Sunday, April 12, 2026
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क्या अब देश में लागू हो सकता है एक राष्ट्र एक चुनाव?

आने वाले समय में देश में एक राष्ट्र एक चुनाव लागू हो सकता है! भारत में एक देश एक चुनाव के लिए काफी दिनों पहले एक समिति बनाई गई थी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इसका चेयरमैन बनाया गया है। अब इस उच्च स्तरीय समिति ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। नोटिस में लोगों से इसपर सुझाव मांगे गए हैं। समिति ने अपने नोटिस में कहा है कि लोग अपने सुझाव समिति की वेबसाइट onoe.gov.in पर पोस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा लोग ईमेल के जरिए भी अपने सुझाव भेज सकते हैं। आप sc-hlc@gov.in पर ईमेल कर अपने सुझाव भेज सकते हैं। इससे पहले, एक देश एक चुनाव के लिए बनाई गई समिति ने अपनी प्रारंभिक बैठक की। इस बैठक में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह, कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन. के. सिंह, लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप और पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी मौजूद थे। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

एक राष्ट्र, एक चुनाव का गठन 20 सितंबर, 2023 की एक अधिसूचना के माध्यम से किया गया था। संदर्भ की शर्तों के अनुसार, समिति को स्थाई आधार पर एक साथ चुनाव कराने के लिए एक उपयुक्त कानूनी और प्रशासनिक ढांचे के निर्माण, संविधान और संबंधित चुनाव कानूनों में आवश्यक संशोधनों की पहचान, आम मतदाता सूची तैयार करने, ई. वी. एम. एस./वी. वी. पी. ए. टी. एस. जैसे रसद के लिए सिफारिशें करने की आवश्यकता थी। देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए मौजूदा कानूनी प्रशासनिक ढांचे में उचित बदलाव करने के लिए आम जनता के सदस्यों से लिखित में सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। 15 जनवरी, 2024 तक प्राप्त सभी सुझावों को समिति के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा। यही नहीं आपको बता दें कि कांग्रेस ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए अपने मैनिफेस्टो का मसौदा तैयार करने के लिए बैठक की। घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी संभालने वाली कांग्रेस की समिति ने अपनी पहली बैठक में दस्तावेज में शामिल किए जाने वाले विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। लगातार करीब 10 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा से सत्ता छीनने की कोशिश में जुटी कांग्रेस का लक्ष्य जनता के सामने एक वैकल्पिक सकारात्मक एजेंडा पेश करना है। बता दें कि कांग्रेस ने गुरुवार को ही अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा की घोषणा की है जो 14 जनवरी से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगी। समिति के अध्यक्ष पी. चिदंबरम ने बैठक के बाद कहा, ‘घोषणापत्र समिति की यह पहली बैठक थी। यह प्रारंभिक विचारों का आदान-प्रदान था कि हम घोषणापत्र के प्रारूप के साथ कैसे आगे बढ़ते हैं। अगली बैठक अगले सप्ताह होगी।’ चिदंबरम के अलावा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव समिति का हिस्सा हैं। सिंह देव समिति के संयोजक हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा, जयराम रमेश, शशि थरूर, रंजीत रंजन, गौरव गोगोई, के. राजू और गैखंगम भी समिति का हिस्सा हैं और बैठक में शामिल हुए। पहले, एक देश एक चुनाव के लिए बनाई गई समिति ने अपनी प्रारंभिक बैठक की। इस बैठक में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह, कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन. के. सिंह, लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप और पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी मौजूद थे। संदर्भ की शर्तों के अनुसार, समिति को स्थाई आधार पर एक साथ चुनाव कराने के लिए एक उपयुक्त कानूनी और प्रशासनिक ढांचे के निर्माण, संविधान और संबंधित चुनाव कानूनों में आवश्यक संशोधनों की पहचान, आम मतदाता सूची तैयार करने, ई. वी. एम. एस./वी. वी. पी. ए. टी. एस. जैसे रसद के लिए सिफारिशें करने की आवश्यकता थी। देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए मौजूदा कानूनी प्रशासनिक ढांचे में उचित बदलाव करने के लिए आम जनता के सदस्यों से लिखित में सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी, गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में समन्वयक गुरदीप सप्पल और अमिताभ दुबे भी अहम समिति का हिस्सा हैं।

क्या गठबंधन के लिए पेचीदगी पैदा कर रही है कांग्रेस?

कांग्रेस अब अपने गठबंधन के लिए पेचीदगी पैदा करने में लगी हुई है! फटाफट फैसले लेने में कांग्रेस का रिकॉर्ड हमेशा सवालों में रहा है। यहां तक 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा तक बनाया था। तब ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ को लेकर कांग्रेस बुरी तरह घिर गई थी। देश की सबसे पुरानी पार्टी की यह कमजोरी शायद अब तक बनी हुई है। जिस तरह वह फैसले लेने में आगे-पीछे करती है उससे तो यही लगता है। मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्‍व में भी कांग्रेस की यह कमी दूर नहीं हो पाई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होना हो या I.N.D.I.A के कन्‍वीनर पर फैसला, उसके के लिए हर सवाल कौन बनेगा करोड़पति जैसा बन जाता है। आखिर कांग्रेस के साथ इस दिक्‍कत का कारण क्‍या है? आइए, यहां समझने की कोशिश करते हैं। नीतीश कुमार के विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के कन्‍वीनर बनने को लेकर था। जब खरगे से पूछा गया कि क्या I.N.D.I.A गठबंधन के संयोजक पद के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नाम विचार किया जा रहा है? इसके जवाब खरगे बोले, ‘यह सवाल कौन बनेगा करोड़पति जैसा है। चिंता मत कीजिए अगले 10-15 दिनों में जब हम बैठक करेंगे तो इस पर निर्णय लिया जाएगा।’राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होना है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और 6,000 से ज्‍यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। यह और बात है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने पर कांग्रेस अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई है।

खरगे ने समारोह के लिए उन्हें भेजे गए निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘मुझे निमंत्रण मिला है। प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व प्रधान सचिव मंदिर ट्रस्ट के सचिव के साथ आए थे। उन्होंने मुझे आमंत्रित किया है। मैं इस पर बहुत जल्द फैसला करूंगा।’ यानी कुल मिलाकर कह सकते हैं कि अभी तक कांग्रेस नेताओं के समारोह में जाने या नहीं जाने को लेकर चीजें साफ नहीं हैं। एक और उदाहरण लेते हैं। यह सवाल नीतीश कुमार के विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के कन्‍वीनर बनने को लेकर था। जब खरगे से पूछा गया कि क्या I.N.D.I.A गठबंधन के संयोजक पद के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नाम विचार किया जा रहा है? इसके जवाब खरगे बोले, ‘यह सवाल कौन बनेगा करोड़पति जैसा है। चिंता मत कीजिए अगले 10-15 दिनों में जब हम बैठक करेंगे तो इस पर निर्णय लिया जाएगा।’

