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जानिए देश के पहले आम चुनाव की दिल छू लेने वाली कहानी!

आज हम आपको देश के पहले आम चुनाव की दिल छू लेने वाली कहानी बताने जा रहे हैं! प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 22 नवंबर, 1951 को रात 8.30 बजे अपने रेडियो प्रसारण में देश के पहले लोकसभा चुनाव को कुछ इसी रूप में परिभाषित किया था। उन्होंने कहा था, ‘यह वयस्क मताधिकार पर हमारा पहला चुनाव है। हम अभी जो मानक तय करेंगे, वह मिसाल बनेगा और भविष्य के चुनावों की रूपरेखा तय करेगा।’ 1952 के प्रथम आम चुनाव के दौरान मद्रास प्रांत में पूरी जनवरी तक चुनावी प्रक्रिया चली। चुनाव से पहले जनता को वोट डालने के तरीके और वयस्क मताधिकार के उद्देश्य के बारे में जागरुकता के लिए ऑल इंडिया रेडियो पर विशेष प्रसारण हुए तो सिनेमा हॉलों में डॉक्युमेंटरीज दिखाए गए। वहीं, पत्रिकाओं में विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों की संरचना को लेकर विस्तृत लेख प्रकाशित किए गए थे। उन दिनों मुश्किल से 20% आबादी साक्षर थी। इस कारण मतदान बूथों में चुनाव चिह्न लगे मतपेटियां कतार में रखी गई थीं। 92 वर्षीय पत्रकार ने बताया, ‘जिसे जिस उम्मीदवार को वोट देना था, उसे अपना मतपत्र उस बॉक्स में डालना होता था जिसमें उसके पसंदीदा उम्मीदवार का चुनाव चिह्न लगा होता था। लेकिन पहली बार लोग वोट करने पहुंचे थे तो उनमें कई ये समझ नहीं पाए कि बैलट पेपर को बक्से के अंदर डालना है। इसलिए कई मत पत्र बक्से के ऊपर रखे मिले। उस वक्त भी नैतिकता ताक पर ही होती थी। तभी तो लोग दूसरी मतपेटियों से मत पत्र बटोरकर अपने कैंडिडेट वाले बक्से में डाल दिया करते थे।’

गिनती कई दिनों तक चली और लोगों को परिणाम केवल अखबारों से ही पता चले। बहुत से लोग बहुत बुढ़ापे तक नहीं जी पाते थे, इसलिए डाक मतों का कोई सवाल ही नहीं था। उन्होंने कहा, ‘तंजावुर और त्रिची बेल्ट की महिलाएं प्रगतिशील थीं। उन्होंने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।’ चेन्नई में प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्रिंसिपल आर रामन कहते हैं कि यह देश का पहला ऐसा चुनाव था जिसमें कोई भी उम्मीदवार हो सकता था। इससे आम आदमी और श्रमिक वर्ग को बहुत आत्मविश्वास मिला। उन्होंने कहा, ‘तब तक स्थानीय जमींदारों के पास सत्ता थी और वे पंचायतों के अध्यक्ष थे। इसलिए 1952 का चुनाव जनता के लिए एक तरह का उत्सव था। उन्हें पहली बार लगा कि देश उनका है। इस अहसास ने लोगों को साथ लाया। बैठकें पूरी रात, सुबह 4 बजे और 5 बजे तक होती थीं, अक्सर चेन्नई के समुद्र तटों पर।’

मद्रास इन्फॉर्मेशन मैगजीन के 1951-52 एडिशन में प्रकाशित प्रचार के नियम में बताया गया था कि कोई भी व्यक्ति जो वोटिंग के दिन किसी मतदान केंद्र के 100 गज के भीतर अगर प्राइवेट प्लेस पर भी पब्लिक मीटिंग करता है या प्रचार करता है या फिर कोई इशारों में भी वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश करता है तो उसे बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है और 250 रुपये (आज के लिहाज से 20 हजार रुपये से ज्यादा) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। तब नियम था कि कोई भी व्यक्ति जो मतपेटी से छेड़छाड़ करता है, वह भविष्य के चुनावों में मतदान का देने का अधिकार भी खो देगा।

पूर्व चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति बताते हैं कि पार्टी के उम्मीदवार जो आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने के योग्य थे, उनको जारी पार्टी के चुनाव चिह्न के चारों ओर एक काला घेरा लगा दिाय जाता था। राष्ट्रीय और प्रादेशिक दलों को चुनाव चिह्न का आवंटन हो जाने के बाद निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए छह सिंबल तय थे- तीर-धनुष, नाव, फूल, घड़ा, ऊंट और दो पत्तों वाली एक टहनी। उन्हें इनमें से कोई तीन का चयन करना होता था। उनके चयन के आधार पर ही कोई एक सिंबल उन्हें दिया जाता था। इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक ‘गांधी के बाद का भारत’ में लिखते हैं कि उत्तर भारत में कई महिलाओं ने अपने नाम से रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, इसके बजाय ‘फलां’ की मां’ या ‘फलां’ की पत्नी’ के रूप में नाम लिखाए। वोटर लिस्ट से लगभग 28 लाख महिलाओं के नाम काट दिए गए थे। इस पर बवाल मचा तो देश के तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने इसे अच्छा संकेत माना। नाम कटने का असर यह हुआ कि अगले चुनावों में महिलाएं अपना नाम लिखाने लगीं।

मद्रास के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस वेंकटेश्वरन ने 1952 के चुनाव से पहले जनता को अपने संबोधन में महिलाओं से अपील की कि वो मतदान को लेकर किसी तरह का शर्म नहीं करें। उन्होंने कहा, ‘हमारे चुनाव तब तक संतोषपूर्ण नहीं होंगे जब तक कि पुरुष मतदाताओं की तरह ही हमारी महिलाएं बढ़-चढ़कर और बुद्धिमानी से अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करती हैं। एक मतदाता में सामान्य समझदारी होनी चाहिए जो हमारी महिलाओं में पर्याप्त है।’ उन्होंने यह भी ऐलान किया कि ‘गोशा महिला मतदाताओं (जो इस्लामी परंपराओं का सख्ती से पालन करती हैं) की अच्छी-खासी संख्या वाले बूथों पर पूरी तरह से महिला कर्मचारियों को ही तैनात किया जाएगा’ और केवल महिला मतदाताओं को ही वहां वोट डालने की अनुमति होगी।

क्या वर्तमान में बढ़ रही है बच्चा तस्करी की घटनाएं ?

