Sunday, April 12, 2026
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क्या लोकसभा चुनाव से पहले लागू होगा CAA?

अब लोकसभा चुनाव से पहले ही CAA लागू हो सकता है! 2024 में आम चुनाव से पहले एक बार फिर से नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने का मुद्दा गरमाने लगा है। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आम चुनावों से पहले नियमों को नोटिफाई कर इसे लागू करने की बात कही थी। मतलब साफ है कि सरकार सीएए को जल्द से जल्द लागू करने की तैयारी में है। लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि इसे लागू करने से पहले केंद्र सरकार की चुनौती और मंशा क्या है? पूर्व आईएस विजय शंकर पाण्डेय कहते हैं कि सीएए काननू से जुड़ा बिल 2019 दिसंबर में संसद से पास हुआ था। इसका एक ही मकसद था कि जो भी लोग 31 दिसंबर, 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ाना की वजह से भारत आए थे, उनमें मुस्लिम को छोड़कर बाकी को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था। तब इसका विरोध हुआ था। विरोध के पीछे वजह यह था कि धर्म के आधार पर इसे क्यों लाया गया? वह सवाल आज भी वैसे ही खड़ा है? इसलिए इस कानून को लागू करने में चुनौतियां कम नहीं हुई हैं और ना ही होने वाली हैं। इस मामले में कुछ जानकार मानते हैं कि देश का संविधान सेकुलर है। इसलिए धर्म के आधार पर कुछ चीज लागू नहीं कर सकते। इसी सवाल का जवाब देने की चुनौती अभी भी सरकार के सामने रहेगी। दरअसल तब जो मुद्दे थे, वह अभी भी बने हुए हैं, उनका समाधान नहीं हो पाया है। कोई भी ऐक्ट तब तक लागू नहीं हो सकता, जब तक की इसके लिए रूल्स नहीं बन जाते। चार साल हो गए सरकार इसे नोटिफाई नहीं कर पाई है। मूल मुद्दा यह है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले जो लोग धार्मिक प्रताड़ना की वजह से तीन पड़ोसी देशों से भारत आए हैं उन्हें नागरिकता देना है। इसमें गैर मुस्लिमों को प्राथमिकता के आधार पर इन्हें नागरिकता देने का रास्ता साफ हो जाएगा।

सीएए कानून के मुताबिक, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से जो लोग 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए। वह देश की नागरिकता लेने के लिए इसमें अप्लाई कर सकेंगे। इनमें हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी को शामिल किया गया है। नागरिकता देने के लिए सरकार ने एक पोर्टल भी लगभग तैयार कर लिया है। ताकि सबकुछ डिजिटल और आसानी से हो सके। कुछ चीजों को 26 जनवरी से पहले भी सामने लाने की कोशिश की जा रही है। केंद्र सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन लगता है कि इसके बारे में उचित रूप से जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाई, बड़ा गैप रह गया है। वह कहते हैं कि यह तो भारत के नागरिकों के लिए कानून है ही नहीं, तो फिर ऐसा हंगामा क्यों?

पहली बार 2015 में यह कानून सामने आया था। तब कानून में पड़ोसी मुल्कों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की बात थी। उसमें किसी धर्म का जिक्र नहीं था। लेकिन 2019 के बिल में इसमें धर्म का नाम जोड़ा गया। सरकार का तर्क था कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि जिन देशों के लिए कानून है वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। लेकिन इसके विरोधी इसमें धर्म के जिक्र को गलत मानते हैं। साथ ही इससे NRC के भी जुड़ने की आशंका ने विवाद और बढ़ा दिया। लेकिन अभी सरकार सिर्फ सीएए की बात कर रही है। आम चुनाव से पहले यह मुद्दा सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्यों पर इसका असर हो सकता है।

बता दे कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों से आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता में सहूलियत देने वाला कानून लोकसभा चुनाव से पहले ही लागू हो सकता है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्स्प्रेस ने सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए नियमों का नोटिफिकेशन लोकसभा चुनावों के ऐलान से काफी पहले ही जारी कर दिए जाएंगे। स्वाभाविक है कि सीएए लागू हुआ तो यह लोकसभा चुनाव का भी बड़ा मुद्दा बनेगा। बीजेपी इसे अपने पक्ष में भुनाने का भरपूर प्रयास करेगी जबकि विपक्षी दल इसे मुस्लिम विरोधी कदम बताकर अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण करने की जुगत लगाएंगे। सूत्रों ने कहा, ‘हम आने वाले दिनों में सीएए के लिए नियम जारी करने जा रहे हैं। एक बार नियम जारी होने के बाद कानून लागू किया जा सकता है और जो पात्र हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जा सकती है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या नियम लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले अधिसूचित किए जाएंगे, सूत्रों ने कहा, ‘सब कुछ तैयार है और हां, उन्हें चुनाव से पहले लागू किए जाने की संभावना है। आवेदकों को बिना यात्रा दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने का वर्ष घोषित करना होगा। आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। 2014 के बाद आवेदन करने वाले आवेदकों के अनुरोधों को नए नियमों के अनुसार बदला जाएगा।’

क्या 2024 में वापस फैन्स के दिलों में अधिकार जमाएंगे अक्षय कुमार?

अक्षय कुमार 2024 में वापस फैन्स के दिलों में अधिकार जमा सकते हैं! नए साल 2024 में जहां खान सितारों शाहरुख, सलमान व आमिर खान की कोई फिल्म रिलीज नहीं हो रही है। वहीं बीते साल बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले फिल्म स्टार्स रणबीर कपूर व रणवीर सिंह की भी कोई फिल्म रिलीज के लिए तैयार नहीं है। फिलहाल सबकी नजरें अक्षय कुमार पर हैं, जिनकी इस साल करीब आधा दर्जन फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। बॉक्स ऑफिस पर किसी दूसरे बड़े सितारे की गैर मौजूदगी में अक्षय ने साल की तमाम बड़ी रिलीज डेट्स अपने नाम कर ली हैं। जानकार कहते हैं कि अमूमन बड़े फिल्मी सितारे ज्यादा से ज्यादा तीन बड़ी रिलीज डेट अपने नाम कर पाते हैं। लेकिन अक्षय ने आधा दर्जन रिलीज डेट्स अपने नाम करके नया रेकॉर्ड बनाया है। इस साल उनकी फिल्म ‘स्टार्टअप वैलंटाइंस डे’ वीकेंड पर रिलीज होगी। वहीं टाइगर श्रॉफ के साथ उनकी फिल्म बड़े मियां छोटे मियां ईद पर रिलीज होगी। इंडिपेंडेंस डे पर अक्की अजय देवगन व रणवीर सिंह के साथ रोहित शेट्टी की फिल्म सिंघम अगेन में नजर आएंगे। जबकि गांधी जयंती पर अक्षय की फिल्म स्काई फोर्स बड़े पर्दे पर आएगी। दिवाली पर अक्षय की फिल्म हाउसफुल 5 रिलीज होनी थी, लेकिन अब उसके पोस्टपोन होने पर शिवाजी पर आधारित उनकी मराठी फिल्म के रिलीज होने की चर्चा है। यह फिल्म हिंदी समेत कई भाषाओं में डब होकर रिलीज होगी। वहीं अक्षय की सुपरहिट वेलकम फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म ‘वेलकम टु द जंगल’ को क्रिसमस वीकेंड पर रिलीज किया जाएगा।