यह नौबत तब है जब लोकसभा चुनाव सिर पर खड़े हैं। विपक्षी दल गठबंधन में जल्द से जल्‍द सभी राज्यों में सीट बंटवारे को लेकर स्थि‍तियों के साफ होने का इंतजार देख रहे हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 2020 में एनडीए के साथ मिलकर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। फिर उन्‍होंने एनडीए से किनारा कर लिया था। महागठबंधन में शामिल होकर बिहार में नई सरकार बनाई थी।राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होना है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और 6,000 से ज्‍यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। यह और बात है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने पर कांग्रेस अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई है। मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्‍व में भी कांग्रेस की यह कमी दूर नहीं हो पाई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होना हो या I.N.D.I.A के कन्‍वीनर पर फैसला, उसके के लिए हर सवाल कौन बनेगा करोड़पति जैसा बन जाता है। आखिर कांग्रेस के साथ इस दिक्‍कत का कारण क्‍या है? आइए, यहां समझने की कोशिश करते हैं। नीतीश कुमार के विपक्षी गठबंधन, इसमें कांग्रेस, आरजेडी और तीन वाम दल शामिल थे। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि कांग्रेस में गांधी परिवार का हस्‍तक्षेप हमेशा रहता है। अध्‍यक्ष कोई भी हो पीछे से परिवार ही कमान को पकड़कर रखता है। जब ऊपर से झंडी मिलती है तो नीचे फैसलों पर अमल होता है। गांधी परिवार के अलावा भी कई वरिष्‍ठ नेताओं की लाइन है जो फैसलों में अड़ंगे लगाती है। इससे फटाफट फैसले लेने में मुश्किल आती है।

क्या मोदी सरकार करेगी मिडिल क्लास के लिए भला?

मोदी सरकार अब मिडिल क्लास के लिए भला कर सकती है! आम चुनाव से पहले पेश होने वाले अंतिम बजट में नरेंद्र मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार कुछ बड़ी घोषणाएं कर सकती है। इसके लिए तमाम स्तर पर मंथन जारी है। पीएम के अंतिम मुहर के बाद एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे पेश कर सकती हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार खासकर किसानों, महिलाओं और युवाओं को कुछ न कुछ ठोस देने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा मिडिल क्लास के लिए भी सरकार कुछ राहतों का ऐलान कर सकती है। सरकार की मंशा है कि आम चुनाव से पहले यह महज घोषणा न हो और लाखों किसानों तक यह लाभ पहुंच जाए। सरकारी अधिकारियों के अनुसार चुनाव पूर्व लाभ देने के लिए होमवर्क पिछले कुछ दिनों से जारी है। सरकार की ओर से इसका ऐलान होते ही इसे अमल में लाया जा सकता है। घोषणाओं में जिन अहम चीजों पर विचार चल रहा है उनमें किसान सम्मान निधि को बढ़ाने के अलावा लाड़ली योजना की तरह महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ देने जैसी कुछ योजनाओं पर भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार कई नेताओं ने भी शीर्ष नेताओं से आग्रह किया कि मौजूदा वित्तीय नीति में बदलाव की जरूरत है और चुनाव तक वित्तीय घाटे को इग्नोर कर बड़ी कल्याणकारी योजना या किसान पैकेज पर खुलकर खर्च करे।

अधिकारियों के अनुसार आर्थिक हालात सुधरने से अब सरकार के पास इन योजनाओं पर खर्च करने के लिए धन भी है और ऐसा करने से दूसरी विकास की योजनाओं के फंडिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मोदी सरकार अब तक वित्तीय घाटे को नियंत्रण में रखने के प्रति बहुत सावधान रही है और इसमें सफलता भी मिलती रही है। हालांकि अगर सीधी राशि देने वाले पैकेज के ऐलान के बाद इस पर असर पड़ सकता है। 2019 आम चुनाव से पहले अंतिम बजट में केंद्र सरकार ने बड़ा दांव खेला था। इसमें मोदी सरकार ने न सिर्फ किसान सम्मान निधि की घोषणा की बल्कि यह भी सुनिश्चित किया था कि यह चुनाव से पहले पहली किश्त सभी के खाते में पहुंचे। इसके अलावा मिडिल क्लास के इनकम टैक्स में रियायत का भी उसी बजट में ऐलान किया था। इन दोनों घोषणाओं का लाभ चुनाव में मिला था।

आम चुनाव से ठीक पहले BJP और केंद्र सरकार किसी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। 22 जनवरी को राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से सरकार और BJP को सियासी तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। मगर, पार्टी को पता है कि सिर्फ उसी पर चुनाव में जाना नाकाफी होगा। वैसे भी हाल के वर्षों में पीएम मोदी की अगुआई में सरकार ने लाभार्थी वर्ग के रूप में नया वोट बैंक बनाया है। इसमें BJP को किसी तरह का सेंध न लगे इसके लिए पार्टी की पूरी कोशिश है। पार्टी को अंदाजा है कि इस बार I.N.D.I.A. गठबंधन की अगुआई में विपक्ष लुभावने वादे कर सकती है। पिछले कुछ चुनावों से ऐसी योजनाओं का असर वोटर पर देखा भी गया है। यही कारण है कि BJP जोखिम लेना नहीं चाहेगी और बजट में बड़ा ऐलान कर नैरेटिव अपने पक्ष में रखना चाहेगी। बता दें कि चुनाव नजदीक आ रहा है। भाजपा ने 2024 के चुनाव पर नजर रखते हुए एक ‘ज्ञान’ फॉर्मूला तैयार किया है। इसमें चार सेगमेंट शामिल हैं। ये सेगमेंट गरीब, किसान, महिलाएं और युवाओं पर आने वाले समय में पार्टी के आउटरीच का फोकस होगा। नारे गढ़ने से लेकर ‘ज्ञान’ के प्रत्येक सेगमेंट के लिए पैनल बनाने तक, भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए डबल-बैरल ब्लिट्जक्रेग की योजना तैयार की है। इसमें सरकार और संगठनात्मक गतिविधियां दोनों इन चार सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करती हैं। हाल ही में ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सभी जातियों में गरीब, युवा, महिलाएं और किसान उनके लिए सबसे बड़े हैं। देश की प्रगति के लिए इन जातियों का उत्थान ही उनके लिए सबसे बड़ा है।

चुनाव को देखते हुए भाजपा ने ‘ज्ञान’ पैनल का गठन किया है और ‘ज्ञान’ समूह के प्रत्येक सेगमेंट के लिए एक अभियान पर काम कर रही है। हाल ही में एक बैठक में, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने पहली बार मतदाताओं के लिए पार्टी की युवा शाखा को एक नारा सुझाया था, जिसमें लिखा था, ‘अगर आप 18 वर्ष के हैं, तो इंतजार क्यों कर रहे हैं, मतदान के लिए आएं।’ भाजपा जो अपने अभियान के लिए हिंदी भाषा को प्राथमिकता देती है, युवा पीढ़ी तक पहुंचने के लिए अंग्रेजी में नारे का इस्तेमाल कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से भी इस ‘ज्ञान’ समूह के लिए विभिन्न उपायों पर विचार किया जा रहा है। जैसे कि किसानों को दी जाने वाली ‘किसान निधि’ को बढ़ाना। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड पर प्रोत्साहन देना। स्वास्थ्य सेवा के मोर्चे पर कुछ और लाभ प्रदान करने, कुछ निश्चित रिटर्न का आश्वासन देकर नई पेंशन योजना को और अधिक आकर्षक बनाने, लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करने के प्रस्ताव हैं।

