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क्या दही से भी पा सकते हैं बीमारियों से मुक्ति?

दही खाने से भी बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है! दही हमारी सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है। आयुर्वेद में दही के गुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके सेवन से पाचन में सुधार होता है और हड्डियों को मजबूती मिलती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि किसी भी शुभ काम से पहले दही चीनी का सेवन करने से वो काम अच्छे से संपन्न होता है। आज भी कई घरों में लोग घर से बाहर निकलने से पहले दही-चीनी खाकर निकलते हैं। दही को लेकर अधिकांश लोगों को यह भ्रम रहता है कि तासीर ठंडी होने की वजह से दही के सेवन से खांसी या जुकाम बढ़ सकता है। वास्तविकता में देखा जाए ऐसा कुछ भी नहीं है बशर्ते आप फ्रिज में रखी ठंडी दही का सेवन ना कर रहे हों। आयुर्वेद के अनुसार दही भारी, चिकनाई युक्त, कफ और पाचन शक्ति बढ़ाने वाला होता है। दही को बहुत ही पौष्टिक आहार माना गया है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके लिए दही का सेवन फायदेमंद है। दही में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है। अगर आप खाने के साथ में दही खाते हैं तो इससे खाना आसानी से पच जाता है।

रोजाना दही का सेवन करने से पाचन तंत्र सही रहता है और पेट से जुड़ी समस्याओं से बचाव होता है। पाचन तंत्र दुरुस्त करने के अलावा दही खाने के और भी कई फायदे हैं। आइये उनमें से प्रमुख फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं। दही की तासीर ठंडी होती है। इसमें लाभदायक बैक्टीरिया बहुत अधिक संख्या में होते हैं। जिस वजह से यह पेट से जुड़े रोगों में बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है। पेट से जुड़े किसी भी तरह के संक्रमण में दही का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। सर्दी होने पर बुखार होना आम बात है। हालांकि सर्दी होने पर अधिकांश लोग दही का सेवन नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि दही के सेवन से सर्दी वाले बुखार में आराम मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार सामान्यतया रात में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही का सेवन करते समय इसमें घी, शहद, चीनी, मूंग की दाल, आंवला चूर्ण या लवण भास्कर चूर्ण आदि में से कुछ ना कुछ ज़रूर मिला देना चाहिए। इन पदार्थों को बिना मिलाये दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही को आग या धूप आदि में गर्म करके नहीं खाना चाहिए, दही में कफ और पित्त को बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इसीलिए गर्मी, बसंत और शरद ऋतु में दही खाने से मना किया गया है। मानसून, हेमंत और शिशिर ऋतु में दही का सेवन अच्छा माना गया है। दही सेहत के लिए फायदेमंद तो है लेकिन कुछ ख़ास चीजों के साथ अगर आप दही का सेवन करते हैं तो इससे आपको सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। आयुर्वेद में ऐसे आहारों को विरूद्ध आहार कहा गया है। आइये दही के विरुद्ध संयोगो के बारे में जानते हैं।

दही की मलाई भी सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा दही की मलाई का सेवन खूनी बवासीर में भी लाभकारक है। आयुर्वेद के अनुसार दही के पानी में लघु, पाचन-शक्ति बढ़ाने वाले , कब्ज दूर करने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा यह पानी वात का अनुलोमक, स्रोतों को शुद्ध करने वाला और मल-पदार्थों का अनुलोमन करने वाला है। दही के पानी का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में  मदद करता है। दही की मलाई भी सेहत के लिए काफी गुणकारी होती है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा दही की मलाई का सेवन खूनी बवासीर में भी लाभकारक है।

आयुर्वेद के अनुसार दही के पानी में लघु, पाचन-शक्ति बढ़ाने वाले , कब्ज दूर करने वाले गुण होते हैं।इसमें लाभदायक बैक्टीरिया बहुत अधिक संख्या में होते हैं। जिस वजह से यह पेट से जुड़े रोगों में बहुत जल्दी फायदा पहुंचाती है। पेट से जुड़े किसी भी तरह के संक्रमण में दही का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। सर्दी होने पर बुखार होना आम बात है। हालांकि सर्दी होने पर अधिकांश लोग दही का सेवन नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि दही के सेवन से सर्दी वाले बुखार में आराम मिलता है। इसके अलावा यह पानी वात का अनुलोमक, स्रोतों को शुद्ध करने वाला और मल-पदार्थों का अनुलोमन करने वाला है। दही के पानी का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने में  मदद करता है।

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने क्या दिए संदेश?

वर्तमान में लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने कुछ संदेश दे दिए हैं! केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा सरकार का आखिरी बजट पेश किया। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ये अंतरिम बजट है। इस दौरान वित्त मंत्री का बजट भाषण करीब एक घंटे चला। मोदी 2.0 सरकार के इस अंतरिम बजट में करदाताओं को खुश होने के लिए बहुत कुछ नहीं मिला। सरकार पूंजीगत व्यय और अन्य सामाजिक कल्याण सेवाओं में निरंतर रुचि के साथ राजकोषीय कंसोलिडेशन के मार्ग पर आगे बढ़ती नजर आई है। जिस तरह से पीएम मोदी किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों पर खास फोकस की बात करते हैं। निर्मला सीतारमण ने भी एक बार फिर अलग-अलग वर्ग के समर्थन में आवाज बुलंद की। वित्त मंत्री ने अपना बजट भाषण शुरू करने से पहले ही साफ कर दिया कि उनका पूरा फोकस देश के विकास पर केंद्रित रहेगा। बजट रखने पहले पहले निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगले पांच साल बेहद अहम हैं, ये अभूतपूर्व विकास और 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के सुनहरे पल होंगे।

