Home Blog Page 877

क्या तमिलनाडु में मछुआरों का सहारा लेकर जीत पाएगी बीजेपी?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि तमिलनाडु में मछुआरों का सहारा लेकर बीजेपी जीत पाएगी या नहीं! लोकसभा चुनाव में 400 पार के BJP के लक्ष्य में तमिलनाडु का गणित पार्टी के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे में कच्चातिवु द्वीप को लेकर BJP के आक्रामक तेवर देखकर लगता है कि ये मुद्दा इस चुनाव में छाया रहेगा। हालांकि, सच यह भी है कि चुनाव आते ही मछुआरे के मुद्दे सामने आते रहते हैं। तमिलनाडु में करीब 1000 किलोमीटर लंबी कोस्टलाइन है। इसके इर्द-गिर्द 600 से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां मछुआरा समुदाय रहता है। उसकी टेरेटरी में लोग आ गए हैं। साथ ही फिशिंग करने की टेक्निकल क्षमता भी नहीं थी। केंद्र की BJP सरकार दावा करती है कि उसने ब्लू इकॉनमी कॉन्सेप्ट के जरिए मछुआरों के हालात बेहतर करने की कोशिश की है।’ सवाल 2020 में सामने आई राष्ट्रीय मत्स्य पालन नीति को लेकर रहा है। इस समुदाय से जुड़ा एक तबका इस नीति के जरिए कॉरपोरेट का पक्ष लेने का आरोप लगाता रहा है।इस कोस्टलाइन में करीब 10 लाख मछुआरों की रिहाइश है। जानकार कहते हैं कि मछुआरा समुदाय कई विधानसभा क्षेत्रों और लोकसभा क्षेत्रों में दखल रखते हैं। उनके वोट से चुनाव का नतीजा निर्णायक स्तर तक पहुंच सकता है। राज्य सरकार चला रहे DMK गठबंधन, NDA और AIADMK बीच त्रिकोणीय कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

DMK की ओर से केंद्र सरकार पर मछुआरों की उपेक्षा का आरोप लगाया जा रहा है। पार्टी नेता आरोप लगा रहे हैं कि मोदी सरकार श्रीलंका को वित्तीय सहायता देती है, जबकि श्रीलंका झूठे आरोप लगाकर मछुआरों को अपनी गिरफ्त में लेता रहता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 20 वर्षों में श्रीलंका ने 6184 भारतीय मछुआरों की हिरासत में लिया और इस दौरान 1175 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाएं श्रीलंका ने जब्त की। ये मुद्दा लोकल लेवल पर गर्म रहेगा क्योंकि कराईकल में मछुआरों ने श्रीलंकाई सेना की ओर से गिरफ्तार मछुआरों की रिहाई की मांग को लेकर 4 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने और लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है।पिछले लोकसभा चुनाव में DMK की अगुवाई वाले अलायंस ने 39 में से 38 सीटें जीतीं थीं। 2014 में 37 सीटों पर जीत हासिल करने वाली AIADMK को पिछली बार महज एक सीट मिल सकी। BJP का प्रदर्शन निराशाजनक था। 2014 में उसे 5.56% वोट मिले थे, जो 2019 में घटकर 3.66% रह गया। पिछले चुनाव में पार्टी ने सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।लोगों की शिकायतें हैं कि 2014 में नेता सुषमा स्वराज की ओर से रामेश्वरम में पार्टी के प्रचार के दौरान श्रीलंकाई विवाद को सुलझाने का वादा किया गया था। हालांकि सत्ता में आने के बाद सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय भी संभाला, लेकिन हकीकत जस का तस है।

राजनीतिक विश्लेषक शेखर अय्यर का कहना है कि चुनाव को लेकर BJP के अपने वादे हैं। वह कहते हैं, ‘मछुआरों कि दिक्कतें बहुत हैं। उनके पास छोटी बोट और मोटर थी, जिससे वे समुद्र में गहरे नहीं जा पाते थे। मैरीटाइम टेरेटरी के बहुत साफ न होने की वजह से श्रीलंका कहता रहता है कि उसकी टेरेटरी में लोग आ गए हैं। साथ ही फिशिंग करने की टेक्निकल क्षमता भी नहीं थी। केंद्र की BJP सरकार दावा करती है कि उसने ब्लू इकॉनमी कॉन्सेप्ट के जरिए मछुआरों के हालात बेहतर करने की कोशिश की है।’ सवाल 2020 में सामने आई राष्ट्रीय मत्स्य पालन नीति को लेकर रहा है। इस समुदाय से जुड़ा एक तबका इस नीति के जरिए कॉरपोरेट का पक्ष लेने का आरोप लगाता रहा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में DMK की अगुवाई वाले अलायंस ने 39 में से 38 सीटें जीतीं थीं। 2014 में 37 सीटों पर जीत हासिल करने वाली AIADMK को पिछली बार महज एक सीट मिल सकी। तमिलनाडु में करीब 1000 किलोमीटर लंबी कोस्टलाइन है। इसके इर्द-गिर्द 600 से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां मछुआरा समुदाय रहता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 20 वर्षों में श्रीलंका ने 6184 भारतीय मछुआरों की हिरासत में लिया और इस दौरान 1175 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाएं श्रीलंका ने जब्त की। ये मुद्दा लोकल लेवल पर गर्म रहेगा क्योंकि कराईकल में मछुआरों ने श्रीलंकाई सेना की ओर से गिरफ्तार मछुआरों की रिहाई की मांग को लेकर 4 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने और लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है।इस कोस्टलाइन में करीब 10 लाख मछुआरों की रिहाइश है। जानकार कहते हैं कि मछुआरा समुदाय कई विधानसभा क्षेत्रों और लोकसभा क्षेत्रों में दखल रखते हैं।BJP का प्रदर्शन निराशाजनक था। 2014 में उसे 5.56% वोट मिले थे, जो 2019 में घटकर 3.66% रह गया। पिछले चुनाव में पार्टी ने सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।

चीन को फटकार लगाते हुए क्या बोले भारतीय विदेश मंत्री?

हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री ने चीन को फटकार लगाई है! चीन ने अरुणाचल प्रदेशों के कुछ और जगहों के नए नाम दिए हैं। उसकी चौथी सूची में 30 जगहों के नए नाम शामिल हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को मजबूती देने के लिए यहां की जगहों के नए नाम जारी करता रहा है। हालांकि भारत इन्हें खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि चीन के नए नामों से सच्चाई नहीं बदलेगी और वो ये कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने जांगन अरुणाचल प्रदेश के लिए चीन की ओर से दिया गया नया नाम में 30 जगहों के नए नाम जारी किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के नए नामों की पहली सूची जारी की थी। इसमें छह नए नाम शामिल थे। 2021 में 15 जगहों के नए नाम दिए गए थे। वहीं 2023 में 11 नए नाम की सूची जारी की गई थी। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अरुणाचल प्रदेश पर चीन द्वारा बार-बार किए जा रहे दावे को 23 मार्च को बेतुका करार देते हुए इसे खारिज कर दिया था और कहा था कि यह सीमांत राज्य ‘भारत का स्वाभाविक हिस्सा’ है।

अरुणाचल प्रदेश पर दावे को लेकर चीन की ओर से हालिया बयानबाजी तब शुरू हुई थी जब पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था। उस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के 13 हजार फुट की ऊंचाई पर बनी सेला सुरंग को राष्ट्र को समर्पित किया था। चीन में भारत के राजदूत रह चुके जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर तनाव ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, जैसा कि आप जानते हैं , सीमा पर (चीन के साथ) तनाव है और इससे हमारे संबंधों में विसंगति आई है। इसके लिए हमारी सोच बहुत साफ है कि जब तक सीमा पर शांति और स्थिरता नहीं होगी, तब तक रिश्ते नहीं सुधरेंगे।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि आर्थिक मोर्चे पर चीन से मुकाबला करने के लिए भारत को विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा प्रमुख क्षेत्र है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने से पहले की सरकारों ने नजरअंदाज किया था। उन्होंने कहा कि चीन के साथ सीमा पर तनाव के चलते नई दिल्ली-पेइचिंग संबंधों में असामान्यता पैदा हुई है। भारत की सोच बिलकुल स्पष्ट है कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता नहीं होगी, तब तक दोनों एशियाई शक्तियों के बीच संबंधों में सुधार नहीं होगा। जयशंकर ने सूरत में एक कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेताओं के साथ चर्चा के दौरान कहा, ‘अगर हमें चीन से मुकाबला करना है, जो करना भी चाहिए, तो इसका समाधान यही है कि हम यहीं विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद विनिर्माण के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदल गया है। इससे पहले लोग विनिर्माण पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे।’

बता दे कि अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा पेश करने की चीन की हालिया कोशिशों के बीच बीजिंग ने भारतीय राज्य में विभिन्न स्थानों के 30 नए नामों की चौथी सूची जारी की है। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का नाम बदलने की कवायद को भारत खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि यह राज्य देश का अभिन्न अंग है और ‘‘काल्पनिक’’ नाम रखने से इस वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं आएगा। सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने रविवार को बताया कि चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने ‘जंगनान’ में मानकीकृत भौगोलिक नामों की चौथी सूची जारी की। चीन की इस हिमाकत पर एक्सपर्ट ने चीन को फटकार लगाई है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने कहा कि “भारत को चीन को याद दिलाना चाहिए कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून का मजाक उड़ाकर तिब्बत पर कब्जा कर लिया है और अब वह तिब्बत पर कब्जे का विस्तार अरुणाचल तक करना चाहता है, जिसे भारत कभी अनुमति नहीं देगा।” चेलानी ने भारत को सलाह दी कि उसे चीन को साफ-साफ समझा देना चाहिए कि असल बात तो ये है कि बीजिंग खुद तिब्बत पर कब्जा करके भारत का पड़ोसी बना बैठा है।

चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ कहता है और दक्षिण तिब्बत के हिस्से के रूप में इस राज्य पर अपना दावा करता है। मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर क्षेत्र के लिए 30 अतिरिक्त नाम पोस्ट किए गए। यह सूची एक मई से प्रभावी होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुच्छेद 13 के अनुसार, इस घोषणा के क्रियान्वयन में कहा गया है कि ‘‘चीन के क्षेत्रीय दावों और संप्रभुता अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकने वाले विदेशी भाषाओं में रखे गए, स्थानों के नामों को बिना प्राधिकार के सीधे उद्धृत या अनुवादित नहीं किया जाएगा।’’ चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने ‘‘जंगनान’’ में छह स्थानों के ‘‘मानकीकृत नामों’’ की पहली सूची 2017 में जारी की थी, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई थी। इसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों के साथ एक और सूची जारी की गई थी।

क्या भारतीय इसरो ने लगा दी है एक और बड़ी छलांग?

भारतीय इसरो ने वर्तमान में एक और बड़ी छलांग लगा दी है! भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अपने गगनयान मिशन पर काम रही है। चंद्रयान और आदित्य एल-1 की सफलता के बाद ये मिशन इसरो को और ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा। गगनयान भारत का पहला मानव मिशन होगा। इसरो ने गगनयान मिशन के लिए ‘सीई-20 क्रायोजेनिक इंजन’ तैयार कर लिया है। इसरो ने इस इंजन का सफल परीक्षण भी किया। गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए एलवीएम लॉन्चिंग पैड के ‘क्रायोजेनिक चरण’ को शक्ति प्रदान करता है। इसरो ने कहा कि सीई-20 क्रायोजेनिक इंजन मानव मिशन के लिए अंतिम परीक्षणों में सफल रहा। इंजन की टेस्टिंग से इसकी क्षमता का पता चलता है।इससे पहले इसरो कई स्तरों पर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इस मिशन में कोई कमी न रह जाए। इसलिए पिछले साल एजेंसी ने टेस्ट फ्लाइट किया, जिसके जरिए ये टेस्ट किया गया कि इंसानों को ले जाने वाला कैप्सूल सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लौट सकता है। इसरो के मुताबिक, पहली मानव रहित उड़ान ‘एलवीएम3 जी1’ के लिए पहचाना गया सीई-20 इंजन सभी जरूरी परीक्षणों से गुजरा। अब मिशन के अगले चरण के लिए इसरो तैयार है। पहले लॉन्च पैड के आसपास के चार किलोमीटर के दायरे में कोई नहीं होता था। यहां तक की लॉन्च पैड को सुरक्षा देने वाले सीआईएसएफ कर्मी भी उड़ान भरने से दो घंटे पहले पोस्ट छोड़ देते थे। लेकिन 2025 में पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्पेससूट पहनकर एक विशेष मंच के माध्यम से लॉन्च पैड तक पहुंचेंगे। इसरो 19 साल पुराने लॉन्च पैड को भी अपग्रेड कर रहा है।

सतीश धवन स्पेस सेंटर के निदेशक ए. राजराजन ने कहा कि एक अलग लॉन्च पैड को तैयार करने में समय लगता है। इसलिए दूसरे लॉन्च पैड में सुधार का काम किया जा रहा है। हर बार जब हम कुछ प्रयोग करते हैं तो कुछ नए संशोधन भी करते हैं। उन्होंने कहा कि यह करीब 2000 करोड़ का निवेश है। जिस भी रॉकेट से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा, उसमें भी अधिक सुरक्षा सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। मिशन आठ घंटे से एक दिन तक चल सकता है। अंतरक्षि यात्री पूरे समय क्रू मॉड्यूल में ही रहेंगे। इसमें 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान बनाए रखा जाएगा। सेंटर के अधिकारियों ने कहा कि मिशन के दौरान कई बातों को ध्यान में रखने की भी जरूरत है।