आखिर भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था में कैसे आया इतना परिवर्तन?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था में इतना परिवर्तन कैसे आया! विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया में भारत को लेकर होने वाली बातचीत का फोकस बदल गया है। अब दूसरे देश भारत में पिछले कुछ साल हुए सकारात्मक बदलाव को लेकर उत्सुक हैं और बात कर रहे हैं। जयशंकर ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम में विकसित संकल्प भारत यात्रा को संबोधित करते हुए कहा, ‘विदेश मंत्री की हैसियत से मैं दुनिया भर में आता जाता रहता हूं, दुनिया हमारे बारे में बात कर रही है कि भारत में इतना बदलाव कैसे हुआ, वो कहते हैं कि 10 और बीस सालों पहले भी भारत ऐसा ही था, ऐसे में क्या बदलाव हुआ है। तब मैं उन्हें कहता हूं कि भारत में जो कुछ बदलाव हुआ है वो है विजन।’ उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दौरान तकनीक का सही इस्तेमाल कर देश हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। आधार और बैंक अकाउंट की मौजूदगी ने ना सिर्फ गवर्नेंस बल्कि समाज को भी खासा बदलाव आया है। विदेश मंत्री ने कहा कि बीते 10 सालों में पीएम मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने लोगों का जीवन बदलने के लिए असाधारण काम किया है। हेल्थ, बिजली, आवास और एजुकेशन के क्षेत्र में जिन दिक्कतों का सामना भारतीयों को करना पड़ रहा है, वो दुनिया के दूसरे देशों में भी है। उन्होंने इस दौरान भारत सरकार की कई योजनाओं का जिक्र भी किया और कहा कि उज्जवला योजना हो या फिर मुद्रा योजना, सभी स्कीम आम आदमी की जरूरत और तरक्की को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं पर विचार विमर्श के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए, जैसे कि उज्जवला योजना पर बात करते हुए उन्होंने अपनी मां के अनुभवों का जिक्र किया। जयशंकर ने कहा कि बीते 10 सालों में उन्होंने भारत को बेहतरी के लिए बदलते देखा है। इन बदलावों का असर हर ओर पड़ा है, ब्यूरोक्रेसी ज्यादा संवेदनशील हो गई है तो बैंक में काम करने वाले भी ज्यादा दोस्ताना व्यवहार करते हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर विदेश नीति पर लगातार बयान देने से चर्चा में हैं। इन दिनों अपनी नई किताब ‘Why Bharat Matters’ के जरिए वो भारतीय डिप्लोमेसी के कई आयामों पर बात करते दिख रहे हैं। उन्होंने विदेश नीति को लेकर एक बार फिर अपना नजरिया सामने रखा है। शुक्रवार को बेंगलुरु में बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति नई सोच पर चल रही है। इस दौरान उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस विदेश नीति में हम अपने पड़ोसियों को पार्टनर की तरह मानते हैं, जो कि आपके काम आएं, ना कि ऐसे प्रतिद्वंदी जो आपसे जलते हों। जयशंकर ने कहा कि हम इतिहास पर फिर से कब्जा कर रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री ने वियतनाम का जिक्र करते हुए कहा कि पुरातत्व विज्ञान की ही नज़र से देखें तो पाएंगे कि वहां हजारों साल पुराने शिव के मंदिर मौजूद हैं। उन्होंने आगे कहा कि खाड़ी के कुछ देशों में 60 और 70 तक के दशक में भारतीय रुपयों का चलन था।

विदेश मंत्री ने कहा कि चाहे यूक्रेन संघर्ष की जटिलता और उससे जुड़ा दबाव हो या फिर इंडो पैसिफिक की सुरक्षा का मामला, हम अपना स्पष्ट रुख सामने रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्वॉड और रूस के साथ आर्थिक लेनदेन ना करने को लेकर भारत के ऊपर दबाव था। लेकिन इन दोनों ही मामलों पर हम मजबूती के साथ अपनी बात पर कायम रहे। विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि मौजूदा दौर में भारत एक ऐसे देश के तौर पर उभरा है, जिसे ऐसे देश के तौर पर देखा जाता है, जिसकी मौजूदगी बड़ी शक्तियों के आपसी संतुलन के लिए जरूरी है। उन्होंने बेंगलुरु में अमेरिकी कौंसुलेट खोले जाने को लेकर कहा कि वो इस मसले को अमेरिकी राजदूत के साथ अगली बैठक में उठाएंगे।जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाए जाने पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘कश्मीर को यूएन सुरक्षा परिषद ले जाना एक गलती थी क्योंकि वहां मौजूद पश्चिमी देशों के पाकिस्तान में निहित स्वार्थ थे। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास अंतरराष्ट्रीय पॉलिटिक्स की अच्छी समझ होती, तो हम ऐसा नहीं करते। क्योंकि कश्मीर को हमारी कमजोरी की तरह इस्तेमाल किया गया। आर्टिकल-370 पर फैसला ना सिर्फ देश बल्कि ठोस विदेश नीति के लिए भी जरूरी था। ऐसा कर हमने 1948 में खोली भेद्यता की खिड़की को अब बंद कर दिया है।

विदेश मंत्री ने बॉर्डर पर तनाव पर कहा कि भारत चीन के साथ लगी सीमा पर सैनिक भेज पा रहा है क्योंकि वहां विकास का काम हुआ है। उन्होंने कहा कि बॉर्डर डिवेलपमेंट बजट 3,500 करोड़ से 15,000 करोड़ तक बढ़ा है। साथ ही वहां रोड, सुरंग और पुल बनाने की वजह से हमारी पहुंच बढ़ी है। उन्होंने ये भी कहा कि व्यापार के मामले में दोनों देशों के बीच एक अविश्वास है और इसका मुकाबला बेहतर देसी प्रॉडक्ट बना कर कर सकते हैं!

क्या मंजिल पर पहुंच चुका है आदित्य एल 1?

हाल ही में आदित्य एल 1 अपनी मंजिल पर पहुंच चुका है! इसरो ने अंतरिक्ष में एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। देश की पहली सोलर ऑबजर्वेटरी आदित्य-एल1 लैंगरंग प्वाइंट एल1 पर स्थापित हो चुकी है। यहां से अब अंतरिक्ष यान सूर्य को ‘आकाशीय सूर्य नमस्कार’ करेगा। खास बात है कि इसरो के इस जटिल मिशन को लीड करने वाली एक महिला हैं। प्रोजक्ट डायरेक्ट निगार शाजी वो नाम है जो आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एक सौम्य और मुस्कुराती महिला जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाने के लिए अपनी टीम के साथ आठ वर्षों तक अथक परिश्रम किया। इसरो के कई मिशनों में अहम भूमिका निभा रही 59 वर्षीया शाजी अब उन कई महिलाओं के लिए आदर्श बन गई हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान में अपना करियर बनाना चाहती हैं। निगार शाजी ने 1987 में विशिष्ट अंतरिक्ष एजेंसी इसरो को जॉइन किया था। उन्होंने इसरो में अपना कार्यकाल आंध्र तट के पास श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष बंदरगाह पर काम के साथ शुरू किया था। बाद में उन्हें बेंगलुरु के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया, जो उपग्रहों के विकास के लिए प्रमुख केंद्र है। इसरो के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया। शाजी इसरो में भरोसे का प्रतीक बन गईं। इसके बाद उन्हें भारत के पहले सौर मिशन के परियोजना निदेशक बनाया गया। शाजी पहले रिसोर्ससैट-2ए के सहयोगी परियोजना निदेशक भी रह चुकी हैं। यह प्रोजेक्ट अभी भी चालू है। शाजी सभी निचली कक्षा और ग्रहीय मिशनों के लिए प्रोग्राम डायरेक्टर भी हैं।

