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क्या भारत के लिए खतरा बन सकता है चीन का पहला सुपर कैरियर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चीन का पहला सुपर कैरियर भारत के लिए खतरा बन सकता है या नहीं! भारत और अमेरिका पर हमेशा तिरछी निगाहें रखने वाला चीन नई कवायद में जुटा है। उसने अपनी समुद्री सीमाओं को और मजबूत बनाने के लिए पहला सुपर-कैरियर तैयार कर लिया है। ये मॉडर्न युद्धपोत समुद्री टेस्ट पूरा करने के बाद पोर्ट पर लौट आया है। इसके आते ही आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर भारतीय नौसेना के लिए नई चुनौती पेश कर सकता है। फुजियान अपनी श्रेणी का सबसे एडवांस्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसे चीन में ही तैयार किया गया है। ये वहां की सैन्य और नौसैनिक क्षमताओं में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही। 80 हजार टन का ये युद्धपोत जिसे फुजियान कहा जाता है, अपना समुद्री टेस्ट पूरा करने के बाद बंदरगाह पर लौट आया है। ये एयरक्राफ्ट कैरियर चीन में निर्मित अपनी श्रेणी का सबसे उन्नत युद्धपोत है। इसकी खूबियों पर गौर करें तो फुजियान या टाइप 003 क्लास का सुपर कैरियर चीन का पहला स्वदेशी विमान वाहक डिजाइन है। इसमें पहली बार इंटीग्रेटेड प्रोपल्सन सिस्टम और विद्युत चुम्बकीय कैटापुल्ट का इस्तेमाल किया गया है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट, जो पारंपरिक भाप से चलने वाले कैटापुल्ट की जगह लेते हैं। इसका उद्देश्य फुजियान के डेक से एयरक्राफ्ट की सटीक लॉन्चिंग है। जिसे शेनयांग जे-15 ‘फ्लाइंग शार्क’ लड़ाकू विमान के इस्तेमाल से ऑपरेशनल तैनाती की गई। इसके अलावा, चीनी नौसेना जे-35 नाम से एक कैरियर स्टेल्थ फाइटर विकसित कर रही है, जिसके भविष्य में सर्विस में आने की उम्मीद है। जे-35 को चीन के मॉडर्न एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान से संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है।अमेरिकी नौसेना, जिसे अभी भी दुनिया में तकनीकी रूप से सबसे एडवांस्ड नेवी माना जाता है, उनके पास मौजूद कैरियर्स में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जैसा चीन के सुपर कैरियर में है।

उम्मीद है कि फुजियान जल्द ही अपने एयरक्राफ्ट का परीक्षण शुरू कर देगा, जो वारशिप को सभी प्रकार से ऑपरेशन योग्य घोषित किए जाने से पहले एक साल तक चल सकता है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर को डेवलप करने से चीन की नौसैनिक क्षमता में इजाफा देखने को मिलेगा। इसके साथ ही ये हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन के लिए की जा रही कवायद का अहम हिस्सा है। चीन का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर, लियाओनिंग, मूल रूप से सोवियत युग का पोत था। इसे 1998 में यूक्रेन से खरीदा गया था। उस समय, यह कैरियर अधूरा था और इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। बाद में इसे 2012 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) में शामिल किया गया। लियाओनिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से ट्रैनिंग उद्देश्यों और चीन की बढ़ती सैन्य स्थिति के प्रतीक के रूप में किया जाता रहा है।

चीन का दूसरा और स्वदेश में निर्मित पहला कैरियर, शांदोंग है, जिसे अप्रैल 2017 में लॉन्च किया गया था और दिसंबर 2019 से सेवा में आया। ये युद्धपोत, लियाओनिंग का एक काफी मॉडर्न संस्करण है, जिसे शेनयांग जे-15 ‘फ्लाइंग शार्क’ लड़ाकू विमान के इस्तेमाल से ऑपरेशनल तैनाती की गई। इसके अलावा, चीनी नौसेना जे-35 नाम से एक कैरियर स्टेल्थ फाइटर विकसित कर रही है, जिसके भविष्य में सर्विस में आने की उम्मीद है। जे-35 को चीन के मॉडर्न एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान से संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

भारतीय नौसेना की बात करें तो वर्तमान में दो एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत का ऑपरेशनल हैं। भारतीय नौसेना एक दशक से भी अधिक समय से एक बड़े और ज्यादा सक्षम एयरक्राफ्ट कैरियर की चाहत रखती रही है।वहां की सैन्य और नौसैनिक क्षमताओं में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही। 80 हजार टन का ये युद्धपोत जिसे फुजियान कहा जाता है, अपना समुद्री टेस्ट पूरा करने के बाद बंदरगाह पर लौट आया है। ये एयरक्राफ्ट कैरियर चीन में निर्मित अपनी श्रेणी का सबसे उन्नत युद्धपोत है। इसकी खूबियों पर गौर करें तो फुजियान या टाइप 003 क्लास का सुपर कैरियर चीन का पहला स्वदेशी विमान वाहक डिजाइन है। हालांकि, इसके डेवलपमेंट, निर्माण और संचालन की अत्यधिक लागत के कारण लगातार सरकारों ने इसे ठुकरा दिया। फुजियान क्लास के एक एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण में भारत को 7 बिलियन डॉलर 56,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। फिलहाल, सरकार आईएनएस विक्रांत के बराबर आकार के एक छोटे एयरक्राफ्ट कैरियर को हरी झंडी दिखाने पर विचार कर रही है। सरकार फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट के साथ आईएनएस विक्रांत के लिए 26 राफेल-एम लड़ाकू विमान खरीदने के लिए बातचीत कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत 8 बिलियन डॉलर 65,920 करोड़ रुपये होगी।