अमूमन जहां फिल्मी सितारे एक साल में एक या दो फिल्में रिलीज करने के लिए जाने जाते हैं। वहीं अगर कोई सितारा शाहरुख खान की तरह लंबी तैयारी करे, तो भी वह साल में ज्यादा से ज्यादा तीन फिल्में रिलीज कर पाता है। लेकिन करीब एक-डेढ़ महीने में अपनी ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग पूरी कर लेने वाले अक्षय कुमार एक साल में पांच से छह फिल्में रिलीज करने के जाने जाते हैं। यही वजह है कि अक्षय अपनी इस साल 2024 में रिलीज होने वाली फिल्मों का ज्यादातर काम पूरा कर चुके हैं। वहीं अब उन्होंने अगले साल के लिए प्लान की गई फिल्मों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। बात अगर अक्की की अगले साल रिलीज होने वाली फिल्मों की करें, तो इनमें हाउसफुल 5 की रिलीज पहले से ही जून 2025 के लिए घोषित हो चुकी है। इसके अलावा अक्षय अपनी सुपरहिट हेराफेरी व जॉली एलएलबी फ्रेंचाइजी की अगली फिल्मों पर भी काम शुरू कर चुके हैं। यही नहीं अक्की के पिछले दिनों अपने फेवरिट कॉमेडी डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ भी एक कॉमेडी फिल्म करने की खबर आई थी। वहीं दूसरी ओर उनके एक बायॉपिक फिल्म शंकरा की भी शूटिंग शुरू करने की चर्चा है।

बता दे कि 2024 में स्टार्टअप वैलंटाइंस डे, बड़े मियां छोटे मियां ईद, सिंघम अगेन इंडिपेंडेंस डे, स्काई फोर्स गांधी जयंती, मराठी फिल्म शिवाजी, दिवाली, वेलकम टु द जंगल क्रिसमस आदि फ़िल्में रिलीज होने वाली है! वहीं अगर बात अगले साल की करे तो अगले साल के लिए है चर्चा हाउसफुल 5, हेराफेरी 3, शंकरा, जॉली एलएलबी 3, प्रियदर्शन फिल्म इत्यादि फ़िल्मों की है! 

 नए साल में अक्षय कुमार के जबर्दस्त लाइनअप के बारे में बात कर करने पर प्रोड्यूसर और फिल्म बिजनेस एनालिस्ट गिरीश जौहर कहते हैं, ‘पिछला साल 2023 शाहरुख खान के नाम रहा। उनकी दो फिल्मों पठान और जवान ने दुनियाभर में 1000 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। लेकिन अगले साल 2024 में तीनों खान सितारों आमिर, शाहरुख और सलमान में से किसी की कोई फिल्म रिलीज नहीं हो रही है। ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर कमाई का सारा दारोमदार अक्षय कुमार के जिम्मे होगा। उनकी करीब आधा दर्जन से ज्यादा फिल्में 2024 में रिलीज होने वाली हैं। लेकिन अब उसके पोस्टपोन होने पर शिवाजी पर आधारित उनकी मराठी फिल्म के रिलीज होने की चर्चा है। यह फिल्म हिंदी समेत कई भाषाओं में डब होकर रिलीज होगी। वहीं अक्षय की सुपरहिट वेलकम फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म ‘वेलकम टु द जंगल’ को क्रिसमस वीकेंड पर रिलीज किया जाएगा।अक्षय कुमार की ईद पर बड़े मियां छोटे मियां, गांधी जयंती पर स्काई फोर्स और क्रिसमस पर वेलकम 3 जैसी बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इसके अलावा उनकी कई और फिल्में इसी साल रिलीज होंगी। अक्षय के अलावा इस साल बॉक्स ऑफिस पर रितिक रोशन, सनी देओल व अजय देवगन की फिल्मों के भी कमाल करने की संभावना है।’

क्या अब कांग्रेस के लिए भी चुनौती बन गई है भारत जोड़ो न्याय यात्रा?

अब भारत जोड़ो न्याय यात्रा कांग्रेस के लिए भी चुनौती बन गई है! लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी एक बार फिर भारत न्याय यात्रा निकालने जा रहे हैं। यह यात्रा करीब 11 दिन उत्तर प्रदेश में रहेगी।जानकारों का मानना है कि उनकी यह यात्रा सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के लिए भी चुनौती बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि इसके रूट प्लान से साफ है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर फोकस कर रहे हैं। वे इसी बहाने अमेठी भी लौट रहे हैं। इस यात्रा के दौरान सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष का इस बात पर ध्यान रहेगा कि राहुल गांधी का उत्तर और दक्षिण की राजनीति को लेकर जनता के बीच क्या स्टैंड रहता है और वे यात्रा के दौरान इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों को कितना साथ लेकर चल पाते हैं। इसके अलावा, अयोध्या में बने माहौल के बीच उन्हें सनातन पर भी अपना रुख स्पष्ट करना होगा। साथ ही स्टालिन की पार्टी के गठबंधन की बात को भी सही साबित करना होगा। भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ का जो रूट मैप जारी किया है। उसमें राहुल गांधी सबसे ज्यादा समय उत्तर प्रदेश में गुजारेंगे। यूपी में वह 11 दिन में 1,074 किलोमीटर की यात्रा तय करेंगे। इस दौरान 20 जिलों की 23 लोकसभा सीटों को छुएंगे। राहुल गांधी यूपी में चंदौली से प्रवेश करेंगे और उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी होते हुए अपने गढ़ अमेठी और रायबरेली पहुंचेगे। भारत न्याय यात्रा जिन राज्यों से गुजरेगी, वहां कांग्रेस और ‘इंडिया’ के सहयोगियों से सीटों का तालमेल एक बड़ी चुनौती है। जिन राज्यों में कांग्रेस और इंडिया के सहयोगी दलों में शामिल दलों के बीच सीटों का तालमेल एक बड़ा मुद्दा हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी जिन सीटों पर चुनाव लड़ने की सोच रही उन्हीं 22 जिलों से राहुल गांधी की यात्रा गुजरेगी। इसी कारण कांग्रेस अपनी फोकस सीटों के रास्ते से राहुल गांधी को ले जाने का प्लान बनाया है। पूर्वांचल से लेकर अवध, रुहेलखंड से पश्चिमी यूपी और बृज क्षेत्र तक को मथने की रणनीति है।

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस की प्रदेश इकाई कई सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। वहीं गठबंधन से बात करने के लिए बनी समिति ने करीब दो दर्जन सीटें छांटी हैं, जिन पर वह मजबूत दावा पेश करेगी। साथ में यह भी कहा है कि भाजपा को हराने के लिए दोनों दल पूरी तरह साथ आएंगे तभी बात बनेगी। लेकिन यह साथ केवल कहने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि सीटों में उसे भी बड़ी हिस्सेदारी देनी पड़ेगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी कहते हैं कि राहुल गांधी की पहले निकल चुकी भारत जोड़ो यात्रा ने पूरे देश में व्यापक असर डाला था। इस बार की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 11 दिन रहकर 1,074 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस दौरान यह बनारस से शुरू होकर आगरा पहुंचकर लगभग पूरे प्रदेश के सभी अंचलों में पहुंच जाएगी। इस यात्रा से प्रदेश के सभी वर्गों में इसका व्यापक असर होगा। हमारे इंडिया गठबंधन के सहयोगी सपा आरएलडी या अन्य दलों से भी उम्मीद है कि वह सब यात्रा को अपना भरपूर समर्थन देंगे। यह न्याय यात्रा प्रदेश के 2024 के चुनाव में कांग्रेस सहित पूरे इंडिया गठबंधन को ताकत देगी।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में मरणासन्न पड़ी कांग्रेस को जिंदा करने की पूरी कोशिश करेंगे। न्याय यात्रा सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के लिए भी चुनौती बनेगी, क्योंकि सपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुई तकरार भले ही सार्वजनिक क्षेत्र में न दिख रही हो, लेकिन अंदर खाने में टकराव से इनकार नहीं किया जा सकता। तीन राज्यों के चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के ऊपर क्षेत्रीय दलों का दबाव होगा। वैसे भी अखिलेश यादव ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने अंदर खाने कई उम्मीदवार भी तय कर रखे है। चूंकि यह यात्रा पूरी तरह राजनीतिक है इस कारण इसके बयान और गठबंधन पर लेकर आगे की भूमिका क्या होगी इस पर विपक्षी दलों की पूरी नजर रहेगी। रावत कहते हैं कि भाजपा अयोध्या में राम मंदिर के सहारे माहौल को गरमाने में लगी है‌। 22 तारीख को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद देशभर से राम भक्तों का अयोध्या आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इससे उत्तर भारत में भाजपा के पक्ष में हिंदू वोटरों की लामबंदी का माहौल बनता दिख रहा है। ऐसे में राहुल गांधी के सामने अयोध्या के सहारे पैदा किये जा रहे हिंदुत्व की नई लहर को रोक पाने की बड़ी चुनौती होगी।

