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क्या साइबर ठगी से देश में हो रहा है स्पैम?

वर्तमान में साइबर ठगी से देश में स्पैम हो रहा है! भारत में प्रवर्तन निदेशालय ने एक आइरिश महिला की ओर से दी गई शिकायत पर जांच शुरू कर दी। इस शिकायत के आधार पर बिहार और पश्चिम बंगाल में कई तलाशी अभियान चलाए गए, जिसमें साइबर अपराधियों के एक गिरोह का पता चला। ये अपराधी, जिनमें ज्यादातर स्कूल ड्रॉपआउट लड़के हैं जो फर्राटेदार ब्रिटिश अंग्रेजी बोलते हैं, यूके और आयरलैंड में लोगों को ठग रहे थे। उनके काम करने का तरीका यह है कि वे लोगों के फोन और कंप्यूटर को दूर से नियंत्रित करते हैं और उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं।पटना, खड़गपुर और कोलकाता में तलाशी के दौरान, अपराधियों द्वारा संचालित एक 70 सीटों वाले कॉल सेंटर का पता चला। इस कॉल सेंटर ने कम से कम 40 लोगों को ठगा था। जांच तब शुरू हुई जब आयरिश महिला को आयरलैंड में ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाता Eircom Telecom की ‘स्टेफ़नी’ नाम से किसी व्यक्ति का फोन आया। आरोपी, जिसकी बाद में नीतेश कुमार के रूप में पहचान हुई पटना के एक गेस्ट हाउस से काम कर रहा था। उसे अपने कमरे से भागने से पहले ही पकड़ लिया गया।

कोलकाता और खड़गपुर में आगे की तलाशी में पांच लैपटॉप, 16 मोबाइल हैंडसेट, 56 क्रेडिट/डेबिट कार्ड और 69 बैंक खाते जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त, लगभग 2 करोड़ रुपये की नकदी भी मिली। ईडी ने बाद में आरोपी के बैंक खातों से 2.8 करोड़ रुपये जब्त किए। यह भी पता चला कि गिरोह का सरगना सागर यादव खड़गपुर में दो अवैध कॉल सेंटर चला रहा था। आरोपी पीड़ितों के बैंक खातों को उनके फोन/कंप्यूटर पर दूर से नियंत्रित करते थे और फिर पैसे को यूके और आयरलैंड में अपने विदेशी सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। ये सहयोगी तब पैसे निकालते थे और इसे वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत में ट्रांसफर करते थे। एक बार जब पैसा भारतीय बैंक खातों में पहुंच जाता था तब उन्हें नकद में निकाल लिया जाता था।

यह मामला पहली बार है जब विदेशों में दर्ज मामले में केंद्रीय एजेंसी द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह अपराध दूसरे देश में किया गया था और बाद में आय को भारत में ट्रांसफर कर दिया गया था। ईडी ने अक्टूबर 2023 में एक ईसीआईआर दर्ज किया, जो पुलिस प्राथमिकी के समकक्ष है, जब इसे सीबीआई के माध्यम से आयरिश अधिकारियों द्वारा भारत भेजा गया था। यही नहीं लोन सेटलमेंट के नाम पर एक महिला से साइबर ठगी के आरोप में रोहिणी साइबर पुलिस ने नोएडा, गाजियाबाद से तीन ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी 23 वर्षीय सुमित कुमार, 24 वर्षीय अंकित कुमार और नोएडा निवासी 23 वर्षीय अंकित कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात के लिए इस्तेमाल मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक पासबुक जब्त की है।

पुलिस अफसर के मुताबिक, रोहिणी सेक्टर 4 निवासी अनीता ने 62,000 की साइबर ठगी के बारे में शिकायत दी थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके मोबाइल पर एक दिन मेसेज आया। दावा किया कि वह लोन की ईएमआई का भुगतान करने में विफल रही हैं और इसके लिए कंपनी की तरफ से टीम घर पर विजिट करेगी। पीड़िता नहीं चाहती थी कि कोई उनके घर आए। इसलिए, अमाउंट का भुगतान ऑनलाइन करने का अनुरोध किया। इस पर कथित आरोपी ने एकमुश्त भुगतान करके अपना लोन 62000 चुकाने को कहा। उसने बैंक डिटेल भी शेयर की। पीड़िता ने यह रकम ट्रांसफर कर दी। पीड़िता ने जेस्ट मनी की हेल्पलाइन से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है। जिसके बाद पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ। मामले में रोहिणी साइबर सेल ने मामला दर्ज किया। जांच शुरू की। पुलिस ने उन खातों के मनी ट्रेल की डिटेल खंगाली जिसमें पैसा भेजा गया था। पता चला कि यह पैसा गाजियाबाद निवासी सुमित कुमार नाम के अकाउंट में ट्रांसफर हुआ था। टीम ने केस की तफ्तीश करते हुए गाजियाबाद से सुमित और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि अंकित शर्मा एक कॉल सेंटर में काम करता था और उसके पास ग्राहकों के बारे में जानकारी थी। वह उनसे वॉट्सऐप पर चैट करता था और उन्हें उनकी बकाया लोन के एकमुश्त निपटान का विकल्प देता था। इसके बाद उन्हें समझाने के बाद दिए गए बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता था। उसका सहयोगी सुमित कुमार भी पीड़ितों से अपने बैंक खाते में पैसे लेता था। मामले में अब तक चार अन्य पीड़ितों की भी पहचान हो चुकी है। पुलिस पता लगा रही है कि और कितनों को आरोपियों ने इसी तरह ठगा है।

आखिर कैसा रहा दिल्ली का कथालोक उत्सव?

हाल ही में दिल्ली में एक कथालोक उत्सव हुआ था! हम सब का बचपन दादी-नानी की कहानियां सुनकर बीता है। लेकिन कहानी सुनाने की विधा सिर्फ बचपन तक ही सीमित नहीं है। यह कला की एक अलग विधा है, जो किस्सागोई के नाम से दुनियाभर में जानी जाती है। किस्सागोई का एक ऐसा ही फलक गत शनिवार- रविवार को दिल्ली में नजर आया, जहां किस्सागोई पर आधारित दो दिन का उत्सव ‘कथालोक’ का आयोजन हुआ। उत्सव में नामचीन कथाकारों, साहित्य प्रेमियों और दास्तानगोई कहानी सुनाने की विधा की नई प्रतिभाओं के संगम का मंच बना। इस उत्सव का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग और समन्वय से ‘समय यान’ की ओर से किया गया। इस मौके पर अभिनेता और कलाकार आदित्य ओम ने कहानियों की परिवर्तनकारी भूमिका पर व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उत्सव में अपने खास फन के लिए जानी जाने वाली फौजिया दास्तानगो की उर्दू प्रस्तुति ‘दास्तान-ए-राम’, दानिश हुसैन की प्रस्तुति ‘तिलिस्मी दास्तानें’ और मनु सिकंदर ढींगरा की ओर से प्रस्तुत पंजाब की कालजयी प्रेम कथा ‘किस्सा हीर वारिस शाह’ की पेशकश हुई।

