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क्या अब भारत में होगा कैंसर का देशी इलाज?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब भारत में कैंसर का देशी इलाज होगा या नहीं! कैंसर के इलाज का एक स्वदेशी तरीका ईजाद किया गया है, जिसे दुनिया में सबसे सस्ता बताया गया है। अब तक CAR T-सेल थैरेपी से कैंसर के इलाज को सुगम और किफायती बनाया गया है। लेकिन भारत में तैयार की गई थैरेपी का नाम है- NexCAR19 CAR T-सेल थैरेपी। आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल सेंटर ने मिलकर जीन आधारित इस इलाज को तैयार किया है। आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शुभाशीष चौधरी ने कहा कि विदेश में इस इलाज की कीमत तकरीबन चार करोड़ रुपये है, जबकि भारत में यह खर्च लगभग 30 लाख रुपये होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को इसे लॉन्च किया। कार्यक्रम आईआईटी बॉम्बे में हुआ। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, भारत की पहली जीन थैरेपी की शुरुआत कैंसर के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक बड़ी उपलब्धि है। मेक इन इंडिया की पहल पर बनी इस थैरेपी के बारे में एक्सपर्ट का कहना है कि ये दुनिया की सबसे सस्ती थैरेपी है, जिससे आने वाले समय में कैंसर से लड़ने में देश को मजबूती मिलेगी।

सीएआर टी-सेल इम्यूनोथैरेपी और जीन थैरेपी का एक रूप है। इसमें वाइट ब्लड सेल्स और टी सेल्स को निकालकर फिर से बॉडी में अलग-अलग तरीके से डाला जाता है। टी-सेल्स को कैंसर से लड़ने के लिए प्रोग्राम किया जाता है। इसको इस तरह समझें, जैसे युद्ध पर जाने से पहले सेना को ट्रेनिंग दी जाती है। वैसे ही इस थैरेपी में हमारे शरीर की ही सेल्स को पावरफुल बनाकर कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साल 2019 में तकरीबन 12 लाख नए कैंसर के मामले और 9.3 लाख मौतें दर्ज की गई थीं। एशिया में इस बीमारी से जूझने वाला भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। NexCAR19 CAR T-सेल थेरेपी भारत की पहली ‘मेक इन इंडिया’ CAR T-सेल थैरेपी है, जिससे इलाज की लागत में काफी कमी आने की उम्मीद जताई गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक सीएआर टी-सेल इम्यूनोथेरेपी और जीन थैरेपी का एक रूप है। जीन आधारित थैरेपी विभिन्न प्रकार के कैंसर को ठीक करने में मदद करेगी।

बता दे कि वेल्स की राजकुमारी केट मिडलटन को सिर्फ 42 साल की उम्र में कैंसर हो गया। उन्होंने खुद एक विडियो मेसेज जारी कर कैंसर होने की पुष्टि की है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी कम उम्र में केवल केट को ही नहीं, बल्कि भारत में भी कैंसर के मामलों में इजाफा हुआ है। कैंसर एक्सपर्ट का कहना है कि तंबाकू और स्मोकिंग का बढ़ता चलन, पॉल्यूशन, प्लास्टिक, नाइट लाइफ, जंक फूड, हैवी मेटल्स, इंडस्ट्री एक्सपोजर, कॉस्मेटिक का इस्तेमाल, माइक्रोवेव जैसी चीजें उम्र से पहले ही लोगों को कैंसर का शिकार बना रही हैं। जेनेटिक कारण से कैंसर होने का खतरा रहता है। यह माता-पिता में से किसी एक के जीन से बच्चे में आता है। ऐसे लोगों में कम उम्र में कैंसर होने की संभावना रहती है। लेकिन इसकी संख्या कम होती है। 50 साल से कम उम्र में सबसे ज्यादा मुंह और गले का कैंसर बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह गुटखा, तंबाकू का सेवन है। 12 से 15 साल के बीच बच्चे गुटखा चबाना शुरू करते हैं और 40 साल के आसपास आते आते कैंसर के शिकार हो जाते हैं। कहीं से भी इस कैंसर की वजह जीन नहीं है।

लंग्स अक्सर 60 साल के बाद ही खराब होते हैं, तभी किसी को लंग्स कैंसर होता था। अभी स्मोकिंग के अलावा प्रदूषण लंग्स कैंसर की बड़ी वजह बन रहा है। 50 साल से कम उम्र में लंग्स कैंसर के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। वहीं, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर काफी तेजी से बढ़ रहा है। 5 से 10 पर्सेंट मामले में जेनेटिक वजह तो है, लेकिन इसके अलावा बाकी में लाइफस्टाइल की वजह से कैंसर हो रहा है। प्लास्टिक के सेवन से निकलने वाला केमिकल एंडोक्राइन को डिस्टर्ब करता है। प्लास्टिक में पाए जाने वाला थैलेड और बीएसए स्ट्रेजोन को प्रभावित करता है और इसकी वजह से ब्रेस्ट और ओवरी के कैंसर होते हैं।

नाइटलाइफ भी कैंसर पैदा करता है। यानी नॉर्मल साइकल रात में सोना और दिन में जगने की बजाए जो लोग रात में जागते हैं और दिन में सोते हैं, उनमें कैंसर का खतरा ज्यादा है। यूके में इस पर स्टडी हुई थी। अस्पतालों में जो नर्सेज रात में ड्यूटी करती थीं और नॉर्मल नर्सेज जो दिन में काम करती थी। दोनों में तुलना की गई तो रात में काम करने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा पाया गया।

आखिर क्यों और कैसे हो रही है पाकिस्तान में हत्याएं?

वर्तमान में पाकिस्तान में हत्याएं लगातार होती ही जा रही है! पाकिस्तान में आतंकियों की हत्या करने के लिए भारत सरकार ने आदेश दिया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की खुफिया एजेंसी रॉ इस पूरे हत्या को अंजाम दे रही है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कंट्रोल करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत उन लोगों को निशाना बना रहा है, जिसे वह दुश्मन मानता है। गार्जियन की रिपोर्ट में दोनों देशों के खुफिया अधिकारियों के साथ इंटरव्यू और पाकिस्तानी जांचकर्ताओं की ओर से शेयर किए गए डॉक्यूमेंट्स का जिक्र है। रिपोर्ट कहती है कि 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक साहसी दृष्टिकोण अपनाया। दावे के मुताबिक 2020 से अब तक 20 आतंकियों की हत्या अज्ञात हमलावरों की ओर से की गई है। गार्जियन की रिपोर्ट देखकर पाकिस्तानी मीडिया गदगद हो गया है। जियो न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘द गार्जियन की रिपोर्ट पाकिस्तान के दावों को और अधिक बल देती है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने पाकिस्तान की धरती पर हत्याओं के आदेश दिए।’

जियो ने अपनी रिपोर्ट में रॉ को कुख्यात जासूसी एजेंसी बताया। इसके साथ ही कहा कि पुलवामा हमले के बाद से ही भारत ने इन हत्याओं को अंजाम देना शुरू कर दिया। जियो ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तान के अलावा भारत खालिस्तान समर्थकों को भी निशाना बनाता है। जियो ने कहा कि भारतीय एजेंट्स ने कई पाकिस्तानियों को हत्या करने के लिए पैसे भी दिए। रिपोर्ट कहती है कि भारत हमला होने से पहले ही आतंकियों को मार रहा था। लेकिन अब रिपोर्ट पर सवाल खड़े होने लगे हैं। द गार्जियन की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठने का सबसे बड़ा कारण है कि इसे पूरी तरह पाकिस्तान के दस्तावेजों और खुफिया एजेंसी के आधार पर लिखा गया है। वहीं इस रिपोर्ट में कई तथ्यात्मक गलतियों को भी लोगों ने दिखाया है, जिससे पता चलता है कि इतने प्रतिष्ठित अखबार ने जल्दबाजी में इस रिपोर्ट को छाप दिया। डिफेंस एक्सपर्ट अभिषेक अय्यर मित्रा ने सवाल उठाते हुए लिखा कि रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू को मरा हुआ लिख दिया गया, जो कि गलत है। यह दावा किया जाता है कि मार्च 2022 के दौरान कराची में गोलीबारी को अंजाम देने के लिए अफगानिस्तान से लोगों को को बड़ी रकम दी गई थी। इस हमले के बाद वो वहां से गायब हो गए और बॉर्डर पार गए थे। हालांकि बाद में उन्हें पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ लिया था।बाद में द गार्जियन ने इसे सुधारा। वहीं आतंकी रियाज अहमद की फोटो भी गलत लगाई गई थी। भारत सरकार ने भी इस रिपोर्ट को नकारते हुए, ‘झूठा और दुर्भावनापूर्ण भारत विरोधी प्रचार’ बताया है।

