Friday, June 21, 2024
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क्या यादव जाति लालू यादव से हो रही है दूर?

खबरों की माने तो यादव जाति लालू यादव से दूर होती जा रही है! बिहार में गोवर्धन पूजा के मौके पर भाजपा द्वारा यदुवंशी समाज मिलन समारोह का आयोजन किए जाने के बाद प्रदेश में यादव समाज को लेकर सियासत गर्म है। इसी बीच, यादवों के एक संगठन द्वारा भाजपा प्रदेश कार्यालय के आसपास एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी को न केवल अर्जुन के रूप में दिखाया गया है, बल्कि भावी मुख्यमंत्री भी बताया गया है। दरअसल, भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगा है, जिसमें सम्राट चौधरी को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री बताया गया है। ‘राष्ट्रीय यादव विचार मंच’ द्वारा लगाए गए इस पोस्टर में सम्राट चौधरी को एक रथ पर सवार दिखाया गया, जिसमें वे ‘अर्जुन’ की तरह धनुष लिए दिख रहे हैं। पोस्टर पर ‘राष्ट्रीय यादव विचार मंच’ के अध्यक्ष रितिक यादव को कृष्ण के रूप में दिखाया गया है। पोस्टर में अध्यक्ष चौधरी को जन्मदिन पर बधाई देते हुए लिखा गया, “बिहार के भावी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।” निवेदक में ‘राष्ट्रीय यादव विचार मंच’ लिखा हुआ है। उल्लेखनीय है कि यादव समाज को राजद का वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में अब भाजपा की नजर इस समाज पर लगी है। सम्राट चौधरी लगातार लालू यादव पर हमलावर रहे हैं। सम्राट चौधरी ने हमेशा वैसा बयान दिया है, जो उन यादवों को पसंद है, जो ये मानकर चलते हैं कि लालू ने उनके समाज के साथ धोखा दिया। सम्राट चौधरी साफ कहते हैं कि लालू यादव ने यादव जाति के नेताओं को नजरअंदाज करते हुए अपनी पत्नी राबड़ी देवी को 1997 में मुख्यमंत्री के पद पर बिठा दिया। सम्राट चौधरी हमेशा लालू यादव की राजनीतिक पहचान को उनके परिवार से जोड़कर बताते हैं। सम्राट चौधरी लालू यादव की सियासी विरासत को किसी अन्य यादव जाति में फैलाने की जगह घर तक सिमटा कर रखने की बात करते हैं।

सियासी जानकार मानते हैं कि सम्राट चौधरी की यही अदा अब यादवों को भा रही है। यादव समाज के पढ़े-लिखे युवाओं को ये साफ लगता है कि लालू यादव ने अपनी पत्नी के अलावा अपने मैट्रिक फेल बेटे को डेप्युटी सीएम बना दिया। लालू यादव हमेशा अपने परिवार के बारे में सोचते रहते हैं। हाल में एक कार्यक्रम में लालू यादव ने नित्यानंद राय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या मुझे राबड़ी की जगह उनकी राय की पत्नी को राज्य का सीएम बनना चाहिए था? लालू यादव ने यहां अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का जिक्र करते हुए कहा कि हम यदि उनके खिलाफ तेज प्रताप को खड़ा कर दें, तो नित्यानंद राय की जमानत जब्त हो जाएगी। लालू यादव ने अपने करीब रहे एक और नेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने बीजेपी सांसद रामकृपाल यादव को होटलों पर कब्जा करने वाला बताया। उन्हें टेंपो स्टैंड में काम करने वाला बताया। लालू यादव के पीछे खड़े उनके लोग उनकी इस बात पर देर तक हंसते रहे।

लालू यादव के इस बयान के बाद सम्राट चौधरी ने कहा था कि लालू कौन हैं? क्या वह मुखिया पद के लिए पंचायत चुनाव भी लड़ सकते हैं? वो नहीं लड़ सकते। चौधरी ने चारा घोटाला मामलों में लालू की सजा की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि यह नीतीश कुमार और जेडीयू के पदाधिकारी थे जिन्होंने लालू को (चारा घोटाला) मामलों में फंसाया था। चौधरी ने कहा कि अगर लालू के पास अपने कारावास और राजनीतिक भविष्य के बारे में कोई सवाल है, तो उन्हें इसे नीतीश कुमार और उनके जदयू पदाधिकारियों के साथ-साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने उठाना चाहिए। सम्राट ने लालू यादव को आदतन अपराधी कहते हुए गुंडाराज और जंगलराज का प्रतीक करार दिया। सम्राट चौधरी लगातार यदुवंशी सम्मेलन के बाद लालू यादव पर हमलावर हैं। सम्राट चौधरी के इस बयान को यादव समाज पसंद कर रहा है। वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय कहते हैं कि यदि ऐसा नहीं होता, तो सम्मेलन के एक ही दिन बाद पटना में सम्राट चौधरी को लेकर इतना बड़ा पोस्टर नहीं लगा होता।

ध्यान रहे कि लालू प्रसाद ने यादव समुदाय को अपनी ओर खींचने की भाजपा की कोशिशों की आलोचना की, जो दशकों से उनके वफादार समर्थक रहे हैं। पटना में एक समारोह में बोलते हुए, प्रसाद ने भाजपा के ‘यदुवंशी मिलन’ कार्यक्रम का जिक्र किया और पार्टी पर राक्षस राजा कंस की तरह व्यवहार करते हुए भगवान कृष्ण के नाम का आह्वान करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरक्षण को 75% तक बढ़ाने के नीतीश कुमार सरकार के कदम की सराहना की और देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव पर चिंता व्यक्त की। वहीं लालू के अलावा महागठबंधन के नेताओं ने बीजेपी के इस कदम को हाल की घटनाओं के आलोक में यादवों के गुस्से को शांत करने का प्रयास बताया। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी . 5 नवंबर को मुजफ्फरपुर में अपनी हालिया रैली में शाह का भाषण स्पष्ट रूप से यादव समुदाय को पसंद नहीं आया। शाह ने सत्तारूढ़ शासन पर अपनी “तुष्टिकरण नीति” के तहत जानबूझकर “यादवों और मुसलमानों की आबादी बढ़ाने” का आरोप लगाया था।

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