Sunday, May 19, 2024
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आखिर क्या है लखनऊ का पिटबुल केस?

आज हम आपको लखनऊ का पिटबुल केस के बारे में बताने जा रहे हैं! लखनऊ के कैसरबाग स्थित बंगाली टोला में 12 जुलाई की सुबह 80 साल की सुशीला त्रिपाठी पर उनके पालतू फीमेल डॉग ने कथित रूप से हमला कर दिया। ज्यादा खून बह जाने के चलते उनकी जान चली गई। सुशीला के बेटे अमित एक जिम ट्रेनर हैं जो उस समय घर पर नहीं थे। हादसे के बाद पिटबुल ब्रीड की डॉगी को नगर निगम ने जब्त कर लिया है। उसे बिहेवियर स्टडी के लिए ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनैशनल के सेंटर में रखा गया है। यह खबर लगातार चर्चा में बनी हुई है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। पेट पैरंट्स, ऐक्टिविस्ट, डॉक्टर, एनजीओ और आम लोगों में बहस छिड़ गई है कि आखिर एक पालतू कुत्ता अपने ही परिवार के सदस्य की जान कैसे ले सकता है। किसी को ब्राउनी पिटबुल डॉगी के घर का नाम के प्रति हमदर्दी है तो कुछ उसे कातिल की नजर से देख रहे हैं। कोई इस हमले के लिए पिटबुल नस्ल के एग्रेसिव बिहेवियर को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो कोई इसे बेहतर ट्रेनिंग और माहौल की कमी। सुशीला त्रिपाठी के बेटे अमित ने तीन साल पहले पिटबुल ब्रीड की डॉगी ब्राउनी को अडॉप्ट किया था। तब वह तीन महीने की थी। अमित ने मीडिया को बताया है कि इससे पहले कभी भी उसने हमें नुकसान नहीं पहुंचाया, उस दिन पता नहीं क्या हो गया। अमित खुद भी इस हादसे से हैरान हैं। वहीं एनजीओ का मानना है कि सिर्फ स्टेटस सिंबल के लिए डॉग नहीं रखने चाहिए, बल्कि उन्हें सही माहौल और ट्रेनिंग भी जरूरी है। लखनऊ स्थित एनजीओ जीव बसेरा की अध्यक्ष राखी किशोर कहती हैं, ‘कुछ विशेष ब्रीड के डॉग जैसे पिटबुल, रॉट वाइलर या फिर जर्मन शेफर्ड लोग इन्हें स्टेटस सिंबल के लिए पाल लेते हैं।’ वह आगे कहती हैं, ‘कुत्ता घर लाने से पहले जरूरी है आप उसे एक परिवार के सदस्य के रूप में देखें। हमें उस विशेष ब्रीड के बारे में जानकारी और बेसिक रिसर्च पूरी करनी चाहिए। पिटबुल जैसे डॉग को घर में फ्रेंडली और केयरिंग माहौल मिलना जरूरी है। इसके अलावा ट्रेनिंग पर भी बहुत ध्यान देना होता है, प्रफेशनल ट्रेनर्स रखें या फिर घर पर ही ट्रेनिंग दे रहे हैं तो जितने सदस्य हैं उनका कमांड उस पर रहे।’

नगर निगम लखनऊ ने अमेरिकन पिटबुल, रॉट वाइलर, साइबेरियन हस्की, डॉबरमैन, बॉक्सर और जर्मन शेफर्ड जैसे ब्रीड को घातक करार देते हुए इन्हें घर पर न पालने से बचने की सलाह दी है। ऐक्टिविस्ट कामना पांडेय इस पर कहती हैं कि ‘नगर निगम की इस अडवाइजरी से प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं। लोग अपने पालतू जानवरों के डर के चलते अगर छोड़ने लग गए तो ये भी क्रूरता और अवैध होगा।’ उन्होंने कहा, ‘इस तरह अडवाइजरी जारी करने के बजाय नगर निगम को ब्रीडिंग सेंटर को रेग्युलेट करना चाहिए। यहां पर ओनर से उसके बैकग्राउंड की कोई जानकारी या पूछताछ की जाती है और यह भी नहीं देखा जाता है विशेष ब्रीड का डॉग उनके घर के माहौल में रह भी पाएगा या नहीं। इसके अलावा पेट शॉप में अवैध तरीके से जानवर रखते हैं, उन पर भी ऐक्शन लिया जाना जरूरी है।’

