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क्या वर्तमान में छोटे-छोटे बच्चे सीख रहे हैं गुंडागर्दी?

वर्तमान में छोटे-छोटे बच्चे गुंडागर्दी सीख रहे हैं!पिछले दिसंबर में, कुछ छात्रों के एक समूह ने अपने सहपाठी को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। 11 जनवरी को, स्कूल के बाहर झगड़े के दौरान एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई। दो हफ्ते पहले, तीन छात्रों ने अपने सीनियर को तंग करने से बचने के लिए उसे चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया। अभी दो दिन पहले ही, एक 12 साल के लड़के ने अपने सीनियर को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जहां स्कूलों में बदमाशी की वजह ने हिंसा का रूप ले लिया, और मामला बहुत गंभीर हो गया है। तो, सवाल ये है कि आखिर ऐसी घटनाओं में इतनी तेजी से बढ़ोतरी क्यों हो रही है?  बच्चों हर तरह अधकचरी जानकारी और उसके देखने के साधन आसानी से उपलब्ध हैं। उनकी सोच जल्दी ही एकतरफा बन जा रही है। इससे दूसरों से अलग राय रखने वालों को सहन करने की शक्ति कम हो रही है। फोन आसानी से मिलने की वजह से बच्चे बहुत कम उम्र से ही इन चीजों को देखना-समझना शुरू कर देते हैं। मनोचिकित्सक निमिष देसाई ने कहा कि हाल के वर्षों में, यह स्पष्ट हो गया है कि सोशल मीडिया ऐसे किशोरों के मन को प्रभावित करता है जो थोड़े सेंसेटिव हैं। हालांकि, असल समस्या ये है कि हमारे देश में मानसिक स्वास्थ्य के लिए उचित सहायता प्रणाली की कमी है।

बिना किसी मार्गदर्शन के बच्चों को इंटरनेट की दुनिया में कुछ भी देख रहे हैं। ये उनके सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक स्वास्थ्य को खराब कर रहा है। खासकर भावनात्मक समझ और धमकाने बुलीइंग जैसे मुद्दे एक मुश्किल बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चे ऐसे कंटेंट देखते हैं तो उन पर इसका स्थायी प्रभाव पड़ता है। दुर्भाग्य से, कोई भी बच्चों को इन खतरों के बारे में नहीं बताता, जिससे बच्चे अनजाने या जानबूझकर इसकी नकल करते हैं। उन्हें लगता है, ‘अगर मेरा भाई-बहन या कोई हीरो इस तरह का व्यवहार कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता?

हम जल्दबाजी में बच्चों को बड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनका विकास असंतुलित हो रहा है। ये एक जटिल समस्या है, जो माता-पिता के पास बच्चों के व्यवहार को समझने के लिए कम समय मिलने के कारण और गंभीर हो जाती है। यह समझना जरूरी है कि इन चुनौतियों का सामना सिर्फ किसी एक मामले या स्कूल के स्तर पर नहीं किया जा सकता। इसमें पूरे समाज को शामिल होना होगा। हमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए सामुदायिक जिम्मेदारी को स्वीकार करने की जरूरत है।

जिसे उसके माता-पिता उसके शिक्षकों द्वारा धमकाने की शिकायत के बाद उसके पास ले आए थे। उन्होंने कहा कि अगर कोई उसके प्रति संवेदनशील नहीं है, तो उसे भी किसी के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत क्यों है? एक दसवीं कक्षा के छात्र ने अपने काउंसलर को बताया कि कैसे उसे मिलने वाली गालियां उसके पिता जी की उस स्कूल का खर्चा उठाने की क्षमता पर सीधी चोट करती थीं, जहां दूसरे बच्चे पढ़ते थे। उसने दूसरों को नीचा दिखाने को अपना गुस्सा निकालने का तरीका बना लिया। एक अन्य मामले में, एक 10 वर्षीय छात्र को पहले भी कई स्कूलों से निकाला जा चुका था। काउंसलर के अनुसार, उस बच्चे में इतना गुस्सा भरा हुआ था कि वह शिक्षकों के साथ भी अभद्र व्यवहार करने लगता था।प्राची ने बताया एक मामले में, धमकाने वाला बच्चा ये भी नहीं जानता था कि उसने दूसरे बच्चों को कितनी जोर से मारा है। निमिष ने यह भी कहा कि इन मुद्दों की जटिलता किसी एक मंच या तकनीक से कहीं ज्यादा गहरी है। बल्कि, ये व्यापक सामाजिक समस्याओं के लक्षण हैं। ऐसी घटनाएं स्कूलों और परिवारों जैसे संस्थानों के बीच एक-दूसरे पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति की ओर ध्यान दिलाती हैं। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के, एक साथ मिलकर काम करने की बात कही। दिल्ली के निजी स्कूलों में काउंसलर डॉक्टर अनुप्रेक्षा जैन ने कहा कि काउंसलरों और शिक्षकों को साथ मिलकर काम करना चाहिए, बच्चों के व्यवहार को हमें देखना चाहिए ताकि धमकाने के शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सके। दुर्भाग्य से, यह सहयोग अक्सर नहीं होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को सामाजिक और भावनात्मक सीखने पर जोर देना चाहिए, हालांकि अभी सिर्फ कुछ ही स्कूल इसे आजमा रहे हैं। धमकाने के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ माता-पिता के साथ व्यक्तिगत बातचीत भी मददगार हो सकती है। प्राची श्रीवास्तव ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि माता-पिता इस बात पर सतर्क रहें कि उनकी आदतें उनके बच्चों को कैसे प्रभावित करती हैं।

क्या दिल्ली एनसीआर में आवारा कुत्तों का हो गया है खौफ?

खबरों के अनुसार दिल्ली एनसीआर में आवारा कुत्तों का खौफ हो गया है! दिल्ली एनसीआर की हाइराइज सोसायटियों में रहने वाले लोग आजकल हर किसी को कुछ ऐसी ही हिदायतें देते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद की हाइराइज सोसायटी में रहने वाले लोग स्ट्रे डॉग के आतंक से बेहद दहशत में हैं। रेडिडेंट्स का कहना है कि कुत्तों के डर से लोगों का सोसायटी से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है। आए दिन सोसायटी के अंदर भी स्ट्रे डॉग आ जाते हैं। ऐसे में दहशत दोगुनी हो गई है। नोएडा की ऊंची इमारतों में रहने वाले रेजिडेंट्स स्ट्रे डॉग के चलते काफी दहशत में हैं। यहां खूंखार कुत्ते कभी भी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को अपना शिकार बना लेते हैं। पिछले एक साल में 30 लोग डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं। जिनमें 8 से 10 छोटे बच्चे शामिल हैं। नोएडा में करोड़ों रुपये का फ्लैट खरीदने वाले लोग स्ट्रे डॉग के डर के साए में जी रहे हैं। सहाय बताते हैं कि नोएडा प्राधिकरण को स्ट्रे डॉग की समस्या से अवगत कराया जा चुका है। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। उनका कहना है कि स्ट्रे डॉग को पकड़ने वाले एनजीओ और डॉक्टरों की टीम को नोएडा प्राधिकरण की तरफ से पेमेंट नहीं दी जा रही हैं। जिसके चलते स्ट्रे डॉग को पकड़ने का काम ठप है। सोसायटी के लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। उनका कहना है कि नोएडा प्राधिकरण को रेजिडेंट्स की समस्या पर ध्यान देना होगा, वरना लोगों की जीना मुश्किल हो जाएगा।

