Monday, July 15, 2024
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कंगना ने पहले भी बॉलीवुड इन एक्ट्रेस पर लग चुका है बागी होने का आरोप, जाने क्या है इसके पीछे का सच

नई दिल्ली। बॉलीवुड क्वीन कंगना रणौत ने 2006 में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। लेकिन वह सुर्खियों में तब आईं जब उन्होंने 2013 में नेपोटिज्म और बॉलीवुड माफिया के खिलाफ बागी तेवर अपनाया था। उन्होंने बॉलीवुड में अभिनेता और अभिनेत्री की फीस, किरदार और स्क्रीन टाइम के अंतर के खिलाफ खुलकर बात की। तीखे तेवर अपनाते हुए बॉलीवुड के सुपरस्टार्स (सलमान, शाहरुख, आमिर आदि) के साथ काम न करने का निर्णय लिया।

नए टैलेंट को जगह न देने और स्टारकिड्स को बड़े बजट की फिल्मों से लॉन्च करने वाले प्रोड्यूर्स (खासकर करण जौहर) पर निशाना साधा। यही वजह है कि उन्हें बॉलीवुड की बागी क्वीन कहा जाता है। हालांकि कंगना रणौत पहली अभिनेत्री नहीं हैं जिनपर बागी होने का ठप्पा लगाया गया है। इससे पहले फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन सिनेमा कहलाने वाली देविका रानी पर भी बॉलीवुड माफिया निशाना साध चुका है।

भारतीय सिनेमा की पहली महिला के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार की गई, देविका रानी महिला प्रोड्यूसर बनने वाली पहली अभिनेत्री थीं। भारत सरकार की तरह से पहला दादा साहब फाल्के पुरस्कार पाने वाली देविका रानी का जन्म एक अमीर, अंग्रेज़ भारतीय परिवार में हुआ था। आंध्र प्रदेश में जन्मी देविका रानी को नौ साल की उम्र में ही इंग्लैंड के बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया था। इंग्लैंड में पली-बढ़ी देविका की मुलाकात एक भारतीय फिल्म-निर्माता हिमांशु राय से हुई।

मुलाकात के एक साल बाद ही दोनों ने शादी कर ली। शादी के छह साल बाद यानी 1934 में दोनों भारत लौट आए। हिमांशु राय ने कुछ लोगों के साथ साझेदारी में एक प्रोडक्शन स्टूडियो, ‘बॉम्बे टॉकीज़’ की स्थापना की। स्टूडियो ने अगले 5-6 वर्षों में कई सफल फिल्मों का निर्माण किया, और उनमें से कई में देविका रानी ने मुख्य भूमिका निभाई।

भारत लौटने के छह साल बाद 1940 में देविका रानी के पति हिमांशु राय की मृत्यु हो गई। देविका ने स्टूडियो पर नियंत्रण कर लिया और अपने दिवंगत पति के सहयोगियों शशधर मुखर्जी व अशोक कुमार के साथ साझेदारी में कुछ और फिल्मों का निर्माण किया। हालांकि मूवी माफिया को यह कतई मंजूर नहीं था कि कोई अभिनेत्री उन्हें रूल करे। यही कारण था कि जिन फिल्मों की देखरेख देविका रानी किया करती थीं, वह फ्लॉप हो जाती थीं, जबकि साझेदारों की देखरेख में बनी फिल्में हिट हो जाती थीं। मूवी माफिया के खिलाफ आवाज उठाने और उनका असली रूप देखने के बाद 1945 में देविका रानी ने फिल्मों से संन्यास ले लिया। चाहे वो दौर हो या फिर आज का दौर फिल्म निर्माता बनने की कोशिश करने वाली अभिनेत्रियां बॉलीवुड के मठों के निशाने पर हमेशा रहती हैं।

बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा इस सूची में पहले स्थान पर हैं। अभिनेत्री ने 2015 में अपने प्रोडक्शन हाउस – पर्पल पेबल पिक्चर्स की स्थापना की थी। उनके प्रोडक्शन हाउस ने पिछले 7 सालों में मराठी, बंगाली, पंजाबी और भोजपुरी जैसी भाषाओं में 12 फिल्मों का निर्माण किया है। जिसमें से हिंदी भाषा में केवल एक ही फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसके अलावा ‘द व्हाइट टाइगर’ हिंदी और अंग्रेजी में नेटफ्लिक्स पर रिलीज की गई है।

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने 2011 में अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी, पीजेडएनजेड मीडिया (PZNZ Media) लॉन्च की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2022 तक उन्होंने केवल एक शोज – पेरिस में इश्क का निर्माण किया है।

बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल का एच एम प्रोडक्शंस नाम का एक प्रोडक्शन हाउस भी है। उन्होंने दिल आशना है और मोहिनी जैसी फिल्मों का निर्माण किया। इसके अलावा उनके प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले भारत की महिलाएं – आम्रपाली (टीवी श्रृंखला), मिट्टी: विरासत बब्बरन दी (2019), टेल मी ओ खुदा (2011), माटी की बन्नो (टीवी श्रृंखला) (2010), मोहिनी (टीवी मूवी) (1995), दिल आशना है (… दिल जानता है) (1992), नूपुर (टीवी श्रृंखला) (1990) और आवारगी (1990) बनी हैं। यानी 1990 से लेकर 2022 तक केलव 10 शोज।

 

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