जैसे मिशन के दौरान ईंधन लीक हो सकता है, ऐसी स्थिति में रॉकेट में विस्फोट भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन साल 2025 तक लॉन्च होगा। हालांकि इसके शुरुआती चरणों को इसी साल यानी 2024 तक पूरा किया जा सकता है। इसमें दो मानवरहित मिशन को अंतरिक्ष में भेजना शामिल है। जब ये मिशन सफल होंगे उसके बाद ही एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

गगनयान मिशन ISRO की ओर से विकसित भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिशन में तीन अंतरिक्ष मिशन शामिल हैं। इन तीन मिशनों में से दो मानवरहित होंगे, जबकि एक मानव युक्त मिशन होगा। गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन के तहत तीन चालक दल के सदस्यों को 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिनों के मिशन के लिए लॉन्च करना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है। इसरो ने इस मिशन की टेस्टिंग पिछले साल की थी। वहीं हाल ही में इसरो ने इसके क्रायोजेनिक इंजन की टेस्टिंग की।

गगनयान मिशन पांच चरणों में पूरा होगा। इसका अंतिम चरण तब खत्म होगा जब एक अंतरिक्ष यान में तीन इंसान को बैठाकर अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इससे पहले इसरो कई स्तरों पर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इस मिशन में कोई कमी न रह जाए। इसलिए पिछले साल एजेंसी ने टेस्ट फ्लाइट किया,लॉन्च पैड के आसपास के चार किलोमीटर के दायरे में कोई नहीं होता था। यहां तक की लॉन्च पैड को सुरक्षा देने वाले सीआईएसएफ कर्मी भी उड़ान भरने से दो घंटे पहले पोस्ट छोड़ देते थे। लेकिन 2025 में पहली बार भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्पेससूट पहनकर एक विशेष मंच के माध्यम से लॉन्च पैड तक पहुंचेंगे। इसरो 19 साल पुराने लॉन्च पैड को भी अपग्रेड कर रहा है। जिसके जरिए ये टेस्ट किया गया कि इंसानों को ले जाने वाला कैप्सूल सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लौट सकता है। यह सुनिश्चित किया गया है कि हवा से जमीन पर कैप्सूल गिरने से क्या कोई नुकसान हो रहा है या नहीं।

जब राजनीतिक मैदान में उतरे रामायण और महाभारत के किरदार!

हाल ही में रामायण और महाभारत के किरदार राजनीतिक मैदान में उतर चुके हैं! 1987 में दूरदर्शन पर आए टीवी सीरियल रामायण और 1988 में प्रसारित हुए महाभारत के किरदार आज भी घर-घर में पहचाने जाते हैं। उनमें से कई किरदारों ने राजनीति में सफल पारियां भी खेलीं। रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी हों या सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया या हनुमान की भूमिका में दिखे दारा सिंह, सभी ने राजनीति में हाथ आजमाया। इन सभी को बीजेपी ने राजनीति के मैदान में उतारा था। भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल 2024 के लोकसभा चुनाव में मैदान में है। BJP ने उन्हें मेरठ लोकसभा सीट से टिकट दिया है। 2021 में BJP में शामिल हुए अरुण गोविल का जन्म मेरठ में हुआ था। उन्होंने BJP के मौजूदा सांसद राजेंद्र अग्रवाल की जगह ली है। महाभारत में श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नीतीश भारद्वाज, द्रौपदी बन लोगों को अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली रूपा गांगुली, भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार, युधिष्ठिर बने गजेंद्र चौहान भी राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं और ज्यादातर कलाकारों ने BJP को ही चुना है।

1991 के लोकसभा चुनाव में रामायण के दो बड़े कलाकार संसद पहुंचे थे। सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया और रावण के किरदार से हर किसी को प्रभावित करने वाले अरविंद त्रिवेदी गुजरात के चुनावी मैदान में उतरे। दोनों ही कलाकारों को BJP ने लोकसभा का टिकट दिया था। राजनीतिक दलों ने रामायण और महाभारत धारावाहिक के कलाकारों की लोकप्रियता को भांप लिया था और यही कारण था कि कई कलाकारों को चुनावी मैदान में उतारने के लिए कोशिशें शुरू हुई थीं। दीपिका चिखलिया को वडोदरा (बड़ौदा) से चुनावी मैदान में उतारा गया था। वह तब 26 साल की थीं। उन्होंने चुनाव में जीत भी हासिल की। रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी ने 1991 में गुजरात के साबरकांठा से जीत हासिल की थी। अरविंद त्रिवेदी अब हमारे बीच नहीं है। 6 अक्टूबर 2021 को 82 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था। BJP ने अरुण गोविल को उत्तर प्रदेश के मेरठ लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। सवाल यह है कि 1990 के समय जब रामायण के कलाकारों की लोकप्रियता आसमान छू रही थी तो गोविल को किसी दल ने चुनावी मैदान में क्यों नहीं उतारा? कहा जाता है कि कांग्रेस उन्हें चुनावी मैदान में उतारना चाहती थी, लेकिन अरुण गोविल इसके लिए तैयार नहीं हुए। हालांकि, अब बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया है। देखना होगा कि क्या अरुण गोविल अपने साथी कलाकारों अरविंद त्रिवेदी और दीपिका चिखलिया की तरह ही चुनावी राजनीति की शुरुआत जीत से कर पाते हैं या नहीं?

अरविंद त्रिवेदी की तरह दारा सिंह भी अब हमारे बीच नहीं हैं। रामायण में हनुमान का किरदार निभाने वाले दारा सिंह को कौन भूल सकता है। दारा सिंह को BJP ने 2003 में राज्यसभा भेजा था। केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय वह राज्यसभा सांसद बने थे। दारा सिंह ने कुश्ती, एक्टिंग, राइटिंग और राजनीति हर जगह अपना प्रभाव छोड़ा। पर्दे पर श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नीतीश भारद्वाज भी BJP में रह चुके हैं। उन्होंने BJP के टिकट से जमशेदपुर से 1996 में चुनाव लड़ा था। उन्होंने जीत भी हासिल की थी। 1996 के चुनाव में अनुभवी इंदर सिंह नामधारी को हराकर जमशेदपुर से संसद सदस्य के रूप में लोक, महाभारत में द्रौपदी की भूमिका निभाने वाली रूपा गांगुली भी राज्यसभा की मनोनीत सदस्य रह चुकी हैं। BJP ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें हावड़ा नॉर्थ से चुनाव लड़ाया था लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी। युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान भी BJP का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने साल 2004 में पार्टी की सदस्यता ली थी। पार्टी ने उन्हें 2015 में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया का चेयरमैन बनाया था। भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। उन्होंने BJP के मौजूदा सांसद राजेंद्र अग्रवाल की जगह ली है। महाभारत में श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नीतीश भारद्वाज, द्रौपदी बन लोगों को अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली रूपा गांगुली, भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार, युधिष्ठिर बने गजेंद्र चौहान भी राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं और ज्यादातर कलाकारों ने BJP को ही चुना है।प्रवीण एक जाने-माने रेसलर थे। 2014 में प्रवीण को आम आदमी पार्टी की ओर से टिकट मिला। वह दिल्ली के वजीरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े लेकिन वह हार गए। इसके बाद वह BJP में शामिल हो गए। प्रवीण कुमार का फरवरी 2022 में निधन हो गया।