नोएडा सेक्टर-50 में 21 सोसायटियां हैं। यहां एक मेघदूतम पार्क है। इस पार्क के आसपास 10 से 15 स्ट्रे डॉग का जमावड़ा दिनभर लगा रहता है। ऐसे में पार्क जाने वाले लोग काफी दहशत में रहते हैं। उन्होंने बताया कि नोएडा में स्ट्रीट नॉन वेज फूड स्टॉल की संख्या काफी ज्यादा है। इन स्टॉल के आसपास स्ट्रे डॉग देखे जा सकते हैं। यह स्ट्रे डॉग अचानक लोगों पर हमला करते हैं। उन्होंने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 205 सोसायटियां हैं। नोएडा सेक्टर-76, 77, 75, 78,79 में सबसे ज्यादा स्ट्रे डॉग हैं।

गाजियाबाद में 250 से ज्यादा सोसायटियां है। अधिकांश सोसायटी के अंदर आए दिन स्ट्रे डॉग घुस जाते हैं। स्ट्रे डॉग से बच्चों के बीच काफी दहशत देखने को मिलती हैं। सोसायटियों में पिछले एक साल में 50 से ज्यादा एफआईआई डॉग बाइट के मामलों से जुड़ी हैं। स्ट्रे डॉग की समस्या को लेकर आरटीआई भी फाइल की जा चुकी है। लेकिन कोई संतुष्टिजनक जवाब नहीं मिला है। वह बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि स्ट्रे डॉग को उनकी जगह से नहीं हटाया जा सकता है। सरकार स्ट्रे डॉग के रख रखाव के लिए खर्च तो कर रही है लेकिन लोकल प्रशासन की तरफ कोई ऐक्शन नहीं लिया जाता है। जिसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।

दिल्ली में डॉग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। साल 2023 में एमसीडी के बड़े हॉस्पिटल्स के अलावा अलग-अलग इलाकों में बने स्वास्थ्य केंद्रों में डॉग बाइट के 54,395 मामले दर्ज हुए। एमसीडी के हेल्थ विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो डॉग बाइट के सबसे ज्यादा मामले साउथ दिल्ली में दर्ज हुए। बंदर और बिल्लियों के काटने के मामलों में भी अच्छी खासी वृद्धि हुई है। डॉग बाइट के मामले में शाहदारा स्थित पॉलीक्लीनिक सबसे टॉप पर है। यहां पिछले साल डॉग बाइट के 13985 मामले दर्ज हुए।

कानून के मुताबिक, किसी स्ट्रे डॉग को उसकी जगह से नहीं हटा सकते हैं, यानी उसे किसी सोसाइटी या फिर मोहल्ले से ऐसे ही नहीं हटाया जा सकता है। धारा 428 और 429 के तहत आवारा कुत्तों को मारना अपराध है। अगर कोई आवारा कुत्तों को मारने या परेशान करने की कोशिश करता है तो इसकी शिकायत पुलिस में भी की जा सकती है। ऐसे जानवरों को मारने या फिर जहर देने के लिए आपको पांच साल तक की जेल हो सकती है, वहीं क्रूरता के लिए तीन महीने तक जेल में काटने पड़ सकते हैं।

कुत्तों के काटने से इंसान के शरीर में रेबीज का संक्रमण चले जाता है। रेबीज संक्रमण का कोई इलाज नहीं है। संक्रमण होने पर मौत निश्चित है। दुनिया भर में कहीं भी रेबीज का इलाज नहीं है। लेकिन रेबीज इंजेक्शन संक्रमण से बचा सकता है। वैक्सीनेशन के बाद 100% मौत से बचने की संभावना है। एक्सपर्ट का कहना है कि डॉग्स लवर हो, आरडब्ल्यूए हो या अन्य सोसाइटी, उन्हें डॉग्स का वैक्सीनेशन कराना चाहिए। अगर डॉग का वैक्सीनेशन हुआ होता तो रेबीज संक्रमण की वजह से हाल ही में गाजियाबाद में 14 साल के बच्चे की मौत को रोका जा सकता था। यही नहीं, डॉक्टर ने आम लोगों से भी अपील की है कि गाइडलाइन के अनुसार अगर किसी को कुत्ता चाट भी ले तो रेबीज इंजेक्शन 24 घंटे के अंदर जरूर लेना चाहिए।

कुत्ता आप घर में पालते हैं या वो बाहर रहते हैं, उनका वैक्सीनेशन जरूरी है। वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। इस संक्रमण का बचाव तो संभव है, इसका इलाज नहीं है। डॉक्टर ने कहा कि मेरी डॉग्स लवर से अपील है कि वो अपने इलाके में आगे आएं और ऐसे कुत्ते का वैक्सीनेशन कराएं, जिन्हें रेबीज का वैक्सीन नहीं लगी है। एक बार वैक्सीन लग जाती है तो खतरा कम हो जाता है।

क्रैश होते वक्त जेट से कैसे बाहर आते हैं पायलट?

आज हम आपको बताएंगे कि क्रैश होते वक्त पायलट जेट से कैसे बाहर आते हैं! राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। सभी खूबियों से लैस भारतीय वायुसेना का तेजस फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि विमान में मौजूद पायलट की जान बाल-बाल बच गई। हादसे का शिकार यह लड़ाकू जेट हॉस्टल की छत पर जा गिरा। ऐसे हादसों से अपनी जान बचाने के लिए पायलट अक्सर इजेक्ट टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं। जैसलमेर में हवा में हुई इस दुर्घटना के दौरान भी मौजूद पायलट ने यही किया जिससे उसकी जान बच गई। फाइटर प्लेन उड़ा रहे पायलट इस स्थिति से कई बार बाहर निकलने में कामयाब हो जाते हैं तो वहीं कई बार ऐसा भी होता है कि असफल होने के बाद उनकी जान तक चली जाती है। आज हम पायलट की इसी इजेक्ट टेक्निक के बारे में जानेंगे। हालांकि हजारों फीट ऊंचाई पर अपनी जान बचाने के लिए इजेक्ट टेक्निक जोखिम भरा काम है। जब कोई फाइटर जेट हजारों फीट की ऊंचाई पर क्रैश होता है, तब पायलट ही है जो सबसे रिस्क फेज में होता है। वह क्रैश में अपनी जान गंवा देते हैं। कई बाक खबरें आती हैं कि प्लेन हादसे में पायलट की जान चली गई। सवाल उठते हैं कि क्रैश के वक्त हर बार पायलट बाहर क्यों नहीं निकल पाते? ग्वालियर एयरबेस पर उड़ान भरते वक्त MIG-21 बायसन विमान साल 2021 में दुर्घटना का शिकार हुआ था। क्या इन फाइटर जेट में रॉकेट पावर सिस्टम नहीं होता है? नहीं, कभी कभार प्लेन में रॉकेट पावर सिस्टम होते हुए भी पायलट की जान नहीं बच पाती है।उसकी जान बचाना सबसे जरूरी हो जाता है। फाइटर प्लेन क्रैश होते वक्त पायलट प्लेन से बाहर निकलने की कवायद में लग जाता है। इसमें उसकी मदद करता है रॉकेट पावर सिस्टम। रॉकेट पावर सिस्टम पायलट सीट के नीचे होता है। यह क्रैश के वक्त अपने-आप एक्टिव नहीं होता बल्कि इसे पायलट ही एक्टिव करता है। पायलट इसे जैसे ही एक्टिव करता है, क्रैश के वक्त यह सिस्टम उसे 30 मीटर ऊपर पुश करता है। पुश होते ही प्लेन का एक छोटा सा हिस्सा खुल जाता है। इसे ही इजेक्ट टेक्निक कहा जाता है। रॉकेट वापर सिस्टम के पुश करते ही पायलट नीचे ऊंचाई से जमीन पर गिरने लगता है। उस वक्त पायलट लगभगह 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर रहता है। अधिकांश फाइटर जेट विमान जमीन के ऊपर 3,000 से 6,000 मीटर के बीच होते हैं। प्लेन से पुश होने के बाद पायलट पैराशूट के सहारे नीचे आता है।