शाजी और उनकी टीम ने 2016 में आदित्य एल1 परियोजना पर काम करना शुरू किया। हालांकि 2020 के आसपास कोविड महामारी ने उनके काम को रोक दिया। उस समय इसरो की गतिविधियां लगभग रुक गईं, लेकिन प्रोजेक्ट का काम कभी नहीं रुका। उन्होंने और उनकी टीम ने सात वैज्ञानिक उपकरणों वाली सोलर ऑब्जर्वेटरी पर काम करना जारी रखा। मिशन आदित्य एल1 को पिछले साल 2 सितंबर को लॉन्च किया गया था। शाजी और उनकी टीम ने कई अभ्यासों के बाद पृथ्वी से L1 बिंदु की ओर अपनी पूरी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यान पर कड़ी नजर रखी। उनकी कड़ी मेहनत के कारण, आदित्य-एल1 अंततः अपने गंतव्य, हेलो कक्षा तक पहुंच गया है। यहां से अंतरिक्ष यान बिना किसी बाधा या रुकावट के सूर्य का निरीक्षण करेगा।

शाजी का जन्म तमिलनाडु के तेनकासी जिले के सेनगोट्टई में एक मुस्लिम तमिल परिवार में हुआ। शाजी की स्कूली शिक्षा सेनगोट्टई में ही हुई। उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के तहत तिरुनेलवेली के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने यहां से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। बाद में, उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मिसरा से इलेक्ट्रॉनिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। शाजी के पिता शेख मीरान भी मैथ में ग्रेजुएट थे। हालांकि, उन्होंने अपनी पसंद से खेती की ओर रुख किया। हाल ही में एक इंटरव्यू में शाजी ने बताया था कि मेरे पिता ने मुझे हमेशा जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। मेरे माता-पिता दोनों ने मेरे पूरे बचपन में बहुत सहयोग किया। उनके निरंतर समर्थन के कारण, मैं इतनी ऊंचाइयों तक पहुंची।

अंतरिक्ष एजेंसी में लैंगिक भेदभाव के बारे में किसी भी गलतफहमी को दूर करते हुए शाजी ने कहा कि उन्हें इसरो में कभी भी लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। उनका कहना है कि अपने सीनियर्स के लगातार सहयोग के कारण ही वह आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। शाजी कहती हैं कि टीम लीडर होने के नाते, अब कई लोग मेरे अधीन काम करते हैं। इसलिए, मैं उसी तरह तैयार होती हूं जैसे मेरे सीनियर्स ने मुझे तैयार किया। बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए देश के पहले अंतरिक्ष-आधारित मिशन ‘आदित्य एल1’ यान को आज पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर उसकी अंतिम गंतव्य कक्षा में स्थापित करने की तैयारी कर ली है। इसरो अधिकारियों के अनुसार, अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के ‘लैग्रेंज प्वाइंट 1 एल 1 के आसपास एक ‘हेलो’ कक्षा में पहुंचेगा। ‘एल1 प्वाइंट’ पृथ्वी और सूर्य के बीच की कुल दूरी का लगभग एक प्रतिशत है। ‘लैग्रेंज प्वाइंट’ वह क्षेत्र है जहां पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण निष्क्रिय हो जाएगा। ‘हेलो’ कक्षा, एल 1 , एल 2 या एल 3 ‘लैग्रेंज प्वाइंट’ में से एक के पास एक आवधिक, त्रि-आयामी कक्षा है। उन्होंने कहा कि ‘एल1 प्वाइंट’ के चारों ओर ‘हेलो’ कक्षा में उपग्रह से सूर्य को लगातार देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे वास्तविक समय में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर इसके प्रभाव का अवलोकन करने में अधिक लाभ मिलेगा।

इसरो के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, ‘शनिवार शाम लगभग चार बजे आदित्य-एल1 को एल1 के चारों ओर एक ‘हेलो’ कक्षा में पहुंचा देगी। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं, तो संभावना है कि यह शायद सूर्य की ओर अपनी यात्रा जारी रखेगा।’ इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी57 ने दो सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसडीएससी के दूसरे प्रक्षेपण केंद्र से आदित्य-एल1 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यान विभिन्न चरणों से होकर गुजरा और पृथ्वी के प्रभाव क्षेत्र से बचकर, सूर्य-पृथ्वी ‘लैग्रेंज प्वाइंट 1’ एल 1 की ओर बढ़ गया।

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कौन-कौन से नेता जाएंगे?

आज हम आपको बताएंगे कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कौन-कौन से नेता जाने वाले हैं! आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। आप ने दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल, संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। संजय सिंह और एन.डी. गुप्ता राज्यसभा में मौजूदा सांसद भी हैं। वहीं स्वाति मालीवाल को पहली बार मौका मिला है, स्वाति मालीवाल को सुशील कुमार गुप्ता की जगह उम्मीदवार बनाया गया है। 19 जनवरी को चुनाव होगा और रिजल्ट की घोषणा भी इसी दिन की जाएगी। शराब घोटाला मामले में जेल में बद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की सदस्यता इसी महीने की 27 तारीख को समाप्त हो रही है। लेकिन संजय सिंह राज्यसभा चुनाव के लिए एक बार फिर से अपना नॉमिनेशन करेंगे। इसके लिए उन्होंने राऊज एवेन्यू कोर्ट में आवेदन दिया था, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जेल से नॉमिनेशन फाइल करने की अनुमति दे दी है। संजय सिंह आम आदमी पार्टी कद्दावर नेता हैं। मणिपुर हिंसा से लेकर अडानी मामले तक, संजय सिंह ने केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में जमकर हल्ला बोल किया है। संजय सिंह को पिछले साल 4 अक्टूबर को कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। 8 दिन तक ईडी कस्टडी में रहने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। तब से वह तिहाड़ में ही हैं।

​इस बार आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए स्वाति मालीवाल का नाम प्रस्तावित किया है। स्वाति मालीवाल को राज्यसभा में सुशील कुमार गुप्ता की जगह रिप्लेस किया गया है। वह देश की चर्चित एक्टिविस्ट हैं और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने आज ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते वक्त स्वाति काफी भावुक नजर आईं। स्वाति को देखकर स्टाफ के सदस्य भी भावुक हो गए। सभी स्वाति मालीवाल को बाहर गेट तक छोड़ने आए थे। महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक मुद्दों को मजबूती से उठाती रही हैं। स्वाति मालीवाल को वर्ष 2015 में दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

नारायण दास गुप्ता को AAP ने दूसरी बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनका जन्म 16 अक्टूबर 1945 को हरियाणा जिले के सोनीपत के गुहना गांव में हुआ था। एन डी गुप्ता एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वे इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया 2001-02 के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ अकाउंटेंट्स, यूएसए के बोर्ड में चुने जाने वाले पहले भारतीय हैं। बता दें कि सबको पता है कि आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह इस वक्त दिल्ली शराब घोटाला मामले के चलते जेल में बंद हैं। उन्हें वहीं से नामांकन भरने की इजाजत मिल गई। आप आदमी पार्टी ने उनपर दोबारा दांव खेला है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी उम्मीदवारी पहले ही पक्की हो गई थी, हालांकि जेल जाने से पहले ही उन्हें दूसरे कार्यकाल का इशारा दिया गया था। आप के सबसे मुखर और तेज़ तर्रार नेताओं में से एक संजय सिंह ने पार्टी के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अडाणी के मुद्दे पर वह सदन के अंदर सबसे मुखर रहे। उनकी गिरफ्तारी के बाद AAP लगातार यह कह रही है कि उन्हें मोदी और उनके दोस्त यानी गौतम अडाणी पर बोलने के कारण झूठे केस में फंसाया गया है।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से आने वाले संजय सिंह, पार्टी की अंदरूनी कलह से लेकर दूसरे दलों से बातचीत तक, हर मुश्किल मोर्चे पर अहम भूमिका निभाते हैं। हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान, बार-बार निर्देशों की अनदेखी करने के आरोप में उन्हें तत्कालीन राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था। आम आदमी पार्टी लगातार मोदी सरकार के ‘बदले की भावना’ पर आरोप लगाती रही है, जिसके चलते इसके पांच नेता – संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, विजय नायर और गुजरात के विधायक छैतर वासवा – जेल में बंद हैं! 