भ्रामक विज्ञापन के लिए रामदेव बाबा से क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में भ्रामक विज्ञापन के लिए रामदेव बाबा को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है! पंतजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि वो पंतजलि के जवाब से संतुष्ट नहीं है। योगगुरु बाबा रामदेव सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए हैं। उनके साथ आचार्य बालकृष्ण भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बाबा रामदेव को अदालत में पेश होने का समन जारी किया था। अदालत ने पतंजलि और आचार्य बालकृष्ण को अदालत के नोटिस का जवाब नहीं देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव की ओर से सीनियर वकील बलवीर सिंह पेश हुए। अदालत ने कहा कि आपके खिलाफ दो मामले हैं, जिनका जवाब देना होगा। पंतजलि विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस कोहली ने पूछा कि बाबा रामदेव और दूसरे अवमाननाकर्ता का हलफनामा कहां है? पतंजलि के वकील ने जवाब दिया कि वे कोर्ट के अंदर हैं, भीड़ के कारण हम उन्हें यहां नहीं लाए। जस्टिस कोहली ने पूछा कि बाबा रामदेव के जवाब के बारे में क्या कहना है? वकील ने जवाब दिया कि प्रतिवादी 5 कंपनी है और प्रतिवादी 6 प्रबंध निदेशक है। जस्टिस कोहली ने कहा हम 27 फरवरी के आदेश के पैरा 9 को देख रहे हैं और यह इस बारे में था कि कंपनी और प्रबंधन के खिलाफ अवमानना क्यों नहीं होनी चाहिए और फिर उस हलफनामे को दाखिल न करने का आदेश दिया जाए।

जस्टिस अमानतुल्लाह ने कहा आपको पहले हमें दिखाना होगा कि दोनों जवाब कहां हैं। इसके बाद बाबा रामदेव के वकील ने आचार्य बालकृष्ण का हलफनामा पढ़ा। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा एक बार जब यह अदालती कार्यवाही है और निर्देश हैं तो इसकी जानकारी देने के लिए कौन जिम्मेदार है। यदि यह बचाव योग्य नहीं है तो आपकी माफी काम नहीं करेगी। यह सुप्रीम कोर्ट को दिए गए वचन का घोर उल्लंघन है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके वचन का पालन किया जाना चाहिए जो कि गंभीर है। न्यायमूर्ति कोहली ने आगे कहा जो बात हमें प्रभावित करती है वह यह है कि आपने उसके बाद क्या किया। आपने अदालत के नोटिस का उल्लंघन किया। हम इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

जस्टिस कोहली ने कहा आपकी माफी स्वीकार करने का क्या कारण है? आपको मंत्रालय को सूचित करना चाहिए था। आपको यह सब सरकार को बताना चाहिए था। सीनियर वकील सांघी ने कहा कि ये यह व्यावसायिक नहीं है। 24 घंटे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना दिखाता है कि आपको कार्यवाही के बारे में पता था और फिर भी आपने इसका उल्लंघन किया।इसके जवाब में जस्टिस कोहली बोले कि यह एक व्यावसायिक संगठन है। जस्टिस अमानतुल्लाह ने कहा कि यह मत कहिए कि आप सार्वजनिक हित या सार्वजनिक भलाई की सेवा कर रहे हैं।

इसके बाद बाबा रामदेव के वकील ने अदालत में गलती मानते हुए कहा, ‘चूक हो गई’। जस्टिस कोहली ने कहा कि तो यह अंत है। अगर ये आपसे चूक है तो बस इतना ही। हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते। सीनियर वकील सिंह ने कहा कि हम बिना शर्त माफी मांग रहे हैं। वह माफी मांगने के लिए यहां व्यक्तिगत रूप से मौजूद हैं।’जस्टिस कोहली ने कहा हमें एक हलफनामे की जरूरत है। इस अवमानना को गंभीरता से लें। कोर्ट को लग रहा है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो इस अदालत को दिए गए वचन पत्र के अनुरूप है। आपका एक कदम आगे बढ़ना और 24 घंटे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना दिखाता है कि आपको कार्यवाही के बारे में पता था और फिर भी आपने इसका उल्लंघन किया।

अदालत की सख्ती के बाद बाबा रामदेव के वकील ने फिर से गलती मानने की बात दोहराई। वकील ने जवाब दिया कि प्रतिवादी 5 कंपनी है और प्रतिवादी 6 प्रबंध निदेशक है। जस्टिस कोहली ने कहा हम 27 फरवरी के आदेश के पैरा 9 को देख रहे हैं और यह इस बारे में था कि कंपनी और प्रबंधन के खिलाफ अवमानना क्यों नहीं होनी चाहिए और फिर उस हलफनामे को दाखिल न करने का आदेश दिया जाए।जस्टिस कोहली ने कहा 24 घंटे के अंदर प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई.. क्या आपको जानकारी है? सिंह ने जवाब दिया यह एक गलती है और अदालत की महिमा का अनादर नहीं किया जा सकता, यह एक सीख है। जस्टिस कोहली ने कहा कि तो फिर सबक को तार्किक अंत तक ले जाना चाहिए था।

आखिर बीजेपी के घोषणा पत्र में इस बार क्या-क्या होगा?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि इस बार बीजेपी के घोषणा पत्र में क्या-क्या होगा! लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। इस बार चुनावी रण में एनडीए को टक्कर देने के लिए नया विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ है। पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए 400 पार का टार्गेट सेट कर चुका है वहीं, विपक्ष का कहना है कि सत्ताधारी दल को 200 सीटें भी नसीब नहीं हो रही हैं। दोनों के अपने-अपने दावे हैं जिसका फैसला 4 जून को आएगा। उससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार रात खूब मंथन किया। मंथन चुनावी घोषणापत्र को लेकर हुआ। इस बार के मेनिफेस्टो में बीजेपी का ध्यान गरीबों और किसानों के कल्याण वाले वादों और महिलाओं-युवाओं के लिए नौकरियों पर ध्यान केंद्रित करने पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली 27 सदस्यीय चुनाव घोषणापत्र समिति की बैठक में लोगों से ली गई राय के आधार पर चर्चा हुई।भाजपा की चुनाव घोषणापत्र समिति की पहली बैठक में सरकार के ‘विकसित भारत’ एजेंडे के लिए रोडमैप ने केंद्र में जगह बनाई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया कि घोषणापत्र ‘मोदी की गारंटी’ और ‘विकसित भारत’ के इर्द-गिर्द हो सकता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भाजपा को अपनी मिस्ड कॉल सेवा के माध्यम से 3.75 लाख से अधिक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐप पर लगभग 1.70 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं।भाजपा ने 30 मार्च को 27 सदस्यों वाली समिति की घोषणा की थी, जिसमें एक-एक मुस्लिम, सिख और ईसाई नेता भी शामिल थे। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी संयोजक हैं और इसके अलावा कई अघोषणा पत्र के लिए लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, प्रधानमंत्री पर उनके विश्वास और उनसे उनकी उम्मीदों को दर्शाती है। गोयल ने बताया कि 35 दिन के अभियान के दौरान जानकारी इकट्ठी की गई। 300 से ज्यादा चुनाव क्षेत्रों में 916 वीडियो वैन भेजी गईं। उन्होंने बताया कि व्यापार और उद्योग संघों से भी सुझाव मिले।न्य केंद्रीय मंत्री, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे जैसे अनुभवी नेता भी इसके सदस्य हैं। कई दशकों में शायद यह पहली बार है जब इसके चुनावी घोषणापत्र में मुख्य वैचारिक वादों का उल्लेख नहीं किया गया है।