फाइटर जेट से पायलट इस रॉकेट पावर सिस्टम की मदद से हादसे तो बच जाते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि वह क्रैश में अपनी जान गंवा देते हैं। कई बाक खबरें आती हैं कि प्लेन हादसे में पायलट की जान चली गई। सवाल उठते हैं कि क्रैश के वक्त हर बार पायलट बाहर क्यों नहीं निकल पाते? ग्वालियर एयरबेस पर उड़ान भरते वक्त MIG-21 बायसन विमान साल 2021 में दुर्घटना का शिकार हुआ था। क्या इन फाइटर जेट में रॉकेट पावर सिस्टम नहीं होता है? नहीं, कभी कभार प्लेन में रॉकेट पावर सिस्टम होते हुए भी पायलट की जान नहीं बच पाती है। इसके पीछे की वजह है कि, चूंकि हादसे के वक्त संकटमोचक की भूमिका निभाने वाला रॉकेट पावर सिस्टम पायलट की सीट के नीचे ही लगा होता है। हादसे के वक्त पायलट की सीट डैमेज हो जाती है। इससे पायलट के सामने खतरा कहीं अधिक हो जाता है। और ऐसे मौकों पर ही पायलट की जान चली जाती है।

इजेक्शन सीट पायलट को हादसे के वक्त जल्दी से जेट से बाहर निकालने में मदद करती है। यह पायलट को गंभीर चोटों से बचाने में मदद करती है। इजेक्शन सीट का इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। इजेक्शन सीट से बाहर निकलने के दौरान पायलट को चोट लग सकती है। जब जेट हादसे का शिकार हो जाता है। जब जेट में तकनीकी खराबी होती है। बता दें कि जैसलमेर में हवा में हुई इस दुर्घटना के दौरान भी मौजूद पायलट ने यही किया जिससे उसकी जान बच गई। फाइटर प्लेन उड़ा रहे पायलट इस स्थिति से कई बार बाहर निकलने में कामयाब हो जाते हैं तो वहीं कई बार ऐसा भी होता है कि असफल होने के बाद उनकी जान तक चली जाती है। आज हम पायलट की इसी इजेक्ट टेक्निक के बारे में जानेंगे। हालांकि हजारों फीट ऊंचाई पर अपनी जान बचाने के लिए इजेक्ट टेक्निक जोखिम भरा काम है। जब जेट दुश्मन के हमले का शिकार होता है। बता दें कि इजेक्शन सीट का इस्तेमाल करने के लिए पायलट को विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होता है।

आखिर किस नियम के तहत समय पर खत्म हो पाएंगे क्रिकेट मैच?

आज हम आपको वह नियम बताने वाले हैं जिसके तहत क्रिकेट मैच समय पर खत्म हो जाएंगे! इस साल 2 जून से शुरू होने जा रहे टी-20 वर्ल्ड कप के साथ क्रिकेट की दुनिया में एक नया अध्याय भी जुड़ जाएगा। इंटनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC एक ऐसा नियम लाने जा रही है, जिससे मैच के दौरान समय की बर्बादी खत्म हो जाएगी। नियम इतने सख्त और स्पष्ट होंगे कि बात न मानने वाली टीम पर ऑन द स्पॉट पेनल्टी भी ठोक दी जाएगी। इस नए रूल को स्टॉप क्लॉक नियम के नाम से जाना जाएगा। ‘स्टॉप क्लॉक’ नियम जून 2024 से दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले वनडे और टी-20 इंटरनेशनल में स्थायी हो जाएगा। ऐसे में चलिए आपको इस नियम की हर छोटी-बड़ी बात आसान शब्दों में समझाते हैं। स्टॉप क्लॉक’ नियम के अंतर्गत टीम को पेनल्टी रन से बचने के लिए पिछले ओवर के 60 सेकंड के अंदर नया ओवर शुरू करना होता है। यह नियम सबसे पहली बार दिसंबर 2023 में शुरू किया गया। ट्रायल अप्रैल 2024 तक किया जाना था, लेकिन इस ट्रायल के नतीजे साफ दिखायी दे रहे हैं जैसे मैच समय पर खत्म हो रहे हैं, जिससे प्रत्येक वनडे मैच में करीबन 20 मिनट बच रहे हैं।

इसके लिए मैदान पर लगी एक ‘इलेक्ट्रोनिक’ घड़ी 60 से लेकर शून्य तक उलटी गिनती करेगी और थर्ड अंपायर घड़ी शुरू करने का समय तय कर सकता है। फील्डिंग करने वाली टीम के ऐसा नहीं करने पर उसे दो चेतावनी दी जाएगी और इसके बाद के उल्लघंन के लिए हर घटना के लिए पांच रन का जुर्माना लगाया जाएगा। आईसीसी ने हालांकि नियम में कुछ अपवाद भी शामिल किए और ऐसी स्थितियों में शुरू हुई घड़ी को रद्द कर दिया जाएगा। आईसीसी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि, ‘अगर नया बल्लेबाज ओवरों के बीच में क्रीज पर आता है, आधिकारिक ‘ड्रिंक्स ब्रेक’ तथा किसी बल्लेबाज या फील्डर के इंजर्ड होने की स्थिति में मैदान पर ट्रि्टमेंट किया जाना शामिल है। अगर क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण समय खराब हुआ हो। इस नियम को तब भी लागू नहीं किया जाएगा।

