आज हम आपको गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की खासियत बताने जा रही! उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के साथ लिंक होने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण का 55 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। यूपीडा ने इस संबंध में एक ट्वीट करते यह जानकारी दी है। योगी सरकार के इस एक्सप्रेसवे को लेकर गोरखपुर और आसपास के इलाके के लोगों में काफी उत्साह है। इसका कारण है कि एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद गोरखपुर से बनारस और मध्‍य प्रदेश जाना आसान हो जाएगा बल्कि एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित तमाम परियोजनाओं से विकास के नए रास्ते खुलेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ के चुनाव क्षेत्र गोरखपुर से एक एक्सप्रेसवे निकल रही है। यह आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाकर मिलेगी। इसे ही गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे कहा जाएगा। कहा गया था कि गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण का काम इस साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा लेकिन अभी इसका 55 फीसदी हिस्से के निर्माण किया गया है। यूपीडा ने इस संबंध में शनिवार को एक ट्वीट करके जानकारी दी है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाली गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर यूपीडा का कहना है कि इससे आजमगढ़ और गोरखपुर के बीच सांस्कृतिक के साथ-साथ व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। इससे एक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे इसके आसपास रहने वाले लोगों को व्यापार आदि में काफी मदद मिलेगी। गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली जाना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर सफर न सिर्फ इको-फ्रेंडली होगा और डीजल-पेट्रोल की खपत भी कम होगी।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 91 किलोमीटर होगी। 4 लेन की इस सड़क परियोजना में कुल 5 हजार 876 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। इसमें जमीनों की कीमतें भी शामिल हैं। इससे आजमगढ़ और गोरखपुर के बीच सांस्कृतिक के साथ-साथ व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। इससे एक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे इसके आसपास रहने वाले लोगों को व्यापार आदि में काफी मदद मिलेगी। गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली जाना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर सफर न सिर्फ इको-फ्रेंडली होगा और डीजल-पेट्रोल की खपत भी कम होगी।गोरखपुर जिले के जैतपुर से शुरू होने वाला एक्सप्रेसवे चार जिलों का सफर करेगा। इनमें आजमगढ़, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर और गोरखपुर शामिल हैं। लिंक एक्सप्रेसवे आजमगढ़ जिले के सालारपुर गांव में जाकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से मिल जाएगी। इस पर साढ़े 4 से लेकर 5 घंटे का ट्रैवल टाइम होगा।

जानकारी के मुताबिक, एक्सप्रेसवे की चौड़ाई फोरलेन होगी और उसकी संरचना सिक्स लेन की होगी।इससे आजमगढ़ और गोरखपुर के बीच सांस्कृतिक के साथ-साथ व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। इससे एक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे इसके आसपास रहने वाले लोगों को व्यापार आदि में काफी मदद मिलेगी। गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली जाना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर सफर न सिर्फ इको-फ्रेंडली होगा और डीजल-पेट्रोल की खपत भी कम होगी। इसके साथ ही इसके एक ओर 3.75 मीटर की सर्विस रोड स्टैगर्ड के रूप में बनाई जाएगी। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर बिजनस कॉरिडोर भी बनाने की योजना है।इससे आजमगढ़ और गोरखपुर के बीच सांस्कृतिक के साथ-साथ व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। इससे एक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे इसके आसपास रहने वाले लोगों को व्यापार आदि में काफी मदद मिलेगी। गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली जाना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर सफर न सिर्फ इको-फ्रेंडली होगा और डीजल-पेट्रोल की खपत भी कम होगी। यूपीडा ने इसका जो डिजाइन तैयार किया है, उसके मुताबिक, इसमें दो टोल प्लाजा और 7 फ्लाइओवर होंगे। 101 छोटे-बड़े अंडरपास भी बनाए जाएंगे। साथ ही इस पर 7 बड़े और 27 छोटे पुल का निर्माण भी किया जाएगा। इस पर 389 पुलियों का भी निर्माण किया जाएगा। घाघरा नदी पर 1500 मीटर लंबा पुल भी इस एक्सप्रेसवे का हिस्सा होगा।

यूपीडा के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के लिए 4 जुलाई 2022 तक तकरीबन 99.10 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है।इससे आजमगढ़ और गोरखपुर के बीच सांस्कृतिक के साथ-साथ व्यापारिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। इससे एक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे इसके आसपास रहने वाले लोगों को व्यापार आदि में काफी मदद मिलेगी। गोरखपुर से लखनऊ और दिल्ली जाना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर सफर न सिर्फ इको-फ्रेंडली होगा और डीजल-पेट्रोल की खपत भी कम होगी। पर्यावरण और वन विभाग से एनओसी की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के किनारे कई विकास परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें से एक गीडा में विकसित किया जा रहा प्लास्टिक पार्क भी होगा। प्लास्टिक बनाने वाली अलग-अलग कंपनियां यहां निवेश करें, इसके लिए कई खास तरह की सुविधाएं भी यहां दी जा रही हैं।