Sunday, March 15, 2026
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अगर अमेरिका के राष्ट्रपति का पद ट्रंप ने जीता तो भारत को फायदा होगा या नुकसान?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति का पद ट्रंप ने जीता तो भारत को फायदा होगा या नुकसान! अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन के बीच मुकाबला है। डोनाल्ड ट्रंप ने उप राष्ट्रपति पद के लिए 39 वर्षीय सीनेटर जेडी वेंस को चुना है। वहीं, बाइडेन का साथ देने के लिए कमला हैरिस मैदान में हैं। डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के बाद से उनके पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है। ऐसे में सवाल है कि यदि ट्रंप और वेंस की जोड़ी चुनाव जीतती है तो भारत के लिए यह कितना फायदेमंद हो सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के लगभग तीन-चौथाई नेता हैरिस के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, जबकि बाइडन के लिए भी वे ऐसा ही दृष्टिकोण रखते हैं।पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर चीन को एक खतरे के रूप में पहचाना था।अगर जेडी वेंस चुनाव जीतते तो वे गृहयुद्ध के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे युवा उपराष्ट्रपति होंगे। उनकी भारतीय मूल की पत्नी के कारण भारत में उनके चुनाव लड़ने ने स्वाभाविक रुचि पैदा की है। उनकी पत्नी का परिवार आंध्र प्रदेश से संबंध रखता है। अब ट्रंप-वेस की नीतियों के संदर्भ में जिक्र करना जरूरी है। इस जोड़ी की नीतियों को लेकरर कुछ चिंताएं हैं। जैसे कि ट्रम्प-वेंस प्रशासन इमिग्रेशन पर बैन लगा सकता है। इसका असर शिक्षा और नौकरी के लिए अमेरिका जाने के इच्छुक भारतीयों पर पड़ सकता है।

इस बात को लेकर टेंशन है कि ट्रंप-वेंस एडमिनिस्ट्रेश इमिग्रेशन पर बैन लगा सकता है। इसका संभावित असर शिक्षा और नौकरी के लिए अमेरिका जाने के सपने देखने वाले भारतीयों पर पड़ सकता है। व्यापार के लिए अधिक लेन-देन वाला दृष्टिकोण, जिसमें ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के अनुरूप भारतीय वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क और टैरिफ शामिल हैं, कुछ परेशानियां पैदा कर सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि वेंस को बातचीत और सुधार के लिए खुला माना जाता है। ट्रंप ने खुद भी अक्सर मुद्दों को सुलझाने के लिए सौदे करने की वकालत की है।

विदेश नीति पर अपने भाषणों में सीनेटर वेंस ने चीन को एक प्राइमरी रणनीतिक प्रतिस्पर्धी के रूप में बताया है। इसके साथ ही बीजिंग के बढ़ते प्रभाव के लिए अमेरिका से अधिक मुखर प्रतिक्रिया का आह्वान किया है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि अमेरिकी विदेश नीति को अगले 40 वर्षों के लिए पूर्वी एशिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस सप्ताह एक इंटरव्यू में उन्होंने चीन को ‘अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा’ बताया था। वेंस को ट्रम्प की तुलना में एक अधिक प्रखर ट्रेड वॉरियर के रूप में देखा जाता है।

वेंस ने पिछले वर्ष एक ऐसे कानून को सह-प्रायोजित किया था, जिसके तहत चीन की सरकार के लिए अमेरिकी पूंजी बाजारों तक पहुंच को रोकने करने की मांग की गई थी। ऐसा चीन के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून का पालन करने में विफल रहने की सूरत में था। भारतीय विदेश नीति प्रतिष्ठान में कई लोगों द्वारा यह सब अच्छी खबर के रूप में माना जाता है। यही नहीं  इन नेताओं का मानना है कि वह सबसे पुराने दल रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को बाइडन से ज्यादा कड़ी टक्कर दे सकती हैं। जहां तक हैरिस की बात है तो वह बाइडन का पूरी तरह से समर्थन करती रही हैं। बहस में खराब प्रदर्शन के बाद भी उन्होंने बाइडन का बचाव किया था। 

यह उस तरीके से भी मेल खाता है जिस तरह से ट्रम्प ने चीन को अमेरिका के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश किया था। मिसूरी के ग्रीनवुड में डेमोक्रेटिक पार्टी के एक नेता ओकली ग्राहम ने कहा कि वह बाइडन के कार्यकाल में हासिल हुईं उपलब्धियों को लेकर ‘काफी खुश’ हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए हैरिस का समर्थन करके उन्हें ज्यादा खुशी होगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि एक महिला देश की राष्ट्रपति बने। डेमोक्रेटिक पार्टी के लगभग तीन-चौथाई नेता हैरिस के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, जबकि बाइडन के लिए भी वे ऐसा ही दृष्टिकोण रखते हैं।इस बात को लेकर टेंशन है कि ट्रंप-वेंस एडमिनिस्ट्रेश इमिग्रेशन पर बैन लगा सकता है। इसका संभावित असर शिक्षा और नौकरी के लिए अमेरिका जाने के सपने देखने वाले भारतीयों पर पड़ सकता है।पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर चीन को एक खतरे के रूप में पहचाना था।

आखिर क्या है साइबर गुलामी की दर्दनाक कहानी?

आज हम आपको साइबर गुलामी की दर्दनाक कहानी सुनाने जा रहे हैं! ज्यादा पैसा कमाने के लालच में विदेशों में नौकरी का सपना देखने वाले लोगों के लिए ये शायरी एकदम सटीक बैठती है। अगर आप भी किसी अनजान के झूठे वादों के दम पर भारत से बाहर अच्छी नौकरी के सपने देख रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। वरना बेदर्द हाकिम आपकी खाल तब तक उधेड़ेगा जब तक आप मर ना जाएं और फरियाद की यहां कोई गुंजाइश नहीं है। दरअसल गोवा के दो युवक, जिनकी उम्र महज 26 और 25 साल है, वह ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में कंबोडिया में बुरी तरह फंस गए थे। उन्हें अच्छी नौकरी का झांसा देकर क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड में धकेल दिया गया था। इनमें से एक नौजवान दो महीने तक होटल में कैद रहा और फिर भागकर भारतीय दूतावास पहुंचा। दूसरे को 25 दिन तक साइबर गुलामी झेलनी पड़ी और 5 लाख रुपये देकर अपनी आजादी खरीदनी पड़ी। ये दोनों ही गोवा पुलिस द्वारा दर्ज की गई उस बड़ी जॉब स्कैम की जांच का हिस्सा हैं जिसमें 5000 से ज्यादा भारतीयों को कंबोडिया, म्यांमार, लाओस जैसे देशों में फंसाया गया है। 26 साल के युवक ने सीमेंट फैक्ट्री सुपरवाइजर की नौकरी छोड़ दी और ज्यादा कमाने के झांसे में आ गया। लीजा फर्नांडिस नाम की एजेंट ने उसे थाईलैंड में 700 डॉलर प्रति माह सैलरी वाली डेटा-एंट्री जॉब का झांसा दिया।एजेंट ने उसे कहा कि उसे अपनी आजादी के लिए 5 लाख रुपये और देने होंगे। उसने कहा, ‘अगले 25 दिन बहुत तकलीफदेह थे। हमें या तो फाइनेंशियल फ्रॉड करना पड़ता था या सजा भुगतनी पड़ती थी। मैंने इन एजेंट्स पर भरोसा करके गलती की। इन्होंने मजबूरी का फायदा उठाया।’ फरवरी में वो अपने दोस्त के साथ थाईलैंड गया। वहां से उन्हें कंबोडिया ले जाया गया, जहां उन्हें बताया गया कि उन्हें क्रिप्टोकरेंसी ऐप के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने होंगे।