आयोजन के दौरान एक ओपन माइक सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें दर्शकों को अपनी कहानियां सुनाने का मौका दिया गया। इस दौरान एक प्रतियोगिता का आयोजन 75 कॉलेज स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। जिसमें तीन पुरस्कार भी दिए गए। उत्सव के दौरान एक ओपन सेशन का का आयोजन भी हुआ, जिसमें दर्शकों को अपनी कहानियां सुनाने का मौका मिला। इसमें बतौर विशिष्ट अतिथि बीजेपी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भाग लिया, जहां उन्होंने उन्होंने भारतीय राजनीति के कुछ दिलचस्प किस्से सुनाए। वहीं रेडियो विधा से जुड़े जमशेद सिद्दीकी ने वैदिककल से लेकर आज तक की भारतीय संगीत यात्रा को एक कहानी रूप में पिरोकर पेश किया। जिसे संतूर वादक और संगीतकार पं अभय सोपोरी और उनकी टीम ने संगीत में ढाला। यही नहीं आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के खजुराहो में 50वां डांस फेस्टिवल की शुरुआत 20 फरवरी से हो रही है। यह 26 फरवरी तक चलेगा। इस बार खजुराहो में समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ-साथ रोमांच भी भरपुर मिलेगा। संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत के उत्सव की शुरुआत खजुराहो नृत्य महोत्सव के रूप में होने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बुंदेलो की धरती पर देशभर से पधारने वाले प्रतिष्ठित लोक नर्तक अपनी घुंघरुओं की झंकार और कदमताल से छटा बिखेरेंगे। इसमें अब तक भारत की सभी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों के कलाकार अपनी नृत्यों की प्रस्तुतियां दे चुके हैं। इस वर्ष भी देश के ख्यातिलब्ध प्रतिष्ठित कलाकार शिरकत कर रहे हैं।1975 में शुरू हुआ खजुराहो नृत्य महोत्सव इस वर्ष अपना स्वर्ण जंयती वर्ष मना रहा है। इस उपलब्धि को खास और यादगार बनाने के लिए कथक कुंभ का आयोजन किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि 20 फरवरी को 1500-2000 कलाकार सामूहिक रूप से कथक कुंभ में भाग लेंगे। वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि खजुराहो डांस फेस्टिवल को शुरू करने का उद्देश्य शास्त्रीय नृत्यों का संरक्षण ही नहीं, शास्त्रीय नृत्य कला के जरिए परमोत्कर्ष की अनुभूति कला रसिकों को करवाने और इससे जुड़े सभी कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। विश्व रिकॉर्ड के अलावा महोत्सव में पहली बार लयशाला का आयोजन होगा। इसमें भारतीय नृत्य शैलियों के अपनी विधा के श्रेष्ठ गुरूओं के साथ शिष्यों का संगम और कार्यशालाएं होंगी। शुक्ला ने कहा कि यह देश का अत्यंत ख्यातिलब्ध समारोह है।यही नहीं आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के खजुराहो में 50वां डांस फेस्टिवल की शुरुआत 20 फरवरी से हो रही है। यह 26 फरवरी तक चलेगा। इस बार खजुराहो में समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ-साथ रोमांच भी भरपुर मिलेगा। संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत के उत्सव की शुरुआत खजुराहो नृत्य महोत्सव के रूप में होने जा रहा है। इसमें अब तक भारत की सभी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों के कलाकार अपनी नृत्यों की प्रस्तुतियां दे चुके हैं। इस वर्ष भी देश के ख्यातिलब्ध प्रतिष्ठित कलाकार शिरकत कर रहे हैं।

खजुराहो नृत्य समारोह में अब तक भारत की सभी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों जैसे भरतनाट्यम, ओडीसी, कथक, मोहिनीअटेम, कुचिपुड़ी, कथकली, यक्षगान, मणिपुरी आदि के युवा और वरिष्ठ कलाकार अपनी कला की आभा बिखेर चुके हैं।

क्या पहले से अलग है इस बार का किसान आंदोलन?

इस बार का किसान आंदोलन पहले से बहुत अलग है! 2 साल बाद एक बार फिर किसान सड़कों पर उतरे हैं। किसानों के दिल्ली चलो विरोध मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को अंबाला में शंभू बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। शंभू बॉर्डर के पास उस समय स्थिति बिगड़ गई जब किसानों ने सीमेंट से बने अवरोधक हटाने के लिए ट्रैक्टर इस्तेमाल किए। ये अवरोधक प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए घग्गर नदी पुल पर हरियाणा पुलिस द्वारा बैरिकेड के हिस्से के रूप में रखे गए थे। हरियाणा पुलिस ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों पर पथराव कर रहे हैं। सरकार के साथ सोमवार रात बैठक में जब कोई बात नहीं बनी तब किसान यूनियन ने दिल्ली कूच जारी रखने का ऐलान किया। किसानों का यह विरोध प्रदर्शन 2020-21 के साल भर चले आंदोलन से इस बार कैसे अलग है। 250 से अधिक किसान संगठनों ने पंजाब से विरोध का आह्वान किया है। इनमें से करीब 100 यूनियन का समर्थन हासिल करने वाला किसान मजदूर मोर्चा KMM और अन्य 150 संगठनों का मंच संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक शामिल है। ये किसान कई मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

दिसंबर 2023 के अंत में इन दो संगठनों ने दिल्ली चलो का आह्वान किया था। किसानों का नेतृत्व इस बार दूसरे किसान नेता कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक मूल संयुक्त किसान मोर्चा SKM से जुलाई 2022 में टूटकर बना एक गुट है। इसके समन्वयक जगजीत सिंह डल्लेवाल हैं, जो पंजाब स्थित भारतीय किसान यूनियन BKU सिधुपुर के अध्यक्ष हैं। सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से फसल मूल्य निर्धारण, किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ, 2021 दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन किसानों की जान चली गई उनको मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी, किसानों और मजदूरों को पेंशन!2013 जमीन अधिग्रहण अधिनियम का लागू होना किसानों की लिखित सहमति और 4 गुना मुआवजा, लखीमपुर खीरी कांड के अपराधियों को सजा, WTO से भारत की वापसी, बिजली संशोधन विधेयक 2020 रद्द हो, मिर्च और हल्दी जैसे मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग! नकली बीज, कीटनाशक, उर्वरक बनाने वाली कंपनियों पर सख्त दंड और जुर्माना, योजना के तहत साल में 200 दिन का रोजगार 100 के बजाय, 700 रुपये दैनिक मजदूरी, और योजना को कृषि से जोड़ा जाए। जल, वनों और भूमि पर आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित करें!

