Friday, June 21, 2024
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रूस-यूक्रेन जंग के बीच G-7 समिट खत्म,रूस ने 144 यूक्रेनी सैनिकों को रिहा किया

रूस-यूक्रेन जंग को चार महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। इस बीच रूसी सेना ने यूक्रेन के दक्षिणी शहर माइकोलाइव में एक बिल्डिंग पर हमले किए। हमले में 2 यूक्रेनी नागरिकों की मौत हो गई, 3 घायल हो गए। यहां के गवर्नर विटाली किम ने कहा कि अभी ये साफ नहीं है कि हमला बम से किया गया या मिसाइल से किया गया।

इधर, यू्क्रेन के खुफिया विभाग ने कहा कि मॉस्को ने 144 यूक्रेनी सैनिकों को रिहा कर दिया है। इसके बदले में यूक्रेन ने भी रूस के कुछ सैनिकों को रिहा कर दिया है। पिछले महीने करीब 2,500 यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी सेना के आगे सरेंडर कर दिया था।

सोमवार को रूसी सेना ने एक शॉपिंग कॉम्पलेक्स पर मिसाइल हमला किया था। कॉम्पलेक्स में 1,000 से ज्यादा लोग मौजूद थे। 18 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, रूस ने हमले से इनकार कर दिया और उल्टा इसे यूक्रेन की साजिश बताया।दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए जेलेंस्की ने पुतिन की तुलना आतंकवादियों से की। जेलेंस्की ने कहा- रूस के कत्ल-ए-आम को फौरन रोकने की जरूरत है, अब दुनिया को एक्शन लेना होगा। जेलेंस्की ने UN से एक टीम भेजकर शॉपिंग कॉम्पलेक्स पर हुए हमले की जांच कराने की मांग की।

ब्रिटिश PM बोले-पुतिन महिला होते तो यूक्रेन पर हमला नहीं करते

हाल ही में G-7 समिट में युद्ध रोकने के लिए रूस पर और प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया। समिट के बाद ब्रिटिश PM बोरिस जॉनसन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन पर तंज कसते हुए कहा- अगर पुतिन महिला होते तो यूक्रेन पर हमला नहीं करते। इसके कुछ देर बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की ने पुतिन को आतंकवादी और रूस को आतंकी राष्ट्र करार दिया।

जो बाइडेन की पत्नी, बेटी समेत 25 अमेरिकियों पर रूस ने लगाया बैन

रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन और बेटी सहित 25 अन्य अमेरिकियों पर बैन लगा दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय के तरफ से जारी एक नोट में कहा गया कि रूसी पॉलिटिकल और पब्लिक फिगर के खिलाफ लगातार लगाए जा रहे बैन के बाद ये कमद उठाया गया है। नोट में 25 अमेरिकी नागरिकों को स्टॉप लिस्ट में जोड़ा गया है।

लिस्ट में कई अमेरिकी सीनेटर शामिल हैं, जिनमें मेन के सुसान कॉलिन्स, केंटकी के मिच मैककोनेल, आयोवा के चार्ल्स ग्रासली, न्यूयॉर्क के कर्स्टन गिलिब्रैंड शामिल हैं। इसमें कई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और रिसर्चर और अमेरिकी सरकार के पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं।

फिनलैंड-स्वीडन के NATO में शामिल होने का अमेरिका का समर्थन

रूस-यूक्रेन के बीच जंग को चार महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने फिनलैंड और स्वीडन के NATO में शामिल होने का समर्थन किया है। बाइडेन ने कहा कि दोनों ही देश की सेना और वहां का लोकतंत्र मजबूत है।

बाइडेन ने कहा कि उनकी सदस्यता NATO की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करेगी। मैं NATO महासचिव स्टोल्टेनबर्ग, हमारे सहयोगियों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम उन्हें अपने गठबंधन में जल्द से जल्द स्वागत कर सकें।

G-7 कब बना, दुनिया में क्या स्थिति है?

G-7 दुनिया की कुल GDP में 31% हिस्सेदार 7 विकसित देशों का समूह है। इनमें दुनिया की महज 10% ही आबादी रहती है। जबकि अंतरराष्ट्रीय कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन (Emissions) में हिस्सा 21% है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, अमेरिका, इटली और जापान इसके मेंबर हैं। 25 मार्च 1973 को इसकी शुरुआत हुई थी। तब 6 मेंबर शामिल थे। उसके अगले साल कनाडा इसमें शामिल हुआ। साल 1998 में इसमें रूस भी जुड़ा था। तब ये G-8 बन गया था। प्रत्येक देश बारी-बारी से इस समूह की अध्यक्षता करता है।

G-7 से इस बार क्या मिला?

G-7 देशों में चीन शामिल नहीं है। वजह है कि चीन में अब भी GDP के हिसाब से प्रति-व्यक्ति आय काफी कम है, क्योंकि उनकी आबादी ज्यादा है। इसी कारण चीन को इसका हिस्सा नहीं बन सकता। भारत भी इसी वजह से इस समूह का हिस्सा नहीं है।भारत को इस साल गेस्ट नेशन के तौर पर सम्मेलन में बुलाया गया। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित किया गया।सदस्य देशों के रूस के साथ मतभेद हो गए। रूस ने साल 2014 में यूक्रेन के काला सागर प्रायद्वीप क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद समूह से निकाल दिया गया था।G-7 की आलोचना ये कह कर की जाती है कि ये कभी भी प्रभावी संगठन नहीं रहा है। हालांकि, समूह कई सफलताओं का दावा करता है, जिनमें एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए इंटरनेशनल फंड की शुरुआत करना भी है। समूह का दावा है कि इसने साल 2002 के बाद से अब तक 2.7 करोड़ लोगों की जान बचाई है। 2016 के पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने के पीछे अपनी भूमिका बताता है। इसमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका का कोई देश शामिल नहीं।रूस से सोने के आयात पर प्रतिबंध के अलावा चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को टक्कर देने के लिए 600 अरब डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान का ऐलान किया गया। इसे पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इनवेस्टमेंट यानी PGII का नाम दिया गया है। इसे बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड भी कहा जा रहा है।G-7 के सदस्य देश बीते महीने यूक्रेन को 1.55 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त आर्थिक मदद देने के लिए राजी हुए थे। हालांकि, इन देशों ने जो वादा किया है, उसका 10 फीसदी ही यूक्रेन को मदद की है।

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