यदि पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस को बढ़त हासिल करनी है, तो फिर से पायलट को कमान सौंपनी होगी। इसको लेकर सियासत में पायलट समर्थक नेता उनके कार्यकाल के पंचायत राज चुनाव और 2018 के आंकड़े देकर तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं कि उस समय कैसे कांग्रेस में चुनाव में बढ़त हासिल की।

राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश का अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस बीच यह भी माना जा रहा है कि वर्तमान अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को कांग्रेस फिर से एक्सटेंशन दे सकती है। 2022 में गहलोत और सचिन पायलट के बीच चले सियासी संकट के दौरान डोटासरा को शिक्षा मंत्री के पद से हटाकर पीसीसी चीफ बनाया गया, तब से डोटासरा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उनके नेतृत्व में राजस्थान में विधानसभा चुनाव लड़ा गया और अब लोकसभा चुनाव का परिणाम आना बाकी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि फिलहाल डोटासरा का कार्यकाल कम अवधि का रहा है। ऐसे में कांग्रेस हाई कमान उनके कार्यकाल को एक्सटेंशन दे सकती है।

राजस्थान में नवंबर दिसंबर में पंचायत राज के चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस का अगला मिशन पंचायती राज चुनाव है। ऐसे में सियासत में फिर से चर्चाएं तेज हो गई है कि यदि कांग्रेस को पंचायत राज चुनाव में बढ़त हासिल करनी है, तो एक बार फिर सचिन पायलट को पीसीसी चीफ की कमान सौंपनी होगी। इसके पीछे उनके समर्थक नेता इस बात का तर्क दे रहे हैं कि 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने केवल 21 सीटें जीत पाई थी, लेकिन जब पायलट प्रदेश अध्यक्ष बने, तो राजस्थान में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी। ऐसे में पायलट समर्थक नेताओं का दावा है कि पंचायत राज चुनाव जीतना है, तो फिर से पायलट को लाना होगा।

पीसीसी चीफ के लिए कांग्रेस में जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत का नाम भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया हैं। गहलोत तीन बार के प्रदेश अध्यक्ष, तीन बार के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं। ऐसे में पीसीसी के पद के लिए उनका नाम भी मजबूत है। इस दौड़ में उन्हें भी माना जा रहा है।बता दें कि इस बीच मांग उठने लगी हैं कि यदि पंचायत राज चुनाव में कांग्रेस को बढ़त हासिल करनी है, तो फिर से पायलट को कमान सौंपनी होगी। इसको लेकर सियासत में पायलट समर्थक नेता उनके कार्यकाल के पंचायत राज चुनाव और 2018 के आंकड़े देकर तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं कि उस समय कैसे कांग्रेस में चुनाव में बढ़त हासिल की। हालांकि यह अलग बात अलग है कि हाई कमान गहलोत के नाम पर राजी होता है या नहीं। इसके अलावा भी राजस्थान के कई कांग्रेसी नेता रघु शर्मा, हरीश चौधरी, मुरारी लाल मीणा, प्रताप सिंह खाचरियावास समेत नेता के नाम भी चर्चा में चल रहें हैं।

आखिर भारत से क्यों तिलमिलाया अमेरिका?

हाल ही में अमेरिका भारत से तिलमिला उठा है! भारत के ईरानी बंदरगाह चाबहार को संचालित करने के लिए 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से अमेरिका तिलमिला गया है। अनुबंध के कुछ घंटे बाद ही अमेरिका ने भारत को ईरान के साथ डील के लिए प्रतिबंध की धमकी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि ईरान के साथ डील करने वाले को प्रतिबंध से सावधान रहना चाहिए। सोमवार को भारत और ईरान ने रणनीतिक चाबहार पोर्ट को लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद 10 साल के लिए इस बंदरगाह के संचालन का अधिकार मिल गया है। 10 साल बाद ये अनुबंध स्वतः आगे बढ़ जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने भारत-ईरान डील को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कोई भी जो ईरान के साथ साथ व्यापार सौदों को अंजाम दे रहा है, उन्हें उन संभावित प्रतिबंधों के खतरों के बारे में पता होना चाहिए, जिसके वे करीब जा रहे हैं।’ सोमवार को भारत के शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और उनके ईरानी समकक्ष की मौजूदगी में इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईजीपीएल) और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