फिस्कल प्रूडेंस के रास्ते पर चलते हुए, सरकार की ओर से बार-बार कहा गया कि वह वित्त वर्ष 2026 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 फीसदी तक कम करना चाहती है। अंतरिम बजट के दौरान, फाइनेंस मिनिस्टर सीतारमण ने राजकोषीय घाटे को लेकर बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सकल घरेलू उत्पाद के 5.9 फीसदी के पिछले लक्ष्य से घटाकर सकल घरेलू उत्पाद का 5.8 प्रतिशत कर दिया है। वहीं वित्त वर्ष 2025 के लिए ये लक्ष्य GDP का 5.1 फीसदी निर्धारित किया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए शुद्ध उधारी 11.75 लाख करोड़ रुपये देखने को मिली है जबकि केंद्र की सकल उधारी 14.13 लाख करोड़ रुपये देखी गई है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025 के लिए रक्षा क्षेत्र में आवंटन को 4 फीसदी बढ़ाकर 6.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। ये वित्त वर्ष 2024 के बजटीय अनुमान 5.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, चाहे वह प्रत्यक्ष कर हो या अप्रत्यक्ष। हालांकि, सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड में किए गए निवेश को एक और साल के लिए टैक्स फ्री कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025 में कुल राजस्व प्राप्ति अब 30 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 26.99 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 के लिए पूंजीगत व्यय परिव्यय का बजट 11 फीसदी बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का 3.4 फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में पूंजीगत व्यय तीन गुना होने से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर कई गुना प्रभाव पड़ा है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए लगभग 40,000 सामान्य रेल बोगियों को वंदे भारत मानकों में परिवर्तित किया जाएगा। इसके अलावा, तीन प्रमुख आर्थिक रेलवे कॉरीडोर यानी ऊर्जा, खनिज, और सीमेंट कॉरीडोर तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरीडोर और हाई ट्रैफिक डेंसिटी कॉरीडोर्स लागू किए जाएंगे। सरकार ने महिला उद्यमियों को 30 करोड़ मुद्रा योजना ऋण उपलब्ध कराए हैं। एसटीईएम पाठ्यक्रमों में अब 43 फीसदी नामांकन लड़कियों और महिलाओं का है। ये दुनिया में सबसे ज्यादा है। वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम आवास योजना के तहत 70 फीसदी से अधिक घर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को दिए गए हैं। सरकार लड़कियों 9-14 वर्ष के लिए सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण को प्रोत्साहित करेगी। बेहतर पोषण वितरण के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 में तेजी लाई जाएगी।

सरकार अगले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अतिरिक्त 2 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रख रही है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि नागरिकों को घर खरीदने या बनाने में मदद के लिए मध्यम वर्ग के लिए एक नई आवास योजना शुरू की जाएगी। सरकार राज्यों को प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्र विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड में किए गए निवेश को एक और साल के लिए टैक्स फ्री कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2025 में कुल राजस्व प्राप्ति अब 30 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 26.99 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से अधिक है।इसके अलावा, विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राज्यों को दीर्घकालिक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किया जाएगा। सरकार ने कहा कि लक्षद्वीप सहित आईलैंड्स में बंदरगाह कनेक्टिविटी, पर्यटन बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।

कैसा रहा आर्मी के लिए आवंटित बजट?

आज हम आपको आर्मी के लिए आवंटित बजट के बारे में जानकारी देने वाले हैं! सरकार रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक पर लगातार जोर दे रही है। इस बार तो डीप-टेक के लिए नई स्कीम का भी ऐलान किया गया है। लेकिन लगातार दो सालों से उस फंड का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है जो स्वदेशी कंपनियों को प्रोटाइप विकसित करने में मदद देने के लिए बनाया गया है। पिछले बार की तरह ही इस बार भी आर्मी के लिए दिए इस फंड का महज एक पर्सेंट ही खर्च हो पाया। लगातार दो बार से यही स्थिति रही है और अब इस बार आर्मी के लिए यह फंड घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछली बार इस मद में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। एयरफोर्स के लिए भी यह फंड है। जिसका इस्तेमाल भी कम हो पाया। हालांकि यह आर्मी से थोड़ा बेहतर है। एयरफोर्स के लिए दिए गए फंड का करीब 30 पर्सेंट खर्च हो पाया। इस बार एयरफोर्स के लिए इस फंड में थोड़ी बढ़ोतरी भी की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक ये टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड खासकर नए स्टार्टअप, एमएसएमई और अकेडमिया को ध्यान में रखकर बनाया गया ताकि डिफेंस में डीआरडीओ के साथ मिलकर टेक्नॉलजी इनोवेशन के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके।

पिछले साल आर्मी के लिए टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड 100 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था। यह उन स्वदेशी कंपनी या स्टार्टअप या युवाओं को मिलता जो आर्मी की जरूरत के हिसाब से कोई वेपन या उपकरण तैयार कर रहे हैं और उन्हें उसका प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए आर्थिक मदद दी जाती। लेकिन यह 100 करोड़ रुपये का बजट संशोधित बजट में 1 करोड़ रुपये हो गया। ऐसा तब होता है, जब फंड दिया जाता है और करीब आधा साल गुजरने के बाद भी उस दिशा में कोई प्लानिंग ना हुई हो और बजट का इस्तेमाल ना किया गया हो। ऐसा ही पिछली बार भी हुआ था। पिछले बार एयरफोर्स प्रोजेक्ट्स के लिए 1131 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन ये भी संशोधित बजट में घटकर 388 करोड़ रह गया। इस बार एयरफोर्स प्रोजेक्ट्स के लिए टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड में 1697 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डिफेंस पर कहा कि नई डीप-टेक टेक्नोलॉजी को लाया जाएगा। आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाएंगे। एयरफोर्स के लिए भी यह फंड है। जिसका इस्तेमाल भी कम हो पाया। हालांकि यह आर्मी से थोड़ा बेहतर है। एयरफोर्स के लिए दिए गए फंड का करीब 30 पर्सेंट खर्च हो पाया। इस बार एयरफोर्स के लिए इस फंड में थोड़ी बढ़ोतरी भी की गई है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक ये टेक्नॉलजी डिवेलपमेंट फंड खासकर नए स्टार्टअप, एमएसएमई और अकेडमिया को ध्यान में रखकर बनाया गया ताकि डिफेंस में डीआरडीओ के साथ मिलकर टेक्नॉलजी इनोवेशन के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जा सके।डीप टेक टेक्नोलॉजी यानी क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई, रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और एयरोस्पेस जैसे उद्योग शामिल हैं। देश की रक्षा के क्षेत्र में अब निजी कंपनियों को ज्यादा मौके मिलने वाले हैं। सरकार की योजना देश को ज्यादा ताकतवर बनाने की है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी साल के अंत की समीक्षा में कहा था कि रक्षा अधिग्रहण परिषद डीएसी ने 2023 में भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति को बढ़ाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डीएसी ने फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख डसॉल्ट एविएशन से भारतीय नौसेना के लिए संबंधित उपकरण, हथियार, सिम्युलेटर और स्पेयर सहित 26 राफेल समुद्री विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। FY22 में रक्षा व्यय पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2023 में कहा था कि साल 2047 तक जब हम आजादी के 100 साल मनाएंगे, तब एक विकसित देश बनने के लिए भारत को आधुनिक उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की जरूरत है। अगर हम एक विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं,डीएसी ने 2023 में भारत के सशस्त्र बलों की शक्ति को बढ़ाने के लिए 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, डीएसी ने फ्रांसीसी रक्षा प्रमुख डसॉल्ट एविएशन से भारतीय नौसेना के लिए संबंधित उपकरण, हथियार, सिम्युलेटर और स्पेयर सहित 26 राफेल समुद्री विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी। FY22 में रक्षा व्यय पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए। तो हमें आधुनिक हथियारों और उपकरणों के साथ मजबूत सशस्त्र बलों की जरूरत पड़ेगी। अभी दुनिया में चौथी सबसे ताकतवर मिलिट्री भारत के पास है। भारत इस मामले में जापान और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों से आगे है। चीन तीसरी सबसे बड़ी मिलिट्री ताकत है।