भारत जोड़ो यात्रा का प्रभाव उन्हीं जिलों पर पड़ा था जहां से यात्रा गुजरी थी। क्योंकि यह यात्रा मध्यप्रदेश और राजस्थान भी गई वहां पर कुछ इसका विशेष असर नहीं दिखा। कर्नाटक में बदलाव की बयार बह रही थी जिस कारण वहां पर कांग्रेस की सरकार बन गई। इसका पूरा प्रभाव प्रदेश में नहीं पड़ता है। इस तरह की यात्रा जब तक बहुत व्यापक उद्देश्य के साथ नहीं चलती है, तब तक राजनीतिक असर नहीं होता है। 2012 में अखिलेश यादव ने जो यात्रा निकाली थी, सपा का प्रभाव पूरे प्रदेश में था। उस समय लोग मायावती से बदलाव चाहते थे। उन्होंने अपने को विकल्प के तौर पर प्रस्तुत किया था, जिस कारण उन्हें सफलता मिली थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने को बड़े विकल्प के तौर पर अभी तक प्रोजेक्ट नहीं कर पा रही है। इंडिया गठबंधन के जो आंतरिक गतिरोध हैं, उसके कारण कांग्रेस ऐसा कर भी नहीं पाएगी। इसी कारण कांग्रेस से लोगों को बहुत अपेक्षा नहीं है। इसका प्रभाव बहुत सीमित रहेगा। एक-दो जिलों के बाद यह तय हो जायेगा कि इसमें स्थानीय लोगों का कितना जुड़ाव है। उसके बाद अन्य दल तय करेंगे कि इस यात्रा को कितनी गंभीरता से लिया जाए। रतनमणि लाल कहते हैं कि इस यात्रा में राहुल गांधी के बयानों पर भी नजर होगी। एक बात तो तय है कि सिर्फ यात्रा किसी चुनाव का पैमाना नहीं हो सकती है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस यात्रा को लेकर कहा कि कांग्रेस लगातार राहुल गांधी को रीलांच करने की कोशिश करती रहती है। लेकिन वह सफल नहीं हो पा रही है। पहले से जुड़े देश को वह फिर जोड़ने निकले हैं। उनकी पहली यात्रा विफल रही है। जिन लोगों ने 70 साल तक जनता के साथ अन्याय किया है, वे न्याय यात्रा निकाल रहे हैं। आने वाले समय में कांग्रेस सिर्फ पुरातात्विक समाग्री बनकर रहेगी जो इतिहास में पढ़ाने के काम आयेगी।

आखिर कैसे लुप्त हो रहे हैं साइबेरियन क्रेन पक्षी?

आज हम आपको बताएंगे कि साइबेरियन क्रेन पक्षी कैसे लुप्त हो रहे हैं! हर साल सर्दियों के मौसम में, नवंबर के पहले हफ्ते के आसपास, साइबेरियन पक्षी ओमिद घड़ी की तरह ईरान के उत्तरी इलाके कैस्पियन के मैदानों में लौट आता था। कुछ ही समय में, यह ईरान का एक बहुप्रतीक्षित उत्सव बन गया, अखबारों में उसके आगमन की खबरें छपतीं। पूरे 15 साल तक, इस मेल साइबेरियन क्रेन ने सर्दियों से पहले पश्चिमी साइबेरिया से ईरान तक 5,000 किलोमीटर की खतरनाक उड़ान भरी, और वसंत में वापस साइबेरिया की यात्रा की। लेकिन इस साल, ऐसा नहीं हुआ। हफ्तों इंतजार के बाद, दिसंबर के अंत में ईरान के पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने दुखद खबर दी कि इंटरनेशनल क्रेन फाउंडेशन के सदस्यों के मुताबिक, ओमिद यानी साइबेरियन क्रेन के बारे में कोई खबर नहीं है। तो फिर यह पक्षी कहां गया ? क्या दुनिया का सबसे तन्हा परिंद जिंदा है? सवाल कई उठे पर जवाब किसी के पास नहीं। फारसी में, ‘ओमिद’ का अर्थ है आशा – उर्दू में ‘उम्मीद’ के समान – यह नाम इस पक्षी के लिए बिल्कुल सटीक था, जो अपने थके हुए पंखों पर साइबेरियन क्रेन की पश्चिमी आबादी के पुनरुद्धार की एक किरण लिए उड़ता था। उसका यह बोझ उठाने वाला और कोई नहीं था। 2008 के अंत या 2009 की शुरुआत में, जब उसकी साथी अरज़ू की मृत्यु हो गई, तब से ओमिद जंगल में उस कड़ी का आखिरी बचा हुआ सदस्य था।

एक अधिकारी के शब्दों में कभी-कभी दुनिया का सबसे अकेला पक्षी कहलाने वाला ओमिद फिर भी अपनी जीवित रहने की अद्भुत क्षमता दर्शाता था। अकेले ही, उसने खतरनाक प्रवास की राह पार की, पश्चिमी साइबेरिया के जंगलों से, कजाकिस्तान होते हुए रूस के वोल्गा डेल्टा तक और फिर दक्षिण में अजरबैजान से ईरान तक – हर साल, बिल्कुल “घड़ी की कल की तरह। उसकी अविश्वसनीय दृढ़ता और विलुप्त होने के खिलाफ उसके दिल को छू लेने वाले संघर्ष ने दुनिया भर के लोगों को भावुक किया, जिससे ओमिद ईरान में और अंतरराष्ट्रीय पक्षी देखने वालों के बीच एक प्रकार का सेलिब्रिटी बन गया। इसने भी उम्मीद जगाई कि गंभीर रूप से लुप्तप्राय: साइबेरियन क्रेन की पश्चिमी प्रवासी आबादी को किसी तरह जीवित रखा जा सकता है। ICF के सह-संस्थापक जॉर्ज आर्चिबाल्ड ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि 15 शरद ऋितुओं के लिए, एक अकेला नर साइबेरियन क्रेन, ओमिद, ईरान लौटा है। इस सर्दी में उसका न आना शायद उस क्षेत्र में प्रवास करने वाले साइबेरियन क्रेन के अंत का संकेत देता है।

पक्षी विज्ञानियों को निस्संदेह इस असाधारण पक्षी के लिए शोकगीत लिखने से पहले कम से कम एक और साल इंतजार करना होगा। लंबी प्रवास उड़ानें कई जटिल संकेतों पर निर्भर करती हैं, जिनमें से सभी को स्पष्ट रूप से समझा नहीं जा सकता है। ओमिद का गायब होना इसलिए और भी दुखद है क्योंकि उसके साथी को खोजने के लिए एक योजना बनाई गई थी। आर्चिबाल्ड ने कहा, ‘यह एक दुखद क्षण है, खासकर जब से बेल्जियम में क्रेकिड संरक्षण और प्रजनन केंद्र की ओर से प्रदान की गई एक कैदकर पाली गई मादा, रोया , ईरान में ओमिद के आने का इंतजार कर रही थी। पिछले साल, आईसीएफ ने एक उपयुक्त साथी की पहचान की थी, सात साल की रोया, जिसे ओमिद के निकट ईरान के फेरेयडुंकेनार आर्द्रभूमि में छोड़ा गया था, जहां अकेला पक्षी अपना सर्दी का मौसम बिताता था। ईरानी वन्यजीव अधिकारियों ने बताया था कि इस जोड़े ने अच्छा बंधन बनाया था। ईरान बर्ड रिकॉर्ड कमेटी के सदस्य केरामत हफीजी बिरगानी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि वे वेटलैंड के चारों ओर एक साथ उड़ते थे। वे नाचते और पुकारते थे।