यह सामने आया है कि सुशीला और उनके बेटे पड़ोसियों के विरोध के चलते पिटबुल को घर पर ही टहलाते थे। ऐक्टिविस्ट कामना पांडेय बताती हैं, ‘डॉग के गुस्सैल होने के कई कारण होते हैं। इनमें से एक वजह डॉग का लोगों से इंट्रैक्शन न होना भी शामिल है। पिटबुल जैसे बड़ी ब्रीड वाले डॉग को वॉक के लिए घर पर जगह कम पड़ती है, इन्हें बाहर ले जाना जरूरी है ताकि पर्याप्त एक्सरसाइज हो सके। इसे लेकर पशु कल्याण विभाग की ओर से सर्क्युलर भी जारी हो चुका है कि पार्कों में कुत्ता टहलाने पर बैन नहीं लगाया जा सकता है। हालांकि फिर भी विवाद की खबरें आती हैं।’ इस घटना के बाद पड़ोसियों में दहशत है। उनका कहना है कि जो कुत्ता अपने ही घर के सदस्य पर हमला कर सकता है, उससे डर लगना लाजिमी है। ब्राउनी को नगर निगम के जब्त किए जाने के बाद से लोग थोड़े राहत में हैं।

लखनऊनगर निगम के पशु कल्याण विभाग का कहना है कि यहां किसी भी ब्रीड के डॉग को पालने पर प्रतिबंध नहीं है फिर भी लोगों को आक्रामक ब्रीड वाले डॉग को पालने से बचना चाहिए। इसके साथ ही नगर निगम से देशी-विदेशी किसी भी तरह के डॉग को पालने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। इसकी वैधता एक साल तक होती है। ऐसा न करने पर 5000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। नगर निगम के पशु कल्याण विभाग ने पाया कि ब्राउनी फीमेल डॉग है और उसका स्टरलाइजेशन (बधियाकरण) नहीं हुआ था। ऐसे में हार्मोनल इश्यू भी कभी-कभी डॉग के एग्रेसिव नेचर की वजह हो सकता है। अमित ने मीडिया को बताया कि ब्राउनी ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। बस एक बार उनकी मां को दांत लगा था, इस पर जब अमित ब्राउनी पर गुस्सा हुए तो मां ने ही मना कर दिया कि उसने काटा नहीं है। जीव बसेरा की राखी किशोर कहती हैं, ‘मैं नहीं मानती कि कोई भी डॉग अगर भाग-भागकर सबको नहीं काट रहा है तो उसका दिमाग बिल्कुल ही आपे से बाहर हो चुका है। अगर सभी को काट रहा हो तब तो उसका इलाज करना चाहिए। न्यूरोलॉजिकल, मेंटल डिसीज या ट्रॉमा हो सकता है लेकिन अगर सिर्फ एक को काट रहा तो कोई वजह रही होगी जिससे वह ट्रिगर हुआ।’

नगर निगम ने ब्राउनी को हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल (एचएसआई) को सौंप दिया है। उसे इंदिरा नगर जरहरा स्थित एबीसी सेंटर में रखा गया है। पशु कल्याण विभाग के अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया, ‘पहले दो दिन डॉगी थोड़ी परेशान रही, रो भी रही थी और लेकिन तीसरे दिन से सुधार हुआ है। अब वह खाना भी खा रही है। वह तीन साल से उस परिवार के साथ थी लेकिन एकदम से अटैचमेंट कम तो नहीं होगा। हमने इसे 14 दिन के लिए ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है। इसके बाद उसे एनजीओ या ट्रेनर को सौंपा जाएगा। इसके लिए हमारी प्रक्रिया चल रही है।’ पशु कल्याण विभाग जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. अरविंद कुमार राव ने कहा कि ‘फिलहाल ब्राउनी को ऐसी परिस्थितियों में अमित त्रिपाठी को नहीं सौंपा जाएगा। अमित चाहें तो नगर निगम से इजाजत लेकर उससे मिल सकते हैं लेकिन हमारे पास अभी उनका कोई कॉल नहीं आया।’

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