आखिर कब होंगे 2024 के लोकसभा चुनाव?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव कब होने वाले हैं! दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उन अटकलों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि 16 अप्रैल को लोकसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। दिल्ली के चीफ इलेक्शन कमिश्नर की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा गया है, ‘दिल्ली चुनाव आयोग की तरफ से जारी एक सर्कुलर के संदर्भ में मीडिया से कुछ सवाल आ रहे हैं, जिसमें यह पूछा जा रहा है कि क्या 16 अप्रैल, 2024 लोकसभा चुनाव की संभावित तारीख है, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस तारीख का उल्लेख केवल अधिकारियों के लिए केंद्रीय निर्वाचन आयोग ईसीआई के चुनाव योजना के अनुसार गतिविधियों की योजना बनाने के ‘संदर्भ’ के लिए किया गया था।’ दिल्ली सीईओ कार्यालय की ओर से एक फॉलो-अप पोस्ट में भारत के चुनाव आयोग को भी टैग किया गया। लोकसभा चुनाव के लिए वास्तविक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि अप्रैल या मई में मतदान हो सकता है। बता दें कि 2019 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुआ था, जो 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई को समाप्त हुआ था, जिसके नतीजे 23 मई को घोषित किए गए थे।

अनुमान के मुताबिक, इस साल लोकसभा चुनाव के लिए देशभर में कुल 11.80 लाख मतदान केंद्र बनाने की आवश्यकता होगी। अब चुनाव आयोग ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी की है. वायरल लेटर पर चुनाव आयोग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर साफ किया कि लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव संबंधी गतिविधियों की योजना बनाने और उसे समय पर पूरा करने की जरूरत है. चुनाव आयोग के योजनाकार इस संबंध में योजनाएं बना रहे हैंलोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने के दौरान, प्रत्येक मतदान केंद्र पर ईवीएम के दो सेट की आवश्यकता होगी–एक, लोकसभा सीट के लिए और दूसरा, विधानसभा सीट के लिए आयोग ने सरकार को भेजे गए पत्र में पूर्व के अनुभवों के आधार पर कहा है कि मतदान के दिन विभिन्न स्तर पर त्रुटिपूर्ण इकाइयों को बदलने के लिए कुछ प्रतिशत ‘कंट्रोल यूनिट’ सीयू, ‘बैलट यूनिट’ बीयू और ‘वोटर-वेरिफियेबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ वीवीपैट मशीनों की आवश्यकता होती है।

बता दे कि सोशल मीडिया पर लोकसभा चुनाव की तारीख वाला एक लेटर खूब वायरल हो रहा है. इस लेटर के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया है. विभिन्न संबंधित अधिकारियों को संबोधित करते हुए लेटर में ऐसा संकेत दिया गया है कि 2024 का लोकसभा चुनाव 16 अप्रैल से शुरू होगा. वायरल नोटिफिकेशन में संबंधित अधिकरियों को इसी तारीख को ध्यान में रखकर बाकी चीजें प्लान करने का सुझाव दिया गया है. अब चुनाव आयोग ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी की है. वायरल लेटर पर चुनाव आयोग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर साफ किया कि लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव संबंधी गतिविधियों की योजना बनाने और उसे समय पर पूरा करने की जरूरत है. चुनाव आयोग के योजनाकार इस संबंध में योजनाएं बना रहे हैं…

चुनाव आयोग ने दोहराया कि वायरल लेटर में दी गई तारीख बस एक सुझाव है, और यह जरूरी नहीं है कि इसी तारीख से चुनाव होंगे. तारीख इसलिए दी गई थी ताकि संबंधित अधिकारी जिला स्तर पर चुनाव की योजनाओं को समय पर पूरा कर सकें और व्यवस्था बना सकें. आयोग ने बताया कि चुनाव को लेकर चुनाव आयोग द्वारा पूरा शेड्यूल जारी किया जाएगा. इस स्पष्टीकरण के साथ ही आयोग ने उम्मीद जताई की चुनाव की तारीख को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस पर विराम लग जाएगा, इस बात पर जोर देते हुए कि इनमें से अधिकांश गतिविधियों को जिला चुनाव अधिकारियों/रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा जिला स्तर पर किया जाता है, तो इसी संबंध में उन्हें 19 जनवरी को एक लेटर जारी किया गया था. दिल्ली सीईओ कार्यालय की ओर से एक फॉलो-अप पोस्ट में भारत के चुनाव आयोग को भी टैग किया गया। लोकसभा चुनाव के लिए वास्तविक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि अप्रैल या मई में मतदान हो सकता है। बता दें कि 2019 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुआ था, जो 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई को समाप्त हुआ था, जिसके नतीजे 23 मई को घोषित किए गए थे।चुनाव आयोग ने बयान में स्पष्ट किया कि चुनाव की संभावित तारीख 16 अप्रैल जो कि सोशल मीडिया पर भी वायरल है, वो चुनाव की संभावित तारीख के तौर पर सुझाव दिया गया था!

आखिर क्या है कल्कि धाम शिलान्यास समारोह?