वर्तमान में बच्चा तस्करी की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है! दिल्ली में बच्चा तस्करी के गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद सीबीआई इस मामले में अगला कदम उठाने जा रही है। इस मामले में सीबीआई की नजर अब आईवीएफ सेंटर्स पर हैं। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई शनिवार को दिल्ली में बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के संबंध में कुछ अस्पतालों के अलावा कुछ आईवीएफ इन विट्रो फर्टिलाइजेशन क्लीनिकों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी की जांच से पता चला है कि गिरोह ने सरोगेट माताओं से बच्चे खरीदे। अब तक कम से कम दस तस्करी किए गए शिशुओं के रिकॉर्ड प्राप्त किए गए हैं। बताया जा रहा है कि गैंग के लोग गरीब माता-पिता के साथ ही सरोगेट मदर से बच्चों को दो से तीन लाख रुपये में खरीदते थे। इसके बाद इन बच्चों को 4 से 6 लाख रुपये में बेच देते थे। एजेंसी की तरफ से कई अस्पताल और क्लिनिक कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। मौके पर पूछताछ के दौरान, पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि किराए के मकान में रहने वाले लोग अक्सर बच्चों की रोने की आवाज को दबाने के लिए तेज आवाज में टीवी और म्यूजिक बजाते थे।रैकेट के कथित सरगनाओं में से एक, सोनीपत का नीरज एक अस्पताल में काम करता था। सूत्रों ने कहा कि वह आईवीएफ केंद्रों के लिए एक एजेंट के रूप में काम करता था।

नीरज गर्भधारण करने में कठिनाइयों का सामना करने वाले जोड़ों के बारे में जानकारी के लिए कर्मचारियों के साथ संपर्क बनाए रखता था। कुछ मामलों में, उन्होंने संभावित टारगेट की पहचान करने के लिए आईवीएफ केंद्रों से संपर्कों का इस्तेमाल किया। संदिग्धों ने विभिन्न माध्यमों से बच्चे प्राप्त किए। बाद में उन्हें निःसंतान दंपत्तियों को बेच दिया। उन्होंने गोद लेने से संबंधित दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने के अलावा, डॉक्टरों की मदद से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र भी बनाया।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सीबीआई ने आरती नाम की एक संदिग्ध का पता लगाने के लिए जयपुर में छापेमारी की। आरती ने कथित तौर पर एक नवजात शिशु की अदला-बदली में मदद की थी, जो सिर्फ एक दिन का था। गिरोह ने बच्चों को पहले ही खरीद लिया था। बाद में संभावित खरीदारों की तलाश की। बच्चों की देखभाल ऐसी महिलाओं द्वारा की जाती थी जिन्हें कथित तौर पर प्रति दिन 500-1,000 रुपये का भुगतान किया जाता था। इनमें से दो महिलाओं को शुक्रवार रात उत्तर पश्चिमी दिल्ली के केशवपुरम में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। मौके पर पूछताछ के दौरान, पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि किराए के मकान में रहने वाले लोग अक्सर बच्चों की रोने की आवाज को दबाने के लिए तेज आवाज में टीवी और म्यूजिक बजाते थे।

सीबीआई की तरफ से की गई छापेमारी में तीन शिशुओं को बचाया गया। शुक्रवार रात एक्सचेंज के दौरान वास्तविक समय के ऑपरेशन में तीन शिशुओं में से एक को बचाया गया। सीबीआई की तरफ से जयपुर, गोरखपुर और पंजाब में छापेमारी की गई। नीरज के अलावा, सीबीआई की हिरासत में पश्चिम विहार से इंदु पवार, पटेल नगर से असलम और मालवीय नगर से अंजलि शामिल हैं। पूजा कश्यप, रितु और कविता नाम की तीन अन्य महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने दिल्ली के केशवपुरम में बाल तस्करी की तलाशी के दौरान नवजात शिशुओं को बचाया। विक्रेताओं, खरीदारों और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है।शिशुओं के रिकॉर्ड प्राप्त किए गए हैं। बताया जा रहा है कि गैंग के लोग गरीब माता-पिता के साथ ही सरोगेट मदर से बच्चों को दो से तीन लाख रुपये में खरीदते थे। इसके बाद इन बच्चों को 4 से 6 लाख रुपये में बेच देते थे। एजेंसी की तरफ से कई अस्पताल और क्लिनिक कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। रैकेट के कथित सरगनाओं में से एक, सोनीपत का नीरज एक अस्पताल में काम करता था। सूत्रों ने कहा कि वह आईवीएफ केंद्रों के लिए एक एजेंट के रूप में काम करता था। सीबीआई ने बाल तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। एजेंसी ने दिल्ली, यूपी और पंजाब में नवजात शिशुओं को बचाया और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। तस्करी रैकेट के बारे में एक गुप्त सूचना के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया गया था। एजेंसी का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है।

क्या अब भारत में आ रहे हैं दुनिया भर के एमबीए स्टूडेंट?

वर्तमान में भारत में दुनिया भर के एमबीए स्टूडेंट दस्तक दे रहे हैं! आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज दैनिक जीवन की चर्चा का विषय बन गया है। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म रहता है। भविष्य में एआई के प्रभावों को लेकर दुनिया दो भागों में बंट गई है। एक वर्ग कहता है कि यह लाखों-करोड़ों नौकरियां निगल जाएगा तो दूसरा वर्ग कंप्यूटर क्रांति का उदाहरण देकर पहले के दावे को खारिज कर देता है। यह कहा जा रहा है कि एआई के कारण एक नए स्किल सेट की जरूरत पड़ेगी और दुनियाभर के लोगों की पहचान दो तरह से होगी- एक जो एआई फ्रेंडली हैं और एक जिन्हें एआई से अनछुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि भारत को एआई क्रांति का अगुवा बनाया जाए। टेक्नॉलजी की दुनिया में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड देखकर हर किसी को भरोसा भी है कि हम एआई में ग्लोबल लीड ले सकते हैं। यही कारण है कि एआई में इंस्ट्रस्टेड स्टूडेंट्स भारत का रुख कर रहे हैं। दुनियाभर में मास्टर्स ऑफ बिजनस एडमिनिस्ट्रेशन के 40% स्टूटेंड्स का फोकस अब एआई हो गया है। उनका एक बड़ा हिस्सा भारत के मैनेजमेंट संस्थानों का रुख कर रहा है, खासकर एआई में महारत हासिल करने के लक्ष्य से। इनका एक हिस्सा चीन की तरफ भी आकर्षित हो रहा है। आंकडे़ बताते हैं कि भारतीय संस्थानों से एमबीए करने के इच्छुक उम्मीदवारों में 57 प्रतिशत की चाहत एआई में ग्रैजुएट होने की है तो चीन में यह आंकड़ा 51% है।

ये बातें GMAC ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल की तरफ से ‘प्रॉस्पेक्टिव स्टूडेंट्स सर्वे 2024’ रिपोर्ट में सामने आईं। सर्वेक्षण से पता चला है कि मैनेजमेंट स्टडी के इच्छुक स्टूडेंट्स तेजी से जेनरेटिव एआई जैसी परिवर्तनकारी तकनीकों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, जिसमें सालाना 38% की महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। ऐसे स्टूडेंट्स का बड़ा बहुमत मानता है कि एआई के बिना उनकी पढ़ाई का बहुत महत्व नहीं रहा जाता है। इसके साथ ही, STEM साइंस, टेक्नॉलजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स सर्टिफाइड बिजनस प्रोग्राम्स के प्रति वैश्विक रुचि में समानांतर वृद्धि हुई है। यह पिछले पांच वर्षों में 38% की वृद्धि दर्ज कर रहा है, खासकर एशिया में जो भारत और चीन में बढ़ती मांग से प्रेरित है।