युवक ने बताया, ‘मैंने कई बार इमारत से कूदकर जान देने की सोची। हर रोज रोता था … नींद नहीं आती थी। यह जेल जैसा था।’ उसे फर्जी सोशल मीडिया पहचान बनाने की ट्रेनिंग दी गई। उन्हें अच्छी दिखने वाली महिलाओं की तस्वीरें और कुछ इंस्टाग्राम प्रोफाइल दिए गए। उन्हें भारतीयों को टेलीग्राम और फेसबुक मैसेंजर पर चैट करके क्रिप्टोकरेंसी ऐप में निवेश करने के लिए लालच देने को कहा गया।

युवक ने बताया, ‘नए लोगों को एक हफ्ते तक सीनियर्स के साथ काम करना पड़ता था ताकि उनकी चैटिंग स्किल्स में सुधार हो। चैट के दौरान, वे यह बताते थे कि कैसे एक ट्रेडिंग ऐप में निवेश करने से उनके पैसे दोगुने हो गए हैं, जिससे उन्हें उस दिन एक डिजाइनर बैग खरीदना संभव हुआ।’ जैसे ही कोई टारगेट ऐप या इन्वेस्टमेंट फंड में निवेश करते थे, उन्हें ब्लॉक कर दिया जाता था।’ युवक ने बताया, ‘डेली टारगेट पूरा न करने पर सजा दी जाती थी, जिसमें अकेले कैद करना, पिटाई करना, घंटों पुश-अप्स या स्क्वैट्स करवाना और खाना देर से देना शामिल था।’ युवक ने बताया, ‘हमारी शिफ्ट के दौरान, कॉलिंग रूम को बाहर से बंद कर दिया जाता था। हम इमारत नहीं छोड़ सकते थे और सभी एग्जिट पॉइंट पर गार्ड तैनात रहते थे।’

दूसरा युवक, जो 25 साल का है, उसे मुंबई के एजेंट हाजी ने पोलैंड में 85,000 रुपये प्रति माह की सैलरी वाली नौकरी का झांसा दिया था। जब उसे एहसास हुआ कि उसे कंबोडिया में फ्रॉड करने के लिए लाया गया है, तो उसने एजेंट से शिकायत की। एजेंट ने उसे कहा कि उसे अपनी आजादी के लिए 5 लाख रुपये और देने होंगे। उसने कहा, ‘अगले 25 दिन बहुत तकलीफदेह थे। हमें या तो फाइनेंशियल फ्रॉड करना पड़ता था या सजा भुगतनी पड़ती थी। मैंने इन एजेंट्स पर भरोसा करके गलती की। इन्होंने मजबूरी का फायदा उठाया।’

गोवा पुलिस ने इस मामले में कई रिक्रूटमेंट एजेंट्स के खिलाफ FIR दर्ज की है और दो एजेंट्स-नासिर अहमद तिगड़ी और मोहम्मद हाजी को गिरफ्तार किया है। बता दें कि 25 दिन तक साइबर गुलामी झेलनी पड़ी और 5 लाख रुपये देकर अपनी आजादी खरीदनी पड़ी। ये दोनों ही गोवा पुलिस द्वारा दर्ज की गई उस बड़ी जॉब स्कैम की जांच का हिस्सा हैं जिसमें 5000 से ज्यादा भारतीयों को कंबोडिया, म्यांमार, लाओस जैसे देशों में फंसाया गया है। पुलिस का कहना है कि वे ऐसे और साइबर स्लेव्स को ढूंढने और इस अंतर्राष्ट्रीय जॉब स्कैम के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच कर रहे हैं जो कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम तक फैला हुआ है।

आखिर देश के किन-किन कोनों से आ रहे हैं पेपर लीक के मामलें?

आज हम आपको बताएंगे कि देश के किन-किन कोनों से पेपर लीक के मामले आ रहे हैं! नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच पटना एम्स के बाद झारखंड रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) तक भी पहुंच गई है। गुरुवार को पटना एम्स से चार मेडिकल स्टूडेंट की गिरफ्तारी के बाद रिम्स से एमबीबीएस कर रही एक अन्य मेडिकल स्टूडेंट को भी गिरफ्तार किया गया है। इन सभी से लाखों रुपये देने के नाम पर पेपर सॉल्व कराया गया था। इन सभी से हजारीबाग में एक गेस्ट हाउस में ले जाकर 5 मई को हुआ नीट पेपर सॉल्व कराया गया था। मामले में हजारीबाग से सुरेंद्र शर्मा नाम के एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि नीट मामले में सीबीआई ने अभी तक अपने स्तर पर 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसे गुरूवार को कोर्ट में पेश कर चार दिन की रिमांड पर लिया गया है। इसके ऊपर आरोप है कि इसने 5 मई की तड़के आरोपी पंकज की पेपर सॉल्व कराने में मदद की थी।आरोपियों के पकड़े जाने का सिलसिला लगातार जारी है। जबकि बिहार, गुजरात और अन्य राज्य पुलिस ने इस मामले में 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने बताया कि ताजा गिरफ्तारियों में रिम्स रांची से एमबीबीएस की सेकंड ईयर की सुरभि कुमारी नाम की छात्रा को गिरफ्तार किया गया है।

गुरुवार को आरोपी छात्रा से इंस्टीट्यूट के डीन की मदद से गर्ल हॉस्टल से बुलाकर पूछताछ की गई थी। बाद में मामले में लिंक जुड़ने पर छात्रा को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी आरा की रहने वाली बताई गई है। यह भी बताया गया है कि अपने बैच में आरोपी छात्रा एआईआर-60 के अंदर रही थी।

सूत्रों ने बताया कि एमबीबीएस स्टूडेंट सुरभि के अलावा गुरुवार को एम्स पटना से पकड़े गए एमबीबीएस के चार छात्र करन जैन, कुमार सानू, राहुल आनंद और चंदन सिंह ने मामले में 16 जुलाई को पकड़े गए सिविल इंजीनियर पंकज कुमार सिंह उर्फ आदित्य और हजारीबाग में गेस्ट हाउस का संचालक बताए जाने वाले गिरफ्तार आरोपी राजू सिंह के लिए काम किया था। सूत्रों का कहना है कि सभी पांचो मेडिकल स्टूडेंट पहले से ही आरोपी पंकज के संपर्क में थे। फिर जैसे ही 4 मई की देर शाम पंकज नीट का पेपर लीक करने में कामयाब हुआ। वैसे ही इन सभी से कांटेक्ट कर इन्हें हजारीबाग स्थित आरोपी राजू सिंह के गेस्ट हाउस में बुलाया गया। जहां इनसे पेपर सॉल्व कराया गया। जिसका फायदा 5 मई को पेपर देने वाले कई छात्रों को पहुंचाया गया।

