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आखिर शिवाजी का रायगढ़ किला क्यों बना रहा हमेशा से ही खास?

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आज हम आपको बताएंगे कि शिवाजी का रायगढ़ किला आखिर खास क्यों बना रहा! 1656 से कुछ समय पहले की बात है, जब शिवाजी महाराज मुगल बादशाह औरंगजेब को पस्त करने और आदिलशाही सल्तनत को धूल चटाने के बाद हिंद स्वराज्य की स्थापना के बारे में सोच रहे थे। वह चाहते थे कि हिंदू पदपादशाही का केंद्र कोई ऐसी जगह हो, जहां दुश्मन भी बाल बांका न कर सके। ऐसे में उनकी नजर तब पश्चिमी भारत में सह्याद्री पर्वतों की खड़ी ढलानों के ऊपर बने एक किले रायगढ़ पर पड़ी। महाराष्ट्र के उत्तरी कोंकण क्षेत्र में बने इस किले को जंगी किले में तब्दील किया जाना था। साल 1656 में शिवाजी महाराज ने चंद्ररावजी को हराकर इस किले पर कब्जा किया था। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बना यह किला पहाड़ी पर बना है और महाड से करीब 25 किलोमीटर दूर है। रायगढ़ किले को पहले ‘रायरी’ के नाम से जाना जाता था। शिवाजी महाराज ने इसका नाम ‘रायगढ़’ या ‘शाही किला’ रखा था। इस किले का जीर्णोद्धार शिवाजी महाराज ने ही करवाया था।

जब शिवाजी महाराज ने रायगढ़ को अपने कब्जे में किया तो इसे उन्होंने दुर्जेय बनाया। शिवाजी महाराज ने इसकी सुरक्षा में भारी-भरकम निवेश किया। इसकी दीवारों के भीतर सैनिकों और तोपखाने को तैनात किया। उन्होंने किसी भी संभावित हमलावर को विफल करने के लिए ऐसी स्ट्रैटेजी अपनाईं कि रायगढ़ दुश्मनों से बचा रहे। 1662 में शिवाजी ने रायगढ़ किले को अपने हिंदवी स्वराज्य की राजधानी बनाया। इसी दीवारों से दिवाली पर गोला-बारूद दागे जाते थे। शिवाजी ने दिवाली के दिन किले बनाने की शुरुआत की थी, जिसे महाराष्ट्र में दिवाली के दिन लोग मिट्टी के किले बनाकर मनाते हैं। शिवाजी का राज्याभिषेक 6 जून, 1674 को इसी रायगढ़ किले में हुआ था। यहीं पर एक भव्य समारोह में शिवाजी को मराठा साम्राज्य का राजा घोषित किया गया था। शिवाजी का राज्याभिषेक वाराणसी के विश्वेश्वर (गंगा भट्ट) ने शास्त्रों के मुताबिक किया था। इस समारोह में गंगा भट्ट ने शिवाजी के सिर पर यमुना, सिंधु, गंगा, गोदावरी, नर्मदा, कृष्णा और कावेरी नदियों के जल से भरे सोने के बर्तन से पानी डाला था। यहीं पर शिवाजी को शककर्ता (एक युग का संस्थापक) और छत्रपति (छत्र के स्वामी) की उपाधि दी गई।

रायगढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल में मराठा साम्राज्य की राजधानी का मुख्य केंद्र था। उस वक्त रायगढ़ किले पर पहुंचने के लिए 1,450 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं, जिस पर आज सैलानी रोपवे से जा सकते हैं। शिवाजी ने यहीं पर हैंदव धर्मोद्धारक (हिंदू धर्म के रक्षक) की उपाधि भी धारण की थी। रायगढ़ किले से एक कृत्रिम झील भी दिखती है जिसे ‘गंगा सागर झील’ के नाम से जाना जाता है। किले का एकमात्र मुख्य मार्ग महा दरवाजा से होकर गुजरता है। रायगढ़ किले के अंदर राजा के दरबार में मूल सिंहासन की प्रतिकृति है जो मुख्य द्वार के सामने है जिसे नागरखाना दरवाजा कहा जाता है। इस घेरे को द्वार से सिंहासन तक सुनने में सहायता के लिए ध्वनिक रूप से डिजाइन किया गया था। किले में एक प्रसिद्ध गढ़ है जिसे हिरकानी बुरुज (हिरकानी गढ़) कहा जाता है, जो एक विशाल खड़ी चट्टान पर बना है। कहा जाता है कि इस किले में 300 से ज्यादा महल और 84 कुएं थे।

शिवाजी महाराज के रहते मुगल कभी रायगढ़ किले को छू भी नहीं पाए। हालांकि, 15 साल बाद रायगढ़ पर एक बार फिर दूसरी ताकतों का नियंत्रण स्थापित हुआ। 1689 में रायगढ़ के युद्ध में मुगल सेनापति जुल्फिकार खान ने रायगढ़ किले पर हमला करके मराठों के तीसरे छत्रपति राजाराम भोंसले प्रथम की सेना को हराया। इसके बाद मुगल बादशाह औरंगज़ेब ने किले का नाम बदलकर ‘इस्लामगढ़’ रख दिया। 1707 तक अहमदनगर सल्तनत के राज्य प्रतिनिधि फतेह खान इस किले पर कब्ज़ा करके अगले दो दशकों तक इस पर शासन करते रहे। इसके बाद इस पर मराठों ने इस किले पर फिर से कब्जा कर लिया। उन्होंने 1813 तक यहां शासन किया। बाद में यानी 1818 में तोपों से बमबारी करने के बाद अंग्रेजों ने इस किले पर कब्जा जमा लिया। पहले इसे जमकर लूटा और फिर इसे नुकसान पहुंचाया। अंग्रेजों ने रायगढ़ की खड़ी, दुर्गम और ठोस बनावट की तुलना भूमध्य सागर में एक मशहूर रॉक से करते हुए इसे पूर्व का जिब्राल्टर करार दिया।

छत्रपति शिवाजी ने सिंधु दुर्ग किले की नींव 25 नवंबर, 1664 को रखी थी। 48 एकड़ में फैले इस किले की ऊंचाई 30 फुट है। इस किले की तीन दीवारें 12 फुट मोटी हैं, जो पुर्तगालियों, अंग्रेजों के साथ-साथ अरब सागर के समुद्री लुटेरों से भी बचाने में मददगार हुआ करती थीं। इसे 3000 से अधिक मजदूरों ने बनाया था। उस वक्त यह तीन साल में बनकर तैयार हुआ था। इस किले का निर्माण डच, फ्रांसीसी और पुर्तगालियों के आक्रमण को रोकने के लिए किया गया था।

 

जब पूरे विश्व में था मराठाओं का खौफ!

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आज हम आपको मराठाओं के खौफ की कहानी बताने जा रहे हैं! यूरोप के एक विद्वान सर रिचर्ड टेंपल ने महान मराठा योद्धा पेशवा बाजीराव प्रथम के बारे में एक बात कही है, जो उनकी महानता के बारे में काफी है। अपनी किताब Sivaji and the Rise of the Mahrattas में टेंपल कहते हैं कि सवार के रूप में बाजीराव को कोई भी मात नहीं दे सकता था। युद्ध में वह हमेशा आगे रहते थे। मुश्किल से मुश्किल काम में भी वह हमेशा गोला-बारूद का सामना करने में आगे रहते थे। कभी न थकने वाले बाजीराव अपने सिपाहियों के साथ दुःख-सुख बांटते थे। टेंपल कहते हैं कि मुस्लिम और यूरोपीय दुश्मनों के खिलाफ कामयाबी की बड़ी वजह हिंदुओं का उन पर गहरा यकीन और आस्था थी। बाजीराव के समय में मराठों की दहशत अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक संपूर्ण भारतीय महाद्वीप पर थी। उनकी मौत उस डेरे में हुई, जहां वह जिंदगी भर सिपाहियों के साथ रहा। महान योद्धा बाजीराव को पेशवा के रूप में और हिंदू शक्ति के महान अवतार के रूप में मराठे उन्हें हमेशा याद करते रहेंगे। टेंपल की इसी टिप्पणी को देखते हुए आज जानते हैं पेशवा बाजीराव की कहानी।मराठों का इतिहास लिखने वाले विश्वनाथ गोविंद दीघे की किताब ‘पेशवा बाजीराव प्रथम एंड मराठा एक्सपैंशन’ के अनुसार, बाजीराव ने जब मराठा सत्ता को मजबूत कर लिया तो उन्होंने सादात खां और मुगलों को सबक सिखाने की सोची। उस वक्त तक मुगलों पर सीधा हमला करने की कोई सोच भी नहीं सकता था।