आज हम आपको कल्कि धाम शिलान्यास समारोह के बारे में जानकारी देने वाले हैं! कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पीएम मोदी को कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह का निमंत्रण दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी न्योते को सहर्ष स्वीकार करते हुए प्रमोद कृष्णम का धन्यवाद किया है। मोदी ने कहा कि आस्था और भक्ति से जुड़े इस पावन अवसर का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। आचार्य प्रमोद ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पीएम के साथ निमंत्रण देते हुए कि तस्वीर भी साझा की है।

कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कृष्णम ने अपने एक्स हैंडल पर पीएम संग तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि 19 फरवरी को आयोजित श्री कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री,आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, मेरे इस पवित्र भाव को स्वीकार करने के लिये माननीय प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार एवं साधुवाद।

प्रधानमंत्री मोदी ने उस ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि आस्था और भक्ति से जुड़े इस पावन अवसर का हिस्सा बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। निमंत्रण के लिए आपका हृदय से आभार आचार्य प्रमोद जी। पीएम के इस ट्वीट पर आचार्य प्रमोद ने दोबारा ट्वीट करते हुए लिखा कि श्री हरि विष्णु के दशम और अंतिम अवतार भगवान श्री कल्कि नारायण की अवतरण स्थली संभल की पावन धरा पर आपका स्वागत है प्रभु। प्रमोद कृष्णम और पीएम मोदी के बीच ट्विटर संवाद के बाद राजनीतिक हलको में चर्चा तेज होने वाली है। कांग्रेस के इस सीनियर नेता ने राम मंदिर के सफल प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद भी पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं।

यही नहीं आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बनना उनके जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों में था और वह वहां से एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटे हैं जो कभी उनसे दूर नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे दो पन्नों के एक पत्र में यह बात कही। पत्र की प्रति एक्स पर साझा करते हुए मोदी ने कहा, दो दिन पूर्व मुझे आदरणीय राष्ट्रपति जी का एक बहुत ही प्रेरणादायी पत्र मिला था। मैंने आज अपनी कृतज्ञता पत्र के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देश भर में जश्न का माहौल भारत की शाश्वत आत्मा की एक निर्बाध अभिव्यक्ति और देश के पुनरुत्थान में एक नए चक्र की शुरुआत है। इसके जवाब में मोदी ने लिखा,अयोध्या धाम में अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों का साक्षी बनकर लौटने के बाद मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं। मैं एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटा हूं। एक ऐसी अयोध्या, जो कभी मुझसे दूर नहीं हो सकती।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को उनकी शुभकामनाओं और स्नेह के लिए आभार जताया तथा कहा कि उन्होंने पत्र के हर शब्द में अपने करुणामयी स्वभाव और प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन पर असीम प्रसन्नता को व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि जिस समय उन्हें यह पत्र मिला था उस वक्त वह एक अलग ही भाव यात्रा में थे और इस पत्र ने उन्हें उनके मन की भावनाओं को संभालने और उनमें सामंजस्य बिठाने में अपार सहयोग और संबल दिया। उन्होंने कहा, मैंने एक तीर्थयात्री के रूप में अयोध्या धाम की यात्रा की। जिस पवित्र भूमि पर आस्था और इतिहास का ऐसा संगम हुआ हो वहां जाकर मेरा मन अनेक भावनाओं से विह्वल हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए एक सौभाग्य भी है और एक दायित्व भी है।

राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा लिखे गए पत्र में प्रधानमंत्री के 11 दिन के व्रत अनुष्ठान और इससे जुड़े यम-नियमों के उल्लेख पर मोदी ने कहा, हमारा देश ऐसे अनगिनत लोगों का साक्षी रहा है जिन्होंने शताब्दियों तक अनेक संकल्प व्रत किए जिससे कि रामलला पुनः अपने जन्मस्थान पर विराज सकें। उन्होंने कहा सदियों तक चले इन व्रतों की पूर्णाहुति का संवाहक बनना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था और इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के साथ रामलला के साक्षात दर्शन, उनके रूप से साक्षात्कार और उनके स्वागत का वह क्षण अप्रतिम था। उन्होंने कहा वह क्षण प्रभु श्रीराम और भारत के लोगों के आशीर्वाद से ही संभव हुआ और इसके लिए मैं कृतज्ञ रहूंगा। राष्ट्रपति द्वारा लिखे गए पत्र में पीएम-जनमन और जनजातीय समाज में अति पिछड़ों के सशक्तीकरण का उल्लेख किए जाने पर मोदी ने कहा कि इसके जैसे कई अभियान आज देशवासियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।

आखिर कैसा था इस बार का अंतरिम बजट?

आज हम आपको बताएंगे कि इस बार का अंतरिम बजट कैसा था! लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार के अंतरिम बजट से लोगों को राहत की फुहारों की उम्मीदें थीं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों को उम्मीद थी पीएम किसान सम्मान निधि की रकम बढ़ने की। सैलरीड क्लास को उम्मीद थी टैक्स में राहत की। महिला, गरीब, युवा, किसान सबने सीधे-सीधे कुछ रियायतों की आस लगा रखी थी। ये चार तो पीएम मोदी के लिए सबसे बड़ी जातियां हैं। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में भी बताया कि सरकार का मुख्य फोकस इन्हीं चार वर्गों पर है। ये प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। लेकिन कुछ खास नहीं मिला। न किसान सम्मान निधि बढ़ी और न ही इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव हुआ। इनकम टैक्स ही नहीं, सभी डायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ। इनडायरेक्ट टैक्स में भी कोई बदलाव नहीं हुआ। विपक्ष बजट की आलोचना कर रहा। समाजवादी पार्टी के मुखिया तो वित्त मंत्री के बजट भाषण को मोदी सरकार का ‘विदाई भाषण’ करार दिया है। आखिर इस बजट के सियासी निहितार्थ क्या हैं? बजट के जरिए समझा जा सकता है कि चुनाव से पहले पीएम मोदी के दिमाग में आखिर क्या चल रहा। सरकार की 10 साल की उपलब्धियों का बखान, पिछली सरकार को कोसकर विपक्ष पर हमला, किसी भी तरह की नई लोकलुभावन योजना से परहेज और भविष्य में और ‘अच्छे दिन’ के सपने। मोटे तौर पर ये 4 बातें ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण का निचोड़ हैं।

मुद्रा योजना से लेकर पीएम किसान योजना तक, मुफ्त राशन स्कीम से लेकर अभूतपूर्व इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर आर्थिक मोर्चे पर देश के शानदार प्रदर्शन तक…निर्मला ने बजट भाषण में मोदी सरकार की पिछले 10 साल की उपलब्धियों का बखान किया। ‘पहले और अब’ के जरिए उन्होंने मोदी सरकार के आने के बाद इकॉनमी से लेकर तमाम क्षेत्रों में क्या-क्या बदलाव आया, इसके जरिए भारत की बुलंद तस्वीर दिखाने की कोशिश की। नजीर के तौर पर, 2013-14 में 2.2 लाख रुपये की आय इनकम टैक्स के दायरे से बाहर थी जबकि अब 7 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस तरह उन्होंने पिछली सरकारों को भी कोसा। यहां तक कि 2014 से पहले के कथित आर्थिक कुप्रबंधन पर श्वेत पत्र लाने का ऐलान किया।