अभी इस मामले में यह जांच भी की जा रही है कि क्या कुछ मेडिकल स्टूडेंट ऐसे तो हायर नहीं किए गए थे। जिन्हें पेपर देने के लिए असली कैंडिडेट की जगह ही बैठा दिया गया हो। मामले में अभी कुछ और मेडिकल स्टूडेंट समेत अन्य लोग गिरफ्तार किए जा सकते हैं। सीबीआई ने बताया कि मामले में गिरफ्तार एक और आरोपी सुरेंद्र शर्मा को हजारीबाग से पकड़ा गया है। इसे गुरूवार को कोर्ट में पेश कर चार दिन की रिमांड पर लिया गया है। इसके ऊपर आरोप है कि इसने 5 मई की तड़के आरोपी पंकज की पेपर सॉल्व कराने में मदद की थी।

इस मामले में सीबीआई का सारा फोकस अभी पटना और हजारीबाग में पेपर लीक होने पर ही है। मामले में गोधरा, लातूर और राजस्थान मॉडयूल में पेपर लीक के लिंक नहीं मिल रहे हैं। बिहार पुलिस यह पहले ही कह चुकी है कि नीट का पेपर 4 मई को ही लीक हो गया था। लेकिन फिलहाल आधिकारिक रूप से सीबीआई इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। लेकिन डिजिटल युग में इस बात की आशंका बेहद कम ही है कि कुछ घंटे पहले भी हुआ पेपर लीक पटना और हजारीबाग तक ही सीमित रह गया हो।आरोपियों के पकड़े जाने का सिलसिला लगातार जारी है। जबकि बिहार, गुजरात और अन्य राज्य पुलिस ने इस मामले में 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने बताया कि ताजा गिरफ्तारियों में रिम्स रांची से एमबीबीएस की सेकंड ईयर की सुरभि कुमारी नाम की छात्रा को गिरफ्तार किया गया है। मामले में सूत्रों का यह भी कहना है कि एनटीए ने नीट रिजल्ट को 14 जून तक आने की बात कही थी। लेकिन जिस तरह से अचानक लोकसभा चुनाव के रिजल्ट वाले दिन 4 जून को ही नीट एग्जाम का परिणाम घोषित कर दिया गया। यह भी समझ से परे है।

काठमांडू में विमान दुर्घटनाग्रस्त, सभी यात्रियों की मौत, पायलट गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

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नेपाल में एक और विमान हादसा. सूर्या एयरलाइंस का एक विमान बुधवार को काठमांडू हवाईअड्डे से उड़ान भरते समय रनवे से फिसल गया। विमान में 19 यात्री और चालक दल सवार थे। नेपाल में एक और विमान हादसा. नेपाल के काठमांडू में त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से बुधवार को उड़ान भरने के तुरंत बाद सूर्या एयरलाइंस का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चालक दल और यात्रियों सहित कुल 19 लोगों के साथ उड़ान भरने वाले विमान में आग लग गई। विमान काले धुएं से ढका हुआ था. हवाई अड्डे के कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड दौड़ पड़े। तुरंत बचाव कार्य शुरू हुआ. हवाईअड्डे की सेवाएं फिलहाल निलंबित कर दी गई हैं।

बुधवार सुबह जब फ्लाइट ने उड़ान भरी तो मौसम खराब था। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही यात्री विमान में आग लग गई. टीआईए के प्रवक्ता प्रेमनाथ टैगोर ने बताया कि हादसा सुबह करीब 11 बजे हुआ. तुरंत बचाव कार्य शुरू हुआ. विमान में सवार कई लोगों को बचाना संभव हो सका. पायलट को भी बचा लिया गया. उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया. दमकलकर्मी और पुलिस बचाव अभियान जारी रखे हुए हैं।

मालूम हो कि पायलट मनीष शाक्य को गंभीर हालत में बचाया गया था. उन्हें शिनमंगल के एक अस्पताल में ले जाया गया। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, कम से कम 13 यात्रियों की मौत हो गई है। उनके शव बरामद कर लिए गए हैं. साउथ एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विमान रनवे से फिसल गया। यही दिक्कत है। अंतिम गणना में, 19 में से 18 लोगों की मृत्यु हो गई।

2010 के बाद से नेपाल में एक के बाद एक बड़ी विमान दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले 14 सालों में कम से कम 12 ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई है. इसमें बुधवार का विमान हादसा और जुड़ गया। इसी साल जनवरी में यति एयरलाइंस का एक विमान उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. विमान में आग लग गई और वह पोखरा में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उस विमान में कुल मिलाकर 72 लोग सवार थे. वे सभी मर गये.

15 जनवरी को इंजन में खराबी के कारण नेपाली विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. जांचकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने यति एयरलाइंस की उड़ान के ब्लैक बॉक्स की जांच की। जांच समिति ने कहा कि एटीआर-72 विमान के उड़ान डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि इंजन में कोई समस्या थी।

यति एयरलाइंस का विमान 15 जनवरी को काठमांडू से पोखरा जाते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उड़ान के 20 मिनट बाद हुआ हादसा. लैंडिंग से 10 सेकंड पहले विमान सेती नदी के किनारे एक खड्ड में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. गिरने के कई वीडियो सामने आए हैं. उन्हें स्थानीय लोगों ने उठाया। इस दुर्घटना में विमान में सवार एक भी व्यक्ति जीवित नहीं बचा। 72 लोगों की मौत हो गई. 68 यात्रियों में पांच भारतीय, चार रूसी और एक आयरलैंड का है। दुर्घटना की जाँच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया। उन्हें 45 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

दुर्घटना के अगले दिन विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया था। शुरुआत में माना जा रहा था कि हादसा खराब मौसम की वजह से हुआ. हालांकि, बाद में नेपाल के विमानन मंत्रालय ने कहा कि आसमान साफ ​​है। विमान यांत्रिक खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया. पोखरा में हवाईअड्डा, जहां विमान को उतरना था, का उद्घाटन कुछ सप्ताह पहले किया गया था। साढ़े छह सौ फीट गहरी नदी की तलहटी. वह नदी तल भी घने कोहरे से ढका हुआ है। बचावकर्मी पश्चिमी नेपाल के पोखरा में सेती नदी के किनारे संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि दृश्यता कम है और सूरज की रोशनी उस तक नहीं पहुंच पाती है। रविवार सुबह क्रू समेत 72 यात्रियों को लेकर जा रहा नेपाली विमान क्रैश हो गया. विमान में सवार 70 लोगों का पता चल गया है, लेकिन दो यात्री अब भी लापता हैं. मंगलवार को बचाव दल ने अंतिम दो यात्रियों की ड्रोन से तलाश शुरू की।

नेपाल की यति एयरलाइंस का एटीआर 72 विमान रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 72 सीटर इस विमान में टर्बो प्रोपेलर इंजन लगा है. काठमांडू से पोखरा में उतरने से कुछ देर पहले विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसा उजले मौसम में हुआ. यात्रियों में 5 भारतीय समेत 15 विदेशी थे। उस विमान में 6 बच्चे भी थे. बचाव दल ने मंगलवार को कहा कि हादसे में मरने वाले बच्चों के शव पूरी तरह जल गए होंगे. ऐसे में उनका शव ढूंढना मुश्किल हो सकता है.

इस बीच, बचाव दल ने सोमवार को रस्सी के सहारे नदी में उतरकर दो और यात्रियों के शव बरामद किए। हालांकि, मौसम की बिगड़ती स्थिति के कारण उनके बचाव कार्य में बाधा आ रही है। इसलिए ड्रोन को नीचे उतारकर आखिरी दो लापता यात्रियों की तलाश शुरू कर दी गई है.