उम्मीद थी कि ओमिद और रोया साथ-साथ साइबेरिया के पश्चिमी इलाकों में अपने घोंसले बनाने की जगह तक जाकर एक परिवार शुरू करेंगे। ईरानी पक्षी देखने वालों के मुताबिक, 5 मार्च, 2023 को 34 दिन साथ बिताने के बाद, दोनों ने उड़ान भर ली। लेकिन सफर वैसा नहीं रहा जैसा सोचा गया था। सात दिनों के बाद, रोया को मजंदरान प्रांत के टोनेकाबोन शहर में अकेला देखा गया। माना जाता है कि रोया में अभी भी लंबी यात्रा के लिए शारीरिक शक्ति की कमी थी, जिसके लिए पक्षियों को वसा भंडारण और मांसपेशियों के विकास के मामले में पूरी तरह से तैयार रहने की आवश्यकता होती है। इस बीच, ओमिद का भाग्य अटकल का विषय बना हुआ है। पिछले हफ्ते, ईरान डेली ने देश के वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन कार्यालय के प्रमुख के हवाले से कहा कि इस साल कम कठोर सर्दी के कारण क्रेन अपने प्रवास मार्ग के बीच में ही रुक गया होगा। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यह आकलन आशावादी था।

बर्डिंग वेबसाइट ने रिपोर्ट दी कि पिछले साल मार्च में, अजरबैजान में एक रास्ते के चौराहे पर जहाँ साइबेरियन क्रेन को 2022 और 2020 में देखा गया था ओमिद और रोया के ईरान से आने का इंतजार कर रहे पक्षी देखने वालों ने उसे नहीं देखा। ओमिद के गायब होने का मतलब है कि प्रवास की याद और साइबेरिया और ईरान के बीच पक्षियों की लंबी उड़ान के लिए मार्गदर्शन करने वाले मानसिक नक्शे भी खो गए हैं। क्योंकि, ओमिद न सिर्फ पश्चिमी साइबेरिया का आखिरी जीवित क्रेन था, बल्कि झुंड के सामूहिक ज्ञान का भी आखिरी भंडार था। यह एक बड़ी क्षति है और यह हमें इस प्रजाति के संरक्षण के महत्व को याद दिलाती है। वैज्ञानिक अब भी साइबेरियन क्रेन को पुनर्जीवित करने के तरीकों पर शोध कर रहे हैं, और उम्मीद है कि एक दिन इस असाधारण पक्षी के वंशज फिर से आसमान में उड़ते दिखाई देंगे।

भारत में सर्दियां बिताने वाले साइबेरियन क्रेन अब लुप्त हो चुके हैं, लेकिन क्या इन खूबसूरत पक्षियों को उनके प्राचीन घर वापस लाना संभव है? हां, यह मुश्किल ज़रूर होगा, लेकिन असंभव नहीं! भारत में चीते जैसे स्तनधारी के पुनर्वास की तुलना में, पक्षियों को उनके पूर्वजों के लंबे और कठिन प्रवास मार्ग पर ले जाने में अलग तरह की चुनौतियां हैं। लेकिन ऐसा पहले भी किया जा चुका है।उदाहरण के लिए, अमेरिका में 1941 में प्रवासी हूपिंग क्रेन की आबादी केवल 21 रह गई थी, लेकिन अब जंगल में इनकी संख्या 800 से भी ज़्यादा है। यह कैसे संभव हुआ? दरअसल, पायलटों ने हल्के हवाई जहाजों में क्रेन की पोशाक पहनकर, कैद में पली-बढ़े क्रेन के बच्चों को 15 साल से ज़्यादा समय तक प्रवास मार्ग सिखाया।

इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल उत्तरी गंजा इबिस को मध्य यूरोप में फिर से लाने के लिए किया गया था, जहां 17वीं सदी में शिकार के कारण यह विलुप्त हो गया था।भारत या ईरान में साइबेरियन क्रेन को फिर से लाने की किसी भी योजना में कई देशों के सहयोग की आवश्यकता होगी। मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पूर्व निदेशक, असद रहमानी कहते हैं कि उदाहरण के लिए, अफगानिस्तान की स्थिति भारतीय मार्ग पर एक बड़ी बाधा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसे नहीं कर सकते। यद्यपि चुनौतियां निश्चित रूप से मौजूद हैं, सफलता की कहानियां हमें आशा देती हैं। वैज्ञानिक और संरक्षणवादी लगातार नए तरीके खोज रहे हैं लुप्तप्राय: प्रजातियों की मदद करने के लिए, और शायद एक दिन, हम भारत के आसमान में एक बार फिर से साइबेरियन क्रेन के सुंदर नृत्य को देख पाएंगे।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू!

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सारी रात बाघ की दहाड़! पैरों के निशान दिखे, कुलतली में दक्षिणराय के आगमन की खबर से उत्साह फैल गया
स्थानीय निवासियों को अलर्ट करने के लिए माइकिंग शुरू कर दी गई है. इसके अलावा वन क्षेत्र को जाल से घेरने का काम भी शुरू हो गया है. ताकि कोई बाघ मोहल्ले में प्रवेश न कर सके। सुंदरवन इलाके में बाघ का आतंक. इस बार भी घटना स्थल कुलतली ही है. बाघों की लगातार दहाड़ से रहवासी रात में सो नहीं पाते। पैरों के निशान भी देखे गए। जैसे-जैसे दिन का उजाला होता है, डर और भी अधिक मंडराने लगता है। जंगल को जाल से घेरने का काम शुरू हो गया है.

पिछले हफ्ते ही पत्थर की मूर्ति पर बाघ के पैरों के निशान देखे गए थे. कुलतली में भी बाघ की दहाड़ सुनकर लोग जाग गए। महीनों बाद वह फिर प्रकट हुआ। कुलटाली ब्लॉक के मोइपीठ तटीय पुलिस स्टेशन के गुरुगुरिया भुवनेश्वर क्षेत्र के गौडरचक इलाके में क्षेत्र के निवासियों ने बाघ के पैरों के निशान देखे। कई लोग दावा कर रहे हैं कि उन्होंने रात भर बाघ की दहाड़ सुनी है. मामले की जानकारी होते ही वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची. स्थानीय निवासियों को अलर्ट करने के लिए माइकिंग शुरू कर दी गई है. इसके अलावा वन क्षेत्र को जाल से घेरने का काम भी शुरू हो गया है. ताकि कोई बाघ मोहल्ले में प्रवेश न कर सके। वन विभाग के एक वर्ग को शुरू में लगता है कि बाघ भोजन की तलाश में इलाके में आया होगा। उसे वापस गहरे जंगल में लौटाने का प्रयास किया गया है।

इधर बाघ की दहशत से क्षेत्रवासी रतजगा कर उठे। कुछ दिन पहले इस इलाके में एक बाघ आ गया था. स्थानीय लोग बाघ के दोबारा आने से डरे हुए हैं. वन विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाघों को घने जंगल से इलाके में प्रवेश करने से रोकने के लिए जाल लगाए गए हैं। बाघ आमतौर पर जाल नहीं फाड़ते। लेकिन स्थानीय निवासी विभिन्न जरूरतों के लिए जंगल के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करते हैं और जाल फाड़ देते हैं। लेकिन वह फटा हुआ जाल अब ठीक नहीं होता। वह खबर हमेशा वन विभाग के पास नहीं होती. और बाघ फटे हुए जाल का फासला तोड़कर वहां घुस गया. क्या यही घटना कुलतली में भी हुई, इसकी जांच की जा रही है.