क्या केजरीवाल की तर्ज पर हेमंत सोरेन भी आएंगे जेल से बाहर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या केजरीवाल की तर्ज पर हेमंत सोरेन भी जेल से बाहर आएंगे या नहीं! आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उन्हें एक जून तक अंतरिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में लोकसभा चुनाव को लेकर वोटिंग में कुछ ही दिन बचे हैं। 25 मई को दिल्ली में वोटिंग है, इससे पहले केजरीवाल को जेल से बाहर आने का मौका मिल गया है। हालांकि, केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद सियासी गलियारे में झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है। हर किसी के मन में सवाल यही है कि क्या हेमंत सोरेन को भी सर्वोच्च अदालत से जमानत मिल सकती है? ऐसा इसलिए क्योंकि हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली हेमंत सोरेन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 13 मई को सुनवाई होगी। झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में झारखंड के पूर्व सीएम की याचिका 3 मई को खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मुहैया कराए गए दस्तावेजों के मुताबिक यह मानना संभव नहीं है कि ईडी ने याचिकाकर्ता के खिलाफ बिना किसी कारण के कार्रवाई की है। हेमंत सोरेन ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

बीते सोमवार को हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सीजेआई डीवाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र किया था। बता दें कि रांची के बड़गई में एक भूखंड के अवैध खरीद-बिक्री मामले में ईडी की टीम ने 31 जनवरी को हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले हेमंत सोरेन ने झारखंड सीएम पद से त्यागपत्र दे दिया था। हेमंत सोरेन पर अवैध तरीके से जमीन खरीदने का आरोप है। पीएमएलए कोर्ट में ईडी की ओर से हेमंत सोरेन के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दायर किया जा चुका है। ने मांग उठाई कि राज्य में 13 मई को होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता को रिहा किया जाए। अब इस मामले में 13 मई को सुनवाई है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी, क्या हेमंत सोरेन को भी राहत के आसार बन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल पर दिए फैसले में उनके एक राष्ट्रीय पार्टी का मुखिया होने, राज्य का सीएम होने का जिक्र किया। हेमंत सोरेन भी ईडी की कार्रवाई से पहले झारखंड के मुख्यमंत्री थे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते वक्त साफ किया है कि अरविंद केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना होगा ताकि वो फिर से न्यायिक हिरासत में भेजे जा सकें। ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार को ही पूरी हो गई थी, लेकिन वक्त की कमी के कारण उस दिन फैसला नहीं आ पाया था। आज फैसले से पहले ईडी और अरविंद केजरीवाल के वकीलों के बीच संक्षिप्त बहस हुई और फिर दो जजों की बेंच ने अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही दिल्ली सीएम को 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत पर छोड़ने का आदेश पारित किया, केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने 1 जून की मियाद बढ़ाकर 5 जून करने की अपील की। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा दिया था। हेमंत सोरेन भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, वो बरहैट विधानसभा सीट से विधायक भी हैं। वो पिछले तीन महीनों से अधिक समय से जेल में बंद हैं।

रांची के बड़गई में एक भूखंड के अवैध खरीद-बिक्री मामले में ईडी की टीम ने 31 जनवरी को हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले हेमंत सोरेन ने झारखंड सीएम पद से त्यागपत्र दे दिया था। झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है। हर किसी के मन में सवाल यही है कि क्या हेमंत सोरेन को भी सर्वोच्च अदालत से जमानत मिल सकती है? ऐसा इसलिए क्योंकि हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है।हेमंत सोरेन पर अवैध तरीके से जमीन खरीदने का आरोप है। पीएमएलए कोर्ट में ईडी की ओर से हेमंत सोरेन के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दायर किया जा चुका है।

आखिर सीएम केजरीवाल को कैसे मिली अंतरिम जमानत?

आज हम आपको बताएंगे कि सीएम केजरीवाल को अंतरिम जमानत कैसे मिली है! दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सारी दलीलों को खारिज करते हुए केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दे दी। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि पार्टियों को अपना एजेंडा जनता के सामने का अधिकार तो है ही, जनता का भी अधिकार है कि वो सभी पार्टियों की पेशकश अच्छी तरह जाने-समझे ताकि वह मतदान में उचित पार्टी का चुनाव कर सके। ईडी ने दिल्ली शराब घोटाले के केस में अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। वो फिर से 2 जून को जेल में बंद हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते वक्त साफ किया है कि अरविंद केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना होगा ताकि वो फिर से न्यायिक हिरासत में भेजे जा सकें। ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार को ही पूरी हो गई थी, लेकिन वक्त की कमी के कारण उस दिन फैसला नहीं आ पाया था। आज फैसले से पहले ईडी और अरविंद केजरीवाल के वकीलों के बीच संक्षिप्त बहस हुई और फिर दो जजों की बेंच ने अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही दिल्ली सीएम को 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत पर छोड़ने का आदेश पारित किया, केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने 1 जून की मियाद बढ़ाकर 5 जून करने की अपील की। सिंघवी ने कहा कि अंतरिम जमानत 5 जून तक दिया जाना चाहिए क्योंकि चुनाव के बाद वोटों की गिनती 4 जून को है और उस दिन रिजल्ट आना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रचार वोटिंग से 48 घंटे पहले ही खत्म हो जाता है, इसलिए केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना होगा।

ईडी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि चुनाव में कैंपेन करना मौलिक अधिकार नहीं है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) में आरोपी अमृत पाल सिंह ने चुनाव लड़ने के आधार पर जमानत के लिए अप्रोच किया है। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए अगर अंतरिम जमानत दी गई तो इसका व्यापक प्रभाव होगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि अमृत पाल सिंह का केस अलग है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पहले से भी कोई नजीर नहीं है कि चुनाव लड़ने वाले किसी कैंडिडेट को प्रचार के लिए जमानत दी गई हो। जवाब में जस्टिस खन्ना ने कहा कि इस तरह की सीधी व्यवस्था तय नहीं है। हम अंतरिम जमानत का आदेश पारित करते हैं और केजरीवाल को 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत देते हैं। हम आदेश की कॉपी शाम में अपलोड करेंगे। इस दौरान अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि इस केस के संबंध में केजरीवाल जमानत के दौरान कुछ बयान जारी ना करें, यह शर्त होनी चाहिए। तब जस्टिस खन्ना ने कहा कि आप नेता संजय सिंह की तरह इसमें भी शर्तें लागू रहेंगी।