एआई में महारत की मांग नए स्किल सेट की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाती है, जो संगठनों को जनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग पर ध्यान देने के साथ अपने मौजूदा वर्कफोर्स के लिए कौशल विकास को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती है। इसके अलावा, फरवरी 2024 में एआई बेस्ड हायरिंग में 20% की वृद्धि हुई जबकि एआई और मशनी लर्निंग आधारित नौकरियों में सालाना आधार पर 21% की वृद्धि दर्ज की गई है। सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘उन स्टूडेंट्स की संख्या जो कहते हैं कि एआई उनके जीएमई पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक है, 2022 में 29% से बढ़कर 2023 में 40% हो गई है। यह किसी भी अन्य पाठ्यक्रमों की तुलना में सबसे बड़ी सालाना वृद्धि दर है, और बिजनस में AI की भूमिका के बारे में सीखने की बढ़ती मांग का प्रमाण भी।’

GMAC के सीईओ जॉय जोन्स ने कहा, ‘संभावित छात्रों के 2024 सर्वे से पता चलता है कि एस्पिरेंट्स को उम्मीद है कि ग्रैजुएट बिजनस एजुकेशन उन्हें अपने पेशेवर और व्यक्तिगत लक्ष्यों के एक घटक के रूप में सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने में मदद करेगी। अनिश्चित दुनिया में लीडरशिप, समस्याओं के डेटा आधारित समाधान, इफेक्टिव टेक्नॉलजी और मैन कैपिटल मैनेजमेंट जैसे सदाबहार कौशल हासिल करने की उनकी प्रबल इच्छा कयम है, भले ही डिलीवरी फॉर्मेट्स और स्टडी डेस्टिनेशनों की अपनी प्राथमिकताएं बदलनी पड़े।’

विशेष रूप से, भारत में एस्पिरेंट्स के बीच स्टेम सर्टिफाइड प्रोग्राम्स की प्राथमिकता 2019 में 43% से बढ़कर 2023 में 57% हो गई है और चीन में 35% से 51% हो गई है। इसके अलावा, सर्वेक्षण इस बात को रेखांकित करता है कि दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों से एमबीए डिग्री हासिल करने के इच्छुक भारतीयों के लिए अमेरिका 77% और पश्चिमी यूरोप 63% आकर्षण का केंद्र हैं जबकि कम खर्च पर डिग्री लेने की प्राथमिकता वालों के लिए मध्य और दक्षिण एशिया 55% पसंदीदा जगह हैं। मैथमेटिक्स सर्टिफाइड बिजनस प्रोग्राम्स के प्रति वैश्विक रुचि में समानांतर वृद्धि हुई है। यह पिछले पांच वर्षों में 38% की वृद्धि दर्ज कर रहा है, खासकर एशिया में जो भारत और चीन में बढ़ती मांग से प्रेरित है।सर्वेक्षण के अनुसार, क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों के सामर्थ्य और ऐसे संस्थानों की संक्या में वृद्धि के कारण दुनियाभर के छात्र आकर्षित होते हैं। उदाहरण के लिए, अधिकांश भारतीय स्टूडेंट्स देसी संस्थानों में ही अप्लाई करने की सोच रहे हैं, जो 2022 में 41% से बढ़कर 2023 में 53% हो गया है।

आखिर क्या है पाकिस्तान के आतंकियों के लिए गुमनाम कातिल की कहानी?

आज हम आपको पाकिस्तान के आतंकियों के लिए गुमनाम कातिल की कहानी बताने जा रहे हैं! आतंक की फैक्ट्री चलाने वाला कंगाल पाकिस्तान आजकल बेहद डरा और सहमा हुआ है। पाकिस्तान का दावा है कि कोई गुमनाम कालित है जो चुन-चुन उसके हाई प्रोफाइल लोगों की हत्या कर रहा है। पाकिस्तान जिन लोगों की हत्याओं पर मातम मना रहा है। वे लोग भारत और दुनिया के कई हिस्सों में आतंक फैला चुके हैं।पाकिस्तान बुरी तरह तिलमिला रहा है। वहां की एजेंसियों ने दावा किया है की भारतीय खुफिया एजेंसी RAW पाकिस्तान में टारगेट किलिंग करवा रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि सियालकोट में शाहिद लतीफ और रावलकोट में मोहम्मद रियाज की हत्याएं भारतीय एजेंट्स योगेश कुमार और अशोक कुमार आनंद ने कराई थी। पिछले कुछ वक्त से पाकिस्तान में भारत के दुश्मनों को चुन-चुन कर मौत के घाट उतारा जा रहा है। पाकिस्तान उस अनजान कातिल को ढूंढने की काफी कोशिश करता रहा लेकिन नाकाम रहा। अब पाकिस्तान ने अपनी आवाम के सामने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है और मौतों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान ने भारत और भारत की खुफिया एजेंसी RAW पर पाकिस्तान में हुई 2 हाई प्रोफाइल लोगों की हत्या का सनसनीखेज आरोप लगाया था।

पाकिस्तान ने आनन-फानन में अशोक कुमार आनंद नाम के एक शख्स को RAW एजेंट बताते हुए इस साजिश में शामिल बताया था और उसकी तस्वीरें जारी की थीं। लेकिन अब जो सच सामने आया है वो काफी चौंकाने वाला है। एक बार फिर पाकिस्तान की दुनिया में फजीहत हुई है। पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश हुआ है। भारतीय बिजनेसमैन अशोक कुमार आनंद ने सोमवार को पाकिस्तान में हो रही टारगेट किलिंग में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने न्यूज चैनल आजतक से बात करते हुए कहा, ‘मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं दुबई में अपने ऑफिस में था। मैं दुबई में एक बिजनेसमैन हूं और मैं अपने बिजनेस पर ध्यान देता हूं।’ अपने इंटरव्यू में, उन्होंने पाकिस्तान में टारगेट किलिंग को फाइनेंस करने के आरोपों से भी इनकार किया है।

पाकिस्तान में मौजूद भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों के लगातार मारे जाने से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। पाकिस्तान बुरी तरह तिलमिला रहा है। वहां की एजेंसियों ने दावा किया है की भारतीय खुफिया एजेंसी RAW पाकिस्तान में टारगेट किलिंग करवा रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि सियालकोट में शाहिद लतीफ और रावलकोट में मोहम्मद रियाज की हत्याएं भारतीय एजेंट्स योगेश कुमार और अशोक कुमार आनंद ने कराई थी।

बिजनेसमैन अशोक कुमार ने न्यूज चैनल आजतक से बात करते हुए कहा, ‘मैं जब दुबई में अपने ऑफिस में बैठा था तो तब दुबई के कुछ स्थानीय लोगों ने और कुछ इंडिया के दोस्तों ने बताया आपका नाम टीवी पर चल रहा है। मुझे हैरानी हुई। ना मुझे कुछ पता है और ना ही मैं किसी को जानता हूं। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि मैं RAW का पैडलर हूं और वहां कोई कत्ल हुआ जिसमें मेरा हाथ है, लेकिन मैं वहां किसी को जानता तक नहीं हूं, मैं दुबई में सिर्फ बिजनेस करता हूं अपना काम करता हूं।’

