बंगाल के मुर्शिदाबाद में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है! पिछले हफ्ते बंगाल का मुर्शिदाबाद एक घटना को लेकर सुर्खियों में रहा। यहां दो महिलाओं के साथ बर्बरता की हद पार की गई। पहले उन्हें पीटा गया, फिर उनके साथ रेप की कोशिश की गई और आखिर में प्राइवेट पार्ट्स को गर्म लोहे की रॉड से जलाया गया। इसे अंजाम देने वाले आरोपी थे साहेबुल शेख, कदम मुल्ला और समजेर शेख। इनमें से दो महिलाओं के रिश्तेदार थे। सवाल है कि आखिर इन महिलाओं की गलती क्या थी? दरअसल, महिलाओं पर लेस्बियन रिलेशनशिप में होने का आरोप था। घटना 25 अक्टूबर को मुर्शिदाबाद जिले के सागरडीघी की है। लड़कियां एक कमरे में सो रही थीं, जब पुरुष उनके कमरे में घुस गए और उन पर समलैंगिक होने का आरोप लगाया। महिलाओं ने भागने का प्रयास किया। बाद में पुरुषों ने उनके साथ बलात्कार करने का प्रयास किया और उनके प्राइवेट पार्ट को भी जला दिया। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी फरार है।

फर्स्टपोस्ट में प्रकाशित एक लेख में अभिजीत मजूदमार लिखते हैं, ‘मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद इन दिनों कभी म्यूजिक, कभी लॉटरी तो कभी टीवी देखने पर फतवा जारी करने को लेकर खबरों में हैं। पड़ोसी जिले मालदा में जहां 51 फीसदी मुस्लिम आबादी है, वहां 2015 में लड़कियों का एक फुटबॉल मैच बैन कर दिया गया था। वजह बताई गई कि लड़कियों की जर्सी बहुत टाइट और गैर इस्लामिक थी। कई इस्लामिक देशों में, समलैंगिकता को दंडनीय अपराध माना जाता है। कहीं-कहीं मौत की सजा का भी प्रावधान है क्योंकि इस्लाम में इसे सबसे जघन्य अपराध माना जाता है।’ 2018 में कोलकाता के कमला गर्ल्स हाई स्कूल में छात्राओं के एक समूह से स्वीकारोक्ति पत्र पर साइन कराए गए थे जिसमें कहा गया था कि वे सभी लेस्बियन हैं। तब कोलकाता की सड़कों पर इसके विरोध में समलैंगिक समुदाय निकल आया था।

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल का बेहद संवेदनशील बॉर्डर जिला है। 2020 में यहां से अलकायदा, जमात-उल- मुजाहिद्दीन बांग्लादेश और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी। यह आतंकियों के भारत में घुसपैठ का एक ईजी पॉइंट भी बताया जाता है। महाराष्ट्र एटीएस ने 2018 में बांग्लादेश प्रशिक्षित आतंकी संदिग्धों को नवी मुंबई से पकड़ा था। ये सभी जाली दस्तावेजों की मदद से मुर्शिदाबाद के रास्ते भारत में घुसे थे। सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भी मुर्शिदाबाद में काफी हिंसा देखने को मिली थी। यहां ट्रेनें और बसें जलाने से लेकर, स्टेशनों में तोड़फोड़ हुई। यहां के बाहुटली हाई स्कूल के प्रिसिंपल दीनाबंधु मित्रा ने छात्राओं को हिजाब पहनकर स्कूल आने से मना कर दिया था। इस पर भी खूब हंगामा हुआ था।

मुर्शिदाबाद में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और आपराधिक नेटवर्क भी बीते कई सालों में काफी बढ़ा है। पिछले कुछ समय से यह जिला प्रतिबंधित पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के लिए उपजाऊ जमीन बन रहा था। इसी साल फरवरी में पीएफआई ने मुर्शिदाबाद में बड़ी रैली निकाली थी।सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भी मुर्शिदाबाद में काफी हिंसा देखने को मिली थी। यहां ट्रेनें और बसें जलाने से लेकर, स्टेशनों में तोड़फोड़ हुई। यहां के बाहुटली हाई स्कूल के प्रिसिंपल दीनाबंधु मित्रा ने छात्राओं को हिजाब पहनकर स्कूल आने से मना कर दिया था। इस पर भी खूब हंगामा हुआ था। टीएमसी के विधायक मनिरुल इस्लाम ने भी यहां मंच साझा किया था। उस वक्त काफी हंगामा हुआ था। इसी तरह 2020 में मुर्शिदाबाद में सीएए के खिलाफ पीएफआई के पोस्टर लगाए गए थे जिसमें टीएमसी सांसद अबु ताहिर खान का नाम था।

अभिजीत मजूदमार लिखते हैं, ‘पश्चिम बंगाल का यह जिला इस बात का आदर्श उदाहरण है कि कैसे ऐतिहासिक गलतियां और जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक जगह के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं।मुर्शिदाबाद में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और आपराधिक नेटवर्क भी बीते कई सालों में काफी बढ़ा है। पिछले कुछ समय से यह जिला प्रतिबंधित पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के लिए उपजाऊ जमीन बन रहा था। इसी साल फरवरी में पीएफआई ने मुर्शिदाबाद में बड़ी रैली निकाली थी। टीएमसी के विधायक मनिरुल इस्लाम ने भी यहां मंच साझा किया था। उस वक्त काफी हंगामा हुआ था। इसी तरह 2020 में मुर्शिदाबाद में सीएए के खिलाफ पीएफआई के पोस्टर लगाए गए थे जिसमें टीएमसी सांसद अबु ताहिर खान का नाम था। विभाजन के वक्त मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद बांग्लादेश का हिस्सा हो सकता था जबकि हिंदू बहुल खुलना भारत का हिस्सा हो सकता था लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के चलते इससे उलट हुआ।’ लेख के अनुसार, 1947 में खुलना की हिंदू आबादी 52 फीसदी जो अब घटकर 11 फीसदी हो गई है। मुर्शिदाबाद में मु्स्लिम आबादी 1951 में 55 फीसदी से बढ़कर 2011 तक 67 फीसदी हो गई है।