Sunday, May 19, 2024
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जब कंप्यूटर ने बदल दी भविष्य की बच्चियों की जिंदगी!

कंप्यूटर ने भविष्य की बच्चियों की जिंदगी बदल कर रख दी है! 13 साल की लक्ष्मी के लिए स्कूल की राह ही मुश्किलों भरी थी। घर पर उसका समय शराबी पिता की मार से मां को बचाने में ही गुजर जाता था। गणित के पेपर में बेहतर नंबर लाना उसके लिए सपना पूरा होने जैसा है। 14 साल की जैसमीन 6वीं क्लास के एंट्रेस में नंबर तक याद नहीं रख पाती थी लेकिन अब वह क्लासमेट्स को स्क्वैयर रूट यानी वर्गफुट के सवाल हल करवा रही हैं। 11 साल की बच्ची भूमि के पिता अब दुनिया में नहीं हैं। उसे मैथ से इतना लगाव हो चुका है कि वह इस सब्जेक्ट में टीचर बनना चाहती है। 12 साल की कविता पहले पढ़ाई से जी चुराती थी लेकिन अब मैथ, साइंस और अंग्रेजी फेवरिट विषय हैं। ऐसे ही अपनी मां को खो चुकीं सान्या पढ़ाई कर वकील बनना चाहती हैं। एक समय इन सभी बच्चियों की पढ़ाई छूटने की कगार पर आ गई थी लेकिन अब करियर के रास्ते आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय (KGBV) ने इनकी किस्मत बदल दी। इन स्कूल्स में 6वीं से 8वीं क्लास तक की पढ़ाई होती है। जो बच्चे बुनियादी सवालों पर लड़खड़ाते थे क्योंकि उन्हें कभी भी कोई विषय ठीक से नहीं सिखाया गया था। जिस मैथ और इंग्लिश से डर लगता था, उनके लिए सीखने का तरीका अब मनोरंजन की चीज हो गई। कम्प्यूटर के साथ ही स्किल्स भी मजबूत हो रहे हैं। हाल के साल में KGBV में लड़कियों के पास होने का प्रतिशत भी बढ़ा है। गौतमबुद्धनगर के दादरी ब्लॉक के नागला की निवासी लक्ष्मी की जिंदगी का उद्देश्य अपनी मां की जिंदगी को बेहतर बनाना है। एक समय किताब छूने से भी परहेज करने वाली लक्ष्मी को अब पढ़ाई से लगाव हो गया है। उसकी आंखों में सिविल सेवा में जाने का सपना तैर रहा है। वहीं दनकौर के KGBV में पढ़ने वाली 14 साल की तनु भी पुलिस सेवा में जाना चाहती है। वह चाहती है कि बच्चियों बेखौफ होकर घरों से बाहर निकले और गांव-कस्बे में भी कोई लड़कियों को परेशान ना कर पाए।

लखनऊ के मलिहाबाद KGBV में लड़कियों के मैथ विषय में पास होने का प्रतिशत 2021 में 25 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 80 प्रतिशत हो गया है। वहीं 2023 में यह 100 प्रतिशत तक पहुंच गया। आठवीं तक पढ़ाई के बाद नौवीं क्लास में पढ़ाई करने का प्रतिशत भी बढ़ा है। सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े समाज की लड़कियों को पढ़ाई में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 2004-05 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की शुरुआत की गई थी। इससे ग्रामीण इलाकों में साक्षरता दर में सुधार दर्ज किया गया है। यहां छठवीं से 12वीं क्लास तक पढ़ाई होती है, जिसे अब बढ़ाकर 12वीं तक किया जा रहा है। अभी प्रदेश में 746 KGBV स्कूल संचालित हैं।

मलिहाबाद KGBV में पढ़ाई कर रही जैसमीन बताती है कि हमें शुरू से हमेशा यही बताया गया कि गणित तो लड़कों के पढ़ने का विषय है। स्कूल भी जाना तय नहीं था। आज यह महसूस होता है कि केवल शिक्षा ही हमें गरीबी से मुक्ति दिला सकती है। वह सुबह स्कूल के कम्प्यूटर लैब में वर्कशीट तैयार करती हैं। वार्डेन नीलिमा सिंह ने बताया कि जैसमीन के अंदर पहले कॉन्फिडेंस ही नहीं था। वह कई बार पूछने पर कुछ बोलती थी। लेकिन अब यह हाल है कि वह हेड गर्ल है और प्रार्थना सभा से लेकर कम्प्यूटर क्लास तक की जिम्मेदारी संभालती है।

बाराबंकी के KGBV के आठवीं क्लास में पढ़ने वाली नेहा यादव अब नौंवीं क्लास की पढ़ाई करने जा रही है। वह बताती हैं कि मैथ से अब लगाव हो गया है। वर्ग और घन के सवाल हल करने में मजा आता है। ऐसा ही कहना है मऊ की 13 साल की राजनंदिनी का। KGBV में टॉप करने वाली बच्ची का कहना है कि कस्तूरबा स्कूल ने मेरी जिंदगी बदल दी। अब उनका सपना कॉलेज में जाकर इंजिनियरिंग की पढ़ाई करना है।

उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने बताया कि KGBV में बच्चियों को साइंस, मैथ की पढ़ाई के साथ डिजिटली भी मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि कस्तूरबा की बच्चियों को टेक्नॉलजी और इंजिनियरिंग की दिशा में मजबूत किया जाए। बेसिक कॉन्सेप्ट को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सर्वे के मुताबिक KGBV की बच्चियां स्किल्स में भी मजबूत हो रही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य के पाठ्यक्रम के साथ ही खान अकैडमी के सहयोग से कोर्स मॉड्यूल प्रॉजेक्ट में टाटा ट्रस्ट भी सहयोगी है।

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