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क्या महाराष्ट्र चुनाव में मुसलमान कर रहे हैं ब्लैकमेल?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या महाराष्ट्र चुनाव में मुसलमान ब्लैकमेल कर रहे हैं या नहीं! तब देश आजाद होने वाला था, अभी महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव होने वाला है। तब भी मुसलमानों ने अपने लिए विशेषाधिकार की मांग की थी, अब भी लंबा चिट्ठा तैयार किया है। इस बीच करीब 100 साल का अंतर है। इसलिए सवाल गंभीर है कि क्या इतिहास दुहरा रहा है? दोनों मांगों में चौंकाने वाली समानताएं देखने को मिल रही हैं, जिससे देश में फिर से द्विराष्ट्र सिंद्धांत की मानसिकता को हवा मिलने का डर पैदा हो गया है। ये हैं- 1929 में मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा रखे गए 14 सूत्रीय प्रस्ताव और महाराष्ट्र में ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड की 14 मांगें। इन दोनों ही मांगपत्रों में मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण, नौकरियों और सरकार में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया गया है, जिससे भारत विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले वो दिन याद आने लगे हैं। 1929 का जिन्ना का प्रस्ताव भारत में मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए एक अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग का पहला कदम माना जाता है, वहीं ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल की मांगों में भी उसी की झलक देखी जा सकती है। उलेमा बोर्ड ने अपने 17 सूत्री प्रस्ताव में बताया है कि महाराष्ट्र में अगर कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार बनी तो उसे क्या-क्या चाहिए। दूसरी तरफ, एमवीए का उलेमा बोर्ड की मांगों के समर्थन में उतरना द्विराष्ट्र सिद्धांत की मानसिकता को और मजबूत कर सकता है।

जिन्ना के 14 सूत्रीय प्रस्ताव में संघीय ढांचे के साथ प्रांतों को अधिक स्वायत्तता देने; सभी निर्वाचित निकायों में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने; केंद्र में मुस्लिमों को कम से कम एक तिहाई प्रतिनिधित्व देने; पंजाब, बंगाल और NWFP में मुस्लिम बहुमत वाले क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं करने; धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने; मुस्लिम हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी विधेयक या प्रस्ताव का विरोध करने के लिए मुस्लिम सदस्यों को वीटो पावर देने जैसे मुद्दे शामिल थे।

इसके अलावा, सिंध को बॉम्बे प्रेसीडेंसी से अलग करने; NWFP और बलूचिस्तान में अन्य प्रांतों की तरह ही सुधार लागू करने; सभी सरकारी सेवाओं और स्थानीय स्वशासित निकायों में मुस्लिमों को उनकी योग्यता के आधार पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने; मुस्लिम संस्कृति और शिक्षा की रक्षा के लिए संवैधानिक गारंटी देने और कैबिनेट में कम से कम एक तिहाई मुस्लिम मंत्रियों को शामिल करने की मांग भी की गई थी। इसके साथ ही, जिन्ना ने यह भी मांग की थी कि केंद्र सरकार भारतीय संघ बनाने वाले राज्यों की सहमति के बिना संविधान में कोई बदलाव नहीं कर सकेगी।

मोहम्मद अली जिन्ना ने 28 मार्च, 1929 को यह 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा था। इसमें भारत का बंटवारा करवाने वाली मुस्लिम लीग का नजरिया स्पष्ट होता है। इस प्रस्ताव के जरिए मुस्लिम लीग ने भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए विशेषाधिकारों की मांग की थी। दूसरी तरफ, लगभग 100 साल बाद ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल ने भी महाराष्ट्र में 14 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें से कुछ मांगें जिन्ना के 14 सूत्रीय प्रस्ताव से मिलती-जुलती हैं। उलेमा काउंसिल ने वक्फ बिल का विरोध; नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिमों के लिए 10% आरक्षण; महाराष्ट्र के 48 जिलों में मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों की जब्त की गई जमीन का सर्वेक्षण कराने; महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के विकास के लिए 1,000 करोड़ रुपये देने; 2012 से 2024 तक दंगों के सिलसिले में कैद बेगुनाह मुस्लिमों को रिहा करने और मौलाना सलमान अजहरी को जेल से रिहा करने की मांग की है।

इसके अलावा, उलेमा बोर्ड ने यह भी मांग की है कि महाराष्ट्र में मस्जिदों के इमामों और मौलानाओं को हर महीने 15,000 रुपये पेंशन दी जाए; पुलिस भर्ती में मुस्लिम युवाओं को प्राथमिकता दी जाए; पुलिस भर्ती में शिक्षित मुस्लिम समुदाय को प्राथमिकता दी जाए; रामगिरी महाराज और नीतेश राणे को जेल में डाला जाए; ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के मुफ्ती मौलाना और अलीम हाफिज मस्जिद के इमाम को सरकारी समिति में शामिल किया जाए; इस विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय के 50 उम्मीदवारों को टिकट दिया जाए; राज्य वक्फ बोर्ड में 500 कर्मचारियों की भर्ती की जाए और महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर से अतिक्रमण हटाने के लिए विधानसभा में एक कानून पारित किया जाए।

उलेमा बोर्ड आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने और भड़काऊ बयान देने वाले मौलाना सलमान अजहरी को छोड़ने की मांग कर रहा है। बोर्ड ने कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले को अपनी मांगों की चिट्ठी सौंपते हुए एमवीए के समर्थन का खुला ऐलान किया है। उसने अपनी 17 मांगों में आततायी मुसलमानों की जेल से रिहाई तो हिंदू संतों और बीजेपी नेताओं को गिरफ्तारी की मांग की है। साफ है कि उलेमा बोर्ड मुस्लिम सांप्रदायिकता को हवा देना चाहता है, लेकिन हिंदुओं के मुंह पर ताले जड़ने का सपना देखता है। हैरत की बात है कि वोटों के लिए उलेमा बोर्ड की इस ब्लैकमेलिंग टैक्टिक्स को कांग्रेस गठबंधन ने खुले दिल से स्वीकार लिया है।

 