बजट भाषण में किसी भी नई लोकलुभावन स्कीम का ऐलान नहीं हुआ जिसे मुफ्त की रेवड़ी कहा जा सके। ये संकेत है कि लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी मुफ्त की रेवड़ियों के मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करने वाले हैं। निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में भविष्य को लेकर और ‘अच्छे दिन’ के सपने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का वादा हो या रूफटॉप सोलर स्कीम के जरिए 1 करोड़ लोगों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा हो, किराये के घर या स्लम, चॉल या फिर अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को घर देने के लिए नई हाउसिंग स्कीम का ऐलान हो या 2047 तक विकसित भारत बनाने का वादा…बजट भाषण सुनहरे भविष्य का सपना भी दिखाता है।

रूफटॉप सोलर स्कीम यानी छत पर सौर ऊर्जा वाली स्कीम का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन को शाम में की थी। इस महत्वाकांक्षी स्कीम के जरिए 1 करोड़ लोगों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है। सरकार का दावा है कि इससे हर लाभार्थी परिवार को सालाना 15 से 18 हजार रुपये का फायदा पहुंचेगा। ये ऐसी स्कीम है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव में जमकर भुनाने वाले हैं, भले ही अभी इसका ऐलान हुआ है, धरातल पर उतरना बाकी है। इसके जरिए ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर उनका प्रहार और धारदार होगा। इसके जरिए उन्होंने मुफ्त में दिए बिना ही मुफ्त की बिजली के इंतजाम का विजन पेश किया है जो मुफ्त बिजली-मुफ्त पानी पॉलिटिक्स पर सीधा प्रहार है।

बजट में किसी भी नई लोकलुभावन स्कीम का ऐलान नहीं करने और सीधे-सीधे किसी वर्ग को नई रियायत नहीं देने की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री मोदी का केंद्र की सत्ता में हैटट्रिक लगाने का पूर्ण भरोसा है। ये बताता है कि मोदी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वह फिर सत्ता में आ रहे हैं। निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट भाषण में इस भरोसे का ये कहकर पुरजोर इजहार भी किया कि जुलाई में वह पूर्ण बजट पेश करेंगी। इस भरोसे की बड़ी वजह संभवतः ‘राम लहर’ है। निर्मला ने भले ही परंपरा का हवाला देकर अंतरिम बजट में किसी तबके के लिए बड़ी रियायत का ऐलान नहीं किया लेकिन अंतरिम बजट तो 2019 में भी पेश हुआ था। मोदी सरकार का ही था। तब पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था और उसमें पीएम किसान सम्मान निधि के बारे में ऐलान था। ये स्कीम गेमचेंजर साबित हुई और 2019 में मोदी सरकार रिपीट में उसका बड़ा योगदान माना गया। लेकिन इस बार इस तरह की किसी गेमचेंजर स्कीम का ऐलान नहीं होना बताता है कि नरेंद्र मोदी सरकार को पक्का भरोसा है कि चुनाव बाद वही फिर सत्ता में आएगी। इस भरोसे की एक बड़ी वजह अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण है। 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूरे देश में एक जबरदस्त ‘राम लहर’ बनी है। नरेंद्र मोदी को अपनी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में किए गए कामकाज और ‘राम’ पर भरोसा है।

आखिर कौन-कौन से बड़े नेता हो रहे हैं राज्यसभा से रिटायर?

आज हम आपको बताएंगे कि राज्यसभा से कौन-कौन से बड़े नेता रिटायर हो रहे हैं! राज्यसभा की 56 सीटों अप्रैल के पहले हफ्ते में खाली होने जा रही हैं। इन्हें लेकर सोमवार केंद्रीय चुनाव आयोग ने चुनावों को ऐलान किया। इन सीटों के लिए आगामी 27 फरवरी को चुनाव होगा। इन खाली सीटों पर राजनीति के बड़े बड़े चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, एसपी की जया बच्चन, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, उद्योग मंत्री नारायण राणे, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, अखिलेश प्रताप सिंह, नासिर हुसैन जैसे लोग शामिल हैं। रिटायर हो रहे अन्य प्रमुख चेहरों में आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, बीजेपी के मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी, सीनियर बीजेपी लीडर मुरलीधर, सुशील कुमार मोदी, पार्टी प्रवक्ता जीबी नरसिम्हा राव, सुधांशु त्रिवेदी, शिवसेना के अनिल देसाई, एनसीपी की वंदना चव्हाण, कांग्रेस के कुमार केतकर, आरजेडी के मनोज कुमार झा व अशफाक करीम, जेडीयू के अनिल प्रसाद हेगड़े और वशिष्ठ नारायण सिंह शामिल हैं। राज्यसभा के इन चुनावों के मद्देनजर माना जा रहा है कि उच्च सदन में सियासी तस्वीर कुछ बदल सकती है। जहां कुछ सीटों में बीजेपी को नुकसान होगा तो वहीं कुछ राज्यों में उसे फायदा हो सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हुई बीजेपी की जीत उसकी सीटों में इजाफा करने में मददगार साबित होगी। जहां एक ओर लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हो रहे इन चुनावों को लेकर तमाम सियासी दलों के सामने कई तरह के प्रश्न व समीकरण घूम रहे हैं। ज्यादातर पार्टियां इन सीटाें के लिए ऐसे उम्मीदवार देना चाहेंगी, जिसके जरिए वह आने वाले लोकसभा चुनाव में एक संकेत दे सकें। राजनीतिक दल मान रहे हैं कि राज्यसभा में उम्मीदवारों को चयन चुनाव के मद्देनजर कई तरह के संकेत देगा। इसीलिए विभिन्न पार्टियां जातिगत, सामाजिक समीकरणों को देखते हुए अपने उम्मीदवारों को चुनेंगी। वहीं कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी रिटायर हो रहे अपने कई सांसदों को लोकसभा लड़वा सकती है।

उल्लेखनीय है कि सदन में फिलहाल सबसे ज्यादा सदस्य बीजेपी के हैं, जिनकी तादाद 93 है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर कांग्रेस की संख्या 30 है। इस चुनाव में कांग्रेस की नौ सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन उसे दस सीटें मिलने का अनुमान है। इसमें कुछ राज्यों में जहां उसे नुकसान हो रहा है तो वहीं कुछ राज्यों में सीटों का फायदा है। बिहार में वह अपनी एक सीट बचा रही है। गुजरात में दो सीटों का तो बंगाल में एक सीट का नुकसान होगा, वहीं हिमाचल प्रदेश व राजस्थान में एक-एक सीट तो तेलंगाना में दो सीटों का फायदा होने जा रहा है। जबकि कर्नाटक में पार्टी अपनी तीनों सीटें और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में अपनी एक-एक सीट बचा पाने में कामयाब दिख रही है।