नेपाल प्रशासन ने विमान हादसे में मारे गए 70 यात्रियों के शव उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बरामद शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया है। इसे नेपाल के एक स्थानीय टीवी चैनल के फुटेज में देखा गया है. अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहे परिजन फूट-फूटकर रोने लगे।

क्या आप बिना डाइटिंग के पतला होना चाहते हैं?

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यदि आप किसी भी नियम का पालन करते हैं, तो आपका वजन कम हो जाएगा, भले ही आप अच्छा या बुरा खाएं?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि सख्त आहार आपको तेजी से वजन कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए स्वस्थ नहीं हो सकता है। इसके बजाय, आहार और दैनिक जीवन में ऐसे बदलाव करना जरूरी है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर फिट रहेगा और वह फिटनेस लंबे समय तक बनी रहेगी। बहुत से लोग उम्र बढ़ने पर चिंतित हो जाते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि एक निश्चित उम्र के बाद सौ बार कोशिश करने पर भी वजन कम करना संभव नहीं है। वहीं व्यायाम के प्रति अनिच्छा, ऑफिस में लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना, अनियमित खान-पान की आदतों के कारण 40 की उम्र तक पहुंचने से पहले ही वजन बढ़ने लगा। 40 के बाद मेटाबॉलिक रेट कम होने लगता है। इसके साथ ही हार्मोन के स्तर में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है। इन सभी कारणों से वजन बढ़ना सामान्य है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो भी कई लोगों को स्ट्रिक्ट डाइट बिल्कुल पसंद नहीं आती है। भले ही आप अच्छा या बुरा खाएं, वजन कम करना संभव है। हालाँकि, भोजन के दौरान पालन करने के लिए कुछ नियम हैं।

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि सख्त आहार आपको तेजी से वजन कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए स्वस्थ नहीं हो सकता है। इसके बजाय खान-पान और दैनिक जीवन में ऐसे बदलाव करने की जरूरत है, जिससे शरीर फिट रहेगा और वह फिटनेस लंबे समय तक बनी रहेगी। जान लें कि फिट रहने के लिए जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है।

1) वजन बढ़ने पर शरीर में हजारों बीमारियां घर करने लगती हैं। इसलिए फिट रहने के लिए नियमित व्यायाम करें। अगर आप जिम जाकर पसीना नहीं बहाना चाहते तो घर पर ही कार्डियो एक्सरसाइज या योग करें। इसके अलावा आप नियमित रूप से पैदल चलना, साइकिल चलाना, जॉगिंग कर सकते हैं। वजन कम करने के लिए आप योग पर भी भरोसा कर सकते हैं। शरीर जितना सक्रिय रहेगा, पाचन क्रिया उतनी ही बेहतर होगी और वजन नियंत्रित रहेगा।

2) आहार से चीनी या मिठाई को पूरी तरह हटा दें। वजन बढ़ने का एक मुख्य कारण चीनी है। आहार में चीनी की मात्रा कम करके वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। नतीजतन, सुबह में चीनी वाली दूध वाली चाय, दोपहर के भोजन के बाद मीठा मुंह, रात में फिल्में देखते समय केक और चॉकलेट खाना – इन सभी आदतों को तोड़ना होगा। अगर आप कभी मीठा खाना चाहते हैं तो आप फल, खजूर, किशमिश खा सकते हैं। इसके अलावा, खजूर, केले और विभिन्न फलों का उपयोग स्वस्थ मिठाइयाँ बनाने के लिए किया जा सकता है। इन सब से आप मिठाइयाँ बना सकते हैं।

3) आहार में फाइबर की मात्रा अधिक होनी चाहिए। भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। अगर खाना अच्छे से पचता है तो शरीर में फैट कम जमा होता है। आहार में कार्बोहाइड्रेट और वसा की मात्रा कम और प्रोटीन अधिक होना चाहिए। चाहे वह अच्छी हो या बुरी, मात्रा सही रखना जरूरी है।

4) तनाव के कारण वजन बढ़ता है। और तनाव कम करने के लिए नींद बहुत जरूरी है। अगर आपको रात में जागने की आदत है तो इस आदत को बदल लें। शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए दिन में सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है।

5) सुबह का नाश्ता नियमित रूप से करना चाहिए। नाश्ता न छोड़ें. दिन भर में बार-बार छोटे-छोटे भोजन खाने का अभ्यास करें। यदि आप रात का खाना आठ बजे से पहले समाप्त कर सकें तो यह सबसे अच्छा है। अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो खाने के कम से कम दो घंटे बाद सो जाएं। मेटाबॉलिज्म सामान्य होने पर ही आप दुबले होंगे, इसलिए खाने के बाद टहलना जरूरी है।

मुंहासों को कम करने के लिए उन्होंने एक महीने तक हर दिन जिम जाना शुरू कर दिया है और वह कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं। हालांकि, एक महीने बाद भी वजन में कोई बदलाव नहीं आया है। कोण है वोह! यदि यह लंबे समय तक जारी रहता है, तो अंततः आप व्यायाम में रुचि खो देंगे। अगर आप रोजाना नियमों के मुताबिक व्यायाम कर रहे हैं तो ऐसा क्यों हो रहा है, यह सवाल उठ सकता है। ऐसे में कैसे समझें कि गांठ कहां है? रोजमर्रा की जिंदगी में अनजाने में कुछ न कुछ गलत हो जाता है, जिसके कारण घंटों की एक्सरसाइज भी कोई फायदा नहीं पहुंचाती! जानें कि जिम शुरू करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए।

42, 45, 50… आलू का दाम पूछने के बाद खरीदारों को कुछ देर सोचना पड़ता है।

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जो आलू कुछ दिन पहले 32 टका था, अब 45 टका प्रति किलो बिक रहा है! विक्रेताओं का कहना है कि थोक बाजार में आलू है ही नहीं. वह आलू-प्याज की दुकान पर गया और हाथ में थैला लेकर कुछ देर तक खड़ा रहा। कुछ मिनटों तक सोचने के बाद कि कितना आलू खरीदना है, खरीदार चयनित आलू को तराजू की ओर धकेलते हैं। आलू व्यापारियों के हड़ताल पर जाने के बाद से प्रदेश की मंडियों में यही तस्वीर देखने को मिल रही है. ज्योति और चंद्रमुखी आलू अब क्रमशः 42 रुपये और 50 रुपये पर हैं। कहीं दो-पाँच रुपये कम तो कहीं। हालांकि, बाजारों में आलू की सप्लाई पहले से ही कम हो गई है. फल, आलू की आसमान छूती कीमतें और आपूर्ति की कमी। ऐसे में खुदरा विक्रेता बुधवार की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। आलू कब होगा सस्ता? हम इंतजार कर रहे हैं।

बुधवार को कुछ बाजारों में ज्योति आलू कहीं 40 टका तो कहीं 45 टका प्रति किलो की कीमत पर बिक रहा है। चंद्रमुखी आधी सदी पार कर चुकी हैं. दुकानदारों के बीच मनमाफिक दाम ले रहे हैं। आलू का दाम पूछने से खरीदार चंपत हो जाते हैं। कुछ दिन पहले जो आलू 32 टका था वह अब 45 टका प्रति किलो है! खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि थोक बाजार में आलू नहीं है. ऐसे में वे ‘असहाय’ हैं. पिछले कुछ दिनों में सब्जियों की कीमत में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन आलू की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, जिससे घरों की जेब पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कुछ दिनों तक बाजार बाजार में जो टास्क फोर्स की कार्रवाई देखने को मिली थी, वह देखने को नहीं मिल रही है.