इस बात की अंडरटेकिंग देने को तैयार हैं कि अंतरिम जमानत के दौरान केजरीवाल किसी भी आधिकारिक फाइल पर दस्तखत नहीं करेंगे। लेकिन साथ ही कहा कि एलजी भी किसी भी फाइल पर सीएम के दस्तखत ना होने के आधार पर काम ना रोकें। केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अंतरिम जमानत की मांग की। केजरीवाल कोई आदतन अपराधी नहीं हैं। अगर उन्हें जमानत दी जाती है तो उनसे समाज को कोई खतरा नहीं है।

जिस बयान के आधार पर गिरफ्तारी हुई है, वह बयान दिसंबर, 2022 से लेकर जुलाई, 2023 के बीच हुई। गिरफ्तारी 21 मार्च, 2024 को हुई है। सिंघवी ने कोर्ट के सामने सवाल उठाते हुए तंज कसा कि क्या ईडी ने दोषी मुख्यमंत्री को फ्री घूमने के लिए छोड़ रखा था? केजरीववाल की गिरफ्तारी लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने के बाद की गई। इस मामले में कोई नया मैटेरियल नहीं था। जिस बयान के आधार पर गिरफ्तारी हुई वह जुलाई, 2023 तक हो चुकी थी लेकिन गिरफ्तारी 21 मार्च, 2024 को हुई है।

अगर चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है तो यह नियम के साथ भेदभाव होगा क्योंकि कोई भी पेशा या बिजनेस भी अहम है। कोई किसान की खेती या छोटे व्यापारी का काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि राजनीतिक पार्टी का चुनाव प्रचार। फर्ज करें कि अगर हम आपको रिलीज करते हैं और आप चुनाव में भाग लेते हैं, आधिकारिक ड्यूटी करते हैं तो इसका व्यापक प्रभाव होगा। हम साफ करना चाहते हैं कि हम अगर आपको रिलीज करते हैं तो हम चाहेंगे कि आप ऑफिशियल ड्यूटी ना करें।  अरविंद केजरीवाल दिल्ली के चुने हुए सीएम हैं और वह आदतन अपराधी नहीं हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को आदतन अपराधी की तरह ट्रीट नहीं किया जा सकता है। बेंच ने कहा था कि वह कोई अलग लीगल स्टैंडर्ड तय नहीं करने जा रही है कि पॉलिटिकल लीडर के लिए अलग क्लास होगा। यह मामला वह व्यापक परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव पांच साल में एक बार होता है।

सीएम केजरीवाल के जेल से बाहर आने पर क्या बोला विपक्ष?

हाल ही में सीएम केजरीवाल की जेल से बाहर आने के बाद विपक्ष ने कई बयान बाजियां की है! सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए शुक्रवार को उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दे दी। केजरीवाल को अब कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनीलॉन्ड्रिंग केस में 2 जून को आत्मसमर्पण करना होगा। केजरीवाल की रिहाई को लेकर आम आदमी पार्टी से लेकर विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल की रिहाई पर कहा-सत्यमेव जयते…तानाशाही खत्म होगी। यही नहीं खेड़ा ने कहा कि 4 जून के बाद पीएम मोदी को भी बहुत समय मिलने वाला है क्योंकि वह पूर्व प्रधानमंत्री बन जाएंगे। इसके बाद वह साबरमति आश्रम में बैठकर आत्मनिरीक्षण करेंगे। खेड़ा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हेमंत सोरेन को भी उचित न्याय मिलेगा। वहीं, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी केजरीवाल की रिहाई पर खुशी व्यक्त की। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई है। यह मौजूदा चुनावों के संदर्भ में बहुत मददगार होगा। हर देशवासी की आंखें खुशी से नम हैं, उनके भाई उनके बेटे अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आने वाले हैं। आज शाम जेल के ताले टूटेंगे, केजरीवाल छूटेंगे। लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का दिल की गहराइयों से आभार। इंकलाब जिंदाबाद अरविंद केजरीवाल जिंदाबाद!, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत है।

तानाशाही खत्म होगी। सत्यमेव जयते।कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए स्वागत किया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। खेड़ा ने कहा कि 4 जून के बाद पीएम मोदी को भी बहुत समय मिलने वाला है क्योंकि वह पूर्व प्रधानमंत्री बन जाएंगे। इसके बाद वह साबरमति आश्रम में बैठकर आत्मनिरीक्षण करेंगे। खेड़ा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हेमंत सोरेन को भी उचित न्याय मिलेगा।आप विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं। सत्यमेव जयते! तानाशाही खत्म होगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने पर संतोष व्यक्त किया। ममता बनर्जी ने कहा कि इसका मौजूदा लोकसभा चुनावों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ममता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई है। यह मौजूदा चुनावों के संदर्भ में बहुत मददगार होगा। हर देशवासी की आंखें खुशी से नम हैं, उनके भाई उनके बेटे अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आने वाले हैं। आज शाम जेल के ताले टूटेंगे, केजरीवाल छूटेंगे। लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का दिल की गहराइयों से आभार। इंकलाब जिंदाबाद अरविंद केजरीवाल जिंदाबाद!

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए स्वागत किया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल की रिहाई पर कहा-सत्यमेव जयते…तानाशाही खत्म होगी। वहीं, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी केजरीवाल की रिहाई पर खुशी व्यक्त की। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।केजरीवाल को अब कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनीलॉन्ड्रिंग केस में 2 जून को आत्मसमर्पण करना होगा। केजरीवाल की रिहाई को लेकर आम आदमी पार्टी से लेकर विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की। आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल की रिहाई पर कहा-सत्यमेव जयते…तानाशाही खत्म होगी। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। खेड़ा ने कहा कि 4 जून के बाद पीएम मोदी को भी बहुत समय मिलने वाला है क्योंकि वह पूर्व प्रधानमंत्री बन जाएंगे। इसके बाद वह साबरमति आश्रम में बैठकर आत्मनिरीक्षण करेंगे। खेड़ा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हेमंत सोरेन को भी उचित न्याय मिलेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से क्या बोला चुनाव आयोग?