ओमान की खाड़ी के पास ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह को भारत विकसित कर रहा है। भारत क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए चाबहार बंदरगाह पर जोर दे रहा है। रणनीतिक बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन की मदद से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है।यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण व्यापार धमनी के रूप में कार्य करता है।’ सोनोवाल ने कहा, ‘इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने से चाबहार बंदरगाह की व्यवहार्यता और दृश्यता पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा।’इसके रास्ते भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच हासिल होगी और पाकिस्तान को बायपास करने में सक्षम होगा। इसके पहले भारत को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की जरूरत पड़ती थी। इसके साथ ही इस रणनीतिक बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन की मदद से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है। इसे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से जोड़ने की योजना है। 7200 किलोमीटर लंबा ये गलियारा भारत को ईरान, अजरबैजान के रास्ते होते हुए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ेगा।

इस पोर्ट का महत्व भारत के लिए इससे भी समझा जा सकता है कि चुनाव के व्यस्त समय के बीच मोदी सरकार ने अपने मंत्री को इस डील के लिए ईरान भेजा था। समझौते पर हस्ताक्षर के साथ दोनों देशों ने चाबहार में दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रखी है। समझौते के तहत, चाबहार बंदरगाह पर सरकारी स्वामित्व वाली आईपीजीएल लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी, जबकि अतिरिक्त 250 मिलियन डॉलर वित्तपोषण में दिए जाएंगे, जिससे अनुबंध का मूल्य 370 मिलियन डॉलर हो जाएगा। सोनोवाल ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा, ‘चाबहार बंदरगाह का महत्व भारत और ईरान के बीच एक मात्र माध्यम के रूप में इसकी भूमिका से कहीं अधिक है।

भारत और ईरान ने रणनीतिक चाबहार पोर्ट को लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद 10 साल के लिए इस बंदरगाह के संचालन का अधिकार मिल गया है। 10 साल बाद ये अनुबंध स्वतः आगे बढ़ जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने भारत-ईरान डील को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कोई भी जो ईरान के साथ साथ व्यापार सौदों को अंजाम दे रहा है, उन्हें उन संभावित प्रतिबंधों के खतरों के बारे में पता होना चाहिए, जिसके वे करीब जा रहे हैं।’इसके पहले भारत को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की जरूरत पड़ती थी। इसके साथ ही इस रणनीतिक बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन की मदद से विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है।यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण व्यापार धमनी के रूप में कार्य करता है।’ सोनोवाल ने कहा, ‘इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने से चाबहार बंदरगाह की व्यवहार्यता और दृश्यता पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा।’ उन्होंने कहा, ‘चाबहार न केवल भारत का निकटतम ईरानी बंदरगाह है, बल्कि यह समुद्री दृष्टिकोण से भी एक उत्कृष्ट बंदरगाह है।’

रणबीर कपूर और आलिया भट्ट पहले डेस्टिनेशन वेडिंग चाहते थे?

विदेश जाकर शादी करने का था रणबीर-आलिया का प्लान! उसके बाद शादी घर पर क्यों बैठ गई? हाल ही में एक्ट्रेस नीतू कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा, ”डेस्टिनेशन वेडिंग” रणबीर-आलिया का प्लान था। लेकिन अंत में उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर ही शादी करने का फैसला किया। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी परिवार और दोस्तों के साथ हुई। 14 अप्रैल, 2022 को उनका विवाह समारोह कपूरबाड़ी में आयोजित किया गया था। लेकिन योजना यह थी कि शादी समारोह दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया जाएगा। हाल ही में रणबीर की मां और एक्ट्रेस नीतू कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा, ”डेस्टिनेशन वेडिंग” रणबीर-आलिया का प्लान था। लेकिन अंत में उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर ही शादी करने का फैसला किया।