स्वाति मालीवाल को आम आदमी पार्टी ने पहली बार चुना है। उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन भरने से पहले दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। पद से दिए इस्तीफे के बाद वह काफी भावुक भी नजर आईं। आम आदमी पार्टी ने स्वाति मालीवाल के नाम का चुनाव कर महिला कार्ड भी खेला है। इसे केंद्र सरकार के लाए नए महिला कानून बिल नारी शक्ति से भी जोड़ कर देखा जा सकता है। स्वाती मालीवाल अगर राज्यसभा चुनाव जीतती हैं तो वह आप आदमी पार्टी की ओर से एकलौती महिला सासंद होंगी।

2015 में, मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। महिलाओं के अधिकारों की पैरोकारी करने, उनकी शिकायतों का समाधान करने और उन्हें न्याय दिलाने का प्लेटफॉर्म देने में वो काफी सक्रिय रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि मालीवाल ने खुद को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखा। हिंसाग्रस्त मणिपुर पहुंचकर, उन्होंने वहां संघर्ष में बुरी तरह प्रभावित महिलाओं को सहारा दिया। 8 साल के कार्यकाल में, मालीवाल और उनकी टीम ने लगभग 1,70,000 शिकायतों का निपटारा किया। वो महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काफी सक्रिय रहती हैं और उनकी चुस्ती-फुर्ती की तारीफ होती है तो आलोचना भी।

क्या नीतीश कुमार बन पाएंगे INDIA गठबंधन के संयोजक?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नीतीश कुमार INDIA गठबंधन के संयोजक बन पाएंगे या नहीं! बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्टाइल ऑफ फंक्शनिंग राजनीति करने का तरीका हमेशा से अनप्रेडिक्टेबल रही है। उनके आसपास के लोग भी दावे के साथ अनुमान नहीं लगा सकते हैं। हमेशा से टेंटरहूक आगे क्या होगा कि प्रतिक्षा में चिंतित रहना पर अपने नजदीकियों को रखते रहे हैं। यहीं राजनीति का ‘नीतीश मॉडल’ है और अब तक सफल है। 2005 से अब तक बिहार की सियासत को अपने हिसाब से चला रहे हैं। बीजेपी और आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार के पीछे लाइन लगाने को मजबूर है। मगर, कांग्रेस के स्ट्रैटिजिस्ट को नीतीश की फंक्शनिंग स्टाइल पता है। शायद यही वजह है कि अब तक की इंडिया गठबंधन की मीटिंग में नीतीश को वो ‘भाव’ नहीं मिला, जिसकी वो उम्मीद कर रहे थे। अगर, उनका कन्‍वीनर बनने का ख्वाब पूरा भी हो जाता है तो वो सिर्फ खानापूर्ति ही होगी क्योंकि तब तक कांग्रेस अपने हिसाब से चीजों को ढाल चुकी होगी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि नीतीश कुमार की जो स्टाइल ऑफ फंक्शनिंग है, उसमें लोग ये उम्मीद कर रहे हैं कि कैमरे के सामने आकर बोलें कि मुझे कन्‍वीनर बना दिया जाए तो वो कभी नहीं करेंगे। वो जब 2020 में मुख्यमंत्री बने थे, तब भी कह रहे थे कि मुझे मुख्यमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं थी, मुझे लोगों ने बना दिया। वो ऐसे ही चाहते हैं कि घसीटकर कन्‍वीनर की चेयर पर बैठा दिया जाए। जहां तक आरजेडी उनके सहयोगी दल की बात है तो उनकी इच्छा यही है कि नीतीश कुमार कन्‍वीनर बन जाएं। अगर, नीतीश कुमार कन्‍वीनर बनते हैं तो उनके नेता तेजस्वी यादव का बिहार में रास्ता साफ होता है। आरजेडी शुरू से ये मानती रही है कि चाहे ऑन कैमरा हो या ऑफ कैमरा हो, वो ये मानते रहे हैं कि नीतीश कुमार को देश की राजनीति में जाना चाहिए। मतलब, उनके नेता के लिए बिहार की राजनीति छोड़ दी जाए।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार ऐसा होने देंगे? नहीं, बिल्कुल नहीं। नीतीश कुमार ऐसा बिल्कुल नहीं होने देंगे। बिहार में सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार नहीं छोड़ेंगे। उन्हें कन्‍वीनर बनाया जाए या नहीं बनाया जाए, वो तेवर दिखाते रहेंगे। नीतीश कुमार की पॉलिटिकल स्टाइल ही है कि उनके साथ रहनेवाले लोगों को भी अनकम्फर्टेबल रखते हैं। नीतीश कुमार के बारे में लगातार चर्चा हो रही है कि वो इंडिया में रहेंगे या एनडीए में जाएंगे। दरअसल, नीतीश कुमार के राजनीति करने के तरीके को ये सूट करता है। ये नीतीश कुमार का स्टाइल ऑफ फंक्शनिंग है। नीतीश कुमार के साथ हैं या उनके विरोधी सबको ऑन टेंटरहूक रखते हैं। ऐसे में कभी भी उनके ऊपर दांव नहीं खेल सकते कि वो आपके साथ हैं या नहीं हैं। वर्तमान में उनके सहयोगी आरजेडी उतने ही असमंजस में है, जितने कि एनडीए। ऐसे में मीडिया, पब्लिक या राजनेता, वो सारे लोग डिबेट करते रहेंगे कि वो किसी तरफ जाएंगे। ये नीतीश कुमार के काम करने का तरीका शुरू से रहा है।

दरअसल, नीतीश कुमार की राजनीति का जो मॉडल रहा है, उसमें ये सूट करता है। फिलहाल जो हालात हैं, उसमें जेडीयू के जो बड़े नेता हैं, उनमें नीतीश कुमार को कन्‍वीनर बनाने की आवाज काफी तेज हो गई है। ऐसे में सवाल उठता है क्या वो खुद से बोल रहे हैं? क्या पार्टी के तरफ से उन्हें बोलने की इजाजत है? अगर, नीतीश कुमार को कन्‍वीनर बनने की इच्छा नहीं है तो वो अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि ये सबकुछ उनके कॉन्सेंट से हो रहा है। जेडीयू में नीतीश के बिना कुछ भी नहीं हो सकता है। अगर, जेडीयू के नेता लगातार नीतीश कुमार को इंडिया गठबंधन का संयोजक बनाने और पीएम पद के उम्मीदवार बनाने की बात हो रही है तो इसका सीधा मतलब है कि नीतीश कुमार चाहते हैं कि उनके नाम को उछाला जाए। ऐसे में ममता बनर्जी हों या अरविंद केजरीवाल, वो नीतीश कुमार के नाम को आगे नहीं आना देना चाहेंगे। उनकी अपनी राजनीति है।

नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन का कॉन्सेप्ट इसलिए तो नहीं शुरू किया था कि देश का कल्याण हो? अपनी राजनीति के लिए अगर वो चाहते हैं कि कन्‍वीनर बनें और फिर पीएम पद का उम्मीदर बनें तो वो क्यों न करें, ये काम? मगर, नीतीश कुमार फ्रंट में आकर ये कभी नहीं करेंगे। वो दूसरे लोगों से ये काम कराएंगे। जबतक, इस पर कोई ठोस फैसला नहीं आ जाता, तब तक रोजाना का असमंजस रहेगा कि नीतीश कुमार किधर जाएंगे। ये ऐसा इसलिए होगा कि नीतीश कुमार चाहते हैं कि ये स्थिति बनी रहे।

उनका नीतीश कुमार यही काम करने का तरीका है। वो ऐसी स्थिति बनाकर रखते हैं। वो ऐसा हर काम करते हैं, जिससे कोई अनुमान न लगा पाए। दरअसल, नीतीश कुमार हों या फिर नरेंद्र मोदी, जो बड़े नेता हैं, वो इस तरह की स्थिति बनाकर रखते हैं ताकि आप उनके फैसले पर चौंकते रहें। लंबे समय तक राजनीति करते-करते एक पॉलिटिकल मॉडल बना लिए हैं। इसी में इनको मजा आता है। ऐसे में इनके अगले कदम का कयास लगाना मुश्किल हो जाता है। असमंजस की स्थिति बनी रहे। ऊहापोह वाले हालात दिखते रहे। हमेशा टेंडर हूक पर रहें। ये हर समय डर बना रहे कि पता नहीं क्या कर दें, किधर चले जाएं। क्या फैसला ले लें। अब तक ये मॉडल काम करता आया है। ऐसी स्थिति आगे भी बनी रहेगी।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कन्‍वीनर बन जाने से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बन जाएंगे? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इसमें एक बात जरूर है कि अगर कुछ ऊंच-नीच होता है तो आगे रास्ता थोड़ा आसान हो जाएगा। आगे किसी ओहदे के लिए कंसिडर किए जा सकते हैं। जो कुछ भी जेडीयू की ओर बयानबाजी हो रही है, उसमें नीतीश कुमार की सहमति जरूर है।

दरअसल, नीतीश कुमार ने जो इंडिया गठबंधन का कॉन्सेप्ट लाया था, उस समय उनकी प्लानिंग थी कि वो पूरे देश में घूमेंगे। हर सीट पर मैन टू मैन मार्किंग होगी। अपोजिशन का एक उम्मीदवार होगा। मगर, अब तक ऐसा कुछ हुआ नहीं। अगर नीतीश कुमार कन्‍वीनर बना दिए जाते हैं तो इतना जरूर होगा कि इस काम में थोड़ी तेजी आएगी। वो अगर कन्‍वीनर पोस्ट को पायलट करेंगे तो इंडिया गठबंधन का एक सेप दिखने लगेगा। फिलहाल, नीतीश कुमार पैसिव मोड में हैं। मीटिंग तो अटेंड करते हैं, मगर बहुत ऐक्टिव नहीं हैं। नीतीश कुमार अगर इंडिया गठबंधन के संयोजक बनते हैं तो उनकी ऐक्टिविटी जरूर बढ़ जाएगी।

उपराष्ट्रपति की मिमिक्री करने वाले सांसद को उपराष्ट्रपति ने बुलाया खाने पर!

हाल ही में उपराष्ट्रपति की मिमिक्री करने वाले सांसद को उपराष्ट्रपति ने खाने पर बुलाया है! उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बड़ा दिल दिखाते हुए उनकी मिमिक्री करने वाले टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी। साथ ही बनर्जी और उनकी पत्नी को डिनर का न्योता भी दिया है। तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी ने अपने जन्मदिन पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मिले बधाई संदेश के लिए शुक्रवार को उनकी सराहना की और इसे उनका ‘बड़प्पन’ बताया। संसद के पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान बनर्जी ने राज्यसभा सभापति की ‘मिमिक्री’ की थी जिससे राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। बनर्जी ने पिछली गलतफहमियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने के महत्व पर भी जोर दिया। बनर्जी गुरुवार को 67 वर्ष के हो गए। उन्होंने कहा, ‘मेरे जन्मदिन पर मुझे बधाई देना माननीय उपराष्ट्रपति का वास्तव में बेहतर प्रयास और उनका बड़प्पन है। मैं वास्तव में अभिभूत हूं कि उन्होंने मुझसे और मेरी पत्नी से बात की और हमें अपने घर पर रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया।’ यह पूछे जाने पर कि क्या धनखड़ का ये व्यवहार दोनों के बीच संबंधों में सुधार ला सकता है, इस पर श्रीरामपुर के सांसद ने कहा,संसद के परिसर में उपराष्ट्रपति का मजाक उड़ाना अच्छी बात नहीं है। यह सम्मान व्यक्ति का नहीं पद का सम्मान होता है। उन्होंने आगे कहा कि नेताओं को बहुत सावधानी से काम करना चाहिए क्योंकि उनकी बातों को कार्यकर्ता फॉलो करते हैं। इसलिए सावधानी से ही नेताओं को काम करना चाहिए। ‘जीवन में हमेशा अतीत की गलतफहमियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।’ तृणमूल कांग्रेस सांसद ने जन्मदिन की बधाई के लिए गुरुवार को सोशल मीडिया पर भी धनखड़ का आभार व्यक्त किया था।

पिछले महीने तब विवाद खड़ा हो गया था जब बनर्जी ने संसद की सीढ़ियों पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान धनखड़ की नकल की थी। इस घटना की कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वीडियो-रिकॉर्डिंग की थी। विपक्षी सांसद 140 से अधिक संसद सदस्यों को निलंबित किए जाने का विरोध कर रहे थे। बनर्जी के इस कृत्य की भारतीय जनता पार्टी भाजपा ने कड़ी निंदा की थी। धनखड़ एक वरिष्ठ वकील भी हैं। उन्होंने तब सदन में कहा था कि वह संसद या उपराष्ट्रपति के संवैधानिक पद का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। बनर्जी ने बाद में कहा कि ‘मिमिक्री’ अभिव्यक्ति का एक रूप है और असहमति एवं विरोध जताना लोकतंत्र में एक मौलिक अधिकार है। बता दें कि पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उपराष्ट्रपति की मिमिक्री को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। इंदौर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की संसद में जो भी हुआ वह ठीक नहीं हुआ। संसद के परिसर में उपराष्ट्रपति का मजाक उड़ाना अच्छी बात नहीं है। यह सम्मान व्यक्ति का नहीं पद का सम्मान होता है। उन्होंने आगे कहा कि नेताओं को बहुत सावधानी से काम करना चाहिए क्योंकि उनकी बातों को कार्यकर्ता फॉलो करते हैं। इसलिए सावधानी से ही नेताओं को काम करना चाहिए।