हाल ही में चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को खरी खोटी सुनाई है! चुनाव आयोग ने वोटिंग के आंकड़ों पर सवाल उठाए जाने और ‘भ्रम’ पैदा करने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को चल रहे लोकसभा चुनाव में बाधा डालने के लिए फटकार लगाई है। चुनाव आयोग ने वोटिंग के आंकड़ों को लेकर खरगे के आरोपों को खारिज करते हुए उसे ‘बेबुनियाद’ और ‘जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश’ करार दिया है। आयोग ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने चल रहे चुनावों के बीच में वोटर टर्नआउट के आंकड़ों को जारी करने के बारे में बेबुनियाद आरोप लगाए हैं, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संचालन में भ्रम, गलत दिशा और बाधाएं पैदा करने के लिए तैयार किए गए हैं। आयोग ने आगे कहा कि इस तरह के बयानों से मतदाताओं की भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और राज्यों में बड़ी चुनाव मशीनरी का मनोबल गिर सकता है।

कांग्रेस अध्यक्ष को दिए गए कड़े शब्दों वाले जवाब में चुनाव आयोग ने उनके बयानों को ‘चुनाव संचालन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर आक्रमण’ बताया। आयोग ने कहा कि चुनाव आयोग ‘ऐसी घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जिनका सीधा असर उसके मुख्य जनादेश के क्रियान्वयन पर पड़ता है।’ आयोग ने वोटिंग के आंकड़ों पर खरगे द्वारा विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के नेताओं को लिखे गए पत्र का संज्ञान लिया और इसे बेहद अवांछनीय पाया। आयोग ने खरगे के तर्कों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए उन्हें आक्षेप और बेबुनियाद बताया। चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा कि मतदाता मतदान के आंकड़ों के कलेक्शन और प्रसार में कोई चूक या विचलन नहीं हुआ है; सभी पिछली और वर्तमान प्रक्रियाओं और प्रथाओं का परीक्षण किया गया; और खरगे के दावों को खारिज करने के लिए बिंदुवार जवाब दिए गए।

आयोग ने मतदान के आंकड़े देने में किसी भी तरह की देरी से इनकार किया और बताया कि मतदान के अपडेट किए गए आंकड़े हमेशा मतदान के दिन से ज्यादा रहे हैं। आयोग ने 2019 के आम चुनाव से लेकर अब तक का तथ्यात्मक मैट्रिक्स पेश किया। आयोग ने कहा कि उसे कांग्रेस के पिछले और वर्तमान गैरजिम्मेदाराना बयानों की श्रृंखला में एक ‘पैटर्न’ दिखाई देता है और इसे ‘परेशान करने वाला’ करार दिया। आयोग ने कहा कि सभी तथ्यों के सामने होने के बावजूद, कांग्रेस अध्यक्ष पक्षपातपूर्ण बयानबाजी करने का प्रयास कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने विशेष रूप से खरगे के इस बयान की निंदा की कि ‘क्या यह अंतिम परिणामों को प्रभावित करने का प्रयास हो सकता है’, और कहा कि इससे संदेह और असामंजस्य के अलावा अराजक स्थिति पैदा हो सकती है। 7 मई को मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की तरफ से जारी मतदान आंकड़ों में कथित विसंगतियों पर I.N.D.I.A. के नेताओं को पत्र लिखा। अपने पत्र में खरगे ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से मतदान से जुड़े आंकड़ों में विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया, क्योंकि ‘हमारा एकमात्र उद्देश्य जीवंत लोकतंत्र और संविधान की संस्कृति की रक्षा करना है।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी मतदान के रुझानों और पहले दो चरणों में अपनी घटती चुनावी किस्मत से ‘स्पष्ट रूप से परेशान’ और ‘हताश’ हैं।

पत्र में कहा गया है, ‘इस संदर्भ में मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि हम सभी को सामूहिक रूप से, एकजुट होकर और स्पष्ट रूप से ऐसी विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, क्योंकि हमारा एकमात्र उद्देश्य एक जीवंत लोकतंत्र और संविधान की संस्कृति की रक्षा करना है। आइए हम भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें और इसे जवाबदेह बनाएं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम आयोग से पूछते हैं – प्रथम चरण के लिए, मतदान समाप्ति की तिथि (19.04.2024 को शाम 7 बजे) से लेकर मतदाता मतदान के आंकड़ों के देरी से जारी होने (30.04.2024 को) तक अंतिम मतदाता मतदान में लगभग 5.5% की वृद्धि क्यों हुई है? दूसरे चरण के लिए, मतदान समाप्ति की तिथि (26.04.2024 को शाम 7 बजे) से लेकर आंकड़ों के विलंब से जारी होने (30.04.2024 को) तक अंतिम मतदाता मतदान में लगभग 5.74 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है?’

उन्होंने कहा, ‘देरी के अलावा, आयोग की तरफ से जारी किए गए मतदान के आंकड़ों में महत्वपूर्ण लेकिन संबंधित आंकड़ों का उल्लेख नहीं किया गया है, जैसे कि प्रत्येक संसदीय क्षेत्र और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में डाले गए वोट। अगर मतदान के 24 घंटे के भीतर मतदाता मतदान के आंकड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों के साथ प्रकाशित किए गए होते, तो हमें पता चल जाता कि क्या निर्वाचन क्षेत्रों में वृद्धि (5% की) देखी गई थी। या केवल उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहां सत्तारूढ़ शासन ने 2019 के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था?’

सीएम केजरीवाल की वापसी से क्या-क्या बदलेगा?