अशोक आनंद ने आगे कहा कि मुझे इस बात का दुख है कि मैं एक बिजनेसमैन हूं और ऐसा लग रहा है कि अब मुझे जबरदस्ती का थ्रेट आया है। पाकिस्तान में जब प्रेस कांफ्रेंस हो रही थी तो तब दोस्तों का कॉल आया की भाई आप ठीक हैं। अशोक आनंद ने कहा, ‘मैंने टीवी देखा, मुझे बताया गया की मैने फंडिंग किया है। पाकिस्तान उस अनजान कातिल को ढूंढने की काफी कोशिश करता रहा लेकिन नाकाम रहा। अब पाकिस्तान ने अपनी आवाम के सामने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है और मौतों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान ने भारत और भारत की खुफिया एजेंसी RAW पर पाकिस्तान में हुई 2 हाई प्रोफाइल लोगों की हत्या का सनसनीखेज आरोप लगाया था। मेरे स्टाफ में पाकिस्तानी, दुबई और हर मुल्क के लोग रहते हैं। मेरा एक स्टाफ था पाकिस्तानी, अगर उसने कुछ किया हो तो उसका मुझे नहीं पता है। पहले मेरा इंटरनेट कैफे था और पाकिस्तान का रहने वाला मोहम्मद अली ही सब कुछ संभालता था। वो क्या करता था मुझे कुछ नहीं मालूम, उसके यहां बहुत सारे लोग आते थे।

आखिर क्या है कोयला घोटाला केस और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की कहानी?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर कोयला घोटाला केस और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की कहानी क्या है! दिल्ली हाईकोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में दोषी करार पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे की सजा पर रोक लगा दी है। उन्हें तीन साल की सजा हुई थी। दिलीप रे हाईकोर्ट में अपील के दौरान कहा कि वो चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसी को लेकर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सजा पर रोक की अपील की थी। इस मामले में कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए दिलीप रे की सजा पर रोक लगा दी। अब दिलीप रे आगामी चुनाव लड़ सकेंगे। इस मामले में कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस भी जारी किया। कोर्ट ने सीबीआई से दिलीप रे के आवेदन पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। दिलीप रे, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे। अभी वो 71 वर्ष के हैं। दिलीप रे का जन्म 9 जनवरी 1954 को ओडिशा राज्य में हुआ था। वो एक भारतीय राजनीतिज्ञ और होटल व्यवसायी हैं। वो केंद्रीय इस्पात, कोयला और संसदीय मामलों के मंत्री रहे थे। रे तीन प्रधानमंत्रियों की सरकार का हिस्सा बनने वाले एकमात्र उड़िया सांसद थे। उनके पिता का नाम हृषिकेश रे और मां का नाम कल्याणी रे था। उन्होंने 1969 में राज कुमार कॉलेज, रायपुर से अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। 1974 में सेंट जोसेफ कॉलेज, दार्जिलिंग से ग्रेजुएशन किया। जिसका नेतृत्व बीजू पटनायक ने किया था। रे को 1996 में संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था और वह लगातार दो कार्यकाल 1996-2002; 2002-2008 तक सदन के सदस्य बने रहे। एक सांसद के रूप में, उन्होंने कई मंत्रालय संभाले और विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्य थे।फिर जेसीसी कॉलेज ऑफ लॉ, कोलकाता में उन्होंने दाखिला लिया, 1976 में अपनी कानून की डिग्री पूरी की। इसके बाद एमबीए किया।

दिलीप रे ने अपनी राजनीतिक पारी 1985 में शुरू की। राउरकेला निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए। वो 1985 से 90 तक विधायक रहे। इसके बाद साल 1990 में फिर से विधायक चुने गए। उन्होंने जनता दल सरकार 1990-95 में उद्योग मंत्री के रूप में कार्य किया, जिसका नेतृत्व बीजू पटनायक ने किया था। रे को 1996 में संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था और वह लगातार दो कार्यकाल 1996-2002; 2002-2008 तक सदन के सदस्य बने रहे। एक सांसद के रूप में, उन्होंने कई मंत्रालय संभाले और विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्य थे।

अक्टूबर 2020 में उन्हें दिल्ली की विशेष सीबीआई कोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में दोषी ठहराया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे अलावा कोयला मंत्रालय के दो पूर्व अधिकारियों प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम को भी दोषी ठहराया गया था। रायपुर से अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। 1974 में सेंट जोसेफ कॉलेज, दार्जिलिंग से ग्रेजुएशन किया। फिर जेसीसी कॉलेज ऑफ लॉ, कोलकाता में उन्होंने दाखिला लिया, 1976 में अपनी कानून की डिग्री पूरी की। इसके बाद एमबीए किया।इनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया गया था। उस समय पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को तीन साल की सजा हुई थी। दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने 1999 में झारखंड के ब्रह्मडीहा कोयला ब्लॉक को बोकारो स्थित एक कंपनी को अवैध आवंटन में उनकी भूमिका के लिए दोषी पाया था। इसी को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को तीन साल जेल की सजा सुनाई और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ा ये केस साल 1999 में सामने आया था। मामला झारखंड के गिरिडीह स्थित ब्रह्मडीहा कोयला ब्लॉक को सीटीएल को आवंटित करने से संबंधित है। बताया जा रहा कि कोयला मंत्रालय की 14वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने कैस्ट्रन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के पक्ष में गिरिडीह का 105.153 हेक्टेयर गैर-राष्ट्रीयकृत कोयला खनन क्षेत्र आवंटित किया था।

सीबीआई ने चार्जशीट में कहा था कि दिलीप रे, प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्यानंद गौतम ने कोयला ब्लॉक के आवंटन की खरीद को लेकर साजिश रची थी। नियमों को ताक पर रखकर सीटीएल को कोयला ब्लॉक तो मिला था लेकिन खनन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद खनन किया गया। इस मामले में 26 अक्टूबर, 2020 को ट्रायल कोर्ट ने दिलीप रे को तीन साल जेल की सजा सुनाते हुए उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर, 2020 को दिलीप रे की दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही उनकी तीन साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया गया।

आखिर कांग्रेस के घोषणा पत्र की तुलना किस से कर रही है बीजेपी?

हाल ही में बीजेपी ने कांग्रेस के घोषणा पत्र की तुलना एक मुस्लिम घोषणा पत्र से कर दी है! लोकसभा के चुनावी रण में जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख करीब आ रहा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। हाल ही में कांग्रेस ने इस चुनाव को लेकर पार्टी का घोषणा-पत्र जारी किया। कांग्रेस ने इसका नाम न्याय पत्र दिया है, जिसमें 5 ‘न्याय’ और 25 ‘गारंटी’ का जिक्र किया गया है। हालांकि, कांग्रेस का न्याय पत्र सामने आते ही बीजेपी ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में ‘मुस्लिम लीग की छाप’ नजर आ रही। पीएम मोदी ने पहले बिहार के नवादा, फिर यूपी के सहारनपुर और इसके बाद पुष्कर रैली में भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में वही सोच झलकती है, जो आजादी के समय मुस्लिम लीग में थी। जैसे ही ये मुद्दा उठा तो कांग्रेस ने इसे लेकर चुनाव आयोग से शिकायत कर दी। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से कहा कि पीएम मोदी ने नवादा, सहारनपुर और पुष्कर की रैलियों में कांग्रेस के घोषणा-पत्र (न्याय पत्र) को पूरी तरह से मुस्लिम लीग की छाप वाला बताया था। साथ ही यह भी कहा था कि न्याय पत्र का जो हिस्सा बचा हुआ है, उस पर वामपंथियों का प्रभाव है। इसे लेकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग को छह शिकायतें दी हैं। इनमें दो शिकायत पीएम मोदी को लेकर भी है। कांग्रेस ने भले ही अपनी शिकायत चुनाव से कर दी है। दूसरी ओर बीजेपी ने भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किन मुद्दों के आधार पर कांग्रेस के घोषणा-पत्र में मुस्लिम लीग की छाप होने का जिक्र किया है। पार्टी ने इसके लिए मुस्लिम लीग का 88 साल पुराना मेनिफेस्टो पेश किया है।