क्या भारत के राष्ट्रपति से ताकतवर होता है अमेरिका का राष्ट्रपति?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अमेरिका का राष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति से ताकतवर होता है या नहीं! रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सत्ता में दमदार वापसी की है। वह अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के कड़े मुकाबले में उन्होंने डेमोक्रेट प्रत्याशी कमला हैरिस को रेस से बाहर कर दिया। नए चुने गए राष्ट्रपति 20 जनवरी 2025 को 4 साल के लिए अपने पद की शपथ लेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप को जीत की बधाई दे दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति को दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों में से एक माना जाता है। ऐसे में जानते हैं कि ट्रंप को राष्ट्रपति बनने पर क्या-क्या मिल सकता है़? उन्हें क्या उड़ता ह्वाइट हाउस भी मिलेगा? अमेरिकी राष्ट्रपति को देश-विदेश के दौरों के लिए एक मरीन हेलीकॉप्टर और एयर फोर्स वन प्लेन भी मिलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति वॉशिंगटन में अपने आधिकारिक आवास से एयरपोर्ट तक मरीन वन हेलीकॉप्टर में जाते हैं। इसमें भी उनके साथ मरीन कमांडो और सीक्रेट सर्विस के अफसर होते हैं।

एयरफ़ोर्स वन हवाई जहाज में करीब 4 हजार वर्ग फुट जगह होती है। इसे ‘फ्लाइंग कैसल’ और ‘फ्लाइंग व्हाइट हाउस’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह बेहद सुरक्षित है। इसमें राष्ट्रपति के लिए अपने रोजाना के कामकाज को करने के लिए व्हाइट हाउस की तरह ही सभी जरूरी सुविधाएं होती हैं। इसमें राष्ट्रपति के अलावा एक बार में 100 से ज्यादा लोग सफर कर सकते हैं। एयरफोर्स वन के साथ उसके जैसे दिखने वाले 2 और Boeing 747-200Bs विमान घेरा बनाकर उड़ते हैं। एक तीसरा जंबो विमान भी साथ चलता है, जिसमें ऑफिस स्टॉफ और सुरक्षा अधिकारी होते हैं। 1953 में पहली बार एयर फोर्स वन का आइडिया आया था। उस वक्त आइजनआवर राष्ट्रपति थे। उस वक्त उनका विमान कमर्शियल एयरलाइन फ्लाइट के रास्ते में आ गया था।

एयरफोर्स वन में बेहद तगड़ी सुरक्षा होती है। इसमें डायरेक्टेड इन्फ्रारेड काउंटर मेजर्स (DIRCM) सिस्टम लगा होता है, जो किसी भी हाल में राष्ट्रपति की सुरक्षा में मुस्तैद रहता है। इसमें किसी दुश्मन की मिसाइलों को नाकाम करने का सिस्टम होता है, एयरफोर्स वन की तरफ बढ़ रही मिसाइलों को हवा में ही मार गिराता है। एयरफोर्स वन से ही किसी आपात स्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति को परमाणु हमले की शुरुआत करने की अनुमति है। इसके लिए उसे कांग्रेस की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। प्लेन में कई तरह के जैमर्स लगे होते हैं।

एयरफोर्स वन में 386 किमी लंबी वायरिंग शील्ड होती है। यह एक तरह से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कवच जैसा होता है, जो किसी भी परमाणु हमले से बचाने में मददगार होता है। अमेरिका के राष्ट्रपति एंड्रयूज एयर फोर्स बेस से अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लेते हैं। एयरफोर्स वन में एक कॉन्फ्रेंस रूम भी होता है। इसे सिचुएशन रूम भी कहा जाता है। इसमें एक प्लाज्मा टीवी लगा होता है, जिससे राष्ट्रपति टेलीकॉन्फ्रेंसिंग से अधिकारियों को संबोधित करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को यात्रा करने के लिए एक लिमोजिन कार मिलती है। उनके साथ चलने वाले सीक्रेट सर्विस के अफसरों का लिमोजिन कारों का काफिला होता है। किसी देश के दौरे पर राष्ट्रपति के साथ एक डमी राष्ट्रपति भी होता है, जिसे हूबहू राष्ट्रपति जैसा ही तैयार किया जाता है, ताकि दुश्मन कन्फ्यूज रहे। लिमोजिन कारें एआई सिक्योरिटी और एडवांस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस होती हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति एक सरकारी सेवक माना जाता है, जो सीधे चुनाव से जीतकर आता है। इसीलिए वो सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होता है। ऐसे में देश के सरकारी खजाने से उसकी सैलरी और खर्चों का भुगतान किया जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का वेतन किसी अमेरिकी से 6 गुना से ज्यादा होती है। एक अमेरिकी औसतन सालाना तकरीबन 53 लाख रुपए कमाता है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति की सैलरी करीब 3.35 करोड़ रुपए सालाना होती है। उसे बतौर खर्च करीब 42 रुपए और मिलते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की सैलरी में 2001 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। 2001 में जब जॉर्ज डब्ल्यू बुश राष्ट्रपति थे, तभी वेतन बढ़ा था।

अमेरिका के राष्ट्रपति का सरकारी निवास और ऑफिस वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस है। उसे यहां सब कुछ फ्री मिलता है। अगर ट्रंप जीतते हैं तो उन्हें व्हाइट हाउस आने पर पहली बार करीब 85 लाख रुपए मिलेंगे, जिसे वो मनमुताबिक अपने सरकारी निवास को सजाने और व्यवस्थित करने में खर्च कर सकते हैं। राष्ट्रपति को मनोरंजन, स्टाफ और कुक के लिए सालाना 60 लाख रुपए भी मिलते हैं। उन्हें मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति को कई और भी सुविधाएं मिलती हैं। अमेरिका के पहले राष्ट्रपति को सालाना करीब 1.68 लाख रुपए वेतन मिलता था। 1789 के हिसाब से यह बहुत बड़ी रकम थी। राष्ट्रपति के पद से रिटायर होने के बाद तकरीबन 2 करोड़ रुपए पेंशन मिलती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के मुकाबले भारतीय राष्ट्रपति की सैलरी बहुत कम होती है। भारत के राष्ट्रपति को सालाना 60 लाख रुपए वेतन मिलता है। साथ ही राष्ट्रपति को फ्री मेडिकल, टेलीफोन बिल, आवास, बिजली समेत कई सारे भत्ते भी मिलते हैं। राष्ट्रपति को आने-जाने के लिए गाड़ी मिलती है। राष्ट्रपति के पास 86 स्पेशल गार्ड होते हैं, जिन्हें प्रेसिडेंशियल बॉडीगार्ड कहा जाता है।

भारतीय राष्ट्रपति के पास सीमित शक्तियां होती हैं। हमारे देश में वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री के पास होती हैं। भारतीय राष्ट्रपति केंद्रीय कैबिनेट की सलाह पर ही काम करते हैं। हालांकि, वो तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर होते हैं। भारत में कोई भी बिल तभी कानून बनता है, जब राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर करते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति ही सुप्रीम पावर होते हैं। वो बिना सलाह के भी कोई कानून या आदेश पारित कर सकते हैं, क्योंकि वो जनता के बीच सीधे चुनकर आते हैं। किसी देश पर परमाणु हमला करना है तो भारत में उसका आदेश सिर्फ प्रधानमंत्री दे सकते हैं। वहीं,अमेरिका में परमाणु हमले का आदेश देने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है।

 

क्या अब इंडिगो शुरू करने वाला है बिजनेस क्लास?