बता दे कि सरकार की ओर से क्या कहा जा रहा है कि 6 फरवरी को कृषि मंत्रालय को ईमेल भेजकर किसानों ने अपनी मांगें रखी थीं। 8 फरवरी को सरकार ने 10 किसान नेताओं से चंडीगढ़ में मुलाकात की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। संयुक्त किसान मोर्चा SKM से जुलाई 2022 में टूटकर बना एक गुट है। इसके समन्वयक जगजीत सिंह डल्लेवाल हैं, जो पंजाब स्थित भारतीय किसान यूनियन BKU सिधुपुर के अध्यक्ष हैं। सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से फसल मूल्य निर्धारण, किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ, 2021 दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन किसानों की जान चली गई उनको मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी, किसानों और मजदूरों को पेंशन!पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस बैठक में मध्यस्थता की थी। दूसरी बैठक सोमवार में मुख्यमंत्री मान शामिल नहीं थे। इस बैठक में 26 किसान नेताओं ने 3 मंत्रियों से मुलाकात की पर कोई समझौता नहीं हुआ। सरकार के साथ सोमवार रात बैठक में जब कोई बात नहीं बनी तब किसान यूनियन ने दिल्ली कूच जारी रखने का ऐलान किया। किसानों का यह विरोध प्रदर्शन 2020-21 के साल भर चले आंदोलन से इस बार कैसे अलग है। 250 से अधिक किसान संगठनों ने पंजाब से विरोध का आह्वान किया है। इनमें से करीब 100 यूनियन का समर्थन हासिल करने वाला किसान मजदूर मोर्चा KMM और अन्य 150 संगठनों का मंच संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक शामिल है। ये किसान कई मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने किसानों को समर्थन दिया है। सोमवार बातचीत बेनतीजा रही और बैठक में कोई हल नहीं निकला। इस मीटिंग के बाद किसान नेताओं ने दिल्ली कूच जारी रखने का ऐलान कर दिया। वहीं किसानों को रोकने के लिए हरियाणा ने पंजाब से लगती सीमाओं को सील कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। किसान शंभू बॉर्डर तक पहुंचे हैं जहां उन्हें रोकने की कोशिश हरियाणा पुलिस की ओर से जारी है।

क्या विपक्ष के INDIA गठबंधन को लग चुके हैं बड़े-बड़े झटके?

हाल ही में विपक्ष के INDIA गठबंधन को बड़े-बड़े झटके लग चुके हैं! लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. को लगातार झटके लग रहे। बिखरे हुए विपक्ष को एकजुट करने की सबसे पहले पहल करने वाले नीतीश कुमार के अलग होने के झटके से गठबंधन उबरा भी नहीं था कि आरएलडी के जयंत चौधरी भी विपक्ष के लिए बेगाने हो गए। ये झटके तो पुराने हो गए। पिछले 24 घंटे में ही ऐसे 3 सियासी घटनाक्रम हो चुके हैं जो इशारा करते हैं कि विपक्ष की हालत कितनी खराब है। विपक्ष की सबसे बड़ी नेता और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा के बजाय राज्यसभा से संसद में जाने का फैसला किया है। राजस्थान से पर्चा भरने के अगले दिन गुरुवार को उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र यूपी के रायबरेली की जनता के नाम एक बड़ा ही भावुक खत लिखा। उनके इस फैसले से रायबरेली में कांग्रेस के कार्यकर्ता निश्चित तौर पर निराश होंगे। इसीलिए सोनिया ने खत में उन्हें ये समझाने की कोशिश की कि स्वास्थ्य कारणों से वह लोकसभा चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं। हालांकि, उन्होंने जिस तरह ये कहा कि रायबरेली के बिना उनका परिवार अधूरा है, उससे ये अटकलें जरूर लगने लगी हैं कि अब उनकी जगह पर उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। सोनिया गांधी का रायबरेली से हटना सियासी लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। पूरे राज्य में लोकसभा की एक यही तो सीट थी जो कांग्रेस के खाते में थी। 2019 के चुनाव में यूपी में गांधी परिवार को एक और मजबूत गढ़ अमेठी कांग्रेस के हाथ से छिन चुका है। वहां राहुल गांधी को बीजेपी की स्मृति इरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। यही वजह है कि सोनिया गांधी के राज्यसभा जाने पर बीजेपी कह रही है कि उनको भी रायबरेली में ‘2019 के अमेठी’ दोहराए जाने का डर था यानी हार का डर था। हालांकि, अगर प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से लोकसभा का चुनाव लड़ती हैं तो वहां निराश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश आ सकता है।

गुरुवार को ही एक अन्य घटनाक्रम विपक्षी गठबंधन और खासकर कांग्रेस की चिंता बढ़ाने वाला रहा। नैशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने ये कहकर चौंका दिया कि उनकी पार्टी लोकसभा का चुनाव अकेले लड़ेगी और उन्हें बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए से भी कोई परहेज नहीं है। हालांकि, उनके इस बयान के बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने सफाई दी कि नैशनल कॉन्फ्रेंस विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. का हिस्सा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत अभी चल रही है। नैशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की 6 लोकसभा सीटों में से 3 सीटों पर लड़ना चाहती है। वह चाहती है कि कांग्रेस सिर्फ जम्मू रीजन की सीटों पर लड़े लेकिन ग्रैंड ओल्ड पार्टी जम्मू के साथ-साथ कश्मीर में भी एक सीट या फिर लद्दाख से भी चुनाव लड़ना चाहती है। वैसे भी विपक्षी गठबंधन अबतक कागजों में ही दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी ने कांग्रेस समेत बाकी पार्टियों को एक भी सीट नहीं देने का ऐलान कर रखा है। इसी तरह आम आदमी पार्टी ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर लड़ने का एकतरफा ऐलान कर रखा है। इतना ही नहीं, पार्टी ने दिल्ली की 7 सीटों में से सिर्फ एक सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का ऐलान किया है जो उसे मंजूर नहीं है।

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की अगुआई वाली एनसीपी को ही ‘असली एनसीपी’ करार दिया है। उन्होंने शरद पवार गुट की तरफ से अजीत गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं को खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया। स्पीकर ने अपने फैसले में कहा कि अजीत पवार की पार्टी ही असली एनसीपी है लिहाजा उसके विधायकों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। इससे पहले चुनाव आयोग फैसला कर ही चुका है कि एनसीपी पर अजीत पवार का ही नियंत्रण रहेगा। आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अजीत पवार के दावे को सही पाया है। एनसीपी के संस्थापक शरद पवार को अपनी नई पार्टी के लिए नया नाम ‘एनसीपी शरद चंद्र पवार’ रखा है। एनसीपी की तरह ही महाराष्ट्र में शिवसेना भी दो फाड़ हो चुकी है। स्पीकर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुआई वाले धड़े को ही असली शिवसेना माना है। उद्धव ठाकरे की अगुआई वाले धड़े का नाम अब शिवसेना उद्धव बाल ठाकरे है।

बीजेपी के लिए माधव भंडारी के बेटे ने क्या कहा?