फील्डिंग करने वाली टीम अक्सर मैच की गति को धीमा करने की कोशिश करती हैं ताकि उन्हें प्लानिंग बनाने के लिए और ज्यादा समय मिल सके और टीम हर बॉल के बाद फील्डिंग में भी बदलाव करती हैं। अभी तक टीम और कप्तान पर ही वित्तीय रूप से जुर्माना जा सकता था, लेकिन यह इसे रोकने में कारगर साबित नहीं हुआ। बता दें कि क्रिकेट में स्कूप शॉट नया नहीं है। सूर्यकुमार यादव से पहले भी क्रिकेट की दुनिया में 360 डिग्री शॉट्स खेलने वाले बैटर आए हैं। बावजूद इसके सूर्य ने जिस तरह जिंबाब्वे के खिलाफ इनिंग्स की आखिरी गेंद पर फास्ट बोलर रिचर्ड एनगरावा की गेंद को खेला, उससे महान सुनील गावस्कर भी हैरान थे। उनके साथी कॉमेंटेटर पॉमी एमबांग्वा तो लगातार कहते रहे कि आखिर यह कैसे संभव है। सूर्य ने लगभग पांचवें स्टंप की पोजिशन पर जाते हुए एक वाइड यॉर्कर को जिस तरह लगभग गिरते हुए फाइन लेग बाउंड्री के बाहर उड़ा दिया, वह चमत्कार ही था।

मैच के बाद रवि शास्त्री ने जब पूछा कि आप कैसे कर लेते हैं यह सब, तो सूर्य का जवाब था कि मैं रबड़ की गेंद से खेलते हुए इस तरह के शॉट्स खेलने का अभ्यास करता था। शास्त्री ने जब और कुरेदा तो सूर्य ने असल बात बताई। उन्होंने कहा, ‘मैं यह जानने की कोशिश करता हूं कि उस समय गेंदबाज क्या सोच रहा है।’ तो क्या सूर्य गेंदबाज का दिमाग पढ़ लेते हैं? भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और इन दिनों जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के साथ जुड़े लालचंद राजपूत ने NBT को बताया, ‘सूर्य एक बेहद शार्प क्रिकेटर हैं। उन्हें फील्डिंग पोजिशंस से यह अंदाजा लग जाता है कि गेंदबाज कहां बॉल डालने वाला है। वैसे तमाम क्रिकेटर ऐसा करने की कोशिश करते हैं, मगर शायद इस मामले में सूर्य एक जादूगर की तरह हैं। यह काम आसान नहीं। वह क्रिकेट की दुनिया के जादूगर बन गए हैं।’

मुंबई के रहने वाले राजपूत ने यह भी बताया कि सूर्य ने जो हासिल किया है उसके पीछे बेहद कड़ी मेहनत भी है। वर्ल्ड कप के लिए रवानगी से पहले उन्होंने मुंबई के पारसी जिमखाना क्लब के कोच के साथ घास वाली और बाउंसी पिच पर हर रोज घंटों अभ्यास किया। इसके लिए उन्होंने ‘साइड आर्म्स एक्सपर्ट्स’ की भी मदद ली। लगातार तेज गेंदों को इस तरह से हिट करने के बाद ही वह इस लेवल तक पहुंच पाए हैं। उन्होंने मुंबई के पूर्व क्रिकेटर और पारसी जिमखाना के कोच विनायक माने की लगातार सेवाएं लीं। प्रैक्टिस के दौरान भी सूर्य ने लगातार मैच जैसी स्थिति तैयार करवाया और चैलेंज लिया।

क्या इंडियन नेवी ने खदेड़ दिए हैं समुद्री लुटेरे?

वर्तमान में इंडियन नेवी ने समुद्री लुटेरे खदेड़ दिए हैं! पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भारत को कुछ इसी तरह परिभाषित किया था। बताया था कि जो हमारी तरफ आंख उठाकर देखेगा, उसे मुंह की खानी पड़ेगी। हमारी तीनों सेनाएं (नभ,जल और थल) भी अब ईंट से ईंट बजाने में माहिर हैं। दुश्मन को उसी की भाषा में समझाना उन्हें आता है। भारत के सेना की ताकत क्या होती है, यह तो अरब सागर में आतंक मचा रहे समुद्री लुटेरे अब भलीभांति समझ गए होंगे। भारतीय नौसेना ने 12 मार्च को बांग्लादेश के 22 नागरिकों को भी 11 समुद्री लुटेरों से बचाया। समुद्री लुटेरों की हिमाकत को हाल के एक दो महीनों में भारतीय नौसेना ने ही चुनौती दी है। खुद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी भारत की इस मदद का मुरीद हो गया है। वहां के लोग भारत की बढ़ती ताकत खूब तारीफ भी कर रहे हैं। समुद्री लुटेरों से बचाने के लिए ईरान, लाइबेरिया, यूरोप का देश माल्टा भी शुक्रगुजार है। अरब सागर के पास सोमालिया के तट पर समुद्री लुटेरों ने बांग्लादेशी झंडे वाले जहाज एमवी अब्दुल्ला पर हमला किया था। एमवी अबदुल्ला जहाज उस वक्त कोयला लेकर मोजाम्बिक से संयुक्त अरब अमीरात जा रहा था। इंडियन नेवी ने बताया कि जैसे ही भारतीय नौसेना को सूचना मिली, उन्होंने तुरंत एक लंबी दूरी की समुद्री गश्ती विमान को भेजा। 12 मार्च की शाम जहाज का पता लगाने के बाद, नेवी ने चालक दल के सदस्यों का पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी। इसके लिए इंडियन नेवी ने बांग्लादेश के जहाज एमवी अब्दुल्ला से संपर्क किया लेकिन जहाज से कोई जवाब नहीं मिला।

गुरुवार यानी 14 मार्च की सुबह, भारतीय नौसेना ने यह सुनिश्चित करने के लिए जहाज के चालक दल की जांच की कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। चालक दल के सभी सदस्य बांग्लादेशी नागरिक थे जिन्हें हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने बंधक बना रखा था। भारतीय नौसेना के बयान के अनुसार, ‘मिशन ने समुद्री सुरक्षा अभियानों के लिए तैनात एक युद्धपोत को भेजा था, जिसे रास्ते से हटा दिया गया था। इस युद्धपोत ने 14 मार्च 24 की सुबह अपहरण किए गए एमवी अबदुल्ला को रोका। जहाज पर सवार बांग्लादेशी चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की गई और भारतीय युद्धपोत सोमालिया के क्षेत्रीय जल में पहुंचने तक एमवी के आसपास ही रहा। कुल 22 बांग्लेदेशी नागरिक थे और उन्हें करीब 11 समुद्री लुटेरों ने बंधक बनाया था।

मुश्किल में फंसे पड़ोसी देश के नागरिकों की मदद करना कोई पहली बात नहीं है। बांग्लादेश से पहले बीते दो महीनों में इंडियन नेवी ने पाकिस्तान और ईरान के भी नागरिकों को भी समुद्री लुटेरों से बचाया है। यह सारी घटनाएं अरब सागर के पास सोमालिया तट के पास ही हुई हैं। पाकिस्तान के लिए तो भारतीय नौसेना दो-दो बार मदद कर उन्हें चंगुल से छुटाया था। जनवरी के अंतिम महीने में सोमालिया के पूर्वी तट के पास समुद्री लुटेरों ने 19 पाकिस्तानी नाविकों को बंधक बना लिया था। उनके ईरानी झंडे वाले विमान एफवी अल नईमी में 11 समुद्री लुटेरे सवार हो गए थे। इसके बाद इंडियन नेवी ने अपने INS सुमित्रा को भेजा जिसके बाद मजबूरन समुद्री लुटेरों को उन 19 पाकिस्तानी नागरिकों को छोड़ना पड़ा था। इसके ठीक 2 दिन बाद सोमालिया के ही तट के पास एक बार फिर समुद्री लुटेरों ने 8 पाकिस्तानी नागरिकों को बंधक बनाया था। इस बार उनके साथ 11 ईरानी भी थे। यहां भी मदद के लिए आगे आते हुए इंडियन नेवी ने 11 ईरानी और 8 पाकिस्तानी नागरिकों को बचाया था। तब इंडियन नेवी ने आईएनएस शारदा को भेजा था।