यहां देखना भी अहम होगा, जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, क्या उनके दल फिर से उन्हें मौका देंगे। इनमें अहम नाम पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, जया बच्चन व प्रकाश जावड़ेकर जैसे नामों का है। छह बार के राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय मनमोहन सिंह का अपनी नरम सेहत के चलते अब फिर से राज्यसभा में लौटना मुश्किल लग रहा है। उनकी सेहत के चलते अब शायद ही कांग्रेस उन्हें मौका दे। वह फिलहाल राजस्थान से सांसद हैं। पिछली बार भी कांग्रेस ने 86 साल की उम्र में उन्हें सम्मान स्वरूप प्रतीकात्मक रूप से राज्यसभा भेजा था। राजनीतिक दल मान रहे हैं कि राज्यसभा में उम्मीदवारों को चयन चुनाव के मद्देनजर कई तरह के संकेत देगा। इसीलिए विभिन्न पार्टियां जातिगत, सामाजिक समीकरणों को देखते हुए अपने उम्मीदवारों को चुनेंगी। वहीं कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी रिटायर हो रहे अपने कई सांसदों को लोकसभा लड़वा सकती है।वहीं जया बच्चन पर नजर रहेगी कि एसपी उन्हें फिर से मौका देती है या नहीं। इनमें अहम नाम पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, जया बच्चन व प्रकाश जावड़ेकर जैसे नामों का है। छह बार के राज्यसभा सांसद 92 वर्षीय मनमोहन सिंह का अपनी नरम सेहत के चलते अब फिर से राज्यसभा में लौटना मुश्किल लग रहा है।इसके अलावा, जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी पिछली बार टीएमसी के समर्थन से वेस्ट बंगाल से जीते थे। देखना होगा कि पार्टी उन्हें कहां से भेजती है। हालांकि कपिल सिब्बल के पार्टी छोड़ने के बाद बड़े वकीलों में सिंघवी सबसे अहम हैं, जो पार्टी के मुश्किल वक्त में खड़े होते रहे हैं।

भारत के पड़ोसियों को विदेश मंत्री ने क्या दी नसीहत?

हाल ही में विदेश मंत्री ने भारत के पड़ोसियों को एक नसीहत दे दी है! यह स्वीकार करना जरूरी है कि चीन भारत के पड़ोसी देशों को प्रभावित करेगा और भारत को ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति से नहीं डरना चाहिए। यह कहना है विदेश मंत्री एस. जयशंकर का। मंगलवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई में छात्रों के साथ संवाद सत्र में मालदीव से तनावपूर्ण संबंधों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर पड़ोसी देश में समस्याएं हैं, लेकिन अंततः पड़ोसियों को एक-दूसरे की जरूरत होती है। जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते चीनी प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा है, लेकिन इसे भारतीय कूटनीति की विफलता कहना गलत होगा। उन्होंने कहा, ‘हमें समझना चाहिए, चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में, प्रतिस्पर्धी राजनीति के तहत इन देशों को प्रभावित करेगा। मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए। मुझे लगता है कि हमें यह मानना चाहिए वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है। आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा।’ जयशंकर ने कहा कि एक प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के नाते, चीन संसाधनों का इस्तेमाल करके चीजों को अपने तरीके से आकार देने की कोशिश करेगा।

उन्होंने कहा, ‘मैं आज कहना चाहता हूं… हमें प्रतिस्पर्धा से डरना नहीं चाहिए। हमें प्रतिस्पर्धा का स्वागत करना चाहिए और कहना चाहिए कि मुझमें प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है।’ मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान के बारे में एक सवाल पर जयशंकर ने भारतीय कूटनीति पर भरोसा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘हर देश के पड़ोस में समस्याएं हैं। समस्याएं तो होंगी। हमारा काम अनुमान लगाना, आकलन करना और प्रतिक्रिया देना है। अंत में पड़ोसियों के एक-दूसरे के साथ संबंध रहते हैं।’ उन्होंने बताया कि राजनीति में तीखे रुख अपनाए जाते हैं और कूटनीति हमेशा उन तीखे रुख से नहीं चलती। उन्होंने कहा, ‘आखिरकार, पड़ोसियों को एक-दूसरे की जरूरत होती है। इतिहास और भूगोल बहुत शक्तिशाली ताकतें हैं। इससे कोई बच नहीं सकता।’ इस महीने की शुरुआत में, मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से कहा था कि वह 15 मार्च तक मालदीव में तैनात सभी भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस बुला ले।

यही नहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रेड सी में नेवी की ओर से युद्धपोतों को तैनात किए जाने को लेकर कहा है कि भारत की क्षमता के साथ ये उसके हितों के लिए जरूरी है कि वो मुश्किल हालात में मददगार की भूमिका में आए। IIM-मुंबई में छात्रों के साथ बात करते हुए एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारतीय नेवी ने इस क्षेत्र में अपने 10 पोत तैनात किए हैं। लाल सागर के इलाके में समुद्री पायरेट्स के साथ-साथ मर्चेंट नेवी के जहाजों पर भी हमले हो रहे हैं। उन्होंने बीते कुछ समय में विकसित हुए भारत की नैरेटिव का विस्तार से जिक्र करते हुए मददगार वाली नीति पर जोर देते हुए कहा कि अगर हमारे पड़ोस में कुछ ठीक नहीं हो रहा है और हम कहें कि हमारा इससे कोई लेना देना नहीं है तो हमें जिम्मेदार देश नहीं माना जाएगा। जब आप मुसीबत में होंगे तो पड़ोसी देश भी ऐसे ही कहेंगे। चीन को लेकर सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि चीन की प्रतिद्वंद्विता की पॉलिटिक्स से डरने की जरूरत नहीं है।

विदेश मंत्री ने इस दौरान कई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने तुर्किये में आए भूकंप से लेकर कोविड महामारी के दौरान टीके और डॉक्टरी मदद मुहैया करवाने में भारत की भूमिका को लेकर बात की। इसके अलावा मालदीव के साथ द्विपक्षीय संबंधों में आ रही चुनौतियों को लेकर जयशंकर ने कहा कि लोगों को डिप्लोमेसी पर भरोसा करना चाहिए। कई बार देश बेहद विपरीत पोजिशन लेते हैं, लेकिन डिप्लोमेसी में इसे ऐसे नहीं देखा जाता। डिप्लोमेसी के जरिए मुद्दों का अध्ययन, विश्लेषण और प्रतिक्रिया करने का काम होता है।