संसद की सुरक्षा में सेंधमारी को लेकर भी पूर्व स्पीकर ने बयान दिया है। महाजन ने कहा कि संसद की सुरक्षा स्पीकर के अंतर्गत आती है और उन्होंने कार्रवाई भी की है। इसके साथ ही महाजन ने कहा कि विपक्ष बेवजह की मांग करके संसद की कार्यवाही को भी ठप्प करते है जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि संसद चर्चा करने के लिए है।यह पूछे जाने पर कि क्या धनखड़ का ये व्यवहार दोनों के बीच संबंधों में सुधार ला सकता है, इस पर श्रीरामपुर के सांसद ने कहा, ‘जीवन में हमेशा अतीत की गलतफहमियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।’ तृणमूल कांग्रेस सांसद ने जन्मदिन की बधाई के लिए गुरुवार को सोशल मीडिया पर भी धनखड़ का आभार व्यक्त किया था। हंगामा संसद में नहीं होना चाहिए। दरअसल, लोकसभा की सुरक्षा में जो चूक हुई थी उस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में घमासान जारी था। हंगामे के चलते 78 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। सस्पेंड होने वाले सांसदों में लोकसभा के 33 और राज्यसभा के 45 एमपी थे। निलंबित एमपी संसद परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे। तृणमूल कांग्रेस के नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल की थी। इतना ही इसका वीडियो बनाकर वायरल भी किया गया था। इस घटना का जमकर विरोध हुआ था। इसी मामले में लोकसभा की पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी तीखी आलोचना की है।

आखिर कैसे बची 379 लोगों की जापान विमान हादसे में जिंदगी?

आज हम आपको बताएंगे कि जापान विमान हादसे में 379 लोगों की जिंदगी कैसे बची! जापान के टोक्यो के एयरपोर्ट में बीती 2 जनवरी को दो विमानों की टक्कर के बाद 379 जानों का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं। एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यात्रियों ने केबिन क्रू के नियमों को माना और हड़बड़ी नहीं की, जिससे यह मुमकिन हो सका। टोक्यो के हनेडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर शाम 5:47 बजे जापान एयरलाइंस का A350 विमान लैंडिंग के लिए रनवे पर उतरा ही था कि कोस्ट गार्ड के छोटे विमान से उसकी टक्कर हो गई। जांचकर्ताओं को कहना था कि 367 पैसेंजर और 12 क्रू मेंबर्स वाले A350 विमान को ही उतरने की मंजूरी मिली थी। कोस्ट गार्ड के प्लेन को टेकऑफ की मंजूरी नहीं थी। जापान एयरलाइंस के विमान में आग लग गई। अंदर केबिन में भी धुआं भरने लगा। एक यात्री ने कहा कि अफरातफरी मच गई। हम फर्श पर लेट गए। विमान एक ओर झुक गया था। बाहर खिड़कियों से विमान आग की लपटों में घिरा दिख रहा था। सच कहूं तो लगा कि बच नहीं पाएंगे। हम जिंदा हैं तो बस यह एक चमत्कार है। तब तक पायलट को नहीं पता था कि आग लग चुकी है। फ्लाइट अटेंडेंट ने उसे बताया। क्रैश से दो घंटे पहले ही क्रू ने यात्रियों को सेफ्टी विडियो दिखाया था। इसमें बताया गया था कि इमरजेंसी में उन्हें क्या करना है, और क्या नहीं। इसमें बताया जाता है कि जब जान खतरे में हो तो सबसे पहले खुद को बचाइए, सामान की फिक्र छोड़ दें। बैग और हाई हील की वजह से आग तेजी से फैलती है और बचाव के दौरान स्लाइड्स से गिरकर घायल होने का खतरा रहता है।

उड़ान में 12 फ्लाइट अटेंडेंट थे। निकासी अभियान के दौरान अनाउंसमेंट सिस्टम खराब हुआ तो उन्होंने मेगा फोन पर तेज आवाज में स्पष्ट इंस्ट्रक्शंस दिए। सबसे पहले कहा शांत रहें। अपना सामान छोड़ दें। फिर उन्होंने 8 में से 3 इमरजेंसी एग्जिट के इस्तेमाल का फैसला किया। दो आगे और एक सबसे पीछे, क्योंकि बीच के निकास आग से घिर चुके थे। हर एग्जिट पर अटेंडेंट खड़े हो गए और लोगों से निकलने को कहा। जहां एग्जिट बंद था, वहां साफ कहा- इस गेट से नहीं। हर यात्री बिना संयम खोए नियमों को मान रहा था। किसी ने रास्ते को जाम नहीं किया। वे अटेंडेंट के निर्देशों के अनुसार लाइन से बाहर निकलते रहे। सबसे खास बात यह कि किसी भी यात्री ने सामान हाथ में नहीं लिया था। वे सब पीछे छोड़ चुके थे। सभी यात्री स्लाइड से उतरते ही भागने लगे। इस तरह हादसे के 18 मिनट के अंदर पूरा विमान खाली हो गया।

बता दे कि जापान की राजधानी टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर मंगलवार को एक विमान हादसे का शिकार हो गया। 379 लोगों को ले जा रहा एयरबस A350 रनवे पर दूसरे विमान से टकरा गया। इससे विमान में आग लग गई। जिससे फ्लाइट के अंदर धुंआ भरने लगा और अफरातफरी मच गई। जान बचाने के लिए यात्री इधर-उधर दौड़ने लगे क्योंकि जान बचाने के लिए सभी के पास सिर्फ अगले कुछ सेकेंड का समय था। यात्रियों वे विमान के अंदर उस समय जो अनुभव किया, वो वाकई बहुत डरावना था। मौत के मुंह से निकले यात्रियों ने जलते विमान से बचने का भयावह अनुभव साझा किया है। हादसे के बाद जापान एयरलाइंस की फ्लाइट 516 से यात्रियों को निकाल लेना भी एक सफलता माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से निकासी और नई तकनीक ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि दूसरे विमान, जो भूकंप पीड़ितों को सहायता पहुंचाने वाला एक छोटा तटरक्षक विमान था, में सवार लोग उतने भाग्यशाली नहीं थे। इस विमान में सवार पांच लोगों की मौत हो गई और पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया।

विमान में सवार 17 साल के यात्री स्वेड एंटोन डेइबे ने बताया, टक्कर बोते ही अफरा-तफरी मच गई। एयरबस ए350 रनवे पर रुक गया था और कुछ ही मिनटों में पूरा केबिन धुएं से भर गया। केबिन में धुंआ जिस तरह से फैल रहा था, लग रहा था कि ये कोई नरक है। हमने खुद को फर्श पर गिरा दिया। जैसे ही आपातकालीन दरवाजे खोले गए तो हमने जैसे खुद को उस तरफ धकेल दिया। भारी अराजकता थी और तब कुछ पता नहीं था कि हम कहां जा रहे हैं। हम बाहर आए तो मैदान में भाग गए। एक अन्य महिला यात्री ने कहा कि विमान के अंदर तेजी से गर्मी बढ़ रही थी और ईमानदारी से कहूं तो मैंने ये महसूस किया कि मैं बच नहीं पाऊंगी।

विमान में सवार सातोशी यामाके ने कहा, हवाई जहाज एक तरफ झुक गया था। ऐसे लगा जैसे विमान नीचे किसी चीज से टकरा रहा हो। मैंने खिड़की के बाहर एक चिंगारी देखी और फिर धुएं से केबिन भरने लगा। एक और यात्री ने क्योदो न्यूज को बताया कि उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि हम किसी चीज से टकराए हों। यात्री यामाके ने कहा कि सभी को बाहर निकलने में लगभग पांच मिनट लग गए। मैंने देखा कि इसके करीब 5 मिनट बाद आग पूरे विमान में फैल गई। 28 साल के त्सुबासा सवादा ने कहा कि वह केवर यह सकते हैं कि यह एक चमत्कार था, जो नहीं होता तो हम मर सकते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि हादसे के दौरान ये अच्छी बात रही कि चालक दल स्पष्ट रूप से यह समझने में सक्षम था कि कौन से दरवाजे आग की लपटों से दूर थे। उन्हीं दरवाजों को लोगों के लिए खोला गया। अगर थोड़ी भी देर होती तो शायद ये बहुत भयावह हो सकता था।

जब चीनी मीडिया ने भारत की तारीफ की, तो क्यों आग बबूला हुई कांग्रेस?

हाल ही में चीनी मीडिया ने भारत की तारीफ की थी जिसके बाद कांग्रेस आग बबूला हो गई है! सीमा विवाद के चलते भारत और चीन के रिश्ते सामान्य नहीं हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी कई मंचों से यह बात कुबूल चुके हैं। लेकिन नए साल में पहली बार पड़ोसी मुल्क के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत के आर्थिक और विदेश नीति की तारीफ की है। लेकिन, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। चीनी मीडिया में मोदी सरकार की तारीफ से कांग्रेस आग-बबूला है। उसने अपनी इस नाराजगी के 5 कारण भी गिनाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा कि मोदी सरकार को तय कर लेना चाहिए कि उनकी चीनी नीति क्या है? ‘न कोई हमारी सीमा में घुसा’ वाली मोदी जी की चीन को क्लीन चिट है या उन्हीं के MEA वाली ‘सामान्य नहीं’ है, जिसमें उन्होंने ऐप बैन के अलावा कुछ नहीं किया। लद्दाख समेत, पूरा देश स्पष्ट रूप से जानना चाहता है।  प्रधानमंत्री मोदी ने 19 जून 2020 ने एक बयान दिया था। पीएम ने कहा था कि न कोई हमारी सीमा में घुसा आया है, न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में हैं। इस बयान ने चीनियों को क्लीन चिट दे दी थी। यह बयान हमारे सैनिकों के लिए एक भारी अपमान के अलावा, इस झूठ ने 18 राउंड की कोर कमांडर स्तर की वार्ताओं में हमारे रुख को काफी नुकसान पहुंचाया है और मई 2020 से 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीन के नियंत्रण को जारी रखने मे भी मदद की है। प्रधानमंत्री के बयान के विपरीत, लेह के पुलिस अधीक्षक ने एक पेपर प्रस्तुत किया जिसमें कहा गया कि भारत अब 2020 से पहले गश्त लगाने वाले 65 में से 26 पेट्रोलिंग प्वाइंट तक नहीं पहुंच सकता। देपसांग और देमचोक जैसे प्रमुख क्षेत्र अभी भी भारतीय सैनिकों के लिए बंद हैं। गोरा पोस्ट और हॉट स्प्रिंग्स, वहां भारत ने आक्रामकता के लाभ के लिए बफर जोन छोड़ दिए हैं। यही नहीं भारत की अब परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह के स्मारक तक पहुंच भी उपलब्ध नहीं है। कोई आश्चर्य नहीं कि चीनी प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं।

कांग्रेस ने दूसरा कारण गिनाते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात ये है कि सरकार ने लद्दाख में हमारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठे चीनी सैनिकों के साथ भी रूस में संयुक्त सैन्य अभ्यास करवाने की मंजूरी दे दी। 1-7 दिसंबर को, 7/8 गोरखा राइफल्स के भारतीय जवानों ने रूस के वोस्तोक 2022 अभ्यास में भाग लिया, जिसमें चीन भी शामिल था। क्या हमारे 20 बहादुर सैनिकों का सर्वोच्च बलिदान इतनी आसानी से भुला दिया गया? कांग्रेस ने लिखा कि सरकार पर आरोप है कि उन्होंने चीन को भारत के आसपास के देशों मालदीव, भूटान और श्रीलंका में अपना पैर जमाने का मौका दिया है। मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ु ने सीधे तौर पर भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग की है, जो सीमा सुरक्षा के लिए बड़ा झटका है। 2017 में जीत का दावा करने के बावजूद डोकलाम इलाके में चीन का सैन्य बिल्डअप जारी है, जो भारत के रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ही चुनौती दे रहा है। भूटान के प्रधानमंत्री कहते हैं कि वहां कोई घुसपैठ नहीं हुई, लेकिन भारत को चीन की गतिविधियों पर चिंता है। श्रीलंका में भी, जहाँ हाल के सरकार का ज्यादा ध्यान सिर्फ अपने खास लोगों को ठेके दिलवाना है, वहाँ चीन ने रणनीतिक हंबनटोटा पोर्ट को 99 साल के लिए लीज पर ले लिया है, जो एक बड़ा झटका है। यहाँ चीनी जासूसी के जहाज भी आते-जाते रहते हैं। ये सब देखकर चीन तो खुश होगा ही, पर भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस ने चौथा कारण बताते हुए कहा कि सरकार पर आरोप है कि ‘मेक इन इंडिया’ के बड़े-बड़े वादों के बावजूद चीन से आयात तेजी से बढ़ा है, जिसने 2022 और 2023 में $200 बिलियन से अधिक का रिकॉर्ड ट्रेड डेफिसिट व्यापार घाटा पैदा किया है। हालत यह है कि सरकार मोबाइल फोन के कलपुर्जे जैसे छोटे-मोटे सामानों को चीन से आयात कर, उस पर थोड़ा सा काम कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ का ढोल पीट रही है। वही सरकार अब चीन के मजदूरों के लिए वीजा पाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की कोशिश कर रही है। जाहिर है, मोदी सरकार के राज में चीन के आर्थिक हित अच्छे से सुरक्षित हैं।

कांग्रेस के पांचवे कराण में निशाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर था। कांग्रेस का कहना है कि 2018 में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दावा किया था कि चीन से लड़ने के लिए तीन दिन में आरएसएस फौज खड़ी कर देगा, जबकि सेना को इसके लिए 6-7 महीने लगेंगे। 4 साल बाद भी सीमा पर किसी लामबंदी का कोई आसार नहीं हैं। उल्टा दिसंबर 2023 में आरएसएस ने अपने नागपुर मुख्यालय में चीनी राजनयिकों को मेहमान बनाया। क्यों गए ? किस लिए गए? क्या बातचीत हुई ?

कांग्रेस ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने चीन की घुसपैठ के जवाब में अपनी गर्दन रेत में दबा ली, उसकी सेना के साथ सहयोग किया, उसे भारत के पड़ोस में प्रभाव हासिल करने दिया, चीन पर भारत की आर्थिक निर्भरता बढ़ाई और आरएसएस को अपने राजनयिकों को सम्मानित करने की अनुमति दी। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन के साथ संबंध सामान्य नहीं हैं। लेकिन जो बात वास्तव में असामान्य है, वह है प्रधानमंत्री की ओर से चीनी हितों को स्वीकार करना। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि चीनी राज्य मीडिया के पास उनके लिए केवल प्रशंसा के शब्द हैं।