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इंडिगो अब बिजनेस क्लास शुरू करने वाला है या नहीं! देश के एविएशन सेक्टर में विस्तारा एयरलाइंस का एयर इंडिया में विलय होने के बाद अब एक नई दौड़ शुरू होने वाली है। यह है ‘बिजनेस क्लास रन’। जिसकी शुरूआत 14 नवंबर से देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइंस इंडिगो की ओर से दिल्ली-मुंबई रूट की फ्लाइट में 12 बिजनेस क्लास सीट से हो रही है। देश में अभी तक बिजनेस क्लास का सबसे बड़ा बिजनेस एयर इंडिया और मर्जर से पहले विस्तारा के पास ही था। जिसमें अब इंडिगो सेंध लगाने के लिए मैदान में कूद गया है। इसका ऐलान पांच अगस्त को एयरलाइंस की 18वीं वर्षगांठ पर इंडिगो के एमडी राहुल भाटिया और सीईओ पीटर एल्बर्स ने किया था। अब इस ऐलान को लागू करने का समय आ गया है। जो 14 नवंबर से शुरू हो रहा है। इसी के साथ ही देश में बिजनेस क्लास यात्रियों को अपनी-अपनी फ्लाइट में खींचने के लिए एक नया युद्ध शुरू हो जाएगा। इंडिगो ने घोषणा भी की थी कि उनके बिजनेस क्लास में यात्रियों को वर्ल्ड क्लास आरामदायक सीट और सुविधाएं मिलेंगी। जिसमें एक्स्ट्रा लगेज कैरी करने के साथ ही फेयर भी बहुत अधिक नहीं होगा। इंडिगो ने दिल्ली-मुंबई रूट पर बिजनेस क्लास के सफर की शुरूआत 18018 रुपये से की है। जबकि अन्य एयरलाइंस का इस रूट पर बिजनेस क्लास का किराया इससे कहीं अधिक है।

फिलहाल, इंडिगो अपने 220 सीट वाले ए-321 नियो एयरक्राफ्ट में 12 बिजनेस क्लास सीटों से इसकी शुरूआत कर रहा है। बाकी 208 सीट इकॉनमी होंगी। लेकिन आने वाले समय में इंडिगो की योजना है कि वह देश के तमाम बिजनेस एयर रूटों पर अपने एयरक्राफ्ट में बिजनेस क्लास सर्विस देना शुरू करे। अभी तक इंडिगो इकॉनमी क्लास के लिए ही जाना जाता था। यह पहली बार होगा जब इंडिगो बिजनेस क्लास में भी अपने हाथ आजमाने उतरा है।

दिल्ली-मुंबई रूट पर भी इंडिगो अगले साल जनवरी तक अपने तमाम एयरक्राफ्ट में बिजनेस क्लास सर्विस देना शुरू कर देगा। इसके बाद 2025 मार्च के अंत तक इसमें बेंगलुरु और चेन्नई वाले एयर रूट पर भी यह सर्विस शुरू करने की योजना है। बाकी 2026 मई तक इंडिगो अपने बेड़े के सभी एयरक्राफ्ट में बिजनेस क्लास सर्विस देने की प्लानिंग कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि विस्तारा का एयर इंडिया में विलय होने के बाद इंडिगो के लिए भी यह बड़ी चुनौती होगी। क्योंकि, एयर इंडिया अपने पहले के मुकाबले और अधिक एयरक्राफ्ट के साथ यात्रियों को बिजनेस क्लास की सर्विस दे सकेगी।

देश में भारतीय एयरलाइंस में अभी तक एयर इंडिया और मर्जर से पहले विस्तारा का ही बिजनेस क्लास में वर्चस्व था। अब इसमें इंडिगो एयरलाइंस भी आ गई है। ऐसे में आने वाले समय में एयरलाइंस इकॉनमी क्लास की तरह बिजनेस क्लास के लिए भी यात्रियों को सस्ती टिकट उपलब्ध करा सकती हैं। इससे और कुछ हो या ना हो, लेकिन इतना जरूर है कि यात्रियों को इसका फायदा जरूर होता दिखाई दे रहा है। जिसमें यात्रियों को और अधिक आरामदायक सीटें, पसंद का लजीज खाना-पीना, एक्स्ट्रा लगेज और ऑन बोर्ड अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं।

इसी बीच बता दे कि छठ पर पूर्वांचल जाने के लिए दिल्ली ही नहीं, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरू और हैदराबाद के तमाम फ्लाइट्स में मारामारी है। ट्रेवल एजेंट राकेश अरोड़ा का कहना है कि फेस्टिव सीजन में एयर फेयर हर बार ही महंगे होते हैं। इस बार कुछ डेस्टिनेशन से पूर्वांचल के फ्लाइट्स कुछ अधिक महंगे आ रहे हैं। इसके बावजूद आसानी से फ्लाइट की बुकिंग नहीं मिल पा रही हैं। ट्रेनों का हाल तो इससे भी बुरा है। फ्लाइट में कुछ अधिक पैसा देकर कम से कम टिकट तो मिल जा रही है, ट्रेनों में तो एजेंट को पैसा देने के बावजूद कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रही है। हालांकि, इस मारामारी को देखते हुए कुछ लोग समय रहते सड़क मार्ग से भी निकल रहे हैं।

इस हिसाब से यह पटना और दरभंगा जाना इन देशों में जाने से महंगा पड़ रहा है। हालांकि, 6 अक्टूबर और इसके बाद से पटना, दरभंगा और रांची से दिल्ली, मुंबई, गुजरात और दक्षिण भारत समेत देश के अन्य शहरों में जाने वाली तमाम फ्लाइटों के किराए एकदम बेहद कम होते हुए आधे से भी कम हो गए हैं। यानी, छछ पूजा पर बिहार जाने वाली तमाम फ्लाइटों के किराए महंगे हो गए हैं, जबकि छठ के बाद से वही किराए आधे से भी कम में मिल रहे हैं।

त्योहारों के मौसम में यह भी बड़ी विडंबना है। रेलवे में कन्फर्म टिकट नहीं मिलता तो फ्लाइटों के किराए आसमान छूने लगते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय समेत एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए को सख्त कदम उठाने चाहिए। एयरलाइंस को केवल चेतावनी देने से काम नहीं चलने वाला। इस पर कंट्रोल भी करना होगा। हालांकि, पॉलिसी के तहत एयर फेयर कंट्रोल करना सरकार के हाथ में नहीं है, लेकिन होली, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों पर फ्लाइटों की बढ़ती डिमांड को देखते हुए और अधिक फ्लाइट तो ऑपरेट की ही जा सकती हैं। इससे एयर फेयर में बेतहाशा बढ़ोतरी होने से कुछ राहत मिल सकेगी।

 

क्या बीजेपी से एकजुट हो रहे हैं गैर मुस्लिम समुदाय?