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं।

सर्दी आते ही सुंदरवन में बाघों का आतंक शुरू हो गया। इस बार रॉयल बंगाल टाइगर का खौफ दक्षिण 24 परगना के कुलतली में है. वहां रात भर बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। दिन में घर के आसपास बाघ के पैरों के निशान देखे जा सकते हैं। कुल मिलाकर स्थानीय लोग दक्षिणराय के भय से कांप रहे हैं। कुलटाली ब्लॉक के मोइपीठ थाना क्षेत्र का भुवनेश्‍वरी इलाका. वहां इलाके के लोगों ने रात भर बाघ की दहाड़ सुनी. नतीजा यह हुआ कि रात को पूरा गांव एक दूसरे से नजर नहीं मिला पा रहा था। डर के मारे किसी की घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई। सुबह होते ही क्षेत्रवासी जंगल के सामने एकत्र हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बाघ बस्ती से सटे जंगल में घूम रहा है।

वन विभाग और पुलिस को भी सूचना दी गई। मोइपिथ पुलिस और वन विभाग के कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं। वे अलग-अलग जगहों पर बाघों की तलाश कर रहे हैं. लेकिन शुरुआत में वन विभाग को लगता है कि बाघ वापस गहरे जंगल में चला गया है. हालाँकि, पुष्टि होने तक निगरानी जारी रहेगी।

संयोग से, सरकारी आंकड़े कहते हैं कि पिछले पांच वर्षों में बाघ के हमलों के कारण देश में 302 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से सबसे ज्यादा जान महाराष्ट्र में गई। पश्चिम बंगाल में 29 लोगों की जान चली गई. इसके अलावा केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि राज्यों में संख्या में काफी कमी आई है. 2018 में बंगाल में 15 लोग बाघ के पेट में समा गये. लेकिन 2022 में यह संख्या घटकर एक रह गई है. हालाँकि, ये सभी डेटा और आँकड़े जंगल में बाघ की प्राकृतिक सीमा के संदर्भ में हैं। इसलिए, भोजन की तलाश में बाघों के गांवों में घुसने और लोगों को मारने की जानकारी इन आंकड़ों में शामिल नहीं है.

बेटे आर्यन के ड्रग्स केस में शाहरुख खान ने घटना पर खोला था मुंह!

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बेटे आर्यन के ड्रग केस ने शाहरुख खान को बहुत कुछ सिखाया। पिछले साल बादशा को आसमान छूती सफलता मिली। लेकिन उन काले दिनों का सबक नहीं भूले. शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को 2021 में ड्रग मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह करीब एक महीने तक जेल में रहे. हाल ही में एक अवॉर्ड लेते समय शाहरुख ने इस घटना के बारे में खुलकर बात की। पिछले साल शाहरुख की तीनों फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता मिली। लेकिन साथ ही शाहरुख ने मीडिया से बातचीत भी कम कर दी है. इसके बजाय, वह इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों से सीधे बात करते हैं। लेकिन हाल ही में एक पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपने भाषण में उन्होंने अपने जीवन के कुछ सबसे बुरे समय का जिक्र किया।

“पिछले 4-5 वर्षों की यात्रा हमारे परिवार के लिए काफी कठिन रही है। मैं जानता हूं कि कोविड के कारण कई अन्य लोगों के लिए भी ऐसा ही होगा। मेरी सारी तस्वीरें फ्लॉप हो गईं. कई लोगों ने मेरे करियर के खत्म होने पर श्रद्धांजलि भी लिखी!” शाहरुख ने मजाक में फिल्म विशेषज्ञों को ‘बेवकूफ’ कहा। इसके बाद उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात की.

उन्होंने कहा, ”निजी जीवन में कम से कम कुछ अप्रिय और परेशान करने वाली घटनाएं घटी हैं। लेकिन मैंने एक सबक सीखा. शांत रहो, बहुत शांति से काम करो, अपने स्वाभिमान के साथ चुपचाप काम करो। क्योंकि, कई बार जब ऐसा लगता है कि जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा है तो आप समझ ही नहीं पाते कि जिंदगी आपका कैसे इम्तिहान लेगी! लेकिन यह अपनी कहानी अधिक ईमानदारी और आशा के साथ लिखने का समय है।” हालाँकि, कॉर्डेलिया क्रूज़ मामले में सभी आरोपों को बाद में अदालत ने खारिज कर दिया और एरियन को पूरी तरह से निर्दोष पाया गया। लेकिन उस वक्त उन्हें करीब एक महीने तक जेल में रहना पड़ा था. कई दरवाजे खटखटाने के बावजूद शाहरुख अपने बेटे की जमानत नहीं करा सके।

उन्होंने भाषण का समापन अपनी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के एक डायलॉग से किया. “जब तक आनंद का अंत है, तब तक वह खत्म नहीं हुआ है।”

उसी कार्यक्रम में, शाहरुख ने पठान और जवान की अद्वितीय बॉक्स ऑफिस सफलता के लिए दर्शकों को धन्यवाद भी दिया। वह मानते हैं कि जिन लोगों ने ये फ़िल्में देखी हैं उनमें से कई लोग उनके अभिनय के प्रशंसक नहीं होंगे। लेकिन उनके बगल में खड़े होकर उनके सिनेमा हॉल में चले गए. वह इसके लिए आभारी हैं. पिछले साल ‘पठान’, ‘जवान’ और ‘डंकी’ ने मिलकर दुनिया भर में 2500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था। शाहरुख ने अभी तक अपनी अगली फिल्म के बारे में कोई घोषणा नहीं की है.

वह दक्षिणी मनोरंजन जगत का एक जाना माना चेहरा हैं। अभिनेता विजय सेतुपति ने फिल्म ‘सुपर डीलक्स’, ‘विक्रम वेधा’, ‘पेट्टा’, ‘विक्रम’ की बदौलत भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने हिंदी मनोरंजन जगत में भी काम करना शुरू कर दिया है. वह इससे पहले साउथ डायरेक्टर एटली की फिल्म ‘जवां’ में शाहरुख खान के साथ नजर आ चुके हैं। विजय ने शाहरुख की पहली फिल्म ‘पैन इंडियन’ में विलेन का किरदार निभाया था। जवान पिछले साल रिलीज हुई थी. सेतुपति की अगली हिंदी फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ नए साल में रिलीज होने वाली है। ‘अंधाधुन’ फेम श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 जनवरी को हिंदी और तमिल में रिलीज होगी। उस फिल्म में विजय ने बॉलीवुड स्टार कैटरीना कैफ के साथ काम किया था। विजय फिलहाल उस फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं. ‘जवान’ के प्रमोशन में विजय नजर नहीं आए. एक्टर फिल्मों की शूटिंग के अलावा कैमरे से दूर रहना पसंद करते हैं. लेकिन क्यों?

‘मेरी क्रिसमस’ के एक प्रमोशनल इवेंट में विजय को ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा। एक्टर ने कहा कि जब वह फिल्म की शूटिंग के अलावा किसी और वजह से कैमरे के सामने आए तो भी गिर पड़े. विजय ने कहा कि उन्हें पहले अपनी शक्ल को लेकर कई बातें सुननी पड़ी थीं। इतना ही नहीं कई लोगों ने उनके कपड़ों का मजाक भी उड़ाया है. इतना सब सुनने के बाद वह कैमरे के सामने सख्त हो गए. अभिनेता के शब्दों में, ”मैं ऐसा ही था. कई लोग मेरी शक्ल को लेकर काफी बातें करते थे. मैंने कई लोगों को यह कहते सुना है कि मैं किसी पार्टी में जाते समय या किसी से मिलते समय चप्पल पहनता था।” लेकिन हाल ही में उन्होंने उस जड़ता पर काबू पा लिया है। विजय के अनुसार, “अच्छी बात यह है कि दर्शक वास्तव में आपको वैसे ही स्वीकार करते हैं जैसे आप हैं। मैं खुद को वैसे ही स्वीकार करता हूं जैसे मैं हूं।’ अब दर्शकों ने भी मुझे उसी तरह स्वीकार कर लिया है.’ मैं बहुत खुश हूं।”

सौरवेरा इंग्लैंड क्रिकेट में इतिहास रचने जा रहे हैं, काउंटी टीम दिल्ली कैपिटल्स ने खरीदी

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दिल्ली कैपिटल्स आईपीएल के बाद इंग्लैंड में एक काउंटी टीम खरीदने पर विचार कर रही है। वहां एक टीम का स्वामित्व लेने की बातें काफी आगे बढ़ चुकी हैं. सौरभ गंगोपाध्याय इस बार इंग्लैंड क्रिकेट में कदम रख रहे हैं. सौरव की दिल्ली कैपिटल्स इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट टीम हैम्पशायर का स्वामित्व लेने की राह पर है। यदि समझौते पर हस्ताक्षर हो जाता है, तो हैम्पशायर किसी विदेशी कंपनी के स्वामित्व वाली काउंटी की पहली टीम बन जाएगी।