बता दे कि दो भारतीय खुफिया अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में रहकर भारत के खिलाफ साजिश करने वालों को निशाना बनाने की यह प्रक्रिया खुफिया मिशनों से प्रभावित थी, जिसमें मोसाद और केजीबी के साथ समानताएं थीं। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इन दावों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पिछले बयान को दोहराया गया है जिसमें उन्होंने कहा था विदेश में हुईं टारगेट किलिंग भारत सरकार की नीति के अनुरूप नहीं हैं। पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि ये हत्याएं भारतीय खुफिया स्लीपर सेल द्वारा की गई थीं, जो मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात से संचालित होती थीं, हत्याओं को अंजाम देने के लिए स्थानीय अपराधियों या जिहादियों को झूठे बहाने से नियुक्त करती थीं। गार्जियन की रिपोर्ट में जाहिद अखुंड की हत्या का जिक्र है, जिसे जहूर मिस्त्री के नाम से जाना जाता है। जहूर घोषित आतंकवादी है, जिसने एयर इंडिया का एक विमान हाईजैक किया था। इसके साथ ही कहा कि पुलवामा हमले के बाद से ही भारत ने इन हत्याओं को अंजाम देना शुरू कर दिया। जियो ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तान के अलावा भारत खालिस्तान समर्थकों को भी निशाना बनाता है।गार्जियन के अनुसार, पाकिस्तान के दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि रॉ के एक एजेंट पर कई महीनों तक अखुंड के ठिकाने और गतिविधियों पर खुफिया जानकारी जुटाने के लिए फंडिंग देने का आरोप है। यह दावा किया जाता है कि मार्च 2022 के दौरान कराची में गोलीबारी को अंजाम देने के लिए अफगानिस्तान से लोगों को को बड़ी रकम दी गई थी। इस हमले के बाद वो वहां से गायब हो गए और बॉर्डर पार गए थे। हालांकि बाद में उन्हें पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ लिया था।

पाकिस्तान में हो रही हत्याओं के लिए क्या बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर?

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान में हो रही हत्याओं के लिए एक बयान दिया है! भारत ने पाकिस्तान में हत्याओं की साजिश रचने के दावों का सख्ती से खंडन किया है। उन दावों को ‘भारत विरोधी झूठा और दुर्भावनापूर्ण प्रचार’ बताया है। यह प्रतिक्रिया उन आरोपों के मद्देनजर आई है, जिसमें भारत पर अपनी खुफिया एजेंसी रॉ के जरिए 2020 से पाकिस्तान में लगभग 20 हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगा था। ब्रिटेश के अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय और पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों का हवाला देते हुए, कि ये कार्रवाइयां विदेशी धरती पर आतंकवादियों को खत्म करने के एक मिशन का हिस्सा थीं, जिसमें खालिस्तान आंदोलन को हवा देने वाले सिख अलगाववादियों को निशाना बनाना भी शामिल था। आरोप 2019 में पुलवामा हमले के बाद शुरू की गई एक रणनीति की ओर इशारा करते हैं, जिसका उद्देश्य आतंकी हमले के खतरे को पनपने से पहले ही बेअसर कर देना है।

दो भारतीय खुफिया अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में रहकर भारत के खिलाफ साजिश करने वालों को निशाना बनाने की यह प्रक्रिया खुफिया मिशनों से प्रभावित थी, जिसमें मोसाद और केजीबी के साथ समानताएं थीं। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इन दावों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पिछले बयान को दोहराया गया है एजेंसियों ने पकड़ लिया था।एक पाकिस्तानी अधिकारी ने गार्जियन को बताया, ‘पाकिस्तान में हत्याओं का आयोजन करने वाले भारतीय एजेंटों की यह नीति रातोंरात नहीं बनी है। हमारा मानना है कि उन्होंने यूएई में इन स्लीपर सेल को स्थापित करने के लिए लगभग दो साल तक काम किया है जो ज्यादातर फांसी का आयोजन कर रहे हैं। उसके बाद, हमने कई हत्याओं को देखना शुरू किया।’जिसमें उन्होंने कहा था विदेश में हुईं टारगेट किलिंग भारत सरकार की नीति के अनुरूप नहीं हैं। पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि ये हत्याएं भारतीय खुफिया स्लीपर सेल द्वारा की गई थीं, जो मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात से संचालित होती थीं, हत्याओं को अंजाम देने के लिए स्थानीय अपराधियों या जिहादियों को झूठे बहाने से नियुक्त करती थीं।

गार्जियन की रिपोर्ट में जाहिद अखुंड की हत्या का जिक्र है, जिसे जहूर मिस्त्री के नाम से जाना जाता है। जहूर घोषित आतंकवादी है, जिसने एयर इंडिया का एक विमान हाईजैक किया था। गार्जियन के अनुसार, पाकिस्तान के दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि रॉ के एक एजेंट पर कई महीनों तक अखुंड के ठिकाने और गतिविधियों पर खुफिया जानकारी जुटाने के लिए फंडिंग देने का आरोप है। यह दावा किया जाता है कि मार्च 2022 के दौरान कराची में गोलीबारी को अंजाम देने के लिए अफगानिस्तान से लोगों को को बड़ी रकम दी गई थी। इस हमले के बाद वो वहां से गायब हो गए और बॉर्डर पार गए थे। हालांकि बाद में उन्हें पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ लिया था।एक पाकिस्तानी अधिकारी ने गार्जियन को बताया, ‘पाकिस्तान में हत्याओं का आयोजन करने वाले भारतीय एजेंटों की यह नीति रातोंरात नहीं बनी है। हमारा मानना है कि उन्होंने यूएई में इन स्लीपर सेल को स्थापित करने के लिए लगभग दो साल तक काम किया है जो ज्यादातर फांसी का आयोजन कर रहे हैं। उसके बाद, हमने कई हत्याओं को देखना शुरू किया।’

 हालांकि, रॉ के एक पूर्व सीनियर अधिकारी ने इस दावे का खंडन किया कि एजेंसी इन हत्याओं में शामिल थी। कार्रवाइयां विदेशी धरती पर आतंकवादियों को खत्म करने के एक मिशन का हिस्सा थीं, जिसमें खालिस्तान आंदोलन को हवा देने वाले सिख अलगाववादियों को निशाना बनाना भी शामिल था। आरोप 2019 में पुलवामा हमले के बाद शुरू की गई एक रणनीति की ओर इशारा करते हैं, जिसका उद्देश्य आतंकी हमले के खतरे को पनपने से पहले ही बेअसर कर देना है।गार्जियन के अनुसार, उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जानकारी के बिना नहीं होगी, जो बदले में प्रधानमंत्री को सूचित करेगा। सिख अलगाववादियों को निशाना बनाना भी शामिल था। आरोप 2019 में पुलवामा हमले के बाद शुरू की गई एक रणनीति की ओर इशारा करते हैं, जिसका उद्देश्य आतंकी हमले के खतरे को पनपने से पहले ही बेअसर कर देना है।कभी-कभी एजेंसी सीधे प्रधानमंत्री से बात करती है। उन्होंने कहा, ‘मैं उनकी मंजूरी के बिना कुछ नहीं कर सकता।’ उनका मानना है कि ये हत्याएं संभवतः पाकिस्तान द्वारा की गई थीं।

अदिति सिंह के लिए क्या बोली प्रियंका गांधी?

हाल ही में प्रियंका गांधी ने अदिति सिंह पर एक बयान दिया है! उत्तर प्रदेश के रायबरेली से भाजपा विधायक अदिति सिंह ने कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ पॉडकास्ट में अदिति ने खुलासा किया है कि वह जब कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आईं तो प्रियंका ने उन्हें बदनाम करने की कोशिश की। आरोप है कि प्रियंका ने उस समय अदिति के पति अंगद सिंह पर पत्नी के चरित्र को लेकर लांछन लगाने का दबाव बनाया, तभी चुनाव में टिकट मिलेगा। रायबरेली में कांग्रेस से राजनीति शुरुआत करके फिर बीजेपी में शामिल हो चुकीं अदिति ने यह भी बताया कि अंगद सिंह से उनका तलाक हो चुका है। अंगद सिंह पंजाब के निवासी हैं और यहां की नवांशहर सीट से विधायक थे। अंगद सिंह 2017 में पहली बार विधायक चुने गए थे, उस समय वे कांग्रेस में थे। अदिति ने बताया कि पंजाब में टिकट बंटवारे के दौरान प्रियंका गांधी ने अंगद के सामने शर्त रखी कि वो अपनी पत्नी अदिति सिंह के कैरेक्टर को लेकर आरोप लगाएं।रायबरेली से भाजपा विधायक अदिति ने बताया कि जब वो 2017 में पहली बार विधायक बनी थीं तो संयोग से राहुल गांधी से भी उनकी मुलाकात हुई थी। उस दौरान राहुल गांधी ऐसे दिख रहे थे जैसे उन्हें किसी चीज की खबर ना हो और कोई जानकारी ना हो। इसी शर्त पर टिकट दिया जाएगा। पूर्व पति को अदिति के खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की गई।

अदिति का ही राजनीतिक घराने से ताल्लुकात है। अदिति सिंह के पिता बाहुबली अखिलेश कुमार सिंह 24 वर्षों तक रायबरेली विधायक बने रहे। अब उनकी बेटी दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं। वह अब बीजेपी में शामिल हैं। उधर, अंगद सिंह के दादा दिलबाग सिंह छह बार नवांशहर के विधायक रहे हैं। अंगद के पिता प्रकाश सिंह और मां गरिकबाल कौर भी एक-एक बार विधायक रह चुकी हैं। राहुल गांधी ने अपना सिर ऊपर की तरफ उठाया और जोर-जोर से हंसने लगे। अदिति ने बताया कि उस समय वह चौंक उठी थीं। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में गांधी परिवार भी ज़्यादा अकड़ है। वे खुद को सबसे ऊपर समझते हैं। पिता अखिलेश सिंह की विरासत को संभाल रहीं अदिति सिंह रायबरेली से दो बार से विधायक हैं। पहली बार वह कांग्रेस से जीतकर आईं तो वहीं दूसरी बार भाजपा में शामिल होकर जीतीं।बता दें कि लखनऊ से सटे रायबरेली जिले में कांग्रेस के झंडे पर चुनाव जीतकर विधानसभा की राजनीति में एंट्री करने वाली अदिति सिंह ने अब गांधी परिवार को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। अब भाजपा में शामिल हो चुकीं अदिति ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ को लेकर राज खोला है।

रायबरेली से भाजपा विधायक अदिति ने बताया कि जब वो 2017 में पहली बार विधायक बनी थीं तो संयोग से राहुल गांधी से भी उनकी मुलाकात हुई थी। उस दौरान राहुल गांधी ऐसे दिख रहे थे जैसे उन्हें किसी चीज की खबर ना हो और कोई जानकारी ना हो। अदिति सिंह ने बताया कि राहुल गांधी ने उस दौरान पूछा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से कितने विधायक हैं? अदिति सिंह ने जवाब में 7 की संख्या बताई। इसके बाद राहुल गांधी ने अपना सिर ऊपर की तरफ उठाया और जोर-जोर से हंसने लगे। अदिति ने बताया कि उस समय वह चौंक उठी थीं। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में गांधी परिवार भी ज़्यादा अकड़ है। वे खुद को सबसे ऊपर समझते हैं। पिता अखिलेश सिंह की विरासत को संभाल रहीं अदिति सिंह रायबरेली से दो बार से विधायक हैं। पहली बार वह कांग्रेस से जीतकर आईं तो वहीं दूसरी बार भाजपा में शामिल होकर जीतीं।

अदिति ने प्रियंका गांधी पर गंभीर आरोप लगाया। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पंजाब में टिकट बंटवारे के दौरान प्रियंका गांधी ने पति अंगद के सामने शर्त रखी कि वो अपनी पत्नी अदिति के कैरेक्टर को लेकर आरोप लगाएं। बता दे कि अंगद सिंह 2017 में पहली बार विधायक चुने गए थे, उस समय वे कांग्रेस में थे। अदिति ने बताया कि पंजाब में टिकट बंटवारे के दौरान प्रियंका गांधी ने अंगद के सामने शर्त रखी कि वो अपनी पत्नी अदिति सिंह के कैरेक्टर को लेकर आरोप लगाएं। इसी शर्त पर टिकट दिया जाएगा। पूर्व पति को अदिति के खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की गई। इसी शर्त पर टिकट दिया जाएगा। पूर्व पति को अदिति के खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की गई।

क्या रायबरेली की सीट पर रहेगा अखिलेश परिवार का ही राज?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि रायबरेली की सीट पर अखिलेश परिवार का ही राज रहेगा या नहीं! उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सूबे की सत्ता संचालित होती है। लेकिन लखनऊ के बगल में ही रायबरेली जिला है, जो देश की सत्ता की अहम धुरी रही है। इसकी वजह यहां पिछले कई दशकों से गांधी परिवार का राज रहा है। लेकिन इसी रायबरेली शहर में एक और सत्ता चलती रही है। वो सत्ता है अब दिवंगत हो चुके बाहुबली अखिलेश सिंह (Akhilesh Singh) की। रायबरेली सदर सीट पर अखिलेश फैमिली का ही राज रहा है। बीते 30-35 सालों से यही एक परिवार विधानसभा की जंग जीतता रहा है। चाहे गांधी परिवार के साथ हों या विरोध हो गया हो, इस एक परिवार की अपनी सत्ता कायम रही है। अब अखिलेश की बेटी अदिति सिंह (Aditi Singh) पिता की राजनीतिक विरासत को संभाल रही हैं। वही अदिति जो अब प्रियंका और राहुल गांधी पर हमलावर तेवर अपना रही हैं। कांग्रेस के साथ राजनीति की शुरुआत करने वाली अदिति बाद में बीजेपी के साथ आ गईं। पहली बार कांग्रेस के बाद अब भाजपा से विधायक अदिति ने सीधा गांधी फैमिली पर अटैक शुरू किया है। राहुल गांधी की राजनीतिक समझ के साथ ही अदिति ने प्रियंका गांधी पर शादीशुदा घर तोड़ने की कोशिश का सनसनीखेज आरोप लगाया है। लोकसभा चुनाव के लिए अभी तक रायबरेली सीट से कोई उम्मीदवार फाइनल नहीं हुआ है लेकिन उससे पहले ही स्थानीय राजनीति तेज हो गई है।

अदिति सिंह का ही राजनीतिक घराने से ताल्लुकात है। अदिति के पिता बाहुबली अखिलेश कुमार सिंह 24 साल तक रायबरेली विधायक बने रहे। किसी के लिए वह रॉबिनहुड थे तो किसी के लिए बाहुबली। अखिलेश रायबरेली सदर सीट से कभी नहीं हारे। 1993 से 2017 तक पांच बार विधायक रहे। अब उनकी बेटी दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं। अब वह भाजपा के साथ हैं। रायबरेली हमेशा से गांधी परिवार का गढ़ रहा, लेकिन इसी रायबरेली की सदर विधानसभा सीट पर अखिलेश सिंह की विधायकी रही। पहले कांग्रेस से और बाद में निर्दलीय फिर एक बार पीस पार्टी से। अखिलेश वैसे तो हमेशा गांधी फैमिली के लिए हनुमान की भूमिका में रहे। लेकिन बीच में रिश्ते बिगड़ने पर सोनिया और प्रियंका की तमाम कोशिशों के बावजूद भी उन्हें हराया नहीं जा सका।

अखिलेश सिंह के पिता धुन्नी सिंह की रायबरेली में प्रभावशाली और दबंग छवि थी। इंदिरा गांधी के करीबी माने जाते थे। धुन्नी सिंह की हत्या हुई थी। बाद में धुन्नी सिंह की हत्या करने वाले ज्यादातर लोगों की हत्या कर दी गई। अखिलेश सिंह पर भी कई मुकदमे दर्ज रहे। सैयद मोदी के कत्ल में भी नाम आया था, पर 1996 में वह बरी हो गए। रायबरेली के ही एक और बाहुबली और पूर्व मंत्री मनोज पांडेय से अखिलेश सिंह की अदावत रही। यह दुश्मनी 2019 को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले ही खत्म हुई। मनोज पांडेय के भाई राकेश पांडेय की हत्या के बाद ही 2003 में अखिलेश को कांग्रेस से निकाला गया था। अखिलेश सिंह का स्वभाव सत्ता विरोधी भी रहा। एक बार एसपी ने उनके चचेरे भाई अशोक सिंह को सांसदी का टिकट दिया फिर टिकट काटते हुए अशोक को चुनाव लड़ाने से मना कर दिया। इस पर अखिलेश सिंह ने साफ कर दिया कि उनके भाई चुनाव तो लड़ेंगे ही। तब प्रदेश में एसपी की सरकार थी और अखिलेश को इसका खमियाजा भुगतना पड़ा था।

एनआई के साथ पॉडकास्ट में अदिति सिंह ने खुलासा किया है कि वह जब कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आईं तो प्रियंका ने उन्हें बदनाम करने की कोशिश की। आरोप है कि प्रियंका गांधी ने उस समय अदिति के पति अंगद पर पत्नी के चरित्र को लेकर लांछन लगाने का दबाव बनाया, तभी चुनाव में टिकट मिलेगा। प्रियंका पर आरोप के बाद अदिति ने बताया कि जब वो 2017 में पहली बार विधायक बनी थीं तो संयोग से राहुल गांधी से भी उनकी मुलाकात हुई। उस दौरान राहुल गांधी ऐसे दिख रहे थे प्रियंका गांधी पर शादीशुदा घर तोड़ने की कोशिश का सनसनीखेज आरोप लगाया है। लोकसभा चुनाव के लिए अभी तक रायबरेली सीट से कोई उम्मीदवार फाइनल नहीं हुआ है लेकिन उससे पहले ही स्थानीय राजनीति तेज हो गई है।जैसे उन्हें किसी चीज की खबर और कोई जानकारी ना हो। अदिति ने बताया कि राहुल ने उस दौरान पूछा कि यूपी में कांग्रेस से कितने विधायक हैं? अदिति ने जवाब में 7 की संख्या बताई तो राहुल गांधी जोर-जोर से हंसने लगे। अदिति ने बताया कि उस समय वह चौंक उठी थीं।

आखिर क्या है उत्तराखंड की लोकसभा सीटों का झमेला?

उत्तराखंड की लोकसभा सीटों का झमेला बढ़ता ही जा रहा है! लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में अब तक 26 प्रत्याशी मैदान में हैं। बुधवार को नामांकन का आखिरी दिन है। राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ क्षेत्रीय दल भी चुनाव में नामांकन के लिए जोर-शोर से जुटे हुए हैं। उत्तराखंड की पांचों सीटों पर वैसे तो जोरदार टक्कर है, लेकिन हरिद्वार संसदीय सीट हॉट सीट बन गई है। यहां दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा की लड़ाई है। भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री तो कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चुनाव मैदान में हैं। दोनों रावतों की लड़ाई में किसका वर्चस्व कायम रहेगा यह तो आने वाले समय ही बताएगा। हालांकि पांचों सीटों में से हरिद्वार पर मुकाबला कड़ा और रोचक होने जा रहा है। इस सीट पर सबसे ज्यादा प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। उत्तराखंड में भाजपा ने जहां तीन सीटिंग सांसदों के साथ दो नए चेहरों को मौका दिया है। वहीं कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को बदला है। कुछ नए चेहरों को जगह दी है। साथ ही दो युवाओं को प्रत्याशी बना कर युवा शक्ति को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया है। हालांकि किसी महिला प्रत्याशी को टिकट न देने के कारण पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी है।

हरिद्वार लोकसभा सीट में दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बीच मुकाबला है। भाजपा ने पूर्व सीएम और कद्दावर नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व सीएम हरीश रावत की जिद के आगे घुटने टेकते हुए उनके बेटे वीरेंद्र रावत को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खानपुर विधायक उमेश कुमार भी चुनाव मैदान में हैं। विधायक उमेश कुमार इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय बना सकते हैं, जबकि राजनीतिज्ञ इन तीनों में से कांग्रेस पार्टी को मजबूत मान रहे हैं, क्योंकि हरिद्वार में कांग्रेस के विधायक ज्यादा है। इसके चलते मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। बहुजन समाज पार्टी ने भी हरिद्वार सीट पर अपना प्रत्याशी उतारा है। बसपा ने यहां से पहले राज्य आंदोलनकारी और जनता कैबिनेट पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष भावना पांडे को अपना प्रत्याशी बनाया था। भावना पांडे के बसपा में आने से पार्टी के कार्यकर्ता नाराज हो गए, जिस पर पार्टी ने भावना पांडे को निष्कासित कर दिया। इसके बाद भावना पांडे भाजपा में शामिल हो गईं। बसपा ने मुजफ्फरनगर के मीरापुर से पूर्व विधायक मौलाना जमील अहमद कासमी को हरिद्वार संसदीय सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है।

टिहरी लोकसभा से भाजपा ने सिटिंग एमपी माला राज्य लक्ष्मी शाह को एक बार फिर प्रत्याशी बनाया है। भाजपा प्रत्याशी के सामने कांग्रेस के पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला चुनाव मैदान में हैं। भाजपा जहां वर्तमान सांसद और प्रत्याशी के जीत का दम ठोक रही है, वहीं कांग्रेस के जोत सिंह गुनसोला राजशाही खत्म करने और संसदीय सीट पर कांग्रेस का कब्जा होने का दावा कर रहे हैं।

टिहरी संसदीय सीट से ही युवा नेता बॉबी पवार भी चुनाव मैदान में हैं, जिन्हें कई क्षेत्रीय दलों ने अपना समर्थन दिया है। बॉबी पवार उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष हैं और लंबे समय से उत्तराखंड के युवाओं की लड़ाई लड़ रहे हैं। बॉबी पंवार के नामांकन जुलूस में जौनसार के लोग भारी संख्या में शामिल हुए। हालांकि सवाल यह भी है कि नामांकन जुलूस में शामिल यह भीड़ वोटों में तब्दील हो सकेगी या नहीं। क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के अपने-अपने कैडर वोट हैं, जिनके लिए पार्टियां आश्वत हैं कि उनका कैडर वोट कहीं नहीं खिसकेगा। हालांकि बॉबी पवार की रैली में उमड़ी अभूतपूर्व भीड़ केवल भीड़ साबित होगी या वोट बैंक में तब्दील होगी, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।

हालांकि बॉबी पंवार के नामांकन जुलूस में उमड़ी भीड़ ने राजनीतिज्ञ को भी के माथे पर भी चिंता की लकीरें डाल दी हैं। टिहरी लोकसभा सीट से डेमोक्रेटिव पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया ने भी अपना प्रत्याशी उतारा है। पार्टी प्रत्याशी रामपाल सिंह ने मंगलवार को अपना नामांकन कराया है।

उत्तराखंड में हरिद्वार के बाद पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट सबसे अधिक चर्चित सीट साबित हो रही है। इस सीट पर भाजपा ने पूर्व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को टिकट दिया है। बलूनी पीएम मोदी के करीबियों में माने जाते हैं। वहीं उनके प्रतिद्वंदी के रूप में कांग्रेस ने पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को चुनाव मैदान में उतारा है। एक ओर अनिल बलूनी को टिकट दिए जाने से जहां स्थानीय कार्यकर्ताओं में कुछ नाराजगी है तो वहीं स्थानीय नेता होने के कारण गणेश गोदियाल की ओर जनता का रुख देखा जा रहा है। गणेश गोदियाल की श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र में अच्छी पहुंच है। पौड़ी लोकसभा सीट में आने वाले बद्रीनाथ क्षेत्र के विधायक राजेंद्र भंडारी कुछ दिनों पहले ही भाजपा में शामिल हो गए हैं, लेकिन उनके समर्थक अभी भी कांग्रेस में हैं। जिसका असर इस चुनाव में देखा जा सकता है।

नैनीताल-उधम सिंह नगर लोकसभा सीट पर सिटिंग सांसद अजय भट्ट और युवा प्रत्याशी प्रकाश जोशी के बीच का मुकाबला होने जा रहा है। सिटिंग एमपी अजय भट्ट अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रहे हैं तो वहीं राहुल गांधी के करीबियों में से एक माने जाने वाले प्रकाश जोशी इस संसदीय चुनाव में जीत को लेकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। इनके अलावा बसपा प्रत्याशी अख्तर अली माहीगीर भी चुनाव मैदान में हैं। बसपा प्रदेश अध्यक्ष शीशपाल चौधरी के अनुसार बसपा ने नैनीताल-उधम सिंह नगर से अपने कैडर कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाया है। अख्तर अली 1984 से बसपा से जुड़े हुए हैं और विभिन्न पदों पर रह चुके हैं। हालांकि मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन यह भी तय है कि बसपा प्रत्याशी इन राष्ट्रीय दलों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।

उधर भाजपा ने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अनुराग ठाकुर, स्मृति ईरानी, वीके सिंह, दुष्यंत कुमार, नायब सिंह सैनी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, विजय बहुगुणा सहित 40 नेताओं के नाम शामिल हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से फिलहाल स्टार प्रचारकों की कोई सूची नहीं आई है। 26 मार्च तक कुल 26 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। टिहरी गढ़वाल में 6, पौड़ी गढ़वाल में 8, अल्मोड़ा में 3, नैनीताल में 3 और हरिद्वार में 6 नामांकन हो चुके हैं। आज नामांकन के आखिरी दिन की स्थिति शाम तक साफ हो पाएगी लेकिन सबसे ज्यादा प्रत्याशी पौड़ी गढ़वाल में हैं। यहां पर मुकाबला मुकाबला भी काफी रोचक होने जा रहा है क्योंकि अधिकांश लोग भाजपा प्रत्याशी को पैराशूट प्रत्याशी बताते हुए मशहूर गढ़वाली गीत गा रहे हैं। यह जरूर हो सकता है कि मोदी लहर में भाजपा प्रत्याशी इस चुनावी नैया को पार कर ले लेकिन यह भी तय है की जीत का अंतर बेहद कम होगा।

जानिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अद्भुत कहानी!

आज हम आपको पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अद्भुत कहानी बताने जा रहे हैं! पूर्व प्रधानमंत्री और महान अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की औपचारिक राजनीति से अलविदा होने का दिन आ गया है। आज वो राज्यसभा से रिटायर हो जाएंगे। संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में उनके छह वर्षों के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है। उन्होंने प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद कहा था कि ‘इतिहास उनकी समीक्षा करते वक्त दयाभाव रखेगा।’ अब राजनीति के क्षेत्र में इतिहास बनने जा रहे मनमोहन सिंह की समीक्षा का वक्त आ गया है। मनमोहन सिंह को जानने-समझने वाले बाकियों की बात बाद में, लेकिन पहले उनके बयान का जिक्र कर लेते हैं जिनके बारे में खुद मनमोहन सिंह ने अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर राय रखी थी। वो शख्सियत कोई और नहीं बल्कि मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। तारीख थी 8 फरवरी, 2024। राज्यसभा के कुछ सदस्यों को विदाई देने का मौका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदाई भाषण दे रहे हैं। रिटायर हो रहे सदस्यों के बारे में बारी-बारी से चर्चा कर रहे हैं। अब बारी आई है मनमोहन सिंह की। मोदी कहते हैं, ‘मैं विशेष रूप से माननीय डॉ. मनमोहन सिंह जी का उल्लेख करना चाहूंगा। उन्होंने छह बार इस सदन में अपने मूल्यवान विचार रखे। सदन के नेता के रूप में और प्रतिपक्ष के नेता के रूप में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।’ पीएम मोदी मनमोहन सिंह के एक सांसद का दायित्व निभाने को लेकर काफी अभिभूत हैं। वो मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं। मोदी कहते हैं, ‘मुझे याद है, उस सदन के अंदर पिछले कुछ दिनों में एक वोटिंग का अवसर था। पता था कि विजय ट्रेजरी बेंच की होने वाली है, अंतर भी बहुत था। लेकिन डॉक्टर मनमोहन सिंह जी व्हीलचेयर में आए, वोट किया। एक सांसद अपने दायित्व के लिए कितना सजग है, इसका वो उदाहरण हैं। वो प्रेरक उदाहरण हैं। इतना ही नहीं, कभी कमिटी मेंबर्स के चुनाव हुए, वो व्हीलचेयर में वोट देने आए। सवाल यह नहीं है कि किसको ताकत देने के लिए वो आए थे। मैं मानता हूं कि वो लोकतंत्र को ताकत देने आए थे। इसलिए आज विशेष रूप से उनके दीर्घायु जीवन के लिए हम सबकी तरफ से प्रार्थना करता हूं। वो निरंतर हमारा मार्गदर्शन करते रहें, हमें प्रेरणा देते रहें।’

मोदी ने कभी मनमोहन पर जोरदार तंज भी कसा था। संभवतः उसी परिप्रेक्ष्य में कहा, ‘वैचारिक मतभेद, कभी बहस में छींटाकसी, वो तो बहुत अल्पकालीन होती है। लेकिन इतने लंबे अर्से तक जिस प्रकार से उन्होंने इस सदन का मार्गदर्शन किया है, देश का मार्गदर्शन किया है, जब भी हमारे लोकतंत्र की चर्चा होगी, तो कुछ माननीय सदस्यों चर्चा होगी, उसमें माननीय मनमोहन सिंह के योगदान की चर्चा जरूर होगी।’ मनमोहन को एक प्रेरक शख्सियत बताकर बाकी सांसदों को सुझाव भी देते हैं। मोदी कहते हैं, ‘चाहे इस सदन में हों या उस सदन में, जो आज नहीं हैं शायद भविष्य में आने वाले हैं, मैं सभी सांसदों से ये जरूर कहूंगा कि ये जो माननीय सांसद होते हैं, किसी भी दल के क्यों न हों, जिस प्रकार से उन्होंने अपने जीवन को कंडक्ट किया होता है, जिस प्रकार की प्रतिभा के दर्शन उन्होंने अपने कार्यकाल में कराए होते हैं, उससे हमें एक गाइडिंग लाइट के रूप में सीखने का प्रयास करना चाहिए।’

दरअसल, मनमोहन सिंह ने दिल्ली सर्विस बिल पर वोटिंग करने व्हिलचेयर पर आए थे। उस वक्त मनमोहन सिंह काफी कमजोर दिख रहे थे। उनकी तस्वीर देश ने देखा तो बरबस उनकी तारीफ किए नहीं रहा। हां, एक बार मन में यह भी सवाल आया कि क्या जरूरत थी इस हाल में आने की जब उनके वोट से हार-जीत पर कोई फर्क पड़ना नहीं था। जो ऐसा सोच रहे होंगे, उन्हें पीएम मोदी ने मनमोहन के उस हाल में भी संसद आने का मर्म समझा दिया। ध्यान रखिए,

मनमोहन सिंह के लिए उस व्यक्ति ने ये बातें कहीं जिनके लिए मनमोहन से 4 जनवरी, 2014 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल किया गया था। तब मनमोहन ने टके सा जवाब देते हुए कहा था, ‘नरेंद्र मोदी के गुण-दोष पर बहस किए बिना, मेरा पक्का यकीन है कि उनका प्रधानमंत्री बनना देश के लिए विनाशकारी साबित होगा।’

ऐसा नहीं है कि मनमोहन सिंह की तारीफ करने वाले पीएम मोदी विपक्ष के अकेले नेता हैं। मोदी मंत्रिमंडल के ही सबसे चर्चित मंत्रियों में एक नितिन गडकरी ने नवंबर, 2022 में कहा था कि आर्थिक सुधारों के लिए देश मनमोहन सिंह का कर्जदार रहेगा। कौन भूल सकता है कि 1990 के दशक की शुरुआत भारत के आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जब देश को भुगतान संतुलन के गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लाइसेंस-कोटा राज से मुक्त करने का बीड़ा उठाया। अभूतपूर्व आर्थिक सुधारों के लिए उनकी नीतियां सरकारी नियंत्रण को कम करने, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और व्यापार व्यवस्था में सुधार पर केंद्रित थीं। इन सुधारों ने न केवल संकट को टाला बल्कि भारत को मजबूत आर्थिक विकास के मार्ग पर भी स्थापित किया।

वर्ष 2004 का लोकसभा चुनाव आया जिसमें सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस पार्टी ने पहली बार गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने का फैसला किया। चुनाव बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का गठन हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इसकी अध्यक्ष बनीं। सोनिया का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए उछला। तभी विदेशी मूल का मुद्दा छा गया और सोनिया ने मनमोहन सिंह का नाम आगे कर दिया। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने और सोनिया राष्ट्रीय सलाहकार

परिषद (NAC) की चेयरपर्सन बन गईं। मनमोहन सिंह सरकार 2009 में दोबारा सत्ता में लौटी। मनमोहन सिंह की 10 वर्षों की सरकार ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं जिनमें एक बेहद महत्वपूर्ण भारत-अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर डील थी। मनमोहन ने अपने कार्यकाल के बाद मीडिया ब्रीफिंग में खुद भी इसे अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताई। मनमोहन सरकार के खाते में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), सूचना का अधिकार कानून (RTI), यूनिवर्सल आइडी कार्ड आधार जैसी अन्य बड़ी उपलब्धियां हैं।

हाल में मनमोहन की तारीफ करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक सात वर्ष पहले मनमोहन सिंह की बहुत कड़ी आलोचना की थी। वो तारीख थी 9 फरवी, 2017। तब पीएम मोदी ससंद का निम्न सदन लोकसभा में खड़े थे। उन्होंने मनमोहन सिंह के लिए जो कहा, वो हमेशा-हमेशा के लिए एक यादगार बयान बन गया है। मोदी ने कहा, ‘डॉ. मनमोहन सिंह जी पूर्व प्रधानमंत्री हैं, आदरणीय व्यक्ति हैं। पिछले 30-35 साल से भारत के आर्थिक निर्णयों से उनका सीधा संबंध रहा है और निर्णायक भूमिका में रहा है। 35 साल तक। इस देश में शायद ही कोई ऐसा अर्थजगत का व्यक्ति होगा जिसने हिंदुस्तान की आजादी के 70 साल में आधा समय एक ही व्यक्ति का इतना दबदबा रहा है और इतने घोटालों की बातें आ रही हैं। लेकिन खासकर हम राजनेताओं को डॉ. साहब से बहुत कुछ सीखने जैसा है। इतना सारा हुआ लेकिन उन पर एक दाग नहीं लगा। बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना, ये कला तो डॉक्टर साहब ही जानते हैं और कोई नहीं जानता।’

तो क्या मनमोहन सिंह ने एक अर्थशास्त्री के रूप में इतने लंबे वक्त तक प्रभावी पदों पर रहकर जो योगदान दे सके, वो उम्मीद से कम हैं? आरबीआई के पूर्व गवर्नर और मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष सी रंगराजन से जुड़ा एक वाकया याद आता है। मनमोहन के दूसरे कार्यकाल के आखिरी वर्षों में डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट आ रही थी। एक पत्रकार ने पीएम से इस बारे में पूछ लिया तो उन्होंने सीधा उत्तर देने के बाद सी रंगराजन से शिकायत की कि उनसे रुपये के बारे में पूछा जा रहा है। तब रंगराजन ने सामान्य प्रतिक्रिया दी, लेकिन बाद में अपने करीबी से बोले, ‘एक सफल अर्थशास्त्री के रूप में पहचाने जाने वाले प्रधानमंत्री की ऐसी बात चौंकाने वाली थी।’

जब पाकिस्तान शरणार्थी की बच्ची ने आईआईटी में कर दिया कमाल?

हाल ही में एक पाकिस्तान शरणार्थी बच्ची ने आईआईटी में कमाल कर दिया है! सिर्फ कक्षा V और कक्षा VI में सरकारी स्कूल की छात्रा हैं। वे आईआईटी दिल्ली के टेक्निल फेस्ट में भाग लेने वाले इंजीनियरिंग योग्यता वाले छात्रों के आसपास भी नहीं है। इसके बावजूद 9 से 12 साल की उम्र की इन चार लड़कियों ने आईआईटी दिल्ली के प्रतिष्ठित ट्राइस्ट 2024 में सीनियर स्टूडेंट्स के साथ सम्मानपूर्वक प्रतिस्पर्धा की। ये लड़कियां पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों में से एक हैं। इन्होंने टेक फेस्ट में अपने रोबॉट से सबको प्रभावित किया। संध्या कुमारी, मुस्कान, रेशमा भील और आरती राजस्थान के जोधपुर से आईआईटी दिल्ली फेस्ट में शामिल होने आई थीं। ये इस प्रतियोगिता में सबसे कम उम्र की प्रतियोगी भी रहीं। इन लड़कियों ने एक ‘ग्रिपर बॉट’ डेवलप किया है। इस रोबोट को वस्तुओं को पकड़ने और बाधाओं के माध्यम से नेविगेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह रोबोट इन लड़कियों की रोबोटिक्स विज्ञान की समझ और अनुप्रयोग को प्रदर्शित करता है। उनके प्रोजेक्ट ने प्रतियोगिता में आवश्यक सभी कार्य पूरे कर लिए हैं। इन लड़कियों को अब फाइनल रिजल्ट का इंतजार है। चार लड़कियों की उपलब्धि और भी अधिक सराहनीय है क्योंकि वे उन परिवारों से हैं जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न के डर से पाकिस्तान से भागने के बाद भारत में शून्य से शुरुआत करनी पड़ी थी। ऐसी एडवांस तकनीक के साथ उनका जुड़ाव सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन नामक जोधपुर एनजीओ द्वारा किया गया था। इनकी देखरेख में ही बच्चों को असीम आत्मविश्वास दिया।

आईआईटी-डी में बीटेक ऊर्जा विज्ञान तृतीय वर्ष की छात्रा और ट्राइस्ट 2024 की समन्वयक रितिका सिंह ने कहा कि मुख्य रूप से, ट्रिस्ट कॉलेज के छात्रों के लिए है। हालांकि कभी-कभी ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्र भी भाग लेते हैं। उन्होंने बताया कि इन लड़कियों को जिस मानदंड का पालन करना था, वह यह था कि उनके पास एक ग्रिपर बॉट होना चाहिए जो बाधाओं को लेकर काम कर सकते। रीतिका सिंह ने बताया कि अपने स्तर पर कई अन्य प्रतिभागियों की तुलना में, लड़कियों ने एक्टिविटी की सीरीज पूरी की। जबकि कई टीमें प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम नहीं थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बच्चे थोड़े शर्मीले थे लेकिन हमने उन्हें सहज बनाया और उनमें तेजी से आत्मविश्वास आया!