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यह सवाल उठाने आदमी है कि क्या गैर मुस्लिम समुदाय है बीजेपी से एकजुट हो रहे हैं या नहीं! वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर संसदीय समिति में ही नहीं, बल्कि संसद के बाहर भी जबरदस्त विवाद छिड़ा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा होता दिख रहा है। विवादों ने बीजेपी के इस दावे को बल दिया है कि वक्फ बोर्ड के पास मनमाना अधिकार हैं। बीजेपी को इस दलील से अन्य समुदायों तक अपनी बात पहुंचाने में भी मदद मिल रही है। विपक्षी दलों के शासन वाले प्रदेशों केरल और कर्नाटक में वक्फ बोर्ड ने कथित अतिक्रमणकारियों को जमीन से बेदखल करने के प्रयासों के कारण विवाद पैदा हो गया है, जिसका फायदा बीजेपी उठा रही है। केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) जबकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। दोनों इन मामलों पर बचाव की मुद्रा में हैं, जबकि भाजपा लगातार हमलावर है। वक्फ विधेयक पर विचार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने हाल ही में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के अनुरोध पर कर्नाटक स्थल का दौरा किया। जेपीसी चेयरमैन के इस दौरे ने आग में घी डालने का काम किया है।

विधेयक में वक्फ बोर्ड को मिली असीमित शक्तियों को नियंत्रित करने का प्रस्ताव है। कर्नाटक में वक्फ बोर्ड पर मंदिरों सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से संरक्षित स्थलों पर दावा करने का आरोप है। केरल में चर्च खुद विवाद में शामिल हो गया है क्योंकि वक्फ बोर्ड ने एर्नाकुलम जिले में जिस 400 एकड़ से अधिक जमीन पर दावा किया है वहां बसे 600 से अधिक परिवारों में से अधिकांश ईसाई हैं। प्रभावशाली सिरो मालाबार चर्च वक्फ के दावे के खिलाफ पूरे केरल और लगभग एक हजार चर्चों में विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहा है। एर्नाकुलम-अंगमाली आर्कडायोसीज के मेजर आर्कबिशप मार राफेल थॉटिल ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। केरल में ईसाइयों की जनसंख्या और प्रभाव मुसलमानों के बराबर है। ऐसे में भाजपा राज्य में पैठ बनाने के लिए चर्च को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। दोनों अल्पसंख्यक समुदायों के बीच वर्चस्व को लेकर अंतर्निहित तनाव का मतलब है कि यह रणनीति पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकती है।

भाजपा नेता कर्नाटक और केरल, दोनों जगह आंदोलन में सबसे आगे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वक्फ की जमीन को लेकर इसी तरह का तनाव अन्य राज्यों में भी देखने को मिल सकता है। ऐसा प्रत्येक विवाद बीजेपी के दावे को मजबूत करता है कि वक्फ के रेग्युलेशन की कितनी ज्यादा जरूरत है। केरल बीजेपी के नेता बी गोपालकृष्णन कहते हैं, ‘कल सबरीमाला (हिंदू तीर्थस्थल) वक्फ की संपत्ति बन जाएगा। (भगवान) अयप्पा को (मंदिर) खाली करना होगा। क्या हमें इसकी इजाजत देनी चाहिए? वेलांकन्नी क्रिश्चियन श्राइन (तमिलनाडु में) ईसाइयों के लिए महत्वपूर्ण है। अगर वक्फ जमीन पर अपना दावा करता है, तो तीर्थस्थल बोर्ड के पास चला जाएगा… इसलिए हम विधेयक (वक्फ संशोधन विधेयक) लेकर आए हैं।’

वहीं, कर्नाटक के दौरे और स्थानीय निवासियों से मुलाकात के बाद जेपीसी चेयरमैन जगदंबिका पाल ने कहा कि वक्फ बोर्ड की तरफ से धार्मिक संस्थानों सहित विभिन्न संपत्तियों पर स्वामित्व का लगातार दावा करना चिंता का विषय है और वह इस मामले को संसदीय समिति के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न समूहों से ऐतिहासिक मंदिरों को भी बिना किसी सूचना के वक्फ संपत्ति घोषित करने के बारे में ज्ञापन मिले हैं।

इस मुद्दे पर बीजेपी के एक नेता का बयान प्रकाशित किया है। बीजेपी नेता का कहना है कि वक्फ भूमि मुद्दे पर पार्टी का रुख कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसकी शक्तियों का नियमन हमेशा से संघ के एजेंडे में रहा है और पार्टी इस विधेयक को ‘आम मुसलमानों के लिए न्याय’ के रूप में पेश कर रही है। तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद मोदी सरकार के वक्फ (संशोधन) विधेयक में वक्फ कानून के मौजूदा ढांचे को काफी हद तक बदलने और वक्फों को नियंत्रित करने की शक्ति मूलतः मुस्लिमों द्वारा संचालित बोर्डों और न्यायाधिकरणों से राज्य सरकारों को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में यह विधेयक पेश करते हुए किसी भी धार्मिक निकाय की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने के किसी भी इरादे से इनकार किया था। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा वक्फ अधिनियम, 1995 अपने उद्देश्य में सफल नहीं रही है और संशोधन से वह सारे सुधार होंगे जो पिछली कांग्रेस सरकारें करने में विफल रहीं।

केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि संशोधन वक्फ बोर्ड के कामकाज में सुधार करेंगे और उन लोगों को अधिकार देंगे जिन्हें वंचित किया गया है। भाजपा ने तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को भी मुस्लिम महिलाओं की मदद की दिशा में उठाया गया एक कदम बताया था। ठीक उसी प्रकार वक्फ विधेयक को भाजपा मुस्लिम समुदाय के व्यापक हितों को साधने के रूप में पेश कर रही है। पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल मंदिर और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने के दर्जनों उदाहरणों का दावा कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इन अवैध कब्जों से कुछ लोगों को फायदा हो रहा है जबकि आम मुसलमान बिल्कुल अछूता है।