बाजीराव ने इसी खौफ को खत्म किया। उन्होंने केवल 500 घोड़ों के साथ बिना रुके बिना थके 10 दिन की दूरी 48 घंटे में पूरी कर ली। देश के इतिहास में अब तक 2 राजाओं के आक्रमण ही सबसे तेज माने गए हैं-एक अकबर का फतेहपुर से गुजरात के विद्रोह को दबाने के लिए 9 दिन के अंदर वापस गुजरात जाकर हमला करना और दूसरा बाजीराव का दिल्ली का सैन्य अभियान।

इतिहासकार बीएल ग्रोवर की किताब आधुनिक भारत के अनुसार, बाजीराव ने दिल्ली में आज के तालकटोरा स्टेडियम के पास डेरा डाल दिया। उस वक्त मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला बाजीराव को लालकिले के इतना करीब सुनकर घबरा गया। उसने पूछा कि कौन है ये बाजीराव? तब एक चित्रकार ने बाजीराव की पेंटिंग बनाकर दिखाई, जब मोहम्मद शाह ने देखा तो उसने घबराकर कहा ये तो प्रेत है…ये तस्वीर हटाओ। उसने डरकर खुद को लालकिले में कैद कर लिया। मोहम्मद शाह ने मीर हसन कोका की अगुआई में 10 हजार सैनिकों को बाजीराव का सामना करने के लिए भेजा। बाजीराव के 500 लड़ाकों ने उस सेना को 28 मार्च 1737 को शर्मनाक तरीके से हरा दिया। यह मराठों के लिए सबसे सुनहरा दिन साबित हुआ।

विश्वनाथ दीघे की किताब के अनुसार, 1737 में जब बाजीराव दिल्ली विजय के बाद पुणे की ओर लौटे तो मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला ने सादात अली खान और हैदराबाद के निजाम को लिखा कि आप बाजीराव को पुणे से पहले ही रोक ले, जिसके चलते निजाम की अगुवाई में दुश्मनों की सेना का सामना बाजीराव से भोपाल के निकट हुआ।

24 दिसंबर, 1737 के दिन मराठा सेना ने सभी को जबरदस्त तरीके से हराया। निजाम ने अपनी जान बचाने के के लिए बाजीराव से 7 जनवरी, 1738 को दोराहा की संधि कर ली। मालवा मराठों को मिल गया और मुगलों को 50 लाख रुपए बतौर हर्जाना बाजीराव को देना पड़ा। ब्रिटिश फील्ड मार्शल बर्नार्ड मोंटगोमरी के अनुसार, बाजीराव भारत के इतिहास का सबसे महानतम सेनापति था और पालखेड़ युद्ध में जिस तरीके से उन्होंने निजाम की विशाल सेनाओं को पराजित किया वह सिर्फ बाजीराव प्रथम ही कर सकते थे। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में ऐसा करने की क्षमता किसी और में नहीं थी। बाजीराव प्रथम और उनके भाई चिमाजी अप्पा ने बेसिन के लोगों को पुर्तगालियों के अत्याचार से भी बचाया जो जबरन धर्म परिवर्तन करवा रहे थे। 1739 में पुर्तगालियों को हराया और वसई की संधि करवा दी।

पेशवा बाजीराव बल्लाल का जन्म 18 अगस्त सन् 1700 को चितपावन कुल के ब्राह्मण परिवार में पिता बालाजी विश्वनाथ और माता राधाबाई के घर में हुआ था। उनके पिताजी मराठा छत्रपति शाहूजी महाराज के प्रथम पेशवा यानी प्रधानमंत्री थे। बाजीराव का एक छोटा भाई भी था चिमाजी अप्पा। वह 1720 में 19 साल की उम्र में पेशवा बने। बाजीराव घोड़े पर सवार होकर लड़ने में सबसे माहिर थे। बाजीराव की लंबाई 6 फीट से ज्यादा थी। उनके हाथ घुटनों तक आते थे। 41 किलो की उनकी तलवार दुश्मन का हौसला पस्त कर देती थी। बाजीराव ने नासिक शहर के पास पालखेड़ गांव में निजाम को हरा दिया और उसे 6 मार्च 1728 को मुंगी शेवगांव की एक संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया, जिससे निजाम ने मराठों की हूकूमत मानने पर मजबूर हुआ। वह सरदेशमुखी और चौथ जैसे मराठा टैक्स देने पर मजबूर हुआ। प्रख्यात इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार ने पेशवा बाजीराव के गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हुए उन्हें ‘स्वर्ग में जन्मे घुड़सवार वीर सेनापति’ बताया है।

बाजीराव ने 1730 में पुणे में शनिवार वाड़ा का निर्माण करवाया, जिसे पुणे को राजधानी बनाया। बाजीराव ने ही पहली बार देश में हिंदु पदशाही का सिद्धांत दिया और सभी हिंदुओं को एक कर विदेशी शक्तियों के खिलाफ लड़ने का बीड़ा उठाया। मगर, दूसरे धर्म के लोगों को कभी परेशान नहीं किया। 1740 में बाजीराव की बुखार से अचानक मौत हो गई। जिसके बाद हिंदुस्तान को अगले 200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी झेलनी पड़ी। कहते हैं कि बाजीराव की एक मुस्लिम लड़की मस्तानी से प्रेम हो गया था। जिस पर बॉलीवुड में बाजीराव-मस्तानी जैसी फिल्म भी बनी।

ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स ग्रांट डफ की किताब ‘हिस्ट्री ऑफ मराठाज’ के अनुसार, पेशवा बाजीराव प्रथम के नाम से अंग्रेज शासक थर-थर कांपते थे। मुगल शासक बाजीराव से इतना डरते थे कि उनसे मिलने तक से भी घबराते थे। उन्होंने निजाम, मोहम्मद बंगश से लेकर मुगलों, अंग्रेजों और पुर्तगालियों तक को युद्ध के मैदान में कई-कई बार करारी शिकस्त दी थी। बाजीराव पेशवा के समय में महाराष्ट्र, गुजरात, मालवा, बुंदेलखंड सहित करीब 80 फीसदी हिंदुस्तान पर मराठों की पताका लहरा रही थी।

 

झांसी अग्निकांड-10 नवजात शवों की फोटो जारी:शव देखने लायक नहीं, 80% तक झुलसे; प्रशासन ने कहा– ज्यादा मौतों की बात गलत

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में शुक्रवार रात भीषण आग लग गई। हादसे में 10 बच्चों की मौत हो गई। शनिवार शाम को 7 बच्चों का 2-2 डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। सभी बच्चे 80 फीसदी से अधिक जल गए थे। जलने की वजह से ही मौत हुई। सभी के DNA सैंपल भी लिए गए हैं। 3 बच्चों के शवों की पहचान नहीं हो सकी, इसलिए पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया। पहचान होने या नहीं होने पर 72 घंटे बाद पोस्टमॉर्टम होगा। इधर, 20 घंटे से लापता 8 बच्चों में से 7 मिल गए हैं। सिर्फ 1 बच्चा अभी तक नहीं मिल पाया है। झांसी जिला प्रशासन ने 10 बच्चों के शवों की फोटो जारी की। कहा- ज्यादा मौतों की बात गलत है। कैसे हुआ हादसा?
शुक्रवार रात करीब साढ़े 10 बजे ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में स्पार्किंग के चलते आग लगी, फिर धमाका हो गया। पूरे वार्ड में आग फैल गई। वार्ड बॉय ने आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) चलाया, मगर वह 4 साल पहले ही एक्सपायर हो चुका था, इसलिए काम नहीं किया। सूचना पर फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां पहुंचीं। खिड़की तोड़कर पानी की बाैछारें मारीं। भीषण आग को देखते हुए सेना को बुलाया गया। करीब 2 घंटे में आग पर काबू पाया गया। वार्ड की खिड़की तोड़कर 39 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