इंग्लैंड में मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हैम्पशायर के पूर्व अध्यक्ष रॉड ब्रंसग्रोव के पास टीम का बहुमत है। वह उस स्वामित्व को जीएमआर ग्रुप को बेचना चाहता है। दिल्ली कैपिटल्स में GMR ग्रुप की 50 फीसदी हिस्सेदारी है. सौरव गांगुली दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेट निदेशक हैं।

प्रेस ने बताया कि ब्रैंसग्रोव के साथ जीएमआर ग्रुप की बातचीत लगभग पक्की हो गई है। एक बार यह डील हो जाने के बाद दिल्ली कैपिटल्स को भविष्य में काफी फायदा मिलेगा. लंदन की ‘द हंड्रेड’ प्रतियोगिता धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कर रही है। वहां भी काफी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं. यदि दो टीमों का स्वामित्व एक ही संगठन के पास है, तो उन्हें विदेशी क्रिकेटरों को चुनने में फायदा होगा।

ब्रैंसग्रोव 23 वर्षों तक हैम्पशायर के अध्यक्ष रहे। क्लब में उनकी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मालूम हो कि इस फैसले के पीछे इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड का परोक्ष समर्थन है. उन्होंने विदेशी निवेश लाने की पहल की है. द हंड्रेड अपनी कई टीमें विदेशी कंपनियों को बेचने की भी योजना बना रहा है। बीच में ये खबर सामने आई थी.

इस बार की आईपीएल नीलामी पिक्चर-ब्रेक! गलत क्रिकेटर ने खरीदी सौरव की दिल्ली, ‘गलत’ सुमित ने तोड़ा!
इस बार आईपीएल नीलामी की तस्वीर फेल! झारखंड के क्रिकेटर सुमित कुमार बेहद बेचैनी में। सौरव गंगोपाध्याय की दिल्ली कैपिटल्स ‘मौका’ मिलने के बावजूद आईपीएल में नहीं खेल रही है. आईपीएल नीलामी में नाम फेल होने के बाद इस बार पिक्चर फेल! और इसकी वजह से झारखंड के ऑलराउंडर सुमित कुमार बेहद परेशानी में हैं. सौरव गांगुली की दिल्ली कैपिटल्स में ‘मौका’ मिलने के बावजूद सुमित आईपीएल में नहीं खेल रहे हैं.

आईपीएल में सौरव की दिल्ली ने सुमित कुमार को खरीदा. बेस प्राइस 20 लाख रुपये था. दिल्ली ने इसे 20 लाख रुपये में खरीदा. यह तो बहुत बाद में पता चला कि सुमित को ले जाते वक्त किस तरह की परेशानी हुई. सौरव हरियाणा के ऑलराउंडर सुमित कुमार को खरीदना चाहते थे. लेकिन नीलामी के दौरान झारखंड के क्रिकेटर सुमित कुमार की तस्वीर दिखाई गई. सौरव ने झारखंड के सुमित को भी इसी हिसाब से खरीदा.

आईपीएल में पहली बार टीम पाकर झारखंड के सुमित काफी खुश थे. सौरव की टीम में मौका मिलने के बाद सुमित सपने देखने लगे. उन्होंने अपनी मां को फोन किया और कहा, ”दिल्ली ने मुझे एक करोड़ रुपये में ले लिया है.” यह सुनकर मां खुशी से रो पड़ीं.

वह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिकी. कुछ ही दिनों में समझ आ गया कि सौरवेरा ने गलत सुमित को ले लिया है. ‘भूल’ सुमित ने एक अंग्रेजी दैनिक को बताया, ‘मेरे लिए यह पूरी बात काफी रहस्यमय है। दिल्ली जैसी टीम ने मेरी तस्वीर के साथ कैसे बोली लगा दी. शायद मेरी छवि गूगल द्वारा दी गई थी. यही बड़ी गलती है. माँ को बहुत दर्द हो रहा है. किसी ने नहीं सोचा था कि हमारे सपने रातों-रात इस तरह बिखर जाएंगे।” ‘गलत’ सुमित ने पड़ोस में महसूस की गई परेशानी के बारे में भी बताया है. उन्होंने कहा, ”यह हमारे लिए बहुत असहज स्थिति है. कई लोगों ने मुझे बधाई दी. दोस्तों ने मुझे नीलामी की तस्वीरें भी भेजीं. अब हम टूट चुके हैं.” बोकारो सुमित झारखंड के लिए खेलते थे. अधिक अवसर पाने के लिए नागालैंड चले गए। विकेटकीपर-बल्लेबाज ने धोनी को अपना आदर्श माना है।

ऋषभ पंत की कार दुर्घटना को एक साल बीत चुका है। भारत के इस विकेटकीपर की अभी तक क्रिकेट में वापसी नहीं हुई है. वह कब लौटेंगे, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता. पंत के एक्सीडेंट के बाद काफी खबरें सामने आ रही हैं. इस बार अक्षर पटेल ने हादसे वाले दिन की कई बातों का खुलासा किया. 30 दिसंबर 2022 की सुबह के बारे में बताते हुए अक्षर ने दिल्ली कैपिटल्स पॉडकास्ट को बताया, “उस सुबह मेरी बहन प्रतिमा ने फोन किया था. उन्होंने मुझसे पूछा, आखिरी बार आपकी पंथ से कब बात हुई थी? मैंने कहा, मुझे कल फोन करना था. लेकिन नहीं किया गया. प्रतिमा ने कहा, उन्हें पंथ की मां का फोन नंबर चाहिए. क्योंकि पंथ का एक्सीडेंट हो गया था. पहले तो मेरे मन में आया, अगर ऐसा है तो पंथ जीवित नहीं है?” घटना के बारे में बात करते हुए अक्षर की आवाज भारी हो जाती है. संभालने के बाद उन्होंने आगे कहा, ”उस घटना के बाद बीसीसीआई, शार्दुल सभी ने मुझे फोन करना शुरू कर दिया. क्योंकि सभी को लगा कि आखिरी बार पंथ की बात बापुर (किरदार का उपनाम) से हुई थी. मैंने ऋषभ के मैनेजर को फोन किया. उन्होंने कहा कि सबकुछ ठीक है. शरीर पर कुछ चोटें हैं. बाकी सब ठीक है. मैंने फोन रख दिया और राहत की सांस ली. ऐसा लग रहा था, अब कोई चिंता नहीं. वह वापस लड़ेगा और ठीक हो जाएगा। हमारा रास्ता हमेशा लड़ने का है।”

मोदी सरकार के आखिरी बजट सत्र के लिए 31 तारीख को निर्मला का वोट ऑन अकाउंट

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1 फरवरी को दूसरी मोदी सरकार के आखिरी बजट सत्र के लिए 31 तारीख को निर्मला का वोट ऑन अकाउंट
चूंकि यह लोकसभा चुनाव का वर्ष है, इसलिए इस बार पूर्ण बजट पेश नहीं किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए लोकसभा में लेखानुदान पेश करेंगी. अयोध्या में राम मंडी के उद्घाटन के नौ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे चरण में संसद का आखिरी बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होने की संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वोट ऑन अकाउंट (अंतरिम बजट) पेश कर सकती हैं। सत्र 9 फरवरी को समाप्त हो सकता है.

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को इस खबर की जानकारी दी. लोकसभा चुनाव का साल होने के कारण इस बार पूर्ण बजट सत्र नहीं होगा. संवैधानिक नियमों के मुताबिक वित्त मंत्री लोकसभा में लेखानुदान पेश करेंगे. लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट प्रस्ताव लोकसभा में पेश करेगी.

परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 31 जनवरी को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी. प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट में ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना के लिए केंद्रीय सहायता की राशि दोगुनी की जा सकती है। संयोग से, वर्तमान में पीएम किसान का वार्षिक आवंटन 6000 रुपये है। किसानों को यह आर्थिक सहायता तीन किस्तों में मिलती है।

अमीरों की संपत्ति बढ़ती जा रही है. गरीब और गरीब होते जा रहे हैं – मोदी युग में देशवासियों की आर्थिक स्थिति के बारे में घरेलू और विदेशी कंसल्टेंसी फर्मों का यही आकलन है। इसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्टेट बैंक के अनुसंधान विभाग की रिपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वित्तीय असमानता के आरोप वास्तव में ‘मिथक’ हैं!

अर्थशास्त्रियों के एक वर्ग के मुताबिक, कोविड के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था का कायापलट अंग्रेजी के अक्षर ‘K’ जैसा है। क्योंकि अमीरों की आय तो बढ़ी है लेकिन गरीबों की आय घट गयी है। हालांकि, इस दावे पर जोरदार हमला करते हुए स्टेट बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि असमानता कम हुई है. 36.3% आयकरदाता निम्न आय वर्ग से उच्च आय वर्ग में चले गये। 2013-14 से 2021-22 के बीच 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले करदाताओं में 295% की बढ़ोतरी हुई। कई छोटी-मझोली कंपनियाँ बड़ी कंपनियाँ बन गई हैं। 2013-14 में 23 लोग ऐसे थे जो 100 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाते थे। 2020-21 में यह 136 है. लेकिन देश की कुल आय में उनकी हिस्सेदारी घट गयी है. स्टेट बैंक के मुख्य वित्तीय सलाहकार सौम्यकांति घोष और अर्थशास्त्री अनुराग चंद्रा द्वारा आज लिखे गए लेखों का हवाला देते हुए, निर्मला ने कहा, “के-पत्र पसंद आया? कवि नहीं!

ब्रिटेन में बाथ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संतोष मेहरोत्रा ​​ने टिप्पणी की, “दुखद दिन। देश के सबसे बड़े बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने 1.4 अरब लोगों में से 3 प्रतिशत के आंकड़ों के आधार पर आय असमानता का अनुमान लगाया है। वित्त मंत्री ने यही बताया।” तृणमूल के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया, ”सरकार ने असमानता के बारे में बोलने के लिए 146 सांसदों को निलंबित कर दिया।”

वित्त मंत्रालय के अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि सांख्यिकी मंत्रालय के इस वर्ष विकास के पहले अग्रिम पूर्वानुमान में भी असमानता के संकेत स्पष्ट हैं। अनुमान है, चालू वित्त वर्ष में पर्सनल शॉपिंग डिमांड ग्रोथ 4.4% रहेगी। मोदी सरकार के पहले पांच वर्षों में यह बहुत अधिक (7.1%) था।

बैंकों के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही शिकायत यह है कि जब रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो वह जमा पर ब्याज उतनी तेजी से नहीं बढ़ाता, जितनी तेजी से ऋण पर ब्याज बढ़ाता है। बैंकिंग हलकों के अनुसार, जमा संग्रह हाल ही में ऋण वृद्धि दर के बराबर नहीं रह पाया है। उस कम ब्याज के कारण. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद सरकारी बैंकों से इस बार फंड जुटाने के लिए नई और आकर्षक जमा योजनाएं लाने को कहा है। आज उन्होंने उन सभी बैंकों के एमडी-सीईओ के साथ बैठक में विलफुल डिफॉल्टर्स और ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी रोकने का संदेश भी दिया. उनका स्पष्ट निर्देश है कि इन गतिविधियों के संपर्क में रहने वाले सभी बैंक अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाये.

संबंधित हलकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में ऋण वृद्धि और जमा वृद्धि दर के बीच का अंतर 3% -4% है। इस अंतर को पाटने के लिए स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने विभिन्न जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। हाल ही में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने याद दिलाया कि अगर बैंकिंग प्रणाली फिर से कम ब्याज वाली जमाओं की ओर बढ़ती है, तो बैंकों को पुरानी जमा योजनाओं के लिए अधिक भुगतान करना होगा। तो सावधान रहो। आइए देखें कि बैंक इन दोनों पहलुओं को कैसे बनाए रखते हैं।

आज की बैठक में निर्मला ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के साथ-साथ कॉरपोरेट संस्थाओं के बड़ी रकम के बकाएदारों की रोकथाम के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि ऋण स्वीकृत करने से पहले दस्तावेज सत्यापन सहित सभी प्रक्रियाओं में सुधार किया जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय संपत्ति पुनर्निर्माण निगम (एनएआरसीएल) के माध्यम से अधिक एनपीए की वसूली पर जोर देने को कहा।

‘मुइज्जू के नेतृत्व में मालदीव में शुरू हुआ भारत विरोधी अभियान’, यूरोपीय संघ ने क्यों किया दावा?

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इसमें कहा गया है, ”प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम), जिसने राष्ट्रपति चुनाव में पीएनसी नेता मुइज्जू का समर्थन किया था, ने भी भारत विरोधी प्रचार में खुलकर हिस्सा लिया.” मालदीव में पिछले साल के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के बाद से ही भारत विरोधी प्रचार चल रहा है लगातार. और वह अभियान “चीन समर्थक” नेता और “पीपुल्स नेशनल कांग्रेस” (पीएनसी) के प्रमुख मोहम्मद मुइज्जू (वर्तमान में मालदीव के राष्ट्रपति) के राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनने के बाद शुरू हुआ। नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर उपजे तनाव के बीच यूरोपीय संघ ने यह मांग की है।

मालदीव में पिछले सितंबर में दो राष्ट्रपति चुनाव हुए। उस वोट में, मुइज्जू ने मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के नेता इब्राहिम मोहम्मद सोली को बाहर कर दिया और राष्ट्रपति पद पर कब्जा कर लिया। उस वोट पर यूरोपियन यूनियन इलेक्शन ऑब्जर्वेशन मिशन की रिपोर्ट में भारत विरोधी अभियान का जिक्र है. इसमें कहा गया, “प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम), जिसने राष्ट्रपति चुनाव में पीएनसी नेता मुइज्जू का समर्थन किया था, ने भी खुले तौर पर भारत विरोधी अभियानों में भाग लिया।”

संयोग से, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम पीपीएम पार्टी के संस्थापक हैं। 1978 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे दिग्गज नेता को ‘भारत का मित्र’ कहा जाता था। 1988 में मालदीव में मामून के ख़िलाफ़ सशस्त्र तख्तापलट हुआ था. उस समय, प्रधान मंत्री राजीव गांधी के आदेश पर, भारतीय सेना उनकी सरकार की रक्षा के लिए हिंद महासागर में द्वीप राष्ट्र में गई थी। इसलिए भारत विरोधी अभियान में मामून की पार्टी की भागीदारी को नई दिल्ली के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।

संयोग से, ‘चीन समर्थक’ नेता मुइज्जू पिछले सितंबर में मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से ही भारत के खिलाफ एक के बाद एक फैसले ले रहे हैं। जिससे नई दिल्ली-मलय में तनाव पैदा हो गया है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए मोदी सरकार सक्रिय है। वे अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उससे पहले साउथ ब्लॉक को समुद्री रास्ते की चिंता सताने लगी है. इसकी एक वजह चीन के करीबी मुइज्जू भी हैं. सत्ता में आते ही मुइज्जू ने मालदीव में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस भेज दिया. हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली के साथ चार साल पुरानी जल संधि को रद्द करने की घोषणा की थी. समझौते ने भारतीय नौसेना को सुरक्षा और रक्षा सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहायता के लिए मालदीव के जल क्षेत्र में ‘हाइड्रोग्राफिक’ सर्वेक्षण करने की अनुमति दी। अनुबंध की समाप्ति के परिणामस्वरूप इसकी समाप्ति हुई। इसी माहौल में मोदी हाल ही में भारत के केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप गए थे. उस दौरे की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. कथित तौर पर, मालदीव के तीन मंत्रियों, मरियम शेओना, मालशा शरीफ और महजुम मजीद ने कुछ तस्वीरों में मोदी को ‘कठपुतली’ और ‘जोकर’ कहा। भारत-इजराइल संबंधों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं. हालाँकि, बाद में विवाद के बीच पोस्ट हटा दिए गए। लेकिन आख़िर में मालदीव के विपक्षी नेताओं के दबाव में राष्ट्रपति मुइज्जू को तीन मंत्रियों को निलंबित करना पड़ा. लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका. ऐसे में मालदीव की विपक्षी पार्टियों ने संसद सदस्यों से मुइज्जू को राष्ट्रपति पद से बर्खास्त करने की अपील की है.