भारत-ईरान के रिश्ते किसी से छुपे नहीं हैं। दोनों के बीच आपसी संबंध मजबूत हैं। भारत ने ईरान के नागरिकों को भी ऐसे ही समुद्री डाकुओं से बचाया था। रविवार यानी 28 जनवरी यानी रविवार को भारतीय नौसेना को सूचना मिली कि ईरान के फिशिंग वैसेल FV ईमान को समुद्री लुटेरों ने बंधक बना लिया था। इसमें 17 ईरानी क्रू मेंबर्स सवार थे। इसके 15 दिन पहले भी इंडियन नेवी ने आईएनएस सुमित्रा की मदद से ईरान के लोगों की रक्षा थी। तब 11 ईरानी नागरिकों के साथ पाकिस्तानी भी सवार थे।

यूरोप के देश माल्टा का एक जहाज भी पिछले साल 14 दिसंबर की तारीख को हाईजैक कर लिया गया था। इसके बाद भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत को अदन की खाड़ी में जहाज एमवी रुएन की मदद के लिए भेजा था। तब 6 समुद्री लुटेरों ने उस जहाज को बंधक बनाया था। एमवी रुएन तब कोरिया से तुर्किये की तरफ जा रहा था कि तभी समुद्री लुटेरों ने उसे बंधक बना लिया था। उस घटना में नाविक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

क्या चुनावी बॉन्ड के नाम पर हुआ था घोटाला?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चुनावी बॉन्ड के नाम पर घोटाला हुआ था या नहीं! सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करा दी है। निर्वाचन आयोग की तरफ से इस डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। डेटा के अनुसार इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये बीजेपी को सबसे अधिक चंदा मिला है। डेटा के सामने आने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल तो इससे सबसे बड़ा घोटाला बता रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में एसआईटी जांच की भी मांग कर दी है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से इसे कथित रूप से दुनिया का सबसे बड़ा एक्सटॉर्शन रैकेट बताया जा रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी की तरफ से इस चुनावी चंदे में पारदर्शिता की बड़ी पहल करार दिया जा रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लग चुकी है।कपिल सिब्बल ने साफ कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये कंपनियों ने राजनीतिक दलों को अपने हित में साध लिया है। उन्होंने कहा कि डेटा से साफ पता चलता है कि घाटे में चल रही कंपनियों ने भी राजनीतिक दलों को इलेक्टरोल बॉन्ड के जरिए चंदा दिया। हालांकि, सिब्बल ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि इस मामले की कोई जांच नहीं होगी। सिब्बल ने इस मामले में सिर्फ कोर्ट से ही उम्मीद जताई। सिब्बल ने 2जी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि एक एसआईटी का गठन कर इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये किस पार्टी को किसने कितना चंदा दिया। साथ ही इस चंदे की एवज में उसे कितना फायदा पहुंचा।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से लाई गई चुनावी बॉन्ड योजना को ‘दुनिया का सबसे बड़ा ‘एक्सटॉर्शन रैकेट’ (जबरन वसूली गिरोह)’ बताया। राहुल ने इस स्कीम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘दिमाग की उपज’ करार दिया। राहुल इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि यह कॉर्पोरेट भारत से एक आपराधिक जबरन वसूली है। उन्होंने कहा कि हर एक कॉर्पोरेट यह जानता है। राहुल ने आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के महीनों बाद, कंपनियों ने बीजेपी को चुनावी बॉन्ड के जरिये दान दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई, ईडी मामले दर्ज करती है और फिर कॉरपोरेट बीजेपी को पैसा देते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य कॉरपोरेट्स को गुमनाम रूप से धन दान करने की अनुमति देना था। राहुल ने कहा कि विपक्षी सरकारों को गिराने, शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों को तोड़ने के लिए धन इलेक्शन बॉन्ड के जरिये प्राप्त किया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी बांड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि यह योजना भारतीय राजनीति में काले धन के वर्चस्व को खत्म करने की एक पहल थी। शाह ने कहा कि इस योजना को खत्म करने की बजाय इसमें सुधार किया जाना चाहिए था। शाह ने कहा कि मैं इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करना चाहता हूं। कुल 20,000 करोड़ रुपये के चुनावी बांन्ड में से बीजेपी को लगभग 6,000 करोड़ रुपये मिले हैं। शाह ने सवाल उठाया कि बाकी बॉन्ड कहां गए? उन्होंने कहा कि 303 सांसद होने के बावजूद हमें 6,000 करोड़ रुपये मिले हैं और बाकियों को 242 सांसदों के बावजूद 14,000 करोड़ रुपये मिले हैं। शाह ने कहा कि किस बात को लेकर हंगामा है? उन्होने कहा कि मैं कह सकता हूं कि एक बार हिसाब-किताब हो जाने के बाद वे आप सभी का सामना नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, गृह मंत्री ने यह भी कहा कि चुनावी बॉन्ड के लागू होने से पहले, विपक्षी दल कैश में राजनीतिक चंदा लेते थे। शाह ने आरोप लगाया कि 1,100 रुपये के दान में से, वे के पार्टी के नाम पर 100 रुपये जमा करते थे और 1,000 रुपये अपनी जेब में रखते थे।

भारतीय स्टेट बैंक ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 1 अप्रैल 2019 से इस साल 15 फरवरी के बीच कुल 22,217 चुनावी बॉन्ड खरीदे गए। वहीं, राजनीतिक दलों ने 22,030 बॉन्ड को कैश कराया। चंदा हासिल करने वाले टॉप पार्टियों में बीजेपी 6,060 करोड़ रुपये पहले नंबर पर रही। वहीं, दूसरे नंबर पर टीएमसी 1,609 करोड़ रुपये और तीसरे नंबर पर कांग्रेस 1,421 करोड़ रुपये रहीं। कांग्रेस के अलावा बीआरएस को 1214 करोड़ रुपये, बीजेडी को 775 करोड़ रुपये, डीएमके को 639 करोड़ रुपये मिले। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा डोनेशन देने वाली कंपनियों में पहले नंबर पर फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज का नाम शामिल है। कंपनी ने 1368 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं। दूसरे नंबर पर मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड है। कंपनी ने 966 करोड़ रुपये इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये डोनेशन दिया है। इसके बाद क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड 410 करोड़ रुपये का नाम है। वहीं, हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ने 377 करोड़ रुपये, वेदांता लिमिटेड 376 करोड़, एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 225 करोड़ रुपये चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये दिए।

आखिर डिसएबल्ड कैडेट्स के लिए क्या फैसला लेगा रक्षा मंत्रालय?