माधुरी दीक्षित ने सुनाया घाघरा गाने की शूटिंग का किस्सा:बोलीं- रणबीर कपूर काफी शरारती हैं, उनके साथ काम करके अच्छा लगा

माधुरी दीक्षित ने हाल ही में फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ को लेकर बात की। एक इंटरव्यू के दौरान, एक्ट्रेस ने रणबीर कपूर को शरारती बताया और कहा कि वह बहुत चंचल और मस्ती करने वाले हैं। लेकिन उनके अंदर एक काफी शांत स्वभाव भी है। इसके अलावा, माधुरी ने घाघरा सॉन्ग को लेकर भी बात की। पिंकविला के साथ बातचीत में माधुरी दीक्षित ने कहा, ‘ये जवानी है दीवानी फिल्म में मैंने घाघरा गाने पर डांस किया था। मुझे यह गाना करते हुए बहुत मजा आया, क्योंकि सबसे पहले गाना तो शानदार था। लेकिन जिस तरीके से इसे फिल्माया गया। वह और भी ज्यादा बेहतरीन था। यह फिल्म में एक ऐसे मोड़ पर आता है, जहां यह सभी को हैरान कर देता है।’ माधुरी दीक्षित ने आगे कहा, ‘इस गाने में मेरे साथ रणबीर कपूर भी थे। उनके साथ काम करना बहुत ही ज्यादा मजेदार था। वह बहुत शरारती हैं, लेकिन आप जान नहीं सकते, वह बहुत शांत भी होते हैं।’ माधुरी दीक्षित ने अपने आइकॉनिक गानों के सलेक्शन के बारे में कहा, ‘मैंने सोचा था कि वैसे चोली के पीछे गाने कर लिए हैं, चलो अब घाघरा पर डांस करते हैं। इतना ही नहीं, मैंने द फेम गेम के लिए दुपट्टा मेरा भी किया, तो अब दुपट्टा भी हो गया।’ साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म ये जवानी है दीवानी जबरदस्त हिट रही थी। 320 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करने वाली इस फिल्म को अयान मुखर्जी ने डायरेक्ट किया है। बता दें, माधुरी दीक्षित हाल ही में फिल्म ‘भूल भुलैया 3’ में नजर आई हैं। इस फिल्म में उनके अलावा कार्तिक आर्यन, विद्या बालन और तृप्ति डिमरी लीड रोल में हैं।

एन. रघुरामन का कॉलम:हम समाज की खामोश चीखें सुनने के लिए खुद को कब प्रशिक्षित करेंगे?

“मां, मां तुम कहां हो? मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं मां, जल्दी आओ प्लीज, मां प्लीज आओ ना… मुझे पता है कि तुमने इन नौ महीनों में मेरी कितनी देखभाल की है, मुझे पता है कि तुम मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती हो। तुमने मुझे इन दिनों कितनी कहानियां सुनाईं और मुझे बताया कि तुम कितनी खूबसूरत दुनिया में रह रही हो और मुझे उस खूबसूरत दुनिया का सामना करने के लिए तैयार किया, जिसमें मैं प्रवेश करने जा रहा हूं। मां, प्लीज मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं मां, जल्दी आओ… मुझे पता है मां, तुम मुझे बचाने आओगी, मां।’ आप सोच रहे होंगे कि यह सब किसने और किससे कहा है? जानने के लिए आगे पढ़ें! मुम्बई के कामा एंड एलब्लेस अस्पताल में अपनी नाइट शिफ्ट में एक मरीज को देखने के दौरान स्टाफ नर्स अंजलि कुलथे ने एक छोटा-सा धमाका सुना। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के उस बड़े अस्पताल के पीछे की तरफ की खिड़की से बाहर झांका। उन्होंने देखा कि दो लोग पीछे के बंद गेट से कूदे, परिसर में प्रवेश किया और दो गार्डों को गोली मार दी। प्रवेश द्वार पर खून से लथपथ दो बेजान शवों को देखकर अंजलि घबरा गईं, वे तेजी से भागीं और प्रसव-पूर्व देखभाल वार्ड के भारी दोहरे दरवाजे बंद कर दिए। दोनों आतंकवादी- अजमल कसाब और उसका लंबा साथी अबू इस्माइल- उस मंजिल पर तेजी से चढ़ रहे थे, जहां वे थीं। वे जल्दी से सभी गर्भवती महिलाओं और उनके कुछ परिजनों को वार्ड के दूर के छोर पर एक छोटी-सी पेंट्री में ले गईं। इस्माइल ने खिड़की से उनकी दिशा में दो गोलियां चलाईं। एक गोली दीवार से टकराकर एक आया के हाथ में जा लगी, जिससे उन्हें बहुत खून बहने लगा। अंजलि और दूसरे स्टाफ सदस्य उनका इलाज करते रहे और घंटों चुपचाप खड़े रहे, जब तक कि बाहर का शोर शांत नहीं हो गया। जैसे ही उन्हें उम्मीद हुई कि अब संकट टल गया होगा, वार्ड में एक महिला को प्रसव-पीड़ा शुरू हो गई। अगर देरी होती तो दो जानें खतरे में पड़ सकती थीं। अंजलि ने उनकी मदद के लिए अपनी जान को जोखिम में डालने का फैसला किया। तब तक दोनों हथियारबंद आतंकवादियों ने छत पर फिर से आतंक मचाना शुरू कर दिया था और कई डॉक्टरों को बंधक बना लिया था। लेकिन अंजलि और कुछ समर्पित स्टाफ-सदस्य- अपने स्वयं के जीवन के अनिश्चय में होने के बावजूद- दूसरी मंजिल पर एक शांत प्रसव कक्ष में सिर्फ एक ट्यूबलाइट की रोशनी में एक नई जिंदगी को दुनिया में ला रहे थे। अंजलि, मरीज का हाथ पकड़े हुए, उस अजन्मे बच्चे की सुरक्षा के बारे में सोचते हुए, सीढ़ी की दीवार के साथ-साथ ऊपर जाती हैं। और आखिरकार वह महिला डॉक्टरों की मदद से अपने बच्चे को सुरक्षित रूप से जन्म देने में सक्षम हो जाती है। आप सोच सकते हैं कि ऊपर लिखे शब्द उस बच्चे ने कहे होंगे, जो आज 16 साल का है। हो सकता है। क्योंकि सभी बच्चे अपनी मां से चुपचाप बातें करते हैं और मांओं को भगवान ने उन अनकही बातों को सुनने की क्षमता दी है। इस साधारण विचार ने मुझे एक घंटे तक रुलाया। जानते हैं क्यों? क्योंकि मैंने कल्पना की कि ये शब्द उन बच्चों के भी हो सकते हैं, जो दुर्भाग्य से इस शुक्रवार रात 10.30 बजे झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) वार्ड में लगी भीषण आग में जलने और दम घुटने से मारे गए। ​हालांकि बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचा ली गई। लेकिन अगर अस्पताल के कर्मचारियों की इस बात की कोई आपातकालीन ड्रिल होती कि अस्पताल का हर कर्मचारी- चाहे वह किसी भी विभाग का क्यों न हो- मदद की जरूरत वाले बच्चों और बुजुर्गों की किस तरह से मदद करेगा, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी। फंडा यह है कि ऐसी बहुत-सी समस्याएं रोजाना चुपचाप चीखती रहती हैं। अगर हम खुद को उन खामोश चीखों को सुनने के लिए प्रशिक्षित नहीं करते हैं, तो हमारी सारी तरक्की बेकार है।

मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ:ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की चिनगारी से 10 नवजात जिंदा जले; राहुल बोले- मोदी को भूलने की बीमारी; दिल्ली के स्कूलों में मास्क जरूरी