रणवीर-आलिया ने करीब दो साल तक शादी की प्लानिंग की थी। नीतू ने कहा, ”वे दक्षिण अफ्रीका गए थे. वह यह देखने आया था कि कहां शादी करनी है और उसने तस्वीरें दिखायीं।” लेकिन नीतू कहती हैं, ”यह सबसे अच्छा है। आलिया बेहद खूबसूरत लग रही थीं।” इससे पहले आलिया ने खुद कहा था कि उनका डेस्टिनेशन वेडिंग प्लान है। लेकिन आडम्बर के दबाव से बचने के लिए उन्होंने वह योजना त्याग दी। आलिया कॉस्मेटिक फेज खत्म करने के बाद घर से बाहर निकलकर शादी करना चाहती थीं। और इसलिए उनके घर में ही बारात बैठी है. शादी में 40 मेहमान शामिल हुए. सभी आलिया-रणवीर के करीबी रिश्तेदार और दोस्त थे। भीड़ कम होने के कारण यह जोड़ा मेहमानों से करीब से बात कर सका।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी के बाद बॉलीवुड में डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन बढ़ गया है. उस स्थान पर आलिया और रणवीर की शादी काफी असाधारण है। नवंबर 2022 में आलिया-रणबीर ने बेटी राहा का स्वागत किया। हाल ही में मेटा गाला में आलिया भट्ट के आउटफिट ने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने पिछले साल हॉलीवुड फिल्म से भी डेब्यू किया था. आलिया को अपने करियर में एक के बाद एक सफलता मिलती जा रही है। इन सबके बावजूद एक्ट्रेस की डेढ़ साल की बेटी के इर्द-गिर्द ही उनकी जिंदगी घूमती है।

अप्रैल 2022 में शादी के बंधन में बंधने के बाद, आलिया और रणबीर कपूर नवंबर में एक बच्ची के माता-पिता बने। फ़िलहाल, राहाई दो सितारों की आंखों के आभूषण की तरह है। रणवीर-आलिया ने अपनी बेटी राहा को खो दिया। वे उसे एक पल के लिए भी छोड़ना नहीं चाहते. चाहे उनकी अपनी फिल्म की शूटिंग हो या विदेश यात्राएं या अंबानी की पार्टियां, वे हमेशा राहा को अपने साथ ले जाते हैं। लेकिन अंत में उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर ही शादी करने का फैसला किया।

आलिया छोटी राहा को आश्वासन और सुरक्षा से घिरे घेरे में बड़ा करना चाहती है। एक्ट्रेस के पिता महेश भट्ट ने ऐसा होने से रोका. आपने अपनी बेटी को उसकी पोती राहा की भावी जिंदगी के बारे में क्या सलाह दी? रणवीर और आलिया स्वाभाविक रूप से अपनी बेटी के प्रति कुछ अधिक जागरूक हैं। लड़की चले तो भी दर्द होता है! हाल ही में एक इंटरव्यू में आलिया ने कहा कि दोनों पति-पत्नी अपनी बेटी को चलने नहीं देते थे. कहीं गिर कर चोट लग जाये, यही डर. यहां अभिनेत्री के पिता की सलाह है कि राहा को अकेला छोड़ दिया जाए। तभी वह उठना सीखेगा!

अपने पिता की बात मानते हुए आलिया ने कहा, ”मैंने खुद छोटी उम्र में घर छोड़ दिया था. मैं तब 23 साल का था. उन्होंने घर पर कभी नहीं पूछा कि मैं कहां शूटिंग कर रहा हूं, कहां जा रहा हूं।’ कितने दिन बीत गए, जब घर पर लोगों को पता नहीं था कि मैं कहां शूटिंग कर रही हूं. उसकी वजह से, मैं आज ‘आदमी’ बन सका! ऐसा लगता है, मैं बहुत कम उम्र में घर से दूर चला गया था। हम अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं होने देंगे. ऐसे कई मामले हैं जहां अज्ञात नंबरों से कॉल करके बैंक खातों से पैसे उड़ा लिए जाते हैं। इस बार उस धोखाधड़ी का निशाना सोनी थी. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.

एक इंस्टाग्राम पोस्ट में सोनी लिखती हैं, ”हमारे आसपास एक बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। एक शख्स ने मुझे फोन किया और कहा कि वह दिल्ली पुलिस से बोल रहा है. उन्होंने कहा, मैंने अवैध ड्रग्स का ऑर्डर दिया था. उसने मेरा आधार कार्ड नंबर पूछा. मेरे जानने वाले कुछ लोगों को इसी तरह के फोन कॉल आए हैं।