आज हम आपको बताएंगे कि डिसएबल्ड कैडेट्स के लिए रक्षा मंत्रालय क्या फैसला लेने वाला है! मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान चोट लग जाने की वजह से मेडिकल आधार पर जो कैडेट्स बाहर हो जाते हैं उन्हें भी रीसेटेलमेंट पुर्नस्थापन सुविधा दी जाएगी। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि इसमें न तो डिसएबिलिटी पेंशन शामिल है ना ही ईसीएचएस की सुविधा। इसमें वह कुछ भी नहीं है जो सर्विस हेडक्वॉर्टर आर्मी, नेवी, एयरफोर्स ने अपने प्रस्ताव में भेजा था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ऐसे कैडेट्स के लिए अवसरों को बढ़ाने के लिए, पुनर्वास महानिदेशालय द्वारा संचालित योजनाओं के लाभ के विस्तार की अनुमति दी गई है। इससे मेडिकल आधार पर निष्कासित हुए 500 कैडेट्स को योजनाओं का लाभ उठाने और उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसी तरह की स्थिति में भविष्य के कैडेटों को भी समान लाभ मिलेंगे। रीसेटेलमेंट सुविधा में क्या शामिल है, इस पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि उन कैडेट्स को ऑयल प्रॉडक्ट एजेंसी में अलॉटमेंट के लिए 8 पर्सेंट कोटा के लिए इलेजिबल होने का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

मदर डेरी मिल्क बूथ, फ्रूट और वेजिटेबल सफल शॉप का अलॉटमेंट हो सकेगा। एनसीआर में सीएनजी स्टेशन के मैनेजमेंट के लिए, एलपीजी डिस्ट्रिब्यूशनशिप के अलॉटमेंट के लिए, रेटल आउटलेट पेट्रोल और डीजल के अलॉटमेंट के लिए इलेजिबिलिटी सर्टिकेट दिया जाएगा। सरकार ने 4 अगस्त 2021 को संसद को बताया था कि डिसएबिलिटी पेंशन देने का प्रस्ताव मंत्रालय में विचाराधीन है। हालांकि ऐसा कुछ भी रीसेटेलमेंट सुविधा में शामिल नहीं किया गया है, जिसका ऐलान रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को किया।सिक्योरिटी एजेंसी स्कीम और टेक्निकल सर्विस स्कीम में शामिल किया जाएगा। ये सब अभी डिसएबल्ड पूर्व सैनिकों और सैनिकों की विडोज विधवाओं पर लागू होती हैं। भारतीय सशस्त्र सेनाओं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स ने दिव्यांग डिसएबल कैडेट्स को आर्थिक मदद और इलाज में मदद देने का जो प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा था उसमें डिसएबिलिटी पेंशन देने को कहा गया था। 2015 में रक्षा मंत्री ने इस मामले पर एक्सपर्ट कमिटी बनाई थी तब भी कमिटी ने दिव्यांग कैडेट्स को डिसएबिलिटी पेंशन और आर्थिक मदद की सिफारिश की थी। लेकिन तब इसे स्वीकार नहीं किया गया। सर्विस हेडक्वॉर्टर्स ने फिर प्रस्ताव भेजा। जिसमें कहा गया कि अगर कैडेट डिसएबल हो जाता है या मौत हो जाती है तो आर्थिक मदद एक्स ग्रेशिया का प्रावधान किया जाए। इसके लिए उन्हें लेफ्टिनेंट की सैलरी के हिसाब से पेंशन दी जा सकती है।

अभी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट की सैलरी 56510 रुपए है। पेंशन इसकी आधी होती है। कैंडेड्स सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर ही कमिशन होते हैं। प्रस्ताव में ये भी कहा गया था कि दिव्यांग कैडेट्स को पूर्व सैनिकों की तरह हेल्थ स्कीम ईसीएचएस में शामिल किया जाए। सरकार ने 4 अगस्त 2021 को संसद को बताया था कि डिसएबिलिटी पेंशन देने का प्रस्ताव मंत्रालय में विचाराधीन है। हालांकि ऐसा कुछ भी रीसेटेलमेंट सुविधा में शामिल नहीं किया गया है, जिसका ऐलान रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को किया।

भारतीय आर्म्ड फोर्सेस सेना, नेवी, एयरफोर्स का हिस्सा बनने से पहले युवा जब तक एनडीए, आईएमए, ओटीए या नेवी और एयरफोर्स की अकेडमी में ट्रेनिंग कर रहे होते हैं तब तक उन्हें कैडेट्स कहा जाता है। वह जब ट्रेनिंग पूरी कर फौज में अधिकारी के तौर पर कमिशन होते हैं तब से उन्हें फौज का हिस्सा माना जाता है। लेकिन अगर ट्रेनिंग के दौरान कोई कैडेट डिसएबल हुआ या उसकी मौत हो गई तो सरकार या फौज की तरफ से उन्हें या परिवार वालों को कोई राहत नहीं दी जाती। दिव्यांग कैडेट्स को मदद देने का मसला संवेदनाओं से भी जुड़ा है। जब कोई युवा सेना का हिस्सा बनने आता है तो वह खुद को पूरी तरह देश को समर्पित करता है और अगर उसे कुछ हो गया तो उससे मुंह मोड़ लेना बिल्कुल सही नहीं है। इसी तरह की स्थिति में भविष्य के कैडेटों को भी समान लाभ मिलेंगे। रीसेटेलमेंट सुविधा में क्या शामिल है, इस पर रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि उन कैडेट्स को ऑयल प्रॉडक्ट एजेंसी में अलॉटमेंट के लिए 8 पर्सेंट कोटा के लिए इलेजिबल होने का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।ट्रेनिंग के दौरान डिसएबल होने के बाद कइयों को जिंदगी भर इलाज का भारी खर्चा उठाना पड़ता है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 1985 के बाद अब तक करीब 500 डिसएबल कैडेट्स हैं। हर साल अलग अलग सैन्य अकेडमी में करीब 10-20 कैडेट्स मेडिकली अनफिट होने की वजह से बाहर हो जाते हैं।

किस राज्य में कब होंगे लोकसभा चुनाव? जानिए!

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किस राज्य में कब होंगे लोकसभा चुनाव! देश के सबसे बड़े ‘चुनावी महाकुंभ’ की तारीखों का ऐलान आज मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव का पहला चरण 19 अप्रैल, दूसरा चरण 26 अप्रैल, तीसरा चरण 7 मई, चौथा चरण 13 मई, पांचवां चरण 20 मई, छठा चरण 25 मई और सातवां चरण 1 जून को होगा। 19 अप्रैल से 1 जून तक 7 चरणों में होंगे लोकसभा चुनाव। वोटों की गिनती 4 जून को होगी। फेज -1 का नोटिफिकेशन 20 मार्च को जारी होगा। नॉमिनेशन दाखिल करने की आखिरी तारीख 27 मार्च होगी। 28 मार्च को नामांकन पत्र की जांच। 30 मार्च को नामांकन वापस लिया जा सकेगा। 19 अप्रैल को वोटिंग होगी। पहले फेज में 102 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी।