नमस्कार, कल की बड़ी खबर झांसी के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में 10 नवजात की मौत से जुड़ी रही। एक खबर राहुल गांधी के चुनावी बयान की रही। वहीं दिल्ली के स्कूलों में सभी स्टूडेंट्स के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन कल की बड़ी खबरों से पहले आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर… अब कल की बड़ी खबरें… 1. ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में चिनगारी से 10 नवजात जिंदा जले, प्रशासन ने इनके फोटो जारी किए झांसी के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (SNCU) में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में स्पार्किंग के चलते आग लगी थी। शुक्रवार रात हादसे 10 बच्चों की मौत हुई थी, 39 को बचाया गया। लेकिन 8 बच्चों की जानकारी नहीं है। वार्ड बॉय ने आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर चलाया, लेकिन ये 4 साल पहले ही एक्सपायर हो चुका था। शनिवार को IB की टीम जांच के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंची। 10 में से 7 बच्चों की शिनाख्त हुई: 10 में से 7 शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया है। 3 की शिनाख्त की जा रही है। 16 बच्चों को मेडिकल कॉलेज की अलग यूनिट में भर्ती किया गया है। इनमें से 3 की हालत गंभीर है। 7 बच्चे निजी अस्पताल में भर्ती हैं। 8 बच्चों का पता नहीं चल पा रहा है। परिजन ने कहा कि ये भी SNCU में भर्ती थे। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन कोई जानकारी नहीं दे रहा है। 10 मौतों की वजह: बच्चों को SNCU में रखा गया था। इसके दो पार्ट थे, अंदर की तरफ क्रिटिकल केयर यूनिट थी। यहीं पर सबसे ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। क्योंकि एंट्री और एग्जिट का एक ही रास्ता था, जिसमें धुआं भर गया था। हॉस्पिटल का फायर अलार्म नहीं नहीं बजा। परिजन का आरोप है कि बच्चों को पैरामेडिकल स्टाफ ने बचाया ही नहीं, वह भाग गए। मेडिकल स्टाफ इस हादसे में जले नहीं, सभी सुरक्षित हैं।
पूरी खबर यहां पढ़ें… 2. राहुल बोले- मोदी को बाइडेन की तरह भूलने की बीमारी, भाषण देते वक्त भूल जाते हैं कि क्या कहना है
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के चंद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से की। राहुल ने कहा, ‘आजकल मोदी जी अपने भाषणों में वही बातें बोल रहे हैं, जो हम बोल रहे हैं। शायद मोदी जी को मेमोरी लॉस हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति भी भाषण देते वक्त भूल जाते थे। बोलना कुछ होता था और बोल कुछ और देते थे। फिर पीछे से उन्हें बताया जाता था कि ये नहीं बोलना है।’ महाराष्ट्र में 20 नवंबर को वोटिंग: महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को वोटिंग होनी है। नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। कांग्रेस महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में सबसे ज्यादा 103 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। MVA में कांग्रेस, शिवसेना उद्धव और NCP शरद शामिल है। पूरी खबर यहां पढ़ें… 3. ICC ने चैंपियंस-ट्रॉफी टूर से PoK के 3 शहर हटाए, 15-26 जनवरी तक भारत में रहेगी ट्रॉफी
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने चैंपियंस ट्रॉफी के टूर का शेड्यूल जारी किया है। इसमें PoK के शहरों के नाम नहीं हैं। पाकिस्तान के 7 शहरों के अलावा ट्रॉफी 7 देशों में जाएगी। यह ट्रॉफी 15 से 26 जनवरी तक भारत में रहेगी। टूर्नामेंट फरवरी 2025 से पाकिस्तान में खेला जाएगी। पूरी खबर यहां पढ़ें… 4. इंफाल में विधायकों के घर तोड़फोड़-आगजनी; 7 जिलों में इंटरनेट बैन, 5 में कर्फ्यू मणिपुर में 15 नवंबर को एक महिला और दो बच्चों के शव जिरी नदी में मिले थे। इसके बाद कई जिलों में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। मैतेई समुदाय के लोगों ने इंफाल में 6 विधायकों के घर पर पथराव और आगजनी की। मणिपुर के 7 जिलों में इंटरनेट बैन और 5 जिलों में कर्फ्यू है। 11 नवंबर को 6 लोग अगवा हुए थे: 11 नवंबर को वर्दी पहने हथियारबंद उग्रवादियों ने जिरीबाम जिले के बोरोब्रेका पुलिस स्टेशन और CRPF चौकी पर हमला किया था। इसमें 10 उग्रवादी मारे गए। इस दौरान पुलिस स्टेशन स्थित राहत शिविर से 6 लोगों को अगवा कर लिया गया गया। 15 नवंबर को मिले तीनों शव इन लापता हुए लोगों के बताए जा रहे हैं। उधर, जिरीबाम में 10 उग्रवादियों के परिजन उनके शवों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। उन पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
पूरी खबर यहां पढ़ें… 5. दिल्ली में AQI-440 पार: स्कूलों में मास्क पहनना जरूरी, सरकारी ऑफिस की टाइमिंग बदली
दिल्ली में प्रदूषण ‘गंभीर’ श्रेणी में आ चुका है, 39 से ज्यादा जगहों पर एयक क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400+ दर्ज किया गया। छठी से 12वीं तक के स्कूलों में मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। 5वीं क्लास तक के स्कूल पहले से ही ऑनलाइन मोड में चल रहे हैं। लोग निजी वाहन न चलाएं, इसके लिए बस-मेट्रो के फेरे बढ़ाए गए हैं। ₹5.85 करोड़ का जुर्माना लगाया: ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे फेज के तहत शनिवार को ₹5.85 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। दिल्ली में निर्माण, खनन और तोड़फोड़ पर रोक है। राजधानी में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए GRAP को 4 कैटेगरी में बांटा गया है। इसके तहत, अलग-अलग कदम उठाए जाते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… 6. टायसन के मैच से नेटफ्लिक्स 6 घंटे ठप, 19 साल बाद रिंग में उतरे, 31 साल छोटे खिलाड़ी से हारे दुनिया के ऑल टाइम ग्रेट मुक्केबाज माइक टायसन ने 31 साल छोटे 27 साल के अमेरिकी बॉक्सर जैक पॉल से मुकाबला किया। टायसन 19 साल बाद रिंग में उतरे थे। जैक ने टायसन को 78-74 से हरा दिया। मैच की लाइव स्ट्रीमिंग नेटफ्लिक्स पर हुई, लेकिन इतने ज्यादा यूजर्स स्ट्रीमिंग से जुड़े कि सर्विस 6 घंटे ठप हो गई। अमेरिका और भारत में 1 लाख से ज्यादा यूजर्स को नेटफ्लिक्स चलाने में दिक्कत हुई। जैक को ₹338, टायसन को ₹169 करोड़ मिले: मैच की टोटल प्राइज मनी 60 मिलियन डॉलर यानी 506 करोड़ रुपए थी। मुकाबला जीतने वाले जैक पॉल को 40 मिलियन यानी करीब 338 करोड़ रुपए और माइक टायसन को 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 169 करोड़ रुपए मिले।
पूरी खबर यहां पढ़ें… 7. ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अमेरिका को मैसेज भेजा, कहा- ट्रम्प की हत्या का कोई इरादा नहीं
ईरान ने अमेरिका को एक मैसेज भेजकर साफ कर किया है कि उसका नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या का कोई इरादा नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अक्टूबर में थर्ड पार्टी के जरिए अमेरिका को यह मैसेज भेजा था। यह मैसेज ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का है। क्यों ट्रम्प को मारना चाहता था ईरान: रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका से मिली चेतावनी देने के बाद यह मैसेज भेजा। दरअसल, बाइडेन प्रशासन ने सितंबर में चेतावनी दी थी कि अगर ट्रम्प की हत्या की कोशिश होती है तो इसे एक्ट ऑफ वॉर माना जाएगा। ईरान, ट्रम्प की हत्या करके 2020 के ड्रोन हमले का बदला लेना चाहता है। दरअसल, 2020 में अमेरिका ने सीरिया में ड्रोन हमले के जरिए ईरान के सैन्य कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी थी। यह हमला ट्रम्प के निर्देश पर हुआ था।
पूरी खबर यहां पढ़ें… आज का कार्टून By मंसूर नकवी… कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… अब खबर हटके… 13 साल के वैभव IPL ऑक्शन में, सचिन से भी कम उम्र में रणजी में किया था डेब्यू बिहार के समस्तीपुर के 13 साल के वैभव सूर्यवंशी इस बार IPL ऑक्शन में शामिल होंगे। वैभव रणजी, हेमन और कूच बिहार ट्रॉफी खेल चुके हैं। वैभव ने बिहार और मुंबई के बीच रणजी में डेब्यू किया था, तब उनकी उम्र 12 साल 9 महीने थी। सचिन तेंदुलकर ने 15 साल, 7 महीने की उम्र में रणजी में डेब्यू किया था।
पढ़ें पूरी खबर… भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… इन करेंट अफेयर्स के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… वृश्चिक राशि के नौकरीपेशा लोगों को महत्वपूर्ण अधिकार मिल सकते हैं। धनु राशि के लोगों को अचानक रुका पैसा मिल सकता है, जानिए आज का राशिफल आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