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने पर तीन मंत्रियों को निलंबित कर दिया है। लेकिन इससे विवाद छिपा नहीं. बल्कि चीन समर्थक मुइज्जू वहां के विपक्षी नेताओं के निशाने पर हैं. सुनने में तो यहां तक ​​आ रहा है कि विपक्षी नेतृत्व उन्हें बर्खास्त करने के लिए संसद में औपचारिक प्रस्ताव भी ला सकता है.

पिछले हफ्ते मुइज्जू सरकार के तीन मंत्रियों की विवादास्पद टिप्पणियों के बाद मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इब्राहिम सोली (जिन्हें चुनाव में हराकर मुइज्जू 2023 में सत्ता में आए थे) ने कड़ा विरोध जताया था. . एक और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नसीद ने भी मोदी के अपमान का विरोध किया. मंगलवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष फ़ैयाज़ इस्माइल ने सार्वजनिक रूप से पीपुल्स नेशनल कांग्रेस के नेता मुइज्जू को दोषी ठहराया और भारत के साथ “संबंधों में घावों” को भरने का आह्वान किया। संयोग से, राष्ट्रपति मुइज़ू सोमवार से चीन की पांच दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। इस बीच सियासी तनाव का पारा चढ़ने लगा है. मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी ने सीधे तौर पर मुइज्जू पर मलेशिया-नई दिल्ली संबंधों को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि मुइज्जू की पार्टी ‘पीपुल्स नेशनल कांग्रेस’ के नेता उनके समर्थन में मुंह खोलते नजर नहीं आ रहे हैं.

भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने जिला वकीलों को क्या दिया संदेश?

हाल ही में भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने जिला वकीलों को एक संदेश दे दिया है! सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने मंदिरों पर लगे ध्वजों से प्रेरणा लेते हुए जिला अदालतों के वकीलों से इस तरह काम करने के लिए कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक ‘न्याय की ध्वजा’ फहराती रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे समाज की कल्पना करें जहां हर एक नागरिक को इंसाफ का अधिकार मिले। लोग सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट नहीं आते। शुरुआत में लोग जिला अदालतों में जाते हैं। जिला अदालतें ही इंसाफ की पहली सीढ़ी के रूप में उभरती हैं। उन्होंने जिला अदालतों के वकीलों से कहा कि बार के सदस्यों के रूप में आपको नागरिकों में आत्मविश्वास पैदा करना होगा। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, जिला अदालत के वकील के रूप में यह हमारी दक्षता है कि हम वास्तव में यह सुनिश्चित करेंगे कि न्याय की यह ध्वजा आने वाली पीढ़ियों तक फहरती रहे। एक रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई चंद्रचूड़ ने राजकोट में जिला अदालतों के वकीलों को संबोधित कर रहे थे। द्वारका और सोमनाथ मंदिरों के ऊपर ध्वजा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं आज सुबह द्वारकाधीश जी में ध्वजा से प्रेरित हुआ। ऐसी ही ध्वजा मैंने जगन्नाथ पुरी में देखी थी। लेकिन हमारे देश की परंपरा की इस सार्वभौमिकता को देखिए, जो हम सभी को एक साथ बांधती है। इस ध्वजा का हमारे लिए विशेष अर्थ है। और वह अर्थ है – वकीलों के रूप में, जजों के रूप में या नागरिकों के रूप में हम सभी को एकजुट करने वाली शक्ति है। और वह एकीकृत शक्ति हमारी मानवता है, जो कानून के शासन और भारत के संविधान द्वारा शासित होती है।’

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और समाधानों को खोजने के लिए महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों से प्रेरित होकर कई राज्यों का दौरा करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी दो दिवसीय गुजरात यात्रा उसी प्रयास का हिस्सा थी। सीजेआई ने कहा, ‘मैंने पिछले एक साल में कई राज्यों का दौरा करने की कोशिश की ताकि मैं हाई कोर्ट और जिला अदालतों के अधिकारियों से मिल सकूं, उनकी समस्याओं को सुन सकूं और इस तरह, हम न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान ढूंढ सकें… उनके साथ बातचीत करके, मैं उनकी समस्याओं को समझने और प्रभावी समाधानों को खोजने की कोशिश कर रहा हूं।’ चीफ जस्टिस ने बताया कि उनके दौरे का हाई कोर्ट के जजों और जिला अदालतों के अधिकारियों के साथ भारतीय न्यायपालिका की उपलब्धियों को साझा करना भी है।

बता दे कि भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ अक्‍सर हंसते-खिलखिलाते दिखते हैं। लेकिन, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में उनका जबर्दस्‍त गुस्‍सा देखने को मिला। एक वकील के बातचीत का लहजा उन्‍हें सख्‍त नागवार गुजरा। याचिका की लिस्टिंग पर तीखी नोकझोंक के दौरान सीजेआई ने उस वकील को कड़ी चेतावनी दी। वकील को फटकार लगाते हुए सीजेआई ने उसे अपनी आवाज धीमी करने को कहा। यह भी हिदायत दी कि वह कोर्ट को डराने-धमकाने की कोशिश नहीं करें। जब सीजेआई चंद्रचूड़ उस वकील से गुस्‍साकर बोले तो पूरी कोर्ट में अचानक सन्‍नाटा पसर गया। नोकझोंक याचिका की लिस्टिंग पर शुरू हुई। जस्टिस चंद्रचूड़ को वकील की बातचीत का लहजा कतई पसंद नहीं आ रहा था। फिर एक समय आया जब उनसे रहा नहीं गया। वकील को टोकते हुए सीजेआई ने उसे मर्यादा में रहने की नसीहत दी। नाराजगी जाहिर कर सीजेआई बोले, ‘एक सेकेंड, अपनी आवाज धीमी करें। आप सुप्रीम कोर्ट की फर्स्‍ट कोर्ट के सामने बहस कर रहे हैं; अपनी आवाज कम करें वरना मैं आपको अदालत से बाहर करवा दूंगा।’

जस्टिस चंद्रचूड़ ने वकील की सामान्य कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा, ‘आप आम तौर पर कहां पेश होते हैं? क्या आप हर बार न्यायाधीशों पर इसी तरह चिल्लाते हैं?’ मुख्य न्यायाधीश ने कोर्टरूम में मर्यादा बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘कृपया पहले अपनी आवाज धीमी करें। अगर आपको लगता है कि आप अपनी आवाज उठाकर हमें डरा सकते हैं तो आप गलत हैं। ऐसा 23 सालों में नहीं हुआ है। मेरे करियर के आखिरी साल में भी ऐसा नहीं होगा।’ मुख्य न्यायाधीश की कड़ी चेतावनी से वकील चौंक गया। उसने तुरंत माफी मांगी। फिर और अधिक विनम्र तरीके से अपनी बात आगे बढ़ाई। आज की घटना पहली बार नहीं है जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने कोर्टरूम की मर्यादा बनाए रखने को कहा है। एक अन्य मौके पर मुख्य न्यायाधीश ने अपने कोर्टरूम के अंदर एक वकील के मोबाइल फोन पर बात करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा था, ‘क्या यह कोई मार्केट है कि आप फोन पर बात कर रहे हैं। इनका मोबाइल फोन जब्त कर लीजिए।’

पिछले साल मार्च में जस्टिस चंद्रचूड़ पर विकास सिंह नाम के सीनियर एडवोकेट चिल्लाए थे। वह सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के लिए भूमि से जुड़े एक मामले को आगे बढ़ाने की अपील कर रहे थे। तब मुख्य न्यायाधीश गुस्‍साकर बोले थे, ‘चुप रहिए। अभी इस अदालत को छोड़ दीजिए। आप हमें डरा नहीं सकते!’