हाल ही में माधव भंडारी के बेटे ने बीजेपी के लिए एक बयान दिया है! राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था। महाराष्ट्र की छह सीटों के लिए सात नामांकन दाखिल किए गए। बीजेपी की ओर से अशोक चव्हाण, अजित गोपछड़े, मेधा कुलकर्णी को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से प्रफुल्ल पटेल, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से मिलिंद देवड़ा मैदान में उतरे हैं। वहीं कांग्रेस ने चंद्रकांत हंडोरे को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी की ओर से कई नामों पर चर्चा हुई। इनमें विनोद तावड़े, पंकजा मुंडे, माधव भंडारी, हर्षवर्द्धन पाटिल और अन्य शामिल हैं। इस बार भी माधव भंडारी के नाम पर चर्चा हुई लेकिन उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की गई। इस मुद्दे को लेकर माधव भंडारी के बेटे चिन्मय भंडारी ने एक्स प्लेटफॉर्म पर ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने पार्टी में अपने पिता के योगदान को पेश किया और कहा कि उनके नाम पर 12 बार चर्चा हुई लेकिन उन्हें नामांकन नहीं मिला। चिन्मय भंडारी ने पोस्ट में साफ किया है कि यह व्यक्तिगत है। माधव भंडारी 1975 में जनसंघ जनता पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद 1980 में बीजेपी का गठन हुआ। अब उनकी उम्र लगभग 50 साल बताई जा रही है। इन 50 सालों के दौरान माधव भंडारी ने महाराष्ट्र के अलग-अलग संगठनों को खड़ा करने का काम किया। हजारों लोगों, सैकड़ों गांवों की मदद की।

चिन्मय ने बताया कि माधव भंडारी ने सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ मोर्चा संभाला। आम लोगों के मुद्दों को उठाया। 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उन्होंने चुनौतियों का सामना करने और उन्हें सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। चिन्मय भंडारी ने कहा है कि उन्होंने राज्य के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और कई किताबें लिखीं। हालांकि इस पूरे समय में वह लाइमलाइट से दूर रहे।

सिंधुदुर्ग में एक घर के लिए बिजली कनेक्शन के मामले में चिन्मय भंडारी का कहना है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया है। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मैं आपको इसका एक उदाहरण बताता हूं। चिन्मय ने बताया कि माधव भंडारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने उस पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं किया, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर काम किया। बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उन्होंने अपने जीवन साथी को खो दिया। इसके बाद भी उन्होंने पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मैंने कुछ लोगों को, जिन्हें पार्टी ने मंत्री और सांसद बनाया, यह कहते हुए देखा है कि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है। वह 90 के दशक के अंत में सिंधुदुर्ग जिला परिषद के उपाध्यक्ष थे, तो हमारा घर शहर के बाहर था। वहां से बिजली ग्रिड एक किलोमीटर दूर था। इसलिए उन्होंने 18 महीने तक इंतजार करना चुना। हम उस अवधि में बिना बिजली के रहे। चिन्मय ने कहा कि यह हाल तब का है जब वह सड़कें बना रहे थे और कई अन्य गांवों में बिजली पहुंचा रहे थे। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मेरे जीवन में 12 बार विधानसभा या राज्यसभा चुनाव के दौरान पिता का नाम चर्चा में आया लेकिन उन्हें नामांकन नहीं मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी नेतृत्व इस पर सवाल नहीं पूछना चाहता।

चिन्मय ने बताया कि माधव भंडारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उन्होंने चुनौतियों का सामना करने और उन्हें सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। चिन्मय भंडारी ने कहा है कि उन्होंने राज्य के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और कई किताबें लिखीं। हालांकि इस पूरे समय में वह लाइमलाइट से दूर रहे।महीने तक इंतजार करना चुना। हम उस अवधि में बिना बिजली के रहे। चिन्मय ने कहा कि यह हाल तब का है जब वह सड़कें बना रहे थे और कई अन्य गांवों में बिजली पहुंचा रहे थे। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मेरे जीवन में 12 बार विधानसभा या राज्यसभा चुनाव के दौरान पिता का नाम चर्चा में आया लेकिन उन्हें नामांकन नहीं मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी नेतृत्व इस पर सवाल नहीं पूछना चाहता।उन्होंने उस पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं किया, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर काम किया। बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उन्होंने अपने जीवन साथी को खो दिया। इसके बाद भी उन्होंने पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मैंने कुछ लोगों को, जिन्हें पार्टी ने मंत्री और सांसद बनाया, यह कहते हुए देखा है कि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है।

ऑपरेशन लोटस के बारे में क्या बोले सीएम अरविंद केजरीवाल?

सीएम अरविंद केजरीवाल ने ऑपरेशन लोटस के बारे में भी बड़े बयान दिए हैं! दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘अन्य प्रदेशों में जैसे देखा जा रहा है कि पार्टियां गिराई जा रही हैं, AAP के सभी नेताओं को इन्होंने भाजपा गिरफ्तार कर लिया है, इन्हें भाजपा पता है कि ये लोग दिल्ली में चुनाव जीत नहीं सकते हैं, जनता को हम पर विश्वास है और इनका प्रयास सफल नहीं रहा। जनता को दिखाने के लिए कि हमारा एक भी विधायक नहीं टूटा, मैं विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं।’ प्रस्ताव पेश करने के बाद सदन की कार्यवाही कल शनिवार तक के लिए स्थगित की गई। सदन की कार्यवाही कल होगी और विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में कहा, ‘मेरे पास दो MLA आए और उन्होंने बताया कि BJP ने उन्हें कहा है कि आपके मुख्यमंत्री को हम कुछ दिन में गिरफ्तार कर लेंगे, हमने 21 विधायकों से बात कर ली है उन्होंने 25-25 Crore का ऑफर दिया है और कहा है कि उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव भी लड़वा देंगे।’ केजरीवाल ने कहा, ‘इन्होंने कई बार Operation Lotus की कोशिश की और इस बार भी हमारे सभी विधायकों ने मना कर दिया है।’ केजरीवाल ने कहा, ‘ये तथाकथित शराब घोटाला कोई घोटाला नहीं। मकसद केवल येन,केन, प्रकारेन दिल्ली सरकार गिराना है। घोटाले की खबरें बनाकर उसकी आड़ में सारे AAP के नेता गिरफ्तार कर लिए। लेकिन ये भी प्रयास इनका सफल नहीं रहा। हमारा एक भी MLA नहीं टूटा, हमारे सारे के सारे MLA आज भी हमारे साथ हैं।’