भास्कर अपडेट्स:नाइजीरिया में डॉक्टर ने सबसे बड़ी‎ 10,814 वर्ग फीट की ड्राइंग बनाई‎, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना

नाइजीरिया के डॉक्टर फोला डेविड टोलाराम ने 10,814.5 वर्ग फुट‎की ड्राइंग बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकाॅर्ड अपने नाम किया है। इस ड्राइंग का ‎शीर्षक अनेकता की एकता है। इसमें नाइजीरिया का नक्शा और उसमें देश‎ की अलग-अलग संस्कृति काे दर्शाया गया है। 31 साल के टोलाराम ने 5 हजार सीटों वाले स्टेडियम में ये ड्राइंग बनाई। इसे बनाने के‎लिए उन्होंने बड़े कैनवास पर वाटरप्रूफ मार्करों का उपयोग किया।‎ आज की अन्य बड़ी खबरें… चीन में छात्र ने भीड़ पर चाकू से हमला किया, 8 की मौत और 17 घायल चीन के वूशी शहर में 21 साल के छात्र ने शनिवार शाम को लोगों की भीड़ पर चाकू से हमला कर दिया। इस घटना में 8 लोगों की मौत हो गई और 17 घायल हैं। इससे पहले हिट एंड रन का मामला सामने आया है। जिसमें 35 लोगों की मौत हुई थी और 43 लोग घायल हुए थे। पूरी खबर पढ़ें …

दिल्ली के जहांगीरपुरी में AQI 783 पहुंचा:ग्रैप-3 लागू होने के पहले दिन 550 वाहनों के चालान कटे, 5.85 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा

दिल्ली में शनिवार देर रात प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर रिकॉर्ड किया गया। जहांगीरपुरी में AQI सबसे ज्यादा 783 रिकॉर्ड किया गया। वहीं, शाहदरा में AQI 682 दर्ज हुआ। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण के तहत पहले दिन शुक्रवार को ट्रैफिक पुलिस ने करीब 550 चालान काटे। एक ही दिन में 5.85 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया। प्रदूषण को देखते हुए मुख्यमंत्री आतिशी ने सरकारी ऑफिसों के लिए नए समय की घोषणा की। केंद्र सरकार के दफ्तर सुबह 9 से शाम 5:30, दिल्ली सरकार के दफ्तर 10 से शाम 6:30 और MCD के दफ्तर 8:30 से शाम 5 बजे तक चलेंगे। दिल्ली के सभी प्राइमरी (5वीं क्लास तक) स्कूलों में ऑनलाइन क्लास चलाने का ऐलान शुक्रवार को ही कर दिया गया था। अब छठी से 12वीं तक के स्कूलों के लिए मास्क अनिवार्य करने का फैसला लिया गया है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने आरोप लगाया कि पड़ोसी राज्य जैसे हरियाणा, यूपी और राजस्थान जानबूझकर BS-IV डीजल बसें दिल्ली भेज रहे हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। भाजपा शासित राज्य नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उधर, पड़ोसी देश पाकिस्तान के लाहौर में AQI 1600 तक पहुंच गया है, जो ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है। इसे देखते हुए सरकार ने सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों को 24 नवंबर तक बंद करने का फैसला किया है। दिल्ली में प्रदूषण की 6 तस्वीरें स्कूलों में 6th क्लास से मास्क अनिवार्य
प्रदूषण को देखते हुए मुख्यमंत्री आतिशी ने सरकारी ऑफिसों के लिए नए समय की घोषणा की। केंद्र सरकार के दफ्तर सुबह 9 से शाम 5:30, दिल्ली सरकार के दफ्तर 10 से शाम 6:30 और MCD के दफ्तर 8:30 से शाम 5 बजे तक चलेंगे। दिल्ली के सभी प्राइमरी (5वीं क्लास तक) स्कूलों में ऑनलाइन क्लास चलाने का ऐलान शुक्रवार को ही कर दिया गया था। अब छठी से 12वीं तक के स्कूलों के लिए मास्क अनिवार्य करने का फैसला लिया गया है। सरकार ने लोगों से निजी वाहन न चलाने की अपील की है। इसके लिए 106 अतिरिक्त क्लस्टर बसें और मेट्रो के 60 और फेरे बढ़ाए गए हैं, ताकि लोग प्राइवेट व्हीकल का कम इस्तेमाल करें। एयर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने NCR यानी हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आने वाली बसों के दिल्ली आने पर भी रोक लगा दी है। दिल्ली-NCR में तोड़फोड़ पर रोक, डीजल गाड़ियों पर पाबंदी दिल्ली में प्रदूषण की 2 सैटेलाइट इमेज अमेरिकी साइंटिस्ट हीरेन जेठवा ने 14 नवंबर को दिल्ली की सैटेलाइट इमेज शेयर की हैं। इसमें दिल्ली में घना स्मॉग दिखाई दे रहा है। हीरेन अमेरिका की मॉर्गन स्टेट यूनिवर्सिटी में एरोसोल रिमोट सेंसिंग साइंटिस्ट हैं। हीरेन की फोटोज NASA ने भी शेयर की हैं। आगे क्या: UP, पंजाब, हिमाचल में रहेगा बहुत घना कोहरा
पंजाब-चंडीगढ़ में धुंध का अलर्ट जारी किया है। राजस्थान में दो दिन घने कोहरे का अलर्ट है। UP और पंजाब में 15 नवंबर तक, हिमाचल में 18 नवंबर तक रात और सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाएगा। हरियाणा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड में 16 नवंबर तक धुंध छाने का अनुमान है। दिल्ली में प्रदूषण से निपटने ग्रेडेड एक्शन प्लान लागू
राजधानी में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए प्रदूषण के स्तर को 4 कैटेगरी में बांटकर देखा गया है। हर स्तर के लिए लिए पैमाने और उपाय तय हैं। इसे ग्रेडेड एक्शन प्लान यानी GRAP कहते हैं। इसकी 4 कैटेगरी के तहत सरकार पाबंदियां लगाती है और प्रदूषण कम करने के उपाय जारी करती है। दिल्ली सरकार ने कहा था- प्रतिबंध नहीं लगाएंगे
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने गुरुवार सुबह ही कहा था, ‘GRAP-3 के प्रतिबंध लागू नहीं किए जाएंगे।’ इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आतिशी सरकार की निष्क्रियता के कारण प्रदूषण की स्थिति दिल्ली के आसपास के इलाकों से भी बदतर हो गई है। राजपथ जैसे इलाकों में भी AQI 450 से ज्यादा है। उन्होंने कहा- दिल्ली के लोग चाहते हैं कि गोपाल राय अपना पद छोड़ दें। इस पर गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली की खराब एयर क्वालिटी में 35% योगदान भाजपा शासित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के NCR में आने वाले जिलों का है। दिल्ली में 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू किया गया था
दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में GRAP-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (BS -III पेट्रोल और BS-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं। आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेन्टेनेन्स एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रिपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है। ​​​​​​AQI क्या है और इसका हाई लेवल खतरा क्यों
AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) , PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है। हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है। क्या होता है PM, कैसे नापा जाता है
PM का अर्थ होता है पर्टिकुलेट मैटर। हवा में जो बेहद छोटे कण यानी पर्टिकुलेट मैटर की पहचान उनके आकार से होती है। 2.5 उसी पर्टिकुलेट मैटर का साइज है, जिसे माइक्रोन में मापा जाता है। इसका मुख्य कारण धुआं है, जहां भी कुछ जलाया जा रहा है तो समझ लीजिए कि वहां से PM2.5 का प्रोडक्शन हो रहा है। इंसान के सिर के बाल की अगले सिरे की साइज 50 से 60 माइक्रोन के बीच होता है। ये उससे भी छोटे 2.5 के होते हैं। मतलब साफ है कि इन्हें खुली आंखों से भी नहीं देखा जा सकता। एयर क्वालिटी अच्छी है या नहीं, ये मापने के लिए PM2.5 और PM10 का लेवल देखा जाता है। हवा में PM2.5 की संख्या 60 और PM10 की संख्या 100 से कम है, मतलब एयर क्वालिटी ठीक है। गैसोलीन, ऑयल, डीजल और लकड़ी जलाने से सबसे ज्यादा PM2.5 पैदा होते हैं। दावा- दिल्ली में 69% परिवार प्रदूषण से प्रभावित NDTV के मुताबिक, प्राइवेट एजेंसी लोकल सर्कल के सर्वे में दावा किया गया कि दिल्ली-NCR में 69% परिवार प्रदूषण से प्रभावित हैं। 1 नवंबर को जारी की गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली-NCR में 62% परिवारों में से कम से कम 1 सदस्य की आंखों में जलन है। 46% फैमिली में किसी न किसी मेंबर को जुकाम या सांस लेने में तकलीफ (नेजल कंजेशन) और 31% परिवार में एक सदस्य अस्थमा की परेशानी है। पूरी खबर पढ़ें… राज्यों की मौसम की खबरें… बिहार: 12 जिलों में कोहरे का ऑरेंज अलर्ट, पटना एयरपोर्ट से 12 जोड़ी फ्लाइट लेट बिहार में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। 14 नवंबर को आए नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर पश्चिम भारत के साथ-साथ बिहार में भी ठंड बढ़ने लगी है। एक से 2 दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ें… मध्य प्रदेश: ग्वालियर-चंबल में ठंड बढ़ेगी, 2 डिग्री पारा गिरेगा; ​​​​उत्तरी हिस्से में कोहरा, सर्द हवाओं का भी असर मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर-चंबल में ठंड का असर बढ़ेगा। यहां रात का टेम्प्रेचर 2 डिग्री तक लुढ़क सकता है। वहीं, ग्वालियर, भिंड में मध्यम कोहरा रहेगा। ऐसा मौसम 20 नवंबर तक रहेगा। भोपाल, इंदौर-जबलपुर में भी सर्दी बढ़ेगी। पूरी खबर पढ़ें… हरियाणा: 17 शहरों में घने कोहरे का अलर्ट, अंबाला सबसे ठंडा, मुरथल सबसे प्रदूषित, AQI 451 के पार हरियाणा के अधिकतर जिलों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने हिसार, नाथूसरी चोपटा, ऐलनाबाद, फतेहाबाद, रानिया, कैथल, नरवाना, नासरसा, टोहाना, कलायत, रतिया, डबवाली, गुहला, पिहोवा, अंबाला, कालका, पंचकूला में घना कोहरा छाए रहने की संभावना जताई है। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब: 18 जिलों में धुंध का अलर्ट, चंडीगढ़ रेड जोन में, मंडी गोबिंदगढ़ का AQI सबसे अधिक पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद पंजाब और चंडीगढ़ के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। रात के तापमान में गिरावट के साथ-साथ दिन का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ये बदलाव जारी रहेगा। पूरी खबर पढ़ें…