मुस्लिम नेता भी दबी जुबां से स्वीकार करते हैं कि मौजूदा वक्फ कानून ने वक्फ बोर्डों को आततायी बना दिया है क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों ने 1995 और 2013 में मनामाने कानून लाए थे। 1995 का कानून वक्फ न्यायाधिकरण के फैसलों को किसी भी दीवानी अदालत से ऊपर रखा गया था। 2013 में लाए गए कानून के कुछ प्रावधानों में संशोधन करके वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण के लिए दो साल तक के कारावास का प्रावधान किया गया था। तभी वक्फ संपत्ति की बिक्री, उपहार, अदला-बदली, गिरवी या ट्रांसफर को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

 

पुष्पा 2 का ट्रेलर रिलीज:पहले पार्ट से ज्यादा खतरनाक रोल में दिखे अल्लू अर्जुन; फहाद फासिल से फिर से भिड़ेंगे एक्टर

मोस्ट अवेटेड फिल्म पुष्पा 2 का ट्रेलर रिलीज हो गया है। लगभग 3 मिनट के इस ट्रेलर में अल्लू अर्जुन का खूंखार अवतार देखने को मिला है। फिल्म में अल्लू के अलावा रश्मिका मंदाना, फहाद फासिल भी लीड रोल में हैं। सुकुमार द्वारा निर्देशित और मैथरी मूवी मेकर्स द्वारा निर्मित यह फिल्म 5 दिसंबर को रिलीज होगी। कहानी एक डायलॉग से शुरू होती है, जहां सुनाई देता है कि कौन है यह आदमी, जिसे न पैसों की परवाह है और न ही पावर का खौफ। जरूर ही इसे गहरी चोट लगी है। इसके बाद पुष्पा बने अल्लू अर्जुन की धमाकेदार एंट्री होती है, जहां वे कहते हैं – पुष्पा… ढाई अक्षर नाम छोटा है, लेकिन साउंड बहुत बड़ा। फिर पुष्पा का जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस देखने को मिला है। पुष्पा की पत्नी बनीं रश्मिका की अल्लू के साथ बेहतरीन केमिस्ट्री भी देखने को मिली है। कहानी में आगे दिखाया गया है कि आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों से शुरू हुई चंदन की लकड़ी की तस्करी से किंग बना पुष्पा का बिजनेस अब इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंच गया है। जहां वो देसी दुश्मनों के साथ-साथ विदेशी दुश्मनों से भी अपने हक के लिए लड़ता दिखा है। पुलिस ऑफिसर बने फहाद फासिल के साथ भी पुष्पा का गजब फेस ऑफ देखने को मिला है। दमदार डायलॉग्स से भरपूर है ट्रेलर पुष्पा… ढाई अक्षर नाम छोटा है, लेकिन साउंड बहुत बड़ा- अल्लू अर्जुन पुष्पा सिर्फ एक नाम नहीं है, पुष्पा मतलब ब्रांड श्रीवल्ली मेरी बायको है…जब पति अपनी बायको की सुने तो क्या होता है…पूरी दुनिया को दिखाएगा- अल्लू अर्जुन जो मेरे हक का पैसा है.. वो चार आना हो या आठ आना…वो सातवें आसमान पर हो या सात समंदर पार हो…पुष्पा का उसूल, करने का वसूल- अल्लू अर्जुन पुष्पा को नेशनल खिलाड़ी समझे क्या…इंटरनेशनल है- अल्लू अर्जुन 2021 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी ‘पुष्पा: द राइज’ 2021 में रिलीज हुई ‘पुष्पा: द राइज’ साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी। सभी वर्जन मिलाकर इस फिल्म ने लाइफ टाइम इंडिया में 313 और वर्ल्डवाइड 350 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था। यह सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्मों की लिस्ट में छठे नंबर पर है।

आकिब जावेद पाकिस्तान के नए हेड कोच होंगे:जेसन गिलेस्पी की जगह लेंगे, जिम्बाब्वे दौरे से शुरू कर सकते है कोचिंग

पूर्व पाकिस्तानी बॉलर आकिब जावेद पाकिस्तानी टीम के नए हेड कोच बन सकते हैं। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक जेसन गिलेस्पी को हटाकर आकिब जावेद को सभी फॉर्मेट की जिम्मेदारी दी जा सकती है। गिलेस्पी को हाल ही में व्हाइट बॉल फॉर्मेट के हेड कोच गैरी कर्स्टन के रिजाइन देने के बाद पाकिस्तान का कोच बनाया गया था। आकिब अभी पाकिस्तान मेंस क्रिकेट सिलेक्शन कमेटी में बतौर कन्वीनर काम कर रहे हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) इस डिसीजन का एनाउंसमेंट सोमवार को कर सकता है। जिम्बाब्वे दौरे से शुरू कर सकते है कोचिंग पाकिस्तान क्रिकेट टीम सोमवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरा और आखिरी टी-20 मैच खेलेगी। इसके बाद टीम को जिम्बाब्वे का दौरा करना है, जहां आकिब जावेद को व्हाइट-बॉल हेड कोच बनाया जाएगा। आकिब पूर्व में पकिस्तान टीम के असिस्टेंट कोच भी रह चुके हैं। उन्हें 2013 में UAE ने अपना हेड कोच बनाया था। गैरी कर्स्टन ने छह महीने में कोचिंग छोड़ी हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने कप्तानों और मुख्य कोचों से चयन करने का अधिकार छीन लिया है। यही कारण था कि गैरी कर्स्टन ने छह महीने बाद ही पद छोड़ दिया था। जावेद सिलेक्शन कमेटी के कन्वीनर जावेद को हाल ही में PCB के पांच राष्ट्रीय चयनकर्ताओं में में शामिल किया गया था। जिसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने घरेलू मैदान पर अच्छा प्रदर्शन किया और पाक टीम ने तीन साल और आठ महीने के बाद घरेलू टेस्ट सीरीज जीती। रिपोर्ट के मुताबिक जावेद ने सपाट पिचों के बजाय स्पिन के अनुकूल पिच बनाने पर जोर दिया था। ऐसा माना जाता है कि गिलेस्पी कोच थे, लेकिन जावेद फैसले ले रहे थे। वनडे वर्ल्ड कप 2023 के बाद मिकी आर्थर ने इस्तीफा दिया
ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 के बाद PCB ने अपने सपोर्ट स्टाफ में कई बदलाव किए। टीम वनडे वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाइ नहीं कर सकी थी। मिकी आर्थर, ग्रांट ब्रैडबर्न और एंड्रयू पुटिक ने वर्ल्ड कप के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। आर्थर को अप्रैल 2023 में पाकिस्तान मेंस क्रिकेट टीम का निदेशक नियुक्त किया गया था। ब्रैडबर्न को पिछले साल की शुरुआत में टीम का मुख्य कोच घोषित किया गया था।

