Thursday, December 12, 2024
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क्या बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है पूर्वोत्तर की 25 सीट?

बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर की 25 सीट बेहद महत्वपूर्ण है! 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की नजर सिर्फ और सिर्फ अपने 400 पार के मिशन पर है। ऐसे में पार्टी देश के हर हिस्से पर खास फोकस कर रही है। चाहे उत्तर भारत हो या साउथ का इलाका या फिर पूर्वोत्तर भारत। बीजेपी हर हिस्से में जमकर प्रचार अभियान चला रही है। ऐसे में बात करें नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्यों की तो यहां 25 लोकसभा सीटें हैं जो जनादेश 2024 में अहम रोल निभाती है। ऐसे में उत्तर पूर्व के राज्यों की सियासी पार्टियां तो इस चुनाव को लेकर एक्टिव हैं ही बीजेपी और कांग्रेस भी के लिए भी इन राज्यों में जीत बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और मिजोरम की सत्ताधारी जोरम पीपुल्स मूवमेंट जैसी कुछ ‘न्यूट्रल’ पार्टियों को छोड़कर, पूर्वोत्तर की अधिकांश क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस की सदस्य हैं। इसे ऐसे भी कह सकते हैं ये पार्टियां केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा हैं। असम जातीय परिषद और पूर्व कार्यकर्ता अखिल गोगोई की रायजोर दल, कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी अलायंस का हिस्सा हैं। 2019 लोकसभा चुनाव की स्थिति पर नजर डालें तो उस समय एनडीए ने नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में जबरदस्त प्रदर्शन किया था। पार्टी ने 25 में से 19 संसदीय सीटें जीती थीं। एनडीए ने अब देशभर में 400 पार लोकसभा सीट का टारगेट रखा है, इसे पाने के लिए पार्टी को इन क्षेत्रों में और अच्छा प्रदर्शन करना होगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक, बीजेपी इस बार पूर्वोत्तर में 22 सीटें छूने का भरोसा है। इस क्षेत्र में 16 लोकसभा सीटों के लिए मतदान पहले चरण यानी 19 अप्रैल को होगा। इसमें अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी साथ होगा। बाकी नौ संसदीय सीटों पर मतदान, जिसमें सभी असम की हैं, अगले दो चरणों में होने वाला है। बीजेपी को अरुणाचल प्रदेश में बढ़त हासिल है, यहां 60 विधानसभा सीटों में से 10 पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। बाकी 50 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर उन्हें ही जीतने का भरोसा है।

सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के साथ अपने गठबंधन को खत्म करने के बाद, बीजेपी सिक्किम में 32 विधानसभा सीटों और एकमात्र लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ रही है। जैसा कि मेघालय के मुख्यमंत्री और नेशनल पीपुल्स पार्टी एनपीपी के प्रमुख कॉनराड के. संगमा कहते हैं, चुनावी लड़ाई में सहयोगियों और अस्थायी प्रतिद्वंद्वियों का आमने-सामने होना असामान्य नहीं है। उदाहरण के लिए, एनपीपी अरुणाचल प्रदेश में दो लोकसभा सीटों के लिए बीजेपी उम्मीदवारों का समर्थन कर रही है। इनमें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी शामिल हैं। हालांकि, राज्य में 23 विधानसभा सीटों पर ये पार्टी बीजेपी को टक्कर दे रही है।

मेघालय की बात करें तो यहां बीजेपी ने दावा किया कि उसका गठबंधन कांग्रेस से ज्यादा एकजुट है। बीजेपी ने असम में अपने सहयोगियों के साथ लोकसभा सीटों का बंटवारा करते हुए एक उदाहरण के तौर पर रखा है। पार्टी राज्य की 14 में से 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दो सीट असम गण परिषद और एक यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के लिए छोड़ा है। दूसरी ओर, कांग्रेस असम से 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि AJP एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। लेफ्ट फ्रंट ने बारपेटा सीट से उम्मीदवार उतारने की अपील को कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने के बाद नाराजगी जताई। वहीं आम आदमी पार्टी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान टाल दिया है। इंडी अलायंस में आपसी समझ के साथ पार्टी ने कांग्रेस और AJP कैंडिडेट के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया। एनडीए की ओर से उत्तर पूर्वी राज्यों में क्लीन स्वीप के दावे को कांग्रेस ने खारिज किया है। गौरव गोगोई ने बीजेपी पर सवाल खड़े किए। गौरव गोगोई जोरहाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

भले ही कांग्रेस को नॉर्थ ईस्ट में अपने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद हो लेकिन अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में पार्टी लगभग खत्म हो चुकी है। 2019 में पार्टी ने जिन चार सीटों पर जीत दर्ज की थी, उनमें से तीन असम में हैं जबकि कालियाबोर सीट का अस्तित्व 2023 में परिसीमन के बाद समाप्त हो गया। बारपेटा और नागांव सीटों का आकार और डेमोग्राफी बदल चुकी है। चौथी सीट, मेघालय के शिलांग में, पूर्व केंद्रीय मंत्री विंसेंट एच. पाला के लिए करो या मरो की लड़ाई है, जो सीधे चौथे कार्यकाल पर नजर गड़ाए हुए हैं।

मणिपुर की बात करें तो कांग्रेस राज्य की दो लोकसभा सीटें जीतने को लेकर संघर्ष कर रही है। इनर मणिपुर, जो इम्फाल घाटी के अधिकांश हिस्से को कवर करता है, और बाहरी मणिपुर, जो ट्राइबल हिल्स तक फैला हुआ है। पार्टी को राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के खिलाफ लोगों के गुस्से को देखते हुए इन सीटों पर जीत की उम्मीद जग रही। हालांकि, बीजेपी की सहयोगी नागा पीपुल्स फ्रंट बाहरी मणिपुर को जीतने के लिए बेहद आश्वस्त दिख रही। वो भी ऐसे समय में जब इस इलाके के आधा निर्वाचन क्षेत्र में कुकी समुदाय का प्रभुत्व है। इस समुदाय ने सरकार के अन्याय का विरोध करने के लिए चुनाव बहिष्कार का फैसला किया है। जोरहाट सीट को छोड़कर, असम में कांग्रेस के लिए एक बड़ी चिंता बारपेटा और नागांव निर्वाचन क्षेत्रों को बनाए रखना है। इस सीट पर वह AIUDF के साथ मुस्लिम वोटों के लिए फाइट करती नजर आएगी। पार्टी इसे बीजेपी की ‘बी-टीम’ बता रही है। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल धुबरी सीट को बरकरार रखना चाहते हैं।

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