इससे पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर कहा, ‘विधानसभा में आज मैं विश्वास मत रखूंगा।’ हालांकि केजरीवाल सरकार के खिलाफ विपक्ष ने कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं रखा है। अचानक केजरीवाल के इस पोस्ट से सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। दरअसल बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश का आरोप लगा चुके अरविंद केजरीवाल ने यह दांव ऐसे समय पर चला है जब दिल्ली पुलिस उनसे सबूत मांग रही है। ऐसी चर्चा हैं कि केजरीवाल ने AAP के विधायकों की एकजुटता दिखाने के लिए यह फैसला लिया है। इससे पहले आज उपराज्यपाल के अभिभाषण में बाधा डालने को लेकर बीजेपी के 7 विधायकों को दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। बता दें कि दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र मार्च के पहले सप्ताह तक बढ़ाया जा चुका है।

उपराज्यपाल के अभिभाषण में बाधा डालने को लेकर बीजेपी के सात विधायकों को शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। बीजेपी के विधायकों ने गुरुवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के दौरान कई बार व्यवधान डाला था क्योंकि वे अरविंद केजरीवाल सरकार को निशाना बनाना चाहते थे। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष राम निवास गोयल ने व्यवधान का मामला विशेषाधिकार समिति को भी भेज दिया। आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडे ने इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग को लेकर सदन में प्रस्ताव रखा, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया।

पांडे ने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने गुरुवार को योजनाबद्ध तरीके से उपराज्यपाल के अभिभाषण को बाधित किया, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची। उन्होंने कहा, ‘यह अभूतपूर्व और दुर्भाग्यपूर्ण था।’ उन्होंने नियम पुस्तिका पढ़ते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों के आचरण से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। विधानसभाध्यक्ष गोयल ने पांडे के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की बात कही। समिति की रिपोर्ट आने तक नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी को छोड़कर बीजेपी के सात सदस्यों को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद गोयल ने सात विधायकों मोहन सिंह बिष्ट, अजय महावर, ओपी शर्मा, अभय वर्मा, अनिल वाजपेई, जीतेंद्र महाजन और विजेंद्र गुप्ता को सदन के कक्ष से बाहर जाने के लिए कहा। नेता प्रतिपक्ष बिधूड़ी विरोध जताते हुए सदन से बाहर चले गए। गोयल ने गुरुवार को बजट सत्र के पहले दिन उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के दौरान बार-बार बाधा पहुंचाने के लिए बीजेपी विधायकों को मार्शल के माध्यम से सदन से बाहर भेज दिया था।

विधानसभा के अधिकारियों ने बताया था कि सक्सेना ने जब अपना अभिभाषण शुरू किया और शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया तो बीजेपी विधायक व पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों के वित्तपोषण का मुद्दा उठाते हुए उन्हें रोक दिया। बीजेपी के अन्य विधायकों ने अभिभाषण के दौरान पानी की कमी, आयुष्मान भारत योजना को लागू न करने, अस्पतालों की खराब स्थिति और बिजली दरों को लेकर अभिभाषण में बाधा पहुंचाई।

सीएम केजरीवाल ने सरकार के लिए क्या बोला?

हाल ही में सीएम केजरीवाल ने सरकार के लिए बड़े-बड़े बयान दे दिए हैं! दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के विधायकों को खरीदने का प्रयास किया है। अब उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया। सीएम केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को विश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान उन्होंने सदन में कहा कि हमें पता चला कि हमारे विधायकों को बीजेपी ने संपर्क किया है। यह कई ऑपरेशन लोटस कर चुके हैं। हालांकि, हमारी जानकारी के हिसाब से पार्टी के सभी 21 विधायकों ने उन्हें मना कर दिया। हमारा एक भी विधायक नहीं टूटा। इसी के साथ मैं विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं। दिल्ली विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखते हुए सीएम केजरीवाल ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले मेरे पास आम आदमी पार्टी के दो विधायक आए। दोनों ही विधायक अलग-अलग दिए आए। दोनों ने एक ही बात कही कि ये बीजेपी वाले आए थे हमारे पास और उन्होंने हमें कहा कि देखो थोड़े दिन बाद तुम्हारे मुख्यमंत्री को हम गिरफ्तार कर लेंगे। इसके बाद हमने 21 विधायकों से संपर्क किया है, वो मान गए पार्टी छोड़ने के लिए औरों से भी संपर्क कर रहे हैं। 25 करोड़ रुपये देंगे। तुम भी आ जाओ पार्टी में अपनी टिकट से चुनाव लड़वा देंगे। और भी कुछ चाहिए हो तो बता दो। दोनों विधायकों ने बताया कि हमने तो उन्हें मना कर दिया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने फिर एक-एक एमएलए से अलग-अलग संपर्क किया। फोन के जरिए बात की तो पता चला 21 तो नहीं नहीं पर सात विधायकों से बीजेपी वालों ने संपर्क किया था। इतने सालों में इन्होंने कई ऑपरेशन लोटस कर चुके थे। एक और ऑपरेशन लोटस करने की प्लानिंग थी लेकिन हमारी जानकारी के हिसाब से सभी 21 विधायकों ने उन्हें मना कर दिया। अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में आगे कहा कि जाहिर तौर पर जो तथाकथित यह शराब घोटाला कोई घोटाला नहीं है। इन्होंने कोई जांच नहीं करनी। अन्य प्रदेशों में हम देख रहे हैं ये पार्टियां तोड़ रहे हैं, सरकार गिरा रहे, केवल झूठे-झूठे केस करके इनका मकसद केवल येन-केन प्रकारेण दिल्ली की सरकार गिराना है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर अटैक करते हुए कहा कि घोटाले की खबरें बनाकर उसकी आड़ में AAP नेताओं गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इनका प्रयास सफल नहीं रहा। हमारा एक भी MLA नहीं टूटा, हमारे सारे के सारे MLA आज भी हमारे साथ हैं। बीजेपी को ये पता है कि दिल्ली में चुनाव तो जीत नहीं सकते। पूरी जिंदगी में भी ये दिल्ली में चुनाव नहीं जीत सकते। केजरीवाल ने आगे कहा कि अब चुनाव नहीं जीत सकते तो किसी भी तरह से सरकार गिरा के अपनी सरकार बना लो यहां पर। लेकिन ऊपर वाले की दया है हम पर, जनता का विश्वास है कि प्रयास इनका सफल नहीं रहा। ये देखने के लिए और जनता को दिखाने के लिए कि हमारा एक भी एमएलए नहीं टूटा।

