Sunday, February 25, 2024
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गुजरात कोर्ट ने 38 दोषियों को दी फांसी की सजा, 56 लोगों की हुई थी मौत

नई दिल्ली : साल 2008 में गुजरा  त के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में स्पेशल कोर्ट ने दोषियों को सजा का ऐलान कर दिया है. कोर्ट ने 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई है. वहीं, 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई । विशेष न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत ने आदेश देने के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की थी। कोर्ट ने शुक्रवार को इस पर फैसला सुनाया साल 2008 में इन धमाकों की गूंज से पूरा देश हिल गया था. 26 जुलाई 2008 को 70 मिनट की अवधि में हुए 21 बम धमाकों ने अहमदाबाद को हिला कर रख दिया था। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक घायल हुए थे। पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने साल 2002 में गुजरात दंगों(गोधरा कांड) का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे। इस सीरियल ब्लास्ट मामले में 2 फरवरी को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन 30 जनवरी को ही स्पेशल कोर्ट के जज एआर पटले कोरोना संक्रमित हो गए और इस मामले पर फैसला 8 फरवरी तक टल गया.अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाकों के कुछ दिन बाद पुलिस ने सूरत के विभिन्न इलाकों से कई बम बरामद किए थे। इसके बाद अहमदाबाद में 20 और सूरत में 15 एफआईआर दर्ज की गई थीं। अदालत की ओर से सभी 35 एफआईआर को एक साथ जोड़ देने के बाद दिसंबर 2009 में 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत हुई थी। इनमें से एक आरोपी बाद में सरकारी गवाह बन गया था। इस मामले में बाद में चार और आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनका मुकदमा अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 1100 गवाहों का परीक्षण किया।

साल 2008 में अहमदाबाद में सिलसिलेवार कुल 21 ब्‍लास्‍ट हुए थे. दिलदहला देने वाली ये सबसे बड़ी घटना थी,  एक घंटे के अंदर अहमदाबाद में एक दो नहीं बल्कि पूरे 21 धमाके हुए. इस मामले में अहमदाबाद पुलिस ने 20 प्राथमिकी दर्ज की थी, अदालत ने इस मामले में 49 लोगों को दोषी करार दिया था और 28 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। 13 साल से अधिक पुराने इस मामले में अदालत ने पिछले साल सितंबर में मुकदमे की कार्यवाही पूरी कर ली थी। पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने साल 2002 में गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे।जबकि सूरत में 15 अन्य प्राथमिकी दर्ज की गईं.

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