बीजेपी ने देशभर से आए लोगों के सुझाव को ध्यान में रखते हुए रात में करीब दो घंटे तक मंथन किया। लोगों ने मिलकर सरकार को जनकल्याण के सुझाव दिए हैं। दिल्ली में सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने बताया कि समिति की बैठक में 2047 तक विकसित भारत के लिए रोडमैप पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि हमारे घोषणा पत्र के लिए लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, प्रधानमंत्री पर उनके विश्वास और उनसे उनकी उम्मीदों को दर्शाती है। गोयल ने बताया कि 35 दिन के अभियान के दौरान जानकारी इकट्ठी की गई। 300 से ज्यादा चुनाव क्षेत्रों में 916 वीडियो वैन भेजी गईं। उन्होंने बताया कि व्यापार और उद्योग संघों से भी सुझाव मिले।

भाजपा ने 30 मार्च को 27 सदस्यों वाली समिति की घोषणा की थी, जिसमें एक-एक मुस्लिम, सिख और ईसाई नेता भी शामिल थे। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी संयोजक हैं और इसके अलावा कई अन्य केंद्रीय मंत्री, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे जैसे अनुभवी नेता भी इसके सदस्य हैं। कई दशकों में शायद यह पहली बार है जब इसके चुनावी घोषणापत्र में मुख्य वैचारिक वादों का उल्लेख नहीं किया गया है। 27 सदस्यों वाली समिति की घोषणा की थी, जिसमें एक-एक मुस्लिम, सिख और ईसाई नेता भी शामिल थे। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी संयोजक हैं और इसके अलावा कई अन्य केंद्रीय मंत्री, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे जैसे अनुभवी नेता भी इसके सदस्य हैं।इसने इस बारे में आम जिज्ञासा को बढ़ा दिया है व्यापार और उद्योग संघों से भी सुझाव मिले।न्य केंद्रीय मंत्री, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे जैसे अनुभवी नेता भी इसके सदस्य हैं। कई दशकों में शायद यह पहली बार है जब इसके चुनावी घोषणापत्र में मुख्य वैचारिक वादों का उल्लेख नहीं किया गया है।कि इस बार सत्तारूढ़ दल की चुनावी प्रतिज्ञाओं के मुख्य आकर्षण क्या होंगे। घोषणा पत्र समिति की अगली बैठक 4 अप्रैल को होने की संभावना है। लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से 1 जून के बीच होने हैं।

आखिर अमेठी से कौन सा बड़ा राजनेता लड़ेगा चुनाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि अमेठी से कौन सा बड़ा राजनेता चुनाव लड़ने जा रहा है! इस बार BJP सबसे अधिक दांव तमिलनाडु पर लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के समय में सबसे अधिक चुनावी रैलियां भी वहीं की हैं। दिलचस्प है कि चुनावी सीजन में नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के टीवी चैनल को ही अपना सबसे पहला डीटेल्ड इंटरव्यू दिया। हालांकि वहां पार्टी से AIADMK के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन न हो पाना जरूर झटका माना गया। जानकारों के अनुसार, खुद पीएम मोदी भी चाहते थे कि AIADMK के साथ गठबंधन हो। उनकी यह मंशा इंटरव्यू में भी दिखी, जब उन्होंने जयललिता की खूब तारीफ की। उन्होंने यहां तक कहां कि 2002 में गुजरात दंगे के बाद देश के तमाम दूसरे नेताओं ने उनसे दूरी बना ली थी, तब सिर्फ जयललिता थीं जो गुजरात आईं। कहीं न कहीं नरेंद्र मोदी जयललिता की विरासत से खुद को जोड़कर तमिलनाडु में AIADMK वोटरों को भी टारगेट कर रहे हैं। BJP ने पार्टी के नेताओं से भी कहा है कि वे जयललिता पर कोई नकारात्मक कमेंट न करें। BJP का आकलन है कि अगर जयललिता से जुड़ी विरासत का वोट BJP को मिला, तो पार्टी इस बार सभी को चौंका सकती है। उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट पर इस बार कांग्रेस को लेकर एक बड़ा सस्पेंस बना हुआ है। सियासी गलियारों में चर्चा चल रही है कि इस बार अमेठी से राहुल गांधी कांग्रेस उम्मीदवार होंगे या नहीं। रायबरेली से सोनिया गांधी के नहीं लड़ने के एलान के बाद वहां से प्रियंका गांधी के चुनावी मैदान में उतरने की अटकलें भी लग रही हैं। लेकिन कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की संभावना कम ही है। ऐसे में अब फोकस अमेठी पर शिफ्ट हो गया है। कांग्रेस के अंदर अधिकतर नेताओं की आम राय है कि अगर राहुल गांधी वहां से खुद नहीं लड़ेंगे, तो इसका बहुत नकारात्मक संदेश जाएगा। ऐसे में कांग्रेस के अधिकतर नेताओं की ओर से राहुल गांधी पर एक तरह का दबाव भी है। लेकिन सभी जानते हैं कि वहां से चुनाव लड़ना है या नहीं लड़ना, यह फैसला खुद राहुल गांधी ही करेंगे। यही वजह है कि पार्टी की ओर से वहां उम्मीदवार तय करने में लगातार देरी हो रही है, और सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