जयशंकर ने चीन की विस्तारवादी विदेश नीति पर किए गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये समझना जरूरी है कि वह पड़ोसी देशों पर असर डालने की कोशिश करता रहेगा। ऐसे में किसी को प्रतिद्वंदिता वाली पॉलिटिक्स से डरना नहीं चाहिए। ग्लोबल पॉलिटिक्स एक प्रतिद्वंदी गेम है, ऐसे में यही होना चाहिए कि हर कोई बेहतर करे। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों को एक दूसरे की जरूरत पड़ती है क्योंकि इतिहास और ज्योग्राफी बेहद पावरफुल फोर्सेस हैं। इसके अलावा भारत की G-20 अध्यक्षता को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दुनिया में किसी को ऐसा नहीं लगा था कि बीस देश एकमत हो जाएंगे, लेकिन फिर पीएम नरेंद्र मोदी को कौन मना करता? उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने अलग अलग विचार रखने वाले देशों को एकजुट किया, ये काबिले तारीफ है। इसके अलावा विदेश मंत्री ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ी भारत की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों में इसे लेकर खासी उत्सुकता और उत्साह है।

आखिर कहां है भारत के संविधान की मूल प्रति?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत के संविधान की मूल प्रति आखिर कहां है! गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। इस साल, हमने गणतंत्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ मनाई। ये वही दिन था जब नए आजाद भारत के संस्थापक कठिन प्रयास से एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर पहुंचे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को कॉन्स्टीट्यूशन ड्राफ्टिंग का काम पूरा किया और 26 जनवरी, 1950 को ये लागू हुआ। संविधान सभा ने इस संविधान का मसौदा तैयार किया। दो साल से अधिक समय की मेहनत से संविधान की दो लिखित प्रतियों को पेश किया गया था। इस पर स्वतंत्रता आंदोलन के दिग्गजों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, वो सुलिखित संविधान के वॉल्यूम्स कहां हैं? वास्तव में, भारत के संविधान की मूल सुलेखित प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में प्रदर्शन के लिए संरक्षित हैं। इन प्रतियों को उसी तरह से संरक्षित किया गया है जैसे काहिरा में मिस्र के संग्रहालय में शाही ममियों को संरक्षित किया गया है। संविधान के अंग्रेजी और हिंदी संस्करणों को 45 फीसदी सापेक्ष आर्द्रता ह्यूमिडिटी पर 1 फीसदी से कम ऑक्सीजन के माइक्रो वातावरण में डिजाइन किए गए सील ग्लास रिसेप्टेकल्स में रखा गया है। पूरा ग्लास केस सुनिश्चित करता है कि ये दस्तावेज नमी, तापमान या प्रदूषण से प्रभावित नहीं हो।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर की नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला एनपीएल की ओर से अमेरिका के गेटी कंजर्वेशन इंस्टीट्यूट जीसीआई के सहयोग से बनाए गए ये ग्लास केस 1994 से संसद लाइब्रेरी के एक स्ट्रांग रूम में रखे गए हैं। ये दोनों ग्लास रिसेप्टेकल्स संसद की लाइब्रेरी में एक सुरक्षात्मक तिजोरीनुमा कमरे के अंदर हैं। ये रूम 180 सेमी चौड़ा, 180 सेमी गहरा और 305 सेमी ऊंचा है। पूरे साल 20 डिग्री सेल्सियस तापमान और 30 फीसदी सापेक्ष आर्द्रता बनाए रखने के लिए कमरे को जलवायु-नियंत्रित किया जाता है। प्रत्येक बॉक्स 55 सेमी चौड़ा, 70 सेमी लंबा और 25 सेमी ऊंचा है।

सीएसआईआर-एनपीएल के निदेशक वेणुगोपाल अचंता ने टीओआई को बताया कि ‘इन रिसेप्टेकल्स का समय-समय पर एनपीएल वैज्ञानिकों की एक टीम जांच करती है। पार्लियामेंट लाइब्रेरी भी साप्ताहिक आधार पर इनकी निगरानी करती है। दोनों प्रतियां बहुत अच्छी स्थिति में हैं और मॉनिटरिंग पैरामीटर्स को पर्याप्त रूप से बनाए रखा गया है। संविधान की दोनों मूल सुलेखित कॉपी की बड़ी ही ऐतिहासिक वैल्यू है क्योंकि इसमें संविधान के संस्थापकों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। प्रारंभ में इन्हें किसी भी अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज की तरह संसद पुस्तकालय में रखा गया था। लेकिन 1980 के दशक के मध्य में यह महसूस किया गया कि इन ऐतिहासिक वॉल्यूम्स को बेहतर ढंग से संरक्षित करने की आवश्यकता है। तभी एनपीएल ने इसमें एंट्री मारी, इसका काम इन दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए खास केस का निर्माण करना था।

1988-89 में टेम्पर्ड ग्लास और उपयुक्त सीलेंट का इस्तेमाल करके एनपीएल केस का निर्माण किया गया था। हालांकि, स्थायित्व के मुद्दों की वजह से ये उपयुक्त नहीं माने गए थे। करंट साइंस पत्रिका में बाद के प्रयासों का विवरण देते हुए, एनपीएल के पूर्व निदेशक डीके असवाल और इसकी पूर्व मुख्य वैज्ञानिक रंजना मेहरोत्रा ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने भली-भांति सील किए गए कांच के केस को डेवलप करने के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की मांग की थी।

1989 में, एनपीएल वैज्ञानिक अंततः जीसीआई के दरवाजे पर पहुंचे, जिसने मिस्र के संग्रहालय की ममियों के ‘भंडारण और प्रदर्शन के लिए लगभग वैसे ही केस’ डेवलप किए थे। एनपीएल और जीसीआई ने भारत के संविधान के लिए डिस्प्ले केस के निर्माण को लेकर जुलाई 1993 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस बात पर सहमति हुई कि संविधान के अंग्रेजी और हिंदी संस्करणों के लिए दो समान ग्लास केस गढ़े जाएंगे। ये ग्लास रिसेप्टेकल्स अमेरिका में जीसीआई ने बनाए थे। फिर संसद की लाइब्रेरी में भेजा गया था। इन्हें मार्च 1994 में स्थापित किया गया था।

एनपीएल ने हर्मेटिकली सीलबंद ग्लास केस को डेवलप करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग का प्रयास किया था। 1992-93 में, एनपीएल वैज्ञानिक हरि किशन ने सेंट-गोबेन कंपनी, पेरिस का दौरा किया। वह दो डिस्प्ले केस बनाने में सक्षम थे। एक को सोल्डरिंग प्रक्रिया से सील किया गया और दूसरे को ओ-रिंग्स से सील किया गया। हालांकि, उन्हें दीर्घकालिक संरक्षण के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया।

हरि किशन ने इस मुद्दे पर जॉर्जेस एम्सेल प्रसिद्ध लौवर संग्रहालय, पेरिस में संरक्षण पहलुओं के विशेषज्ञ के साथ चर्चा की। उन्होंने जीसीआई से संपर्क करने का सुझाव दिया, क्योंकि 1989 में उन्होंने मिस्र के संग्रहालय में 27 शाही ममियों के भंडारण और प्रदर्शन के लिए काहिरा इसी तरह के केस डेवलप किए थे।

नवंबर 1992 में, एनपीएल ने एमए कोर्जो निदेशक, जीसीआई से संपर्क किया, जो संयुक्त रूप से ‘हर्मेटिकली सीलबंद ग्लास केस’ विकसित करने के लिए सहमत हुए। मार्च 1994 में, इन केस को संसद पुस्तकालय में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। केस को व्यक्तिगत रूप से पॉलिश किया गया, स्टेनलेस-स्टील स्टैंड लगभग 1 मीटर ऊंचाई पर वार्निश टीक कैबिनेट-वर्क के साथ लगाया गया था। केस को मेटल फ्रेम से कवर किया गया। एनपीएल में स्टैंड और कैबिनेट का निर्माण किया गया था। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र बीएआरसी में स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण समूह के निदेशक के रूप में तैनात असवाल ने टीओआई को बताया कि चूंकि वे बॉक्स पुराने हो रहे हैं, इसलिए नए बक्से बनाने का प्रस्ताव जल्द से जल्द लिया जाना चाहिए।

हाल ही में हुए चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए क्या बोले केजरीवाल?

हॉकी में हुए चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए केजरीवाल ने एक बयान दिया है! सबसे ज्यादा पार्षद होने के बावजूद चंडीगढ़ मेयर पद के लिए I.N.D.I.A के कांग्रेस-आप गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा। मंगलवार को नगर निकाय में सत्तारूढ़ बीजेपी ने 4 वोटों से जीतकर मेयर की सीट बरकरार रखी। उधर आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि यह जीत बीजेपी ने बेईमानी से हासिल की है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, ‘आज लोकतंत्र के लिए काला दिन है जिस तरह से बीजेपी गुंडागर्दी करके सारे आम बेईमानी करके चंडीगढ़ मेयर चुनाव में अपना मेयर बनाया है और उनकी यही बेईमानी वीडियो में कैप्चर हो गई। पूरा देश आज वो वीडियो सोशल मीडिया पर देख रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘मेयर आते जाते रहते हैं, पार्टियां आती जाती रहती हैं, लेकिन मुद्दा ये है कि इन्होंने गुंडागर्दी करके ये चुनाव जीता। अगर इसे पूरे देश ने मिलकर नहीं रोका गया तो आने वाले समय में ये देश के लिए बहुत खतरनाक है।’ सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, ‘इस तारीख को गांधीजी की हत्या हुई थी और 76 साल बाद उन्होंने बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या की है, यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। उनकी यह प्रतिक्रिया मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के मनोज सोनकर द्वारा ‘आप’ के कुलदीप कुमार को हराकर महापौर पद जीतने के बाद आई। कुमार को कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद महापौर पद के लिए चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया था। नतीजे घोषित होते ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ इंडिया के घटक दल आप और कांग्रेस के पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया।उन्होंने खुलेआम गुंडागर्दी की और यह कैमरे में कैद हो गया। पूरा देश देख रहा है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए। चुनाव कोई भी जीत सकता है या हार सकता है, देश को हारना नहीं चाहिए। मुद्दा यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ मेयर का चुनाव खुली धोखाधड़ी से जीता है।’

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को आरोप लगाया कि चंडीगढ़ में महापौर पद के लिए हुए चुनाव में सरेआम ‘बेईमानी’ की गई और जिन लोगों ने ऐसा किया वे राष्ट्रीय चुनाव में किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के मनोज सोनकर द्वारा ‘आप’ के कुलदीप कुमार को हराकर महापौर पद जीतने के बाद आई। कुमार को कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद महापौर पद के लिए चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया था। नतीजे घोषित होते ही विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ इंडिया के घटक दल आप और कांग्रेस के पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद चुनाव हो रहे हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ इंडिया के सदस्य कांग्रेस और आम आदमी पार्टी आप के एक साथ चुनाव लड़ने के कारण यह चुनाव महत्वपूर्ण हैं। बता दें कि कांग्रेस ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में BJP की जीत पर कहा कि उसे हैरानी नहीं है कि लोकतंत्र की हत्या के लिए 30 जनवरी का दिन चुना गया। पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था पर निर्लज्ज तरीके से कब्जा किया गया। चंडीगढ़ में मेयर चुनाव जीतने के लिए विपक्षी वोटों को अवैध घोषित करना दर्शाता है कि लोकतांत्रिक जनादेश को खत्म करना BJP की दूसरी प्रकृति है।’ कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि BJP ने चंडीगढ़ में लोकतंत्र की हत्या के लिए 30 जनवरी का दिन चुना।’ 

दोनों दलों में हालांकि पंजाब में लोकसभा चुनावों के लिए सीटों की साझेदारी पर अभी सहमति नहीं बनी है। सोनकर को 16 मत मिले जबकि कुमार के पक्ष में 12 मत आए। आठ मतों को अवैध घोषित कर दिया गया।खुलेआम गुंडागर्दी की और यह कैमरे में कैद हो गया। पूरा देश देख रहा है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए। चुनाव कोई भी जीत सकता है या हार सकता है, देश को हारना नहीं चाहिए। मुद्दा यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ मेयर का चुनाव खुली धोखाधड़ी से जीता है।’ नवनिर्वाचित महापौर वरिष्ठ उप महापौर और उप महापौर के पद पर चुनाव कराएंगे। कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने महापौर पद के लिए प्रत्याशी खड़ा किया था। कांग्रेस ने वरिष्ठ उपमहापौर और उपमहापौर पदों के लिए अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं।