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आखिर पहाड़ों का सीना चीर के कैसे बनाई जाती है सुरंग?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर सुरंग कैसे बनाई जाती है… आपने कई बार बड़ी-बड़ी सुरंगे जरूर देखी होगी… पहाड़ों का सीन चीरकर सुरंग का निर्माण किया जाता है, कई बार यह लगता है कि शायद यह सुरंग इंसानों के द्वारा हाथों से खुद ही गई है, तो कई बार बड़ी-बड़ी मशीन भी दिखाई जाती है… लेकिन सवाल ये कि आखिर यह बड़ी-बड़ी सुरंग खोदी कैसे कैसे जाती है और इसमें किस तकनीकी का प्रयोग किया जाता है… तो आज हम आपको इस बारे में जानकारी देने वाले हैं!आपको बता दें कि हमारे देश ने इंसानों के लिए सबसे मुश्किल जगहों पर पहाड़ों का सीना चीरकर सुरंगें बनाई हैं। ये सुरंगें ऊंचे हिमालय से लेकर अरब सागर की गहराइयों तक जाती हैं। बीते साल उत्तराखंड के सिलक्यारा में एक भयानक सुरंग हादसा हुआ था। इस हादसे में 41 मजदूर 17 दिन तक एक सुरंग में फंसे रहे, राहत की बात यह है कि सभी मजदूरों को कड़ी मशक्कत के बाद सुरंग से बाहर निकाल लिया गया था। इस हादसे के बाद सुरंगों के निर्माण को लेकर हर किसी के मन में जिज्ञासा बढ़ी है कि आखिर सुरंग का निर्माण कैसे किया जाता है और इसमें किस तकनीकी का प्रयोग किया जाता है…. तो आज हम आपको इसी बारे में जानकारी दे रहे हैं….. बता दें कि ऊंचे-ऊचे पहाड़ों पर सुरंग बनाने के लिए ड्रिल और ब्लास्ट विधि (DBM) का इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक काफी रिस्की होती है। कभी-कभी ब्लास्ट के दौरान चट्टान का बड़ा हिस्सा खिसक जाता है और आसपास के घरों में दरार भी आ जाती है। इसके अलावा सुरंग-बोरिंग मशीन (TBM) से भी सुरंग बनाई जाती है। ड्रिल और ब्लास्ट विधि में चट्टान में छेद कर विस्फोटक भरा जाता है और फिर विस्फोट से चट्टान तोड़ी जाती है। जबकि सुरंग-बोरिंग मशीन विधि में मशीनों के जरिए चट्टान में छेद किया जाता है।

ये ड्रिल और ब्लास्ट विधि की तुलना में मंहगी तो है , लेकिन काफी सुरक्षित भी है। वहीं, न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड सुरंग खोदने का एक पारंपरिक तरीका है। इसका इस्तेमाल सबसे पहले 1962 में ऑस्ट्रिया के रैजबिज ने किया था। न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड का इस्तेमाल आम तौर पर उन इलाकों में किया जाता है, जहां पर टर्नल बोरिंग मशीन से सुरंग बनाना असंभव होता है। बता दें कि एक्सपर्ट बताते हैं कि सुरंग-बोरिंग मशीन विधि का उपयोग ऊंचे पहाड़ों में सुरंग बनाने के लिए किया जा सकता है, क्योंकि इससे पहाड़ में खाली जगह बनने पर चट्टान फट जाती है और उसका हिस्सा गिर जाता है। सुरंग-बोरिंग मशीन तकनीक 400 मीटर तक ऊंची चट्टानों में इस्तेमाल की जाती है। दिल्ली मेट्रो के लिए सुरंगों का निर्माण सुरंग-बोरिंग मशीन विधि के जरिए किया गया है। वहीं जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड सहित हिमालय जैसी जगहों पर ड्रिल और ब्लास्ट विधि तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि सेला दर्रे पर वर्तमान में, भारतीय सेना के जवान और क्षेत्र के लोग तवांग पहुंचने के लिए बालीपारा-चारीदुआर रोड का उपयोग कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी के कारण सेला दर्रे में भयंकर बर्फ जम जाती है। इससे रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। साथ ही, दर्रे पर 30 मोड़ आते हैं, जो बहुत ही घुमावदार हैं। इस कारण यहां आवाजाही पर पूर्ण रूप से  बाधित हो जाती है। सफर के लिए कई-कई घंटों तक का इतंजार करना पड़ता है। इस दौरान पूरा तवांग सेक्टर देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। सेला दर्रा सुरंग मौजूदा सड़क को बायपास करेगी और यह बैसाखी को नूरानंग से जोड़ेगी। इसके साथ ही सेला सुरंग सेला-चारबेला रिज से कटती है, जो तवांग जिले को पश्चिम कामेंग जिले से अलग करती है। रोहतांग सुरंग या अटल सुरंग वर्तमान में भारत की सबसे लंबी ऊंचाई वाली सुरंग है, जो हिमालय पर्वत में स्थित है।

अक्टूबर 2020 में उद्घाटन किया गया, यह 9.02 किमी लंबी सुरंग लेह और मनाली को जोड़ती है और इसे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाया गया था। यह हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रा के नीचे और 3,878 मीटर की ऊंचाई पर बनाई गई है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर, अटल सड़क सुरंग लेह और मनाली के बीच यात्रा के समय को 4 घंटे कम कर देती है। इस सुरंग में भी इसी विधि का प्रयोग किया गया है! तो यह है भारत में सुरंग खोदने की विधि, जानकारी अच्छी लगी हो तो बने रहिए मोजों पत्रकार के साथ! 

आखिर मौत से पहले और मौत के बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं?

यह सवाल उठना लाजिमी है की मौत से पहले और मौत के बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं… आपने यह बात जरूर सुनी होगी की मौत आने से पहले एक व्यक्ति अलग प्रकार से व्यवहार करने लगता है और मौत समीप आती है तो वह व्यक्ति अलग सा व्यवहार करने लग जाता है, तो आज हम आपको बताएंगे कि आखिर मौत से पहले और मौत के बाद व्यक्ति के साथ क्या बदलाव होते हैं… शारीरिक और मानसिक तौर पर उसमें क्या-क्या परिवर्तन आते हैं, आपको बता दें कि इस दुनिया में जो पैदा होता है उसकी मौत निश्चित है. अब बात करते हैं कि जब किसी की मृत्यु नजदीक आती है तो उस व्यक्ति को कैसा मेहसूस होता है? यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में कोई अपनी राय नहीं दे सकता है, क्योंकि इस बारे में सिर्फ वही व्यक्ति बता सकता है, जिसने मौत का अनुभव किया हो, बता दे कि इस बात को समझाते हुए एक एक्सपर्ट ने इस बात का खुलासा किया है कि मरने से ठीक पहले क्या-क्या होता है और व्यक्ति कैसा मेहसूस करता है? द एक्सप्रेस की रिपोर्ट मे बताया गया है कि एक डॉक्टर ने अपनी लाइफ में काफी लोगों को मरते हुए देखा है, साथ ही उन्होंने बताया है कि मरने से ठीक पहले व्यक्ति के शरीर में क्या-क्या बदलाव आने शुरू हो जाते हैं? तो बता दे कि रिपोर्ट के अनुसार, मृत्यु से पहले क्या मेहसूस होता है, इस  विषय पर चर्चा करते हुए एक डॉक्टर ने कहा कि मरने की प्रक्रिया नॉर्मली दिल की धड़कन रुकने से लगभग 2 सप्ताह पहले शुरू हो जाती है.

लिवरपूल यूनिवर्सिटी में मानद रिसर्च फेलो सीमस कोयल ने द कन्वर्सेशन के लिए लिखे एक आर्टिकल में मौत की प्रक्रिया के बारे में बात की है. उन्होंने बताया कि मौत की प्रक्रिया व्यक्ति की मौत के 2 सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती है. 2 सप्ताह के भीतर ही व्यक्ति की सेहत गिरने लगती है. उसे चलने और सोने में भी परेशानी होनी शुरू हो जाती है. जिंदगी के आखिरी दिनों में, व्यक्ति की दवाई  खाने, भोजन करने और पीने की क्षमता तक खत्म हो जाती है. यही नहीं कुछ रिसर्च के मुताबिक, मौत के वक्त दिमाग से काफी सारे केमिकल निकलते है. उन्हीं केमिकल मे से एक है एंडोर्फिन. यह केमिकल व्यक्ति की भावनाओं को संदीप्त करता है. सीमस कोयल ने बताया, मौत के पलों को समझना मुश्किल तो है लेकिन अभी तक हुई रिसर्च के अनुसार, जैसे-जैसे व्यक्ति मौत के करीब आता हैं, वैसे-वैसे उसकी बॉडी मे स्ट्रेस केमिकल्स बढ़ते जाते है. कैंसर वाले व्यक्ति की बॉडी में सूजन भी आने लगती है. मौत की प्रक्रिया के वक्त व्यक्ति का दर्द कम हो जाता है. यह बताना मुश्किल है कि ऐसा क्यों होता है? शायद ऐसा एंडोर्फिन के कारण हो सकता है. आमतौर पर, हर इंसान की मृत्यु अलग-अलग तरीके से होती है. ऐसे मे, यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि शांतिपूर्ण तरीके से किसकी मौत होगी. कई कम उम्र के लोगो को भी देखा गया है जिन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वे मर रहे हैं!

बता दे कि डॉक्टर्स केे अनुसार जबब व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर दे और उसके दिल की धड़कन रुक जाए, साथ ही वो व्यक्ति सांस लेना भी बंद कर दे तब उसेे ब्रेन डेड माना जाता है. इसी को हम आम भाषा में मौत कहते हैं. हालांकि कानूूनी रूप से किसी व्यक्ति की मृत्यु की घोषणा करने के लिए पहले ये देखा जाता है कि व्यक्ति ब्रेन स्टेम रिस्पांस कर पा रहा है या नहीं. यदि रिस्पांस करने में व्यक्ति कामयाब नहीं हो पाता तब उसे मृत घोषित कर दिया जाता है! किसी व्यक्ति की मौत केे बाद उसकेे शरीर की सभी मसल्स रिलैैक्स हो जाती हैं. जिसे मेडिकल की भाषा में प्राइमरी फ्लेक्सिबिलिटी कहा जाता है. इसके बाद व्यक्ति की पलकें अपना तनाव खो देनेे के चलते बंद हो जाती हैं और सिकुड़ने लगती हैं. उसका जबड़ा खुल जाता है और उसके शरीर के सभी जोड़ और अंग बहुत लचीले हो जाते हैं. वहीं हृदय गति रुक जानेे के चलते कुछ मिनटों तक डेेड बॉडी के अंदर पेलोर मोर्टिन नामक प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसके बाद व्यक्ति का शरीर गुलाबी दिखने लगता है!

मृत्यु के समय आमतौर पर किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है जो मौत के बाद तेजी से गिरने लगता है. इस प्रक्रिया को एल्गास मोर्टिस या डेथ चिल कहा जाता है. पहले 2 घंटे में ये तापममान 2 डिग्री सेल्सियस और फिर हर घंटे 1 डिग्री कम होता जाता है. कई बार तो मांसपेशियों की रिलेक्स होने की प्रक्रिया में डेड बॉडी से मल-मूत्र तक निकल जाता है. वहीं मृत्यु के बाद 2 सेे 6 घंटे की बीच शरीर की मांसपेशियां भी अकड़नेे लगती हैं!

आखिर क्या होती है क्रॉस वोटिंग? जिसकी चर्चा हर चुनाव में होती है!

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्रॉस वोटिंग क्या होती है? जिसकी चर्चा हर चुनाव में है… हाल ही में 56 राज्यसभा सीटों पर राज्यसभा चुनाव संपन्न कर लिए गए,लेकिन इसी बीच क्रॉस वोटिंग एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ था कि आखिर यह क्रॉस वोटिंग होती क्या है? जिसके कारण कई नेता हार जाते हैं, तो कई नेता जीत जाते हैं… तो आज हम आपको इसी क्रॉस वोटिंग के बारे में जानकारी देने वाले हैं… साथ यह भी बताने वाले हैं कि आखिर क्रॉस वोटिंग हमारे राजनीतिक इतिहास में कब-कब हुई है और उससे क्या-क्या प्रभाव पड़े हैं? आपको बता दें कि क्रॉस वोटिंग का मतलब समझने के लिए पहले जानते हैं कि राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं. हर राज्य की आबादी के आधार पर राज्यसभा सांसदों की सीटें तय हैं. राज्य के विधायक वोट देकर अपना राज्यसभा सांसद चुनते हैं. राज्य में राज्यसभा सांसद की सीटों और विधायकों की संख्या के आधार पर तय होता है कि जीत के लिए एक सदस्य को कितने मत चाहिए होते हैं. जैसे कि यूपी में 399 विधायक हैं और 10 सीटों पर राज्यसभा सांसद का चयन होना है. ऐसे में एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 वोट मिलना जरूरी है… राज्यसभा चुनाव के दौरान हर पार्टी के विधायक अपना मत तय करते हैं और इसे पार्टी के मुखिया को दिखाते हैं. इसके बाद उसे सभापति के पास जमा कर दिया जाता है. जब विधायक अपनी पार्टी के उम्मीदवार की बजाय किसी अन्य उम्मीदवार को वोट दे देता है, तो उसे क्रॉस वोटिंग कहते हैं. 27 फरवरी को हुए राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने के आसार थे… क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक को पार्टी से निकाला भी जा सकता है. हालांकि, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग होती रही है…. बता दें कि पहली बार 1998 में क्रॉस वोटिंग हुई थी. कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद ओपेन बैलेट का नियम भी लाया गया, जिसके कारण हर विधायक को अपना मत पार्टी के मुखिया को दिखाना होता है, लेकिन क्रॉस वोटिंग अभी भी होती है. 2022 में हरियाणा के कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग की थी. वह बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. इसी चुनाव में राजस्थान से बीजेपी नेता शोभारानी कुशवाह ने भी क्रॉस वोटिंग की थी. वह भी पार्टी से निकाल दी गईं…. यही नहीं 2016 में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के छह नेताओं ने बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग की थी. पार्टी ने सभी को निष्कासित कर दिया था. 2017 में कांग्रेस की अपील पर दो नेताओं के वोट खारिज हो गए थे, क्योंकि इन दोनों ने अपना बैलेट पेपर अमित शाह को दिखाया था. इसके बाद कांग्रेस के अहमद पटेल राज्यसभा सांसद बने थे…. यानी सीधी सी बात यह है कि क्रॉस वोटिंग अपने पार्टी के बजाय किसी अन्य पार्टी के नेता को वोट देने से है… यानी क्रॉस वोटिंग करने से है… इसके बाद विधायकों को हटाया जा सकता है या फिर विधायक स्वयं ही उस पार्टी को छोड़ सकते हैं!

बता दे कि संविधान के मुताबिक, राज्‍यसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की ओर से व्हिप तो जारी किया जा सकता है, लेकिन ये बेअसर ही होता है. दरअसल, पार्टी की ओर से जारी व्हिप को मानना या ना उसके खिलाफ जाना पूरी तरह से विधायकों और सांसदों की मर्जी पर निर्भर करता है. वहीं, राज्‍यसभा चुनावों में पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान करने पर दलबदल कानून भी लागू नहीं होता है. बता दें कि राज्यसभा में सांसदों की ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्या होना हर पार्टी के लिए जरूरी है, क्योंकि इसी संख्या के आधार पर राष्ट्रपति चुनाव में हर दल अपनी दावेदारी पेश करता है. राष्ट्रपति चुनाव में राज्‍यसभा के सदस्‍यों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है!

सबसे पहले जानते हैं कि क्रॉस वोटिंग क्या है औऱ ऐसा करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? क्रॉस वोटिंग का मतलब है कि अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर दूसरी पार्टी के पक्ष में वोट करना. आमतौर पर दुनियाभर में राजनीतिक दलों के बीच संसद या महत्वपूर्ण मामलों में क्रासवोटिंग के उदाहरण हैं. हालांकि, पार्टियां इसे व्हिप जारी कर रोकने की पूरी कोशिश करती हैं. हालांकि, कई बार राजनीतिक दलों को इसमें नाकामी मिलती है. राज्‍यसभा चुनावों में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती हैं. साफ है कि हिमाचल प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश में पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वाले विधायकों पर पार्टी नेतृत्‍व कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगा!

आखिर कहां होते हैं सबसे ज्यादा बाल विवाह?

आज हम आपको बताएंगे की सबसे ज्यादा बाल विवाह कहां होते हैं… एक समय ऐसा था जब हमारा देश बाल विवाह के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता था… क्योंकि यहां पर बाल विवाह सबसे ज्यादा प्रचलित था, लेकिन अगर मैं वर्तमान की बात करूं तो वर्तमान में भी बाल विवाह देश के अधिकतर हिस्सों में होते हैं, हालांकि यह विवाह गैरकानूनी है, लेकिन फिर भी चोरी छुपे बाल विवाह वर्तमान में हो रहे हैं… इसी बीच ये सवाल उठता है कि आखिर यह बाल विवाह क्यों होते हैं और भारत में ऐसा कौन सा राज्य है जहां सबसे ज्यादा बाल विवाह अब भी होते हैं? तो आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने वाले हैं! आपको बता दें कि असम सरकार ने बाल विवाह पर रोक लगाने के मकसद से मुस्लिम विवाह और तलाक से जुड़े 1935 के कानून को खत्म कर दिया. 23 फरवरी को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अब ऐसे विवाह पूरी तरह से समाप्त कर दिए जाएंगे… ये समान नागरिक संहिता यूसीसी की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है… सीएम हिमंत बिस्वा ने ये भी कहा कि अगर लड़का और लड़की शादी की कानूनी उम्र लड़कियों के लिए 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल तक नहीं पहुंचे हैं, तो भी उनकी शादी करा दी जाती थी.. जो कहीं ना कहीं गैरकानूनी विवाह यानी बाल विवाह को प्रेरित करता है… जिसे अब समाप्त कर दिया जाएगा… बता दें कि भारत में बाल विवाह की समस्या गंभीर है. दुनिया के 40% से ज्यादा बाल विवाह भारत में ही होते हैं. यहां लगभग आधी लड़कियों की 18 साल से पहले ही शादी कर दी जाती है. हालांकि हाल के दशकों में बाल विवाह की समस्या में कमी आई है. 1993 में जहां 49% लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती थी, वहीं 2021 में यह आंकड़ा घटकर 22% हो गया है.

ये आंकड़े भले ही सकारात्मक है, लेकिन पूरे देश में बाल विवाह की समस्या अभी भी गंभीर है. 2021 में भी लगभग हर पांचवीं लड़की और हर छठे लड़के का विवाह 18 साल से कम उम्र में ही हो जाता है. यानी 2021 में लगभग 135 लाख लड़कियां और 14 लाख लड़के बाल विवाह के शिकार बने. अब भी कुछ चार-पांच राज्यों में देश के आधे से ज्यादा लड़के-लड़कियों का बाल विवाह होता है. इनमें बिहार, झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य सबसे ऊपर हैं. गांवों में शहरों के मुकाबले बाल विवाह की समस्या ज्यादा गंभीर है. गांव में 56% और शहरों में 29% लड़कियों का विवाह 18 साल से पहले हो जाता है… .बता दे भारत में विवाह की कानूनी उम्र पुरुषों के लिए 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल है. लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल की हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर को छोड़कर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1993 से 2021 के बीच लड़कियों के बाल विवाह में कमी आई है. लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल ने 1993 से 2021 तक 5 बार 1993, 1999, 2006, 2016, 2021 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे एनएफएचएस के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है. अनुमान के अनुसार, 2021 में बाल विवाह की शिकार हुई लड़कियों की संख्या लगभग 1 करोड़ 34 लाख 64 हजार 450 थी, जबकि लड़कों की संख्या लगभग 14 लाख 54 हजार 894 थी… लड़कियों के बाल विवाह मामले में कुल आंकड़ों का आधे से ज्यादा हिस्सा सिर्फ चार राज्यों में पाया गया- बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, और महाराष्ट्र. वहीं लड़कों के लिए ये आंकड़े गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा थे..  यानी सीधी सी बात यह है कि अब भी बाल विवाह काफी प्रचलित है… लेकिन सवाल यह कि आज फिर ऐसी कुप्रथा को कैसे समाप्त किया जा सकता है? तो आपको बता दे कि बाल विवाह की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार को कई स्तर पर काम करने होंगे. कम उम्र में शादी करने वाले बच्चों को शिक्षा पूरी करने का मौका नहीं मिलता है. इससे गरीबी का चक्र बना रहता है और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं होता है. इसके अलावा कम उम्र में गर्भधारण करने से लड़कियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है. जब बच्चे शिक्षा और रोजगार में योगदान नहीं दे पाते, तो देश का विकास भी धीमा हो जाता है. यूनिसेफ का कहना है कि देश में बाल विवाह को रोकने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं किया जाता है. लोगों को जागरूक करने और कानूनों को लागू करने के लिए धन की कमी है. साथ ही सामाजिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की भी कमी है. लड़कियों को लड़कों की तुलना में बराबर का महत्‍व न दिया जाना भी एक कारण है. शिक्षा और सशक्तिकरण ही बाल विवाह खत्म करने का सबसे सटीक तरीका है. उन्हें आत्मनिर्भर बनने और पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना होगा… यानी यह कि अब बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है और कानून का सख्त होना भी बहुत जरूरी है!

एआईएफएफ सुनील छेत्री को उनके 150वें अंतरराष्ट्रीय मैच पर सम्मानित करेगा.

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150वें अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले सुनील! भारतीय टीम के कप्तान को सम्मानित करेगा फेडरेशन सुनील ने अब तक देश के लिए 149 मैच खेले हैं और 93 गोल किए हैं. अपने 25वें, 50वें, 75वें, 100वें और 125वें अंतरराष्ट्रीय मैचों में गोल किये। 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू. अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री को विशेष अभिनंदन देने की योजना बनाई है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो सुनील 26 मार्च को अफगानिस्तान के खिलाफ देश के लिए 150वां मैच खेलेंगे. उस दिन फेडरेशन गुवाहाटी मैदान पर उनका स्वागत करेगा.

भारतीय टीम विश्व कप 2026 और 2027 में एएफसी एशियन कप के लिए क्वालीफाइंग मैच खेल रही है। मंगलवार का मैच इगोर स्टिमाच की टीम के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अफगानिस्तान के खिलाफ पहला मैच गोलरहित समाप्त हुआ था। गुवाहाटी में एशले वेस्टवुड की टीम को हराने में नाकाम रहने पर भारतीय टीम दबाव में होगी। उस मैच से पहले फेडरेशन सुनील को 150वें अंतरराष्ट्रीय मैच का मील का पत्थर छूने के लिए सम्मानित करना चाहता है.

एआईएफएफ के अध्यक्ष कल्याण चौबे ने कहा, ”यह आश्चर्यजनक और आश्चर्यजनक बात है। सुनील छेत्री 2005 से देश के लिए खेल रहे हैं। उन्हें इतने लंबे समय तक उच्चतम स्तर पर खेलते देखना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। सुनील अपना 150वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले हैं. महान उपलब्धि। सुनील लंबे समय से भारतीय फुटबॉल का झंडा बुलंद रखे हुए हैं। वह न सिर्फ एक महान फुटबॉलर हैं बल्कि उन्होंने लाखों बच्चों को फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित भी किया। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए सुनील को मेरी बधाई।”सुनील ने 12 जून 2005 को क्वेटा में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय जर्सी में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज की। उन्होंने अब तक 149 मैच खेले हैं और देश के लिए 93 गोल किए हैं. जो भारतीय फुटबॉलरों में सबसे ज्यादा है. उनका एक और उदाहरण है. सुनील ने अपने 25वें, 50वें, 75वें, 100वें और 125वें अंतरराष्ट्रीय मैचों में स्कोर किया।

भारतीय टीम कभी भी विश्व कप क्वालीफिकेशन के तीसरे चरण के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई है। सुनील छेत्री आज गुरुवार रात सऊदी अरब में अफगानिस्तान के खिलाफ पहला मैच जीतते हैं तो अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा देंगे. लेकिन द्वंद्व से पहले सहल अब्दुल समद को लेकर कोच इगोर स्टिमाच की चिंता बढ़ गई.

इगोर चोट के कारण एएफसी एशियन कप के ग्रुप चरण में ऑस्ट्रेलिया और उज्बेकिस्तान के खिलाफ सहल को टीम में नहीं रख सके। उन्होंने पिछले मैच में सीरिया के खिलाफ 64 मिनट के विकल्प के रूप में मोहन बागान स्टार को उतारा था। इगोर सहल को रखकर अफगानिस्तान को हराने की रणनीति तैयार कर रहे थे. लेकिन मंगलवार को अभ्यास के दौरान गेंद पकड़ते समय उनके पैर की मांसपेशियों में चोट लग गई. भारतीय कोच गुरुवार के मैच में सहल को खिलाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते. सूत्रों के मुताबिक, 26 मार्च को गुवाहाटी में अफगानिस्तान के खिलाफ वापसी मैच में उनके खेलने की संभावना कम है.

ब्रेंडन फर्नांडिस भी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं. उनकी जगह विक्रम प्रताप सिंह खेल सकते हैं. इसके बावजूद विशेषज्ञ गुरुवार के मुकाबले में भारत को आगे रख रहे हैं. सबसे पहले, सुनील फीफा रैंकिंग में 117वें स्थान पर हैं। अफगानिस्तान 158वें नंबर पर है. दूसरा, 18 अफगान फुटबॉलरों ने अपने देश के फुटबॉल संगठन पर वित्तीय भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय टीम का बहिष्कार किया। हालाँकि, मोहम्मद अकबरी, ओमिद पोपलाज़ी और मोसावर अहदी हृदय परिवर्तन के साथ लौट आए हैं। तीसरा, अफगानिस्तान ने अब तक भारत को केवल एक बार हराया है।

हालांकि, न तो कोच इगोर और न ही कप्तान सुनील प्रतिद्वंद्वी को कमजोर मानते हैं। क्योंकि, बेंगलुरु एफसी के पूर्व कोच एशली वेस्टवुड अब अफगानिस्तान की राष्ट्रीय टीम के प्रभारी हैं। मैच से चौबीस घंटे पहले सुनील ने कहा, ”अफगानिस्तान आक्रामक फुटबॉल खेलता है. क्योंकि, एश्ले इसी तरह की फुटबॉल खेलती है।” उन्होंने कहा, ”एएफसी एशियन कप में क्या हुआ. काम कठिन है, लेकिन हमें पलटना होगा।” एएफसी एशियन कप के बाद से ही इस मैच के लिए टीम तैयार कर रहा है।

विश्व कप क्वालीफाइंग दौर के पहले मैच में अफगानिस्तान को कतर ने 1-8 से हरा दिया। दूसरे मैच में कुवैत से 0-4 से हार हुई. भारत ने कुवैत को उसके घरेलू मैदान पर 1-0 से हराया. हालाँकि, सुनीरा कतर से 0-3 से हार गई। भारत फिलहाल ग्रुप ए में दो मैचों में तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। कुवैत के भी दो मैचों में तीन अंक हैं. लेकिन गोल अंतर (3) में भारत से आगे (-2) होने के कारण वे दूसरे स्थान पर हैं। तालिका में सबसे नीचे मौजूद अफगानिस्तान के शून्य अंक हैं। फिर भी, इगोर को लगता है कि गुरुवार की लड़ाई कठिन होगी। उन्होंने कहा, ”अफगानिस्तान ने विश्व कप क्वालीफायर के पहले मैच में जिस तरह से खेला था उसकी तुलना में उन्होंने काफी सुधार किया है. इसलिए यह मैच बिल्कुल भी आसान नहीं होगा।”

केकेआर के आंद्रे रसेल ने आईपीएल 2024 में SRH के खिलाफ अपनी पारी के दौरान कई रिकॉर्ड बनाए.

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ईडन में 25 गेंदों पर 64 रनों की तूफानी पारी, रसेल ने शनिवार को हैदराबाद के खिलाफ कौन सी मिसाल कायम की? आंद्रे रसेल ने शनिवार को हैदराबाद के खिलाफ ईडन गार्डन्स में जोरदार धमाका किया। 25 गेंदों पर 64 रन बनाए और गेंद से दो विकेट लिए। इस ऑलराउंडर ने बल्लेबाजी के दौरान भी कई मिसालें कायम कीं. क्या रहे हैं? आंद्रे रसेल ने शनिवार को ईडन गार्डन्स को हराया। रसेल की 25 गेंदों में 64 रनों की पारी और गेंद से दो विकेट ने कोलकाता को हैदराबाद के खिलाफ जीत दिलाने में मदद की। इस ऑलराउंडर ने बल्लेबाजी के दौरान भी कई मिसालें कायम की हैं. उनमें से एक में हमवतन क्रिस गेल ने टॉप किया है।

रसेल ने तीन चौकों और सात छक्कों की मदद से 64 रन बनाये. इनमें से मयंक मार्कंडेय और भुवनेश्वर कुमार के प्रति सबसे ज्यादा निर्दयी थे। आईपीएल के इतिहास में सबसे तेज बल्लेबाज के रूप में रसेल ने 200 छक्के लगाने का रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने 1322 गेंदों पर 200 छक्के लगाए। क्रिस गेल का रिकॉर्ड टूटा. गेल ने 1811 गेंदों पर 200 छक्के लगाए। साथ ही रसेल आईपीएल के इतिहास में 200 छक्के लगाने वाले नौवें क्रिकेटर बन गए।

इसके अलावा रसेल ने रिंकू सिंह के साथ सातवें विकेट के लिए 81 रन जोड़े. यह पहली बार है जब केकेआर के लिए सातवें विकेट पर इतने रन बने हैं. यह जोड़ी आईपीएल इतिहास में पांचवें स्थान पर है.

मैच के बाद रसेल ने अपने प्रदर्शन के बारे में कहा, ”गेंदबाज पिछले दो साल से मेरे खिलाफ अच्छी योजना बना रहे थे। वह योजना बना रहा था कि मुझे कैसे रोका जाए। इसलिए मुझे योजना बनानी पड़ी. मेरे शॉट के साथ खेला. इसलिए मैं इस बार अच्छा खेल रहा हूं।” रसेल ने उन पर भरोसा करने के लिए केकेआर को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि जब वह यह जर्सी पहनते हैं तो उन्हें अच्छे खेल की उम्मीद होती है। रसेल ने कहा, ”यह फ्रेंचाइजी मेरे बहुत करीब है. उन्होंने 2014 से मुझ पर भरोसा किया है। मैं नियमित रूप से खेलता था। वह कोलकाता की जर्सी पहनकर अच्छा खेलना चाहते हैं।’ इस बार मैं ऐसा करने में कामयाब रहा।”

आंद्रे रसेल ने आईपीएल में मिसाल कायम की. कोलकाता नाइट राइडर्स के अनुभवी ऑलराउंडर ने शनिवार को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एक नया मुकाम हासिल किया। उन्होंने 25 गेंदों पर 64 रनों की नाबाद पारी खेलकर एक नई उपलब्धि हासिल की. उन्होंने 170 पारियों में 251 छक्के लगाए. शनिवार को इस सूची में कोलकाता के रसेल का भी नाम शामिल हो गया।

रसेल ने शनिवार को ईडन में 3 चौके और 7 छक्के लगाए। केकेआर के इस ऑलराउंडर ने ईडन में आईपीएल में 200 छक्के लगाए। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह नौवें क्रिकेटर हैं। रसेल ने 97वीं पारी में 200 छक्कों का आंकड़ा छुआ. शनिवार को रसेल की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने हैदराबाद के गेंदबाज लगभग दिशाहीन नजर आए. वेस्टइंडीज के इस क्रिकेटर ने प्रतिद्वंद्वी टीम के किसी भी गेंदबाज को हिट नहीं किया। वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेटर क्रिस गेल के नाम आईपीएल में सबसे ज्यादा छक्के हैं। उन्होंने 141 पारियों में 357 छक्के लगाए. भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। मुंबई इंडियंस के पूर्व कप्तान ने अब तक 238 पारियों में 257 छक्के लगाए हैं। तीसरे स्थान पर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज एबी डिविलियर्स हैं। उन्होंने 170 पारियों में 251 छक्के लगाए. शनिवार को इस सूची में कोलकाता के रसेल का भी नाम शामिल हो गया।

उन्होंने आईपीएल के पहले ही मैच में ईडन में तूफान मचा दिया था. आंद्रे रसेल ने बल्लेबाजी के अलावा गेंद से भी 2 विकेट लिए. कोलकाता नाइट राइडर्स की जीत के पीछे रसेल की सबसे बड़ी उपलब्धि. टीम की जीत के बाद स्वाभाविक रूप से उन्हें मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। लेकिन रसेल ने जीत का श्रेय टीम साथी हर्षित राणा को दिया। आखिरी ओवर में हर्षित ने जिस तरह से गेंदबाजी की उससे रसेल प्रभावित हुए.

आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे. हर्षित और रसेल दोनों के ओवर बचे थे. कई लोगों ने सोचा कि अनुभवी रसेल गेंदबाजी करेंगे। श्रेयस अय्यर ने उनकी जगह हर्षित को गेंद थमाई. मैच के बाद रसेल ने कहा कि हर्षित अपनी ही गेंद खेलना चाहते थे. रसेल ने कहा, “हमने बातचीत की।” हर्षित ने मुझसे कहा कि वह बात करना चाहता है। मेरे हाथ से गेंद लगभग छीन ही ली. पहली गेंद पर छक्का लगाकर हर्षित वापस आ गए हैं। टीम जीत गई।”

लंदन में मिस्ट्री मैन का हाथ थामे कृति सेनन.

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कृति शैनन इस समय बॉलीवुड की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक हैं। एक के बाद एक नौकरी की पेशकश. हाल ही में उनकी और शाहिद कपूर स्टारर ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ ने बॉक्स ऑफिस पर ओवरऑल अच्छा प्रदर्शन किया है। उनकी फिल्म ‘क्रू’ बहुत जल्द रिलीज होगी. फिल्म का प्रमोशन शुरू हो चुका है. इसी बीच एक्ट्रेस को लंदन की सड़कों पर देखा गया. वह एक शख्स के साथ प्राइवेट टाइम भी बिता रहे हैं. कृति और उस शख्स को लंदन की सड़कों पर एक फैन ने कैमरे में कैद कर लिया. मालूम हो कि एक्ट्रेस महेंद्र सिंह धोनी की करीबी दोस्त के साथ रिलेशनशिप में हैं. तस्वीर जारी होते ही कुछ नेटिजन्स अटकलें लगा रहे हैं।

सुना है वह व्यक्ति कबीर बहिया है। वह एक उद्यमी हैं. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान धोनी और उनकी पत्नी साक्षी करीबी दोस्त हैं। एक्ट्रेस ने साल का आखिरी दिन कबीर के साथ दुबई में बिताया। इसमें साक्षी-माही के साथ कृति और कबीर की भी तस्वीरें हैं। वे इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो करते हैं। हालांकि कृति के प्यार की अफवाहें समय-समय पर फैलती रही हैं। कभी उनका नाम साउथ स्टार प्रभास के साथ जोड़ा जाता है तो कभी दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ। लेकिन हर बार कृति ने इन अटकलों पर पानी फेर दिया है. एक्ट्रेस ने पिछले साल नेशनल अवॉर्ड जीता था. फिलहाल, अभिनेत्री अपने काम के अलावा अपनी निजी जिंदगी में ज्यादा शामिल नहीं होना चाहती हैं।

तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया 9 फरवरी को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शाहिद कपूर और कृति शैनन पहली बार बड़े पर्दे पर साथ दिखे। शाहिद और कृति की केमिस्ट्री दर्शकों के दिलों पर छा गई है। प्यार के महीने में इतनी रिच लव पिक्चर ने अब तक खराब बिजनेस नहीं किया है. जैसे ही फिल्म सफलता की राह पर है, फिल्म की नायिका कृति ने शूटिंग सेट से एक मजेदार घटना साझा की।

शाहिद सेट पर हों और वहां कुछ भी मजेदार न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। शाहिद जितना मेहनत करते हैं उतना ही उन्हें मौज-मस्ती करना भी पसंद है। शाहिद हों तो शूटिंग की थकान तुरंत दूर हो जाती है। जिन लोगों ने शाहिद के साथ काम किया है वो ये बात अच्छे से जानते हैं. हालांकि ऐसी चर्चा थी कि कृति को शाहिद के साथ शूटिंग का कोई अनुभव नहीं है। ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ की शूटिंग के दौरान कृति को पता चला कि शाहिद सच में कितने मजाकिया हैं।

एक्स के पेज पर एक फैन ने कृति से पूछा, ”शाहिद कपूर ने शूटिंग सेट कितना रखा?” कृति ने जवाब दिया, ”शाहिद और उनके पंजाबी गाने की प्लेलिस्ट सबसे मजेदार है.” शाहिद कुछ गानों के साथ ऐसे फनी पोज देते हैं कि आप जोर-जोर से हंसने पर मजबूर हो जाते हैं. एक्ट्रेस का मानना ​​है कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान कृति खूब हंसती थीं, इसीलिए उनका वजन काफी कम हो गया. एक्ट्रेस ने पिछले साल नेशनल अवॉर्ड जीता था. फिलहाल, अभिनेत्री अपने काम के अलावा अपनी निजी जिंदगी में ज्यादा शामिल नहीं होना चाहती हैं।

कोई नहीं जानता कि किस्मत का पहिया कब दूसरी दिशा में घूम जाए। ऐसा ही कुछ हुआ एक्ट्रेस कृति शैनन के साथ। उन्होंने दिल्ली में पढ़ाई की. कृति इंजीनियरिंग की छात्रा थी. माँ एक कॉलेज टीचर हैं. नायिका के पिता एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। हालांकि, एक्ट्रेस ने छोटे करियर की ओर रुख नहीं किया। कई नौकरियाँ मिलने के बाद, उन्होंने नौकरी छोड़ दी और तथाकथित ‘अनिश्चित’ करियर पथ अपना लिया। वह वर्तमान में बॉलीवुड की अग्रणी अभिनेत्रियों में से एक हैं। लेकिन उनकी अभिनय यात्रा कैसे शुरू हुई?

वह पहली बार टूथपेस्ट की 5 रुपए की ट्यूब के विज्ञापन में नज़र आए। अपने प्रेमी के साथ कॉलेज की कैंटीन में बैठना, 5 रुपये के सिक्के लेना और चेहरे पर मुस्कान रखना – इस तरह कृति शैनन को दर्शक सबसे पहले देखते हैं। कृति के करियर की शुरुआत मॉडलिंग से हुई. उन्होंने शुरुआत में छोटे विज्ञापनों में काम किया। कृति को विज्ञापनों के जरिए अपनी अभिनय प्रतिभा का पता चला। कृति ने अपने टैलेंट के दम पर बालीपारा में अपनी जगह बनाई है. अनेक कार्य प्रगति पर हैं। उन्हें ‘आदिपुरुष’, ‘गणपत’ समेत कई फिल्मों में देखा जा चुका है। आने वाले दिनों में उनकी कई नई फिल्में आने वाली हैं।

ओडिशा में स्कूल हॉस्टल में छात्र की मौत

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हॉस्टल में फंदे से लटका मिला पांचवीं कक्षा के छात्र का शव! ओडिशा स्कूल पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पांचवीं कक्षा की छात्रा शुक्रवार दोपहर हॉस्टल के कमरे में अकेली थी. स्कूल के एक गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्य को कमरे में गश्त के दौरान बच्चे का शव मिला। ओडिशा के रायगढ़ जिले के गुनुपुर में स्कूल के हॉस्टल से पांचवीं कक्षा के छात्र का शव बरामद होने के बाद तनाव फैल गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें 11 साल के छात्र की असामान्य मौत की जानकारी मिली है. मृतक का नाम जुडास शाबर है. वह गुनुपुर में एक सरकारी स्कूल के छात्रावास में रहता था। छात्र की मौत कैसे हुई, इसकी जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। उधर, मृतक छात्र के परिवार का आरोप है कि उनके बेटे की हत्या की गई है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पांचवीं कक्षा की छात्रा शुक्रवार दोपहर हॉस्टल के कमरे में अकेली थी. स्कूल के एक गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्य को कमरे में गश्त के दौरान बच्चे का शव मिला। उन्होंने बताया कि घर का दरवाजा गीला था. घर में प्रवेश कर उन्होंने देखा कि बच्चा गले में रस्सी का फंदा लगाकर पंखे से लटका हुआ है। उन्होंने तुरंत मामले की जानकारी स्कूल अधिकारियों को दी। वहां से खबर पुलिस तक जाती है. स्कूल की प्रधानाध्यापिका संगीता ओमकार ने पुलिस को बताया कि छात्रावास की प्रभारी शिक्षिका गुरुवार से छुट्टी पर हैं.

दूसरी ओर, मृत बच्चे के पिता ने शिकायत की, “वह छोटा लड़का छत के पंखे से रस्सी नहीं लटका सकता और न ही उसके गले में फंदा डाल सकता है।” यह असामान्य है. उसे मार कर फाँसी पर लटका दिया गया। मैं चाहता हूं कि पुलिस उचित जांच करे और आरोपी को ढूंढे।” कई रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद स्कूल अधिकारियों ने तीन दिनों की छुट्टी घोषित कर दी। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का कारण पता चलेगा। साथ ही शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है.

वर अटेक का चंद्रकांत अपने दोस्तों के साथ स्कूल के मैदान में खेल रहा था। अचानक वह जमीन पर गिर जाता है. उसे गिरता देख उसके दोस्त दौड़ पड़े। उसने उसका हाथ पकड़ कर खींचने की कोशिश की. लेकिन चंद्रकांता की ओर से कोई जवाब नहीं आया. यह स्थिति देख कुछ छात्रों ने स्कूल के शिक्षकों को इसकी जानकारी दी. शिक्षकों ने आकर देखा तो चंद्रकांत जमीन पर गिरा पड़ा था। उसके पास कोई प्रतिक्रिया नहीं है.

शिक्षकों ने चंद्रकांत को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. शुरुआत में बच्चे की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. यह दुखद घटना उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक चंद्रकांत हिमायूंपुर का रहने वाला है। केवल बच्चे वह घर से कुछ दूर एक स्कूल में पढ़ता था.

वह अन्य दिनों की तरह शुक्रवार को भी स्कूल गया था. दोपहर 12 बजे टिफिन के समय चंद्रकांत अपने दोस्तों के साथ स्कूल के मैदान में खेल रहा था। अचानक वह खेत में गिर गया। उसे गिरता देख उसके दोस्त आये और उसे उठाने की कोशिश करने लगे. लेकिन चंद्रकांत नहीं उठे तो उन्होंने शिक्षकों को इसकी जानकारी दी। डॉक्टर को भी बुलाया गया. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. लेकिन कोई आखिरी बचाव नहीं था. चंद्रकांत दूसरी कक्षा में पढ़ता था। पड़ोसियों ने बताया कि वह रोज स्कूल जाता था। वह स्कूल से लौटने के बाद घर के सामने मैदान में खेलता था। यह बहुत जीवंत था. छोटे बच्चे की अचानक मौत से हर कोई सदमे में है. एक युवक ने ऑनलाइन ऐप से कई लाख का लोन ले लिया. इसका काफी हिस्सा चुकाया जाता है. लेकिन युवक के परिवार का आरोप है कि लोन देने वाली ऐप कंपनी की ओर से उसे लगातार फोन कर परेशान किया जा रहा था. परिवार के सदस्यों को नहीं छोड़ा गया. और वह युवक डिप्रेशन का शिकार होने लगा. अंततः चरम कार्रवाई! परिवार ने दावा किया है कि उन्होंने खाली घर में आत्महत्या की है.

तेलंगाना पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हैदराबाद के 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र ने सोमवार को घर पर आत्महत्या कर ली। उसी शाम बंद घर से उनका लटकता हुआ शव बरामद किया गया. जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. मृत छात्र के पिता का आरोप है कि उनके बेटे ने एक ऑनलाइन ऐप कंपनी से लोन लिया था. उस संगठन की ओर से उन्हें बार-बार फोन कॉल कर परेशान किया जाता था. उनका बेटा कई दिनों से डिप्रेशन से जूझ रहा था. उसके बाद ये अतिवादी फैसला.

ईडी ने कोर्ट में कहा कि AAP एक कंपनी है और अरविंद केजरीवाल इसके निदेशक के तौर पर काम करते हैं.

AAP एक ‘कंपनी’ है, उस कंपनी का ‘डायरेक्टर’ केजरी है! कोर्ट में ईडी के दावे पर बहस करते हुए ईडी ने कोर्ट में पीएलएमए एक्ट की धारा 70 का हवाला दिया. इस धारा का उपयोग कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार के मामलों में किया जाता है। केजरीवाल के खिलाफ इस कानून के इस्तेमाल से विवाद शुरू हो गया है. दिल्ली एक्साइज मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के कई नेताओं और मंत्रियों को ईडी ने गिरफ्तार किया है। यहां तक ​​कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल को भी केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया है. शुक्रवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया. ईडी ने केजरीवाल की एक्साइज ‘भ्रष्टाचार’ में संलिप्तता की बात करते हुए ‘आप’ की तुलना एक ‘कंपनी’ से कर दी. इतना ही नहीं, उन्होंने केजरीवाल को उस ‘कंपनी’ का निदेशक भी बताया। विवाद तब शुरू हुआ जब राजनीतिक दल की तुलना एक कंपनी से की गई और उसके नेता को कंपनी का निदेशक बताया गया.

केजरीवाल को गुरुवार रात एक्साइज मामले में गिरफ्तार किया गया था. ईडी ने शुक्रवार को विशेष सीबीआई अदालत में दावा किया कि आप ने केजरीवाल के जरिए अवैध वित्तीय लेनदेन का अपराध किया है. अपने तर्क को समझाते हुए, ईडी ने गैरकानूनी धन लेनदेन या पीएलएमए अधिनियम की धारा 70 का उल्लेख किया। इस धारा का उल्लंघन तब होता है जब किसी कंपनी का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या कोई अन्य वरिष्ठ अधिकारी किसी भी तरह से वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल होता है। इस धारा के उल्लंघन के अपराध के लिए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कुछ दंड भी निर्धारित हैं।

शुक्रवार को ईडी ने कोर्ट में यही धारा कही. ईडी ने दावा किया कि यूपी का वित्त एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चलाया जाता था। उस कंपनी में आखिरी अधिकार केजरीवाल का था। केजरीवाल को अच्छी तरह पता था कि पार्टी फंड में कितना पैसा है और वह पैसा कहां से आ रहा है। पार्टी सुप्रीमो को इस बात की जानकारी नहीं थी कि दिल्ली की उत्पाद शुल्क नीति के कारण व्यवसायियों से ली गई ‘रिश्वत’ के कारण टका अप फंड में कितनी राशि आएगी। ईडी ने आप कोषाध्यक्ष या राज्यसभा सांसद एनडी गुप्ता के बयान का इस्तेमाल कर अपनी बात साबित करने की कोशिश की. केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि AAP के कोषाध्यक्ष ने उन्हें बताया कि केजरीवाल ही पार्टी के आखिरी शब्द हैं.

ईडी ने अदालत को बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को धन शोधन निवारण अधिनियम के विशिष्ट प्रावधानों के अनुसार गिरफ्तार किया गया है। आप प्रमुख की जमानत का विरोध करते हुए ईडी ने यह भी कहा कि केजरीवाल सीधे तौर पर अपराध में शामिल थे. दावा है कि कुछ कारोबारियों से रिश्वत लेने के लिए आबकारी नीति बनाई गई थी.

शुक्रवार को ईडी ने कोर्ट में यह भी दावा किया कि केजरीवाल एक्साइज मामले में ‘साउथ ग्रुप’ को मदद पहुंचाने के लिए पैसे चाहते थे. केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि इस दावे के पक्ष में सबूत हैं. इतना ही नहीं पैसों का सारा लेन-देन हवाला के जरिए होता है. ईडी ने शुरू में दावा किया था कि आप नेताओं ने मामले में 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। ईडी ने शुक्रवार को कोर्ट में दावा किया कि रकम 600 करोड़ तक पहुंच सकती है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि उस मामले में केजरीवाल सीधे तौर पर शामिल हैं. ईडी ने यह भी कहा कि उत्पाद शुल्क मामले से मिले 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए गोवा गए. उस पैसे का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया. इसके अलावा ईडी ने यह भी दावा किया कि उत्पाद शुल्क ‘भ्रष्टाचार’ मामले के पैसे का इस्तेमाल पंजाब विधानसभा चुनाव में किया गया था.

बंगाल के ‘न्यारापोरा’ के समान, त्योहार से पहले बुरी आत्माओं को दूर रखने के लिए उत्तर भारत के बड़े हिस्से में ‘होलिका दहन’ की प्रथा है। इस बार दिल्ली बीजेपी ने भ्रष्टाचार को बुरी ताकत के रूप में पहचानते हुए अरविंद केजरीवाल का पुतला फूंका. रविवार को बीजेपी के विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में भी केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की गई.

कार्यक्रम का एक वीडियो बाद में दिल्ली बीजेपी के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से पोस्ट किया गया था। कार्यक्रम का नेतृत्व दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष बीरेंद्र सचदेव ने किया. पुतले के चेहरे पर केजरीवाल का पोस्टर लगाकर उसे जला दिया गया. बीजेपी समर्थकों ने नारे लगाए, “केजरीवाल इस्तीफा दो।”

इस कार्यक्रम के बारे में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”होली बुरी ऊर्जा पर अच्छी ऊर्जा की जीत का त्योहार है. आज हमने भ्रष्टाचार की होलिका जलाई। अगर दिल्ली में कोई भ्रष्टाचार का चेहरा रहा है तो वह मुख्यमंत्री केजरीवाल हैं। साथ ही उन्होंने आप प्रमुख पर हमला बोलते हुए कहा, ”केजरीवाल ने देश के बारे में नहीं सोचा. सिर्फ अपने परिवार और जेब के बारे में सोचा. इसलिए वह और उनके मंत्री आज जेल में हैं।”

क्या अब भी है यूट्यूबर एलविश यादव की जमानत के आसार?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यूट्यूबर एलविश यादव की जमानत के आसार अब भी है या नहीं! रेव पार्टी और पार्टियों में सांप का जहर सप्लाई करने के मामले में एल्विश यादव बुरी तरह फंस गए हैं। नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने उन्‍हें अरेस्‍ट कर 14 दिनों की न्‍यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। बताया जा रहा है कि 25 साल के एल्विश यादव ने पुलिस पूछताछ में उसने रेव पार्टी में सांप के जहर की सप्‍लाई की बात स्‍वीकार कर ली है। उसने माना कि वह विभिन्न रेव पार्टियों में आरोपियों से मिला था और उनके संपर्क में था। अगर उसके ऊपर आरोप साबित हो जाते हैं तो उसे 20 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं दूसरी और एल्विश की जमानत के लिए उसके वकीलों ने तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आज यानी सोमवार या मंगलवार को उसकी जमानत का आवेदन कोर्ट में भेजा जाएगा। उधर, यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी-2 विनर एल्विश यादव के खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट पुलिस पहले ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर चुकी है। लेकिन पेच यह है कि गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय के वकील आज यानी सोमवार को हड़ताल पर है। इसलिए आज एल्विश यादव की जमानत अर्जी पर सुनवाई होने भी मुश्किल है।

नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने एल्विश के ऊपर जांच के दौरान एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में बढ़ोतरी की गई है। थाना सेक्टर-20 पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत धारा-8/20/27/27ए/29/30/32 शामिल किया है। अगर उसके ऊपर इन धाराओं के तहत आरोप साबित हो जाते हैं तो उसे कितने साल की सजा हो सकती है? आरोप सिद्ध होने के बाद उसे कितनों दिनों तक जेल काटनी पड़ी सकती है?इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रुद्र विक्रम सिंह ने एनबीटी की टीम को जानकारी देते हुए बताया कि आरोप साबित होने के बाद 20 साल तक की जेल हो सकती है।उसे जमानत मिलना भी मुश्किल है। अमूमन जिला अदालतें ऐसे मामलों में चार्जशीट फाइल होने के बावजूद भी जमानत देने से बचती हैं। जिला अदालत से खारिज होने के अगले दिन भी हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं, कोई टाइम लिमिट नहीं है। साथ ही इस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। धारा-27ए में 10 से 20 साल, धारा-20 में 10 से 20 साल तक की सजा का प्रावधान है। चूंकि एनडीपीएस की वो धाराएं भी लगी हैं जिसमें 20 साल तक की सजा है। इसलिए अभी कुछ महीनों तक जमानत मिलना मुश्किल है। कम से कम तब तक, जब तक पुलिस चार्जशीट फाइल नहीं कर लेती है। प्राथमिक तौर पर वह डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ही बेल लगायेंगे, उसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाएंगे पर यह तय है कि अगले कुछ महीनों तक जेल में रहेंगे।

 सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रुद्र विक्रम सिंह ने आगे बताया कि वाइल्ड लाइफ की जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज था उसमें अधिकतम सजा तीन वर्ष की थी। इसी वजह से पुलिस एल्विश को गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अर्नेश कुमार स्टेट ऑफ बिहार में यह कहा है कि सात साल से कम की सजा वाले अभियुक्त की सीधे तौर पर गिरफ्तारी नहीं हो सकती। अब चूंकि जिन मामलों में वह अभियुक्त है उसमें 20 वर्ष तक की सजा है। इसलिए पुलिस के पास उसे गिरफ्तार करने का भी अधिकार था और अब कम से कम जब तक चार्जशीट फाइल नहीं हो जाती, उसे जमानत मिलना भी मुश्किल है। अमूमन जिला अदालतें ऐसे मामलों में चार्जशीट फाइल होने के बावजूद भी जमानत देने से बचती हैं। जिला अदालत से खारिज होने के अगले दिन भी हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं, कोई टाइम लिमिट नहीं है।

वरिष्ठ वकील रुद्र विक्रम सिंह ने बताया एनडीपीएस की धारा-27ए एल्विश यादव को सबसे अधिक मुसीबत में डाल सकती है। यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी-2 विनर एल्विश यादव के खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट पुलिस पहले ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर चुकी है। लेकिन पेच यह है कि गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय के वकील आज यानी सोमवार को हड़ताल पर है। इसलिए आज एल्विश यादव की जमानत अर्जी पर सुनवाई होने भी मुश्किल है।एनडीपीएस एक्ट लगने के बाद उसे जेल भेजना पुलिस के लिए आसान हो गया। एनडीपीएस एक्ट का मतलब होता है नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट अधिनियम 1985, जिसे आम तौर पर एनडीपीएस एक्ट के रुप में जाना जाता है। भारतीय संसद का एक अधिनियम है जो किसी भी व्यक्ति को उत्पादन, विनिर्माण, खेती, कब्जा, ब्रिकी, खरीद या किसी भी नशीली दवाई का सेवन करता है। उस पर ये एक्ट लगाया जाता है।