BJP ने इस बार आम चुनाव में टिकट देने को लेकर कई प्रयोग किए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से पार्टी ने कई नामों को मैदान में उतारा है। इसी कड़ी में सिने-कला जगत से जुड़े दो चर्चित नामों को टिकट दिया गया। दोनों टिकट मिलने के बाद उत्साहित हैं और अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में सियासी मुकाबले के लिए उतर चुके है। लेकिन BJP को एक चिंता भी है। दोनों अपने हिसाब से कई बार बेबाक बोलने के लिए जाने जाते हैं। ऐसा भी बोल देते हैं, जिससे राजनीतिक रूप से नुकसान हो सकता है। इस मामले में खासकर एक नाम पर अधिक चिंता है। उन्हें टिकट देने से पहले कई स्तर पर मंथन भी हुआ। पार्टी के अंदर उन्हें टिकट देने पर पूरी तरह एक राय नहीं थी। उनके ट्रैक रेकॉर्ड को देखते हुए BJP अब टिकट देने के बाद कवर भी अपने स्तर से दे रही है। दोनों उम्मीदवारों के लिए मुद्दों की तलाश से लेकर कब कहां किससे क्या बोलना है, उसका होमवर्क पार्टी की टीम ही कर रही है। पार्टी की ओर से दोनों उम्मीदवारों को कम्युनिकेशन टीम भी उपलब्ध कराई गई है। सोशल मीडिया अकाउंट पर भी नजर रखी जा रही है। दरअसल, BJP की मंशा है कि इस बार चुनाव में ऐसा कोई विवाद न हो, जिससे उनका कैंपेन किसी तरह प्रभावित हो।

बिहार में इस बार दो छोटे दलों के नेताओं के लिए ‘दुविधा में दोनों गए माया मिली न राम’ वाली हालत हो गई है। एक हैं पशुपति कुमार पारस, और दूसरे हैं मुकेश सहनी। दोनों नेताओं की कोशिश रही कि बारगेन कर अधिक से अधिक सीटें लें, पर इस कोशिश में दोनों कहीं के नहीं रहे। चिराग पासवान से समझौता करने के बाद BJP ने पारस को एक पैकेज ऑफर दिया, लेकिन वह RJD के साथ बारगेन करने लगे और वहां अधिक सीटों की मांग करने लगे। इसी कोशिश में वक्त बीत गया और उन्हें कहीं कुछ नहीं मिला। अब पारस एकतरफा NDA को समर्थन देने की बात कर रहे हैं ताकि चुनाव के बाद कुछ मिल सके। वहीं मुकेश सहनी के बारे में कहा गया कि वह एक ही दिन अलग-अलग समय दोनों गठबंधन से बात कर रहे थे। इसका पता दोनों गठबंधनों को चल गया तो उनसे सबने नमस्ते कर ली।

अभी सबसे अधिक सियासी उत्सुकता उस वजह का पता लगाने की है, जिसके तहत ओडिशा में BJP और BJD का चुनाव पूर्व गठबंधन होते-होते रुक गया। वह भी तब, जब BJP में नरेंद्र मोदी और BJD में खुद नवीन पटनायक की सहमति से गठबंधन की बात शुरू हुई थी। चर्चा है कि BJD की ओर से नवीन पटनायक के करीबी ब्यूरोक्रेट ने गठबंधन की बात शुरू की थी। इस पूर्व ब्यूरोक्रेट को नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं BJP में भी ब्यूरोक्रेट से नेता बने एक मंत्री ने कमान संभाली थी। लेकिन BJP के अंदर एक बड़ा वर्ग BJD विरोधी भी है। वैसे ही BJD के अंदर एक वर्ग BJP विरोधी है। इन दोनों ने अपनी-अपनी पार्टियों पर दबाव बनाया। लेकिन दोनों पार्टियों को लगा कि इससे न सिर्फ उनकी पार्टी में टूट हो सकती है, बल्कि उसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है, जो राज्य में तीसरे नंबर पर कमजोर स्थिति में है। लेकिन गठबंधन न हो पाने के बाद अब दोनों दल चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ किस तरह उतरेंगे, इसे लेकर संशय है। BJP को लगता है कि अगर वह BJD पर नरम पड़ी, तो कहीं विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव में भी नुकसान न हो जाए। इसका ठीक उलटा संशय BJD को भी सता रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ कितना टफ या सॉफ्ट रुख अपनाते हैं।

सुष्मिता सेन ने शादी की योजना पर तोड़ी चुप्पी.

0

महज 18 साल की उम्र में जगतजोरा दुनिया भर में प्रसिद्धि का मालिक है। इसके ठीक दो साल बाद सुष्मिता सेन ने बॉलीवुड में डेब्यू किया। 1996 में फिल्म ‘दस्तक’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ‘बीबी नंबर वन’, ‘सिर्फ तुम’, ‘फिजा’, ‘आंखे’, ‘मे हू ना’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। जितना उनकी चर्चा उनकी पर्सनैलिटी के लिए हुई है, उतना ही उनकी पर्सनल लाइफ के लिए भी हुई है। यह कहना अच्छा है कि उनके प्रेम जीवन की प्रथा का कोई अंत नहीं है। हालांकि, एक्ट्रेस कभी भी कुछ भी छिपाने में विश्वास नहीं रखती हैं। कभी रणदीप हुडा, कभी मुंबई के रेस्टोरेंट मालिक रितिक भसीन, कभी डायरेक्टर विक्रम भट्ट तो कभी ललित मोदी, उनका नाम अपने से काफी छोटे रोहमन शाल के साथ जुड़ा। उनकी उम्र पचास के पार है. लेकिन, घर नहीं बना. फिलहाल, उनके परिवार में दो बेटियां रेने और अलीशा शामिल हैं। एक्स-बॉयफ्रेंड रोहमन भी हैं साथ में. इस बार सुष्मिता ने कहा कि वह शादी करेंगी। उन्होंने अपने एक्स के बारे में अपना मुंह खोला। जैसे ही रोहमन उनकी जिंदगी में वापस आए तो कई लोगों ने सवाल उठाए, लेकिन क्या एक्ट्रेस अपने एक्स-बॉयफ्रेंड के साथ समझौता करेंगी? उस वक्त उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि उन्हें शादी से कोई हिचक नहीं है. लेकिन इस बार सुष्मिता ने कहा, वह शादी करेंगी.

कुछ वर्ष पहले वे हृदय रोग से पीड़ित हो गये। इलाज के बाद पूर्व ब्रह्माण्डसुंदरी की जान वापस आ गई। तभी उनकी जिंदगी में उनका पुराना प्यार भी वापस आ गया. वह रोहमन हैं. वे इस वक्त साथ हैं. हालांकि, इस बात को लेकर असमंजस है कि वे रिलेशनशिप में हैं या नहीं। हालांकि सुष्मिता ने कहा, उनके अपने एक्स के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं। इतना ही नहीं, वह अपनी जिंदगी में ऐसे दोस्तों के लिए आभारी हैं। लेकिन सुष्मिता मानती हैं कि किसी भी रिश्ते के टूटने के बाद भी दोस्ती कायम रह सकती है। लेकिन उसकी भी कुछ सीमाएं हैं. जैसे ही रोहमन उनकी जिंदगी में वापस आए तो कई लोगों ने सवाल उठाए, लेकिन क्या एक्ट्रेस अपने एक्स-बॉयफ्रेंड के साथ समझौता करेंगी? उस वक्त उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि उन्हें शादी से कोई हिचक नहीं है. लेकिन इस बार सुष्मिता ने कहा, वह शादी करेंगी.