कंगना बोलीं- राहुल को भाषण के लिए पर्ची लगती है:पीएम बिना पेपर देखे घंटेभर बोल सकते हैं; राहुल ने कहा था- मोदी को मेमोरी लॉस

भाजपा सांसद कंगना रनोट ने शनिवार को राहुल गांधी के भाषण का जवाब देते हुए कहा कि पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। लेकिन हमारे देश का विपक्ष इसे उपलब्धि की तरह नहीं देखता है। विपक्षी नेता पीएम मोदी की उपलब्धियों से जलते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बिना पेपर देखे एक घंटे तक भाषण दे सकते हैं, जबकि राहुल को भाषण देने के लिए एक-एक मिनट पर पर्ची चाहिए होती है। वे बिना पर्ची के बात नहीं कर सकते हैं। और वो कह रहे हैं कि पीएम को मेमोरी लॉस हुआ है। राहुल को तहजीब सीखनी चाहिए। दरअसल, राहुल गांधी ने शनिवार को महाराष्ट्र के चंद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से की थी। राहुल ने कहा- ‘मोदी जी की याददाश्त कमजोर हो रही है, अमेरिकी राष्ट्रपति को भी भूलने की बीमारी है।’ राहुल ने कहा कि मेरी बहन ने मुझे बताया कि आजकल मोदी जी अपने भाषणों में वही बातें बोल रहे हैं, जो हम बोल रहे हैं। शायद मोदी जी को मेमोरी लॉस हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति भी भाषण देते वक्त भूल जाते थे। बोलना कुछ होता था और बोल कुछ और देते थे। फिर पीछे से उन्हें बताया जाता था कि ये नहीं बोलना है। राहुल बोले- पीएम हमारे भाषणों की बातें दोहरा रहे
राहुल ने कहा कि मैं हर भाषण में संविधान की कॉपी लेकर चल रहा हूं, इसे दिखा रहा हूं, एक साल से कह रहा हूं कि भाजपा इस पर आक्रमण कर रही है। मोदी जी को पता लगा कि लोगों को गुस्सा आ रहा है तो मोदी जी कहने लगे हैं कि राहुल गांधी संविधान पर हमला कर रहे हैं। मैं हर भाषण में कहता हूं कि 50% आरक्षण की दीवार को गिराकर हम दायरा बड़ा कर देंगे। लोकसभा में मैंने मोदी जी के सामने ये कहा कि 50% आरक्षण की दीवार जिसे आप नहीं तोड़ना चाह रहे हो, उसे हम लोकसभा में तोड़कर दिखाएंगे, लेकिन उनको मेमोरी लॉस हो गया। वो कहते हैं कि राहुल गांधी आरक्षण के खिलाफ है। अगली मीटिंग में कहेंगे कि राहुल गांधी जातीय जनगणना के खिलाफ हैं। जबकि मैंने उनके सामने कहा है कि मोदी जी जातीय जनगणना कराइए। देश को पता लगना चाहिए कि कितने दलित हैं, कितने आदिवासी है और कितने पिछड़े वर्ग के लोग हैं। देश को पता लगना चाहिए कि इनकी भागीदारी कितनी है। प्रियंका शिर्डी में बोलीं- NDA के झूठ से जनता परेशान
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी शनिवार को महाराष्ट्र के शिर्डी में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा- ये उमड़ता जनसैलाब गवाही दे रहा है कि महाराष्ट्र की जनता NDA सरकार के झूठ और जुमलों से परेशान हो चुकी है। हम इस अहंकारी सरकार को सत्ता से बाहर कर यहां महाविकास अघाड़ी की जनहितैषी सरकार बनाने जा रहे हैं। BJP के लोग संविधान की बात करते हैं, लेकिन इस प्रदेश में संविधान की धज्जियां किसने उड़ाई? संविधान कहता है कि जनता के हाथों में सबसे बड़ी शक्ति उनका वोट है और जनता अपने वोट के द्वारा अपनी सरकार चुनेगी, लेकिन यहां क्या हुआ? प्रियंका के भाषण की प्रमुख बातें… 1. भाजपा ने डरा-धमकाकर महाराष्ट्र की सरकार चोरी की
पहले जनता ने सरकार चुनी और फिर पैसों के दम पर, डराकर-धमकाकर, एजेंसियों का इस्तेमाल कर यहां की सरकार चोरी की गई। यहां की सरकार चोरी करके नरेंद्र मोदी, BJP ने महाराष्ट्र की जनता के साथ विश्वासघात किया है। 2. मोदी जी ने अरबपतियों का करोड़ों का कर्ज माफ किया, किसानों का नहीं करते
BJP सरकार की नीतियों ने किसान, युवा, महिला समेत हर वर्ग को कमजोर करने का काम किया है। नरेंद्र मोदी ने चंद अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया है, लेकिन किसानों की कर्जमाफी की बात पर कहते हैं कि ‘पैसा नहीं है’। जबकि कांग्रेस की सरकारों ने किसानों का कर्ज माफ किया है। 3. महाराष्ट्र का रोजगार दूसरे प्रदेशों में भेजा गया
महाराष्ट्र का रोजगार दूसरे प्रदेश में क्यों भेजा गया। यहां 2 लाख सरकारी पद खाली हैं, जिन्हें भरा नहीं गया। नौजवान बेरोजगार हैं, अपना आत्मविश्वास खो रहे हैं, उन्हें जवाब कौन देगा? नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र की सरकार को इसका जवाब देना पड़ेगा। BJP सरकार आपके साथ भेदभाव करती है। इस सरकार ने करीब 10 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट महाराष्ट्र से दूसरे प्रदेशों में भेज दिए। वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर प्लांट, टाटा एयरबस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, ड्रग पार्क समेत कई प्रोजेक्ट महाराष्ट्र से गुजरात भेज दिए गए। लाखों नौकरियां खत्म हो गईं। महाराष्ट्र को कमजोर किया गया, लेकिन नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हम प्रदेश को मजबूत कर रहे हैं। 4. मोदी सरकार में देश में महंगाई बढ़ी
नरेंद्र मोदी मंच से आकर कहते हैं, वो सरकार और थी, ‘आज मोदी है’। सच बात है, आज मोदी है.. इसीलिए देश में महंगाई है, महाराष्ट्र का किसान तड़प रहा है, 10 साल से सोयाबीन के दाम नहीं बढ़ाए। आपने किसानों के लिए क्या किया है। खेती-किसानी के सामान पर GST लगा दिया। प्याज, कपास, दूध, संतरे के किसान पर आपने हर तरफ से हमला किया है। कांग्रेस सरकार में किसान खुशहाल था। इसीलिए जनता अब समझ गई है कि वो सरकार और थी… ‘आज मोदी है’। ———————————– महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… फडणवीस बोले-अजित पवार दशकों तक हिंदू विरोधियों के साथ रहे:’बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे में कुछ भी गलत नहीं, उन्हें समझने में थोड़ा वक्त लगेगा महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बीच डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने ने बंटेंगे तो कटेंगे नारे का महायुति और भाजपा में हो रहे विरोध पर कहा- मुझे योगी जी के नारे में कुछ भी गलत नहीं लगता। इस देश का इतिहास देख लीजिए, जब-जब इस देश को जातियों, प्रांतों और समुदायों में बांटा गया, यह देश गुलाम हुआ है। पूरी खबर यहां पढ़ें… नागपुर में कन्हैया कुमार बोले- धर्म सब मिलकर बचाएंगे:ऐसा नहीं होगा कि हम धर्म बचाएं और डिप्टी सीएम की पत्नी इंस्टग्राम रील्स बनाएं कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने गुरुवार को महाराष्ट्र के नागपुर में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के धर्मयुद्ध वाले बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर धर्म बचाना है तो सब मिलकर बचाएंगे। ऐसा तो नहीं होगा न कि हम धर्म बचाएंगे और डिप्टी सीएम की पत्नी इंस्टाग्राम पर रील्स बनाएंगीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