सारे विधायक हमारे साथ हैं, इसी के साथ उन्होंने प्रस्ताव पेश किया ये सदन मंत्रीपरिषद में विश्वास व्यक्त करता है।दोनों ने एक ही बात कही कि ये बीजेपी वाले आए थे हमारे पास और उन्होंने हमें कहा कि देखो थोड़े दिन बाद तुम्हारे मुख्यमंत्री को हम गिरफ्तार कर लेंगे। इसके बाद हमने 21 विधायकों से संपर्क किया है, वो मान गए पार्टी छोड़ने के लिए औरों से भी संपर्क कर रहे हैं। 25 करोड़ रुपये देंगे। तुम भी आ जाओ पार्टी में अपनी टिकट से चुनाव लड़वा देंगे। और भी कुछ चाहिए हो तो बता दो। बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए 10 अप्रैल, 2023 का दिन खुशियां लेकर आया।इस दिन उनका पार्टी को बड़ी सफलता मिली। चुनाव आयोग ने आप को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दे दी। साल 2022 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप को गुजरात विधानसभा चुनावों में पांच विधायकों के साथ एक बड़ा वोट शेयर मिला था।गुजरात में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर करीब 12 फीसदी मिला। इससे पहले AAP पंजाब, गोवा और दिल्ली में खुद को एक राज्य पार्टी के रूप में स्थापित कर चुकी थी। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलते ही केजरीवाल ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। दोनों विधायकों ने बताया कि हमने तो उन्हें मना कर दिया।दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के विश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई। अब विधानसभा की कार्यवाही शनिवार को होगी और विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

क्या बीजेपी को समाप्त करना चाहती है आम आदमी पार्टी?

आम आदमी पार्टी अब बीजेपी को समाप्त करना चाहती है! लोकसभा चुनाव की हलचल के बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने फुल कॉन्फिडेंस के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का सफाया करने का दावा ठोका है। केजरीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर केजरीवाल किस आधार पर बीजेपी को इतनी बड़ी चुनौती दे रहे हैं। केजरीवाल ने यह चुनौती किसी चुनावी सभा से नहीं बल्कि दिल्ली विधानसभा से दी है। दरअसल दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के दौरान केजरीवाल की ओर से लाया गया विश्वास प्रस्ताव शनिवार को ध्वनिमत से पारित हो गया। इस दौरान सदन में आम आदमी पार्टी के 62 में से 54 विधायक मौजूद थे। केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी के लिए आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी चुनौती है। अगर बीजेपी 2024 का चुनाव जीत जाती है तो 2029 में इस देश को BJP से मुक्ति AAP ही दिलाएगी। केजरीवाल के इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी के चुनावी रिपोर्ट कार्ड को लेकर भी चर्चा तेज है। आइए जानते हैं केजरीवाल के इस कॉन्फिडेंस की वजह क्या हैं। साल 2022 में पंजाब फतह करने के बाद आम आदमी पार्टी का जोश काफी हाई है। दरअसल पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटों पर कब्जा करके ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इससे पहले ऐसी ही जीत 1997 में अकाली दल और बीजेपी की गठबंधन सरकार ने मिलकर हासिल की थी। यह 56 साल में किसी एक पार्टी की सबसे बड़ी जीत थी। चुनावों में AAP ने जहां तीन-चौथाई सीटें हासिल कीं। वहीं कांग्रेस ने 18, शिरोमणि अकाली दल ने 3, बीजेपी ने 2 और बसपा ने 1 सीट जीतीं। आम आदमी पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में भी पंजाब को लेकर काफी उत्साहित है। यही वजह है कि AAP पंजाब में इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही है। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने पंजाब में लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है। भगवंत मान ने कहा कि वह पंजाब की 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे। वह किसी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। पंजाब में आप 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। मान ने कहा कि AAP पंजाब में 13-0 से जीतेगी।

लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली विधानसभा से केजरीवाल ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया। दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से लाया गया विश्वास प्रस्ताव शनिवार को ध्वनिमत से पारित हो गया। विश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में आम आदमी पार्टी (AAP) के 62 में से 54 विधायक मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने सदन में विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि बीजेपी के लिए आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी चुनौती है और यही वजह है कि उस पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। उन्होंने पूर्व में आरोप लगाया था कि बीजेपी ने उनकी सरकार को गिराने के लिए आप विधायकों को तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भले ही बीजेपी इस साल का लोकसभा चुनाव जीत जाए लेकिन AAP 2029 के लोकसभा चुनाव में देश को बीजेपी से मुक्ति दिलाएगी। केजरीवाल इससे पहले भी दिल्ली विधानसभा से विश्वास मत पारित करवाकर विरोधियों को अपना दमखम दिखा चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केजरीवाल को दिल्ली की जनता पर पूरा भरोसा है। भरोसे की सबसे बड़ी वजह फ्री बिजली स्कीम है।

साल 2022 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली एमसीडी चुनाव में भारी मतों से शानदार जीत दर्ज की थी। इसी के साथ दिल्ली एमसीडी में 15 सालों से चला आ रहा बीजेपी का राज समाप्त हो गया था। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने 134 वार्डों में जीत हासिल की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने 104 सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस को महज 9 सीटें हासिल हुई हैं और 3 सीटें अन्य के खाते में गई हैं। इनमें से 12 वार्ड ऐसे हैं, जिन पर जीत-हार का अंतर 200 वोटों से भी कम का रहा। इन 12 में से 3 सीटें आप के खाते में तो 9 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि उनकी सरकार के पास सदन में बहुमत है लेकिन उसे विश्वास प्रस्ताव लाने की जरूरत है क्योंकि बीजेपी पार्टी के विधायकों को तोड़ने और उनकी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान आप के 62 में से 54 विधायकों के ही मौजूद रहने पर केजरीवाल ने कहा कि आप के किसी विधायक ने दल नहीं बदला। उन्होंने कहा कि दो विधायक जेल में हैं, कुछ अस्वस्थ हैं तो कुछ शहर से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि कई विधायकों ने बताया कि कैसे कथित तौर पर बीजेपी के लोगों ने उनसे संपर्क किया और पाला बदलने के लिए पैसे की पेशकश की।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए 10 अप्रैल, 2023 का दिन खुशियां लेकर आया।इस दिन उनका पार्टी को बड़ी सफलता मिली। चुनाव आयोग ने आप को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दे दी। साल 2022 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप को गुजरात विधानसभा चुनावों में पांच विधायकों के साथ एक बड़ा वोट शेयर मिला था।गुजरात में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर करीब 12 फीसदी मिला। इससे पहले AAP पंजाब, गोवा और दिल्ली में खुद को एक राज्य पार्टी के रूप में स्थापित कर चुकी थी। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलते ही केजरीवाल ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। पीएम मोदी और बीजेपी पर हमले तेज कर दिए। केजरीवाल को विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठकों में प्रथम पंक्ति में स्थान मिला।