बीजेपी ने मुस्लिम लीग के 1936 में आए घोषणा-पत्र और कांग्रेस के 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर आए न्याय पत्र में उठाए गए मुद्दों की तुलना की। इसमें उन्होंने तीन प्वाइंट्स को फोकस किया। बीजेपी ने कहा कि 1936 में आए मुस्लिम लीग के घोषणा-पत्र में कहा गया था कि मुस्लिमों के लिए शरिया पर्सनल लॉ की रक्षा की जाएगी। अब 2024 में कांग्रेस के घोषणा-पत्र में पार्टी ने वादा किया है कि अल्पसंख्यकों के पर्सनल लॉ हों। 1936 में आए मुस्लिम लीग के घोषणा पत्र में उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी बहुसंख्यकवाद के खिलाफ लड़ेगी। कुछ ऐसा ही जिक्र 2024 चुनाव को लेकर आए कांग्रेस के घोषणा-पत्र में भी देखने को मिला है। कांग्रेस ने इसमें कहा है कि भारत में बहुसंख्यकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। बीजेपी ने बताया कि 1936 के मुस्लिम लीग की ओर से जारी मेनिफेस्टो में उन्होंने कहा था कि हम मुसलमानों के लिए खास छात्रवृत्ति और नौकरियों के लिए संघर्ष करेंगे। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जो घोषणा पत्र निकाला है उसमें वादा किया है कि मुस्लिम छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिले, इसे इंश्योर किया जाएगा।

उधर, कांग्रेस ने उसके चुनावी घोषणा़पत्र में ‘मुस्लिम लीग की छाप’ होने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग का रुख किया। इस मामले में कार्रवाई की मांग की। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के समक्ष इस विषय के साथ कुछ और मुद्दों को रखा। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और सलमान खुर्शीद, कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य गुरदीप सप्पल शामिल थे। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के नवादा जिले में रविवार को एक चुनावी सभा में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि उसके चुनाव घोषणापत्र में मुस्लिम लीग की छाप है। उसके नेताओं के बयानों में राष्ट्रीय अखंडता और सनातन धर्म के प्रति शत्रुता दिखाई देती है।

सलमान खुर्शीद ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने भाषणों में कांग्रेस के घोषणा पत्र को झूठ का पुलिंदा कहा है, यह काफी दुखद है। आप किसी भी पार्टी से मतभेद रख सकते हैं, लेकिन एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी के घोषणा पत्र के बारे में ऐसा कहना दुखी करने वाली बात है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि यह उन पार्टियों का घोषणा पत्र लगता है, जो हमारे धर्मनिरपेक्ष समाज की आजादी का विरोध कर रहे हैं। हम समझते हैं कि प्रधानमंत्री को ऐसी बात कहने का कोई अधिकार नहीं है। खुर्शीद ने कहा कि हमने इस मामले को चुनाव आयोग के समक्ष रखा है और उनसे विशेष अनुरोध किया है कि वे इसे गंभीरता से लें और इस पर कार्रवाई करें।

क्या अभी भी फंसा हुआ है बीजेपी के अंदर सीटों का पेंच?

बीजेपी के अंदर सीटों का पेंच अभी भी फंसा हुआ है! देश में पहले और दूसरे फेज के आम चुनावों को लेकर प्रचार जोरों पर है। हालांकि, देश के दो राष्ट्रीय पार्टियों BJP और कांग्रेस की ओर कुछ अहम सीटों पर उम्मीदवारी को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। BJP अब तक 418 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। इसमें पार्टी अब तक 92 मौजूदा सांसदों का टिकट काट चुकी है। इसके अलावा, कुछ सांसद पहले ही विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बन गए हैं। इस तरह BJP अब तक अपने 104 सांसद बदल चुकी है। उसे अभी 35-40 और सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान करना है। पिछले लोकसभा चुनाव में वह 436 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार BJP करीब 450 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। BJP ने अभी कई उन सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है, जहां कुछ पेच फंसा है। उसने अभी महाराष्ट्र की मुंबई उत्तर मध्य लोकसभा सीट से उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। यह सीट पिछले दो बार से लगातार वही जीत रही है। BJP नेता रहे प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन इस सीट से दो बार सांसद चुनी गईं। वह 2014 और 2019 की चुनाव जीतीं। 2004 और 2009 में इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार जीते थे। कहा जा रहा है कि BJP इस सीट से नया कैंडिडेट दे सकती है। इसी तरह यूपी की कैसरगंज सीट पर भी पेंच फंसा है। BJP ने अभी यहां उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। इसी सीट से मौजूदा सांसद BJP के विवादित नेता बृजभूषण शरण सिंह हैं। वह कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और महिला पहलवानों ने उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी बृजभूषण को फिर से टिकट देने के मूड में नहीं है। उन्हें इसकी जानकारी देकर यह कहा गया है कि इस सीट पर उनकी जगह उनकी पत्नी या बेटे को चुनाव लड़ाया जा सकता है। हालांकि बृजभूषण इसके लिए तैयार नहीं हैं और इसलिए मामला अटका हुआ है। BJP ने VIP सीट माने जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट से भी उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।

कांग्रेस खेमे से जिन कुछ अहम सीटों पर लगातार सस्पेंस बना हुआ है, उनमें उत्तर प्रदेश की अमेठी और रायबरेली के अलावा गठबंधन में दिल्ली में कांग्रेस के खाते में आई तीन सीटों चांदनी चौक, नॉर्थ-ईस्ट और नॉर्थ-वेस्ट की सीट शामिल हैं। अमेठी और रायबरेली पर सस्पेंस कायम होने का एक बड़ा कारण इन सीटों का गांधी परिवार से सीधा संबंध है। इस पर गांधी परिवार के दो सदस्य सोनिया गांधी और राहुल गांधी लड़ते रहे हैं। सोनिया गांधी रायबरेली छोड़कर राज्यसभा चली गई हैं, जबकि राहुल के अमेठी से लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि रायबरेली से प्रियंका गांधी के नाम की चर्चा है। इन सीटों पर बने सस्पेंस पर उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे का कहना है, ‘हमने रणनीति के तहत इन सीटों पर उम्मीदवारी के ऐलान को होल्ड पर रखा है। सही वक्त आने पर इस पर फैसला होगा।’ चर्चा है कि दूसरे फेज के चुनाव के बाद इन सीटों का ऐलान हो सकता है। केरल में दूसरे फेज का चुनाव 26 अप्रैल को होना है, जहां की वायनाड सीट से राहुल गांधी मैदान में हैं। माना जा रहा है कि वहां से चुनाव निबटने के बाद ही अमेठी पर फैसला होगा।

कांग्रेस अब तक तकरीबन 14 लिस्ट के जरिए 244 उम्मीदवारों को ऐलान कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, लगभग 60 सीटों पर उम्मीवारी को लेकर तस्वीर साफ होनी बाकी है। पिछले लोकसभा चुनावों में पार्टी 423 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन इस बार यह संख्या कम होने जा रही है। पार्टी के एक अहम रणनीतिकार ने कहा कि पिछली बार पार्टी लगभग सभी जगह अकेले चुनाव लड़ी थी, जबकि इस बार कई राज्यों में गठबंधन है। इस बार पार्टी 300+ सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

अभी तक अमेठी-रायबरेली UP में कुल तीन और दिल्ली की आती सीटों के अलावा ओडिशा, बंगाल, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड में कुछ सीटें रहती हैं। आखिरी चरण में होने वाले उत्तर भारत के तीन अहम राज्यों हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को लेकर अभी तक एक भी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी 13 अप्रैल को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होनी है। इसके बाद इन राज्यों में तस्वीर साफ हो सकती है। दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल और पंजाब मिलाकर कुल कांग्रेस की 29 सीटें बचती हैं। दिल्ली और हरियाणा छोड़ बाकी सभी जगह कांग्रेस अकेले उतरने जा रही है। दिल्ली, गुजरात और हरियाणा में साथ लड़ने वाली कांग्रेस और AAP पंजाब में अलग-अलग मैदान में हैं।

आखिर कांग्रेस में क्या अहमियत रखते हैं के सी वेणुगोपाल?