लाठीचार्ज के बीच पटना में ‘पुष्पा-2’ का ट्रेलर लॉन्च:फैंस ने फेंकी चप्पल, भीड़ कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने चलाई लाठी

पटना के गांधी मैदान में आज फिल्म ‘पुष्पा 2: द रूल’ का ट्रेलर लॉन्च हो गया। लॉन्चिंग से पहले पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। गांधी मैदान में फैंस की भारी भीड़ जमा हो गई है। करीब 1 लाख लोग गांधी मैदान पहुंचे हैं। भीड़ ने स्टेज की तरफ चप्पल फेंकी, जिसके बाद लोग बेकाबू होने लगे। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठी चलाई। गांधी मैदान में साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना को देखने भीड़ बेकाबू हो गई। लोग गांधी मैदान में लगी 40 मीटर ऊंची होर्डिंग्स में चढ़ गए। सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना गांधी मैदान पहुंच गए हैं। फैंस की भीड़ उनके पीछे भागती दिखी। गांधी मैदान में कार्यक्रम चल रहा है। वहीं बार-बार भीड़ बेकाबू हो रही है। जिसे कंट्रोल करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ रहा है। इससे पहले पटना एयरपोर्ट पहुंचने पर अल्लू अर्जुन ने अपने फैंस की रिक्वेस्ट पर फिल्म पुष्पा का सिग्नेचर स्टाइल किया। दोनों कलाकार पटना के ताज होटल में ठहरे हैं। ये खबर भी पढ़ें साउथ स्टार के जलवे:360 करोड़ की नेटवर्थ के मालिक हैं अल्लू अर्जुन, हैदराबाद में है 100 करोड़ का आलीशान घर! अनबन की खबरों के बीच अल्लू अर्जुन का वीडियो वायरल:चाचा पवन कल्याण की तारीफ करते नजर आए; आंध्र प्रदेश चुनाव के दौरान थीं मनमुटाव की खबरें

अबकी बार IPL में झारखंड के 8 प्लेयर:मियांदाद का रिकॉर्ड तोड़ने वाले कुशाग्र, आदिवासी प्लेयर रॉबिन मिंज और सेल्समैन का बेटा मैदान में

इस बार का IPL झारखंड के लिए खास होने वाला है। राज्य के आठ प्लेयर IPL 2025 में नजर आ सकते हैं। इसमें एक पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद का रिकॉर्ड तोड़ने वाला कुमार कुशाग्र हैं तो दूसरा सेल्समैन का बेटा सुशांत मिश्रा है। तीसरा खिलाड़ी न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में अलग पहचान रखता है। वह देश का पहला आदिवासी खिलाड़ी रॉबिन मिंज है। इसके अतिरिक्त ईशान किशन, अनुकूल राय, उत्कर्ष सिंह, विराट सिंह और रवि यादव की बोली लगेगी। इनमें क्रिकेटर ईशान किशन, अनुकूल राय झारखंड से भले खेलते हैं, लेकिन बाहर के हैं। इनमें से ईशान किशन का बेस प्राइस सबसे अधिक दो करोड़ रुपए है। बाकी प्लेयर का 30 लाख रुपए है। पिछली बार बिकने के बाद भी IPL नहीं खेल पाए थे रॉबिन पिछली बार रॉबिन को गुजरात टाइटंस ने 3.6 करोड़ रुपए में खरीदा था। लेकिन वह सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। इसक कारण IPL से दूर रहे। इसी तरह कुमार कुशाग्र को दिल्ली कैपिटल्स ने कुल 7.2 करोड़ रुपए की मोटी रकम दी थी। सुशांत मिश्रा की बात करें तो पिछले ऑक्शन में गुजरात टाइटंस ने 2.2 करोड़ रुपए दिए थे। झारखंड से निकला पहला आदिवासी IPL प्लेयर देश का पहला आदिवासी क्रिकेटर रॉबिन मिंज हैं। वह झारखंड की राजधानी रांची से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के पन्दन टोली के रहने वाले हैं। रॉबिन मिंज का पूरा परिवार फिलहाल रांची के नामकुम में रहता है। रॉबिन के पिता फ्रांसिस जेवियर मिंज फौज से रिटायर हैं। वर्तमान में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट में गार्ड की नौकरी करते हैं। जबकि, मां एलिस मिंज गृहणी हैं। रॉबिन के पिता फ्रांसिस जेवियर मिंज चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। लेकिन उसका पान्दनटोली गांव आना जाना लगा रहता है। रॉबिन का पूरा परिवार भारतीय सेना में रह चुका है। रॉबिन मिंज का क्रिकेट के प्रति दिवानगी गुमला से शुरू होती है। उसने कई मैच गांव के मैदान में खेले हैं। यहां से लगातार आठ साल तक प्रैक्टिस कर आईपीएल तक का सफर तय किया है। वह जिला लेबल पर कई डिस्ट्रिक गेम खेल चुके हैं। साथ ही राज्य स्तर पर जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। साल 2020-21 में अंडर-19 के ओपन ट्रायल के दौरान उसने अपने पहले ही ट्राई मैच में 60 रन बनाए थे। इसके बाद वह झारखंड की अंडर 23 टीम की ओर से खेलते हुए दोहरा शतक लगाया। फिर विदर्भ के खिलाफ 130 रन जड़ दिए। इन्हीं पारियों की बदौलत रॉबिन आज यहां पहुंचा है। पिता सेल्समैन, क्रिकेट को मानते हैं भगवान रांची के कटहल मोड़ इलाके में रहने वाला सुशांत मिश्रा क्रिकेट को भगवान मानते हैं। उसके पिता समीर मिश्रा पेशे से सेल्समैन हैं। जबकि मां ममता मिश्रा गृहणी हैं। बेटे के आईपीएल तक के सफर को लेकर पिता कहते हैं वह क्रिकेट को खेल नहीं भगवान की तरह समझाता है। यही वजह था कि वह खेल के दौरान घायल भी हुआ या बीमार पड़ा तब भी वह खेल के मैदान में ही नजर आता था। वह बताते हैं कि जितना समय खेल के दौरान देता था, उतना ही समय तब भी बिताता था जब वह घायल या बीमार रहता था। कोच भी जब कहते थे कि तुम्हें रेस्ट करने की जरूरत है, तुम क्यों आ गए तब वह कहता था कि घर में बोर हो जाऊंगा, इसलिए यहां चला आता हूं। वह हमेशा कहता था कि मुझे नंबर वन रहना है। माता-पिता से मिली जानकारी के अनुसार क्रिकेट के प्रति लगाव बचपन से रहा है। इसे देखते हुए हमने शशिकांत पाठक के अरगोड़ा कोचिंग में भेजा। साल 2012-13 में वह रांची जिला के लिए खेलना शुरू किया। इसी साल वह खड्गपुर में हुए टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। बतौर खिलाड़ी यह उसका पहला टुर्नामेंट था। वह बताते हैं कि जब वह 13 साल का था तभी अंडर 14 खेलने लगा था। इसी तरह 14 साल होते-होते वह अंडर 16 खेलने लगा था। यह क्रम आगे तक चलता रहा। पिता के मुताबिक क्रिकेट की जर्नी लगातार रही है। इंडिया ए टीम और बी टीम में रहा। वह बताते हैं कि सुशांत को राहुल द्रविड़ का सानिध्य मिला है।
कुशाग्र ने तोड़ा है पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद का रिकॉर्ड जमशेदपुर के रहने वाले कुमार कुशाग्र क्रिकेट जगत में तेजी से उभर रहे हैं। वह विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं। कुशाग्र का पैतृक आवास पटना जिले के बाढ़ स्थित वाजिदपुर में है, लेकिन उनका परिवार पिछले 30 वर्षों से जमशेदपुर में रह रहा है। कुमार कुशाग्र ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित लोयोला स्कूल से की है। वह वर्तमान में वे कोल्हान विश्वविद्यालय से संबद्ध जेकेएस कॉलेज, मानगो से स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स ने उन पर 7.20 करोड़ रुपए खर्च किए थे। आईपीएल 2024 में 7.20 करोड़ की भारी भरकम बोली लगने के बाद इंटरनेट पर छा जाने वाले कुमार कुशाग्र ने क्रिकेट जगत में अपनी पहचान पहले ही बना ली थी। साल 2022 के रणजी ट्रॉफी के प्री-क्वार्टर फाइनल में नगालैंड के खिलाफ खेली गई उनकी ऐतिहासिक पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। इस मुकाबले में कुशाग्र ने महज 17 साल और 141 दिनों की उम्र में 266 रन बनाकर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में यह कारनामा करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज जावेद मियांदाद के नाम था, जिन्होंने 17 साल और 311 दिनों की उम्र में 250 रनों की पारी खेली थी। इन खिलाड़ियों को भी जानिए बिहार के पटना में जन्मे ईशान किशन सात साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। साल 2016 के अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के लिए भारत की टीम के कप्तान के रूप में ईशान किशन को नोमिनेट किया गया था। मार्च 2021 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया है। जमशेदपुर सोनारी के रहने वाले युवा क्रिकेटर विराट सिंह ने 17 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। विराट के बड़े भाई विशाल सिंह भी क्रिकेटर हैं। विराट सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। विराट बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं जो मिडिल ऑर्डर में खेलते हैं। अनुकूल सुधाकर रॉय फिलहाल झारखंड के लिए खेलते हैं। वो मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले हैं। बायें हाथ के स्पिनर हैं और अच्छी बल्लेबाज़ी भी करते हैं। अनुकूल के पिता सुधाकर रॉय के मुताबिक मुंबई में इंग्लैंड के जूनियर कोल्ट टीम के साथ मैच के दौरान राहुल द्रविड़ की नजर अनुकूल पर पड़ी और जूनियर टीम इंडिया में एंट्री मिली थी। झारखंड से खेलने वाले उत्कर्ष सिंह मूल रूप से असम के रहने वाले हैं। घरेलू क्रिकेट में उत्कर्ष सिंह झारखण्ड के लिए 18 फर्स्ट क्लास मैचों में 737 रन बना चुके हैं जबकि 114 रनों की पारी सर्वश्रेष्ठ है। जबकि 25 विकेट भी उनके नाम दर्ज हैं। वहीं वनडे टूर्नामेंट के 14 मैचों में उनके नाम 230 रन और 16 विकेट हैं, इसमें एक शतक भी लगा चुके हैं। बोकारो के रहने वाले रवि यादव बेहतरीन बॉलर हैं। इन्हें लेग स्पीन में महारत हासिल है। फिलहाल झारखंड टीम के लिए खेल रहे हैं।

वोटिंग से पहले शिंदे बोले-सीएम की रेस में नहीं:कहा– अगला मुख्यमंत्री महायुति का ही होगा; फडणवीस भी खुद को रेस से बाहर बता चुके

महाराष्ट्र में वोटिंग से 2 दिन पहले सीएम एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि वो सीएम पद की रेस में नहीं हैं। आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये भी तय है कि सीएम महायुति का ही होगा। एक दिन पहले ही महाराष्ट्र के डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने ANI से बातचीत में भी यही बात कही थी। सीएम शिंदे ने आजतक से कहा- कांग्रेस की नीति फूट डालो राज करो की है। राहुल गांधी, बाला साहेब ठाकरे को हिंदू हृदय सम्राट कब कहेंगे? शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे कहते थे कि मैं अपनी पार्टी को कभी भी कांग्रेस नहीं बनने दूंगा, लेकिन उद्धव ठाकरे खुद के स्वार्थ और मुख्यमंत्री बनने के लिए कांग्रेस के साथ चले गए। शिंदे ने पीएम मोदी के एक हैं तो सेफ हैं नारे का भी समर्थन किया। महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा सीटों के लिए सिंगल फेज में 20 नवंबर वोटिंग होगी। 23 नवंबर को इसका रिजल्ट आएगा। फडणवीस ने कहा था- ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारा समझने में अजित को थोड़ा वक्त लगेगा
फडणवीस ने 16 नवंबर को ANI को दिए इंटरव्यू में कहा था कि NCP (SP) चीफ शरद पवार परिवार और पार्टी तोड़ने के मामले में महारथी हैं। NCP और शिवसेना अपनी अति महत्वाकांक्षाओं के कारण टूटीं। उद्धव CM बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने हमसे नाता तोड़ लिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे आदित्य ठाकरे को आगे लाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एकनाथ शिंदे को सफोकेट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा था कि उद्धव ठाकरे के लिए भाजपा के दरवाजे बंद हो चुके हैं। महाराष्ट्र में पार्टी भविष्य में उनके साथ नहीं जाएगी। शिंदे को CM बनाने की जानकारी मुझे पहले से थी। मैं मुख्यमंत्री या अध्यक्ष किसी भी रेस में नहीं हूं। पूरी खबर पढ़ें… अजित बोले- ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा महाराष्ट्र में नहीं चलेगा, UP-झारखंड में चलता होगा
10 नवंबर को महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा था कि ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का नारा उत्तर प्रदेश और झारखंड में चलता होगा, महाराष्ट्र में नहीं चलेगा। मैं इसका समर्थन नहीं करता। हमारा नारा है- सबका साथ सबका विकास।’ उन्होंने कहा था कि दूसरे राज्यों के भाजपा के मुख्यमंत्री तय करें कि उन्हें क्या बोलना है। महाराष्ट्र में बाहर के लोग आकर ऐसी बातें बोल जाते हैं। हम महायुति में एक साथ काम कर रहे हैं, लेकिन हमारी पार्टियों की विचारधारा अलग-अलग है। हो सकता है कि दूसरे राज्यों में यह सब चलता हो, लेकिन महाराष्ट्र में ये काम नहीं करता। पूरी खबर पढ़ें… …………………………….. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से जुड़ीं ये खबरें भी पढ़ें… जिस चॉल में रहकर कभी फैक्ट्री में मछलियां छीलीं:वहीं 4 बार विधायक बने; उद्धव को झकझोरने वाले शिंदे की कहानी एकनाथ शिंदे का जन्म 9 फरवरी 1964 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के पहाड़ी जवाली तालुका में हुआ था। शिंदे के पिता संभाजी शिंदे एक किसान थे। बचपन में ही वो अपने परिवार के साथ ठाणे की एक मराठी बस्ती किसन नगर की चॉल में रहने चले आए थे। पिता ने शिंदे का दाखिला म्युनिसिपैलिटी के स्कूल में करवाया, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें… शिंदे को युवक ने कांग्रेस दफ्तर के बाहर गद्दार कहा और काला झंडा दिखाया; सीएम गुस्से में दफ्तर में घुसे 11 नवंबर की देर रात शिंदे अपने काफिले के साथ साकीनाका इलाके से गुजर रहे थे। इसी दौरान संतोष काटके नाम के युवक ने शिंदे को काला झंडा दिखाया और उन्हें गद्दार कहा। साथ ही उनके काफिले को रोकने की कोशिश की। ये पूरी घटना कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व मंत्री नसीम खान के चुनावी कार्यालय के बाहर हुई, जिसका किसी ने वीडियो बनाया लिया। पूरी खबर पढ़ें…

चोटिल गिल पहले टेस्ट से बाहर:राहुल ने प्रैक्टिस शुरू की, दो दिन पहले चोटिल हुए थे; पडिक्कल को ऑस्ट्रेलिया में रोका गया

टॉप ऑर्डर बैटर शुभमन गिल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं। वे शनिवार को प्रैक्टिस मैच के दौरान चोटिल हो गए थे। वहीं, भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल ने वाका में प्रैक्टिस शुरू कर दी है। राहुल को शुक्रवार को प्रैक्टिस मैच के दौरान दाएं कोहनी में चोट लग गई थी। उधर, देवदत्त पडिक्कल को ऑस्ट्रेलिया में ही रोक लिया गया। वे पिछले 20 दिनों से ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट खेलने गई इंडिया-ए टीम का हिस्सा थे। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टीम मैनेजमेंट ने सिलेक्शन कमेटी से बात करने के बाद पडिक्कल को सीनियर टीम के बैकअप के लिए ऑस्ट्रेलिया में ही रोक लिया है। भारतीय टीम बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई है। टीम दौरे की शुरुआत 22 नवंबर से पर्थ में पहले टेस्ट के साथ करेगी। वहां भारतीय टीम को 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। स्लिप में फील्डिंग को दौरान चोटिल हुए थे गिल
गिल को शनिवार को पर्थ में मैच सिमुलेशन के दौरान स्लिप में फील्डिंग करते समय उंगली में चोट लगी थी। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके अंगूठे में फ्रैक्चर है और वे पहले टेस्ट से बाहर हो गए हैं। हालांकि गिल की चोट को लेकर BCCI की ओर से अब तक कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है। राहुल पूरी तरह से सहज दिखे
राहुल ने रविवार को एक्सरसाइज के बाद काफी देर तक नेट्स में बैटिंग की। BCCI फिजियोथेरेपिस्ट कमलेश जैन और योगेश परमार ने कहा, वे पूरी तरह फिट हैं, तभी उन्हें बैटिंग की इजाजत दी गई। स्कैन के बाद पता लगा कि उनकी चोट गंभीर नहीं है और ना ही कोई फैक्चर है। शुक्रवार को प्रैक्टिस मैच के दौरान राहुल की कोहनी में प्रसिद्ध कृष्णा की बॉल लगी और वे स्कैन के लिए मैदान से बाहर चले गए थे। वे शनिवार को अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिए थे। रोहित की गैरमौजूदगी में ओपनिंग के ऑप्शन राहुल
राहुल की वापसी टीम इंडिया के लिए राहत की खबर है। 32 साल के राहुल भारतीय कप्तान रोहित शर्मा के पहला टेस्ट नहीं खेलने पर ओपनिंग के ऑप्शन है। रोहित अब तक ऑस्ट्रेलिया नहीं पहुंचे
कप्तान रोहित शर्मा के पहला टेस्ट खेलने पर असमंजस बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने पहले टेस्ट में BCCI से छुट्टी मांगी है। हालांकि BCCI का कहना है कि रोहित पर्थ टेस्ट से पहले टीम से जुड़ जाएंगे। टीम इंडिया के टेस्ट और वनडे कप्तान रोहित दूसरी बार पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी रितिका सजदेह ने 15 नवंबर को देर रात बेटे को जन्म दिया। रोहित ने अपने बच्चे के जन्म के लिए टीम इंडिया से ब्रेक लिया था। वह टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया भी नहीं पहुंचे। पडिक्कल ने इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया था
देवदत्त पडिक्कल ने इसी साल मार्च में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया था। उन्होंने अपने पहले ही मैच में 65 रन बनाए थे। हाल ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ इंडिया-ए के लिए खेलते हुए, चार पारियों में 151 रन बनाए थे। जिसमें 88 रन की इनिंग भी शामिल है। ———————————————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… मैक्ग्रा बोले- कोहली इमोशनल, उन्हें टारगेट बनाओ ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को विराट कोहली पर दबाव बनाने की सलाह दी है। 54 साल के इस दिग्गज ने कहा, ‘आउट ऑफ फॉर्म चल रहे कोहली खराब शुरुआत के चलते दबाव में होंगे। कंगारुओं को उन्हें टारगेट बनाना चाहिए। न्यूजीलैंड से हार के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के पास उनके खिलाफ काफी गोला-बारूद है।” पढ़ें पूरी खबर…