इन बच्चियों ने नमस्कार के साथ लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने खुशी-खुशी अपने अनुभव साझा करते हुए, आईआईटी-दिल्ली में स्वागत योग्य माहौल की सराहना की। उन्होंने कहा, दीदी और भाइयों ने उन्हें प्रेरित किया। छठी कक्षा की छात्रा संध्या ने मुस्कुराते हुए बताया कि मुझे रोबोट पर काम करना पसंद है। संध्या ने कहा कि अब मैं अधिक जटिल रोबोट बनाना और संचालित करना सीख रही हूं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह थोड़ा मुश्किल था। सबसे कठिन हिस्सा बाधाओं को दूर करते समय वस्तु को न गिराना था। लेकिन अनगिनत अभ्यास सत्रों के साथ, हमने इसे बनाया। इस घटना के बाद मेरे और बस्ती के अन्य परिवारों ने शिक्षा को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।

छठी कक्षा की छात्रा मुस्कान के पिता 2015 में सिंध के मीरपुर से आकर साइकिल मरम्मत की दुकान खोली थी। मुस्कान ने कहा कि मैं भी बड़ी होकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती हूं। जब उनका परिवार पाकिस्तान से आया था उस समय मुस्कान महज एक साल की थीं। केवल मुस्कान के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट है क्योंकि उसका जन्म उसी देश में हुआ था। बाकी तीन किसी देश के नागरिक नहीं हैं। मुस्कान के पिता कमलजी ने खुशी से कहा कि मैंने कभी आईआईटी के बारे में नहीं सुना था और न ही कभी सपना देखा था कि मेरी बेटी इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि हम सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के आभारी हैं, जिसने मेरे बच्चे की क्षमता को पहचाना। पाकिस्तान में हमारे गांव में कोई स्कूल नहीं था और हर कोई बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित था। लेकिन यहां भारत में, हम एक उज्ज्वल भविष्य का सपना देख सकते हैं। कमलजी ने कहा कि वह अपनी बेटी को वह सम्मान हासिल करते देखने के लिए डबल शिफ्ट में काम करने को तैयार हैं जिसे वह कभी हासिल नहीं कर सकते।

पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली रेशमा और आरती अपनी उपलब्धि से खुश थीं। रेशमा ने कहा कि मुझे लगता है कि अब हम अधिक जटिल रोबोटों पर काम कर सकते हैं, शायद जिसकी गति अधिक हो। एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी आरती ने कहा कि हमने आवश्यक कार्य पूरे कर लिए, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रैक्टिस करने की आवश्यकता है कि अगली बार हम इसे और अधिक स्पीड से करें। आईआईटी-गुवाहाटी और आईआईएम-कोलकाता से स्नातक और सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के संस्थापक संजीव नेवार के अनुसार, चार लड़कियों ने लचीलेपन और आशा की एक कहानी स्थापित की थी। इन्होंने प्रवासियों के परिवारों के बीच शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को रेखांकित किया था, जो अब प्रेरित हैं अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर चुके हैं।

क्या INDIA गठबंधन में फिर से हो रही है बगावत?

वर्तमान में INDIA गठबंधन में एक बार फिर से बगावत हो रही है! लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में कुछ ही दिन बाकी है और उससे पहले जम्मू- कश्मीर भी उस सूची में शामिल हो गया है जहां I.N.D.I.A गठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने कश्मीर में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। मुफ्ती ने कहा नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हमारे लिए उम्मीदवार खड़ा करने और चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। इससे पूर्व भी दूसरे राज्यों में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यूपी, बिहार और बंगाल इन तीन राज्यों में भी मामला ठीक नहीं है। बंगाल में तो पहले ही बात नहीं बनी और बिहार में सीट बंटवारे के ऐलान के बाद भी सब कुछ ठीक नहीं। वहीं यूपी जैसे बड़े राज्य में एक नया गठबंधन बनने से ‘इंडिया’ गठबंधन की चुनौती और भी बढ़ गई है। अभी हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की ओर से एकजुटता दिखाने की कोशिश हुई लेकिन ऐसा लग रहा है कि देश की राजधानी से दिया गया संदेश राज्यों तक नहीं पहुंच रहा है। पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायन्स की घटक नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पीडीपी के पास कश्मीर की सभी तीन लोकसभा सीट पर उम्मीदवार खड़े करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हाल में ऐलान किया था कि वह सभी तीनों सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इंडिया गठबंधन में हुए सीट बंटवारे के तहत जम्मू की दो सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दीं। मुफ्ती ने कहा उन्होंने उम्मीदवार खड़ा करने और चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व का रवैया निराशाजनक और आहत करने वाला है। उन्होंने कहा जब मुंबई में इंडिया गठबंधन की मीटिंग तो मैंने वहां कहा कि चूंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला हमारे वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए वह सीट बंटवारे पर फैसला करेंगे और इंसाफ करेंगे। मुझे उम्मीद थी कि वह पार्टी हितों को एक तरफ रख देंगे। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कश्मीर में सभी तीन सीट पर चुनाव लड़ने का एकतरफा फैसला लिया।

इंडिया’ गठबंधन से अलग होकर अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने एक नया गठबंधन बनाया है। अपना दल (कमेरावादी) और मजलिस—ए—इत्तेहाद—उल—मुस्लिमीन (AIMIM) के बीच नया गठबंधन बना है। इतना ही नहीं पल्लवी पटेल ने कहा है कि राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के नेता एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का आशीर्वाद उनके साथ है और वे साथ मिलकर सामाजिक न्याय के लिये मजबूत लड़ाई लड़ेंगे। पल्लवी पटेल ने कहा कि उनके ‘पिछड़ा, दलित, मुसलमान न्याय मोर्चा’ ने जनभावनाओं की लगातार अनदेखी कर रही सरकार और विपक्ष के ‘बड़े लोगों’ के खिलाफ जनता को एक विकल्प दिया है। उन्होंने कहा हम तो लगातार विपक्षी इंडिया गठबंधन के अभिन्न अंग के रूप में काम कर ही रहे थे, लेकिन आप लोगों ने देखा कि किस प्रकार हम लोगों को धोखा दे दिया गया। धोखा भी ऐसे वक्त पर दिया गया जब चुनावी गतिविधियां पूरे देश में काफी तेज हैं। हम राजनीतिक दल हैं तो हमें अपना रास्ता तो बनाना ही होगा और उसी के परिणामस्वरुप हमने यह गठबंधन बनाया है। हमने इस प्रदेश की जनता को एक विकल्प देने का काम किया है। इस सवाल पर कि क्या सपा छोड़कर राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी का झंडा थामने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को भी पिछड़ा, दलित, मुसलमान न्याय मोर्चा में शामिल किया जाएगा, पटेल ने कहा, मोर्चा में हमने सभी का स्वागत किया है और रही बात स्वामी प्रसाद मौर्य जी की तो वह अपने आप में सामाजिक न्याय की एक लंबी लड़ाई लड़ने वाले बहुत ही उच्च स्तर के नेता हैं तो उनको कैसे कोई किनारे कर सकता है। वह हमारे साथ हैं।

बिहार के महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भले ही राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 26 और कांग्रेस 9, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) तीन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है लेकिन पूर्णिया सीट सीट ने पूरे बिहार में महागठबंधन की टेंशन बढ़ा दी है। घोषणा के अनुसार, कांग्रेस को पूर्णिया लोकसभा छोड़ने के लिए मजबूर किया गया जहां से राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन के पति पप्पू यादव को चुनाव लड़ने की उम्मीद थी। पप्पू यादव ने दावा किया है कि उन्हें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस से टिकट मिलने का आश्वासन दिया था। पूर्णिया सीट से बीमा भारती को उम्मीदवार बनाया है जिन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। वहीं पप्पू यादव अब भी अपनी जिद पर कायम हैं और कहा है कि मर जाएंगे लेकिन पूर्णिया नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा है कि वे किसी भी कीमत पर पूर्णिया से चुनाव लड़ेंगे। उनकी ओर से आरजेडी पर भी आरोप लगाए गए और कहा कि राजनीति बहुत गंदी हो गई है।

आखिर जनता क्यों करती है ट्रोल ?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि जनता ट्रोल क्यों करती है! मुंबई इंडियंस के नए कप्तान पांड्या आजकल कई दिक्कतों से जूझ रहे हैं। एक तरफ लगातार तीन मैच हारकर उनकी टीम इस वक्त आईपीएल प्वाइंट्स टेबल में आखिरी पायदान पर है। वहीं दूसरी तरफ हार्दिक को इस आईपीएल सीजन में ग्राउंड पर हूटिंग और सोशल मीडिया पर भद्दी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। रोहित शर्मा की जगह कप्तान बनाए जाने के बाद से ही हार्दिक हेटर्स के निशाने पर हैं। हार्दिक पांड्या को ग्राउंड से लेकर सोशल मीडिया तक, हेटर्स बुरी तरह जलील कर रहे हैं। कोई उन्हें छपरी कह रहा है तो कोई उन्हें ‘बेवफा’ बोल रहा हैं। हेटर्स मर्यादा की सीमा लांघकर पांड्या पर ऐसे-ऐसे शब्दों के बाण चला रहे हैं, जिनका सभ्य समाज में जिक्र तक नहीं किया जा सकता। आखिर पांड्या का कसूर क्या है? अगर एक युवा खिलाड़ी अपने करियर की बेहतर संभावनाओं की तलाश में एक टीम को छोड़कर दूसरी टीम में शामिल हो जाता है तो इसमें कौन सा गुनाह है? दरअसल पांड्या आईपीएल की ‘गुजरात टाइटंस’ टीम को छोड़कर ‘मुंबई इंडियंस’ टीम में बतौर कप्तान शामिल हुए हैं। लेकिन हेटर्स उन पर ऐसे हमला बोल रहे हैं कि जैसे वो इंडिया की जगह पाकिस्तान से खेल रहे हैं। हेटर्स मुंबई इंडियंस की हार का गुस्सा पांड्या पर भद्दे-भद्दे कमेंट करके निकाल रहे हैं। मुंबई इंडियंस की टीम इससे पहले भी आईपीएल मैच लगातार हारती रही है, इसमें कोई नई बात नहीं है। बाकी टीमें भी हारती हैं, लेकिन हार्दिक को जिस तरह से मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक ट्रोल किया जा रहा है, वो परेशानी की बात है। हेटर्स को सोचना होगा अल्फाजों के जरिए किसी की ‘मॉब लिचिंग’ का अधिकार किसी के पास नहीं है। जब सड़क पर किसी एक शख्स को लोगों की भीड़ मिलकर पीटती है तो उसे ‘मॉब लिंचिंग’ कहा जाता है। सड़क पर मॉब लिचिंग से शरीर जख्मी होता है। लेकिन अल्फाजों के जरिए एक शख्स को टारगेट करना और उसपर भद्दे-भद्दे कमेंट करना दिल और दिमाग दोनों को हिलाकर रख देता है। शायद पांड्या भी आजतक इसी दर्द से गुजर रहे हैं। पांड्या ये तकलीफ झेलने वाले कोई पहले शख्स नहीं है। बॉलीवुड और सोशल मीडिया स्टार भी आए दिन हूटिंग और ट्रोलिंग का शिकार होते हैं। फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत समेत कई सेलिब्रिटी भी इस तकलीफ को झेल चुके हैं। वहीं एल्विश यादव, अंजलि अरोड़ा समेत अन्य सोशल मीडिया स्टार भी हूटिंग और ट्रोलिंग के दर्द को अच्छे से समझते हैं। यहां सवाल खड़ा होता है कि एक भीड़ को किसी के चरित्र का चीरहरण का अधिकार कौन देता है? भीड़ मानसिकता एक दीमक की तरह है जो धीरे-धीरे सभ्य समाज की पंरपराओं और मर्यादाओं को खा रही हैं।

आज हम सोशल मीडिया के युग में जी रहे है। इंटरनेट पर साइबर क्राइम के अलावा एक और बड़ी समस्या है, जो अब खतनाक रूप धारण करती जा रही है। हंसी मजाक और टांग खींचने से शुरु हुआ ट्रोलिंग, अब इंटरनेट के बदलते स्वरूप के चलते चरित्र हनन जैसी गंभीर समस्या बनता जा रहा है।

सोशल मीडिया पर लोग अपना असली नाम छिपाकर दूसरों को आसानी से परेशान कर सकते हैं। ये ट्रोलिंग कई कारणों से हो सकती है। कभी-कभी ध्यान खींचने के लिए, कभी-कभी मनोरंजन के लिए, बदला लेने के लिए, या फिर बोरियत मिटाने के लिए। लेकिन इस बात के बारे में सोचना होगा कि आपकी ट्रोलिंग से किसी को गंभीर परेशानी हो सकती है। जब सोशल मीडिया पर किसी को टारगेट कर ट्रोल किया जाता है तो ट्रोलिंग का शिकार हो रहा है शख्स घबराहट , डिप्रेशन, समाज से कट जाना , गहरे सदमे में जाना, खाने की आदतों में बदलाव , नशे की चीज़ों का इस्तेमाल, खुद को कमतर समझना आदि मानसिक परेशानियों की चपेट में आ सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के तहत सभी नागरिकों को अपने विचार रखने की आजादी दी गई है और सोशल मीडिया के जरिए लोगों ने इस आजादी का इस्तेमाल भी किया है। लेकिन, इस आजादी की भी एक सीमा है और इसमें दूसरे कानूनों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब समेत अन्य सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट, भड़काऊ कंटेंट या फिर अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत पैदा करने वाला कंटेंट शेयर नहीं कर सकते। भारत के आईटी नियम के अनुसार साइबर क्राइम में सजा का प्रावधान है। ये सजा 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक है।साथ ही जुर्माने का प्रावधान एक लाख से 10 लाख रुपए तक है।

जब किसी एक शख्स को सरेआम भीड़ की ओर से मानसिक यातनाएं दी जाती है। भद्दे-भद्दे कमेंट और गाली गलौज की जाती है। सोशल मीडिया पर मीम्स और जोक्स बनाकर हमला बोला जाता है। तब पीड़ित शख्स के अलावा पीड़ित शख्स का पूरा परिवार डिप्रेशन में आ जाता है। सोचिए जब किसी शख्स पर भद्दी-भद्दी टिप्पणी की जाती हैं तो उस शख्स की बहन को कैसा लगता होगा? उस शख्स की मां क्या महसूस करती होगी? उस शख्स के पिता को कैसा फील होता होगा? उसकी पत्नी और बच्चे कितना घुटते होंगे? हेटर्स आगे से किसी को टारगेट करने से पहले इन सवालों का जवाब खुद से जरूर मांग लें।