आज हम आपको बताएंगे कि सीएम अरविंद केजरीवाल की वापसी से आखिर क्या-क्या बदलेगा! दिल्ली में 25 मई को लोकसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव के बीच शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के लिए सबसे अच्छी खबर सुप्रीम कोर्ट से आई। इस खबर ने ना सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं की मुराद पूरी की बल्कि इस चुनाव में विपक्षी गठबंधन की खुशी के लिए एक और मौका दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति में कथित घोटाला मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत मंजूर कर ली। इस आदेश के बाद केजरीवाल अब जेल से बाहर आ चुके हैं। केजरीवाल 1 जून तक जेल से बाहर ही रहेंगे। खास बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव प्रचार की अनुमति दे दी है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि केजरीवाल की वापसी से लोकसभा चुनाव पर क्या असर होगा। जेल से रिहा होने के बाद अरविंद केजरीवाल का पटाखों, ढोल के साथ स्वागत किया गया। केजरीवाल ने जेल से रिहा होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है। केजरीवाल ने रिहा होने के साथ ही केंद्र और बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। अब केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी अपने लोकसभा चुनाव कैंपने के लिए एक स्पष्ट दिशा और एक फिर से सक्रिय कैडर के साथ नए सिरे से रणनीति बनाएगी। खास बात है कि केजरीवाल की रिहाई का असर तीन राज्यों की उन 18 लोकसभा सीटों पर पड़ेगा जहां, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें दिल्ली की चार, पंजाब की 13 और हरियाणा की एक सीट शामिल हैं।

केजरीवाल की वापसी पर आम आदमी पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि यह हमारे लिए एक बड़ा कदम है। हमने अब तक अच्छा प्रचार किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले उनकी गिरफ्तारी का मुद्दा जनता की अदालत से लेकर कानून की अदालत तक हर मंच पर उठाया गया है। आप नेता ने कहा कि यह कोई रहस्य नहीं है कि वह हमारे सबसे अच्छे वक्ता हैं। आप के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”जो कुछ भी सामने आ रहा है, वह उसे करीब से देख रहे हैं और जमीन उनके धारदार प्रचार का असर देखने को मिलेगा। केजरीवाल की तरफ से दिल्ली में इलेक्शन कैंपेन को सुव्यवस्थित करने की भी उम्मीद है। दिल्ली में कांग्रेस और आप नेताओं के बीच चुनाव प्रचार को लेकर कई समन्वय बैठकें हुई हैं। हालांकि, दोनों पार्टियों के बीच तालमेल कुछ ही सीटों पर देखने को मिला है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश की जानकारी के बाद ही आम आदमी पार्टी ने अपने दिन की सभी योजनाओँ को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही पार्टी के नेताओं को पार्टी मुख्यालय पहुंचने का आदेश दिया गया। दिल्ली और हरियाणा में छठे चरण के तहत में 25 मई को मतदान होगा। वहीं, पंजाब में 1 जून को मतदान होगा। इसी दिन केजरीवाल की अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त हो रही है। माना जा रहा है कि केजरीवाल दिल्ली में, AAP की चार सीटों पर प्रचार के अलावा उन सीटों पर भी प्रचार करेंगे जहां इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। ऐसे में दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ इंडिया को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा पंजाब केजरीवाल के साथ-साथ पार्टी के लिए भी बड़ा फोकस क्षेत्र होगा। यह एक ऐसा राज्य है जहां AAP कांग्रेस के साथ गठबंधन में नहीं बल्कि सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अब तक राज्य में मोर्चा संभाले हुए हैं।

जेल का जवाब वोट से… अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद से आम आदमी पार्टी का प्रचार अभियान, इस नारे को केंद्र में रखकर चलाया जा रहा था। आम आदमी पार्टी के अनुसार गिरफ्तारी के बाद से पार्टी को लोगों की सहानुभूति का पूरा फायदा मिल रहा था। केंद्र और बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। अब केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी अपने लोकसभा चुनाव कैंपने के लिए एक स्पष्ट दिशा और एक फिर से सक्रिय कैडर के साथ नए सिरे से रणनीति बनाएगी। खास बात है कि केजरीवाल की रिहाई का असर तीन राज्यों की उन 18 लोकसभा सीटों पर पड़ेगा जहां, आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।पार्टी की तरफ से रोडशो या पब्लिक मीटिंग में लोग बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकल रहे थे। अब चूंकि केजरीवाल रिहा हो गए हैं तो पार्टी के प्रचार लाइन में बदलाव देखने को मिलेगा। पार्टी अब सीएम की वापसी के बाद नए सिरे से रणनीति बनाएगी।

क्या छेड़छाड़ के आरोप में फंस चुके हैं बंगाल के गवर्नर?

हाल ही में बंगाल के गवर्नर छेड़छाड़ के आरोप में बुरे फंस चुके हैं! पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ एक महिला ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। कोलकाता स्थित राजभवन के आवासीय क्वार्टर में रहने वाली महिला कर्मचारी ने राज्यपाल बोस से नौकरी को परमानेंट करने का आवेदन किया था। महिला ने आरोप लगाया कि गवर्नर के पास इस आवेदन को लेकर जाने के दौरान राज्यपाल ने उसे ‘गलत तरीके से छूने’ की कोशिश की। कोलकाता पुलिस को दी शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि गवर्नर बोस ने उसका दो बार यौन उत्पीड़न किया। इस मामले में भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। अब इस तरह के मामले में संवैधानिक पेंच फंसा हुआ। क्योंकि ऐसे मामले में राष्ट्रपति या राज्यपाल को कुछ विशेष छूट मिली हुई है। आइए, समझते हैं कि संविधान में वो कौन सा अनुच्छेद है, जिसके तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल को मामले की जांच या गिरफ्तारी से कवच मिला हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार अनिल सिंह श्रीनेत बताते हैं कि संविधान में अनुच्छेद-361 के एक नियम की वजह से पुलिस किसी राज्यपाल को संदिग्ध के रूप में केस दर्ज नहीं कर सकती है और न ही उनके खिलाफ मामले की जांच कर सकती है। अनुच्छेद-361 राष्ट्रपति और राज्यपालों को पद पर रहते हुए अपने कार्यों के लिए अदालत में जवाबदेह ठहराए जाने से छूट देता है। यानी राष्ट्रपति या राज्यपाल अपने कर्तव्यों निभाने के दौरान जो भी कुछ करते हैं, उसके लिए उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। ऐसे में राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ भी पद पर रहते कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

एडवोकेट अनिल सिंह बताते हैं कि पश्चिम बंगाल के गवर्नर बोस पर भी संविधान का यह नियम लागू होता है। संविधान में दी गई इस छूट के कारण पुलिस राज्यपाल को आरोपी के रूप में देखने या इस पूरे मामले को लेकर जांच शुरू नहीं कर सकती है। उन पर पद पर रहने के दौरान मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। पुलिस राज्यपाल के खिलाफ तभी कार्रवाई कर सकती है जब वे इस पद पर न हों या उनका कार्यकाल पूरा हो चुका हो। इसके अलावा, संविधान के अनुसार, जब राष्ट्रपति को उन पर भरोसा नहीं रह जाता है, तब भी राज्यपाल को इस्तीफा देना पड़ता है और इसके बाद ही उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल को दी गई इम्युनिटी पर ऐतिहासिक निर्णय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में रामेश्वर प्रसाद बनाम भारत संघ के मामले में कहा था कि राज्यपाल किसी भी कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह सुरक्षित हैं। राज्यपाल पर भले ही कुछ गलत करने का आरोप लगाए गए हों, मगर पद पर रहते उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। यानी राज्यपाल को कानूनी रूप से परेशान नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने तब यह भी कहा कि कानून में स्थिति यह है कि राज्यपाल को व्यक्तिगत दुर्भावना के आरोपों पर भी पूर्ण छूट प्राप्त है।

इससे पहले भी आपराधिक कार्रवाई को लेकर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कल्याण सिंह को भी संवैधानिक छूट मिली थी। दरअसल, 2017 में राजस्थान के राज्यपाल थे। उस वक्त बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उन्हें मुकदमे का सामना करने की छूट मिल गई थी। मगर, राज्यपाल होने की वजह से कल्याण सिंह के खिलाफ किसी तरह की आपराधिक कार्यवाही नहीं की गई थी। तब यह कहा गया था कि जब तक कल्याण सिंह राज्यपाल पद से नहीं हटते हैं, तब तक उनके ऊपर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। उस चक्त लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती को इस मामले में मुकदमे का सामना करना पड़ा था।

इस बीच सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने बोस पर राजभवन का अपमान करने का आरोप लगाते हुए इसे भयावह और अकल्पनीय करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि इस कृत्य से हमारी संवैधानिकता के प्रतीक राजभवन की पवित्रता धूमिल हो गई है। नौकरी के झूठे बहाने के तहत राज्यपाल ने एक महिला से कथित तौर पर छेड़छाड़ की। वहीं, राज्यपाल बोस ने भी इसे ममता बनर्जी की दीदीगीरी करार दिया है और इसे गंदी राजनीति बताया है। बोस ने राजभवन के 100 सीसीटीवी फुटेज दिखाने की बात भी कही है।

आखिर मीरजाफर के वंशज की क्या है सबसे बड़ी समस्या?

आज हम आपको मीरजाफर के वंशज की सबसे बड़ी समस्या बताने जा रहे हैं! लोकसभा चुनाव के बीच बंगाल के राजनीतिक विमर्श में, मीर जाफर का नाम लंबे समय से ‘गद्दार’ के पर्याय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। बंगाल को ब्रिटिश नियंत्रण में लाने वाली निर्णायक लड़ाई के 267 साल बाद भी, विरासत इतनी गहरी है कि मीर जाफर के वर्तमान उत्तराधिकारी अपने पूर्वजों के विश्वासघात से खुद को दूर रखना चाहते हैं। 1757 में प्लासी की लड़ाई में बंगाल में नवाब सिराज-उद-दौला के सबसे भरोसेमंद जनरलों में से एक मीर जाफर ब्रिटिश पक्ष में चले गए थे। इससे ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत हुई। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने धोखे की उस विरासत के बारे में और अधिक जानने के लिए मीर जाफर के जन्मस्थान की यात्रा की। मुर्शिदाबाद के किला निजामत में, हमारी मुलाकात मीर जाफर के 14वें परपोते, सैयद रजा अली मिर्जा से हुई। वह एक विनम्र जीवन जीते हैं। अली मिर्जा और बार-बार उल्लेख करते हैं कि कैसे गाली उनके परिवार को परेशान करती है। उनकी ड्राइंग-कम-बेडरूम की दीवार पर उनके सभी पूर्वजों की तस्वीरें हैं। यहां तक कि नवाब सिराज-उद-दौला की भी, लेकिन मीर जाफर की नहीं है। अली मिर्जा साफगोई से कहते हैं कि मैं अपने मेहमानों से दुर्व्यवहार नहीं चाहता। 80 के दशक की शुरुआत में, छोटे नवाब के नाम से जाने जाने वाले मिर्जा, परिवार की प्रतिष्ठा और समृद्धि में भारी गिरावट के बावजूद फुर्तीले और मिलनसार हैं। अब वह साइकिल चलाते हैं, लेकिन उन्हें शाही हाथी पर स्कूल जाना अच्छी तरह याद है।

क्या आपको चुनाव के समय राजनीतिक गद्दार के लिए मीर जाफर का नाम इतने व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने से घृणा नहीं होती? इस पर अली मिर्जा कहते हैं, ‘क्या करें? मैं अपने 14वें परदादा के नाम से जुड़ी इतिहास की धारा को नहीं बदल सकता, न ही मैं लोकप्रचलित वाक्यांश को बदल सकता हूं। उन्होंने कमजोर ढंग से अपने पूर्वज के बचाव की कोशिश की। उन्होंने कहा, यहां तक कि मीर जाफर घसेटी बेगम, जगत सेठ, कंपनी के कासिम बाजार प्रमुख विलियम वाट्स, मोतीझील में रॉबर्ट क्लाइव की तरफ से रची गई मूल साजिश का हिस्सा नहीं था। छोटे नवाब के बेटे, फहीम मिर्ज़ा, एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक और टीएमसी संचालित लालबाग नगर पालिका में वार्ड 10 के तृणमूल पार्षद हैं। फहीम ने कहा कि मेरे परदादा वासिफ अली मिर्जा ने बड़े पैमाने पर मीर जाफर की बदनामी को भुनाया। वासिफ अली ने शेरबोर्न स्कूल, रग्बी स्कूल और ट्रिनिटी कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की थी।

फहीम ने बताया कि 15 अगस्त, 1947 को, रैडक्लिफ अवार्ड ने मुर्शिदाबाद जिले को पाकिस्तान को आवंटित कर दिया था। पाकिस्तान का झंडा यहां हजारदुआरी पैलेस में फहराया गया। लेकिन दो दिनों के भीतर, वासिफ अली मिर्जा के हस्तक्षेप के कारण, दो प्रभुत्वों का आदान-प्रदान हो गया। खुलना बांग्लादेश का हिस्सा बन गया और 17 अगस्त 1947 को मुर्शिदाबाद के भव्य महल में भारतीय ध्वज फहराया गया। भारतीय सरकार ने 1953 में उनकी सारी संपत्ति उन्हें वापस कर दी। फहीम ने कहा कि वह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के सबसे बड़े चैंपियन थे। बाद में, परिवार के एक सदस्य, इस्कंदर मिर्ज़ा, पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति बने। छोटे नवाब ने कहा कि वह नवाब बहादुर इंस्टीट्यूट गए। इसके बाद हायर स्टडी के लिए बॉम्बे चले गए। वे बाद में एक सैन्य अधिकारी के रूप में पाकिस्तान चले गए। उनका मुर्शिदाबाद वाला घर रखरखाव के अभाव में खंडहर हो गया है।

हालांकि, छोटे नवाब नहीं चाहते कि उन्हें मीर जाफर के पारिवारिक कब्रिस्तान, जाफरगंज में दफनाया जाए। वे कहते हैं कि जोड़ी किचुता कोम गाली खाई इस तरह, मुझे कम गालियां मिलेंगी। उन्होंने कहा, यहां तक कि मीर जाफर घसेटी बेगम, जगत सेठ, कंपनी के कासिम बाजार प्रमुख विलियम वाट्स, मोतीझील में रॉबर्ट क्लाइव की तरफ से रची गई मूल साजिश का हिस्सा नहीं था। छोटे नवाब के बेटे, फहीम मिर्ज़ा, एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक और टीएमसी संचालित लालबाग नगर पालिका में वार्ड 10 के तृणमूल पार्षद हैं।कब्रिस्तान के एक मार्गदर्शक लालटन हुसैन ने कहा कि मीर जाफर की कब्र पर आने वाले लोग अक्सर घृणावश उस पर थूक देते थे। फिर हम 500 रुपये का जुर्माना लेते हैं और कब्र को धोते हैं। इसके बाद वहां फूल और अगरबत्ती लगाते हैं। लालटन हुसैन को जिला राजकोष से प्रति माह 11 रुपये का वेतन मिलता है। यह राशि नवाब के दिनों से नहीं बदली है। जाफरगंज में मीर जाफर के महल के विशाल प्रवेश द्वार को अभी भी नेमक हरम देउरी या गद्दार का दरवाजा कहा जाता है।

क्या भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है मालदीव?

वर्तमान में मालदीव भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है! मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात भी की। इस मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी विश्वास से जुड़े हैं और हमारी अपने पड़ोसी देशों के साथ नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी का अहम हिस्सा रहा है। विदेश मंत्री ने ये कहा कि मालदीव में डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट में योगदान को लेकर भारत अगुवा की भूमिका में रहा है। इन प्रोजेक्ट से वहां के लोगों की ज़िंदगी के स्तर में पॉजिटिव बदलाव आया है। इन प्रोजेक्ट्स मे ना सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट बल्कि कई सामाजिक पहल के प्रोजेक्ट भी हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने मालदीव में मेडिकल ऑपरेशन्स के साथ साथ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को भी सुचारू रूप से चलाया है। विदेश मंत्री ने भारत की ओर मालदीव को दी गई वित्तीय सहायता का भी जिक्र किया और कहा कि कई मौकों पर मालदीव की मदद के लिए हम सबसे पहले एक्शन में आए हैं। आखिर में जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक मुश्किल वक्त से गुजर रही है। ऐसे में पड़ोसियों के साथ नजदीकी रिश्ते रखना जरूरी है।

दरअसल पिछले साल के आखिर में इंडिया आउट के नारे पर राष्ट्रपति मुइज्जू के चुनाव लड़ने और जीतने के बाद भारत और मालदीव के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव आया है, इस दौरान मालदीव सरकार ने लगातार अपने बयानों के जरिए चीन परस्ती दिखाई। मुइज्जू के मंत्रियों ने भारत के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट भी किए, जिन्हें लेकर खासा बवाल भी हुआ था। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार हर्ष पंत कहते हैं कि मालदीव को आर्थिक तौर पर भारत की जरूरत है और इससे वो इनकार नहीं कर सकता। वो कहते हैं कि ये यात्रा वहां हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद हो रही है। ऐसे में राजनीतिक तौर पर मुइज्जू सरकार की कोई मजबूरी नहीं है कि वो इंडिया का कार्ड लेकर पॉलिटिक्स करे। ऐसे में इंडिया आउट कार्ड का प्रभाव उनकी विदेश नीति में थोड़े समय के लिए कम प्रभावकारी हो गया है।

बात साफ है कि जिस आर्थिक परेशानी से मालदीव गुज़र रहा है। ऐसे में भारत के साथ की जरूरत और बढ़ जाती है। ये बात मुइज्जू पहले भी कह चुके हैं कि ये जरूरी है कि भारत के साथ आर्थिक संबंध सुधरें। वहीं भारत ने लगातार मुइज्जू की ओर से भड़काऊ बयानों के बाद भी सयंम बरता है। ऐसे में रिश्तों में सहजता कायम करने को लेकर ज्यादा जिम्मेदारी मालदीव की है, ना कि भारत की। और वो वही करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि जानकार ये भी कहते हैं कि इस यात्रा का मतलब ये नहीं है कि मालदीव अपनी चीन परस्त नीति से परे हट रहा है। लेकिन चीन और भारत के बीच उसे डिप्लोमैटिक बैलेंस बनाना उसके हित में है। यह, यात्रा इसी सिलसिले का का एक हिस्सा है। बता दें कि विदेश मंत्री मूसा ने भारत के लिए रवाना होने से पहले कहा था कि वो भारत-मालदीव के बीच सहयोग को बढ़ाने का प्रयास करेंगे, जिससे दोनों देशों को फायदा हो। ध्यान रहे कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर करने की आखिरी तारीख भी 10 मई ही तय की गई थी। ऐसे में इस यात्रा को दोनों विदेश मंत्रियों की युगांडा में हुई बैठक से आगे का कदम माना जा रहा है।

मालदीव में महज़ दो हफ्तों पहले ही संसदीय चुनाव हुए हैं। इन चुनाव में मुइज्जू के दल को बड़ी जीत हासिल हुई है, यानि मुइज्जू जानते हैं कि उनका इंडिया आउट एजेंडा चल रहा है और ऐसे में वो दीर्घकालिक तौर पर भारत विरोधी सेंटीमेंट का इस्तेमाल करना राजनीतिक तौर पर नहीं छोड़ेंगे। लेकिन देशों में एक डिप्लोमैटिक बैलेंस बनना रणनीतिक प्राथमिकताओं का तकाजा होता है। यात्रा वहां हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद हो रही है। ऐसे में राजनीतिक तौर पर मुइज्जू सरकार की कोई मजबूरी नहीं है कि वो इंडिया का कार्ड लेकर पॉलिटिक्स करे। ऐसे में इंडिया आउट कार्ड का प्रभाव उनकी विदेश नीति में थोड़े समय के लिए कम प्रभावकारी हो गया है।खासकर इस क्षेत्र में जब भी चीन और भारत, दो बड़ी महाशक्तियों का बैलेंस बिगड़ता है, तो येचाहे अनचाहे वो मालदीव जैसे किसी भी तीसरे देश के लिए दिक्कत भरा हो सकता है। विदेश मंत्री की इस यात्रा से पहले मालदीव के पर्यटन मंत्री इब्राहिम फैसल भारतीय पर्यटकों से मालदीव आने की अपील पहले भी कर चुके हैं।

आखिर प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल की जमानत पर क्यों किया विरोध?

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल की जमानत पर विरोध जाहिर किया है! आबकारी नीति घोटाला मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट का शुक्रवार को फैसला आने से पहले ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में कहा है कि चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल को जमानत नहीं दी जा सकती है। चुनाव प्रचार का अधिकार ना तो संवैधानिक अधिकार है और ना ही कानूनी अधिकार। सुप्रीम कोर्ट में ईडी की ओर से दाखिल नए हलफनामा में केजरीवाल की अंतरिम जमानत की मांग वाली अर्जी का विरोध किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि आम चुनाव के मद्देनजर वह केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी पर विचार करेंगे। इसके बाद अंतरिम जमानत पर सुनवाई हुई थी। पिछले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह शुक्रवार को फैसला देंगे। सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा कि अगर केजरीवाल को चुनाव के आधार पर अंतरिम जमानत दी जाती है तो इससे एक नजीर पेश होगा और इस कारण वैसे राजनीतिक शख्स जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस है उन्हें भी अंतरिम जमानत की इजाजत मिलेगी और चुनाव के नाम पर वह छानबीन के दायरे से बाहर होंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच इस मामले में शुक्रवार को फैसला देने वाली है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह शुक्रवार को फैसला देंगे।इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर वह अंतरिम जमानत पर केजरीवाल को रिलीज करेंगे तो वह इस दौरान सरकारी कामकाज नहीं करेंगे तब केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि वह फाइल पर दस्तखत नहीं करेंगे बशर्ते कि एलजी फाइल पर दस्तखत ना होने के आधार पर काम ना रोकें। ईडी ने अंतरिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए हलफनामा दायर किया है और कहा है कि चुनाव प्रचार का जो अधिकार है वह ना तो मौलिक अधिकार है और ना ही यह संवैधानिक अधिकार है। ईडी ने कहा कि यहां तक कि चुनाव प्रचार का अधिकार कानूनी अधिकार के दायरे में भी नहीं है। साथ ही ईडी ने कहा है कि कोई भी राजनीतिक व्यक्ति किसी भी साधारण व आम जनता से ज्यादा अधिकार का दावा नहीं कर सकता है। कोई राजनीतिक व्यक्ति इस बात का अधिकार नहीं रखता है कि उसे किसी आम जनता से अलग ट्रीट किया जाए और ना ही वह आम जनता से ज्यादा अधिकार रखने का दावा कर सकता है।

ईडी ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी के नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं गई है चाहे वह पॉलिटिकल लीडर खुद चुनाव ही क्यों ना लड़ रहे हों। यहां तक कि कंटेस्ट करने वाले कैंडिडेट को भी चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी जाती रही है। सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा कि अगर केजरीवाल को चुनाव के आधार पर अंतरिम जमानत दी जाती है तो इससे एक नजीर पेश होगा और इस कारण वैसे राजनीतिक शख्स जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस है उन्हें भी अंतरिम जमानत की इजाजत मिलेगी और चुनाव के नाम पर वह छानबीन के दायरे से बाहर होंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली बेंच इस मामले में शुक्रवार को फैसला देने वाली है।

केजरीवाल को 21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी और रिमांड को केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। निचली अदालत और हाई कोर्ट से मामले में राहत नहीं मिलने के बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई में वक्त लग रहा है ऐसे में वह आम चुनाव के मद्देनजर केजरीवाल की अंतरिम जमानत की अर्जी पर विचार करेंगे। हलफनामा में केजरीवाल की अंतरिम जमानत की मांग वाली अर्जी का विरोध किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि आम चुनाव के मद्देनजर वह केजरीवाल की अंतरिम जमानत अर्जी पर विचार करेंगे। इसके बाद अंतरिम जमानत पर सुनवाई हुई थी। पिछले सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि वह शुक्रवार को फैसला देंगे।इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर वह अंतरिम जमानत पर केजरीवाल को रिलीज करेंगे तो वह इस दौरान सरकारी कामकाज नहीं करेंगे तब केजरीवाल की ओर से कहा गया था कि वह फाइल पर दस्तखत नहीं करेंगे बशर्ते कि एलजी फाइल पर दस्तखत ना होने के आधार पर काम ना रोकें।