आज हम आपको बताएंगे कि के सी वेणुगोपाल कांग्रेस में क्या अहमियत रखते हैं! कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल काफी चर्चा में हैं। यह चर्चा तारीफ से ज्यादा आलोचना के रूप में हो रही है। हाल ही में कांग्रेस से निकाले गए मुंबई के मुखर नेता संजय निरूपम ने के. सी. वेणुगोपाल को लेकर न सिर्फ जमकर निशाना साधा, बल्कि उन्हें पार्टी का पांचवां पावर सेंटर तक करार दिया। निरूपम का कहना था कि पार्टी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के बाद अगला पावर सेंटर वेणुगोपाल हैं। यह कोई पहला मौका नहीं था, जब पार्टी छोड़ने वालों ने उन पर ऐसे आरोप लगाए हों। इससे पहले भी कुछ लोग वेणुगोपाल की ओर इशारा कर चुके हैं। संगठन के भीतर उनके बढ़ते कद और वर्चस्व को लेकर उनकी तुलना लगभग दो दशकों तक सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव रहे अहमद पटेल से होने लगी। वेणुगोपाल राहुल गांधी के काफी करीबी और भरोसेमंद माने जाते हैं। अशोक गहलोत के बाद जब राहुल गांधी ने तमाम सीनियर नेताओं की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए दक्षिण से आए अपेक्षाकृत इस युवा चेहरे को संगठन महासचिव जैसी अहम जिम्मेदारी दी तो पार्टी के भीतर तमाम नजरें तिरछी हुई थीं। समय के साथ वेणुगोपाल इतने मजबूत होते चले गए कि पार्टी के भीतर बाकायदा उनका एक कैंप माना जाने लगा, जिसमें तमाम लोग उनकी गुड लिस्ट में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करते दिखे। ऐसा नहीं है कि वेणुगोपाल सिर्फ पार्टी छोड़ने वालों के ही निशाने पर हों, बल्कि पार्टी के भीतर भी कई लोग असंतुष्ट बताए जाते हैं।

पार्टी के भीतर उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने संगठन महासचिव के दायरे से आगे जाकर पावर हाथ में लेने की कोशिश की है। ऐसा ही एक उदाहरण पार्टी के भीतर कांग्रेस अध्यक्ष और संगठन के चुनाव से जुड़ी एआईसीसी डेलीगेट्स बनाने की प्रक्रिया लेकर दिया जाता है। इसकी लिस्ट वेणुगोपाल की ओर से उनके दस्तखत से जारी की गई है। डेलिगेट्स बनाने का काम पार्टी के केंद्रीय चुनाव संघ का होता है। उनके आलोचकों का कहना था कि पार्टी के आज तक के इतिहास में यह पहला मामला होगा, जहां एआईसीसी डेलिगेट्स की लिस्ट सीईए की बजाय संगठन महासचिव की ओर से जारी की गई हो। यह वेणुगोपाल के बढ़ते प्रभाव का ही संकेत है कि वह पार्टी की तमाम अहम मीटिंग में अक्सर शामिल रहते हैं। पार्टी ने उन्हें I.N.D.I.A. की समन्वयक टीम में भी रखा है। राहुल गांधी से उनकी नजदीकी का संकेत इससे भी मिलता है कि 2019 में यह वेणुगोपाल ही थे, जिन्होंने राहुल गांधी को अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट से न सिर्फ लड़ने का सुझाव दिया, बल्कि उन्हें लड़ने के लिए तैयार भी किया। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दोनों चरणों में वेणुगोपाल लगातार उनके साथ रहे।

छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले वेणुगोपाल फिलहाल राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। वह केरल की अलापुझा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। स्कूल-कॉलेज में वॉलीबॉल खेलने वाले वेणुगोपाल ने मैथमेटिक्स में मास्टर किया और उसके बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा। केरल के पूर्व सीएम के. करुणाकरण वेणुगोपाल के राजनीतिक गुरु रहे हैं, लेकिन आगे चलकर उनका अपने गुरु से वैचारिक मतभेद हो गया। इसके बाद उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपने समय के तमाम युवा नेताओं को साथ लेकर एक अलग खेमा तैयार किया, जो केरल की आगामी राजनीति की दिशा बदलने का सूत्रधार बना। इस खेमे में उनके साथ रमेश चेनिथल्ला, जी. कार्तिकेयन और एम. आई. शानवाज जैसे लोग थे।

वेणुगोपाल के राजनीतिक गुरु करुणाकरण ने 1991 में पहली बार कासरगोड से उन्हें विधायक का चुनाव लड़ाया, हालांकि वह जीत नहीं पाए। 1996 में वह अलापुझा से पहली बार विधायक चुने गए। समय के साथ वेणुगोपाल इतने मजबूत होते चले गए कि पार्टी के भीतर बाकायदा उनका एक कैंप माना जाने लगा, जिसमें तमाम लोग उनकी गुड लिस्ट में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करते दिखे। ऐसा नहीं है कि वेणुगोपाल सिर्फ पार्टी छोड़ने वालों के ही निशाने पर हों, बल्कि पार्टी के भीतर भी कई लोग असंतुष्ट बताए जाते हैं।2001 और 2006 में एक बार फिर उन्होंने यहां से असेंबली का रास्ता तय किया। 2004 में वह ओमन चांडी सरकार में मंत्री भी रहे। केरल की राजनीति कर रहे वेणुगोपाल का राष्ट्रीय राजनीति में आना 2009 में तब हुआ, जब वह पहली बार अलापुझा से जीत कर लोकसभा पहुंचे। 2014 में भी वेणुगोपाल यहां से जीते। 2019 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इस बार एक बार फिर वह इसी सीट से मैदान में हैं।

मयंक यादव को टी20 वर्ल्ड कप 2024 में खेलने का मौका.

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मयंक यादव उम्र 21 साल. दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने पहले ही जवाब दे दिया है। आईपीएल में उनकी रफ्तार ने सभी को हैरान कर दिया है. नियमित रूप से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं. लाइन और लेंथ पर भी नियंत्रण होता है. क्या प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सिर्फ एक मैच खेलने वाला ये मयंक टी20 वर्ल्ड कप खेलने जा रही भारतीय टीम में जगह बना पाएगा?