मिजोरम सरकार ने मणिपुर हिंसा पर दुख जताया:कहा- केंद्र हिंसा रोकने के लिए कदम उठाए; मणिपुर में 3 शव मिले, 7 जिलों में इंटरनेट बैन

मिजोरम सरकार ने मणिपुर में हुई हालिया हिंसा पर दुख जताया है। सरकार ने केंद्र और मणिपुर सरकार से अपील की है कि वे हिंसा को रोकने और शांति बहाल करने के लिए तुरंत कदम उठाएं। मिजोरम के गृह विभाग ने मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सरकार ने मिजोरम के लोगों से कहा है कि वे कोई ऐसा काम न करें, जिससे यहां तनाव बढ़े। हिंसा की वजह से मणिपुर के करीब 7,800 लोग मिजोरम में शरण ले चुके हैं। ये लोग कुकी-जो समुदाय से हैं, जिनका मिजोरम के मिजो समुदाय से गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव है। दरअसल, मणिपुर में शुक्रवार को एक महिला और दो बच्चों के शव जिरी नदी में बहते मिले थे। इसके बाद से राज्य के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, जो अब हिंसक हो गया है। मैतेई समुदाय के लोगों ने इंफाल में आठ विधायकों के घर हमला किया। प्रदर्शनकारियों ने यहां पथराव और आगजनी की। इंफाल में टायर जलाकर सड़कों को ब्लॉक किया। 7 जिलों में इंटरनेट बैन, 5 में कर्फ्यू
विरोध प्रदर्शन के चलते मणिपुर के पांच घाटी जिलों में कर्फ्यू लगाया गया है। जबकि सात जिलों में शनिवार शाम 5:15 बजे से दो दिन के लिए इंटरनेट बैन कर दिया गया है। ये जिले हैं- इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, बिष्णुपुर, थौबल, काकचिंग, कांगपोकपी और चुराचांदपुर। दरअसल, 11 नवंबर को वर्दी पहने हथियारबंद उग्रवादियों ने बोरोब्रेका थाना परिसर और सीआरपीएफ कैंप पर हमला किया था। इसमें 10 उग्रवादी मारे गए थे। इस दौरान जिरीबाम जिले के बोरोब्रेका थाना परिसर स्थित राहत शिविर से 6 लोगों को अगवा किया गया था। शुक्रवार को मिले तीन शव इन लापता हुए लोगों के बताए जा रहे हैं। इंफाल में प्रदर्शन की 5 तस्वीरें… इन विधायकों के घर पर हुआ हमला… 1. राजकुमार इमो सिंह, सागोलबंद विधानसभा 2. सपम कुंजकेश्वर, पटसोई विधानसभा 3. सपम निशीकांत, केशमथॉन्ग विधानसभा 4. थांगजम अरुणकुमार, वांगखेई विधानसभा 5. सागोलशेम केबी देवी, नाओरिया पखांगलाकपा विधानसभा 6. ख्वैरखपम रघुमनि सिंह, उरिपोक विधानसभा 7. एसी लोकन, वांगकोई विधानसभा 8. करम श्याम, लांगथाबल विधानसभा इनके अलावा राज्य कैबिनेट मंत्री सपम रंजन और थोंगम बिस्वजीत सिंह के घरों पर भी हमला हुआ। मैतेई संस्था ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की
मैतेई समुदाय की संस्था कॉर्डेनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने शनिवार से अनश्चितकालीन हड़ताल करने का ऐलान किया है। संस्था के अध्यक्ष खुराइजाम अथौबा ने बताया कि वेस्ट इंफाल जिले के इमा कीथल बाजार में यह हड़ताल की जाएगी। यह एशिया का सबसे बड़ा महिला संचालित बाजार है। असम में कुकी उग्रवादियों के शवों को लेकर कुकी समुदाय का प्रदर्शन
शनिवार सुबह असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SMCH) के बाहर पुलिस और कुकी समुदाय के लोगों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज किया। दरअसल, मणिपुर के जिरीबाम जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए 10 उग्रवादियों के परिजन उनके शव मांगने के लिए अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। असम पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि शव मणिपुर पुलिस को सौंपे जाएंगे, लेकिन परिजन शव वहीं सौंपे जाने की मांग करते हुए पत्थरबाजी पर उतर आए। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिसके बाद हालात काबू में आए और परिजन मणिपुर पुलिस से शव लेने पर सहमत हुए। इसके बाद शवों को मणिपुर के चुराचांदपुर एयरलिफ्ट किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें… कुकी संगठन बोले- मरने वाले उग्रवादी नहीं, वॉलिंटियर्स थे
कुकी समुदाय से जुड़े लोग मुठभेड़ में मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को चुराचांदपुर में सैंकड़ों लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि मुठभेड़ की न्यायिक जांच हो। कुकी संगठनों ने दावा किया है कि मरने वाले उग्रवादी नहीं थे। सभी कुकी गांव के वॉलिंटियर्स थे। साथ ही कहा था कि CRPF को मंगलवार को हुई घटना को ध्यान में रखते हुए अपना कैंप नहीं छोड़ना चाहिए। संगठनों के इस दावे को आईजीपी ऑपरेशन आईके मुइवा खारिज किया। उन्होंने कहा कि मारे गए सभी लोगों के पास एडवांस हथियार थे। ये सभी यहां उपद्रव मचाने आए थे। इससे साबित होता है कि वे सभी उग्रवादी ही थे। उन्होंने कुकी समुदाय की CRPF पर गई टिप्पणी पर कहा- पुलिस और सुरक्षाबल भारत सरकार के अधीन काम कर रहे हैं। वे हमेशा अलग-अलग एजेंसियों के मार्गदर्शन में काम करते हैं। पुलिस और सीआरपीएफ जैसी सुरक्षा एजेंसियां ​​अपने कर्तव्य के मुताबिक काम करना जारी रखेंगी। उग्रवादियों ने पुलिस स्टेशन-CRPF कैंप पर हमला किया था
जिरिबाम जिले के जकुराडोर करोंग इलाके में मौजूद बोरोबेकेरा पुलिस स्टेशन पर 11 नवंबर को कुकी उग्रवादियों दोपहर करीब 2.30 से 3 बजे के बीच हमला किया था। जवाबी फायरिंग में सुरक्षाबलों ने 10 उग्रवादियों को मार गिराया था। पुलिस स्टेशन के नजदीक ही मणिपुर हिंसा में विस्थापित लोगों के लिए एक राहत शिविर है। यहां रह रहे लोग कुकी उग्रवादियों के निशाने पर बने हुए हैं। शिविर पर पहले भी हमले हुए थे। अधिकारियों के मुताबिक उग्रवादी सैनिकों जैसी वर्दी पहने थे। इनके पास से 3 AK राइफल, 4 SLR , 2 इंसास राइफल, एक RPG, 1 पंप एक्शन गन, बीपी हेलमेट और मैगजीन बरामद हुई। सुरक्षाबलों ने बताया था कि पुलिस स्टेशन पर हमला करने के बाद उग्रवादी वहां से एक किलोमीटर दूर छोटी सी बस्ती की ओर भागे थे। वहां घरों-दुकानों में आग भी लगाई थी। सुरक्षाबलों ने उग्रवादियों पर गोलियां बरसाई थीं। किसान की हुई थी हत्या
11 नवंबर को ही मणिपुर के याइंगंगपोकपी शांतिखोंगबन इलाके में खेतों में काम कर रहे किसानों पर उग्रवादियों ने पहाड़ी से गोलीबारी की थी, जिसमें एक किसान की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। पुलिस ने बताया कि इस इलाके में उग्रवादी पहाड़ी से निचले इलाकों में फायरिंग करते हैं। खेतों में काम कर रहे किसानों को निशाना बनाया जा रहा है। हमलों के कारण किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। इंफाल में 3 दिन में भारी गोला-बारूद जब्त
असम राइफल्स ने बताया था कि मणिपुर के पहाड़ी और घाटी जिलों में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने कई हथियार, गोला-बारूद और IED जब्त हुआ। 9 नवंबर को असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस की जॉइंट टीम ने चुराचांदपुर जिले के एल खोनोम्फई गांव के जंगलों से एक.303 राइफल, दो 9 एमएम पिस्टल, छह 12 सिंगल बैरल राइफल, एक.22 राइफल, गोला-बारूद और सामान जब्त किया था। इसके अलावा एस चौंगौबंग और कांगपोकपी जिले के माओहिंग में एक 5.56 मिमी इंसास राइफल, एक प्वाइंट 303 राइफल, 2 एसबीबीएल बंदूकें, दो 0.22 पिस्तौल, दो इंप्रोवाइज्ड प्रोजेक्टाइल लांचर, ग्रेनेड, गोला-बारूद जब्त किए गए थे। 10 नवंबर असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस और बीएसएफ की जॉइंट टीम ने काकचिंग जिले के उतांगपोकपी के एरिया में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था। इसमें एक 0.22 राइफल, गोला-बारूद और सामान शामिल था। 9-10 नवंबर: महिला की हत्या, पहाड़ी से गोलीबारी
इंफाल पूर्वी जिले के सनसाबी, सबुंगखोक खुनौ और थमनापोकपी इलाकों में 10 नवंबर को गोलीबारी की घटना हुई थी। 9 नवंबर को बिष्णुपुर जिले के सैटन में उग्रवादियों ने 34 साल की महिला की हत्या कर दी थी। घटना के वक्त महिला खेत में काम कर रही थी। उग्रवादियों ने पहाड़ी से निचले इलाकों में गोलीबारी की थी। 8 नवंबर: उग्रवादियों ने फूंक डाले 6 घर, 1 महिला की मौत
8 नवंबर को जिरीबाम जिले के जैरावन गांव में हथियारबंद उग्रवादियों ने 6 घर जला दिए थे। ग्रामीणों का आरोप था कि हमलावरों ने फायरिंग भी की थी। घटना में एक महिला की मौत हुई थी। मृतक महिला की पहचान जोसंगकिम हमार (31) के रूप में हुई थी। उसके 3 बच्चे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हमलावर मैतेई समुदाय के थे। घटना के बाद कई लोग घर से भाग गए। 7 नवंबर को रेप के बाद महिला को जिंदा जलाया
7 नवंबर को हमार जनजाति की एक महिला को संदिग्ध उग्रवादियों ने मार डाला था। उन्होंने जिरीबाम में घरों को भी आग लगा दी। पुलिस केस में उसके पति ने आरोप लगाया कि उसे जिंदा जलाने से पहले उसके साथ रेप किया गया था। एक दिन बाद, मैतेई समुदाय की एक महिला की संदिग्ध कुकी विद्रोहियों ने गोली मार दी थी। मणिपुर में हिंसा को लगभग 500 दिन हुए
कुकी-मैतेई के बीच चल रही हिंसा को लगभग 500 दिन हो गए। इस दौरान 237 मौतें हुईं, 1500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए, 60 हजार लोग घर छोड़कर रिलीफ कैंप में रह रहे हैं। करीब 11 हजार FIR दर्ज की गईं और 500 लोगों को अरेस्ट किया गया। इस दौरान महिलाओं की न्यूड परेड, गैंगरेप, जिंदा जलाने और गला काटने जैसी घटनाएं हुईं। अब भी मणिपुर दो हिस्सों में बंटा हैं। पहाड़ी जिलों में कुकी हैं और मैदानी जिलों में मैतेई। दोनों के बीच सरहदें खिचीं हैं, जिन्हें पार करने का मतलब है मौत। स्कूल- मोबाइल इंटरनेट बंद किए गए। मणिपुर में अचानक बढ़ी हिंसक घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने 10 सितंबर को 5 दिन के लिए इंटरनेट पर बैन लगाया था। हालांकि 12 सितंबर को ब्रॉडबेन्ड इंटरनेट से बैन हटा लिया गया था। 4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह…
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए। मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया। नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा। सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं। ——————————————- मणिपुर में हिंसा से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… मणिपुर के 6 इलाकों में AFSPA फिर से लागू मणिपुर के 5 जिलों के 6 थानों में फिर से आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल प्रोटेक्शन एक्ट (AFSPA) लागू कर दिया गया है। यह 31 मार्च 2025 तक प्रभावी रहेगा। गृह मंत्रालय ने गुरुवार को इसका आदेश जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि इन इलाकों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के चलते फैसला लिया गया। AFSPA लागू होने से सेना और अर्ध-सैनिक बल इन इलाकों में कभी भी किसी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में ले सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें …