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क्या पोखरण में दिखाएंगे भारतीय सेना अपना बल ?

भारतीय सेना अपना बल अब पोखरण में दिखने वाली है! अगले हफ्ते भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास पोखरण में भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ताकत दिखेगी। पहली बार भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की इस तरह की जॉइंट एक्सरसाइज हो रही है जिसमें सभी स्वदेशी प्लेटफॉर्म और वेपन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इस एक्सरसाइज को ‘भारत शक्ति’ नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस जॉइंट एक्सरसाइज के गवाह बनेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस एक्सरसाइज के जरिए दिखाया जाएगा कि कैसे युद्ध की स्थिति में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स मिलकर काम करती है और कितनी तेजी से सेनाओं के बीच कॉर्डिनेशन होता है। तीनों सेनाओं को मिलाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने की तैयारी भी चल रही है और इसका फाइनल स्वरूप तय होना बाकी है। ऐसे में तीनों सेनाओं का किस तरह से इंटीग्रेशन होता है और अलग अलग लोकेशन पर होने के बाद भी कैसे तेजी से कम्युनिकेशन होता है, यह सब ‘भारत शक्ति’ एक्सरसाइज में दिखाई देगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में आत्मनिर्भरता पर काफी फोकस किया है और तीनों सेनाओं ने भी आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से कदम बढ़ाए हैं।

अब तक रक्षा मंत्रालय पॉजिटिव इंडिनाइजेशन की पांच लिस्ट जारी कर चुका है। यानी उन रक्षा उपकरणों की लिस्ट जो विदेश से नहीं लिए जाएंगे बल्कि स्वदेशी से ही खरीद होगी। यह भी तय किया गया कि रक्षा खरीद के लिए सभी कैटेगरी में कम से कम 50 परसेंट स्वदेशी कंटेंट होना चाहिए, जिसमें मटेरियल, कंपोनेंट, सॉफ्टवेयर शामिल हो सकता है, ये भारत में ही बने होने चाहिए। भारत शक्ति एक्सरसाइज में ड्रोन से लेकर रडार तक और फाइटर जेट से लेकर मिसाइल तक भारत की आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ते कदमों की कहानी कहेंगे।

सूत्रों के मुताबिक एक्सरसाइज में इंडियन एयरफोर्स का तेजस फाइटर जेट भी शामिल रहेगा। यह पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें उड़ान भर चुके हैं और कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। एयरफोर्स का एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर भी एक्सरसाइज का हिस्सा होगा। साथ ही एयरफोर्स का बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट एचटीटी-40 भी दिखाई देगा। इंडियन नेवी के पास मौजूद स्वदेशी प्लेटफॉर्म और वेपन सिस्टम भी एक्सरसाइज का हिस्सा होंगे। इसमें कुछ प्लेटफॉर्म पोखरण में मौजूद होंगे और कुछ दूर समंदर में मौजूद होंगे और तीनों सेनाओं के समन्वय के साथ कैसे युद्ध लड़ा जाता है यह दिखाएंगे। नेवी के लाइट वेट टॉरपीडो, मोबाइल एंटी ड्रोन सिस्टम, फायर फाइटिंग बोट भी दिखाई देगी। इंडियन आर्मी का सर्वत्र रडार सिस्टम से लेकर सारंग गन सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, ब्रह्मोस मिसाइल से लेकर ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम भी एक्सरसाइज का हिस्सा होगा। सूत्रों के मुताबिक एक्सरसाइज में रोबोटिक म्यूल रोबोटिक खच्चर भी दिखाई देगा।

बता दे कि भारत एक के बाद एक डिफेंस डील कर रहा है। रक्षा क्षेत्र में भारत की तरक्की से चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को 39,125 करोड़ रुपये का पांच सैन्य खरीद सौदों पर साइन किए। इसमें हाई पावर रेडार, नेवी के लिए ज्यादा रेंज की ब्रह्मोस मिसाइल और एयरफोर्स के मिग-29 फाइटर जेट के लिए इंजन के सौदें शामिल हैं। मिग-29 फाइटर जेट के इंजन के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 5249.72 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया है। ऐसे में तीनों सेनाओं का किस तरह से इंटीग्रेशन होता है और अलग अलग लोकेशन पर होने के बाद भी कैसे तेजी से कम्युनिकेशन होता है, यह सब ‘भारत शक्ति’ एक्सरसाइज में दिखाई देगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में आत्मनिर्भरता पर काफी फोकस किया है और तीनों सेनाओं ने भी आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से कदम बढ़ाए हैं।ये एयरो-इंजन रूस की कंपनी से ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलजी लाइसेंस लेकर बनाए जाएंगे!

नए हाई पावर रेडार एयरफोर्स के मौजूदा लॉन्ग रेंज रेडार की जगह लेंगे। इससे एयर डिफेंस क्षमता बढ़ेगी और छोटे फ्लाइंग टारगेट को डिटेक्ट करने की क्षमता भी बढ़ेगी। नेवी के लाइट वेट टॉरपीडो, मोबाइल एंटी ड्रोन सिस्टम, फायर फाइटिंग बोट भी दिखाई देगी। इंडियन आर्मी का सर्वत्र रडार सिस्टम से लेकर सारंग गन सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, ब्रह्मोस मिसाइल से लेकर ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम भी एक्सरसाइज का हिस्सा होगा। सूत्रों के मुताबिक एक्सरसाइज में रोबोटिक म्यूल रोबोटिक खच्चर भी दिखाई देगा।दो कॉन्ट्रैक्ट ब्रह्मोस एरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किए गए हैं। इसमें एक कॉन्ट्रैक्ट ब्रह्मोस मिसाइल के लिए हैं और दूसरा कॉन्ट्रैक्ट शिप से दागी जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल के लिए है, ये मिसाइल ज्यादा रेंज की हैं।

पहले से लेकर अब तक कितना बदल चुका है कश्मीर?

आज हम आपको बताएंगे कि पहले से लेकर अब तक कश्मीर कितना बदल चुका है! आर्टिकल 370 हटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पहली बार जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचे तो वहां अलग ही नजारा देखने को मिला। श्रीनगर में पीएम मोदी की रैली को लेकर जबरदस्त भीड़ जुटी थी, मोदी-मोदी के नारे घाटी में गूंज रहे थे। प्रधानमंत्री भी मानो इस मौके को हाथ से जाने देना नहीं चाहते थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को देश का मुकुट बताते हुए प्रदेश का डेवलपमेंट प्लान सबके सामने रख दिया। उन्होंने कहा कि एक विकसित जम्मू-कश्मीर विकसित भारत की प्राथमिकता है। जम्मू-कश्मीर आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है क्योंकि वह खुलकर सांस ले रहा है। ये वो नया जम्मू कश्मीर है, जिसका इंतजार हम सभी को कई दशकों से था। इस नए जम्मू कश्मीर की आंखों में भविष्य की चमक है, इस नए जम्मू कश्मीर के इरादों में चुनौतियों को पार करने का हौसला है। प्रधानमंत्री ने बड़े ही सधे शब्दों में प्रदेश के डेवलपमेंट को अपनी रैली में उठाने की कोशिश की। उनके इस अंदाज से सवाल उठने लगे कि क्या जम्मू-कश्मीर में आए बदलाव से बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में फायदा मिलेगा? क्या कश्मीर वाकई धरती का स्वर्ग बनने की ओर अग्रसर है? जानिए आर्टिकल 370 हटने के बाद प्रदेश में कितना आया बदलाव। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ही अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का फैसला लिया था। यही नहीं राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का भी निर्णय किया गया था। मोदी सरकार के इस निर्णय को अब करीब 5 साल हो चले हैं। ऐसे में हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या इस फैसले से घाटी में कुछ बदलाव आया। जानकारों की मानें तो आर्टिकल 370 हटने के बाद प्रदेश में काफी विकास नजर आ रहा। यही नहीं घाटी में एक समय पत्थरबाजी की घटनाएं बहुत हुआ करती थीं। इस पर मानो लगाम ही लग गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2018 में 1767 संगठित पत्थरबाजी की घटनाएं हुई थीं, वहीं 2023 से लेकर आज की तारीख तक शून्य हो गई हैं।

इसके अलावा आतंकवादी घटनाएं और सीमा पार से घुसपैठ के मामले अकसर ही सामने आ जाते थे। हालांकि, अब ऐसी घटनाएं भी कम ही सुनने में आती हैं। ऐसे हम ऐसे भी कह सकते हैं कि अनुच्छेद 370 के बाद सूबे न केवल अलगाववाद और पत्थरबाजी का खात्मा हुआ आतंकी संगठनों के भी पैर उखड़ गए। आर्टिकल 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने आतंकी घटनाओं के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई। टेरर नेटवर्क नष्ट किए, जिससे इसमें बड़ी गिरावट आई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 से 2022 के बीच आतंकी गतिविधियों में 45.2 फीसदी की कमी देखने मिली। इसके साथ ही विदेशी घुसपैठ में भी कमी आ गई। 2018 में 143 मामले सामने आए थे जो 2022 में घटकर 14 ही रह गए।

आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में डेवलपमेंट का ही जिक्र सामने आ रहा। विकास की मानो नई इबारत लिखी जा रही। चाहे श्रीनगर लाल चौक हो जिस पर कभी अलगाववादियों का कब्जा रहता था। अब वहां बिल्कुल शांति नजर आती है। पर्यटकों के घाटी में पहुंचने का आंकड़ा काफी सुधर गया है। इसके अलावा फिल्मों की शूटिंग से लेकर झीलों में पर्यटकों के घूमने-फिरने की तस्वीरें लगातार घाटी का हाल बयां करने के लिए काफी हैं। इसके लिए राज्य में कई तरह की विकास योजनाएं शुरू की गई हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को कश्मीर दौरे के दौरान राज्य को कई सौगातें दीं। यही नहीं श्रीनगर रैली में उन्होंने दो टूक कहा कि जम्मू कश्मीर केवल एक क्षेत्र नहीं है। जम्मू कश्मीर भारत का मस्तक है और ऊंचा उठा मस्तक ही विकास और सम्मान का प्रतीक होता है। इसलिए विकसित जम्मू कश्मीर, विकसित भारत की प्राथमिकता है। विकसित जम्मू-कश्मीर के निर्माण का रास्ता पर्यटन संभावनाओं और किसानों के सशक्तिकरण से निकलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सधे शब्दों में विकास का ही मुद्दा श्रीनगर दौरे में उठाया। साथ ही कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर राज्य के विकास पर फोकस नहीं करने को लेकर आड़े हाथों भी लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने रैली में राज्य के डेवलपमेंट का मुद्दा उठाया। लोगों में भी उनकी रैली को लेकर क्रेज दिखा। प्रधानमंत्री को सुनने काफी भीड़ जुटी थी। हालांकि, क्या बीजेपी को जम्मू-कश्मीर की आवाम का सहयोग आगामी लोकसभा चुनाव में मिलेगा? क्या आर्टिकल 370 हटने के बाद प्रदेश की जनता उनके और सपोर्ट में आएगी? ऐसा इसलिए क्योंकि 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर की 6 सीटों में 3 पर जीत दर्ज की थी। बाकी तीन सीटें नेशनल कॉन्फ्रेंस के कब्जे में गई थी। अब देखना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कितना फायदा मिलता है। क्या बीजेपी इस चुनाव में सबको चौंकाने जा रही।

क्या आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस दे रही है युवाओं को गारंटी?

आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस युवाओं को गारंटी दे रही है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपनी रैलियों में ‘मोदी की गारंटी’ का जिक्र करते रहे हैं। इसी बीच अब कांग्रेस ने भी आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर 5 गारंटी का ऐलान किया है। इसमें पार्टी ने युवाओं पर खास टारगेट किया है। विपक्षी पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले युवाओं के लिए एक बड़ी गारंटी की घोषणा की। जिसमें केंद्र सरकार में खाली पड़े 30 लाख पदों को भरना, 25 साल से कम उम्र के डिप्लोमा या डिग्री धारक युवाओं को सरकारी या निजी क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण देना शामिल है। इसके अलावा ‘गिग वर्कर्स’ के लिए सामाजिक सुरक्षा, पेपर लीक से मुक्ति शामिल है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी ने बांसवाड़ा में एक जनसभा में ये घोषणाएं कीं। आदिवासी बहुल बांसवाड़ा इलाके में यह जनसभा ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के तहत की गई थी। कांग्रेस ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी विस्तृत जानकारी दी। ‘युवा न्याय’ नाम के पोस्ट में पार्टी ने लिखा कि 2024 में कांग्रेस की सरकार बनते ही, देश के युवाओं को भर्ती भरोसा देकर, एक नई रोजगार क्रांति की शुरुआत होगी। आज कांग्रेस पार्टी इस देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी घोषणा कर रही है, जिसके पांच प्रमुख प्वाइंट हैं।

इसमें पहला प्वाइंट ‘भर्ती भरोसा’ है। पार्टी ने लिखा कि कांग्रेस की यह गारंटी देश के युवाओं के लिए है, जिसमें सबसे पहले हम सभी युवाओं को भर्ती भरोसा की गारंटी देते हैं। इसके तहत केंद्र सरकार में करीब 30 लाख खाली पदों को भरा जाएगा। परीक्षा के आयोजन से भर्ती होने तक की एक निश्चित समयसीमा होगी। पार्टी की गारंटी का दूसरा प्वाइंट ‘पहली नौकरी पक्की’ है। इसके अनुसार डिग्री होने के बाद भी देश का हर दूसरा युवा बेरोजगार है, क्योंकि उसके पास सही अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण नहीं है। कांग्रेस पार्टी यह गारंटी देती है कि हम एक नया ‘अप्रेंटिसशिप का अधिकार’ कानून लाकर 25 साल से कम आयु के हर डिप्लोमा या डिग्री धारी युवा को सरकारी या निजी क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण देंगे। पार्टी ने कहा कि इसके साथ ही ऐसा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी युवाओं को साल भर में एक लाख रुपये यानी 8,500 रुपये प्रति माह की सहायता दी जाएगी।

पार्टी ने गारंटी की तीसरे प्वाइंट में पेपर लीक से मुक्ति दिलाने का वादा किया है। इसके अनुसार कांग्रेस पार्टी यह गारंटी देती है कि हम नया कानून लाकर प्रश्नपत्र लीक पर रोक लगाएंगे।गांरटी के पांचवें प्वाइंट ‘युवा रोशनी’ के तहत पार्टी ने पांच हजार करोड़ रुपये की राशि से एक कोष बनाने का प्रस्ताव किया है जिसे देश के सभी जिलों में बांटा जाएगा। इसके अनुसार कांग्रेस पार्टी गारंटी देती है कि इस कोष को 40 वर्ष से कम आयु के युवाओं को अपना खुद का व्यवसाय स्टार्टअप शुरू करने के लिए दिया जाएगा।हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सारी परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से हों ताकि परीक्षार्थियों की सालों-साल की मेहनत बेकार न जाए। इसी तरह पार्टी ने ‘गिग इकोनॉमी’ में सामाजिक सुरक्षा देने का वादा किया है। इसके तहत ट्रक ड्राइवरों, मैकेनिक, बढ़ई, ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों और टैक्सी ड्राइवरों आदि असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसके अनुसार कांग्रेस पार्टी यह गारंटी देती है कि ऐसे करोड़ों युवा जो अनौपचारिक तरीके से नौकरी कर अपना और अपने परिवार का जीवन पाल रहे हैं उनके लिए ‘हम गिग इकोनॉमी में सामाजिक सुरक्षा और कामकाजी हालात में सुधार के लिए नया कानून लेकर आएंगे।’

गांरटी के पांचवें प्वाइंट ‘युवा रोशनी’ के तहत पार्टी ने पांच हजार करोड़ रुपये की राशि से एक कोष बनाने का प्रस्ताव किया है जिसे देश के सभी जिलों में बांटा जाएगा। इसके अनुसार कांग्रेस पार्टी गारंटी देती है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी ने बांसवाड़ा में एक जनसभा में ये घोषणाएं कीं। आदिवासी बहुल बांसवाड़ा इलाके में यह जनसभा ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के तहत की गई थी। कांग्रेस ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी विस्तृत जानकारी दी। ‘युवा न्याय’ नाम के पोस्ट में पार्टी ने लिखा कि 2024 में कांग्रेस की सरकार बनते ही, देश के युवाओं को भर्ती भरोसा देकर, एक नई रोजगार क्रांति की शुरुआत होगी।कि इस कोष को 40 वर्ष से कम आयु के युवाओं को अपना खुद का व्यवसाय स्टार्टअप शुरू करने के लिए दिया जाएगा।

क्या भारतीयों के साथ गलत कर रहा है रूस?

रूस वर्तमान में भारतीयों के साथ गलत कर रहा है! नेपाल के बाद अब यूक्रेन की जंग में फंसे भारतीय नागरिकों ने अपनी खौफनाक कहानी बयान करना तेज कर दिया है और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। ताजा मामले में 7 से ज्‍यादा भारतीयों के दल ने दो वीडियो जारी किया है और बताया किस तरह से उन्‍हें प्रताड़‍ित किया जा रहा है और जंग के मैदान में जबरन भेजा जा रहा है। इन भारतीयों की पहचान गगनदीप सिंह, लवप्रीत सिंह, नरैन सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, हर्ष कुमार और अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। इनमें से 5 भारतीय पंजाब और दो अन्‍य हरियाणा के हैं। इन लोगों ने बताया कि वे टूरिस्‍ट वीजा पर रूस गए थे और रूसी पुलिस ने 10 साल जेल भेजने की धमकी देकर उन्‍हें ‘हेल्‍पर’ के रूप में यूक्रेन की जंग में भेज दिया। इनमें से एक भारतीय ने कहा, ‘हमें यह बताया गया कि हमको केवल हेल्‍पर के रूप में काम करना होगा। लेकिन उन्‍होंने हमें हथियारों और गोला बारूद की ट्रेनिंग के लिए शामिल कर लिया। अब हमें यूक्रेन भेजने की तैयारी है। रूसी सैनिक हमें भूखा रख रहे हैं और हमारे फोन को भी छीन लिया है।’ यह वीडियो 3 मार्च का बताया जा रहा है। रूस में फंसे भारतीय नागरिक ने बताया कि कई बार गुहार लगाई है लेकिन रूसी सेना उसे अनसुना कर दे रही है। उन्‍होंने कहा, ‘रूसी सेना ने हमें बताया कि हम एक साल के बाद ही जा सकते हैं। वे हमसे कह रहे हैं कि मदद करो ताकि रूस युद्ध जीत सके। हम नहीं जानते हैं कि उन्‍हें कैसे मदद करना है। अगर हम नहीं करेंगे तो हम जिंदा नहीं रहेंगे।’

वहीं एक अन्‍य भारतीय ने कहा कि हमने अपने दर्द को पहले भी बताया था। रूस हो या यूक्रेन यहां पर कई भारतीय हैं जो फंसे हुए हैं। हम भारतीय दूतावास और भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे हमारी मदद करें। यह हमारा अंतिम वीडियो हो सकता है। रूसी सेना हमें यूक्रेन में युद्ध क्षेत्र में भेजने जा रही है। इससे पहले भी कई भारतीयों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 भारतीयों को पिछले एक साल में रूसी सेना में शामिल किया गया है। इस बीच भारतीय व‍िदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनके कड़े व‍िरोध के भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी दोस्‍ती है। भारत ने यूक्रेन जंग में फंसे रूस को हथियारों या सैनिक भेजकर कोई मदद नहीं की है लेकिन रेकॉर्ड तेल खरीदकर काफी राहत दी है। रूस इस समय अमेरिकी प्रतिबंधों की मार से जूझ रहा है। भारतीयों से पहले नेपाल के गोरखा सैनिकों ने भी अपने साथ अमानवीय व्‍यवहार का आरोप लगाया था। बताया जा रहा है कि नेपाल के हजारों गोरखा रूसी सेना में लालच देकर भर्ती किए गए हैं और उन्‍हें युद्ध के मोर्चे पर भेजा गया है। इनमें से कई मारे भी गए हैं। कई भारतीयों को रूसी सेना से हटा दिया गया है। भारत ने जोर देकर कहा कि ‘करीब 20 भारतीयों’ ने भारतीय दूतावास से मदद मांगी है। उन्‍होंने भारत सरकार से वापस लाने में मदद मांगी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा है कि भारत सरकार रूस के साथ इस पूरे मामले को लेकर संपर्क में है। भारतीय नागरिकों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद अब रूस की पुतिन सरकार चौतरफा घिर गई है।

भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी दोस्‍ती है। भारत ने यूक्रेन जंग में फंसे रूस को हथियारों या सैनिक भेजकर कोई मदद नहीं की है लेकिन रेकॉर्ड तेल खरीदकर काफी राहत दी है। रूसी सैनिक हमें भूखा रख रहे हैं और हमारे फोन को भी छीन लिया है।’ यह वीडियो 3 मार्च का बताया जा रहा है। रूस में फंसे भारतीय नागरिक ने बताया कि कई बार गुहार लगाई है लेकिन रूसी सेना उसे अनसुना कर दे रही है। उन्‍होंने कहा, ‘रूसी सेना ने हमें बताया कि हम एक साल के बाद ही जा सकते हैं। वे हमसे कह रहे हैं कि मदद करो ताकि रूस युद्ध जीत सके।रूस इस समय अमेरिकी प्रतिबंधों की मार से जूझ रहा है। भारतीयों से पहले नेपाल के गोरखा सैनिकों ने भी अपने साथ अमानवीय व्‍यवहार का आरोप लगाया था। बताया जा रहा है कि नेपाल के हजारों गोरखा रूसी सेना में लालच देकर भर्ती किए गए हैं और उन्‍हें युद्ध के मोर्चे पर भेजा गया है। इनमें से कई मारे भी गए हैं।

क्या रूस यूक्रेन वार में हो रही है भारतीयों की तस्करी?

वर्तमान में रूस यूक्रेन वार में भारतीयों की तस्करी हो रही है! रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर भारतीयों की अवैध तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने देश में भारतीयों की अवैध तस्करी में शामिल एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है और एक साथ देश के सात शहरों में दस से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई। ये छापे इस तस्करी के कारोबार में शामिल एजेंटों और कंपनियों पर किए गए थे। जिन शहरों में छापेमारी हुई उनमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, अंबाला, चंडीगढ़ और मदुरै शामिल हैं। सीबीआई जांच में दुबई के रहने वाले फैसल खान नाम के एक शख्स की संलिप्तता का पता चला है। बताया जा रहा कि आरोपी को बाबा के नाम से भी जाना जाता है। फैसल खान बाबा व्लॉग्स नाम से एक यूट्यूब चैनल चलाता है। ये एक्शन तब हो रहा जब यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए बहला-फुसलाकर ले जाए गए हैदराबाद के एक व्यक्ति की रूस में दुखद मौत हो गई। इसके अतिरिक्त, पंजाब और हरियाणा के सात लोग जो शुरू में पर्यटकों के रूप में रूस गए थे, उन्हें धोखे से यूक्रेन जंग में हिस्सा लेने के लिए भेज दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद के 30 वर्षीय युवक मोहम्मद अफसान को धोखे से रूस-यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में भेजा गया, जिसमें उसकी मौत हो गई। इस शख्स के मारे जाने के एक दिन बाद ही सीबीआई ने जांच तेज कर दिया है। जिसमें वीजा एजेंट्स के छापेमारी की गई। बताया जा रहा कि मोहम्मद अफसान को कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल होने के लिए धोखे से भेजा गया और फिर यूक्रेन के साथ वॉर जोन भेज दिया गया। यह सूचना सामने आने के एक दिन बाद कि यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग में धोखे से हैदराबाद गए एक व्यक्ति की मौत हो गई। सीबीआई ने गुरुवार को एक मामला दर्ज किया। इसी के बाद देश में भारतीयों की तस्करी में शामिल एजेंटों और फर्मों पर सात शहरों में छापेमारी शुरू कर दी। ऐसा माना जाता है कि लगभग दो दर्जन भारतीयों को ज्यादा सैलरी वाली नौकरी पाने के बहाने धोखा देकर रूस में युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किया गया था। उधर, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध क्षेत्र में फंसे 20 भारतीयों के एक ग्रुप ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। इस संबंध मे एक मैसेज भेजा गया है।

भारत के हैदराबाद शहर के रहने वाले 30 साल के असफान की रूस-यूक्रेन युद्ध में मौत हो गई ह। असफान को सिक्योरिटी हेल्पर की नौकरी बताते हुए रूसी सेना में शामिल किया गया था लेकिन धोखा देते हुए उसे यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में भेज दिया गया। यूक्रेन के एक हमले में उसकी मौत हो गई। मोहम्मद असफान के हाल हीं मे ये बताया था कि एजेंट झूठ बोलकर उसको ले गया है और रूसी सेना में भर्ती करा दिया है। परिवार ने हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी से मदद की अपील भी की थी। ओवैसी ने इसके बाद मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर असफान के बारे में जानकारी चाही तो अधिकारियों ने युद्ध क्षेत्र में उसकी मौत की पुष्टि की।

रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी भारतीय की ये पहली मौत नहीं है। फरवरी के आखिर में रूस में एक भारतीय की मौत हुई थी। 23 साल का ये युवक गुजरात का रहने वाला था और सिक्योरिटी हेल्पर के तौर रूसी सेना में शामिल हुआ था। हमले से बचकर निकले एक अन्य भारतीय कर्मचारी ने बताया कि 21 फरवरी को यूक्रेनी हवाई हमले में रूसी सेना द्वारा सुरक्षा सहायक के रूप में नियुक्त किया गया गुजरात का 23 वर्षीय व्यक्ति मारा गया। उसको रूस-यूक्रेन सीमा पर डोनेट्स्क क्षेत्र में तैनात किया गया था। उसको फायरिंग करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी, उसी समय मिसाइल से हमला हुआ। इस हमले में युवक की जान चली गई।

विदेश मंत्रालय ने भी स्वीकार किया कि कुछ युवाओं को रूसी सेना में शामिल किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने इस बात को स्वीकारा था कि कुछ भारतीयों को कुछ एजेंटों के जरिए रूसी सेना में भर्ती किया गया। इनको बाद में रूस-यूक्रेन युद्ध में उतार दिया गया। ये डील के खिलाफ था क्योंकि भारतीय नागरिकों को रूसी सेना के साथ सहायक नौकरियों के लिए बुलाया गया था। रूस में जाकर फंसे भारतीय युवाओं के परिवार लगातार भारत सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं। इन परिवारों की केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से मांग है कि रूस में फंसे को वापस लाया जाए और धोखे से इनको भेजने वाले एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई हो। परिवारों के मुताबिक इन एजेंटों ने युवाओं सेना के सहायक के रूप में नौकरी मिलने की बात की थी, जिसका लड़ाई से कोई संबंध नहीं होगा। रूस पहुंचने के बाद इनको सेना में शामिल कर लड़ने के लिए भेजा जा रहा है।

क्या वर्तमान में यूको बैंक ने भी कर दिया है घोटाला ?

वर्तमान में यूको बैंक में भी एक घोटाला कर दिया है! केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई ने यूको बैंक में तत्काल भुगतान प्रणाली आईएमपीएस से संबंधित 820 करोड़ रुपये के घोटाले के सिलसिले में राजस्थान और महाराष्ट्र के सात शहरों में 67 स्थानों पर तलाशी ली है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बुधवार को शुरू हुई और बृहस्पतिवार तक जारी तलाशी यूको बैंक में हुए बड़े घोटाले से संबंधित है, जो पिछले साल 10 नवंबर से 13 नवंबर के बीच हुए थे। इसके तहत 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2,874 शाखाओं में 41,296 खातों में 8,53,049 लेन-देन के माध्यम से घोटाला हुआ। सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि सात निजी बैंकों के लगभग 14,600 खाताधारकों से शुरू किए गए आईएमपीएस आवक लेन-देन को यूको बैंक के 41,000 से अधिक खाताधारकों के खातों में गलत तरीके से पोस्ट किया गया था। इसके परिणामस्वरूप 820 करोड़ रुपये मूल बैंकों से वास्तविक डेबिट किए बिना यूको बैंक खातों में जमा किए गए थे।लेन-देन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक से शुरू किए गए थे। प्राथमिकी यूको बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई।

सीबीआई ने मंगलुरु स्थित एलकोड टेक्नोलॉजीज के सपोर्ट इंजीनियर अभिषेक श्रीवास्तव और सुप्रिया मलिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में कहा गया है कि कंपनी को आईएमपीएस चैनल सहित बैंक के लिए मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन विकसित करने और बनाए रखने के लिए काम पर रखा गया था।प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान दोनों मौजूद थे और लॉग रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि दोनों में से किसी ने आठ नवंबर को शाम 7 बजे बैंक से मंजूरी के बिना आईएमपीएस लेन-देन का पोर्ट नंबर बदल दिया।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि सिस्टम में किए गए कथित बदलावों के कारण कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर ने लाभार्थी के खाते में पैसा जमा कर दिया, लेकिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया एनपीसीआई के माध्यम से प्रेषक बैंक को लेन-देन असफल होने का संदेश भेजा। 820 करोड़ रुपये मूल बैंकों से वास्तविक डेबिट किए बिना यूको बैंक खातों में जमा किए गए थे।लेन-देन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक से शुरू किए गए थे। प्राथमिकी यूको बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। में कहा गया है कि इसके कारण, राशि दोनों बैंकों यानी यूको और मूल बैंक ग्राहकों के खातों में जमा हो गई।बैंक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि कई खाताधारकों ने दूसरों के साथ सहयोग किया और मिलीभगत कर इन अवैध लेन-देन को अंजाम दिया।

अधिकारियों ने कहा कि बुधवार को राजस्थान और महाराष्ट्र में तलाशी उन लोगों पर केंद्रित थी, जिन्होंने पैसे प्राप्त किए और बैंक को वापस करने के बजाय इसे निकाल लिया। यह तलाशी का दूसरा दौर है।राजस्थान में, 232 शाखाओं में 7,71,752 लेनदेन के माध्यम से 766 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल थी। महाराष्ट्र में 11 करोड़ रुपये संदिग्ध लेन-देन के घेरे में आए।820 करोड़ रुपये मूल बैंकों से वास्तविक डेबिट किए बिना यूको बैंक खातों में जमा किए गए थे।लेन-देन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक से शुरू किए गए थे। प्राथमिकी यूको बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। बैंक ने कहा कि बैंक ने 664 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, लेकिन 156 रुपये की वसूली अभी बाकी है।प्रवक्ता ने कहा कि इससे पहले दिसंबर 2023 में कोलकाता और मंगलुरु में निजी व्यक्तियों और यूको बैंक के अधिकारियों से जुड़े 13 स्थानों पर तलाशी ली गई थी।

जोधपुर, जयपुर, जालौर, नागौर, बाड़मेर, फलोदी राजस्थान और पुणे महाराष्ट्र सहित कई शहरों में कार्रवाई में 40 टीम में राजस्थान पुलिस के 120 पुलिसकर्मी समेत सहित 330 से अधिक पुलिसकर्मी और 80 स्वतंत्र गवाह शामिल थे। 820 करोड़ रुपये मूल बैंकों से वास्तविक डेबिट किए बिना यूको बैंक खातों में जमा किए गए थे।लेन-देन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, फिनकेयर स्मॉल फाइनेंस बैंक, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक से शुरू किए गए थे। प्राथमिकी यूको बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। अभियानों के दौरान, यूको बैंक और आईडीएफसी से संबंधित लगभग 130 आपत्तिजनक दस्तावेज के साथ-साथ 43 डिजिटल डिवाइस 40 मोबाइल फोन, दो हार्ड डिस्क और एक इंटरनेट डोंगल सहित को फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए जब्त कर लिया गया। इसके अतिरिक्त, 30 संदिग्धों से भी पूछताछ की गई।

राहुल गांधी कहां से लड़ेंगे चुनाव वायानाड या अमेठी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि राहुल गांधी वायनाड या अमेठी में से कहां से चुनाव लड़ेंगे! कांग्रेस सांसद और पार्टी के स्टार कैंपेनर राहुल गांधी को लेकर इन दिनों चर्चा का बाजार गरमाया हुआ है। उनके लोकसभा चुनाव में वायनाड से उतरने की संभावना है। दरअसल, कांग्रेस चुनाव समिति की गुरुवार को हुई बैठक के दौरान केरल के सभी 15 मौजूदा सांसदों के लोकसभा चुनावी मैदान में उतरने को मंजूरी दे दी गई। राहुल गांधी केरल के वायनाड से सांसद हैं। इस प्रकार एक बार फिर उनके वायनाड से ही चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, केरल में सत्तारूढ़ एलडीएफ की ओर से भी वायनाड में उम्मीदवार दिया गया है। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में 60 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर विचार किया गया। पार्टी ने 40 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम को मंजूरी दे दी। दावा किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मणिपुर घाटी से पूर्व सीएम की इबोबी सिंह और तिरुवनंतपुरम से शशि थरूर के चुनावी मैदान में उतरेंगे। इनके नामों को मंजूरी दे दी गई है। ऐसे में राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी मुकाबला क्या अमेठी में दिखेगा? इस पर सस्पेंस बरकरार है। इसके पीछे के कारण कई बताए जा रहे हैं। दरअसल, भाजपा ने यहां से स्मृति ईरानी को उम्मीदवार बना दिया है। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार पर हर किसी की नजर है। केरल के सांसदों के नामों को एआईसीसी स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के आधार पर मंजूरी दे दी गई थी। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी प्रोटोकॉल के अनुसार, अंतिम फैसला राहुल पर छोड़ दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल अलाप्पुझा सीट से संभावित उम्मीदवार हैं, जिसे कांग्रेस 2019 में हार गई थी। इसे सीईसी की ओर से चर्चा के लिए नहीं लिया गया था। संकेत हैं कि कांग्रेस त्रिपुरा में सीपीएम के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी। गठबंधन के तहत त्रिपुरा ईस्ट सीट कांग्रेस को मिलने की उम्मीद है। इन तमाम नामों पर विचार और कांग्रेस की ओर से लिए गए निर्णयों के बीच राहुल गांधी पर चर्चा सिमट रही है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन हुआ है। समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग फार्मूला भी तय हो चुका है। इसके तहत कांग्रेस 17 और सपा 63 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। कांग्रेस को मिली 17 सीटों में अमेठी, रायबरेली जैसी पार्टी की परंपरागत सीटें शामिल है। वहीं, प्रयागराज और वाराणसी जैसी सीट भी कांग्रेस के हिस्से में आई है। हालांकि, इसमें सबसे महत्वपूर्ण अमेठी सीट है। अमेठी को गांधी परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 में अमेठी सीट से भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को करारी मात दी थी। अपनी स्थिति को कमजोर मानकर राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट से भी नामांकन किया। वहां से चुनाव जीतकर वे लोकसभा तक पहुंचे।हालांकि, अमेठी सीट पर यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान समीकरण बदलतर दिखा था। समाजवादी पार्टी यहां टक्कर में दिखाई दी। लेकिन, राज्यसभा चुनाव की वोटिंग में मुलायम सिंह यादव के करीबी और जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी प्रजापति भाजपा के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में वोटिंग करती नजर आई थीं। ऐसे में अमेठी के समीकरण बदलाव होता एक बार फिर दिख रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस किसी तरह से खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहती है। इसलिए, अमेठी से राहुल गांधी को चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा लगातार हो रही है।

दरअसल, एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे बड़े चेहरे नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वहीं, कांग्रेस पार्टी अभी उत्तर प्रदेश में मिली 17 सीटों के उम्मीदवारों के नाम तय करने में जुटी है। माना जा रहा है कि यूपी के सीटों पर नाम फाइनल किए जाने के साथ ही अमेठी सीट के उम्मीदवार पर तस्वीर साफ हो पाएगी। देखना यह दिलचस्प होगा कि एक बार फिर स्मृति ईरानी और राहुल गांधी का चुनावी मुकाबला होता है, या फिर कांग्रेस किसी अन्य उम्मीदवार पर दांव खेलती नजर आती है। राहुल गांधी के यूपी की अमेठी के चुनावी मैदान से उतरने या न उतरने की रणनीति पर हर किसी की नजर रहने वाली है।लोकसभा चुनाव 2019 के बाद राहुल गांधी इक्का- दुक्का मौके पर ही अमेठी जाते दिखे हैं। वहीं, स्मृति ईरानी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बावजूद लगातार अमेठी के दौरे पर रही हैं। इसके बाद भी स्मृति पर कुछ वर्ग की नाराजगी दिखी है। पिछले दिनों स्मृति ने अमेठी में अपना घर बनवाया। वहां पर गृह प्रवेश किया। इससे संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश की है। दूसरी तरफ, राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के तहत अमेठी पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र से अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया।

अमेठी लोकसभा सीट पर राहुल गांधी के सामने स्मृति ईरानी की चुनौती है। भाजपा ने अपना उम्मीदवार फाइनल कर लिया है। स्मृति ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को पटखनी दी थी। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी और स्मृति ईरानी का मुकाबला हुआ था। उस मुकाबले को राहुल गांधी ने आसानी से अपने नाम किया था। उसके बाद स्मृति ईरानी ने अमेठी को एक प्रकार से अपना दूसरा घर बनाया। वह लगातार लोगों के बीच जाती रहीं। सांसद रहते हुए भी राहुल गांधी पर अमेठी पर उतना ध्यान नहीं दे पाए, जितना चुनाव हारने के बाद स्मृति ईरानी ने दिया। परिणाम 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी के पक्ष में आया। लोकसभा चुनाव 2024 तक स्मृति ईरानी की पकड़ क्षेत्र में मजबूत हुई है। भले ही क्षेत्र के लोगों की नाराजगी की खबरें सामने आती रही हैं।स्मृति ने ऐसे क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क साधकर उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास शुरू कर दिया है। गांव- गांव घूम रही हैं। वहीं, राहुल गांधी चुनाव के ऐन पहले तक न्याय यात्रा में व्यस्त हैं। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की योजनाएं भी अमेठी में जमीन पर उतरती दिखी हैं। सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश लगातार भाजपा की ओर से हो रही है। इसका असर चुनाव परिणाम पर भी दिखना तय है। ऐसे में राहुल गांधी को संशय वाली सीट से उम्मीदवार बनाने से कांग्रेस बच सकती है। हालांकि, यूपी के उम्मीदवारों के नाम फाइनल होने पर ही इस पर वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

क्या अब भारत में ही बना करेंगे अत्यधिक फाइटर जेट?

अब अत्यधिक फाइटर जेट भारत में ही बना करेंगे!भारत अब अमेरिका, रूस और चीन वाले टॉप क्लब में शामिल होने जा रहा है। मोदी सरकार ने वायु सेना के लिए अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास और प्रोटोटाइप प्रॉडक्शन को मंजूरी दे दी है। यह कदम घरेलू मॉन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा अवसर खोलेगा और सशस्त्र बलों को युद्ध में बढ़त देगा। सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति ने गुरुवार को अनुमानित 15 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिससे परियोजना डेवलपमेंट स्टेज और प्रोटोटाइप प्रॉडक्शन से आगे बढ़ गई। भारत का 2028 तक एडवांस्ड मल्टिरोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट को उड़ाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसी एरोनॉटिकल डिवेलपमेंट एजेंसी अडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तैयार कर रही है। यह फाइटर जेट पांचवीं जनरेशन के और स्वदेशी होंगे। ये डबल इंजन के होंगे। इसका डिजाइन ऐसा होगा कि दुश्मन की रेडार इसे पकड़ नहीं पाएगी या फिर जब यह दुश्मन के एकदम करीब पहुंचेगा तब उसकी रेडार इसे पकड़ पाएगी। तब तक एयरक्राफ्ट के पास दुश्मन को निशाना बनाने के लिए काफी वक्त मिल जाएगा। इसका डिजाइन तैयार हो चुका है। प्रोजेक्ट के अप्रूवल का इंतजार था। अब जल्द ही इसके डिवेलपमेंट पर काम शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है। दो साल के भीतर यह बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है और यह पहली उड़ान उसके एक साल बाद भर सकेगा।

दरअसरल, नए जेट में नवीनतम मिलिट्री टेक्नॉलजी होंगी, जिनमें स्टील्थ फीचर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई इंटेग्रेशन, लंबी दूरी के लक्ष्य भेदने की क्षमताएं और अनमैन्ड सिस्टम्स के साथ संयुक्त रूप से संचालित करने की क्षमता शामिल है। योजना के अनुसार, चार से पांच प्रोटोटाइप विमानों का उत्पादन किया जाएगा और फिर सीरियल प्रॉडक्शन से पहले उनका परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। जेट के लिए अंतिम ऑर्डर लाखों करोड़ रुपये की सीमा में होने की उम्मीद है। भारत ने निजी क्षेत्र की काफी भागीदारी के साथ अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का उत्पादन करने का फैसला किया है। योजना के अनुसार, जेट का अंतिम उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड , वैमानिकी विकास प्राधिकरण और एक निजी क्षेत्र की भागीदारी से मिलकर एक विशेष प्रयोजन वाहन द्वारा किया जाएगा। तकनीकी क्षमताओं पर गहराई से विचार करने वाली चयन प्रक्रिया के बाद चुनी गई प्राइवेट कंपनी के पास अत्याधुनिक एरोनॉटिकल सिस्टम्स बनाने में सक्षम एक चुनिंदा ग्लोबल लीग में शामिल होने का अवसर होगा।

पश्चिम के देशों में डिफेंस की सारी कंपनियां प्राइवेट सेक्टर की ही हैं। उन्हें जरूरत पड़ने पर सरकार की फंडिंग वाले लैब्स और इंस्टिट्यूशंस से मदद मिलती है। मेगा प्रॉजेक्ट्स के लिए जिस एसपीवी मॉडल की कल्पना की गई है, उससे एक विशालकाय भारतीय कंपनी खड़ा होने की उम्मीद है। हालांकि, इस पर बड़ी जिम्मेदारी होगी क्योंकि विमान तीन दशकों से अधिक समय तक सेवा में रहेगा। इसके लिए कंपनी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम बनाने की जरूरत पड़ेगी। एचएएल की प्लानिंग है कि कोई प्राइवेट कंपनी भविष्य में AMCA का उत्पादन करना चाहेगी तो वह उसे नासिक में अपनी मौजूदा सुविधाएं ऑफर करेगा। वर्तमान में वायु सेना के चल रहे ऑर्डर के लिए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट Mk1A के निर्माण के लिए उसी सुविधा को उन्नत किया जा रहा है।

AMCA प्रॉजेक्ट भारत की स्वदेशी लड़ाकू जेट इंजन कार्यक्रम की महत्वाकांक्षाओं से भी जुड़ी है। 40 AMCA जेट के शुरुआती बैच के साथ-साथ प्रोटोटाइप को GE 414 इंजन द्वारा संचालित किया जाएगा, लेकिन वर्तमान में 110 kn थ्रस्ट देने में सक्षम अधिक शक्तिशाली इंजन को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए एक विदेशी भागीदार का चयन करने पर काम चल रहा है। ध्यान रहे कि अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ने पांचवीं जनरेशन के एयरक्राफ्ट बनाए हैं। समय के हिसाब से तकनीक बदलती है और इस तरह अलग-अलग जनरेशन के एयरक्राफ्ट बनते हैं। इसका डिजाइन तैयार हो चुका है। प्रोजेक्ट के अप्रूवल का इंतजार था। अब जल्द ही इसके डिवेलपमेंट पर काम शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है। दो साल के भीतर यह बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है और यह पहली उड़ान उसके एक साल बाद भर सकेगा।1970-80 के बाद जो फाइटर एयरक्राफ्ट बने उन्हें फोर्थ जनरेशन यानी चौथी पीढ़ी कहा गया। साल 2,000 के शुरू में जो एयरक्राफ्ट बने वह पांचवीं जनरेशन के एयरक्राफ्ट हैं। अगर चौथी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट में कुछ नई तकनीक डाल उसे मॉडिफाई कर सकते हैं तो यह 4.5 जनरेशन कहलाएगा। अभी वायुसेना के पास फोर्थ जनरेशन और 4.5 जनरेशन के एयरक्राफ्ट हैं।

जानिए ऑक्‍सफोर्ड हाईस्‍कूल में हुई गोलीबारी की डरा देने वाली कहानी!

आज हम आपको ऑक्सफोर्ड हाईस्कूल में हुई गोलीबारी की डरा देने वाली कहानी सुनाने जा रही हैं! साल था 2021। तारीख थी 30 नवंबर। मिशगन का ऑक्‍सफोर्ड हाईस्‍कूल गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज गया। इसने हर किसी को हैरान कर दिया। 15 साल के एक लड़के ने अपने ही क्‍लास के चार बच्‍चों की हत्‍या कर दी। जिस बंदूक से लड़के ने इस वारदात को अंजाम दिया, उसे वह 4 दिन पहले क्रिसमस गिफ्ट में मिली थी। किसी और ने नहीं, बल्कि उसके अपने माता-पिता ने यह गन उसे खरीदकर दी थी। दो साल पहले यानी 2022 में ही लड़का इस अपराध का दोषी ठहराया जा चुका है। लेकिन, अब उसकी मां पर भी मुकदमा चलने जा रहा है। अभियाजकों ने मामले में माता-पिता को भी आरोपी पाया है। यह मिशिगन में अब तक का बिल्‍कुल अनूठा केस बताया जा रहा है। क्‍या है यह पूरा मामला, इसमें कौन से किरदार हैं, माता-पिता पर कौन से आरोप लगे हैं, मां पर हत्‍या का मुकदमा क्‍यों चलने जा रहा है? इस कहानी में आगे आपको ये सभी जवाब मिलेंगे। खूनी वारदात की इस कहानी की स्क्रिप्‍ट 30 नवंबर 2021 के चार दिन पहले लिखनी शुरू हो गई थी। तब एथन क्रम्बले अपने पिता के साथ एक गन शॉप पर गया था। यहां जेम्स क्रम्बले ने उसे 9 एमएम हैंडगन खरीदकर दी थी। फिर चार दिन बाद इसी पिस्‍तौल से एथन ने अपने ही क्‍लास के चार बच्‍चों की हत्‍या कर दी थी। यह वारदात ऑक्‍सफोर्ड हाईस्‍कूल में घटी थी। वारदात के समय ए‍थन 15 साल का था। क्रिसमस गिफ्ट के तौर पर उसे पैरेंट्स ने पिस्‍तौल दिलाई थी।

एथन क्रम्बले को 2022 में दो दर्जन मामलों में दोषी ठहराया गया। इसमें चार सहपाठियों की हत्‍या का मामला भी शामिल था। पिछले महीने उसे पैरोल के बिना जेल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 2021 के अंत में चार हत्याओं के आरोप के बाद एथन की मां जेनिफर क्रम्बले और उनके पति जेम्स क्रम्बले पर अलग से मुकदमा चलाया जा रहा था। वे तब से जेल में हैं। जेम्स क्रम्बले का मुकदमा 5 मार्च को शुरू होगा। वहीं, जेनिफर का ट्रायल शुरू हो गया है। मां के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं। अभियोजकों का आरोप है कि जेनिफर क्रम्‍बले घर में बंदूक को सुरक्षित रखने में नाकाम रही। सिर्फ इतना ही नहीं, उसे पता था कि एथन परेशान था। इस बारे में उसे चेतावनी भी दी गई। लेकिन, जेनिफर ने समय रहते ऐक्‍शन नहीं लिया।

वहीं, क्रम्‍बले दंपती के वकीलों ने अदालती दस्तावेजों में कहा है कि उनके पास यह जानने का कोई तरीका नहीं था कि उनका बेटा गोलीबारी को अंजाम देने वाला था। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा है कि माता-पिता पर यह मुकदमा अपनी तरह का शायद पहला है। अभियोजकों का आरोप है कि गोलीबारी से चार दिन पहले एथन क्रम्बले अपने पिता के साथ एक बंदूक की दुकान पर गया। दुकान में जेम्स क्रम्बले ने उसे 9 एमएम की हैंडगन खरीदकर दी। मिशिगन कानून 18 साल से कम उम्र के लोगों को गोली-बंदूक खरीदने या रखने पर प्रतिबंध लगाता है। कुछ खास परिस्थितियों में ही इसकी अनुमति है। मसलन, शिकार करने के लिए। हालांकि, इसके लिए लाइसेंस की जरूरत होती है और किसी बालिग के पर्यवेक्षण में वे ऐसा कर सकते हैं।

एथन ने सोशल मीडिया पर बंदूक की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘आज मुझे अपनी ‘ब्‍यूटी’ मिली है।’ इसके साथ उसने हार्ट वाले इमोजी भी जोड़े थे। अगले दिन उसकी मां ने पोस्ट किया था कि वे दोनों बेटे के नए क्रिसमस गिफ्ट की रेंज जांच रहे हैं। स्कूल में गोलीबारी से एक दिन पहले एक टीचर ने एथन क्रम्बले को गोलियों की तलाश में अपने स्मार्टफोन का इस्‍तेमाल करते पकड़ा था। टीचर ने स्कूल के अधिकारियों को सतर्क कर दिया था। अधिकारियों ने एथन की मां को इस बारे में मैसेज भेजे थे। हालांकि, जेनिफर ने इनका जवाब नहीं दिया। बाद में जेनिफर ने अपने बेटे को संदेश भेजा, ‘हेलो, मैं तुमसे नाराज नहीं हूं। तुम्हें सीखना होगा कि तुम पकड़े नहीं जाओ।’

गोलीबारी की सुबह एक टीचर ने एथन क्रम्बले के बनाए चित्र देखे थे। इसमें उसने लिखा था – ‘हर जगह खून’, ‘मेरा जीवन बेकार है’, और ‘ख्‍याल आते रहेंगे- मेरी मदद करो’। इनके आगे उसने हैंडगन, गोली और खून बहता हुआ चित्र बनाया था। एथन ने स्कूल एडवाइजर्स को बताया था कि वे चित्र एक वीडियो गेम के लिए थे जिन्‍हें वह डिजाइन कर रहा था। अभियोजकों ने कहा है कि शूटिंग की सुबह क्रम्बले दंपती को स्कूल में बुलाया गया था। दोनों को बताया गया था कि एथन को तुरंत परामर्श की आवश्यकता है। उन्हें बेटे को घर ले जाने की जरूरत है। माता-पिता ने बेटे को घर ले जाने का विरोध किया। उसके बैग की तलाशी भी नहीं ली। न ही उससे बंदूक के बारे में पूछा। इसके बाद एथन को क्‍लास में लौटा दिया गया। बाद में वह बंदूक लेकर बाथरूम से बाहर चला गया। फिर गोलीबारी शुरू कर दी। अभियोजकों को लगता है कि इस त्रासदी को रोका जा सकता था। बशर्ते माता-पिता ने बंदूक हासिल करने में केंद्रीय भूमिका नहीं निभाई होती।

क्या वर्तमान में बुलंदियों को छू रहा है AI?

AI वर्तमान में बुलंदियों को छूता जा रहा है! कहते हैं तकनीक यानी टेक्नोलॉजी आपके लिए उपयोगी भी हो सकती है और खतरनाक भी। AI यानी आर्टिफिशियल इंटिलिजेंस, इस नई तकनीक से क्या नहीं हो सकता। दीवार पर टंगी तस्वीर बोलने लगती है, किसी व्यक्ति के आवाज की हूबहू नकल कर सकती है, आतंकवाद, अपराध और अन्य खतरों से बचा सकती है आदि आदि। हालांकि एआई के अपने नुकसान भी हैं। लेकिन, क्या आप कल्पना भी कर सकते हैं कि AI किसी मरे हुए इंसान को जिंदा भी कर सकता है! पढ़ने में यह भले अजीब लगे लेकिन ऐसा मुमकिन हुआ है। एआई का यह गजब इस्तेमाल किया खुद पुलिस ने। जी हां दिल्ली पुलिस ने इस एडवांस तकनीक का उपयोग कर एक मर्डर की मिस्ट्री सुलझा दी और कातिलों को भी पकड़ लिया। क्या है पूरी कहानी आइए जानते हैं। पूरे घटना की शुरुआत दिल्ली के उत्तरी इलाके से हुई। 10 जनवरी को गीता फ्लाईओवर के नीचे एक युवक की लाश मिली थी। दिल्ली पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर इसका पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम में पता चला कि युवक की हत्या गला दबाकर की गई थी। इसके बाद पुलिस आरोपियों को खोजने में लग गई। लेकिन दिल्ली पुलिस के सामने दुविधा यह थी कि कातिलों ने सुराह के नाम पर एक सुई भी नहीं छोड़ी थी। इसके अलावा लाश पर न कोई निशान था न पास कोई पहचान पत्र। पुलिस के सामने आरोपियों को पकड़ने से पहले दुविधा यह थी कि यह व्यक्ति कौन है? पुलिस तो यह जान गई कि कातिल चाहे एक हो या दो, बड़े ही शातिर तरीके से लाश को ठिकाने लगाया है।

दिल्ली पुलिस ने जिस हालत में शव को लाया था, उससे उसकी पहचान मुश्किल थी। तो अब किया जाए? तभी पुलिस के दिमाग में वो आईडिया आया जिसकी मदद से उसने असंभव को संभव कर दिया। दिल्ली पुलिस ने AI की मदद ली। उससे लाश के चेहरे को कुछ इस तरह बनाया गया कि वह बोलती हुई प्रतीत होने लगी। उसकी आंखों को उस तरह बनाया गया जैसे वह खुली हैं और ठीक हालत में हैं। आर्टिफिशियल इंटिलिजेंस की मदद से उत्तरी दिल्ली की पुलिस ने एआई से बनाई मृत व्यक्ति की जिंदा जैसी तस्वीर के पोस्टर बनने दे दिए। फिर इसे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में चिपका दिए गए। पुलिस थानों में भी इसे शेयर किया गया और वॉट्सऐप पर भी इसे खूब सर्कुलेट किया गया। इस तरह से दिल्ली पुलिस ने कुल 500 पोस्टर्स छपवाए थे। एआई से दिल्ली पुलिस ने एक और जबरजदस्त चीज बना दी। इस तकनीक की मदद से लाश का बैकग्राउंड बदलकर यमुना नदी कर दिया। मतलब जहां पहले उसकी मौत के बाद लाश गीता फ्लाईओवर के नीचे थी, AI की मदद से उसकी जगह यमुना नदी कर दी गई थी। दिल्ली पुलिस की तकनीक से की गई यह कोशिश ने केस को और रुचिकर बना दिया।

दिल्ली पुलिस ने उस व्यक्ति की राजधानी के अलग-अलग इलाकों में AI से बने पोस्टर्स को चिपकाया था। इसके बाद छावला में लगे पोस्टर को देख एक व्यक्ति ने पुलिस को फोन लगाया। व्यक्ति ने कहा कि जिस शख्स का पोस्टर लगा है, वह उसका भाई हितेंद्र है। चूंकि पुलिस ने केस पहले ही दर्ज कर लिया था। कॉलर के बताते ही दिल्ली पुलिस हितेंद्र को खोजने में लग गई। उसकी प्रोफाइल को सर्च किया और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की।

आदमी की शिनाख्त हो चुकी थी। बस इंतजार था तो बस कातिलों का। दिल्ली पुलिस ने केस की जांच आगे बढ़ाई। पता चला कि हितेंद्र का एक दिन 3 युवकों के साथ झगड़ा हुआ था। तीनों युवकों ने झगड़े के बाद हितेंद्र की गला दबाकर हत्या कर दी थी।इसके बाद पुलिस आरोपियों को खोजने में लग गई। लेकिन दिल्ली पुलिस के सामने दुविधा यह थी कि कातिलों ने सुराह के नाम पर एक सुई भी नहीं छोड़ी थी। इसके अलावा लाश पर न कोई निशान था न पास कोई पहचान पत्र। पुलिस के सामने आरोपियों को पकड़ने से पहले दुविधा यह थी कि यह व्यक्ति कौन है? पुलिस तो यह जान गई कि कातिल चाहे एक हो या दो, बड़े ही शातिर तरीके से लाश को ठिकाने लगाया है। इसके बाद लाश को गीता फ्लाईओवर के नीचे ठिकाने लगाकर फरार हो गए थे। मामले की और तफ्तीश की तो पता चला कि तीन युवकों के साथ एक महिला भी थी जो इनकी मदद कर रही थी। सारे आरोपी पकड़े गए हैं और इसपर आगे की कार्रवाई जारी है।