हाल ही में एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने कहा, ”मैं शादी के लिए कभी भी सामाजिक दबाव या उम्र की परवाह नहीं करती। लेकिन मैं शादी करना चाहता हूं. लेकिन उस सही इंसान को जिंदगी में आना ही होगा. मैं ऐसा उस दिन करूंगी जब कोई ऐसा आदमी आएगा जिसे देखकर ऐसा लगेगा कि वह शादी करने वाला है। या फिर मैं तभी शादी करूंगी जब मेरी ज़रूरतों की सूची पूरी हो जाएगी। उससे पहले मैं बिल्कुल ठीक थी.” पिछले साल के मध्य में पूर्व ब्यूटी क्वीन सुष्मिता सेन अचानक बीमार पड़ गईं थीं. सुष्मिता दिल की बीमारी से पीड़ित थीं। एंजियोप्लास्टी की गई है. स्टेंट भी बैठता है. सुष्मिता ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शारीरिक बीमारी की जानकारी दी। इसके बाद वह बहुत जल्दी ठीक हो गये. सुष्मिता ने जिम जाना शुरू कर दिया। वह हेवी एक्सरसाइज भी करते हैं. सुष्मिता को दिल की समस्याओं से जूझते देख कई लोग हैरान रह गए। सुष्मिता की हिम्मत से कई लोग डर गए थे. लेकिन सर्जरी के दौरान सुष्मिता ने उतनी ही हिम्मत दिखाई. हाल ही में एक इंटरव्यू में सुष्मिता ने बताया कि एंजियोप्लास्टी के दौरान वह मुस्कुरा रही थीं।

सुष्मिता का परिवार दो बेटियों से भरा हुआ है। जीवन में कई रिश्तों में शामिल। हालाँकि, उन्होंने किसी से शादी नहीं की। उनका जीवन उनकी बेटियों रेने और अलीशा के इर्द-गिर्द घूमता है। हालांकि, उनके पार्टनर रहमान उनके साथ हैं. कुछ दिनों पहले सुष्मिता ने साफ किया था कि वह अभी शादी के बारे में नहीं सोच रही हैं। सुष्मिता ने कहा कि उनके पास जीवन को अच्छे से जीने के लिए कई संसाधन हैं। शारीरिक बीमारी उन पर मानसिक रूप से हावी नहीं हो सकी। वह हमेशा दिल से अच्छा बनने की कोशिश करता है। सुष्मिता पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि वह हर पल को सेलिब्रेट करके सहेजने में यकीन रखती हैं।

रास्ते में कई समस्याएं आएंगी. लेकिन सुष्मिता सिर्फ उन्हीं तक सीमित रहने की पक्षधर नहीं हैं। बल्कि वह अपनी जिंदगी हंसी-मजाक और मौज-मस्ती में बिताना पसंद करते हैं। दिल की सर्जरी के दौरान भी वह मुस्कुरा रहे थे। इस बारे में सुष्मिता ने कहा, ”एंजियोप्लास्टी के दौरान मुझे बिल्कुल भी डर नहीं लगा. इसके बजाय, वह मुस्कुरा रहा था. डॉक्टर मुझे देखकर आश्चर्यचकित रह गये.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी का किया विरोध.

0

नया भारत घर में प्रवेश कर शत्रुओं का नाश करता है! मोदी ने दावा किया कि इसके उलट जब प्रधानमंत्री के विदेश मंत्रालय सीमा पार से हमले की बात कर रहे हैं, रक्षा मंत्री पाकिस्तान में घुसकर मारने की बात कर रहे हैं तो ऐसे गुप्त दुश्मन निकेश को विदेश मंत्रालय आधिकारिक तौर पर स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है संचालन? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल बिहार के जमुई में एक सभा में देश में आतंकी हमला होने पर पड़ोसी देश में घुसने की धमकी दी थी. यही धमकी उन्होंने आज राजस्थान के चुरू में एक सभा से दी. लोकसभा चुनाव से पहले भले ही मोदी बार-बार राष्ट्रवाद भड़काने के लिए सीमा पार से हमले की बात करते रहे हों, लेकिन देश के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि विदेशी धरती पर कोई गुप्त हमला या हत्या करना भारत की नीति नहीं है।

मोदी के नेतृत्व में पिछले दस वर्षों में उरी और पुलवामा में आतंकवादी हमलों के बाद, भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार हमले शुरू किए। लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवाद को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए कल बिहार और आज राजस्थान में सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए मोदी ने कहा, ”सीमा पर सेना की जवाबी कार्रवाई के सवाल पर इस सरकार ने पूरी छूट दे दी है. आज दुश्मन भी जान गए हैं, ये भारत नया भारत है, जो घर में घुसकर दुश्मनों को तबाह कर देता है.” केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी आज एक इंटरव्यू में दावा किया कि अगर कोई उग्रवादी भारत की शांति भंग करने की कोशिश करेगा. सरकार मुंहतोड़ जवाब देगी. उनके शब्दों में, “अगर वह (आतंकवादी) पाकिस्तान भाग जाता है, तो हम उसका पीछा करेंगे और पाकिस्तानी धरती पर उसे मार डालेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा है कि पाकिस्तान भी समझने लगा है कि भारत में वो ताकत है.” भले ही मोदी-राजनाथ ने वोटरों में राष्ट्रवाद भड़काने के लिए दुश्मन देशों की सीमा पार जाकर हमला करने की बात कही, लेकिन देश के विदेश मंत्रालय ने इससे इनकार कर दिया. ऐसी मांगों को स्वीकार करें. बल्कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर ऐसे दावे को खारिज कर दिया है. कल एक विदेशी अखबार ने दावा किया कि इजराइल की जासूसी एजेंसी मोसाद और रूस की एफएसबी की तरह भारतीय एजेंसी ‘रॉ’ (रिसर्च एंड एनालिटिकल विंग) लगातार पाकिस्तान समेत दूसरे देशों में छुपी भारत विरोधी ताकतों का पर्दाफाश कर रही है. अखबार का दावा है कि 2020 के बाद से पड़ोसी देशों की धरती पर भारत विरोधी उग्रवादियों की हत्याएं शुरू हो गई हैं. पिछले साल ही 15 आतंकवादी मारे गए हैं, जो भारत में तोड़फोड़ की विभिन्न कार्रवाइयों से जुड़े थे। मरने वालों में अधिकतर लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी समूहों के नेता थे। मारे गए लोगों में से कई कश्मीर में आतंकवादियों के आका थे। अखबार ने दावा किया कि उस काम में पाकिस्तानी युवाओं, स्थानीय अपराधियों या अफगान खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन उन्हें पीछे से ‘रॉ’ या परोक्ष रूप से नई दिल्ली द्वारा नियंत्रित किया गया था। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने विदेशी अखबार के दावे का खंडन किया और कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी है और भारत विरोधी प्रचार का हिस्सा है। विदेशी धरती पर चुन-चुनकर हत्या करना भारत सरकार का कदापि काम नहीं है
नीति नहीं.