पश्चिम बंगाल प्रोग्रेसिव पोटैटो ट्रेडर्स एसोसिएशन ने राज्य की सीमाओं पर पुलिस की बर्बरता के विरोध में पिछले सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी है। इस वजह से फ्रीजर से आलू निकलना लगभग बंद हो गया है. खेतों में आलू की सप्लाई भी कम हो रही है. जिसका असर बाजार पर पड़ा है. हड़ताल के तीसरे दिन, हुगली के चौक बाजार, मल्लिक काशेम हाट, खरुआ बाजार, रवींद्रनगर बाजार, चंदननगर बाउबाजार, मनकुंडु के स्वप्नबाजार – सभी सब्जी बाजारों में एक ही तस्वीर थी। हालांकि सिंगुर में आलू के कुछ प्लांट खुले हैं, लेकिन वे मांग की तुलना में काफी कम हैं. हड़ताल के कारण राज्य के अधिकांश कोल्ड स्टोर बंद हैं. अब बाजार में अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाले कुछ आलू बिक रहे हैं। अगर आप वह भी खरीदना चाहते हैं तो कीमत 35 टका है। बर्दवान शहर के एक बाजार में आलू व्यापारी बिजय दास ने टिप्पणी की, “स्थिति व्यापार को नीचे लाने वाली है। हर दिन बाजार में आकर कई लोग पूछ रहे हैं, ‘इतनी कीमत क्यों?’ कई लोग फिर बाजार नियंत्रण की बात कर रहे हैं।” खेती की लागत बढ़ गयी है. तो आलू के दाम बढ़ेंगे. क्या ऐसा कहना गलत है?” यहां तक ​​कि बर्दवान शहर में भी, शहर के बाहर मेमारी, गुस्करा, रैना – हर जगह आलू अब एक महंगी वस्तु है। एक कोल्ड स्टोर के मालिक अरुण मुखोपाध्याय ने कहा, ”हड़ताल के कारण हम दोबारा कोल्ड स्टोर से आलू नहीं ले रहे हैं.” एक हफ्ते पहले भी हावड़ा के थोक बाजार में आलू काफी सस्ते थे. अब प्रति बैग 150 से 200 रुपये तक कीमत में बढ़ोतरी हो गयी है. भले ही सब्जियों की कीमत में थोड़ी कमी आई है, लेकिन टास्क फोर्स की निगरानी पर किसी का ध्यान नहीं गया है।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आलू व्यापारियों को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि आलू को विदेश नहीं भेजा जा सकता. मुख्यमंत्री ने संकट के समाधान के लिए कृषि विपणन मंत्री बेचाराम मन्ना को जिम्मेदारी सौंपी. बुधवार को हुगली के हरिपाल में प्रोग्रेसिव पोटैटो ट्रेडर्स एसोसिएशन की बैठक हुई. उनके साथ मंत्री का भी बैठने का कार्यक्रम है. बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी और मंत्री शामिल हो सकते हैं. देखते हैं वहां से कोई समाधान निकलता है या नहीं.

डर था. सप्लाई कम होने के कारण पुरुलिया और बांकुरा के विभिन्न बाजारों में आलू की कीमत काफी बढ़ गई है. कहीं-कहीं तो यह 40 टका प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।

दूसरे राज्यों में आलू की बिक्री पर लगी रोक हटाने और राज्य की सीमा पर व्यापारियों की गाड़ियां रोककर उन्हें परेशान करने से रोकने की मांग को लेकर आलू व्यापारियों ने पिछले सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी है. जयपुर के बिष्णुपुर में मंगलवार को वेस्ट बंगाल प्रोग्रेसिव पोटैटो ट्रेडर्स एसोसिएशन की बैठक हुई. बैठक के बाद संगठन के राज्य सलाहकार विवस डे ने कहा, ”आंदोलन को विशेष रूप से वापस लेने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है. यहां तक ​​कि राज्य सरकार ने भी चर्चा के लिए नहीं बुलाया है.” उन्होंने कहा, आज बुधवार को आरामबाग में संगठन की बैठक है.

लगातार दो दिनों से बाजार में आलू नहीं आने से सप्लाई को लेकर टेंशन हो गई है. कीमत भी बढ़ रही है. पिछले कुछ दिनों में खुले बाजार में आलू की कीमत थोड़ी कम होकर 30 टका प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अब यह फिर से 32-35 टका है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ भंडारित आलू ही बेचा जा रहा है। अगर हड़ताल जल्द नहीं हटाई गई तो बाजार में आलू की सप्लाई और कम हो जाएगी। बांकुरा के चौकबाजार में आलू विक्रेता स्वरूप पाल ने कहा, “जितना स्टॉक में है, शायद मैं एक दिन और आलू निकाल सकता हूं।” लागोआ केशियाकोल, हेविरमोर इलाकों में कई व्यापारियों के पास आलू खत्म हो रहा है।

बिष्णुपुर बाजार में भी आलू की आपूर्ति कम है। दो दिनों के अंतराल में, यह 35 टका से 40 टका प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। चौक बाजार में भी सप्लाई कम है। कुछ खरीददारों का दावा है कि आलू की गुणवत्ता खराब है. हालाँकि, बिष्णुपुर में सुफल बांग्ला स्टॉल में आलू 27 टका प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया। आपूर्ति सामान्य थी. बांकुड़ा के जिलाधिकारी सियाद एन ने कहा कि प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है.

पुरुलिया में भी यही स्थिति है. पुरुलिया थोक बाजार के सूत्रों के अनुसार, पिछले रविवार से शहर में आलू की आवक नहीं होने से आलू की कीमत अचानक बढ़ गयी है. रविवार को आलू की कीमत प्रति क्विंटल 2400 टका थी, मंगलवार को प्रति क्विंटल 2800 से 3000 टका थी.

पुरुलिया शहर के निवासी निलॉय मुखोपाध्याय के शब्दों में, “कल मैंने 32 टका में आलू खरीदा, आज वे 40 टका प्रति किलो कह रहे हैं। केन जानता है कि टास्क फोर्स की भूमिका क्या है!” इस दिन झालदा और काशीपुर बाजार में आलू 40 टका के भाव बिका.

खुदरा विक्रेताओं का दावा है कि थोक बाजार में कीमत अधिक है। बाराहाट के एक विक्रेता ने कहा, ”आज कीमत बहुत ज्यादा है. खुदरा 40 से कम में नहीं बिकता।” झालदा नगर पालिका-नियंत्रित बाजार के एक विक्रेता, महादेव क्विरियो ने कहा, “हम उसी कीमत पर बेच रहे हैं जिस कीमत पर हम थोक बाजार में खरीदते हैं।

क्या कर्नाटक सरकार ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है?