केजरीवाल ने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी ने सोचा कि वह उन्हें गिरफ्तार करके आप को खत्म कर देगी। उन्होंने पूछा, ‘आप मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं लेकिन आप केजरीवाल के विचारों को कैसे खत्म करेंगे?’ दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सेवा विभाग और नौकरशाही पर नियंत्रण के माध्यम से भाजपा उनकी सरकार के काम में बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा, ‘वे राम भक्त होने का दावा करते हैं लेकिन उन्होंने हमारे अस्पतालों में गरीब लोगों के लिए दवाएं बंद कर दीं। क्या भगवान राम ने गरीब लोगों के लिए दवाएं बंद करने के लिए कहा था?’ केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने अतीत में हमलों का सामना किया है, उन्हें थप्पड़ मारे गए, उन पर स्याही फेंकी गई और अब वे उन्हें गिरफ्तार करना चाहते हैं।

आखिर क्या है डॉक्टर स्वामीनाथन का किसानी फार्मूला?

आज हम आपको डॉक्टर स्वामीनाथन का किसानी फार्मूला बताने जा रहे हैं! एक बार फिर से स्वामीनाथन आयोग की चर्चा जोरों पर है। पंजाब, हरियाणा और कुछ और राज्यों के किसान आंदोलन की राह पर हैं। वे दिल्ली पहुंच रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें पूरी तरह से मुस्तैद है कि किसान दिल्ली नहीं पहुंच पाए। आंदोलनरत किसानों की कई मांगे हैं। उनमें से प्रमुख मांग है ‘सी2+50% फॉर्मूला’ के आधार पर एमएसपी तय करना। आपको पता है कि क्या है यह फार्मूला? सरकार जो मुख्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी तय करती है, उसकी सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग करता है। इसमें ए2 , ए2 प्लस एफएल और सी2 फार्मूला है। ए2 में किसी खास फसल में लगी किसान की लागत शामिल होती है। मतलब कि बीज, खाद, कीटनाशनक, जन-मजदूरों की मजदूरी, जमीन का किराया और मशीनरी और फ्यूल की लागत शामिल होती है। ए2प्लस एफएल में ए2 वाली सभी चीजें तो शामिल होती ही हैं, साथ ही खेत में परिवार के सदस्यों द्वारा मुफ्त में किए गए काम का मूल्य भी शामिल होता है। सी2 में ए2प्लस एफएल के साथ ही खुद की जमीन है तो भी उसका किराया और फिक्स्ड कैपिटल पर देय ब्याज आदि भी शामिल है।

अभी जो एमएसपी तय करने की प्रणाली है, उससे किसान खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पाती है। इसलिए, किसानों की माली हालत सुधारने के लिए 18 नवंबर 2004 को केंद्र सरकार ने एक आयोग का गठन क‍िया था। यही आगे चलकर स्वामीनाथन आयोग के नाम से लोकप्र‍िय हो गया। आयोग ने दो साल में सरकार को पांच रिपोर्ट सौंपी थीं। उन रिपोर्टों में 201 स‍िफार‍िशें शामिल थीं।स्वामीनाथन कमीशन की र‍िपोर्ट को लागू करने का मसला जनहित याचिका के रूप में सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है। उसके उत्तर में वर्तमान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने यह कह द‍िया था क‍ि केंद्र के पास ज‍ितने व‍ित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, उससे सी-2 वाली बात पर अमल करना व्यवहार‍िक नहीं है। इसे लागू क‍िया नहीं जा सकता। इन सिफारिशों में सबसे चर्च‍ित स‍िफार‍िश न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंध‍ित थी। इसमें किसानों को फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य ‘सी2+50% फॉर्मूले’ पर तय करने को कहा गया था। मतलब कि सी2 की लागत तो मिले ही साथ ही उस पर 50 फीसदी अतिरिक्त राशि मिले जो कि खेती का मुनाफा कहलाए।

किसान चाहते हैं कि एमएसपी तय करने के लिए स्वामीनाथन आयोग का फार्मूला अमल में लाया जाए। दरसअल, किसान इसलिए भी उग्र हैं क्योंकि एमएसपी तय करने में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश मानना वर्तमान सरकार का चुनावी वादा रहा है। साल 2018 में सरकार ने दावा भी कर द‍िया था क‍ि उसने स्वाम‍ीनाथन आयोग की स‍िफार‍िशों को लागू कर दिया है। लेकिन अभी भी इसका इंतजार हो रहा है। स्वामीनाथन कमीशन की र‍िपोर्ट को लागू करने का मसला जनहित याचिका के रूप में सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है। उसके उत्तर में वर्तमान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने यह कह द‍िया था क‍ि केंद्र के पास ज‍ितने व‍ित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, उससे सी-2 वाली बात पर अमल करना व्यवहार‍िक नहीं है। इसे लागू क‍िया नहीं जा सकता।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भूमि सुधारों पर भी जोर दिया था। इस रिपोर्ट में भूमिहीनों को जमीन देने की बात कही गई थी। अन्य बातों के साथ-साथ यह भी सिफारिश की थी कि “जहां कहीं भी व्यवहार्य हो भूमिहीन कृषक परिवारों को प्रति परिवार न्यूनतम एक एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यह जमीन उन्हें घरेलू बगीचा, पशुपालन के लिए स्थान उपलब्ध कराएगी।” स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश थी कि कृषि को राज्यों की सूची के बजाय समवर्ती सूची में लाया जाए। इससे फायदा यह होगा कि केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारें किसानों की मदद के लिए आगे आएंगी। बता दें कि किसी खास फसल में लगी किसान की लागत शामिल होती है। मतलब कि बीज, खाद, कीटनाशनक, जन-मजदूरों की मजदूरी, जमीन का किराया और मशीनरी और फ्यूल की लागत शामिल होती है। ए2प्लस एफएल में ए2 वाली सभी चीजें तो शामिल होती ही हैं, साथ ही खेत में परिवार के सदस्यों द्वारा मुफ्त में किए गए काम का मूल्य भी शामिल होता है। सी2 में ए2प्लस एफएल के साथ ही खुद की जमीन है तो भी उसका किराया और फिक्स्ड कैपिटल पर देय ब्याज आदि भी शामिल है। साथ ही दोनों सरकारों के बीच समन्वय बनाया जा सकेगा। आयोग ने किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाने की सिफारिश की थी, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को तुरंत मदद मिल सके।

क्या किताबी नंबर्स के लिए बढ़ रहा है छात्रों पर दबाव?

वर्तमान में किताबी नंबर्स के लिए छात्रों पर दबाव बढ़ रहा है! जब हर कोई अंतरिम बजट 2024-25 में बड़े आंकड़ों को देखने में व्यस्त है, जिसे हमेशा भरोसेमंद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्तुत किया है, एक और आंकड़ा पूरे भारत में चिंता बढ़ा रहा है। कोटा में पिछले साल 27 छात्रों की दुखद मौत हुई। इसके बाद इस साल दो सप्ताह के भीतर तीन और छात्रों की मौत हो गई। आत्महत्याओं ने सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। जेईई, NEET, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं को पास करने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा करते समय उत्पन्न होने वाली कठोर उम्मीदों और असहनीय दबाव के प्रति हमारी आंखें खोल दी हैं। हालांकि परिस्थितियाँ उनके विपरीत हैं। लाखों छात्र ऐसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समय, प्रयास और धन का निवेश करते हैं। अपने असंभव सपनों को साकार करने में असमर्थ, कुछ लोग दबाव के आगे झुक जाते हैं। उनमें से एक के लिखे हृदय विदारक नोट में कहा गया, यही आखिरी विकल्प है। ऐसे में सवाल है कि नंबर जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण कैसे और कब हो गए? हाल ही में कई फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ’12वीं फेल’ हमें उन लाखों आशावानों की मानसिकता को समझने में मदद करती है। ये लोग उस जादुई यूपीएससी लाइन को इस उम्मीद को पार करने के लिए भीख मांगने, उधार लेने, चोरी करने, भूखे मरने के लिए तैयार हैं। उन्हें यह लगता है कि यह उन्हें कठिन जीवन से बचाएगा और सम्मान, स्वीकार्यता, यहां तक कि उच्च सम्मान भी प्रदान करेगा। यह जीवनी गरीबी से जूझ रहे एक ऐसे छात्र के आघात और अंततः जीत का वर्णन करती है, जो परीक्षा में सफल होने का फैसला करता है, चाहे कुछ भी हो। यह एक प्रामाणिक और भावुक कथा है – जितनी आश्चर्यजनक है उतनी ही हृदय विदारक भी। एक्टर विक्रांत मैसी ने फिल्म में वास्तविक जीवन के आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की भूमिका निभाई है। मनोज शर्मा के विस्मयकारी दृढ़ संकल्प ने एक किताब का रूप लिया। उससे प्रेरित होकर लेखक, निर्देशक, निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने एक बेहद मार्मिक फिल्म में बदल दिया। यह डकैतों से प्रभावित चंबल में एक ईमानदार क्लर्क के बेटे शर्मा की कहानी है। यह हमारी शिक्षा/सामाजिक व्यवस्था में गहरे दबे कई मुद्दों और भयावह असमानताओं से निपटती है। उदाहरण के लिए, परीक्षा के दौरान नकल से भी।

यह उन लाखों छात्रों का अंतिम सपना है, जो कोचिंग कक्षाओं में दाखिला लेते हैं और कठोर यूपीएससी परीक्षाओं के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं। इसके जरिये एक खूनी घोटाला उजागर हुआ है। फिल्म के नायक के लिए परीक्षा के अलावा और भी बहुत कुछ दांव पर है। यह नायक भ्रष्ट पुलिस वालों और निर्दयी नेताओं की तरफ से नियंत्रित जाति-ग्रस्त गांव में पला-बढ़ा है। गौरी भैया नाम के एक चरित्र का स्पष्ट रूप से उकेरा गया चित्र, जो एक असफल यूपीएससी उम्मीदवार है, जो नायक का मार्गदर्शन करता है। यह एक सम्मोहक ट्रैक है, जो संदेह और गुस्से से रहित है। ‘रीस्टार्ट’ उनके जर्जर सेट-अप का आदर्श वाक्य है, जहां वह अपने प्रेरक समूह से सिलेबस पर बने रहने और आगे बढ़ने पर लेजर जैसे फोकस के साथ काम करने का आग्रह करते हैं।

उन छात्रों की प्रचंड भूख को समझना मुश्किल है जो अपनी महत्वाकांक्षा हासिल करने के लिए इतना कुछ त्याग देते हैं। और सोचने वाली बात यह है कि परीक्षा में बैठने वाले 10 लाख लोगों में से केवल 180 आईएएस अधिकारियों का चयन किया जाता है। लेकिन एक बार जब कोई व्यक्ति इसमें शामिल हो जाता है, तो उसके बाद वह पीछे मुड़कर नहीं देखता। दस वर्षों तक काम करने के बाद एक आईएएस अधिकारी का वेतन लगभग 12 लाख प्रति वर्ष है, लेकिन उसके पास जो शक्ति है, उसका आकलन करना कठिन है। सरकार के शक्तिशाली पहिये यूपीएससी अधिकारियों की बदौलत घूमते रहते हैं, जो शासन के खेल को उन राजनेताओं की तुलना में कहीं अधिक गहराई से जानते हैं, जिन्हें वे रिपोर्ट करते हैं। यह सिर्फ पैसा नहीं है जो इतने सारे छात्रों को भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आकर्षित करता है। यह एक आईपीएस अधिकारी के वर्दी पहनने का मौका भी है। छात्र अपना पसीना बहाकर, नींद से वंचित, भूखे और अकेले रहकर, दिन में 16 से 18 घंटे एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई करते हैं, जिसकी अक्सर घातक कीमत चुकानी पड़ती है।

कोचिंग क्लास कल्चर उत्पीड़ित उम्मीदवारों की बौद्धिक और भावनात्मक क्षमता से कहीं अधिक की मांग करके बहुत से युवाओं की जान ले रही है। यह केवल छात्र हॉस्टल में पंखे बदलने या बालकनियों में जाल लगाने से मानसिक स्वास्थ्य संकट या गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की कमी का समाधान नहीं होने वाला है। इसके परिणामस्वरूप प्रवेश के लिए भारी मारामारी होती है। हमें न सिर्फ लक्षणों से बल्कि इस बीमारी से निपटने की जरूरत है। यह केवल रिस्टार्ट करने नहीं बल्कि पुनर्विचार करने का समय है। संभवतः इससे अधिक मूल्यवान क्या हो सकता है कि एक अनमोल जीवन को अचानक केवल इसलिए समाप्त कर दिया जाए क्योंकि शैक्षणिक विफलता और शर्मिंदगी मौत से भी बदतर लगती है?