टी20 वर्ल्ड कप टीम अभी तय नहीं हुई है. हालाँकि, चक्रवर्ती इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण हैं कि अगर आप आईपीएल में अच्छा खेलते हैं, तो आप सीधे विश्व कप टीम में प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने 2021 आईपीएल में अच्छा खेला और विश्व कप टीम में जगह बनाई। मयंक का नाम भी उस लिस्ट में आ सकता है. टी20 टीम में तेज गेंदबाज के तौर पर यशप्रित बुमरा की जगह पक्की है. लेकिन उनका पार्टनर कौन होगा? मोहम्मद शमी घायल. वह पाया नहीं जा सकता. मोहम्मद सिराज इस बार आईपीएल में जिस फॉर्म में हैं, उसे देखते हुए हैदराबाद के तेज गेंदबाज को टीम में शामिल करने पर सवाल उठ सकता है। वह हर मैच में रन दे रहे हैं. सीनियर पेसर होने के बावजूद सिराज जिम्मेदारी के साथ खेलने में नाकाम रहे. नतीजतन, यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी जगह पक्की है. तो फिर कौन होगा बुमराह का पार्टनर?

मुकेश कुमार, आकाश दीप, प्रसिद्ध कृष्णा और अबेश खान जैसे तेज गेंदबाजों को भारतीय क्रिकेट बोर्ड के साथ बुमराह, सिराज, शमी के वार्षिक अनुबंध से बाहर कर दिया गया है। मुकेश इस बार आईपीएल में नियमित नहीं हैं. उन्होंने 2 मैचों में 4 विकेट लिए. आकाश ने इस आईपीएल में अब तक सिर्फ एक ही मैच खेला है. प्रशीद को चोट लगी है. अबेश ने पांच मैचों में सिर्फ तीन विकेट लिए हैं. ऐसे में मयंक निश्चित तौर पर टी20 वर्ल्ड कप टीम में एंट्री के लिए दावेदारी कर सकते हैं. अर्शदीप सिंह मयंक से लड़ेंगे. बाएं हाथ का तेज गेंदबाज इस आईपीएल में 5 मैचों में 8 विकेट लेकर ऑरेंज हैट के लिए संघर्ष कर रहा है। उसका परीक्षण किया जाता है. उन्होंने 2022 टी20 वर्ल्ड कप भी खेला था. उन्होंने देश की जर्सी में 44 टी20 खेले हैं. उन्हें इस साल अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 टीम में भी शामिल किया गया था. परिणामस्वरूप, वह विश्व कप टीम में बने रह सकते हैं।

मयंक ने वहां तीन मैच खेले. इनमें से एक मैच में वह एक ओवर फेंकने के बाद मैदान से बाहर चले गये थे. उसकी पीठ में दर्द है. मयंक ने दो मैचों में 6 विकेट लिए. उन दोनों मैचों में उन्हें मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। मयंक की तेजी देखकर इयान बिशप ने कहा, ”मैं एक दोस्त से मयंक यादव के बारे में बात कर रहा था. ऐसी प्रतिभा का प्रबंधन किया जाना चाहिए. अगले दो साल तक उन्हें एक पर्सनल ट्रेनर, एक डॉक्टर की जरूरत पड़ेगी. उसका ख्याल रखना होगा।” इस बात के प्रमाण मिले हैं कि बिशप के विचार अचूक नहीं थे। मयंक चोट के कारण टीम से बाहर हैं. लखनऊ सुपर जायंट्स के सीईओ विनोद बिस्ट ने कहा, ”मयंक पेट दर्द से पीड़ित थे। इसीलिए उन्हें हटा दिया गया. हो सकता है कि वह इस सप्ताह दोबारा न खेलें। मयंक को आराम की जरूरत है. लेकिन वह जल्द ही मैदान पर वापसी करेंगे।”

अगर मयंक टी20 वर्ल्ड कप से पहले ठीक हो जाते हैं और अपनी फॉर्म बरकरार रखते हैं तो इसकी बिल्कुल भी संभावना नहीं है. बंगाल के सहायक कोच सौराशीष लाहिड़ी ने कहा, ”भारत में अब एक से एक तेज गेंदबाज उभर रहे हैं. अलग-अलग राज्यों से युवा तेज गेंदबाज उभरकर सामने आ रहे हैं। इसके पीछे राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों का होना जरूरी है. अचानक इतने सारे तेज गेंदबाज उठ नहीं सकते. उनके लिए समय देना होगा. आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप कितने मैच खेलेंगे। यदि नहीं, तो तेज गेंदबाज घायल हो जायेंगे। अगर मयंक ठीक हो जाते हैं और उसी गति से गेंदबाजी करते हैं तो उन्हें मौका मिल सकता है.” मयंक को उनके पिता ने बनाया था. उन्होंने अपने बेटे के आईपीएल में अच्छा खेलने को लेकर बड़े सपने देखना शुरू कर दिया है. मयंक के पिता ने कहा, ”जब वह 12 साल का था तो मुझे पता था कि वह क्रिकेटर बनेगा. वह मेरा हाथ पकड़ कर खेलने लगा. 14 साल की उम्र में जब वह पहली बार ट्रायल के लिए गए तो वह बाकियों से आगे थे। इसके बाद भी मयंक ने कड़ी मेहनत की. मुझे कभी नहीं छोड़ा. मैं 100 फीसदी आश्वस्त हूं और भारतीय टीम में खेलूंगा।”

हालांकि मयंक खुद अभी टी20 वर्ल्ड कप में खेलने के बारे में नहीं सोच रहे हैं. उनके दिमाग में सिर्फ आईपीएल ही है. मयंक ने कहा, ”मैं अभी टी20 वर्ल्ड कप के बारे में नहीं सोच रहा हूं. मैं बस अच्छा कहना चाहता हूं. अब अच्छा कह रहा हूं तो अच्छा लग रहा है. मैं वर्तमान प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं. मैं फिलहाल आईपीएल पर ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं।” हालांकि, यह कहते हुए कि वह निश्चित रूप से भारतीय टीम में खेलना चाहते हैं, मयंक ने कहा, ‘लगातार दो मैचों में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिलना अच्छा लगता है। लेकिन दोनों मैच जीतने से ज्यादा खुशी है. मेरा असली लक्ष्य देश के लिए खेलना है।’ यात्रा अभी शुरू हुई है।”

मयंक से पहले आईपीएल में उमरान मलिक की चर्चा थी. वह 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी गेंदबाजी कर सकते थे. लेकिन वो चर्चा एक सीज़न में ही ख़त्म हो गई. अब उमरान को हर मैच में जगह भी नहीं मिलती. हालाँकि, मयंक और उमरान के बीच एक अंतर है। मयंक का लाइन और लेंथ पर नियंत्रण है. उमरान के पास वह नहीं था. वर्तमान बल्लेबाजों को केवल गति के आधार पर रोका नहीं जा सकता। इसलिए उमरान को पहले कुछ दिनों तक सफलता मिली लेकिन अब वह छिप गया है। देखूंगा मयंक क्या करता है. हालांकि, लखनऊ के गेंदबाजी कोच मोर्नी मोर्कल ने कहा, ‘मयंक ने न सिर्फ अच्छी गेंदबाजी की बल्कि अहम विकेट भी चटकाए. पिछला सीजन उनके लिए अच्छा नहीं गया था. वह पहले तैयारी मैच में घायल हो गये थे. मैंने उनसे केवल एक ही बात कही, अच्छा क्रिकेट खेलने के लिए आपको बुनियादी चीजें सही करने की जरूरत है। मैंने आपसे कहा था कि गेंद की लाइन और लेंथ को लेकर सावधान रहें। मयंक यही करने की कोशिश करता है। मैच में कुछ अतिरिक्त करने की कोशिश नहीं की. उनकी गेंद की गति एक प्लस है।”

भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व गेंदबाज मिशेल जॉनसन के बारे में बात की.

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विराट कोहली का नाम अब कई गेंदबाजों के लिए एक बुरे सपने जैसा है. कई बड़े गेंदबाज ये नहीं सोचते कि उन्हें कैसे बताया जाए. लेकिन विराट आज भी 10 साल पहले मिचेल जॉनसन की एक गेंद को नहीं भूल पाए हैं. उस समय जॉनसन उनका आतंक बन गया था.

2014 में भारत ऑस्ट्रेलिया में खेलने गया था. उस दौरे पर विराट टेस्ट कप्तान बने थे. महेंद्र सिंह धोनी ने दिया इस्तीफा. दौरे की शुरुआत में विराट ने एक घटना का जिक्र किया. बताते हैं कि कैसे सारी योजनाएँ बदल गईं जब जॉनसन का एक बाउंसर उनके सिर पर लगा। विराट ने कहा, ”दौरे के पहले मैच में जॉनसन की पहली गेंद उनके सिर पर लगी. यह बहुत बड़ा सदमा था. यह अविश्वसनीय लग रहा था।”

विराट पहले मैच में 31वें ओवर में बल्लेबाजी कर रहे थे. जॉनसन कह रहा था. और कुछ ही देर में लंच ब्रेक. जॉनसन ने पहली गेंद उछाली. विराट गेंद की लाइन से अपना सिर नहीं हटा सके. गेंद हेलमेट पर जोर से लगी. विराट ने कहा, ”मैं दो महीने से जॉनसन के खिलाफ खेलने की तैयारी कर रहा था। मैं कल्पना कर रहा था कि गेंद को कैसे खेलूं। लेकिन गेंद हेलमेट पर लगने के बाद सारी योजनाएं बदल गईं. यह बहुत तेज़ था. मेरी आँखों में सरशेफुल दिख रहा था. बायीं आंख सूजी हुई थी. हालाँकि उस समय मुझे यह समझ नहीं आया था।” 2013-14 में विराट और जॉनसन के बीच लड़ाई काफी तीखी रही थी. जॉनसन उस समय बल्लेबाजों के लिए एक आतंक था। विराट को भी धीरे-धीरे अपनी जाति का पता चल रहा है. विराट ने जॉनसन के सिर पर गेंद लगने के बाद उनके रवैये के बारे में बात की. उन्होंने कहा, ”दोपहर के भोजन के दौरान मेरे पास सोचने का समय था. मुझे लगा कि मेरे पास दो विकल्प हैं। एक तो मैं लड़ूंगा, दो मैं भाग जाऊंगा। मैंने पहला चुना. मैंने सोचा कि उसकी मेरे सिर पर मारने की हिम्मत कैसे हुई। जॉनसन एक के बाद एक चौका लगाते नजर आए. वही मैंने किया।”

विराट कोहली ने आईपीएल में अब तक सबसे ज्यादा रन बनाए हैं. लेकिन गुरुवार को वह दौड़ नहीं सके. महज 3 रन पर आउट हो गए. इसके बाद पाकिस्तान के तेज गेंदबाज जुनैद खान ने विराट की आलोचना की. वह विराट का नाम लेने की हिम्मत नहीं कर सके. लेकिन उन्होंने अपने स्ट्राइक रेट को लेकर मजाक किया.

जुनैद ने पाकिस्तान के लिए 22 टेस्ट खेले. 76 वनडे मैच खेले. उन्होंने टी20 खेला है. उस तेज गेंदबाज ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. वहां उन्होंने विराट का नाम लिए बिना लिखा, ”स्ट्राइक रेट 33.33”. उन्होंने हैशटैग में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और मुंबई इंडियंस का नाम लिखा। विराट ने गुरुवार को मुंबई के खिलाफ 9 गेंदों पर 3 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 33.33 है. इसमें कोई शक नहीं कि जुनैद का इशारा विराट की तरफ था.

यह पहली बार नहीं है, जुनैद इससे पहले भी विराट की आलोचना कर चुके हैं. विराट ने इस बार आईपीएल में शतक लगाया. लेकिन उन्होंने ये रन बनाने के लिए आईपीएल के इतिहास में सबसे ज्यादा गेंदें खेलीं. राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ उस पारी के तुरंत बाद जुनैद ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘आईपीएल इतिहास का सबसे धीमा शतक बनाने के लिए विराट को बधाई।’ विराट ने इस आईपीएल में अब तक 319 रन बनाए हैं. शतक बनाया. दो अर्द्धशतक बनाए. विराट अब नारंगी टोपी के मालिक हैं. उनके नाम आईपीएल में 7500 से ज्यादा रन हैं. विराट ने भारत के लिए टी20 में 4037 रन बनाए हैं. ऐसे ही एक क्रिकेटर पर जुनैद ने व्यंग्य किया है.

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज को 2019 के बाद पाकिस्तान के लिए खेलने का मौका नहीं मिला। जुनैद ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 107 मैचों में कुल 189 विकेट लिए। इनमें 22 रेड बॉल मैचों में उनके नाम 71 विकेट हैं। टी20 में उन्होंने 9 मैचों में 8 विकेट लिए. जुनैद ने आखिरी बार घरेलू क्रिकेट 2022 में खेला था। 11 अप्रैल: वानखेड़े स्टेडियम में भीड़ ने हार्दिक पंड्या की फिर से हूटिंग की। विराट कोहली ने उन्हें शांत करने के लिए हाथ जोड़कर विनती की.

रोहित शर्मा की जगह हार्दिक को मुंबई इंडियंस का कप्तान बनाए जाने की घोषणा के बाद से क्रिकेट प्रेमियों का एक वर्ग नाराज है। घरेलू मैदान वानखेड़े में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पिछले मैच में भी उन्हें भीड़ के तानों का शिकार होना पड़ा था। यह दिन कोई अपवाद नहीं था. मुंबई बनाम आरसीबी मैच के दौरान दोनों टीमों के कई क्रिकेटरों ने हार्दिक पर तंज कसना बंद करने का अनुरोध किया। और जब मुंबई के कप्तान बल्लेबाजी करने उतरे तो विराट दर्शकों से उनके नाम पर जीत का नारा लगाने के लिए कहते दिखे!

हार्दिक के पक्ष में खड़े होते हुए विराट ने ये भी कहा कि गौतम गंभीर के साथ उनका मनमुटाव खत्म हो गया है. नवीन उल हक से कोई विवाद नहीं है. एक कार्यक्रम में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के स्टार को यह कहते हुए सुना गया, “लोग मेरे व्यवहार से निराश हैं। मैंने नवीन को गले लगा लिया. उस दिन गौती भाई ने मुझे गले लगाया. परिणामस्वरूप, अब कोई मसाला नहीं रह गया है। इसलिए लोग निराश हैं. वे मजाक उड़ा रहे हैं. अरे, क्या हम अभी भी बच्चे हैं!