हाल ही में कर्नाटक सरकार ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है! कर्नाटक में प्राइवेट कंपनियों की ग्रुप C और D नौकरियों में स्थानीय (कन्नड़) लोगों को 100 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर राज्य का सियासी पारा हाई है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार मुश्किल में घिरी हुई है। भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर डोमिसाइल कोटा बिल पर पलटने तक, कांग्रेस कई मोर्चों पर घिरी हुई है। इसका फायदा BJP को मिल रहा है, जो अब कांग्रेस को कई मुद्दों पर घेर रही है। सोमवार को मॉनसून सत्र शुरू होते ही, BJP और जेडीएस ने विधानमंडल के दोनों सदनों में सरकार को घेरने की कोशिशें तेज कर दीं। विपक्षी दलों को बुधवार को एक और मुद्दा मिल गया जब उद्योग जगत ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कैबिनेट के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें सभी प्रतिष्ठानों में गैर-प्रबंधन में 75% और प्रबंधन क्षेत्र में 50% नौकरियों में स्थानीय उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की योजना करने वाले विधेयक को मंजूरी दी गई थी। गुरुवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र सहित बीजेपी नेताओं को उस समय हिरासत में लिया गया जब उन्होंने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड में कथित घोटाले को लेकर विधानसभा का घेराव करने और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की। राज्य के राजस्व मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कर्नाटक सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है क्योंकि उन्होंने झारखंड, दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में कोशिश की थी। कथित घोटालों ने कर्नाटक विधानसभा को भी हिला कर रख दिया, जहां सिद्धारमैया ने गुरुवार को विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि उनके करियर में एक भी ‘काला धब्बा’ नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं उनके आरोपों से नहीं डरता।’ राज्य में मौजूदा राजनीतिक माहौल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। पार्टी पहले ही कई मोर्चों पर आग से खेल रही है और ताजा विवादों ने उसकी परेशानी और बढ़ा दी है। देखना होगा कि कांग्रेस इन आरोपों से कैसे निपटती है और अपनी छवि कैसे सुधारती है।

कर्नाटक विधानसभा में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जोरदार बहस हुई। बीजेपी ने डोमिसाइल कोटा बिल को लेकर सरकार पर निशाना साधा और उसे ‘तुगलक सरकार’ कहा। सीएम सिद्धारमैया ने जवाब दिया कि बिल पर अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी। कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार के आरोप चुनौती हैं क्योंकि सिद्धारमैया की छवि एक ईमानदार नेता की रही है। मुश्किल ये है कि एक आरोप उनकी पत्नी पर है और दूसरा अनुसूचित जनजाति के लिए फंड के दुरुपयोग से जुड़ा है। 2016 में, सीएम रहते हुए सिद्धारमैया अपनी महंगी हब्लोट घड़ी को लेकर विवादों में घिर गए थे। एक कांग्रेस नेता ने स्वीकार किया, ‘हमें स्वीकार करना होगा कि सरकार और सिद्धारमैया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जनता में यह धारणा बनने से पहले कि सरकार भ्रष्ट है, हमें चीजें बदलनी होंगी। राहत की बात यह है कि अभी विधानसभा चुनाव नहीं हैं, इसलिए हमारे पास समय है।’

कर्नाटक में बीजेपी की सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते हारी थी। कांग्रेस ने बीजेपी पर 40% कमीशन का आरोप लगाया था, जिसका खामियाजा बीजेपी को चुनाव में भुगतना पड़ा। कांग्रेस नेता बी.एस. शिवन्ना का कहना है कि सीएम सिद्धारमैया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शिवन्ना का मानना है कि ये आरोप राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं और सिद्धारमैया बेदाग साबित होंगे। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के करीबी सहयोगी और ठेकेदार संतोष पाटिल ने येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। पाटिल ने आरोप लगाया था कि उन्हें ठेका दिलाने के लिए 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। यह मामला 2022 का है, जब बीजेपी की सरकार सत्ता में थी। इस मामले में तत्कालीन मंत्री के.एस. ईश्वरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, बीजेपी सरकार ने इस मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया और बीजेपी पर जमकर हमला बोला। कांग्रेस के आरोपों का असर जनता पर पड़ा और उसने बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर दिया।

कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष विजयेंद्र ने कहा कि ‘सिद्धारमैया के परिवार का मैसूरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी घोटाला (मुदा घोटाला) में शामिल होना उन्हें भी चौंकाता है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले महीनों में और मामले सामने आएंगे। यह सच है कि सिद्धारमैया के राजनीतिक जीवन में भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे, लेकिन इस बार यह अलग है।’ विजयेंद्र ने कहा, ‘कांग्रेस और सिद्धारमैया मुश्किल में हैं। लोग देख रहे हैं और इसका असर पार्टी की कल्पना से परे होने वाला है।’ हमें शक है कि चुनाव प्रचार के लिए एसटी फंड का इस्तेमाल हुआ और अगले दो-तीन महीनों में आप मौजूदा सरकार से जुड़े कई भ्रष्टाचार के मामले देखेंगे।’ विजयेंद्र ने आगे कहा कि सिद्धारमैया के कार्यकाल में भले ही भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हों, लेकिन इस बार मामला अलग है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा। विजयेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के लिए अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई और भ्रष्टाचार के मामले सामने आएंगे।

बीजेपी ने मानसून सत्र के पहले दिन अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए बनाई गई वाल्मीकि निगम से पैसे के हेरा फेरी का मुद्दा उठाया। सीबीआई और ईडी जैसी कई एजेंसियों ने मामले दर्ज किए हैं। सिद्धारमैया ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि 89.6 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, न कि बीजेपी द्वारा लगाए गए 187 करोड़ रुपये का। आरोप लगने के बाद इस्तीफा देने वाले आदिवासी कल्याण मंत्री बी नागेंद्र अब ईडी की हिरासत में हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब निगम के एक अधिकारी, पी चंद्रशेखरन, जो ऑडिटिंग और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ समन्वय में शामिल थे, ने 26 मई को आत्महत्या कर ली। अपने छह पन्नों के सुसाइड नोट में, उन्होंने कई अधिकारियों के नाम लिए और व्यवस्थित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

कर्नाटक में कांग्रेस और बीजेपी के बीच भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस ने बीजेपी पर देवराज उर्स ट्रक टर्मिनल (DUTT) घोटाले का आरोप लगाया है। यह घोटाला कथित तौर पर उस समय हुआ था जब बीजेपी सत्ता में थी। पिछले हफ्ते राज्य CID ने DUTT के पूर्व चेयरपर्सन और बीजेपी के पूर्व MLC डी एस वीरैया को गिरफ्तार किया था। वीरैया पर 2021 से 2023 के बीच 47.1 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। कांग्रेस ने बीजेपी पर भ्रष्टाचार में डूबे होने का आरोप लगाते हुए DUTT घोटाले का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस का कहना है कि जब बीजेपी सत्ता में थी, तब यह घोटाला हुआ था। CID ने इस मामले में बीजेपी के एक पूर्व MLC को गिरफ्तार किया है, जो DUTT के चेयरपर्सन भी रह चुके हैं। उन पर 47.1 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है।

आखिर अखिलेश यादव का ऑफर किस ओर इशारा करता है?

आज हम आपको बताएंगे कि अखिलेश यादव का ऑफर किसी और इशारा कर रहा है! उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय हलचल तेज हो गई है। एक तरफ खराब प्रदर्शन के कारण यूपी भारतीय जनता पार्टी में विवाद गहराया हुआ है। केशव प्रसाद मौर्य लगातार एक्टिव दिख रहे हैं। दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात कर लखनऊ लौट चुके हैं। अखिलेश यादव भाजपा के भीतर गहराई राजनीति के बीच लगातार बयान जारी किया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर यूपी के राजनीति में सनसनी मचा दी है। उन्होंने अपने ही अंदाज में मानसून ऑफर दे दिया है। इसमें उन्होंने कहा है कि 100 लाओ, सरकार बनाओ। अखिलेश यादव के पर चर्चा का बाजार गर्मा गया है। दरअसल, पहले भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव इस प्रकार का ऑफर दे चुके हैं कि अगर आपको सरकार बनाने का सपना पूरा करना है तो 100 विधायक तोड़कर लाएं। समाजवादी पार्टी समर्थन कर देगी। इस बयान के जरिए उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य को उन्होंने खुला ऑफर दिया था। अब एक बार फिर वे इस प्रकार की बात करते दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से उत्तर प्रदेश भाजपा में लगातार विवाद गहराया हुआ है। पार्टी को चुनाव में मार्च 33 सीटों पर जीत मिली। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी यूपी की राजनीति में नंबर वन बन गई है। पार्टी को 37 सीटों पर जीत मिली। सहयोगी कांग्रेस 6 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। इसके बाद से लगातार भाजपा में मंथन का दौर जारी है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बैठकों का दौर चल रहा है।

इन बैठकों के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने संगठन को सरकार से बड़ा बताकर प्रदेश के राजनीति में अलग ही बहस छेड़ दी है। सरकार बड़ा या संगठन बहस का मुद्दा बन गया है। इस बीच विपक्षी दल भाजपा के भीतर बढ़ी हलचल के बीच अपनी रणनीति को जमीन पर उतरने की कोशिश में जुट गए हैं। इस क्रम में अखिलेश यादव ने केशव प्रसाद मौर्य को एक बार फिर सरकार बनाने का मॉनसून ऑफर दे दिया है। 100 विधायकों को लाने पर सरकार बनाने का ऑफर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय भारतीय जनता पार्टी 251 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। वहीं, समाजवादी पार्टी के पास 105 विधायक हैं। अपना दल सोनेलाल 13 विधायकों के साथ तीसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय लोक दल के पास आठ विधायक हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के पास 6, निषाद पार्टी के पास पांच, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के पास दो, कांग्रेस के पास दो और बहुजन समाज पार्टी के पास एक विधायक हैं। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े के लिए 202 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है। वहीं, पार्टी को तोड़ने के एक दो-तिहाई विधायक जरूरी होते हैं। ऐसे में किसी भी नेता के भाजपा को तोड़ने के लिए कम से कम 167 विधायकों का एक तरफ आना जरूरी होगा।

ऐसे में अगर भारतीय जनता पार्टी के 100 विधायकों के साथ केशव प्रसाद मौर्य अलग गुट बनाकर अखिलेश यादव से मिलते हैं तो फिर वह सरकार बना सकते हैं। हालांकि, इस प्रकार की स्थिति में पाला बदलने वाले विधायकों पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, केशव प्रसाद मौर्य लगातार भारतीय जनता पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के ऑफर को तंज के रूप में ही देखा जा रहा है।

यूपी में इन दिनों में राजनीति काफी गहराई हुई है। यूपी बीजेपी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने प्रदेश में पार्टी की हार की वजहों से संबंधित रिपोर्ट प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष तक सौंप चुके हैं। इस दरम्यान प्रदेश में कार्यकर्ताओं की स्थिति की भी खूब चर्चा की गई है। मामले में पार्टी आलाकमान सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक कर सकती है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से उत्तर प्रदेश भाजपा में लगातार विवाद गहराया हुआ है। पार्टी को चुनाव में मार्च 33 सीटों पर जीत मिली। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी यूपी की राजनीति में नंबर वन बन गई है। पार्टी को 37 सीटों पर जीत मिली।वहीं, विपक्षी दल भाजपा को अब संतुलित नहीं होने देने की रणनीति पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं। अखिलेश यादव के बयान को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। वहीं, केशव प्रसाद मौर्य की नाराजगी को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।

बीजेपी की हार पर विपक्ष ने क्या कहा?

हाल ही में विपक्ष ने बीजेपी की हार पर एक बयान दे दिया है! उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मीटिंगों का दौर जारी है। सत्ता हासिल करने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी परेशान है। पार्टी की सबसे बड़ी परेशानी देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में जनाधार का कम होना है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों के 40 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं से चर्चा के आधार पर हार की वजह तलाशी। 15 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा को सौंपा गया है। अब माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक करेगी। इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। संगठन नहीं हो तो सरकार नहीं, जैसे मुद्दों को उछाला जा रहा है। इस बीच सरकार के समर्थन और विरोध में भी स्वर बुलंद होने लगे हैं। इन तमाम स्वरों को पार्टी के हित में लाने की कोशिश के तहत बैठकों का दौर जारी है। इस स्थिति के बीच विपक्षी दलों का प्रहार शुरू हो गया है। अखिलेश यादव तो खुलकर हमले कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मिशन 80 तैयार कर चुनावी लड़ाई लड़ी।प्रदेश में अभी भी भाजपा लोकसभा चुनाव रिजल्ट की स्थिति से बाहर नहीं आ पा रही है। एक प्रकार के अनिर्णय जैसी स्थिति दिख रही है। इस बीच पूर्व मंत्री सुनील भराला जैसे नेताओं के बयान विवाद को भड़का रहे हैं। मिशन 80 का दावा एक साल से किया जा रहा था। पार्टी के तमाम सीनियर नेता प्रदेश की सभी सीटों को जीतने की बात कह रहे थे। लेकिन, स्थानीय खेमेबाजी ने खेल बिगाड़ दिया। उम्मीदवारों के प्रति कार्यकर्ताओं की नाराजगी का असर हुआ कि 2014 में 71 और 2019 में 62 सीटें जीतने वाली भाजपा महज 33 सीटों पर सिमटी। वोट प्रतिशत भी करीब 8 फीसदी कम हो गया। पीएम से लेकर सीएम तक की छवि पर रिजल्ट ने प्रभाव डाला। ऐसे में पर्दे के पीछे से अब तक राज्य सरकार के खिलाफ हमलावर नेता सामने से हमले कर रहे हैं। बगावती सुर सुनाई दे रहे हैं। इसने प्रदेश में एक अलग माहौल बनाया है।

यूपी भाजपा में इस समय बदलाव की चर्चा खूब हो रही है। बदलाव किस स्तर पर होगा, यह अभी तय नहीं है। भाजपा आलाकमान ने सभी मुद्दों पर प्रदेश अध्यक्ष के साथ चर्चा की है। हालांकि, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का एक बयान इस बीच आया है। विपक्ष की ओर से हमलों के बीच केशव मौर्य ने अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूपी में एक बार फिर 2017 जैसे परिणाम आने वाले हैं। दरअसल, 2012 से 2017 के बीच अखिलेश यादव सरकार थी। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद यूपी बीजेपी की जिम्मेदारी केशव प्रसाद मौर्य को सौंपी गई थी। केशव मौर्य के नेतृत्व में भाजपा ने पहली बार प्रदेश में 300 के आंकड़े को पार किया था।