दूसरे फेज के चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 28 मार्च को जारी किया जाएगा। 4 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किया जा सके। 5 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 8 अप्रैल तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। 26 अप्रैल को यहां वोटिंग होगी। दूसरे फेज मे 89 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। तीसरे फेज का नोटिफिकेशन 12 अप्रैल को जारी होगा। 19 अप्रैल तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकते हैं। 20 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 22 अप्रैल तक नांमाकन वापस लिए जा सकते हैं। तीसरे फेज में 7 मई को वोटिंग होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। तीसरे चरण में 94 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी।

चौथे फेज का नोटिफिकेशन 18 अप्रौल को जारी होगा। 25 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। 26 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 29 अप्रैल तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। चौथे फेज में 13 मई को वोटिंग होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। चौथे फेज में 96 सीटों पर वोटिंग होगी। पांचवें फेज का नोटिफिकेशन 26 अप्रैल को जारी होगा। 3 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। 4 मई को नामांकन पत्र की जांच होगी. 6 मई तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। 20 मई को वोटिंग होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। पांचवें चरण में 49 सीटों पर वोटिंग होगी।

छठे फेज के लिए 29 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी होगा। 6 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। नामांकन पत्रों की जांच 7 मई को होगा। 9 मई तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। छठे फेज की वोटिंग 25 मई को होगी। छठे चरण में 57 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। सातवें और अंतिम चरण के लिए नोटिफिकेशन 7 मई को जारी किया जाएगा। 14 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। 15 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 17 मई को नामांकन वापस लिया जा सकता है। अंतिम चरण की वोटिंग 1 जून को होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। अंतिम चरण में 57 सीटों पर वोटिंग होगी।

बता दे कि चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बार 543 सीटों के लिए लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होंगे। वोटों की गिनती 4 जून को होगी। 19 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोट डाले जाएंगे। 26 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा। तीसरे चरण के लिए 7 मई को वोट डाले जाएंगे। 13 मई को चौथे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे। पांचवे चरण का मतदान 20 मई को होगा। 25 मई को छठे चरण और 1 जून को सातवें और अंतिम चरण का चुनाव होगा। लोकसभा चुनाव के साथ ही चार राज्यों में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि इससे पहले निर्वाचन आयोग ने कहा कि हम चुनाव कराने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा कि इस बार युवा वोटर अच्छी संख्या में हैं। 18 से 19 साल की 85 लाख महिला वोटर हैं। 19-29 साल के 19.74 करोड़ वोटर हैं। 1.8 करोड़ वोटर पहली बार वोट डालेंगे। इसस बार 85 साल के वोटर घर से ही वोट दे सकेंगे।

इस बार करीब 96.88 करोड़ वोटर 12 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसमें 49 करोड़ 72 लाख पुरुष मतदाता हैं। वहीं, 47.1 करोड़ महिला वोटर हैं। बता दें कि चौथे फेज में 96 सीटों पर वोटिंग होगी। पांचवें फेज का नोटिफिकेशन 26 अप्रैल को जारी होगा। 3 मई तक नामांकन दाखिल किया जा सकता है। 4 मई को नामांकन पत्र की जांच होगी. 6 मई तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। भारत में अमेरिका की तुलना में लगभग चार गुना अधिक वोटर हैं। देश में कुल वोटरों की संख्या यूरोप के देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। इस बार वोटर लिस्ट में 2.3 करोड़ नए मतदाता जुड़े हैं। इस बार लोकसभा चुनाव कराने में 55 लाख ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा।

झारखंड बीजेपी नेता जय प्रकाश भाई पटेल बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गये.

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लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में बीजेपी के घर में सेंध! पदमा के विधायक कांग्रेस में शामिल इस बार लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने झारखंड में बीजेपी का घर तोड़ दिया. मांडू क्षेत्र के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का झंडा थाम लिया. लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में कांग्रेस ने बीजेपी के घर में तोड़फोड़ की. मांडू क्षेत्र के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का झंडा थाम लिया. पार्टी में जयप्रकाश का स्वागत करने के लिए झारखंड पार्टी के निवर्तमान नेता गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, चंपई सोरेन कैबिनेट के सदस्य आलमगीर आलम और अनुभवी नेता पवन खेड़ा मौजूद थे।

जयप्रकाश के पिता, दिवंगत टेकलाल महतो, झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक सदस्य थे। वह 2004 से 2009 तक गिरिडी सांसद रहे। बाद में वे मांडू के विधायक भी बने. 2014 में, जयप्रकाश अपने पिता द्वारा खाली की गई सीट पर झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुने गए। बाद में वह बीजेपी में चले गये. मांडू 2019 में केंद्र से दोबारा निर्वाचित हुए। बुधवार को पार्टी बदलने का कारण बताते हुए जयप्रकाश ने कहा कि उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में अपने पिता के आदर्शों की कोई झलक नहीं दिखती. इसलिए उन्होंने पद्म शिविर छोड़कर झारखंड में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ को मजबूत करने का फैसला किया.

नई पार्टी में शामिल होने के बाद जयप्रकाश ने कहा, ”मैं किसी पद के लिए कांग्रेस में शामिल नहीं हुआ। मैं अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए नई टीम में आया हूं।” कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, वह हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. कांग्रेस के साथ आने से विपक्षी दल ‘इंडिया’ झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटें जीतेगी. झारखंड के 14 केंद्रों पर 13 मई से 1 जून तक चार चरणों में मतदान होगा। संयोगवश, झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन की बहू और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हो गईं। मंगलवार को। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी, सीता शिबू के सबसे बड़े बेटे, दुमका जिले के जामा निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे।

लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में कांग्रेस ने बीजेपी के घर में तोड़फोड़ की. मांडू क्षेत्र के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का झंडा थाम लिया. पार्टी में जयप्रकाश का स्वागत करने के लिए झारखंड पार्टी के निवर्तमान नेता गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, चंपई सोरेन कैबिनेट के सदस्य आलमगीर आलम और अनुभवी नेता पवन खेड़ा मौजूद थे। 2014 में, जयप्रकाश अपने पिता द्वारा खाली की गई सीट पर झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुने गए। बाद में वह बीजेपी में चले गये. मांडू 2019 में केंद्र से दोबारा निर्वाचित हुए। बुधवार को पार्टी बदलने का कारण बताते हुए जयप्रकाश ने कहा कि उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में अपने पिता के आदर्शों की कोई झलक नहीं दिखती. इसलिए उन्होंने पद्म शिविर छोड़कर झारखंड में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ को मजबूत करने का फैसला किया.

जयप्रकाश के पिता, दिवंगत टेकलाल महतो, झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक सदस्य थे। वह 2004 से 2009 तक गिरिडी सांसद रहे। बाद में वे मांडू के विधायक भी बने. 2014 में, जयप्रकाश अपने पिता द्वारा खाली की गई सीट पर झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुने गए। बाद में वह बीजेपी में चले गये. मांडू 2019 में केंद्र से दोबारा निर्वाचित हुए। बुधवार को पार्टी बदलने का कारण बताते हुए जयप्रकाश ने कहा कि उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में अपने पिता के आदर्शों की कोई झलक नहीं दिखती. इसलिए उन्होंने पद्म शिविर छोड़कर झारखंड में विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ को मजबूत करने का फैसला किया.