सवाल यह उठ रहा है कि एक तरफ जब प्रधानमंत्री सीमा पार से हमले की बात कर रहे हैं और रक्षा मंत्री पाकिस्तान के अंदर घुसकर मारने की बात कर रहे हैं तो विदेश मंत्रालय आधिकारिक तौर पर ऐसे गुप्त दुश्मन के हमले को स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है? राजनीतिक खेमे के मुताबिक चुनाव प्रचार में वोट आकर्षित करने के लिए इस तरह के खून-खराबे वाले भाषण दिए जा सकते हैं. लेकिन विदेश नीति के कुछ दायित्व होते हैं। इसके अलावा कोई भी संप्रभु देश दूसरे संप्रभु देश में घुसकर उसके नागरिकों की हत्या नहीं कर सकता। ऐसे में यह युद्ध का नाम है. इसलिए भारत के लिए मामला कितना भी सकारात्मक क्यों न हो, ऐसे गुप्त अभियानों को कभी भी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के तहत मान्यता नहीं दी जाती है। सभी देश कमोबेश उस नीति का पालन करते हैं। ऐसे छापों में पकड़े गए किसी भी देश के एजेंटों को नागरिक के रूप में मान्यता देने से भी इनकार कर दिया जाता है। नरेंद्र मोदी के दूसरे चरण में पाकिस्तान में कई भारत विरोधी उग्रवादियों की ‘रहस्यमय मौत’ की खबरें आई हैं. खालिस्तानी आतंकी निज्जर की ‘हत्या’ पर कनाडा ने सीधे तौर पर भारत पर उंगली उठाई है. ऐसे में विदेशी अखबार की रिपोर्ट को देखते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना ​​है कि भारत भी सीआईए, मोसाद या केजीबी की शैली में दुश्मन राज्य की छत्रछाया में रहने वाले आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मोदी ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है. उनकी सरकार उसी नीति पर चल रही है.

सौरभ भारद्वाज का कहना है कि AAP को एकजुट रखने के लिए सुनीता केजरीवाल सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति हैं.

0

छुपा था। पति की गिरफ्तारी के बाद से अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता लगातार उनकी आवाज बनकर सामने आ रही हैं. इस बार आप मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा हालात में आप को एकजुट रखने के लिए सुनीता ही सही व्यक्ति हैं।

एक्साइज भ्रष्टाचार मामले में फंसे केजरीवाल जेल में रहते हुए भी मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं. सुनीता टीम और अपने पति के बीच संपर्क सूत्र का काम कर रही हैं। केजरीवाल भीड़ के लिए दिए गए विभिन्न संदेशों को कैमरे के सामने खुद पढ़ रहे हैं, साथ ही आप संयोजक का संदेश भी पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचा रहे हैं. हालांकि, विपक्ष केजरीवाल के इस्तीफे की मांग कर रहा है। और आप ये भी समझते हैं कि इस तरह ज्यादा देर तक दौड़ना नामुमकिन है. भविष्य में किसी को तो केजरी का उत्तराधिकारी चुनना ही होगा.

बीजेपी नेताओं के मुताबिक नए मुख्यमंत्री के चुनाव के आसपास आप में फूट पड़ने की प्रबल संभावना है. दरअसल, लड़ाई शुरू हो चुकी है और सांसद संजय सिंह के जेल से रिहा होने के बाद प्रतिद्वंद्विता और तेज हो गई है. आज सौरव ने कहा, ”इस समय पार्टी को संभालने के लिए सुनीता केजरीवाल सही व्यक्ति हैं.” बीजेपी के एक वर्ग के मुताबिक, यह टिप्पणी मुख्य रूप से संजय को रोकने के लिए है. सौरव ने तर्क दिया, ”केजरीवाल के भाषण को पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाकर सुनीता एक राजदूत के रूप में काम कर रही हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. हम इस मुद्दे पर प्रचार करना चाहते हैं.” केजरी गए जेल आम आदमी पार्टी का एक धड़ा भी सुनीता के साथ वोट के लिए प्रचार करने के पक्ष में है. पार्टी में कोई दरार नहीं होने का दावा करते हुए सौरव ने आगे कहा, ‘जमानत पर रिहा होने के बाद संजय मुख्यमंत्री आवास गए और सुनीता केजरीवाल के पैर छूकर झुके.’ संजय अरविंद का बड़े दादा की तरह सम्मान करते हैं। बीजेपी का प्रचार बेबुनियाद है.” इस संबंध में संजय ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिकायत की कि केजरीवाल को एक्साइज भ्रष्टाचार में फंसाया गया है. उन्होंने दावा किया कि राघव मगुंटा नाम के एक कारोबारी को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया था. राघव ने पिछले साल फरवरी से जुलाई तक सात बयान दिए। छह में उन्होंने केजरीवाल का नाम नहीं लिया, लेकिन सातवें बयान में उन्होंने केजरीवाल के खिलाफ बोला. संजय ने दावा किया कि उस व्यक्ति ने पांच महीने तक यातना सहने के बाद केजरीवाल के खिलाफ बयान दिया। उधर, बीजेपी नेता गौरव भाटियार ने दावा किया कि संजय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक्साइज भ्रष्टाचार की बात कहकर जमानत की शर्त तोड़ी है.

कल, जब सुनीता अपने पति का बयान पढ़ रही थीं, तो पीछे की दीवार के दोनों ओर भगत सिंह और बीआर अंबेडकर की तस्वीरों के बीच अरविंद केजरीवाल की तस्वीर लटकी हुई देखी जा सकती थी। उस चित्र के सामने गारद था। भगत सिंह के परिवार के सदस्य जदविंदर संधू ने इसका विरोध करते हुए कहा, ”केजरीवाल की तुलना मनीषी से करने की कोशिश की गई है. मैं आप नेतृत्व को सलाह देना चाहूंगा कि ऐसा न करें।’ केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में संदेश वाला पत्र पढ़ा। पत्र में केजरीवाल ने पार्टी विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि लोगों को परेशानी नहीं हो.

सुनीता ने कहा, ”अरविंद केजरीवाल ने सभी विधायकों को एक संदेश भेजा है।” इसके बाद उन्होंने पत्र पढ़ा. पत्र में आप प्रधान ने लिखा, ”मेरे जेल में होने से दिल्ली के लोगों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. प्रत्येक विधायक को प्रतिदिन अपने क्षेत्र में जाना चाहिए, लोगों की समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए और उनका समाधान करना चाहिए।” दिल्ली उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किये गये आप सांसद बुधवार को जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आये। जेल से बाहर आने के बाद संजय सुनीता से मिलने गए। एक समय आईआरएस अधिकारी के रूप में काम करने वाली सुनीता का राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं था। हालाँकि, उनके पति को उत्पाद शुल्क भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद, वह राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गईं। उन्होंने पिछले रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ की ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली को भी संबोधित किया था. पढ़ें कि देश में सत्ता में आने पर विपक्षी गठबंधन के सहयोगी कौन से छह वादे लागू करेंगे।