केशव प्रसाद मौर्य एक बार फिर अपने बयानों के जरिए अखिलेश यादव को 2017 के परिणाम 2027 में दोहराए जाने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, भाजपा सूत्रों की मानें तो सरकार और संगठन में अभी बदलाव नहीं होगा। लेकिन, चुनाव से पहले केशव मौर्य को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इस प्रकार के कयास अभी से लगने लगे हैं।

प्रदेश में अभी भी भाजपा लोकसभा चुनाव रिजल्ट की स्थिति से बाहर नहीं आ पा रही है। एक प्रकार के अनिर्णय जैसी स्थिति दिख रही है। इस बीच पूर्व मंत्री सुनील भराला जैसे नेताओं के बयान विवाद को भड़का रहे हैं। भराला कहते हैं कि जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को इस्तीफा देना चाहिए था। उन्होंने परंपरा का पालन करने का संदेश दिया। इस बीच सरकार के समर्थन और विरोध में भी स्वर बुलंद होने लगे हैं। इन तमाम स्वरों को पार्टी के हित में लाने की कोशिश के तहत बैठकों का दौर जारी है। इस स्थिति के बीच विपक्षी दलों का प्रहार शुरू हो गया है। अखिलेश यादव तो खुलकर हमले कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मिशन 80 तैयार कर चुनावी लड़ाई लड़ी।वहीं, भाजपा के भीतर खींचतान पर निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन के बीच सबकुछ ठीक है। विपक्ष भ्रम फैला रहा है। इन तमाम बयानों के बीच भाजपा आलाकमान अब सबकुछ ठीक करने की कोशिश में जुट गया है।

15 पन्नों की रिपोर्ट में क्या है बीजेपी की हार की वजह?

आज हम आपको बताएंगे कि 15 पन्नों की रिपोर्ट में बीजेपी की हार की वजह क्या है! उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव 2024 क्यों हारी? इस सवाल के जवाब में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने आलाकमान को 15 पेज की रिपोर्ट सौंपी है। दरअसल, लोकसभा चुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद से यूपी भाजपा में कलह की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। नेता अब नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हैं। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बैठकों का दौर जारी है। प्रदेश पार्टी नेतृत्व की ओर से जवाब सौंपे जाने के बाद अब बारी शीर्ष नेताओं की है। लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद आए रिपोर्ट को लेकर प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पिछले दिनों दिल्ली में जमे थे। भाजपा आलाकमान अब इस मामले में सीधे सीएम योगीर आदित्यनाथ से चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि प्रदेश में पार्टी की स्थिति को एक बार फिर बेहतर बनाने के लिए सांगठनिक बदलाव पर भी चर्चा हो सकती है। जल्द ही यूपी के दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का भी दिल्ली दौरा हो सकता है।यूपी में भाजपा की हार की बड़ी वजह कार्यकर्ताओं का उदासीन होना माना जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठा चुके हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अगर हम पहले से ही अपनी जीत को मानकर चलेंगे तो कोई दूसरा इसका फायदा उठा ले जाएगा। हमें लोगों के बीच लगातार बने रहना होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को थकने और थमने से बचने की सलाह दी गई है। हालांकि, भाजपा कार्यकर्ताओं का आक्रोश अधिकारियों के रवैये को लेकर भी है। लोगों की परेशानी लेकर अधिकारियों तक पहुंचने के बाद उनकी सुनवाई नहीं होती। इस कारण कार्यकर्ता अब लोगों के बीच जाने से बचते हैं।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी की रिपोर्ट आने के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बयान आया कि सरकार से संगठन हमेशा बड़ा है और रहेगा। वहीं, वे कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान दिए जाने की बात कह रहे हैं। कुछ इसी प्रकार का बयान दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का भी आया था। कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी। माना जा रहा है कि आलाकमान सीएम योगी से इस संबंध में अलग से चर्चा कर सकती है।

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों पर 40 हजार कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की। सभी 80 लोकसभा सीटों पर पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत हुई। फीडबैक के आधार पर 15 पेज की रिपोर्ट तैयार की गई है। पिछले दो दिनों में प्रदेश अध्यक्ष ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। अपनी रिपोर्ट उन्होंने सौंप दी है। इस पर अलग से चर्चा की भी खबरें हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के सभी 6 क्षेत्रों पश्चिमी यूपी, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और काशी क्षेत्र में पार्टी के वोट शेयर में कम से कम 8 फीसदी की कमी आई है।

पार्टी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम और काशी क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा। इस क्षेत्र की 28 में से महज 8 सीटें भाजपा के पाले में आईं। ब्रज क्षेत्र में पार्टी को 13 में से 8 सीटें मिलीं। वहीं, गोरखपुर में पार्टी को 13 में से केवल 6 सीटें मिलीं। अवध की 16 में से 7 सीटें मिलीं हैं। कानपुर-बुंदेलखंड में बीजेपी अपनी मौजूदा सीटें वापस पाने में विफल रही। यहां पर 10 में से केवल 4 सीटों पर पार्टी को जीत मिली है।

यूपी भाजपा अध्यक्ष की ओर से सौंपी गई इंटरनल रिपोर्ट के आधार पर पार्टी के खराब प्रदर्शन के कई कारण बताए गए हैं। इसमें अधिकारियों और प्रशासन की मनमानी को वजह करार दिया गया है। कार्यकर्ताओं के सरकार से असंतोष को बड़ा कारण बताया गया है। इसके अलावा युवाओं में पेपर लीक के मसले को लेकर नाराजगी थी। वहीं, राजपूत वर्ग भी भाजपा से नाराज हो गया। इसका असर चुनावी रिजल्ट पर दिखा। राज्य में होने वाली संविदा कर्मियों की भर्ती में सामान्य वर्ग के लोगों को प्राथमिकता मिलने को विपक्ष ने आरक्षण खत्म करने जैसे मुद्दे में बदल दिया। विपक्ष पहले से ही संविधान बदलने के बयान को जोरदार तरीके से उठा रहा था। इसने पिछड़े और दलित वोट बैंक को प्रभावित किया।

भाजपा की हार के कारणों में जल्दी टिकट वितरण को भी कारण बताया गया है। लंबी चुनावी प्रक्रिया को भी हार की वजह बताई गई। पार्टी की इंटरनल रिपोर्ट में कहा गया है कि छठा और सातवां चरण आते-आते कार्यकर्ताओं का जुनून कम हो गया। सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों में ओल्ड पेंशन स्कीम का मुद्दा गरमाया रहा। पार्टी ने अग्निवीर के मुद्दे को भी हार की एक बड़ी वजह करार दिया है।

बीजेपी की इंटरनल रिपोर्ट में पार्टी के कोर वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने की बात कही गई है। लगभग हर सीट पर 30 हजार से 40 हजार पार्टी के कोर वोटर के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने की बात रिपोर्ट में है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर यादव ओबीसी यानी कुर्मी, कोरी, मौर्य, शाक्य और लोध जातियों का रुझान भाजपा से हटा है। वहीं, बसपा के कोर वोट शेयर में 10 प्रतिशत की कमी आने और 2019 की तुलना में पार्टी को दलितों का एक तिहाई वोट ही मिल पाने को भी बड़ी वजह बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कार्यकर्ताओं के साथ सरकारी अधिकारियों और प्रशासन का व्यवहार सम्मानजनक हुआ तो आगामी चुनावों में प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।