नई पार्टी में शामिल होने के बाद जयप्रकाश ने कहा, ”मैं किसी पद के लिए कांग्रेस में शामिल नहीं हुआ। मैं अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए नई टीम में आया हूं।” कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, वह हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. कांग्रेस के साथ आने से विपक्षी दल ‘इंडिया’ झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटें जीतेगी. झारखंड के 14 केंद्रों पर 13 मई से 1 जून तक चार चरणों में मतदान होगा। संयोगवश, झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन की बहू और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हो गईं। मंगलवार को। स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी, सीता शिबू के सबसे बड़े बेटे, दुमका जिले के जामा निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे।

लखनऊ सुपर जाइंट के कप्तान केएल राहुल ने उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए.

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आईपीएल से पहले, लखनऊ के नेता राहुल मंदिर में. टीम में शामिल हुए लोकेश राहुल महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करने गए. नेशनल क्रिकेट अकादमी ने उन्हें स्वस्थ घोषित कर दिया है. हालाँकि, आईपीएल खेलने के लिए कुछ शर्तें हैं। आईपीएल शुक्रवार से शुरू होगा. लखनऊ सुपर जाइंट्स के कप्तान बुधवार को टीम से जुड़े। इससे पहले लोकेश राहुल महाकालेश्वर मंदिर में पूजा करने पहुंचे. नेशनल क्रिकेट अकादमी ने उन्हें स्वस्थ घोषित कर दिया है. हालाँकि, आईपीएल खेलने के लिए कुछ शर्तें हैं।

लखनऊ की टीम ने अभ्यास शुरू कर दिया है. कोच जस्टिन लैंगर की ट्रेनिंग चल रही है. लखनऊ का पहला मैच जयपुर में. वे राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलेंगे. लखनऊ टीम में शामिल होने से पहले राहुल ने मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में पूजा की. वह वहीं से टीम में शामिल हुए. आखिरी बार उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए देखा गया था. भारत के लिए टेस्ट खेला. वहां उनकी मांसपेशियों में चोट लग गई.

राहुल ने आईपीएल में 118 मैचों में 4163 रन बनाए। उन्होंने चार बार आईपीएल में 600 से ज्यादा रन बनाए हैं. उनके नाम चार शतक भी हैं. राहुल ने पहली बार 2013 में आईपीएल खेला था. उनके नाम अब तक 33 अर्धशतक हैं. शतक लगाने वालों की सूची में भारतीयों में राहुल विराट कोहली के बाद हैं। राहुल को आईपीएल में खेलने की मंजूरी मिल गई है, लेकिन बीसीसीआई ने उन्हें फिलहाल विकेटकीपर के रूप में खेलने से प्रतिबंधित कर दिया है। बोर्ड के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी को बताया, ‘एनसीए ने राहुल को छूट दे दी है। 20 को टीम से जुड़ेंगे लखनऊ। इसके बाद वह पहला मैच खेलने के लिए जयपुर के लिए उड़ान भरेंगे। ऐसा लगता है जैसे शुरू में उसे आगे की ओर झुकने से मना किया गया था। कुछ मैचों के बाद वह कीपिंग करने में सक्षम होंगे।’ वह पहले कुछ मैचों में केवल बल्लेबाज के रूप में खेलेंगे।”

आईपीएल शुरू होने से पहले लखनऊ सुपर जाइंट्स को बड़ी खुशखबरी मिली है. उनके कप्तान केएल राहुल फिट थे. राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) ने राहुल को फिट घोषित कर दिया। लेकिन यह भी कहा गया कि राहुल पहले कुछ मैचों में विकेटकीपिंग नहीं कर पाएंगे.

राहुल को इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में क्वाड्रिसेप्स चोट लगी थी। उन्होंने बाकी टेस्ट नहीं खेले. तीसरे मैच में भाग लेना था लेकिन बाहर हो गये। राहुल ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एनसीए में अपने समय के दौरान बल्लेबाजी, कीपिंग और फील्डिंग के वीडियो पोस्ट किए थे।

बोर्ड के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी को बताया, ‘एनसीए ने राहुल को छूट दे दी है। 20 को टीम से जुड़ेंगे लखनऊ। इसके बाद वह पहला मैच खेलने के लिए जयपुर के लिए उड़ान भरेंगे। ऐसा लगता है जैसे शुरू में उसे आगे की ओर झुकने से मना किया गया था। कुछ मैचों के बाद वह कीपिंग करने में सक्षम होंगे।’ वह शुरुआती कुछ मैचों में सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खेलेंगे.” लेकिन अगर राहुल नहीं टिक सके तो लखनऊ को चिंता नहीं है. क्विंटन डी कॉक या वेस्टइंडीज के निकोलस पूरन को रखा जा सकता है. हालांकि, अगर राहुल को टी20 वर्ल्ड कप टीम में मौका पाना है तो उन्हें आईपीएल में अच्छा खेलना होगा.

बोर्ड सूत्र ने कहा, ”पिछले प्रदर्शन के कारण विश्व कप के पहले तीन बल्लेबाजों में राहुल के नाम पर विचार नहीं किया जा रहा है. आईपीएल में अच्छा खेलने पर पांचवें या छठे नंबर पर विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर खेल सकते हैं. अगर सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खेल रहे हैं तो रिंकू सिंह, ऋषभ पंत जैसे विकल्प मौजूद हैं.” आईपीएल से पहले लखनऊ सुपर जाइंट्स कैंप में एक और विदेशी क्रिकेटर शामिल हुआ. पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एडम वोजेस को आईपीएल की लखनऊ फ्रेंचाइजी ने सलाहकार नियुक्त किया है। उन्हें टीम के मुख्य कोच जस्टिन लैंगर की सलाह पर लाया गया था।

वोजेस ने 35 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया. पूर्व क्रिकेटर के पास ऑस्ट्रेलिया के लिए 20 टेस्ट, 31 वनडे और 7 टी20 मैच खेलने का अनुभव है। उनके पास आईपीएल खेलने का भी अनुभव है. उन्होंने 2010 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेला। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मुख्य रूप से बल्लेबाजी सलाहकार के रूप में लखनऊ शिविर में शामिल हुए हैं। कुछ दिन पहले दक्षिण अफ्रीका के पूर्व ऑलराउंडर लांस क्लूजनर सहायक कोच के रूप में लखनऊ फ्रेंचाइजी से जुड़े थे। लखनऊ सुपर जायंट्स के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर वोजेस के सलाहकार के रूप में शामिल होने की घोषणा की।

टीम के मुख्य कोच लैंगर ने कहा, “हमने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के लिए लंबे समय तक एक साथ खेला है।” वोग्स के पास बिग बैश लीग में कोच के रूप में काम करने का अनुभव है। एक कोच के रूप में उन्हें काफी सफलता मिली है। जब मैं वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया को कोचिंग दे रहा था तब वोग्स कप्तान थे। मेरे बाद उन्हें नेतृत्व सौंपा गया. उन्होंने पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके समय में बहुत कुछ बदल गया है. वोज़ मिलने से लखनऊ फ्रेंचाइजी को फायदा होगा। वोजेस एक अद्भुत व्यक्ति और महान कोच हैं। मैं उनके साथ दोबारा काम करने का मौका पाकर उत्साहित हूं।”